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Guest
मैं:- तो प्रेज़ेंटेशन कैसी थी मेरी जानू की
पायल:- ठीक थी...
मैं:- क्यूँ अच्छी नहीं थी... प्रेज़ेंटेशन अच्छी नहीं बनाई थी मैने ?
पायल:- नहीं... अच्छी थी
"अब बस यार.. क्यूँ ऐसे मार रही है, एक एक शब्द नहीं चाहिए जवाब में... अब गुस्सा ठंडा कर प्लीज़, नहीं तो मैं पागल हो जाउन्गा तेरे बिना"
मैने थोड़ा उँची आवाज़ में.. थोड़ा झल्ला के कहा
पायल:- चलो ठीक है बस... सॉरी!! ऐसे कपड़े नहीं पहनुँगी मैं आपके सामने बस...
मैं:- मैने कब कहा के मेरे सामने मत पहन... बस ऑफीस वीअर नहीं है ये मैने ऐसा कहा.. आगे तेरी मर्ज़ी...
ये कहके मैने बात करना बंद कर दी...
15 मीं बीत चुके थे... पहली बार पायल और मैने एक दूसरे से 15 मीं तक कोई बात नहीं की थी.. ये खामोशी हम दोनो को अंदर ही अंदर काट रही
थी... मैं जानता था कि वो लड़की है इसलिए कभी पहेल नहीं करेगी...
"सॉरी स्वीट हार्ट... आगे से नहीं चिल्लाउन्गा तुझ पे यार.. प्लीज़ फर्गिव मी" मैने थोड़ा मीठी आवाज़ में कहा..
ये सुनके पायल मुझे देखने लगी.. कुछ सेकेंड्स में देखते देखते हँसने लगी ज़ोर से...
"हाहहहहा भाई... हहहे.... क्या यार...हेहहेहेहेहेहहे" पायल हँसते हँसते बात कर रही थी
मुझे समझ नहीं आया इसे क्या हुआ.... "क्या हुआ अब" मैने उसे देख के सवाल करने लगा
"कुछ नहीं भाई.. हेहहहे... मुझे लगा आप दूसरे मर्दों से अलग हो, पर मैं ग़लत थी.. हहेहहेहहहे" पायल फिर बोल बोल के हँसने लगी
"दूसरे मर्दों से अलग मतलब क्या." मेरी चिढ़ बढ़ रही थी
"हहहीहे... चिल मेरे भाई... बताती हूँ.. आज ही मैने एक आर्टिकल पढ़ा जिसमे लिखा था कि जब मर्द और औरत का झगड़ा होता है, उसमे ग़लती चाहे
किसी की भी हो, पर माफी हमेशा सब से पहले मर्द ही माँगता है.. और आपने ये साबित भी कर लिया" पायल मुझ पे फिर से हँसने लगी
मैं सोच में पड़ गया था के इसको कैसे समझू मैं.. ये लड़की एक पल में गुस्सा, एक पल में प्यार, आख़िर क्या है ये.. मुझे सोच में देख
पायल फिर बोली
"अच्छा चलो सॉरी.. पर एक लास्ट बात बोलूं आपको"
"बोल" मैं सिर्फ़ ये शब्द ही बोल पाया
"उस आर्टिकल में लिखा था कि एक मर्द कम से कम 45 मिनट्स तो औरत से नाराज़ रहता है.. पर आप तो 17 मिनट में ही हार मान गये' पायल ने फिर
मुझे चिढ़ाने के लिए कहा..
"नहीं.. ऐसा नहीं है, मैं तुझसे ज़्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकता डियर... तू जानती है ना मैं तुझसे कितना प्यार करता हूँ, तुझसे एक मिनट तो क्या ,
एक पल भी..."
"झूठ झूठ झूठ... पायल ने मुझे बीच में ही काट दिया..
"अगर प्यार करते तो आज दोपहर को मुझे इग्नोर ही नहीं करते भाई.. जाओ ना आप, मुझे बात नहीं करनी" पायल ने बनावटी गुस्से में मुझसे मूह
फिराते हुए कहा
मैं:- ठीक है चल.. नहीं बात कर बस.. मुझे घर ड्रॉप कर, डॉली से मिलके मैं उसके साथ घूमने जाउन्गा
ये सुन पायल मुझे देखते देखते आग बाबूला होने लगी.. "चलो अभी.. ज़्यादा मत भागो, नहीं तो फिर जानते हो ना मुझे क्या करूँगी मैं" पायल ने
गुस्से में गाड़ी की तेज़ी बढ़ाते हुए कहा
बातें करते करते हम पायल के घर पहुँच गये.... हम गाड़ी से उतर के पायल के घर के अंदर गये और सीधा उसकी मोम, यानी मेरी बुआ के पास
चले गये
मैं:- बुआ जी... कैसे हो, कितना घूमते हो आप.. एक हम हैं, हमे टाइम ही नहीं मिलता. कितने खुश नसीब हो आप..
