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मैं और मेरा परिवार

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838 ब

हम ने आधे से ज़्यादा सफ़र तय कर दिया था.पर नाश्ता और लंच तो करना था.

दादाजी से मिलते ही हम प्यास भूक भूल जाएँगे ये बात छोटी चाची को पता थी. हमे दादाजी के आश्रम जाने के जितना समय लगने वाला था उसमे से 3/4 सफ़र तय किया था अब बस 1 घंटे का सफ़र बाकी था फिर भी चाची ने लंच करने के लिए बस रोक दी

ड्राइवर ने एक अच्छे से ढाबा टाइप के होटेल पर बस रोक दी.

सी चाची-चलो हम यहाँ लंच करके फिर आश्रम जाएँगे

कोमल-मामी ,हम ने सुबह नाश्ता किया था ,अब तो सीधे दादाजी से मिलने के बाद लंच करेंगे

पूजा बुआ-कोमल अभी के लिए थोड़ा नाश्ता कर लो

सीतल दीदी-माँ ,1 घंटे का सफ़र तो बाकी है.

पूजा बुआ-मैं ने क्या कहा सुना नही या दुबारा बताऊ

राज-मैं ने सुन लिया .और मैं तो गरम गरम समोशा खाउन्गा. और कोल्ड ड्रिंक पीऊंगा.

नीता बुआ-देखो राज को भूक लगी है. चलो थोड़ा थोड़ा नाश्ता करते है

बडो के सामने छोटो की चलती कहाँ है

हम एक एक करके बस से उतरने लगे.

सी चाची-विद्या वो परान्ठे वाला बॅग भी लेना

विद्या-जी चाची

हम लाइन मे लग कर नीचे उतरने लगे .मैं लास्ट मे था और मेरे आगे रानी थी.मैं ने धीरे से रानी से बात की

अवी-कैसा लगा मेरा पंच

रानी-ऐसा लगा कि अभी भी दर्द हो रहा है तुम्हारे पंच से

अवी-कहाँ दर्द हो रहा है

रानी-तुम ने तो सीधे दिल पे मारा पंच ,दिल मे दर्द हो रहा है

अवी-तुम ने तो आत्मा में मारा है ,उसका क्या

कोमल-रानी कितनी देर लगा रही हो,चलो मेरे साथ

कोमल रानी को लेके वॉशरूम मे चली गयी. और हम सब टेबल पर जाकर बैठ गये

कविता-मामी मेनू कार्ड देना

नेहा बुआ-कोई मेनू कार्ड नही मिलेगा. हम जो खाएँगे वही तुम्हे खाना होगा

नेहा बुआ की बात से कविता ने अपना मूह टेडा किया.

म चाची-ये तो टूर है मैं तो अपनी पसंद का खाना खाउन्गी

लीना-मामी हमारे साथ बैठिए हम बताते है

नेहा बुआ-आँखे दिखाते हुए लीना...........

लीना और कविता मेरी तरफ एक उम्मीद से देखने लगी

मैं खड़ा हो गया.

अवी-ये फॅमिली टूर है. यहाँ जिसे जो करना है खाना है वो खा सकता है. नो रेस्टिक्षन

नीता बुआ-सिर्फ़ कविता और लीना को छोड़ कर

लीना-माँ, ये चीटिंग है

नीता बुआ-मैं मज़ाक कर रही थी ,ये लो मेनू कार्ड

नेहा बुआ-नीता तू ये क्या कर रही है

पूजा बुआ-नेहा ,बच्चो के लिए तो टूर पे आए है. करने दो इनको एंजाय

पूजा बुआ की बात सुनते सब खुश हो गये.

फिर क्या था मेनू कार्ड के लिए झगड़े शुरू हो गये.

कविता के लिए दूसरे के टेबल पे रखा हुआ मेनू कार्ड लाया.

ऑर्डर के वक्त क्या हुआ ये तो पूछो ही मत

वेटर तो ऑर्डर लेते लेते परेशान हो गया. कविता और लीना और राज क्या कम थे सीमा चाची भी उनके साथ शामिल हो गयी.

