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मेरी गरम माँ की तड़पती जवानी -1
ये कहानी मेरे बचपन की है मेरे माँ और पापा काफी अच्छे घर से है पापा नौकरी करते है और माँ हाउसवाइफ है. जब में छोटा था तब से ही मेरी माँ एक गदराई हुए बदन वाली बेहद कामुक औरत है जिसकी सेक्स की भूख बहुत ज्यादा है. दोस्तों कहानी को शुरू करने से पहले में आप लोगों को अपनी माँ के बारे में बताता हूँ, मेरी माँ का नाम शालिनी है और उसकी उम्र 42 साल है और उसकी हाईट 5 फिट 2 इंच है.
वो बहुत गोरी है और दिखने में बिल्कुल ग़ज़ब है उसका सबसे बड़ा हथीयार उसके मस्त चूतड़ है जिसको देखकर हर कोई उसका दीवाना हो जाता है क्योंकि उसके चूतड़ बहुत बड़े और गोल है वो जब भी चलती है तो सबकी नज़र उसकी मटकती हुई गांड पर ही होती है जिसको देखकर हर कोई उसकी मटकती हुई गांड की तरफ आकर्षित हो जाता है, वो ज़्यादातर पटियाला सलवार पहनती है जिसको पहनने के बाद उन कपड़ो में उसकी गांड और भी मस्त दिखती है. वो जब भी सड़क पर चलती है तो सलवार उसकी गांड के बीच की दरार में फंस जाती है तो इसलिए सब उसे ही घूर घूरकर देखते रहते है.
दोस्तों मेरे पापा के दोस्त जब घर आते है तो मेरी माँ उन्हें देखकर रंडियो की तरह सजधजकर तैयार हो जाती है और वो लाल कलर के कपड़ो में बहुत सेक्सी माल लगती है. पापा भी माँ की जमकर चुदाई किया करते थे.
एक रात की बात है की मेरी अचानक नींद खुल गयी तब मैने देखा की माँ और पापा दोनो नंगे हो कर कुछ कर रहे है मैं उस वक़्त बहुत छोटा था कुछ ज़्यादा समझ में नही आया. मैने देखा की सामने वाले फ्लैट की खिड़की खुली थी और वहाँ एक औरत और मर्द दोनो मेरे माँ और पापा की तरह ही नंगे थे मेरे माँ और पापा दोनो की तरह ही कुछ कांड कर रहे थे. जब मैं थोड़ा बड़ा हो गया तो मुझे समझ मैं आ गया की सामने वाले फ्लैट में चुदाई का खेल चल रहा था जिसको देख कर मेरे पापा और माँ दोनो मजा ले रहे थे, सामने वाले भी जानते थे के मेरे माँ और पापा ये देख कर चुदाई का आनंद ले रहे हैं.
मैं यह बता दूं की मुझे बचपन से ही थोड़ा ज्ञान हो गया था चुदाई के खेल के बारे मैं क्यूंकी माँ और पापा.के रात के इस खेल को मैं कई बार देख चुका था और कुछ कुछ समझने लगा था साथ मैं उनके पास नंगी तस्वीरों का भी किताब.रहता था जो की मैं चुप के देख लेता था. मेरी माँ का बदन एकदम सुडोल था, भारी हुई चूचीयाँ, मस्त गोल गांड थी, फूली हुई चूत. में हल्की झाट रखती थी. बहुत बार मेरे सामने भी कपड़े बडलती तो पेटीकोट के बीच के छेद से झाँट दिख जाती थी. मैं किताबें देख कर मदहोश हो जाता था और गंदी बातों की तरफ ध्यान चला जाता था .
