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मेरी चालू बीवी complete

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अपडेट 49

शालू का मस्ताना हुस्न नंगा होने को तैयार मेरे सामने खड़ा था, उसने अपनी कुर्ती पेट से ऊपर कर ली थी…उसकी पतली कमर और सुतवाँ पेट बहुत धीरे धीरे मेरे सामने फूलता पिचकता अपनी बैचेनी बता रहा था.

उसकी नाभि पर एक चुम्मा लेते हुए मैंने हलकी सी गुदगुदी की.

शालू- अह्ह्ह्हाआआ…

मैं उसकी लेग्गिंग को उसके चूतड़ों से नीचे करते हुए आगे से जैसे ही नीचे कर उसकी जाँघों तक लेकर गया, शालू की चिकनी चूत अपने दोनों होंठों को कंपकंपाते हुए मेरे सामने आ गई.

उसने अपनी चूत को बिल्कुल चिकना किया हुआ था.. इसका कारण यह था कि मुझे इस जगह एक भी बाल पसंद नहीं…

तो शालू भी नियमित हेयर रिमूवर का उपयोग करती है… मैंने कभी उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं देखा था..मैं ध्यान से उसकी चूत को देखने लगा..शालू ने भी अपने चूतड़ों को आगे को कर अपनी चूत को उभार दिया…

उसकी चूत पर हल्के हल्के निशान दिख रहे थे जो खुजाने से सफ़ेद भी हो रहे थे.

मैंने अपनी उँगलियों को उसकी चूत पर फेरते हुए ही कहा- क्या जानेमन? कुछ चिकना तो लगा लेती.. लगता है तुमने कुछ नहीं लगाया ..शालू की आँखें बंद होने लगी थी.. वो मेरे स्पर्श का पूरा आनंद ले रही थी…

शालू- ओह्ह्ह्ह हाँ सर… पर मैंने सुना है कि आदमी के थूक से अच्छा कुछ नहीं होता..तो ऐसी है मेरी शालू !

वो मुझे अपनी चूत चाटने का साफ़ साफ़ इशारा कर रही थी.उसकी चूत देखकर मेरा भी दिल फिर से चुदाई का करने लगा था… मेरे लण्ड ने अंडरवियर के अंदर अपना सिर उठाना शुरू कर दिया था…

मैंने नीचे झुककर उसकी चूत की गन्ध ली.. एक अलग ही मीठी मीठी सी खुशबू वहाँ फैली हुई थी..

मैंने अपनी जीभ निकाली और शालू की चूत को चारों ओर से चाटा…

शालू- आआह्ह्ह्ह्ह… हाआआ… ओह्ह्ह… इइइइइ…वो खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाई, उसके मुख से तेज सिसकारियों की आवाज निकलने लगी..

मैं अपनी पूरी कला का प्रदर्शन करते हुए अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को पकड़ अपनी ओर कर मस्त हो उसकी चूत का स्वाद ले रहा था…मेरी जीभ शालू की चूत के हर कोने को अपनी नोक से छेड़ रही थी…

करीब दस मिनट में ही वो इतनी गर्म हो गई कि वो मेरी कुर्सी को पीछे को खिसका एक ओर को आ गई… फिर अपने सैंडल एक तरफ को उतार वो अपनी लेग्गिंग पूरी तरह से निकाल मेरी मेज पर रख दी.

शालू जब लेग्गिंग को अपने पंजों से निकालने में पूरी झुकी थी…तब उसके चूतड़ मुझे इतने प्यारे लगते हैं कि मैंने एक तेज चपत उसके चूतड़ों पर लगा दी…उसके चूतड़ पर एक लाल निशान तुरंत पड़ गया और वो मस्त हिलने लगे..

शालू- ओह्ह्ह्ह्ह…उसने बस अपनी कमर हिला कर हल्का सा दर्द का अहसास कराया मगर कुछ मना नहीं किया…

मैंने उस जगह को सहला उसके दर्द को कम करने की कोशिश की.

फिर शालू अपनी कुर्ती भी निकाल मेरी मेज पर रख पूरी नंगी हो गई, उसकी तनी हुई चूचियाँ और हल्क्र भूरे निप्पल तेज तेज सांसों के साथ मस्त तरीके से हिल रहे थे.मैंने दोनों कबूतरों को प्यार से सहलाया- …अहा अब सांस आई बेचारों को…शालू जोर से हंस पड़ी- …ठीक है सांस लेने के लिए इनको खुला ही रहने देती हूँ.. फिर जो होगा, आप देख लेना…

मैं अपने होंठों से उसके निप्पल पकड़ चूसने लगा.एक बार फिर वो सेक्सी सिसकारियाँ भरने लगी- …आःह्हाआआ… बस अब छोड़ भी दो ना सर.. क्या आप भी… कॉफ़ी के समय दूध पीने में लगे हो…

.!

उसको पता था कि मैं साधारणतया इस समय कॉफ़ी पीता हूँ…

मैं- यह तो तुम्हारी गलती है ना… कॉफ़ी की जगह मेरे सामने दूध क्यों रखा?

शालू तुरंत गम्भीर हो गई, उसने मेज पर रखे इण्टरकॉम पर दो कॉफ़ी का आर्डर भी दे दिया …

मैं- अच्छा… अब क्या मदन लाल के सामने नंगी रहोगी?मदन लाल हमारा चपरासी है.

शालू- मेरे को कोई फर्क नहीं पड़ता… आप ही सोचो कि क्या बोलोगे…

मैं- हा हा हा… अच्छा खिलाओगी क्या? यह तो बताओ…

शालू नीचे को बैठ मेरी पेंट खोलते हुए- मेरे पास तो मजेदार स्नैक्स है… अब अपनी बताओ क्या खाओगे?वो अंडरवियर से मेरे आधे खड़े लण्ड को बाहर निकाल सहलाने लगी.

 
अपडेट 50

मैंने भी उससे मस्ती करने की सोची… मैंने पास की डोरी खींच शीशे के ऊपर से परदे को हटा दिया..अब बाहर 15 लोगों का पूरा स्टाफ दिख रहा था..जिनमें 11 मर्द और 4 लड़कियाँ थीं..

मैं- तो बता कौन सा लूँ?शालू मुस्कुराते हुए- ..जो आपकी मर्जी हो…फिर थोड़ा सा चिढ़कर- …जो अंदर है वो तो अब आपको दिख ही नहीं रहा होगा..

शालू मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी…तभी बाहर ठक ठक हुई…

मदनलाल- कॉफ़ी साहब…

दिन के 11 बजे थे.. मैं अपने ऑफिस में, अपने केबिन में था, मेरा पूरा स्टाफ अपने काम में लगा था… केबिन के परदे हटे हुए थे… और सीशे से सारा स्टाफ दिख रहा था.

और ऐसी स्थिति में भी मैं अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर बैठा था, मेरा लण्ड मेरी पैंट से बाहर था.. जिसे मेरी पर्सनल सेक्रेटरी अपने पतले हाथों में लिए चूस रही थी और वो इस समय पूरी नंगी थी, उसके कपड़े मेरी ऑफिस की मेज पर रखे थे…

यहाँ तक तो सब ठीक था क्योंकि मेरे ऑफिस में कोई ऐसे नहीं आ सकता था और ना ही किसी को कुछ दिखाई दे सकता था..

परन्तु इस समय हमारे ऑफिस में काम करने वाला चपरासी मदन लाल जो 52 साल का ठरकी बुड्ढा है, मेरे केबिन के दरवाजे के बाहर खड़ा था और अंदर आने के लिए खटखटा रहा था…खट खट… खट खट…

मैं- कम इन…

और कुछ हो भी नहीं सकता था पर हाँ… मैंने अपनी कुर्सी को खिसकाकर मेज के बिल्कुल पास कर ली जिससे शालू मेज के अंदर को हो गई..अब सामने वाले को कुछ नहीं दिख सकता था ..

तभी दरवाजा खुला और मदन लाल कॉफ़ी लेकर अंदर आ गया.

साधारण सी पैंट शर्ट पहने, अधपके बाल और शेव बढ़ी हुई… दिखने में बहुत साधारण मगर हर समय उसका मुँह और आँखें चलती रहती हैं.. अपने काम में माहिर है…

मदन लाल- साहब कॉफ़ी..

मैंने वहीं सामने रखी एक फाइल को देखने का बहाना किया- हाँ रख दो…

और शालू को तो न जाने क्यों कोई शर्म ही नहीं थी, वो अभी भी मेरे लण्ड को पकडे चाटने और चूसने में लगी थी… उसको यह भी चिंता नहीं थी कि उसकी कोई हल्की सी आवाज भी अगर मदन लाल ने सुन ली तो वो रोज उसे चिड़ाने लगेगा !

