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फ्लॅशबॅक 832ए
जयसिंघ ने एक साल मे बहुत तरक्की की
जैसा कुमार ने सोचा था वैसा ही हुआ
जयसिंघ ने कंपनी को एक साल मे बहुत सारे कांट्रॅक्ट मिलवा दिए
कांट्रॅक्ट मिलते कंपनी जल्दी न्यूज़ पेपर की हेडलाइन बन गयी
कुमार ने जिस लिए जयसिंघ को पार्टनर बनाया वो सब हो गया
जयसिंघ ने एक साल मे तीन बड़े कांट्रॅक्ट मिलवा दिए कंपनी को
और पैसे की बारिश शुरू हो गयी
ऐसी बारिश जिसमे जयसिंघ खुद को भूलता गया
पर जब भी वो अपने पिताजी की फोटो देखता तो उसे पिताजी की बात याद आती की कभी भूलना मत कि तुम कौन हो
ये बात याद आते ही जयसिंघ अपने भाई बहनों के बारे मे सोचने लगता
जयसिंघ ने पूजा को टीचर बनने का सोचा था
इस साल पूजा 12 पास हो जाएगी
तो उसके लिए जयसिंघ ने शहर3 के एक कॉलेज से बात की , जयसिंघ का रेकॉर्ड देख कर पूजा को अड्मिशन देने को कॉलेज वाले तय्यार हो गये ,
पूजा की मारक्शीट देखहे बिना कॉलेज वालो ने जयसिंघ को फॉर्म दे दिया क्यूँ कि उनके कॉलेज को जयसिंघ की तरहफ़ से फंड मिलने की आशा थी
पूजा टीचर बन जाएँगी तो उसके लिए कितना अच्छा रहेगा
नेहा नीता को डॉक्टर बनाने का सोच रहा था जयसिंघ
दोनो को मेडिकल की तय्यारी के लिए किताबें और एक डॉक्टर से बात की थी उनको अभी से . की तय्यारी करवाने के लिए
नेहा नीता को अच्छे मार्क मिल गये तो उनकी अड्मिशन को जितने पैसे लगेंगे उसके लिए जयसिंघ ने अलग अकाउंट मे जमा किए थे
नेहा नीता डॉक्टर बन जाएगी तो पिताजी कितने खुश हो जाएँगे
और छोटू के लिए जयसिंघ ने बहुत बड़ा सोच रखा था
अभी भी देर नही हुई ये बात जयसिंघ को पता थी
अबी भी छोटू पे थोड़ा ध्यान दिया तो वो कलेक्टर बन सकता है
ये जयसिंघ समझ गया था
मा और पिताजी के आराम की सारी चीज़े घर मे लेकर रखी थी
जब जयसिंघ पिताजी को यहाँ लेकर आएगा तो शहर3 का घर देख कर वो खुश हो जाएँगे
भले पिताजी गाँव को भूलेंगे नही पर यहाँ आते ही उनको अच्छा लगेगा
जयसिंघ सारी तय्यारी करके गाँव जा रहा था
उसने अपनी मेहनत से कंपनी स्टार्ट की
कंपनी को नयी उँचाई पे ले जाने को मेहनत कर रहा था
जयसिंघ कितना खुश था
पूरे एक साल बाद वो गाँव जाने वाला था
जयसिंघ को डर भी लग रहा था कि पिताजी को झूठ का पता चलेगा तो वो क्या कहेंगे
पर जयसिंघ की तरक्की देख पिताजी सारी बाते भूल जाएँगे ये जयसिंघ को पता था
माँ तो खुश होकर जयसिंघ को गले लग जाएगी
जयसिंघ अपने साथ पूजा के टीचर बनने का फॉर्म्लेकर आया था
नेहा नीता के लिए मेडिकल के किताबें और उस से रिलेटेड चीज़ो से भरा हुआ पूरा बॅग लेकर आया था
छोटू पढ़ाई मे कमज़ोर है
उसको धीरे धीरे पढ़ाई मे तेज करने के हिसाब से किताबें लेकर आया था जयसिंघ
छोटू को मेद्स , साइन्स आराम से समझ मे आए इस लिए जयसिंघ ने खुद नोट्स बनाए थे
जयसिंघ बहुत मेहनत ले रहा था अपनी फॅमिली के लिए
पर पिताजी अलग तरह से फॅमिली को खुश रखना चाहते थे
