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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 832ए

जयसिंघ ने एक साल मे बहुत तरक्की की

जैसा कुमार ने सोचा था वैसा ही हुआ

जयसिंघ ने कंपनी को एक साल मे बहुत सारे कांट्रॅक्ट मिलवा दिए

कांट्रॅक्ट मिलते कंपनी जल्दी न्यूज़ पेपर की हेडलाइन बन गयी

कुमार ने जिस लिए जयसिंघ को पार्टनर बनाया वो सब हो गया

जयसिंघ ने एक साल मे तीन बड़े कांट्रॅक्ट मिलवा दिए कंपनी को

और पैसे की बारिश शुरू हो गयी

ऐसी बारिश जिसमे जयसिंघ खुद को भूलता गया

पर जब भी वो अपने पिताजी की फोटो देखता तो उसे पिताजी की बात याद आती की कभी भूलना मत कि तुम कौन हो

ये बात याद आते ही जयसिंघ अपने भाई बहनों के बारे मे सोचने लगता

जयसिंघ ने पूजा को टीचर बनने का सोचा था

इस साल पूजा 12 पास हो जाएगी

तो उसके लिए जयसिंघ ने शहर3 के एक कॉलेज से बात की , जयसिंघ का रेकॉर्ड देख कर पूजा को अड्मिशन देने को कॉलेज वाले तय्यार हो गये ,

पूजा की मारक्शीट देखहे बिना कॉलेज वालो ने जयसिंघ को फॉर्म दे दिया क्यूँ कि उनके कॉलेज को जयसिंघ की तरहफ़ से फंड मिलने की आशा थी

पूजा टीचर बन जाएँगी तो उसके लिए कितना अच्छा रहेगा

नेहा नीता को डॉक्टर बनाने का सोच रहा था जयसिंघ

दोनो को मेडिकल की तय्यारी के लिए किताबें और एक डॉक्टर से बात की थी उनको अभी से . की तय्यारी करवाने के लिए

नेहा नीता को अच्छे मार्क मिल गये तो उनकी अड्मिशन को जितने पैसे लगेंगे उसके लिए जयसिंघ ने अलग अकाउंट मे जमा किए थे

नेहा नीता डॉक्टर बन जाएगी तो पिताजी कितने खुश हो जाएँगे

और छोटू के लिए जयसिंघ ने बहुत बड़ा सोच रखा था

अभी भी देर नही हुई ये बात जयसिंघ को पता थी

अबी भी छोटू पे थोड़ा ध्यान दिया तो वो कलेक्टर बन सकता है

ये जयसिंघ समझ गया था

मा और पिताजी के आराम की सारी चीज़े घर मे लेकर रखी थी

जब जयसिंघ पिताजी को यहाँ लेकर आएगा तो शहर3 का घर देख कर वो खुश हो जाएँगे

भले पिताजी गाँव को भूलेंगे नही पर यहाँ आते ही उनको अच्छा लगेगा

जयसिंघ सारी तय्यारी करके गाँव जा रहा था

उसने अपनी मेहनत से कंपनी स्टार्ट की

कंपनी को नयी उँचाई पे ले जाने को मेहनत कर रहा था

जयसिंघ कितना खुश था

पूरे एक साल बाद वो गाँव जाने वाला था

जयसिंघ को डर भी लग रहा था कि पिताजी को झूठ का पता चलेगा तो वो क्या कहेंगे

पर जयसिंघ की तरक्की देख पिताजी सारी बाते भूल जाएँगे ये जयसिंघ को पता था

माँ तो खुश होकर जयसिंघ को गले लग जाएगी

जयसिंघ अपने साथ पूजा के टीचर बनने का फॉर्म्लेकर आया था

नेहा नीता के लिए मेडिकल के किताबें और उस से रिलेटेड चीज़ो से भरा हुआ पूरा बॅग लेकर आया था

छोटू पढ़ाई मे कमज़ोर है

उसको धीरे धीरे पढ़ाई मे तेज करने के हिसाब से किताबें लेकर आया था जयसिंघ

छोटू को मेद्स , साइन्स आराम से समझ मे आए इस लिए जयसिंघ ने खुद नोट्स बनाए थे

जयसिंघ बहुत मेहनत ले रहा था अपनी फॅमिली के लिए

पर पिताजी अलग तरह से फॅमिली को खुश रखना चाहते थे

और जयसिंघ अलग तरह से फॅमिली का फ्यूचर बना रहा था

पिताजी सबको उनकी मर्ज़ी से पड़ने देना चाहते थे

और जयसिंघ ने जो सपना देखा है उसके हिसाब से सबका फ्यूचर बनाना चाहता था

पिताजी सबको अपना अपना फ़ैसला लेने की पर्मिशन दे रखी थी

पर जयसिंघ ने तो किस को क्या बनना है ये सोच भी रखा था

यहाँ तक कि उसका इंतज़ाम भी किया था

ना जयसिंघ ग़लत था और ना पिताजी

दोनो की सोच अलग थी

दोनो अपनी अपनी जगह पर सही थे

जैसे जैसे बस गाँव के पास जा रही थी वैसे वैसे जयसिंघ सबको अपनी तरक्की के बारे मे बताने को एग्ज़ाइट हो रहा था

पिताजी सुंनेगे तो क्या कहेंगे

पूजा तो नये नये ड्रेस देख कर पागल हो जाएगी

नेहा नीता डॉक्टर बनने की बात सुनेगी तो उछल कर उसके गले लग जाएगी

छोटू अपने गिफ्ट देखेगा तो अपने दोस्तो को दिखाने की जल्दी मे होगा

माँ को मुझपे कितना गर्व महसूस होगा

उनका बेटा बड़ा आदमी बन गया है

अब उनके मेहनत करने के दिन ख़तम हो गये

अब उनको आराम ही आराम मिलेगा

ये सब सोचते हुए जयसिंघ गाँव मे पहुँच गया

जयसिंघ ने किसी को बताया नही था कि वो आ रहा है

जयसिंघ सर्प्राइज़ देना चाहता था

बस से नीचे उतरते ही जयसिंघ को गाँव के सरपंच मिल गया

सरपंच-जयसिंघ तुम आ गये

जयसिंघ- जी चाचा

सरपंच-लगता है तुम्हे तार ( पोस्ट लेटर) देर से मिली है

जयसिंघ- कैसी खत चाचा

सरपंच- लगता है तुझे कुछ पता ही नही है

जयसिंघ- क्या पता नही है मुझे

सरपंच- घर जाओ पता चल जाएगा , तभी मैं सोचु की कल तुम दिखाई क्यूँ नही दे रहे थे

जयसिंघ- क्या हुआ कल

सरपंच- योगेंद्रसिंघ तुम्हे सर्प्राइज़्ड देना चाहते होंगे

जयसिंघ- कैसा सर्प्राइज़्ड

सरपंच- खुद जाकर देखो

.और सरपंच ने आते ही जयसिंघ को झटका दे दिया

जयसिंघ सोचता रह गया कि बात क्या है

सरपंचजी किस बारे मे बात कर रहे थे

जयसिंघ को कुछ समझ नही आ रहा था

कल हुआ क्या है

जयसिंघ सोचते सोचते घर की तरफ जाने लगा

आते जाते लोग जयसिंघ को बधाई देने लगे

जयसिंघ को लग रहा था कही गाँव वालो को उसके कंपनी के बारे मे तो नही पता चल गया

और पिताजी ने मेरे लिए सर्प्राइज़्ड रखा हो

गाँव को दावत दी हो

जयसिंघ के दिमाग़ मे पहली बात यही आई

पर ऐसा होता तो मुझे बताया क्यूँ नही गया

मैं तो अचानक आ गया हूँ

सरपंचजी ने कहा कि मुझे तार देर से मिली हो

शायद पिताजी ने खत भेजी हो पर मुझे मिली नही है

उनको कहा पता कि मैं अब हॉस्टिल मे नही अपने घर मे रहता हूँ

खुद के घर मे

अपने मेहनत से बनाए हुए घर मे

अब वहाँ मैं बाकियो को भी लेकर जाउन्गा

नेहा नीता अपना नया घर देख कर कितनी खुश होगी

शहर का घर देखते गाँव को भूल जाएँगी

बस पहली बार दिखाने को ले जाउन्गा वो शहर3 का घर देखते वही रुक जाएँगे

अपने आप

जयसिंघ अपने घर के पास आ गया

घर को देखते जयसिंघ देखता रह गया

घर को शादी के घर की तरह सजाया गया था

जयसिंघ- मेरी आने की इतनी बड़ी तय्यारी , मतलब पिताजी भी खुश है मतलब मैं उनको शहर3 लेकर जा सकता हूँ

जयसिंघ घर की सजावट देख कर शॉक्ड हो गया

कल यहाँ क्या हुआ होगा इस बात से जयसिंघ अंज़ान था

जयसिंघ अपना समान लेकर घर के मेन गेट के सामने खड़ा हो गया

अंदर तो घर फूलों से सजाया था

छोटू हॉल मे बैठा काम कर रहा था

बाकी कोई दिखाई नही दे रहा था

जयसिंघ- छोटू

जयसिंघ ने छोटू को आवाज़ दी

अपने भाई की आवाज़ तो वो मेले की शोर शराबो मे भी पहचान सकता है

छोटू ने पलट कर देखा , अपने बड़े भाई को देख कर छोटू ज़ोर से चिल्लाया

छोटू- भैया

छोटू की आवाज़ सुनकर बाकी सब अपने कमरे से बाहर आ गये

माजी- क्या हुआ छोटू

पिताजी- तेरे भाई की आज तार भेज दूँगा , तू तो ऐसे चिल्लाया कि

छोटू ने उंगली घर के मेन गेट की तरफ दिखाई

पिताजी और माँ ने जैसे उधर देखा तो उनके खुशी का कोई ठिकाना नही था

माँ तो बेहोश होते होते बच गयी

पिताजी को तो इतनी खुशी हुई कि वो जयसिंघ के पास आकर उसके गले लग गये

पिताजी की आवाज़ सुनते नेहा नीरा बाहर आ गयी

नेहा- भैया आप ,

और माँ और नीता भी जयसिंघ के गले लग गयी

उनके खुशी का तो कोई ठिकाना नही था

सब जिसका इंतज़ार कर रहे थे वो आ गया

कल पिताजी को जिसकी कमी महसूस हो रही थी वो आ गया

पिताजी को पहली बार अकेले होने का अहसास हुआ था

पर छोटू ने उनकी इतनी मदद की कि जयसिंघ की कमी महसूस नही होने दी

पर पिताजी को फिर भी जयसिंघ की याद आई थी

और देखो जयसिंघ आ गया

नेहा - भैया कल आपको बहुत मिस किया

नीता- कल क्यू नही आए आप , अच्छा हुआ हम कल ही वापस आ गये थे मामा के घर से

जयसिंघ- तुम मामा के घर गयी थी

नेहा - हाँ , और अच्छा हुआ हम कल यहाँ आए थे वरना आपकी तरह हम भी मिस कर देते

नीता- दीदी से तो मैं बहुत गुस्सा हूँ , बिना हमारे , दीदी हमारे बिना सोच भी कैसे सकती है ,

जयसिंघ- क्या था कल

पूजा - भैया आप

और पूजा भाग कर जयसिंघ के गले लग गयी

पूजा तो दुल्हन की तरह दिख रही थी

उसने कल जो मेकप किया वो निकाला नही था

पूजा -भैया सॉरी , सब कुछ इतनी जल्दी हो गया कि आपके बिना ही , मेरी ग़लती है

जयसिंघ- क्या हुआ कल और तुम ये दुल्हन की तरह सजी क्यूँ हो

पूजा - भैया वो मैं

जयसिंघ- तू तो ऐसे शरमा रही है जैसे तेरी शादी हुई हो

नीता - दीदी मैं आप से गुस्सा हूँ , अगर हम कल नही आती तो

पूजा -सॉरी , सब कुछ जल्दी मे हो गया

नेहा - हम आपकी बहन है , हमारा तो इंतज़ार करती ,

पूजा- तुम्हारे इंतज़ार मे वो भाग जाते तो , और तुम्हे देख मुझे भूल जाते तो

नेहा -ये भी सही है हम है ही इतनी सुंदर

जयसिंघ- बात क्या है मुझे कोई बताएगा

नीता- भैया कल पूजा दीदी की सगाई हो गयी ,

जयसिंघ- व्हाट

नेहा - जीजाजी तो बहुत अच्छे है

नीता - तभी तो दीदी ने हमारा भी इंतज़ार नही किया , पर हमारी किस्मत मे लिखा था तो हम टाइम पर आ गये

