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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 1064

जयसिंघ को.जब पता चला कि कुमार ग़लत था और नेहा जो कह रही थी वो सच था

तो जयसिंघ ने अजीत कुमार की जोरदार पिटाई की

इतना मारा कि दोनो की हालत पतली हो गयी

जयसिंघ के मारने के बाद कुमार और अजीत दर्द के वजह से तडप रहे थे.

कुमार-मैं जयसिंघ को छोड़ूँगा नही.

अजीत-छोड़ना भी मत ,मेरे लंड की हालत खराब कर दी

कुमार-मादरचोद की जान ले लूँगा. ऐसा क्या किया जो इस तरह मारा. इसका बदला तो मैं लेके रहूँगा.

अजीत-जयसिंघ को सब पता चल गया है

कुमार-जयसिंघ हमे कुछ करे उस से पहले हमे उसको मारना होगा.

अजीत-हाँ.नही तो वो अपना हिस्सा माँग लेगा. हमे बर्बाद कर देगा.

कुमार-ऐसे कैसे बर्बाद कर देगा. हमे बर्बाद करने से पहले उसकी जान ले लेंगे. अभी मेरे खास आदमी को फोन करके उसको मारने को

कहता हूँ.

अजीत-ऐसे तो हम मुसीबत मे फस जाएँगे

कुमार-तो तू ही बता

अजीत-उसका आक्सिडेंट करवाते है जिस से हम पे कोई शक नही करेगा.

कुमार-लेकिन वो गया कहाँ होगा.

अजीत-अपने गाँव जा रहा है. उसके गाँव जाने से पहले उड़ा दे

कुमार-ये सही रहेगा.उसके घर वाले उसका साथ भी नही देते जिस से हम पे कोई शक नही करेगा.

कुमार ने अपने आदमी को फोन करके बता दिया कि जयसिंघ की कार उसके शहर आ रही है .उसे उड़ा दे

कुमार ने जैसा कहा उस ड्राइवर ने वैसा ही किया.

जयसिंघ की कार को ऐसी टक्कर मारी कि वो दोनो बच नही सकते थे .

पर पहली टक्कर जोरदार लगी.पर दोनो मरे नही , जयसिंघ और शालिनी जिंदा थे

वो ड्राइवर ने ट्रक रोक दिया और कार के पास आया जब उसने देखा कि जयसिंघ ज़िंदा है तो वो ट्रक से दूसरी टक्कर मारने वाला था पर वहाँ दूसरी गाडिया आते ही वो वहाँ से चला गया

यही पर उस ड्राइवर ने ग़लती की. ड्राइवर को दूसरी टक्कर मारने के बारे में सोचते समय एक औरत ने देख लिया था.

वो औरत इस बात से डर गयी पर जब उसे पता चला कि मरने वाला योगेन्द्र का बेटा है तो उसने योगेंद्रसिंघ को सब बता दिया.

जैसे ही उस औरत के पास योगेंद्रसिंघ के आदमी पूछने आए कि यहाँ जयसिंघ का आक्सिडेंट हुआ क्या इस बारे में उसे पता है , उस औरत को पता चला की मरने वाला योगेंद्रसिंघ का बेटा है तो उसने उस दिन जो देखा वो सब बता दिया

पिताजी को ये बात पता चलते ही पिताजी ने अपने आदमी को उस ड्राइवरको ढूँढने के लिए लगा लिया

जैसे हुलिया उस औरत ने बताया वैसे ट्रक और ड्राइवर को ढूँढने मे लग गये

उस औरत ने ड्राइवर को ढूँढने का काम आसान कर दिया था

पिताजी को लगा कि ड्राइवर ने डर की वजह से ऐसा किया होगा पर ,जब पता चला कि ये कुमार ने किया है तो पिताजी ने कुमार को मार डाला.

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कुमार को जो मौत दी पिताजी वो दर्दनाक थी

पिताजी पागलो की तरह हंस रहे थे कुमार की लाश देख कर

रोते हुए जयसिंघ को बता रहे थे कि उसके हत्यारे को मार डाला है

कुमार को मारने के बाद पिताजी उसे फिर भी बेल्ट से मारते हुए जयसिंघ से बाते कर रहे थे.

अजीत कुमार के घर मे आ चुका था.

कुमार की बीवी की लाश देख कर अजीत समझ गया कि कुछ तो गड़बड़ है.

अजीत कुमार को आवाज़ देने वाला था कि नौकरानी डरते हुए अजीत के पास आई .और अजीत को बताया कि कुमार उपर है.

ये भी बताया कि एक आदमी साब को मारने उपर गया है

नौकरी कुमार की चीखे सुनकर इतनी डर गयी कि उसने पोलीस को भी नही बताया

बस छुप कर बैठ थी कि कोई उसे ना मारे

पर अजीत के आते ही नौकरानी से सब कुछ बता दिया

अजीत ने दूसरा चाकू उठा लिया और उपर कुमार को बचाने के लिए चला गया.

अजीत के आने तक काफ़ी देर हो चुकी थी. पिताजी ने कुमार को मार दिया था.

अजीत कमरे के अंदर का नज़ारा देख कर डर गया.

अजीत जयसिंघ के पिताजी को देखते ही समझ गया कि जयसिंघ के पिताजी को सब पता चल गया होगा.

अजीत वहाँ से जाने वाला था कि उसकी नज़र गेट के पास पड़ी हुई गन पर गयी.

अजीत जयसिंघ के पिताजी से बच नही सकता था ऐसे मे अजीत ने पिताजी को गन से मारने का सोचा.

अजीत ने गन उठा ली और कुमार के जैसी ग़लती नही की.

अजीत भले ही पढ़ाई मे होशियार ना हो पर उसे इतना पता था कि दुनिया मे कैसे रहा जाता है

कुमार पिताजी के पेट पर गोली मार कर समझा कि पिताजी मर गये

पर अजीत ऐसी ग़लती नही करने वाला था

अजीत बिना पिताजी को पता लगे गोली चलाने का सोच रहा था

अगर पिताजी को पता चला कि अजीत गन लेकर उसके पीछे पड़ा है तो उसकी हालत भी कुमार जैसी होंगी

अजीत ने पिताजी की पीठ पे गोली चलाना सही समझा.

अजीत ने पूरी गन पिताजी के उपर खाली कर दी.

अजीत ने दिमाग़ लगाते हुए बिना पिताजी को कुछ पता चले गोली मारनी सुरू की

पिताजी कुछ रिक्ट कर पाते उस से पहले अजीत ने सारी गन खाली कर दी

पता नही कहाँ कहाँ पिताजी को गोली लगी

गोली लगते ही पिताजी वही पर गिर गये.

इतनी गोलिया लगने के बाद अजीत को लगा कि पिताजी मर गये है.

