• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मेरी चालू बीवी complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
अपडेट. 141

सलोनी- मैं उन दिनों स्कूल के बाद कॉलेज में नई आई थी कि मेरी मुलाकात सीड से हुई… बड़ा बांका और मजबूत दिखता था वह… और सुंदर भी था… उसे देखते ही मेरे दिल में अजीब सी बैचेनी होने लग गई थी.

मेरी ही एक सखी ने मुझे उससे मिलवाया और पहली ही मुलाकात में सीड ने मुझे ‘आई लाइक यू…’ कह दिया. एक रोज मैं कॉलेज जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी, तभी वो आ गया और बाइक से मुझे कहीं घुमाने को कहने लगा.

मैंने कहा कि कोई जानने वाला भी मिल या देख सकता है… तो वह मुझको अपने एक दोस्त के कमरे पर ले गया, बोला- यहाँ तो कोई नहीं देखेगा ना?मैंने उस दिन स्कर्ट, टॉप पहना था, उसने मेरी बहुत तारीफ की- बहुत खूबसूरत लग रही हो!फिर उसने मुझसे किस मांगी… और मैं तो उसे मना ही नहीं कर पाई थी.तब उसने कहा कि अब क्लास तो छुट ही गई है, आज हम खूब सारी बातें करते हैं, शाम को छुट्टी के वक्त मैं तुम्हें तुम्हारे घर के पास छोड़ दूँगा.मैंने उसे कुछ नहीं कहा, मुझे तो उसके साथ अच्छा लग रहा था.

इधर मैंने ध्यान दिया कि जोगिंदर ताऊ हाथ से सलोनी के पहले तलुए फ़िर घुटने और फिर उससे और ऊपर भी सहलाने लगे थे पर सलोनी कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी, वह शायद अपनी पुरानी यादों से बेचैन हो रही थी.

सलोनी- तुम दोनों वहाँ क्यों बैठे हो… मेरे समीप आकर यहाँ बैठो!सलोनी ने पप्पू और कलुआ को भी अपनी दोनों तरफ़ बिठा लिया और वे दोनों टोप के ऊपर से उसके पेट और मम्मों को सहलाने लगे.

सलोनी ने आहे कहना शुरू किया- तो मैंने भी उससे कहा हां, आज हम दोनों बहुत बातें करेंगे. वहाँ एक ही बिस्तर था, उस पर लेट गई. लेटने से मेरी स्कर्ट कुछ ऊपर हो गई. मैंने उस दिन लाल रंग की चड्डी पहनी हुई थी जो सीड ने देख ली.वह मुझसे बोला- वाह सलोनी, तुम्हें भी लाल रंग पसन्द है… मैं भी लाल कच्छा ही पहनता हूँ!और मेरे कुछ भी बोलने से पहले ही उसने अपनी जींस उतार दी.

पहले तो मुझको काफ़ी शरम आई पर उसको देखना अच्छा लगा! उसने छोटा सा लाल रंग का फ्रेंची पहना रखा था.साथ ही मुझे हंसी आ गई क्योंकि उसके लंड का उभार फ्रेंची से साफ दिख रहा था.

सलोनी इस समय तीन अजनबी पुरुषों के साथ थी, जिनमें दो लड़के थे और एक आदमी बड़ी उम्र का था, इनसे सलोनी की जान पहचान अभी थोड़ी देर पहले ही हुई थी. सलोनी उनके साथ इतनी बेबाकी से ना केवल साथ थी बल्कि पूरी खुलकर अपने जवानी के राज की कहानी बता रही थी… और लंड जैसे शब्दों का प्रयोग कर र्ही थी.
 
सच है कि मेरी सलोनी जैसी कोई नहीं हो सकती… बहुत सेक्सी है मेरी बीवी!जोगिंदर समझ चुका था कि सलोनी अब उसे कुछ नहीं कहेगी, वह सलोनी को गर्म करने के चक्कर में था और उसका हाथ सलोनी की जांघों में ऊपर तक फ़िरने लगा था.

ऊपर पप्पू और कलुआ बीच बीच में ‘फिर आगे क्या हुआ?’ बोल रहे थे जबकि उनके हाथ उनके मनपसन्द खिलौने से खेलने में रत थे.उनकी हरकतों से सलोनी का टॉप बिल्कुल अस्त व्यस्त होकर ऊपर को उठ गया था, उसने ब्रा भी नहीं पहन रखी थी तो दोनों लड़के उसके नंगे उरोजों मसल रहे थे.

यह तो जोगिंदर ताऊ की नजर अभी तक वहाँ नहीं पड़ी थी शायद वरना अब तक सलोनी की चूचियों की हालत और ख़राब हो चुकी होती.जोगिंदर अपने हाथों को सलोनी की चूत तक पहुँचाना चाहता थे और सलोनी की चिकनी टांगों पर उनके हाथ फ़िसल रहे थे.और सलोनी भी अपने सेक्सी बदन पर तीन गैर मर्दों के हाथों का भरपूर मजा ले रही थी और सबको अपनी सेक्स कहानी भी सेक्सी आवाज में मज़े के साथ सुना रही थी.

सलोनी- उसका उभार देखकर मुझे हंसी आई और मैंने पूछ लिया कि मेरी कच्छी देख कर आपका यह क्यों खड़ा हो गया?वो हंस कर बोला- अरे ये तो ऐसा ही है, अभी खड़ा नहीं है.उसकी बात से मैं चौंक गई क्योंकि उसका तो बहुत बड़ा लग रहा था.

वह झूठ नहीं बोल रहा है, यह बात साबित करने के लिए उसने अपनी फ्रेंची भी निकाल दी और उसका लंड वाकयी टाइट नहीं था, फिर भी बहुत बड़ा दिख रहा था.उसने बताया कि जब उसका लंड खड़ा होता है तो इससे भी काफ़ी बड़ा होता है.फ़िर उसने पूछा- तुम देखना चाहती हो कि कितना बड़ा हो जाता है?

और उत्सुकता के कारण मैं उससे उस मुलाकात में ही खुल गई.उसने कहा कि लंड टाइट करने के लिए उसको मुझे हाथ में लेना होगा, मैंने ले लिय और फिर जल्दी टाइट करने के लिए उसने मेरी स्कर्ट और कच्छी भी उतरवा दी.

मैंने अपनी चूत पूरी साफ़ कर रखी थी क्योंकि मुझे अपनी चूत साफ करने की आदत शुरू से थी… जिसको देखकर वह बहुत खुश हुआऔर मेरी चूत को हाथ से सहलाने लगा.

इतना सुनते ही जोगिंदर ताऊ बहुत गर्म हो गये, सलोनी की चूत को अपने हाथ से पकड़ कर बोले- वाह मेमसाब, फिर तो आपकी चूत बहुत प्यारी होगी? मुझे भी चिकनी चूत चाटने में बहुत मजा आता है… क्या मैं आपकी चूत चाट सकता हूँ?

सलोनी ने नशीली आँखों से ताऊ को देखा, बोली- ताऊ सिर्फ़ चाटना… और कुछ नहीं!और जैसे ही ताऊ उसकी शॉर्टस को उतारने लगे, सलोनी ने उनको रोका- नहीं ताऊ.. ऐसे ही ऊपर से… मैंने इसको उतारने को मना किया है ना…

पता नहीं सलोनी उनके साथ क्या खेल खेल रही थी, बेचारे ताऊ को इतना तड़फा रही थी.ताऊ बेचारा सलोनी की चूत देखने के लिये मरा जा रहा था पर सलोनी उसे बार बार मना कर रही थी.

तभी ताऊ ने अपना पज़ामा उतार दिया, वे नीचे से पूरे नंगे हो गये थे, उनका लन्ड काफ़ी बड़ा था… सलोनी के पाँव का तलुआ उनके लंड को स्पर्श कर रहा था जिसे वो हिला भी रही थी.