और अगर मदन लाल थोड़ा सा भी मेरे दाईं ओर आया, जो अक्सर कुछ न कुछ करने वो आ ही जाता है, तो मेज के नीचे घुसी पूरी नंगी शालू उसको दिख जाएगी…मगर अभी तक ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी थी…

मैं अपने चेहरे पर कोई भी भाव नहीं आने दे रहा था जबकि जिस तरह शालू मेरे लण्ड से खेल रही थी, ऐसे तो मेरा दिल जोर जोर से चीखने का कर रहा था..शालू मेरे लण्ड को ऊपर नीचे खींचती, उसके टॉप को लोलीपोप की तरह चूसती, लण्ड को ऊपर उठाकर गोलियों को मुँह में ले लेती, पूरे लण्ड को चाटती..

उसकी आवाजें कमरे में सुनाई न दें, इसलिए मैंने लेपटोप पर एक कंपनी का वीडियो ओन कर दिया…इसीलिए मदन लाल को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, वरना उस जैसा पारखी इंसान एकदम समझ जाता कि ये तो लण्ड चूसने की आवाजें हैं…

मदन लाल कॉफ़ी रखकर बोला- और कुछ साब? वो रोज़ी मेमसाब मिलने को बोल रही थी, कह रही थी कि जो आपने काम दिया था उसमें कुछ पूछना है.

रोज़ी 26-27 साल की एक शादीशुदा महिला है, उसने खुद को बहुत मेन्टेन कर रखा है.. 36-28-34 की कुछ सांवली मगर अच्छी सूरत वाली रोज़ी कुल मिलाकर बहुत खूबसूरत दिखती है. उसने अभी एक महीने पहले ही ज्वाइन किया था इसलिए उसको यहाँ के बारे में ज्यादा नहीं पता था.

मैंने मदन लाल को जल्दी भेजने के चक्कर में बोल दिया- ठीक है, भेज देना उसको …मगर मदन लाल पूरा घाघ आदमी था- अरे शालू मेमसाब कहाँ हैं साब… कॉफ़ी ठंडी हो जायेगी.

ओ बाप रे ..साले ने मेज पर रखे कपड़े देख लिए थे… उसके होंठों पर एक कुटिल मुस्कान थी…मैं जरा आवाज में कठोरता लाते हुए- तुझे मतलब? ..अपना काम कर… वो बाथरूम में है…मदन लाल- व्व… व…व…वो साब यहाँ उनके कपड़े…??

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 51

मदन लाल पूरा घाघ आदमी था- अरे शालू मेमसाब कहाँ हैं साब… कॉफ़ी ठंडी हो जायेगी.ओ बाप रे ..साले ने मेज पर रखे कपड़े देख लिए थे… उसके होंठों पर एक कुटिल मुस्कान थी…

मैं जरा आवाज में कठोरता लाते हुए- तुझे मतलब? ..अपना काम कर… वो बाथरूम में है…मदन लाल- व्व… व…व…वो साब यहाँ उनके कपड़े…??

मैं- हाँ वो अपनी ड्रेस ही बदलने गई है… और तू अपना काम से मतलब रखा कर… समझा?

मेरी हालत ख़राब थी, मैं इधर मदन लाल को समझाने में लगा था और नीचे शालू हंस भी रही थी और मेरे लण्ड को नोच या काट भी रही थी..

मैं कुछ भी रियेक्ट नहीं कर पा रहा था.. समझ नहीं आ रहा था कि कैसे खुद को रोकूँ..मगर थैंक्स गॉड.. मदन लाल बाहर चला गया..

मुझे शालू पर इतना गुस्सा आ रहा था कि मैंने तुरंत उसको मेज के नीचे से निकाला और मेज पर लिटा दिया… उसकी दोनों टांगों को फैलाकर.. सीधे उसकी पूरी चूत अपने मुँह में भर ली और दांतों से काटने लगा..

अब मचलने की बारी शालू की थी.. वह बुरी तरह सिसकार रही थी और अपनी कमर हिलाये जा रही थी.

मैं अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों में उसके चूतड़ों को पकड़ कस कस कर दबाने लगा तो जरा सी देर में शालू की हालत बुरी हो गई, वो छोड़ने के लिए मिन्नतें करने लगी…

शालू: नहींईइइइइ… छोड़ दीजिये ना.. आह्ह्ह्ह्ह्हाआआ… नहींईइइ… आआअ… अब्बब्बब नहींई अह्ह्ह…

मैंने उसको उसी अवस्था में रखा और अपनी पैंट खोल दी, मेरी पैंट नीचे मेरे जूतों पर जाकर ठहर गई..

मैंने अंडरवियर भी नीचे घुटनों तक उतार अपने मस्ताने लण्ड को आज़ाद किया और शालू की मेरे थूक से गीली चूत के छेद पर टिका एक ही बार में अंदर ठोक दिया…

ठक की आवाज से लण्ड पूरा चूत की जड़ तक चला गया.

पिछले 24 घंटे में यह चौथी चूत थी जिसमें मेरा लण्ड प्रवेश कर रहा था…

मगर शायद आज किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी, अभी लण्ड ने जगह बनाई ही थी कि एक बार फिर…ठक ठक… ठक ठक…दरवाजे पर फिर दस्तक हुई…और इस बार कोई महीन आवाज थी…

ओह रोज़ी… मर गए… मैं तो भूल ही गया था…अब क्या होगा..??

शालू को पहले भी ऑफिस में मैंने कई बार चोदा था…मगर हमेशा दोपहर के बाद या फिर शाम को…

मैं हमेशा यह ध्यान रखता था कि अब कोई नहीं आने वाला है, और सभी कार्य निबटने के बाद ही उसको चोदता था..मगर आज तो सुबह आते ही यह कार्यक्रम सेट हो गया था…इसीलिए हद हो गई यार…

पहले मदन लाल शालू के कपड़े देख गया…ना जाने क्या क्या सोच रहा होगा…

और अब बिल्कुल नई स्टाफ, वो भी शादीशुदा.. दरवाजे के बाहर खड़ी थी..शालू पूरी नंगी अपनी टाँगें फैलाये मेरी मेज पर लेटी थी…और मैं लगभग नंगा..

पैंट और अंडरवियर दोनों मेरे जूतों पर पड़े रो रहे थे..मेरा लण्ड जड़ तक शालू की चूत में घुसा था.. मैं उसकी चूचियों को मसलता हुआ उसकी चूत में धक्के लगा रहा था…

.!

और दरवाजे के बाहर खड़ी रोज़ी की दरवाजे पर की जा रही खट-खट..ऐसा लग रहा था जैसे चुदाई का बैकग्राउंड म्यूजिक चल रहा है…

और मुझे अचानक होश आया…शालू पर जैसे कोई फर्क नहीं पड़ा..

वो मुझे अपनी लाल आँखों से देख रही थी.. कि क्यों निकाल लिया… फिर से पूरी ताकत से डाल दो ना…मैंने जल्दी से उसको उठाकर फिर से मेज के नीचे घुसा दिया.. और इस बार उसके कपड़े भी नीचे गिरा दिए..

मैं- कम इन…

और तुरंत दरवाजा खुला.. रोज़ी का सुन्दर चेहरा नजर आया..उसने नीली पारदर्शी साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज पहना था.. ब्लाउज से उसकी ब्रा भी नजर आ रही थी…एक टाइट बन्धी साड़ी में उसके शरीर के अंग अच्छी तरह उभर कर प्रदर्शित हो रहे थे…

उसने मुझे मुस्कुराकर देखा- …गुड मॉर्निंग सर…

मैं- हाँ क्या हुआ?मैंने फिर से खुद को काम में खोया दिखाया…

रोज़ी- सर वो दामोदर दास जी वाला काम हो गया है.. आप एक बार देख लेते..

मैं- ठीक है तुम फाइल छोड़ दो.. मैं देख लूंगा.. और तुम्हारा दिल लग रहा है ना..काम सही लग रहा है?

रोज़ी- हाँ सर.. यहाँ का माहौल बहुत अच्छा है और सभी लोग भी बहुत मिलनसार हैं.

मैं- ठीक है… मन लगाकर काम करो… जल्दी ही तुम्हारी तरक्की हो जाएगी…

रोज़ी- थैंक यू सर.. क्या… मैं… आपका बाथरूम… यूज़ कर सकती हूँ सर…? !! ? बाहर का बहुत गन्दा हो रहा है…वैसे भी ज्यादातर लेडीज स्टाफ ये अंदर का ही बाथरूम यूज़ करती थीं तो उसमे कोई प्रॉब्लम नहीं थी.. और मैं उसको मना भी कैसे कर सकता था…

मैं- हाँ हाँ क्यों नहीं… जरा ध्यान से.. लॉक ख़राब है..

रोज़ी- हा हा.. मुझे पता है सर.. पर अभी तो आप हैं ना, किसी को अंदर नहीं आने देंगे.

और वो बड़ी सेक्सी मुस्कान छोड़कर बाथरूम में चली गई.

थैंक्स गॉड कि उसने एक बार भी पीछे घूमकर नहीं देखा.. वरना बाथरूम मेरी कुर्सी के सीधी तरफ पीछे की ओर था, उसको सब कुछ दिखाई दे सकता था !