बुआ:- बेटा... मस्का मत मार, बोल क्या काम है सीधे सीधे
पायल:- वाह मोम!!!! आप भी पहचान गये हो भाई को एहहेहेहहे
मैं:- बुआ जी.... कुछ दिन आप पायल को हमारे घर रहने के लिए भेजिए ना प्लीज़
बुआ:- अभी तो तुम्हारे घर से आई है.. अचानक क्या हुआ बेटे...
मैं:- नहीं बुआ कुछ नहीं... बस ऐसे ही, मैं घर पे अकेला होता हूँ.. आप तो जानते हो डॉली और ललिता को, उन लोगों को मेरे से बात करने के लिए टाइम
ही नहीं है.. इसलिए पायल कुछ दिन रहेगी साथ तो मुझे भी अच्छा लगेगा और इसका भी टीपी हो जाएगा... मैने पायल को आँख मारते हुए कहा
पायल:- मैने कोई टीपी नहीं करना.. मेरे पास बहुत काम है, मैं नहीं चलूंगी कहीं.. पायल ने मेरी तरफ देखते कहा... कहके फिर अपनी जीभ निकाल
के बुआ से चुप के मुझे चिडाने लगी
बुआ:- ठीक है राज बेटे, मेरी तरफ से पर्मिशन है.. आज इसके पापा भी आ जाएँगे.. ये मान जाए तो ले जाओ इसे.... अब हटो यहाँ से, मुझे काम
फिनिश करने दो अपना तुम दोनो... तुम बाहर जाओ, मैं अभी कोल्ड कॉफी लाती हूँ तुम दोनो के लिए
ये कहके बुआ अपने काम में लग गयी और हम लोग बाहर आ गये....
पायल:- अब बोलो.. क्यूँ ले चल रहे हो अपने घर मुझे..
मैं:- क्यूँ मतलब... ऐसे ही, दिल है मेरा.. क्यूँ, नहीं ले जा सकता ?
पायल:- अगर ले जाना है तो हमेशा के लिए ले जाओ ना अपने साथ. ऐसे रोज़ रोज़ अपने साथ ले जाते हो, फिर वापस छोड़ने आते हो.. इतना कोई तड़पाता है क्या कभी... कहते कहते पायल की आँखें नम होने लगी...
ये देख मुझसे भी रहा नहीं गया.. मैं तुरंत उसके पास गया और उसे ज़ोर से अपने गले लगा लिया..
मैं:- अब रोना बंद कर प्लीज़ मेरी जानू.. तेरा ये एक एक आँसू मेरे दिल पे एक ऐसा बोझ डाल रहा है जो मैं जीते जी कभी नहीं उतार पाउन्गा.
पायल:- ठीक थी...
मैं:- क्यूँ अच्छी नहीं थी... प्रेज़ेंटेशन अच्छी नहीं बनाई थी मैने ?
पायल:- नहीं... अच्छी थी
"अब बस यार.. क्यूँ ऐसे मार रही है, एक एक शब्द नहीं चाहिए जवाब में... अब गुस्सा ठंडा कर प्लीज़, नहीं तो मैं पागल हो जाउन्गा तेरे बिना"
मैने थोड़ा उँची आवाज़ में.. थोड़ा झल्ला के कहा
पायल:- चलो ठीक है बस... सॉरी!! ऐसे कपड़े नहीं पहनुँगी मैं आपके सामने बस...
मैं:- मैने कब कहा के मेरे सामने मत पहन... बस ऑफीस वीअर नहीं है ये मैने ऐसा कहा.. आगे तेरी मर्ज़ी...
ये कहके मैने बात करना बंद कर दी...
15 मीं बीत चुके थे... पहली बार पायल और मैने एक दूसरे से 15 मीं तक कोई बात नहीं की थी.. ये खामोशी हम दोनो को अंदर ही अंदर काट रही
थी... मैं जानता था कि वो लड़की है इसलिए कभी पहेल नहीं करेगी...
"सॉरी स्वीट हार्ट... आगे से नहीं चिल्लाउन्गा तुझ पे यार.. प्लीज़ फर्गिव मी" मैने थोड़ा मीठी आवाज़ में कहा..
ये सुनके पायल मुझे देखने लगी.. कुछ सेकेंड्स में देखते देखते हँसने लगी ज़ोर से...