सलोनी को अपने पाँव से लंड हिलाने और खेलने में बहुत मज़ा आता है, इस वक्त वह अपना वही मनपसंद खेल खेल रही थी.जोगिंदर ताऊ का हाथ शॉर्ट्स के ऊपर से ही सलोनी की चूत का पूरा जायजा ले रहा था.

पर मुझे इससे ज्यादा सलोनी और सीड के बीच चल रही चुदाई में ज्यादा रुचि थी जिसका बखान सलोनी पूरे रस के साथ कर रही थी.
 
अपडेट. 142

सलोनी- ताऊ… मेरे सहलाने और उसकी हरकतों से सीड का लंड एकदम खड़ा होकर 8-9 इंच का हो गया तो देख कर भी डर लगने लगा था पर उसे पकड़ कर मज़ा भी आ रहा था जैसे मैंने कोई डण्डा अपने हाथ में पकड़ लिया हो.

उसने पूछा- कैसा लगा मेरा लड़ और इसे पकड़ कर तुम्हें कैसा लग रहा है?मेरे मुख से बस ‘अच्छा’ ही निकला.

फिर उसने मेरा टॉप और ब्रा भी उतार दी और मेरे स्तन चूसने लगा, उसने कहा- सलोनी यार, तुम्हारे चूचे काफ़ी बड़े हैं, खुद मसलती हो या कोई और मसलता है?

मैंने कहा कि धत्त… ये तो हैं ही ऐसे! तुम्हारा इतना बड़ा है तो क्या किसी को चोदते हो?और पता है ताऊ उसने क्या कहा? उसने कहा- हाँ, मैं तो चोदता हूँ… मैंने अपनी चार फुफेरी और ममेरी बहनों की चूतों को चोदा है, जब भी उन से मिलता हूँ तो उनकी चूत चुदाई करता हूँ… इसी से मेरा लंड बड़ा हुआ है.

उसकी साफ दिल की बात सुनकर मुझे अच्छा लगा कि उसने मुझसे कुछ नहीं छिपाया.उसने कहा कि मैं खुद से तुम्हारे साथ कुछ नहीं करूंगा लेकिन तुम्हारा मन हो तो कह देना! जब तुम कहोगी, तभी तुम्हें चोदूँगा.

पर मेरा दिल तो उसके लंड को देखने के साथ ही करने लगा था… पर कैसे कहूँ उसे चोदने के लिए… मुझे लगा रहा कि वह क्या सोचेगा मेरे बारे में और डर भी लगा कि इतना बड़ा लंड है.. कहीं मेरी चूत ना फ़ट जाये!

मैं यह सोच रही थी कि उसने पूछ लिया- सलोनी क्या तुम पहले कभी चुदवा चुकी हो किसी से? कोई तुम्हारा बॉयफ़्रेन्ड, दोस्त, भाई रिश्तेदार या पहचान वाला?

इधर मैं सोचने लगा कि क्या सलोनी ने तब से पहले कभी चुदाई करवाई होगी? या सीड ही उसको पहली बार चोदने वाला होगा?पता नहीं सलोनी सही बतायेगी या नहीं?

मेरे कान और दिल दोनों ही जरूरत से ज्यादा तेज़ हो गये कि आगे सलोनी अब क्या राज खोलने वाली है?

तब तक सलोनी पूर्णतया वासना में डूब चुकी थी.मुझे पता है कि सलोनी को ऐसी सेक्सी बातें कितनी पसन्द हैं, चुदाई करते वक्त अगर ऐसे सेक्सी किस्से बतायें तो उसका मज़ा कई गुणा बढ़ जाता है.

इस वक्त यही तो हो रहा था… तीन मज़बूत लंडों के साथ वो मस्त लेटी हुई अपनी सबसे पुरानी चुदाई को याद करके सुना रही थी.शायद ताऊ को पता नहीं लगा कि सलोनी इस वक्त पूरी कामूकता में डूबी हुई है, अगर ताऊ चाहते तो अब उसकी शॉर्ट्स उतार कर उसकी लाजवाब चूत को नंगी कर चुके होते.

पर वो डर रहे थे, हाँ उनका हाथ जरूर शॉर्ट्स के ऊपर से सलोनी की चूत को छू रहा था.आज तो मेरा भाग्य बहुत अच्छा था, सलोनी की ऐसी चुदाई देख पाने का तो मैंने सोचा भी नहीं था, तीन मर्दों के साथ सलोनी ऐसे देखने को मिलेगी.और वो भी सलोनी के पुराने छिपे एक राज़ के साथ!

यह तो मुझे यकीन सा था कि सलोनी विवाह से पहले भी चुदाई का काफ़ी मजा ले चुकी है, आज इस बात का पक्का पता भी चल गया, पता चल रहा है, देखें कि उसकी चढ़ती जवानी के कौन कौन से राज़ पर्दे से बाहर आते हैं.

जोगिंदर ताऊ- तो क्या तुमने उस दिन से पहले चुदाई की थी किसी के साथ? हाँ, तो क्या सीड को बताया?

सलोनी – आह्ह्ह्ह हाह… मैंने उससे कुछ नहीं छिपाया, जब भी हम दोनों चुदाई करते तो ऐसे ही करते थे, वह अपनी और मैं अपनी चुदाई की बातें बताती थी. इससे मज़ा भी ज्यादा आता था, एक साथ दो चुदाइयों का आनन्द लेते थे और मेरी चूत भट्टी की भान्ति गर्म हो जाती थी, उससे जैसे आग निकलती जैसे अब भी निकल रही है.

ताऊ सलोनी की चूत मसलते हुए- सच्ची क्या? सही बोल रही हो मेमसाब यहाँ आग लगी है तो क्या इसको खोल दूँ?

सलोनी ने कोई जवाब नहीं दिया… वह भी अब निक्कर उतरवाना चाहती होगी, उसे अपने बदन पर कपड़े अब भार लग रहे होंगे.

और देखते ही देखते ताऊ ने सलोनी की निक्कर के बटन और ज़िप खोल कर उसे नीचे सरका दिया, सलोनी ने भी अपने कूल्हे उठा कर उसे उतर जाने दिया.

ताऊ सलोनी के पैरों से निक्कर निकाल रहे थे लेकिन उनकी नज़र सलोनी की दोनों नंगी टांगों के जोड़ पर थी.और इस समय सलोनी के बदन का सब से खूबसूरत हिस्सा… वो तिकोन, उसकी केले सी चिकनी उजली जांघों के बीच वो त्रिभुजाकार अंग… शायद उसके दोनों होंठ हल्के से खुले ही होंगे क्योंकि सलोनी के दोनों पैर दूर दूर हो गए थे, फैले गए थे.

सलोनी की चूत की सुन्दरता देख कर ताऊ की क्या हालत हुई, वो तो ताऊ के लंड को देख कर ही पता लग रहा था… उनका लंड बुरी तरह झटके ले रहा था.

तभी जोगिंदर ताऊ ने अपना हाथ सलोनी की चूत पर रखा और चूत को सहलाया भी क्योंकि सलोनी ने एक तेज़ सीत्कार भरी- आहहहा हहहआ…ताऊ- हां, तो और क्या बताया तुमने सीड को?

सलोनी- अह… आह्ह… हाँ, मैं पहली बार में तो उसे ज्यादा नहीं बता सकती थी, बस पहली बार मेरे साथ जो बीता था… वो बताया.. जिससे उसको यह ना लगे कि मैं झूठ बोल रही हूँ कि मैंने अभी तक किसी से चुदाई नहीं कराई… और यह भी ना लगे कि मुझे चूत चुदवाना बहुत पसन्द है, मैं चुदाई के लिए कुछ भी कर सकती हूँ.

अब पप्पू और कलुआ भी बोले- बताओ ना मैडमजी, अपने पहली बार कब और किससे अपनी चूत की सील खुलवाई?