हमारा घर काफ़ी बड़ा था और नौकर नौकरानी भी.काम करते थे. हमारा एक नौकर था जिसका नाम संजय था आगे करीब 24/25 की होगी मैं दोपहर को बोर होता तो उसके पास चला जाता था.उसके पास अपना क्वॉर्टर था जिसमे वो दोपहर और रात को सोता था. एक दोपहर जब मैं उसके पास गया तो मैने देखा की वो अपना हाथ अपनी अंडरवियर के अंदर डाले हुए था और अपने लंड को रगड रहा था मुझे देखा तो बोला किसी से कहना मत के मैं क्या कर रहा हूँ. फिर उसने मुझे नंगी.तस्वीर वाली किताब दिखाई, नंगी औरतों की तस्वीर देख के वो अपना लंड गरम कर रहा था , जब मैने उससे.पूछा की ये किताब कहाँ से मिली तो उसने बोला की तुम्हारे माँ के कमरे से, उनके बिस्तर के पास पड़ी हुई मिली. उसने मुझे अपने पास बुलाया और तस्वीर दिखाने लगा,
मेरा लंड उस वक़्त ज्यादा खड़ा नही होता था तब उसने अपना लंड अंडरवियर से बाहर निकाला और मुझे दिखाया मुझे बहुत अच्छा लगा मैने उसके लंड को पकडा और बोला ये बहुत बडा है, तो उसने बोला हां बाबू तुमको अच्छा लगा क्या, मैने बोला हाँ संजय बहुत अच्छा है. संजय ने फिर मुझे अपने लंड पे बैठाया और मेरे गांड में लंड सटा दिया मुझे बहुत मजा आया मैं उसके लंड पे.बैठ के नंगी तस्वीर देखने लगा वो अपने गरम लंड को मेरे गांड मैं लगा के मुझसे बोला बाबू तेरी माँ भी नंगी ऐसी ही लगती है,.मैने पूछा "कैसी" तो उसने एक गदराई हुई औरत की नंगी तस्वीर दिखाई और कहा की ऐसी और फोटो में औरत की चूची छूने लगा मैने उससे.पूछा की तुमने कैसे देखा है माँ को नंगा तो संजय बोला की बाबू जब वो नहाती है तो मैं बाथरूम में देख लेता हूँ. मैं बहुत.उत्सुक हो गया और उससे पूछा की तुम्हे देख के कैसा लगता है संजय मुझसे बोला बाबू बहुत मजा आता है
चूची और चूत दोनो मस्त है और यह कह कर उसने मेरे हाथ में अपना लंड दे दिया मैने उसका लंड पकड़ लिया उसका लंड एकदम कड़क टाइट था चारों तरफ झाँट भरे हुए थे लंड साँप की तरह खड़ा फूँकार रहा था दोनो अंडे टाइट हो गये थे उसने मुझसे कहा बाबू इसको सहलाओ मैं मस्त.हो कर उसका लंड सहलाने लगा, उसने मुझे चूम लिया और बोला बाबू तुम्हारी माँ को देख कर मेरा लंड एकदम कड़ा हो जाता है मन करता है.की खूब चोदू तेरी माँ को. मैने संजय से पूछा की चोदना क्या होता है तो उसने मुझे कहा की लंड जब गरम हो कर चूत मैं जाता है तो उसको चोदना कहते है और फिर एक तस्वीर दिखा कर समझाया. मैं मस्ती मैं उसका लंड सहला रहा था उसका 8 इंच का लंबा और काला था. उसने मुझसे कहा की बाबू लॉलिपोप चूसे हो की नही, मैने कहा हाँ चूसा हूँ तो संजय ने कहा मेरे लंड भी लॉलिपोप ही की तरह एक बार चूसोगे तो बहुत अच्छा लगेगा. मैं उसके लंड को अपने मूह में लिया तो बहुत अजीब सा लगा एक अजीब सी स्मेल थी एक अजीब सा टेस्ट.
