• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मेरी सेक्सी बहनें compleet

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date


ये कहके, मैं वहाँ से मम्मी पापा से अलविदा लेके चला गया सीधे ऑफीस... नाश्ता तो कर नहीं पाया, रास्ते में एक केफे में रुक के कॉफी और सॅंडविच खाने लगा.... उस वक़्त ललिता का फोन आया..

"गुड वन ब्रदर.. क्या मारी है अच्छे से तुमने.." ललिता ने तारीफ़ करते हुए कहा

"वर यू लिसनिंग.." मैने पूछा

"एप.. राइट ऐबव यू.." ललिता का जवाब

"सो... क्या बोली आख़िर" मैने फिर पूछा

" क्या बोलती बेचारी.... हां बोलके गयी है.. बट डॅड ईज़ सूपर अंग्री ऑन यू भाई.." ललिता ने वॉर्निंग देके कहा..

"डोंट वरी.. मैं उन्हे पटा लूँगा... अच्छा सुन, ग्ट्ग नाउ.. रिज़ाइनिंग टुडे.." मैने ललिता को इनफॉर्म किया

"ओके भाई.. सी यू सून हियर.." ललिता ने फोन कट करते कहा

ललिता से बात ख़तम करके, मुझे बहुत खुशी हुई, अंशु ने हामी भरी 5 दिन में शादी के लिए.. ये खेल अब बहुत ही जल्द ख़तम होने वाला है... ये सोच के मैं ऑफीस निकल गया और अपने मॅनेजर से रेजिग्नेशन की बात करी

".. कोई रीज़न है, इनक्रिमेंट चाहिए या हाइयर डेसिग्नेशन" मेरे मॅनेजर ने कहा

"नो सर.. बट कहीं पहुँचने के लिए कहीं से निकलना तो पड़ेगा..." मैने मेरे मॅनेजर से कहा

" युवर प्रमोशन ईज़ ड्यू... यू कॅन गो प्लेसस, इफ़ यू वान्ट आइ कॅन सेट यू अप इन लंडन हेडक्वार्टेर..." मॅनेजर ने मुझे ललचाना चाहा

"सॉरी सर... आइ आम गोयिंग प्लीज़... लंडन आप किसी और को भेजिए प्लीज़, सम वन हू ईज़ मच मोर बेटर देन मी.. आइ आम शुवर योउ कॅन फाइंड वन, टफ थौघ" मैने मॅनेजर को आँख मारके कहा

"हहहहा.. गुड वन बॉय... ओके, रेसिग्नेशन आक्सेप्टेड. प्लीज़ मैल मी अक्रॉस.. आंड यू हॅव टू सर्व युवर नोटीस पीरियड ओके.." मॅनेजर ने आखरी बात कही

"नोप... नोट पासिबल... आइ लीव वेफ टुडे... आइ डोंट वान्ट टू स्पायिल टर्म्ज़ वित यू आंड कंपनी.. सो अभी मैं एसएल आंड पैड लीव रख देता हूँ... उससे 15 दिन निकल जाएँगे.. आंड आइ आम शुवर यू कॅन मॅनेज इन 15 डेज़ ऑल्सो... आइ ट्रस्ट यू वेरी मच सर.." मैने फिर मज़ाक में मेरे बॉस को कहा

"ओके ... फाइनल कॉल एचआर लेगा, आइ विल कीप माइ पॉइंट.. ऑल दा बेस्ट..." मैने मॅनेजर से अलविदा लेके कहा और 15 दिन में वापस आ जाउन्गा फॉर फाइनल सेटल्मेंट.. ये कहके मैं ऑफीस से निकल के घर चला गया

ऑफीस से निकल के मैं सबसे पहले वाइन शॉप में गया... वहाँ से मैने डॅड की फेव शॅंपेन "चार्ल्स हिडसीयेक ब्रूट रिज़र्व" खरीदी.. डॅड गुस्सा थे, इसलिए उन्हे मनाना तो पड़ेगा... इनफॅक्ट इस शॅंपेन के साथ हम अच्छी तरह घर पे सेलेब्रेट कर सकते हैं.. मेरे दिमाग़ में एक छोटा सा हॅपी आइडिया आया.. घड़ी देखी तो शाम के 7 बज चुके थे.... मैने ललिता को फोन किया

" बेबी, व्हेअर आर यू ?" मैने ललिता से पूछा

'अट होम भाई... गेटिंग बोर्ड यार" ललिता ने जवाब दिया

"लिसन.. डू वन थिंग..." और मैने उसे सब काम बता दिए करने को

"भाई.. कैसा सेलेब्रेशन है.." ललिता ने सवाल पूछा

"बेटा, डू ऐज आइ से ओके..." मैने फोन कट करने से पहले कहा..

मैं आराम से घर जाने लगा.. थोड़ी स्पीड कम कर दी मैने गाड़ी की, ताकि जब तक मैं पहुँचू तब तक ललिता मोम डॅड को कहीं बाहर ले जाए... जैसे ही मुझे ललिता का कन्फर्मेशन आया, मैं तुरंत नज़दीकी मल्टी क्विज़ीन रेस्तरॉ में गया, और मोम डॅड की फेव डिशस पार्सल करवाई और तुरंत घर पहुँचा... घर पहुँच के सबसे पहले मैने शॅंपेन को आइस फ्रीज़ में रख दिया और डाइनिंग टेबल को अच्छे से सज़ा दिया... पूरा खाना मैने टेबल पे लगा दिया, बॅकग्राउंड में हल्का सा म्यूज़िक लगा दिया... लाइट्स डिम कर दिए और शॅंपेन के ग्लासस रख दिए.... एसी को एक 18 पे करके, रूम फ्रेशनेर छिड़का.... सब एक दम बढ़िया लग रहा था.. मैने ललिता को एसएमएस किया

"कम नाउ..."

 


ललिता मोम डॅड को 15 मिनट में वापस लाई... जैसे ही मोम अंदर आई

"अरे बेटे.. ये देखो ललिता बच्पना कर रही है..." मोम ने ललिता के कान पकड़के कहा

".. आइ वान्ट टू टॉक टू यू नाउ..." पीछे से डॅड की आवाज़ आई.. वो बहुत गुस्से में थे

"डॅड... मोम... उससे पहले प्लीज़ कम विद मी.." कहके मैं उन्हे डाइनिंग हॉल में ले गया

"सर्प्राइज़ सर्प्राइज़...." मैने मोम डॅड को टेबल दिखा के कहा

टेबल पे डॅड की फ़ेवरेट शॅंपेन.. मोम का फ़ेवरेट खाना.... भला कोई कैसे नहीं मानेगा.... मोम डॅड के चेहरे पे बहुत बड़ी मुस्कान सी आ गयी

"वाह बेटा.. ये सब क्या है..." मोम ने टेबल देख के कहा

"मोम... कितना टाइम हुआ हमने अच्छे से बैठ के शॅंपेन पी हो, आपका फेव खाना खाया हो.. आज करते हैं ना" मैने चेअर आगे करके मोम को बिठाया

"आंड डॅड.. हियर इट ईज़.. युवर फ़ेवरेट वन.." मैने डॅड को शॅंपेन देते हुए कहा

"हाहाहा... माइ बॉय.. ही शुवर नोज हाउ टू कन्विन्स हाँ... बॉय कीप इट अप... वैसे मेरे पास भी तुम्हारे लिए एक सर्प्राइज़ है..." डॅड ने मुझे गले लगा के कहा

"वो क्या डॅड..." मैने डॅड से पूछा, जो अब अपने रूम में जाने लगे

उन्हे जाता देख, ललिता और मैं कन्फ्यूज़ थे, वहीं मोम के चेहरे से लग रहा था वो सब जानती हैं

"मोम.. व्हाट ईज़ इट..." मैने उनके पास जाके बैठा

"वेट... लेट हिम कम ..." मोम ने शॅंपेन ग्लासस में निकालते हुए कहा

" बॉय.. कम हियर.. आंड साइन दीज़ पेपर्स...." डॅड ने पेपर्स दिखा के कहा

"डॅड, कैसे पेपर्स हैं ये..." मैने पेपर्स लेते हुए कहा

"बेटे साइन दिस ओके... आइ विल लेट यू नो..." डॅड ने अपनी फ़ेवरेट पेन देते हुए कहा

मैने बिना कुछ पूछे उन पेपर्स पे साइन कर दी...

