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मेरी चालू बीवी complete

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अपडेट 29

मैं फिर से रसोई में चला गया…मधु खाना लगा रही थी… और सलोनी झुकी हुई कुछ कर रही थी…मेरी नजर सीधे उसके नंगे चूतड़ पर ही जाती है…उसके गोल मटोल… दूध जैसे चूतड़… खिले हुए मेरे सामने थे..केवल चूतड़ ही नहीं… उसके इस अवस्था में झुके होने से उसके चूतड़ों के दोनों भाग से… सलोनी की छोटी सी कोमल चूत भी झाँक रही थी…मैं अपने हाथ से उसके चूतड़ों को सहलाते हुए सीधे अपनी दो उंगलियाँ उसकी सुरमई चूत के छेद पर रख देता हूँ…मेरी उंगली को एक अलग सा अहसास होता है…उँगलियों पर कुछ गीलापन… जो शायद उसके चूत का रस था… पर कुछ चिपचिपा और सूखा सा रस भी लगता है…मेरे दिमाग में फितूर तो जाग ही गया था…क्या यह सूखा रस अंकल का था… क्या पता अंकल ने अपना लण्ड सलोनी की चूत के ऊपर भी घिसा हो…और उनका कुछ प्रीकम यहाँ लग गया हो…सलोनी उस समय ऐसे ही तो झुकी थी… और जहाँ तक मैं समझता हूँ… इस अवस्था में तो जरूर अंकल का लण्ड… सलोनी के चूत के छेद पर ही दस्तक दे रहा होगा…पता नहीं मैं क्या-क्या सोच रहा था… और ये सब सोचते हुए… ये सुसरा मेरा लण्ड भी खड़ा हो रहा था…क्या पता… अंकल का लण्ड ने सलोनी की चूत के ऊपर ही ऊपर घिसा था.. या कही कुछ अंदर भी किया हो…तभी सलोनी एकदम से खड़ी हो जाती है… और मधु की ओर देखते हुए- …क्या करते हो??मैं बिना शरमाये और ना सुनते हुए- …क्या हुआ जान?? यह कच्छी कब निकाल दी?सलोनी पहले तो कुछ चुप रहती है… फिर… खुद ही- …अरे नहीं… मैं तो कपड़े बदलने ही गई थी… कि तभी अंकल आ गए…मैं हँसते हुए- …हा हा… तो क्या जान… कहीं अंकल ने तो नहीं देख लिया कुछ… हा हा…मेरी बात पर एकदम से मधु भी हंस पड़ती है…सलोनी उसको गुस्से से देखती है- तू क्यों हंस रही है… और हटो अब आप… मैं आती हूँ… आप बैठो… पहले खाना खा लेते हैं…और बिना कुछ कहे वो बैडरूम में चली जाती है…हम दोनों को ही उसकी इस नखरीली अदा पर हंसी आ रही थी…मैंने देखा मधु मेरे बरमुडे को ध्यान से देख रही है…

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 30

मैंने देखा मधु मेरे बरमुडे को ध्यान से देख रही है…बरमूडा लण्ड वाले भाग से काफी उठ गया था…क्योंकि मेरा लण्ड कुछ सख्त हो गया था…मैं मधु के पास वाली कुर्सी पर बैठ गया और अपने हाथ को उसके छोटे मुलायम चूतड़ों पर रख उसको छेड़ा- तू क्यों मजे ले रही है… क्यों इतनी जोर से हंस रही थी?

मधु कसमसाते हुए- नहीं भैया… वो तो… क्या कर रहे हो?उसन मेरे आगे से निकलने की कोशिश की तो मैंने उसको कसकर पकड़ झटका दिया…वो गड़बड़ाकर… मेरी गोद में बैठ सी गई और… उसके चूतड़ ठीक मेरे लण्ड पर थे…उसके कसमसाने से उसके चूतड़ मेरे खड़े हो चुके लण्ड को बहुत मजा दे रहे थे…

मधु- क्या कर रहे हो भैया… छोड़ो ना…मैं उसको गुदगुदी के बहाने उसके पेट और छोटी छोटी चूचियों को नापते हुए…

मैं- पहले यह बता कि जब अंकल आये तो सलोनी क्या कर रही थी?मधु कसमसा तो रही थी… मगर मेरी गोदी से हटने का कोई ज्यादा प्रयास नहीं कर रही थी… लगता था उसको भी मजा आ रहा था…

मधु- ओह… ह्ह्ह्ह्ह्ह वववव व्व्वो भैया… मुझे… नहीईईईई… हाँ वो अपने कपड़े ही बदल रही थी…

मैं- अरे यह बता कि क्या कर रही थी… कपड़े तो अभी भी पहने ही हैं ना…

मधु- आआररर रे… वो अपनी कच्छी ही निकाल रही थी…

मैं – अच्छा उसने खुद ही निकाली ना… कहीं अंकल ने तो नहीं??

मधु- ह्ह्ह्ह्ह्ह नहीईइइइइ ना भाभी ने ही… हाँ अंकल ने उनको पीछे से नंगी देख लिया था…

मैं- ओह अच्छा… तभी… वो…

मधु- हाँ… अंकल ने उनको पीछे से पकड़ लिया था…उसकी बातें सुन कर मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैंने गुदगुदी करते करते अपना हाथ उसकी सफ़ेद नेकर के अंदर घुसा दिया…मधु मेरी गोद में बैठी बुरी तरह से मचल रही थी, वो पूरी तरह से मेरे से चिपकी थी… उसके छोटे-छोटे चूतड़ मेरे तने हुए लण्ड को बेहाल किये थे…मधु एक परफेक्ट डांसर की तरह अपनी कमर को हिला रही थी और अपने चूतड़ के हर भाग को मेरे लण्ड से रगड़ रही थी…इधर मेरे हाथ उसको पकड़ने एवं गुदगुदी के बहाने उसके पूरे चिकने शरीर को टटोल रहे थे…उसने केवल एक सफ़ेद कॉटन का टॉप और नेकर ही पहना था…जिसके अंदर न तो कोई समीज या अन्य कपड़ा था और ना ही नीचे कच्छी थी…मेरे हाथों को उसका चिकना शरीर लगभग नंगा ही प्रतीत हो रहा था…मेरे हाथ उसके टॉप के अंदर नंगे पेट एवं कभी कभी उसकी छोटी सी बिल्कुल टाइट चूची तक भी पहुँच जाते थे…तो कभी उसकी नंगी टांगों, जांघों को रगड़ते हुए उसकी छोटी मुनिया सी चूत को भी रगड़ देते थे…मधु पूरी मस्त हो गई थी… और बेहद गरम आवाजें निकाल रही थी- आह्ह्ह्ह्हाआ इइइइइइ ऊ उउउउउउउउउ क्या कर रहे हो भैयाआहाए…मैं बिना कुछ बोले केवल उसको बुरी तरह से छेड़ते हुए खुद भी मजे ले रहा था…