इतनी देर में चुदाई का मूड सब ख़त्म हो गया था, मैंने जल्दी से अपना अंडरवियर और पेंट सही करके पहन ली और शालू को भी कपड़े पहनने को बोला.

क्योंकि जब वो वापस आएगी तो पक्का उसको सब दिख जाने वाला था.शालू ने भी तुरंत अपनी कुर्ती पहनी और लेग्गिंग भी चढ़ा ली.

पर तभी शालू को शरारत सूझी, मुझे आँख मारते हुए वो बाथरूम की ओर चली गई.मैं उत्सुकता से उसे देखने लगा पता नहीं अब क्या करने वाली थी…

मगर उसकी हर शरारत से मुझे फ़ायदा ही पहुँचता था इसलिए मैं कभी कुछ नहीं कहता था.और उसने एकदम से बाथरूम का दरवाजा खोल दिया.ओह माय गॉड !!!क्या नजारा था !!!!!!!!

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 52

केवल एक मिनट में ही शालू ने अपना गोरा चिकना नंगा बदन अपने दो कपड़ों में ढक लिया…मैंने भी अपने पप्पू मियां को अंदर कैद कर पैंट ठीक कर ली…

मगर शैतान शालू को तो अपनी चुदाई बीच में रुकने का बदला लेना था…वो तुरंत बाथरूम की ओर गई.. एक बार मुझे पलट कर देखा… मुस्कुराई…और एक झटके में दरवाजा खोल दिया…

दरवाजा अंदर की ओर खुलता था…अंदर सफ़ेद लाइट झमाझम चमक रही थी…उसमे एक तरफ ही वेस्टर्न सीट लगी थी…मैं जहाँ खड़ा था, वहाँ से वो जगह साफ़ दिख रही थी..

कहते हैं ना कि कोई-कोई दिन आपके लिए बहुत भाग्यशाली होता है..तो आज यह भी देखना था..मैंने सबसे पहले शानदार पूरे नंगे चूतड़ देखे…

क्या लुभावना दृश्य था..!!!मेरी आँखें तो पलक झपकना ही भूल गई..मैं एकटक उसको निहार रहा था..

दरअसल रोज़ी अभी अभी ही शू शू करके उठी होगी..उसने अपनी नीली साड़ी पूरी ऊपर कर अपने बाएं हाथ से पकड़ी हुई थी…

और उसकी कच्छी जो शायद गुलाबी ही थी.. जैसी वहाँ से दिख रही थी… उसने अपने घुटनों तक उतार रखी थी..और वो हल्के से झुक कर फ्लश कर रही थी…

वो इतनी मग्न थी कि उसको पता ही नहीं चला कि बाथरूम का दरवाजा खुल गया है…मेरी आँखों ने भरपूर उसके मतवाले चूतड़ों के दर्शन किये…

अभी मैं कुछ सोच ही रहा था कि शालू ने एक और हरकत कर दी…उसने ऐसे जाहिर किया जैसे उसको कुछ पता ही नहीं है, वो तेज आवाज में बोली- अररररर ऐ एई… तू यहाँ रोज़ी…?और स्वभाविक ही रोज़ी ने घूमकर उसको देखा…

उसने वो कर दिया जिसकी उम्मीद न तो मुझे थी और ना शायद शालू को ही…

रोज़ी- हाय राम…और उसने अपनी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ी.. और शरमा कर अपने चेहरे तक ले जाकर ढक ली…इस दृश्य की तो मैंने कल्पना भी नहीं की थी..

रोज़ी के घूमने से उसकी गुलाबी कच्छी ढीली हो उसके घुटनों से सरक कर नीचे गिर गई…उसकी साड़ी और उसका पेटीकोट दोनों वो खुद पूरा उठाकर अपने चेहरे तक ले गई थी…

उसका कमर के नीचे का भाग पूरा नंगी अवस्था में बाथरूम की सफ़ेद चमकती लाइट से भी ज्यादा चमक रहा था..पतली कमर, पिचका हुआ पेट, लम्बी टाँगें, गोल सफ़ेद चिकनी जांघें… और जांघों के बीच फूली हुई चूत का उभार खिला खिला साफ दिख रहा था…

.!यह तो नहीं पता चला कि उस पर बाल थे या नहीं.. और अगर थे तो कितने बड़े..

वैसे जितनी साफ़ वो दिख रही थी उस हिसाब से तो चिकनी ही होगी.. या होंगे तो थोड़े थोड़े ही होंगे…दिल चाह रहा था कि अंदर जाऊं और उसके इन प्यारे होंठों पर अपने होंठ रख दूँ…

रोज़ी की तो जैसे आवाज ही नहीं निकल रही थी…

मगर शालू पूरे होश में थी… वो चाहती तो दरवाजा बंद कर देती और सब कुछ सही हो जाता…

मगर वो तो किसी और ही मूड में थी.. वो अंदर जाकर रोज़ी के कंधे पर हाथ रख कर बोली- अरे सॉरी यार… मुझे नहीं पता था कि तू अंदर है… चल अब तेरा तो हो गया ना…

रोज़ी- तू बहुत गन्दी है रे ! तू बाहर जा ना…

शालू- हा हा… क्या बात करती हो दीदी? आपका तो हो गया ना… अब आप बाहर जाओ ना.. मुझे भी तो करनी है…

और अस्वभाविक रूप से शालू नीचे बैठ गई और रोज़ी की कच्छी को पकड़ ऊपर करने लगी..इतनी देर में मैंने रोज़ी की चूत के भरपूर दर्शन कर लिए थे…

शालू- अब कपड़े तो सही कर लो दीदी.. कब तक अपनी मुनिया को हवा लगाओगी?

अब जैसे रोज़ी को होश आया.. कि चेहरा छुपाने के लिए उसने क्या कर दिया था !?!और शालू तो पिछले एक साल में मेरे साथ रहकर पूरी बेशर्म हो ही गई थी…

उसने कच्छी को रोज़ी के चूतड़ों पर चढ़ाते हुए अपने एक हाथ से रोज़ी की गुलाबी चूत को सहलाया और कच्छी के अंदर करते हुए बोली- बहुत प्यारी है दीदी अपनी मुनिया… इसको धो तो लिया था ना?

और रोज़ी ने अब अपनी साड़ी छोड़कर नीचे कर दिया और शालू के धप्प लगाते हुए बोली- पूरी पागल ही है तू… चल हट…

अभी तक शायद उसको पता नहीं था.. या वो मेरे बारे में बिलकुल भूल ही गई थी.. कि मैं बाहर कमरे में से दोनों की हर हरकत को देख रहा हूँ…

रोज़ी बाहर आ दरवाजा अभी बंद ही कर रही थी, इतनी देर में शालू अपनी कुर्ती ऊपर उठा अपनी लेग्गिंग चूतड़ों से नीचे खिसका सीट पर बैठने की तैयारी कर रही थी…

रोज़ी- अरे दरवाजा तो बंद करने देती… तू सच पूरी पागल है… हे… हे…

और जैसे ही रोज़ी दरवाजा बंद कर घूमी, मुझे देख उसे सब कुछ अहसास हो गया… वो बुरी तरह झेंप गई और अब शरमा रही थी…

रोज़ी- अरे सर, आपने शालू को रोका नहीं… वो अंदर.. मैं.. ये…

मैं- अरे… मैं काम में बिजी था… और वो पता नहीं कैसे.. मुझे पता ही नहीं चला…

रोज़ी- वो.. ओह… मैं तो…

मैं- अरे इतना घबरा क्यों रही हो? शादीशुदा हो.. समझदार हो… हो जाता है ऐसा… कोई बड़ी बात नहीं है..

रोज़ी- वो सब अचानक… मेरे को तो पता ही नहीं था.. और आप भी…?

मैं- अरे यार, कुछ नहीं हुआ… इतनी सुन्दर तो हो तुम.. जरा सा देख लिया तो क्या हो गया? वैसे एक बात बोलूँ…रोज़ी ने अपनी नजर बिल्कुल नीचे कर रखी थी.. वो बहुत शरमा रही थी…

लेकिन इतना शुक्र था कि वो कमरे से बाहर नहीं गई थी.. वो मुझसे बात कर रही थी…

रोज़ी- क्या सर?

मैं- तुम अपने नाम से लेकर.. अंदर तक गुलाब ही हो.. मतलब गुलाबी…

रोज़ी- धत्त.. क्या कह रहे हो सर आप?

मैं- सच यार… मजा आ गया… कच्छी से लेकर अंदर तक सब गुलाबी था…

रोज़ी- आप भी ना सर… अपने सब देख लिया…?

मैं- अरे यार इतना सुन्दर दृश्य कौन.. छोड़ता है… और वाकयी बहुत प्यारी लग रही थी…रोज़ी के चेहरे से लग रहा था कि उसको मेरी बात अच्छी लग रही है..