"सी.. यू ब्रोक दा फर्स्ट रूल... पेपर्स पढ़े क्यूँ नहीं" डॅड ने पेपर्स वापस लेते हुए कहा

मैं कन्फ्यूज़ था, आख़िर डॅड करना क्या चाहते हैं.. शायद उन्होने भी ये भाँप लिया

"हाहहहहहा.. रिलॅक्स बॉय.. आइ आम कमिंग टू यू... अब से तुम सिर्फ़ मेरे बिज़्नेस के ही नहीं... मेरी पर्सनल वेल्त के भी मालिक हो..." डॅड ने एक बिजली सी गिरा दी मुझपे

"डॅड... यूआर किडिंग राइट..." मैं सीरीयस हो गया

"नहीं बेटा.. आइ आम सीरीयस.. अकॉरडिंग टू दिस, तुम्हारे नाम पे मैने सब असेट्स ट्रान्स्फर कर दिए हैं.. ज़य के नाम पे मैने 10 करोड़ रखे हैं फिक्स्ड डेपॉज़िट... उसकी पढ़ाई के बाद उसको बिज़्नेस करना है जिसके लिए आइ हॅव स्पोकन टू वेंचर कॅपिटलिस्ट ऐज वेल... तो ज़य सेट हो गया.. रहे तुम, तुमने अपनी जॉब , अपनी इनडिपेंडेन्स छोड़ी है मेरे कहने पे... हमारे कहने पे तुमने लाइफ पार्ट्नर चूज़ किया है वो भी हमारी मर्ज़ी का... तुमने अपनी ज़िंदगी का भविष्य हमारे हिसाब से डिसाइड किया है बेटा.. तो हम क्या इतना नहीं कर सकते..." डॅड ने शॅंपेन का ग्लास पकड़ते हुए मुझे कहा

"बट डॅड... दिस.." मैने इतना ही कह पाया के डॅड ने मुझे रोक दिया

"नो दिस आंड दट सन... आंड वन मोर न्यूज़... गॉड फर्बिड कभी तुम्हे कुछ हुआ, तो तुम्हारी सारी वेल्त पूजा के नाम पे ट्रान्स्फर हो जाएगी.. आंड बिकॉज़ सारा हिस्सा एक बंदे के नाम पे ना रहे, इसलिए आफ्टर यू ज़य आंड पूजा विल बी 50 % पार्ट्नर्स.." डॅड ने एक और बड़ा झटका दिया मुझे

मैं एक दम स्टन हो चुका था... क्रिकेट की भाषा में बोलूं तो क्लीन बोल्ड.. स्टंप्ड... जो भी समझो....

"और डॅड... मेरे होते हुए पूजा का हिस्सा.." मैने जिग्यासा से पूछा

"व्हाट सन... ओफ़कौर्स 50 %" डॅड ने जवाब दिया

"डॅड. कॅन आइ सी दा लिस्ट ऑफ युवर असेट्स प्लीज़ " मैने पेपर्स लेते हुए कहा

डॅड के असेट्स की लिस्ट और वॅल्यूयेशन कुछ यूँ थी

स्टॉक्स आंड इनवेस्टमेंट्स :- 45 करोड़

लाइफ इन्षुरेन्स (ड्यू) :- 10 करोड़

लाइफ इन्षुरेन्स (ड्यू इन 3 यियर्ज़ ) 15 करोड़

फार्म हाउस (लोनवाला) :- 18 करोड़

फार्म हाउस (महाबालेश्वर) 16 करोड़

कार्स :- 9 करोड़

बंगलोस (अँबी वॅली) 50 करोड़

बंगलो (पुणे) 6 करोड़

वॉचस 1 करोड़

बंगलो (मुंबा बांद्रा) 50 करोड़

जेवेल्लेरी (मदर) 25 करोड़

क्लब मेंबरशिप्स 3 करोड़

पेंटिंग्स 10 करोड़

कॅश आंड बॅंक बॅलेन्स 10 करोड़

लाइयबिलिटीस :- 3 करोड़

"नेट वर्त 265 करोड़...." मेरे मूह से ज़ोर से निकला

"यू आर रिच मॅन नाउ सन.... एंजाय...." डॅड ने अपना दूसरा शॅंपेन का ग्लास ख़तम कर दिया था

"आंड गिव मी दीज़ पेपर्स बॅक.... मुझे मेरी बहू से भी तो सिगनेचर्स लेने हैं.." डॅड ने पेपर्स लेते हुए कहा

मैं निराश होके वहीं बैठ गया और शॅंपेन पीने लगा.... डॅड ने तुरंत ही ज़य को फोन किया और उसे उसके बिज़्नेस के सेट अप के लिए बताया.. वो बहुत खुश था, उसकी आड़ कंपनी के लिए उसको फाइनान्स मिल गया और उसके पास 10 करोड़ कॅश भी थे.. वो फाइनान्स का पार्ट सुनके बहुत खुश हुआ पर डॅड ने उसे पैसे दिए वो सुनके वो भी डॅड से बहुत गुस्सा हुआ.... मेरी शॅंपेन का नशा इतना, मैं सोचने लगा था....

"डॅड... अँबी वॅली तो आपने ललिता और डॉली के लिए लिया था ना... तो आप उन्हे दे दीजिए ना प्लीज़..." मैने ललिता को देखते कहा

"बेटे, अभी उसकी ओनरशिप मेरे पास है, विच ईज़ ट्रॅन्स्फर्ड टू यू नाउ... तुम बोलो तो पेपर्स मैं अभी बनवा लूँ ललिता के लिए भी, शी ईज़ माइ डॉटर.. बट उसके लिए मैने कुछ और सोच रखा है, विच ईज़ अगेन आ सर्प्राइज़..." डॅड ने फिर ललिता को देख के जवाब दिया

 


आज सर्प्राइज़ नहीं, शॉक लग रहे थे मुझे... मैं चुप चाप खाना खाने बैठ गया और शॅंपेन पीने लगा.... कुछ ही देर में हम सब खाना ख़ाके बातें करने बैठे, और बातों बातों में ये पता चला कि मोम डॅड कल पूजा के घर कुछ शगुन ले जाने वाले हैं और उसके साइन भी कल ही ले लेंगे... (और गान्ड मर्वाओ, करो 5 दिन में शादी भैनचोद.... मैं खुद को गालियाँ देने लगा).. कुछ देर में मोम डॅड से अलविदा लेके मैं अपने रूम में चला गया.. ललिता वहीं बैठी मोम डॅड से बातें कर रही थी.. रूम में जाके मैं फ्रेश हुआ और कपड़े चेंज करके बाल्कनी में खड़ा हो गया.... बाल्कनी में खड़े रहके अपने लिए सिगरेट सुलगाई और कश मारने लगा...

"यूँ सिगर्रेट से टेन्षन कम नहीं होगी स्वीट हार्ट..." पीछे से ललिता की आवाज़ आई....