जयसिंघ को तो कुछ समझ नही आ रहा था

पूजा की सगाई हो गयी

और उसे किसी बे बताया भी नही

एर पूजा की शादी की उमर नही है

पिताजी ऐसे कैसे कर सकते है
 
फ्लॅशबॅक 832फ

जयसिंघ पूजा की सगाई की बात सुनकर शॉक्ड हो गया

उसे उम्मीद नही थी कि उसे ऐसा भी सुनने को.मिलेगा

जयसिंघ इस के लिए तय्यार नही था

इतना बड़ा झटका लगा था कि जयसिंघ कुछ देर के लिए होश खो बैठा

नेहा नीता बातें कर रही थी

उनकी बाते जयसिंघ को टॉर्चर कर रही थी

उनकी बाते जयसिंघ का दिमाग़ खराब कर रही थी

उसने क्या सोचा था पूजा के लिए

पूजा को टीचर बना देगा

पूजा को पहले अपने पैरो पे खड़ा करेगा

उसकी खुद की पहचान होगी

फिर उसकी शादी ऐसे करेगा कि पूरी दुनिया देखती रह जाएँगी

पूजा तो अभी बच्ची थी

इतनी जल्दी क्या थी शादी की

उसके तो खेलने के दिन थे

पिताजी ऐसा कैसे कर सकते है

पिताजी भी पड़े लिखे है उनको पता है कि जल्दी शादी करने से क्या होता है

फिर भी पूजा की शादी की जल्दी क्या थी

उसकी तो पढ़ाई चल रही है

वो नाबालिग है

भले वो 3 महीने बाद बालिक हो रही हो पर ये कुछ जल्दी हो रहा है

ज़रूर पिताजी ने पूजा को मज़बूर किया होगा

वरना पूजा को तो कितना कुछ करना था अपनी लाइफ मे

उसने तो पिछली बार मुझे वादा किया था कि वो शहर3 घूमने आएँगी

पूजा तो मुझसे छोटी है

फिर उसकी शादी मुझसे पहले क्यूँ करने का सोच रहे है पिताजी

मेरा इंतज़ार भी नही किया

मुझे पूछ तो लेते

ऐसी क्या जल्दी हो गयी कि मेरा इंतज़ार भी नही किया गया

क्या पिताजी को डर था कि मैं ये सगाई होने नही दूँगा

कैसे होने देता

माँ ने भी मेरा इंतज़ार नही किया

नेहा नीता भी यहाँ नही थी

फिर ये सब हुआ कैसे

कितने सपने देखे थे मैं ने पूजा के लिए

पूजा के अड्मिशन की बात भी करके आया था

उसको टीचर के रूप मे देखना था मुझे

पूजा यहाँ गाँव के स्कूल मे पड़ती तो पिताजी को भी अच्छा लगता

सब कुछ ख़तम हो गया

एक झटके मे मेरे सपने तोड़ दिए पिताजी ने

नेहा - भैया , क्या हुआ , क्या सोच रहे हो

नेहा - भैया

पूजा - भैया क्या हुआ आप नाराज़ हो गये

माँ- जयसिंघ

जयसिंघ- हााआ माआआअ

माँ- क्या हुआ

जयसिंघ- कुछ नही , चक्कर आ रहा है

माँ- आ बैठ जा , ये नेहा नीता भी ना , आते शुरू हो जाती है

माँ ने जयसिंघ को बेड पे बैठा दिया

पूजा - भैया पानी पी लो

जयसिंघ ने पानी नही लिया

पूजा - भैया गुस्सा हो मुझपे

नेहा- गुस्सा तो होंगे ना , आपने काम ही ऐसा किया है

नीता- मैं भी गुस्सा हूँ

पूजा - भैया

नेहा - भैया बात ही मत करना पूजा दीदी से

पूजा - नेहा तू चुप रहेगी

नेहा - क्यू चुप रहूं , आपने तो हमारा भी इंतज़ार नही किया

पूजा - वो मैं

पिताजी- नेहा , पूजा को प्यार हो गया था

नेहा - प्यार

पूजा- तुम्हे कहा था ना कि मुझे राजकुमार का इंतज़ार है

नीता- हमे तो लगा वो राजकुमार राकेश होगा

पूजा- राकेश , तूने सोचा भी कैसे

नेहा - पूरे गाँव को पता है

पूजा - वो डरपोक है

नेहा- रमेश जीजाजी

पूजा - वो तो राजकुमार है

नीता- मुझे तो ऐसा नही लगा

पूजा- एक दिन मे मेरा दिल जीत लिया तुम्हारे जीजाजी ने

नेहा- मतलब कल ही मिले थे आप

पूजा- हाँ

नीता- और कल ही आपने सगाई का फ़ैसला किया

पूजा - हाँ

नेहा - रोमॅंटिक लग रहा है

नीता- फुल टू रोमॅंटिक

नेहा - दीदी क्या हुआ था बताओ ना

पूजा - फिर कभी बता दूँगी

नेहा - शॉर्टकट मे बता दो ना

पूजा- वो अचानक मेरे सामने आए और मेरा दिल जीत लिया

नेहा - पर आप तो कह रही थी कि जो पिताजी को हरा देगा वो आपका राजकुमार होगा

पूजा - पिताजी को हराया ना तुम्हारे जीजाजी ने

नेहा- ये हो नही सकता

पूजा - पिताजी से पूछ लो

नेहा - पिताजी क्या ये सच है

पिताजी- हाँ , पूजा को जिस राजकुमार का इंतज़ार था वो मिल गया

नेहा - हमे मिलाने से पहले आप ने सगाई कर ली

पूजा - वो बहुत फास्ट है , यही तो उनकी स्टाइल मुझे पसंद आ गयी

नीता- वो करते क्या है

पिताजी- वो यही पास के कंपनी मे काम.करते है

नेहा- रहते कहाँ है

पिताजी- शहर2 मे

नेहा - आपने देखा उनका घर

पूजा- मैं ने सिर्फ़ उनके प्यार को फील किया है और इतना ही मुझे चाहिए था उनको अपना बनाने के लिए

नेहा- अगर वो झोपड़ी मे रहते हो तो

पूजा- सब मंज़ूर है मुझे ,

नेहा- दीदी आपको तो प्यार हो गया

पूजा - बता नही सकती कि कल से मेरा क्या हाल हो रहा है , ऐसा लग रहा कही उड़ जाउ तुम्हारे जीजाजी के साथ

माजी- पूजा

माँ ने नेहा नीता को ऐसे बाते बताने से मना किया

नेहा -बताओ ना दीदी क्या हुआ था

पूजा - बता दूँगी जल्दी क्या है

नीता- जल्दी है आपकी तो 1महीने बाद शादी है

पूजा - 1महीना उनके बिना मैं कैसे रहूंगी

माजी- पूजा

नेहा - दीदी आप तो दीवानी हो गयी हो

पूजा - मुझे तो अब तुम्हारे जीजाजी हर जगह नज़र आते है

नेहा- काश मुझे भी ऐसा राजकुमार मिल जाए

माँ ये सुनते पूजा को अंधेरे के कमरे मे ले गयी

माजी- पूजा ये सब क्या है

पूजा - क्या हुआ माँ

माजी- नेहा नीता छोटी है ये बात तो याद रखो

पूजा- माँ मुझे प्यार हो गया है

माजी- तो इसका ये मतलब नही कि पागलो जैसी बाते करो

पूजा - माँ आपको भी ऐसा ही लगा था ना जब पिताजी से शादी होने वाली थी

माजी- मैं तेरी जैसे पागल नही थी

पूजा - बताओ ना

माजी-एक शरत पे

पूजा- क्या

माजी- तुम अपनी प्रेम कहानी नेहा नीता को अभी नही बताओगी

पूजा- उनके बड़े होने पे बता दूँगी

माजी- जब तेरे पिताजी को देखा था ना तब से शादी तक मैं सो नही पाई थी , आँख लगते ही तेरे पिताजी दिखाई देते , हर किसी मे तेरे पिताजी नज़र आते , टी मे शक्कर की जगह नमक डाल देती

पूजा- मुझे भी ऐसा ही लगा रहा है

माजी- तुम थोडा कंट्रोल मे रह तेरे कहने पे कल तेरे पिताजी ने तेरी सगाई कर दी , वरना मैं बिना पूछताछ किए सगाई होने नही देती

पूजा- मेरे पिताजी जैसा कोई नही है , मेरे कहते मेरी सगाई कर दी , कितना प्यार करते है मुझे ,कितना विश्वास है मेरी पसन्द पे , पिताजी मुझे बहुत प्यार करते है , उनको पता है कि मेरी खुशी किस मे है

माजी- मैं भी करती हू तुझे प्यार

पूजा- पिताजी बहुत ज़्यादा प्यार करते है मुझे

माजी- पर जयसिंघ नेहा नीता को गुस्सा आया होगा , तेरे खुशी के लिए तेरे पिताजी ने सगाई तो कर दी अब आता नही क्या होगा, तू थोड़ा प्यार से काम लेना

पूजा- जी

माजी- वो अच्छा हुआ कि नेहा नीता , शाम मे आ गयी और वो तेरी सगाई मे शामिल हुई पर जयसिंघ को बुरा लगा होगा वो तेरा बड़ा भाई है

पूजा- पिताजी ने सिर्फ़ मेरी खुशी देखी ,

माजी- पर जयसिंघ का तुझे पता हैना

पूजा - मैं बोल दूँगी कि ये सब मैं ने पिताजी को करने को बोला है ,मैं ज़िद्द ना करती तो पिताजी एक दिन मे अंज़ाने लड़के से मेरी सगाई थोड़े करते

माजी- तेरे पिताजी को तुझ पे बहुत विश्वास है प्यार है , उनको पता है की तेरी खुशी किस मे है , तुझे रमेश पसंद है तो पिताजी ने तेरे कहने पे सगाई कर दी

पूजा- मैं हर जनम मे पिताजी की बेटी बनना चाहूँगी

मसजी- तेरे कहते ही तेरी सगाई कर दी , अब तू ज़्यादा गड़बड़ मत करना

पूजा- नेहा नीता को मैं समझा दूँगी

माजी- चल अब ,

माँ ने पूजा को समझा दिया

पूजा ने सुबह रमेश को देखा , दोपेहर होने तक दोनो ने खुद को अपना जीवन साथी चुन लिया ,

और जैसे पूजा ने कहा कि उसको आज सगाई करनी है तो पिताजी ने ना रमेश से सवाल किया बस पूजा की खुशी देख कर सगाई कर दी , पिताजी की आँखे पहचान लेती है लोगो को , और सगाई से पहले रमेश की.माँ से बात कर ली थी पिताजी ने

रमेश मे पिताजी ने अच्छे जीवन साथी की छवि देखी

पर शादी से पहले पिताजी सब कुछ चेक कर लेंगे

रमेश करता क्या है उसका घर कैसा है पूजा खुश रहेगी ना

पर इधर जयसिंघ ने पूना के लिए जो सपने देखे वो टूट गये

पिताजी ने अपनी बेटी की ख़ुसीया देख कर सगाई कर दी

पर जयसिंघ के सपनो का क्या

नेहा- दीदी जीजू के बारे मे और कुछ बताइए ना

पूजा- जैसे मुझे पता चलेगा वैसे बता दूँगी

नीता- आपको भी नही पता ,

पूजा- तुम्हारे जीजू को देखते प्यार हो गया

नेहा- आपकी बातों से मेरा गुस्सा तो ख़तम हो गया

नीता-और हम भी तो सगाई मे शामिल हुए , देर से क्यूँ ना हो ,

मसजी- नेहा नीता चुप रहो , जयसिंघ क्या हुआ

पिताजी- जयसिंघ

माजी-तुम कुछ बोल क्यूँ नही रहे हो

जयसिंघ- बोलने के लिए बचा ही क्या है

माजी- ये क्या बोल रहे हो

जयसिंघ- पिताजी आप ऐसा कैसे कर सकते है

पिताजी- मैं जो किया वो पूजा के खुशी को ध्यान मे रख कर किया

.

.

