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Guest
दोस्तो इस कहानी के सभी पार्ट पढ़ना ना भूलें मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई – 1
मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई – 2
मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई – 3
में आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने टीचर के घर गई और हम दोनों ने कैसे चूमा चाटी का मजा लिया.
अब आगे:
>जैसे ही मैं सैंडिल उतारने लगी सर ने रोक दिया, सर ने कहा- सैंडिल के साथ ही ऊपर आ जाओ, इसमें बहुत सेक्सी लगती हो।
मैंने कहा- सर चादर गंदी हो जाएगी!
तो बोले- नई चादर बदल देंगे. वैसे भी मुझे ही चादर धोनी पडे़गी।< मैं ऐसे ही सैंडिल पहनकर ही बैड की बैक से पीठ लगा कर बैठ गई और सर भी ऊपर आकर मेरे साथ बैठ गए। सर ने सफेद रंग की लोअर और काली सफेद धारीदार टी शर्ट पहन रखी थी। मैंने कहा- डार्लिंग इस टी शर्ट में बहुत सेक्सी लगते हो। सर ने कहा- सिर्फ टी शर्ट में ही? लोअर में नहीं क्या? मैंने कहा- लोअर भी अच्छी है लेकिन टी शर्ट बहुत सेक्सी है। सर ने बैठे बैठे ही लोअर निकाल कर फेंक दी और कहा- ये कम सेक्सी लगती थी तो निकाल दी। सर ने नीचे कुछ नहीं पहना था; सर का लंड पूरी तरह से खड़ा तन कर खड़ा था जिसके ऊपर टी शर्ट आ रही थी और लंड ने वहां से कपड़े को उठा रखा था। मैंने सर से कहा- सर टी शर्ट अकेली सेक्सी नहीं लगती! तो सर ने शरारती मुस्कान देकर कहा- बहुत चालू हो यार! और सर ने टी शर्ट भी निकाल कर फेंक दी। अब सर मेरे सामने बिल्कुल नंगे बैठे थे। मैंने हाथ से सर का लंड पकड़ लिया और चमड़ी को पीछे करके लाल टोपे को बाहर निकाल लिया। मैं उस पर धीरे-धीरे उंगली घुमाने लगी। लंड का टोपा बहुत ही चिकना और मुलायम था। तभी सर ने मुझे अपनी गोद में आने को कहा और मैं सर की गोद में आ गई। सर ने मेरे दोनों बूब्ज़ शर्ट के ऊपर से पकड़ लिए और मेरे होंठों पर होंठ रख दिए। सर मेरे बूब्ज़ दबाते हुए मेरे होंठ चूमने लगे और कुछ ही देर में मैं भी गर्म हो गई। मैंने सर के चेहरे को दोनों हाथों में ले लिया और सर के होंठ जोर से चूमने लगी। अब हम बहुत जोर से एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे; कभी सर मेरे होंठ को अपने मुंह में खींचकर चूसते और कभी मैं सर के होंठ अपने मुंह में भर कर चूसने लगती। तभी जैसे मैंने मूवी में देखा था, वैसे सर के मुंह में जीभ घुसा कर घुमाने लगी। सर का मुंह एकदम गर्म था। सर मेरी जीभ अपने मुंह में लेकर चूसने लगे और फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। सर मेरे मुंह में जीभ घुमाने लगे और फिर मैं सर की जीभ चूसने लगी। हम दोनों एक दूसरे की जीभ को और होंठों को ऐसे चूस रहे थे जैसे सारा रस निचोड़ कर पी जाएंगे। सर ने मेरा चेहरा अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर को किया और मेरी गर्दन पर अपने होंठ रखकर चूमने लगे; मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। सर अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरी गर्दन पर घुमाने लगे तो मेरे बदन के एक एक अंग में बिजली सी दौड़ने लगी और मैंने सर के कंधों पर हाथ रख कर जोर पकड़ लिया। अब सर ने पूछा- कैसा लग रहा है शिल्पा? मैं कुछ नहीं बोल पाई, बस नशीली नजरों से सर की आंखों में देखने लगी और सर ने मेरी आंखों में देखते हुए अपनी एक आंख दबा दी। मुझे मालूम नहीं