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मेरी खुली चुनौती मेरे पति को

मैं मेरी टीम की एक सदस्यके साथ हमारे ऑफिस के ही बगल के कॉफ़ी शॉप में कॉफ़ी पी रही थी। मुझे साथ वाली कैबिन में से योगराज की आवाज़ सुनाई पड़ी। योगराज भी अपने कुछ साथीदारों से कुछ बात कर रहे थे। हमें उनकी आवाजें स्पष्ट सुनाई पड़ रही थीं। योगराज की एक महिला साथीदार ने योगराज से हमारी ही ऑफिस की एक और टीम की बड़ी सफलता के बारे में कहा।उसने कहा की वह सफलता में एक महिला का बड़ा योगदान था और उसके योगदान के लिए वह महिला को कंपनी ने बड़ा सराहा और एक प्रमोशन और बढ़ावा भी दिया। यह सुनकर योगराज तिलमिला उठे और जोर से बोलने लगे, "बकवास है। उस महिला का क्या योगदान था? क्या उसे अपनी काबिलियत के लिए वह प्रशंशा, प्रमोशन और बढ़ावा मिला था या फिर उस महिला को अपनी खूब सूरत जाँघों को प्रदर्शित करने के लिए मिला था?" योगराज के जोर से बोले हुए यह वचन सुनकर कमरे में बैठे हुए सारे लोग सकते में आ गये। योगराज हमारी कंपनी का एक जिम्मेवार एवं सीनियर लीडर था। उसके वाक्य कंपनी के कर्मचारियों के लिए मायने रखते थे। मेरे लिए इतना सुनना ही काफी था। मैं मारे गुस्से के लाल हो गयी और अपने दोनों हाथों को मोड़ कर अपनी कमर पर दोनों हाथोंकी हथेलियों को टिकाकर आग बबूला हो कर योगराज के सामने आ खड़ी हुई।

मैं गुस्से भरी नजर से योगराज की और देखते हुए कहा, "अच्छा! तो आप कहते हो की उस महिला को अपनी काबिलियत के लिए नहीं बल्कि उसकी खूबसूरत जाँघों के लिए वह सब प्रशंशा, प्रमोशन और दूसरे पारितोषिक मिले ठीक है? क्या इसका मतलब यह हुआ की आप उन सब लोगों से ज्यादा अक्लमंद हो जिन्होंने उस महिला की कार्य क्षमता को परखा?" शायद मेरे शब्दों से कहीं ज्यादा मेरी धमकी भरी अंगभंगिमा देख कर योगराज कुछ देर तक मुझे स्तब्ध हो कर ताकते ही रहे। उन्हें पता नहीं था की मैं भी वहाँ उनकी बातें सुन रही थी। उन्होंने फिर मुझे ऊपर से निचे आँखे घुमाकर प्रशंशा भरी नजर से देखा और फिर थोड़ा मुस्कुराकर वही लोलुप नज़रों से देखते हुए बोले, "बापरे! माफ़ करना श्रीमती जी, मैं किसी को भी नीचा दिखाने की कोशिश नहीं कर रहा था। भाई अब मैं मानता हूँ की निर्णायकों का कोई भी दोष नहीं है। अगर मैं भी उनकी जगह होता और मुझे भी तुम्हारी जैसी सुन्दर फिगर वाली सेक्सी महिला की कार्यदक्षता का मूल्यांकन करना होता तो मैं भी वही करता जो उन्होंने किया।" योगराज की बातें सुनकर मुझे सारे कमरे के लोगो के चेहरे पर कटाक्ष भरी हंसी दिखाई दी। यह तो उलटा हो गया। मैं योग की बात काटने चली थी और इधर मेरी ही फिरकी उड़ गयी। मैं सब को हँसते देख कर खिसिया गयी और गुस्से में कॉफ़ी शॉप से उँफ की आवाज़ कर के बाहर निकल गयी।

मैं मुश्कल से थोड़ा ही चली थी की योगराज मेरे पीछे भागते हुए आये और पीछे से मेरी कमर अपने दोनों हाथोँ में पकड़ कर मुझे अपनी तरफ घुमा कर बोले, " प्रिया, आई ऍम वैरी सॉरी। प्रिया डार्लिंग, मेरी बात तो सुनो। तुम गुस्से में इतनी सुन्दर लग रही थी की मैं अपने आप पर नियत्रण नहीं रख पाया। सच बोलता हूँ डार्लिंग तुम इतनी सेक्सी लग रही थी की उस वक्त मेरा मन किया की मैं तुम्हें वहीँ पर...... डालूं।" योगराज ने वह शब्द नहीं बोले जो शायद वह बोलना चाह रहे थे। फिर चारों और नजर घुमाके उन्होंने देखा की कोई नजदीक सुन नहीं सकता था तो वह अपने मुंह को मेरे कान के पास लाकर बड़ी ही धीमी और मीठी आवाज़ में बोले, "प्रिया डार्लिंग, तुम इस अंदाज में इतनी सेक्सी और चुदक्कड़ लग रही हो की वाकई मैं मेरा मन तुम्हें चोदने के लिए बाँवला हो रहा है। डार्लिंग मैं तुम्हें सचमुच चोदना चाहता हूँ।" यह तो योग के असभ्यता की हद ही हो गयी! हालांकि यह सही था की वह मुझे चोदने की बात मेरे कानों में बोले, पर जिन्होंने भी उसे देखा होगा उन्हें साफ़ अंदाज लग ही गया होगा की योग मेरे कानों में क्या कह रहे थे। मुझे समझ नहीं आया की इस आदमी के माफ़ी मांगने की विचित्र तरीके से मैं कैसे निपटूं? वह मुझसे माफ़ी मांग रहे थे या मेरा मजाक उड़ा रहे थे? क्या वह मुझे चुदवाने के लिए निमत्रण दे रहे थे? अगर योग ने मुझे अलग ही माहौल में और अलग ही संजोग में यही चीज़ कही होती तो मैं शायद उसके निमत्रण का सकारात्मक जवाब देती। योग से चुदवाने के बारे में सोचने भर से मेरा गला सूखने लगा और मेरी टाँगे कमजोर पड़ने लगी। मैंने महसूस किया की मेरी टाँगों के बिच में से मेरा स्त्री रस रिसना शुरू हो गया। मेरी निप्पलं फूलने लगीं। पर उसके शब्द याद आते ही मरे मन में गुस्से की ज्वाला भड़क उठी। योग ने मेरा हाल देखा। वह मेरे करीब आये और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ा। मैं थोड़ी लड़खड़ा गयी तो उन्होंने मुझे कमर से पकड़ा और मैं उनकी बाँहों में झूलती रह गयी। मेरा चेहरा उनके चेहरे के बराबर सामने था। उनकी आँखें मेरी आँखों में झांक रही थीं। हमारे होँठ लगभग चुम्बन की स्थिति में ही थे। शायद मेरी भाव भंगिमा से वह समझ गए थे की जब उन्हों ने मुझे चोदने की बात कही तो मैं नर्वस हो गयी थी। हम दोनों उसी पोज़ में कुछ देर तक खड़े रहे। मैं योग के कार्य कलाप से कुछ अचंभित थी।