मैं- अच्छा तो तेरी भाभी के नंगे चूतड़ों से… पीछे से चिपक कर अंकल ने क्या किया… बता नहीं तो…

मधु- ओह भैया… आपने भी तो देखा था ना… छोड़ दो ना आह्ह्ह्ह्हाआआआ इइइइइइ

मैं- अच्छा छोड़ दू… क्यों छोड़ू????? ले अभी… तू बता ना ..क्या तूने अंकल का देखा था ..???

मधु- क्या देखा था… ओह्ह्ह्ह नहीईईईईईईईमैं- अच्छा नहीं देखा… झूट…

मधु- अरे हाँ… पर क्याआआआ??

मैं- उनका खड़ा हुआ लण्ड… मैं उससे जल्द से जल्द खुलना चाह रहा था…

मधु- धत्त्त्त् भैया… चलो अब छोड़ो… नहीं तो चिल्ला कर भाभी को बुला लुंगी…

मैं- अच्छा तो बुला ना…मैंने उसके नेकर पर हाथ रख अपनी उंगलियाँ नेकर के अंदर डालने की कोशिश की..नेकर सलोनी का था… इसलिए शायद उसकी कमर में बहुत ढीला होगा…मैंने देखा उसने एक तरफ पिन लगाकर उसको अपनी कमर पर टाइट किया था…वो इतना टाइट हो गया था कि मेरी उँगलियाँ भी अंदर नहीं गई…मधु ने मेरा हाथ पकड़ लिया- ..नहींईईईई भैया… मैं भाभी को बुलाती हूँ… आप उन्ही से पूछ लेना… उन्होंने तो देखा था… उन अंकल का…मधु अब वाकयी खुल रही थी…उसकी बात सुन मेरी हिम्मत बढ़ गई…
 


अपडेट 31

मैंने उसके हाथ को छुड़ाकर एक झटका दिया…उसके नेकर की पिन खुल गई… और नेकर आगे से पूरा ढीला हो गया…और मेरी सभी उँगलियों ने मधु के शरीर के सबसे कोमल भाग पर अपना कब्ज़ा कर लिया…मधु ने एक जोर से हिचकी ली- …आआउउच नहीईईईईईईईईमैं बयां नहीं कर सकता कि उसकी चूत कितनी मुलायम थी… मुझे लगा जैसे मैं मक्खन की टिक्की में उँगलियाँ घुमा रहा हूँ…मैं यह देख और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि इतनी कम उम्र में भी उसकी चूत से रस निकल रहा था…इसका मतलब मधु अब जवान हो चुकी थी… और मेरा लण्ड उस मक्खन में जाने को फुफकार रहा था…तभी सलोनी की आवाज आई… वो रसोई में प्रवेश कर रही थी…मधु मेरी गोद में थी… मेरा बायां हाथ उसके छाती से लिपटा था… और दायाँ उसके नेकर के अंदर उसकी चूत पर था ..कुछ देर तक तो हम दोनों भौंचक्के थे…मैंने तुरंत मधु को गोद से हटा दिया…मगर सलोनी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे… वो सामान्य रूप से आई और सामान देखने लगी…

मधु- वो भाभी… भैया परेशान कर रहे हैं…

सलोनी- अच्छा और तूने ही कुछ किया होगा…

मधु- मैं क्या करूँ भाभी??

सलोनी- अच्छा परेशान मत हो… मैंने तेरे घर फोन कर दिया है… आज यही रुक जाना… ओके

मधु- ठीक है भाभी…

सलोनी- चल पहले खाना खा ले… फिर कपड़े बदल लेना…मधु जैसे ही उठकर आगे बड़ी… उसका नेकर उसके पैरों पर गिर गया…लगता है नेकर बहुत ढीला था… मैं तो थोड़ा सा डर गया पर…सलोनी जोर से हँसते हुए- …हा हा हा हा हा हा.. तुझसे जब नेकर नहीं संभलती… तो मत पहन ..मधु ने शरमाते हुए नेकर ऊपर कर अपने हाथों से पकड़ लिया…इतनी देर में मेरी नजरों ने एक बार फिर ..उसके चिकने चूतड़ और छेद का मनोरम दर्शन किया…

सलोनी- चल जा मैंने अपनी एक समीज अंदर रखी है .. इसको निकाल… और वो पहन ले…मधु जल्दी से अंदर चली गई…अब मैंने सलोनी को ध्यान से देखा… उसने भी अपनी शॉर्ट वाली पिंक झीनी नाइटी पहनी थी…उसका पूरा नग्न शरीर दिख रहा था… उसने अंदर कुछ नहीं पहना था…तभी मधु रसोई में एक पतली सफ़ेद समीज पहने आई जो उसकी जांघों तक ही थी…

मधु- भाभी बस यही…?

सलोनी- और क्या रात को सोना ही तो है… क्या बीस कपड़े पहनेगी…मधु केवल मुस्कुरा देती है…मधु के साथ इतनी छेड़खानी होने के बाद… वो अब काफी खुल चुकी थी… उसका चेहरा बिल्कुल लाल था और अब वो शरमाने की बजाए मजे ही ले रही थी…उसने सलोनी की जो सफ़ेद रंग की समीज पहनी थी उसमे कंधों पर पतली रेशमी लैस थी… जो उसकी छाती पर बहुत नीचे थी…उसका सीना काफी हद तक नंगा था…मधु के जरा से झुकने से उसकी पूरी नंगी चूचियाँ साफ़ साफ़ दिख रही थी… वो बार-बार उठकर काम कर रही थी… तभी उसके समीज के दोनों साइड के कट से, जो उसके कमर तक थे, समीज के हटने से उसकी नंगी जांघें… तो कभी उसके चूतड़ तक झलक दिखा जाते थे…मेरा लण्ड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था, मधु की मस्ती देख वो कुछ ज्यादा ही मस्ता रहा था..इधर सलोनी ने भी कमाल कर रखा था… वो कोई मौका… रोमांटिक होने या बनाने का नहीं छोड़ रही थी…देखा जाए तो… इस समय सलोनी… अपनी इस छोटी सी पारदर्शी… नाइटी में… लगभग नंगी ही दिख रही थी…मगर मेरे लण्ड को उससे कोई मतलब नहीं था… और ना वो सलोनी की नग्नता देख… इतना फ़ुफ़कारता था…इस समय मधु के नंगे अंग, जो अभी विकसित भी नहीं हुए थे, उनको देख लण्ड ने बवाल मचा रखा था…मेरी समझ में अच्छी तरह आ गया था कि यह लण्ड भी उस तेज तर्रार शिकारी कुत्ते की तरह है जो अपने जानकार लोगों को देख शांत रहता है…
 