जयसिंघ-वो अभी बच्ची है , उसे क्या पता अच्छे बुरे की पहचान कहाँ है

पिताजी- मैं लोगो को देखते ही पहचान जाता हूँ कि वो कैसे होते है

जयसिंघ- कब तक आप ये पुरानी परंपरा के साथ जियोगे

पिटाज़ू- क्या मतलब

जयसिंघ- क्या एक दिन मे लड़का देखा और सगाई कर दी ऐसा कोई करता है क्या

पूजा- भैया इसमे पिताजी की कोई ग़लती नही है

जयसिंघ- तू चुप रह , तुझे सही ग़लत की समझ नही है

पिताजी- तुम कहना क्या चाहते हो

जयसिंघ- वो कौन है , क्या करता है , आपको कुछ पता नही है , अचानक वो आ गया और पूजा को अपनी बातों मे फसा दिया , पूजा ने कहा कि सगाई कर दो तो आपने सगाई कर दी ,वो अभी बच्ची है पिताजी

पिताजी- मुझे मत बता कि मुझे क्या करना चाहिए , 2 किताबें ज़्यादा पढ़ ली तो बेटा बाप नही बन जाता

जयसिंघ- आपने जो किया क्या वो ठीक है , अगेर कल पूजा किसी भिकारी को लाकर कहेंगी कि इस से मुझे शादी करनी है तो आप कर देंगे , पूजा तो नासमझ है पर आप तो समझदार है , आपको सोचना चाहिए था , आप कैसे बाप हो जो खुद अपनी बेटी को कुएँ मे धक्का दे रहे हो ,

पिताजी- जयसिंघ

जयसिंघ- आज पूजा को कुएँ मे धक्का दिया है कल नेहा और नीता के साथ भी ऐसा ही करेंगे , उनकी ज़िंदगी भी बर्बाद कर दोगे , आप खुद अपनी बेटियो की ज़िंदगी बर्बाद कर रहे हो

और पिताजी ने जयसिंघ को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया

थप्पड़ ऐसा पड़ा कि पूरे घर मे सन्नाटा फैल गया

पहली बार पिताजी ने अपने बच्चों पे हाथ उठाया था

किसी को ऐसी उम्मीद नही थी

पिताजी ऐसा करेंगे कभी किसी ने सोचा नही था

जयसिंघ ने ये कहा ही कैसे कि पिताजी अपनी बेटियो के साथ ऐसा करेगे
 
फ्लॅशबॅक 832जी

पिताजी ने जयसिंघ को थप्पड़ मार दिया

जो कभी पिताजी सोच भी नही सकते आज पिताजी को वो करना पड़ा

पिताजी ने अपने बच्चों पे कभी हाथ नही उठाया था आज उनको हाथ उठाना पड़ा

थप्पड़ जयसिंघ को लगा था पर दर्द पिताजी को हुआ

आसू माँ के आँखो से निकलने लगे

तीनो बहनों के दिल रोने लगे

छोटू तो थप्पड़ की आवज़ सुनकर डर के अपने कमरे मे छुप गया

जयसिंघ को थप्पड़ मारते ही पिताजी को लगा होगा कि ये हाथ टूट जाए

जयसिंघ ने बात ही ऐसी की जिस से पिताजी खुद को रोक नही पाए

पिताजी कैसे अपनी बेटियो को कुएँ मे धकेल सकते है ये जतसिंघ ने सोचा भी कैसे

क्या पिताजी का प्यार कहीं कम पड़ गया

जिस से जयसिंघ के दिमाग़ मे ऐसी बात आ गयी

जयसिंघ ने पहले भी पिताजी को कई बार दुख दिया है

जयसिंघ के वजह से पिताजी को कही बार रोना पड़ा था

पर आज जयसिंघ ने पिताजी की कमज़ोरी पे पैर रखा था

जयसिंघ को ऐसा नही करना चाहिए था ऐसा माँ को भी लग रहा था

माँ अब सिर्फ़ रोने के सिवा कुछ नही कर सकती है

एक तरफ उनका बेटा और दूसरे तरफ नेहा के पिताजी

माँ को पता है ना उनका बेटा ग़लत है और ना नेहा के पिताजी ग़लत है

ग़लती उनकी है जो अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नही दे सकी

कोई कुछ नही बोल रहा था

जयसिंघ के मूह से खून निकल रहा था

माँ ये देखते ही जयसिंघ के पास जाना चाहती थी पर वो किसके पास जाती , इधर पूजा भी रो रही थी

जयसिंघ के मूह से खून निकलते हुए देखते उसको भी गुस्सा आ रहा था

जयसिंघ है तो उनका खून ही ना

पिताजी ने थप्पड़ तो मारा और मलहम भी खुद लगा रहे थे

पिताजी ने नप्कीन निकाल कर जयसिंघ के खून को पौंछ दिया

पिताजी के ऐसा करते जयसिंघ ने उनका हाथ झटक दिया

पिताजी फिर से जयसिंघ के खून को निकलने से रोक रहे थे

जयसिंघ ने इस बार पिताजी को धक्का दिया

पिताजी को धक्का देना किसी को अच्छा नही लगा

पर जयसिंघ का पिताजी को कुछ भी बोलना बर्दास्त हो रहा था पर अपनी बेटियो के बारे मे पिताजी थोड़े गुस्सा हो जाते है

पर ये माँ से बर्दास्त नही हुआ

माँ- जयसिंघ

माँ ने पहली बार इतने गुस्से मे जयसिंघ का नाम लिया था

माँ जयसिंघ को थप्पड़ मारने के लिए आगे आ रही थी कि पिताजी ने इशारा करके माँ को रोक दिया

जयसिंघ की सारी ग़लतियो पे अब तक माँ ने परदा डाल दिया था

पर आज जो जयसिंघ ने किया वो माँ बर्दास्त कैसे करती

जयसिंघ- यही बाकी रह गया था

पिताजी-जयसिंघ

जयसिंघ-ये थप्पड़ इस बात का सबूत है कि आपने कभी मुझे प्यार किया है नही , कभी मेरी परवाह की ही नही , कभी अपना समझा ही नही

माजी- जयसिंघ

जयसिंघ- आप बस खुद से प्यार करते है , आपको जो अच्छा लगता है वही हमे करना चाहिए , यही आप चाहते है

पिताजी-मैं ने ऐसा कभी नही चाहा था

जयसिंघ- देखिए पूजा की तरफ , कहाँ से ये आपको शादी के उमर की लगती है

पिताजी-उसकी खुशी उसी मे थी

जयसिंघ- खुशी खुशी , क्या लगा के रखा है , उसके फ्यूचर के बारे मे सोचा आपने , नही सोचा

पिताजी-रमेश पे उसको विश्वास है , वो प्यार करती है रमेश से

जयसिंघ- जमाना बदल गया है , विश्वास, खुशी , प्यार से पेट नही भरता

पिताजी-तू कहना क्या चाहता है

जयसिंघ- उस बच्ची की शादी करवाने से पहले आपने सोचा भी नही कि वो उस लायक है कि नही

माजी-जयसिंघ ये क्या तरीका है

पिताजी- बोलने दो उसे

पिताजी भी देखना चाहते है कि जयसिंघ उनके बारे मे क्या सोचता है

जयसिंघ- उसकी पढ़ाई चल रही है और आप ने इसकी सगाई कर दी

पिताजी-पूजा यही चाहती थी

जयसिंघ- वो बच्ची है , पर आपको तो समझाना चाहिए था कि उसकी उमर क्या है ,

पिताजी-हमने सब सोचा है

जयसिंघ- क्या सोचा , पूजा पढ़ लिखती तो फ्यूचर मे इसके लिए अच्छा होता , ज़माना बदल रहा है

जयसिंघ- क्या पता है रमेश के बारे मे , क्या करता है , कहाँ रहता है , कुछ पता नही है और आपने शादी फिक्स कर दी

पिताजी-उसने सब बता दिया था

जयसिंघ- उसने बता दिया और आपने मान लिया ,पूछताछ करने का नही सोचा

माजी- शादी नही की है सिर्फ़ सगाई की है , , तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे शादी कर दी हो

जयसिंघ- क्या पता कल ही शादी करवा देते

पिताजी-तू क्या समझता है मैं क्या ऐसे ही शादी करवा दूँगा

जयसिंघ- आपका क्या भरोसा , कल को पता चल जाएगा कि नेहा नीता की शादी भी हो गयी

पिताजी-जयसिंघ , तू ये मत भूल कि किस से बात कर रहा है

जयसिंघ- क्या ग़लत कहा मैं ने

जयसिंघ- बोलिए

माजी- तू कहना क्या चाहता है

जयसिंघ- अब बोलने के लिए रखा ही क्या है , मैं नेहा नीता को यहाँ रहने ही नही दूँगा , मैं उनको अपने साथ लेकर जाउन्गा , वो यहाँ रहेगी तो उनके साथ भी आप ऐसा ही कुछ करेंगे

पिताजी-वो कही नही जाएँगी

जयसिंघ- वो यहाँ रही तो आप उनका भी फ्यूचर खराब कर देंगे , वो मेरे साथ शहर3 जाएँगी अभी के अभी

पिताजी-जयसिंघ

जयसिंघ- नेहा नीता छोटू अपने कपड़े पॅक करो

नेहा नीता अपनी जगह से नही हिली

जयसिंघ- सुना नही मैं ने क्या कहा

नेहा- हमे नही जाना उस शहर3 ,उस शहर3 ने मेरे भैया को खा लिया है

नीता- हमारे भैया को खा गया तो हम भी वहाँ भूल जाएँगे कि हम कौन है

जयसिंघ- तुम्हारा फ्यूचर वहाँ शहर3 मे है , यहाँ गाँव मे रहोगी तो कुछ नही होगा

नेहा- हमारी फॅमिली यहाँ गाँव मे है

जयसिंघ- फॅमिली बनाई जाती है

नीता- हमे नही बनानी हम यही खुश है अपने पिताजी के पास

जयसिंघ- नेहा तू तो समझ कि यहा गाँव मे कुछ नही है

नेहा- यहाँ गाँव मे मेरी फॅमिली है ,यहाँ मेरे पिताजी है मेरी माँ है मेरे भाई है मेरी दीदी है

नीता- शहर 3 मे किसी के पास अपनो के लिए भी टाइम नही होता

नेहा - मैं यही ठीक हूँ

पिताजी- जयसिंघ मैं ने कहा था कि खुद की पहचान को भूलना मत , पर तुम भूल गये कि तुम कौन हो , पर हमने नही भूले की हम क्या है , हमारे खून मे क्या है ये हम नही भूले है

जयसिंघ-मुझे पता है मैं कौन हूँ , पर आप मुझे अपने जैसा बनाना चाहते है , नही बन सकता मैं आपके जैसा , आप समझते क्यू नही है , नही रहना है मुझे गाँव मे

पिताजी- मैं ने तुझे कभी नही कहा , तुझे जो करना था वो करने दिया

जयसिंघ- भीक माँगनी पड़ी हर बार मुझे

पिताजी-हमारे प्यार को तू भीक बोल रहा है

जयसिंघ- मेरे कहने का मतलब था कि.....

पिताजी-तू क्या कहना चाहता है मैं समझ गया हूँ

जयसिंघ- आप कभी नही समझोगे , कोई मुझे नही समझता

पिताजी-तेरा बाप हूँ मैं और मैं तुझे नही समझूंगा

जयसिंघ- आप ने कभी पूछा मुझे कि मुझे क्या करना है ,

जयसिंघ- कभी जानने की कॉसिश की , मुझे क्या चाहिए

जयसिंघ- कभी मुझे पूछा कि मुझे क्या अच्छा लगता है

जयसिंघ- कभी पूछा मुझे कि मेरे सपने क्या है

जयसिंघ- कभी नही पूछा , आपको तो लगता है मैं आपके जैसा बन जाउ , आप जैसा मैं नही बन सकता है , आप ने पढ़ाई की फिर भी इस गाँव मे हो मैं नही कर सकता ऐसा ,

पिताजी-तुम कर भी नही सकते

जयसिंघ- आप के रास्ते अलग है मेरे रास्ते अलग है ,

पिताजी-तूने पहले ही अपना रास्ता सोच रखा था

जयसिंघ- यही तो , आप ने मुझे कभी समझा ही नही , रास्ते अलग थे पर मंज़िल एक थी , ये आप समझ नही पाए

पिताजी-तूने मुझे हर बार निराश किया ,

जयसिंघ- क्यू कि आपकी सोच अलग थी और मेरी , आप समझे ही नही कि हम दोनो की जेनरेशन अलग है , रास्ते अलग तो होंगे ही पर मंज़िल एक थी

पिताजी-पर तू उस रास्ते पे अकेला चलना चाहता था

जयसिंघ- आप को ऐसा लगता है , रुकिये अभी दिखाता हूँ मैं क्या करना चाहता था

पिताजी-क्या दिखाएगा , वो पेपर लेके आना

माजी- जाने दीजिए ना

पिताजी- मैं ने क्या कहा सुना नही तुमने .