चाचा ड्राइवर के साथ बैठ थे. ताकि वो सब का हिसाब किताब करे

ब चाची-मैं तो परान्ठे खाउन्गी. विद्या परान्ठे देना

विद्या ने जैसे ही परान्ठे का टिफिन ओपन किया सब ने एक एक परान्ठे और अचार उठा लिया

सी चाची-ये क्या ,तुम सब ने ऑर्डर दिया फिर परान्ठे क्यूँ खा रहे है

स्वेता दीदी-मामी सुबह का टाइम है ऑर्डर आने मे टाइम लगेगा. तब तक परान्ठे खा कर पेट पूजा करते है.

ब चाची-खाने दो, हम भी कुछ मँगाते है

पूजा बुआ-मैं ने तुम्हारा भी ऑर्डर दिया है. चल परान्ठे खाते है

हमारे परान्ठे खाने तक रानी और कोमल भी आ गयी.

कोमल मेरे बाजू मे और उसके बाद रानी बैठ गयी. ये तो गड़बड़ हो गयी.कोई बात नही पूरा टूर बाकी है मेरे पास

कोमल-ये क्या हमारे आने पहले खाना शुरू किया

राजेश-दीदी, ये तो मामी ने लाए हुए परान्ठे थे

कोमल-हम ऑर्डर करते है

रानी-तुम ऑर्डर करो, तब तक मैं जो टिफिन लाई थी वो ख़तम करते है

कविता-दीदी आप टिफिन लाई ,पहले क्यूँ नही बताया ,हम आपके लिए परान्ठे रखते

कोमल-अब तो हम भी तुम्हे हमारे टिफिन से कुछ नही देंगे

राज-दीदी ,मैं आपके लिए परान्ठे रखने वाला था,पर भुकः लगी तो आपका पराठा भी मैं ने खा लिया

रानी-कोई बात नही ,मैं सब के लिए टिफिन लाई हूँ.

और रानी ने मुझे उसका बॅग लाने को कहा.

रानी मिठाई लाई थी लड्डू , बारपी, चकली, और चिवाड़ा

रानी ने कमाल कर दिया.

चिवाड़ा देखते ही ,होटेल का नाश्ता कौन करेगा. हम तो रानी का लाया हुआ नाश्ता करने लगे.

वाउ ,रानी और आंटी के हाथो मे जादू है. हर एक बाइट पे तारीफे हो रही थी.

हम ज़्यादा मेंबर थे जिस से हमारे हिस्से मे ज़्यादा खाना नही आया ,जिस होटेल का नाश्ता भी कर लिया.

नाश्ते करने के बाद कोई स्वीट तो कोई कोल्ड्ड्रिंक पी रहा था.

बुआ और चाची शरबत पी रही थी तो चाचा भी ड्राइवर का ख़याल रखते हुए नाश्ता कर रहे थे.

छोटी चाची सरबत पीने की जगह स्वेता दीदी को लेकर वॉशरूम मे गयी.

स्वेता दीदी ने कोल्ड्ड्रिंक पीने तक रुकने को कहा था पर पूजा बुआ ने आँखो से इशारा करके स्वेता दीदी को छोटी चाची के साथ भेज दिया.
 
इधर कोमल तो कुछ ज़्यादा फॉर्म मे थी.

रानी के लाए हुए लड्डू मैं ने आधे खा लिए थे कि आधा लड्डू प्लेट से गायब कर दिया कोमल ने

मैं ने भी गुस्से मे कोमल का लड्डू प्लेट से उठा कर हजम कर लिया

मेरे ऐसा करते ही कोमल ने टेबल से नीचे से मुझे लात मारी

मैं ने भी धीरे से वैसा ही रिक्षन दिया.तो कोमल भी धीरे से मेरे पैर को टच करने लगी

हमारा हँसी मज़ाक ऐसे चलता गया.

यहाँ तक कि कोमल अपनी कोल्ड्ड्रिंक की जगह मेरी कोल्ड ड्रिंक पीने लगी. तो कोमल को देख कर कविता ने भी मेरा ध्यान भटका कर कोल्ड ड्रिंक ख़तम की

ऐसे हसी मज़ाक एक दूसरे के पेकेट से खाना चुराना मज़ेदार लग रहा था

हम यहाँ आधा घंटा रुकने वाले थे पर टाइम पे किसी का ध्यान नही था

चाचा का ध्यान बिल पे था.

बिल आते ही मैं ने एटीम राजेश को दिया .और बिल पे करने को कहा.

चाचा-राजेश कितना बिल हुआ .पैसे तो लेते जाओ.

राजेश-मामा , भैया ने एटीएम दिया है. वहीं से निकाल कर भर दूँगा.