अपडेट 32

पर जहाँ कोई अजनबी देखा नहीं कि बुरी तरह उग्र हो जाता है…मधु को देख मेरे लण्ड का भी वही हाल था…और यह भी समझ आ गया था… कि सलोनी के नंगे अंगों को देख अरविन्द अंकल, पारस या दूसरे लोगों का क्या हाल होता होगा…तभी मेरे दिमाग में शाम वाली बात आ जाती है…

मैं- अरे जान… शाम क्या कह रही थी??सलोनी- किस बारे में?

मैं- वो जब मैं मधु को नहला रहा था… तब कि तो मत शरमा… अब क्यों ऐसा कर रही है… क्या कोई पहले भी इसको नहला चुका है..या नंगी देख चुका है?अपनी बात सुनते ही तुरंत मधु ने प्रतिरोध किया- क्या भैया… आप फिर?

सलोनी- तू चुप कर खाना खा… तुझसे किसी ने कुछ पूछा क्या ???

सलोनी की डाँट से वो कुछ डर गई…और ‘जी भाभी’ बोल नजरें नीचे कर खाने लगी…

सलोनी- जानू और कोई नहीं इसका बाप ही… वो शराबी… जब देखो इसको परेशान करता रहता है…

मैं- क्याआआ??? क्या कह रही है तू… क्या ये सच है… इसके पापा ही… क्या करते हैं वो?मधु एक बार फिर- रहने दो ना भाभी…

सलोनी- अरे इसकी कुछ समय पहले तक बिस्तर पर सूसू निकल जाती थी… ना फिर…

मधु- छीइइइइइइ भाभी नहीं ना…

सलोनी- अच्छा वो तो एक बीमारी ही है ना… इसमें शरमा क्यों रही है…

मधु- पर वो तो बहुत पहले की बात है ना… अब क्यों…मैं दोनों की बातें रस लेकर सुन रहा था…

मैं- हाँ तो फिर क्या हुआ???

सलोनी- तो इसके पापा ही रोज इसके कपड़े बदल… इसको साफ़ करते थे…

मैं- और इसकी माँ… वो नहीं…

सलोनी- वही तो… वो सोती रहती थी… और इसके पापा को ही बोलती थी… ये बेचारी डर के मारे कुछ नहीं बोलती थी…

मैं- वो तो है…तो इसमें गलत क्या है… हर बाप… यही करेगा…

सलोनी- अरे आगे तो सुनो… वो इसकी बिस्तर के साथ साथ… इसके कपड़े… कच्छी सब निकाल पूरा नंगा कर देते थे… और इसका पूरा शरीर साफ़ करते थे…

मैं- हाँ तो क्या हुआ… गीले हो जाते होंगे ना…

सलोनी- अरे नहीं… इसका कोई पूरा थोड़ी निकलता था… केवल डर की बीमारी थी… केवल जरा सा निकल जाता था…

मैं- ओह… फिर वो क्या करते थे??

सलोनी- वही तो… इसके पूरे शरीर को बहाने से छूते… रगड़ते थे…

मधु- बस भाभी ना…

सलोनी- उस समय बस नहीं बोलती थी…

मैं- और क्या करते थे वो…

सलोनी- इसके नंगे बदन से चिपक कर लेट जाते थे…इसको सोए हुआ जानकर… इसके निप्पल को चूसते हैं… इसके होंटों को भी चूमते हैं… और अभी उस दिन तो बता रही थी… कि इसकी मुनिया को भी चाटा था… क्यों मधु…???मैं सलोनी की बात सुन… आश्चर्यचकित था…क्या एक बाप आप ही बेटी के साथ…?

मधु सर झुकाये बैठी थी… उसने कोई जवाब नहीं दिया…

मैं- तो क्या अब भी इसको सूसू निकल जाती है…मधु तुरंत ना में सर हिलाती है- …नहीं भैया…

सलोनी- अरे नहीं… अब तो यह बिल्कुल ठीक है… मगर इसका बाप अब भी…

मैं- क्याआआआ?

सलोनी- हाँ… जब पीकर आता है… तो इसी के बिस्तर पर आकर… इसको डराता है… कि दिखा आज तो नहीं मूता तूने… और इसको नंगा कर परेशान करता है…

मैं- साला… शराबी… हरामी…

सलोनी- अरे आप क्यों गाली दे रहे हो…

मधु- भाभी आप बहुत गन्दी हो… मैं भी भैया को आपकी बात बता दूंगी हाँ…मधु कुछ ज्यादा ही बुरा मान रही थी मगर इसमें मेरा फ़ायदा ही था… लगता है उसके पास कोई सलोनी के राज हैं… जो मैं उससे

जान सकता हूँ…

मैं- वो क्या मधु???

सलोनी- अच्छा मेरी कौन सी बात है… हा हा… मैं कोई तेरी तरह बिस्तर पर सूसू नहीं करती…

मधु- धत्त्त भाभी… अब तो मैं बता दूंगी…

सलोनी- तो बता दे ना… मैं कुछ नहीं छुपाती अपने जानू से हाँ…

मधु- अच्छा वो जो डॉक्टर अंकल…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 33