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 143

मेरी बीवी सलोनी की पहली चुदाई का किस्सा

सलोनी की पहली चुदाई के बारे में तो मुझे भी जानने की लालसा थी, पहली चुदाई के बारे में सुनने में तो बहुत मज़ा आता है.

सलोनी मुस्कुराई और उन तीनों के हाथों का मज़ा अपने बदन पर लेती हुई बोली- काफ़ी पहले मेरे पापा के एक दोस्त अक्सर घर पर आते थे, वे हमारे शहर में नहीं कहीं दूसरे शहर में रहते थे और मुझे बहुत प्यार करते थे, मेरे लिए काफ़ी सारी चीजें लाया करते थे और अक्सर मुझे अपनी गोद में बिठाते थे.

मुझे कुछ पता नहीं था, लगता था कि वे सामान्य प्यार कर रहे हैं मुझे… पर बाद में मुझे अहसास होने लगा कि उनकी नीयत अच्छी नहीं है, वे मेरे साथ छेड़खानी करते थे.

जोगिंदर ताऊ तो अब सलोनी की चूत से चिपक से गये थे, वे उल्टे होकर लेट गये और उनकी दाढ़ी और होंठ सलोनी की चूत के ठीक ऊपर थे, अपने हाथों से उसकी चूत के होंठों को खोलते हुए उसकी चूत को चाट भी रहे थे और अपनी दाढ़ी से उसको छेड़ भी रहे थे.

इसके बाबजूद भी उनका ध्यान सलोनी के कहे हर एक शब्द पर था- कैसी छेड़खानी मेमसाब… क्या क्या करते थे वे आपके साथ? उस समय आप कितनी बड़ी थी?

सच में जोगिंदर ताऊ काफ़ी समझदार थे और मेरा काम वे ही कर रहे थे, जो भी प्रश्न मेरे मन में आते, ताऊ सलोनी से तभी पूछ लेते थे… इसलिए मुझे वे अब अच्छे लगने लगे थे, चाहे वे मेरी जानू की चूत से खेल रहे थे.

मुझे तो मज़ा आ रहा था और जिस राज से मैं अन्जान था वह अब खुलने जा रहा था.

सलोनी – आह… अह… हां ताऊ, वे तो बहुत पहले से ही आते थे… जब मैं फ्रॉक और स्कर्ट पहनती थी. पर जब बड़ी हुई तो मुझे पता लगने लगा, उनके हाथ मेरे बदन के ऊपर हर जगह घूमते रहते थे, कभी मेरी जांघों को सहलाते तो कभी मेरी छाती को, कभी पेट को…

और चूमते भी थे गालों को, गर्दन को, और अगर कोई नहीं होता तो मेरे होंठों को भी चूमते थे.

मुझे भी यह सब अच्छा लगता था तो किसी से कुछ नहीं बताती थी. मुझे उनकी आदत सी हो गयी थी और पहली बार उन्ही अंकल के साथ सब कुछ किया था, इसलिये शायद मुझे अब भी ज्यादा उम्र के पुरुष अच्छे लगते हैं.

जोगिंदर ताऊ- क्या कह रही हो मेमसाब? सच्ची? फिर तो आप मुझसे चुदवा लो… आपको बहुत मज़ा दूँगा.और ताऊ ने अपने लंड को सलोनी के बदन पर रगड़ा.

सलोनी- नहीं, कुछ नहीं, अभी तो आप जो कर रहे हो, करते करो!

अजीब है सलोनी भी… इसके मूड का कुछ पता ही नहीं चलता है.

जोगिंदर ताऊ फ़िर डर से गये और सलोनी की चूत को वैसे ही चाटने लगे, साथ ही उसकी पहली चुदाई की घटना सुनने लगे..!

सलोनी- तो अंकल जब भी आते थे मेरे बदन के अंगों के साथ छेड़छाड़ करते थे और उनकी कोई भी छेड़छाड़ मुझे अच्छी ही लगती थी. धीरे धीरे उनकी हरकतें बढ़ने लगी, वे अब मौका देखते, कोई आस पास होता तो सामान्य रहते पर कोई ना देख रहा हो या इधर उधर हो तो उनके हाथ जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ जाते थे.

‘हां… वे मेरी हर खुशी का ख्याल रखते, मुझसे पूछते रहते कि अच्छा लग रहा है ना!’

पहले कपड़ों के ऊपर से सहलाने वाले हाथ शर्ट के अन्दर मेरे नंगे पेट पर आने लगे, फ़िर वे हाथ को ऊपर मेरे नंगी चूचियों तक घुमाने लगे.

बाद में वे मेरे निप्पल जो तब बहुत छोटे थे, उनको भी उंगलियों से सहलाने लगे और नीचे कभी स्कर्ट के ऊपर से तो कभी स्कर्ट के अन्दर से मेरी नंगी टांगों और फिर ऊपर नंगी जांघों को सहलाते हुये जांघों के जोड़ तक पहुंच जाते थे.और कई बार तो पैन्टी के ऊपर से मेरी चूत को भी सहला देते थे.

ऐसे ही एक दिन मैं अपने कमरे में पढ़ रही थी, उस दिन भी मैंने फ्रॉक और पैंटी पहनी थी बस… गर्मी के दिन थे, अंकल आइसक्रीम लेकर मेरे कमरे में आ गए. मुझे स्ट्रॉबरी बहुत पसंद है, उनको पता था तो वे वही लाए थे.

मैं उल्टी लेटी पढ़ रही थी, वे मेरे पास आ कर बैठ गये और अपने हाथ से मुझे आइसक्रीम खिलाने लगे.और स्वयम् भी खा रहे थे.

उन्होंने मेरे फ्रॉक ऊपर सरका दी और ठण्डे ठण्डे हाथ मेरी कमर और जांघों पर लगाते तो मुझे अच्छा लग रहा था.और तभी जाने कैसे काफी सारी आइसक्रीम मेरी पीठ पर गिर गई.

मैं हड़बड़ा कर उठ कर बैठी तो आइसक्रीम बह कर मेरी कच्छी के अन्दर तक चली गई, मैं कम्पकपाने लगी- अह… यह क्या कर दिया अंकल?

वो वैसे ही मुझे झुका कर बोले- रुक, मैं साफ करता हूँ!और किसी कपड़े से पौंछने के बजाये अपनी जीभ से चाटने लगे.

मुझे गुदगुदी हो रही थी पर फिर भी मैंने मना नहीं किया क्योंकि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरे बदन के इस अंग को वे पहली बार ही चाट रहे थे.

और तभी मेरी पीठ को चाटते हुये अंकल मेरी पैंटी नीचे करने लगे, मुझे समझ नहीं आया कि मैं क्या करूँ?

और अब अंकल मेरे कूल्हे चाटने लगे, मेरी पैंटी भी आधे से ज्यादा नीचे तक हो गई थी, पहली बार अंकल मेरे नंगे चूतड़ देख रहे थे.उनकी साँसें और आवाज ही बदल सी गई थी.

तभी किसी के आने की आहट हुई… और मैं एकदम बाथरूम में चली गई.घर में इससे ज्यादा क्या हो सकता था.

उन्हीं दिनों मेरी परीक्षा का केन्द्र उनके शहर में बना, मेरे सारे एग्जाम वहीं होने थे तो पापा मुझे उनके घर छोड़ आए.

इस बार की परीक्षा मेरे लिये बिल्कुल अलग थी, मुझे नहीं पता था कि अंकल ने सब कुछ पहले ही सोचा हुआ है पर उस एक महीने ने मेरे जीवन को पूरी तरह बदल दिया.

पहले दिन अंकल के पहुँची तो पता चला कि अंकल बिल्कुल अकेले हैं. उन्होंने पापा से तो कह दिया कि सब शाम तक आ जाएँगे पर उस पूरे महीने कोई नहीं आया घर में, हम दोनों अकेले घर में रहे.