अवी-चाचा जी के एटीएम से काम चल जाएगा

चाचा-ठीक है. कुछ लगे तो माँग लेना

बिल पे करने के बाद भी हम थोड़ी देर ऐसे बैठ रहे

मैं होटेल के अंदर जाकर कुछ स्नॅक लेने लगा. बस मे खाने के लिए

मैं स्नेक ले रहा था कि रानी मेरे पीछे आकर खड़ी हो गयी.

रानी-वो हलदीराम वाला स्नॅक लेना

अवी-तुम ,तुम कब आई कोमल कहाँ है

रानी-उसको चकमा दे कर आई हूँ.

अवी-अच्छा किया .मुझे तुम से बात करनी थी

रानी-हाँ बोलो

अवी-कैसा लग रहा है फॅमिली टूर पे जा कर

रानी-अवेसम, फॅमिली के साथ तो असली मज़ा आता है,

अवी-वो तो है पर मैं सोच रहा था कि क्यू ना इस फॅमिली टूर को हमारा हूनीमन बना दूं,क्या कहती हो

रानी-तो ये चल रहा था तुम्हारे दिमाग़ मे तभी मम्मी को पटा कर मुझे टूर पे ले आए हो

अवी-कुछ भी समझो ,हूनीमन के बारे मे तुम क्या कहती हो

रानी-मेरी मम्मी और बड़ी चाची हाँ कहेगी तो मैं तय्यार हूँ.

अवी-फिर तो हाथ से काम चलाना होगा.

रानी-क्या कहा.

अवी-मैं ने कहा किस तो मिल सकती है कि नही

रानी-तुम कुछ हाथ के बारे मे बोल रहे थे

मैं ने अपने हाथ रानी के बूब्स पे रख दिए

अवी-समझी,हाथ से काम चलना होगा

रानी-तुम्हारे पीछे कोमल है

और मैं ने जल्दी से अपने हाथ हटा दिए और पीछे देखने लगा. पर पीछे कोई नही था.

रानी मुझे उल्लू बना कर हंस रही थी.

रानी को हँसते हुए देख कर मैं ने उसको पकड़ कर दीवार से खड़ा किया

अवी-बहुत हँसी आ रही है तुम्हे

रानी-तुम इतना डरते हो और हूनीमन मनाने की बात करते हो

अवी-अब तो हूनीमन मना कर दिखाना होगा.

और मैं रानी को किस करने के लिए आगे आने लगा.

तो रानी ने मेरे होंटो पे हाथ रख दिया

रानी-अभी नही. वरना लिपस्टिक खराब होते ही कोमल को शक हो जाएगा.

अवी-एक छोटा सा

रानी-तुम्हारे लिप्स पे लिपस्टिक लग जाएगी.

अवी-तुम कुछ ज़्यादा स्मार्ट हो,

रानी-तुम भी कुछ कम नही हो .सब के सामने मुझे प्रपोज किया.

अवी-तुम्हे देख कर अपने दिल पे काबू नही रख पाया

रानी-दिल को संभाल के रखो ,वरना देखा ना सब कैसे घूर रहे थे

अवी-इतना तो अपनी जान के लिए करना होगा.

रानी-तुम इतना करते हो और मैं हूँ कि तुम्हे एक किस नही करने दे रही हूँ.

अवी-जाने दो, आश्रम जाके कर लेंगे

रानी-तब तक तो मैं तुम्हे ऐसे तड़फते हुए नही देख सकती.

अवी-तुम भावुक हो रही हो

रानी-तुम मेरे दिल पे किस कर लो

अवी-क्या

रानी-दिल पे

और रानी ने अपना दुपट्टा अपने चेस्ट से हटा दिया.

अवी-ऐसा मत करो ,वरना यही पर हूनीमन हो जाएगा

रानी-तुम्हे किस दिए बिना मुझे चैन नही आएगा

अवी-फिर तो

और मैं ने रानी के मेरे नाम से धड़कते हुए दिल पे किस किया.

मेरेकिस करते ही रानी का दिल एकपल के लिए रुक गया था.

किस करते हम दोनो खुश हो गये.

यहाँ से जाना तो एक एक करके होगा. पहले रानी स्नॅककॉर्नर से जाने लगी.पर वो बीच मे रुक गयी.