अचानक मेरी ज़िंदगी ने एक रोमांचक मोड़ ले लिया था… जो अब तक मैं जी रहा था.. वो केवल सूखी नदी की तरह था, अब ऐसा लग रहा था जैसे ज़िंदगी में रस ही रस आ गया हो…अब तक किताबों या लोगों से सुने सभी सामाजिक विचार मुझे बेकार लगने लगे थे… इज्जत, सम्मान, मर्यादा सब आपके दिल में ही अच्छे लगते हैं… दिखावट करने से ये आपको जंजीरों में जकड़ लेते हैं… मैं अगर इन सब में पड़ता… तो अब तक सलोनी से लड़ झगड़ कर… हम दोनों की जिंदगी नरक बना लेता…मगर मेरी सोच अलग है…लण्ड किसी की भी चूत में जाए.. इससे ना तो लण्ड को फर्क पड़ता है.. और ना ही चूत का ही कुछ नुकसान होता है…परन्तु बदलाव आने से… एक अलग मजा आता है और जवानी बरकरार रहती है…मैं देख रहा था… कि सलोनी के चेहरे पर एक अनोखी चमक बरकरार रहती है… यह सब उसके चंचल जीवन के कारण ही था…हम तीनों को ही खाना खाते हुए मस्ती करने में बहुत मजा आ रहा था…मैंने सलोनी को चुप कराते हुए कहा- तू चुप कर जान… मुझे भी तो पता चले ..कि मेरे पीछे उस साले डॉक्टर ने क्या किया?? हा हा हा हा..मैं जोर से हंसा भी जिससे माहौल हल्का ही बना रहे..

मधु- हाँ भैया… मेरे को चिड़ा रही हैं भाभी… जब आप यहाँ नहीं थे तब… ना…मैंने मधु को अपने पास करके उसके गाल को चूमते हुए पूछा- पुच च च च… बता बेटा.. क्या किया डॉक्टर ने…सलोनी अपने चेहरे को नीचे कर खाते हुए ही आँखें ऊपर को चढ़ा हम दोनों को घूर रही थी… उसके चेहरे पर कई भाव आ जा रहे थे…उसके चेहरे के भाव देख मुझे लग रहा था कि जरूर कुछ अलग राज़ खुलने वाला है… क्या डॉक्टर ने मेरे पीछे सलोनी की चुदाई की थी… वो भी मधु के सामने???क्या इसीलिए सलोनी मधु को मेरे इतना पास ला रही है…मैंने अपने सीधे हाथ से मधु की नंगी ..चिकनी जांघें सहलाते हुए उसको बढ़ावा दिया…

मधु- वो भैया.. भाभी की तबियत खराब नहीं हो गई थी… जब… तब आपने ही तो भेजा था ना डॉक्टर को… भाभी बिल्कुल चल ही नहीं पा रही थी.. तब ना ..उन डॉक्टर ने भाभी को नंगा करके… सुई लगाईं थी…

मैं- क्याआआआआ…

सलोनी- एएएएए मारूंगी.. क्या बकवास कर रही है…

मैं- क्यों मारेगी… कौन सी सुई लगाई थी.. हा हा हा हामैंने बिल्कुल ऐसे जाहिर किया ..जैसे कुछ हुआ ही नहीं… मेरे इस बर्ताव से माहौल सामान्य बना रहा..सलोनी जो कुछ बेचैन हो गई थी.. अब मजे ले रही थी- …अरे नहीं जानू… मैं तो बिल्कुल बेजान ही हो गई थी उस दिन… मेरा ब्लड प्रेशर बहुत कम हो गया था…

मैं- हाँ मुझे पता है जान… सॉरी यार उस समय मैं तुम्हारे पास नहीं था..

सलोनी- ओह थैंक्स माय लव..

मैं- फिर डॉक्टर ने कहाँ इंजेक्शन लगाया?सलोनी- अरे उस दिन मैंने पीला वाला लॉन्ग गाउन पहना था ना… बस… उसी कारण…

मैं- अरे तो क्या हुआ जान… डॉक्टर जब चूतड़ों पर इंजेक्शन ठोंकता है… तो उसके सामने तो सभी को नंगा होना ही पड़ता है…

मधु- हाँ भैया… मगर भाभी ने तो उस दिन ..कच्छी भी नहीं पहनी थी… डॉक्टर ने तो भाभी के चूतड़ और सुसू पूरी नंगी देखी थी.. हे हे..मधु को कुछ ज्यादा ही मस्ती चढ़ गई थी… मगर अब हम दोनों ही उसकी बातों से मजा ले रहे थे ..

सलोनी- इसे देखो जरा ..कितनी चुगली कर रही है..? अरे जानू वो गाउन ..केवल नीचे से ऊपर ही हो सकता है ना…मुझे तो पता ही नहीं था कि वो इंजेक्शन लगाएंगे… वरना मैं कोई पजामा जैसा कपड़ा पहन लेती..

मैं- अरे तो क्या हुआ जान… क्या फरक पड़ता है..

सलोनी- मुझे तो बाद में समझ आया… फिर बहुत शर्म भी आई.. पहली बार मुझे लगा कि कच्छी पहननी चाहिए थी !पर तब तो उन्होंने इंजेक्शन लगा गाउन ठीक भी कर दिया था…

मधु- नहीं भाभी ..बहुत देर तक उन्होंने आपके चूतड़ सहलाये थे.. मैंने देखा था…मधु ने तो जैसे पूरा मोर्चा संभाल लिया था… उसको लगा आज सलोनी कि डांट पड़वा कर ही रहेगी…

सलोनी- ओह… नहीं जान.. मुझे कोई होश नहीं था.. मुझे नहीं पता यह क्या बक रही है…

 
अपडेट 34

मैं- हा हा हा हा… मुझे पता है जान…मैंने मधु को और भी अपने से चिपका कर उसकी जांघों की जड़ तक अपना हाथ पहुँचा दिया… आश्चर्य जनक रूप से उसने अपने दोनों पैरों को खोल एक गैप बना दिया…मेरी उँगलियों ने एक बार फिर उसकी कोरी छोटी सी चिकनी फ़ुद्दी को सहलाना शुरू कर दिया…

मैं- मेरी प्यारी बच्ची… वो जो डॉक्टर है ना सुई लगाने से पहले ..उस जगह को मुलायम करने के लिए मलते हैं…

मधु- अहा ह्ह्ह्ह्ह… जज्जी… भैया

सलोनी- समझी पागल…

मधु- मुझे लगा कि वो भाभी के साथ कोई गन्दी हरकत कर रहे हों…

मैं- नहीं बेटा…ऐसी बातें करते हुए और… मजे लेते हुए हम तीनों ने खाना खत्म किया…अब बारी थी सोने की…

