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मेरी बहु की मस्त जवानी complete

सुबह देर तक मैं और बहु एक बिस्तर पे एक चादर के अंदर सोते रहे मुझे ख्याल ही नहीं आया की कब शमशेर हमारे कमरे में आया और मुझे आवाज़ लगाने लगा।

शमशेर- देसाई जी। देसाई जी।। बहु।। बहु।। दिन चढ़ गया है मॉर्निंग वाक पे नहीं जाना क्या।

मै घबरा कर उठ गया मुझे हैरत हुआ की ये शमशेर कबसे हमे उठा रहा है।। कमरे के हालत बहुत ख़राब थी। बहु के ब्रा और पेंटी बिस्तर के नीचे गिरी पड़ी थी और मैं भी पूरा नंगा था। मैं डर गया की शमशेर न जाने क्या सोच रहा होगा हमारे बारे में मैंने छुपके से चादर खीच के बहु के नंगी पीठ को ढक दिया और खुद भी लेता रहा।।

मै - शमशेर वो मेरे सर में दर्द है तो मैं वाक पे नहीं जाउँगा।। तुम चले जाओ।।

शमशेर - और बहु क्या बहु नहीं जाएगी।।?

मै - बहु देर रात तक मनीष से बात कर रही थी तो अभी शायद नहीं उठेगी तुम चलो मैं पूछता हूं।

शमशेर - ठीक है, (और शमशेर कमरे से बाहर चला गया)

सरोज - (उठ के बैठती हुई।।) बाबूजी।।।।।।।।।।शमशर अंकल ने सब देख लिया??????? शीट।। मैं क्या मुह दिखाउंगी।।? ओहः।।

मै - (ओह इसका मतलब बहु जानबूझ कर सोने की एक्टिंग कर रही थी उसे पता था की वो बिस्तर से बाहर नहीं निकल सकती)।।। नहीं नहीं बहु उसे पता नहीं चला होगा की चादर के अंदर तुम नंगी हो।। तुम चिंता मत करो।

सरोज- सच में बाबूजी?

मै - हाँ

सरोज - बाबूजी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा ये सब क्या हो रहा है क्यों हो रहा है प्लीज बाबूजी आप रात को इतना बहक जाते हैं मैं आपको कण्ट्रोल नहीं कर पाती आखिर आपको हुआ क्या है क्यों मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर देना चाहते हैं?

मै - नहीं बहु।। ऐसा मत बोलो मैं तुम्हे कभी बदनाम नहीं होने दूंगा। मैं कल रात कुछ ज्यादा ही जिद्दी हो गया था मुझे माफ़ कर दो बहु।।

सरोज - ठीक है बाबूजी।। लेकिन मैं अपने आप को और प्रॉब्लम में नहीं दाल सकती। आप प्लीज शमशेर अंकल को अपने घर जाने के लिए कह दिजिये वो यहाँ क्यों रुके हुए हैं?

मै - बहु।। शमशेर तुम्हारी जिस्म के ख़ूबसूरती पाने के लिए रुका हुआ है मैं क्या बहाना करके उसे अपने घर भेजूं?

सरोज - आप मर्दो का क्या प्रॉब्लम है? क्या मिलता है आपको? क्या वो आपके....आपके... ओ....केले का पानी निकलने से सब ठीक हो जाता है?

मै- हाँ बहु हम मर्दो के लंड का पानी एक बार निकल जाए तो रिलैक्स महसूस होता है। एक बात कहूं बहु अगर तुम बुरा न मानो तो।।

सरोज - क्या बाबूजी?

मै - तुम चाहती हो न की शमशेर अपने घर चला जाए?

सरोज - हाँ

मै - तो फिर तुम उसे सटिस्फाइड क्यों नहीं कर देती?

सरोज - मैं समझी नहीं बाबू जी?

मै - मेरा मतलब।। तुम कुछ ऐसा करो की वो सटिसफाइ हो जाए, वो तुम्हे बहुत पसंद करता है तुमहारे बारे में सोच कर मुठ मारता है। और अगर तुम उसे हेल्प करोगी तो वो खुश हो कर अपने घर चला जाएगा।
 
सरोज - बाबूजी मैं ये नहीं कर सकती।। ये आप क्या कह रहे हैं?