"हाहहहहा भाई... हहहे.... क्या यार...हेहहेहेहेहेहहे" पायल हँसते हँसते बात कर रही थी
मुझे समझ नहीं आया इसे क्या हुआ.... "क्या हुआ अब" मैने उसे देख के सवाल करने लगा
"कुछ नहीं भाई.. हेहहहे... मुझे लगा आप दूसरे मर्दों से अलग हो, पर मैं ग़लत थी.. हहेहहेहहहे" पायल फिर बोल बोल के हँसने लगी
"दूसरे मर्दों से अलग मतलब क्या." मेरी चिढ़ बढ़ रही थी
"हहहीहे... चिल मेरे भाई... बताती हूँ.. आज ही मैने एक आर्टिकल पढ़ा जिसमे लिखा था कि जब मर्द और औरत का झगड़ा होता है, उसमे ग़लती चाहे
किसी की भी हो, पर माफी हमेशा सब से पहले मर्द ही माँगता है.. और आपने ये साबित भी कर लिया" पायल मुझ पे फिर से हँसने लगी
मैं सोच में पड़ गया था के इसको कैसे समझू मैं.. ये लड़की एक पल में गुस्सा, एक पल में प्यार, आख़िर क्या है ये.. मुझे सोच में देख
पायल फिर बोली
"अच्छा चलो सॉरी.. पर एक लास्ट बात बोलूं आपको"
"बोल" मैं सिर्फ़ ये शब्द ही बोल पाया
"उस आर्टिकल में लिखा था कि एक मर्द कम से कम 45 मिनट्स तो औरत से नाराज़ रहता है.. पर आप तो 17 मिनट में ही हार मान गये' पायल ने फिर
मुझे चिढ़ाने के लिए कहा..
"नहीं.. ऐसा नहीं है, मैं तुझसे ज़्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकता डियर... तू जानती है ना मैं तुझसे कितना प्यार करता हूँ, तुझसे एक मिनट तो क्या ,
एक पल भी..."
"झूठ झूठ झूठ... पायल ने मुझे बीच में ही काट दिया..
"अगर प्यार करते तो आज दोपहर को मुझे इग्नोर ही नहीं करते भाई.. जाओ ना आप, मुझे बात नहीं करनी" पायल ने बनावटी गुस्से में मुझसे मूह
फिराते हुए कहा
मैं:- ठीक है चल.. नहीं बात कर बस.. मुझे घर ड्रॉप कर, डॉली से मिलके मैं उसके साथ घूमने जाउन्गा
ये सुन पायल मुझे देखते देखते आग बाबूला होने लगी.. "चलो अभी.. ज़्यादा मत भागो, नहीं तो फिर जानते हो ना मुझे क्या करूँगी मैं" पायल ने
गुस्से में गाड़ी की तेज़ी बढ़ाते हुए कहा
बातें करते करते हम पायल के घर पहुँच गये.... हम गाड़ी से उतर के पायल के घर के अंदर गये और सीधा उसकी मोम, यानी मेरी बुआ के पास
चले गये
मैं:- बुआ जी... कैसे हो, कितना घूमते हो आप.. एक हम हैं, हमे टाइम ही नहीं मिलता. कितने खुश नसीब हो आप..
बुआ:- बेटा... मस्का मत मार, बोल क्या काम है सीधे सीधे
पायल:- वाह मोम!!!! आप भी पहचान गये हो भाई को एहहेहेहहे
मैं:- बुआ जी.... कुछ दिन आप पायल को हमारे घर रहने के लिए भेजिए ना प्लीज़
बुआ:- अभी तो तुम्हारे घर से आई है.. अचानक क्या हुआ बेटे...
मैं:- नहीं बुआ कुछ नहीं... बस ऐसे ही, मैं घर पे अकेला होता हूँ.. आप तो जानते हो डॉली और ललिता को, उन लोगों को मेरे से बात करने के लिए टाइम
ही नहीं है.. इसलिए पायल कुछ दिन रहेगी साथ तो मुझे भी अच्छा लगेगा और इसका भी टीपी हो जाएगा... मैने पायल को आँख मारते हुए कहा
पायल:- मैने कोई टीपी नहीं करना.. मेरे पास बहुत काम है, मैं नहीं चलूंगी कहीं.. पायल ने मेरी तरफ देखते कहा... कहके फिर अपनी जीभ निकाल
के बुआ से चुप के मुझे चिडाने लगी
बुआ:- ठीक है राज बेटे, मेरी तरफ से पर्मिशन है.. आज इसके पापा भी आ जाएँगे.. ये मान जाए तो ले जाओ इसे.... अब हटो यहाँ से, मुझे काम
फिनिश करने दो अपना तुम दोनो... तुम बाहर जाओ, मैं अभी कोल्ड कॉफी लाती हूँ तुम दोनो के लिए
ये कहके बुआ अपने काम में लग गयी और हम लोग बाहर आ गये....
पायल:- अब बोलो.. क्यूँ ले चल रहे हो अपने घर मुझे..
मैं:- क्यूँ मतलब... ऐसे ही, दिल है मेरा.. क्यूँ, नहीं ले जा सकता ?
पायल:- अगर ले जाना है तो हमेशा के लिए ले जाओ ना अपने साथ. ऐसे रोज़ रोज़ अपने साथ ले जाते हो, फिर वापस छोड़ने आते हो.. इतना कोई तड़पाता है क्या कभी... कहते कहते पायल की आँखें नम होने लगी...
ये देख मुझसे भी रहा नहीं गया.. मैं तुरंत उसके पास गया और उसे ज़ोर से अपने गले लगा लिया..
मैं:- अब रोना बंद कर प्लीज़ मेरी जानू.. तेरा ये एक एक आँसू मेरे दिल पे एक ऐसा बोझ डाल रहा है जो मैं जीते जी कभी नहीं उतार पाउन्गा.