मेरे मन में ना जाने कितने विचार चल रहे थे… कि आज रात मधु के साथ कुछ न कुछ तो करता हूँ…मगर मधु जब भी आती है… वो बाहर के कमरे में ही सोती है… अब उसको अपने बैडरूम में तो सुला नहीं सकता था… और अगर रात को सोते हुए उठकर कुछ करता हूँ तो कैसे…यही सब प्लान मेरे दिमाग में चल रहे थे…मगर यह पक्का था कि आज यार कुछ करूँगा जरूर ..जब सलोनी भी लगभग साथ दे रही है… और मधु भी मजे ले रही है… कोई विरोध नहीं कर रही ..तो यह मौका नहीं छोड़ना चाहिए…मेरा लण्ड भी बैठने का नाम नहीं ले रहे था… उसको भी एक टाइट माल की ख़ुशबू आ रही थी…रसोई के सब काम निबटने और बिस्तर लगाने तक कई बार मैंने मधु को छेड़ा… उसके नंगे चूतड़ों को मसला… उसकी चूची को सहलाया…मधु ने हर बार मेरा साथ दिया… दो बार तो उसने खुद बहाने से मेरे लण्ड को पकड़ दबाया…मैंने सोच लिया कि आज रात को इसे उसके किसी न किसी छेद में तो डालूँगा ही…मधु की चिकनी फ़ुद्दी और मनमोहक चूतड़ों ने मेरी सोचने समझने की शक्ति को बिल्कुल ख़त्म ही कर दिया था… मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कैसे इसकी ठुकाई करूँ…साफ़ नजर आ रहा था कि सलोनी कुछ नहीं कह रही है बल्कि हर बार साहयता ही कर रही है…फिर भी मुझमें खुलकर कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी…शायद यह हम दोनों का एक दूसरे के प्रति असीम प्यार था जो एक दूसरे की इच्छा का सम्मान भी कर रहे थे मगर एक दूसरे के सामने खुलकर किसी दूसरे से रोमांस नहीं कर पा रहे थे…मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि अगर मैं मधु को चोद रहा हूँ और सलोनी देख ले तो क्या वो कोई प्रतिक्रिया देगी… या मेरी तरह ही चुप रहेगी…अब सोने का इन्तजार था…मधु ने अपना बिस्तर बाहर के कमरे में ही लगाया था..मैं यही सोच रहा था कि रात को एक बार कोशिश तो जरूर करूँगा… यह अच्छा ही था कि सलोनी बैडरूम में रहेगी और मैं आसानी से मधु की बन्द चूत खोल पाऊँगा.मगर फिर एक डर भी सता रहा था कि अगर वो ज़ोर से चिल्ला दी तो क्या होगा !बहुत से विचार मेरे दिल में आ जा रहे थे… मैं बहुत सारी बातें सोच रहा था… कि मधु को ऐसे करके चोदूंगा, वैसे चोदूंगा..यहाँ तक कि मैंने दो तीन चिकनी क्रीम भी ढूंढ कर पास रख ली थीं… मेरे शैतानी लण्ड ने आज एक क़त्ल का पूरा इंतजाम कर लिया था और वो हर हाल में इस काण्ड को करने के लिए तैयार था…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 35

मधु ने अपना बिस्तर बाहर के कमरे में ही लगाया था..मैं यही सोच रहा था कि रात को एक बार कोशिश तो जरूर करूँगा… यह अच्छा ही था कि सलोनी बैडरूम में रहेगी और मैं आसानी से मधु की बन्द चूत खोल पाऊँगा.मगर फिर एक डर भी सता रहा था कि अगर वो ज़ोर से चिल्ला दी तो क्या होगा !बहुत से विचार मेरे दिल में आ जा रहे थे… मैं बहुत सारी बातें सोच रहा था… कि मधु को ऐसे करके चोदूंगा, वैसे चोदूंगा..यहाँ तक कि मैंने दो तीन चिकनी क्रीम भी ढूंढ कर पास रख ली थीं… मेरे शैतानी लण्ड ने आज एक क़त्ल का पूरा इंतजाम कर लिया था और वो हर हाल में इस काण्ड को करने के लिए तैयार था…फिर काम निपटाकर सलोनी अंदर आई और उसने मेरे पुराने सभी विचारों पर बिंदु लगा दिया..अहा… सलोनी ने यह क्या कर दिया…पता नहीं मेरे फायदे के लिए किया… या सब कुछ रोकने के लिए… मगर मुझे बहुत बुरा लगा…दरअसल हमारे घर में ऐ सी केवल बैडरूम में ही लगा है…बाहर के कमरे में केवल छत का पंखा है जो सोफे वाली तरफ है, जहाँ मधु ने बिस्तर लगाया था वहाँ हवा बिल्कुल नहीं पहुँचती.सलोनी ने वहाँ आते ही उसको कहा- अरे मधु, यहाँ तू कैसे सोयेगी? रात को गर्मी में मर जाएगी… चल अंदर ही सो जाना…लगता है जैसे मधु मेरे से उल्टा सोच रही थी… जहाँ मैं उसको अलग आराम से चोदना चाह रहा था.. वहीं वो शायद मेरे पास लेटने की सोच रही थी.. क्योंकि वो एकदम से तैयार हो गई, उसने फटाफट अपना बिस्तर उठाया और बैडरूम में आ देखने लगी कि किस तरफ लगाना है..मैं कुछ कहना ही चाह रहा था मगर तभी सलोनी ने एक और बम छोड़ दिया- यह कहाँ ले आई बेवकूफ, इसको बाहर ही रख दे.. यहीं बेड पर ही सो जाना…अब मुझसे नहीं रुक गया, मैं बोला- अरे जान यहाँ..कैसे…सलोनी- अरे सो जाएगी एक तरफ को जानू… वहाँ गर्मी में तो मर जायेगी सुबह तक…मैं चुप करके अब इस स्थिति के बारे में विचार करने लगता हूँ… पता नहीं यह अच्छा हुआ या गलत…पर जब मधु सलोनी के पास ही सोयेगी तब तो मैं हाथ भी नहीं लगा पाऊँगा…मेरा दिल कहीं न कहीं डूबने लगा था और सलोनी को बुरा-भला भी कह रहा था.हम तीनों बिस्तर पर आ गए, एक ओर मैं था, बीच में सलोनी एवं दूसरी तरफ मधु लेट गई… ऐ सी मधु वाली साइड में लगा था…मैंने कमर में एक पतला कपड़ा बाँध लिया था और पूरा नंगा था… वैसे मैं नंगा ही सोता था पर आज मधु के कारण मैंने वो कपड़ा बाँध लिया था.सलोनी अपनी उसी शार्ट नाइटी में थी जो उसके पैर मोड़ने से उसके कमर से भी ऊपर चली गई थी.. उसके मस्त नंगे चूतड़ मेरे से चिपके थे…उधर मधु केवल एक समीज में लेटी थी..हाँ उसमे अभी भी शर्म थी.. या वाकयी ठण्ड के कारण वहाँ रखी पतली चादर ओढ़ ली थी… उसका केवल सीने तक का ही बदन मुझे दिख रहा था..करीब आधे घंटे तक मैं सोचता रहा कि यार क्या करूँ…एक तो सलोनी के मस्त नंगे चूतड़ मेरे लण्ड को आमंत्रण दे रहे थे.. मगर उसे तो आज नई डिश दिख रही थी…मेरा कपड़ा खुल कर एक ओर हो गया था और अब नंगा लण्ड छत की ओर तना खड़ा था, मेरे बस करवट लेते ही वो सलोनी के नंगे चूतड़ से चिपक जाता …मगर ना जाने क्यों मैं सीधा लेटा मधु के बारे में सोच रहा था कि क्या रिस्क लूँ, उस तरफ जा मधु को दबोच लूँ..मगर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी… फिर मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया.. मैंने सलोनी की ओर करवट ले ली और सलोनी से पीछे से चिपक गया..मेरे लण्ड ने सलोनी के चूतड़ के बीचों बीच अपनी जगह बना ली….सलोनी ने भी थोड़ा सा खिसक कर अपने चूतड़ों को हिलाकर लण्ड को सही जगह सेट कर लिया.
 
