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मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन complete

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जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया की तरफ देखा तो, नाज़िया ने फिर से अपनी आँखे बंद कर ली….”सीईइ नाज़िया नज़ीबा की ज़ुबान बहुत मीठी है….तुम्हारी सौतन ने तो अपने होंटो और ज़ुबान के जाम पिला कर अपने मुझे खुश कर दिया है….तुम मुझे खुश नही करोगी…” मैने नाज़िया के कान के पास अपने होंटो को लेजा कर सरगोशी में कहा तो, और फिर नाज़िया के कान को अपने होंटो में लेकर जैसे ही चूसा…नाज़िया एक दम से तड़प उठी….मैने हाथ से नाज़िया के फेस को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंटो को अपने होंटो में लेकर सक करना शुरू कर दिया…..

पर नाज़िया ने फिर से कोई रेस्पॉन्स नही दिया….मुझे पता था कि, नाज़िया अभी भी शरमा रही है….आख़िर उसकी बेटी साथ मे थी….जो शरम हया उसमे थी….उसे दूर करने में मुझे पता नही कितना वक़्त लगने वाला था….इसीलिए मैने नाज़िया के होंटो को छोड़ आगे बढ़ने की सोची….मैने नाज़िया के फेस से हटा कर नाज़िया के पेट पर उसकी नाफ़ के पास रखा….और उसके कमीज़ को पकड़ कर धीरे-2 ऊपर करना शुरू कर दिया…जैसे ही नाज़िया को इस बात का अहसास हुआ तो, नाज़िया ने हिलना शुरू कर दिया.. क्योंकि नाज़िया का कोई भी हाथ फ्री नही था….जिससे वो मुझे रोक पाती….”अह्ह्ह्ह समीररर ये क्या कर रहे हो….क्यों मुझे शर्मिंदा कर रहे हो….प्लीज़ समीर छोड़ दो मुझे… ऐसे तो ना करो…”

मैं: बड़ी बदजुबान हो तुम…….कैसी बेबाकी से अपने शोहर का नाम ले रही हो…. मुझे लगता है तुम्हारी जिंदगी में मेरी कोई अहमियत है ही नही….

मेरी बात सुन कर नाज़िया ने अपनी आँखे खोल कर मेरी तरफ देखा…और रुआंसी सी आवाज़ मे बोली….”सॉरी पर ऐसे तो ना करिए….”

मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए उसकी कमीज़ को ऊपेर करना शुरू कर दिया…नाज़िया ने भी मान लिया था कि, अब वो कुछ नही कर सकती…नाज़िया ने हथियार डालते हुए फिर से अपनी आँखे बंद कर ली…. मैने नाज़िया की कमीज़ को उसके गले तक ऊपेर उठा दिया….जैसे ही नाज़िया की कमीज़ उसके गाले तक ऊपेर हुई, मैने नाज़िया की ब्रा को एक हाथ से नीचे से पकड़ कर नज़ीबा की तरफ देखते हुए नज़ीबा को दूसरी मम्मे के नीचे से ब्रा पकड़ने का इशारा किया तो, नज़ीबा ने शरामते हुए नज़रें झुका ली…

.”तुमने सुना नही मैने क्या कहा…” मैने थोड़ा गुस्से में कहा तो, नज़ीबा ने दूसरी साइड से नाज़िया के ब्रा को पकड़ लिया….

“ऊपेर उठाओ….” और फिर मैने नज़ीबा ने एक हाथ से नाज़िया के ब्रा को जैसे ही ऊपेर उठाया…नाज़िया के गोरे 38 साइज़ के मम्मे उछल कर बाहर आ गये…मैने अपने साइड वाले मम्मे को अपने हाथ में लेकर दबाते हुए नज़ीबा की तरफ देखा….जो नज़रें झुका कर लेटी हुई थी….”ये देखो तुम्हारी अम्मी के मम्मे कितने बड़े है…सीईइ देखो इनके निपल कैसे सख़्त हो चुके है….” मेरी बात सुन कर नाज़िया ने ऐसे होंका भरा जैसे वो रो रही हो….”हाईए मैं मर गयी… मैं अब तुम दोनो के साथ आँखे कैसी मिलाउन्गी….नज़ीबा प्लीज़ इस तरफ मत देखना….”

मैं: क्यों क्यों नही देखना उसे….उसने देखना भी है और अपनी सौतन के मम्मों को चूसना भी है….

नाज़िया: नही…..