मै - देखो बहु तुम अनजाने में कुछ ऐसा करो की वो मुठ मारने पे मजबूर हो जाए। और वो जब सटिसफाई हो जायेगा तो खुद ही चला जाएगा।

सरोज - लेकिन ये होगा कैसे? की मैं भी अन्जान रहूँ और शमशेर अंकल को मजा भी आ जाए? मैं कुछ सोचती हूँ।

मै - ठीक है बहु।।

बहु चादर के अंदर ही अपनी ब्रा पैंटी पहनी फिर नाइटी पहन कर वाशरूम चलि गई।। मैं भी फ्रेश होने चला गया।।। बाथरूम से लौट कर मैं कमरे में घूम रहा था शमशेर सोफ़े पे बैठा टीवी देख रहा था। मैं भी शमशेर के साथ सोफ़े पे बैठ गया। बहु कमरा साफ़ कर रही थी, वो हॉल में झाड़ू लगाने के बाद टीवी के पास बैठ कर कुछ फोटोज फ्रेम साफ़ करने लगी। बहु ने पीली साड़ी पहन रखा था और जब वो हमारे ठीक आगे झुक के सफाई कर रही थी तो उसकी मोटे मोटे कुल्हे उसकी साड़ी में लिपटे बहुत ही मादक लग रहे थे। उसकी कमर का भाग काफी खुला हुआ था और कमर से ले कर हिप तक उसकी शेप देख शमशेर की आँखें बाहर आ गई।

बहु जानबूझ कर अपने कुल्हे हिला रही थी जैसे किसीको आमंत्रित कर रही हो।।शमशेर की हालत ख़राब हो रही थी।। और वो बहु की गांड देख अपना लंड सहलाने लगा।

शमशेर - बहु क्या बात है आज तुम बहुत खुश लग रही हो।।। और बालों में गजरे भी लगाए हैं कोई ख़ास बात?

सरोज - (बहु बिना पीछे मुड़े ही जवाब दी।।। शायद वो जानती थी की शमशेर अपना लंड हिला रहा होगा और वो उसे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी।। ) ख़ास बात तो है लेकिन न तो मेरे पतिदेव को याद है और न ही मेरे ससुर जी को।

मै- क्या ख़ास बात बहु।। ? मेरा न्यूज़ पेपर पे ध्यान गया क्या आज १४ जुलाई है? ओह मेरी बहु का जन्मदिन? (मैं सोफ़े से उठ खड़ा हुआ)

बहु भी खड़ी हो गई और बोली।।

सरोज - हाँ बाबूजी आप भूल गये।।
 
मै- बहु मुझे बिलकुल ही याद नहीं रहा मुझे माफ़ कर दो। (और मैंने आगे बढ़ कर बहु को गले से लगाया।। उसके गाल और हाथों पे हलके से किस किया और उसे अपने से चिपका लिया)

बहु भी मुझसे काफी टाइट लिपट गई और अपने भारी बूब्स को मेरे सीने से दबा रही थी साथ ही साथ उसकी मोटी मोटी जाँघे भी मुझे मेरी जांघो से टच हो रही थी।। मैं फिर उससे कस के गले लगाया और बहु के पीठ फिर उसकी नंगी कमर और फिर उसके कुल्हे को अपने हाथो से सहलाने लगा।

शमशेर - बहु जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो।। (शमशेर ने अपना हाथ आगे बढाया।। तो बहु ने मेरे गले से अपनी बाहें निकाल शमशेर के गले में डाल दी।) ऐसा करते हुए बहु का पल्लू गिर गया और उसकी नाभि दिखने लगी। बहु को इतने पास से बिना पल्लू के देख शमशेर का लंड फुंफकार मारने लगा। वो झट से बहु को गले लगा लिया।। इधर बहु ने भी बेशरमी से बिना पल्लू के शमशेर से लिपट गई। शमशेर भी कहाँ पीछे हटने वाला था उसने अपना एक हाथ बहु के पीठ पर रखा और एक हाथ उसकी गांड पे रख अपनी ओर एक झटके से खीच लिया। शमशेर बहु के काँधे पे झुक अपनी आँखें बंद किये हुई थी और वह बहु के गरमाई जिस्म को रगडता रहा।।

मै - बहु आज तुम्हारा जन्मदिन है तो क्यों न हम कहीं घूमने चलें?