 
तब अचानक ही योगने एक हाथ से मेरे एक स्तन को मेरे ब्लाउज के उपर से ही अपने हाथ में पकड़ा और उसे दबाने लगे। फिर उन्होंने अपना मुंह निचे किया और मेरे होठोँ से होँठ मिलाकर मुझे चुम्बन करना चाहा। मैं इस अशिष्ट पर आकर्षक मर्द के ऐसे बेधड़क दुस्साहस से हैरान रह गयी। मेरे दिमाग का एक हिस्सा मेरे बदन को योग की बाहों में लिपट कर उसे चुम्बन करना चाहता था, पर दुसरा हिंसा चिल्ला चिल्ला कर योग के चंगुल से भागना चाहता था। मैंने अपने आप को सम्हाला और एक झटके से मैंने उनके हाथ मेरे बदन से हटा दिए। मैं उनसे अलग होकर कुछ व्याकुल आवाज़में बोली, "योग आप यह क्या कर रहे हैं? आप कहीं पागल तो नहीं हो गए?" यह कह कर मैं वहाँ से दूसरी और तेजी से चल पड़ी। मेरी आवाज मेरा गुस्सा कम और नर्वस ज्यादा होने की चुगली खा रही थी। अपनी घबराहट छुपाने और अधिक शर्मिंदगी से बचने के लिए मैं भागकर महिला के वाशरूम की और भागी ताकि योग मेरा पीछा ना कर सके। जब मैं आयने के सामने खड़ी हुई तो मैंने आयने में अपने चेहरे पर साफ़ साफ़ घबराहट देखि। मैं चली थी योग को उलाहना देने और बात एकदम उलटी ही हो गयी। सब के सामने मुझेही शर्मिंदगी से भागना पड़ा। मैं यह साबित करना चाहती थी की मैं एक सफल और काबिल महिला हूँ जो अपना काम भली भाँती जानती है। पर मैं ऐसा कुछ कर नहीं पायी।

वाशरूममें मैंने कुछ मेकअप सा किया और अपने आपको सम्हालने की कोशिश की। पर जब मैं बाहर निकली तो योग को वहीँ खड़े हुए पाकर मैं कुछ लड़खड़ा सी गयी। वह मेरे बाहर आने का इंतजार कर रहे थे। उसे वहीँ देखकर मैं गुस्से से तिलमिला उठी। मैंने चिल्लाकर सब सुने ऐसी आवाज में कहा, "आप अपने आपको समझते क्या हो? क्या आप कामदेव हो या कोई सुपर हीरो हो जो आपके ज़रा से इशारे पर सारी महिलायें आप के कदम चूमकर आपको आपके साथ एक रात एक बिस्तर पर गुजारने के लिए मिन्नतें करेंगीं?" मैं हैरान तब रह गयी जब योग ने मेरे जवाब में बड़ी ही धीरज और शान्ति से मेरे करीब आकर मेरे कानों में कहा, "सारी औरतें नहीं, मैं मात्र एक ही औरत को अपने बिस्तर में अपने साथ सुला कर बड़े ही प्यार से चोदना चाहता हूँ। और वह तुम हो। मेरी बात मानो प्रिया, मैं सचमुच में ही तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और मैं तुमसे रात रात भर तुम्हारे साथ पलंग में चिपक कर प्यार से चोदना चाहता हूँ। मैं जानता हूँ की तुम भी वही चाहती हो। वह बात अलग है तुम इस बात को स्वीकार करना नहीं चाहती हो।" योग के इस तरह के वर्ताव से मेरी धीरज और शुशीलता अब मेरे नियत्रण से बाहर जा चुकी थी।

मैंने जोर से चिल्लाते हुए योग को कहा, "योग अब बहुत हो चुका। आप मेरे सीनियर हो और मैं आपका लिहाज करती हूँ इस लिए मैंने अब तक आपसे ज्यादा झिक झिक नहीं की। पर अब हद हो चुकी है। मैं आपको साफ़ साफ़ बता देना चाहती हूँ की मैं आपको चाहना तो दूर, देखना भी नहीं चाहती। मैं आपसे नफ़रत करती हूँ। मैं आपका करियर बर्बाद करना नहीं चाहती इस लिए मैं आपको पहले से चेतावनी देती हूँ की अगर आपने आगे से कोई ऐसी वैसी हरकत की तो मैं आपके विरुद्ध मुझे छेड़ने की और परेशान करने की उच्च स्तर पर शिकायत करुँगी। और हाँ, आप इसे खोखली गीदड़ भभकी समझ ने की गलती मत करियेगा।" मैंने पहेली बार योग के चेहरे पर निराशा, गंभीरता और दुःख के स्पष्ट भाव देखे। शायद उन्हें मुझसे यह उम्मीद नहीं थी। उन्होंने शायद यह सोचा होगा की उन की करतूतों से प्रभावित होकर मैं उनसे कहूँगी, "ठीक है, चलो बोलो कहाँ चलें? आप के घर या मेरे?" शायद न का यह फार्मूला दूसरी लड़कियों के साथ चला होगा। उन्हें दूसरी लड़कियों या महिलाओं से सकारात्मक जवाब मिला होगा। पर मैं दूसरी काठी की औरत थी।

 
"ठीक है, चलो बोलो कहाँ चलें? आप के घर या मेरे?" शायद न का यह फार्मूला दूसरी लड़कियों के साथ चला होगा। उन्हें दूसरी लड़कियों या महिलाओं से सकारात्मक जवाब मिला होगा। पर मैं दूसरी काठी की औरत थी।

पर फिर मेरे मन ने मुझसे कहा, "अरे बेवकूफ, क्यों अपने आपको धोखा दे रही हो? वाकई मैं तो अंदर से तुम भी तो उनकी बाहों में जाने के लिए मचल रही हो।" मैंने योग के सामने देखा। उनके चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे मैंने सब के सामने ही उसे एक थप्पड़ मारा हो। वह बहुत दुखी और निराश लग रहे थे। शायद मैंने उनका दिल तोड़ दिया था। मुझे भी बुरा लगा। मुझे लगा की मुझे ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था। योग को उस हाल में देख कर मैं भी बहुत दुखी हो गयी। मेरा मन किया की मैं दौड़कर उनकी बाँहों में चली जाऊं और उन्हें अपने बाहु पाश में जकड कर कहूं, "मेरे प्राण, मुझे पागल मत बनाओ। मुझे भी तुमसे चिपक कर पूरी रात भर प्यारसे चुदवाने का बहुत मन है।" यह सोचते ही मेरी जाँघों के बिच में से मेरे प्यार का रस रिसना शुरू हो गया। मेरी टाँगें कमजोर पड़ने लगीं। योग ने मेरी और देखा। उन्होंने मेर चेरे के भाव देखे। शायद योग मेरे मन के भाव पढ़ने में माहिर थे। वह उनकी वही लोलुपता भरी मुस्कान से मुस्करा दिया। पर उस बार मैंने महसूस कियाकी उनमें पहले जितना आत्मविश्वास नजर नहीं आ रहा था। मैं वहाँ से चुपचाप योग की और देखे बिना बाहर निकल गयी और योग वहीँ मेरे पीछे देखते रहे। मेरे योग के प्रति ऐसे आक्रामक वर्ताव से मैं अपने आप पर नाराज हो गयी। मैंने सोचा, अच्छा होता की मैं योग की मुझे उकसाने वाली बातों का कोई जवाब ना देती और चुप ही रहती।