मैने देखा कि नज़ीबा बड़ी ही नशीली नज़रों से मेरी तरफ देख रही थी….मैने उसकी तरफ देखते हुए नाज़िया के मम्मे के ऊपेर झुकते हुए, जितना हो सकता था.. उसके मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईईईईईईई अहह….” जैसे ही नाज़िया को अपने मम्मे पर मेरी गरम ज़ुबान फील हुई, नाज़िया एक दम से तड़प उठी…

मैने नाज़िया का राइट मम्मा पकड़ा और मुँह में डाल लिया फिर रूम में मुकामल खामोशी छा गयी ....मैं नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए नज़ीबा की आँखो में देख रहा था…मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए, नाज़िया के दूसरे मम्मे को पकड़ कर दबाया…तो नाज़िया के दूसरे मम्मे का निपल और तीखा होकर बाहर निकल आया….मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए आँखो ही आँखो से नज़ीबा को नाज़िया के मम्मे को सक करने को कहा तो, नज़ीबा ने नाज़िया के ऊपेर झुकते हुए,नज़ीबा ने पूरा मुँह खोला और नाज़िया का मम्मा मुँह में डाल लिया...जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया के दूसरे मम्मे को चूसना शुरू किया...

तो नाज़िया ऐसे तडपी, जैसे उसे करेंट लग गया हो….”हाए मैं गयी… हाई ओईए खुदा ये तुम दोनो आअहह मेरे साथ कियाअ कर रहे हो…ओह्ह्ह्ह नज़ीबा तुम तो ऐसा ना करो….तुम तो आह तुम तो मेरी बेटी हो…प्लीज़ ऐसा ना करो…” नाज़िया बुरी तरह तड़प रही थी….मैने नाज़िया के मम्मे को बाहर निकाला तो नज़ीबा ने भी ने भी नाज़िया के मम्मे को मुँह से निकालना चाहा…पर मैने उसे मना कर दिया…नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को सक करना शुरू कर दिया… “बेड रूम में वो तुम्हारी बेटी नही है….आज के बाद बेडरूम के अंदर तुमने उसे बेटी नही कहना….” नज़ीबा बड़ी नफ़ासत से नाज़िया के मम्मे को सक कर रही थी...

नाज़िया: अह्ह्ह्ह ऐसा करने से सच्चाई तो बदल नही जाएगी….

मैं: अच्छा अगर मेरी बात का यकीन ना हो…तुम खुद ही नज़ीबा से पूछ लो… बताओ नज़ीबा नाज़िया बेडरूम में ये तुम्हारी क्या लगती है….

मैने फिर से झुक कर नाज़िया के मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईई ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अब्ब बस भी करो….मुझे बहुत शर्म आ रही है….”मेरी बात सुन कर नज़ीबा ने नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह से बाहर निकाला और सरगोशी से भरी आवाज़ में कहा…”मैं आपकी बेटी नही…आपकी सौतन हूँ बाजी…” और नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईई ओह हाईए तुम पागल हो गयी है….सीयी ओह्ह्ह्ह मुझसे बर्दास्त नही हो रहा…अहह बस करो….” नाज़िया बुरी तरह मस्ती में सिसक रही थी….

नाज़िया: आह मेरे बाज़ू में दर्द हो रहा है…

नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे कंधे के नीचे से खेंचते हुए कहा…तो मैं खुद ही थोड़ा ऊपेर हो गया….नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे नीचे से निकाल लिया…मेरे और नज़ीबा के दरम्यान मम्मे चूसने का मुक़ाबला स्टार्ट हो चुका था.. ....हम दोनो ने मम्मे चूस चूस कर नाज़िया को इस क़दर मजबूर कर दिया कि उस ने अपने दोनो हाथ हम दोनो के बालों में फेरने शुरू कर दिए.....”ओह्ह ये तुम मुझसे क्या करवा रहे हो….अह्ह्ह्ह हइईए आह नज़ीबा ओह जी मुझे कुछ हो रहा है…अहह मैने मर जाना है….ओह्ह्ह्ह,……”

मैं: क्या हो रहा है सच क्यों नही कहती कि तुम्हे अपने मम्मे चुसवा कर मज़ा आ रहा है….

नाज़िया: आहह खुदा के लिए चुप हो जाओ आप….

नाज़िया ने अपने दोनो बाज़ुओं में मेरे और नज़ीबा के सर को कस लिया…और हम दोनो के सर को अपने मम्मों पर दबाने लगी….वो कभी कभी सीयी की आवाज़ निकालती...मगर और कुछ ना कहती...नज़ीबा और मेरे गाल आपस में टकरा रहे थे...हम दोनो नाज़िया को ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा दे कर नाज़िया को भरपूर गरम करने की कोशिश कर रहे थे...नाज़िया भी अपने हाथों के ज़ोर से हमारे सिर अपने मम्मों पर दबा रही थी...

नाज़िया की कमीज़ और ब्रा उस के गले में थी...हम तीनो उस वक़्त खामोश थे और कुछ भी बोलने के मूड में नही थे....बस मैं और नज़ीबा इशारों से और ऐक दूसरे को देख कर समझाते हुए कर रहे थे…नाज़िया की सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी….नज़ीबा ने भी अपनी साइड संभाली हुई थी…और नाज़िया के राइट मम्मे को चूस रही थी….