रानी-शादी तक हाथ से ज़्यादा काम मत करना

अवी-क्या

रानी-इतनी भी बुद्धू मत समझो कि हाथ से काम चलाने का मतलब ना समझू

मैं ने हाथ जोड़ कर रानी से हार मान ली

और रानी हँसते हुए चाची के पास चली गयी. और थोड़ी देर बाद हम सब बस मे बैठ कर सफ़र के फाइनल पड़ाव पे जाने लगे.
 
838 सी

एक छोटा सा ब्रेक लेकर हम ने फिर से सफ़र शुरू कर दिया

नाश्ता करने से हर कोई थोड़ा रिलॅक्स होना चाहता था.

ऐसे मे हम ने बस मे जो टीवी थी उसपे मूवी लगा दी.

इस बार मैं कोमल के पास बैठ गया.और विद्या स्वेता दीदी के पास और रानी सीतल दीदी के साथ बैठ कर टीवी देखते हुए बाते करने लगी

कोमल ने तो डीडीएलजी मूवी लगा दी. फिर क्या था सब काफ़ी इंटेरेस्ट लेने लगे.

कोमल तो मेरे कंधे पे सर रख कर मूवी देख रही थी.

ये कोमल भी ना आज कल ऐसी हरकत कर रही है कि मैं उसको समझ ही नही पा रहा हूँ.

मैं तो उसे जिस चीज़ से खुशी मिलती है वही करता हूँ.

अच्छा है रानी को कभी जलन नही होती. मुझे कभी ज़्यादा रोक टोक नही करती.

कोमल-अवी

अवी-हाँ

कोमल-ये मेरी फेव मूवी है.

अवी-तुम्हे रोमॅंटिक मूवी अच्छी लगती है.

कोमल-हाँ, रोमॅन्स के बिना ये दुनिया फीकी लगती है.

अवी-तुम ठीक तो हो ना ,ऐसी बहकी बहकी बाते कहाँ से सीख ली

कोमल-रानी से सीखा है. वो दिखती नही पर काफ़ी रोमॅंटिक है वो. और तुम ही ने तो कहा था कि रानी जैसा बन जाउ.

अवी-तुम तो रानी से भी स्मार्ट और खूबसूरत हो

कोमल-थॅंक्स, वैसे तुम्हे तारीफ करना नही आता.

अवी-अब सीखना पड़ेगा. क्यू कि तुम तारीफ के काबिल होती जा रही हो

कोमल-ऐसा कुछ नही है. बस थोड़ा चेंज हो गयी हूँ.

अवी-अब तुम पर्फेक्ट बन गयी हो. स्मार्ट भी हो और खूबसूरती के बारे मे तो पूछो ही.मत

कोमल-नही पूछती.

और कोमल खुद के जोक पे हँसते हुए मेरे और करीब आकर टीवी देखने लगी

उधर सीतल दीदी और रानी बाते कर रही थी.

सीतल दीदी-रानी एक बात पुच्छू ,सच बताना

रानी-इसमे पूछने की क्या बात है

सीतल दीदी-तुम्हारे बाय्फ्रेंड का नाम क्या है.

रानी-मेरा कोई बाय्फ्रेंड नही. अगर होता तो बता देती

सीतल दीदी-झूठ मत बोलो, तुम इतनी खूबसूरत हो ,ये हो ही नही सकता कि तुम्हारा बाय्फ्रेंड ना हो

रानी-मैं ने आपको मेले के वक्त बताया था.

सीतल दीदी-तो अवी को बाय्फ्रेंड बना लो,

रानी-अवी को, कुछ भी

सीतल दीदी-अवी मे क्या कमी लगती है तुम्हे ,हॅंडसम है, स्मार्ट है. तुम्हारा फ्रेंड, पर्सनली जानती हो.तुम दोनो की जोड़ी अच्छी दिखेगी.

रानी-अभी कुछ सोचा नही. पर आपकी बात पे सोचना पड़ेगा.ऐसा लग रहा है

सीतल दीदी-देख लो, अवी की गर्लफ्रेंड बनोगी तो हमारे फॅमिली की पर्मानेन्त मेंबर बन सकती हो.

रानी-अगर कभी बाय्फ्रेंड बनाने का सोचा तो आपकी बात पे पहले ध्यान दुगी

सीतल दीदी-तो इस टूर पे अवी के साथ रहो , अवी को जानने की कॉसिश करो, मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ

रानी-थॅंक्स पर इतने बड़ा फ़ैसला इतनी जल्दी करना ठीक नही होगा.

