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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 832

हर रोज की तरह चाची ने मुझे कसरत करने के लिए उठा दिया

अब तक तो मुझे आदत पड़ जानी चाहिए थी

पर मैं जानबूझ कर सोता रहता क्यूँ कि छोटी चाची मुझे प्यार से जो जगाती थी

छोटी चाची अलग अलग तरीके का ईस्तमाल करके मुझे नींद से जगाती है जो मुझे अच्छा लगता है

कभी प्यार से किस करना कभी मेरे गले कर उठाना , कभी मेरी चींटी काट लेना कभी मेरे लंड की दबा देना , ठंडे पानी से नहला देना ,गरम टी मे मेरी उंगली डाल देना , चाची के उठाने के तरीके मुझे अच्छे लगते थे

उसके बाद चाची जो मेरी कसरत लेती वो भी अच्छा लगता था

चाची को योगा करते हुए देखना , चाची मेनका की तरह मुझे सिड्यूस करती पर मैं कसरत करता रहता , अगेर कभी मैं सिड्यूस होकर उनके पास गया तो चाची मेरे कान पकड़ लेती

उनकी तो हर अदा लाजवाब है

कसरत करने के बाद मैं कोमल को मिलने जाने का प्लान बना रहा था पर छोटी चाची ने मुझे रोक लिया

सी चाची- अवी

अवी- जी चाची

सी चाची- तुझे आज कुछ काम है

अवी- नही तो

सी चाची- तो मेरे साथ चल

अवी- कहाँ पे

सी चाची- पूजा दीदी के घर चलते है

अवी- चलिए मैं आपको बुआ के घर छोड़ कर कोमल के यहाँ चला जाउन्गा

सी चाची- कोमल तो क्लासस को गयी होंगी

अवी- सनडे को हॉलिडे होता है

सी चाची- कोमल से तो तू मिलता रहता है , चल आज पूजा दीदी के घर चल

अवी- वहाँ तो स्वेता दीदी सीतल दीदी और राज मुझे पकड़ लेंगे

सी चाची- वो सब शहर जा रहे है , अपनी पुरानी सहेलियो से मिलने तो पूजा दीदी अकेली रह जाएँगी चल हम उनको कंपनी देते है

अवी- आप और बुआ तो बाते करेंगी मैं क्या करूँगा वहाँ पर

सी चाची- बच्चू , लॅडीस की गॉसिप सुनने लायक होती है इस से तुझे लॅडीस को समझने मे मदद मिलेंगी

अवी- और उस से क्या होगा

सी चाची- तू मिसेज़ दुबे जैसी आंटी को सिड्यूस कर पाएगा

अवी- चलिए

और मैं तय्यार होके चाची और अमित के साथ पूजा बुआ के घर आ गया

हमारे आने से पहले स्वेता दीदी सीतल दीदी और राज शहर चले गये

पूजा बुआ अकेली रह गयी

वो भी दोपेहर मे नेहा बुआ या नीता बुआ के घर चली जाती पर उस से पहले हम आ गये

चोथ चाची और मुझे देखते पूजा बुआ खुश हो गयी

काफ़ी दिन बाद मैं स्पेशली पूजा बुआ से मिलने आया था

पूजा बुआ -मीना अवी तुम , आव आज इधर कैसे आना हुआ

सी चाची- आप अकेली है ये सुना तो आपसे मिलने आ गये

पूजा बुआ -तेरा तो समझ सकती हूँ पर अवी इधर का रास्ता कैसे भूल गया आज

अवी- बुआ ये आप क्या बोल रही है , , मैं तो यहाँ आता रहता हूँ

पूजा बुआ -पता है जब देखो तब अपनी बहनों या अपने भाई से मिलने आता है , कभी तो अपनी बुआ को मिलने आया कर

अवी- आज आया हूँ ना

पूजा बुआ -मीना तुझे लाई होगी , वरना तू तो मुझे भूल ही गया था

अवी- ऐसा नही है बुआ , आपको तो पता है यहाँ आते ही राज मुझे अकेला छोड़ता ही नही जिस से आपसे बात हो ही नही पाती

सी चाची- दीदी अब क्या खड़े रखने का इरादा है

पूजा बुआ -तेरा ही घर है तुझे क्या बोलना पड़ेगा ,

और हम हॉल मे जाकर बैठ गये

अवी- आपके पूछने से पहले बता रहा हूँ मैं कॉफी लूँगा

पूजा बुआ -तुम बैठो मैं हम सबके लिए कॉफी बनाती हूँ

सी चाची- दीदी कॉफी पीते हुए बाते करते है

और पूजा बुआ ने कॉफी बना दी

हम कॉफी पीते हुए बात करने लगे

मैं तो बस कॉफी पी रहा था

बाते तो पूजा बुआ और छोटी चाची कर रही थी

मैं तो उनकी बाते सुन रहा था

पूजा बुआ और छोटी चाची तो बाते करने मे पूरी तरह से डूब गयी थी

मेरे बारे मे तो जैसे भूल गयी थी

मैं ने उनको याद दिलाया की मैं यहाँ हूँ

अवी- बुआ एक और कप कॉफी मिलेगी

पूजा बुआ- क्या कहा

अवी- 2 कप तो पी ली और एक कप मिलेगी

पूजा बुआ- तेरी तबीयत तो ठीक हैना

अवी- मेरी तबीयत अच्छी है , मैं बोर हो रहा था तो सोचा कॉफी पी जाए

पूजा बुआ- सॉरी हम तो बातों मे ऐसी डूब गयी कि तुझे भूल ही गयी

छोटी चाची- अवी तू लॅपटॉप पे कुछ देख ले , तब तक हम बाते करते है

अवी- स्वेता दीदी का लॅपटॉप , वो तो लॉक हॉंगा ना

पूजा बुआ- जाकर देख तो ले कि लॅपटॉप कबॉरॅड मे रखा है या नही

छोटी चाची- अवी

अवी- आप बाते करो , मैं मूवी देख लेता हूँ

और मैं स्वेता दीदी के कमरे मे चला गया

पूजा बुआ और छोटी चाची बाते करने लगी

स्वेता दीदी का लॅपटॉप तो मिल गया पर पासवर्ड दीदी ने चेंज किया था

ज़रूर रोहन की फोटो होंगी कोई देख ना ले इस लिए पासवर्ड रखा है

लास्ट टाइम मेसेज देख लिए थे तो गड़बड़ हो गयी थी इस बार जाने देता हूँ

पर बिना लॅपटॉप के बोर हो जाउन्गा

क्या करू क्या करू , मोबाइल के वीडियो देख कर तो मैं और बोर हो जाउन्गा

चलो पूजा बुआ के कमरे मे जाके देखता हूँ बुआ अकेले मे क्या करने का प्लान कर रही थी

मैं पूजा बुआ के कमरे मे चला गया

पूजा बुआ के बेड पे आल्बम पड़ा हुआ था

मैं ने उठाकर देखा तो ये तो पूजा बुआ की शादी के फोटो का आल्बम है

पहली फोटो मे तो पूरी फॅमिली है ,

दादाजी दादी मेरे पापा पूजा बुआ नेहा बुआ नीता बुआ और छोटू

दुल्हन के ड्रेस मे पूजा बुआ कितनी सुंदर दिख रही है

ऐसा लग रहा है कि सबने प्यार से सजाया है पूजा बुआ को

पूजा बुआ से पूछता हूँ उनकी शादी के बारे मे क्या पता नेहा बुआ के बारे मे पता चल जाए

मैं आल्बम लेकर पूजा के सामने आ गया

अवी- बुआ , आपके शादी का आल्बम

पूजा बुआ- तुझे कहाँ से मिला

अवी- आपके बेड पे पड़ा था

पूजा बुआ- हाँ वो मैं तुम्हारे आने से पहले देख रही थी , पुरानी बाते याद कर रही थी

अवी- मुझे भी बताइए

पूजा बुआ- मेरी शादी के बारे मे जानकार क्या करेगा

छोटी चाची- (जब से नेहा के बारे मे बताया तब से अवी पुरानी बातों के पीछे लगा है )

अवी- मैं भी तो जानू कि मेरी प्यारी बुआ की शादी कैसे हुई थी और उनको राजकुमार कैसे मिला था

पूजा बुआ- वो तो बड़ी इंटरेस्टिंग कहानी है

अवी- बताए ना

पूजा बुआ- फोटो देखते हुए बताती हूँ

छोटी चाची- (दीदी क्या करने जा रही है )