मुझे आज भी याद है उस घर की पहली रात!

पता नहीं मैं कैसे सुन रहा था सलोनी की एक एक बात… मेरी हालत खराब थी ही पर वे तीनों भी जैसे सब कुछ भूल गये थे, उनके हाथ सलोनी के अंगों पर तो थे लेकिन तीनों सलोनी की कहानी में खो गये थे कि क्या होगा आगे?

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 144

अंकल और मैं, हम दोनों अकेले घर में रहे. मुझे आज भी याद है उस घर की पहली रात!

सलोनी को तो यही सब कुछ अच्छा लगता है… उसके पास आज तीन मर्द थे जो उसके बदन की सेवा में लगे थे.पर मुझे तो सलोनी की पहली चुदाई से सरोकार था कि उसकी कुँवारी चूत में कैसे पहली बार लंड गया.

सलोनी- मुझे तो ऐसे ही अंकल का साथ अच्छा लगता था इसलिये उनके घर में किसी के होने या ना होने से मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला था.

अंकल ने मुझको अपने गले से लगा कर प्यार किया जैसे हमेशा करते हैं, फिर वे बोले- मेरे कमरे में AC है, इसलिये तुम इसी में रहो. पढ़ाई करने के बाद रात को यहीं सो जाया करना!

मुझे वो पहली रात्रि और उसके बाद वाली सब रातें भली प्रकार से याद हैं, उस वक्त ने मेरी ज़िंदगी में एक नया रंग दे दिया था जो कुछ मुझे पता नहीं था, .अंकल ने मुझे वह सब सिखाया.

अंकल के घर आने से पहले मैं घर में नाईट सूट पहनती थी पर मेरी मम्मी ने मुझे अब यहाँ के लिए नाईटी दी थी कि वहाँ यही पहनना!

पहली बार नाईटी पहनना… वो भी अपने प्यारे अंकल के सामने… मुझे रोमांच हो रहा था क्योंकि उस वक्त अंकल ही थे जो मेरी हर बात की तारीफ़ किया करते थे.

मैरून रंग की सिल्क नाईटी मेरे ऊपर बहुत फ़ब रही थी और मेरे स्लिम चिकने बदन से जैसे चिपक सी गई थी.मैंने सपष्ट महसूस किया कि अंकल अजीब सी निगाहों से मुझे देख रहे थे.

मैं जब पढ़ने जाने लगी तोवे बोले- बेटी, आज तो सफ़र से आई हो.. थकी होगी, आओ आज आराम कर लो! मैं तुम्हें सुबह जल्दी उठा दूँगा पढ़ने के लिये! अभी तो पहला पेपर ही तीन दिन बाद है, हो जायेगी पूरी तैयारी… मैं हूँ ना… तुम चिंता बिल्कुल मत करना!

और उन्होंने उस रात मुझे पढने नहीं दिया… पढ़ने का दिल तो मेरा भी नहीं था.मैं उनके पास ही जरा से दूरी बना कर लेट गई… मैंने दूसरी ओर करवट ली और कुछ ही देर बाद ही अंकल का हाथ मेरी कमर पर था.

वे बोले- अरे, इतनी दूर क्यों लेटी हो? पास आओ ना… कुछ देर बात करते हैं, नींद आने लगी है क्या?मैंने कहा- नहीं अंकल्…बोलकर उनकी ओर करवट ले ली.

उनका हाथ जो मेरी कमर पर था वो अब मेरे उभरे हुए कूल्हों पर आ गया था.

इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं थी, यही सब तो अंकल हमेशा करते थे जब भी मौका मिलता था और आज तो पूरा मौका था.

उन्होंने मुझे और अपनी तरफ़ खिसका कर, अपनी एक बाजू फैलाकर मुझे उस पर लेटा लिया.अब हम दोनों के सिर आपस में मिले हुये थे, उन्होंने ‘बहुत प्यारी हो तुम!’ कहते हुए… मेरे गाल को चूम लिया.

ऐसे तो वे जाने कितनी ही बार मेरे दोनों गालों को चूम चुके थे, इसलिये मुझे कोई आपत्ति नहीं थी.

फिर अंकल ने मेरे गोल चूतड़ों पर हाथ फिराया और फ़िर हाथ को एकदम पीठ पर ले गये तो उनके हाथ में मेरी ब्रा कि स्ट्रिप आ गई…मैंने अभी कुछ माह पहले से ही ब्रा पहननी शुरू की थी, स्पोर्ट ब्रा थी बिना हुकों वाली!

अंकल तुरन्त बोले- यह क्या सलोनी? तुम रात में ब्रा पैन्टी पहन कर सोती हो? बुरी बात!‘क्यों अंकल? इसमें क्या हुआ? ब्रा तो मैंने अभी थोड़े दिन पहले ही पहननी शुरू की है.

‘वो तो ठीक है बेटी, पर रात में इतने कसे कपड़े पहन कर नहीं सोया करते… ऐसा करने से अंग खराब हो जाएँगे और वहाँ निशान भी पड़ जाएँगे. फिर तेरा पति ही तुझे सुन्दर नहीं मानेगा.

अंकल की बात सुन कर मैं सच में मैं डर गई क्योंकि मैं अंकल को बहुत अच्छा मानती थी, वे जो भी कहेंगे सही ही कहेंगे.

मैंने कहा- ठीक है अंकलजी, मैं रात में ब्रा पैन्टी पहन कर नहीं सोया करूँगी.

तो अंकल ने कहा- कब से? आज ही से शुरू कर दो!

जैसे ही मैं उठने लगी, उन्होंने तुरन्त मुझे लिटा दिया, बोले- कहाँ जा रही हो? ला मैं ही उतार देता हूँ, अगर कोई निशान हुआ तो क्रीम वगैरा भी लगा दूँगा जिससे साथ ही ठीक हो जाये.

मैं कुछ बोलती, उससे पहले ही उन्होंने मेरी नाईटी ऊपर उठा दी.मुझे खास शर्म नहीं आई क्योंकि अंकल पहले भी मुझे पैन्टी में देखते रहे थे, जब मेरी फ्रॉक या स्कर्ट को ऊपर करके मेरी पैंटी के ऊपर से मेरे कूल्हे या मेरी चूत को सहलाते थे.

कभी कभी तो अंकल हल्के से उंगली अंदर को दबा कर भी सहला देते थे तो उस वक्त तो मुझे बहुत गुदगुदी होती थी और अच्छा भी महसूस होता था.

अंकल ने मेरी नाईटी कमर तक उठाई, पहले मेरी पैंटी पर हाथ फिराया, फिर उसे सरका कर उतारने लगे..!

पहले तो मुझे शर्म आई यह पहली बार कोई मर्द मेरी पैंटी उतार रहा था तो मैंने हल्का सा विरोध किया पर अंकल को जैसे कोई फर्क नहीं पड़ा, उन्होंने मेरी पैन्टी पूरी नीचे को सरका कर मेरे पाँव से बाहर निकाल दी.

मैं अपने हाथों से नाईटी नीचे करने लगी तो मेरा हाथ पकड़ कर बोले- रुक तो जा… अभी ब्रा भी तो उतारनी है.

मैंने कहा- रुको ना अंकल… वो तो ऊपर से निकल जाएगी!और मैंने अपनी नाईटी नीचे कर ली.

वो तो शुक्र था कि कमरे में ज्यादारोशनी नहीं थी, सिर्फ़ एक हल्का सा नाइट बल्ब जल रहा था.

मैं उठ कर उनकी तरफ़ पीठ करके बैठ गई और…
 
अपडेट 145

अंकल ने मेरी नाइटी उठा कर मेरी पैन्टी उतार दी, फिर मेरी ब्रा उतारने की कोशिश करने लगे.कमरे नाइट बल्ब जल रहा था, मैं उठकर… उनकी ओर पीठ करके बैठी सोचने लगी कि अपनी ब्रा कैसे निकालूँ?

