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मेरी बहु की मस्त जवानी complete

मुझे आज नींद नहीं आ रही थी, मैं अपनी सेक्सी बहु का वेट कर रहा था। कुछ देर बाद बहु कमरे में आयी और लाइट ऑफ कर दिया, अब कमरे में बहुत कम लाइट थी। बहु ने सोचा की मैं सो गया हूं, उसने पास आकर मुझे देखा फिर बेड के पास अपनी साड़ी उतारने लगी। मैं अँधेरे में हल्का सा आँख खोले उसकी गोरी बदन को देख रहा था।। फिर उसने अपना ब्लाउज खोला और पीछे हाथ करके अपनी ब्रा भी उतार दी। उसकी पीठ पीछे से पूरी नंगी हो गई।

उसने अब एक टी-शर्ट डाल लिया। और फिर से मेरी तरफ मुड के देखी। अगले पल झट्ट से अपनी पेटीकोट की डोरी खोल दिया और एक झटके में उसकी पेटीकोट जमीन पे गिर गई। अब उसकी मांसल गोरी जांघें मेरे सामने थी, पेटीकोट उतार कर वो एक स्कर्ट पहन मेरे बगल में लेट गई।। मैं अपना हाथ अपने अंडरवियर के अंदर डाल अपने लंड को धीरे धीरे मसल रहा था।। मुझे आज साड़ी रात नींद नहीं आनी थी।। अपनी बहु के नंगी पीठ और नंगी जाँघ देखने के बाद नींद आती भी कैसे?।
 
मैं और बहु एक बिस्तर पे क़रीब ६ इंच के दूरी पे थे, मैं सीधा लेटा ऊपर फैन को देख रहा था। तभी बहु मेरी ओर करवट ली और उसके बड़े बूब्स मेरे एल्बो से टकराने लगे। मैं अपना हाथ सीधा किया और अब बहु के बूब्स मेरी हथेली को दबा रहे थे।। मैंने हलके हाथ से बहु के बूब्स दबाने लगा।। इतनी सॉफ्ट बूब्स वो भी बिना ब्रा के।। मक्खन से मुलायम उसके बूब्स को थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने अपना लेफ्ट हैंड उसकी गरम चूत पे रख दिया।

मै बहु के ओर क़रीब गया, बहु के दोनों हाथ ऊपर थे, मैं धीरे से उसके ऊपर गया और अपना चेहरा उसके बूब्स पे रख दिया। मेरे लेफ्ट हैंड अभी भी उसकी चूत को सहला रहे थे तभी शायद बहु की नींद खुली और उसने मेरा हाथ अपनी चूत से हटा दिया और फिर मेरा चेहरा भी अपने बूब्स से दूर कर दिया। मैं थोड़ा डर गया, कहीं बहु बुरा न मान जाए। इसलिए दूबारा कोशिश नहीं किया।

मैने एक हाथ से अपना लंड बाहर निकाला और बहु के चुचि देख कर रब करने लगा। एक बार फिर मेरे लंड का पानी बिस्तर पे बहु के पेट के पास गिर गया।

सूबह होने में अब ज्यादा देर नहीं थी, और मुझे नींद आ गई। सुबह बहु मेरा हाथ जोर जोर से हिला के उठाने लगी।।

सरोज - बाबूजी।।। बाबूजी।।

मैन - क्या हुआ बहु।। ?

सरोज - यहाँ देखिये न बाबू जी कुछ गिला सा लग रहा है।। और चिपचिपा सा भी।। क्या है ये?

मैन - अरे बहु लगता है कल रात डिनर करते वक़्त फिर से कुछ गिर गया बिस्तर पे।।

सरोज - (अपने हाथ से मेरे मूठ को छूते हुए बहु बोली।। ) ये देखिये ये कुछ सफ़ेद रंग का चिपचिपा सा है।।

मै - (मैं मन में सोच रहा था। बहु इतना नादान तो नहीं हो सकती।। कहीं ये जानबूझ के अनजान तो नहीं बन रही। ? लेकिन बहु ऐसा क्यों करेगी? )

सरोज - (सरोज ने मेरे मूठ को स्मेल किया और फिर अपनी ऊँगली पे लगी मेरे मुट्ठ को चाट्ने लगी।। ) पप।। ये कुछ नमकीन सा टेस्ट है।। मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा की ये क्या गिर गया कल रात?