और जयसिंघ अलग तरह से फॅमिली का फ्यूचर बना रहा था
पिताजी सबको उनकी मर्ज़ी से पड़ने देना चाहते थे
और जयसिंघ ने जो सपना देखा है उसके हिसाब से सबका फ्यूचर बनाना चाहता था
पिताजी सबको अपना अपना फ़ैसला लेने की पर्मिशन दे रखी थी
पर जयसिंघ ने तो किस को क्या बनना है ये सोच भी रखा था
यहाँ तक कि उसका इंतज़ाम भी किया था
ना जयसिंघ ग़लत था और ना पिताजी
दोनो की सोच अलग थी
दोनो अपनी अपनी जगह पर सही थे
जैसे जैसे बस गाँव के पास जा रही थी वैसे वैसे जयसिंघ सबको अपनी तरक्की के बारे मे बताने को एग्ज़ाइट हो रहा था
पिताजी सुंनेगे तो क्या कहेंगे
पूजा तो नये नये ड्रेस देख कर पागल हो जाएगी
नेहा नीता डॉक्टर बनने की बात सुनेगी तो उछल कर उसके गले लग जाएगी
छोटू अपने गिफ्ट देखेगा तो अपने दोस्तो को दिखाने की जल्दी मे होगा
माँ को मुझपे कितना गर्व महसूस होगा
उनका बेटा बड़ा आदमी बन गया है
अब उनके मेहनत करने के दिन ख़तम हो गये
अब उनको आराम ही आराम मिलेगा
ये सब सोचते हुए जयसिंघ गाँव मे पहुँच गया
जयसिंघ ने किसी को बताया नही था कि वो आ रहा है
जयसिंघ सर्प्राइज़ देना चाहता था
बस से नीचे उतरते ही जयसिंघ को गाँव के सरपंच मिल गया
सरपंच-जयसिंघ तुम आ गये
जयसिंघ- जी चाचा
सरपंच-लगता है तुम्हे तार ( पोस्ट लेटर) देर से मिली है
जयसिंघ- कैसी खत चाचा
सरपंच- लगता है तुझे कुछ पता ही नही है
जयसिंघ- क्या पता नही है मुझे
सरपंच- घर जाओ पता चल जाएगा , तभी मैं सोचु की कल तुम दिखाई क्यूँ नही दे रहे थे
जयसिंघ- क्या हुआ कल
सरपंच- योगेंद्रसिंघ तुम्हे सर्प्राइज़्ड देना चाहते होंगे
जयसिंघ- कैसा सर्प्राइज़्ड
सरपंच- खुद जाकर देखो
.और सरपंच ने आते ही जयसिंघ को झटका दे दिया
जयसिंघ सोचता रह गया कि बात क्या है
सरपंचजी किस बारे मे बात कर रहे थे
जयसिंघ को कुछ समझ नही आ रहा था
कल हुआ क्या है
जयसिंघ सोचते सोचते घर की तरफ जाने लगा
आते जाते लोग जयसिंघ को बधाई देने लगे
जयसिंघ को लग रहा था कही गाँव वालो को उसके कंपनी के बारे मे तो नही पता चल गया
और पिताजी ने मेरे लिए सर्प्राइज़्ड रखा हो
गाँव को दावत दी हो
जयसिंघ के दिमाग़ मे पहली बात यही आई
पर ऐसा होता तो मुझे बताया क्यूँ नही गया
मैं तो अचानक आ गया हूँ
सरपंचजी ने कहा कि मुझे तार देर से मिली हो
शायद पिताजी ने खत भेजी हो पर मुझे मिली नही है
उनको कहा पता कि मैं अब हॉस्टिल मे नही अपने घर मे रहता हूँ
खुद के घर मे
अपने मेहनत से बनाए हुए घर मे
अब वहाँ मैं बाकियो को भी लेकर जाउन्गा
नेहा नीता अपना नया घर देख कर कितनी खुश होगी
शहर का घर देखते गाँव को भूल जाएँगी
बस पहली बार दिखाने को ले जाउन्गा वो शहर3 का घर देखते वही रुक जाएँगे
अपने आप
जयसिंघ अपने घर के पास आ गया
घर को देखते जयसिंघ देखता रह गया
घर को शादी के घर की तरह सजाया गया था
जयसिंघ- मेरी आने की इतनी बड़ी तय्यारी , मतलब पिताजी भी खुश है मतलब मैं उनको शहर3 लेकर जा सकता हूँ