छोटी चाची ने पूजा बुआ को इशारो मे कुछ कहा जिसका जवाब पूजा बुआ ने इशारो मे दिया

जिस से छोटी चाची रिलॅक्स हो गयी

और पूजा बुआ मुझे अपने शादी के फोटो दिखाने लगी

अचानक आल्बम मे से एक काय्न नीचे गिर गया

पूजा बुआ- अवी वो काय्न खोने मत देना

मैं ने वो काय्न उठा लिया

ये तो कोई काय्न नही है

इस पे तो पूजा बुआ और राज के पापा का नाम लिखा है

अवी- बुआ इस पे तो आपका नाम लिखा है और ये तो सिल्वर काय्न है

पूजा बुआ- हाँ , मेरे शादी मे सभी मेहमानों को दिया था तो मैं ने अपनी शादी की याद के लिए एक रख लिया

अवी- वाउ सिल्वर काय्न शादी मे मेहमानों को गिफ्ट , और उसपे आपका और अंकल का नाम ये आइडिया किस का था

पूजा बुआ- तेरे पापा का , तेरे पापा ने अपने कमाई से खास बनाए थे मेरे शादी मे , तेरे पापा ने मेरी शादी करवाई थी

अवी- मेरे पापा ने

पूजा बुआ- हाँ , तेरे पापा ने ऐसी शादी करवाई थी कि पूरा गाओं आज तक भुला नही होगा

अवी- फिर तो नेहा बुआ की शादी भी मेरे पापा ने धूम धड़ाके के साथ की होगी

नेहा बुआ के शादी की बात सुनते ही पूजा बुआ और छोटी चाची को साप सूंघ गया

दोनो एक दूसरे के चेहरे देखने लगे

छोटी चाची- अवी पता है पूजा दीदी ने एक दिन मे अपना राजकुमार पसंद किया और उसी दिन सगाई भी कर ली थी

छोटी चाची ने बड़ी सफाई के साथ नेहा बुआ के शादी की बात बदल दी

पर ऐसी बात के साथ बदली कि मुझे पूजा बुआ की शादी के बारे मे सुनने का मन करने लगा

अवी- ये कैसे हुआ

पूजा बुआ- रुक तुझे बताती हूँ

और पूजा बुआ फोटो दिखाते हुए मुझे अपने शादी की कहानी बताने लगी

छोटी चाची भी फोटो देखते हुए अपने ख़याल मे खो गयी , उनकी जो बताया गया उनको याद करने लगी

पूजा बुआ भी मुझे शादी के बारे मे बताते बताते खुद ख़यालो मे डूब गयी

और मैं फिर से फोटो देखते हुए इमॅजिन करने लगा कि क्या हुआ होगा शादी मे कैसी हुई होगी शादी

मेरे पापा कितने खुश दिख रहे है पूजा बुआ की शादी मे

पर ये क्या पूजा बुआ तो यादो की दुनिया मे खो गयी

और छोटी चाची भी

दोनो को जितना पता है उसके बारे मे सोचने लगी

और मैं फोटो देखने लगा

फोटो देख कर अपने पापा की कहानी कैसी होंगी ये सोचने लगा
 
फ्लॅशबॅक 832ए

ये कहानी है जयसिंघ की

जितना दर्द सबको हुआ मेरे जाने से उतना ही मुझे हुआ

पर ये मैं अपने लिए नही कर रहा था

ये मैं अपने फॅमिली के लिए कर रहा था

आज भी मुझे याद है ,जब मास्टर जी ने मुझे कहा था कि अगर तुम्हे कुछ बनना है तो उड़ना सीखो ,अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी सोच को आज़ाद करो , अपने होशले को कम मत होने देना ,

मास्टर जी के ये कुछ वर्ड मेरे दिमाग़ मे हमेशा घूमते रहे

मैं तो समझता था कि दुनिया मे सिर्फ़ मेरा गाओं ही है

मेरा गाओं है ही इतना प्यारा कि सबको क़ैद करके रखता है अपनी खूबसूरती मे

यहाँ से बाहर जाने का दिल ही नही करता

मैं भी ऐसा ही था

मैं भी अपने गाओं को प्यार करता हूँ , मेरी जनम्भुमि है ये

मेरे लिए मेरी फॅमिली ही सबकुछ है

मेरे पिताजी मेरे आइडीयल है

मेरे पिताजी ने जो गाओं को दिया है , ये स्कूल खोल कर गाओं के लोगो को एक नयी दिशा दी जिस पे उनको चलना है

मेरे पिताजी ने अपनी शिक्षा का सही ईस्तमाल किया

वो चाहते तो बड़ा ऑफीसर बन सकते थे पर उननो ने ऐसा नही किया

वो इस मिट्टी का क़र्ज़ चुकाना चाहते थे

उनके लिए तो ये जनम भूमि है,कर्मभूमि है ,

मैं भी उनकी तरह बनना चाहता हूँ

मेरे पिताजी जैसा बनने के लिए मुझे पहले अपने पैरो पे खड़ा होना होगा

फिर मुझे अपनी फॅमिली अपने गाओं के लिए कुछ करना था

मेरे पिताजी के मुझसे बहोत एक्सपेकशन है

वो चाहते है कि मैं उनके तरह बन जाउ

मेरे पिताजी जैसा कोई बन नही सकता , मैं भी नही बन सकता

मेरे पिताजी ने हमे इतना प्यार दिया , जैसे उन्हो ने अपने बचपन मे नही किया हो वो हमारे साथ बच्चे बन कर करते थे

मुझे तो याद भी नही है की कभी पिताजी ने हम भाई बहनो पे हाथ उठाया हो

माँ को भी हमे मारने नही दिया

मेरे पिताजी मुझ मे अपनी छवि देखते थे

उनका कहना है कि मैं अपने भाई बहनो को साथ लेकर चलूं

मैं तो उनको खुद से आगे लेकर जाना चाहता हू ,

जो पिताजी ने सोचा नही था मैं अपने भाई बहनों को उस उँचाई पर ले जाना चाहता हू

जब भी मैं ग़लती करता हूँ तब पिताजी मुझे सही सीख देते है

मैं ने दुबारा कभी वैसी ग़लती नही की

लास्ट टाइम छोटू के गिरने पे पिताजी ने मुझे भरा भुला कहा

पर मैं 1 स्ट अपने लिए नही छोटू के लिए आया था

मुझे पता था कि छोटू वो रेस जीत नही पाएगा तो मैं रेस जीत कर उसको पहला आम देना चाहता था

छोटू की चीख मैं ने भी सुनी थी

मैं छोटू के पास जा सकता था

पर छोटू के पास आप सब थे मैं तो उसके दर्द का इलाज़ लेने के लिए 1 स्ट आया था

पहला आम छोटू को देता तो उसका दर्द ख़तम हो जाता

पर मुझे सब ने ग़लत समझा , पर कोई बात नही

अपने ही तो थे , उनकी बात का क्या बुरा मानना

उस दिन पिताजी ने जो शिक्षा दी मुझे आज भी याद है

उसके बाद शहर3 जाते वक्त मैं ने पिताजी के आँखो मे दर्द देखा

दिल मे आया कि अपने सपने को तोड़ दूं

मैं बोलने वाला था पिताजी को मुझे नही जाना शहर3

पर पिताजी का वो सवाल कि तुम शहर3 किस के लिए जा रहे हो ,

इस सवाल के जवाब पर पिताजी ने मुझे गले लगाया जैसे कह रहे हो कि तू जा और अपना सपना पूरा कर , अपने लिए नही हमारे लिए

उस दिन के बाद मैं ने पलट कर नही देखा

और वो मास्टर जी के वर्ड , मास्टर जी के वो वर्ड मेरे दिमाग़ को स्थिर रहने नही दे रहे थे

मेरे सपने भी बड़े थे

मेरे सपने

मैं ने आज तक किसी को नही बताया

ना मेरे पिताजी को ना मेरी माँ को और ना मेरी बहनों को

एक बार नेहा ने पूछा था मेरे सपने के बारे मे

नेहा से मैं झूठ नही बोलता था

नेहा की वो प्यारी आवाज़ मुझे अपने सपने को बताने के लिया काफ़ी थी

मैं नेहा को अपने सपने के बारे मे बताने वाला था क़ि नेहा ने खुद अपने सवाल का जवाब दिया ये बोल कर मुझे बड़ा आदमी बनना है

फिर नेहा ने अपनी प्यारी प्यारी बातों से मेरे सपने को बढ़ाना सुरू किया

नेहा- भैया आप कर लेना , सबसे पहले मैं बताउन्गी आपके कार मे , हम बहोत दूर जाएँगे , उचे उचे बादलो मे जाएँगे ,

