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अपडेट. 141
सलोनी- मैं उन दिनों स्कूल के बाद कॉलेज में नई आई थी कि मेरी मुलाकात सीड से हुई… बड़ा बांका और मजबूत दिखता था वह… और सुंदर भी था… उसे देखते ही मेरे दिल में अजीब सी बैचेनी होने लग गई थी.
मेरी ही एक सखी ने मुझे उससे मिलवाया और पहली ही मुलाकात में सीड ने मुझे ‘आई लाइक यू…’ कह दिया. एक रोज मैं कॉलेज जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी, तभी वो आ गया और बाइक से मुझे कहीं घुमाने को कहने लगा.
मैंने कहा कि कोई जानने वाला भी मिल या देख सकता है… तो वह मुझको अपने एक दोस्त के कमरे पर ले गया, बोला- यहाँ तो कोई नहीं देखेगा ना?मैंने उस दिन स्कर्ट, टॉप पहना था, उसने मेरी बहुत तारीफ की- बहुत खूबसूरत लग रही हो!फिर उसने मुझसे किस मांगी… और मैं तो उसे मना ही नहीं कर पाई थी.तब उसने कहा कि अब क्लास तो छुट ही गई है, आज हम खूब सारी बातें करते हैं, शाम को छुट्टी के वक्त मैं तुम्हें तुम्हारे घर के पास छोड़ दूँगा.मैंने उसे कुछ नहीं कहा, मुझे तो उसके साथ अच्छा लग रहा था.
इधर मैंने ध्यान दिया कि जोगिंदर ताऊ हाथ से सलोनी के पहले तलुए फ़िर घुटने और फिर उससे और ऊपर भी सहलाने लगे थे पर सलोनी कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी, वह शायद अपनी पुरानी यादों से बेचैन हो रही थी.
सलोनी- तुम दोनों वहाँ क्यों बैठे हो… मेरे समीप आकर यहाँ बैठो!सलोनी ने पप्पू और कलुआ को भी अपनी दोनों तरफ़ बिठा लिया और वे दोनों टोप के ऊपर से उसके पेट और मम्मों को सहलाने लगे.
सलोनी ने आहे कहना शुरू किया- तो मैंने भी उससे कहा हां, आज हम दोनों बहुत बातें करेंगे. वहाँ एक ही बिस्तर था, उस पर लेट गई. लेटने से मेरी स्कर्ट कुछ ऊपर हो गई. मैंने उस दिन लाल रंग की चड्डी पहनी हुई थी जो सीड ने देख ली.वह मुझसे बोला- वाह सलोनी, तुम्हें भी लाल रंग पसन्द है… मैं भी लाल कच्छा ही पहनता हूँ!और मेरे कुछ भी बोलने से पहले ही उसने अपनी जींस उतार दी.
पहले तो मुझको काफ़ी शरम आई पर उसको देखना अच्छा लगा! उसने छोटा सा लाल रंग का फ्रेंची पहना रखा था.साथ ही मुझे हंसी आ गई क्योंकि उसके लंड का उभार फ्रेंची से साफ दिख रहा था.
सलोनी इस समय तीन अजनबी पुरुषों के साथ थी, जिनमें दो लड़के थे और एक आदमी बड़ी उम्र का था, इनसे सलोनी की जान पहचान अभी थोड़ी देर पहले ही हुई थी. सलोनी उनके साथ इतनी बेबाकी से ना केवल साथ थी बल्कि पूरी खुलकर अपने जवानी के राज की कहानी बता रही थी… और लंड जैसे शब्दों का प्रयोग कर र्ही थी.
सलोनी- मैं उन दिनों स्कूल के बाद कॉलेज में नई आई थी कि मेरी मुलाकात सीड से हुई… बड़ा बांका और मजबूत दिखता था वह… और सुंदर भी था… उसे देखते ही मेरे दिल में अजीब सी बैचेनी होने लग गई थी.
मेरी ही एक सखी ने मुझे उससे मिलवाया और पहली ही मुलाकात में सीड ने मुझे ‘आई लाइक यू…’ कह दिया. एक रोज मैं कॉलेज जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी, तभी वो आ गया और बाइक से मुझे कहीं घुमाने को कहने लगा.
मैंने कहा कि कोई जानने वाला भी मिल या देख सकता है… तो वह मुझको अपने एक दोस्त के कमरे पर ले गया, बोला- यहाँ तो कोई नहीं देखेगा ना?मैंने उस दिन स्कर्ट, टॉप पहना था, उसने मेरी बहुत तारीफ की- बहुत खूबसूरत लग रही हो!फिर उसने मुझसे किस मांगी… और मैं तो उसे मना ही नहीं कर पाई थी.तब उसने कहा कि अब क्लास तो छुट ही गई है, आज हम खूब सारी बातें करते हैं, शाम को छुट्टी के वक्त मैं तुम्हें तुम्हारे घर के पास छोड़ दूँगा.मैंने उसे कुछ नहीं कहा, मुझे तो उसके साथ अच्छा लग रहा था.
इधर मैंने ध्यान दिया कि जोगिंदर ताऊ हाथ से सलोनी के पहले तलुए फ़िर घुटने और फिर उससे और ऊपर भी सहलाने लगे थे पर सलोनी कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी, वह शायद अपनी पुरानी यादों से बेचैन हो रही थी.
सलोनी- तुम दोनों वहाँ क्यों बैठे हो… मेरे समीप आकर यहाँ बैठो!सलोनी ने पप्पू और कलुआ को भी अपनी दोनों तरफ़ बिठा लिया और वे दोनों टोप के ऊपर से उसके पेट और मम्मों को सहलाने लगे.
सलोनी ने आहे कहना शुरू किया- तो मैंने भी उससे कहा हां, आज हम दोनों बहुत बातें करेंगे. वहाँ एक ही बिस्तर था, उस पर लेट गई. लेटने से मेरी स्कर्ट कुछ ऊपर हो गई. मैंने उस दिन लाल रंग की चड्डी पहनी हुई थी जो सीड ने देख ली.वह मुझसे बोला- वाह सलोनी, तुम्हें भी लाल रंग पसन्द है… मैं भी लाल कच्छा ही पहनता हूँ!और मेरे कुछ भी बोलने से पहले ही उसने अपनी जींस उतार दी.
पहले तो मुझको काफ़ी शरम आई पर उसको देखना अच्छा लगा! उसने छोटा सा लाल रंग का फ्रेंची पहना रखा था.साथ ही मुझे हंसी आ गई क्योंकि उसके लंड का उभार फ्रेंची से साफ दिख रहा था.
सलोनी इस समय तीन अजनबी पुरुषों के साथ थी, जिनमें दो लड़के थे और एक आदमी बड़ी उम्र का था, इनसे सलोनी की जान पहचान अभी थोड़ी देर पहले ही हुई थी. सलोनी उनके साथ इतनी बेबाकी से ना केवल साथ थी बल्कि पूरी खुलकर अपने जवानी के राज की कहानी बता रही थी… और लंड जैसे शब्दों का प्रयोग कर र्ही थी.