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फ्लॅशबॅक 1064
जयसिंघ को.जब पता चला कि कुमार ग़लत था और नेहा जो कह रही थी वो सच था
तो जयसिंघ ने अजीत कुमार की जोरदार पिटाई की
इतना मारा कि दोनो की हालत पतली हो गयी
जयसिंघ के मारने के बाद कुमार और अजीत दर्द के वजह से तडप रहे थे.
कुमार-मैं जयसिंघ को छोड़ूँगा नही.
अजीत-छोड़ना भी मत ,मेरे लंड की हालत खराब कर दी
कुमार-मादरचोद की जान ले लूँगा. ऐसा क्या किया जो इस तरह मारा. इसका बदला तो मैं लेके रहूँगा.
अजीत-जयसिंघ को सब पता चल गया है
कुमार-जयसिंघ हमे कुछ करे उस से पहले हमे उसको मारना होगा.
अजीत-हाँ.नही तो वो अपना हिस्सा माँग लेगा. हमे बर्बाद कर देगा.
कुमार-ऐसे कैसे बर्बाद कर देगा. हमे बर्बाद करने से पहले उसकी जान ले लेंगे. अभी मेरे खास आदमी को फोन करके उसको मारने को
कहता हूँ.
अजीत-ऐसे तो हम मुसीबत मे फस जाएँगे
कुमार-तो तू ही बता
अजीत-उसका आक्सिडेंट करवाते है जिस से हम पे कोई शक नही करेगा.
कुमार-लेकिन वो गया कहाँ होगा.
अजीत-अपने गाँव जा रहा है. उसके गाँव जाने से पहले उड़ा दे
कुमार-ये सही रहेगा.उसके घर वाले उसका साथ भी नही देते जिस से हम पे कोई शक नही करेगा.
कुमार ने अपने आदमी को फोन करके बता दिया कि जयसिंघ की कार उसके शहर आ रही है .उसे उड़ा दे
कुमार ने जैसा कहा उस ड्राइवर ने वैसा ही किया.
जयसिंघ की कार को ऐसी टक्कर मारी कि वो दोनो बच नही सकते थे .
पर पहली टक्कर जोरदार लगी.पर दोनो मरे नही , जयसिंघ और शालिनी जिंदा थे
वो ड्राइवर ने ट्रक रोक दिया और कार के पास आया जब उसने देखा कि जयसिंघ ज़िंदा है तो वो ट्रक से दूसरी टक्कर मारने वाला था पर वहाँ दूसरी गाडिया आते ही वो वहाँ से चला गया
यही पर उस ड्राइवर ने ग़लती की. ड्राइवर को दूसरी टक्कर मारने के बारे में सोचते समय एक औरत ने देख लिया था.
वो औरत इस बात से डर गयी पर जब उसे पता चला कि मरने वाला योगेन्द्र का बेटा है तो उसने योगेंद्रसिंघ को सब बता दिया.
जैसे ही उस औरत के पास योगेंद्रसिंघ के आदमी पूछने आए कि यहाँ जयसिंघ का आक्सिडेंट हुआ क्या इस बारे में उसे पता है , उस औरत को पता चला की मरने वाला योगेंद्रसिंघ का बेटा है तो उसने उस दिन जो देखा वो सब बता दिया
पिताजी को ये बात पता चलते ही पिताजी ने अपने आदमी को उस ड्राइवरको ढूँढने के लिए लगा लिया
जैसे हुलिया उस औरत ने बताया वैसे ट्रक और ड्राइवर को ढूँढने मे लग गये
उस औरत ने ड्राइवर को ढूँढने का काम आसान कर दिया था
पिताजी को लगा कि ड्राइवर ने डर की वजह से ऐसा किया होगा पर ,जब पता चला कि ये कुमार ने किया है तो पिताजी ने कुमार को मार डाला.
--------->>>>>>>>><<<<<<<<<------
कुमार को जो मौत दी पिताजी वो दर्दनाक थी
पिताजी पागलो की तरह हंस रहे थे कुमार की लाश देख कर
रोते हुए जयसिंघ को बता रहे थे कि उसके हत्यारे को मार डाला है
कुमार को मारने के बाद पिताजी उसे फिर भी बेल्ट से मारते हुए जयसिंघ से बाते कर रहे थे.
अजीत कुमार के घर मे आ चुका था.
कुमार की बीवी की लाश देख कर अजीत समझ गया कि कुछ तो गड़बड़ है.
अजीत कुमार को आवाज़ देने वाला था कि नौकरानी डरते हुए अजीत के पास आई .और अजीत को बताया कि कुमार उपर है.