जयसिंघ- पगली , कार हवा मे नही उड़ती

नेहा - भैया आप इंजिनियर बनोगे तो वैसी कार बना ले

जयसिंघ- तुम्हे हवा मे उड़ना है

नेहा - आज़ाद पंछी की तरह

जयसिंघ- और

नेहा - मुझे पक्षियों को अपना दोस्त बनाना है,उनके साथ खेलना है

जयसिंघ- तू तो पगली हो गयी है ऐसा कभी होता है

नेहा - मुझे पक्षियो को अपना दोस्त बनाना है,उनके साथ खेलना है

जयसिंघ- तू तो पगली हो गयी है ऐसा कभी होता है

नेहा - भैया आप मेरे लिए इतना नही कर सकते

जयसिंघ- तू तो मेरी जान है , शहर से जब मैं वापस आउन्गा तो तुज़े अपने साथ लेकर जाउन्गा , तेरे दोस्त के पास , तेरे पक्षियों के पास

नेहा - पक्का भैया

जयसिंघ- पक्का जा अब सो जा , बहोत रात हो गयी है , और नीता कहाँ है

नेहा - मुझे आपसे अकेले मे बात करनी थी तो उसके सोने तक इनजार किया और उसके सोते यहाँ आ गयी आपके पास

जयसिंघ- अब जा नीता के पास , अगेर वो उठ गयी और तुझे अपने पास नही देखा तो वो रो देगी ,अब जा तू उसके पास

नेहा - जी भैया , आप भी सो जाइए

जयसिंघ- मुझे पढ़ना है

नेहा - भैया इतना क्या पढ़ना , मैं पिताजी को कहूँगी कि आपको शहर 3 जाने देंगे

जयसिंघ- मैं अपने लिए नही तुम सब के लिए पढ़ रहा हूँ , तुझे पक्षियों से दोस्ती करना हैना , तो उसके लिए उड़ने वाली कार बनानी होगी तो उसके लिए पढ़ना होगा ना

नेहा - जी भैया ,

और नेहा ने स्वीट सी पप्पी दी जयसिंघ को

नेहा की वो प्यारी प्यारी बाते आज भी याद आती है

नेहा नीता और पूजा के बिना मुझे कुछ भी अच्छा नही लग रहा था

पहले दिन तो शहर3 आके ऐसा लगा कि वापस चला जाउ

पर वापस चला गया तो पिताजी को कैसे लगेगा कि उनके बेटे ने खेलने से पहले हार मान ली

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11थ, 12थ के बाद जयसिंघ ने इंजिनियर कॉलेज मे अड्मिज़िशन लिया ,

2न्ड एअर इंजिनियरिंग-

जयसिंघ- ये तू क्या कर रहा है , ये तो मेरी बुक के पेजस है

है

कुमार- पढ़ने दे ना ,, तुझे तो डायरी लिखनी चाहिए , ये पेज पे क्यूँ लिखा है

अजीत- तू तो राइटर बन सकता है

जयसिंघ- वो पेज मुझे वापस दो

अजीत - पूरा पढ़ने तो दे

कुमार - तेरी फॅमिली तो बहोत अच्छी है , खास करके नेहा ,, कितनी प्यारी है , सिर्फ़ पढ़कर ही ऐसा लग रहा था तो खुद देखूँगा तो मेरा क्या होगा

जयसिंघ- मेरी बहन के खिलाफ एक वर्ड भी ऐसा वैसा मत कहना

कुमार- मैं ने कुछ बुरा थोड़े कहा है मैं तो सिर्फ़ तेरी बहन की तारीफ कर रहा था

जयसिंघ- तू अपनी बाते अपने पास रख

और जयसिंघ ने वो पेज अपने हाथ मे लिया और उसको जला दिया

अजीत- जला क्यूँ रहे हो

जयसिंघ- तेरे जैसे कमीने का क्या भरोसा

अजीत- कमीने दोस्त ही काम आते है

कुमार- पर कुछ भी बोल , वो मास्टर जी बाते आज भी याद आती है , उनके वो वर्ड

और कुमार अजीत हँसने लगे

जयसिंघ- इसी लिए जलाया है उस पेज को

अजीत- तेरे भाई का नाम छोटू , और जयसिंघ मोटू

जयसिंघ- साले तुझे मेरे हाथ का मार खाना है

अजीत -वो भी खा लूँगा पहले टी तो बना दे

जयसिंघ- सालो खुद तो कुछ कर लिया करो , पढ़ाई मैं करू और टी भी मैं बनाऊ

कुमार- मुझे टी बनानी आती नही ,वरना मैं ही बना देता

जयसिंघ- जिसको पीनी है वो खुद बना लेगा

अजीत- मुझे टी नही सिग्रेट पीनी है पर पर मैं सिग्रेट टी के साथ पीता हूँ

कुमार- तेरे सिग्रेट के लिए जयसिंघ क्यू बनाएगा टी ,

अजीत- तू बना दे जानेमन , रात को तुझे खुश कर दूँगा

कुमार- मेरे घर पे टी बनाने के लिए एक स्पेशल नौकर है , खाना बनाने के लिए अलग ,नाश्ता बनाने के लिए अलग

अजीत- तेरी गंद धोने को भी नौकेर होगा

कुमार-हैना ,उसका नाम अजीत है

अजीत- मुझे नौकर बोलता है

जयसिंघ- तुम्हे झगड़ा करना है तो बाहर जाके करो , मुझे पढ़ना है

कुमार- कितना पड़ेगा , टॉप तो तू हर बार आता है

जयसिंघ-तो क्या हुआ मैं तेरे जैसा रिच नही हूँ

कुमार- मेरे बाप ने पता नही कहाँ से उतने पैसे जमाए है

जयसिंघ- तुझे देख कर लग रहा है कि तू सारे पैसे उड़ाएगा

कुमार- क्या करूँ यार , जितने खर्च करता हूँ उस से ज़्यादा वापस आ जाते है

अजीत- इस ग़रीब पे खर्च करा कर

कुमार- तूने कब अपने पैसे से कुछ लिया है वो बता , शर्ट से लेके सिग्रेट तक सारे मेरे पैसे से लेता है

अजीत - जिसका रिच दोस्त हो वो अपने पैसे क्यू खर्च करे

जयसिंघ- साले कुमार , तेरा घर तो इसी शहर3 मे है फिर तू यहाँ हॉस्टिल मे क्यूँ रहता है

कुमार- घर पे रहूँगा तो अपनी मर्ज़ी से कुछ नही कर पाउन्गा , यहाँ हॉस्टिल पे तो मैं अपने दिल का राजा हूँ

अजीत- तो चल रानी ढूँढने

कुमार- मुझे नही पसंद रंडियो के पास जाना

अजीत - चल तो मज़ा आता है

जयसिंघ- वो अच्छी नही होती

अजीत- तो

कुमार - कोई गर्लफ्रेंड मिल जाए तो मज़ा आ जाए

अजीत- तो चल ना गर्लफ्रेंड बनाते है

जयसिंग- कुमार इसके साथ जाना मत कल ही मैं ने इसे सॅंडल खाते हुए देखा था

कुमार-जयसिंघ अपना स्टाइल अलग है

जयसिंघ- तो टी बना कर जाना

कुमार- अजीत बना दे जयसिंघ को पढ़ाई करनी है

अजीत- मैं क्यू बनाऊ उसके लिए

कुमार- अपना भाई है जयसिंघ , समझा कर

अजीत -ठीक है अभी बनाता हूँ

और अजीत टी बनाने लगा

कुमार- जयसिंघ तू आ ये सिंग निकाल दे अच्छा नही लगता

जयसिंघ- नही , वो मेरी पहचान है

कुमार- वो ऐसा लगता है कि

जयसिंघ- मेरा नाम मुझे बताता है कि मैं कौन हूँ किस लिए यहाँ आया हूँ .

कुमार-समझ गया फिर से सुरू मत हो जाना

जयसिंघ- तू अजीत के साथ मत रहा कर एक दिन तुझे महँगा पड़ जाएगा

कुमार- तुम दोनो ही तो मेरे खास दोस्त हो , तू मुझे समझता है कि क्या अच्छा है और अजीत बताता है कि बुरा कितना अच्छा होता है

जयसिंघ- तू फिससस्स जाएगा

कुमार-मेरी छोड़ , असाइनमेंट हुआ लिख कर

जयसिंघ- मेरा भी हो गया तेरा भी , उस अजीत को कॉपी करने को बोल देना

कुमार-तू ही मेरा सच्चा दोस्त है , ले टी पी ले

और जयसिंघ टी पीते हुए पढ़ाई करने लगा और कुमार अजीत के साथ बाहर चला गया
 
फ्लॅशबॅक 832 ब

जयसिंघ शहर3 आके सिर्फ़ पढ़ाई करने पे ध्यान दे रहा था

उसे उसके सपने जो पूरे करने थे

जैसा सबके साथ होता है वैसा ही जयसिंघ के साथ हुआ

जयसिंघ पढ़ाई करने वाले लड़के को 2 ऐसे रूम मेट मिले जो पढ़ाई का नाम भी नही लेते थे.