"थॅंक गॉड इट्स यू... दरवाज़ा बंद करो , मोम डॅड ना देख ले सिगर्रेट" मैने ललिता को हिदायत देते कहा

दरवाज़ा बंद करके ललिता मेरे पास आई और मेरे हाथ से मेरी सिगर्रेट लेके कश मारने लगी

"तो क्या करूँ... इससे तो बहुत बड़ा लफडा होगा यार.." मैने ललिता से कहा

"डोंट वरी... ट्रस्ट रखो खुद पे... हम तो ऑलरेडी अपनी चाल चल चुके हैं... हमे बस उस शख्स का इंतजार है जो इनका बॉस है.. उसके आते ही हमे हमारा प्लान ख़तम करना है... येई तो चाहते थे ना आप भाई.." ललिता ने मुझे कहा

"हां आइ नो... बट फिर भी, अगर उनको शक़ हो गया कि हमने उनके साथ क्या किया है, तो वो लोग अलर्ट तो होंगे ही, साथ में हमे ख़तरा भी है.. और मुझे डॉली के कातिल के बारे में भी जानना है ओके... इसलिए वी आर वेटिंग, नहीं तो हम अब तक अपनी चाल चल चुके होते और ये खेल यहीं रुक गया होता..." मैने वापस ललिता से सिगर्रेट ली और अपने मूह में लगा ली

"कम ऑन इन भाई... अंदर आओ," कहके ललिता अंदर चली गयी

अंदर जाते ही ललिता ने मेरे और अपने लिए एक दारू का पेग बनाया हुआ था...

"ये विस्की कहाँ से आई..." मैने हाथ में ग्लास लेके कहा

"आप ने मुझे तो भेज दिया अंकल आंटी को घुमाने.. जब तक वो माल में घूमते, मैं चुपके से जाके वाइन शॉप में घुसी और गाड़ी में ड्राइवर्स सीट के नीचे छुपा दी... अब पियो, आपकी चाय्स ही है.. जॅक डॅनियल्ज़, नो सोडा, नो वॉटर... सिंपल ऑन दा रॉक्स..." ललिता ने टोस्ट करने के लिए अपना ग्लास आगे बढ़ाते कहा

"नहीं यार... फिर कल की तरह कोई भूल ना हो जाए..." मैने ग्लास वापस टेबल पे रखते हुए कहा

फ्लॅशबॅक येस्टरडे नाइट

"भाई, चलो दारू पीते हैं.." ललिता ने मेरे रूम में घुस के कहा....

अंशु के घर की चुदाई देख के मेरा लंड ऑलरेडी तना हुआ था, उपर से ललिता के सामने कंफर्टबल भी नहीं लग रहा था, पर उसे मना नहीं करना था...

"ओके डियर.... बना ले पेग" मैने बाथरूम में घुसते हुए कहा

जैसे ही मैने बाथरूम से आया, सामने ललिता बैठी थी और उसने भी नाइटी पहनी थी... उसकी नाइटी एक दम सोबर थी वाइट कलर की, पर मेरे खड़े लंड की वजह से वो मुझे सेक्सी लग रही थी.... मैं जाके उसके पास बैठ गया

"व्हाट.... जाके सामने बैठो ना..." ललिता ने कहा

"क्यूँ... यें बैठने में क्या पंगा है... और ये मेरा रूम है... साथ में बैठते हैं..." मैने ग्लास लेते हुए कहा..

"चियर्स स्वीटी... चियर्स ..... मैने ललिता के ग्लास को ज़बरदस्ती टकरा के कहा

ललिता वहीं बैठी रही.... उसके चहरे पे कोई भाव नहीं थे... हम दोनो खामोशी से अपने अपने ग्लास से दारू पी रहे थे.. अंशु के घर का सीन मेरे सामने से हट ही नहीं रहा था, और शायद ललिता के दिमाग़ से भी.... तभी तो उसकी नाइटी थोड़ी गीली लग रही थी मुझे उसकी चूत के वहाँ से.... मैं ललिता का चेहरा देख के अपनी दारू पिए जा रहा था.. देखते देखते मैने 5 ग्लास अंदर गटक लिए

"भाई धीरे.... अभी तो मैने 2 लिए हैं... इतना क्या जल्दी है आपको हाँ" ललिता ने मुझसे पूछा

"ललिता... आइ लाइक यू आ लॉट...." ये कहके मैने ललिता के चेहरे को पीछे से पकड़ा और उसके होंठ अपने होंठों से मिला लिए.. जब तक उसे कुछ समझ आता, तब तक मैं जन्गलियो की तरह उसके होंठ चूसने लगा था... कुछ देर की ना नुकुर के बाद उसने भी मेरा साथ दिया और हम वाइल्ड किस्सिंग में इन्वॉल्व हो गये.... किस्सिंग करते करते मैं उसके चुचे दबाने लगा...

"आहह सीईईई...उम्म्म्मम भाई उम्म्म्म....." ललिता सिसकियाँ लेती हुई बोली

उसके चुचों से नीचे जाके मैं उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा... पहले तो उसने मना नहीं किया, पर फिर अचानक ही उसने मुझे खुद से अलग किया और रूम से तेज़ी से भाग के निकल गयी.. उसके जाते ही मुझे खुद पे बहुत गुस्सा आया.... मैं वहीं बैठे बैठे सोचने लगा, अभी इसको बुरा लगा तो, ललिता बहुत कुछ कर सकती है मुझे... मैं डर सा गया, मैने उसे सॉरी के एसएमएस भी किए पर उसका कोई जवाब नहीं.... थक हार के मैं अकेला विस्की पीने लगा और आखरी पेग ख़तम किया तभी ललिता का एसएमएस आया

 


"थ्ट्स ओके भाई... वी नीडेड टू रिलीस दा हीट... आज देखने के बाद ईवन आइ वाज़ वेरी हॉट... प्लीज़ रिलीस युवरसेल्फ़ नाउ.. सी यू टुमॉरो"

ललिता का ये एसएमएस पढ़ के मेरी जान में जान आई और मैं हंस के सो गया

बॅक टू प्रेज़ेंट

"ओह कम ऑन भाई... दट वाज़ जस्ट आ पासिंग मोमेंट.. डोंट बी आ स्पायिलर नाउ... बी आ स्पोर्ट ओके.." ललिता ने फिर मेरे हाथ में दारू पकड़ा दी

हम टोस्ट कर ही रहे थे कि तभी मेरे मोबाइल पे एसएमएस आया... मैने जैसे ही मोबाइल लिया, तभी उसके मोबाइल पे भी एसमएस आया..

"को इन्सिडेन्स ना..." मैने ललिता से कहा और हम चेक करने लगे एसएमएस

एसएमएस पढ़के हमने एक दूसरे को देखा, और ग्लास से ग्लास टकरा के कहा

"चियर्स टू दिस वन... वी आर वेरी क्लोज़"

ललिता और मैं अब खुशी से दारू पीने लगे थे.. बात ही ऐसी थी... कुछ देर पहले जो प्रॉपर्टी के पेपर्स देख के मायूसी हुई थी, उसका दुख अब कम होने लगा था... ललिता मुझसे ज़्यादा खुश थी, उसको यकीन होने लगा था कि हम अब डॉली के कातिल तक जल्द पहुँचने वाले हैं..

"फाइनली... तो आपका दोस्त काम का निकला भाई..." ललिता ने खुशी ख़ुसी ग्लास छलकाते हुए कहा

"तुझे कोई डाउट है उसपे.... ही ईज़ आ बॉन्ड यार..." मैने ललिता का जवाब दिया

"इनफॅक्ट, वाइ डोंट वी स्पीक टू हिम... वेट लेट मी कॉल हिम.... " मैने ग्लास रखके अपने फोन से नंबर डाइयल किया.. कुछ सेकेंड्स त्रिंग बजने के बाद सामने से जवाब आया

"हाई ... कैसे हो" एरिसटॉटल ने कहा

"क्या रे मेरे जेम्ज़ बॉन्ड... बहुत जल्द मिल गया तुझे ज़ूरिच का वीसा... क्या बात है मेरे शेर..." मैने खुशी में कहा

"हां... इसमे हमने इंटररपोल को इन्वॉल्व किया है... जब किसी केस में इंटररपोल इन्वॉल्व्ड हो, तो समझ लो या तो उसका नतीजा जल्द आता है, या तो बिल्कुल नहीं आता..." एरिसटॉटल ने सीरियस्ली बात की

"कूल है भाई... अब कब जाएगा तू, वी होप तुझे ज़ूरिच में सब मिल जाए जो हमे चाहिए... आंड तूने वाच तो ली है ना ऐज आ प्रूफ.." मैने एरिसटॉटल से श्योर होना चाहता था

"हां ... वाच ली है , तुम फ़िक्र मत करो... और मैं आज रात की लेट फ्लाइट है.. मुंबई से जाउन्गा सो अभी 10 मिनट में कॅब पकड़ के निकलूंगा..." एरिसटॉटल एक दम कूल साउंड कर रहा था

"कॅब क्यूँ.. एक काम करता हूँ, मैं अभी 5 मिनट में तेरे वहाँ गाड़ी भिजवाता हूँ.. उसमे जा" मैने अपनी हेल्प एक्सटेंड की

"अरे नहीं यार.. कॅब ईज़ ओके.." एरिसटॉटल आना कानी करने लगा

"सुन, आइ वान्ट यू टू बी सेफ.. आंड मैं ये चीज़ मेरे लिए कर रहा हूँ ओके... अब ज़्यादा नाटक मत कर.. स्कोडा लॉरा आ जाएगी तेरे पास 15 मिनट में... गाड़ी नंबर है एमएच13 XX 9**9.. और ड्राइवर का नाम , नंबर एसएमएस कर देता हूँ.. ओके" मैने अपनी बात मनवा ली उससे..