योग तो ऐसे ही थे। मेरे कुछ कहने या करनेसे वह सुधरने वाले नहीं थे। आखिर वह मेरे सीनियर और बड़े ही काबिल साथीदार थे। क्या पता आज नहीं तो कल अगर मुझे उनसे कोई मदद चाहिए तो मुझे उनके पास जाना ही पडेगा। उनके साथ सम्बन्ध बिगाड़ने में मुझे कोई फायदा नज़र नहीं आया। पर तीर कमान से निकल चुका था। मैं मन ही मन प्रभु से प्राथना कर रही थी की ऐसा ना हो की मुझे उनके पास कोई मदद मांगने जाना पड़े। पर कहते हैं ना की आप जिससे डरते हो वह समस्या आपके सामने जरूर जल्द आ खड़ी होती ही है। हुआ कुछ ऐसा की मैं और मेरी टीम ने एक व्यावसायिक औद्योगिक सॉफ्टवेयर प्रोगैम डिज़ाइन किया हुआ था जो टेस्ट पास हो चुका था। हमारी कंपनी के मार्केटिंग डिपार्टमेंट ने उसे सफल होने योग्य करार भी दे दिया था। उनका मानना था की यह प्रोग्राम जब मार्किट में रिलीज़ होगा तो उसे जबरदस्त रिस्पांस मिलेगा और कंपनी को वह अच्छी खासी आमदन प्राप्त करा सकता था। उस प्रोगैम को मुझे तुरंत ही लॉंच करना था। पर एक समस्या थी। उस प्रोग्राम का कंप्यूटर के साथ कॉन्फ़िगर करने के लिए जो एप्प चाहिए था वह हमारी कंपनी में ही योग ने डेवेलोप किया था। तो मुझे योग के पास जाकर उसे वह एप्प मुझे मुहैया कराने के लिए बिनती करने के लिए जाना पडेगा ऐसी स्थिति आ गयी। चाहती तो वह एप्प मैं भी डेवेलोप कर सकती थी। पर मेरे पास समय नहीं था। कंपनी चाहती थी की मेरा प्रोग्राम उसी महीनेमें लॉन्च हो। इसके लिए उन्होंने विज्ञापन आदि की भी व्यवस्था कर रखी थी। जब हमारी ही कंपनी में वह एप्प तैयार था तो भला मैं उसे दुबारा बनाने की जहमत क्यों करूँ? उसमें समय भी लगेगा और कंपनी का पैसा भी खर्च होगा। चूँकि मैं योग पास सीधा जाने में झिझक रही थी, इसलिए मैंने हमारे ग्रुप वाइस प्रेजिडेंट से कहा की वह योग को कहे की जो एप्प मुझे चाहिए उसे मुझे मुहैय्या कराए।

तब मुझे उन्होंने बड़ी विनम्रता से पर साफ़ साफ़ कह दिया की योग इस समय बहुत जरुरी और ख़ास प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक ना होगा। हाँ अगर योग अपने आप मेरी मदद करना चाहे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी। उन्होंने सुझाव दिया की ऐसे मामले में मुझे सीधा योग से बातचीत करके योग की मदद लेनी चाहिए। भला योग क्यों हमारी मदद नहीं करेंगे? वाईस प्रेजिडेंट ने कहा वह इस बात में बिच में पड़ना नहीं चाहते। मैंने फिर सोच कर योग को एक आधिकारिक ईमेल भेजी जिस में योग को मदद के लिए मैंने रिक्वेस्ट की। मुझे तुरंत योग से आधिकारिक चिट्ठी का जवाब मिला की वह बहुत ही व्यस्त थे और अभी वह मेरे काम के लिए समय नहीं दे सकते। मैं जानती थी की अगर योग चाहे तो समय दे सकते थे। पर शायद उन्हें मुझसे उसक अपमान का बदला लेना था। मैंने दुबारा उन्हें ऑफिसियल चिट्ठी लिखी। मैंने उसमें बताया की हमारा प्रोजेक्ट कंपनी के लिए कितना फायदेमंद था और उस लिए उन्हें हमारी मदद करनी चाहिए। उसके जवाब में उन्होंने मुझे फ़ोन किया और दो ही मिनट में कह दिया की उनके पास समय नहीं और मुझे इस लिए वाईस प्रेजिडेंट से बात करनी चाहिए। वाईस प्रेजिडेंट से तो मैं बात कर ही चुकी थी। योग के ऐसे घमंडने मुझे परेशानी में डाल दिया। योग फालतू में ही अपना वर्चस्व दिखाना चाहते थे। हाँ यह बात सही की वह हमारी कंपनी के एक अग्रिम काबिल डिज़ाइनर थे और सफलता की बात करें तो उनके नाम कई मानक दर्ज थे। पर उतनी ही यह बात भी सही थी की वह मुझे एक काबिल प्रोग्राम डिज़ाइनर नहीं मानते थे। शायद उन्हें कोई भी महिला टीम लीडर बने यह गवारा न था।

वह शायद यह मानते थे की मैं (अथवा कोई भी महिला) ने उस दिन तक जो भी कामयाबी हासिल की थी वह मेरी (या उन सब महिलाओं की) टांगों के बिच में छुपी हमारी योनि के कारण थी। एक स्टाफ की लड़की ने मुझे मेरे कानों में बताया था की एक बार नशे की हालत में योग उसे कह रहे थे की योग की ख्वाहिश थी की मौक़ा मिलने पर वह एक ना एक दिन मेरी टांगों के बिच में अपनी जगह जरूर बना लेंगे। ऐसी नीच और घटिया मानसिकता वाले व्यक्ति से मैं कैसे समझौता करूँ? यह मेरी समस्या थी। जब उस लड़की से मैंने सूना की योग मुझे चोदने की प्रबल ख्वाहिश रखते थे तो मेरी पुरे बदन में एक जबरदस्त सिहरन फ़ैल उठी। मेरी टाँगों में रस रिसना शुरू हो गया। कहीं न कहीं मेरे जहन में भी तो यही इच्छा थी। कुछ समय पहले योग के पीछे कई लडकियां फ़िदा थी। मैंने सूना था की योग पहले उन लड़कियों को लिफ्ट देते थे और शायद कईयों को चोद भी चुके होंगे। कई लड़कियों ने मुझसे कुबूल भी किया की योग ने उन्हें चोदा था। हमारे दफ्तर में चोरी छुपके यह अफवाह चली थी की जब से मैंने उस कंपनी में ज्वाइन किया तब से योग ने वह सब लफंडर बाजी छोड़ दी थी। उनमें से कुछ लडकियां मुझे ताने मारती थी की "अब तुम आ गयी हो तो योग ने हमसे बात करना भी बंद कर दिया है।" मैं हैरान थी की ऐसे अभिमानी आदमी के साथ कैसे लडकियां सोना पसंद करती थीं। पर खैर मेरे पास तब यह सब कुछ सोचने का समय नहीं था। मुझे मेरे प्रोग्राम को सही समय पर लॉन्च करना ही था। उसमें शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी।