अजीत और कुमार ये दोनो जयसिंघ के दोस्त थे

जयसिंघ तो रात रात भर पढ़ाई करता था .

उसको तो बाकी की चीज़ो से कुछ लेना देना नही था

पिताजी ने जयसिंघ को उसके मनपसंद कॉलेज मे अड्मिशन करवा दिया

मुश्किल था पर जयसिंघ को यही पढ़ना था तो पिताजी ने ठाकुरजी से बात की और ठाकुर जी का नाम सुनते ही अड्मिशन आराम से हो गया

जयसिंघ उनका बेटा था , उसके लिए पिताजी इतना तो कर ही सकते थे

वो पहला और आख़िरी दिन था जब पिताजी शहर3 आए थे

उसके बाद तो पिताजी ने शहर3 जाने का सोच भी नही था

जयसिंघ को जितने पैसे लगते पिताजी मनी ऑर्डर कर देते

जयसिंघ दीवाली मे घर आता था

और अपने साथ अपने भाई बहनों के लिए गिफ्ट भी लता था

पिताजी सोचते कि ये उनके पैसो से ही

पर जयसिंघ इन गिफ्ट के पैसो के लिए कितनी बचत करता ये उसे ही पता था

रात रात भर कुमार के नोट लिख कर देता , लाइब्रेरी मे बुक अरेंजमेंट का काम करता , पार्ट टाइम कॅंटीन मे काम करता

पैसे तो पिताजी उसके लिए भेज देते पर जयसिंघ को अपने भाई बहनों के लिए अपने पैसो से गिफ्ट लेने थे

जयसिंघ चाहता था कि वो अंबे भाई बहनों को अपने कमाई से लिए गिफ्ट दे

जयसिंघ ने ये बात कभी किसी को पता नही चलने दी कि गिफ्ट के लिए पैसे कहाँ से लाता था

पिताजी को लगता कि ये पैसे उन्होने दिए हुए है

जयसिंघ ने लाए हुए गिफ्ट सबको पसंद आते थे

क्यू कि उस गिफ्ट मे जयसिंघ का प्यार जो था

दीवाली का इंतज़ार नेहा नीता छोटू पूजा इस लिए नही करते की उनको मस्ती करना है पटाखे फोड़ने है

वो तो इस लिए इंतज़ार करते थे कि उनका बड़ा भाई आएगा

उनकी आँखे बस डोर पर लगी हुई होती थी

जैसे जयसिंघ घर मे पैर रखता तो सब भाग कर जयसिंघ के गले लग जाते

अपने भाई बहनो का प्यार देख कर जयसिंघ के आँखो मे पानी आ जाता था

गिफ्ट से ज़्यादा सब को जयसिंघ को प्यार करने का दिल करता

जयसिंघ से बाते करते रहना का दिल करता

जयसिंघ के मूह से शहर के किस्से सुनने का दिल करता

जयसिंघ घर आते ही सही मायने मे सबके लिए दीवाली होती

वरना सब के मूह लटके हुए होते थे

पिताजी को भी अच्छा लगता कि राम की तारा जयसिंघ भी दीवाली मे घर आया है , सबके लिए खुशियाँ लेकर आया है

पिताजी अपनी भावनाओं को छुपा कर रखते थे

पर एक माँ खुद को कैसे रोकती

वो तो जयसिंघ के गले लग कर रोने लग जाती थी

फिर जयसिंघ का उनको शांत करना सबको गिफ्ट देना

पिताजी के पैर छु कर उनको छोटा सा गिफ्ट देना सब कुछ कितना अच्छा लग रहा था पिताजी को

पिताजी को अभी तक उम्मीद थी कि जयसिंघ वापस ज़रूर आएगा

पिताजी ने बताई हुई बात कि खुद को कभी भूलना मत ये आज भी जयसिंघ को याद है ये देख कर पिताजी को अच्छा लगा

माँ भी पिताजी की फीलिंग को देख चुकी थी

पिताजी अपने आसू को सब से छुपाने के लिए अपने कमरे मे चले गये

अपने खरीदे हुए गिफ्ट लाने

पर उनके गिफ्ट से ज़्यादा सबको जयसिंघ के गिफ्ट पसंद थे

पिताजी को इस से बुरा नही लगता था , क्यू लगेगा बुरा , उनका बेटा उनकी जगह जो ले रहा था , हर पिता यही तो चाहता है कि उसका बेटा उसके जैसे बन जाए

पिताजी ने जयसिंघ को खुशी खुशी आशीर्वाद दिया

जयसिंघ के आते ही सब देर रात तक बाते करते थे

जयसिंघ को इतने दूर से आने की थकान नही थी बस वो अपने बहनों का प्यार देख रहा था

जयसिंघ के आने की बात पता चलते ही तीनो बहनों ने खुद अपने हाथो से खाना बनाया था

माँ तो ये देख कर अपनी बेटियो पे गर्व महसूस करने लगी

जयसिंघ को जब पता चला कि खाना नेहा नीता पूजा ने बनाया है तो वो पेट फटने तक खाना खाया जयसिंघ ने

जयसिंघ दूर जाने से अपने भाई बहनों को ज़्यादा प्यार करने लगा है ये पिताजी ने देख लिया

वो जो सोचते थे कि जयसिंघ सहर जाके बदल जाएगा वो ग़लत साबित हो रहा था

जयसिंघ तो सच मे बदल गया पर जैसा पिताजी ने सोचा था वैसा नही हुआ , जयसिंघ तो सबको प्यार करने लगा है

जयसिंघ आ तो गया दीवाली पर पर वो सोएगा कहाँ

उसके कमरे मे तो छोटू और पूजा रहते है

दूसरे कमरे मे नेहा और नीता , और पिताजी और माँ अपने कमरे मे सोती है

अब क्या करे

ये सवाल सबसे पहले नेहा के दिमाग़ मे आया

सब इसी पे सोचने के लिए अपने दिमाग़ लगाने लगे

पर नेहा और नीता अपने बिस्तेर लेकर हॉल मे आ गये

और हॉल मे बिस्तेर लगा दिया .

नेहा नीता का देख कर बाकी सब भी अपना बिस्तेर लेकर हॉल मे आ गये

और पूरी फॅमिली एक साथ हॉल मे सोने की तय्यारी करने लगी

पर नेहा और नीता के कहानी सुनने का वक्त हो चुका था

पिताजी वही सोच रहे थे कि आज किस की कहानी सुनाई जाए

पर ये क्या हुआ

नेहा - पिताजी

पिताजी- तुम्हारी फेव कहानी सुननी है

नेहा - पिताजी मैं कह रही थी कि

पिताजी- बोलो ना

नेहा- आज भैया की कहानी सुनती हूँ , वो शहर मे कैसे रहते है ,

पिताजी- जैसा तुम्हे अच्छा लगे

नेहा- आपको बुरा तो नही लग रहा

फिराजी- कैसी बात करती हो

नेहा - आप रोना मत , आपकी कहानी नही सुन रही हूँ तो ,

माजी- ओह दादीमा , हम भी सुनेगे तेरे भाई की कहानी

नीता- भैया आप यहाँ लेट जाइए , हमारे बीच मे

जयसिंघ- अच्छा बाबा,

एक तरफ नेहा और दूसरी तरफ नीता बीच मे जयसिंघ , इस तरह बाकी सब भी लेट गये

और जयसिंघ अपने शहर के किस्से सुनने लगा

नेहा नीता पूजा बड़ी एग्ज़ाइट होकर जयसिंघ की बाते सुन रही थी

पिताजी ये देख खुश थे कि जयसिंघ उनकी जगह ले रहा है

पिताजी जो रोज नेहा को कहानी सुनाते थे आज जयसिंघ सुना रहा है

माजी - आप का बेटा आपकी जगह ले रहा है

पिताजी- मैं खुश हूँ जयसिंघ के लिए

माजी-आपने तो कहा था कि वो बदल जाएगा

पिताजी- मैं ग़लत था

माजी- पहली बार आपको ग़लत देख कर मैं खुश हूँ

पिताजी- मैं भी , जयसिंघ ऐसा ही रहे तो मुझे प्राब्लम नही है

माजी- आपके गिफ्ट तो अभी तक खोले भी नही किसी ने

पिताजी- मेरे बेटे के गिफ्ट तो खोले ना , यही तो चाहिए था मुझे

माजी- जयसिंघ ने आपके पैसे से लिए होंगे ना गिफ्ट

पिताजी- तुम अभी तक समझ नही पाई हो जयसिंघ को , वो मेरा खून है , मुझे लग रहा है कि ये उसकी कमाई के है , तभी तो मेरे प्यार को हरा दिया