नाज़िया भी पूरी गरम हो चुकी थी…अब वो किसी भी तरह का विरोध नही कर रही थी…नाज़िया को मस्त होकर अपने मम्मे चुस्वाते देख कर थोड़ी ही देर बाद मैने नाज़िया की कमीज़ को पकड़ कर तोड़ा सा खींच कर नाज़िया को उतारने का इशारा दिया...नाज़िया नशे में डूबी हुई उठ बैठी और अपनी कमीज़ को आगे पीछे से पकड़ कर उतारा नज़ीबा ने भी उस की मदद करते हुए ब्रा का हुक खोल कर उस को भी उतार दिया...

नाज़िया ने नशीली निगाहों से पहले नज़ीबा के फेस पर अपनी लंबी पलकें झुका कर उस को देखा ..फिर ऐसे ही मेरे चेहरे को देखा…फिर जैसे ही मैने नाज़िया को अपनी बाजुओं में लेकर उसे गले से लगाया…..तो नज़ीबा ने भी नाज़िया को अपनी बाहों में कस लिया….नाज़िया भी उस वक़्त फुल गरम हो चुकी थी…उसने मुझे और नज़ीबा को अपने बाज़ुओं के घेरे मे ले लिया…जैसे ही मैने नाज़िया के गालों को चूमना शुरू किया…तो मुझे देख कर नज़ीबा ने फॉरन नाज़िया के गाल चूमते हुए उस को प्यार करना शुरू कर दिया...

नज़ीबा आहिस्ता आहिस्ता किस करते हुए गर्दन पर आइ फिर नाज़िया की चेस्ट को मुँह में ले लिया और उस को चूसने लगी...नाज़िया ने तड़प कर सिसकी की आवाज़ निकाली और मेरे फेस को अपने फेस के सामने ला कर मेरे होंठो पर अपने नर्म ओ नाज़ुक होन्ट रख दिए.

मैने पागल होते हुए नाज़िया के होंठों का जाम अपने होंठो से लगा लिया ...नाज़िया को आहिस्ता आहिस्ता बेड पर लेटा दिया….और पूरी शिदत से मेरे होन्ट चूसने लगी उधर नज़ीबा भी नाज़िया की चेस्ट को हाथों में ले कर चूस रही थी..

मेरा एक हाथ खुद ही नाज़िया के एक मम्मे पर चला गया जिस को नज़ीबा ने पहले ही पकड़ रखा था मैं नज़ीबा के हाथ के ऊपेर से ही मम्मा दबाने लगा… नाज़िया मज़े के नशे में डूबी हुई सिसकारियाँ भर रही थी….मैने नज़ीबा का हाथ पकड़ कर नाज़िया के मम्मे से नीचे करते हुए धीरे-2 नाज़िया के पेट की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….जैसे -2 नाज़िया नज़ीबा के हाथ को अपने पेट की तरफ नीचे जाता हुआ महसूस कर रही थी…वैसे -2 उसका जिस्म उसकी कमर रुक-2 कर झटके खा रहे थे….फिर जैसे ही नज़ीबा और मेरा हाथ नाज़िया की शलवार के नैफे से टकराया….तो मैने नज़ीबा के हाथ से अपना हाथ हटा कर नाज़िया की शलवार का नाडा पकड़ा और नज़ीबा की आँखो में देखते हुए धीरे-2 नाज़िया की शलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….

नज़ीबा मदहोशी से भरी नज़रों से कभी मुझे और कभी नाज़िया की शलवार के नाडे को खुलता हुआ देख रही थी….जैसे ही नाज़िया का शलवार का नाडा खुला…मैं उठ कर बैठ गया….और नाज़िया की टाँगो को खोल कर उसकी टाँगो के दरम्यान आते हुए, उसकी शलवार को दोनो साइड से पकड़ कर जैसे ही नीचे करने लगा तो, नाज़िया ने मेरा हाथ पकड़ लिया….नही प्लीज़ इसे मत उतारो….” नाज़िया ने बिना आँखे खोले ही कहा….

“तुमने मुझे फुद्दि प्यार से देनी है या मार खा कर देनी है….” मैने नाज़िया की शलवार को नीचे की तरफ झटकते हुए कहा….पर नाज़िया ने अपनी शलवार को नही छोड़ा..

“जो करना है कर लो….पर प्लीज़ ये लाइट ऑफ कर दो….” नाज़िया ने सिसकते हुए कहा….