मैं अच्छी फँसी थी। इधर कुआं तो उधर खाई। मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, तब योग की साथीदार एक लड़की मेरे ऑफिस में आयी। बातों बातों में मैंने उसे अपनी लाचारी बतायी की मुझे योग की मदद चाहिए पर वह है की मदद करने को राजी ही नहीं थे। तब वह लड़की मेरे पास आयी और उसने मेरे कानों में कहा, "प्रिया मुझे तुम्हारी समस्या का भली भाँती पता है। इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। योग सर तुम्हारी मदद जरूर करेंगे।" जब मैंने उसे पूछा की उसे कैसे पता की योग मेरी मदद करेंगे? तो वह लड़की ने कहा, "मुझे खुद योग सर ने कहा की वह आपकी मदद जरूर करते। पर आपके अड़ियल और तीखे रवैय्ये से वह नाराज हैं। अगर आप प्यार और नरमी से पेश आएंगे और उनकी और थोड़ा रियायती रवैया दिखा कर उनसे रिक्वेस्ट करोगे तो वह जरूर आपकी मदद करेंगे। योग सर कुछ जिद्दी और बोलने में उद्दंड जरूर हैं, पर दिल के बहुत अच्छे हैं।" यह कह कर वह लड़की मेरी और देख कर शरारती तरीके से आँख मटक कर चली गयी। मुझे शक हुआ की कहीं योग सर ने खुद ही उस लड़की द्वारा यह सन्देश तो नहीं भेजा था? दूसरा मैं समझ गयी की रियायती रवैय्या से उस लड़की का इशारा था की यदि योग सर मुझे मदद करने के बदले में चोदने की शर्त रखे तो मुझे कोई आपत्ति नहीं जतानी चाहिए। वाह भाई वाह!! मदद करने का यह एक अच्छा तरिका था। पर मैं क्या करती? एक और मेरी मज़बूरी थी की मुझे हर हालत में मेरा प्रोग्राम ख़तम करना था जिसमें मुझे योग की मदद चाहिए थी, तो दूसरी और उस लड़की ने योग से चुदवाने का इशारा किया तो मेरी तो जैसे हालत ही खराब हो गयी। मेरे पुरे बदन में रोमांच से कम्पन फ़ैल गया। मेरी चूत गीली हो गयी और मेरी निप्पलेँ जैसे योग की उँगलियों से खेलने के लिए मचल कर फूल उठीं।

 
तो मेरा दिमाग बोल उठा, "अरे लड़की, तू तो योग को सबक सिखाना चाहती थीं ना? तो अब क्या हो गया?" काफी कुछ गुथम गुत्थी के बाद मैंने तय किया की आखिर में साँढ़ को सींग से पकड़ना ही पडेगा। योग से आमने सामने हुए बगैर बात बनेगी नहीं। मैंने मन ही मन पक्का इरादा कर लिया की कुछ भी हो जाय मैं ऐसे इंसान को कभी भी अपना बदन सौंप नहीं सकती। पर मैं उसे मिलूंगी जरूर और उसे दिखाउंगी की मैं कोई ऐसी वैसी औरत नहीं हूँ। मैं अपने इरादे में सुद्रढ़ रहूंगी। यह तय कर मैंने योग से फ़ोन पर शाम को कॉफी शॉप में मिलने का प्रोग्राम बनाया। योग मुझ से मिलने को राजी हो गए। कॉफी आर्डर करने के बाद मैं योग से मेरे तीखे रवैय्ये के बारे में माफ़ी मांगने लगी l तो योग ने अपने हाथों को घुमा कर कहा, "यह सब फ़ालतू बात छोडो, बोलो तुम्हें क्या चाहिए?"

मैंने कहा मुझे इनकी मदद चाहिए और फिर मैंने उन्हें वह सब कहा जो उनको मैं पहले भी बता चुकी थी। बीच में ही मेरी बात को काटकर वह बोले, "पर मैं आपकी मदद क्यों करूँ?" मुझे पता था की उनका जवाब यही होगा। तब मैंने उन्हें कहा की कंपनीके लिए यह प्रोग्राम बड़ा ही जरुरी है, जिसमें मुझे उनका सहयोग चाहिए। योग ने बड़े ही रूखे अंदाज में कहा, "आपको वाईस प्रेजिडेंट के पास जाने के लिए मैं पहले ही कहा था। वह मेरे भी बॉस हैं। अगर वह कहेंगे तो मुझे आपका काम करना ही पडेगा। आखिर में आपने अभी अभी कहा की आपका काम कंपनी के फायदे में है। तो फिर आप उनके पास क्यों नहीं जाती?" हालांकि मैं जानती थी योग यह सब कहेंगे, पर फिर भी मेरी धीरज जवाब दे रही थी। मैं गुस्से हो रही थी। तब मुझे ख्याल आया की उस प्रोग्राम के पीछे ना सिर्फ मेरी परन्तु मेरे साथीदारों की करियर भी दाँव पर लगी थी। वह सब मुझ से यह उम्मीद कर रहे थे की जैसे तैसे मैं इस प्रोग्राम को लॉन्च करवा सकूँ, क्यूंकि उसकी सफलता पर उनकी नौकरियां और प्रमोशन इत्यादि निर्भर था। मैंने गुस्सा थूक देने में ही हम सबकी बलाई समझी। मैंने सोचा मेरे पास एक ऐसा शस्त्र था जो मैंने इस्तेमाल नहीं किया था। वह था करुणा शस्त्र। मैंने उसका प्रयोग करना उचित समझा। मेरी आँखों में आंसूं आ गये। मैंने कहा, "योग सर, आप क्यों नहीं समझते? इस प्रोग्राम के ऊपर मेरी और हमारी पूरी टीम की करियर निर्भर है। अगर यह प्रोग्राम सफल हो गया तो हमारे सबके करियर बन जायेगे।" यह कहते कहते वाकई में मैं रो पड़ी। उस टाइम मैं कोई ड्रामा नहीं कर रही थी।

मेरे रोते ही योग सर सकते में आ गये। उन्होंने तब मेरी और देखते हुए पूछा, "अच्छा तो यह बात है! चलो ठीक है। मैं तुम्हारी मदद करूंगा। पर बदले में मुझे क्या मिलेगा?" मैं समझ गयी, अब वह बदमाश इंसान अपने आपको बेनकाब कर रहा था। पर मैने सोचा चलो थोड़ा खेल खेल लेते हैं। मैंने अपनी पूरी मिठास और विनम्रता पूर्वक आग्रह दिखते हुए कहा, "सब जानते हैं की हमारी कंपनी में आप एक अग्रगण्य काबिल प्रोग्राम डिज़ाइनर हैं। आप हम से काफी सीनियर भी हैं। आपकी मदद के बिना इस प्रोग्राम का सफल होना मुश्किल है। मैं हमारी टीम की तरफ से आपसे बड़ी विनम्रता से बिनती करने आयी हूँ की आप हमारे लिए ही सही, हमारी प्लीज मदद कीजिये, प्लीज!" मैंने जान बुझ कर दो बार प्लीज कहा। फिर ना चाहते हुए भी मेरे मुंह से निकल ही गया, "योग सर आपकी मदद के लिए मैं और मेरी टीम सदा सर्वदा आपकी बहुत आभारी रहेंगी। अगर हम आपकी कोई भी मदद कर पाएं तो वह हमारा सौभाग्य होगा।"