रोज़ी- यह शालू भी बहुत गन्दी है.. ये सब उसकी वजह से हुआ…

मैं- हा हा.. मेरे लिए तो बहुत लकी रही यार.. और तुमको उससे बदला लेना हो तो ले लो.. जाओ दरवाजा खोल दो.. हा… हा…

रोज़ी- धत्त.. मैं ऐसी नहीं हूँ… आपका मन कर रहा हो तो आप खुद खोलकर देख लीजिये…

मैं- अरे इतनी खूबसूरत देखने के बाद तो अब किसी और की देखने का दिल ही नहीं करेगा… सच बहुत सुन्दर है तुम्हारी…

और अब रोज़ी तुरंत केबिन से बाहर निकल गई !मगर हाँ केबिन का दरवाजा बंद करते हुए उसके चेहरे की मुस्कुराहट उसकी ख़ुशी को दर्शा रही थी.

कुछ देर बाद शालू भी अपने काम में लग गई.अब ऑफिस का कुछ काम भी करना था.

कहानी जारी रहेगी.

 
मैं आप सब दोस्तो का बहुत आभारी हूं दोस्तो अगर आपको मेरी कोई स्टोरी बोर कर रही हो या पसंद ना आ रही हो तो कृपया बताये ता की मैं वह स्टोरी बंद कर सकू और कोई नई स्टोरी शुरू कर सकू...सतीश
 
अपडेट. 53

रोज़ी तुरंत केबिन से बाहर निकल गई !मगर हाँ केबिन का दरवाजा बंद करते हुए उसके चेहरे की मुस्कुराहट उसकी ख़ुशी को दर्शा रही थी.

कुछ देर बाद शालू भी अपने काम में लग गई.अब ऑफिस का कुछ काम भी करना था.

दोपहर को लंच करने के बाद मैंने सलोनी को फोन लगाया…उधर से मधु की आवाज आई- कौन..??

मैं- अरे मधु तू.. क्या हुआ? सलोनी कहाँ है??

मधु- अरे भैया.. हम स्कूल में हैं… भाभी की जॉब लग गई है… वो अंदर हैं…

मैं- क्यों? तू बाहर क्यों है?

मधु- अरे अंदर उनका इंटरव्यू चल रहा है… वो कुछ समझा रहे थे !

मैं- ओह… मगर तू उसका ध्यान रख… देख वो क्या कर रही है?

मधु- हाँ भइया… पर क्यों?

मैं- तुझसे जो कहा, वो कर ना…

मधु- पर वो अपने कोई पुराने दोस्त के साथ हैं.. वो क्या नाम बोला था? हाँ याद आया… मनोज… वो उनके कोई पुराने दोस्त हैं… वो ही हैं यहाँ बड़े वाले टीचर..मेरे दिमाग में एक झनका सा हुआ… अरे मनोज वो तो कहीं वही तो नहीं…

मुझे याद आया सलोनी ने एक दो बार बताया था.. उसका फोन भी आया था शायद… मनोज उसके स्कूल के समय से दोस्त था…पर हो सकता है कि कोई और हो…

तभी मधु की आवाज आई- भैया.. ये तो… अंदर…

मैं- क्या अंदर? क्या हो रहा है?

मधु- व्व्व्व्व्व्वो भाभी अंदर… और व्व्व्वो !!!!!

ऑफिस में ही शालू और रोज़ी से मस्ती करने के बाद मैं बहुत आराम से फोन पर बात कर रहा था…लण्ड को अपनी खुराक भरपूर मिल गई थी, फिर भी दिल तो बावरा होता है रे…

सलोनी का फोन मधु के पास था… दोनों किसी स्कूल में थी जहाँ सलोनी ने जॉब करने के लिए कहा था…मधु ने के ऐसी बात बताई कि मेरे कान खड़े हो गए…

झूठ नहीं बोलूंगा.. कान के साथ लण्ड भी खड़ा हो गया था…

मधु- भैया… भाभी अंदर कमरे में हैं… यहाँ उनका कोई दोस्त ही बड़ा सर है… वो क्या बताया था… हाँ मनोज नाम है उनका…

मैंने दिमाग पर ज़ोर डाला… उसने बताया था कि कॉलेज में उसके विनोद और मनोज बहुत अच्छे दोस्त थे, दोनों हमारी शादी में भी आये थे.मैंने मधु को कमरे में देखने को बोला..

मधु- व्वव… व्वव… वो भाभी तो मनोज सर की गोद में बैठी हैं…

.!मैं सारा किस्सा एकदम से समझ गया… दिल चाह रहा था कि भागकर वहाँ पहुँच जाऊँ…

मैंने मधु को निर्देश दिया- सुन मधु फोन ऐसे ही वहीं खिड़की पर रख दे.. स्पीकर उनकी तरफ रखना… और तू वहीं खड़े होकर देखती रह…मधु ने तुरंत ही यह काम कर दिया और मुझे आवाज आने लगी…

मनोज- सच सलोनी.. कसम से तुम तो बहुत सेक्सी हो गई हो… मुझे पहले पता होता तो चाहे कुछ हो जाता.. मैं तो तुमसे ही शादी करता…

सलोनी- हाँ… और जैसे मैं कर ही लेती… मैंने तो पहले ही सोच रखा था कि शादी माँ डैड की मर्जी से ही करूँगी… और यकीन मानना, मैं बहुत खुश हूँ…

‘पुच्छ पुच च च च च च पुच…’

सलोनी- ओह क्या करते हो मनोज… अपना मुँह पीछे रखो ना… जब से आई हूँ, चूमे ही जा रहे हो..

मनोज- अरे यार, कंट्रोल ही नहीं हो रहा…

सलोनी- हाँ, वो तो मुझे नीचे पता चल रहा है… कितना चुभ रहा है…

मनोज- हा हा हा… यार, यह तुमको देखकर हमेशा ही खड़ा होकर सलाम करता था मगर तुमने कभी इस बेचारे का ख्याल ही नहीं किया..

सलोनी- अच्छा… तो तुम्हारे दोस्त के साथ दगा करती..?

मनोज- इसमें दगा की क्या बात थी यार? तुम तो हमेशा से खुले माइंड की रही हो… ऐसे तो अब भी तुम अपने पति से दगा कर रही हो…

सलोनी- क्यों ऐसा क्या किया मैंने… ऐसी मस्ती तो तुम पहले भी किया करते थे.. हे… हे… क्यों याद है बुद्धू… या याद दिलाऊँ?

मनोज- अरे उस मस्ती के बाद ही तो मैं पागल हो जाता था… फिर पता नहीं क्या क्या करता था… तुम तो हाथ लगाने ही नहीं देती थी… तुम्हारे लिए तो बस विनोद ही सब कुछ था…

सलोनी- अरे नहीं यार… तुम ही कुछ डरपोक किस्म के थे…

मनोज- अच्छा मैं डरपोक था…?? वो तो विनोद की समझ कुछ नहीं कहता था…वरना न जाने कबका.. सब कुछ कर देता…

सलोनी- अच्छा जी क्या कर देते??? बोल तो पाते नहीं थे.. और करने की बात करते हो…

मनोज- बड़ी बेशरम हो गई है तू…

सलोनी- मैं हो गई हूँ बेशरम… यह तेरा हाथ कहाँ जा रहा है… चल हटा इसको…

मनोज- अरे यार, बहुत दिनों से तेरी ये चीजें नहीं देखी.. शादी के बाद तो कितना मस्ता गई है.. जरा टटोलकर ही देखने दे…

सलोनी- जी बिल्कुल नहीं… ये सब अब उनकी अमानत है… तुमने गोद में बैठने को बोला तो प्यार में मैं बैठ गई… बस इससे ज्यादा कुछ नहीं… समझे बुद्धू… वरना मैं तुम्हारे यहाँ जॉब नहीं करुँगी…

मनोज- क्या यार?? तुम भी न…ऐसे ही हमेशा के एल पी डी कर देती हो..

सलोनी- हा हा हा हा… मुझे पता है तुम्हारे के एल पी डी का मतलब… और ज्यादा हिलाओ मत… कहीं यन मेरी जींस में छेद ना कर दे…

मनोज- हा हा… तो दे दो ना इस बेचारे का छेद इसको.. फिर अपने आप ढूंढ़ना बंद कर देगा…

सलोनी- जी नहीं, यहाँ नहीं है इसका छेद… इसको कहीं और घुसाओ…

मनोज- अरे यार, कम से कम इसको छेद दिखा तोदो… बेचारा कब से परेशान है…

सलोनी- अच्छा जैसे पहले कभी देखा ही नहीं हो… अब तो रहने ही दो…

मनोज- अरे यार तब की बात अलग थी… तब तो मैं दोस्त का माल समझ कुछ ध्यान से नहीं देखता था..

सलोनी- हाँ हाँ मुझे सब पता है… कितना घूरते थे… और मौका लगते ही छूते और सहलाते थे.. वो तो मैंने कभी विनोद से कुछ नहीं कहा… वरना तुम्हारी दोस्ती तो ही गई थी… हे हे…

मनोज- अच्छा तो यह तुम्हारा अहसान था?