पर मैने नाज़िया की एक ना सुनी और नाज़िया की शलवार के साथ-2 नाज़िया की पैंटी की इलास्टिक को भी पकड़ कर ज़ोर से नीचे खेंचा…जैसे ही नाज़िया के हाथो से उसकी शलवार निकली मैने नाज़िया की शलवार और पैंटी को उतार कर साइड में रख दिया…मेरी नज़र नाज़िया की पैंटी पर पड़ी….जो उसकी फुद्दि वाली जगह से एक दम गीली थी….मैने नाज़िया की पैंटी को पकड़ा और नज़ीबा को दिखाते हुए कहा….”ये देखो तुम्हारी सौतन की फुद्दि कितना पानी छोड़ रही है….देखो लंड लेने के लिए कितनी बेकरार है…फिर भी नखडे कर रही है….” मैने नज़ीबा की तरफ पैंटी बढ़ाई…तो नज़ीबा ने शरमाते हुए नाज़िया की पैंटी को पकड़ कर जैसे देखना शुरू किया.. तो नाज़िया ने झपट्टा मार कर उसके हाथ से पैंटी छीन ली…

नाज़िया: नज़ीबा तुम भी बेशर्मी पर उतर आई हो….

नाज़िया ने पैंटी को बेड के दूसरी साइड पर फेंकते हुए कहा….तो मैने नज़ीबा की तरफ अपना हाथ बढ़ाया…तो नज़ीबा ने जैसे ही अपना हाथ मेरे हाथ में दिया… मैने नज़ीबा को अपनी तरफ खेंचा…नज़ीबा उठ कर घुटनो के बल बैठ गयी…मैने नज़ीबा को अपने आगे नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आने को कहा… जैसे ही नज़ीबा नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आई…नाज़िया ने अपने सर के नीचे रखे हुए तकिये को उठा कर अपनी फुद्दि पर रख लिया…

.”नज़ीबा तुम्हारी सौतन तो बहुत शरमाती है….” मैने पीछे से अपने बाज़ुओं को आगे करते हुए, नज़ीबा के मम्मों को कमीज़ के ऊपेर से पकड़ते हुए कहा….और धीरे नज़ीबा के मम्मों को दबाने लगा….सामने लेटी नाज़िया हम दोनो को नशीली नज़रों से देख रही थी...

जैसे ही मेरी नज़रें नाज़िया की नज़रों से टकराती तो, नाज़िया अपनी नज़रें फेर लेती… “इसे उतारो….” मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए नज़ीबा की कमीज़ को पकड़ कर उसे उतारने के लिए कहा…..तो नज़ीबा ने अपनी कमीज़ को पकड़ लिया....नज़ीबा भी उस वक़्त मदहोश हो चुकी थी…. उस ने फॉरन कमीज़ पकड़ कर ऊपेर करते हुए उतार दी... मैने उसकी ब्रा के हुक्स फॉरन ही खोल दिए…फिर उसने अपनी स्किन कलर की ब्रा को भी उतार दिया...फिर मैने नज़ीबा की शलवार का नाडा पकड़ कर खेंचा और नज़ीबा को खड़े होने के लिए कहा…जैसे ही नाज़िया की टाँगो के दरम्यान नज़ीबा खड़ी हुई, मैने उसकी शलवार के साथ-2 उसकी पैंटी को भी पकड़ कर नीचे खेंच दिया….

 


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और नज़ीबा ने खुद अपने दोनो पैरो को बारी-2 ऊपेर उठाया और मैने उसकी शलवार और पैंटी को निकाल कर साइड मे रख दिया… जैसे ही मैने नज़ीबा को पूरी नंगी किया…वो फिर से नाज़िया की टाँगो के दरम्यान ठीक वैसे ही अंदाज़ मे बैठ गयी… जैसे मैं नाज़िया को चोदते हुए उसकी टाँगो के दरम्यान घुटनो के बल बैठता था….मैने फिरसे नज़ीबा के मम्मों को पीछे से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया….और उसके कानो के पास अपने होंटो को लेजा कर सरगोशी से भरी आवाज़ मे कहा.. “नज़ीबा मैं देखना चाहता हूँ कि तुम मुझसे कितना प्यार करती हो…इसलिए जब तक मैं अपने कपड़े उतारता हूँ….तब तक तुम मुझे नाज़िया से प्यार करके दिखाओ… कि तुम्हारे लिए मेरी हर बात की क्या अहमियत है…”

मैने तोड़ा सा पीछे होकर अपनी कमीज़ के बटन के खोलने शुरू किए… नज़ीबा ने एक बार फेस घुमा कर मेरी तरफ देखा…और फिर वो नाज़िया के ऊपेर झुक गयी… मैं जब तक कमीज़ उतार रहा था…. तब तक नज़ीबा ने नाज़िया के ऊपेर झुक कर अपने अपने होन्ट नाज़िया के होंठो पर रख दिए थे….पहले तो सिर्फ़ नज़ीबा ही किस कर रही थी….पर जैसे ही मैने नज़ीबा की टाँगो के नीचे से एक हाथ निकाल कर नाज़िया की फुद्दि के अंदर अपने दो उंगलियों को डाल कर अंदर बाहर करना शुरू किया…फिर दोनो ने ऐसे जोश से ऐक दूसरे को किस की कि मैं वो नज़ारा देख कर पागल होने लगा.