मैने ज़्यादा नही चूसा उसके लंड को फिर उसने मुझसे कहा की बाबू तेरी माँ को खूब चुसवाउगा अपना लंड बहुत मस्त हो जाएगी मेरा.लंड चूस के. मैं उसके लंड को सहलाता रहा और वो मेरी माँ के बारे मैं गन्दी गन्दी बाते बोलता रहा. 10 मिनट तक सहलाने के बाद अचानक उसने मेरा.हाथ पकड़ लिया और लंड से गाढ़ा सफ़ेद माल निकाने लगा . कुछ मेरे हाथ मैं गिरा कुछ ज़मीन पर .. झड़ने के बाद उसने मुझसे कहा की मुन्ना किसी से कुछ कहना मत, मैने कहा की नही कहूँगा और वहाँ से चला आया.संजय के साथ इस खेल खेलने आईं मुझे बहुत मजा आने लगा,
रोज़ दोपहर मैं उसके कमरे मैं चला जाता वहाँ वो लूँगी पहना हुआ मिलता , गंदी किताबों के साथ कुछ फोटो वाली कुछ गंदी कहानियों वाली जिसमे सिर्फ़ चुदाई की कहानी होती . वो मुझे अपने पास बैठा लेता और मेरे हाथ मैं अपना लंड दे कर कहानियाँ पढ़ के मुझे सुनता , मैं उसके लंड को सहलाता रहता .. वो मुझसे गंदी बातें करता मेरी माँ के बारे मैं कहता मुन्ना तेरी माँ की चूचीयाँ मस्त खरबूज की तरह हैं 36 साइज़ के होंगे और बोलता की माँ की चूत मैं बाल भरे हुए हैं पेटिकोट के नीचे से खूब सहलाऊगा उसके चूत के बाल चूत के छेद मैं उंगली करूँगा फिर उसके पेटीकोट उठा के चूत चुसूंगा मैं मस्त हो जाता और जोश के साथ उसके लंड को सहलाता और चूसता था. कभी वो मुझे अपने लंड पे बैठा लेता और मेरी लुल्ली को मसलता अपना लंड मेरे गांड मैं सटा देता , मुझे खूब मजा आता ,
ये कहानी मेरे बचपन की है मेरे माँ और पापा काफी अच्छे घर से है पापा नौकरी करते है और माँ हाउसवाइफ है. जब में छोटा था तब से ही मेरी माँ एक गदराई हुए बदन वाली बेहद कामुक औरत है जिसकी सेक्स की भूख बहुत ज्यादा है. दोस्तों कहानी को शुरू करने से पहले में आप लोगों को अपनी माँ के बारे में बताता हूँ, मेरी माँ का नाम शालिनी है और उसकी उम्र 42 साल है और उसकी हाईट 5 फिट 2 इंच है.
वो बहुत गोरी है और दिखने में बिल्कुल ग़ज़ब है उसका सबसे बड़ा हथीयार उसके मस्त चूतड़ है जिसको देखकर हर कोई उसका दीवाना हो जाता है क्योंकि उसके चूतड़ बहुत बड़े और गोल है वो जब भी चलती है तो सबकी नज़र उसकी मटकती हुई गांड पर ही होती है जिसको देखकर हर कोई उसकी मटकती हुई गांड की तरफ आकर्षित हो जाता है, वो ज़्यादातर पटियाला सलवार पहनती है जिसको पहनने के बाद उन कपड़ो में उसकी गांड और भी मस्त दिखती है. वो जब भी सड़क पर चलती है तो सलवार उसकी गांड के बीच की दरार में फंस जाती है तो इसलिए सब उसे ही घूर घूरकर देखते रहते है.
दोस्तों मेरे पापा के दोस्त जब घर आते है तो मेरी माँ उन्हें देखकर रंडियो की तरह सजधजकर तैयार हो जाती है और वो लाल कलर के कपड़ो में बहुत सेक्सी माल लगती है. पापा भी माँ की जमकर चुदाई किया करते थे.