माजी-जी

जयसिंघ बॅग खोलते खोलते रुक गया

माँ एक पेपर लेकर आ गयी

पिताजी ने न्यूज़ पेपर अपने हाथ मे लिया

पिताजी- तू तो अँधा हो गया है , मैं ही पढ़ कर दिखाता हूँ

आज का उबरता हुआ सितारा ,

ये कोई फिल्म स्टार नही है ,

या किसी बड़े बाप का बेटा ,

ये है जयसिंघ

एक छोटे से गाँव से इस शहर3 मे अपनी तकदीर बनाने आया हुआ नौजवान

ऐसा नौजवान जिसने अपनी स्मार्टनेस ने पूरे शहर3 को अपना बना लिया

हर किसी के ज़बान पर उसका ही नाम है

इतने कम समय मे एक बंद कंपनी को शुरू कर दिया

शुरू ही नही , इतनी उँचाई तक ले गया कि सब बिज़्नेसमॅन इसकी बात कर रहे है

ये आने वाले सालो मे एल्कट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की पहचान होगा

जयसिंघ जयसिंघ जयसिंघ

पिताजी-ये तेरा सच तो मुझे कब का पता है ,

माजी- जयसिंघ तूने हमसे झूठ कहा

पिताजी- तुझे कभी रोका नही मैं ने , जो तूने चाहा वो दिया तुझे , फिर भी तूने इतना बड़ा झूठ छुपाया

माजी- जयसिंघ तूने मुझे भी नही नही बताया

पिताजी-तुझे शहर3 मे रहना था तो बोल देता , मैं रोकता नही , पर तुनमे अपने पिताजी के प्यार पे विश्वास ही नही था ,जिस से तूने हमसे इतना बड़ा झूठ बोला

पिताजी-मैं तो उसी दिन समझ गया था कि तू कभी वापस नही आएगा ,पर ये नही पता था कि तू झूठ भी बोलने लगा है , झूठ किस से बोला , अपने माता पिता से ,क्या मिला झूठ बोल कर , कुछ पैसे , पर क्या खोया ये नही दिखा तुझे , तूने हमारे प्यार को खो दिया है

माजी- क्या हम तुझे रोकते , ना पहले कभी रोका था और ना अब रोकते , पर तूने पहले सोच लिया था कि तुझे क्या करना है

पिताजी- हम यहाँ तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे , और तू वहाँ पार्टी कर रहा था

माजी- बड़े बेटे के होते हुए तेरे पिताजी को सगाई करवानी पड़ी , क्यूँ ये नही सोचा तूने ,तुझे बताते तो एक और झूठ बोल देता ,

पिताजी- तुझसे तो अच्छा छोटू है ,

माजी- छोटू जैसा भी है पर इसने कभी हमारा दिल नही दुखाया

पिताजी-तूने अपने सपने पूरे करने के लिए झूठ बोल कर ये बता दिया कि तुझे अपने सपने प्यारे है हम नही , सपने देखना अच्छी बात है पर उसे पूरा करना उस से भी अच्छी बात है , पर उन सपनो को पूरा करने के लिए प्यार का गला घोंट दिया है तूने , ऐसे सपने पूरे हो के भी किसी काम नही आते जिस से प्यार की चिता जली हो

माजी- छोटू ने कल तेरी कमी महसूस होने नही दी , हमे लगता था कि छोटू को तुझे कुछ सिखाना चाहिए , पर हम ग़लत थे , तुझे छोटू से सीखना चाहिए कि बेटे के फ़र्ज़ पूरे कैसे किए जाते है

पिताजी-तुझे शहर 3 मे रहना हैना है वही रह , कर अपने सपने पूरे ,

माजी- जा तू शहर3 मे

पिताजी-मुझे लगा था कि तू आएगा तो हम मिलके पूजा की शादी करेंगे पर तू तो शादी तोड़ना चाहता है , अपनी बहन की ख़ुसीया गम मे बदलना चाहता है

माजी- पूजा जो कल खुश थी आज तेरी वजह से रो रही है

पिताजी - तूने हम सबको रुला दिया

माजी- तेरी वजह से आज मैं रोई हूँ , ये याद रखना ,

छोटू - मुझे नही चाहिए ये गिफ्ट , आप बुरे हो , आपने माँ को रुलाया है

पिताजी- जब तक छोटू है तब तक मैं अकेला नही हूँ ,

माजी-पूजा चुप हो जा

पूजा - ये सब मेरी वजह से हुआ है ,

पिताजी-अच्छा हुआ , ये कभी ना कभी होना था आज हो गया अच्छा हुआ

जयसिंघ को भी बुरा लग रहा था

पर इस मे किसी की ग़लती थी कुछ कह नही सकते

जयसिंघ ने सही कहा हर जेनरेशन को सोच अलग होती

भले उनके रास्ते अलग हो पर मंज़िल एक होती है

पिताजी भी फॅमिली के अच्छे के लिए सोच रहा था

और जयसिंघ ने भी सबके अच्छे के लिए सोचा था
 
फ्लॅशबॅक 832ह

जो पिताजी कभी करना नही चाहते थे वो आज कर दिया

पिताजी ने जयसिंघ को थप्पड़ मार दिया

थप्पड़ जयसिंघ को मारा था पर दर्द पिताजी को हुआ

जयसिंघ को इस की उम्मीद नही थी

माजी- ये आप ने क्या किया

पिताजी- तुम चुप रहो

पूजा- सब मेरी वजह से हुआ है

.और पूजा रोने लगी ,

माजी- तूने कुछ नही किया ,

पूजा- ना मैं पिताजी से सगाई की बात करती और ना ये सब होता

माजी- तूने कुछ ग़लत नही किया

नेहा - दीदी आपको तो आपका राजकुमार मिला था ऐसे मे उसे आप जल्द से जल्द अपना बनाना चाहती थी

नीता- पिताजी ने हमारा भी इंतज़ार नही किया मतलब आप करेक्ट थी ,आप खुश थी

नेहा- कल तक आप कितनी खुश थी , और आज

नीता- भैया आपने हमारी दीदी को रुलाया है ,

नेहा-भैया आप बुरे हो

माजी- नेहा नीता चुप रहो

नेहा- पिताजी ने कभी हमे मारा नही और आज उनको हाथ उठाना पड़ा ,तो ग़लत कौन है

नीता- भैया , पिताजी कभी ग़लत नही हो सकते

नेहा- पिताजी हमारे भले का सोचते है ,हमे कितने प्यार करते है

नीता- ऐसे मे वो हमारे बारे मे ग़लत कैसे सोच सकते है ,

नेहा- आप से ज़्यादा पिताजी को हमारी चिंता है

नीता- उनको पता है हमारी खुशिया किस मे है

नेहा- उनको पता है हमे क्या चाहिए

नीता- पिताजी को पता है कि हमारा जीवन साथी कैसा होना चाहिए

नेहा- पूजा दीदी का प्यार आपको नही दिखा

नीता- पूजा दीदी के चेहरे की खुशी देखते ना आप तब समझते कि पूजा दीदी की खुशी किसमे छुपी है

नेहा- कल मैं ने नयी पूजा दीदी को देखा था

नीता- ऐसा लगा कि पूजा दीदी को जिसका इंतज़ार था वो मिल गया है

नेहा- पूजा दीदी को जिसका इंतज़ार था वो मिल गया

नीता- पूजा दीदी के इतने इंतज़ार के बाद उनका राजकुमार मिल गया तो उससे रुका नही गया

नेहा- कैसे रुकती , उनका डर था कि उनका राजकुमार उनसे दूर ना हो जाए

नीता- इस डर को ख़तम करने के लिए पिताजी को कहा कि सगाई कर दीजिए

नेहा- पिताजी आप से बड़े है उनको भी पता है शादी करने से पहले क्या देखना चाहिए

नीता- पिताजी ने आप से ज़्यादा दुनिया देखी है

नेहा-पिताजी सिर्फ़ पूजा दीदी की खुशी देखी

नीता- पूजा दीदी के खुशी के सामने पिताजी को कुछ नही दिखा

नेहा- ऐसे पिता पाने के लिए किस्मत अच्छी होनी चाहिए

नीता- प्यार का नाम सुनते कुछ लोग अपनी बेटी को मार डालते है , प्यार ना मिलने मे शूसाइड कर लेते है , क्या पिताजी को इसका डर नही होगा कि उनके ना करने पे पूजा दीदी ने कुछ कर लिया तो , पूजा दीदी का तो आपको पता है , वो जो चाहती है वो नही हुआ तो क्या करती है , फिर भी आप पिताजी को ग़लत मान रहे है

नेहा- इस लिए पिताजी ने पूजा दीदी की सगाई कर दी

नीता- हमारा भी इंतज़ार नही किया

नेहा- क्यू नही किया , क्यू कि वो भी पूजा दीदी के लिए उस से अच्छा जीवन साथी नही ढूँढ पाते

नीता-दीदी तो दीवानी हो गयी

नेहा- पिताजी ने वही किया जो एक पिता को करना चाहिए

नीता- और अभी तो सिर्फ़ सगाई हुई है

नेहा- शादी तक सब कुछ पता किया जा सकता है कि जीजू कैसे है

नीता- किसी किसी के बारे मे कुछ पता करने की ज़रूरत नही होती , उनके चेहरे का तेज सब कुछ बता देता है

नेहा- दीदी ने वही देख लिए ,

नीता- दीदी ने कुछ ग़लत नही किया

नेहा- ना पिताजी ने कुछ ग़लत किया ,

नीता - आप ने अपना फ्यूचर बना दिया

नेहा- हम हमारा फ्यूचर बनाएँगे , जैसा पिताजी ने हमे सिखाया है

जयसिंघ चुप चाप सुन रहा था

नेहा - पिताजी हम तीनो को टीचर बनाना चाहते है

नीता- गाँव के स्कूल का टीचर बनाना चाहते है ,

नेहा - हम भी बनेगे , लेकिन पिताजी ने इसके लिए हंपे कोई दबाव नही डाला कि हमे टीचर ही बनना चाहिए ,

नीता- पिताजी ने तो कहा कि हमे जो करना है हम कर सकती है

नेहा - नीता और मैं पढ़ाई मे तेज है , पर पूजा दीदी हमारी जैसी नही है ,

नीता- छोटू भी आपकी तरह पढ़ाई मे तेज नही है ,

नेहा - हाथ की पाँचो उंगली एक जैसी नही होती है , ये आपने ही हमे सिखाया था

नीता- और आप ही भूल गये

नेहा- पूजा दीदी और हम अलग है

नीता - पूजा दीदी के सपने अलग है , हमरे सपने अलग है

नेहा- हम सपने देखते है कि हम टीचर बन गयी है और गाँव के स्कूल मे पढ़ा रहे है

नीता - और पूजा दीदी सपने देखती है अपने राजकुमार के , कि वो ऐसा होगा वैसा होगा

नेहा- ऐसे मे पूजा दीदी को उनका फ्यूचर अपने राजकुमार मे दिखता है

नीता - पिताजी ने पूजा दीदी का सपना पूरा किया है , ऐसे मे आप ही बताइए कि पूजा दीदी पे ज़ोर डालना चाहिए था कि वो टीचर ही बने

नेहा- क्या पिताजी को पूजा दीदी की पिटाई करनी चाहिए थी और उसको बोलना चाहिए था कि तू टीचर ही बनेगी

नीता - पिताजी ऐसे नही है

नेहा- उनको तो हमारी ख़ुसीया प्यारी है

नीता - नही पढ़ना होगा पूजा दीदी को आगे तो कोई कुछ नही कर सकता , आपने ही कहा था कि पढ़ाई किसी के ज़ोर जबर्जस्ती से नही की जाती ,

नेहा- पिताजी आप से ज़्यादा अच्छे से हमे जानते है

नीता - उनको पता है कि पूजा दीदी की शादी कब करनी चाहिए और हमारी कब , हम पढ़ना चाहते है और पूजा दीदी शादी करना चाहती है ,

नेहा- सब एक जैसा नही होता

नीता - और किसी को तुम जो चाहते हो वैसा करने को कहा तो ये किस वजह से ठीक होगा

नेहा- आपको भी पिताजी ने कभी ये नही कहा कि आपको उनके जैसे गाँव मे रहना चाहिए

नीता - पिताजी ने आपको शहर3 जाने नही दिया ऐसा आपको लगता है

नेहा- पिताजी तो आपके पहली बार कहते आपको शहर3 भेज देते पर ऐसा करने से बच्चे बिगड़ जाते है , पिताजी ने ये सोचा होगा, सब कुछ माँगते मिल जाए तो उसका अलग असर होता है

नीता - पिताजी ने आपको अहसास दिलाया कि आप कौन हो क्यूँ शहर3 जा रहे हो , किसी वजह से शहर3 जा रहे हो , क्या कुर्बानी दे रहे हो आप शहर3 जाने के लिए

नेहा- ये बात आपको याद रही होगी तभी आप अपना सपना पूरा कर पाए ना

नीता - आप तो शहर3 चले गये पर यहाँ हमारा क्या हुआ ये पता है आपको

नेहा- आप यहाँ थे तो छोटू आपके डर की वजह से पढ़ाई कर लेता थॅंक्स

नीता - पर आपके शहर3 जाते ही छोटू का डर ख़तम हो गया और वो फैल हो गया क्लास मे

नेहा- आपने तो वहाँ शहर3 मे टॉप किया होगा पर यहाँ गाँव मे छोटू तो फैल हो गया

नीता - नही है छोटू आपके जैसा , उसे पढ़ाई अच्छी नही लगती , नही है पूजा दीदी हमारी जैसी , नही पढ़ना होगा उनको ,, क्या आपने बात की पूजा दीदी से , क्या पूछा कि उनको क्या करना है , बस आपने सोचा कि पूजा दीदी का फ्यूचर ऐसा होना चाहिए और लग गये पिताजी से झगड़ा करने के लिए

नेहा- हम पिताजी के हाथ की पाँच उंगलिया है , हम पाचो अलग है , हम एक जैसे नही है कोई एक जैसा नही होता

नीता - हम ताक़त है पिताजी की , हमारे पिताजी जैसे कोई नही है

नेहा- आपको पता है गाँव मे एक लड़की को छोटी कास्ट के लड़के से प्यार हो गया और उसके पिता ने मना किया शादी से तो उस लड़की ने शूसाइड कर लिया , 1 हफ्ते पहले ये घटना हुई थी

नीता - पिताजी तीन लड़कियो के पिता है

नेहा- उनको उस घटना से डर नही लगा होगा कि उनकी बेटियो ने ऐसा किया तो उनको क्या करना चाहिए

नीता - पिताजी भले गाँव के पहलवान है पर उनको भी हमारे लिए डर लगा रहता है

नेहा- पिताजी बस एक बात सोच कर नही चलते , उनको सब के बारे मे सोचना होता है , और हर बार उनको नया सोचना पड़ता है कि अब क्या करे, ऐसी बहुत सी बाते होगी जिस से पिताजी ने पूजा दीदी की सगाई कर दी , राकेश और पूजा दीदी के बारे मे पूरे गाँव को पता है , भले पूजा दीदी राकेश को प्यार नही करती है पर गाँव वालो को तो लगता है कि दोनो मे कुछ चल रहा है , ऐसे मे राकेश ने कुछ उल्टा सीधा किया तो , भले राकेश डरपोक हो , पिताजी से डरता हो पर कुछ भी हो सकता है , ऐसी बहुत सी बाते है जो आपको पता नही है क्यूँ कि आप यहाँ थे ही नही ,

नीता- पिछले साल पूजा दीदी ने शहर मे एक लड़के की पिटाई की थी ........