तो योग सर ने मेरी और सहानुभूति से झुक कर कहा, "जब आपके जैसी बड़ी खूबसूरत और सैक्सी लड़की मुझे दो दो बार प्लीज कहे तो मेरा दिल भी तार तार हो जाता है। आखिर इस ठोस और वीर्यवान बदन में भी एक नरम दिल इंसान बसा हुआ है। पर फिर भी यह पूछना गलत नहीं होगा की आखिर यह सब करने के लिए मुझे क्या मिलेगा।" मुझे गुस्सा तो बड़ा ही आ रहा था पर मैंने अपने आप पर नियत्रण रखा l मैं जानती थी की गुस्सा दिखाने से काम बनेगा नहीं। जब हम करीब करीब अपने गंतव्य पर पहुँच रहे थे तो बात बिगाड़ने से काम नहीं चलेगा। मैंने एक और दाँव खेला। मैं कहा, "योग सर, अगर आपने हमारी मदद की तो मैं आपको वचन देती हूँ की मैं आपकी हमेशा के लिए आभारी रहूंगी और मौका मिला तो मैं आपको आपकी कोई भी तरह की व्यावसायिक मदद जरूर करुँगी। और आपकी मदद का उचित पारितोषिक जरूर दूंगी।" (मैंने सोचा देखते हैं, योग सर पारितोषिक का क्या मतलब निकालते हैं।) योग भी तैयार थे। उन्होंने कहा, "मैं नहीं समझता की मुझे आपकी व्यावसायिक मदद की कोई जरुरत होगी। मैं अपने आप में पूरा सक्षम हूँ। पर हाँ और कई तरीकोंसे तुम मेरी मदद कर सकती हो।" मैं समझ गयी यह चोदू, मुझे अपनी टांगों के बिच में हो रहे दर्द को मिटाने की और इशारा कर रहा था। फिर मैं एक बार और अपनी वासना पूर्ण काल्पनिक दुनिया में खोने लगी।

 
"मैं नहीं समझता की मुझे आपकी व्यावसायिक मदद की कोई जरुरत होगी। मैं अपने आप में पूरा सक्षम हूँ। पर हाँ और कई तरीकोंसे तुम मेरी मदद कर सकती हो।" मैं समझ गयी यह चोदू, मुझे अपनी टांगों के बिच में हो रहे दर्द को मिटाने की और इशारा कर रहा था। फिर मैं एक बार और अपनी वासना पूर्ण काल्पनिक दुनिया में खोने लगी।

मैंने सोचा की काश अगर ऐसा हुआ तो मेरी टाँगों के बिच का दर्द भी तो मिट जाएगा। पर दूसरी और मैं इस मुर्ख इंसान पर तरस भी आ रहा था। वह चाहते थे की उनकी टाँगों के बिच हो रहे दर्द का इलाज मैं करूँ ताकि वह ऑफिस के काम में बिना टेंशन के आराम से ज्यादा ध्यान दे सके। वाह! वाह! पर जैसे ही मैं उनकी टाँगों के बिच वाले उनके लण्ड के बारे में सोचने लगी की मेरी हालत खराब होने लगी। मेरा यह धोखे बाज बदन! मेरी यह बेईमान चूत!! मेरी यह बेबस निप्पलेँ!!! यह बैरन! योगराज से चुदाइ का ख़याल आते ही अपने गाने गाने लगीं! मेरी चूत में से पानी रिसने लगा और निप्पलेँ बरबस फूल गयीं।

यह मेरा बदन मुझे चैन से सोचने ही नहीं देता था। मैं सोचने लगी यदि मैंने उन की टाँगों के बिच हो रहे दर्द को दूर किया, तो वास्तव में तो मेरी टाँगों के बिच हो रहा दर्द भी तो दूर होगा! मेरी चूत भी तो उनका तगड़ा लण्ड अपने अंदर लेने के लिए कबसे तड़प रही थी। योग अपने छद्म शब्दों से अपनी कामना जाहिर कर रहे थे। मैं उस से गुस्सा भी थी और साथ साथ में मेरे अंदर काम वासना भी भड़क रही थी। अगर दुसरा कोई व्यक्ति होता तो मैं उनकी इन लोलुपता भरी बातों का माकूल जवाब देती। पर उस समय मेरे पास उन सारी बातों को सोचने का समय नहीं था। मुझे बस उनसे अपना काम निकलवाना था। हाँ, मेरे ह्रदय के अंदर कहीं कोई कोने में जरूर यह प्रश्न बार बार उठ रहा था की "हे प्रिया, कहीं योग से काम करवाने के चक्कर में उसे खुश करने के लिए तू अपना स्वाभिमान खो कर अन्य लड़कियों की तरह योग के सामने अपने घुटने तो नहीं तक देगी और उन से चुदवाने के लिए राजी तो नहीं हो जायेगी?"

मुझे ऐसा लग रहा था की योग मेरे मन की बात पढ़ लेते थे। उन्होंने कहा, "डार्लिंग, मैं जानता हूँ तुम क्या सोच रही हो। तुम मुझे कहती कुछ हो और सोचती कुछ और हो। तुम सोच रही हो ना की कहीं मैं तुम्हें मदद करने के बहाने ललचा फुसला कर तुम पर जबर दस्ती करके तुम्हें अकेला पाकर तुम्हारा बलात्कार ना कर दूँ? हौसला रखो। मैं तुम्हें चोदना जरूर चाहता हूँ पर जबर दस्ती नहीं। मेरे सशक्त और वीर्यवान शरीर में एक प्यार और करुणा से भरा दिल भी छुपा हुआ है।" मैं योग की और विस्मय से देखती रही। बातें करते हुए भी यह अभिमानी पुरुष अपने वीर्यवान बदन का जिक्र करना नहीं चुकता था। वह शायद मुझे अपनी चोदने की क्षमता का जायजा देना चाहते थे।

वह मुझे साफ़ साफ़ कह रहे थे की वह मुझे चोदना चाहते थे। कमाल है! योग की घृष्टता देख कर मैं मन ही मन दंग रह गयी। मुझे इस इंसान की बेशर्मी और ज़िद पर आश्चर्य हो रहा था; की इतनी नाकामियों के बावजूद वह मेरा पीछा नहीं छोड़ रहे थे। पर मैं करती तो क्या करती? मैं उसे उस समय योगराज को कोई सबक सिखाने के मूड में नहीं थी। मैं तो प्यार मोहब्बत से अपना काम निकलवाने के जुगाड़ में थी। मैं अपने इस अंतर्मंथन से परेशान हो गयी। मेरे चेहरे पर शायद यह परेशानी योगराज को साफ़ साफ़ नज़र आयी होगी, तो मुझ पर जैसे तरस खाकर योगराज बोले, "ठीक है, मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए, तुम जैसी एक सेक्सी और सुन्दर औरत के लिए, और यह ध्यान में रखते हुए की तुमने मुझे वचन दिया है की तुम मेरे इस अहसान का कर्ज जरूर चुकाओगी, मेरे अत्यंत व्यस्त होने के बावजूद, मैं निजी तौर पर तुम्हारा यह प्रोग्राम जरूर देखूगा।" जैसे ही योगराज ने यह शब्द कहे, मेरे पुरे मष्तिष्क ने एक चैन की साँस ली।