एक रात की बात है की मेरी अचानक नींद खुल गयी तब मैने देखा की माँ और पापा दोनो नंगे हो कर कुछ कर रहे है मैं उस वक़्त बहुत छोटा था कुछ ज़्यादा समझ में नही आया. मैने देखा की सामने वाले फ्लैट की खिड़की खुली थी और वहाँ एक औरत और मर्द दोनो मेरे माँ और पापा की तरह ही नंगे थे मेरे माँ और पापा दोनो की तरह ही कुछ कांड कर रहे थे. जब मैं थोड़ा बड़ा हो गया तो मुझे समझ मैं आ गया की सामने वाले फ्लैट में चुदाई का खेल चल रहा था जिसको देख कर मेरे पापा और माँ दोनो मजा ले रहे थे, सामने वाले भी जानते थे के मेरे माँ और पापा ये देख कर चुदाई का आनंद ले रहे हैं.
मैं यह बता दूं की मुझे बचपन से ही थोड़ा ज्ञान हो गया था चुदाई के खेल के बारे मैं क्यूंकी माँ और पापा.के रात के इस खेल को मैं कई बार देख चुका था और कुछ कुछ समझने लगा था साथ मैं उनके पास नंगी तस्वीरों का भी किताब.रहता था जो की मैं चुप के देख लेता था. मेरी माँ का बदन एकदम सुडोल था, भारी हुई चूचीयाँ, मस्त गोल गांड थी, फूली हुई चूत. में हल्की झाट रखती थी. बहुत बार मेरे सामने भी कपड़े बडलती तो पेटीकोट के बीच के छेद से झाँट दिख जाती थी. मैं किताबें देख कर मदहोश हो जाता था और गंदी बातों की तरफ ध्यान चला जाता था .
हमारा घर काफ़ी बड़ा था और नौकर नौकरानी भी.काम करते थे. हमारा एक नौकर था जिसका नाम संजय था आगे करीब 24/25 की होगी मैं दोपहर को बोर होता तो उसके पास चला जाता था.उसके पास अपना क्वॉर्टर था जिसमे वो दोपहर और रात को सोता था. एक दोपहर जब मैं उसके पास गया तो मैने देखा की वो अपना हाथ अपनी अंडरवियर के अंदर डाले हुए था और अपने लंड को रगड रहा था मुझे देखा तो बोला किसी से कहना मत के मैं क्या कर रहा हूँ. फिर उसने मुझे नंगी.तस्वीर वाली किताब दिखाई, नंगी औरतों की तस्वीर देख के वो अपना लंड गरम कर रहा था , जब मैने उससे.पूछा की ये किताब कहाँ से मिली तो उसने बोला की तुम्हारे माँ के कमरे से, उनके बिस्तर के पास पड़ी हुई मिली. उसने मुझे अपने पास बुलाया और तस्वीर दिखाने लगा,
मेरा लंड उस वक़्त ज्यादा खड़ा नही होता था तब उसने अपना लंड अंडरवियर से बाहर निकाला और मुझे दिखाया मुझे बहुत अच्छा लगा मैने उसके लंड को पकडा और बोला ये बहुत बडा है, तो उसने बोला हां बाबू तुमको अच्छा लगा क्या, मैने बोला हाँ संजय बहुत अच्छा है. संजय ने फिर मुझे अपने लंड पे बैठाया और मेरे गांड में लंड सटा दिया मुझे बहुत मजा आया मैं उसके लंड पे.बैठ के नंगी तस्वीर देखने लगा वो अपने गरम लंड को मेरे गांड मैं लगा के मुझसे बोला बाबू तेरी माँ भी नंगी ऐसी ही लगती है,.मैने पूछा "कैसी" तो उसने एक गदराई हुई औरत की नंगी तस्वीर दिखाई और कहा की ऐसी और फोटो में औरत की चूची छूने लगा मैने उससे.पूछा की तुमने कैसे देखा है माँ को नंगा तो संजय बोला की बाबू जब वो नहाती है तो मैं बाथरूम में देख लेता हूँ. मैं बहुत.उत्सुक हो गया और उससे पूछा की तुम्हे देख के कैसा लगता है संजय मुझसे बोला बाबू बहुत मजा आता है