अपडेट 36

अब मैंने अपना हाथ बढ़ा कर सीधे मधु की चादर में डाल दिया… मुझे पता था कि सलोनी आँखे खोले मेरे हाथ को ही देख रही है…मगर मैंने सब कुछ जान कर भी अपने हाथ को मधु की चादर में डाल दिया और हाथ मधु के नंगे पेट पर रखा…मधु की समीज उसके पेट से भी ऊपर चली गई थी..मैं सलोनी की परवाह ना करते हुए अपना हाथ सीधे पेट से सरकाते हुए मधु की मासूम फ़ुद्दी तक ले गया जहाँ अभी बालों ने भी पूरी तरह निकलना शुरू नहीं किया था…उसका यह प्रदेश किसी मखमल से भी ज्यादा कोमल था ….मेरी उँगलियों ने उसकी फ़ुद्दी को सहलाते हुए जल्दी ही उसके बेमिसाल छेद को टटोल लिया….!मधु कसमसाई, उसने आँखे खोली और सर घुमाकर सलोनी की ओर देखा…सलोनी की भी आँखें खुलीं थी…बस मधु बिदक गई और उसने तुरंत मेरा हाथ झटक दिया…

मधु- क्या करते हो भैया… सोने दो ना…मैं पहले तो घबरा गया मगर फिर मेरे दिमाग ने काम किया,

मैं बोला- अरे, मैं देख रहा हूँ कि तूने कहीं सूसू तो नहीं कर दिया… गद्दा खराब हो जायेगा…

सलोनी- हा हा.. और एक दम ऐसी के सामने लेटी है.. जरा संभलकर…

मधु- क्या भाभी आप भी… मैं नहीं बोल रही आपसे..तभी सलोनी ने वो कर दिया जिसकी मुझे सपने में भी उम्मीद नहीं थी…मधु की मक्खन जैसी फ़ुद्दी के छूने से मेरे लण्ड में जबरदस्त तनाव आ गया था जिसको सलोनी ने भी महसूस कर लिया था…मेरी समझ से बिल्कुल परे था कि एक बीवी होकर भी वो अपने पति के सेक्सी रोमांस का मजा ले रही है… ना केवल मजे ले रही है बल्कि मेरे इस काम में सहयोग भी कर रही है…अब ना जाने उसके मन में क्या था…इन सब बातों को सोचने के बारे में मेरे दिल और दिमाग दोनों ने ही मना कर दिया था…मधु की नाजुक जवानी को चखने के लिए उसमें इतना तनाव आ गया था कि दिल और दिमाग दोनों ही सो गए थे, उनको तो बस अब एक ही मंजिल दिख रही थी… चाहे उस तक कैसे भी जाया जाये…

मधु- ओह भाभी… भैया भी.. पापा की तरह परेशान कर रहे हैं…सलोनी ने मधु का हाथ पकड़ कर खींच कर सीधे मेरे तने हुए लण्ड पर रख दिया और बोली- तू भी तो पागल है.. बदला क्यों नहीं लेती… तू भी देख ..कि कहीं तेरे भैया ने तो सूसू नहीं की.. हे हे हे हे…सलोनी के इस करतब से मैं भौंचक्का रह गया.. और शायद मधु भी…हाथ के खिंचने से वो सलोनी के ऊपर को आ गई थी.. सलोनी ने ना केवल मधु का हाथ मेरे लण्ड पर रखा बल्कि उसको वहाँ पकड़े भी रही कि कहीं मधु जल्दी से हटा न ले…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 37

सलोनी ने मधु का हाथ पकड़ कर खींच कर सीधे मेरे तने हुए लण्ड पर रख दिया और बोली- तू भी तो पागल है.. बदला क्यों नहीं लेती… तू भी देख ..कि कहीं तेरे भैया ने तो सूसू नहीं की.. हे हे हे हे…सलोनी के इस करतब से मैं भौंचक्का रह गया.. और शायद मधु भी…हाथ के खिंचने से वो सलोनी के ऊपर को आ गई थी.. सलोनी ने ना केवल मधु का हाथ मेरे लण्ड पर रखा बल्कि उसको वहाँ पकड़े भी रही कि कहीं मधु जल्दी से हटा न ले…मधु का छोटा सा कोमल हाथ मेरे लण्ड को मजे दे ही रहा था कि अब मधु ने भी मेरी समझ पर परदा डालने वाली हरकत की…उसने कसकर अपनी छोटे छोटे हाथ से बनी जरा सी मुट्ठी में मेरे लण्ड को जकड़ लिया…

मधु- हाँ भाभी, आप ठीक कहती हो… क्या अब भी भैया सूसू कर देते हैं बिस्तर पर?सलोनी- हा हा… हाँ बेटा… तुझे क्या पता कि ये अब भी बहुत नालायक हैं.. ना जाने कहाँ कहाँ मुत्ती करते हैं… मेरे कपड़े तक गीले कर देते हैं…मैंने मधु के हाथ को लण्ड से हटाने की कोई जल्दी नहीं की… लेकिन कुछ प्रतिवाद का दिखावा तो करना ही था इसलिए..