जयसिंघ घर की सजावट देख कर शॉक्ड हो गया
कल यहाँ क्या हुआ होगा इस बात से जयसिंघ अंज़ान था
जयसिंघ अपना समान लेकर घर के मेन गेट के सामने खड़ा हो गया
अंदर तो घर फूलों से सजाया था
छोटू हॉल मे बैठा काम कर रहा था
बाकी कोई दिखाई नही दे रहा था
जयसिंघ- छोटू
जयसिंघ ने छोटू को आवाज़ दी
अपने भाई की आवाज़ तो वो मेले की शोर शराबो मे भी पहचान सकता है
छोटू ने पलट कर देखा , अपने बड़े भाई को देख कर छोटू ज़ोर से चिल्लाया
छोटू- भैया
छोटू की आवाज़ सुनकर बाकी सब अपने कमरे से बाहर आ गये
माजी- क्या हुआ छोटू
पिताजी- तेरे भाई की आज तार भेज दूँगा , तू तो ऐसे चिल्लाया कि
छोटू ने उंगली घर के मेन गेट की तरफ दिखाई
पिताजी और माँ ने जैसे उधर देखा तो उनके खुशी का कोई ठिकाना नही था
माँ तो बेहोश होते होते बच गयी
पिताजी को तो इतनी खुशी हुई कि वो जयसिंघ के पास आकर उसके गले लग गये
पिताजी की आवाज़ सुनते नेहा नीरा बाहर आ गयी
नेहा- भैया आप ,
और माँ और नीता भी जयसिंघ के गले लग गयी
उनके खुशी का तो कोई ठिकाना नही था
सब जिसका इंतज़ार कर रहे थे वो आ गया
कल पिताजी को जिसकी कमी महसूस हो रही थी वो आ गया
पिताजी को पहली बार अकेले होने का अहसास हुआ था
पर छोटू ने उनकी इतनी मदद की कि जयसिंघ की कमी महसूस नही होने दी
पर पिताजी को फिर भी जयसिंघ की याद आई थी
और देखो जयसिंघ आ गया
नेहा - भैया कल आपको बहुत मिस किया
नीता- कल क्यू नही आए आप , अच्छा हुआ हम कल ही वापस आ गये थे मामा के घर से
जयसिंघ- तुम मामा के घर गयी थी
नेहा - हाँ , और अच्छा हुआ हम कल यहाँ आए थे वरना आपकी तरह हम भी मिस कर देते
नीता- दीदी से तो मैं बहुत गुस्सा हूँ , बिना हमारे , दीदी हमारे बिना सोच भी कैसे सकती है ,
जयसिंघ- क्या था कल
पूजा - भैया आप
और पूजा भाग कर जयसिंघ के गले लग गयी
पूजा तो दुल्हन की तरह दिख रही थी
उसने कल जो मेकप किया वो निकाला नही था
पूजा -भैया सॉरी , सब कुछ इतनी जल्दी हो गया कि आपके बिना ही , मेरी ग़लती है
जयसिंघ- क्या हुआ कल और तुम ये दुल्हन की तरह सजी क्यूँ हो
पूजा - भैया वो मैं
जयसिंघ- तू तो ऐसे शरमा रही है जैसे तेरी शादी हुई हो
नीता - दीदी मैं आप से गुस्सा हूँ , अगर हम कल नही आती तो
पूजा -सॉरी , सब कुछ जल्दी मे हो गया
नेहा - हम आपकी बहन है , हमारा तो इंतज़ार करती ,
पूजा- तुम्हारे इंतज़ार मे वो भाग जाते तो , और तुम्हे देख मुझे भूल जाते तो
नेहा -ये भी सही है हम है ही इतनी सुंदर
जयसिंघ- बात क्या है मुझे कोई बताएगा
नीता- भैया कल पूजा दीदी की सगाई हो गयी ,
जयसिंघ- व्हाट
नेहा - जीजाजी तो बहुत अच्छे है
नीता - तभी तो दीदी ने हमारा भी इंतज़ार नही किया , पर हमारी किस्मत मे लिखा था तो हम टाइम पर आ गये
जयसिंघ को तो कुछ समझ नही आ रहा था
पूजा की सगाई हो गयी
और उसे किसी बे बताया भी नही
एर पूजा की शादी की उमर नही है