मैन - नहीं बहु कुछ घी या मक्खन गिर गया होगा।। थोड़ा सा और चाट के देखो पता चल जाएगा।

सरोज - (सेक्सी तरीके से स्मेल करते हुवे और अपना मुह खोल मेरा मूठ चाट्ने लगी।।)।। उम्मम्मम बाबूजी।।जो भी है ये तो अच्छा टेस्ट लग रहा है।।

मै - (बहु के इस हरकत पे मैं सोचने लगा की शायद बहु को सब पता है और वो बेवजह अन्जान बनने की कोशिश कर रही है।। बहु को ऐसे मेरा मूठ चाटते देख मेरा लंड खड़ा हो गया। दिल में तो ख़याल आया के अपना लंड खोल के बहु के मुह में दे दूँ, और उसकी मुह में अपना पानी छोड़ दूँ )

बहु मेरे मूठ को बहुत ही बेशरमी से चाट रही थी। थोड़ी देर बाद बहु बाथरूम जा के फ्रेश हो आयी और मैं भी बिस्तर से बाहर आ गया।

डायनिंग हॉल में बहु चाय लायी।। हमेशा की तरह आज भी बहु ने साड़ी काफी नीचे पहनी थी और मुझे अपना नवेल दिखा रही थी।
 
बहु चाय के सिप लेते हुए मेरे बगल में बैठ गई।

सरोज - बाबूजी।। आज मुझे कुछ शॉपिंग करनी है क्या आप चलेंगे?

मै - हाँ बहु क्या-२ चाहिए बोलो मैं पेपर पे लिखता हूँ

सरोज - ओके बाबूजी।। ये लिजीये पेन और पेपर

मै- बोलो बहु।।

सरोज - मेरे पास एक ही ट्रैक सूट है तो एक एक्स्ट्रा ट्रैक सुट, शूज, हेयर डॉयेर्, बँगलेस

मै- हाँ ठीक है और बोलो बहु

सरोज - ब्लैक कलर लेग्गिंग, छोटा टॉवेल, ब्रा और पैंटी

सरोज - और हाँ भूल गइ एक शेवर भी

मैन - बेटी तुम शेवर यूज करती हो? तुम हेयर रिमूवल क्रीम क्यों नहीं यूज करती?

सरोज - नहीं बाबूजी उसके लिए नहि, मुझे तो हेयर रिमूवल की जरुरत ही नहीं पडती

मै - क्यों? तुम पैरों के बाल नहीं साफ़ करती?

सरोज - बाबूजी, बाल होंगे तब तो करुँगी न।। मेरे पैर पे तो बाल बहुत कम आते है।। (बहु ने थोड़ा सा साड़ी ऊपर उठाते हुए अपने पैर दिखाए।।)

सरोज - और मेरी थाइस पे तो बिलकुल बाल नहीं है।। मेरी थाइस एकदम चिकनी और सॉफ्ट है। साड़ी अगर नहीं पहनी होती तो मैं आपको अपनी थाइस दिखाती।। बिलकुल चिकनी है।। मैं बहुत लकी हूँ जो मेरे थाइस पे बाल नहीं है।

बहु के मुह से अपनी थाइस दिखाने की बात सुन कर मेरे लंड में तूफान भर गया।। ये मेरी बहु को कुछ दिनों से क्या हो गया है।।? इतनी बेशरमी से बातें करती है।। मेरी बहु तो जैसे एक नयी दुल्हन से अब रंडी बन गई हो।। अब मैं जब बहु के बारे में सोच के मास्टरबैट करता तो इमेजिन करता के वो मेरे सामने पड़ोसियों के लंड चूस रही है। सोफ़े पे लेते वो एक रंडी की तरह शमशेर का लंड मुह में ले रही है और मैं नीचे बैठ बहु के चूत चाट रहा हूं।।

ये सब इमेजिन करने से मेरे लंड से पानी 5 मिनट में आ जाता था और मुझे बहुत सन्तुष्टि मिलती ।।
 