पिताजी को ज़मीन पर पड़ा हुआ देख कर अजीत को लगा कि अब वो बच जाएगा

अजीत वहाँ से जाने वाला था कि उसी नज़र तिजोरी पे गयी.

अजीत के पास कंपनी के शेयर कम थे जिस से उसके पास ज़्यादा पैसे नही थे.

जयसिंघ और कुमार की डेत के बाद कोई ना कोई रिस्तेदार ज़रूर आएगा कंपनी का हिस्सा माँगने

ऐसे मे अजीत ने तिजोरी लूटने का सोचा उसके दिमाग़ मे कुछ चल रहा था ,

अजीत ने तिजोरी मे रखे हुए सारे पैसे ,ज्वेलरी बॅग मे डाल दी.

और जाने के लिए पलट रहा था कि पिताजी उसके सामने खून मे लत्पथ खड़े हो गये

अजीत की तो जान हलक तक आ गयी.

पिताजी ने पूरी ताक़त लगा दी खड़े होने मे

अजीत पैसे देख कर ये भूल गया कि पिताजी उसी कमरे मे है

पिताजी ने अपने मज़बूत हाथो से अजीत की गर्दन पकड़ ली.

6 फुट के पिताजी ने 5 फुट के अजीत को गर्दन पकड़ कर हवा मे उठा लिया

अजीत पिताजी के हाथो से निकलने की कोशिश कर रहा था.

अजीत अपने हाथ पैर पटक रहा था

ऐसा लग रहा था कि अजीत को फासी दे रहे है

पर पिताजी के हाथो से निकलना मुश्किल था.

ऐसे मे कुमार ने पिताजी के पेट मे जो गोली मारी थी उसपे अजीत ने मुक्का मारा.

क्यूँ कि अजीत ने जितनी गोलिया मारी थी वो पीछे से मारी थी

कुमार की मारी वाली गोली का घाव थोड़ी देर पहले हुआ था जिस से वहाँ दर्द ज़्यादा होने वाला था

दर्द की वजह से पिताजी के हाथ ढीले पड़ गये

पिताजी पीछे पीछे सरक रहे थे. उनके आँख के सामने अंधेरा छा रहा था.

अजीत ने इसी का फ़ायदा उठाते हुए पिताजी पे बॅग से हमला किया

पिताजी अगर अच्छी हालत मे होते तो अजीत को वही मार डालते

पिताजी बॅग के वार से पीछे गिरते हुए खिड़की से नीचे गिर गये.

पिताजी खिड़की से नीचे गिर गये

अजीत ने खुद को छुड़ा लिया और नीचे आ गया.

अजीत ने पहली बार दिमाग़ से काम नही लिया. इन सब का शक सीधा उसी पे जाने वाला था.पर शायद उसने कुछ सोचा होगा

अजीत के सामने पैसे थे ऐसे मे उसके दिमाग़ ने काम करना बंद किया.

अजीत ने नीचे आकर नौकरानी को चाकू से मार दिया ताकि किसी को पता ना चले,, और वो अपनी स्टोरी पोलीस को बता सके

अजीत सारे पैसे लेकर पता नही क्या करने का सोच रहा था. अजीत अपनी कार मे बैठ कर वहाँ से जाने लगा.

अजीत के गेट क्रॉस करते ही ठाकुर की कार वहाँ आ गयी.

ठाकुर ने अजीत को भागते हुए देख लिया.

अजीत ने भी देख लिया कि उसको किसी ने देख लिया है , ऐसे मे अब भागने का ही सोच रहा था

ठाकुर ने अंदर जाके देखा तो नौकरानी तडप रही थी.

ठाकुर ने नौकरानी से पूछा तो उसने सब कुछ बता दिया.

और नौकरानी मर गयी

ठाकुर भागते हुए उपर गया .उपर सिर्फ़ कुमार की लाश थी. पिताजी कहीं दिख नही रहे थे.

ठाकुर इधर उधर देख रहे कि उनकी नज़र तिजोरी पे गयी जहाँ से पैसे चुराए गये थे

ठाकुर समझ गये कि कुमार की ऐसी हालत पिताजी कर सकते है. और अजीत ने इसका फ़ायदा उठा कर तिजोरी साफ की.

पर ठाकुरजी को पिताजी कही दिखाई नही दिए

पिताज़ा का बेल्ट ठाकुरजी ने पहचान लिया

पिताजी कहाँ है

ऐसे ने उनकी नज़रें टूटी हुई खिड़की पे गयी

ठाकुरजी ने खिड़की से देखा तो पिताजी को नीचे पड़ा हुआ देखा

पिताजी को ऐसा हालत मे खून से लटपथ देखते ही ठाकुर जी ने वही से नीचे जंप मार दी
 
फ्लॅशबॅक 1065

ठाकुरजी मीना के साथ कुमार के घर आ गये

कुमार के घर आते ही अजीत को कार से बाहर जाते हुए ठाकुरजी ने देख लिया

अजीत का इस तरह भाग कर जाना ठाकुरजी को शक पैदा करा रहा था

ठाकुरजी ने देखा कि वॉचमन गेट के पास बेहोश पड़ा था

ठाकुरजी बिना वक्त गवाए घर के अंदर आ गये मीना के साथ

हॉल मे दो औरतो की लाश दिखी ठाकुरजी को

दोनो को चेक किया तो नौकरानी ज़िंदा थी

नौकरानी ने बता दिया कि यहाँ क्या हुआ

और ठाकुरजी उसे बचा पाएँ इस से पहले वो मर गयी

मीना लाश देख कर कुछ बोल नही पाई

ठाकुरजी बिना देर किए उपर कुमार के बेडरूम.मे भाग गये

कुमार के बेडरूम मे आते ही कुमार की लाश देख कर ठाकुरजी की हालत खराब हो गयी

ठाकुरजी समझ गये कि ये पिताजी का गुस्सा है

ठाकुरजी पिताजी को ढूँढने लगे उनको आवाज़ दे रहे थे पर कोई फ़ायदा नही हुआ

पिताजी का बेल्ट यहीं है मतलब पिताजी यही होंगे

और अजीत के भागने से ठाकुरजी को डर लग रहा था कि अजीत ने कुछ किया तो नही पिताजी के साथ

.तभी ठाकुरजी की नज़र खिड़की पे गयी जो टूट गयी थी

ठाकुरजी ने खिड़की मे आकर देखा तो नीचे पिताजी खून से लटपथ पड़े हुए थे

ठाकुरजी ये देख नही पाए और वही से जंप मार दी

और नीचे आकर ठाकुरजी पिताजी को देखने लगे.

पिताजी की सासे अभी तक चल रही थी.