सलोनी- और नहीं तो क्या…

मनोज- तो थोड़ा सा अहसान और नहीं कर सकती थीं…पता नहीं था क्या कि मैं कितना परेशान रहता था…

सलोनी- वैसे सच बोलूं… तुमने कभी हिम्मत नहीं की… तुम्हारे पास तो कई बार मौके थे… और शायद मैं मना भी नहीं करती…

मनोज- अच्छा इसका मतलब.. मैं बेबकूफ था…ऐं ऐं ऐं ऐं…

सलोनी- हा हा… हा हा… हा हा… ओह… रहने दो न.. बहुत गुदगुदी हो रही है… अहा… ये क्या कर रहे हो…?? अरे छोड़ो न इन्हें…

मनोज- यार सच बहुत जानदार हो गए हैं तुम्हारे बूब.. कितना मजा आ रहा है इनको पकड़ने में…

सलोनी- देखो मैं अब जा रही हूँ ओके.. तुम बहुत परेशान कर रहे हो…

मनोज- अरे यार तुमने ही तो कहा था… अब कोशिश कर रहा हूँ तो मना कर रही हो…

सलोनी- ये सब उस समय के लिए बोला था… अब मैं किसी और की अमानत हूँ…

मनोज- अरे यार, मैं कौन का अमानत में ख़यानत कर रहा हूँ.. जैसी है वैसी ही पैक करके पहुँचा दूंगा…

सलोनी- हाँ मुझे पता है.. कैसे पैक करोगे… मेरे मियां को दाग पसंद नहीं है समझे बुद्धू…

मनोज- कह तो ऐसे रही हो जैसे अब तक बिल्कुल साफ़ और चिकनी हो… न जाने कितने दाग लग गए होंगे…

सलोनी- जी नहीं… मेरी उस पर एक भी दाग नहीं है.. जैसे तुमने पहले देखी थी.. अब तो उससे भी ज्यादा अच्छी हो गई है…

ओह माय गॉड !इसका मतलब विनोद तो उसका बॉय फ्रेंड था ही..फिर यह मनोज भी क्या उसको नंगी देख चुका है…मैं और भी ध्यान से उनकी बातें सुनने लगा…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 54

मैं एक लाइव ऑडियो सुनते हुए अपनी ही सेक्सी बीवी के रोमांस की कल्पना कर रहा था कि कैसे मेरी प्यारी सलोनी अपने पुराने दोस्त कि गोदी में बैठी होगी… उसने क्या-क्या पहना होगा…

वैसे उनकी बातों से लग रहा था कि उसने जीन्स और टॉप या शर्ट पहनी होगी…

मनोज ना जाने कहाँ कहाँ और किन किन अंगों को छू रहा होगा और मसल रहा होगा…

मनोज का लण्ड ना जाने कितना बड़ा होगा और सलोनी के मखमल जैसे चूतड़ों में कहाँ रगड़ रहा होगा या हो सकता है कि गड़ा होगा …

ये विचार आते ही मेरा कई बार का झड़ा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा…

मैं अपने हाथों से अपने लण्ड को मसलते हुए उनकी बातें सुनते हुए मस्त होने लगा…

मुझे मधु से जलन सी होने लगी कि वो तो लाइव मजे ले रही होगी और मैं यहाँ केवल सुन पा रहा हूँ…

तभी उनकी आवाजें आने लगी…

सलोनी- ओह मनोज…तुम क्या कर रहे हो ?? समझा लो अब अपने इस पप्पू को… ठीक से बैठने भी नहीं दे रहा…

.!

मनोज- कहाँ यार ..कितना तो शांत है… वरना इतने पास घर का द्वार देख .. अब तक तो दरवाजा तोड़कर अंदर घुस जाता ..

सलोनी- हाँ हाँ रहने दो.. यह दरवाजा इसके लिए नहीं खुलेगा… और खिला क्या रहे हो आजकल इसको.. जो इतना मोटा होता जा रहा है… पहले तो काफी कमजोर था ना… हा हा हा…

मनोज- हाँ हाँ… उड़ा लो मजाक ..तुमको तो उस समय केवल विनोद का ही पसंद आता था… मेरा कभी तुमने ध्यान दिया… हाथ तक तो नहीं लगाती थी.. हर समय विनोद का ही पकड़े रहती थीं… पता है उस समय मेरे इस पर क्या गुजरती थी…??

सलोनी- अच्छा तुम ही हर समय वहीं घुसे रहते थे.. तुमको तो देखने में ना जाने क्या मजा आता था?? छुप-छुप कर हमको ही देखते रहते थे… और झूट मत बोलो.. मुझे याद है अच्छी तरह से… 2-3 बार मैंने तुम्हारे लल्लू को पकड़ा तो था… तभी तो उसकी सेहत के बारे में याद है…

मनोज- हाँ सब पता है… मुझे देखने को भी मना करते थे… हर समय कहीं ना कहीं भेजने का सोचते रहते थे… और उसको पकड़ना कहते हैं क्या?? कभी मेरे इस बेचारे को पकड़कर किस किया… प्यार से चूमा क्या तुमने… बस पकड़कर पीछे को धकेल दिया… तुमको पता है कितना गुस्सा आता था मुझे…

सलोनी- हाँ, उस समय तुमको बचा लेती थी बच्चू.. अगर विनोद को मालूम हो जाता कि तुम भी अपना लिए फिर रहे हो न तो सोचो वो क्या कर देता… उसको तुमसे बहुत प्यार था… इसलिए देखने या छूने में कुछ नहीं कहता था… मगर इसका मतलब यह थोड़े ही था कि सब कुछ कर लेते..

मनोज- अरे यार, मुझे पता होता कि तुम किसी और से शादी करने वाली हो.. तो कसम से मैं नहीं छोड़ता… वो तो विनोद कि वजह से मैं शांत रहता था..

सलोनी- अच्छा जी.. तो क्या करते???

मनोज- अच्छा तो बताऊँ… यह देख… जैसे पूरी नंगी लेटी रहती थी ना और मेरे पूरे घर में घूमती रहती थी… ना जाने कितनी बार…

सलोनी- अह्ह्हाआ ओह धीरे से… क्या कितनी बार??? हे हे…मनोज- अरे यार, तुम्हारे इस प्यारे से छेद को अपने पप्पू से पूरा भर देता…

सलोनी- ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ… वहाँ से अपना हाथ हटाओ… ऊपर रखने दिया बस उतना ही बहुत है…

मनोज- अरे यार, ऊपर से ही रख रहा हूँ… कौन सा चेन खोलकर अंदर डाल दिया…

सलोनी- सोचना भी मत…

मनोज- अरे इतना नखरा क्यों कर रही हो…?? दिखा दो ना एक बार… देखूँ तो सही, पहले में और अब में कितना अंतर आ गया..

सलोनी- नहीं जी.. कोई अंतर नहीं आया… अभी भी पहले जैसी ही है… और अब यह किसी की अमानत है ! समझे…? जब मौका था तब तो तुमने चखा नहीं… तो अब तो तुमको देखने को भी नहीं मिलेगी…

मनोज- और अगर जब विनोद आएगा तो उसको भी मना करोगी?

सलोनी- और नहीं तो क्या…?? उसकी भी शादी हो गई.. मेरी भी… अब उसको क्या मतलब..?? वो तो तुमने अभी तक शादी नहीं की..

इसलिए तुमको थोड़े मजे करा दिए… पर इससे ज्यादा कुछ नहीं.. समझे बुद्दू..

मनोज- वाह यह तो वही बात हुई ना… कि भूखे के आगे खाना तो रखा.. पर खिलाया नहीं..

सलोनी- हाँ तुम जैसे भूखे ही होगे ना… ना जाने कहाँ कहाँ.. क्या क्या करते रहते होगे…

मनोज- अरे चलो ठीक है… पर थोड़ा सा दूध तो पिला दो यार.. कितने प्यारे हो गए हैं तुम्हारे ये मम्मे…

सलोनी- अच्छा बस अब छोड़ भी दो ना… पूरा टॉप खराब कर दोगे तुम… मुझे अभी घर भी वापस जाना है…

मनोज- अरे यार पिला दो ना… क्यों इतना नखरे कर रही हो… पहले भी तो पीता था…इस पर तो तुमको ऐतराज नहीं होता था… चलो उतार दो अब टॉप.. वरना फाड़ दूंगा हाँ..

सलोनी- ओह रुको ना यार.. एक मिनट… अह्हाआआ… नहींईइइइयय यार, बस ऊपर कर लेती हूँ… इतना ही… अर्रर्र रे… कोई आ जाएगा बाबा… बस्स्स्स्स… अब नहीईईईई…

मनोज- वाओ यार क्या मस्त गोले हैं… तुम क़यामत हो यार !

पुचह्ह्ह्ह्ह… पुच पुच चचच मु ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… पुच पुच…

सलोनी- ओह धीरे यार… अह्ह्ह्ह्ह… अह… दांत नहीईइइ इइइइ… लाल कर दिया… तुझे सब्र नहीं है… कबाड़ा करेगा क्या?

