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थोड़ी देर मे हम सब को शराब का अच्छा नशा हो गया और हम बहुत ही भद्दे और अश्लील मज़ाक करने लगे.
मैने मामीजी से कहा, "मामी, किशन नही दिख रहा. मुझे तो उसका लन्ड भी लेना है!"
"अभी आ रहा है, बेटी." मामीजी बोलीं.
तभी किशन हाथ मे एक कैमेरा जैसी चीज़ लेकर बैठक मे आया.
"यह क्या है किशन?" मैने अचरज से पूछा.
"दीदी, यह एक वीडिओ कैमेरा है." किशन खुश होकर बोला, "भैया कल ही शहर से लाये हैं."
"इसमे हमारी वीडिओ बनेगी?" मैने उत्साहित होकर पूछा.
"हाँ." किशन बोला और कैमेरे को चालु करने लगा.
"हाय दईया!" गुलाबी चहक कर बोली, "किसन भैया, इससे का आप हमरी चुदाई फिलम बनायेंगे? जैसी उस दिन हमने टीवी पर देखी थी?" उसकी आवाज़ नशे मे लड़खड़ा रही थी.
"हाँ. बस देखती जा." किशन बोला.
उसने वीडिओ कैमेरा चालु किया और अमोल को पकड़ाकर बोला, "अमोल भैया, आपको तो वीडिओ कैमेरा चलानी आती होगी? आप ही फ़िल्म बनाइये."
अमोल ने खुशी खुशी कैमेरा ले लिया और सबकी वीडिओ बनाने लगा.
हम सबमे एक नया जोश भर गया क्योंकि हम आज जो करने वाले थे सब कैमेरे मे कैद होने वाला था.
सब ने अपनी शराब की गिलास खाली की और अपने अपने जोड़ीदार से चुम्मा-चाटी करने लगे. रामु ने फिर सब की गिलासें भर दी. उसका लन्ड भी लुंगी मे तनकर खड़ा था. उसकी भोली-भाली बीवी आज एक नये मर्द के बाहों मे रंगरेलियां मना रही थी.
गुलाबी ने विश्वनाथजी का लन्ड लुंगी के ऊपर से पकड़ रखा था और हिला रही थी. वह नशे मे हिचकी लेते हुए बोली, "अरे साला कोई चोदाई भी करेगा या सब चुम्मा-चाटी ही करते रहेंगे?"
शराब के नशे से मेरा सर घूम रहा था. मेरा पूरा शरीर गरम हो गया था और मेरी चूत गीली होकर चू रही थी. बलराम भैया ने मेरे ब्रा को ऊपर खींच दिया था और मेरी नंगी चूचियों को जोर से मसल रहे थे. साथ ही मेरे होठों को पी रहे थे.
वह बोले, "मै तो भई अब वीणा को चोदने वाला हूँ. मेरी बहन इतनी मस्त माल है और मैने आज तक इसकी जवानी का रस नही पिया है!"
"हाँ हाँ, चोद लीजिये अपनी बहन को और बहनचोद बन जाईये." भाभी अपने पति को छेड़कर बोली. भाभी की ब्लाउज़ सामने से खुली हुई थी और अमोल उसकी चूचियों को एक हाथ से दबा रहा था.
"कम से कम वीणा मेरी सगी बहन तो नही है." बलराम भैया बोले, "तुम तो अपने सगे भाई से चुदवाती हो."
"हाँ चुदवाऊंगी तो. आपको क्या?" भाभी नशे मे धुत्त आवाज़ मे बोली, "अपने बड़े भाई से भी चुदवाऊंगी. अपने बाप से भी चुदवाऊंगी. आप देखना और अपना लौड़ा हिलाना."
"अरे तुम लोग बातें बंद करो और कोई मुझे चोदो!" मैं खीजकर चिल्लायी. "कोई तो मेरी चूत मे एक लौड़ा डालो!"
"बलराम, बेचारी बहुत तड़प रही है. अब चोद दे उसे." मामीजी बोली, "अमोल, ज़रा वीणा को नंगी कर दे बेटा."
"हाँ हाँ, अमोल. आओ और अपनी मंगेतर को मेरे लिये तैयार करो." बलराम भैया बोले.
अमोल उठकर आया और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोलकर मेरे पैरों से अलग करने लगा. मैने अपने पीठ के पीछे हाथ ले जाकर ब्रा की हुक खोल दी. जल्दी ही मैं पूरी नंगी हो गयी.
बलराम भैया ने मुझे गद्दे पर लिटा दिया और मैने अपनी नंगी चूत उनके सामने कर दी. वह उठे और अपनी लुंगी उतारकर पूरे नंगे हो गये. उनका शरीर कसा हुआ और तराशा हुआ था. पर उनका लन्ड मैं पहली बार देख रही थी. सांवले रंग का लन्ड करीब 8 इंच का था और काफ़ी मोटा था. इसी लन्ड से बलराम भैया भाभी को चोदकर मज़ा देते थे. इस लन्ड को अपनी चूत मे लेने की मेरी बहुत दिनो की चाहत थी.