माजी- कुछ भी हो ये दीवाली मेरे लिए यादगार रहेगी

पिताजी- वो सिर्फ़ 10 दिन के लिए आया है

माजी- तो क्या हुआ हम 10 दिन दीवाली मनाएँगे

छोटू-10दिन दीवाली

माजी- तू तो सुनते ही खुश हो गया

छोटू- मुझे और पटाखे लेने है

पिताजी- कल तू खुद जाना पटाखे लेने , जितने चाहिए उतने लेना

नीता- आप चुप रहिए , हमे डिस्ट्रब हो रहा है

मा और पिताजी धीरे धीरे बाते करने लगे

नेहा - भैया वहाँ के घर बड़े बड़े होते है

.जयसिंघ- हाँ ,इतने बड़े की सर इतना उपर करना पड़ता है कि दर्द हो जाता है

पूजा- वहाँ हीरोइन देखी आपने

जयसिंघ- वहाँ की हर एक लड़किया हीरोइन होती है

पूजा - सच भैया ,

जयसिंघ- हाँ , वहाँ तो ऐसे गाओं जैसे कपड़े पहनते भी नही है

नीता- वहाँ तो थियेटर भी बड़ा होगा , उस थियेटर मे तो राजेश खन्ना और बड़ा दिखता हॉंगा

जयसिंघ- राजेश खन्ना की दीवानी , वहाँ सब कुछ बड़ा होता है

नेहा - भैया , ठाकुरजी तो कह रहे थे कि शहर3 मे घर बड़े होते है पर उनके दिल छोटे होते है

जयसिंघ-,ऐसा कुछ नही होता है , मुझे जितने लोग मिले है सब अच्छे है , पता है मेरे रूमेट का घर कितना बड़ा है

नीता- कितना बड़ा

जयसिंघ- हमारे इस हॉल जितना उसका बाथरूम है ,

पूजा - कुछ भी , ऐसा नही होता , ठाकुरजी की हवेली इतनी बड़ी है पर बाथरूम छोटा ही है

जयसिंघ- मैं खुद देखा है , और पता है उसके घर मे 2 कार है , इतने नौकर है कि पूछो मत

नेहा - नही पूछते

जयसिंघ-नेहा ऐसा बोला जाता है

नेहा - हमे आपके बारे मे सुनना है आपके फ्रेंड के बारे मे नही

जयसिंघ- सॉरी बाबा, अब बाकी बाते कल करते है

नीता- इतनी जल्दी सो रहे है

जयसिंघ- मैं तो देर से सोता हूँ पर आज थक गया हूँ , अब तो पूरे 10 दिन के लिए आया हूँ

पूजा-नेहा नीता सोने दो भैया को

नेहा - जी दीदी

जतसिंघ- तुम मेरी नेहा होना , इतनी जल्दी पूजा की बात मान कैसे गयी

नेहा- दीदी आपकी तरह हमे छोड़ कर नही गयी , वो हमारे साथ है , उनकी बात तो हम मानेगे ही

जयसिंघ- मैं तो

नेहा- सो जाइए , कल से आपको बहोत प्रश्नल करूँगी

जयसिंघ- इतना परेशान करना कि मैं यहाँ से जाउ ही ना

नीता- मैं तो सो गयी

नेहा- मेरे सपने मे मत आना तू

नीता- तेरा पीछा मैं सपने मे भी नही छोड़ूँगी

जयसिंघ- तुम दोनो की बाते मुझे सब से ज़्यादा याद आती थी

नेहा- और मैं

जयडिनघ- तुझे याद किए बिना कोई दिन गया ही नही

पूजा - नेहा

नेहा - आँखे बंद कर दी है दीदी

नेहा नीता अपने भाई के गले लग कर सो गयी

जैसे उनको डर हो कि सुबह आँखे खुलते ही जयसिंघ चला ना जाए

उनके इस हरकत पे जयसिंघ को प्यार आ गया

पिताजी अपने बच्चों को साथ देख कर खुश हो गये

जयसिंघ जितने दिन घर मे रहता उतने दीवाली होती

पिताजी हवेली भी नही जाते थे , और ना खेत मे जाते थे

दिन भर अपने बच्चों के साथ रहते थे

उनको ज़्यादा से ज़्यादा वक्त देते थे पिताजी

पिताजी के लिए उनके बच्चे कोहिनूर की तरह अनमोल थे

जयसिंघ के आते ही खुशी आ गयी

और जयसिंघ के जाते ही सब की आँखो मे आसू आ गये

जयसिंघ ने फिर से मिलने का वादा किया

इस बार गर्मियो की छुट्टियों मे आएगा

नेहा नीता उसी का इंतज़ार करने लगे

जयसिंघ भी जल्द से जल्द अपनी पढ़ाई ख़तम करना चाहता था .

ताकि वो अपना सपना पूरा कर सके

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कुमार- जयसिंघ जयसिंघ

जयसिंघ- क्या हुआ

कुमार- तू पढ़ाई करते हुए सो गया था

जयसिंघ- (पिछली दीवाली का सपना देख रहा था कितनी मस्ती की थी नेहा और नीता ने , )

कुमार- कहाँ खो गया

अजीत- सपने देख रहा हॉंगा कि बड़ा आदमी बन गया

जयसिंघ- बड़ा आदमी अपने काम से होता है

कुमार- तू फिर सुरू मत होना

अजीत- मैं तो सो रहा हूँ

जयसिंघ- आज के लिए इतनी पढ़ाई काफ़ी है ,

जयसिंघ फिर से दीवाली के सपने देखते हुए सो गया
 
फ्लॅशबॅक 832सी

जयसिंघ अपनी पढ़ाई मे लगा हुआ था

हर साल वो दीवाली मे घर आता

और दीवाली मे बिताए हुए पल के सपने देखता रहता

आज भी ऐसा ही हुआ

जयसिंघ पढ़ाई करते हुए दीवाली के सपने देखने लगा

कुमार ही उसको सपनो से जगाता था

जयसिंघ जब हॉस्टिल मे आया तो वो इस कमरे मे अकेला था

पर बाद मे अजीत और कुमार ने ये रूम जाय्न किया

स्टार्टिंग मे अजीत और कुमार के बिहेवियर से जयसिंघ रूम चेंज करना चाहता था

पर उसने सोचा कि दूसरे रूम.मे भी ऐसे ही लड़के मिले तो क्या वो रूम चेंज करता रहेगा

भले अजीत और कुमार पढ़ाई नही करते थे पर दिल के अच्छे लगे जयसिंघ को

कुमार - रिच फॅमिली से बिलॉंग करता है , इसी शहर3 मे उसकी फॅमिली रहती है , फिर भी वो घर मे रहने की जगह होस्टल मे आ गया , उसका मानना था कि कॉलेज लाइफ ज़ीनी है तो हॉस्टिल मे रह कर ज़ीनी चाहिए , हॉस्टिल के दिन कभी कोई नही भूलता , रिच था तो पास होने का टेन्षन नही था , सेट्टिंग हो जाती थी बस प्रेक्टिकल और असाइनमेंट के लिए जयसिंघ था , जयसिंघ पैसे लेता था और असाइनमेंट लिख कर देता था , ताकि वो अपनी बहनों के लिए गिफ्ट ले सके

अजीत- मिड्ल क्लास फॅमिली का लड़का था ,,इसका सबके जैसा सपना था बिना मेहनत किए रिच बनना , और उसको मिला कुमार , कुमार के पैसे को खुद के पैसे समझ कर उड़ाता था , चड्डी से लेके बनियान तक सब कुमार के दिए हुए थे , कुमार का चमचा था ,

फिर भी तीनो दोस्त बन गये ,

कुमार जयसिंघ स्मार्टनेस से इंप्रेस्ड हुआ था

कुमार इसको कभी डिस्ट्रब नही करता था

शराब पीता तो हॉस्टिल आने की जगह घर चला जाता ,

जयसिंघ को कभी कुमार के बारे मे ज़्यादा पता ही नही चला

कुमार जयसिंघ के सामने हमेशा अच्छा बन कर रहता था

अजीत तो साला कमीना था

एक बार तो नंगी हीरोइन की फोटो देख कर इतना एग्ज़ाइट हो गया था कि जयसिंघ कुमार के सामने मूठ मारने लगा