पिताजी ऐसे कैसे कर सकते है
जयसिंघ ने एक साल मे बहुत तरक्की की
जैसा कुमार ने सोचा था वैसा ही हुआ
जयसिंघ ने कंपनी को एक साल मे बहुत सारे कांट्रॅक्ट मिलवा दिए
कांट्रॅक्ट मिलते कंपनी जल्दी न्यूज़ पेपर की हेडलाइन बन गयी
कुमार ने जिस लिए जयसिंघ को पार्टनर बनाया वो सब हो गया
जयसिंघ ने एक साल मे तीन बड़े कांट्रॅक्ट मिलवा दिए कंपनी को
और पैसे की बारिश शुरू हो गयी
ऐसी बारिश जिसमे जयसिंघ खुद को भूलता गया
पर जब भी वो अपने पिताजी की फोटो देखता तो उसे पिताजी की बात याद आती की कभी भूलना मत कि तुम कौन हो
ये बात याद आते ही जयसिंघ अपने भाई बहनों के बारे मे सोचने लगता
जयसिंघ ने पूजा को टीचर बनने का सोचा था
इस साल पूजा 12 पास हो जाएगी
तो उसके लिए जयसिंघ ने शहर3 के एक कॉलेज से बात की , जयसिंघ का रेकॉर्ड देख कर पूजा को अड्मिशन देने को कॉलेज वाले तय्यार हो गये ,
पूजा की मारक्शीट देखहे बिना कॉलेज वालो ने जयसिंघ को फॉर्म दे दिया क्यूँ कि उनके कॉलेज को जयसिंघ की तरहफ़ से फंड मिलने की आशा थी
पूजा टीचर बन जाएँगी तो उसके लिए कितना अच्छा रहेगा
नेहा नीता को डॉक्टर बनाने का सोच रहा था जयसिंघ
दोनो को मेडिकल की तय्यारी के लिए किताबें और एक डॉक्टर से बात की थी उनको अभी से . की तय्यारी करवाने के लिए
नेहा नीता को अच्छे मार्क मिल गये तो उनकी अड्मिशन को जितने पैसे लगेंगे उसके लिए जयसिंघ ने अलग अकाउंट मे जमा किए थे
नेहा नीता डॉक्टर बन जाएगी तो पिताजी कितने खुश हो जाएँगे
और छोटू के लिए जयसिंघ ने बहुत बड़ा सोच रखा था
अभी भी देर नही हुई ये बात जयसिंघ को पता थी
अबी भी छोटू पे थोड़ा ध्यान दिया तो वो कलेक्टर बन सकता है
ये जयसिंघ समझ गया था
मा और पिताजी के आराम की सारी चीज़े घर मे लेकर रखी थी
जब जयसिंघ पिताजी को यहाँ लेकर आएगा तो शहर3 का घर देख कर वो खुश हो जाएँगे
भले पिताजी गाँव को भूलेंगे नही पर यहाँ आते ही उनको अच्छा लगेगा
जयसिंघ सारी तय्यारी करके गाँव जा रहा था
उसने अपनी मेहनत से कंपनी स्टार्ट की
कंपनी को नयी उँचाई पे ले जाने को मेहनत कर रहा था
जयसिंघ कितना खुश था
पूरे एक साल बाद वो गाँव जाने वाला था
जयसिंघ को डर भी लग रहा था कि पिताजी को झूठ का पता चलेगा तो वो क्या कहेंगे
पर जयसिंघ की तरक्की देख पिताजी सारी बाते भूल जाएँगे ये जयसिंघ को पता था
माँ तो खुश होकर जयसिंघ को गले लग जाएगी
जयसिंघ अपने साथ पूजा के टीचर बनने का फॉर्म्लेकर आया था
नेहा नीता के लिए मेडिकल के किताबें और उस से रिलेटेड चीज़ो से भरा हुआ पूरा बॅग लेकर आया था
छोटू पढ़ाई मे कमज़ोर है
उसको धीरे धीरे पढ़ाई मे तेज करने के हिसाब से किताबें लेकर आया था जयसिंघ
छोटू को मेद्स , साइन्स आराम से समझ मे आए इस लिए जयसिंघ ने खुद नोट्स बनाए थे
जयसिंघ बहुत मेहनत ले रहा था अपनी फॅमिली के लिए
पर पिताजी अलग तरह से फॅमिली को खुश रखना चाहते थे