ये भी बताया कि एक आदमी साब को मारने उपर गया है
नौकरी कुमार की चीखे सुनकर इतनी डर गयी कि उसने पोलीस को भी नही बताया
बस छुप कर बैठ थी कि कोई उसे ना मारे
पर अजीत के आते ही नौकरानी से सब कुछ बता दिया
अजीत ने दूसरा चाकू उठा लिया और उपर कुमार को बचाने के लिए चला गया.
अजीत के आने तक काफ़ी देर हो चुकी थी. पिताजी ने कुमार को मार दिया था.
अजीत कमरे के अंदर का नज़ारा देख कर डर गया.
अजीत जयसिंघ के पिताजी को देखते ही समझ गया कि जयसिंघ के पिताजी को सब पता चल गया होगा.
अजीत वहाँ से जाने वाला था कि उसकी नज़र गेट के पास पड़ी हुई गन पर गयी.
अजीत जयसिंघ के पिताजी से बच नही सकता था ऐसे मे अजीत ने पिताजी को गन से मारने का सोचा.
अजीत ने गन उठा ली और कुमार के जैसी ग़लती नही की.
अजीत भले ही पढ़ाई मे होशियार ना हो पर उसे इतना पता था कि दुनिया मे कैसे रहा जाता है
कुमार पिताजी के पेट पर गोली मार कर समझा कि पिताजी मर गये
पर अजीत ऐसी ग़लती नही करने वाला था
अजीत बिना पिताजी को पता लगे गोली चलाने का सोच रहा था
अगर पिताजी को पता चला कि अजीत गन लेकर उसके पीछे पड़ा है तो उसकी हालत भी कुमार जैसी होंगी
अजीत ने पिताजी की पीठ पे गोली चलाना सही समझा.
अजीत ने पूरी गन पिताजी के उपर खाली कर दी.
अजीत ने दिमाग़ लगाते हुए बिना पिताजी को कुछ पता चले गोली मारनी सुरू की
पिताजी कुछ रिक्ट कर पाते उस से पहले अजीत ने सारी गन खाली कर दी
पता नही कहाँ कहाँ पिताजी को गोली लगी
गोली लगते ही पिताजी वही पर गिर गये.
इतनी गोलिया लगने के बाद अजीत को लगा कि पिताजी मर गये है.
पिताजी को ज़मीन पर पड़ा हुआ देख कर अजीत को लगा कि अब वो बच जाएगा
अजीत वहाँ से जाने वाला था कि उसी नज़र तिजोरी पे गयी.
अजीत के पास कंपनी के शेयर कम थे जिस से उसके पास ज़्यादा पैसे नही थे.
जयसिंघ और कुमार की डेत के बाद कोई ना कोई रिस्तेदार ज़रूर आएगा कंपनी का हिस्सा माँगने
ऐसे मे अजीत ने तिजोरी लूटने का सोचा उसके दिमाग़ मे कुछ चल रहा था ,
अजीत ने तिजोरी मे रखे हुए सारे पैसे ,ज्वेलरी बॅग मे डाल दी.
और जाने के लिए पलट रहा था कि पिताजी उसके सामने खून मे लत्पथ खड़े हो गये
अजीत की तो जान हलक तक आ गयी.
पिताजी ने पूरी ताक़त लगा दी खड़े होने मे
अजीत पैसे देख कर ये भूल गया कि पिताजी उसी कमरे मे है
पिताजी ने अपने मज़बूत हाथो से अजीत की गर्दन पकड़ ली.
6 फुट के पिताजी ने 5 फुट के अजीत को गर्दन पकड़ कर हवा मे उठा लिया
अजीत पिताजी के हाथो से निकलने की कोशिश कर रहा था.
अजीत अपने हाथ पैर पटक रहा था
ऐसा लग रहा था कि अजीत को फासी दे रहे है
पर पिताजी के हाथो से निकलना मुश्किल था.
ऐसे मे कुमार ने पिताजी के पेट मे जो गोली मारी थी उसपे अजीत ने मुक्का मारा.
क्यूँ कि अजीत ने जितनी गोलिया मारी थी वो पीछे से मारी थी
कुमार की मारी वाली गोली का घाव थोड़ी देर पहले हुआ था जिस से वहाँ दर्द ज़्यादा होने वाला था
दर्द की वजह से पिताजी के हाथ ढीले पड़ गये
पिताजी पीछे पीछे सरक रहे थे. उनके आँख के सामने अंधेरा छा रहा था.
अजीत ने इसी का फ़ायदा उठाते हुए पिताजी पे बॅग से हमला किया
पिताजी अगर अच्छी हालत मे होते तो अजीत को वही मार डालते
पिताजी बॅग के वार से पीछे गिरते हुए खिड़की से नीचे गिर गये.