ऐसे भी कार्टून होते है हॉस्टिल पे

जयसिंघ हर साल कॉलेज मे टॉप करता था

रोज सुबह अपने पिताजी के फोटो का आशीर्वाद लेकर कॉलेज जाता था

उसका एक लक्ष्य था अपना सपना पूरा करना

अपने पिताजी को दिखाना कि वो उनके जैसा है

ये सब तो अलग बात थी

कॉलेज मे तो जयसिंघ बहोत मशहूर था

उसको बहोत सी लड़किया लाइन देती थी

पर जयसिंघ उनकी तरफ देखता भी नही

क्यू की जयसिंघ ने पिताजी को वादा किया था कि वो शादी उनकी मर्ज़ी से करेगा

एक बार तो क्या हो गया

जयसिंघ को क्लास मे देर तक बैठ कर पढ़ाई करने की आदत थी

सब स्टूडेंट जा चुके थे जयसिंघ अकेला रह गया था क्लास मे

तभी उसी क्लास की एक लड़की क्लास मे आई और जतसिंघ के पास बैठ गयी

जयसिंघ को अपनी खूबसूरती से अट्रॅक्ट करने लगी

पर जयसिंघ उसकी तरफ ध्यान भी नही दे रहा था

उस लड़की को गुस्सा आ गया और वो जयसिंघ पर टूट पड़ी

उसको जगह जगह चूमने की कॉसिश करने लगी

जयसिंघ को इस हरकत से गुस्सा आया और उस ने लड़की को धक्का दे दिया

जयसिंघ लड़की पे हाथ कैसे उठाता

वो लड़की ज़मीन पर गिर गयी

और जयसिंघ वहाँ से चला गया

पर वो लड़की तो जयसिंघ के साथ चुदाई करने के इरादे से आई थी

वो नही मिला तो कोई और सही

.और वो रात भर किसी और का बिस्तर गरम करने लगी

दूसरे दिन जयसिंघ को देख कर वो लड़की उसके पास आ गयी

लड़की- तुम नामर्द ही , जो मेरी जैसे खूबसूरत लड़की को ना कहा

जयसिंघ - मैं कितना बड़ा मर्द हूँ वो दिखाने पे आ गया तो 9 महीने पछताती रहोगी

, जयसिंघ- और तुम खूबसूरत हो , इसका ये मतलब नही कि कोई भी तुम पे फिदा हो जाए , तुम खुद एक बार खुद को आयने मे देख लेना पता चल जाएगा कि कल रात तुम क्या बन गयी थी

वो लड़की जयसिंघ की बात सुनते वहाँ से गर्दन नीचे करके चली गयी

जयसिंघ ने ऐसे बहोत से चान्स छोड़ दिए

पिताजी को प्रॉमिस जो दिया था

वरना वो भी भी पिताजी से कुछ कम नही था

पिताजी ने हवेली मे जितने कांड किए ये जयसिंघ को भी पता है

पर जयसिंघ को वो सब पसंद नही था

पिताजी ठाकुरजी के साथ मिलके क्या करते है , मेले मे हवेली पे कैसी पार्टी चलती है ये जयसिंघ को पता था पर वो इन सब से दूर रहता था

जयसिंघ कहीं बार अपने पिताजी को किसी और औरत के साथ देखा था , उसे पता था कि ये सब सालो से चलता आ रहा है , ये बंद नही हो सकता

जयसिंघ कहीं बार अपने पिताजी को किसी और औरत के साथ देखा था , उसे पता था कि ये सब सालो से चलता आ रहा है , ये बंद नही हो सकता

उसे भी एक दिन ये सब करना हॉंगा

पर जयसिंघ ने दूसरा रास्ता सेलेक्ट कर लिया

वो चुदाई से दूर रहता था , उसने सब कुछ अपनी बीवी के साथ करने का सोचा था

इस लिए वो बहोत कम पूजा मे गया , या हवेली मे जाता नही

ये तो हुई गाओं की बात ,

शहर3 मे जयसिंघ सभी टीचर का फेव स्टूडेंट बन गया

हर बार वो टॉप करता

अजीत तो अटकल लगा कर पास होता था

पर कुमार अपने पिता और जयसिंघ की मदद से पास होता था

कुमार ने जयसिंघ से अच्छी दोस्ती कर ली थी

जयसिंघ भी कुमार को बहोत मानने लगा था

कुमार इतना रिच होकर ज़्यादा दिखावा नही करता था

ये बात जयसिंघ को अच्छी लगती थी

कुमार को तो अपना फ्यूचर दिखता था जयसिंघ मे

कुमार ने जयसिंघ को पहले दिन देख कर अपना दोस्त बना लिया था

क्यू की आगे जाकर कुमार आराम की ज़िंदागी बिताना चाहता था

आराम की ज़िंदगी बिताने के लिए वो जयसिंघ का ईस्तमाल कर सकता था

कुमार ने जयसिंघ से उसके सपनो के बारे मे पूछ लिया

कुमार को पता चल गया कि जयसिंघ बड़ा आदमी बनना चाहता है

अपनी कंपनी खोलना चाहता है

जयसिंघ के पास नालेज तो है पर पैसा और पवर नही है

कुमार के पास पैसा और पवर है पर नॉलेज नही है

ऐसे मे कुमार के दिमाग़ मे एक बढ़िया प्लान तय्यार हो गया

कुमार ने जयसिंघ को बढ़िया ऑफर दी
 
ये बात फाइनल एअर की ----->

कुमार- जयसिंघ ये तो आख़िरी साल है अब इतनी पढ़ाई क्यूँ कर रहा है

जयसिंघ- पहले तू बता डेढ़ महीना कहाँ था (कुमार फाइनल एअर का कॉलेज सुरू होने के 45 दिन बाद कॉलेज मे आया था )

कुमार- मैं चेन्नई गया था अपनी बुआ के पास

जयसिंघ- और ये अजीत

कुमार- तुझे तो पता है ये मेरे साथ ही रहता है तो मेरे साथ चेन्नई आ गया था

जयसिंघ- पर कॉलेज सुरू होते ही आना चाहिए था

कुमार- फाइनल एअर है , ये एंजाय करने का एअर होता है और तू है कि पढ़ाई कर रहा है

जयसिंघ- नौकरी भी चाहिए ना ,

कुमार- तुझे कब से नौकरी की ज़रूरत पड़ गयी

जयसिंघ- मैं तेरे जैसा रिच नही हूँ

कुमार- तू रिच है , तेरा दिमाग़ तुझे रिच बना सकता है

जयसिंघ- इसी लिए तो पढ़ाई कर रहा हूँ

कुमार- कर पढ़ाई पर इंजिनियर बनने के बाद क्या करेगा सोचा है

जयसिंघ- बताया ना नौकरी करूँगा

कुमार- कहाँ पे

जयसिंघ- गॉव कंपनी मे

कुमार- गॉव कंपनी मे पैसे खाने का प्लान है

जयसिंघ- मैं ईमानदार हूँ

कुमार- वो मुझे पता है ,

ऐसे कुमार और जयसिंघ की बात होती थी

लास्ट सेमेस्टर की शुरुआत के समय ------>>>>>>

फिर से कौन क्या करेगा इसकी बाते होने लगी

जयसिंघ ने सोच लिया था कि उसे क्या करना है

गॉव जॉब देखेगा

पर कुमार ने कभी बताया नही कि वो क्या करेगा

जयसिंघ- तू क्या करने वाला है

कुमार- सोचा नही है

अजीत- कुमार को कुछ करने की ज़रूरत नही है ,

जयसिंघ- हाँ ,, तू तो अपने पिता जी का बिजनेस चलेगा

कुमार- मुझे उस मर्चेंट के बिज़्नेस मे इंटेरेस्ट नही है

जयसिंघ- तो

कुमार- मैं खुद कुछ करना चाहता हूँ ताकि लोग कहे कि कुमार ने अपने दम पे ये सब किया है , ना कि बाप के पैसे पे , और मेरा बाप , दलाल है , सुनने मे कैसा लगता है लुमर दलाल , ऐसा लगता है कि मैं लड़किया बेचने का काम करता हूँ