मैं पास बैठ कर दोनो को देख रहा था... बिलाख़िर नाज़िया ने भी नज़ीबा का साथ देते हुए, अपने बाज़ुओं को नीचे लेटे लेटे नज़ीबा की गर्दन के गिर्द डाला और उसने नज़ीबा को अपने जिस्म के साथ लगा लिया….नज़ीबा की पूरी फ्रंट साइड नाज़िया के फ्रंट साइड से टच हो रही थी…पर नाज़िया ने अपनी फुद्दि के ऊपेर टिकाया रखा हुआ था….जिसकी वजह से नज़ीबा की फुद्दि नाज़िया की फुद्दि के साथ टच नही हो रही थी..कुछ देर बाद नज़ीबा ने नाज़िया के होंटो को छोड़ा और नाज़िया के एक मम्मे को मुँह मे डाल लिया...

और पूरे जोशो ख़रोश के साथ नाज़िया के मम्मे को चूसना शुरू कर दिया… नज़ीबा ने मेरी तरफ़ देखते हुए नाज़िया के दूसरे मम्मे को पकड़ कर दबाते हुए मुझे इशारा किया… तब तक मैं अपने सारे कपड़े उतार चुका था… नाज़िया की आँखे मस्ती में एक बार फिर से बंद हो चुकी थी….मैने फॉरन नाज़िया के ऊपेर झुक कर उस के दूसरे मम्मे को चूसना शुरू कर दिया...नाज़िया ने फिर से अपने हाथ हम दोनो क सिर पर रख दिए...फिर हाथों से सिर को दबा कर अपनी चेस्ट ऊपेर उठाने लगी. ..

नाज़िया बुरी तरह तड़प ने लगी...उस की हालत बिगड़ने लगी….और ऐसा होता भी क्यों ना उस के दोनो मम्मो को हमने मुँह मे जो डाला था उस का तो रोम रोम मज़े मे डूबा था…कुछ देर बाद नज़ीबा ने नाज़िया के मम्मे को मुँह से बाहर निकाला…और नाज़िया के जिस्म के हर हिस्से को चूमते हुए पेट की तरफ़ का सफ़र शुरू कर दिया.... नज़ीबा ने पेट पर नाफ़ के चारों तरफ़ ज़ुबान घुमा कर दोनो हाथों से नाज़िया की फुद्दि के ऊपेर रखे हुए तकिये को हटा कर साइड में कर दिया….जैसे ही तकिया हटा…मैने फॉरन नाज़िया की फुद्दि पर हाथ रख कर उसकी फुद्दि को रब करना शुरू कर दिया….

नाज़िया का जिस्म एक बार फिर से काँपने लगा…नज़ीबा एक बार फिर से नाज़िया के फेस के ऊपेर झुक गयी…नाज़िया ने अपनी आँखे खोल कर हवस से भरी नज़रों से नज़ीबा की तरफ देखा और इस बार नाज़िया ने फॉरन सिर उठा कर नज़ीबा के होंठों से होन्ट लगा दिए और पागलों की तरह किस करने लगी...नाज़िया ने हाथ मेरे सिर पर रख कर मुझे ऊपेर खींचा फिर मेरा मुँह भी नज़ीबा के होंठो से लगा दिया और हम तीनो ने अपने होन्ट ऐक दूसरे के होन्ट से जोड़ दिए...

कभी नाज़िया नज़ीबा के होंठ चूमती कभी मैं कभी हम तीनो के होंठ ऐक साथ जुड़ जाते...किस करते हुए नज़ीबा फॉरन नाज़िया के ऊपेर आइ. ..और नाज़िया के मम्मों को चूसने लगी...मैने नाज़िया के होंठो को सक करना शुरू कर दिया...नज़ीबा ने फिर आहिस्ता आहिस्ता पेट की तरफ़ जाना शुरू कर दिया. .. नज़ीबा फॉरन नाज़िया के ऊपर आइ और उस के मम्मे दबाने लगी...फिर नज़ीबा भी मेरे साथ नाज़िया के होंटो का रस पीने लगी...

नाज़िया ने आहिस्ता आहिस्ता अपनी टांगे खोल दी...नज़ीबा की फुद्दि नाज़िया की फुद्दि के साथ टच हुई …फिर जो नज़ीबा ने किया वो मंज़र देख कर तो मैं भी बे काबू होने लगा…दो दिन पहले मैने नज़ीबा को एक थ्रीसम वीडियो दिखा कर उसके जेहन में ये भर दिया था….ऐसा करने मैं बहुत मज़ा आएगा….और आज मुझे यकीन नही हो रहा था…कि दो दिन पहले जो नज़ीबा ने देख कर मुझसे वादा किया था…कि वो मुझे हर वो ख़ुसी देगी…जिसकी ख्वाहिश मेरे दिल में है….वो आज नज़ीबा सच में पूरी कर रही थी…नज़ीबा ने अपनी बुन्द को दबा कर नाज़िया की फुद्दि से फुद्दि रगड़नी शुरू कर दी...