"ओके भाई... तेरे आगे मैं झुक गया.. आंड मैं रेडी होने जाउन्गा, 15 मिनट में भेज देना पक्का... चल बाय " कहके एरिसटॉटल ने फोन कट कर दिया

 


मैने एरिसटॉटल से बात करके, तुरंत हमारी फॅक्टरी के ड्राइवर को उसके घर जाने के आदेश दिए... हमारी फॅक्टरी से एरिसटॉटल का घर 5 मिनट की दूरी पे था..

"क्या कह रहा था भाई... कब जाएगा" ललिता ने सबसे पहला सवाल पूछा

"आए हाए.. तुझे बड़ी जल्दी है हाँ... क्या हुआ उसका नाम सुनके लड़की तुझे.." मैने ललिता को चिढ़ा के कहा

"भाई.. कम ऑन, ही ईज़ नोट ईवन माइ टाइप्स ओके.." ललिता ने ग्लास खाली करते हुए कहा

"आंड.. वॉट ईज़ युवर टाइप स्वीट हार्ट..." मैने सीधा जानना चाहा

कुछ सेकेंड्स ललिता खामोश रही.. रूम में सिर्फ़ मेरे दारू के छलकते आइस क्यूब्स की आवाज़ थी...

"फ्रॅंक्ली स्पीकिंग भाई.. टाइप्स अभी तक सोचा नहीं है... इसको ज़्यादा जानूँगी तो हो सकता है आइ मे फॉल फॉर हिम.... मे बी नोट.. यू नेवेर नो " ललिता ने आँख मार के जवाब दिया

"बात चला लूँ बोल तो... ही विल नोट रिजेक्ट यू ;-) " मैने भी आँख मारके जवाब दिया

"हुह... वो मुझे रिजेक्ट ही नहीं कर सकता.. उसे मेरे जैसी लड़की कहाँ मिलेगी..." ललिता ने एक एक पेग और बना दिया, इस बार उसमे 3 के बदले 4 आइस क्यूब्स थे..

"यो बेब्स.. आज तक उसको भी किसी लड़की ने रिजेक्ट नहीं किया..." मैं एरिसटॉटल की साइड लेने लगा

"चेंज दा टॉपिक नाउ प्लीज़..." ललिता हॅड दा फाइनल से इन दिस... और हमने टॉपिक चेंज करके इधर उधर की कुछ बातें की, और सोचने लगे कि उनका बॉस भी आ जाए तो उसको मुजरिम कैसे साबित करेंगे..

उधर अंशु के घर पे....

"दीदी.. उस हरामी ने तो हमे बिल्कुल टाइम नही दिया.... हम सोच रहे थे कि हम 10 दिन का बोल देंगे तो वो चोंक जाएँगे, बट उस राज ने सामने से 5 दिन माँगे... इसका कारण क्या हो सकता है दीदी" अंशु ने एक साँस में अपनी इस बात के साथ उसका वोड्का का पेग भी गले के नीचे उतार डाला

"अंशु.. इसमे चिंता की क्या बात है, तेरी बेटी की चूत की गुलामी कर रहा है अभी से... इसमे चिंता कैसी, ये तो खुशी की बात है ना... तूने बात आगे पहुँचाई जहाँ इसे पहुँचना चाहिए..." शन्नो ने अपनी सिगर्रेट सुलगाते हुए कहा

"नहीं दीदी.. उसी के लिए हिम्मत चाहिए, उस के लिए ही दो तीन वोड्का के पेग मार के फिर फोन करूँगी..." अंशु ने एक और वोड्का का नीट पेग अपने गले के नीचे उतार दिया... एक के बाद एक 5 पेग अंशु के गले के नीचे उतरे, तभी आके उसे हिम्मत आई और वो फोन मिलाने लगी.. कुछ सेकेंड्स बाद..

"हेलो.. ऊह, शादी की डेट फाइनल हो गयी है..." अंशु ने हिचकिचा कर कहा

"जी.... 5 दिन में शादी करनी है..." अंशु घबराने लगी...

सामने से कुछ जवाब आया जिसे सुनके उसकी घबराहट दूर हो गयी, और वो मुस्कुराने लगी...

"जी बिल्कुल... बस येई चिंता है कि 5 दिन में सब कैसे मॅनेज होगा.." अंशु ने फाइनली रिलॅक्स होके कहा

"ओके... मैं देख लूँगी.." कहके अंशु ने फोन कट करके कहा...

"क्या हुआ..." शन्नो ने फोन कट होने के बाद अंशु से पूछा

"बॉस खुश हुए... पर...." अंशु ने इतना ही कहा, कि शन्नो ने उसे टोक दिया...

"बॉस मत बोल उसे मेरे सामने... " शन्नो ने उसे आँख दिखाते हुए कहा

"हां दीदी.. वैसे उन्होने कहा..." अंशु को फिर शन्नो ने टोक दिया

"बस कर अंशु... बॉस, उन्होने.... ये सब मत बोल, कलेजा फट रहा है मेरे.. आख़िर है तो वो मे...." शन्नो ने इतना ही कहा के अंशु ने फिर उसे कहा

"दीदी.... इसके आगे एक लफ्ज़ नहीं... कंट्रोल कीजिए अपने गुस्से पे" कहके अंशु ने उसे एक वोड्का का ग्लास पकड़ा दिया जिसे शन्नो ने जले हुए मन से अपने गले के नीचे उतार दिया

 


रात को ललिता और मैं दारू पीक मेरे कमरे में हो सो गये थे.. बट मैने एन्षूर किया कि मैं उसके करीब ना रहूं... मैं काउच पे सो गया और वो बेड पे... सुबह जब मैं उठा, तो ललिता ऑलरेडी मेरे सामने खड़ी थी.... कितने दिनो बाद सुबह सुबह मेरे उठते ही किसी लड़की का चेहरा सामने था..

"गुड मॉर्निंग भाई.... स्लेप्ट वेल.." ललिता ने स्माइल के साथ पूछा... ललिता अभी भी उस वाइट नाइटी में थी..

"यस डियर... सॉरी तुझे यहीं सोना पड़ गया रात को, आगे से तेरे साथ नो दारू..." मैने आँखे मलते हुए कहा

"भाई इसमे दारू का क्या दोष... खैर छोड़ो..." ये कहके ललिता मेरे पास आई, और मेरे गाल पे एक सॉफ्ट सा किस दिया...

"ये क्यूँ भला.." मैने हसके ललिता से पूछा

"फॉर बीयिंग आ ट्रू जेन्टलमेन भाई... " ये कहके ललिता मेरे रूम से निकल गयी..

मैं कुछ देर यूही लेट के, फिर फ्रेश होने चला गया... ऑफीस जाना नहीं था, तो क्या करता... ये सोचते सोचते मैं तैयार हो गया, और नीचे आया.. नीचे आते ही मेरी नज़र घर पे पड़ी, तो मैं सोचने लगा.. ये किसका घर है भाई....