मैं और बहु शाम ५ ओ क्लॉक शॉपिंग के लिए अपनी मारुती स्विफ्ट में निकल गये। बहु मेरे बगल वाली सीट पे डार्क ग्रीन कलर के साड़ी पहने बैठी थी, मैंने नोटिस किया की बहु ने काफी सादगी से साड़ी पहने थी उसकी नवेल बिलकुल नज़र नहीं आ रही थी और साइड से उसके थोड़े से खुले हुए पेट् नज़र आ रहे थे। घर पे मेरी बहु एसे साड़ी को काफी नीचे पहेनती थी और उसकी नवेल साफ़ साफ़ नज़र आती थी। बहु के इस दोहरे चरित्र को देख मुझे बहुत अच्छा लगा, ऐसा लगा जैसे बहु को घर पे मुझे अपना बदन दिखाने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती या शायद उसे मुझे अपना बदन दिखाना अच्छा लगता है। वहीँ बाहर वो एक घरेलु स्त्री की तरह सादगी से रहती है।

बहु सीट पे बैठे हुए सामान के लिस्ट निकाल दोहराने लगी और मैंने अपनी कार एक मॉल के तरफ मोड़ लिया। मैं गाडी पार्किंग में लगा के बहु को फॉलो करने लगा। बहु ने अपने बदन को साड़ी में तो ढक लिया था लेकिन वो अपने सेक्सी फिगर ३४-३०-३८ को नहीं छुपा पा रही थी और साड़ी में उसके बड़ा-बड़े हिप्स किस्सी को भी पागल बना सकते थे।

मॉल में हर उम्र के लोग एक बार मुड के मेरी बहु के मटकती गांड को जरूर देखते। लगभग सभी सामान लेने के बाद एन्ड में हमदोनो लेडीज सेक्शन में ब्रा और पैंटी लेने पहुचे। मेरी चारो तरफ लेडीज के अंडरर्गारमेंट लटके थे मेरे अलावा वहां सभी लड़कियां शॉपिंग कर रही थी।

बहु ने कुछ कलरफुल ब्रा और पेंटी सर्च करने लगी मैंने भी हेल्प करना चाहा तो बहु ने अपना साइज बताते हुये मुझे ३४ साइज ढूंढने के लिए बोला। मैं २-३ ब्रा उठा कर बहु के तरफ बढाया।

सरोज - ओह पापा ये ब्रा तो अछि लग रही है लेकिन ये ३४ब है

मै - ३४ब, बहु तुमने ३४ ही तो बोला था।

सरोज - हाँ लेकिन मुझे कप साइज डी चहिये।

मै - तो क्या ३४ब छोटा साइज है?

सरोज - (अपने हाथो को अपने बूब्स के तरफ दीखते हुए।) साइज सेम है बाबूजी लेकिन ३४डी का कप बड़ा होता है ।

मै - बहु के बूब्स को घूरते हुये। ओके मैं लाता हूं

कुछ ब्रा पैंटी लेने के बाद मैं और बहु घर आ गये।।

थोड़ी देर बाद।।। बहु कमरे से मुझे आवाज़ लगाने लगी।।।

सरोज - बाबूजी।। बाबूजी

मै - क्या हुआ बहु?

बहु अपने कमरे में अपनी ग्रीन साड़ी उतार रही थी और नए कपडे ट्राई करना चाहती थी।।

(थोड़ी देर में मैंने देखा बहु ग्रीन कलर ब्लाउज और डार्क ब्राउन कलर का ट्रैक पेंट पहने मेरे सामने खड़ी है।। सिर्फ ब्लाउज और ट्रैक पेंट में बहु बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी। उसके डीप नवेल पूरे खुले हुवे थे।।)

सरोज - बाबूजी।।। ये ट्रैक पेंट तो बहुत टाइट है, मैंने कमर के साइज ३० देख के लिया था। लेकिन यहाँ मेरी जाँघो पे पैंट बहुत टाइट है।।

मै - (टाइट ट्रैक पैंट में बहु की जांघें कसी-कसी थी और उसकी चूत के उभार भी साफ़ नज़र आ रहे थे।। ) हाँ बहु ये तो टाइट है।। लेकिन इसमे तुम्हारी जांघे अच्छी दिख रही है (मैंने मुस्कराते हुए कहा।)

सरोज - बाबूजी, मैंने ये ट्रैक पैंट बिना पैन्टी के पहनी है फिर भी ये इतनी टाइट है।। तो पैन्टी पहनने के बाद और टाइट हो जाएगी।

मै - (बिना पैन्टी के??? बहु के बात सुनते हे मैंने अपनी नज़र उसकी चूत पे गडा ली। ओह बहु के चूत के बीच की लाइन साफ नज़र आ रही थी।। मेरा लंड खड़ा होने लगा।)

सरोज - (उदास होते हुये।।) मुझे सारे कपडे ट्राई कर के लेने चाहिए थे।

मै - कोई बात नहीं बहु दूसरा ले लेंगे तुम बाकी के कपडे भी ट्राई कर के देख लो ब्रा और पैन्टी भी कहीं वो तो छोटी नहीं है?