वैसे मेरी नाईटी बिना बाजू की थी पर उसे ऊपर से पेट तक नीचे सरकाना पड़ता, तभी ब्रा निकल पाती.

मैंने अंकल की तरफ़ देखा तो वे बड़ी चालाकी से दूसरी तरफ़ देख रहे थे.मैं निश्चिन्त सी हो गई, मैंने नाइटी का आगे का लेस खोलकर उनको ढीला किया और अपने कंधो से दोनों स्टेप निकाले और नाइटी को नीचे पेट तक कर लिया.

फिर सलोनी की सिसकारने आवाज आई- आअह… हह आ… यह क्या करने लगा तू?मैं तो भूल ही गया था कि तीन गैर मर्द मेरी बीवी के अगल बगल बैठे हैं और उनकी हालत खराब हो रही है.

इतनी देर में पप्पू और कलुआ दोनों ने अपने लंड सलोनी को पकड़ा दिये, उनको वो सहलाने लगी और दोनों उसकी रसीली चूचियों को चूसने में लगे पड़े थे.

दोनों लड़के सलोनी की आँखों के सामने थे तो वह जोगिंदर ताऊ को नहीं देख पाई और इसका फ़ायदा उठा कर वे चूत को चूसते चूसते उठ कर बैठ गये और सलोनी की दोनों टाँगें अपनी मुड़ी हुई टांगों पर रख कर आगे उसकी चूत के पास अपनी कमर को ले आए.

इससे उनका लंड ठीक सलोनी की चूत पर टिक गया, उसको वो रगड़ रहे थे.

सलोनी के चिल्लाने का कारण अब समझ आया.

जोगिंदर ताऊ – ओह्ह्ह कुछ नहीं, आप सुनाती रहो मेमसाब, आपकी कहानी से जोश में आ गया था… अब बाहर ही रगड़ूँगा! आहहह… अंदर नहीं!

इसका मतलब इस साले ने भी अपना लंड अन्दर तो घुसा ही दिया था, चाहे थोड़ा सा ही!

खैर मैं आगे की गाथा सुनने लगा.

सलोनी- आहहआ हाँ ऐसे ही बस!जबकि सलोनी ने अपने पैरों को थोड़ा सा और भी खोल दिया था.

सलोनी- और फिर मैंने अपनी ब्रेजियर पकड़ कर सर के ऊपर से निकाल दी… और जैसे ही मेरे हाथ ऊपर ही थे कि अंकल का हाथ मैंने अपनी नंगी पीठ पर महसूस किया.

वे मेरी ओर ही देख रहे थे, उनका हाथ मेरी पीठ को सहला रहा था.वे बोले- ओह्ह… मुझे लगा ही था… देख कितने निशान पड़ गए हैं.

उनकी बात सुन सच में मैं घबरा गई- सच कह रहे हो अंकल? मुझे तो इस बात का पता ही नहीं था!

और उनका हाथ मेरी बाजू के नीचे बगल से होते हुए सीधे मेरी बाईं चूची पर आ गया.अंकल बोले- दिखा जरा आगे से… आगेभी होंगे निशान इन पर!

और उन्होंने मुझे घुमा लिया- हाँ यह देख!

और सच में जहाँ ब्रेजियर की एलास्टिक होती है, वहाँ कुछ हल्के से सिकुड़न जैसे निशान थे.मैं उनको देख कर घबरा सी गई.और अंकल एकदम उठ कर अपनी अलमारी तक गये और एक तेल की शीशी लाए और बोले- तू बिल्कुल चिन्ता मत कर… मैं हूँ ना तेरा सबसे प्यारा अंकल! मैं सब सही कर दूंगा… बल्कि तू पहले से भी ज्यादा सुन्दर हो जायेगी… ऐसा जादू है मेरे पास!

चल यहाँ उल्टा होकर लेट जा… पहले पीठ पर सही कर देता हूँ…

और अब उनकी बात ना मानने का प्रश्न ही कहाँ उठता था, जैसे जैसे उन्होंने कहा, मैं वैसे बिस्तर पर लेट गई.

उन्होंने नाइटी को कुछ और नीचे को कमर के बेल्ट जहाँ बांधते हैं वहाँ तक कर दिया और ठण्डा तेल मेरी पीठ पर लगा कर उन्होंने बहुत हल्के हाथ से मलना शुरू कर दिया.उनको सब पता था कि कब और कैसे क्या क्या करना चाहिए!

दस मिनट में ही मेरी आँखें बन्द होने लगी, उनके हाथ धीरे से नाइटी को और नीचे करके, जहाँ पैन्टी की इलास्टिक होती है, वहाँ पर चलने लगे- तूने तो सब जगह निशान बना लिये!

पर अब तू बिल्कुल चिंता मत कर, अभी बहुत हल्के हैं.. सब गायब हो जाएँगे… पर अब से रात में कभी ये कसे कपड़े ना पहना कर!बल्कि मैं तो कहता हूँ कि जब कहीं बाहर जाए, बस तभी ब्रा पैंटी पहना कर और घर में आते ही सब उतार दिया कर!

मुझे हंसी आ गई- क्या अंकल सब? तो क्या घर में नंगी रहा करूं?

‘हा हा हा हा.. जोर से हंसे अंकल- अरे तो क्या हुआ? घर में कोई नहीं है तो क्या परेशानी है? यहाँ तू जब तक है, ऐसा कर ही सकती है!बहुत मजा आता है नंगा रहने में घर में!चल अब सीधी हो… आगे भी तेल लगा कर निशान ठीक कर दूँ.

प… रररर अंकल… मैं कुछ कह ही नहीं पाई और अंकल ने मुझे सीधी कर दिया, मेरा हाथ नीचे गया जिससे अपनी नाईटी मैंने कुछ ऊपर को कर ली ताकि अंकल नीचे ना देख पायें.

अब मैं कमर तक पूरी नंगी अंकल के सामने लेटी थी, उन्होंने मेरी दोनों चूचियों को देखा और मुस्कुराए- इतनी सुन्दर चूची हैं… इन पर निशान पड़ गए ना… तो तेरा पति तुझे अच्छी तरह प्यार ही नहीं करेगा. समझी पागल?

.!

और मैं शरमा गई.

उन्होंने मेरे दोनों स्तनों पर भी तेल लगा कर हल्के हाथ से मलना सहलाना शुरू किया और मुझे अज़ीब सी गुदगुदी होने लगी.सच कहूँ तो मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा था. आहहहा…

और शायद फिर से जोगिंदर ताऊ जोश में आ गये थे.पता नहीं वे कर क्या रहे होंगे जिससे सलोनी इतनी जोर से सिसकार उठी थी… ऊपर ऊपर से ही या अन्दर डाल करभी मजा लेने लगे थे.जाने क्या हो रहा था?

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 146

शायद जोगिंदर ताऊ जोश में आ गये, या उन्होंने क्या किया कि सलोनी इतनी ज़ोर से सिसकार उठी… कहीं अन्दर डाल कर तो मजा नहीं लेने लगे थे?

अब जोगिंदर ताऊ से क्या फ़र्क पड़ना था, उन चेले भी तो चोद ही चुके थे सलोनी को, अगर ताऊ भी चोद लेंगे तो कोई फ़र्क पड़ता.

मुझे तो सलोनी की पहली चुदाई की गाथा सुनने में रुचि थी कि कैसे उस के अंकल ने कमसिन सलोनी को गर्म किया होगा और फ़िर कैसे चुदाई शुरू की होगी.

सलोनी के मुख से निकले एक एक शब्द के लिए मुझे इन्तजार था… और मुझे ही क्या ये साले तीनों भी पूरे मज़े से सुन रहे थे.फ़र्क इतना था कि मेरे हाथ में मेरा ही लंड था जबकि वे तीनों असल में मेरी सलोनी के कोमल अंगों का रसास्वादन और मंथन सब कर रहे थे.