नज़ीबा अपनी लचकीली कमर को ऐसी धीरे-2 हिला हिला कर नाज़िया की फुद्दि से फुद्दि को बड़ी महारत से रगड़ रही थी....जैसे उसकी कमर में कोई स्प्रिंग लगा हो…मैं ये सब देख कर और जोश में आ गया...दोनो को इस तरह देख कर मेरा तो बुरा हॉल होने लगा...मैने नाज़िया के होंटो से अपने होंटो को अलग किया…और उन दोनो के पीछे जाकर दोनो की टाँगो के दरम्यान बैठ गया…..फिर जो मंज़र मेरी आँखो के सामने आया… उसे देख कर मेरा लंड फूटने को आ गया…नाज़िया और नज़ीबा दोनो की फुद्दियो के लिप्स उनकी फुद्दि से निकल रहे लेसदार पानी से सारॉबार हो चुकी थी…दोनो की फुद्दिया एक दूसरे के साथ रगड़ खाती हुई फिसल रही थे…और दोनो की सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी….

मैने आगे बढ़ कर नज़ीबा की कमर को दोनो तरफ से पकड़ा और उसे नाज़िया के ऊपेर से नीचे उतारने लगा….तो नज़ीबा ने अपनी कमर हिलाना बंद कर दिया…. और पीछे फेस घुमा कर मेरी तरफ हवस और सेक्स म्न डूबी हुई आँखो से देखा और खुद ही नाज़िया के ऊपेर से उतर कर साइड पर बैठ गयी….नाज़िया का भी वही हाल था… उसकी आँखो में हवस के लाल डोरे तैर रहे थी… मैने आगे होते हुए नाज़िया की टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठाया….और अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के लिप्स के पास लेजा कर नज़ीबा की तरफ देखा…तो नज़ीबा फॉरन ही मेरा मकसद समझ गयी….

और फिर जैसे ही नज़ीबा ने आगे झुक कर अपने हाथों से नाज़िया की फुद्दि के लिप्स को खोला तो, नाज़िया एक दम से सिसक उठी…..”सीईईईई ओह्ह्ह्ह कुछ तो शरम कर लो….”

नज़ीबा अपने साँसे थामे नाज़िया की फुद्दि को देख रही थी… नाज़िया की फुद्दि के लिप्स खुला देख कर मैने अपने लंड के कॅप को नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर टिका दिया… जैसे ही नाज़िया को अपनी फुद्दि के सूराख कर मेरे लंड के गरम दहकते हुए कॅप का अहसास हुआ, नाज़िया ने अपने दोनो हाथों से अपने मम्मों कस्के पकड़ लिया…मैने अपनी कमर को पूरी ताक़त से आगे की तरफ पुश किया…..

लंड फुद्दि के लिप्स को फेलाता हुआ अंदर घुस गया… नाज़िया के मुँह से घुटि हुई अहह निकल गइई… मैने आगे झुक कर नाज़िया के हाथों को उसके मम्मों से हटा दया और नाज़िया के थाइस को पकड़ कर धना धन शॉट लगाने लगा… और अपने एक हाथ को नीचे लेजा कर नाज़िया की कमर के पास बैठी नज़ीबा की फुद्दि में अपनी दो उंगलियों को डाल कर उंगली को अंदर बाहर करने लगा….जैसे ही मैने नज़ीबा की फुद्दि में अपनी उंगलियों को डाल कर अंदर बाहर करना शुरू किया…. नज़ीबा एक दम से सिसक उठी…..सीईईईईईईईई अहह अम्मी……” नज़ीबा के सिसकते ही मैने एक ज़ोर का झटका मारा…..तो लंड ठप की आवाज़ के साथ नाज़िया की फुद्दि में जड तक घुस गया..

नज़ीबा अपनी अध खुली नशीली आँखो से मेरे लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर होता देख कर सिसक रही थी….मैने नाज़िया की फुद्दि में अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए, नज़ीबा को आगे करके नाज़िया के ऊपेर झुका दिया….और नज़ीबा की एक टाँग उठा कर नाज़िया के ऊपेर से दूसरी तरफ रख दी… अब नज़ीबा नाज़िया के ऊपेर डॉगी स्टाइल मे आ गयी थी…. नीचे नाज़िया लेटी हुई थी नज़ीबा उसके ऊपेर दोनो तरफ पैर करके घुटनो के बल झुकी हुई थी….

नाज़िया: सीईइ हइईए समीर अहह माँ मुझे कुछ हो रहा है…..