 
योग ने उस समय भी मेरा मन जैसे पढ़ लिया। वह मुस्कुरा कर बोले, "पर यह काम ऑफिस समय में नहीं हो सकता। क्यों की उसका मतलब होगा अपने काम की उपेक्षा करना और काम चोरी करना। यह काम या तो तुम्हारे या फिर मेरे घर ही हो सकता है। माहौल ऐसा हो की हम दोनों अकेले ही हों और पूर्णतयाः शान्ति हो l इसका कारण यह है की मैं जब मैं कोई काम हाथमें लेता हूँ तो मैं उस काम पर फोकस करता हूँ, उस पर पूरा ध्यान देता हूँ। मैं जानता हूँ की तुम्हरा प्रोग्राम अगर घटिया नहीं तो एकदम साधारण सा होगा। उसमें कई त्रुटियाँ होंगीं। मुझे उनको ठीक करना होगा। हालांकि यह तुम्हारा प्रोग्राम है, पर चूँकि अब मैं तुम्हें मदद करने के लिए राजी हो गया हूँ तो मैं तुन्हें बदनामी दिलवाना नहीं चाहता l तुम्हारा प्रोग्राम कैसा भी हो मैं उसे सुधारकर तुन्हें पर्याप्त यश दिलवाऊंगा। मेरे अंदाज से तुम्हारा प्रोग्राम देखने में और ठीक करने में मुझे काम से काम बारह या सोलह घंटे का समय तो जरूर चाहिए। तो बताओ फिर तुम्हारे घर में बैठे या मेरे?" मैं समझ तो गयी ही थी की योगराज मुझे अकेले में फाँसने के चक्कर में थे और कुछ न कुछ चाल तो चलेंगे ही। वह शायद मुझे अकेले में पाकर मेरा पूरा फायदा उठाना चाहते थे। शायद वह सोच रहे थे की मैं अकेली उनका विरोध नहिं कर पाउंगी और वह आसानी से पकड़ कर अगर मैं नहीं मानी तो मुझ पर जबरदस्ती करेंगे। पर वह जानते नहीं थे की मैं अलग मिटटी की बनी हुई थी। प्यार से कोई भी मुझसे कुछ भी करवाले। पर अगर किसी ने जबरदस्ती की तो फिर तो मैं महाकाली बन जाती थी और उस की शामत ही आ जाती। दूसरी बात यह भी थी की ज्यादा सोचने या घबराने से भी तो काम नहीं चलेगा। कुछ न कुछ रिस्क तो उठाना पडेगा ही।

खैर मैं भी कोई कम हिम्मत वाली नहीं थी। अगर योगराज ने मुझ पर जबरदस्ती की तो फिर तो उन की मैं ऐसी बैंड बजाऊंगी की वह याद रखेंगे। मैं उन के विरुद्ध शिकायत कर सकती थी या फिर उन पर मुकद्दमा भी दायर कर सकती थी। पर मैं यह भी जानती थी की जो योग कह रहे थे वह एकदम सही था। योगराज वह काम ऑफिस में नहीं कर सकते थे। अगर वह अपने फ्री टाइम में मेरा काम कर देते हैं तो कंपनी को कोई आपत्ति नहीं थी। और दूसरे हमें अकेले में शान्ति से बैठना तो पडेगा ही। ऐसे काम में फोकस एकदम जरुरी था और उसके लिए एकदम शान्ति और एकांत होना अनिवार्य था। बस मैं उनकी यह बात से खूब गुस्सा थी की प्रोग्राम को देखे बगैर वह कैसे कह सकते हैं की वह घटिया होगा? खैर मुझे योगराज का आईडिया ठीक लगा। मैंने कुछ हिचकिचाहट के साथ कहा, "ठीक है। मैं समझ सकती हूँ की आप कह रहें वह सही है। मैं आपका जाती रूप से शुक्रिया अदा करती हूँ की आप मुझे और मेरी टीम को मदद करने के लिए तैयार हुए l हमने हमारे यह प्रोग्राम का काफी सख्ती से परिक्ष्ण किया है। फिर भी आप जैसे सीनियर प्रोग्रामर की राय हमारे लिए बहुत मायने रखती है। चूँकि आप ऑफिस के नजदीक रहते हैं इस लिए अगर आपको एतराज ना हो तो आपके घर में ही यह काम करें तो बेहतर है। तो फिर कब शुरू करें?"

योगराज मेरी बात सुनकर मुस्कराये। उनकी मुस्कान मुझे अच्छी लगी। उस मुस्कान में कोई कड़वाहट नहीं थी। मुझे योग से इतनी ज्यादा पूर्व ग्रह होते हुए भी ऐसा लगा की वह मुस्कान में कोई कटाक्ष या कटुता नहीं थी। पर फिर मेरे मन में शक उठा की एक माहिर अभिनेता की तरह उनकी मुस्कान कहीं उनकी लोलुपता और कपटता को छुपानी उनकी कोशिश तो नहीं थी? हालांकि मैं खुश थी की वह हमें मदद करने के लिए राजी हो गए थे, पर उस से योगराज के प्रति उन का महिलाओं की व्यावसायिक कार्यदक्षता के प्रति जो हीन भाव था, उसके कारण मेरे जहन में कूट कूट कर भरा जो द्वेष और घृणा का भाव था वह कम नहीं हुआ था। खैर योग और मैंने तय किया की हम शुक्रवार शाम से काम शुरू करेंगे। पहले वह ऑफिस में अपना काम ख़तम करके मुझे अपनी कार में उनके घर ले जाएंगे। हम दोनों वहाँ देर रात तक काम करेंगे और फिर योगराज मुझे मेरे घर छोड़ देंगे। दूसरे दिन शनिवार को सुबह फिर वह मुझे अपने घर से अपनी कार में लेने आएंगे और फिर हम दोनों उनके घर शनिवार पुरे दिन उनके घर काम करेंगे। इतवार को भी ऐसे ही चलता रहेगा। हमें उम्मीद थी की सारा काम इतवार रातको खतम हो जाएगा। यह सब तय करने के बाद मेरी और देखकर योगराज बोले, "प्रिया, मैं एक व्यावसायिक प्रोफेशनल हूँ। मेरे जहन में तुम्हें पाने की कितनी भी गहरी इच्छा क्यों ना हो, मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूँ की मैं तुम्हें मेंरे अपार्टमेंट में अकेला पाकर जबरदस्ती नहीं करूंगा। मैंने योग की और देखा और उतने ही आत्म-विश्वास और हिम्मत से जवाब दिया, "आप ऐसा कुछ करने के बारे में सोचना भी मत। मैं भी एक प्रोफेशनल हूँ और बलात्कारियों या छेड़नेवालों से कैसे निपटना यह मैं बहुत अच्छी तरह जानती हूँ। आप गलती से भी यह कोशिश करने के बारे में अपने ही भले के लिए मत सोचियेगा।" मैंने ऐसा कह तो दिया पर मेरे अंदर वास्तवमें इतना आत्म-विश्वास था नहीं जितना की मैं दिखावा कर रही थी।

 
मैं वास्तव में तो उनकी बात सुनकर डर गयी और सोचने लगी की जरूर योगराज के मन में मुझ पर जबरदस्ती करने का प्लान है। पर मैंने मेरे इस शक को फ़ौरन खारिज कर दिया यह सोच कर की अगर उनके मन में ऐसा प्लान होता तो भला मुझे वह इसके बारे में ऐसे कहते नहीं। योग ने मेरा प्रोग्राम अपने लैपटॉप में लोड कर लिया था और उनकी एप्प उन्होंने मुझे दी थी; ताकि मैं भी उसे देखलूं की वह मेरे प्रोग्राम के साथ कॉन्फ़िगर हो सकती थी या नहीं। मैंने जब मेरी टीम को योग के साथ हुई बातचीत के बारे में बताया सबमें राहत और ख़ुशी की लहर फ़ैल गयी। सब ने आकर मुझे बधाई दी और मेरा आभार व्यक्त किया।

