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सबीना: समीर तुम्हे कुछ दिखाऊ….
मैं: हां दिखाओ….
सबीना: तुम रूको मैं अभी आती हूँ….
सबीना बेड से नीचे उतरी और नीचे फर्श पर पड़ा अपना गाउन उठा कर पहना और फिर रूम से बाहर चली गयी….मैं भी बेड से उठ कर रूम के अटॅच बाथरूम मे पेशाब करने चला गया….और फिर जैसे ही मैं पेशाब करके बाथरूम से बाहर आया तो, तो सामने का मंज़र देख कर एक दम हैरान हो गया….रूम मे अहमद बेड पर पीठ के बाल एक दम नंगा लेटा हुआ था….उसके पैर बेड से नीचे लटक रहे थे…उसका सर बेड के बिकुल बीच मे था….उसकी आँखो पर पट्टी बँधी हुई थी… और उसके हाथ उसकी पीठ के पीछे बँधे हुए थे… मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा था कि, आख़िर ये सब हो क्या रहा है….मैं हैरत से भरी नज़रों से कभी अहम्द तो कभी सबीना की तरफ देख कर हालात का ज़ायज़ा लेने की कॉसिश कर रहा था.
मैने सबीना की तरफ देखा तो, वो मेरी तरफ देख कर मुस्करा रही थी…. अभी मैने कुछ बोलने के लिए मूह खोला ही था…कि सबीना ने अपने होंटो पर उंगली रखते हुए मुझे चुप रहने का इशारा किया….और फिर मेरी तरफ देख कर मुस्कराते हुए उसने अपने गाउन को खोल कर बेड पर एक साइड पर फेंक दिया…अब उस रूम मे हम तीनो एक दम नंगे थे….सबीना बेड पर चढ़ि और फिर उसने अपने पैरो को अहम्द के दोनो साइड पर रखा और उसके सर के ठीक ऊपेर आते हुए,
उसने धीरे-2 अपनी मोटी बुन्द को अहम्द के चेहरे के ऊपेर झुकाना शुरू कर दिया…और फिर जैसे ही उसकी मोटी और चौड़ी बुन्द अहम्द के चेहरे पर आई तो, अहम्द का पूरा चेहरा सबीना की बुन्द से ढक गया…."ओह सीईईईई अहह चल मेरे पालतू कुत्ते चाट अपनी मालकिन की बुन्द..." सबीना ने अहम्द के चेहरे के ऊपेर अपनी बुन्द को रगड़ना शुरू कर दिया…"चल चाट अपनी ज़ुबान फिर मेरी बुन्द के सूराख पर कुत्ते के बच्चे….चाट मेरी बूँद के सूराख को…..तुझे बड़ा शॉंक था ना मेरी बुन्द मारने का…हां चाट इसे अब….साले आज तेरा लंड इतनी सख्ती से खड़ा ही नही हुआ कि, मेरी बूँद मार सके….”
सबीना ने अपनी बुन्द को तेज़ी से अहम्द के चेहरे के ऊपेर रगड़ते हुए कहा….देखने से ऐसा लग रहा था कि, जैसे अहम्द ने बहुत ज़यादा पी रखी है….वो अपने होश मे नही था….और वो नशे की हालत मे सबीना की बुन्द के सूराख पर अपनी ज़ुबान को रगड़ रहा था….सबीना अहम्द के ऊपेर से उठी…और उसने अहम्द को बेड पर सीधा करके घुटनो के बल बैठाया…और खुद उसके सामने आकर उसकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी…..सबीना ने अपने सर को दीवार के साथ टिका कर अपनी अपने दोनो हाथो को पीछे लेजा कर अपनी बुन्द के दोनो पार्ट्स को अलग -2 पकड़ा और फिर अपनी बुन्द के पार्ट्स को खोल कर झुक कर खड़ी हो गयी…
“चल आ अपनी मालकिन की बूँद के पीछे….” आहम्द जिसकी आँखो पर पट्टी बँधी हुई थी…वो किसी तरह घुटनो के बल आगे बढ़ता हुए सबीना के पीछे पहुँचा और जैसे ही उसने सबीना की बूँद पर अपना चेहरा झुकाया तो, सबीना एक दम से सिसकते हुए बोली..”सीईईईईईईई हट गश्ती के बच्चे…..फुद्दि चाट मेरी….” सबीना का हुकम सुनते ही अहम्द ने झुक कर अपने होंटो को सबीना की फुद्दि पर लगा दिया….”सीयी ओह हाआँ चाट मेरी फुद्दि साले हराम खोर तुम हो इसी लायक….आह चाट मुझे…..” सबीना ने सिसकते हुए मेरी तरफ देखा….और पीछे गर्दन घुमा कर अहम्द की तरफ इशारा करते हुए बोली….”इसके हाथ खोल दो….” मैने चोंक कर सबीना की तरफ देखा….तो सबीना ने फिर से सिसकते हुए कहा…..