मैने बिना कुछ बोले नाज़िया की फुद्दि से लंड निकाला और थोड़ा सा ऊपेर होकर नज़ीबा की फुद्दि पर अपने लंड के कॅप को नज़ीबा की फुद्दि के सूराख पर रगड़ने लगा… नाज़िया ने अपनी आँखें बंद की हुई थी…. उसे ये तो पता था कि नज़ीबा अब उसके ऊपेर है.. पर उसे पता नही था कि मैं अब क्या कर रहा हूँ…. नज़ीबा ने भी अपने फुद्दि पर मेरे लंड के कॅप की रगड़ को महसूस करते ही गरम अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश करना शुरू कर दिया….

नज़ीबा; अहह ईए क्या कर रहे हूओ ओह आईसीए तो ना तड़पाओ…प्लीज़ फक मी… (नज़ीबा ने लगभग चिल्लाते हुए कहा…)

नज़ीबा को लंड के लिए इस क़दर तड़पता देख कर मैने भी जोश में आते हुए, एक ही झटके में नज़ीबा की फुद्दि में अपना पूरा का पूरा लंड घुसा दया… और नज़ीबा की कमर पकड़ कर अपने लंड को अंदर बाहर करके फुल स्पीड से चोदना शुरू कर दिया… नाज़िया ने अपनी आँखों को थोड़ा सा खोला और देखा नज़ीबा उसपर झुकी हुई थी… उसके 34 साइज़ के मम्मे आगे पीछे उसके चहरे के ऊपेर 1 इंच की दूरी पर हिल रहे थे….. नीचे मेरी थाइस नज़ीबा की बुन्द पर चोट कर रही थी…

नाज़िया अपनी बेटी को ऐसी हालत में देख कर गरम होने लगी…. उसने अपनी जिंदगी में सोचा भी नही होगा कि, वो ऐसे भी अपनी बेटी को इतने करीब से चुदवाते हुए देखे गी….मैने अपने दोनो हाथों को नज़ीबा के कंधों पर रख कर नज़ीबा को नाज़िया के ऊपेर झुकाना शुरू कर दिया…. नज़ीबा अपनी फुद्दि को अपनी रानो को खोल कर चुदवा रही थी…. नज़ीबा के मम्मे अब जब हिलते तो, नाज़िया के मम्मों पर रगड़ खाने लगते…. नज़ीबा के तने हुए निपल्स नाज़िया के निपल्स पर बार-2 रगड़ खा रहे थे… कुछ ही पलों में नज़ीबा के मम्मे…. नाज़िया के बड़े-2 मम्मों के ऊपेर दब गये….

नाज़िया बिना कुछ बोले अपनी आँखें बंद किए लेटी रही… मैने अपनी पूरी ताक़त से नज़ीबा की फुद्दि में लंड को अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा… नज़ीबा अहह ओह सीईईईईईईईईईईई करने लगी….. मैने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर नाज़िया की फुद्दि के दाने (क्लिट ) को अपनी उंगलियों से दबाना चालू कर दिया नाज़िया के जिस्म में मानो जैसे करेंट दौड़ गया हो….

नाज़िया:ओाहह उंह सीईईई हइईए मैं हाई मेरी फुद्दि….

अब नाज़िया भी पूरी गरम हो चुकी थी…. उसने भी मदहोश होकर नज़ीबा को अपनी बाहों में भर लिया….. मैने नज़ीबा की फुद्दि से लंड निकाला…. तो नज़ीबा की फुद्दि के पानी की कुछ बूंदे नाज़िया की फुद्दि के ऊपेर गिरी…. मैने नीचे होकर अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि पर टिका दिया और उसकी टाँगों को घुटनो से पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का दिया लंड नाज़िया की फुद्दि के अंदर चला गया….. \

मैं: ओह्ह्ह मेरी दोनो बीवियों को कैसा लग रहा है….

नाज़िया: ओह्ह्ह मैं आपको बता नही सकती…..कैसा लग रहा है…सीईईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह समीईर करो और जोर्र्र से करो…..मुझे रोज ऐसे ही प्यार किया करो…. आज तो चाहे मेरी फुद्दि सूजा ही दो…. मैने आज के बाद आपको कभी मना नही करना है…

मैं: क्यों नज़ीबा सुना तुम्हारी सौतन क्या कह रही है….

मैने अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर करते हुए, नज़ीबा की फुद्दि में अपनी उंगलियों को घुआ कर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….. “हाआँ…..अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सुना……सीईईईईई अहह हाईए…” नज़ीबा का जवाब सुन कर मैने और ज़ोर से नाज़िया की फुद्दि मे घस्से लगाने शुरू कर दिए….

मैं: तुम्हे कोई एतराज तो नही….अगर मैं तुम्हारे साथ साथ नाज़िया की भी रोज लिया करूँ….

नज़ीबा: अहह नहियीईईईई बाज़ी और मैं आपको हमेशा खुश रखेंगे….बोलो ना बाजी आप समीर को खुश रखने में मेरा साथ दोगी ना…..