और उनके लंडों को सलोनी के नर्म गर्म हाथ सहला रहे थे.जब कि ताऊ का लंड तो सलोनी की चिकनी चूत पर ही था.

सलोनी आगे बोली- अंकल के हाथ मुझे अजीब सा मज़ा दे रहे थे और मैं चाह कर भी उन्हें रोक नहीं पा रही थी… उनका सहलाने का अंदाज भी बहुत उत्तेजक था, वे हल्के हाथ से स्तन की पूरी गोलाई पर घुमाते थे, फिर अपनी उंगली से मेरे चूचुक को भी छेड़ते थे.

और बीच बीच में तो मेरी चूची की पूरी गोलाई को अपनी मुट्ठी में लेकर मसलते थे जिससे मेरे होंठों से सीत्कार निकल जाती थी.मेरी चूची की पूरी गोलाई उनकी बड़ी हथेली में पूरी की पूरी समा जाती थी.मेरे स्तन उस वक्त ज्यादा बड़े भी नहीं थे पर सख्त बहुत थे जिन्हें वे अच्छी तरह से मसल रहे थे.

तब अंकल के हाथ नीचे सरकने शुरू हुये, पेट से होते हुये नाभि तक पहुँचे और थोड़ी देर उन्होंने मेरी नाभि को सहलाया.पता नहीं क्यों ऐसा किया उन्होंने?

अब मुझे डर लग रहा था कि अंकल मेरी गीली चूत न देख लें… पता नहीं क्या सोचें?.!

पर यह तो मैं भी चाह रही थी कि जल्दी से जल्दी उन का हाथ मेरी नंगी चूत तक पहुँचे!

और अंकल कमर के उस हिस्से पर आ गये जहाँ पैन्टी कि एलास्टिक होती है.पता नहीं नाईटी उन्होंने अपने हाथ से नीचे की थी या खुद ही हो गई थी.

और वे मेरा पेट सहलाते हुए फिर से वही बात बोलने लगे- देख, तूने ये क्या कर लिया, अभी से यहाँ निशान बनने लगे. तू तो अभी से अपने बदन को ख़राब कर लेगी! फिर मॉडर्न फैशनेबल कपड़े कैसे पहनेगी?

मैंने कहा भी- अंकल, मैं तो अब भी पहनती हूँ..

पर उन्होंने मुझे चुप कर दिया- यह कोई फैशन है जो तुम पहनती हो? देखा नहीं क्या इन शहरी लड़कियों को? वे जितने छोटे छोटे कपड़े पहनती हैं, उतनी ही सेक्सी लगती हैं.तुम्हें तो सोचना पड़े करेगा कि क्या पहनूँ ..जिससे ये निशान ना दिखें!

तू खुद सोच… अगर तू लो वेस्ट जीन्स या शॉर्ट्स पहनेगी तो क्या ये निशान दिखेंगे? जरूर दिखेंगे! और अगर अन्दर पैन्टी भी पहनेगी तो वो भी सबको दिखेगी. जबकि मॉडर्न लड़कियाँ तो पैन्टी पहनती ही नहीं हैं.

मुझे उनकी बातों से शर्म आने लगी थी पर मजा भी आ रहा था, अंकल के हाथ चल रहे थे… और साथ साथ गर्मागर्म सेक्सी बातें भी!मैंने उनसे पूछा- पर अंकल, आप को कैसे पता कि लड़कियाँ आजकल पैन्टी नहीं पहनती?

उन्होंने एकदम से बता भी दिया- मैं जब भी पार्क या कहीं देखता हूँ तो… जब वो झुकती हैं तो जीन्स उनके आधे चूतड़ों तक आ जाती है तो सबको पता चल जाता है कि उन्होंने पैन्टी नहीं पहनी हुई.

मैंने अंकल को खुली छूट दे दी- अंकल आप ही मेरे ये सभी निशान साफ़ करेंगे… और अब से मैं भी पैन्टी कम से कम पहनूँगी… जब बहुत जरुरी होगी तभी!

अंकल ने मेरे कमर के उस हिस्से पर भी तेल लगा कर मलने लगे, उनकी उंगलियाँ अब मेरी नाईटी को छूने लगी, मुझे लगा कि उनके तेल वाले हाथों से मेरी नई नाईटी… गंदी हो जायेगी तो मैंने कहा- अंकल, मेरी नाईटी खराब ना हो, ध्यान रखना.

अब तो अंकल को मौका मिल गया, वे बोले- अर्र… अभी तो सब जगह तेल लगा कर मालिश करनी है! निशान तो नीचे तेरी जांघों पर भी होंगे, पैन्टी की एलास्टिक तो सब जगह निशान बना देती है.

ऐसा कर… तू नाईटी ही उतार दे जिससे मैं आराम से तेरे बदन के सारे निशान देख कर ठीक कर सकूँ.मैं लाईट भी जला लेता हूँ इससे निशान अच्छी तरह से दिख जाएँगे.

मैंने तुरन्त अंकल को रोका- नहीं अंकल, प्लीज़ अंकल… लाईट नहीं… ऐसे ही कर दीजिए!

वैसे देखा जाये तो उन्होंने काफी कुछ देख ही लिया था, इतना अंधेरा भी नहीं था. तो भी मुझे तेज रोशनी में शर्म आती.मैंने उनको इशारा भी कर दिया था कि ऐसे ही जो करना है कर लीजिए!

पर अंकल पता नहीं क्यों मेरी नाईटी मुझसे ही उतरवाना चाहते थे, उन्होंने कहा- मेरे हाथों में तो तेल लगा है, तेल से तेरे कपड़े ख़राब हो जाएँगे.ऐसा कर, तू खुद जल्दी से नाईटी उतार दे तो मैं तेरे सभी निशानों पर तेल लगा देता हूँ.

मैं सोचने लगी कि अब मैं क्या करूँ?

देखा जाए तो अब मेरे बदन का कोई भी अंग ढका नहीं था, मेरी ब्रा, पैन्टी वे उतार ही चुके थे, मेरी नाईटी ऊपर से पूरी नीचे कमर से भी काफी नीचे थी.और नाईटी का निचला हिस्सा भी जांघों तक सिमटा हुआ था.

मैं कोई फ़ैसला ही नहीं कर पा रही थी कि नाइटी को पूरी उतार दूँ या नहीं!तभी!

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 147

अब तक आपने पढ़ा…मेरे बदन का कोई भी अंग ढका हुआ नहीं था, मेरी ब्रा, पैन्टी अंकल पहले ही उतार चुके थे और नाईटी भी जांघों तक सिमटी हुई थी.मैं सोच रही थी कि नाइटी को पूरी उतार दूँ या नहीं!

कि तभी?मेरे सोचने से पहले ही अंकल ने मेरा हाथ पकड़ मुझे बेड पर खड़ी करके अपने हाथों से ही मेरी नाईटी को नीचे सरका कर उतार दिया.

सलोनी की पहली बार चुदाई वो भी इतनी सेक्सी, उसकी उमर से काफ़ी बड़े अंकल के साथ… उसी के मुख से सुन कर मेरी हालत ख़राब होने लगी थी, लग रहा था कि मेरा लंड जल रहा है.

मगर फिर भी मैंने अपने पर काबू किया हुआ था और हाथ को लंड से परे ही रखने का यत्न कर रहा था.

सलोनी आगे की बात बताने लगी- उस दिन पहली बार मैं अंकल के सामने पूरी नंगी हुई थी, पर मुझे कोई खास शर्म नहीं आ रही थी.

अंकल ने अपने हाथों से मेरी कमर पकड़ी और हाथों को मेरे नंगे कूल्हों पर लाकर बोले- तुम्हारी उमर की कमसिन लड़कियाँ ऐसे बेड पर नंगी खड़ी हुई बहुत सुन्दर और मस्त लगती हैं.