इतना कुछ हो गया फिर भी पिताजी ज़िंदा थे

पर पिताजी को चोट बहुत आई थी

पता नही अजीत की कितनी गोलिया पिताजी को लगी थी

ठाकुरजी ने पिताजी को उठा लिया और अपनी कार मे डाल दिया.

ठाकुरजी ने मीना को आवाज़ दी. मीना भागते हुए बाहर आ गयी.

ठाकुरजी ने मीना को कार मे बैठा दिया और अपने दोस्त डॉक्टर के पास ले गये

ठाकुरजी की पहचान एंपी एमएलए तक थी. उनके काफ़ी दोस्त थे.

ठाकुरजी पिताजी को.लेकर उनके दोस्त डॉक्टर के पास गये

.ठाकुरजी के दोस्त ने तुरंत ओप्रेशन स्टार्ट कर दिया

ठाकुरजी ने पूरी बात अपने कमिश्नर दोस्त को बता दी. कमिश्नर ठाकुर के अहसानो के नीचे दबा हुआ था.

ठाकुरजी ने एक बार कमिशनर की मदद की थी , फिर वो बदली होकर शहर3 आ गया

कमिश्नर ने ठाकुरजी की वजह से सब संभाल लिया.

उसने पिताजी को इन सब से दूर रखा.

वॉचमन को पैसे दे कर उसे चश्मदीद गवाह बना लिया.

कुमार , उसकी बीवी, नौकरानी के मर्डर का गुनाह अजीत पे लगाया गया.

अजीत कुछ कर पाता उस से पहले वो खुद फस गया

इस लिए वो वहाँ से भाग गया

अजीत ने पैसो के लिए मर्डर किया है.और उसे फरार घोसित कर दिया.

ठाकुर ने अजीत और उसकी बीवी को पकड़ कर अपने कब्ज़े मे रखा.

जो पैसे थे वो कमिश्नर को दिए ताकि केस क्लोज़ हो जाए.

ठाकुर पिताजी को अपने दोस्त के क्लिनिक मे ले गये .

जहाँ पर पिताजी का ऑपरेशन सुरू हो गया.

पिताजी ने ठाकुर जी की जान बचाई थी ऐसे मे ठाकुर पिताजी को कैसे भी करके बचाना चाहते थे.

पिताजी की ऐसी हालत देख कर मीना के आसू सुख गये.

मीना और ठाकुरजी ऑपरेशन रूम की तरफ देखने लगे.

ठाकुर को तकलीफ़ मे देखते हुए उनके दोस्त डॉक्टर ने पूरी जी जान लगा दी पिताजी को बचाने के लिए.

डॉक्टर ने अपना पूरा एक्सपीरियेन्स लगा दिया.और पिताजी को बचा लिया.

ठाकुर-कैसा है योगेंद्र

ठाकुरजी पहली बार रो रहे थे

डॉक्टर-उनको बचा तो लिया है ,पर वो जिंदा लाश बन गये है.एक गोली सर मे एक गोली गले को छु कर गयी थी और बाकी गोलिया शरीर

के अलग अलग जगह लगी थी , अगर ये होश मे आ गये तो कभी बोल नही पाएँगे , और इनका बॅकबोन भी डेमेज हो गया

ये सुनते की पिताजी जिंदा है ठाकुर एक पल के लिए खुश हो गये पर पिताजी के जिंदा लाश बन ने की खबर सुन कर रोने लगे.

मीना भी रो रही थी. पर उसने हिम्मत नही हारी.

पिताजी के बाद उसी को घर संभालना था.

ठाकुर और मीना 1 हफ्ते तक उसी हॉस्पिटल मे रहे.

ठाकुर डॉक्टर से पूछ रहे थे कि पिताजी ठीक तो हो जाएगा ना.

डॉक्टर की तरफ से नेगेटिव रिप्लाइ मिला.

ठाकुर ने भी हार नही मानी ,वो दूसरे डॉक्टर से पूछ रहे थे.

सभी ने कहा कि पिताजी बच गये ये भगवान का चमत्कार है.

ठाकुर ने किसी को इसके बारे में नही बताया.

मीना ने सोच लिया कि सब को बताएँगे कि उची बिल्डिंग से गिर गये.

मीना की बात ठाकुर को सही लगी.

ठाकुर ने अजीत को पकड़ लिया था

और अपने आदमियो से पिटाई भी करवाई थी

फिर ठाकुरजी अजीत को लेकर हॉस्पिटल मे आ गया.

अजीत की हालत ठाकुर के शिकारी कुत्तो ने खराब कर दी थी.

ठाकुर ने अजीत को अपने कुत्तों के समान डाला था.

कुत्ते धीरे धीरे अजीत का काट कर खा रहे थे.

पर ठाकुर ने अजीत को मरने नही दिया. उसे तड़पाने के बाद योगेंद्रसिंघ के सामने लेकर आ गये

ठाकुर ने पिताजी के हाथ मे गन दी. और पिताजी का हाथ पकड़ कर अजीत के सीने मे6 की 6 गोलिया खाली की.

ठाकुर ने पिताजी के हाथो अजीत को मौत दी.

पिताजी की ऐसी हालत करने वाले को ठाकुर ने मौत के घाट उतार दिया.

अजीत की बीवी को रंडी खाने फेक दिया.

अजीत की बीवी भी अजीत के साथ मिली हुई थी. ऐसे मे उसको भी सज़ा मिलनी थी.

कुमार की बीवी बिना वजह अपने पति की वजह से मर गयी.

सुमन उधर काफ़ी परेशान थी. ना पिताजी की खबर मिली और ना मीना की

सुमन सबको क्या जवाब देती.

सब पिताजी के बारे में पूछ रहे थे.

सुमन काफ़ी घबरा गयी थी. उसे किसी अनहोनी होने का डर लग रहा था.

पर अच्छा हुआ कि ठकुराइन ने आकर सब संभाल लिया

ऐसे मे 1 हफ्ते से उपर को गया ,

पर पिताजी और मीना की कोई खास खबर नही आई
 
फ्लॅशबॅक 1066

नेहा 1

जयसिंघ और शालिनी के चले जाने के बाद नेहा कन्फ्यूज़ थी

नेहा जब भी अवी को देखती तो उसको अपने भैया के साथ अपनी भाभी भी दिखाई देती

जिसकी वजह से नेहा प्यार और नफ़रत के बीच मे फसि हुई थी

नेहा कभी अवी को प्यार करने लग जाती तो कभी भैया का ख़याल दिमाग़ मे आते ही अवी से नफ़रत करने लगती

नेहा ने जयसिंघ को माफ़ किया कि नही ये वही जानती थी

आख़िरी बार अगर जयसिंघ और नेहा की मुलाकात हो जाती तो अच्छा रहता

पर ये हो नही सका

नेहा को प्यार और नफ़रत के बेवॅंडर से निकालने की कॉसिश पिताजी ने की

नेहा की शालिनी की कसम दे कर अवी के लिए उसके दिल की नफ़रत कम कर दी पर ख़तम हो गयी ये कह नही सकते थे