नाज़िया: हान्णन्न् मेरी जान….आप दोनो तो मेरी जान हो….आप दोनो के लिए कुछ भी…

मैने धना धन शॉट लगा कर नाज़िया की फुद्दि को चोदे जा रहा था….नाज़िया मस्ती से भर चुकी थी…. नज़ीबा भी अपनी नाज़िया के साथ चिपकी हुई थी …. दोनो की साँसें एक दम तेज चल रही थी… मैने नज़ीबा के कंधों को पकड़ कर सीधा किया और उसके कान में बोला…

मैं: नाज़िया के मम्मों को चूसो….

और नज़ीबा फिर से नाज़िया पर झुक गयी और नाज़िया के मम्मे को मुँह मे ले लिया नाज़िया की फुद्दि का ज्वाला मुखी अब फटने को तैयार था….नाज़िया ने भी अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी बूँद को ऊपेर की तरफ उठाना शुरू कर दिया… रूम मे थप-2 की आवाज़ पूरे रूम में गूंजने लगी और नाज़िया का जिस्म झटके खाने लगा और उसकी फुद्दि ने पानी छोड़ दिया…. फिर नाज़िया का जिस्म एक दम से ढीला पड़ गया…. मैने नाज़िया की फुद्दि से लंड निकाल कर नज़ीबा की फुद्दि के सूराख पर सेट किया और नज़ीबा की बूंद को पकड़ कर पीछे की ओर खींचने लगा लंड फुद्दि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुस गया…..

और फिर मैं नज़ीबा की बुन्द को पकड़ कर आगे पीछे करने लगा और कुछ देर बाद मैने नज़ीबा की बुन्द से अपने हाथ हटा लिया… नज़ीबा ने आगे की तरफ झुक कर पीछे अपनी बुन्द को ऊपेर उठा लिया… जिससे उसकी फुद्दि ऊपेर की तरफ हो गयी और वो अपनी बुन्द पीछे धकेल धकेल कर मेरे लंड को अपनी फुद्दि मे लेने लगी…

मैं: और तेज करो….. मेरी जान…..

नज़ीबा ने भी पूरे जोश में आकर अपनी बुन्द को पीछे की तरफ धकेलना चालू कर दिया….मेरा लंड अब और तेज़ी से नज़ीबा की फुद्दि के अंदर बाहर होने लगा…

नज़ीबा;अहह ओह सीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मैईईईईईन्न्नननननननणणन् ओह

और नज़ीबा की फुद्दि ने भी पानी उगलना चालू कर दिया और वो नाज़िया के मम्मों पर गिर पड़ी….मैने नज़ीबा की कमर को अपने हाथों से पकड़ लिया और तबडतोड़ धक्के लगाने चालू कर दिए…. फिर जैसे ही मुझे अहसास हुआ कि, मैं भी फारिघ् होने वाला हूँ….. मैने नज़ीबा की फुद्दि से लंड को बाहर निकाल लिया और अपने लंड को हाथ से दो तीन बार ही हिलाया था कि, लंड से पानी की पिचकारियाँ निकलने लगी और सीधा नज़ीबा की फुद्दि के ऊपेर जाकर गिरने लगी… एक के बाद एक मेरे लंड से चार बार रुक रुक कर पिचकरी छूटी और नज़ीबा की फुद्दि को भीगो दिया….

नज़ीबा की फुद्दि से मेरा लेसदार पानी बह कर नाज़िया की फुद्दि पर गिरने लगा…. दोनो की फुद्दियाँ मेरे लंड से निकले काम रस से भीग चुकी थी…. दोनो को अपनी फुद्दि पर गरम लेसदार पानी का अहसास हो रहा था…और उस मज़े के अहसास को महसूस करके दोनो का जिस्म रह रह कर झटके खा रहा था…. मैं थक कर पीछे की तरफ लेट गया.. फिर हम तीनो बारी-2 जाकर बाथरूम में फ्रेश हुए और फिर से बेड पर आ गये…. उस रात हम तीनो मैं से कोई भी नही सोया…नाज़िया और नज़ीबा की शरमो हया में कोई कमी नही आई थी….

इसलिए वो सेक्स के दौरान झिझक रही थी…और दोस्तो यही झिझक मुझे वो लुफ्त देती थी… जिसके बारे मे मैं कभी सपनो में सोचता था….जिसके बारे मे मैने खुली आँखो से नज़ाने कितनी बार सपने देख लिए थे…आज मेरी खुली आँखो के वो सपने पूरे हो चुके थे….

एंड.

समाप्त

 
दोस्तो ये सफ़र यहाँ ख़तम हो चुका है आप सब को ये कहानी कैसी लगी अपनी फीडबेक ज़रूर देना दोस्तो कुछ दिनों में फिर चलेंगे एक और नये सफ़र पर
 
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