भैया ने मेरे दोनो पैर अलग किये और बीच मे बैठ गये. अपना मोटा, लाल सुपाड़ा मेरी चिकनी चूत के फांक मे रखकर ऊपर-नीचे रगड़ने लगे. मेरा पेट गर्भ होने के कारण थोड़ा फुल गया था और मेरी बुर भी थोड़ी मोटी हो गयी थी. शायद मैं उस समय बहुत ही अश्लील लग रही थी.
मैने अमोल की तरफ़ देखा जो मेरी चूत पर अपने जीजाजी के लन्ड की रगड़ाई देख रहा था. उसके हाथ मे वीडिओ कैमेरा था जिससे वह मेरे नंगेपन की फ़िल्म लिये जा रहा था.
"हाय अमोल! तुम्हारी होने वाली पत्नी अपने भाई से चुदने वाली है!" मैने कहा, "तुम्हे देखकर मज़ा आ रहा है?"
"हाँ, वीणा. बहुत अच्छा लग रहा है." अमोल भारी आवाज़ मे बोला, "जीजाजी, घुसा दीजिये वीणा की चूत मे अपना लौड़ा. पेल दीजिये पेलड़ तक अपना लन्ड!"
"हाँ, भैया! आह!! और मत सताइये मुझे! आह!!" मैने कहा और अपनी कमर उचकाने लगी.
बलराम भैया ने अपना सुपाड़ा मेरी चूत की छेद पर रखा और कमर का धक्का लगाया. लन्ड मेरी चूत को चौड़ी करके अन्दर घुस गया. मैं अनचुदी तो थी नही, इसलिये मुझे कोई तकलीफ़ नही हुई. और एक मस्ती मेरे पूरे शरीर मे छा गयी. मैं जोर से "आह!!" कर उठी.
बलराम भैया मुझे धीरे धीरे चोदने लगे. मैं सबके सामने पैर फैलाये उनसे चुदवाने लगी. शराब का नशा और इतना मोटा मस्त लन्ड. मैं आनंद के सगर मे गोते लगाने लगी. हर धक्के के साथ आह! ओह!! उफ़्फ़!! कर रही थी.
मेरी नज़र वीडिओ कैमेरे की तरफ़ जाती तो मैं और भी कामुक हो उठती. मैने कभी अपनी चुदाई की फ़िल्म नही बनवायी थी.
अमोल एक मन से मेरी चुदाई की वीडिओ बना रहा था. मीना भाभी ने उसकी लुंगी उतार दी थी और उसके खड़े लन्ड को हाथ मे लेकर सहला रही थी. वह खुद घुटनों के बल थी और उसकी पेटीकोट कमर के ऊपर चढ़ी हुई थी. उसके चूतड़ों के पीछे मामाजी थे और उसे कुतिया बनाकर उसको धीरे धीरे चोद रहे थे.
मैने बगल मे नज़र डाली तो देखा विश्वनाथजी पूरे नंगे होकर लेटे थे. उनका 10 इंच का मूसल तनकर खड़ा था और गुलाबी उसे मुंह मे लेकर चूस रही थी. लन्ड इतना मोटा और बड़ा था कि बेचारी के छोटे से मुंह मे पूरा जा भी नही रहा था. पर वह पूरे जोश और हवस के साथ विश्वनाथजी के लन्ड को चूसे जा रही थी.
उसके बगल मे मामीजी अपने पैरों को फैलाये गद्दे पर पड़ी थीं. उनकी पेटीकोट उनके कमर तक चड़ी हुई थी और किशन उनके पैरों के बीच बैठा उनकी मोटी बुर को चाट रहा था. किशन खुद पूरा नंगा हो गया था और उसका लन्ड तनकर खड़ा था.
रामु ने अपनी लुंगी उतार दी थी और पूरा नंगा हो गया था. एक हाथ से वह अपना काला लन्ड हिला रहा था और दूसरे हाथ मे एक गिलास पकड़े, विलायती शराब की चुसकी लेते हुए बाकी सबकी चुदायी देख रहा था.
यह सब देखकर मैं मस्ती की चरम सीमा को पार कर गयी. जोर जोर से चिल्लाते हुए मैं झड़ने लगी.
"ओह! पेलो और जोर से भैया! अपनी बहन को और पेलो! आह!! उम्म!" मैने चिल्लाने लगी, "अमोल! देखो...तुम्हारी वीणा कैसे चुदवा रही है! आह!! आह!! मैं झड़ रही हूँ! आह!! और पेलो! और जोर से पेलो मुझे!! आह!! आह!! आह!!"
मै झड़ रही थी और अमोल मेरी वीडिओ लिये जा रहा था.