नेहा ने अपने पिताजी को खुश रखने के लिए अवी मे शालिनी भाभी की देखना सुरू किया

नेहा भी अवी की माँ बन गयी

सुमन और नेहा दोनो मिलके अवी का ख़याल रखने लगे

पिताजी इस बात से खुश थे कि नेहा पिछली बातों को भूल कर नयी शुरुआत कर रही है

सब कुछ ठीक चल रहा था

पर लगता है नेहा की खुशी और भगवान मे कोई दुश्मनी हो

शालिनी को गये हुए साल से उपर हो गया था

नेहा के दिल मे अवी के लिए प्यार बढ़ने लगा था

लेकिन नेहा की किस्मत मे कुछ और लिख था

अचानक मीना कुछ दिन के लिए गायब हो गयी

मीना और पिताजी कुछ दिन के लिए गायब हो गये

पिताजी का इस तरह बिना बताए जाने से नेहा परेशान रहने लगी

नेहा को पिताजी की चिंता सताने लगी

नेहा को कुछ भी अच्छा नही लग रहा था

लेकिन पिताजी गये कहाँ , और मीना को क्यूँ लेकर गये

नेहा को साथ लेकर जाते

पिताजी और मीना को गये हुए काफ़ी दिन हो गये

सब सुमन से पूछने लगे कि अचानक पिताजी और मीना कहाँ गये है

सुमन को इतना पता था कि मीना पिताजी को ढूँढने गयी है

पर उसके बाद मीना की कोई खबर ही नही मिली

सुमन को समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे

सुमन किसी को बता भी नही सकती

और क्या बताती , पिताजी को ढूँढने मीना गयी है , फिर तो नेहा सुमन की जान ले लेती , उस से इतनी बड़ी बात छुपाने के वजह से

सुमन भी अंजान बनकर मीना और पिताजी का इंतज़ार कर रही थी

सुमन की क्या हालत हुई होंगी ये उसे ही पता है

पिताजी को क्या हुआ होगा , मीना अब तक आई क्यूँ नही , सब ठीक तो है ना

इधर पूरे घर को जवाब देते देते सुमन थक गयी थी

छोटू तो पोलीस मे जाने की बात कर रहा था

पोलीस का नाम सुनते ही सुमन डर गयी

इधर नेहा ने पूरा घर सर पे उठा लिया था

पिताजी को बिना बताए जाने क्यूँ दिया इस के लिए नेहा सुमन सीमा और छोटू पे गुस्सा हो रही थी

नेहा की बात सब चुप चाप सुन रहे थे उस से बात करने की हिम्मत किसी मे नही थी

पूजा और नीता नेहा को समझा रही थी कि पिताजी आ जाएँगे

पर सबको डाउट होने लगा कि मीना क्यूँ गायब है

नेहा - मैं पूछ रही हूँ पिताजी को बिना पूछे जाने क्यूँ दिया तुमने

सुमन- नेहा मुझे पता होता कि ऐसा होगा तो कभी जाने नही देती पिताजी को

नेहा- ऐसे संभाला जाता है घर को ,

सुमन क्या बोलती

नेहा - इतने दिन हो गये और तुम्हें कुछ पता नही है पिताजी के बारे में , तुम सब कर क्या रहे थे , जो पिताजी का ख़याल नही रख पाए

छोटू- नेहा , मुझे लगा हमेशा की तरह पिताजी गाँव मे घूमने गये है

नेहा- तू तो बोल ही मत , सब तेरे वजह से हुआ है

सीमा- नेहा पिताजी आ जाएँगे

नेहा- क्या आ जाएँगे , आज 3 दिन हो गये पिताजी को गये हुए ,

नीता- पिताजी के साथ मीना है ना

नेहा - मीना है तो कोई खबर क्यूँ नही पिताजी की तुम सब के पास

पूजा- नेहा शांत रहो ऐसे गुस्सा होने से कुछ नही होगा

नेहा- तो क्या ऐसे हाथ पे हाथ रख कर बैठने पिताजी आ जाएँगे

सुमन- मीना है ना पिताजी के साथ , वो पिताजी का ध्यान रखेगी

नेहा- अगर पिताजी को कुछ हुआ तो मैं तुम सब को छोड़ूँगी नही

नीता- नेहा अब बस भी कर , देख कोमल और कविता तुम्हारे गुस्सा करने से डर गयी है

पूजा- सीमा बच्चो को अंदर लेकर जाओ

सीमा सबके बच्चो को अपने कमरे मे ले गयी

नेहा - नीता , कहाँ होंगे पिताजी

नेर्ता- पिताजी को कुछ नही होगा , तू टेन्षन मत ले मीना है ना उनके साथ

नेहा- सुमन मुझे सच सच बता , तुझे सच मे नही पता कि पिताजी और मीना कहाँ है

सुमन- , मुझे पता होता तो बता देती , मुझे नही पता कि पिताजी और मीना कहाँ है

नेहा- कहाँ जा सकते है पिताजी , हमे पोलीस के पास जाना चाहिए

पोलीस का नाम सुनते सुमन के पसीने निकलने लगे

पूजा- हमे ठाकुरजी से बात करनी चाहिए

नेहा- हाँ, ठाकुरजी से बात करते है , उनको पता होता है पिताजी के बारे में

नीता- अगर उनको पता नही होगा तो वो पता लगा सकते है

नेहा - तू सही कह रही है नीता , हमे हवेली जाना चाहिए

पूजा- चलो सब चलते है

ठकुराइन- कहाँ जाने की बात हो रही है

और ठकुराइन मेसेज लेकर आई

पूजा- हम आपके पास ही आ रहे थे

ठकुराइन- मेरे पास ,, क्यूँ क्या हुआ , और ये नेहा रो क्यूँ रही है

नेहा- 3 दिन हो गये और पिताजी की कोई खबर नही है हमारे पास

सुमन ने आँख से इशारा करके ठकुराइन से पूछा कि कोई खबर मिली

ठकुराइन-तो इसमे रोने वाली क्या बात है

नेहा- ठाकुरजी कहाँ है , आप अकेली क्यूँ आई है

ठकुराइन- मैं तुम्हारे आसू रोकने आई हूँ

पूजा- क्या मतलब

ठकुराइन- तुम्हारे पिताजी के बारे में बताने आई हूँ

ये सुनते सुमन रिलॅक्स हो गयी

नेहा - पिताजी कहाँ है आपको पता है

.ठकुराइन-ये तो नही पता , पर इतना पता है तुम्हारे पिताजी , ठाकुरजी और मीना के साथ है