सरोज - ठीक है बाबू जी आप यहीं बेड पे बैठिये मैं बाकी के कपडे ट्राई करती हूँ।
 
मै बेड पे बैठ गया, और बहु पीछे मुड कर अपनी ब्लाउज उतारने लगी।। और अब ब्रा भी खोल दिया। उसकी नंगी पीठ मेरे सामने थी

सरोज - बाबू जी।। वो रेड वाली ब्रा दिजिये न पहले।

मै बैग से उसकी रेड ब्रा निकाल के बहु के तरफ बढाया।। सरोज मेरे सामने ब्रा पहन रही थी। मैं सोचने लगा की बहु के सामने से बूब्स अभी कैसे दिख रहे होंगे। मैं दिवार के तरफ पिलो लगा कर बैठा था बहु को ऐसे अधनंगा देख मेरा लंड रगडने का मन करने लगा।

मैं बेड पे रखी ब्लैंकेट को खीच उसके अंदर घुस गया और अपना लोअर नीचे कर लंड को मसलने लगा।।

बहु बिना मेरी तरफ मुड़े अपनी पैन्टी भी मांगा, मैंने एक हाथ से पैन्टी उठा के उसकी तरफ बढ़ाया मेरा एक हाथ अभी भी लंड को मसल रहा था। बहु एक टॉवल लपेट अपनी ट्रैक पेंट उतार बेड पे फेंक दी और पैर उठा के पेंटी पहनने लगी। मैं तेजी से मुठ मार रहा था। बहु पेंटी और ब्रा पहनने के बाद टॉवल को नीचे गिरा दिया और मेरी तरफ मुड गई।

मेरी तो जैसे साँस ही अटक गई।। मेरी जवान बहु अपने भरे-भरे बदन को सिर्फ एक रेड कलर के ब्रा और पैन्टी में ढके मेरे सामने खड़ी थी।।

मैने अपना हाथ स्लो कर दिया ताकि बहु को पता न चले के मैं ब्लैंकेट के अंदर मुठ मर रहा हू।।

सरोज - कैसी लग रही हूँ बाबूजी।।

मै - (मेरी साँसे तेज़ थी।।) बहुत अच्छी लग रही हो बहु।। लाल कलर के ब्रा पैन्टी में बहुत गोरी लग रही हो । और तुम्हारी जांघे कितनी मोटी, चिकनी और मांसल हैं बहु।। (ऐसा कहते हुए मैं आँख बंद कर अपने लंड का स्किन पूरा खोल ३-४ बार जोर से स्ट्रोक दिया।)

सरोज - (हँसते हुवे।। ) सच्ची बाबूजी।। मुझे भी इसकी कलर बहुत पसंद है।। आपको ठण्ड लग रही है क्या? आपने ब्लैंकेट क्यों ले लिया?

मै - हाँ बहु थोड़ी ठण्ड लग रही थी। (मैं बहु की सेक्सी स्ट्रक्चर देख तेज़ी से मस्टरबैट करने लगा।।)

सरोज - क्या हुवा बाबू जी? आपके हाथों को ? इतना क्यों हिल रहे हैं?



मै - कुछ नहीं बहु तुम्हारे कमरे में मच्छर (मॉस्क्वीटो) ज्यादा है, पैर पे कोई मच्छर ने काट लिया शायद।। (मैंने खुजलाने के बहाने और तेज़ी से लंड हिलाने लगा और बस थोड़ी देर में ब्लैंकेट के अंदर मेरे लंड से गाढ़ा पानी निकल गया।। )

सरोज - हाँ बाबूजी मच्छर तो ज्यादा है यहाँ। मैं गुड नाईट लगा देति हूं।। (बहु मेरे सामने ब्रा पैन्टी में अपनी गांड मटकाते हुए स्विच के तरफ गई और गुड नाईट लगाने लगी।।)

मै मौका देख तुरंत अपना लंड अंडरवियर के अंदर वापस डाल लिया।

सरोज बेड के ऊपर आ गई और घुटने पे मेरे सामने बैठ अपने ब्रा को छूते हुये बोली।

सरोज - बाबूजी।। इस ब्रा की क्वालिटी कितनी अच्छी है न?
 