पिताजी खिड़की से नीचे गिर गये
अजीत ने खुद को छुड़ा लिया और नीचे आ गया.
अजीत ने पहली बार दिमाग़ से काम नही लिया. इन सब का शक सीधा उसी पे जाने वाला था.पर शायद उसने कुछ सोचा होगा
अजीत के सामने पैसे थे ऐसे मे उसके दिमाग़ ने काम करना बंद किया.
अजीत ने नीचे आकर नौकरानी को चाकू से मार दिया ताकि किसी को पता ना चले,, और वो अपनी स्टोरी पोलीस को बता सके
अजीत सारे पैसे लेकर पता नही क्या करने का सोच रहा था. अजीत अपनी कार मे बैठ कर वहाँ से जाने लगा.
अजीत के गेट क्रॉस करते ही ठाकुर की कार वहाँ आ गयी.
ठाकुर ने अजीत को भागते हुए देख लिया.
अजीत ने भी देख लिया कि उसको किसी ने देख लिया है , ऐसे मे अब भागने का ही सोच रहा था
ठाकुर ने अंदर जाके देखा तो नौकरानी तडप रही थी.
ठाकुर ने नौकरानी से पूछा तो उसने सब कुछ बता दिया.
और नौकरानी मर गयी
ठाकुर भागते हुए उपर गया .उपर सिर्फ़ कुमार की लाश थी. पिताजी कहीं दिख नही रहे थे.
ठाकुर इधर उधर देख रहे कि उनकी नज़र तिजोरी पे गयी जहाँ से पैसे चुराए गये थे
ठाकुर समझ गये कि कुमार की ऐसी हालत पिताजी कर सकते है. और अजीत ने इसका फ़ायदा उठा कर तिजोरी साफ की.
पर ठाकुरजी को पिताजी कही दिखाई नही दिए
पिताज़ा का बेल्ट ठाकुरजी ने पहचान लिया
पिताजी कहाँ है
ऐसे ने उनकी नज़रें टूटी हुई खिड़की पे गयी
ठाकुरजी ने खिड़की से देखा तो पिताजी को नीचे पड़ा हुआ देखा
पिताजी को ऐसा हालत मे खून से लटपथ देखते ही ठाकुर जी ने वही से नीचे जंप मार दी
जयसिंघ को.जब पता चला कि कुमार ग़लत था और नेहा जो कह रही थी वो सच था
तो जयसिंघ ने अजीत कुमार की जोरदार पिटाई की
इतना मारा कि दोनो की हालत पतली हो गयी
जयसिंघ के मारने के बाद कुमार और अजीत दर्द के वजह से तडप रहे थे.
कुमार-मैं जयसिंघ को छोड़ूँगा नही.
अजीत-छोड़ना भी मत ,मेरे लंड की हालत खराब कर दी
कुमार-मादरचोद की जान ले लूँगा. ऐसा क्या किया जो इस तरह मारा. इसका बदला तो मैं लेके रहूँगा.
अजीत-जयसिंघ को सब पता चल गया है
कुमार-जयसिंघ हमे कुछ करे उस से पहले हमे उसको मारना होगा.
अजीत-हाँ.नही तो वो अपना हिस्सा माँग लेगा. हमे बर्बाद कर देगा.
कुमार-ऐसे कैसे बर्बाद कर देगा. हमे बर्बाद करने से पहले उसकी जान ले लेंगे. अभी मेरे खास आदमी को फोन करके उसको मारने को
कहता हूँ.
अजीत-ऐसे तो हम मुसीबत मे फस जाएँगे
कुमार-तो तू ही बता
अजीत-उसका आक्सिडेंट करवाते है जिस से हम पे कोई शक नही करेगा.
कुमार-लेकिन वो गया कहाँ होगा.
अजीत-अपने गाँव जा रहा है. उसके गाँव जाने से पहले उड़ा दे
कुमार-ये सही रहेगा.उसके घर वाले उसका साथ भी नही देते जिस से हम पे कोई शक नही करेगा.
कुमार ने अपने आदमी को फोन करके बता दिया कि जयसिंघ की कार उसके शहर आ रही है .उसे उड़ा दे
कुमार ने जैसा कहा उस ड्राइवर ने वैसा ही किया.
जयसिंघ की कार को ऐसी टक्कर मारी कि वो दोनो बच नही सकते थे .