पूजा- ठाकुरजी के साथ है , सुमन तुम्हें पता था

सुमन क्या बोलती ,

सुमन ने सिर्फ़ ना मे गर्दन घुमाई

नीता- पिताजी ठाकुरजी के साथ है तो मीना क्यूँ है उनके साथ

नेहा- पिताजी ठीक है ना

ठकुराइन- ये सवाल क्यूँ पूछ रही हो

नेहा- 2 दिन से अजीब अजीब सपने आ रहे है मुझे

ठकुराइन-मेरी बात हुई है ठाकुरजी से , वो कह रहे थे कि नेहा को बता दूं कि उसके पिताजी उनके साथ है , और मीना तुम्हारे पिताजी का

पूरा ख़याल रख रही है

नेहा- मीना और ठाकुरजी है पिताजी के साथ , पर वो किस काम से गये है

ठकुराइन- और कुछ पूछ पाती उस से पहले फोन कट हो गया

पूजा- नेहा अब तो रोना बंद कर दे , देख पिताजी के साथ ठाकुरजी है , उनका ख़याल रखने के लिए मीना है

नीता- पर मीना क्यूँ गयी ,

ठकुराइन- ये तो आने के बाद पता चलेगा ,

नेहा- आप सच बोल रही है ना

ठकुराइन- मुझे झूठ बोलके क्या मिलेगा , और ये भी कहा था कि वो जल्दी आ जाएँगे तब तक नेहा का ख़याल रखना

पूजा- नेहा देख अब तू रोएगी तो पिताजी को बुरा लगेगा , अब रोना बंद कर दे

नेहा ने रोना बंद किया और ठकुराइन से बात करने लगी

पूजा- सुमन ठकुराइन के लिए कुछ खाने के लिए बनाओ

सुमन- अभी बनाती हूँ

और ठाकुरजी ने फोन करके ठकुराइन को इस लिए बताया कि उनको पता था कि उनके इस तरह गायब रहने से नेहा परेशान होंगी