मैं- तुम दोनों पागल हो गई हो क्या?? यह क्या बकवास लगा रखी है?तभी मधु मेरे लण्ड को सहलाते हुए अपना हाथ लण्ड के सुपाड़े के टॉप पर ले जाती है.. उसको कुछ चिपचिपा महसूस हुआ… मेरे लण्ड से लगातार प्रीकम निकल रहा था…

मधु- हाँ भाभी.. आप ठीक कह रही हो… भैया ने आज भी सूसू की है.. देखो कितना गीला है…

सलोनी- हा हा हा…मैं- हा हा… चल पागल…फिर तो तूने भी की है ..अपनी देख वहाँ भी कितनी गीली है…शायद सलोनी जैसी समझदार पत्नी बहुत कम लोगों को मिलती है… मेरा दिल कर रहा था कि जमाने भर की खुशियाँ लाकर उसके कदमों में डाल दूँ…मेरे लण्ड और मधु की चूत के गीलेपन की बात से ही वो समझ गई कि हम दोनों अब क्या चाहते हैं… उसने बिना कुछ जाहिर करे मधु को एक झटके से अपने ऊपर से पलटकर मेरी ओर कर दिया और खुद मधु की जगह पर खिसक गई.फिर बड़े ही रहस्यमयी आवाज में बोली- ..ओह तुम दोनों ने मेरी नींद का सत्यानाश कर दिया… तू इधर आ और अब तुम दोनों एक दूसरे की सूसू को देखते रहो.. कि किसने की और किसने नहीं की सूसू…

.!मधु एकबारगी तो बौखला सी गई पर बाद में सीधी होकर लेट गई…मैं समझ नहीं पा रहा था कि कुछ बोलूं या नहीं…मैंने घूमकर देखा कि सलोनी वाकयी दूसरी और करवट लेकर लेट गई थी…अब मैंने मधु के चेहरे की ओर देखा… उसके चेहरे पर कई भाव थे… उसकी आँखों में वासना और डर दोनों नजर आ रहे थे..जबकि होंटो पर हल्की मुस्कुराहट भी थी…मेरे दिल में एक डर भी था कि कहीं सलोनी कुछ फंसा तो नहीं रही…मगर पिछले दिनों मैंने जो कुछ भी देखा और सुना था… सलोनी का वो खुला रूप याद कर मेरा सारा डर निकल गया…मैंने झुककर मधु के पतले कांपते होंठों पर अपने होंठ रख दिए…मधु तो जैसे सब कुछ करने को तैयार थी… लगता है… इस उम्र में उसकी वासना अब उसके वश से बाहर हो चुकी थी…वो लालायित होकर अपने मुँह को खोलकर…मेरा साथ देने लगी…मैं उसके ऊपर तिरछा होकर झुका था… उसका बायां हाथ मेरे लण्ड को छू रहा था…अचानक मैंने महसूस किया कि उसने फिर से अपनी मुट्ठी में मेरे लण्ड को पकड़ लिया है… उसकी बेचैनी को समझते हुए मैं उसके होंठों को छोड़कर ऊपर उठा… मैंने उसकी समीज की ढीली आस्तीन को उसके कंधो से नीचे सरका दिया…मधु इतनी समझदार थी कि वो तुरंत समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ…उसने अपने दोनों हाथों से अपनी आस्तीन को निकाल दिया…मैंने उसके सीने से समीज को नीचे कर उसकी नाजुक छोटी छोटी चूचियों को एक ही बार में अपनी हथेली से सहलाया…

मधु बहुत धीरे से- अहा… आआ…उसकी समीज उसके पेट पर इकट्ठी हो गई थी…मैंने एक बार फिर समीज नीचे को की…मधु ने सलोनी की ओर देखते हुए अपने चूतड़ को उठाकर अपने हाथ और पैर से समीज को पूरा निकाल दिया…सलोनी अपने नंगे चूतड़ को उठा हमारी ओर करवट लिए वैसे ही लेटी थी… उसकी साँसें बता रही थी कि वो सो गई है या सोने का नाटक कर रही है…मेरा कमर से लिपटा कपड़ा तो कब का खुलकर बिस्तर से नीचे गिर गया था…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 38