सरोज शमशेर के बाँहों से निकलती हुई।। नहीं बाबूजी आज शम को तो मेरे पापा आ रहे है। आप तो जानते हो वो मुझे हर बर्थडे पे मिलने आते हैं आज भी वो जरूर आयेंगे।

शमशेर - तो फिर बहु ऐसा करते हैं तुम यहीं रहो मैं और देसाई जी तुम्हारे लिए केक और गिफ्ट लाते है। आखिर मेरी प्यारी बहु का बर्थडे है।

सरोज - ओके अंकल जैसा आपलोग ठीक समझे।

उसके थोड़ी देर बाद मैं और शमशेर बाजार चले गये। हमने एक चोकलेट केक और बहु के लिए कुछ कपडे ख़रीदे। घर पहुच कर जब बेल बजाया तो बहु ने काफी देर तक रिस्पांस नहीं किया। कुछ देर बाद बहु ने जब दरवाज़ा खोला तो अंदर का हाल देख कर मेरे पसीने आ गए। बहु ने सिर्फ ब्रा और पेटीकोट पहनी हुई थी।।

सरोज - ओह बाबूजी आप।।। सॉरी मुझे लगा कामवाली है।।

बहु के ब्रा बहुत छोटी थी इतनी छोटी की वो केवल उसके निप्पल को ढक पा रही थी और उसके बड़े बड़े बूब्स नीचे से बाहर निकले हुए थे।

ब्रा के बीच से एक लाकेट निकली थी जिसे बहु ने अपनी दांतो से दबा रखा था ताकि वो गिर न जाए।।

सरोज - बाबूजी आपलोग इतनी जल्दी कैसे आ गए मैं तो अभी नहाने जा रही थी।

मै - हम ज्यादा दूर नहीं गए बहु बस यहीं पास से ही केक और तुम्हारे लिए कुछ ड्रेस ले आए।।

सरोज - वाओ बाबूजी मैं जल्दी से नहा के आती हूं।।
 
[attachment=0]attachment.php.jpg[/attachment]इधर शमशेर अपने लंड को बहार निकाल सहलाने लगा।

शमशेर - देसाई तेरी बहु कितनी माल है यार।। आज तो तेरी बहु के सामने मुठ मारूँगा कैसे भी।। साली ने मेरे लंड का बुरा हाल कर दिया है। मैं तो रोज ऐसे टाइम पे आऊ ताकि बहु को लगे की कामवाली आयी है और वो दरवाजा खोल दे और मैं उसके नंगे बदन को देख पाऊ। देसाई बड़ा लकी है तू जो तुझे ऐसी रंडी बहु मिली। शमशेर तेज़ी से मुट्ठ मारने लगा, और फिर पास में पड़े केक को खीच बोला।।

शमशेर - आज मेरी रंडी बहु बर्थडे केक के साथ अपने शमशेर अंकल का वीर्य भी खाएगी।।

ये कहते हुये शमशेर ने अपने लंड का ढेर सारा गाढा पानी केक पे छोड़ दिया।

मै - (झूठ मूठ का शमशेर को डांटते हुए।। ) ये क्या किया तुमने? तुझे शर्म नहीं आती मेरी बहु को अपना मुट्ठ खिलायेंगा।।?

शमशेर - हाथ जोड के रिक्वेस्ट करते हुये।। प्लीज देसाई मुझे आज मत रोक कई हफ्तो से मैं ऐसे मौके की तलाश कर रहा हूँ तू तो जानता है इसलिये मैं तेरे घर भी आया।। प्लीज करने दे मैं तेरा अहसान कभी नहीं भुलुंगा।

मै - ठीक है लेकिन एक लिमिट में तेरी इन हरक़तों का मेरी बहु को पता नहीं चलना चहिये।

तभी बिस्तर पे पड़े मोबाइल पे कॉल आने लगी।। अरे बहु।।। देख तो मनीष का कॉल तो नहीं आखिर उसे याद आ ही गया।।

सरोज - (एक टॉवल लपेटे बाथरूम से झाँकती हुई।।) शमशेर अंकल प्लीज देखिये न किसका फ़ोन है मुझे दे दिजिये न प्लीज।

नहा कर बहु पूरी नंगी थी उसने कुछ नहीं पहना था सिवाय एक टॉवल के।। जिसके इस सिरे से वो अपने बदन से पानी पोंछ रही थी।।