जिस लड़की ने मुझे योग से मिलने की सलाह दी थी उसने जब सूना तो वह मेरे पास आयी और मुझे बधाई देते हुए मेरे कानों में फुसफुसा कर बोली, "योगराज सिर्फ काम के मामले में ही एक्सपर्ट नहीं है, वह बिस्तर में भी कमाल के लवर हैं। मैं गलत नहीं कह रही, जब वह सेक्स करते हैं तो वह उद्दंड और अभिमानी नहीं बल्कि एक अनुकम्पाशील प्रेमी की तरह व्यवहार करते हैं। एक बार उनसे सेक्स करने से उनकी लत लग जाती है।". फिर वो मेरी और देखकर एक गहरी साँस लेते हुए बोली, "काश मुझे यह अनुभव दुबारा होता। तुम तो बहुत भाग्य शाली हो। तुम्हारे आते ही वह एकदम बदल गए। अब वह हमारी और देखते भी नहीं है। योग सर तो तुम्हें जैसे चकोर चाँद को देखता है ऐसे देखते हैं। मेरी और से बेस्ट ऑफ़ लक।" यह कह कर वह लड़की मेरी और देख कर आँख मार कर चली गयी। मैं समझ गयी की लड़की का क्या इशारा था। वह सोच रही थी की अब तो मेरा योग सर से चुदवाना तय था। बस और क्या था? मेरी टाँगें, मेरी चूत और मेरी निप्पलेँ फिर जवाब देने लगीं। मेरी चूत में से पानी रिसना फिर शुरू हो गया, मेरी निप्पलेँ फूलगयीं और मेरी टाँगें ढीली पड़ने लगीं।

मैं पलंग पर नंगी लेटी हुई थी और जोर से रो रही थी और उन का अगला कदम क्या होगा उसका इंतजार कर रही थी। योग ने मुझे नंगी लेटे हुए देखा तो उनके चेहरे पर एक ऐसा संतोष जनक भाव मैंने देखा जो एक शिकारी के चेहरे पर कोई तगड़ा शिकार करने पर होता है। शिकारी यह सोचता है की अब उसे कई दिनों तक कोई और शिकार करने की जरुरत नहीं होगी। मेरे जोर से सिसक कर रोने पर योग चिल्ला कर मुझे चुप रहने के लिए बोले। पर तब भी जब मैं चुप ना हुई तो योग ने अपना हाथ उठाकर मेरे गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मारा। मेरे गाल उनके करारे थप्पड़ से लाल हो गए और मुझे गाल पर तीखी जलन का दर्द महसूस हुआ। मैं योग की और देख कर चिल्लाई और बोल पड़ी, "मुझे चोदना है तो चोदो पर मुझे डराओ मत और मारो मत प्लीज!" योग के चेहरे पर फिर वही बीभत्स हँसी मैंने देखि जिसमें फिर वही सुनेहरा दाँत भी दिखा। मैं पलंग पर बैठ गयी और योग का पजामा पकड़ कर चिल्लाई, "योग आओ और मुझे चोदो पर इस तरह जलील मत करो मुझे।"

योग ने बड़े ही रूखे अंदाज में जवाब दिया, "तुम्हें मैं चोदूँगा जरूर। ओ चोदू कुतिया। तू मुझे, इस योगराज को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी? मैं पहले से ही जानता था की यह सब सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का तुम्हारा ड्रामा मेरे इस मोटे तगड़े लण्ड से चुदवाने का बहाना मात्र था। था की नहीं?" मैं योग की बातों का जवाब देने की स्थिति में नहीं थी। उसने मुझे नंगी कर दिया था और मैं उसके पलंग पर नंगी लेटी हुई उनसे चुदवाने का इंतजार करते हुए पड़ी थी। योग वास्तव में तो गलत नहीं थे। मेरे जहन में उनके मोटे लौड़े से चुदवाने की चाहत तो थी ही। मैं जानती थी की योग अच्छी तरह से चुदाई कर सकता था। उस लड़की ने भी मुझे यह बताया था। योग ने अपना पजामा मेरे सामने ही जल्दी से खोला और उसमें से उसका फनफनाता हुआ तगड़ा लौड़ा कूद के उछाल कर बाहर निकल पड़ा। मैं योग के खड़े मोटे कड़क लण्ड को देखे बगैर रह नहीं पायी। जिस तरह से वह खड़ा हुआ ऊपर की और मुड़ा हुआ काले बालों के बिच खड़ा सर उठाये ऐसे दिख रहा था, जैसे एक शेर घाँस के खेतमें आसपास चारा चरति हुई हिरणियों को देख रहा हो। उस समय मुझ में कुछ ज्यादा सोचने की क्षमता नहीं थी। योग का लण्ड जानता था की एक चूत उससे चुदवाने का बेबसी से इंतजार कर रही थी। योग के लण्ड का गुलाबी कुकुर मुत्ता सामान लौड़े का सर इतना मोटा और फुला हुआ था की मैं उसे बरबस अपने हाथों में लेने से अपने आपको रोक नहीं पायी। योग का लण्ड बिलकुल मेरे होंठों के सामने था। वह मरे मुंह के सामने ऐसे हिल रहा था, जैसे वह मेरे होँठों के बिच जाने के लिए बेताब हो रहा हो।

मैंने भय के मारे योग की और देखा। योग ने मेरी और भाव शून्य नजर से देखा। वह इसी उम्मीद में खड़े थे की मैं उनके लण्ड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसूं। मैं बड़े ही अस्मजस में पड़ गयी। जो योग के लण्ड का साइज था उसे देखते हुए यह तय था की मेरे छोटे से मुंह में उसका इतना चौड़ा लण्ड पूरी तरह से घुस सकना नामुमकिन था। मैंने कभी सपने में भी यह नहीं सिचा था की कोई इंसान का इतना मोटा और लंबा लण्ड हो सकता है। ऐसा लगता था जैसे वह इंसान का नहीं घोड़े का लण्ड हो। मैंने कभी घोड़े का लण्ड देखा था। योग का लंड उससे बहुत ज्यादा कम नहीं होगा। मुझे उसे मुंह में लेना ही होगा वरना मेरे गाल पर एक और थप्पड़ खाने की हालात में मैं नहीं थी। पर मुझे कोशिश तो करने ही पड़ेगी। मैंने योग का लण्ड अपने हाथों में लिया और उसकी गोलाई के ऊपर मैं अपनी उंगलियां घुमाने लगी, जिससे की उसके छेड़ में रिस रहा उसका पूर्व रस पूरी गोलाई में अच्छी तरह फैले।

उसके लण्ड के बड़े बिजली के बल्ब के समान उसके लण्ड के शिरोभाग से लण्ड की पूरी लम्बाई तक हलके नीले रंग वाली नसे फैली हुई नज़र आ रहीं थीं। उसके लण्ड का बल्ब जैसा अग्र भाग चमकते हुए गुलाबी रंग का था। मैंने हलके से उसके लण्ड को ढकती हुई ऊपरी चमड़ी को अपनी मुठी में रख कर दबाया और उसे धीरे धीरे सहलाने लगी। मेरी मुठी योग के लण्ड को ठीक तरह से पकड़ नहीं पा रही थी। जब मैं कुछ देर तक योग का लण्ड हाथ से सहलाती रही तो योग थोड़ा सा अधीर हो उठा। उसने अपना लण्ड मेरे मुंह के पास लाया जिससे मुझे बरबस अपना मुंह जितना हो सके उतना चौड़ा कर खोलना पड़ा और तुरन्त ही योग का मोटा और लम्बा लौड़ा मेरे मुंह में घुस गया।