मधु ने सलोनी की ओर देखते हुए अपने चूतड़ को उठाकर अपने हाथ और पैर से समीज को पूरा निकाल दिया…सलोनी अपने नंगे चूतड़ को उठा हमारी ओर करवट लिए वैसे ही लेटी थी… उसकी साँसें बता रही थी कि वो सो गई है या सोने का नाटक कर रही है…मेरा कमर से लिपटा कपड़ा तो कब का खुलकर बिस्तर से नीचे गिर गया था…अब मधु भी पूरी नंगी हो गई थी…नाईट बल्ब की नीली रोशनी में उसका नंगा बदन गजब लग रहा था…मैंने नीचे झुककर उसकी एक चूची को पूरा अपने मुँह में ले लिया…उसकी पूरी चूची मेरे मुँह में आ गई… मैं उसको हल्के हल्के चूसते हुए अपनी जीभ की नोक से उसके नन्हे से निप्पल को कुरेदने लगा…मधु पागल सी हो गई… उसने अपनी मुट्ठी में मेरे लण्ड को पकड़ उमेठ सा दिया…मैंने अपना बायां हाथ उसकी जांघों के बीच ले जाकर सीधे उसकी फ़ुद्दी पर रखा और अपनी उंगली से उसके छेद को कुरेदते हुए ही एक उंगली अंदर डालने का प्रयास करने लगा…मधु कुनमुनाने लगी…लगता है उसको दर्द का अहसास हो रहा था…मुझे संशय होने लगा कि इतने टाइट छेद में मेरा लण्ड कैसे जायेगा…वाकयी उसका छेद बहुत टाइट था… मेरी उंगली जरा भी उसमें नहीं जा पा रही थी…मैंने अपनी उंगली मधु के मुँह में डाली… उसके थूक से गीली कर फिर से उसके चूत में डालने का प्रयास किया..मेरा बैडरूम मुझे कभी इतना प्यारा नहीं लगा… मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि ज़िंदगी इतनी रंगीन हो सकती है…मेरे सामने ही बेड के दूसरे छोर पर मेरी सेक्सी बीवी लगभग नंगी करवट लिए लेटी है… उसकी अति पारदर्शी नाइटी जो खड़े होने पर उसके घुटनो से 6 इंच ऊपर तक आती थी… इस समय सिमट कर उसके पेट से भी ऊपर थी… और मेरी जान अपने गोरे बदन पर कच्छी तो पहनती ही नहीं थी… उसके मस्त चूतड़ पीछे को उठे हुए मेरे सेक्स को कहीं अधिक भड़का रहे थे…अब तक मजेदार भोजन खिलाने वाली मेरी बीवी ने आज एक ऐसी मीठी डिश मेरे सामने रख दी थी कि जिसकी कल्पना शायद हर पति करता होगा मगर उसे मायूसी ही मिलती होगी…और खुद सोने का नाटक कर रही थी…मधु के रसीले बदन से खेलते हुए मैं अपनी किस्मत पर रश्क कर रहा था…इस छोटी सी लोंडिया को देख मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतनी गर्म होगी और चुदाई के बारे में इतना जानती होगी…मेरा लण्ड उसके हाथों में मस्ती से अंगड़ाई ले रहा था और बार-बार मुँह उठाकर उसकी कोमल फ़ुद्दी को देख रहा था, जैसे बोल रहा हो कि आज तुझे जन्नत की सैर कराऊँगा…उसकी फ़ुद्दी भी मेरी उँगलियों के नीचे बुरी तरह मचल रही थी… वो सब कुछ कर गुजरने को आतुर थी…शायद उसकी फ़ुद्दी होने वाले कत्लेआम से अनभिज्ञ थी…मेरे और मधु के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था, मधु बार-बार मेरे गठीले एवं संतुलित बदन से कसकर चिपकी जा रही थी…मेरा मुँह उसकी दोनों रसीली अम्बियों को निचोड़ने में ही लगा था… मैं कभी दाईं तो कभी बायीं चूची को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था…मधु कुछ ज्यादा ही मचल रही थी… उसने मेरी तरफ घूम कर अपना सीधा पैर मेरी कमर पर रख दिया…मैंने भी अपना हाथ आगे उसकी फ़ुद्दी से हटा कर उसके मांसल चूतड़ों पर रख उसको अपने से चिपका लिया.इस अवस्था में उसकी रसीली चूत मेरे लण्ड से चिपक गई…शाम से हो रहे घटनाक्रम से मधु सच में सेक्स लिए पागल हो रही थी… वो अपनी चूत को मेरे लण्ड से सटा खुद ही अपनी कमर हिला रही थी.. उसकी रस छोड़ रही चूत मेरे लण्ड को और भी ज्यादा भड़का रही थी…मैंने एक बात और भी गौर की कि मधु शुरू शुरू में बार बार सलोनी की ओर घूमकर देख रही थी, उसको भी कुछ डर सलोनी का था…मगर अब बहुत देर से वो मेरे से हर प्रकार से खेल रही थी, उसने एक बार भी सलोनी की ओर ध्यान नहीं दिया था… या तो वासना उस पर इस कदर हावी हो चुकी थी कि वो सब कुछ भूल चुकी थी या अब वो सलोनी के प्रति निश्चिंत हो चुकी थी !हाँ, मैं उसी की ओर करवट से लेटा था तो मेरी नजर बार बार सलोनी पर जा रही थी…कमाल है.. उसने एक बार भी ना तो गर्दन घुमाई थी और ना उसका बदन जरा भी हिला था…सलोनी पूरी तरह से मधु का उद्घाटन करवाने को तैयार थी…मेरा लण्ड इस तरह की मस्ती से और भी लम्बा, मोटा हो गया था…मैं अपने हाथ से उसके चूतड़ों को मसलते हुए अपनी ओर दबा रहा था और मधु अपने कमर को हिलाते हुए मखमली चूत को मेरे लण्ड पर मसल रही थी…मेरे मुँह में उसकी चूची थी… हम दोनों बिल्कुल नहीं बोल रहे थे..मगर फिर भी मेरे द्वारा चूची चूसने की ‘पुच पिच’ जैसी आवाजे हो ही रही थीं…मधु की बेकरारी मुझे उसके साथ और भी ज्यादा खेलने को मजबूर कर रही थी…मैंने उसको सीधा करके बिस्तर पर लिटा दिया…मगर इस बार अब मैं उसके ऊपर आ गया, एक बार उसके कंपकंपाते होठो को चूमा, फिर उसकी गर्दन को चूमते हुए जरा सा उठकर नजर भर मधु की मस्त उठानों को देखा…दोनों चूचियाँ छोटे आम की तरह उठी हुई जबरदस्त टाइट और उन पर पूरे गुलाबी छोटे से निप्पल…जानलेवा नजारा था…मैंने दोनों निप्पल को बारी बारी से अपने होंटों से सहलाया..फिर नीचे सरकते हुए उसके पतले पेट तक पहुँचा, अब मैंने उसके पेट को चूमते हुए अपनी जीभ उसकी प्यारी सी नाभि पर रख दी…मैं जीभ को नाभि के चारों ओर घुमाने लगा…मधु मचल रही थी, उसके मुख से अब हल्की हल्की आहें निकलने लगी- अह्ह्हाआ… ह्ह्ह्ह… आ…मैं थोड़ा और नीचे हुआ… मैंने मधु के पैरों को फैलाया और उसकी कोमल कच्ची कली फ़ुद्दी को पहली बार इतनी नजदीक से देखा…उसकी दोनों पत्तियाँ कस कर एक दूसरे से चिपकी थी…पूरे वस्तिक्षेत्र पर एक भी बाल नहीं था… कुछ रोयें से थे बस…सलोनी की चूत भी गजब की है बिल्कुल छोटी बच्ची जैसी, मगर उस पर बाल तो आ चुके ही थी… भले ही वो कीमती हेयर रेमूवर से उनको साफ़ कर अपनी चूत को चिकना बनाये रखती थी…और फिर लण्ड खाने से उसकी चूत कुछ तो अलग हो गई थी…मगर मधु की चूत बिलकुल अनछुई थी, उस पर अभी बालों ने आना शुरू ही किया था… जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी उसका तो कहना ही क्या…इतनी प्यारी कोमल मधु की चूत इस समय मेरी नाक के नीचे थी… उसकी चूत से निकल रहे कामरस की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी…मैंने अपनी नाक उसकी चूत के ऊपर रख दी…

कहानी जारी रहेगी.

 
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