पर पहली टक्कर जोरदार लगी.पर दोनो मरे नही , जयसिंघ और शालिनी जिंदा थे
वो ड्राइवर ने ट्रक रोक दिया और कार के पास आया जब उसने देखा कि जयसिंघ ज़िंदा है तो वो ट्रक से दूसरी टक्कर मारने वाला था पर वहाँ दूसरी गाडिया आते ही वो वहाँ से चला गया
यही पर उस ड्राइवर ने ग़लती की. ड्राइवर को दूसरी टक्कर मारने के बारे में सोचते समय एक औरत ने देख लिया था.
वो औरत इस बात से डर गयी पर जब उसे पता चला कि मरने वाला योगेन्द्र का बेटा है तो उसने योगेंद्रसिंघ को सब बता दिया.
जैसे ही उस औरत के पास योगेंद्रसिंघ के आदमी पूछने आए कि यहाँ जयसिंघ का आक्सिडेंट हुआ क्या इस बारे में उसे पता है , उस औरत को पता चला की मरने वाला योगेंद्रसिंघ का बेटा है तो उसने उस दिन जो देखा वो सब बता दिया
पिताजी को ये बात पता चलते ही पिताजी ने अपने आदमी को उस ड्राइवरको ढूँढने के लिए लगा लिया
जैसे हुलिया उस औरत ने बताया वैसे ट्रक और ड्राइवर को ढूँढने मे लग गये
उस औरत ने ड्राइवर को ढूँढने का काम आसान कर दिया था
पिताजी को लगा कि ड्राइवर ने डर की वजह से ऐसा किया होगा पर ,जब पता चला कि ये कुमार ने किया है तो पिताजी ने कुमार को मार डाला.
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कुमार को जो मौत दी पिताजी वो दर्दनाक थी
पिताजी पागलो की तरह हंस रहे थे कुमार की लाश देख कर
रोते हुए जयसिंघ को बता रहे थे कि उसके हत्यारे को मार डाला है
कुमार को मारने के बाद पिताजी उसे फिर भी बेल्ट से मारते हुए जयसिंघ से बाते कर रहे थे.
अजीत कुमार के घर मे आ चुका था.
कुमार की बीवी की लाश देख कर अजीत समझ गया कि कुछ तो गड़बड़ है.
अजीत कुमार को आवाज़ देने वाला था कि नौकरानी डरते हुए अजीत के पास आई .और अजीत को बताया कि कुमार उपर है.
ये भी बताया कि एक आदमी साब को मारने उपर गया है
नौकरी कुमार की चीखे सुनकर इतनी डर गयी कि उसने पोलीस को भी नही बताया
बस छुप कर बैठ थी कि कोई उसे ना मारे
पर अजीत के आते ही नौकरानी से सब कुछ बता दिया
अजीत ने दूसरा चाकू उठा लिया और उपर कुमार को बचाने के लिए चला गया.
अजीत के आने तक काफ़ी देर हो चुकी थी. पिताजी ने कुमार को मार दिया था.
अजीत कमरे के अंदर का नज़ारा देख कर डर गया.
अजीत जयसिंघ के पिताजी को देखते ही समझ गया कि जयसिंघ के पिताजी को सब पता चल गया होगा.
अजीत वहाँ से जाने वाला था कि उसकी नज़र गेट के पास पड़ी हुई गन पर गयी.
अजीत जयसिंघ के पिताजी से बच नही सकता था ऐसे मे अजीत ने पिताजी को गन से मारने का सोचा.
अजीत ने गन उठा ली और कुमार के जैसी ग़लती नही की.
अजीत भले ही पढ़ाई मे होशियार ना हो पर उसे इतना पता था कि दुनिया मे कैसे रहा जाता है
कुमार पिताजी के पेट पर गोली मार कर समझा कि पिताजी मर गये
पर अजीत ऐसी ग़लती नही करने वाला था
अजीत बिना पिताजी को पता लगे गोली चलाने का सोच रहा था
अगर पिताजी को पता चला कि अजीत गन लेकर उसके पीछे पड़ा है तो उसकी हालत भी कुमार जैसी होंगी
अजीत ने पिताजी की पीठ पे गोली चलाना सही समझा.
अजीत ने पूरी गन पिताजी के उपर खाली कर दी.
अजीत ने दिमाग़ लगाते हुए बिना पिताजी को कुछ पता चले गोली मारनी सुरू की
पिताजी कुछ रिक्ट कर पाते उस से पहले अजीत ने सारी गन खाली कर दी
पता नही कहाँ कहाँ पिताजी को गोली लगी
गोली लगते ही पिताजी वही पर गिर गये.
इतनी गोलिया लगने के बाद अजीत को लगा कि पिताजी मर गये है.