शमशेर - बेटा मनीष का ही फ़ोन है।। ये लो।

सरोज - अंकल मेरे हाथ गीले हैं मेरे कान के पास लाइये न प्लीज।।

बहु इस्सी हालत में शमशेर के सामने बात करने लगी।। बातों बातों में उसका टॉवल एक साइड से गिर गया, उसकी लेफ्ट साइड की भरी भरी चूची बाहर निकल आयी। बहु बेशरमी से शमशेर अंकल को अपनी नंगी चूचि दिखाती रही।।
 
शमशेर बहु की नंगी चूचि देख अपने होश खो बैठा था, बिना पलक झपकाए वो टकटकी लगा कर बहु की चूचि को घूरता जा रहा था। बहु इस बात से अन्जान मनिष से बातें करने लगी।

सरोज - मनिष् तुम भी यहाँ होते तो कितना अच्छा होता।। यहाँ सब लोग है ससुर जी, पड़ोस के शमशेर अंकल शाम को पापा भी आ जायेंगे केवल तुम नहीं हो।।

सरोज को बातों-बातों में ध्यान आया की उसकी चूचि बाहर निकल आयी है तो उसने तौलिए से ढ़क् लिया और फिर शमशेर की तरफ देखा। चालाक शमशेर पहले ही अपना मुह घुमा लिया था ताकि बहु को लगे की उसने नोटिस नहीं किया। कुछ देर तक बहु फ़ोन पे बात की और फिर दूबारा बाथरूम चलि गयी।। शमशेर बाथरूम के दरवाजे से अपना लंड सहलाते हुए मेरे पास आया।

शमशेर - देसाई जी देखा आपने? अपनी रंडी बहु की चूचियां?

मै - नहीं तो।। ये तुम क्या बोल रहे हो?

शमशेर - कसम से मैंने बहु की चूचि देखी वो भी पूरी नंगी।।

मै- तुम पागल हो गए हो ऐसा कैसे हो सकता है? बहु ऐसा क्यों करेगी?

शमशेर - अरे देसाई जी।। मेरा विश्वास कीजिये जब मैं उसे फ़ोन देने गया तब उसका टॉवल एक साइड से छूट गया था और मुझे उसके गोल-गोल बडी बड़ी चूचि के दर्शन हो गए।

कमाल के निप्पल हैं बहु के।। आआअह्ह्ह्हह।। (शमशेर अपना लंड मसलते हुए बहु की चूचियों को याद करता रहा)

बहु नहा कर बाथरूम से बाहर निकली और सीधा अपने कमरे में चलि गई, मैं और शमशेर बहुत बेसब्री से बहु का इंतज़ार कर रहे थे।

शमशेर - बहु।।।। हम कबसे तुम्हारा वेट कर रहे हैं केक भी रेडी है।।(शमशेर ने आँख मार कर मेरी तरफ शरारत किया)

शमशेर - देसाई जी।। देखिये तो मेरे मुट्ठ से केक कितना चमक रहा है।। बहु को जरूर पसंद आएगा। मेरी मानो तो आप भी अपना माल निकल दो इसपर।। साली रंडी को हम दोनों का मुट्ठ खा जायेगी।

मै - शट अप शमशेर।। मुझे ये सब नहीं करना।

शमशेर - नहीं करना।। तो क्या अपना माल बहु के बुर में गिराने का इरादा है? या फिर सीधा उसके मुह में?

मै मन ही मन मुस्कराता रहा।। शमशेर तुझे क्या मालूम मैंने तो अबतक २ बार बहु के मुह में अपना लंड का पानी छोड़ा है।

मै - चुप करो शमशेर बहु ने सुन लिया तो।। अपनी लिमिट में रहो।।

शमशेर - ओके ओके।। सॉरी तुम्हारी बहु बहुत ही सीधी-साधि और सादगी की मूरत है।

कौन सादगी की मूरत है अंकल??? बहु अचानक से कमरे में आयी।। उसने एक बहुत ही प्यारा सा रेड कलर का सलवार सूट पहन रखा था।।लकिन उसकी सलवार उसके मोटे मोटे जाँघो को नहीं छिपा पा रही थी और उसके यौवन को और निखार रही थी। बहु हमारे सामने चेयर पे क्रॉस लेग कर बैठ गई।
 