नेहा के लिए ठाकुरजी ने झूठ कहा

वहाँ क्या हुआ पिताजी जे साथ इस बात सब अंजान थे

पता नही मीना किस तरह खुद को संभालते हुए पिताजी के ठीक होने की दुआ कर रही होंगी

मीना किस तरह सबको बताएगी कि पिताजी के साथ ये सब क्या हुआ

कुछ बाते छुपाई जानी अच्छी होती है

कुछ बाते क्लियर नही करनी चाहिए

ये पिताजी ने कहा था

अब मीना सच बताएगी या झूठ बताएगी ये देखना होगा

क्यूँ कि सच कहा था तो शालिनी के मर्डर से शुरुआत करनी होंगी

और नेहा इतने बड़े झटके सहन नही कर पाएगी

मीना और ठाकुरजी किसको सच बताएँगे और किसे झूठ ये देखना होगा

क्यूँ कि मीना जैसी सच को बर्दास्त करने वाली नेहा सुमन नीता पूजा नही है

उनके लिए ये सच जानने का सही समय नही है

सुमन भी अब रिलॅक्स हो गयी क्यूँ कि मीना की खबर जो मिली है

वरना 3 दिन से सुमन को नींद नही आई थी

हर दिन सोच मे पड़ जाती कि पिताजी के साथ क्या हुआ होगा और क्या

मीना अब तक वापस क्यूँ नही आई

पर अब सबको यकीन हो गया था कि पिताजी ठीक है
 
फ्लॅशबॅक 1067

ठकुराइन ने आकर सुमन को बचा लिया

ठकुराइन ने बताया कि सब ठीक है

पर ये नही बताया कि वो कहा है किस लिए गये , मीना क्यूँ गयी है

नेहा को इन सवालो से कुछ नही करना था

नेहा को इतना यकीन था कि ठाकुरजी पिताजी के साथ है तो पिताजी को कुछ नही होगा

नेहा को जो बुरे सपने आ रहे थे वो बेवजा थे

नेहा को जिस जवाब का इंतज़र था वो मिल गया

पर नीता को अब भी कुछ बातों पे शक हो रहा था कि मीना क्यूँ गयी है

पिताही और ठाकुरजी ऐसे कई बार साथ मे बाहर जाते है

फिर मीना क्यूँ गयी है

नीता को अंदर ही अंदर ये सवाल परेशान कर रहा था

पर नीता नेहा को खुश देख कर कुछ नही बोली

सुमन ठाकुरजी के फोन आने से रिलॅक्स हुई

पर सुमन को पता नही थी

उसे पूरी बात अभी पता नही थी

अगर सब ठीक है तो मीना वापस क्यूँ नही आई

सुमन भी अंदर ही अंदर परेशान थी

पर सुमन को मीना पे विश्वास था कि इसके होते हुए सब ठीक हो जाएगा

ठकुराइन के एक वर्ड ने सबकी परेशानी ख़तम की

ऐसे मे नेहा और सुमन फिर से अवी की देखभाल मे लग गयी

सुमन का एक मन मीना के बारे में सोच रहा था और दूसरा अवी के

इसी चक्कर मे सुमन के हाथो ग़लतिया हो रही है

नेहा- सुमन ये क्या कर रही हो , कितना नमक डाला है खाने मे

सुमन- नमक ज़्यादा हो गया

नेहा- ये खाना खाने लायक नही रहा इतना नमक है

सुमन- मैं दूसरा खाना बना देती हूँ

नेहा- सुमन तेरा ध्यान कहाँ है , कुछ दिन से तू कोई काम ठीक से नही कर रही है

सुमन- पता नही

नेहा- क्या बात है , कुछ परेशानी होंगी तो मुझे बताओ

सुमन- कुछ दिन आराम कर लूँगी तो ठीक हो जाउन्गी

नेहा- हाँ , तू कुछ दिन अवी के बारे में सोचना बंद कर दे , मैं हूँ अवी के पास ,

सुमन- मुझे भी यही लग रहा है, वैसे अब अवी काफ़ी हद तक ठीक हो गया है

नेहा- मुझे तो लगता है कुछ हफ़्तो मे अवी खेलने हँसने लग जाएगा

सुमन- ऐसा हुआ तो घुटनो के बाल मंदिर जाकर पूजा करूँगी

नेहा- अवी अब जल्दी ठीक हो जाएगा , हमारी मेहनत रंग लाई

सुमन- मुझसे ज़्यादा तो तूने अवी को प्यार दे कर ठीक कर दिया है

नेहा- अच्छा , और वो रात भर अवी के लिए कौन जाग रही थी

सुमन- वो तो ,

नेहा- अवी तेरी वजह से ठीक हो रहा है

सुमन- नही , अवी हम दोनो का बेटा है

नीता- और हमारा क्या , हमे तो भूल गयी तुम दोनो

पूजा- और नही तो क्या , तो अवी हम सब का बेटा है

सुमन- पिताजी जब आएँगे और अवी को नॉर्मल हालत ने देखेंगे तो कितने खुश हो जाएँगे

नेहा- हाँ , बस अब पिताजी आ जाए , तो अवी उनको देख कर उनके गले लग जाएगा

सुमन- वो दिन अब जल्दी आएगा

यहा सब खुश थे

क्यूँ कि अवी अब ठीक होने के लास्ट स्टेज पर था

सुमन और नेहा के प्यार ने अवी को ठीक कर दिया

सुमन और नेहा मे अवी के अंदर नयी जान फुक दी

जब पिताजी आएँगे और अवी को देखेंगे तो खुशी के मारे नाचने लग जाएँगे

पर उनको ये नही पता था कि पिताजी के साथ क्या हुआ है

ये नेचर भी खूब खेल खेलता है

अब तक एक दादाजी अपनेपोते के साथ खेलने के लिए उसके ठीक होने की दुआ कर रहे थे

और अब अवी ठीक हो रहा है तो दादाजी कोमा मे चले गये

अब दादाजी ने बेड पकड़ लिया

पिताजी मरते मरते बच गये

शायद उनकी इक्षा पूरी होनी जो बाकी थी

अवी ठीक हो रहा है तो पिताजी के साथ ये हादसा हो गया

जब ये बात नेहा को पता चलेगी तो क्या होगा

जब दादाजी के बारे में अवी को पता चलेगा तो क्या होगा

फिर से एक मनहूस खबर सबको सुनाई देने वाली थी

फिर से इस घर पे दुखो की छाया छाने वाली है

फिर से इस घर मे हसी की जगह रोने की आवाज़ सुनाई देगी

ये झटका कौन कितना बर्दास्त कर पता है वो देखना होगा

मीना तो गहरी सोच मे डूबी हुई थी

ठाकुरजी की वजह से पिताजी की जान तो बच गयी

पर पिताजी की जो हालत हो गयी है उसे देख कर नेहा मीना की जान ले लेगी

पिताजी को बड़ी मुश्किल से बचाया गया

पर पिताजी को इस घटना की वजह से बहुत चोट लगी थी

पिताजी ज़िंदा तो बच गये पर अब वो बेड से कभी उठ नही पाएँगे और ना किसी से बोल पाएँगे ,

मीना और ठाकुरजी ने बहुत कॉसिश की पिताजी ठीक हो जाएँ

पर डॉक्टर ने जवाब दे दिया

डॉक्टेर का कहना था कि इस से ज़्यादा वो नही कर पाएँगे

ठाकुरजी को अपना दोस्त सही हालत मे वापस चाहिए था

ठाकुरजी बड़े से बड़े डॉक्टर से बात कर रहे थे

पर सब रिपोर्ट देख कर अपने हाथ पीछे खिच लेते

इतना कुछ हो गया फिर भी मीना ने हिम्मत नही हारी

मीना ने अपनी हिम्मत टूटने नही दी

ठाकुरजी के साथ मिलके पिताजी को ठीक करने की पूरी कॉसिश कर रही थी

गाँव से आए हुए 15 दिन हो गये

पर पिताजी की हालत जैसी थी वैसी ही है

पर ठाकुरजी ने मीना को विस्वाश दिलाया कि वो अपने दोस्त को ठीक करके ही रहेंगे चाहे इसके लिए उनको सारी दौलत दाव पे क्यूँ नही लगानी पड़े

पर मीना ऐसे झूठ विश्वास पे भरोसा करने वालो मे से नही थी

मीना सच जानती थी

इतने डॉक्टर ने कहा कि कुछ नही हो सकता तो कुछ नही हो सकता

मीना ने रिलिटी को आक्सेप्ट कर लिया था

मीना रिलिटी के साथ चलने वालो मे से थी

मीना ने मान लिया कि पिताजी की किस्मत यही है

अब मीना को पिताजी से ज़्यादा इस घर के बारे में सोचना होगा

मीना को इस काबिल खुद को मज़बूत बनाना होगा कि नेहा का सामना कर सके

नेहा को इस रिलिटी का सामना करने मे मदद करनी होंगी

अवी के बारे में सोचना होगा

पिताजी को दिया हुआ वादा पूरा करना होगा

इस घर की ज़िम्मेदारी सही मायने मे मीना को उठानी होंगी

मीना जो तूफान अपने साथ घर लाने वाली थी उस से सबको बचाना होगा

मीना को ऐसा कुछ करना होगा कभी इसके बारे में उसने भी सोचा नही था

मीना को नेहा और अवी के बारे में सोच कर अपने स्टेप आगे बढ़ाने होंगे

इस रास्ते पे मीना को अकेले चलना होगा, सुमन का साथ तो मिलेंगा फिर भी मीना को खुद अकेले करने के बारे में सोचना होगा

कितने दिन वो इस सच छुपाएगी

कब तक पिताजी को नेहा से दूर रखेगी

मीना झूठ बोल सकती है कि पिताजी सन्यास लेने चले गये है

पर झूठ बोल कर कुछ नही होगा

सच के साथ जीना चाहिए सबको , भले सच कितना भी दर्दनाक क्यूँ ना हो

मीना ने सोच लिया कि उसे क्या करना है

मीना को पहले खुद इस काबिल बनना होगा कि वो अवी को सही ग़लत का फरक सिखा सके

मीना ने आगे पढ़ने के बारे में सोच लिया , ताकि अवी को अपना स्टूडेंट बना सके

पर ये तो बाद की बात है ,

आज मीना को पिताजी को नेहा के सामने ले जाना होगा

मीना सोचने लगी कि वो क्या कहेगी नेहा से ,

क्यूँ पिताजी की हालत ऐसी हुई है

मीना के दिमाग़ मे नये नये आइडिया आने लगे

मीना ने सोच लिया कि वो क्या बोलेगी नेहा से

तभी ठाकुरजी आ गये

ठाकुरजी- क्या सोच रही हो मीना

मीना- यही कि नेहा को क्या कहूँगी

ठाकुरजी- अभी भी सोच लो , हम झूठ बोल सकते है , कोई भी बहाना कर सकते है

मीना-बोलने को तो कुछ भी बोल सकते है , पर सच को छुपाया नही जा सकता , सच से दूर भागा भी नही जा सकता , ,सच से जितना दूर

जाने की कॉसिश करेंगे उतने सच के पास जाते है ,

ठाकुरजी- पर नेहा को क्या कहूँगी

मीना-नेहा को सच बताना होगा

ठाकुरजी- इस से सबको दर्द मिलेगा

मीना-पर आज झूठ बोलेंगे और कल कहीं और से सच पता चलेगा तो ज़्यादा दर्द होगा , और ज़्यादा नुकसान होगा , इस से अच्छा है आज ही सच बता देना चाहिए

