S
StoryPublisher
Guest
मैने उस एसएमएस का जवाब नहीं दिया और फिर अपनी गेम में व्यस्त हो गया.. कुछ देर बाद जब नींद आने लगी, तब मैं नीचे गया और अपने लिए कॉफी बना के पीने लगा.. क्यूँ कि अभी सिर्फ़ सुबह के 4.15 ही हो रहे थे, मैं फिर अपने रूम में गया और कॉफी के साथ सिगर्रेट भी लेने लगा... नींद आ रही थी, पर मुझे जागना था... पता नहीं क्यूँ, बस मैं जागना चाहता था.... कॉफी के बाद 2 सिगर्रेट ख़तम करके टाइम देखा तो अभी सिर्फ़ 5 ही बज रहे थे... मैं झट से फ्रेश हुआ, और शॉर्ट्स पहन के पास नज़दीकी पार्क में वॉक के लिए गया.. एक घंटे की वॉक के बाद, मुझे मिस्टर तिवारी दिखाई दिए...
"तिवारी जी... नमस्ते...." मैने उनके पास जाके कहा
"अरे आप... यहाँ, राज जी बोलिए.." तिवारी जी ने मुझे देख के कहा
हमने कुछ देर तक बातें की...
"जी बिल्कुल, आप 19 को आइए मेरे घर, अड्रेस ये रहा..आप पक्का पहुँच जाइए, मैं अभी आपकी सुरक्षा का बंदोबस्त कर देता हूँ.. आपके साथ यादव जी का भी ख़याल रखना है मुझे" मैने तिवारी को अपना कार्ड पकड़ाया और एरिसटॉटल को फोन किया
"हेलो.. एरिसटॉटल नींद में बोला....
"... सॉरी टू डिस्टर्ब यू, पर मेरे कुछ दोस्त हैं, उन्हे अभी पोलीस प्रोटेक्षन की ज़रूरत है.." मैने हेलो करना भी ठीक नहीं समझा उस वक़्त
"अभी.. रात के 2 बजे हैं इधर.. " एरिसटॉटल ने अंगड़ाई लेते कहा
"अबे साले... प्लीज़ समझ ना... मैं तुझे अड्रेस और आदमी की डीटेल्स टेक्स्ट करता हूँ, प्लीज़ 1 घंटे में उनके लिए बंदोबस्त कर" मैने रिक्वेस्ट करते हुए कहा
"ठीक है... मैं अभी मेरे नीचे सब इनस्पेक्टर है, उसको फोन करता हूँ, मिस्टर वीरानी के बेटे ने कहा है तो कुछ ज़रूरी होगा.... आंड वो केस की डीटेल्स हैं मेरे पास.. एविडेन्स लेके मैं आ जाउन्गा कल तक.. ऐज कमिटेड मैन 19थ को इंडियन टाइम के हिसाब से वहाँ दोपहर को तेरे घर आ जाउन्गा..." एरिसटॉटल ने फोन रखते हुए कहा
मैने तुरंत एरिसटॉटल को तिवारी का अड्रेस एसएमएस किया और उसका मोबाइल नंबर भी.... और साथ ही में ये भी लिख दिया कि एक और आदमी है उसकी डीटेल्स कुछ देर में भेजता हूँ... एरिसटॉटल को एसएमएस करके मैं तिवारी को बोला
"मिस्टर तिवारी.. डोंट वरी, आप घर जाइए, आपके पहुँचने से पहले वहाँ पोलीस होगी आपकी सुरक्षा के लिए, और हां काम से 19थ जुलाइ तक छुट्टी ले लीजिए.." कहके मैं तिवारी से अलविदा ली और अपने घर निकल गया... तिवारी से बात करते करते 7 बजने आए थे... मैं जल्दी से जल्दी घर पहुँचा, जैसे ही मैं घर पहुँचा तो मोम ने कहा
"इतने भीगे क्यूँ हो पसीने से.... और अचानक आज वॉक क्यूँ..." मोम ने टवल पकड़ाते हुए कहा
"थॅंक्स मोम.. आज बस ऐसे ही फ्रेश एर खाने का दिल हुआ.. आप प्लीज़ चाइ दीजिए, आइ नीड टू गो आउट" कहके मैं अपने रूम में गया और फ्रेश होने लगा.. जैसे ही बाहर आया मैने ललिता को एसएमएस किया
"तिवारी को बुला लिया है मेडम... प्रसाद का अड्रेस और यादव जी का मोबाइल नंबर एसएमएस करें प्लीज़.."
ललिता को एसएमएस करके मैं नीचे गया जहाँ मम्मी कुछ तैयारियों में लगी हुई थी... बार बार अपने घर पे नज़र घुमा रहा था तो चक्कर सा आ रहा था.. इतनी सजावट, इतनी बतियां, ये सब वेस्ट जाएगा, कितने पैसे वेस्ट होंगे.... उससे कहीं ज़्यादा दुख मोम दाद को होगा, वो तो पूजा को कितना अच्छा समझ रहे हैं.. अरे पूजा क्या, इधर पापा जिन्हे अपना भाई मानते हैं, वो बंदा उसकी बीवी ऐसे निकलेंगे, जब उन्हे ये पता चलेगा तो उन्हे कितना बड़ा धक्का लगेगा... खुदा ना ख़स्ता अगर मेरी शादी हुई और मैने जैसा सोचा है वो नहीं हुआ तो भी उनको आगे जाके दुख ही मिलने वाला है... पर उस दुख की तुलना में ये छोटा दुख सही है, पर इसका असर मम्मी पापा पे ज़्यादा ना हो इसके लिए कुछ करना पड़ेगा मुझे... तभी मेरे दिमाग़ में उनकी ऑस्ट्रेलिया ट्रिप की बात याद आई.. मैने तुरंत ज़य को फोन किया
" हां छोटू, एक बात बता, तुम लोग पेसिफिक कब जाने वाले थे.." मैने ज़य से पूछा
"भाई, ना ही ना हेलो.. ऑल वेल ना, ऑस्ट्रेलिया ट्रिप तो अभी पोस्टपोन की पापा ने, अगर वो शेड्यूल पे होती तो हम अभी वहाँ होते..." ज़य ने नींद में से उठके जवाब दिया
"ओके छोटू... चल ये अच्छा है, तो एक काम कर, तूने लीव अप्लीकेशन कितने दिन की रखी है.."
"भाई, 4 दिन की"
"उसे प्लीज़ एक्सटेंड कर, समझा, अभी कोई नाटक मत करियो इसमे प्लीज़"