नेहा-बहुत सी बाते है , क्या क्या बताएँगे आपको

नीता - मुझे नही लगता कि हमारे पिताजी ने पूजा दीदी की शादी फिक्स करके कुछ ग़लत किया हो

नेहा- दूसरे घरो मे तो लड़की को दूल्हे को दिखाया भी नही जाता , डाइरेक्ट सुहागरात को एक दूसरे की देखता है , पर यहाँ तो पिताजी ने पूजा दीदी की पसंद को हाँ कहा

नीता - आप ही कहते हो कि लड़की ने लड़के को पसंद करना चाहिए तब शादी करनी चाहिए

नेहा- वही तो किया पिताजी ने , थोड़ा जल्दी किया पर अब भी जीजाजी के बारे मे पता लिया जा सकता है

नीता - हम तो आज भी आपकी बताई हुई बातों पे चलते है

नेहा- पर आप उन बतो को भूल गये है

नीता - आप भूल गये कि आप किस से बात कर रहे थे

नेहा- माँ हमसे ज़्यादा आपको प्यार करती है

नेहा- माँ हमसे ज़्यादा आपको प्यार करती है , फिर क्यूँ उनको आप को थप्पड़ मारने का दिल किया ,

नीता - भैया , आपने कहा था कि कभी झूठ मत बोलना

नेहा- और आपने हमसे झूठ कहा , क्या मिला आपनो झूठ बोल कर

नेहा नीता की बाते सुनते ही जयसुंघ और टूट गया

उसको लगा कि उसकी बहनें उसका साथ देंगी

पर ऐसा नही हुआ

नेहा नीता ने पूजा दीदी और पिताजी का साथ दिया

नेहा नीता की बातों से पूजा का रोना बंद हो गया

नेहा नीता ने जो कहा उस से सुनकर ज्यसिंघ अंदर ही अंदर रो रहा था .

नेहा नीता ने सही कहा

एक भाई के नज़रिए और पिताजी के नज़रिए मे फरक होता है

एक पिता को किस तरह सोचना चाहिए ये जयसिंघ समझ ही नही पाया

नेहा नीता छोटी होकर ये समझ गयी कि पिताजी ने क्या सोच कर पूजा की शादी तय की होगी

जयसिंघ पढ़ाई की दुनिया मे 1स्ट था

पर रियल दुनिया मे मे उसे बहुत कुछ सीखना बाकी था

कुछ बाते हम तब तक समझ ही नही पाते जान तक हम उस जगह या उस सिचुयेशन से गुज़रते नही है

हम अपनी राय दे सकते है , राय देना आसान होता है पर पिताजी के जगह पर जयसिंघ होता तो क्या करता अपने बच्चों को मार डालता क्यूँ कि उन्होने प्यार किया है , या उनके नापसंद लड़के को पसंद किया है इस लिए शादी नही करवाता , ,या अपने सपने पूरे करने के लिए ज़ोर जबर्जस्ती करता , या उनको प्यार से समझाता ,या कोई रास्ता ना मिलने पे उनकी बात मान जाता और शादी करवा देता

इस बात पे जयसिंघ सोचता रह गया

नेहा नीता ने जो कहा वो ग़लत भी तो नही था

जयसिंघ ने अपने सपने के बारे मे सोचा पर पूजा से पूछा भी नही कि उसके सपने क्या है

पर जयसिंघ अंदर ही अंदर रो रहा था

उसको लगा कि वो खुद सच बता देगा कि वो शहर3 मे कंपनी चला रहा है

पर ये बात तो पिताजी को पता है

फिर भी पिताजी ने उसको वापस बुलाया नही

उसे शहर3 मे रहने दिया

क्यू कि पिताजी को उसको खुश देखना था

लेकिन जयसिंघ की क्या ग़लती थी

उसको भी तो फिकर है पूजा की

कितना कुछ सोचा था कि वो पूजा को ऐसा बनाएगा , इतनी खुशिया देगा , उसके सारे सपने पूरे करेगा

पर यहाँ तो पूजा किसी और के साथ सपने देखने लगी है .

जयसिंघ टूट गया

हाँ वो थोड़ा गुस्से मे आकर कुछ भी बोल गया पर इतना तो होता ही है

जयसिंघ यहाँ रुकेगा तो किस के लिए

जयसिंघ का दिमाग़ कह रहा था कि यहाँ से वापस शहर3 चलते है

जयसिंघ का दिल कह रहा था कि ये हमारे अपने है

अपनो मे ऐसी बाते तो होती रहती है इसका ये मतलब नही है रिस्ता ही तोड़ दिया जाए

जयसिंघ अपने दिल और दिमाग़ के बीच मे फस चुका था

अगेर वो यहाँ से वापस चला गया तो क्या होगा

शहर3 मे हमेशा के लिए रह पाएँगे

वो अपने बचे हुए सपने को पूरा कर पाएगा

एक आज़ाद पंछी बन जाएगा

पिताजी की टेन्षन ख़तम हो जाएँगी

पर यहाँ से जाने के ड्राबॅक भी थे

जयसिंघ चला गया तो लोग क्या कहेंगे

शादी मे बड़े बेटे को ना देख कर लोग क्या कहेंगे

पूजा के ससुराल वालो को लगेगा कि पूजा की फॅमिली अच्छी नही है

पूजा को ये ताना मारा जाएगा कि उसका भाई शादी मे नही आया था

बड़े बेटे के होते हुए पिताजी काम करेंगे ये कैसा दिखेगा

जयसिंघ को जो करना था वो सोच समझ कर करना था

वो पहले इतना भरा बुला कह कर सबकी नज़रो मे उतर गया था

अब और वो ऐसा कुछ नही करना चाहता कि उसकी शकल देखना भी कोई पसंद ना करे

जयसिंघ ने रुकने का फ़ैसला किया

पिताजी को लगा कि जयसिंघ वापस चला जाएगा

माँ जयसिंघ पे गुस्सा तो हुई पर उनको डर लग रहा था कि जयसिंघ गुस्से मे घर छोड़ कर गया तो

पूजा अपने बड़े भाई के बिना शादी कैसे करेगी

नेहा नीता शादी के महॉल मे रोएंगी तो क्या अच्छा लगेगा

छोटू तय्यार था शादी को अपने कंधो पे उठाने को

सगाई मे काम करके उसने इतनी तारीफ जो सुनी थी

पर हुआ सबकी सोच के उल्टा

जयसिंघ भी खुद को भुला नही था

वो था तो योगेंद्रसिंघ का बेटा

योगेंद्रसिंघ का बेटा अपनी ज़िम्मेदारी से दूर नही भाग सकता

उसको सब कैसा भी समझ ले पर वो वैसा नही था

वो अपनी फॅमिली की इज़्ज़त को कुछ होने नही दे सकता

जयसिंघ अपने बॅग लेकर स्टोर रूम मे चला गया
 
फ्लॅशबॅक 832 !

पूजा नेहा नीता ने उसके सपने को तोड़ दिए

छोटू ने भी उसको बुरा कहा

जयसिंघ को समझने वाला कोई नही था

उसकी तरह कोई सोचने वाला नही था

जयसिंघ पूरी तरह से बिखर गया था

अब वो यहाँ कैसे रहता

यहाँ तो उसको किसी को फिकर ही नही है

उसने पूजा के भले का सोचा पर यहाँ तो सब उल्टा हो गया

पिताजी ने भी जयसिंघ को थप्पड़ मार दिया

इतनी प्यार करने वाली माँ की नज़रों से उतर गया जयसिंघ

जयसिंघ का रास्ता ग़लत था कि नही ये उसको बताने वाला कोई नही था

जयसिंघ कुछ भी तो ग़लत नही किया

हाँ वो थोड़ा गुआस्से मे आकर कुछ भी बोल गया पर इतना तो होता ही है

जयसिंघ यहाँ रुकेगा तो किस के लिए

जयसिंघ का दिमाग़ कह रहा था कि यहाँ से वापस शहर3 चलते है

जयसिंघ का दिल कह रहा था कि ये हमारे अपने है

अपनो मे ऐसी बाते तो होती रहती है इसका ये मतलब नही है रिस्ता ही तोड़ दिया जाए

जयसिंघ अपने दिल और दिमाग़ के बीच मे फस चुका था

अगेर वो यहाँ से वापस चला गया तो क्या होगा

शहर3 मे हमेशा के लिए रह पाएँगे

वो अपने बचे हुए सपने को पूरा कर पाएगा

एक आज़ाद पंछी बन जाएगा

पिताजी की टेन्षन ख़तम हो जाएगी

पर यहाँ से जाने के ड्राबॅक भी थे

जयसिंघ चला गया तो लोग क्या कहेंगे

शादी मे बड़े बेटे को ना देख कर लोग क्या कहेंगे

पूजा के ससुराल वालो को लगेगा कि पूजा की फॅमिली अच्छी नही है

पूजा को ये ताना मारा जाएगा कि उसका भाई शादी मे नही आया था

बड़े बेटे के होते हुए पिताजी काम करेंगे ये कैसा दिखेगा

जयसिंघ को जो करना था वो सोच समझ कर करना था

वो पहले इतना भरा बुला कह कर सबकी नज़रो मे उतर गया था

अब और वो ऐसा कुछ नही करना चाहता कि उसकी शकल देखना भी कोई पसंद ना करे

जयसिंघ ने रुकने का फ़ैसला किया

पिताजी को लगी कि जयसिंघ वापस चला जाएगा

माँ जयसिंघ पे गुस्सा तो हुई पर उनको डर लग रहा था कि जयसिंघ गुस्से मे घर छोड़ कर गया तो

पूजा अपने बड़े भाई के बिना शादी कैसे करेगी

नेहा नीता शादी के महॉल मे रोएंगी तो क्या अच्छा लगेगा

छोटू तय्यार था शादी को अपने कंधो पे उठाने को

सगाई मे काम करके उसने इतनी तारीफ जो सुनी थी

पर हुआ सबकी सोच के उल्टा

जयसिंघ भी तक खुद को भुला नही था

वो था तो योगेंद्रसिंघ का बेटा

योगेंद्रसिंघ का बेटा खेल के मैदान से भाग नही सकता

अपनी ज़िम्मेदारी से दूर नही भाग सकता

उसको सब कैसा भी समझ ले पर वो वैसा नही था

वो अपने फॅमिली की इजाज़त को कुछ होने नही दे सकता

जयसिंघ अपने बॅग लेकर स्टोर रूम मे चला गया

बाकी कमरे तो बुक थे

छोटू को भी अब हॉल मे सोना होगा क्यूँ कि पूजा दीदी की शादी जो थी

जयसिंघ स्टोर रूम मे चला गया

पिताजी और माँ जयसिंघ को देखते रह गये

इतना कुछ हो जाने के बाद तो जयसिंघ को वापस जाना चाहिए था

पर जयसिंघ चुप चाप स्टोर रूम मे चला गया

जयसिंघ ने स्टोर रूम मे जाते ही खुद को बंद कर लिया

डोर बंद होते ही जयसिंघ इतना रोया कि वो अपने सारे आसू ख़तम कर देना चाहता हो

बाकी सब भी चुप चाप अपने अपने कमरे मे चले गये

जैसे किसी की डेत हुई हो और सब उसी दुख से बाहर निकलने के लिए अकेला रहने चाहते हो

पिताजी को नेहा नीता की बाते सुनकर गर्व महसूस हुआ कि उनकी बेटियाँ जयसिंघ जैसी नही है

नेहा नीता अच्छी बच्ची की तरह अपनी पूजा दीदी के साथ उनके कमरे मे गयी

नेहा नीता जितनी मस्ती करती थी उतनी ही वो समझदार थी

नेहा नीता अब बच्ची नही रही ये सबको पता चल गया

कब कहाँ कैसे रहना है क्या बोलना है उनको पता था

नेहा नीता को पता था कि ये वक्त पूजा दीदी के लिए थोड़ा मुश्किल होगा , इस लिए वो अपनी दीदी के साथ रह कर उसको हिम्मत दे रही थी