मनोज- मजा आ गया… क्या टेस्ट है यार… ऐसा लग रहा है…जैसे हर सिप के साथ… मुँह मीठे दूध से भर जा रहा हो… बिल्कुल मक्खन जैसे हैं तेरे मम्मे…

सलोनी- ओह अब ये क्या कर रहे हो…???

मनोज- एक मिनट यार… सच तू तो बिलकुल मॉडल लगती है यार… पूरे गोल और तने हुए मम्मे ..कितनी पतली कमर.. और बिल्कुल चिकना पेट… और मन मोहने वाली नाभि.. वाओ यार… और तेरी ये लो वेस्ट जीन्स… कितनी नीची है यार…गजब्ब्ब यार ! तूने तो कच्छी भी नहीं पहनी… क्या बात है यार ???? सच में सेक्स की देवी लग रही है…

सलोनी- ओह क्या कर रहे हो… नहीं ना बटन मत खोलो ओह… अह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्हाआआ आआ…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 55

मनोज- वाओ यार क्या मस्त गोले हैं… तुम क़यामत हो यार !पुचह्ह्ह्ह्ह… पुच पुच चचच मु ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… पुच पुच…

सलोनी- ओह धीरे यार… अह्ह्ह्ह्ह… अह… दांत नहीईइ… लाल कर दिया… तुझे सब्र नहीं है… कबाड़ा करेगा क्या??

मनोज- मजा आ गया… क्या टेस्ट है यार… ऐसा लग रहा है…जैसे हर सिप के साथ… मुँह मीठे दूध से भर जा रहा हो… बिल्कुल मक्खन जैसे हैं तेरे मम्मे…

सलोनी- ओह अब ये क्या कर रहे हो…???

मनोज- एक मिनट यार… सच तू तो बिलकुल मॉडल लगती है यार… पूरे गोल और तने हुए मम्मे ..कितनी पतली कमर.. और बिल्कुल चिकना पेट… और मन मोहने वाली नाभि.. वाओ यार… और तेरी ये लो वेस्ट जीन्स… कितनी नीची है यार…गजब्ब्ब यार ! तूने तो कच्छी भी नहीं पहनी… क्या बात है यार ???? सच में सेक्स की देवी लग रही है…

सलोनी- ओह क्या कर रहे हो… नहीं ना बटन मत खोलो ओह… अह्ह्ह् ह्ह्ह्हाआ आआआ…

यह रब भी कितनी जल्दी अपना बदला पूरा कर लेता है..

अभी कुछ देर पहले ही मैं अपने केबिन में शालू को नंगी करके उसके रसीले मम्मे चूस रहा था… और अब मनोज अपने ही केबिन में मेरी बीवी के टॉप को ऊपर कर उसके मम्मे चूस रहा था…

मैं उसके गोरे जिस्म की कल्पना कर रहा था…

मैंने उसकी लो वेस्ट जीन्स देखी थी… पहले भी वो कई बार पहन चुकी थी… मगर कच्छी के साथ ही पहनती थी…

जीन्स उसके मोटे गदराये चूतड़ से 3 इंच नीचे तक ही आती है… उसकी कच्छी का काफी हिस्सा दिखता रहता है..

और अब तो उसने बिना कच्छी के पहनी है…

उसकी जीन्स का बटन उसकी चूत की लकीर से एक इंच ऊपर ही था और फिर २ इंच की चेन है.. जिसको खोलते ही उसकी चूत भी साफ़ दिख जाती है..

जीन्स इतनी टाइट है कि बटन खुलते ही चेन अपने आप खुल जाएगी..

मैं यही सोच रहा था कि मनोज पूरा मजा ले रहा होगा.. 100% उसकी उँगलियाँ मेरी बीवी की चूत पर होंगी…

उधर उनकी आवाजें आनी कम तो हो गई थीं.. मतलब अब उनके हाथ ज्यादा काम कर रहे थे…

सलोनी- ओह मनोज प्लीज मत करो… अह्हाआ… देखो मान जाओ.. कोई आ जायेगा अभी… और बखेड़ा हो जायेगा…

पुच च च च च शस्स्… चपरर्र… पुच…

मनोज- क्या लग रही हो तुम यार ! सच पूरा बम का गोला हो… यार तुम्हारी मुनिया तो और भी प्यारी हो गई… लगता है जैसे स्कूल में पड़ने वाली लड़की की हो…

सलोनी- हाँ मुझे पता है… मेरी बहुत छोटी हो गई है… और तुम्हारा बहुत बड़ा… हा हा… अब अपना यह मुँह बंद करो… ओके ज्यादा लार मत टपकाओ… अपना हाथ मेरी जीन्स से बहार निकालो.. चलो.. मुझे जाना भी है यार… बाहर मधु वेट कर रही होगी …

अह्हाआ आआ ओह बस्स्स्स्स… न यार …ओह ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह

मनोज- वाओ यार सच यहाँ से तो नजर ही नहीं हटती.. क्या मजेदार और चिकनी है… और क्या खुशबू है यार…

सलोनी- अच्छा हो गया बस बहुत याराना… चलो अब पीछे हो…

मनोज- नहीं यार… ऐसा जुल्म मत करो… ओह नहीं यार… अभी रुको तो… बस एक मिनट… यार अभी कर लेना बंद…

सलोनी- क्यों… अब क्या अंदर घुसोगे…

मनोज- अरे नहीं यार… इतनी जगह कहाँ है इसमें.. बस जरा अपने पप्पू को भी दिखा दूँ… बहुत दिनों से उसने कोई अच्छी मुनिया नहीं देखी…

सलोनी- जी नहीं… रहने दो… यहाँ कोई प्रदर्शनी नहीं लगी है.. जो कोई भी आये और देख ले…

.!

उउउउइइइइ री रे रे बाप रे याआआआअरर्र… ये तो बहुत बड़ा और कितना गरम है… अह्ह्ह्ह्हाआआ… आआ

ओह ! लगता है मनोज ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था.

मनोज- अह्ह्ह… ऐसे ही जान.. कितना सुकून मिल रहा है इसको… यह तो तुम्हारे हाथ की गर्मी से ही पिघलने लगा…

मुझे पता था… यह सलोनी की सबसे बड़ी कमजोरी है.. लण्ड देखते ही उसे अपने हाथ से पकड़ लेती है…

इस समय वो जरूर मनोज का लण्ड पकड़ ऊपर से नीचे नाप रही होगी…

मनोज- अह्ह्ह्हाआ…आआ…

सलोनी- सच यार …कितना मोटा और बड़ा हो गया है यार ये तो…

मनोज- आअह्ह्ह्ह्हाआ… अरे हाँ यार… मुझे भी आज यह पहली बार इतना मोटा नजर आ रहा है.. लगता है तुम्हारी मुनिया देख फूल रहा है साला… हा हा…

सलोनी- ओह सीधे रहो ना.. मेरी जीन्स क्यों खींच रहे हो…

मनोज- अरे अह्ह्हाआआ… ओह यार ये इतनी टाइट क्यों है… नीचे क्यों नहीं हो रही… प्लीज जरा देर के लिए उतार दो ना…

सलोनी- बिलकुल नहीं… देखो मेरी जीन्स भी मना कर रही है… हमको और आगे नहीं बढ़ना है, समझे…

मनोज- यार, मैं तो मर जाऊँगा… अह्ह्हाआ…

सलोनी- हाँ जैसे अब तक कुछ नहीं किया तो जैसे मर ही गए…

मनोज- यार, जरा सी तो नीचे कर दो.. मेरे पप्पू को मत तरसाओ… एक चुम्मा तो करा दो ना अपनी मुनिया का…

सलोनी- तो यार पूरी तो बाहर है… लो अह्ह्ह्हाआआआ… कितना गरम है यार… हो गया ना चुम्मा…ओह ! लगता है सलोनी ने मनोज का लण्ड अपनी चूत से चिपका लिया था.

मनोज- आआआ आह्ह ह्ह्हाआ नहीईईई और करो याआअरर्र…

सलोनी- क्या मोटा सुपारा है यार.. बिल्कुल लाल मोटे आलू जैसा..

मनोज- हाइईन्न्न हैं…कक्क क्या बोला तुमने…

सलोनी- अरे यार इसको आगे वाले को सुपारा ही कहते हो ना…

मनोज- हे हे व्व्वो हाँ बिलकुल.. लेकिन तुम्हारे मुँह से सुनकर मजा आ गया… एक बात पूछूं.. क्या तुम सेक्स के समय इनके देशी नाम भी बोलती हो?