सीतल दीदी-तुम्हे जितना समय चाहिए उतना लो पर अवी के बारे मे ज़रूर सोचना. और मेरी मदद लगे तो बेझिझक माँग लेना.

रानी तो सीतल दीदी की बात पे मन ही मन हँस रही थी.

आज रानी हँस रही थी पर जब सीतल दीदी को सच का पता चलेगा तो रानी की सामत आ जाएगी.

लेकिन अभी के लिए तो रानी खुश है.

हमारी तरह सब टीवी देखते हुए बाते कर रहे थे तो राजेश चेटिंग कर रहा था.

जैसे हमारी मंज़िल पास आने लगी छोटी चाची ने स्वेता दीदी को अपने पास बुला कर कुछ इन्स्ट्रक्षन दिए

स्वेता दीदी और छोटी चाची मे क्या बात हुई मुझे नही पता पर स्वेता दीदी बड़े ध्यान से चाची और बुआ की बात सुन ने लगी.

स्वेता दीदी के बाद छोटी चाची ने मुझे आवाज़ दिया.

और मुझे लेकर बस की लास्ट सीट पर चली गयी.

सी चाची-अवी

अवी-जी चाची

सी चाची-हम कुछ देर मे आश्रम मे पहुँच जाएँगे.

अवी-मुझे तो जल्दी दादाजी से मिलना है

सी चाची-मिल लेना ,पर मुझे बता होटेल कौन सा बुक किया है.तूने बताया ही नही.

अवी-चाची .आज दिन भर हम यहीं रुकेंगे.फिर शाम मे यहाँ से एक हिल स्टेशन जाएँगे. जो 2 घंटा दूर है यहाँ से

सी चाची-मुझे लगा था ,वैसे स्वेता ने बताया था कि हम हिल स्टेशन पे रुकेंगे.

अवी-चाची प्लान मे एक चेंज है

सी चाची-क्या

अवी-हम तो टूर सिर्फ़ 3 दिन के लिए एंजाय करने वाले थे .पर सोच रहा हूँ कि एक दिन और एड कर दूं पर मज़ा आए तभी एड करूँगा.

सी चाची-जैसा करना है वैसा करना .पर मुझे अपडेट करते रहना.

अवी-वो तो करना ही होगा.और आपका हूनीमन भी हो जाएगा.

सी चाची-यहाँ कोई मस्ती मत करना

अवी-मैं मेरी बात नही कर रहा हूँ.चाचा की बात कर रहा हूँ

सी चाची-वो तुम्हारे जैसे नही सोचते .

अवी-पर चाचा बड़ी चाची से तो कह रहे थे कि आज वो हूनीमन मना लेंगे

सी चाची-दीदी के मज़े है.

अवी-और आपके

सी चाची-मेरा क्या है. मैं तो ऐसी ठीक हूँ.

अवी-आप मेरी होगी तो मैं आपको हूनीमन पे ले जाउन्गा.

सी चाची-कहीं ले जाने की क्या ज़रूरत है.बस मुझे प्यार करते रहना.

अवी-इतना प्यार करूँगा कि आपको मेरे प्यार के अलावा कुछ नही दिखेगा.

सी चाची-अभी कंट्रोल मे रहना वरना सबको दिख जाएगा.

अवी-कंट्रोल की बात मत कीजिए ,मुझे पायल की याद आती है.

सी चाची-पायल से याद आया कि वो कैसी है.

अवी-वो खुश है

सी चाची-तू सबको खुश रखता है. पर अपने बारे मे थोड़ा भी नही सोचता

अवी-खुद के बारे मे मैं क्यू सोचूँ, उसके लिए आप हैना.

सी चाची-तो मेरी एक बात मानेगा.

अवी-आपकी हर बात मानता हूँ

सी चाची-तुझे आज मैं सिर्फ़ हँसते हुए देखना चाहती.

अवी-सिर्फ़ आज

सी चाची-हाँ, मेरे लिए इतना करेगा ना.

अवी-आपने कुछ माँगा हो और मैं पूरा ना करू ये कभी हो नही सकता.