मेरी योनि पर हल्के हल्के बाल आने शुरू हुए थे, अंकल ने अपने हाथ से मेरी चूत को सहलाया, बोले- बहुत सुन्दर, बहुत मस्त हो तुम सलोनी… आज मैं तुम्हें खूब मस्ती करवाऊँगा, तुम्हें खूब मजा भी आयेगा.

आज तक मैंने यहाँ केवल पैंटी के ऊपर से देखा था तो मुझे पता नहीं था कि इतनी मस्त चीज हो तुम!सच बताओ ‘क्या कभी किसी और ने तुम्हें नंगी देखा है या तुम्हारी चूत को… इसके साथ किसी ने कुछ किया है?

आह… अह… पता नहीं क्या है कि चुदाई करना सभी चाहते हैं पर यह जानने की इच्छा रखते हैं कि पहले किसी और क्या क्या कर चुका है.

जोगिंदर ताऊ- तो क्या उन अंकल से पहले भी कभी कुछ?सलोनी ने तुरंत उनको रोक दिया- आअह… आआअ… अरे मैंने बताया तो है कि मैं अपनी पहली बार की चुदाई के बारे में बता रही हूँ तो यह कैसे हो सकता है कि इससे पहले कुछ हुआ हो?

मैंने अंकल को यही कहा- नंगी देखने के बारे में तो नहीं कह सकती, घर में या कहीं किसी फंक्शन में किसी ने देख लिया हो तो? वैसे भी तुम मर्द… ऐसे मौकों पर झांकने से कहाँ बाज़ आते हो?

मैंने यही बताया कि अंकल आप ही पहले पुरुष हो जिसने मुझे इस तरह से छुआ!तो अंकल ज्यादा जोश में आ गये, बोले- कल तेरी योनि को भी पूरी तरह साफ़ करूंगा… यहाँ बाल मत रखा करना… जब यह चिकनी होती है तो इसे चाटने में खूब मज़ा आता है और चूत भी तो शीशे तरह चमकती है.

मैंने अंकल से कगा- धत्त… यह तो गन्दी जगह होती है, यहाँ भी कोई चाटता है क्या?मेरी बात का कोई उत्तर न दे, अंकल ने सीधे मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया.

एक अजीब सी गुदगुदी… बहुत सा मज़ा… आहहहा… पता नहीं कैसा सा लग रहा था मुझको!

‘हहहआ आऊईई… ये नहीं… आप भी चाटो ना… इसको हटाओ मेरी चूत से! आप भी फिर से चाटो… फिर बताती हूँ आगे क्या हुआ?’सलोनी ताऊ को बोल रही थी.

और जोगिंदर ताऊ ने उसका कहना मान कर अपना लंड सलोनी की चूत से हटा लिया और उसकी चूत के ऊपर अपना मुँह रखकर उल्टा लेट गये.

और फिर से कुछ देर सलोनी की सिसकारी निकलने लगी- आहहहा… हहहआ आऊईई…जैसे उसे अपनी कमसिन उमर की चूत चटाई ही याद आ रही हो!

और वो उन्हीं यादों में खोई बड़बड़ा रही थी- हां हां… ऐसे ही… ताऊ… ऐसे ही… अंकल भी ऐसे ही कर रहे थे, वे तो मुझको खड़ी भी नहीं होने दे रहे थे… और बैठने भी नहीं दे रहे थे, मेरे पैरों को फैला कर मेरी योनि के अन्दर तक जीभ की नोक से कुरेदने में लगे थे.

आह… आअस्सह… और सच में उस वक्त उनकी वो नुकीली जीभ भी टीस सी दे रही थी क्योंकि बहुत ज्यादा कसे हुए लिप्स थे मेरी चूत के!.!

आहहा… सच कहूँ तो तुम्हारी चूत अभी तक भी एक कमसिन जैसी ही है, अभी भी वैसी ही कसी है.

जोगिंदर ताऊ ने सलोनी की चूत से अपना मुँह हटा कर कहा- वरना तो अब तक जैसे मैंने लंड को तुम्हारी चूत पर घिसा, तो पूरा लंड चूत के अन्दर होता… पर तेरी चूत ने ज़रा सा भी नहीं लिया.सच्ची बहुत कसी है… उस वक्त तो बहुत ज्यादा कसी होगी.फिर चोदा कैसे तुम्हारे अंकल ने तुम्हें? उनका लंड तो काफ़ी बड़ा होगा?

हहहाआअ… बताती हूँ ताऊ, आप चाटते रहो… आहह… आपकी मुँह की सांस और गर्म हवा मुझे बहुत अच्छी लग रही है… और आपकी दाढ़ी तो बहुत गुदगुदी कर रही है! हहहा…

और तब ताऊ ने ज़ोर से एक फूँक मारी सलोनी की चूत में… और अपनी दाढ़ी भी रगड़ने लगे!इससे सलोनी की कम्पकपी और सीत्कारें एकदम से बढ़ ग- हहहा ओह्ह अई… ओह ह्ह्ह हहहा ओह अह्ह्ह ह्ह्ह्ह हहहा ओह्ह!

ऐसा लग रहा था जैसे सलोनी अपने ओर्गैस्म का भरपूर मज़ा ले रही हो!

कलुआ और पप्पू तो उसके उरोजों को निचोड़ने में लगे हुए थे, उनके मुँह से सलोनी के निप्पल निकल ही नहीं रहे थे… जैसे कई दिन के भूखे बच्चे को दूध मिल गया हो!

ताऊ ने अपना मुँह ज़रा ऊपर करके कहा- मेमसाब, आप अपनी पहली चुदाई की कहानी बताती रहो जिससे मेरे लंड को भी कुछ राहत मिले!

सलोनी- हहआं… तो अंकल काफ़ी देर तक मेरी चूत को ऐसे ही चाटते रहे… उन्होंने वैसे बैठे बैठे अपनी लुँगी उतार दी और वे भी पूरे नंगे हो गये.

अंकल का लंड… मैंने पहले भी छुआ तो था, जब गोदी में बिठाते थे तो अपने चूतड़ों में और जांघों में महसूस होता था.पर इस वक्त तो मैं बिना किसी डर के पहली बार पूरा नंगा लंड देख रही थी.

और साथ ही उनकी जीह्वा ने मेरी चूत को लार से तरबतर कर रखा था.बहुत मज़ा आ रहा था.

जोगिंदर ताऊ- अच्छा यह तो बताइये मेमसाब कि उनका लंड पहले कैसे छुआ था? ऐसे कैसे उन्होंने सीधा तुम्हें लंड दिखा दिया?

जिओ ताऊ जिओ… मेरे मन में उपज रहे प्रश्न को ताऊ ने एकदम से सलोनी से पूछ लिया… यह ताऊ तो बड़ी ख़ेली ख़ाई चीज थे.

मैं यह भी जानना चाह रहा था कि सलोनी की पहली प्रतिक्रिया क्या रही होगी अपने अंकल के लंड को देख कर!

सलोनी- अह्ह्ह्ह ह्ह ववो भी…अच्छा अच्छा सुनो??

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 148

मैं जानना चाह रहा था कि अंकल का लन्ड देख सलोनी की क्या प्रतिक्रिया रही थी.

सलोनी- अंकल पहले मुझे पकड़ते थे तो उनके लंड का मुझे अहसास तो होता था और जहाँ भी चुभता, बहुत सख्त लगता था.अंकल जब आते थे तो हमारे साथ ही रहते थे तो एक बार हम सब छत पर सो रहे थे, अंकल भी एक तरफ़ सो रहे थे.