सलोनी- आरए हाँ यार.. वो सब तो अच्छा ही लगता है ना…

मनोज- वाओ यार… मैं तो वैसे ही शर्मा रहा था… यार प्लीज मेरा लण्ड को कुछ तो करो यार…

सलोनी- अरे, तो कर तो रही हूँ… पर प्लीज उसके लिए मत कहना… मैं अभी तुम्हारे साथ कुछ भी करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हूँ…

मनोज- प्लीज यार अह्ह्ह्हाआआआ… ऐसे ही अह्ह्ह्ह… तुम्हारे हाथ में तो जादू है यार… अह्ह्हा… आआ… ओह्ह्ह आअह्ह्ह्हा… आआआ…

पता नही चल रहा था कि सलोनी मनोज के लण्ड से हाथ से ही कर रही थी या मुँह से? वैसे उसको तो चूसने की बहुत आदत है…

तभी…आह्ह्ह्हाआ… आआआ… आआ उउउउउ…

सलोनी- ओह, तुमने मेरा पूरा हाथ ख़राब कर दिया… वैसे.. वाह कितना सारा… यार आराम से… बस्स्स्स्स ना हो गया अब तो…ठक ठक…ठक ठक…

सलोनी- अर्र रे कौन आया..?

मनोज- अरे सोहन होगा… कॉफ़ी लाया होगा… जल्दी से सही कर लो…

मनोज- आओ कौन है?‘-हम हैं सर…कॉफ़ी…’

मनोज- अरे इधर स्टूल पर क्यों बैठ रही हो.. सामने कुर्सी पर बैठो न..

सलोनी- अरे नहीं, मैं ठीक हूँ…

मनोज- हाँ लाओ सोहन… यहाँ रख दो !

सोहन- जी सर……..

…ओह ओह सॉरी सर…

मनोज- देखकर नहीं रख सकते… सब गिरा दी…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 56

हर अगला पल एक नए रोमांच को लेकर आ रहा था मेरे जीवन में ! मैं फोन हाथ से पकड़े कान पर लगाये हर हल्की से हल्की आवाज भी सुनने की कोशिश कर रहा था.

अभी-अभी मेरी बीवी ने अपने पुराने दोस्त के लण्ड को अपने हाथ से पकड़कर उसका पानी निकाला था… हो सकता है कि उसने लण्ड को चूमा भी हो !

ना केवल मेरी बीवी सलोनी अपने दोस्त के लण्ड से खेली बल्कि अपने कपड़े हटा कर अपने कीमती खजाने, वो अंग जो हमेशा छुपे रहते हैं… उनको भी नंगा करके उसने अपने दोस्त को दिखाया !

जहाँ तक मुझे समझ आया… उसने अपनी चूचियाँ नंगी करके उससे चुसवाई, मसलवाई… अपनी चूत को ना केवल नंगी करके दिखाया बल्कि चूत को दोस्त के हाथ से सहलवाया भी… हो सकता है उसने ऊँगली भी अंदर डाली हो…

कुल मिलाकर दोनों अपना पूरा मनोरंजन किया था… और साथ में मेरा, मधु और आपका भी…

उस आवाज से मुझे यह तो लग गया था कि वहाँ कुछ गिरा था… पर क्या और कहाँ… और अभी वहाँ क्या चल रहा था?पता नहीं चल रहा था…

तभी मुझे मधु की आवाज सुनाई दी- हेलो भैया…बहुत समझदार थी मधु… उसने मेरे दिल की बात सुन ली थी…

मैं- हाँ मधु… अभी क्या हो रहा है?

मधु- हे हे भैया… भाभी तो ना जाने क्या क्या कर रही थी अंदर… आपने सुना न… हे हे हे हे…

मैं- अरे तू पागलों की तरह हंसना बंद कर और बता मुझे !

मधु- क्या भैया??

मैं- अरे तूने जो देखा और अभी ये सब क्या हुआ !

मधु- अरे भाभी स्टूल पर बैठी हैं ना… तो वो चाय जो लेकर आया था उसने भाभी को देखते हुए चाय गिरा दी !

मैं- अरे कहाँ गिरा दी… और क्या देखा उसने?

मधु- वो भाभी के बैठने से उनकी जीन्स नीचे हो गई थी, और उनके चूतड़ देख रहे थे… बस उनको देखते ही उसने चाय मेज पर गिरा दी… हे हे हे हे… बहुत मजा आ रहा है…

मैं- ओह फिर ठीक है… किसी पर गिरी तो नहीं ना?

मधु- नहीं… पर वो आदमी चाय साफ़ करते हुए अभी भी भाभी के चूतड़ ही निहारे जा रहा है…

.!

मैं- क्यों? सलोनी कुछ नहीं कर रही?

मधु- अरे वो तो उसकी और पीठ करके बैठी हैं ना… और उसकी नजर वहीं है, घूर घूर कर देख रहा है…

मैं- चल ठीक है तू अपनी जगह बैठ… शाम को मिलकर बात करते हैं.

तभी मेरा केबिन में रोज़ी ने प्रवेश किया…ओह मैं सोच रहा था कि शालू को बुलाकर थोड़ा ठंडा हो जाता क्योंकि इस सब घटनाक्रम से मेरा लण्ड बहुत गर्म हो गया था.मगर रोज़ी को भी देख दिल खुश हो गया… आखिर आज सुबह ही उसकी चूत और गांड के दर्शन किये थे…

रोज़ी- मे आई कम इन सर?

मैं- हाँ बोलो रोज़ी क्या हुआ? क्या फिर टॉयलेट यूज़ करना है?

वो बुरी तरह शरमा रही थी, उसकी नजर ऊपर ही नहीं उठ रही थी, वो जमीन पर नजर लगाये अपने पैर से जमीन को रगड़ भी रही थी…

रोज़ी- ओह…ववव वो नहीं सर…

मैं- अरे यार… तुम इतना क्यों शरमा रही हो… ये सब तो नार्मल चीजें हैं… हम लोगों को आपस में बिल्कुल खुला होना चाहिए… तभी जॉब करने में मजा आता है… वरना रोज एक सा काम करने में तो बोरियत हो जाती है…

रोज़ी- जी सर… वो आज आपने मुझे देख लिया न तो इसीलिए…

मैं – हा हा… अरे… मैं तो तुमको रोज ही देखता हूँ… इसमें नया क्या?

मैं उसका इशारा समझ गया था पर उसको सामान्य करने के लिए बात को फॉर्मल बना रहा था… मैं चाह रहा था कि जल्द से जल्द रोज़ी खुल जाये और फिर से चहकने लगे !

रोज़ी- अरे नहीं सर… आप भी ना…

लग रहा था कि वो अब कुछ नार्मल हो रही थी, वो आकर मेरे सामने खड़ी हो गई थी…मैंने उसको बैठने के लिए बोला…

वो मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गई…

रोज़ी- वो सर, आपने मुझे उस हालत में देख लिया था…

मैं- ओह क्या यार? क्या सीधा नहीं बोल सकती कि नंगी देख लिया था !

रोज़ी- हम्म्म्म… वही सर…

मैं- अरे तो क्या हुआ…?? वो तो शालू ने भी देखा था… और तुम्हारे बदन पर केवल तुम्हारे पति का कॉपीराइट थोड़े ही है कि उसके अलावा कोई और नहीं देखेगा?

रोज़ी- क्या सर? आप कैसी बात करते हो… एक तो आपने मुझे वैसे देख लिया… और अब ऐसी बातें… मुझे बहुत शर्म आ रही है…

मैं- यह गलत बात है रोज़ी जी… कल से अपनी यह शर्म घर छोड़कर आना… समझी… वरना मत आना…

रोज़ी- नहीं सर, ऐसा मत कहिये प्लीज… यहाँ आकर तो मेरा कुछ मन बहल जाता है वरना…

मैं- अरे कोई परेशानी है क्या? रोज़ी, तुम्हारी शादी को कितना समय हो गया?

रोज़ी- यही कोई साढ़े चार साल…

मैं- फिर कोई बेबी?

रोज़ी- हुआ था सर, पर रहा नहीं…

मैं- ओह आई एम सॉरी…

रोज़ी- कोई बात नहीं सर…

मैं- फिर दुबारा कोशिश नहीं की?

रोज़ी- डॉक्टर ने अभी मना कर रखा है सर !

मैं- ओह… तुम्हारी सेक्स लाइफ तो सही चल रही है ना?

रोज़ी- ह्म्म्म्म… ठीक ही है सर…

वो अब काफी नार्मल हो गई थी… मेरी हर बात को सहज ले रही थी…

मैं- अरे ऐसे क्यों बोल रही हो? कुछ गड़बड़ है क्या?