मै- (मैं बहु के पास आया और अपने हाथ बहु के काँधे के पास ब्रा को छूते हुए ।बोला) हाँ बहु ये तो बहुत अच्छा है।

मैन धीरे से अपना हाथ नीचे ले आया और।। साइड से बहु के ब्रा के अंदर हाथ ड़ालते हुये ब्रा के कपडे को छूने लगा।।मेरी उंगलियाँ बहु की नंगी बूब्स को महसूस कर रही थी।

सरोज - बाबूजी ब्रा तो मुझे बहुत पसंद आयी है लेकिन पेंटी उतनी सॉफ्ट नहीं है और स्टीचिंग भी अच्छी नहीं है देखिये न साइड से धागे (थ्रेड) निकल रहे है। (बहु ने एक छोटी सी थ्रेड पकड़ के कहा)

मै - बहु सब थ्रेड को काट दो नहीं तो स्टीचिंग खुल जाएगी।। कुछ काटने के लिए है बहु?

सरोज - नहीं बाबू जी।। यहाँ तो कुछ नहीं है।।

मै - बहु तुम थोड़ा पास आओ तो मैं अपने दांतो से काट देता हू।

सरोज - ठीक है बाबूजी।। (बहु ने थोड़ा ऊपर होते हुये अपनी पेंटी मेरे चेहरे के पास लायी।

मैने अपने हाथ बहु के ब्रा से निकल।। बहु के नंगी कमर और गांड पे रख दिया और झुक कर अपनी तरफ पुल्ल किया। बहु अपनी लेफ्ट हाथ बेड पे रख अपनी कमर को मेरे मुह के पास ले आयी। मैंने धीरे से अपने होठ बहु के इनर थाइस के पास ले गया और थ्रेड काटने की कोशिश करने लगा।

मै- बहु और पास आओ।।(मैं अपना राइट हैंड बहु के गांड से हटा के बहु के पेंटी के साइड में ऊँगली ड़ालते हुये अपनी तरफ पुल्ल किया।। मुझे बहु के चूत की साइड के हलकी-हलकी बाल महसूस हुई।।।)

सरोज अब अपनी चूत को मेरे नाक के पास ले आयी।। पैंटी की साइड से चुत नज़र आ रही थी मैं अपने नोज को बहु के चूत के काफी क़रीब ले गया।। बहु के चूत की स्मेल मुझे पागल कर रही थी।।

मैने बहु के पेंटी साइड से हटा कर थ्रेड काटने लगा, मेरी उंगलिया बहु के गरम चूत से रगड खा रही थी। एक-दो बार मैंने थ्रेड काटने के बहाने अपने होठ बहु के चूत पे रगड दिए।। धीरे-धीरे बहु बेड पे लेट गई और मैं उसके थाइस के बीचे में उसकी चूत के स्मेल का मजा ले रहा था। बहु के आँखें बंद थी।

सरोज - (अपनी टाँगे फैला दी और मेरे बाल पकड़ते हुए अपनी चूत के पास खीचा।।और बोली) आह।। बाबूजी।। संभल के सारे थ्रेड काट दिजिये बाबूजी।।
 
बहु के आवज़ में कुछ नशा सा था। मैं पैंटी को साइड से खीच के बहु के चूत को नंगा कर दिया।। अबतक बहु की चूत गिली हो गई थी।। मैंने अपनी एक ऊँगली बहु के चूत के बीच रखा।। ये क्या बहु के चूत एकदम गरम और मक्ख़न की तरह मुलायम थी।।

बहु के बुर(चूत) से पानी निकल रहा था। जिससे मेरी ऊँगली गिली हो गई। उसके चूत की महक ने मुझे पागल बना दिया, मैं ऊँगली से छुइ को खोल अपने जीभ से बहु के बुर(चूत) २-३ बार चाट लिया।

सरोज - (अपनी चूत को पीछे करते हुए।।) बाबूजी।।।। ये आपने थ्रेड काट दी सारी?