"मोम..... मूओंम्म्मम.... व्हेअर आर यू...... मूंम्म्म.... " मैं चिल्लाने लगा लिविंग रूम से.....

"ओफफो... क्या हुआ है , वाइ शाउटिंग सो मच..." मोम अपने कमरे से निकल के आई

"ये सब क्या है, ये फूल, लाइटिंग्स, शामियाना.. व्हाट ईज़ दिस...." मैने घर के आस पास हो रही तैयारियों को देख के पूछा

"तेरी शादी में अभी 4 दिन ही बाकी है... तो तैयारियाँ तो करनी हैं ना.. और जल्दी नाश्ता कर ले, मुझे और ललिता को शॉपिंग पे ले चल.." मोम मुझे इन्स्ट्रक्षन्स देते हुए बोली

"मोम, ड्राइवर को ले जाओ ना... प्लीज़" मैने बिनती की मोम से....

"बेटा, ड्राइवर को तुम्हारे पापा पूजा के घर ले गये हैं.... उन्हे वहाँ से फिर कुछ काम से बाहर जाना है, आते आते उन्हे शाम होगी." मोम ने सुबह सुबह ही बाद न्यूज़ का बॉम्ब फोड़ दिया

"ओके मोम.... चलिए, नाश्ता करते हैं... मैं तब तक ललिता को बुला के आता हूँ.." कहके मैं ललिता के रूम में भागा

जैसे ही मैं ललिता के रूम में जाने लगा, सामने से ललिता आती दिखाई दी, मैं उसे देखता ही रह गया... बहुत क्यूट लग रही थी.. वाइट ड्रेस में, एक दम स्वीट... मैं उसे किसी और नज़र से देख नहीं सकता था, क्यूँ कि ललिता से वादा किया था, और बिसाइड्स, मैने सोचा था.. ललिता और एरिसटॉटल की जोड़ी सेट करने का...

"क्या घूर रहे हो भाई..." ललिता ने चुटकी बजाते हुए कहा

"सम्वन'स लुकिंग प्रेटी.." मैने ललिता की तरफ कदम बढ़ा के कहा

"ओह... सम्वन'स लुकिंग हॅंडसम ऑल्सो.." ललिता ने आँख मारते हुए कहा....

तभी मेरा मोबाइल बजा.. निकाल के देखा तो पूजा का एसएमएस था

"मिस्सिंग यू सो मच ... 4 दिन कैसे निकलेंगे.... आप ने कितने दिन से बात भी नहीं की... आज मिलते हैं ना प्लीज़.. चुपके चुपके, व्हाट से... वेटिंग, लव पूजा क्षोक्षो :) "

"ललिता... प्लीज़ रिप्लाइ दे ना इसका.." मैने ललिता को मोबाइल देते हुए कहा

ललिता ने झट से एसएमएस किया

"नोट पासिबल टुडे.. गोयिंग टू शॉप वित मोम आंड ललिता... प्लीज़ बाकी 4 दिन निकालो, उसके बाद तो तुम बेड से उठ भी नहीं पओगि... और रात को ललिता को तुम्हारे घर ड्रॉप करने आउन्गा, तब चुपके मिलेंगे फॉर 15 मिनट.. बाय :) "

 


मैने एसएमएस पढ़ा...

"तुझे क्यूँ छोड़ूँगा उसके घर रात को...." मैने ललिता से पूछा

"बस ऐसे ही..." कहके ललिता आगे चली गयी.. कुछ देर वहीं खड़े रहके मैं सोचता रहा, फिर दिमाग़ में बत्ती हुई

"ओके ओके.. गॉट इट.. अब तक तो अंशु बता चुकी होगी उसके बॉस को कि क्या मामला है.. तो अब तू वहाँ रहेगी तो तुझे न्यूज़ मिलेगी ना उनके बारे में." मैने ललिता का क्लू पकड़ के कहा

"स्मार्ट बॉय... अब चलो नाश्ता करो, और शॉपिंग पे ले चलो" कहके ललिता डाइनिंग टेबल पे जाके नाश्ता करने बैठी

मम्मी के आते ही..

"ओये होये... क्या बात है, कुछ दिन में बहू रानी आ जाएगी आपकी तो आंटी हैं.... फिर तो आप उसपे हुकुम चलाओगे जी... क्या बात है, सोच के ही मज़ा आ रहा है..." ललिता मोम को चिढ़ाने लगी.. और उनकी बातें एक घंटे तक चलती रही

एक घंटे में हम शॉपिंग पे निकले.. पूरे दिन की शॉपिंग में ज्यूयलरी, मिठाई, कपड़े, कर्टन्स, कुशान्स, पेंटिंग्स, क्लॉक्स आंड व्हाट नोट.. टोटल बिल देख के दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही शब्द आया... "वेस्ट".... इसलिए नहीं क्यूँ कि ये सब गंदा था, पर इसीलिए क्यूँ कि जिस पर्पज से ये सब खरीदा जा रहा था, वो पर्पज शायद पूरा ही नहीं होगा.. करीब रात के 8 बजे हम फ्री हुए

"भाई.. अंशु मासी के घर ड्रॉप करो ना मुझे.. मैं वहीं रहूंगी कुछ दिन अब" ललिता ने मुझे वो कहा जो वो सुबह को बता चुकी थी

"बेटी, तुम भी यहाँ, तो मेरे साथ कोई नहीं होगा घर पे.. मैं अकेली हो जाउन्गि" मम्मी ने ललिता से ओप्पसे किया

"चिल्क्स माइ स्वीट हार्ट.. आप चलो, मैं मोम और डॅड को आपके साथ वापस भेज दूँगी.. वो दोनो आप की मदद करेंगे.. और मदद कैसी, सब तो अंकल ने आउटसोर्स किया है.. उनपे नज़र डॅड रख देंगे, आप फिकर मत कीजिए मेरी जानेमन" ललिता ने फिर मज़ाक में मोम को कहा

शन्नो वापस आएगी, ये सुनके मोम को जितनी खुशी हुई उससे कहीं ज़्यादा खुशी मुझे हुई क्यूँ कि ललिता वहाँ अकेली होगी तो अंशु और पूजा भी उसपे नज़र नहीं रख पाएँगे, क्यूँ कि वो तो प्रिपरेशन्स में बिज़ी होंगे.. ये प्लान ठीक जा रहा था हमारे लिए.. कुछ देर में हम अंशु के घर पहुँचे, हमे देख के अंशु ने तहे दिल से हमारा स्वागत किया, उसके साथ उसका पति भी था... दोनो ने बहुत खुशी दिखाई हमारे आने पे..

"आज तो आपको हमारे घर ही खाना है बहेन जी, कहे देता हूँ मैं" कहके अंशु मोम को अपने साथ घर दिखाने ले गयी.... मैने कुछ देर पूजा के बाप से बात की... उससे बात करके यकीन हो गया वो साला किसी काम का नहीं , बस पुराने पैसे पे ऐश कर रहा है... (कर ले बेटा कर ले ऐश... तुम्हारी तो ऐसी मारूँगा, सालों याद रखोगे राज वीरानी को..)

मुझे पूजा कहीं दिख नहीं रही थी.. मैं उसे इधर उधर ढूँढ रहा था, तभी मेरे मोबाइल पे एसएमएस आया..

'कम आउट आंड सी मी बिहाइंड दा गार्डेन" पूजा का मेसेज था..