रोज़ी- नहीं सर, ठीक ही है…

वो अभी भी आपने बारे में सब कुछ बताने में झिझक रही थी… मैं माहोल को थोड़ा हल्का करने के लिए- वैसे रोज़ी, सच… तुम अंदर से भी बहुत सुन्दर हो… तुम्हारा एक एक अंग साँचे में ढला है… बहुत खूबसूरत ! सच…रोज़ी बुरी तरह से लजा गई…

रोज़ी- सर…

मैं- अरे यार, इतना भी क्या शर्माना…

मैंने अपनी पेंट की ज़िप खोल अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था क्योंकि वो बहुत देर से तने तने अंदर दर्द करने लगा था… मेरा लण्ड कुछ देर पहले सलोनी और अब रोज़ी की बातों से पूरी तरह खड़ा हो गया था और लाल हो रहा था…

मैं अपनी कुर्सी से उठकर रोज़ी के पास जाकर खड़ा हुआ…

मैं- लो यार, अब शरमाना बंद करो… मैंने तो तुमको दूर से नंगी देखा पर तुम बिल्कुल पास से देख लो… हा हा… और चाहो तो छूकर भी देख सकती हो…

रोज़ी की आँखें फटी पड़ी थी… वो भौंचक्की सी कभी मुझे और कभी मेरे लण्ड को निहार रही थी…मैं डर गया कि पता नहीं क्या करेगी…

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कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 57

मैंने अपनी पेंट की ज़िप खोल अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था क्योंकि वो बहुत देर से तने तने अंदर दर्द करने लगा था… मेरा लण्ड कुछ देर पहले सलोनी और अब रोज़ी की बातों से पूरी तरह खड़ा हो गया था और लाल हो रहा था…

मैं अपनी कुर्सी से उठकर रोज़ी के पास जाकर खड़ा हुआ…

मैं- लो यार, अब शरमाना बंद करो… मैंने तो तुमको दूर से नंगी देखा पर तुम बिल्कुल पास से देख लो… हा हा… और चाहो तो छूकर भी देख सकती हो…

रोज़ी की आँखें फटी पड़ी थी… वो भौंचक्की सी कभी मुझे और कभी मेरे लण्ड को निहार रही थी…

मैं डर गया कि पता नहीं क्या करेगी…

रोज़ी मेरे केबिन में कुर्सी पर बैठी कसमसा रही थी… 28-29 साल की एक शादीशुदा मगर बेहद खूबसूरत लड़की जिसको मेरे यहाँ ज्वाइन किये अभी एक महीना ही हुआ था…

उसकी आज सुबह ही मैंने नंगी चूत और चूतड़ के दर्शन कर लिए थे और इस समय वो कुर्सी पर बैठी थी…

मैं उसके ठीक सामने खड़ा था… मेरा लण्ड पेंट से बाहर था पूरी कड़ी अवस्था में… और वो रोज़ी से चेहरे के इतना निकट था कि उसके बाल उड़ते हुए मेरे लण्ड से टकरा रहे थे…

निश्चित ही उसको मेरे लण्ड की खुशबू आ रही होगी जो आज सुबह से ही मस्त था… नलिनी भाभी और शालू के थूक और चूत की खुशबू से लण्ड महक रहा था क्योंकि आज सुबह से तो मैंने एक बार भी लण्ड नहीं धोया था…

रोज़ी बहुत तेज साँस ले रही थी, उसकी घबराहट बता रही थी कि उसको इस तरह सेक्स करने की बिल्कुल आदत नहीं थी..

वो एक शर्मीली और शायद अब तक अपने पति से ही एक बंद कमरे में चुदी थी… और शायद अपने पति के अलावा उसने किसी का लण्ड नहीं देखा था…

ज़माने भर की घबराहट उसके चेहरे से नजर आ रही थी- …स्स्सर ये क्या कर रहे हैं आप? प्लीज इसको बंद कर लीजिये… कोई आ जाएगा…

मैं अपने लण्ड को और भी ज्यादा आगे आकर ठीक उसके गाल से पास लहराते हुए- …अरे क्या यार… मैंने कहा ना यहाँ हम सब दोस्तों की तरह रहते हैं… जब मैंने तुम्हारे अंग देखे हैं तो तुम मेरे अच्छी तरह से देख लो… मैं नहीं चाहता कि फिर मेरे सामने आते हुए तुमको जरा भी शर्म आये…

रोज़ी- ओह.. न…नही ऐसी कोई बा…त नहीं है.. मुझे बहुत डर ल…लग रहा है… प्लीज…

रोज़ी ने अपने दोनों हाथ अपनी आँखों पर रख लिए.

अब मैंने अपना लण्ड अपने हाथ से पकड़ कर लण्ड का टॉप रोज़ी हाथों के पिछले हिस्सों पर रगड़ा…रोज़ी के हाथ कांपने लगे…

मैं- यह गलत बात है यार रोज़ी… हम बाहर निकाले खड़े हैं और तुम देख भी नहीं रही?रोज़ी के मुख से जरा भी आवाज नहीं निकल रही थी…

उसके लाल कांपते होंठों को देख, जो बस जरा से खुले थे, मेरा दिल बेईमान होने लगा… मैंने लण्ड को हिलाते हुए ही… रोज़ी की नाक के बिल्कुल पास से लाते हुए उसके कांपते होंठों से हल्का सा छुआ..

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बस यही वो पल था जब रोज़ी को अपने होंठ सूखे होने का एहसास हुआ.. और उसने अपनी जीभ निकाल अपने होंठों को गीला करने का सोची.. और उसकी जीभ सीधे मेरे लण्ड के सुपारे को चाट गई…

लण्ड इस छुअन को बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसमें से एक दो बून्द पानी की बाहर चमकने लगी…

रोज़ी को भी शायद नमकीन सा स्वाद आया होगा… उसने एक चटकारा सा लिया कि यह कैसा स्वाद है..

और अबकी बार उसने अपने हाथ अपनी आँखों से हटा लिए…

रोज़ी ने आँखे खोलकर जैसे ही लण्ड को अपने होंठों के इतने पास देखा…

वो बुरी तरह शर्मा गई और उसको एहसास हो गया कि यह जो उसने अभी लिया वो किस चीज का स्वाद था…

उसकी तड़प देख मुझे एहसास हो रहा था कि यह इतनी जल्दी सब कुछ के लिए तैयार नहीं होगी… और मैं जबरदस्ती को बिल्कुल भी पसंद नहीं करता था… मैं चाहता था कि रोज़ी खुद पूरे खेल में साथ दे, तभी मजा आएगा…

मैंने रोज़ी के दोनों हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा- ओह, इतना क्यों शरमा रही हो यार… हम केवल थोड़ा सा एन्जॉय ही तो कर रहे हैं… जिससे हम दोनों को ही कुछ ख़ुशी मिल रही है.. अगर तुमको अच्छा नहीं लग रहा तो कसम से मैं कभी तुम्हें बिल्कुल परेशान नहीं करूँगा.. वो तो तुम खुद को नंगा देखे जाने से इतना शरमा रही थी तभी मैंने तुम्हारी शरम दूर करने के लिए ही ये सब किया…

रोज़ी- व्व्व वो बात नहीं… स्सर… प्पर !

मतलब उसका भी मन था मगर पहली बार होने से शायद घबरा रही थी.

इसका मतलब अभी उसको समय देना होगा.. धीरे धीरे सब सामान्य हो जायेगा…

मैं- अच्छा बाबा ठीक है… अब एक किस तो कर दो, मैंने अंदर कर लिया !

रोज़ी जैसे ही आँखे खोलकर आगे को हुई, एक बार फिर मेरा लण्ड उसके होंठों पर टिक गया, अबकी बार तो कमाल हो गया..

रोज़ी ने अपने हाथ से मेरा लण्ड पीछे करते हुए कहा- ओह सर.. आप भी ना… इसको अंदर कर लो.. मैं अभी इस सबके लिए तैयार नहीं हूँ…

मेरे दिल ने एक जैकारा लगाया.. वाओ इसका मतलब बाद में तैयार हो जाएगी…

मैंने उसको ज्यादा परेशान करना ठीक नहीं समझा… मैंने अपना लण्ड किसी तरह पेंट में अंदर किया और नार्मल हो अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गया…

रोज़ी अपनी जगह से उठकर- सॉरी सर, मैंने आपका दिल दुखाया…फिर कमबख्त कातिल मुस्कुराहट के साथ पूछा- क्या मैं आपका बाथरूम यूज़ कर सकती हूँ?मेरे कोई जवाब न देने पर भी वो मुस्कुराती हुई बाथरूम में घुस गई.

मैं कुछ देर तक उसकी हरकतों के बारे में सोचता रहा… फिर अचानक से मुझे जोश आया कि देखूँ तो सही कि कैसे सुसु कर रही है…

और अपनी जगह से उठकर मैं बाथरूम के दरवाजे तक गया…

मैं कई तरह से सोचता हुआ कि ना जाने बाथरूम में रोज़ी क्या कर रही होगी??अभी सूसू कर रही होगी…?या कर चुकी होगी…?कमोड पर साड़ी उठाये बैठी होगी…?या वैसे ही खड़ी होगी जैसा मैंने सुबह देखा था.. !!

अपने ख्यालों में उसकी सुसु करती हुई तस्वीर लिए मैंने बाथरूम का दरवाजा पूरा खोल दिया और…कहते हैं कि यह मन बावला होता है…यह प्रत्यक्ष प्रमाण मेरे सामने था…

एक मिनट में ही मेरे मन ने रोज़ी के ना जाने कितने पोज़ बना दिए थे… और दरवाजा खोलते ही ये सब के सब…

कहानी जारी रहेगी.

 
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