मै - (अपना चेहरा ऊपर करते हुए।) हाँ बहु।। वो नीचे थोड़ा गिला होने के वजह से थ्रेड चिपक गया था। इसलिए मैंने जीभ से निकाल के काट दिया।

मेरे होठ और मुह पे बहु के चूत का पानी लगा था।। मैं उसे पोंछते हुए मुस्कराते हुये बोला।

तभी बेड के किनारे रखे बहु का मोबाइल बजा।। बहु ने हाथ बढा के सेल फ़ोन उठाया।। और अपनी पेंटी ठीक कर बिस्तर पे बैठ गई।

सरोज - (सेल फ़ोन देखते हुए।।) बाबूजी मनीष का फ़ोन है।।

अपने मन में मैं अपने बेटे को गाली दे रहा था। कैसे गलत टाइम पे फ़ोन किया मेरी बहु के पास। शायद मैं कुछ देर और बहु की बुर(चूत) चाट पाता।
 
बहु मनीष से फ़ोन पे बात करते हुए।।

सरोज - हेलो मनीष कैसे हो आप?

सरोज - ठीक हूं।। नहीं ।अभी शॉपिंग कर के आयी हूँ।। अपने कमरे में हूँ।

सरोज - बाबूजी ठीक है।। यहीं है।

सरोज - कुछ नहि।। यूँ ही मैं और बाबूजी बातें कर रहे थे

मै बहु के बेड पे बैठा बहु और मनीष की बातें सुन रहा था। बहु ने मनीष से बस ये बोली की मैं और बहु बातें कर रहे थे।। लेकिन सच्चाई तो कुछ और है।

बहु को झूठ बोलता देख मैंने राहत की साँस ली, इसका मतलब मेरे और बहु के बीच अभी जो भी हो रहा था मनीष को इस बात का कभी पता नहीं चलेगा।

सरोज - ओके।।मनीष में शाम को कॉल करती हूँ अभी कुकिंग करनी है

बहु ने फ़ोन काट दिया और बेड पे रखे पेंट टीशर्ट पहनते हुये मुझसे बोली।।

सरोज - बाबूजी मैं कुछ डिनर बना देती हूं।। आज रात आप अपने कमरे में सोयेंगे या मेरे कमरे में।।? एक्चुअली रात को मैं मनीष से बात करुँगी।।

मै - ठीक है बहु मैं अपने कमरे में सोउंगा।

बहु कमरे से बाहर चलि गई, मैंने बेड पे गिरि अपने मुट्ठ को बहु के साड़ी से पोंछ दिया लेकिन निशान नहीं मिटा। मैं वेसे छोड़ के कमरे के बाहर आ गया।

रात में डिनर के बाद मैं अपने कमरे में लेटा था।आज जो भी हुआ उसके लिए मैं अपने लक पे बहुत खुश था। आज़ मुझे अपनी ही जवान बहु के बुर(चूत ) चाटने का मौका मिला था। मैं बहु के बारे में सोच मुठ मार कर सो गया।

सूबह क़रीब ६ बजे शमशेर ने डोर पे नॉक किया।। मैंने दरवाजा खोला और शमशेर मेरे पीछे कमरे तक आ गया।।

मै - समशेर तुम ५ मिनट वेट करो मैं अभी आता हू।

शमशेर -(बेड पे बैठा हुआ।। ) हाँ मैं वेट करता हूँ जल्दी आओ। बहु चलेगी?

मै - हाँ

थोड़ि देर बाद मैं जब कमरे में आया तो देखा। शमशेर बेड पे आँखे गड़ाए हुए था। मुझे कमरे में आता देख।।।

शमशेर- देसाईजी। ये क्या है बेड के बीच में?

मै - (अनजान बनते हुए।। ) पता नही

शमशेर - देसाई।।। झूठ मत बोल।। सच बता ये तेरी रात की करतूत है न?

मै - क्या बोल रहे हो?

शमशेर - मैं अच्छी तरह जानता हूँ ये क्या है? बोल सच सच?

मै - हा।।मेरी मूठ है

शमशेर - देसाई।। ऐसा क्या हुआ कल जो तूने बेड पे मास्टरबैट कर लिया।। सच बोल

मै- कुछ नहीं बस ऐसे ही मन किया

शमशेर - किसके बारे में सोच के किया? बोल?

मै - तू जानता है यार। (मैंने टॉवल से मुह पोछते हुए बोला।।)

शमशेर - क्या तूने सरोज।। मतलब अपनी बहु के बारे में सोच मास्टरबैट किया?

