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Guest
मैं: जी चाची वो में अब्बू के पास चला गया था….(मेने भी सबा को मुस्कुरा कर जवाब दिया…)
सबा: अच्छा आओ बाहर आकर खाना खा लो तुम दोनो…..
उसके बाद हम दोनो खाना खाने के लिए बाहर चले गये….अभी में खाना ख़तम करके उठा ही था कि, मेरा मोबाइल बजने लगा…मेने मोबाइल निकाल कर देखा तो, किसी लॅंडलाइन से कॉल आ रही थी….मेने कॉल पिक की तो दूसरी तरफ से किसी औरत की आवाज़ आई….
औरत: हैल्लो समीर बोल रहे है आप…..?
मैं: जी कहिए…..
औरत: समीर में नीलम बोल रही हूँ…..नजीबा की मामी….
मैं: जी मामी जी कहिए….
नीलम: समीर तुम जल्दी से यहाँ आ जाओ….
मैं: क्या हुआ सब ख़ैरियत तो है…..
नीलम: वो नजीबा आज सीढ़ियों से फिसल कर गिर गयी है….उसके पैर में चोट आई है….इसके मामू भी काम के सिलसिले में पेशावॉर गये हुए है…7 दिन बाद आना है….घर पर कोई भी नही है….मुझे समझ में नही आ रहा कि में क्या करूँ…. नजीबा ने तुम्हारा नंबर दिया है…..नजीबा चल नही पा रही है….उसे हॉस्पिटल लेकर जाना होगा….
मैं: (नीलम की बात सुन कर मेरा रंग उड़ गया….और ये बात फ़ैज़ ने भी नोट कर ली……) आप घबराए नही….में फॉरन वहाँ पहुँचता हूँ…..
मेने कॉल कट की….तो फ़ैज़ ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा….”क्या हुआ समीर…?”
मैं: यार वो नजीबा मामी के घर सीढ़ियों से नीचे गिर गयी है…उसके पैर में चोट आई है….चल नही पा रही है…..
फ़ैज़: घबराओ नही समीर….हम कार लेकर चलते है….वहाँ से नजीबा को हॉस्पिटल ले जाएँगे….
मैं: हां यही ठीक होगा…..
उसके बाद मैं और फ़ैज़ उसकी कार लेकर नजीबा की मामी के गाँव की तरफ चल पड़े…. नजीबा की मामी का गाओं ज़्यादा दूर नही था…इसलिए 20 मिनिट में ही हम वहाँ पहुँच गये….घर का गेट खुला हुआ था…हम अंदर दाखिल हुए तो, आवाज़ सुन कर नजीबा की मामी बाहर आई….मेने उन्हे सलाम किया और नजीबा के बारे में पूछा…तो वो हमें उसके रूम में ले गई….. नजीबा बेड पर लेटी हुई दर्द से कराह रही थी…..हम ने एक पल भी देर नही की…मेने नजीबा को गोद में उठाया और नजीबा की मामी को घर लॉक करने के लिए कहा…
जब मैं नजीबा को उठा कर बाहर पहुँचा तो, फ़ैज़ ने जल्दी से कार की बॅक सीट का डोर खोला और मेने पहले नजीबा की मामी को अंदर बैठने के लिए कहा…और फिर नजीबा के सर को उसकी मामी की रानों पर रख कर उसे सीट पर लेटा दिया….और फिर हम दोनो आगे बैठे….और हॉस्पिटल की तरफ कार दौड़ा दी….हॉस्पिटल पहुँचने में भी 20 मिनिट लग गये…..खैर हॉस्पिटल पहुँचे तो, डॉक्टर ने नजीबा की टाँग का एक्स्रे किया….तो पता चला कि, पैर के एडी के पास फेक्चर हुआ था…डॉक्टर ने फॉरन उस पर प्लास्टर लगा दिया….और कुछ मेडिसिन डी….उसके बाद जब मेने डॉक्टर से पूछा तो, उसने कहा कि, घबराने की कोई बात नही है….1 मंत बाद प्लास्टर खुल जाएगा….
खैर हम नजीबा को लेकर वापिस उसकी मामी के घर आ गये….मैं नजीबा को गोद में उठा कर उसके रूम में ले गया….फिर हम वहाँ कुछ देर बैठे…और जैसे ही मैं जाने लगा तो, नजीबा की मामी ने मुझे रोक लिया…और कहा कि जब तक इसके मामा नही आ जाते….मैं यही रहूं….मेने उन्हे अपने एग्ज़ॅम के बारे में बताया तो उन्होने कहा कि, मैं अपनी बुक्स यही ले आउ….और यही से एग्ज़ॅम की तैयारी भी करूँ और एग्ज़ॅम देने चला जाया करूँ……फिर नजीबा के कहने पर मुझे उसकी बात माननी ही पड़ी….