उसके पूरे शरीर में सिर्फ उसकी मोटी-मोटी जाँघ नज़र आ रही थी।। ओहः।। इतनी मोटी जांघ देख कर तो कोई ऋषि भी मुट्ठ मारने पे मजबूर हो जाए।

शमशेर - (घबराहट में।। ) तुम बहु।। मैं तुम्हारी ही बात कर रहा था।। तुम कितनी अच्छी लगती हो कितनी प्यारी सुशील और सादगी से भरपुर।। देखो तुमने आज कितना प्यारा सा सलवार भी पहना है बिलकुल कॉलेज की स्टूडेंट लग रही हो।।

सरोज - ओह अंकल।। मुझे नहीं अच्छा लगता अब कोई मुझे कॉलेज की लड़की समझता है। मैं तो बड़ी दीखना चाहती हू। मुझे अच्छा लगता है जब सोसाइटी के बच्चे मुझे भाभी-भाभी कह के बुलाते है।

शमशेर - अच्छा तो तुम्हे भाभी वर्ड सुनना अच्छा लगता है। फिर तो तुम साड़ी पहना करो एकदम मस्त भाभी दिखोगी। वैसे तुम सलवार सूट में कॉलेज के लड़की लगती हो लेकिन तुम टाइट सलवार में एकदम भाभी ही नज़र आती हो।। (शमशेर का चेहरा उसकी बड़े बड़े हिप्स और उसकी मोटी जांघो के तरफ था।।)

सरोज - मैं समझी नहीं अंकल

शमशेर - अरे बेटी।। वो क्या है न की तुम्हारा चेहरा बहुत मासूम है एक बच्ची की तरह लेकिन तुम्हारी जाँघें काफी भरी हैं बिलकुल एक भाभी की तरह।।

सरोज - ओह अंकल आप भी समझते हो की मैं मोटी हूं।।? मुझे बहुत बुरा लगता है जब कोई मुझे मोटा केहता है।

शमशेर - अरे मैंने कब कहा की तुम मोटी हो।। मैंने तो कहा की तुम भरी भरी हो।। ख़ास कर तुम्हारी जांघे।। बहुत हे अच्छी है।। मैंने तुम्हारी कॉलेज के फोटो देखि है।। उसमे तुम बहुत अच्छी लगती हो?

सरोज - कौन सी वाली फोटो अंकल?

शमशेर - अरे वही फोटो जिसमें तुम कॉलेज के सिढ़ियों पे ब्राउन कलर का सलवार सूट पहने बैठी हो।।में उससे रोज देखता हूण।

सरोज ने तुरंत अपनी फोटो एल्बम से निकाल कर शमशेर को दिखाई।।?

सरोज - क्या ये वाली फोटो? आपको बहुत पसंद है।।? आप इसे रोज देखते हैं?

शमशेर- हाँ बेटी।। तुम इन कपड़ों में बहुत अच्छी लगती हो मैं रोज रात को देखता हू।

सरोज - और देख के क्या करते हैं अंकल।।।।।।।।??

सरोज - बोलिये न।।।?? क्या करते हैं??

शमशेर - आ आ।। वो कुछ नहीं बस देखता हूं।। (शमशेर अचानक इस प्रश्न से घबरा गया था।)
 
सरोज - बोलिये न क्या आप फोटो देख सोचते हैं? की काश आपकी भी एक बेटी होती।। ? आप को एक बेटी की कमी महसूस होती है न? बेटी होती तो आपका ख्याल रखती आपके लिये खाना बनाती।। है न?

(सरोज का इशारा पहले फोटो को रात में देख मुट्ठ मारने के तरफ था। लेकिन फिर बाद में उसने बड़ी ही चतुराई से अपनी बात को बदल दिया)

शमशेर - हा।। हाँ बहु।। यही ।। मैं यही सोचता हूँ (शमशेर ने राहत की साँस ली)

मै अपने मन में सोच रहा था।। साला शमशेर, अगर मेरी बहु की तरह उसकी बेटी होती तो उसे यहाँ आने की जरुरत ही नहीं पडती।। वो अपनी बेटी को नंगा देख मूठ मार रहा होता और कभी मौका मिलने पे अपनी बेटी को चोद डालता।

मै - बहु।। ये केक ख़राब हो रहा है थोड़ा सा तो खा लो मैंने और शमशेर ने बड़े प्यार से ख़रीदा है।।