मै - (गर्दन झुकाते हुवे।।) हाँ

शमशेर - वो।।। देसाई

शमशेर - तेरी बहु है ही ऐसी । देखा आखिर तूने भी उसके नाम की मूठ मार ही डाली। साली है हे ऐसे चीज़।। उसके बारे में सोच तो मैं रोज़ मूठ मारता हूँ

ओ भी २-३ बार एक दिन में।।
 
मै - सच कह रहा है तु।। मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं होता उसकी भरी जवानी देख कर।

शमशेर - तो कितनी बार मास्टरबैट करता है।। ? कभी उस के सामने रह कर किया?

मै - सच कहूं तो मैं ६ से ७ बार एक दिन में मुट्ठ मारता हूं।। और कई बार बहु के बेड पे भी गिराया है।।

शमशेर - देसाई क्या बोल रहा है।।। बहु के बेड पर???? ( मैंने देखा शमशेर का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था। )

हा - बहु की बड़ी बड़ी चूचियां, उसकी मांसल जाँघें और मोटी गांड मेरे दिमाग में रात दिन घूमति हैं और मैं मुठ मारने पे मजबूर हो जाता हूँ।।

(मैं अपने लंड को एडजस्ट करते हुए बोला)

शमशेर - न जाने कितने लोग तेरी बहु को देख मुट्ठ मारते होंगे।। तू किस्मत वाला है जो वो तेरे सामने है कभी मुझे भी उसके अधखुले जिस्म का मजा उठाने दे।

कभि मैं भी उसको सामने देख मुठ मारूँगा।। (ये कहते हुए शमशेर लोअर के ऊपर से अपने लंड को मसलने लगा)

शमशेर - साली तेरी बहु का नाम लेते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।। आज तो उसकी गांड देख के मूठ मारने का मन है।। देसाई कुछ करो प्लिज।

मै न जाने क्यों चाहता था की शमशेर भी मेरी बहु के साथ मजे ले और मैं बहु और शमशेर को मस्ती करते देखुं। मैं बहु को रंडी बनते देखना चाहता था।

मैने शमशेर को बोला के वो चाहे तो २-३ दिन मेरे घर रुक सकता है और मैं बहु से कह दूंगा के तुम्हारे गाओं से कुछ मेहमान आये हैं और तुम मेरे घर पे रहोगे। शमशेर खुश हो गया।

शमशेर - बहु अपने कमरे में सो रही है क्या?

मै - हाँ अभी सो रही होगी, मैं उठाता हू।

शमशेर - रुक मैं भी आता हूं।। मैं देखूँ बहु सोती कैसे है?

मै और शमशेर बहु के कमरे में गये। कमरे में बहु केवल एक वाइट कलर ब्रा पहने और ब्लैंकेट के अंदर सो रही थी। हमदोनों को उसकी नंगी पीठ और नवेल नज़र आ रही थी।

शमशेर की नज़र लगातार बहु के नवेल पे थी। मैंने बहु को उठाया।। थोड़ी देर बाद मैंने शमशेर के बारे में भी बहु को बता दिया।

दोपहर में बहु किचन में थी, मैं और शमशेर टीवी देख रहे थे। शमशेर बार बार किचन में बहु को देख रहा था बहु के नवेल और पेट थोड़े से खुले थे

जीसको देख शमशेर अपने लंड मसल रहा था।

शमशेर - देसाई।। दिल करता है लंड बाहर निकाल के तेरी बहु के गांड और नंगी कमर देखते हुए मास्टरबैट करूँ ।

मै - पागल हो गया है तू? यहाँ ?

शमशेर - हा।। तूने तो बहुत मज़े लिए हैं अब मुझे उसकी गांड का मजा लेने दे।

इससे पहले मैं कुछ कह पता शमशेर ने अपना विशाल लंड बाहर निकल लिया, और स्किन नीचे कर ऊपर नीचे रगडने लगा। मेरे सामने मेरी बहु को देख एक पडोसी मुठ मार रहा था।। मुझे सोच के इरेक्शन होने लगा। मैंने देखा शमशेर का लंड बहुत बड़ा था और उसमे से काफी स्मेल आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे उसके लंड की स्मेल पूरे कमरे में फैल जाएगी।। थोड़ी देर में शमशेर के लंड का पानी सोफ़े और टेबल पे निकल गया। शमशेर को मैंने बहु की ब्रा लाके दी तब उसने अपना मुट्ठ साफ़ किया।
 
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