पूजा का मेसेज मिलते ही , मैं कुछ सेकेंड्स में वहाँ से उठके गार्डेन की तरफ जाने लगा.. ललिता ने भी ये नोटीस किया, और मुझे एक एसएमएस किया

"प्लीज़ मेनटेन दा डिस्टेन्स ओके"

"वाइ शुड आइ...?" मैने रिप्लाइ किया

"बिकॉज़ इट्स मी हू ईज़ ऑर्डरिंग यू..." ललिता ने वापस जवाब दिया

मैं बाहर निकलके गार्डेन की तरफ जाने लगा, गार्डेन के पीछे ऑलरेडी पूजा मेरा वेट कर रही थी.. मुझे देखते ही पूजा दौड़ के मुझसे लिपट गयी

"ओह..... उम्म्म्मम.... कितने दिन दूर रहे हैं हम.... दिल मान ही नहीं रहा था आपके बगैर.... बिल्कुल भी मिस नहीं किया आपने मुझे ?" पूजा ने मेरे सीने में अपने चेहरे को छुपाते हुए पूछा

"तुम खुद ही मेरे दिल से पूछो... वो ही तुम्हे जवाब देगा," मैं पूजा को हग करते हुए बोला... कुछ ही दिन की बात है, फिर तो मुझे ये सीना, ये चुचे कहाँ मिलेंगे.. अभी मज़े लेते हैं थोड़े मैने सोचा...

"उम्म्म्म... दिल से ज़्यादा तो यहाँ से आवाज़ आ रही है..." कहके पूजा ने अपना हाथ मेरे लंड पे रख दिया और उसे रगड़ती हुई बोली

"दिस ईज़ नोट दा राइट टाइम बेब... टेल मी, आज पापा तुमसे सिगनेचर्स लेने आए थे कोई पेपर्स पे सुबह को? " मैं क्यूरियस होके पूछने लगा

"हां आए थे... मैने उनसे पूछा नही कैसे पेपर्स हैं, मैने बस साइन कर दिए.." कहके पूजा मुझसे दूर होने का नाम ही नहीं ले रही थी..

"गिव मी युवर लिप्स बेबी.... उम्म्म्म...आहह.... उम्म्म्मँववाहाहहहहहहहा म्म मवाहाहहहाहौमम्म्म आआहहःसीईईईईईईई..." पूजा और मैं वाइल्ड किस्सिंग में इन्वॉल्व हो गये, मैं उसके चुचे दबाने लगा था.... जैसे ही पूजा फिर मेरे लंड के पास पहुँची,

"डोंट यू गेट इट.... दिस ईज़ नोट दा राइट टाइम ऑलराइट.... कंट्रोल इट डॅम इट..." मैं पूजा को दूर धक्का देके बोला और वहाँ से निकल आया

 


मुझे आते ललिता ने दूर से देखा... मुझे खुद नहीं समझ आ रहा था कि मैने पूजा को क्यूँ मना किया.. डेफनेट्ली ललिता के मेसेज की वजह से नहीं.... शायद मुझे अब उनसे घिंन आने लगी थी... गार्डेन से निकल के मैं जाके अपनी गाड़ी में बैठ गया और अपने लिए सिगर्रेट जला ली... करीब 15 मिनट के बाद मैं फिर अंदर गया , जहाँ मोम और अंशु खाना खाते खाते बातें कर रहे थे...

", आइए आप भी खाना खाइए." पूजा के डॅड ने न्योता देते हुए बोला

"नहीं, आइ आम नोट हंग्री, थॅंक्स एनीवेस... ललिता कहाँ है, आइ वान्ट टू सी हर..." मेरे जवाब में एक रूखापन था

"बेटे वो उपर है पूजा के रूम में... उपर जाके लेफ्ट, दूसरा कमरा" अंशु ने डाइरेक्षन्स दिए मुझे

पूजा के रूम में जाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती... सबसे पहले तो कुमार फिल्म सेट की स्टाइल की सीडीयों पे चढ़ो, उपर से फिर लेफ्ट जाके कमरा ढुंढ़ो... मैने दूसरा ऑप्षन सेलेक्ट किया और ललिता को कॉल किया..

"वान्ट टू सी यू बेब.. बाहर गाड़ी में आ.." कहके मैं वहाँ से निकल गया... मेरा रिक्षन देख के अंशु और उसके पति से ज़्यादा मोम बहुत शॉक में थी.... खैर उन्होने अपना खाना फिर शुरू किया और बातों में लग गये..

"बोलिए भाई... " ललिता गाड़ी में एंटर होती बोली

"तू जानती है ना तुझे क्या करना है... सबसे पहले इंश्योर करना है तू पूजा के मोबाइल से वो नंबर निकाले... आइ डोंट केर तू कैसे सर्च करेगी, पर करेगी ओके... दूसरी बात, जब इनका सो कॉल्ड फक्किंग बॉस यहाँ आएगा वो लोग कहाँ मिलेंगे, तुझे वो जानना है.... आइ आम 100% शुवर के वो लोग शादी के एक दिन पहले वाली रात को पक्का मिलेंगे..." इससे पहले मैं कुछ बोलता ललिता ने फिर मुझे कट किया

"आंड हाउ आर यू श्योर अबाउट दिस ब्रो..."

"उस दिन की बातें याद नहीं है, उनके बॉस ने कहा था तुम शादी फिक्स करो मैं उस दिन आ जाउन्गा.. अब जिस दिन शादी है तो वो उनसे मिल तो नहीं पाएगा.... बिसाइड्स वे आर अस्यूमिंग कि वो फॅमिली मेंबर है, रीज़न बीयिंग दट वाच आंड कॉलर ट्यून, तो वो अगर फॅमिली मेंबर है तो वो शादी में रहेगा ना... तो ये लोग वहाँ बात नहीं कर पाएँगे , इसके लिए आइ आम अस्यूमिंग लेटेस्ट मेन वो एक रात पहले मिलेंगे"

"वाउ माइ शरलॉक होम्ज़... आंड डोंट वरी, आज रात पूजा से बातें निकलवाने की ट्राइ करूँगी.. मैं क्लियर कहती हूँ मैं लेज़्बीयन नहीं बनूँगी उससे बातें निकलवाने के लिए.. हां उसको दारू पिलाउन्गि, थोड़ा बातें ऐसी करूँगी, कि ये टॉपिक खुद निकले, इससे ज़्यादा प्लीज़ डोंट एक्सपेक्ट हाँ" कहके ललिता ने क्लियर कर दिया

"ओके गुड... बट वन्स यू फाइंड आउट तू मुझे बताएगी वो जगह, आंड वी विल वर्क ऑन अवर प्लान ऑलराइट..." मैने ललिता को फाइनल हिदायत देते हुए कहा

"ओके.. वन मोर न्यूज़ फॉर यू.. जड्ज फॉर युवरसेल्फ, इट ईज़ गुड ऑर बॅड.." ललिता ने मुझे देखते हुए कहा

'एप.. शूट..." मैने ललिता को आगे बढ़ने के लिए कहा

जैसे ही ललिता आगे कुछ बोलती, मेरी आँखों के सामने एक गाड़ी की तेज़ रोशनी आई, जिससे मुझे अपनी आँखें बंद करनी पड़ी... जैसे ही गाड़ी की हेडलाइट्स बंद हुई, मैने अपनी आँखें खोली, तो सिर्फ़ एक ही शब्द बोल पाया...

"गॉड ब्लेस्स अस..." मैने ललिता को देखते हुए कहा

ब्लॅक कलर की साड़ी में खुले बालों के साथ, मेरे सामने खड़ी थी माया बुआ... वाइट टॉप और लोंग स्कर्ट में अपनी नीली आँखों के साथ खड़ी थी मेरी डार्लिंग पायल...

"भाई... आपकी एक्स गर्लफ्रेंड है.. हाई हेलो तो करो.." कहके ललिता कार से उतरी और बुआ से बातें करने लगी... मुझे भी मजबूरी में उतरना पड़ा...

"हेलो... हाउ आर यू बुआ जी..." मैने उनके गले लगते हुए बोला

"बेटे, तुम इधर क्या कर रहे हो.. ललिता के साथ गाड़ी में, वॉट आर यू गाइस अपटू..." बुआ ने शक से पूछा

"कुछ नहीं बुआ... आप जानते हो, सिगर्रेट पीने आए थे... मम्मी को मत बोलना प्लीज़..." मेरे दिमाग़ में जो आया वो बोल दिया

"भाभी अंदर है... चलो मैं उनसे मिलूं, और प्लीज़ क्विट स्मोकिंग ओके..." कहके बुआ अंदर चली गयी... रह गये मैं, ललिता और पायल...