सी चाची-(चलो अच्छा है अवी ने प्रॉमिस किया .वरना अपने दादाजी को देख कर रो देता.) प्रॉमिस

अवी-पक्का प्रॉमिस

चाची को प्रॉमिस करते ही ड्राइवर ने ब्रेक मार दिया. और हमारी बस आश्रम के सामने रुक गयी.
 
839

आश्रम आते ही चाचा बस से उतर गये .और वॉचमन से बात करके बस आश्रम मे ले जाने का बंदोबस्त कर लिया.

आश्रम एक विलेज मे था. काफ़ी बड़ा आश्रम था.

हम विंडो से आश्रम को देखने लगे.

आश्रम मे कोई बड़ी बिल्डिंग नही थी. कावेलु के घर थे .पर काफ़ी हलचल दिख रही थी.

पेशेंट बहुत दिख रहे थे, और कुछ डॉक्टर ओपन स्पेस मे ट्रीटमेंट कर रहे थे.

कुछ सेक्षन मे काफ़ी लंबी लाइन लगी हुई थी. इतनी भीड़ होने के बाद भी शांति थी.

चाचा यहाँ काफ़ी बार आए थे जिस से वो इस जगह को अच्छे से जानते थे.

एक सेक्षन पे ठाकुरजी का नाम लिखा था.लगता है ठाकुरजी ने यहाँ डोनेशन दिया होगा.

आश्रम के अंदर आते ही हम खुद को तय्यार करने लगे.

हमे यहाँ कोई सामान नही उतारना था .बस जाके दादाजी से मिलना था.

यहाँ के बारे मे मुझे कुछ पता नही था. जो इंतज़ाम करना था वो चाचा और चाची और बुआ को देखना था.

हम यहाँ शाम तक रुकने वाले थे जिस से हम दादाजी से आराम से मिल सकते थे.

चाचा ने बस रोकने तक किसी को भी सीट नीचे नही उतरने दिया.

चाची भी अपनी जगह पर बैठी थी. मतलब चाचा लीड करने वाले है.

बस रुकते ही चाचा ने हमे कुछ इन्स्ट्रक्षन दिए

कविता-मामा बस रुक गयी है

चाचा-पता है तुमको अपने दादाजी से मिलने की जल्दी है पर उस से पहले मेरी बात ध्यान से सुनो

सब चाचा की तरफ देखने लगे.

चाचा-यहाँ कोई शोर नही मचाएगा. कोई जल्द बाज़ी नही करेगा पहले मुझे मिलना है , और रोना तो बिल्कुल ही मत

राज-मामा जल्दी ,मुझे बाथरूम जाना है

चाचा-और एक बात ,कॅमरा यही रख दो. और मोबाइल स्विच ऑफ रखो या यहीं पर रख दो .अगर वहाँ मोबाइल बजा तो किसी को मिलने को नही मिलेगा. अब एक एक करके नीचे उतरना .फिर बताउन्गा हमें कहाँ जाना है

चाचा का लेक्चर ख़तम होते ही चाचा ने एक एक करके सबको बस से नीचे जाने दिया

और जब तक सब बस से नीचे नही आए तब तक चाचा ने किसी को कहीं जाने नही दिया. राज को बाथरूम भी जाने नही दिया

चाची बच्चो को अपने साथ लेकर बस से नीचे आ गयी. और चाचा हम सब को अनुशासन से आश्रम के अंदर ले जाने लगे.

चाचा हमे आश्रम के एक सेक्षन मे ले गये .और हम को वहाँ बैठने को कहा.

चाचा-तुम यही बैठो मैं डॉक्टर से मिल के आता हूँ.

राज-मामा मुझे बाथरूम जाना है

चाचा-राजेश राज को बाथरूम ले जाओ. वो सामने है. और लॅडीस बाथरूम वही है

अवी-चाचा जी मैं आपके साथ डॉक्टर से मिलना चलता हूँ

चाचा-नही ,तुम यहीं रूको .मैं अकेले मिल के आता हूँ

चाचा डॉक्टर से मिलने के लिए चले गये.

चाचा के जाते ही छोटी चाची हरकत मे आ गयी.

सी चाची-स्वेता तुम सबको वॉशरूम लेकर जाओ. और विद्या तुम अमित को पकडो मैं अभी आती हूँ

पूजा बुआ-तुम कहाँ जा रही है.