चूची और चूत दोनो मस्त है और यह कह कर उसने मेरे हाथ में अपना लंड दे दिया मैने उसका लंड पकड़ लिया उसका लंड एकदम कड़क टाइट था चारों तरफ झाँट भरे हुए थे लंड साँप की तरह खड़ा फूँकार रहा था दोनो अंडे टाइट हो गये थे उसने मुझसे कहा बाबू इसको सहलाओ मैं मस्त.हो कर उसका लंड सहलाने लगा, उसने मुझे चूम लिया और बोला बाबू तुम्हारी माँ को देख कर मेरा लंड एकदम कड़ा हो जाता है मन करता है.की खूब चोदू तेरी माँ को. मैने संजय से पूछा की चोदना क्या होता है तो उसने मुझे कहा की लंड जब गरम हो कर चूत मैं जाता है तो उसको चोदना कहते है और फिर एक तस्वीर दिखा कर समझाया. मैं मस्ती मैं उसका लंड सहला रहा था उसका 8 इंच का लंबा और काला था. उसने मुझसे कहा की बाबू लॉलिपोप चूसे हो की नही, मैने कहा हाँ चूसा हूँ तो संजय ने कहा मेरे लंड भी लॉलिपोप ही की तरह एक बार चूसोगे तो बहुत अच्छा लगेगा. मैं उसके लंड को अपने मूह में लिया तो बहुत अजीब सा लगा एक अजीब सी स्मेल थी एक अजीब सा टेस्ट.
मैने ज़्यादा नही चूसा उसके लंड को फिर उसने मुझसे कहा की बाबू तेरी माँ को खूब चुसवाउगा अपना लंड बहुत मस्त हो जाएगी मेरा.लंड चूस के. मैं उसके लंड को सहलाता रहा और वो मेरी माँ के बारे मैं गन्दी गन्दी बाते बोलता रहा. 10 मिनट तक सहलाने के बाद अचानक उसने मेरा.हाथ पकड़ लिया और लंड से गाढ़ा सफ़ेद माल निकाने लगा . कुछ मेरे हाथ मैं गिरा कुछ ज़मीन पर .. झड़ने के बाद उसने मुझसे कहा की मुन्ना किसी से कुछ कहना मत, मैने कहा की नही कहूँगा और वहाँ से चला आया.संजय के साथ इस खेल खेलने आईं मुझे बहुत मजा आने लगा,
रोज़ दोपहर मैं उसके कमरे मैं चला जाता वहाँ वो लूँगी पहना हुआ मिलता , गंदी किताबों के साथ कुछ फोटो वाली कुछ गंदी कहानियों वाली जिसमे सिर्फ़ चुदाई की कहानी होती . वो मुझे अपने पास बैठा लेता और मेरे हाथ मैं अपना लंड दे कर कहानियाँ पढ़ के मुझे सुनता , मैं उसके लंड को सहलाता रहता .. वो मुझसे गंदी बातें करता मेरी माँ के बारे मैं कहता मुन्ना तेरी माँ की चूचीयाँ मस्त खरबूज की तरह हैं 36 साइज़ के होंगे और बोलता की माँ की चूत मैं बाल भरे हुए हैं पेटिकोट के नीचे से खूब सहलाऊगा उसके चूत के बाल चूत के छेद मैं उंगली करूँगा फिर उसके पेटीकोट उठा के चूत चुसूंगा मैं मस्त हो जाता और जोश के साथ उसके लंड को सहलाता और चूसता था. कभी वो मुझे अपने लंड पे बैठा लेता और मेरी लुल्ली को मसलता अपना लंड मेरे गांड मैं सटा देता , मुझे खूब मजा आता ,