और जयसिंघ अलग तरह से फॅमिली का फ्यूचर बना रहा था
पिताजी सबको उनकी मर्ज़ी से पड़ने देना चाहते थे
और जयसिंघ ने जो सपना देखा है उसके हिसाब से सबका फ्यूचर बनाना चाहता था
पिताजी सबको अपना अपना फ़ैसला लेने की पर्मिशन दे रखी थी
पर जयसिंघ ने तो किस को क्या बनना है ये सोच भी रखा था
यहाँ तक कि उसका इंतज़ाम भी किया था
ना जयसिंघ ग़लत था और ना पिताजी
दोनो की सोच अलग थी
दोनो अपनी अपनी जगह पर सही थे
जैसे जैसे बस गाँव के पास जा रही थी वैसे वैसे जयसिंघ सबको अपनी तरक्की के बारे मे बताने को एग्ज़ाइट हो रहा था
पिताजी सुंनेगे तो क्या कहेंगे
पूजा तो नये नये ड्रेस देख कर पागल हो जाएगी
नेहा नीता डॉक्टर बनने की बात सुनेगी तो उछल कर उसके गले लग जाएगी
छोटू अपने गिफ्ट देखेगा तो अपने दोस्तो को दिखाने की जल्दी मे होगा
माँ को मुझपे कितना गर्व महसूस होगा
उनका बेटा बड़ा आदमी बन गया है
अब उनके मेहनत करने के दिन ख़तम हो गये
अब उनको आराम ही आराम मिलेगा
ये सब सोचते हुए जयसिंघ गाँव मे पहुँच गया
जयसिंघ ने किसी को बताया नही था कि वो आ रहा है
जयसिंघ सर्प्राइज़ देना चाहता था
बस से नीचे उतरते ही जयसिंघ को गाँव के सरपंच मिल गया
सरपंच-जयसिंघ तुम आ गये
जयसिंघ- जी चाचा
सरपंच-लगता है तुम्हे तार ( पोस्ट लेटर) देर से मिली है
जयसिंघ- कैसी खत चाचा
सरपंच- लगता है तुझे कुछ पता ही नही है
जयसिंघ- क्या पता नही है मुझे
सरपंच- घर जाओ पता चल जाएगा , तभी मैं सोचु की कल तुम दिखाई क्यूँ नही दे रहे थे
जयसिंघ- क्या हुआ कल
सरपंच- योगेंद्रसिंघ तुम्हे सर्प्राइज़्ड देना चाहते होंगे
जयसिंघ- कैसा सर्प्राइज़्ड
सरपंच- खुद जाकर देखो
.और सरपंच ने आते ही जयसिंघ को झटका दे दिया
जयसिंघ सोचता रह गया कि बात क्या है
सरपंचजी किस बारे मे बात कर रहे थे
जयसिंघ को कुछ समझ नही आ रहा था
कल हुआ क्या है
जयसिंघ सोचते सोचते घर की तरफ जाने लगा
आते जाते लोग जयसिंघ को बधाई देने लगे
जयसिंघ को लग रहा था कही गाँव वालो को उसके कंपनी के बारे मे तो नही पता चल गया
और पिताजी ने मेरे लिए सर्प्राइज़्ड रखा हो
गाँव को दावत दी हो
जयसिंघ के दिमाग़ मे पहली बात यही आई
पर ऐसा होता तो मुझे बताया क्यूँ नही गया
मैं तो अचानक आ गया हूँ
सरपंचजी ने कहा कि मुझे तार देर से मिली हो
शायद पिताजी ने खत भेजी हो पर मुझे मिली नही है
उनको कहा पता कि मैं अब हॉस्टिल मे नही अपने घर मे रहता हूँ
खुद के घर मे
अपने मेहनत से बनाए हुए घर मे
अब वहाँ मैं बाकियो को भी लेकर जाउन्गा
नेहा नीता अपना नया घर देख कर कितनी खुश होगी
शहर का घर देखते गाँव को भूल जाएँगी
बस पहली बार दिखाने को ले जाउन्गा वो शहर3 का घर देखते वही रुक जाएँगे
अपने आप
जयसिंघ अपने घर के पास आ गया
घर को देखते जयसिंघ देखता रह गया
घर को शादी के घर की तरह सजाया गया था
जयसिंघ- मेरी आने की इतनी बड़ी तय्यारी , मतलब पिताजी भी खुश है मतलब मैं उनको शहर3 लेकर जा सकता हूँ