सी चाची-मेरा सर दर्द कर रहा है. मैं मेडिसिन लेके आती हू

पूजा बुआ-विद्या को साथ लेकर जाओ, वो बता देगी मेडिसिन के बारे मे

ब चाची-मैं जाती हूँ मीना के साथ, विद्या बच्चो का ध्यान रख लेगी

सी चाची -मुझे मेडिसिन का नाम पता है

पूजा बुआ-गुम मत हो जाना. और जल्दी आना

मैं छोटी चाची को देखता रह गया.

अभी तो इतने अच्छे से मेरे साथ बात कर रही थी .अचानक छोटी चाची को क्या हुआ ,

मैं सब का ध्यान बचा कर छोटी चाची के पीछे चला गया.

छोटी चाची काउंटर पे जाके कुछ बोलने लगी. फिर नर्स ने कॉल किया .और नर्स चाची को ले के डॉक्टर के कॅबिन मे चली गयी.

मैं बिना वजह शक कर रहा था .चाची का सर सच मे दर्द कर रहा था तभी वो डॉक्टर से मिलने गयी.

मैं वापस जाकर बुआ के साथ बाते करने लगा.

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सी चाची-दीदी ,मैं ने ठाकुरजी को कॉल कर दिया था.

ब चाची-मुझे तो डर लग रहा है. पहली बार पूरी फॅमिली एक साथ पिताजी को मिलने आई है

सी चाची-दीदी कुछ नही होगा. ठाकुरजी हैना ,वो संभाल लेंगे.मैं ने उनको बता दिया था कि हम पिताजी से मिलने जा रहे है. ठाकुरजी ने डॉक्टर से बात की है

ब चाची-चल जल्दी, हम डॉक्टर से मिलके चेक करते .कि सब ठीक हैना

चाची रिसेप्निस्ट के पास चली गयी.

नर्स-कहिए ,मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ

सी चाची-हमे ठाकुरजी ने भेजा है.

नर्स-एक मिनिट, मैं डॉक्टर को बताती हूँ

नर्स ने डॉक्टर को फोन करके बताया कि ठाकुरजी की तरफ से कोई आया है.

ठाकुरजी का नाम सुनते ही डॉक्टर ने चाची कॅबिन मे लाने को कहा.नर्स खुद चाची को कॅबिन मे ले गयी.(ठाकुरजी ने इस आश्रम को काफ़ी डोनेशन दिया था जिस से उनको यहाँ सब जानते थे)

जिस गेट से चाची कॅबिन मे गयी थी वो 2न्ड गेट था जहाँ से डॉक्टर कॅबिन मे जाता है.

चाची के कॅबिन मे आते डॉक्टर ने नर्स को बाहर भेजा और किसी पेशेंट को अंदर ना आने को कहा.

डॉक्टर-बैठिए, ठाकुरजी ने फोन करके बताया था कि आप आने वाले है

सी चाची-ये भी बताया होगा कि हम क्यूँ आए है.

डॉक्टर-हाँ, मैं ने हमेशा की तरह सारा इंतज़ाम कर दिया है.

सी चाची-इस बार हम पूरी फॅमिली के साथ आए है.

डॉक्टर-आप बेफिकर रहिए. रिपोर्ट बदल दी है. किसी को शक नही आएगा ,

ब चाची-आपका बहुत बहुत शुक्रिया

डॉक्टर-इसमे शुक्रिया कहने की ज़रूरत नही है. आप ठाकुरजी के तरफ से आए .ये आश्रम उनके वजह से चल रहा है.आपके लिए इतना तो कर ही सकता हूँ.

सी चाची-बाकी सबको बता दिया हैना

डॉक्टर-योगेंद्रसिंघ के लिए स्पेशल नर्स रखी है उसको पता है कि उसको क्या करना है. आज तक आपके पति को पता नही चला कि उनके पिताजी के साथ क्या हुआ तो इन बच्चो को कहाँ से पता चल जाएगा.

ब चाची-मुझे सिर्फ़ अवी का डर है. उसको पता चला कि उसके दादाजी के साथ क्या हुआ तो क्या होगा.

सी चाची-दीदी मैं अवी को संभाल लूँगी.

डॉक्टर-आप बेफिकर रहिए. हमारे तरफ से कोई गड़बड़ नही होगी.