सबीना: मैने कहा ना इसके हाथ खोल दो…..घबराने की ज़रूरत नही….
मैं बेड पर चढ़ा और अहम्द के हाथ को खोल दिए….और फिर पीछे हट कर बैठ गया….”हां अब मेरी बुन्द के सूराख मे अपनी एक उंगली डाल कुत्ते जल्दी कर….” सबीना ने अपनी बुन्द को अहम्द के चेहरे पर गोल-2 घूमाते हुए कहा….तो अहमद ने अपनी एक उंगली सबीना की बुन्द मे डालनी शुरू कर दी…शुरू मे सबीना की हलकी चीख निकली….पर उसने कंट्रोल कर लिया….”हां ऐसे ही सबाश….अच्छी नसल कुत्ते ऐसे ही अपने मालिकों का हुकम मानते है….”
आहम्द सबीना की फुद्दि चाटते हुए लगतार उसकी बुन्द मे उंगली को अंदर बाहर कर रहा था…”हान्ंनणणन् आब्ब्ब दूसरी भी साथ मे डाल….” सबीना ने सिसकते हुए कहा तो, अहम्द ने अपनी दूसरी उंगली भी सबीना की बुन्द के सूराख मे डाल दी…. सबीना ने सिसकते हुए फेस घुमा कर मेरी तरफ देखा…और फिर एक दम से सीधी खड़ी हो गयी….अहम्द की उंगलियाँ उसकी बुन्द के सूराख से बाहर आ गयी…सबीना मुस्कराते हुए मेरी तरफ बढ़ी और मेरी पास आते हुए सरगोशी भरी आवाज़ मैं बोली… “लेट जाओ….” जैसे ही मैं लेटा….
सबीना मेरी टाँगो को फेला कर उसके बीच मे बैठ गयी…और फिर झुक कर डॉगी पोज़िशन मे हो गयी.... सबीना ने वैसे ही डॉगी स्टाइल मे ही मेरे लंड को मूह मे लेकर उसके चुप्पे लगाने शुरू कर दिए...और फिर एक दम से मेरे लंड को मूह से बाहर निकाल कर गर्दन घुमा कर अहम्द की तरफ देखा और चीखते हुए बोली….”ओये गश्ती की औलाद उधर बैठ कर क्या अपनी अम्मी चुदवा रहा है….इधर आ मेरी बुन्द के पीछे….और अपना काम जारी रख….” अहमद हाथो से टटोलता हुआ सबीना के पीछे आ गया….और फिर झुक कर सबीना की फुद्दि के सूराख पर अपना मूह लगा दिया…और उसकी बुन्द के सूराख मे अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा….
जैसे ही अहम्द की उंगलियाँ उसकी बुन्द के सूराख मे फिर से घुसी तो, सबीना ने एक दम से सिसकते हुए, मेरी तरफ देखा और मुस्कराते हुए फिर से मेरे लंड को मूह मे लेकर चुप्पे लगाने शुरू कर दिए….सबीना भी पूरी गरम हो चुकी थी....शायद अब उसकी बुन्द मे कीड़े कुलबुलाने लगे थे....वो अपने होंटो को मेरे लंड की कॅप पर दबा दबा कर सर हिलाते हुए चुप्पे मार रही थी....कभी वो मेरे लंड को मूह से बाहर निकाल कर मेरे लंड के बेस पर अपनी ज़ुबान रगड़ना शुरू कर देती तो, कभी मेरे टट्टों को मूह मे लेकर चूसना शुरू कर देती…
तकरीबन 5-6 मिनिट मेरा लंड चूसने के बाद सबीना ने लंड को मूह से बाहर निकाला…जो उसके थूक से एक दम गीला होकर चमक रहा था….”चल अब पीछे हाथ और नीचे फर्श पर घुटनो के बल बैठ जा….” सबीना ने अहम्द की तरफ देखते हुए कहा…”और हां अगर आँखो से पट्टी हटाने की कॉसिश भी की तो, मुझसे बुरा कोई ना होगा….” सबीना की बात सुन कर अहम्द चुप चाप जाकर नीचे फर्श पर घुटनो के बल बैठ गया…मैं सबीना के पीछे आ गया....सबीना ने सोफा की पुस्त के ऊपेर अपना सर टिकाया और अपने दोनो हाथो को पीछे लेजाते हुए, अपनी बुन्दो को पकड़ कर दोनो तरफ फेला दिया.....