छोटू तो बाहर चला गया अपने दोस्तो से मिलने

छोटू भी कमाल का लड़का था

उसके 2 दोस्त थे

एक की शादी हो गयी थी , दूसरा सरपंच का बेटा उस से बड़ा था ,

छोटू उनके साथ खूब मस्ती करता रहा

और बहुत कुछ सीख रहा था

पूरा दिन उस घर मे सन्नाटा रहा

ना किसी ने खाना खाया और ना किसी ने कुछ एक दूसरे से बात की

माँ का भी बहुत बुरा हाल था

अपने जान से प्यारे बेटे पे गुस्सा करके बस रोए जा रही थी

अपनी जान से प्यारे बेटे पे गुस्सा करके बस रोए जा रही थी

पिताजी चेयर पे बैठ कर फॅमिली के फ्यूचर के बारे मे सोच रहे थे

ऐसे मे नेहा नीता फिर से आगे आई

दिन भर तो खाना नही खाया तो चल जाएगा

पर रात मे खाना तो पड़ेगा

नेहा नीता ने रशोई घर ने जाकर खाना बना लिया

.छोटू तो खाना बनते ही खाने लगा

छोटू जैसा होना चाहिए , कोई कुछ भी कहे , खाने पे कभी गुस्सा भी निकलना ,

नेहा नीता ने सबके लिए एक एक प्लेट बना दी

पूजा ने तो खाने से मना किया

पर नेहा नीता को पता था की पूजा दीदी को खाना कैसे खिलाना है

नेहा - नीता पता है जीजाजी ने मुझे बताया कि उनको भिंडी की सब्जी बहुत पसंद है ,

नीता- अच्छा

नेहा - हाँ , और कहा कि अगेर पूजा दीदी भिंडी की सब्जी खाएगी तो वो भी भिंडी की तरह अच्छी फिगर वाली बन जाएगी फिर तो जीजाजी पूजा दीदी को ज़्यादा प्यार करेंगे

नेहा नीता ने जीजाजी की बातों से पूजा दीदी को खाना खिला दिया

फिर नेहा नीता पिताजी और माँ के पास गयी

नेहा पिताजी के पास खाना लेकर गयी

नेहा - पिताजी आपने सुबह से कुछ नही खाया , कुछ खा लीजिए

पिताजी - तुम खा लो ,मुझे भूक नही है

नेहा - जब तक आप नही खाएँगे तब तक मैं भी नही खाउन्गी ये आपको पता है

पिताजी- तू खा ले

नेहा - एक नीवाला आप खा लो फिर मैं भी खा लूँगी

पिताजी- तूने खाना खाया तो मेरा पेट भर जाएगा, जाओ तुम खा लो

नेहा - आज तो मैं भी कुछ नही खाउन्गी , सुबह से कुछ नही खाया है अभी भी नही खाउन्गी , रात भर पेट पकड़ कर सो जाउन्गी

पिताजी- तूने कुछ नही खाया

नेहा - आपके बिना मुझे खाना जहर जैसा लगता है

और नेहा ने एक नीवाला पिताजी के सामने ले गयी

नेहा - पिताजी खा लो ना

नेहा की बात सुनते पिताजी के आँखो मे पानी आ गया और पिताजी खाना खाने लगे

नेहा पे अपने तरीके से पिताजी को खाना खिलाया

नेहा ने अपने पिताजी को एक माँ बेटे जैसे खाना खिलाया

अब बारी थी माँ की

नीता माँ से बात कर रही थी पर कोई फ़ायदा नही हुआ

माँ थी कि बस गुम्सुम सी बैठी थी

नेहा - नीता छोटू कहाँ है उसने खाना नही खाया है

नीता - छोटू तो बेड पर लेट कर रो रहा है

नेहा - रो रहा है क्यूँ

नीता - छोटू को भूक लगी है

नेहा - खाना तो दिया था ना छोटू को फिर

नीता- छोटू कह रहा था कि जब तक माँ नही खाएँगी वो भी खाना नही खाएगा

नेहा - फिर तो माँ को खाना खाना होगा

नीता- माँ छोटू के लिए खाना खा लो

माजी- मैं तेरी माँ हूँ मुझसे झूठ बोलके तुझे कुछ नही मिलेगा

नेहा - माँ खा लो ना खाना

माजी- अपने भैया को दिया है

नेहा - वो स्टोर रूम मे बंद है

माजी-जा पहले जे को खाना खिला

नीता- भैया ने आपको इतना कुछ कहा और आप भैया के बारे मे सोच रही है

माजी- तू भी समझेगी , जब तू माँ बनेगी तब समझ जाएगी

नेहा - माँ मैं खिला दूँगी भैया को खाना ,नीता माँ की प्लेट दे मुझे

नीता- माँ के लिए दूसरी प्लेट लाती हूँ मैं

नेहा - माँ मैं भैया को खाना खिला लाती हूँ आप भी खाना खा लो

माजी- नेहा नीता तुम छोटी हो कर कितनी समझदार हो , ऐसी ही रहना

और नेहा जयसिंघ के पास चली गयी
 
फ्लॅशबॅक 832जे

नेहा जयसिंघ के पास चली गयी

.सुबह से जयसिंघ स्टोर रूम मे बंद था

नेहा को पता था कि ये डोर खोलना आसान नही है

नेहा भी अपनी मस्ती से बहुत कुछ सीख गयी थी

नेहा स्टोर रूम के डोर के पास आ गयी

नेहा - भैया जल्दी डोर खोलो माँ की छाती (चेस्ट) मे दुख रहा है , भैया

और नेहा ने इधर उधर भागने की आवाज़ की

नेहा - नीता पिताजी कहाँ जा रहे है

नीता- वैद्य को बुलाने गये है

इतना सुनते जयसिंघ ने डोर खोला

जयसिंघ- कहाँ है माँ

नेहा - हटिए , मुझे अंदर आने दीजिए

जयसिंघ- क्या हुआ माँ को

नेहा - माँ को कुछ नही हुआ अगर आप कुछ खाएँगी नही तो आपको कुछ हो जाएगा

जयसिंघ- तुझे कुछ अकल है , मैं कितना डर गया था

नेहा - आपके पास अकल होती तो मेरी बातों मे नही आते

जयसिंघ - ऐसा मज़ाक नही करते अगेर किसी दिन सच मे माँ बीमार हो गयी तो कोई मदद करने नही आएगा

नेहा - आप आएँगे इतना मुझे पता है

जयसिंघ - इतना यकीन है मुझपे

नेहा - आप.मेरे भैया हो ,आपको मैं अच्छे से जानती हूँ

जयसिंघ - अच्छा , फिर अपने भैया का साथ क्यूँ नही दिया

नेहा - भैया आप से बड़े पिताजी है

जयसिंघ - तो तू ग़लत का साथ देगी

नेहा - पिताजी ग़लत नही थे , अभी हम माँ के पास गये तो पता है माँ ने क्या कहा पहले भैया को खाना खिला दो फिर वो खाएँगी , हमने पूछा कि भैया ने तो ग़लत किया फिर भी आप ऐसा बोल रही हो तो पता है माँ ने क्या कहा , माँ ने कहा कि तू जब माँ बनेगी तब समझेगी , यही बात आप पे भी लागू होती है आप जब पिता बनगए तब आप पिताजी को समझोगे

जयसिंघ - मुझे तो पता ही नही था कि तू इतनी समझदार हो गयी है

नेहा - भैया आपकी बातों से तो लगता है कि आप को कुछ फरक ही नही पड़ा

जयसिंघ - मुझे कैसा लग रहा है ये तुम भी नही समझ सकती , और मैं कितना भी दूसरो पे गुस्सा करूँ पर हूँ तो इस घर बेटा ना

नेहा - मुझपे भी गुस्सा किया तो

जयसिंघ - तो समझ लेना कि तुम्हारा भाई खुद को भूल गया है

नेहा - ऐसा होने मत देना भैया

जयसिंघ - कभी नही होने दूँगा

नेहा - भैया आपने अच्छा किया जो आप यहाँ से वापस नही गये

जयसिंघ - कैसे जाता पगली मेरे बिना तू शादी मे मस्ती कैसे करती , मेरे बिना पूजा शादी कैसे करती

नेहा - पर भैया आपको पिताजी को ऐसा नही बोलना चाहिए था

जयसिंघ - देख मुझे अभी भी लगता है पिताजी ने ग़लती की है

नेहा - अगेर कल आप पूजा दीदी का चेहरा देखते तो ऐसा बिल्कुल ही नही कहते , इतनी खुश थी जैसे जन्नत मिल गयी हो

जयसिंघ - सच

नेहा - हाँ

जयसिंघ - पर ये सब हुआ कैसे

नेहा - मुझे नही पता , मैं तो 2 दिन से मामा के घर गयी हुई थी , नीता के साथ , और कल वापस आई तो देखा कि पूजा दीदी की सगाई हो रही है

जयसिंघ - तेरे लिए भी नही रुके पिताजी

नेहा - वही तो , इसका मतलब आप समझ लो कि पिताजी ने इतनी जल्दी फ़ैसला क्यूँ लिया है

जयसिंघ - मतलब मैं ग़लत हूँ

नेहा - भैया के नज़रिए आप सही हो और पिता के नज़रिए से पिताजी सही है

जयसिंघ - तू अच्छी बाते करने लगी है

नेहा - ऐसा कुछ नही है

जयसिंघ - तेरी शादी हम ऐसी नही होने देंगे ,, सब से बढ़िया करेंगे तेरी शादी

नेहा - बस आप पिताजी से प्यार से रहना फिर जो करना है कर लेना

जयसिंघ - जा अब तू भी खाना खा ले

नेहा - और आप

जयसिंघ - मैं भी खा लूँगा , जा अब

नेहा - भैया

जयसिंघ - हाँ

नेहा- आपको.मेरी और नीता की बातों को बुरा तो नही लगा

जयसिंघ- तुमने कुछ ग़लत नही कहा , हाथ की पाचो उंगली अलग होती है , ना मैं छोटू जैसा बन सकता हूँ और ना छोटू मेरे जैसा बन पाएगा , सबके सपने अलग होते है सबकी सोच अलग होती है ,

नेहा- फिर भी आपने ऐसा क्यूँ किया

जयसिंघ- मैं बड़ा हूँ ना तो मैं ने अपने साथ तुम सबके लिए भी कुछ सपने देखे थे , और उनके टूटने से मैं कंट्रोल मे नही रहा , और ये भूल गया कि जैसे पिताजी ने मेरे लिए कुछ सोचा होगा पर मैं ने अपने सपने पूरे करने चाहिए , वैसे ही मैं ने तुम सबके लिए कुछ सोचा था पर तुम्हारे सपनो के बारे मे भूल गया ,

जयसिंघ-पिताजी ने अपनी सोच को ख़तम किया और मेरे सपने पूरे होने दिए पर जब मैं पिताजी की जगह पे गया और तुम सबके बारे मे सोचा तो मैं ने अपनी सोच को ख़तम नही किया और तुम सब पे अपनी सोच डालनी चाही,

जयसिंघ-तुमने सही कहा था एक भाई की जगह मैं सही था और पिताजी की जगह पिताजी सही थे , जब मैं पिताजी की जगह जाउन्गा तो मैं भी वही करता जो आज पिताजी ने किया है अपने बच्चों की खुशी के बारे मे सोचता

जयसिंघ- मैं ग़लत था , क्यूँ कि आपको किसी और के लिए सपने देखने का अधिकार होता है , पर वो पूरे करना उनपे होता है जिसके लिए सपने देखे जाते है , आप उनपे दबाव नही डाल सकते ,

जयसिंघ- पिताजी ने मेरे लिए सोचा होगा कि मैं उनका वारिस बनूंगा , पर मेरे सपनो के लिए पिताजी ने अपने सपने तोड़ दिए और मेरी खुशी के बारे मे सोचा , वैसे आज पूजा के लिए भी सोचा होगा पिताजी ,

जयसिंघ-चट मँगनी पट ब्याह ऐसा सुना था आज देख भी लिया ,अगर हम पहली नज़र मे ऐसा सोच लेते है कि ये मेरा जनम जनम का साथी है , तो एक दिन मे सगाई क्यूँ नही हो सकती , आज तक हमने ऐसा देखा नही था जिस से हमको लगता है ये कैसे हो सकता है , पर होने को कुछ भी हो सकता है ,करने को कुछ भी किया जा सकता है , कुछ अलग लगता है तो उसका विरोध होता है पर बाद मे उसी का साथ देते है ,

नेहा- भैया ये आप क्या बोल रहे है

जयसिंघ- हमने कभी ऐसा देखा कि ,एक दिन मे लड़का देखा और सगाई हो गयी , नही , इसी लिए अपने आप हम उस बात को मानने को तय्यार नही होते ,

नेहा- ये आपने सही कहा

जयसिंघ- हमने हमेशा देखा है कि मंडप मे एक दूल्हा और एक दुल्हन होती है , पर पिछले साल सामूहिक विवाह हुआ था , जहा पर 50 कपल थे , पहले सभी पंचायत ने विरोध किया , क्यू कि छोटी और उची कास्ट की एक साथ शादी हो रही थी पर बाद मे सबने इसको अपना लिया

नेहा- आपकी बाते बड़ी बड़ी होती है

जयसिंघ- तू भी बड़ी बड़ी बाते करनी सीख गयी है

नेहा- आपको एक बात बताना तो भूल ही गयी

जयसिंघ- क्या ?