 
मुझे मेरे मुंह में से मेरी जिह्वा को ऐसे गोल रखना पड़ा जिससे योग की लण्ड को गलती से भी कहीं दाँतों की खरोच ना आये। मुझे दुबारा योग का करारा थप्पड़ नहीं खाना था। मैंने अपना जबड़ा जितना हो सके इतना खोला। मेरा जबड़ा भी दर्द करने लगा था। मुझे कभी भी लण्ड चूसना अच्छा नहीं लगता था। पता नहीं मर्दों को इसमें क्या मजा आता होगा? मैं अपने होंठ और जीभ योग के लण्ड के इर्द गिर्द घुमाती रही।

योग को मेरा यह कार्यकलाप या कारीगरी बहुत भाई क्यूंकि उसका पूरा बदन मचलने लगा। योग का पूर्व रस रिसने लगा और ना चाहते हुए भी मेरे गले में नीचे उतरने लगा। पहले तो मेरा मन किया की मैं उसे थूंक दूँ, पर कैसे? योग का इतना मोटा लण्ड मेरे मुंह में जो फँसा हुआ था। मुझे योग का रस निगलना ही पड़ा और मुझे बुरा नहीं लगा। पहले उसका स्वाद थोड़ा अजीब सा जरूर लगा पर निगलते हुए बाद में मुझे अच्छा लगने लगा। मैं सोचने लगी की जो कई पोर्न वीडियो में दिखाते हैं की लडकियां मर्दों के वीर्य को निगल कर खुश होती हैं शायद ठीक ही है। योग ने फिर मेरे मुंह को धीरे धीरे चोदना शुरू किया। साथ साथ में उसके दोनों हाथ मेरी फूली हुई निप्पलोँ को मसलने लगे। मेरे दोनों स्तन से योग के हाथ ऐसे खेलने लगे जैसे की वह रबर के बॉल हों। योग उत्तेजना में मेरे स्तनों को इतने जोर से दबाने लगे की मुझे इतना ज्यादा दर्द महसूस हुआ की मुंह में योग का लण्ड होते हुए भी मेरे मुंह से दबी हुई चीख़ निकल पड़ी। योग शायद समझा की मैं ज्यादा ही उत्तेजित हो रही थी। योग ने मुंह चोदने की रफ़्तार बढ़ाई तो मेरा जबड़ा दर्द करने लगा। मैने कभी मेरा मुंह इतना ज्यादा इतने अधिक समय के लिए नहीं खोला था। अगर मैं ज्यादा देर ऐसे ही रहती तो मुझे कुछ ना कुछ हो जाता।

मैंने धीरे से मेरा मुंह पीछे खींचा। योग का लण्ड बाहर निकल आया। मुझे योग के हाथोँ से और थप्पड़ नहीं खाने थे इस लिए मुझे कुछ न कुछ तो करना ही था। मैं एकदम बिस्तर पर लेट गयी और योग को पकड़ कर मेरे ऊपर सवार होने के लिए अपनी और खींचा और कहा, "अब मैं तुम्हारे लण्ड से चुदवाने के लिए और इंतजार नहीं कर सकती। प्लीज मुझे और मत तड़पाओ और अपना यह मोटा लण्ड जल्दी मेरी गीली चूत में डालो। मैं कितने समय से तुम्हारे लण्ड से चुदवाने के सपने देख रही हूँ।" योग मेरी बिनती सुनकर खुश नजर आये और मेरी और देख कर वही लोलुपता भरी हँसी मुझे उनके चेहरे पर दिखी। उनके पुरुषत्व पूर्ण अहम् को यह सुनकर शायद संतिष्टि हुई और मैं उस करारे थप्पड़ से बच गयी। पर अब मेरे लिए और समस्या थी। योग के घोड़े जैसे लण्ड को मुंह में लेना एक बात थी पर चूत में डलवाना कुछ और। मेरी चूत का छिद्र इस घोड़े के लण्ड को ले पायेगा या नहीं वह एक बड़ी ही विषम स्थिति थी। मेरा मुंह तो अभी उस दर्द से उभर नहीं पाया था और अब मेरी चूत पर वार होना था। मेर पुरे बदन में कम्पन फ़ैल रही थी। यह डर के मारे थी या फिर उत्तेजना के मारे यह कहना मुश्किल था। पर मुझे चुदवाना ना तो था ही। उस में कोई शक नहीं था। दर्द तो बर्दास्त करना ही पडेगा चाहे मेरी चूत फट क्यों नहीं जाय। मैं मानसिक रूप से तैयार हो रही थी। मुझे इससे भी बड़ा खतरा यह नज़र आ रहा था की कहीं योग मेरी गाँड़ मारने की कोशिश ना करे।

ऐसा हुआ तो तो मैं मर ही जाउंगी क्यूंकि मेरे पति ने एक बार कोशिश की थी जिसके कारण मेरी गाँड़ में से इतना खून निकला था की मेरे पति की तो जान हथेली में आ गयी थी। मैं सात दिन तक बीमार रही थी। तब से मेरे पति ने कभी भी मेरी गाँड़ मारने की बात सोची भी नहीं थी। योग मेरी टाँगें फैला कर बिच में आये और अपने लण्ड को मेरी पानी बहा रही चूत के छिद्र पर पोजीशन किया। मैंने चैन की साँस ली की चलो उस समय तो योग मेरी गाँड़ मरने की बात नहीं सोच रहे थे। योग ने मेरी जाँघें उठायी और अपने कंधे पर रखीं। उन्होंने मेरी और अपना वही बीभत्स हास्य करते हुए देखा। मेरी चूत में क्या हो रहा था उसका विवरण करना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है।

आज के दिन भी जब मैं मेरे मन की उस समय की हालत के बारे में सोचती हूँ तो मेरे जहन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती है। पर मुझे योग को देर कर के नाराज भी तो नहीं करना था। मैंने योग का लण्ड अपनी उँगलियों में पकड़ा और प्यार से मेरी चूत की पंखुड़ियों पर हलके से रगड़ा। फिर मैंने अपनी चूत की पंखुड़ियों को थोड़ा सा फैलाया और मेरी उंगली उसमें डाली। मैं अपने स्त्री रस का रिसना महसूस कर रही थी। मेरी चूत में से जैसे रस की धारा बाह रही थी। मेरे योगराज के लण्ड को मेरी चूत की सतह पर योग का लण्ड रगड़ ने से मैंने महसूस किया की वह चिकनाहट से लदा लद लिपटा हुआ था। मुझे थोड़ा सा ढाढस हुआ की शुरुआत में तो मुझे उतनी तकलीफ नहीं होगी। योग भयानक आँखें निकालकर मुझे ताक रहे थे और अपना फनफनाता लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ने की लिए मचल रहे थे। उन्होंने अपना लण्ड घुसेड़ते हुए मेरी और वही बीभत्स पूर्ण हास्य के साथ देखा और उनका वह सुनहरा दाँत एक बार फिर देख कर मैं डर के मारे काँप उठी। वह ऐसे देख रहे थे जैसे कोई विजेता जीती हुई ट्रॉफी के साथ पोज़ दे रहा हो। मैं योग का यह भयावह रूप और उसके ऊपर अपने इतने मोटे और लम्बे लंड को हवा में हिलते हुए देख कर मेरा क्या हाल हुआ होगा उसका अंदाज़ आप नहीं लगा सकते। पर फिर मुझे एक कहावत याद आयी की "अगर आपके साथ जबरदस्ती हो रही हो और आप इसके बारे में कुछ भी नहीं करने की स्थिति में हो तो उसे एजॉय कीजिये।

 
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