क्या हुआ, मैंने अपनी दोनों बांहें की पीठ पर लपेट दीं और कस कर पकड़ कर सर से चिपक गई। मेरे बूब्ज़ सर की छाती से चिपक गए और मेरे दिल की धड़कन तेज़ गति से चलने लगी। मैं कुछ देर ऐसे ही चिपकी रही. और फिर सर ने मुझे पीछे खींचा; सर ने मेरी शर्ट के बटन खोल कर शर्ट निकाल थी और फिर मेरी ब्रा की हुक खोलकर ब्रा भी निकाल दी। सर ने मेरे बूब्ज़ को देखा, दबाने लगे और कहा- शिल्पा, तेरे बूब्ज़ भी तेरी बहन की तरह बड़े, टाईट, मुलायम, गोल और मस्त हैं। तू भी अपनी बहन की तरह बहुत मस्त माल है और उस जैसी ही चुदक्कड़ बनेगी। मैं बिल्कुल बेशर्म हो गई थी और कहा- चुदक्कड़ न होती तो यहां चुदने क्यों आती? सर ने कहा- बिंदास भी अपनी बहन की तरह ही हो… तुझे चोदने में बहुत मजा आएगा। मैंने कहा- मना किसने किया है जानेमन, तुम जी जान से चोदो और मैं जी जान से चुदाई करवाने ही आई हूं। सर ने मेरे बूब्ज़ जो़र से पकड़ लिए और मसलने लगे। सर अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्ज़ मसलने लगे और फिर मेरे सख्त हो चुके बूब्ज़ के निप्पलों को अपने अंगूठे और उंगली के बीच दबा कर रगड़ने लगे। मैं तो मस्त हुई आसमान की सैर कर रही थी। तभी सर मेरे बूब्ज़ को अपनी छाती पर रगड़ने लगे। मैंने सर के हाथों को पकड़ कर अपनी पीठ पर कर लिया और अपने बूब्ज़ सर की छाती पर दबा कर रगड़ने लगी। सर ने कहा- क्या बात है जानूं… तू तो बिना कहे ही समझ गई कि मुझे क्या चाहिए। मैंने कहा- समझ तो आएगी ही जानेमन, आज से आपकी रखैल जो बन गई हूं। मैंने सर की छाती पर बूब्ज़ रगड़ते हुए अपने होंठ सर की गर्दन पर रख दिए और चूमने लगी। फिर मैं सर की गर्दन को जीभ से चाटते हुए सर की छाती पर अपना मुंह ले आई। मैं सर की छाती को चूमने लगी और सर की छाती के निप्पलों को जीभ से चाटने लगी।
मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई – 2
मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई – 3
में आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने टीचर के घर गई और हम दोनों ने कैसे चूमा चाटी का मजा लिया.
अब आगे:
>जैसे ही मैं सैंडिल उतारने लगी सर ने रोक दिया, सर ने कहा- सैंडिल के साथ ही ऊपर आ जाओ, इसमें बहुत सेक्सी लगती हो।
मैंने कहा- सर चादर गंदी हो जाएगी!
तो बोले- नई चादर बदल देंगे. वैसे भी मुझे ही चादर धोनी पडे़गी।< मैं ऐसे ही सैंडिल पहनकर ही बैड की बैक से पीठ लगा कर बैठ गई और सर भी ऊपर आकर मेरे साथ बैठ गए। सर ने सफेद रंग की लोअर और काली सफेद धारीदार टी शर्ट पहन रखी थी। मैंने कहा- डार्लिंग इस टी शर्ट में बहुत सेक्सी लगते हो। सर ने कहा- सिर्फ टी शर्ट में ही? लोअर में नहीं क्या? मैंने कहा- लोअर भी अच्छी है लेकिन टी शर्ट बहुत सेक्सी है। सर ने बैठे बैठे ही लोअर निकाल कर फेंक दी और कहा- ये कम सेक्सी लगती थी तो निकाल दी। सर ने नीचे कुछ नहीं पहना था; सर का लंड पूरी तरह से खड़ा तन कर खड़ा था जिसके ऊपर टी शर्ट आ रही थी और लंड ने वहां से कपड़े को उठा रखा था। मैंने सर से कहा- सर टी शर्ट अकेली सेक्सी नहीं लगती! तो सर ने शरारती मुस्कान देकर कहा- बहुत चालू हो यार! और सर ने टी शर्ट भी निकाल कर फेंक दी। अब सर मेरे सामने बिल्कुल नंगे बैठे थे। मैंने हाथ से सर का लंड पकड़ लिया और चमड़ी को पीछे करके लाल टोपे को बाहर निकाल लिया। मैं उस पर धीरे-धीरे उंगली घुमाने लगी। लंड का टोपा बहुत ही चिकना और मुलायम था। तभी सर ने मुझे