नेहा - आपकी खबर जब पिताजी ने न्यूसपेपर मे देखी थी ना तब पूरे गाँव मे लड्डू बाँटे थे , अपने हाथो से घर घर जाकर मिठाई दी थी , कितने खुश थे पिताजी कि आपकी फोटो न्यूज़ पेपर मे आई थी , पर दुख भी था कि आपने झूठ कहा था

नेहा की बात सुनकर जयसिंघ को झटका लगा

और पिताजी ने उसे इतना कुछ कहा पर उसी बात पर खुश होकर गाँव मे मिठाई दी

और जयसिंघ फिर से अपने ख़यालो मे खो गया

नेहा नीता ने अपने प्यार के जादू से सबको खाना खिला दिया
 
फ्लश बॅक 832के

पर जयसिंघ माँ और पिताजी की आँखो मे नींद ही नही आ रही थी

जयसिंघ नेहा की बातों से सोच मे पड़ गया था

जैसे जयसिंघ शांत हुआ उसे समझ मे आ गया कि उसने क्या किया

वो समझ गया कि नेहा सही थी

नेहा की बातें जयसिंघ के दिमाग़ मे घूम रही थी

जब नेहा खाना लेकर आई और जयसिंघ ने नेहा से पूछा कि वो उसके साथ शहर3 चले

नेहा- भैया आप खाना खा लेना वरना माँ भी भूकी रह जाएँगी

जयसिंघ- मैं खाना खा लूँगा , वैसे नेहा तू टीचर बनना चाहती है

नेहा- हाँ

जयसिंघ- डॉक्टर बनोगी

नेहा- नही , मुझसे तकलीफ़ देखी नही जाती , मैं इमोशनल हो जाती हूँ ऐसे मे मैं डॉक्टर बन गयी तो इलाज कैसे करूँगी

जयसिंघ- वो बाद मे सीख लेना

नेहा- नही भैया , मैं तो टीचर ही बनूँगी

जयसिंघ- अच्छा तो शहर3 चलोगि , वहाँ तुम्हे मैं टीचर बना दूँगा ,

नेहा- नही भैया , मैं यही रह कर टीचर बन जाउन्गी

जयसिंघ- शहर3 मे अच्छे अच्छे कॉलेज है

नेहा- भैया मैं वहीं रहना चाहती हूँ इस गाँव मे

जयसिंघ- क्यूँ

नेहा- क्यूँ कि ये हमारा गाँव है

बड़ा भोला बड़ा सादा बड़ा सच्चा है,

आपके शहर से तो मेरा गाँव अच्छा है,

यहाँ मैं मेरे पिता के नाम से जानी जाती हूँ,

और वहाँ मकान नंबर से पहचानी जाती हूँ,

यहाँ फटे कपड़ो में भी तन को ढंपा जाता है,

वहाँ खुले बदन पर टटू छापा जाता है,

वहाँ कोठी है बंगले हैं और कार है,

यहाँ परिवार है और संस्कार हैं,

मत समझो कम हमें कि हम गाँव से आए हैं,

तेरे शहर के बाजार मेरे गाँव ने ही सजाए हैं,

वहाँ इज़्ज़त में सर, सूरज की तरह ढलते हैं,

चल आज हम उसी गाँव में चलते हैं,

उसी गाँव में चलते हैं…

जयसिंघ- ये तुमने लिखा है

नेहा- नही , न्यूज़ पेपर मे पढ़ा था

जयसिंघ- अच्छी पोएम है

नेहा- आप समझ गये ना

जयसिंघ- मुझे पता था कि तुम नही आओगी शहर3 फिर भी मैं ने पूछ लिया

नेहा- भैया , आप यहाँ आपना शहर3 क्यू नही बसा लेते

जयसिंघ- बसा लूँगा ,

जयसिंघ नेहा की बातों के बारे मे सोच रहा था

माँ और पिताजी भी जयसिंघ के बारे मे सोच रहे थे

तीनो एक दूसरे के बारे मे सोच रहे थे

पिताजी और माँ मे कोई बात नही हुई

जैसे माँ गुस्सा हो पिताजी से

पिताजी ने भी खुद को अकेला रखना ठीक समझा

वरना वो ऐसे मूड मे हवेली जाते है

रात काफ़ी हो चुकी थी

पिताजी सोचते सोचते सो गये

पर माँ को जयसिंघ की चिंता सता रही थी

अचानक माँ को एक आहट सुनाई दी

माँ को डर था कि कही जयसिंघ उल्टा सीधा ना कर दे

जवान खून है

इस लिए माँ देखने आई कि जयसिंघ कहाँ है

माँ ने देखा स्टोर रूम का डोर खुला है

माँ स्टोर रूम मे गयी तो वहाँ जयसिंघ नही था

माँ ने मैं डोर की तरफ देखा तो वो अंदर से बंद था मतलब जयसिंघ यही पर है

माँ को रशोई घर से कुछ जलने की स्मेल आ गयी

माँ ने बिना वक्त गवाए रशोई घर मे पैर रख दिया

रशोई घर मे जयसिंघ कुछ चीज़े जला रहा था

माँ- जय

जयसिंघ- माँ ,

माँ - ये क्या कर रहे हो

जयसिंघ - कुछ नही माँ , कुछ चीज़े जला रहा हूँ

माजी - कैसी चीज़े है वो

जयसिंघ - ये जो बुक जल रहे हैना वो नेहा नीता के लिए लाया था ताकि वो डॉक्टर बन जाए

माजी - फिर जला क्यूँ रहे हो

जयसिंघ - अब ये किसी काम के नही है , पिताजी को मेरे सपने अच्छे नही लगते तो उनको जला रहा हूँ

माजी - ऐसा नही है , वो तो खुश है

जयसिंघ - मैं उनको और खुश कर रहा हूँ , ये पेपर क्या है पता है माँ

माजी - कैसे पेपर है

जयसिंघ - पूजा को टीचर बनाना चाहता था मैं , ये उसी का पेपर है , पर उसकी तो शादी हो रही है अब ये किस काम का ,

और पेपर आग मे डाल दिया

माजी - ऐसा क्यूँ कर रहा है

जयसिंघ - ये छोटू के लिए बुक लाया था ताकि वो पढ़ाई मे तेज बन जाए , रात रात भर जाग कर मैं ने ये नोट बनाए थे , पर ये भी किसी काम के नही है क्यू कि पिताजी छोटू को शहर3 जाने नही देंगे

माजी - जय ऐसा मत कर

और जयसिंघ ने वो नोट्स भी जला दिए ,

माजी - ऐसा मत कर जय ,तू अब होश मे नही है

जयसिंघ - आज होश मे आया हूँ माँ

माजी - ऐसी बात मत कर

जयसिंघ - माँ मुझे माफ़ करना , मेरा तुम्हारा दिल दुखाने का कोई इरादा नही था , मुझे बस पूजा की फिकर हो रही थी

माजी - पता है मुझे , तेरे जैसा भाई पूजा को मिला है, पूजा किस्मत वाली है

जयसिंघ - मुझे इतनी अच्छी बहनें मिली है मैं किस्मत वाला हूँ

माजी - तू इन सब चीज़ो को क्यूँ जला रहा है

जयसिंघ - क्यू कि ये चीज़े मुझे याद दिलाएँगी कि मेरे सपने टूट गये है इस लिए जला रहा हूँ

माजी - जय , तू अपने पिताजी को समझने की कॉसिश कर

जयसिंघ - उनको समझना मुश्किल है माँ , इस लिए इनको जला रहा हूँ

माजी - तू इस से कुछ साबित नही कर पाएगा

जयसिंघ - मैं बस आपका प्यार वापस पन्ना चाहता हू , ये सपने उसके सामने कुछ नही है

माजी - तेरे सपने क्या है वो तो बता

जयसिंघ - मेरे सपने , जाने दो उनको तो जलना है

माजी - ऐसा मत बोल तूने उनके लिए बहुत मेहनत की है

जयसिंघ - वो मेहनत किस काम की जो पिताजी की खुश ना रख पाए

माजी - तेरे पिताजी तेरे लिए खुश है

जयसिंघ - नेहा ने बताया मुझे

माजी - तू क्यूँ जला रहा है पेपर

जयसिंघ - माँ पता है ये फाइल मे क्या है

माजी - क्या

जयसिंघ - ये है मेरा सपना है , मेरा सपना इस फाइल मे बंद है

माजी - जय रुक जा

जयसिंघ - इनको जलने दो माँ ,

माजी जयसिंघ के पास गयी जयसिंघ को रोक ने के लिए

पर तब तक जयसिंघ ने उस फाइल को आग मे डाल दिया

और रशोई घर से बाहर चला गया

जयसिंघ ने अपने सपने को जला दिया

.और स्टोर रूम मे जाकर रोने लगा

.

जयसिंघ ने ऐसा क्यूँ किया

जयसिंघ ने जो मेहनत की वो आज जल कर राख हो गयी

पूजा को टीचर बनाना , नेहा नीता को डॉक्टर बनाना , छोटू को कलेक्टर बनाना , सब कुछ जल के राख हो गया

पता नही अब जयसिंघ क्या करेगा

किस लिए जिएगा जयसिंघ

ना कोई ऐम ना कोई सपना ,

जयसिंघ करना क्या चाहता था

वो तो कल सुबह पता चलेगा
 
फ्लॅशबॅक 832एल

सुबह कैसी होगी ये कोई सोच भी नही सकता

कल जो हुआ उसके बाद आज की सुबह कुछ खास होने की दुआ कर रहे थे सभी

दुआ किस की कबुल होगी वो सुबह पता चल जाएगा

पिताजी की नींद खुली तो देखा कि माँ कमरे मे नही है

पिताजी माँ को ढूँढते हुए हॉल मे आ गये

पिताजी ने देखा कि माँ नेहा नीता से बात कर रही थी

माँ के हाथो मे पट्टी लगी हुई थी

पिताजी- क्या हुआ तुम्हे

माजी- सुबह टी बना रही थी कि हाथ जल गया

पिताजी- तुम थोड़ा तो अपना ध्यान रखा करो

माजी- मैं कुछ सोच रही थी कि हाथ जल गया

पिताजी- ध्यान रखा करो , अपने लिए नही तो कम से कम मेरे बारे मे तो सोचा करो तुम्हारे बिना मेरा क्या होगा

माजी- जी

नेहा - माँ आप टेन्षन मत लो मैं और नीता खाना बना लेंगी

पिताजी- नेहा नीता कुछ दिन आराम देना अपनी माँ को , जब देखो तब चिंता करती रहती है अपने बारे मे तो कभी सोचती ही नही

पूजा - क्या हुआ माँ को

माजी- कुछ नही सुबह थोड़ा जल गया था , तुम सबको टी नेहा नीता पीला देंगी .पूजा

पूजा- आप आराम करो

सब बाते कर रहे थे कि जयसिंघ बाथरूम से नहा कर आ गया

जयसिंघ- तुम सब अभी तक फ्रेश नही हुए , जाओ जल्दी फ्रेश हो जाओ,समय कम है और काम ज़्यादा है

सब जयसिंघ की तरफ देखते रह गये

जयसिंघ- पूजा गरम गरम टी पिला देना , फिर हम शहर जाएँगे , जीजाजी से मिलना भी है , उनसे पूछना है कि वो घोड़े पे आएँगे या घोड़ी पे

सब एक दूसरे के शकल देखने लगे

जयसिंघ- छोटू उठ कब तक सोता है

छोटू - सोने दो ना

जयसिंघ- अब उठ , बहुत काम करना है तुझे , जल्दी उठ और मुनीम जी को बुला के ला , पूरा बजेट लगाना है , क्या लेना है क्या नही , मेरी बहन की शादी है कुछ कमी नही होने दूँगा

सब के चेहरे देखने लायक थे

जयसिंघ- माँ मैं ने स्टोर रूम का समान बाहर रख दिया है , और उसे रूम बना दिया है मैं वही रहूँगा छोटू के साथ , जितनी बेकार की चीज़े है उनको फेक देना ताकि घर मे जगह हो जाए

माँ ने सिर्फ़ हा मे गर्दन घुमा दी

और जयसिंघ अपने रूम मे चला गया

पिताजी- उसको क्या हुआ

माजी- मुझे नही पता

माजी-नेहा

नेहा- मैं ने भी कुछ नही किया

पिताजी- मुझे तो लगा , पर यहाँ तो उल्टा हो गया है

पूजा - पिताजी अब आप कुछ मत कहना , भैया सब भूल गये है

पिताजी - नही कहूँगा तुझे खुशी खुशी विदा करूँगा

माजी- पूजा जा टी बना अपने भैया के लिए और तुम सब तय्यार हो जाओ अपने भैया को अपने जीजाजी से मिलवा देना

नेहा-जी माँ

जयसिंघ के ऐसे बदले हुए रूप से सब शॉक्ड हो गये

किसी ने सोचा नही था कि उनकी सुबह ऐसी होगी

पर सब खुश थे

पिताजी को भी लगा कि जयसिंघ कितना समझदार है

पिताजी को भी लगा कि उनको बात को संभाल कर लेना चाहिए था , ऐसे गुस्से ने जवान लड़के पे हाथ नही उठाना चाहिए था और वो भी अपनी बहनों के सामने

कितना बुरा लगा होगा जयसिंघ को फिर भी वो सब कुछ भूल कर अपनी बहन की शादी खुशी खुशी करना चाहता है

सब कुछ भूल कर उसी जोश मे वापस आ गये .