जयसिंघ- सुनने मे अच्छा लग रहा है

अजीत- मैं तो तेरी कंपनी मे काम करूँगा

कुमार- फिर तो कंपनी सुरू होते बंद हो जाएगी

अजीत- तुझे पता है मैं कैसे पास होता हूँ ऐसे मे मुझे नौकरी कौन देगा

कुमार- तो मैं अपना नुकसान क्यूँ करूँ तुझे नौकरी दे कर

जयसिंघ- छोटी सी पोस्ट दे देना , वो तेरा दोस्त है

कुमार- तू कह रहा है तो अजीत को पोस्ट दे दूँगा पर तुझे पाटनेर्शिप दूँगा

जयसिंघ- मुझे पाटनेर्शिप ,

कुमार- हम पार्टनर बनेगे

जयसिंघ- मैं समझा नही

कुमार- तेरा दिमाग़ मेरे पैसे

अजीत- और मैं

कुमार- अजीत तू चुप रह कुछ देर

जयसिंघ- मैं ने ऐसा सोचा नही है

कुमार- देख तुझे अपनी कंपनी खोलनी है पर उसके लिए पैसे चाहिए

जयसिंघ- हाँ

कुमार- पर उसके लिए पैसे चाहिए ये , जगह चाहिए ,गॉव मे पहचान चाहिए

जयसिंघ- वो तो है

कुमार- वो मैं देखूँगा , पैसे मेरे दिमाग़ तेरा , बोल क्या बोलता है

जयसिंघ- मुझे सोचने दे

अजीत- जयसिंघ तेरी जगह मैं होता तो हाँ कर देता

कुमार- सोचने दे उसे

जयसिंघ- मैं अपने पिताजी से बात करके बताता हूँ

कुमार- तेरे पिताजी , फिर तो तू भूल जा , वो कभी हाँ नही करेंगे तुझे पता है

जयसिंघ- फिर भी पिताजी से बात करूँगा

कुमार- मेरे पास टाइम नही है क्यूँ कि मेरे पिताजी मेरे पीछे लगे हुए है कि उनकी बिज़्नेस जाय्न करूँ , दलाली वाला

जयसिंघ- पर कंपनी सुरू कहाँ करेंगे

कुमार- इसी शहर3 मे

जयसिंघ- यहाँ , फिर तो मुश्किल है

कुमार-मुश्किल क्या है

जयसिंघ- पिताजी मुझे इजाज़त नही देंगे

कुमार- तो भूल जा अपने सपने को

जयसिंघ- नही यार , सपना तो पूरा करना ही है पर पिताजी हाँ कर देते तो

कुमार- (कुमार किसी भी कीमत पे जयसिंघ को खोना नही चाहेगा , जयसिंघ डायमंड है ) उनको मत बता ,

जयसिंघ- पर मैं यहा रहूँगा तो वो पूछेंगे तो

कुमार- कितने लोग यहाँ नौकरी करते है और छुट्टी मे गाओं जाते है तू भी जाना

जयसिंघ- फिर भी पिताजी इजाज़त नही देंगे

कुमार- (जयसिंघ को कैसे मना लूँ) तेरी प्राब्लम इतनी है ना कि तुझे गाओं मे रहना है

जयसिंघ- मैं कहीं भी रह सकता हूँ बस पिताजी की इजाज़त लेनी है

कुमार- देख , यहाँ हम एक कंपनी खोलेंगे , तेरा दिमाग़ मेरे पैसे , और सब अच्छा हुआ , कंपनी अच्छी चलने लगी तो हमे कंपनी की ब्रांच निकालनी पड़ेंगी

जयसिंघ- वो तो निकालनी पड़ेंगी

कुमार- तो हम तेरे गाओं के पास दूसरी ब्रांच निकालेंगे , फिर हमारे पास दो कंपनी होंगी , एक मैं संभालूँगा और दूसरी तू संभालना अपने गाओं के पास वाली अपने गाओं मे रह कर

जयसिंघ- ये तो बढ़िया आइडिया है , इसके लिए तो पिताजी तय्यार हो जाएँगे (गाओं के लोगो को काम भी मिल जाएगा )

कुमार- तो बोल क्या कहता है

जयसिंघ- मुझे मंज़ूर है पर पिताजी से बात करूँगा

कुमार- अभी मत कर , 1 साल बाद करना , जब कंपनी स्टार्ट होंगी

जयसिंघ- ऐसा नही कर सकता मैं

कुमार- देख दूसरी ब्रांच खोलने को 6 7 साल लग जाएँगे ये तुझे भी पता है तब तक तुझे यही रुकना हॉंगा , तब तक तुम्हारे पिताजी इजाज़त नही देंगे पर एक बार कंपनी स्टार्ट हो गयी तो इजाज़त मिल जाएगी

जयसिंघ- मैं अपने पिताजी से झूठ नही बोल सकता

कुमार- तेरा सपना पूरा हॉंगा , तू गाओं मे रहेगा , कंपनी से तेरा गाओं डेविप्लोड हो जाएगा

जयसिंघ- पर

कुमार- देख ज़्यादा देर हो गयी तो प्राब्लम होंगी , मेरे पिताजी ने मुझे बुला लिया तो तेरा सपना कभी पूरा नही हॉंगा

जयसिंघ- पर

कुमार- एक साल की बात है बाद मे बता देना अपने पिताजी को , कौन सा पिताजी अपने बेटे की तरक्की से खुश नही हॉंगा