सुबह सुबह मुझे पेशाब करने की लगी तो मैं वहीं छत की नाली पर कर के जब आई तो गर्मी के कारण अंकल ने सिर्फ़ लुंगी ही पहनी थी जो खुल चुकी थी और उनका नंगा लंड मुझे दिखा… मैंने देखा कि वो नन्हा सा, बहुत नर्म सा है.

मुझे बहुत जिज्ञासा हुई कि यह तो बहुत बड़ा और सख्त लगता था… पर अभी यह ऐसे कैसे दिख रहा है?मैंने पास जाकर देखा, मैं खुद को रोक ना पाई और हाथ लगा कर देखने लगी, पर वो बहुत नर्म लगा.

अब वहाँ उस वक्त उनसे पूछ तो सकती नहीं थी… पर मन में इच्छा रह गई जानने की!

अगले दिन शाम को जब छत पर ही वो मेरे साथ छेड़छाड़ कर रहे थे, मैं उनकी गोदी में थी, मेरे चूतड़ों में सख्त सा लगा, उस वक्त कोई और था नहीं, हम दोनों ही थे… मैंने अंकल से पूछ ही लिया- यह मेरे चूतड़ों में क्या चुभ रहा है?

वे बहुत हंसे, बोले- खुद ही देख लो!अंकल ने तब भी लुंगी पहनी हुई थी, मैंने हाथ लगा कर देखा… तो उनका लंड काफ़ी बड़ा और सख्त लग रहा था.

.!

मैंने अपने मन की बात उनको बताई कि सवेरे मैंने जब देखा था तब यह बहुत छोटा और मुलायम था.अब यह ऐसा कैसे हो गया?

तब अंकल ने मुझे बताया और उस दिन पहली बार मैंने अपने हाथों से हिला कर उन का पानी निकाला था.

सलोनी की ऐसी सेक्स भरी बातें सुन कर मेरा भी पानी निकलने को तैयार था, पता नहीं मैंने कैसे रोका हुआ था.

कलुआ और पप्पू के लंड तो सलोनी के हाथ में पानी गिरा भी चुके थे, उन को भी सलोनी की बातें बहुत मजा दे रही थी.

जोगिंदर ताऊ सलोनी की चूत को चाटते हुए रूके- मेमसाब, अपनी इस प्यारी सी चूत में एक बार तो मुझे चोदने दो ना? जब मेरे ये लड़के चोद चुके तो मुझे क्यों नहीं दे रही हो?

सलोनी- नहीं, बस अब बहुत हो गया… चलो अब काम पर लग जाओ!जोगिंदर ताऊ- लेकिन आपने अपनी पहली चुदाई की बात तो बीच में छोड़ दी कि कैसे हुई आपकी चुदाई?

सलोनी- बस अब मैं और ज्यादा नहीं बताऊँगी, फ़टाफ़ट काम खत्म करो और जाओ यहां से… साहब कभी भी आ सकते हैं!पप्पू- मैडम, यह तो आधी अधूरी बात रह गई!
 
सलोनी- कुछ आधा अधूरा नहीं… 3-4 रातों तक तो वे वैसे ही मस्ती करते रहे, चोदा नहीं मुझे… बस हल्के हल्के लंड को अन्दर करते थे और बाहर निकाल लेते थे.

फिर जब मेरे एग्जाम में कई दिनों की छुट्टी आई… तो उस रात उन्होंने काफ़ी चिकनाई लगाकर मेरी चूत में अपना पूरा लंड घुसाया था.उस रात मुझे बहुत दर्द हुआ था और खून भी निकला था! अंकल उस रात बहुत खुश हुए, उस रात अंकल ने मुझे अच्छी तरह चोदा… और फिर जब तक मैं वहाँ रही… तकरीबन हर रात बार बार चोदते थे.

चलो हो गई कहानी पूरी… अब उठो यहाँ से!

तभी ताऊ उठे और उन्होंने अपने हाथ से अपना पानी सलोनी की जांघ पर गिरा दिया.

सलोनी- आह… अह… ताऊ, माने नहीं ना तुम… चलो अब जाओ काम पर लगो.

और सबने अपने आप को ठीक ठाक कर के कपड़े पहन लिए.

अब मैंने देखा कि अब यहाँ ज्यादा कुछ मसाला नहीं बचा है तो मैं एकदम दरवाज़े से बाहर निकला, वैसे ही लॉक कर दिया… जिससे किसी को कोई शक ना हो.करीब दस मिनट बाद मैं ऐसे ही घूमते हुए लौट कर आ गया.

तीनों बाहर काम में लग चुके थे और दरवाज़ा खुला हुआ था.मैं बिना कुछ बोले बैडरूम में आया तो तब तक सलोनी ने बैडरूम एकदम से ठीक ठाक कर दिया था.

सलोनी ने शॉर्ट्स और टॉप ही पहने हुए थे.

इन सब का पानी तो निकल चुका था लेकिन मेरा अभी भी अधूरा था.वे तीनों बाहर काम में लगे थे और मैंने सलोनी को पीछे से पकड़ा तो सलोनी बोली- ओह्ह… कहां रह गये थे आप? ये तीनों तो बहुत सुस्त हैं, देखो जरा भी काम नहीं निपटाया!

मैं- अरे जानेमन, कर तो रहे हैं तब से लगातार, अभी मैंने देखा बाहर, तीनों काम में ही लगे हुये हैं.

सलोनी- अब आपको क्या हुआ? बाहर से आते ही ये छोटे ज़नाब क्यों अकड़ रहे हैं? कि अभी से मुझे तंग करने लगे?

मैं- अरे यार, बाहर बड़ी कंटीली आइटम दिख गई थी तो मन चुदाई का करने लगा!

सलोनी- अच्छा? तो अब ये ज़नाब दूसरों को देख कर भी खड़े होने लगे? पर अभी तो रुको, बाहर वे लोग हैं, उनको जाने दो, सब कसर पूरी कर दूँगी.

यही अदाएँ तो मुझे पसन्द थी मेरी जान की… कभी मुझे या मेरे लंड को निराश नहीं करती… हर समय हम दोनों का पूरा ख्याल रखती.मैं- अरे यार, वे बाहर काम कर रहे हैं… ऐसे में तो चुदाई का ज्यादा मजा आयेगा… आओ ना…

और सलोनी जान मान गई.मैंने दरवाज़ा बन्द करने की कोई जरूरत नहीं समझी… वैसे भी बैडरूम का दरवाजा स्लाइडिंग है, उस पर परदा था… वही परदा जिसमें से अभी कुछ देर पहले मैंने सब कुछ देखा था… और वो पूरी तरह से ढका हुआ नहीं था.

मेन गेट भी खुला था जिससे मैं अन्दर तो आ गया पर बन्द नहीं किया था.इसके बावजूद इस बार मैंने मज़े लेने की सोची, जो काम मैं बाहर रह कर करता था, आज सोचा कि मैं चोदूँगा सलोनी को और देखता हूँ इनमें से कोई हमें देखता है या नहीं!

अगर देखता है तो क्या करेगा?मैंने आवाज़ करते हुए सलोनी को कसके अपने बदन से चिपका लिया, अपने हाथ आगे ला कर मैंने सलोनी की शॉर्ट्स का बटन एक बार फिर खोल दिया.

बेचारी शॉर्ट्स भी सोच रही होगी कि अभी पहने हुये दस मिनट भी नहीं हुये और उतरने की बारी फिर आ गई. ये लड़की आख़िर पहनती ही क्यों है मुझे?

और मैंने शॉर्ट्स के अन्दर हाथ से सलोनी की प्यारी और चिकनी चूत को सहलाया तो शॉर्ट्स अपने आप ही नीचे सरकती हुई सलोनी के पैरों में गिर गई.

पूरी नंगी थी सलोनी नीचे से… उसने कोई कच्छी नहीं पहनी थी!

तभी मुझे बाहर हल्की सी आहट सी सुनाई दी… कौन आया देखने?

कहानी जारी रहेगी.
 
Back
Top