"सो पायल.. शादी के वक़्त यहाँ, अपने भाई के घर नहीं आना चाहिए तुमको, यहाँ किस रीज़न से..." मैने पायल से पूछा.. अब भी मेरी आवाज़ में एक नफ़रत थी, पर मैं उसे दिखाना नहीं चाहता था... इसलिए अपने एक्सप्रेशन्स पे कंट्रोल किया.

"भाई.. इसके सामने क्यूँ बातें करें, चलो हम ड्राइव पे चलते हैं.." कहके पायल मुझे पकड़ के अपनी गाड़ी में बिठाने लगी..

"नो नो... व्हाट डू योउ मीन इसके सामने... शी ईज़ आ फॅमिली.. आंड.... आंड शी ईज़ माइ सिस्टर ऑलराइट.... यू कॅंट बिहेव लाइक दिस टू हर... नेवेर" कहके मैने ललिता को हग कर लिया और उसके फोर्हेड पे किस कर ली... ललिता की आँखें थोड़ी नम हुई थी, पर उसने खुद को झट से कंपोज़ कर लिया और नॉर्मल खड़ी हो गयी...

"यॅ यॅ... शी ईज़ आ स्वीट हार्ट मेरी ऑल्सो ओके.. चल डार्लिंग, हम चलते हैं अंदर..." कहके पायल ललिता को अंदर ले जाने लगी

दोनो अंदर चले गये, और मुझे समझने में देर ना लगी कि पायल क्यूँ ऐसा बिहेव कर रही है उसके साथ.. कुछ सेकेंड्स में मैं भी अंदर गया, जल्द से जल्द मोम को वहाँ से लेके घर जाना चाहता था.. अंदर जाके देखा तो मोम अंशु, शन्नो और बुआ सब मिलकर बातें कर रहे थे

"अरे भाभी.. ऐसी बात नहीं है... अब आपके साथ शन्नो है, विजय भी है.. और अंशु के साथ कोई नहीं, शन्नो ने मुझे यहाँ बुलाया है, ताकि मैं कुछ दिन यहीं रहके इनकी तैयारियों में मदद करूँ.." बुआ मम्मी से बोल रही थी

"हां जेठानी जी.... मेरी बहेन अकेली पड़ गयी है तो कुछ तो करना पड़ेगा ना.. अब राज को पूजा इतनी भा गयी है कि वो ज़्यादा वेट नहीं कर रहा तो कुछ तो नुकसान होगा ना आपको भी... आपके साथ मैं हूँ फिर कैसी चिंता.. और वैसे भी लड़की वालों के घर ज़्यादा काम रहता है लड़के वालों की कंपॅरिज़न में..." शन्नो ने मोम से मज़ाक में कहा पर सीधी बात थी

 


"हां मामी... और मुझे ललिता के साथ रहना है, अब जब उसने कहा वो यहाँ है तो मैं भी यहीं आ गयी.. पर चिंता मत कीजिए, शादी में हिस्सा तो मैं लड़के वालों की तरफ से ही लूँगी.." कहके पायल मोम के गले लग गयी

"ठीक है भाई.. चलो अब चलते हैं.. और माया, तुम्हे घर आना है ओके पायल के साथ, हमारे साथ भी दो दिन बीताओ समझी.." मोम हॅड फाइनल से इन दिस डिस्कशन...

घर जाते वक़्त मेरे साथ शन्नो और विजय भी थे.. इसलिए मोम ने अपना गुस्सा मुझपे ज़ाहिर नही किया , पर घर पहुँचते ही मोम ने कहा

"... राज व्हाट काइंड ऑफ बिहेवियर वाज़ दिस."

"व्हाट... क्या किया मैने मोम" मैने सर्प्राइज़ होके पूछा

"बनो मत ... पूजा के मोम डॅड के साथ ऐसा बर्ताव, ईज़ अनॅक्सेप्टबल ओके... आगे इस बात का ध्यान रखना.." मोम कहने लगी

इससे पहले मैं कुछ जवाब देता, पीछे से डॅड की आवाज़ आई

"अरे भाई.. अब क्या हुआ, मेरे बिज़्नेस मॅन को क्यूँ डाँट रही हो... और रहने दो, आज के लिए एनफ है... पहले मेरे लिए पानी लाओ, फिर तुम दोनो को एक बात बताता हूँ..."

जब तक मोम डॅड के लिए पानी लाती, तब तक मेरे दिमाग़ में फिर एक चिंता आई... अब क्या बताने वाले हैं डॅड, फिर कोई नयी बात है क्या... डॅड जब जब ऐसा बोलते हैं तब तब मेरा ब्लड प्रेशर हाइ हुआ है....मुझे ऐसे सोच में देख

"क्या हुआ बॉय.... एनी प्राब्लम..." डॅड ने पूछा

"नो डॅड.. आइ आम फाइन.. बस सोच रहा था शादी में क्या पहनु.." मैने बात को घूमाते हुए पूछा

"देखो बेटे, वैसे तो लड़का लड़की कुछ मॅचिंग सेलेक्ट करते हैं, पर आइ लीव दिस डिसिशन ऑन यू.... बट मेक श्योर, वॉटेवर यू वेअर मस्ट बी आ क्लास.. आंड सब तैयारियाँ चालू है.. घर तो तुम देख ही रहे हो... कल से सब मेहमान आने वाले हैं उनके लिए होटेल ह**त में रूम्स बुक्ड हैं... और वेड्डिंग होगी होटेल ब** र******न में.... रिसेप्षन मैं मुंबई में करने का सोच रहा हूँ... अगर मुंबई में करते हैं तो ओ****ई'स में, और अगर यहीं किया तो फिर ह**त में... सब डिसाइडेड है... तुम सिर्फ़ अपने कपड़े लाओ, कल तुम्हारी मोम और मैं रिश्तेदारों के लिए शॉपिंग करने जाएँगे, और उन्हे रिसीव भी करेंगे..." डॅड ने पूरा प्रोग्राम बता डाला

"डॅड, मैं जाता हूँ उन्हे रिसीव करने." मैने सोचा शायद मदद हो जाएगी

"नहीं बेटे.. यू रिलॅक्स, तुम अपनी शॉपिंग करो, और रिसीव क्या करना है, होटेल की गाड़ियाँ चली जाएँगी उन्हे लेने... मुझे बस होटेल जाके देखना है कि वो लोग ठीक से पहुँचे.. तुम अपने फ्रेंड्स के साथ रहो.. और अपने भाई से बात करो, वो कब आएगा..."

इतने में मोम पानी लेके आ गये, तब तक मैं ज़य से बात करने चला गया

"हां भाई..." ज़य शायद सो रहा था

"छोटू, तू सो रहा था क्या.." मैने पूछा

"नहीं भाई... सोच रहा था, मैं आपकी कोई मदद नहीं कर पाया.. पर मुझे अब तक समझ नहीं आ रहा कि आपने 5 दिन लिए, इतना जल्दी क्यूँ... आर यू क्लोज़ टू क्लोसिंग दिस..." ज़य ने मुझसे पूछा

मैं उसे कुछ बताना नहीं चाहता था... ऐसा नहीं कि मुझे उसपे शक था, पर मैं उसे कुछ टेन्षन नहीं देना चाहता था

"नहीं भाई.. बस तू बता कब आएगा, डॅड ने ऑर्डर दिया है.." मैने बात घुमाना चाहा

"डॅड बोल रहे हैं तो आना पड़ेगा ना, बिज़्नेस कॅपिटल जो दिया है उन्होने... और आपके साथ भी रहना है.. चलो, आज हुई 14 जुलाइ... मैं 18 जुलाइ को आउन्गा, आपकी शादी के एक दिन पहले... और आपको यहाँ से कुछ चाहिए.. चलो छोड़ो, मैं खुद ले आउन्गा आपके लिए.." ज़य ने अपनी डेट बताई

"इतनी देर से क्यूँ.. कल ही आजा यार, " मैने थकी हुई आवाज़ में कहा

"भाई, लीव अप्लीकेशन रखी है.. बट देश के नंबर 2 बी स्कूल में पढ़ने का नुकसान भी है.. मैने तीन दिन से ठीक से खाया भी नहीं है, इतनी प्रेज़ेंटेशन्स और फकुटली विज़िट्स... थिंग्स आर गेटिंग मेसी हियर.." ज़य कहने लगा

'ओके छोटू... तू खा ले कुछ, मिलते है फिर.." कहके मैने फोन रखा और डॅड के पास चला गया

"डॅड... उसकी लीव सॅंक्षन नहीं हुई अब तक, ही विल बी हियर बाइ 18थ मॅक्स" मैं सोफे पे बैठते हुए बोला जहाँ मोम डॅड ऑलरेडी बातें कर रहे थे..