सरोज - बाबूजी।। मुझे खाने का मन तो नहीं है लेकिन आप कहते हैं तो थोड़ा सा किनारे से खा लेती हू।

शमशेर - नहीं नहीं बहु।। तुम ऐसा करो ऊपर से केक की क्रीम खा लो नहीं वो वो ख़राब हो जाएगा।

सरोज - ओके अंकल।। (और फिर बहु ने ऊँगली से ऊपर के क्रीम में सनी शमशेर के वीर्य को चाटने लगी।।।)

सरोज - उम् अंकल।। बहुत मजा आ रहा है।। आपका क्रीम चाटने में।। बहु आँख बंद कर सेक्सी अन्दाज़ में एक रंडी की तरह मुट्ठ चाट्ने लगी (शायद बहु को पता चल गया था की ये क्रीम नहीं मुट्ठ है।। क्योंकि उसे अब तो मूठ का स्वाद पता चल चूका था।। )

शमशेर - (बहु को अपना मुट्ठ चाटता देख पागल हो रहा था। ) हाँ बहु।। और चाटो।। मेरा पूरा क्रीम चाट लो बहु।।। (शमशेर अपना मुठ बहु के होठ पे रगड़ने लगा। बहु सारे क्रीम और मूठ बहु के सलवार सूट पे भी गिर गये।। इधर बहु भी कामुक भंगिमाएँ बना कर मुट्ठ का आनन्द ले रही थी।

बहु के इस हरकत से मेरे लंड में जोश आ रहा था। मन हुआ की अभी खड़े होकर बहु के मुह में अपना लंड पेल दूँ। लेकिन मैं संभल गया। बहु से वादा जो किया था की मेरे और बहु के बीच जो कुछ अनजाने में हुआ उसे किसी को उसकी भनक नहीं लगने दूंगा।)

बहु सारा क्रीम ख़तम कर चुकी थे उसकी हालत देख ऐसा लग रहा था जैसे ५-६ लोगों ने उसके मुह और बदन पे अपना माल गिराया हो।। बहु अपने आप को साफ़ करने के लिये वाशरूम चलि गई।। इधर शमशेर अपना मुट्ठ मार कर बहुत संतुष्ट हो गया और वो मुझे धन्यवाद बोला। दोपहर का लंच करने के बाद शमशेर अपने घर चला गया। अब पूरे घर मैं मैं और मेरी बहु अकेले थे।

दोपहर को बहु अपने कमरे में थी।। मैं उसे खोजता हुआ उसके कमरे के नज़दीक गया, देखा तो कमरे का दरवाज़ा बंद था।।

मै - बहु।।

सरोज - जी बाबूजी।।

मै - क्या कर रही हो?

सरोज - चेंज कर रही हूँ बाबूजी।।

मै - क्यों कहीं जाना है बहु?

सरोज - (दरवाज़ा खोल कर मेरे सामने आती है।।।) नहीं बाबूजी।। आपको बोला था न पापा आ रहे हैं इस लिए मैं तैयार हो रही थी। आपके लाये हुए गिफ्ट में से ही कुछ पहन लु।?

बिस्तर पे बहु का टॉप फेंका हुआ था, बहु एक ब्लैक कलर के ब्रा और पैन्टी पहने हुई थी साथ में उसने पेंटी के ऊपर स्कार्फ़ सा बाँध रखा था जो उसकी मांसल जाँघो को और खूबसूरत बना रहा था।।
 
तभी बहु के मोबाइल पे उसके पापा का फ़ोन आता है।

पापा - बेटा।। कैसी हो?

सरोज - ठीक हूँ पापा आप कैसे हैं?

पापा- मैं ठीक हूँ बहु, तुम्हारा जन्मदिन है तो मैं अपना ऑफिस छोड़ तुम्हारे पास आ रहा हूँ तुमसे मिलने, अभी १ घंटे में पहुच जाऊँगा।

सरोज - ओके पापा मैं वेट कर रही हूँ आपका।

(मैं बिस्तर पे था और बहु मेरे सामने खड़ी हो अपने पापा से बात कर रही थी, एक बेटी को अपने पापा से इस अवस्था में बात करता देख मेरा लंड खडा हो गया। )

सरोज - ओह पापा। १ घंटे में आ जायेंगे क्या पहनू मैं। उनकी बेटी अच्छी दिखनी चाहिए न।।।

मै - बहु।। कुछ भी पहन लो जो भी तुम्हे अच्छा लगे।

सरोज - बाबूजी अगर आप कहें तो मैं जीन्स टॉप पहन लूँ? या फिर साड़ी?