अपनी गोद में आने को कहा और मैं सर की गोद में आ गई। सर ने मेरे दोनों बूब्ज़ शर्ट के ऊपर से पकड़ लिए और मेरे होंठों पर होंठ रख दिए। सर मेरे बूब्ज़ दबाते हुए मेरे होंठ चूमने लगे और कुछ ही देर में मैं भी गर्म हो गई। मैंने सर के चेहरे को दोनों हाथों में ले लिया और सर के होंठ जोर से चूमने लगी। अब हम बहुत जोर से एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे; कभी सर मेरे होंठ को अपने मुंह में खींचकर चूसते और कभी मैं सर के होंठ अपने मुंह में भर कर चूसने लगती। तभी जैसे मैंने मूवी में देखा था, वैसे सर के मुंह में जीभ घुसा कर घुमाने लगी। सर का मुंह एकदम गर्म था। सर मेरी जीभ अपने मुंह में लेकर चूसने लगे और फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। सर मेरे मुंह में जीभ घुमाने लगे और फिर मैं सर की जीभ चूसने लगी। हम दोनों एक दूसरे की जीभ को और होंठों को ऐसे चूस रहे थे जैसे सारा रस निचोड़ कर पी जाएंगे। सर ने मेरा चेहरा अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर को किया और मेरी गर्दन पर अपने होंठ रखकर चूमने लगे; मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। सर अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरी गर्दन पर घुमाने लगे तो मेरे बदन के एक एक अंग में बिजली सी दौड़ने लगी और मैंने सर के कंधों पर हाथ रख कर जोर पकड़ लिया। अब सर ने पूछा- कैसा लग रहा है शिल्पा? मैं कुछ नहीं बोल पाई, बस नशीली नजरों से सर की आंखों में देखने लगी और सर ने मेरी आंखों में देखते हुए अपनी एक आंख दबा दी। मुझे मालूम नहीं क्या हुआ, मैंने अपनी दोनों बांहें की पीठ पर लपेट दीं और कस कर पकड़ कर सर से चिपक गई। मेरे बूब्ज़ सर की छाती से चिपक गए और मेरे दिल की धड़कन तेज़ गति से चलने लगी। मैं कुछ देर ऐसे ही चिपकी रही. और फिर सर ने मुझे पीछे खींचा; सर ने मेरी शर्ट के बटन खोल कर शर्ट निकाल थी और फिर मेरी ब्रा की हुक खोलकर ब्रा भी निकाल दी। सर ने मेरे बूब्ज़ को देखा, दबाने लगे और कहा- शिल्पा, तेरे बूब्ज़ भी तेरी बहन की तरह बड़े, टाईट, मुलायम, गोल और मस्त हैं। तू भी अपनी बहन की तरह बहुत मस्त माल है और उस जैसी ही चुदक्कड़ बनेगी। मैं बिल्कुल बेशर्म हो गई थी और कहा- चुदक्कड़ न होती तो यहां चुदने क्यों आती? सर ने कहा- बिंदास भी अपनी बहन की तरह ही हो… तुझे चोदने में बहुत मजा आएगा। मैंने कहा- मना किसने किया है जानेमन, तुम जी जान से चोदो और मैं जी जान से चुदाई करवाने ही आई हूं। सर ने मेरे बूब्ज़ जो़र से पकड़ लिए और मसलने लगे। सर अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्ज़ मसलने लगे और फिर मेरे सख्त हो चुके बूब्ज़ के निप्पलों को अपने अंगूठे और उंगली के बीच दबा कर रगड़ने लगे। मैं तो मस्त हुई आसमान की सैर कर रही थी। तभी सर मेरे बूब्ज़ को अपनी छाती पर रगड़ने लगे। मैंने सर के हाथों को पकड़ कर अपनी पीठ पर कर लिया और अपने बूब्ज़ सर की छाती पर दबा कर रगड़ने लगी। सर ने कहा- क्या बात है जानूं… तू तो बिना कहे ही समझ गई कि मुझे क्या चाहिए। मैंने कहा- समझ तो आएगी ही जानेमन, आज से आपकी रखैल जो बन गई हूं। मैंने सर की छाती पर बूब्ज़ रगड़ते हुए अपने होंठ सर की गर्दन पर रख दिए और चूमने लगी। फिर मैं सर की गर्दन को जीभ से चाटते हुए सर की छाती पर अपना मुंह ले आई। मैं सर की छाती को चूमने लगी और सर की छाती के निप्पलों को जीभ से चाटने लगी।