ठाकुरजी- तुम्हारी बात सही है

मीना-जो होगा वो देखा जाएगा पर सच कभी छुपाना नही चाहिए वरना बाद मे दर्द ज़्यादा होता है

ठाकुरजी- तो क्या तुम नेहा को सब कुछ बता दोगि

मीना-ऐसा तो मैं ने नही कहा ,

ठाकुरजी- क्या मतलब

मीना-पिताजी को उनके सामने लेकर जाएँगे , पर सच वही होगा जो मैं बताउन्गी ,

ठाकुरजी- ये तो झूठ ही होगा ना

मीना-किसने कहा , झूठ उसे कहेंगे कि हम पिताजी को उनके सामने नही लेकर जाएँगे

ठाकुरजी- और तुम्हारा सच क्या होगा

मीना-सच उनके सामने होगा , पिताजी उनके सामने होंगे

ठाकुरजी- पर कहोगी क्या कि ये सब कैसे हुआ

मीना-एक कहानी बताउन्गी , और नेहा को कहानी बहुत अच्छी लगती है

ठाकुरजी- मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा है

मीना-सच पिताजी है , भले पिताजी कैसे भी क्यूँ ना हो , होने चाहिए नेहा के पास या फिर उसको पता होना चाहिए कि पिताजी कहाँ है

ठाकुरजी- ये तुमने सही है , नेहा को योगेंद्रसिंघ की ऐसी हालत देख कर दुख होगा पर उतना नही जितना पिताजी को ना देखेने से होगा ,

और नेहा को इस बात का विस्वाश होगा कि पिताजी जिंदा है और ठीक हो सकते है

मीना-सही कहा , नेहा को हम एक उम्मीद दिखाएँगे कि पिताजी मरते मरते बच गये है , और पिताजी ठीक हो सकते है

ठाकुरजी- समझ गया , तुम नेहा के साथ गेम खेलना चाहती हो

मीना-ऐसा करना ज़रूरी है , इस फॅमिली के लिए मुझे एक ऐसा गेम खेलना होगा जिस से पिताजी जो चाहते थे वो पूरा हो जाए

ठाकुरजी- समझ गया , तुम जो करना चाहती हो करो , मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ

मीना-तो हमे एक छोटा सा झूठ बोलना पड़ेगा

ठाकुरजी- तुम जो कहोगी वही करूँगा मैं

मीना-हम पिताजी को ठीक करने की पूरी कॉसिश करेंगे ,

ठाकुरजी- मैं अच्छे से अच्छे डॉक्टर को ढूँढ कर लाउन्गा

मीना-और हमे नेहा को ये बताना होगा कि पिताजी को हार्ट अटेक आया था ,

ठाकुरजी- हार्ट अटेक से ऐसी हालत नही होती

मीना-पर हार्ट अटेक बड़ी बिल्डिंग की छत पर आए , और पिताजी नीचे गिर जाए जहाँ नुकीले काटे या कीलें हो तो

ठाकुरजी- बात मे दम है

मीना-गोली के निशान काटो के बन जाएँगे

ठाकुरजी- तुमने जैसा कहा है वही करेंगे

मीना-पर सुमन दीदी को सच बताएँगे , ताकि मुझे उनकी मदद मिले

ठाकुरजी- ठीक है , ये सच सिर्फ़ मेरे तुम्हारे और सुमन बहू के बीच ही रहेगा

मीना-और बाकियो के लिए दूसरा सच रहेगा

ठाकुरजी- और अवी

मीना-उसे ठीक तो होने दीजिए उसके लिए भी एक कहानी सोच लूँगी

ठाकुरजी- तुम्हें जो करना है वो सोच समझ कर करना

मीना- मुझे पता है कि क्या करना है , और कैसे करना है

ठाकुरजी- तुम सबको संभालना , और मैं ऐसा हॉस्पिटल ढूँढ कर निकालूँगा जहाँ योगेंद्रसिंघ का इलाज हो

मीना-ठीक है , आप गाँव जाने का इंतज़ाम कीजिए

ठाकुरजी- कब जाना चाहोगी

मीना-कल निकलते है

ठाकुरजी- मैं डॉक्टर से बात करता हूँ , बाकी इलाज गाँव मे करेंगे , मैं एक डॉक्टर भी अपने साथ लेलेता हूँ जो गाँव मे रह कर योगेंद्रसिंघ का इलाज करे

मीना-ये ठीक रहेगा

और मीना नेहा को पिताजी के सच का सामना करवा देगी

पर एक झूठी कहानी के साथ जो मीना के नज़रिए से झूठ नही सच है

पता नही मीना क्या सोच रही है

और करना क्या चाहती है
 
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नेहा 3

मीना ने कुछ बड़ा सोच रखा था

कुछ ऐसा जिस से सब कुछ ठीक हो जाएगा

वरना मीना को पता था कि पिताजी को देख कर नेहा की क्या हालत होंगी

फिर भी मीना रिस्क ले रही थी

वो पिताजी को लेकर नेहा के सामने जाने वाली थी

मीना ने अवी के लिए भी कुछ सोचा होगा

मीना सच और झूठ के साथ गेम खेलने को तय्यार थी

मीना ने डिसाइड कर लिया कि उसे कब क्या करना है ,

मीना ने सुमन को सब कुछ बताने का सोचा ताकि एक बॅकप सपोर्ट मिलता रहे

साथ मे ठाकुरजी की वजह से नेहा भी थोड़ी शांत रहेगी

पर पिताजी की हालत देख कर नेहा को दुख तो होगा

पर सच से नेहा को दूर रखना मतलब बहुत रिस्की था

पिताजी किसी भी हालत मे क्यूँ ना हो बस नेहा के पास होने चाहिए

मीना ने बता दिया ठाकुरजी को क्या करना है

पिताजी के सर मे गोली नही लगती तो पिताजी ठीक हो जाते

पर ये करिश्मा ही था कि इतना कुछ होने के बाद भी पिताजी ज़िंदा है

शायद पिताजी की लाइफ ज़्यादा लिखी होगी या फिर वो उपर जाके माजी शालिनी और जयसिंघ को क्या कहते कि अवी को वो अकेला छोड़ कर आए है

मीना को भी इस से एक उम्मीद मिली कि अभी भी बहुत कुछ किया जा सकता है

अगेर पिताजी की डेत होती तो मीना के हाथो मे कुछ नही होता वो बस देखने की सिवा कुछ नही कर पाती

लेकिन हालत इतने भी बुरे नही है

वो कहते है ना उम्मीद की छोटी सी किरण भी हमारे जीवन मे उजाला कर देती है

अब देखते है मीना क्या करती है , मीना करने क्या वाली है

जैसा सोचा था वैसा ही हुआ

घर के सामने आंब्युलेन्स रुक गयी.