ग़लती मेरी ही थी जो जयसिंघ को बिना पूछे सगाई कर दी

उस से बात करनी चाहिए थी

ग़लती मेरी ही थी , पर भगवान ने सब ठीक कर दिया

पूजा खुश थी कि काली रात से सारी नफ़रत ख़तम कर दी

जयसिंघ बड़ा भाई होने का फ़र्ज़ निबाने लगा

जयसिंघ को पता था कि उसे क्या करना है

उसके नॉर्मल होते ही सब नॉर्मल हो जाएँगे वरना शादी का महॉल टेन्षन मे बदल जाएगा

जयसिंघ ने सब मे एक जान फुक दी

और जयसिंघ दोपेहर का खाना खा कर सबके साथ जीजाजी से मिलने चला गया

नेहा नीता पूजा और जयसिंघ रमेश से मिलने चले गये

जयसिंघ एक जोश के साथ अपने जीजाजी से मिला

रमेश जयसिंघ से मिलके प्रभावित हुआ

जयसिंघ भी रमेश की पर्सनॅलिटी से खुश हुआ

पूजा रमेश के साथ खुश रहेगी

शाम तक जयसिंघ ने रमेश से बात की

पूजा अपने भैया का इतना इंटेरेस्ट देख कर खुश हो गयी

छोटी सी छोटी बात पूछ रहा था जयसिंघ , सारी इन्फो निकाल ली जयसिंघ ने , जयसिंघ ने अपनी भी बाते बताई

जयसिंघ के बारे मे सुनते रमेश काफ़ी प्रभावित हुआ , एक साल मे कंपनी को स्टार्ट करना मुश्किल था

फिर सब ने वही शहर मे अपने होने वाले जीजाजी के साथ खाना खा लिया

और घर आ गये

इतनी देर से आने की वजह से माँ थोड़ी परेशान थी

पर जैसे सबको देखा तो उनके जान मे जान आ गयी ,

पूजा के चेहरे ने बता दिया कि क्या हुआ

जयसिंघ - माँ , पूजा रमेश के साथ खुश रहेगी

पूजा - नाम क्यूँ ले रहे हो आप

जयसिंघ - अभी से अपने पति की तरफ़दारी कर रही हो ,

नेहा- जीजाजी अच्छे हैना भैया

जयसिंघ- बहुत अच्छे है , पूजा के लिए पर्फेक्ट जोड़ीदार है

जयसिंघ की बात सुनते ही पिताजी खुश हो गये

माजी- तुम सब खाना खाओगे

नेहा - मैं तो भूल गयी आपके हाथ जल गये है , मैं अभी खाना बना देती हूँ

जयसिंघ - मेरे लिए भी थोड़ा बना देना मैं भी पिताजी के साथ खाना खाउन्गा

अब जाके पिताजी को सुकून मिला जयसिंघ के मूह से अपना नाम सुनकर

माँ भी खुश थी

पर वो जयसिंघ से अकेले मे बात करना चाहती थी

.सब अपने अपने कमरे जाते ही , माँ जयसिंघ के पास चली गयी

माजी- जय

जयसिंघ- हाँ माँ

माजी- तू ये पूजा के लिए कर रहा हैना

जयसिंघ- मैं आप सबके लिए कर रहा हूँ

माजी- बेटा मैं आज कितनी खुश हूँ बता नही सकती

जयसिंघ- माँ , रमेश पर्फेक्ट रहेगा पूजा के लिए , अच्छा सभव है , समझदार है दिल का साफ है

माजी- यही सब तुम्हारे पिताजी ने भी देखा था रमेश मे

जयसिंघ-जाने दो .माँ , उस बात को दुबारा याद मत दिलाओ

माजी- तू अपने पिताजी से नाराज़ नही हैना

जयसिंघ- होता तो उनके साथ खाना खाने की बात नही करता

माजी- मैं खाना लगा देती हूँ

जयसिंघ- माँ ये आपके हाथ मेरी वजह से जले हैना

माजी- नही रे

जयसिंघ- मुझे पता है ,

और जयसिंघ ने माँ के हाथो की चूम लिया जिस से माँ जयसिंघ के गले लग गयी कुछ देर माँ बेटा ऐसे बात करने लगे जब तक नेहा ने आवाज़ नही दी खाने को

और फिर पिताजी और जयसिंघ ने साथ मे खाना खा लिया

पिताजी तो कल भूके थे .

आज अपने बेटे के साथ खाना खाने से खुश थे

उनको कल ऐसा लगा कि अब वो जयसिंघ से दूर हो जाएँगे

पर जयसिंघ ने समझदारी से काम लेते हुए सब ठीक कर दिया

पिताजी को अच्छा लगा कि उनका बेटा समझदार है

जयसिंघ की जगह कोई और होता तो वो वापस शहर3 चला जाता

पर जयसिंघ ने ऐसा नही किया , जयसिंघ ने उम्मीद से ज़्यादा किया , अपने गुस्सा ख़तम तो किया और साथ मे रमेश से मिल कर पूजा के दिल मे अपने लिए जगह वापस बना ली

दोपेहर से लेके शाम तक जीजा साले की बात का सिलसिला चला

पूजा नेहा नीता ने पिताजी को सब कुछ बता दिया कि कैसे भैया ने जीजाजी से बात की

जयसिंघ की तारीफ सुनकर पिताजी की सारी टेन्षन ख़तम हो गयी

जयसिंघ- पिताजी मैं सोच रहा था कि शादी हम घर से करेंगे ,

पिताजी- तुम जो कहोगे वही होगा

जयसिंघ- हम कल ठाकुरजी को लेकर सहर2 चलेंगे , रमेश जीजाजी का घर भी देख लेंगे और बाते भी कर लेंगे कि शादी कैसी करनी है कब कहाँ किस तरह से करनी है , उनकी डिमॅंड क्या है

माजी- तू तो एक दिन मे सब कुछ करना चाहता है

जयसिंघ- माँ , रमेश जीजाजी ने कहा कि उनको जल्दी शादी करनी है उनकी माँ अकेली है उनको बहू चाहिए

पिताजी- वो तो ठीक है , पूजा भी यही चाहती है ,

जयसिंघ- रमेश ने कहा कि उसकी कोही डिमॅंड नही है पर उसकी माँ की कोई इच्छा हो तो , हमे उनसे भी मिलना चाहिए , और मैं ने रमेश जीजाजी से बात की है , वो पूजा को शादी के बाद भी पड़ने देंगे , अगेर पूजा की इच्छा होगी तो

पूजा- मैं इस साल की एग्ज़ॅम दूँगी , पर आगे का वो बाद मे सोचूँगी

जयसिंघ- आगे पढ़ना हो तो मुझे बताना मैं इंतज़ाम कर दूँगा

पिताजी- और क्या बात हुई

जयसिंघ- शादी मे उनके तरफ से ज़्यादा लोग नही होंगे , उनकी फॅमिली , और उनके दो दोस्त सुरेश और जतिन , और कुछ पड़ोसी होंगे

पिताजी- उनकी फॅमिली छोटी है पर हमे अपने रिश्तेदारों को भी खुश रखना होगा

जयसिंघ- उसके बारे मे मे भी मैं ने सोचा है , जो भी रिश्तेदार आएँगे उनका सिल्वर काय्न देंगे

माजी- ये तू क्या बोल रहा है

जयसिंघ- पैसो की चिंता मत कीजिए , वो काय्न मैं अपने तरफ से दूँगा ,

पिताजी- जैसा तुम ठीक समझो

जयसिंघ - और उस काय्न पे पूजा और जीजाजी का नाम होगा , ये शादी पूरा गाँव याद रखेगा

नेहा - दीदी तो शरमा गयी

नीता- दीदी को तो हम दुल्हन बनाएगे ये फिक्स है

माजी- तुम्हे मना कौन कर सकता है

जयसिंघ- पिताजी कल रमेश जीजाजी शहर2 जा रहे है तो हम भी चलेंगे

रमेश जिस कंपनी मे काम करता है उस की 2 ब्रांच है इंडिया मे , एक शहर2 मे है और एक शहर मे है ,रमेश शहर2 की ब्रांच से किसी प्रॉजेक्ट की वजह से शहर की ब्रांच मे आया था , यहाँ काम करते हुए उसको गाँव के मंदिर के बारे मे पता चला ,रमेश अपने दोस्त के साथ गाँव मे आया तो उसकी नज़र पूजा पे गयी और पूजा ने रमेश का दिल चुरा लिया , रमेश की कंपनी की एक ब्रांच दुबई मे है ,

पिताजी- ठीक है मैं ठाकुर को बोलता हूँ

जयसिंघ- माँ तुम देखो कि हमे क्या क्या चाहिए शादी मे

माजी- कपड़े और गहने

जयसिंघ- नेहा नीता तुम लिस्ट बना दो कि किस किस को बुलाना है ताकि सिल्वर के काय्न का ऑर्डर दे सके

नेहा नीता - कल सुबह तक आपको लिस्ट मिल जाएगी

जयसिंघ- छोटू , तू मेरे साथ रहना,

छोटू - जी भैया

जयसिंघ ने शादी का सारा इंतज़ाम अपने हाथ मे लिया

माँ और पिताजी को यही तो चाहिए था

जयसिंघ अपनी बहन की शादी धूम धड़ाके के साथ करना चाहता था

पूजा तो अंदर ही अंदर अपनी शादी के बारे मे सोच कर खुश थी

जैसा जयसिंघ बोलता गया वैसे पिताजी करते गये

जयसिंघ और पिताजी रमेश का घर देखने चले गये

2 मंज़िला घर देख कर जयसिंघ खुश हुआ पिताजी को पूजा का फ्यूचर सेफ लगा

रमेश ने अपने होने वाले ससुर और साले की अच्छी मेहमान नवाज़ी की

रमेश की बहन ज्योति को अपने भाई के शादी से ऐतराज़ था ,

क्यू कि अगेर पूजा इस घर मे आई तो उसको ये घर छोड़ना पड़ेगा

ज्योति को अपने पति के छोटे से घर मे रहना होगा

ज्योति का पति गॉव ऑफीस मे काम करता था पर ईमानदार था जिस से ज्योति के सारे सपने टूट गये थे

जिस से ज्योति अपने भाई से पैसे माँग कर अपने सौक पूरे करती थी

अगर पूजा आ गयी तो ज्योति को मिल रहे पैसे बंद हो जाएँगे

पर रमेश की माँ ने ज्योति को समझा कर शादी के लिए मना लिया

जयसिंघ स्टेप बाइ स्टेप काम कर रहा था

वो सबको थोड़ा थोड़ा काम बोल कर तय्यारी कर रहा था शादी की

जयसिंघ ने अपने कंपनी के अकाउंट से पैसे निकाल लिए सिल्वर काय्न बनाने के लिए

कुमार को ये पसंद नही आया पर जयसिंघ को वो छोड़ भी नही सकता था इस लिए कुमार पूजा की शादी मे नही आया

गाँव वाले भी उस शादी को लेकर एग्ज़ाइट थे

ठाकुरजी ने जितनी हो सके उतनी मदद की अपने दोस्त की बेटी की शादी मे

पूरा घर ऐसे सजाया गया कि लोग आते जाते तारीफ करने लगे

मेहमानों ने तो शादी के एक हफ्ते पहले से आना शुरू किया

जयसिंघ थोड़ा मॉडर्न सोच का था

जयसिंघ चाहता था कि पूजा और रमेश आपस मे थोड़ा समय बिताए

इस लिए जयसिंघ ने पूजा को नेहा नीता के साथ रमेश के पास भेज दिया , मूवी देखने का प्रोग्राम था , और पूजा रमेश एक दूसरे को समझ लेंगे

इस पर पिताजी को ऐतराज़ था पर फिर से जयसिंघ को नाराज़ नही करना चाहते थे

इस लिए पिताजी ने हाँ कर दी

पूजा रमेश के साथ मूवी देखने चली गयी

रमेश ने नेहा नीता को मूवी देखने को कहा और खुद पूजा के साथ थियेटर से बाहर चला गया

फिर दोनो ने अकेले मे प्यार भरा समय बिताया

शादी की डेट पास आ रही थी

जिस से अब दोनो का मिलना डाइरेक्ट शादी के दिन होगा

लेकिन उस से पहले पूजा और रमेश की जितनी मुलाकात जयसिंघ ने करवाई उस से उनका प्यार और बढ़ गया

पूजा दिल से अपने भाई का शुक्रिया अदा कर रही थी

जितना पूजा ने सोचा था उसे से ज़्यादा उसको मिला

सब कुछ जयसिंघ के वजह से हो पाया
 
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