जयसिंघ घर की सजावट देख कर शॉक्ड हो गया
कल यहाँ क्या हुआ होगा इस बात से जयसिंघ अंज़ान था
जयसिंघ अपना समान लेकर घर के मेन गेट के सामने खड़ा हो गया
अंदर तो घर फूलों से सजाया था
छोटू हॉल मे बैठा काम कर रहा था
बाकी कोई दिखाई नही दे रहा था
जयसिंघ- छोटू
जयसिंघ ने छोटू को आवाज़ दी
अपने भाई की आवाज़ तो वो मेले की शोर शराबो मे भी पहचान सकता है
छोटू ने पलट कर देखा , अपने बड़े भाई को देख कर छोटू ज़ोर से चिल्लाया
छोटू- भैया
छोटू की आवाज़ सुनकर बाकी सब अपने कमरे से बाहर आ गये
माजी- क्या हुआ छोटू
पिताजी- तेरे भाई की आज तार भेज दूँगा , तू तो ऐसे चिल्लाया कि
छोटू ने उंगली घर के मेन गेट की तरफ दिखाई
पिताजी और माँ ने जैसे उधर देखा तो उनके खुशी का कोई ठिकाना नही था
माँ तो बेहोश होते होते बच गयी
पिताजी को तो इतनी खुशी हुई कि वो जयसिंघ के पास आकर उसके गले लग गये
पिताजी की आवाज़ सुनते नेहा नीरा बाहर आ गयी
नेहा- भैया आप ,
और माँ और नीता भी जयसिंघ के गले लग गयी
उनके खुशी का तो कोई ठिकाना नही था
सब जिसका इंतज़ार कर रहे थे वो आ गया
कल पिताजी को जिसकी कमी महसूस हो रही थी वो आ गया
पिताजी को पहली बार अकेले होने का अहसास हुआ था
पर छोटू ने उनकी इतनी मदद की कि जयसिंघ की कमी महसूस नही होने दी
पर पिताजी को फिर भी जयसिंघ की याद आई थी
और देखो जयसिंघ आ गया
नेहा - भैया कल आपको बहुत मिस किया
नीता- कल क्यू नही आए आप , अच्छा हुआ हम कल ही वापस आ गये थे मामा के घर से
जयसिंघ- तुम मामा के घर गयी थी
नेहा - हाँ , और अच्छा हुआ हम कल यहाँ आए थे वरना आपकी तरह हम भी मिस कर देते
नीता- दीदी से तो मैं बहुत गुस्सा हूँ , बिना हमारे , दीदी हमारे बिना सोच भी कैसे सकती है ,
जयसिंघ- क्या था कल
पूजा - भैया आप
और पूजा भाग कर जयसिंघ के गले लग गयी
पूजा तो दुल्हन की तरह दिख रही थी
उसने कल जो मेकप किया वो निकाला नही था
पूजा -भैया सॉरी , सब कुछ इतनी जल्दी हो गया कि आपके बिना ही , मेरी ग़लती है
जयसिंघ- क्या हुआ कल और तुम ये दुल्हन की तरह सजी क्यूँ हो
पूजा - भैया वो मैं
जयसिंघ- तू तो ऐसे शरमा रही है जैसे तेरी शादी हुई हो
नीता - दीदी मैं आप से गुस्सा हूँ , अगर हम कल नही आती तो
पूजा -सॉरी , सब कुछ जल्दी मे हो गया
नेहा - हम आपकी बहन है , हमारा तो इंतज़ार करती ,
पूजा- तुम्हारे इंतज़ार मे वो भाग जाते तो , और तुम्हे देख मुझे भूल जाते तो
नेहा -ये भी सही है हम है ही इतनी सुंदर
जयसिंघ- बात क्या है मुझे कोई बताएगा
नीता- भैया कल पूजा दीदी की सगाई हो गयी ,
जयसिंघ- व्हाट
नेहा - जीजाजी तो बहुत अच्छे है
नीता - तभी तो दीदी ने हमारा भी इंतज़ार नही किया , पर हमारी किस्मत मे लिखा था तो हम टाइम पर आ गये
जयसिंघ को तो कुछ समझ नही आ रहा था
पूजा की सगाई हो गयी
और उसे किसी बे बताया भी नही
एर पूजा की शादी की उमर नही है
पिताजी ऐसे कैसे कर सकते है