आंब्युलेन्स देखते ही सुमन डर की वजह से बेहोश हो गयी.

किसी को कुछ समझ नही आ रहा था.

नेहा नीता और पूजा की दड़कनें तेज चल रही थी.

ठाकुर और मीना आंब्युलेन्स से बाहर आ गये.

पूजा-मीना पिताजी कहाँ है

नेहा-ये आंब्युलेन्स मे कौन है

मीना-पिताजी ठीक है,उनका एक आक्सिडेंट हो गया था.

नेहा-आक्सिडेंट

मीना-वो बिल्डिंग से हार्ट अटॅक आने से गिर गये थे.

पूजा-कब हुआ ये सब ,और तूने अब तक हमे बताया क्यूँ नही.

ठाकुरजी-मैं ने मना किया था. तुम योगेन्द्र को आक्सिडेंट होने के बाद नही देख पाते इसी लिए मैं ने सिर्फ़ मीना को बताया.

नीता-पिताजी ठीक हैं

ठाकुरजी-हाँ, पर सर पे चोट लगने से

ठाकुरजी अपनी बात पूरी करते उस से पहले पिताजी को बाहर निकाला गया.

पिताजी को ऐसे सॉलेन मे देख कर नेहा नीता और पूजा वही पर बेहोश हो गयी.

सब उन तीनो को संभालने लगे

ऐसे मे वॉर्डबॉय पिताजी को अंदर ले गया.

वॉर्डबॉय को जो कमरा खुला मिला वही पर पिताजी ले कर गये .

उस कमरे मे अवी था.जो अब ठीक हो रहा था.

आंब्युलेन्स वापस चली गयी.

सुमन और तीनो को होश मे लाया गया.

नेहा नीता और पूजा अपने पिताजी के पास चली गयी.

पिताजी को ऐसी हालत मे देख कर तीनो इतना रोने लगी कि उनको अवी का ध्यान ही नही रहा.

रमेश सुरेश और जतिन अपनी अपनी पत्नी को संभाल रहे थे.

नेहा नीता और पूजा अपने पिताजी को ऐसे देख कर रो रो कर अपना दर्द कम करने की कोशिश करती गयी.

ये ऐसा दर्द था जो समय के साथ भी भर नही सकता था.

पिताजी की वजह से उस्दिन सब ने अवी की तरफ ध्यान नही दिया.

बस पिताजी की हालत पे रो रहे थे.

नेहा पिताजी की हालत देखते अपने होश खो बैठी

नेहा पिताजी को इस हालत मे देख ही नही पाई

और बेहोश हो गयी

साथ मे पूजा नीता भी खुद को संभाल नही पाई ,

और तीनो बेहोश हो गयी

जितना मीना ने सोचा था उस से ज़्यादा हुआ

और जब उम्मीद से कुछ ज़्यादा हो जाता है तो कुछ गड़बड़ ज़रूर होती है

नेहा नीता पूजा और बच्चों को संभालते संभालते एक गड़बड़ जो गयी

नर्स ने पिताजी को अवी के रूम मे रख दिया

बाकी सब नेहा को संभाल रहे थे

और जो ना होना था वही हो गया

नेहा होश मे होने के बाद भी ये सदमा बर्दास्त नही कर पाई तो अवी कैसे ये सब बर्दास्त करता

अवी की तो हालत पहले ही नाज़ुक थी , वो ठीक हो रहा था

ऐसा लग रहा था की अवी 1 2 हफ़्तो मे चलने फिरने लगेगा

अवी ने आँखे भी खोल ली थी

पर अभी पूरी तरह से ठीक नही हुआ था

बस कुछ हफ़्तो की बात थी फिर अवी सब के साथ खेलने लग जाता

पर अपने दादाजी की हालत देखते ही फिर से अवी को अपने माँ और पापा की याद आ गयी

अपने दादाजी की हालत देख कर तो 18 महीनो की मेहनत पानी मे चली गयी

अवी अभी तो ठीक हो रहा था ऐसे मे अपने दादाजी की हालत देख कर उसकी हालत खराब हो गयी

बाहर डॉक्टर नेहा नीता पूजा को देख रहे थे कि अंदर से नर्स की आवाज़ आई

सुमन अवी के पास गयी तो , अवी की हालत देख कर सुमन भी बेहोश होते होते बच गयी

मीना ने तो अपने सर पे हाथ रख दिया

ये गड़बड़ कैसे हो गयी

मीना नेहा के सिचुयेशन के लिए तय्यार थी

पर अवी के साथ ऐसा कुछ हो जाएगा ये मीना ने सोच नही था

ऐसा ही होता है जब एक साथ इतनी बड़ी जम्मेदारी मिलती है

मीना को इस घर मे आए हुए कितने दिन हुए और मीना शादी के लिए तय्यार नही थी , खुद को इस शादी लायक समझा ही नही था , ऐसे मे शादी हो जाना फिर शालिनी का आक्सिडेंट , फिर नयी ज़िम्मेदारी , उसके बाद पिताजी के साथ ये हादसा होना , मीना कैसे सब संभालती

मीना ने सोचा ही नही था कि ये सब होगा

तभी तो मीना ने सोच लिया था कि वो पहले अपनी पढ़ाई पूरी करेगी ताकि वो खुद को इस काबिल बना सके कि अवी की ज़िम्मेदारी उठा सके

ठाकुरजी को ऐसा होगा ये पता था

इस लिए उन्होने ने मीना को हिम्मत से काम लेने को कहा

और डॉक्टर को कहा कि नेहा को बेहोश ही रहने दीजिए

तब तक अवी और बाकियो को संभाल सके मीना

छोटू और सीमा को तो कुछ समझ ही नही आ रहा था

ठाकुरजी ने छोटू को समझा दिया कि खुद को सम्भालो ,

और सीमा को बच्चों के साथ पूजा के घर पे भेज दिया

डॉक्टर ने अवी को देखा तो उसे हॉस्पिटल शिफ्ट करने को कहा

सुमन तो डॉक्टर की बात सुनते ही डर गयी

पर मीना ने सुमन को सब कुछ बता दिया

पर सुमन को बाकी बातों से कुछ लेना देना नही था उसको बस अवी चाहिए था , अवी की फिकर हो रही थी सुमन को

ठकुराइन सुमन के साथ अवी को हॉस्पिटल लेकर गयी

और मीना ठाकुरजी के साथ सोचने लगी कि नीता और पूजा के होश मे आते ही क्या कहेगी

मीना अब एक एक करके तीनो बहनों से हॅंडल करने वाली थी
 
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