मै - ठीक है बहु जीन्स टॉप ही पहन लो।

सरोज - आप एक मिनट यहाँ बिस्तर पे बैठिये न प्लीज कहीं मत जाइये मैं एक जीन्स टॉप पहन के आती हूं।। बताइये की कैसी है।।

(बहु कमरे से अटैच बाथरूम में चेंज करने चलि गई। थोड़ी देर में वो एक ग्रीन टॉप और ब्लैक जीन्स पहन के बहार आयी।। टाइट टॉप में बहु की चूचियां कसी हुई बड़ी सी दिख रही थी)

मै - बहु ये कपडे तुम्हे थोड़ा टाइट आ रहे है।।

बहु वापस बाथरूम में चलि जाती है और मिरर में अपने आप को चारो तरफ से देखती है। बाबू जी, प्लीज इधर आईये न।।

मै - (बाथरूम के दरवाजे के पास पहुच कर) क्या हुआ बहु?

सरोज - ये टॉप बहुत ज्यादा टाइट है, मैंने पहन तो लिया है लेकिन ये अब निकल नहीं रहि।।।

(बहु अपनी टॉप उठाकर निकालने की कोशिश कर रही थी, इस कोशिश में उसकी नवेल मुझे साफ़ नज़र आती है। आज़ उसकी नवेल ज्यादा सेक्सी लग रही थी। डीप वाइड और स्मूथ।।। शायद जीन्स के टाइट होने से ऐसा था)
 
मै - बहु।। एक बात कहूं बुरा तो नहीं मनोगी।।?

सरोज - नहीं मानूँगी बोलिये।।

मै - बहु अगर तुम ये जीन्स पहन के अपने पापा के सामने गई और पापा ने तुम्हारी ऐसे खुली नाभि देख ली, तो सच बोलता हूं।। तुम्हारी नाभि देख कर उनका मुट्ठ उनके पैंट में ही निकल जाएगा।।

सरोज - छि: बाबूजी।। आप कैसे गन्दी बातें कर रहे है। वो मेरे पापा हैं प्लीज।

मै - ओके बहु सॉरी।।नही कहूँगा कुछ।।

सरोज - ठीक है मैं ये जीन्स टॉप नहीं पहनती मैं कोई और ट्राई करती हूँ।

फिर बहु ने एक ब्लू जीन्स और ग्रे टीशर्ट डाल लिया और अपने पापा का वेट करती रही।।वेट करते करते न जाने कब उसकी आँख लग गई और वो वहीँ बिस्तर पे सो गई।। मैं भी बहु के पापा का हॉल में इंतज़ार करता रहा, तभी डोर बेल्ल बजी मैंने दरवाजा खोला तो मेरे समधी जी थे। मैंने उनका स्वागत किया।। उन्होंने पूछा की मेरी बेटी कहाँ है तो मैं कहा की वो आपकी राह देखते सो गई अपने कमरे में है। फिर मैं और समधी जी बहु के कमरे के तरफ हो लिये।

बहु के कमरे का दरवाज़ा खोला तो अंदर का नज़ारा देख मेरा लंड तमतमा गया। सोते वक़्त बहु का टॉप ऊपर चढ़ गया था जिससे उसकी चिकनी कमर नज़र आ रही थी और उसकी बड़ी सी गांड मेरे आँखों के सामने थी।

बहु की गांड देख ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे और अपने पापा को चोदने के लिए आमंत्रित कर रही हो। समधी जी भी अपनी बेटी की गांड शायद पहली बार देख रहे थे तभी उनके मुह से कुछ नहीं निकला और वो अपनी बेटी के भारी भरकम कुल्हे को निहारते रहे।

मैने धीरे से बहु को आवाज लगाया।। बहु देखो कौन आया है।। बहु की नींद खुली तो वो बिस्तर पर थोड़ा उचक कर हमारी तरफ देखि, बहु ने उठने से पहले अपनी गांड को हवा में लहराया।। उस वक़्त उसकी गांड पहले से ज्यादा बड़ी और मादक लग रही थी।
 
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