पिताजी को ज़मीन पर पड़ा हुआ देख कर अजीत को लगा कि अब वो बच जाएगा
अजीत वहाँ से जाने वाला था कि उसी नज़र तिजोरी पे गयी.
अजीत के पास कंपनी के शेयर कम थे जिस से उसके पास ज़्यादा पैसे नही थे.
जयसिंघ और कुमार की डेत के बाद कोई ना कोई रिस्तेदार ज़रूर आएगा कंपनी का हिस्सा माँगने
ऐसे मे अजीत ने तिजोरी लूटने का सोचा उसके दिमाग़ मे कुछ चल रहा था ,
अजीत ने तिजोरी मे रखे हुए सारे पैसे ,ज्वेलरी बॅग मे डाल दी.
और जाने के लिए पलट रहा था कि पिताजी उसके सामने खून मे लत्पथ खड़े हो गये
अजीत की तो जान हलक तक आ गयी.
पिताजी ने पूरी ताक़त लगा दी खड़े होने मे
अजीत पैसे देख कर ये भूल गया कि पिताजी उसी कमरे मे है
पिताजी ने अपने मज़बूत हाथो से अजीत की गर्दन पकड़ ली.
6 फुट के पिताजी ने 5 फुट के अजीत को गर्दन पकड़ कर हवा मे उठा लिया
अजीत पिताजी के हाथो से निकलने की कोशिश कर रहा था.
अजीत अपने हाथ पैर पटक रहा था
ऐसा लग रहा था कि अजीत को फासी दे रहे है
पर पिताजी के हाथो से निकलना मुश्किल था.
ऐसे मे कुमार ने पिताजी के पेट मे जो गोली मारी थी उसपे अजीत ने मुक्का मारा.
क्यूँ कि अजीत ने जितनी गोलिया मारी थी वो पीछे से मारी थी
कुमार की मारी वाली गोली का घाव थोड़ी देर पहले हुआ था जिस से वहाँ दर्द ज़्यादा होने वाला था
दर्द की वजह से पिताजी के हाथ ढीले पड़ गये
पिताजी पीछे पीछे सरक रहे थे. उनके आँख के सामने अंधेरा छा रहा था.
अजीत ने इसी का फ़ायदा उठाते हुए पिताजी पे बॅग से हमला किया
पिताजी अगर अच्छी हालत मे होते तो अजीत को वही मार डालते
पिताजी बॅग के वार से पीछे गिरते हुए खिड़की से नीचे गिर गये.
पिताजी खिड़की से नीचे गिर गये
अजीत ने खुद को छुड़ा लिया और नीचे आ गया.
अजीत ने पहली बार दिमाग़ से काम नही लिया. इन सब का शक सीधा उसी पे जाने वाला था.पर शायद उसने कुछ सोचा होगा
अजीत के सामने पैसे थे ऐसे मे उसके दिमाग़ ने काम करना बंद किया.
अजीत ने नीचे आकर नौकरानी को चाकू से मार दिया ताकि किसी को पता ना चले,, और वो अपनी स्टोरी पोलीस को बता सके
अजीत सारे पैसे लेकर पता नही क्या करने का सोच रहा था. अजीत अपनी कार मे बैठ कर वहाँ से जाने लगा.
अजीत के गेट क्रॉस करते ही ठाकुर की कार वहाँ आ गयी.
ठाकुर ने अजीत को भागते हुए देख लिया.
अजीत ने भी देख लिया कि उसको किसी ने देख लिया है , ऐसे मे अब भागने का ही सोच रहा था
ठाकुर ने अंदर जाके देखा तो नौकरानी तडप रही थी.
ठाकुर ने नौकरानी से पूछा तो उसने सब कुछ बता दिया.
और नौकरानी मर गयी
ठाकुर भागते हुए उपर गया .उपर सिर्फ़ कुमार की लाश थी. पिताजी कहीं दिख नही रहे थे.
ठाकुर इधर उधर देख रहे कि उनकी नज़र तिजोरी पे गयी जहाँ से पैसे चुराए गये थे
ठाकुर समझ गये कि कुमार की ऐसी हालत पिताजी कर सकते है. और अजीत ने इसका फ़ायदा उठा कर तिजोरी साफ की.
पर ठाकुरजी को पिताजी कही दिखाई नही दिए
पिताज़ा का बेल्ट ठाकुरजी ने पहचान लिया
पिताजी कहाँ है
ऐसे ने उनकी नज़रें टूटी हुई खिड़की पे गयी
ठाकुरजी ने खिड़की से देखा तो पिताजी को नीचे पड़ा हुआ देखा
पिताजी को ऐसा हालत मे खून से लटपथ देखते ही ठाकुर जी ने वही से नीचे जंप मार दी