जयसिंघ- मुझे सोचने दे

अजीत- कुमार मुझे पार्टनर बना ले

कुमार- तू चुप रह

अजीत - यही तेरी दोस्ती है

कुमार- 2% का पार्टनर बनाउन्गा अब चुप रह

अजीत- चल जाएगा मुझे

कुमार- जयसिंघ क्या सोचा है तुमने

जयसिंघ- मुझे कुछ देर अकेला रहने दो

कुमार- अजीत चल मेरे साथ

कुमार अजीत को लेकर बाहर घूमने चला गया

और जयसिंघ सोचने लगा कि उसे क्या करना है
 
फ्लॅशबॅक 832 डी

जयसिंघ कुमार की ऑफर के बारे मे सोचने लगा

कुमार की ऑफर जयसिंघ को अच्छी लगने लगी थी

खुद की कंपनी होगी तो सपने जल्दी पूरे हो जाएँगे

जयसिंघ ने सोचा था कि 8 10 साल वो नौकरी करेगा

फिर जो पैसे जमा होंगे उनसे कंपनी शुरू करेगा

फिर जाके वो अपना सपना पूरा करेगा

पर सपना पूरा करने के बाद भी उसको पैसे लगेंगे

और उन पैसो के लिए कुमार की ऑफर बेस्ट लग रही थी जयसिंघ को

जयसिंघ के 8 10 साल बच रहे थे

नौकरी करने की जगह सीधा कंपनी मे पाटनेर्शिप मिल रही है

पर इसके लिए उसे शहर3 मे रहना होगा

जयसिंघ ने तो सिर्फ़ पढ़ाई शहर3 मे करनी है ऐसा बोला था पिताजी को

अब पिताजी इजाज़त नही देंगे

शहर3 मे रहने की तो बिल्कुल ही नही

पिताजी उसको वापस बुला लेंगे

मैं क्या करूँ

एक तरफ मेरा सपना और दूसरी तरफ पिताजी

मैं पिताजी को दर्द नही दे सकता

पिताजी चाहते है कि मैं गाँव आकर रहूं

कुमार ने कहा कि हम.मेरे गाँव के पास कंपनी की ब्रांच खोलेंगे

मतलब गाँव वालो को उस कंपनी मे काम मिलेगा

गाँव की तरक्की होगी

इस से तो पिताजी खुश होंगे

पर अभी तो उनको दर्द होगा

क्या करूँ कुछ समझ नही आ रहा है

कुमार की ऑफर अच्छी है

खुद की कंपनी खोलना मुश्किल होता है

कुमार तो फरिश्ते जैसा मिला मिला है मुझे

कुमार ने खुद मुझे ऑफर दी है

उसकी ऑफर मे मेरा ही फ़ायदा होगा

गाँव मे कंपनी खुलेगी तो गाँव वालो का फ़ायदा होगा

एक साल बाद पिताजी को बता दिया तो वो नाराज़ हो जाएँगे कि मैं ने झूठ कहा है

पर पता तो करना ही होगा

एक बार कंपनी चलने लगी तो सब कुछ ठीक हो जाएगा

पिताजी भी मेरी बात समझ जाएँगे

उनको मैं समझा दूँगा कि मैं ये सब क्यूँ कर रहा हूँ

मैं ये अपने लिए नही कर रहा हूँ

ये सब मैं अपने फॅमिली और अपने गाँव के लिए कर रहा हूँ

अभी ये सब समझना मुश्किल होगा

पर धीरे धीरे जब पिताजी समझ जाएँगे तो उनको मुझपे गर्व महसूस होगा

अब तक पिताजी ने बहुत मेहनत की है

दिन रात खेतो ने काम किया है

अब उनके आराम करने का समय आ गया है

अब मैं काम करूँगा और पिताजी आराम करेंगे

मैं पिताजी को शहर3 लेकर आउन्गा

उनको राजा की तरह रखूँगा

उनको जो चाहिए वो दूँगा

उनको जो कभी मिला नही है वो दूँगा

मैं अपनी बहनों को खूब पढ़ाउंगा

डॉक्टर टीचर बना दूँगा

उनकी लाइफ बदल दूँगा

उनकी खुद की पहचान होगी

उनको प्रिन्सेस की तरह रखूँगा

उनको जो चाहिए वो दूँगा ,

पूजा को हर रोज नया ड्रेस दूँगा पहनने को

नेहा नीता को जितनी आइस क्रीम खानी है उतनी दूँगा

छोटू को कलेक्टर बना दूँगा

छोटू की पढ़ाई मैं खुद लूँगा

गाँव मे रह कर छोटू कैसा बन गया है

पर मैं छोटू का फ्यूचर खेतो मे काम करते हुए काटने नही दूँगा

छोटू मेरा भाई है उसे मुझसे भी बड़ा ऑफीसर बना दूँगा

माँ और पिताजी को राजा रानी की तरह रखूँगा

उनके चारो तरफ नौकरो की लाइन लगा दूँगा

उनके एक इशारे पे उनके मनपसंद चीज़ हाज़िर हो जाएँगी

उन सबको मैं यहाँ लेकर आउन्गा

मुझे अपने सपने पूरे करने के लिए कुमार की ऑफर मान नी होगी

कुमार ने कहा है कि गाँव मे ब्रांच ओपन करेगा

तब मैं पिताजी को वापस गाँव मे लेकर जाउन्गा

हम बाद मे गाँव मे शिफ्ट ही जाएँगे

छोटू और पूजा नेहा नीता की पढ़ाई तक हम शहर 3 मे रहेंगे

सब कुछ कितना अच्छा होगा सब खुश हो जाएँगे

कुमार ने मुझे पाटनेर्शिप देने की बात कही है

वो 50% तो नही देगा

पर जितना भी दे मैं धीरे धीरे अपनी मेहनत से शेयर बढ़ा दूँगा

मैं उस कंपनी पे अपना खून पसीना लगा दूँगा

मैं एक साल बाद पिताजी को बात दूँगा

झूठ अच्छा हो तो बोलने मे डरना नही चाहिए

कुमार को हाँ कर देता हूँ

जयसिंग इधर सोच रहा था

उधर अजीत और कुमार बाते कर रहा था

कुमार- क्या सोच रहा है

अजीत-मुझे सिर्फ़ 2 %

कुमार- 2% दूँगा

अजीत-मैं तेरा दोस्त हूँ

कुमार- तभी तो 2% दे रहा हूँ

अजीत-तू जयसिंघ से मुझे कम मत समझ , जितना जयसिंघ पढ़ाई मे स्मार्ट है उतना मैं दूसरे काम मे स्मार्ट हूँ

कुमार- तभी तो 2% दे रहा हूँ

अजीत-भूल गया मैं ने तेरी मदद की थी

कुमार- कंपनी अच्छे से स्टार्ट होते तेरे शेयर बढ़ा दूँगा

अजीत-फिर देखना वर्कर से मैं कैसे काम करवाता हूँ

कुमार- वो तो तुझे ही करना

अजीत-फिर देखना वर्कर से मैं कैसे काम करवाता हूँ

कुमार- वो तो तुझे ही करना है

अजीत-फिर तू क्या करेगा , और जयसिंघ को ही क्यूँ पार्टनर बना रहा है

कुमार- ये सब मैं ने पहले ही सोच रखा था जब जयसिंह को देर रात तक पढ़ाई करते हुए देखा था , वो बहुत टॅलेंटेड है , वो अगर मेरी कंपनी मे काम करेगा तो मैं शहर3 का सबसे रिच आदमी बन जाउन्गा और वो भी कम समय मे

अजीत-तेरे तो मज़े होंगे

कुमार- तेरे भी

अजीत-वैसे तू जयसिंघ को कितने की पाटनेर्शिप देगा

कुमार- 20% की

अजीत-बस इतनी है

कुमार- यहाँ दिमाग़ से ज़्यादा पैसा चलता है क्या समझा

अजीत-बाद मे जयसिंघ का दिमाग़ भारी पड़ गया तो

कुमार- वो बाद की बात है , अगर बात बिगड़ गयी तो तू कौन और मैं कौन , क्या समझा , पार्टनरशिप टूट जाती है पर मैं टूटने नही दूँगा , जयसिंघ कोहिनूर डाईमेंड है

अजीत-यस बॉस

कुमार- ये बात उसको बताना मत

अजीत-तेरा चमचा बन कर रहूँगा ,

कुमार- फिर तो हमारा साथ कभी टूटेगा नही , चल अब जयसिंघ से बात करते है

कुमार अजीत जयसिंघ के पास आ गये

कुमार- जयसिंघ क्या सोचा है

जयसिंघ-पार्टनरशिप कितने की मिलेंगी

कुमार- ये हुई ना बात

जयसिंघ-बता पहले

कुमार- तेरे 20% और अजीत के 2% बाकी मेरे

जयसिंघ-ये कम है

कुमार- .मेरे बाप को पता चला कि पार्टनरशिप मे कंपनी स्टार्ट की है तो मुझे बाहर निकाल देंगे

जयसिंघ-बाद मे तेरे पिताजी ने प्राब्लम क्रियेट की तो

कुमार- पेपर बना लेंगे

जयसिंघ-और दूसरी ब्रांच गाँव मे निकालेंगे

कुमार- सब ठीक रहा तो वो भी हो जाएगा

जयसिंघ-कंपनी किस की होगी

कुमार- इलोक्त्रॉनिक गूड्स

जयसिंघ-मैं भी यही सोच रहा था

कुमार- तो पार्टनर चले कंपनी देखने

जयसिंघ-क्या मतलब

कुमार- एक पुरानी कंपनी खरीद ली है

जयसिंघ-व्हाट

कुमार- वो कंपनी एलेक्ट्रॉनिक्स गूड्स की थी वहाँ आग लग गयी तो सस्ते मिल गयी

जयसिंघ-तूने तो सब सोच रखा है

कुमार- जल्दी कंपनी मे मशीन आ जाएँगी

जयसिंघ-फिर तो काम मे लग जाना होगा

कुमार- एग्ज़ॅम होते हम काम मे लग जाएँगे तब तक पेपर भी तयार हो जाएगा

जयसिंघ-चलो साइट देख कर आते है

और फिर शुरू हुआ जयसिंघ का नया सफ़र

जयसिंघ और कुमार अजीत की कंपनी स्टार्ट हो गयी

जयसिंघ ने पिताजी को ये बताया कि उसके एक साल और पढ़ाई मे लग जाएगा उसको प्रॉजेक्ट का काम करना है

पिताजी को इस मे कुछ पता नही था

ऐसे मे जयसिंघ ने कहा तो पिताजी ने इजाज़त दे दी

पिताजी को लग रहा था कि जयसिंघ अब पढ़ाई ख़तम करके गाँव वापस आ जाएगा

जयसिंघ अपनी नयी कंपनी के काम मे लग गया

अपनी सारी पढ़ाई लगा कर जयसिंघ कंपनी को चलाने मे लगा रहा था

शुरुआत मे कुमार भी काम कर रहा था

पिताजी को इस बात का पता नही था

कंपनी स्टार्ट होते जयसिंघ ने खुद के लिए घर खरीद लिया

जैसा उसने सोचा था वैसा ही हो रहा था

उसको शहर3 की आराम की ज़िंदगी की आदत लग गयी

ऐशो आराम , रंगीन दुनिया मे जयसिंघ ने कदम रख लिया

बड़े बड़े लोगो से सामना होते जयसिंघ भी उनकी तरह बन गया

कॉलेज मे था तब तक जयसिंघ खुद की पहचान भुला नही

पर कंपनी के शुरू होते वो धीरे अपनी पहचान खो रहा था

दिन रात जयसिंघ कंपनी के कामो मे लगा रहता देर रात तक जो पढ़ाई करता था वो अब पार्टी मे रात बिताने लगा

इन सब की आदत जयसिंघ को लग रही थी

जयसिंघ को ये सब अच्छा लग रहा था

वो तो अब हमेशा के लिए अपने पिताजी अपनी फॅमिली को यही लेकर आना चाहता था

शहर3 मे जो जयांघ को मिल रहा था उसके सामने गाँव की खूबसूरती बेरंग दिख रही थी

एक साल मे जयसिंघ मे बहुत बदलाव आ गया

पर अभी तक जयसिंघ पूरी तरह से खुद को भुला नही था

वो एक साल होते गाँव जाने को तय्यार हो गया था

सबको शहर3 लाने के लिए जयसिंघ गाँव जा रहा था
 
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