 


"उसे मैने कितना समझाया कि बिज़्नेस जाय्न करे, बट नहीं , उसे तो मासकॉम में दिलचस्पी है.. आख़िर क्या है ग्लॅमर में... खैर, चलो मैं खुद बात करूँगा उसके साथ... और अब मुद्दे की बात सुनो.. राज की शादी है 19 जुलाइ को.. तो , दिस एंटाइयर प्रॉपर्टी ऐज डिस्कस्ड, फॅक्टरी के पेपर्स और जैसे हमारी सब बातें हुई हैं... इन सब का कंट्रोल तुम्हे मिलेगा 20थ जुलाइ से.. तुम इसे अपनी शादी की गिफ्ट समझ लो... ये मैं तुम्हे और पूजा को वेड्डिंग में गिफ्ट के तोर पे दूँगा... हॅपी माइ सन...." कहके डॅड और मोम बहुत खुश हुए...

मैं कुछ देर तक वहीं बैठा था, फिर जाके अपने रूम में पहुँचा और नंबर डाइयल किया... तीन चार बार नंबर डाइयल किया, बट नो रेस्पॉन्स... हर एक मिस्ड आन्सर के साथ मेरी गान्ड फाटती जा रही थी... उपर से ललिता का भी बार बार एक ही एसएमएस आ रहा था..

"एनी अपडेट... एनी अपडेट..."

फाइनली जब मेरा फोन रिंग हुआ, मेरे मोबाइल में नंबर देख मैने फटाफट उठाया

"बहन के लोड्‍े.... कितनी देर बाद फोन उठाता है.. मेरी गान्ड फटी हुई है इधर पता है तुझे.."

"क्या हुआ भाई..." सामने से जवाब आया

"अबे साले... इतनी देर हुई तुझे ज़ूरिच पहुँचे हुए, तूने अभी तक फोन नहीं किया... 10 घंटे की फ्लाइट, कितनी देर की तूने.. उपर से फोन भी आन्सर नहीं करता, जानता है मेरी क्या हालत है इधर..." मैं एरिसटॉटल पे भड़कने लगा

"चिल ... टाइम ज़ोन चेंज हो गया दोस्त, इसलिए ख्याल नहीं आया.. और मैं अभी लोकल पोलीस ऑफीस में ही हूँ.. उनके आसिटेन्स की हेल्प चाहिए मुझे, नहीं तो हमे ये वाच कंपनी असिस्ट नहीं करेगी दोस्त..." एरिसटॉटल ने एक दम ठंडे दिमाग़ से जवाब दिया

"सॉरी यार..... मेरी हालत बहुत खराब है इधर, सॉरी प्लीज़.." मैने सर झुका के उसको जवाब दिया

"इट्स ओके भाई.. बट तुझे इतना स्ट्रेस क्यूँ, एनितिंग दट यू वुड वान्ट टू शेअर विद मी" एरिसटॉटल ने इंक्वाइरी करके कहा

"तू यहाँ आना, आइ विल टेल यू... आंड जैसे ही तुझे वाच के ओनर का नाम मिले, मुझे फोन करना, मैं फर्स्ट फ्लाइट में तेरा डिपार्चर करवा दूँगा वहाँ से... आंड मुंबई आके तेरे लिए गाड़ी खड़ी होगी, उसमे सीधा मेरे घर आना... समझा... मेरे पास वक़्त बहुत कम है.." मैं एरिसटॉटल को हुकुम देने लगा

"वक़्त कम है.. किसलिए ? अभी बता मुझे, मैं यहीं से कुछ कर सकता हूँ तू बोले तो.. आंड टिकेट्स की नो नीड... ये केस की वजह से मुझे एक और यहाँ चीज़ मिली है.. एक कान्फरेन्स अटेंड करनी है, तो उसमे भी थोड़ा वक़्त लगेगा भाई.. मेरी यहाँ से डिपार्चर की टिकेट 18 जुलाइ मॉर्निंग की है... सबसे पहले पहुँच के मैं तेरे पास आउन्गा... वादा है दोस्त, और आके तुझे सब डीटेल्स वहाँ बताऊँगा...." एरिसटॉटल की आवाज़ मैं अब एक विश्वास जाग रहा था

"नहीं भाई.. थ्ट्स ओके, मुझे डिपार्चर की डीटेल्स एसएमएस कर देना, मैं गाड़ी भिजवा दूँगा.. मेरे घर पोलीस के कपड़े पहन के आना उस दिन प्लीज़... आंड जो भी डीटेल्स हैं, सब यहाँ आके बताना, विद एनफ एविडेन्स.. चल रखता हूँ अब..." कहके मैने एरिसटॉटल का फोन कट कर दिया

एरिसटॉटल से बात करके मैने ललिता को फोन लगाया.. वक़्त रात के 12 बजने आए थे...

"हां भाई... फोने लगा उसका, क्या बोला..." ललिता ने हेलो तक नहीं किया

"हां मेरी बात हुई, पर सिर्फ़ एक प्राब्लम है.. वो यहाँ 19थ जुलाइ को ही आएगा, उसकी एक कान्फरेन्स है उधर, वो अटेंड करके आएगा" मैने निराश होके कहा

"निराश क्यूँ होते हो भाई.. उसकी ज़रूरत उसी दिन तो मैं है.. आंड उसे बोला ना जो भी एविडेन्स मिले सीधे यहाँ ले आए पहले.. कुछ एसएमएस, कुछ फोन, कुछ फॅक्स नहीं... आंड आप उसका नंबर दो मुझे, मैं भी उससे बात करना चाहती हूँ.." ललिता ने मुझे जवाब दिया

" हां मैने उसे बोल दिया है, आंड इनफॅक्ट मुंबई भेज दूँगा ड्राइवर को उसे रिसीव करने 19थ को.. और तुझे क्यूँ चाहिए उसका नंबर" मैने सर्प्राइज़ होके पूछा

"भाई जस्ट टेक्स्ट मी.. आंड मीनवाइल मैं आपको गेस्ट लिस्ट भी टेक्स्ट करती हूँ मेरे कुछ फ्रेंड्स की" कहके ललिता ने फोन कट कर दिया

मैने ललिता को एरिसटॉटल का नंबर टेक्स्ट किया और उसने मुझे दो तीन नाम एसएमएस किए

"मिस्टर प्रसाद... मिस्टर तिवारी. आंड मिस्टर यादव..." ये उसके नाम थे... मैं समझ गया और सोच लिया कल जाके इनको पर्सनली इन्वाइट करने जाउन्गा..

मैं रात को सो गया क्यूँ कि कल कुछ काम भी फिनिश करने थे, पर नींद बहुत दूर थी आँखों से... इसलिए फिर थोड़ी देर में जाग गया और गेम खेलने बैठ गया... गेम खेलते खेलते मेरे मोबाइल पे एसएमएस आया.. वक़्त देखा तो रात के 3 बज रहे थे..

"होटेल ***** टुमॉरो... एनिटाइम" यू विल गेट दा रिक्वाइयर्ड डीटेल्स

 
Back
Top