ब चाची-एक छोटी गड़बड़ बहुत सी ज़िंदगी को नुकसान पहुँच सकती है

डॉक्टर-बताया था ठाकुरजी ने कि योगेंद्रसिंघ को क्या हुआ है , और ये बात आपने किसिको नही बताई है.ना योगेंद्रसिंघ के बेटे को (चाचा),, और ना उनकी बेटियो को (पूजा बुआ नेहा बुआ और नीता बुआ , सबसे छुपा के रखा है)

सी चाची-वो छोड़िए. मेरे पति यहाँ आए थे

डॉक्टर-कॅबिन के बाहर इंतजार कर रहे है. मुझे पता था कि आपके पति से मिलने की जगह मेरा आपसे मिलना ज़रूरी है.इसी लिए उनको थोड़ी देर रुकने को कहा है.

ब चाची-अच्छा किया .

डॉक्टर-लेकिन मेरी एक बात समझ मे नही आती कि ,आपके पति आपकी फॅमिली को चलाते है ऐसे मे उनसे क्यूँ छुपाया है

सी चाची-ये बहुत लंबी कहानी है. आप बस इतना ध्यान रखे कि हमारे अलावा किसी को सच का पता नही चलना चाहिए.किसी को भी पता नही चलना चाहिए

डॉक्टर-मैं इसका पूरा ध्यान रखूँगा. वैसे आप कब तक रुकेगी यहाँ

ब चाची-हम शाम मे चले जाएँगे

डॉक्टर-रुकना हो तो मैं इंतज़ाम कर देता हूँ.

सी चाची-यहाँ एक दिन भी रुके तो किसी ना किसी तरह से किसी को पता चल गया तो गड़बड़ हो जाएगी.यहाँ रुकना मतलब रिस्क है , गली से किसी ने नर्स की बात सुन ली तो या हमे बाते करते हुए सुन लिया तो , ऐसा रिस्क हम नही ले सकते, इस लिए हम आज ही जाएँगे वापस,

डॉक्टर-समझ गया .तभी आप जब भी आती हो तो उस्दिन चली जाती हो, अच्छी सोच है ,

ब चाची-मीना अब हमे चलना चाहिए

सी चाची-हाँ दीदी.

डॉक्टर-आप बेफिकर होके रहिए. मैं सब मेनेज कर लूँगा. आपके पति को मैं हॅंडल कर लूँगा.

ब चाची-शुक्रिया

और चाची डॉक्टर से मिलके हमारे पास आ गयी.

चाची का चेहरा टेन्षन फ्री हो गया.

चाची के जाते ही डॉक्टर ने थोड़ी देर चाचा से बाते की.

हम तो चाचा के आने का इंतजार कर रहे थे .हमे दादाजी से जो मिलना था.

और हमारा इंतजार ख़तम हुआ. चाचा जी डॉक्टर के साथ हमारे पास आ गये.
 
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चाचा जी के साथ डॉक्टर के आते ही हम सब खुश हो गये.

बड़ी चाची को डर था कि कहीं दादाजी का सच हमे पता ना चले.

बड़ी चाची के हाथ काप रहे थे, ये देख कर छोटी चाची ने उनको हिम्मत दी.

नेहा बुआ भी अपने पिताजी से मिलने के लिए बेचैन हो रही थी

नीता बुआ नेहा बुआ के साथ ही थी .ताकि नेहा बुआ ज़्यादा भावुक ना हो जाए.

हम सब तो दादाजी से मिलने के लिए बेताब हो रहे थे.

हम कब दादाजी से मिलेंगे इस बात को सोच सोच कर हमारा बुरा हाल हो रहा था.

हम दादाजी से मिलने के बाद क्या करेंगे. क्या बात करेंगे दादाजी ,ये सब हम ने सोच रखा था.

चाचजी-सुनो, हमे इजाज़त मिल गयी है. हमे 5 घंटे मिले है. अब हम आराम से पिताजी को मिल सकते है.

राजेश-और कितनी देर लगेगी.

चाचा-10 15 मिनिट मे हम पिताजी के कमरे के पास होंगे .पर हमे ग्रूप बना कर मिलना होगा.

सीतल दीदी-ऐसा क्यूँ?

पूजा बुआ-ग्रूप बनाने से हम आराम से मिल सकेंगे पिताजी से

कविता-तो जल्दी ग्रूप बनाते है.

चाचा-ग्रूप तुम सब बनाओ ,पर एक ग्रूप मे ज़्यादा लोग नही होने चाहिए

कविता-लीना और मैं एक ग्रूप मे

नीता बुआ-तुम चुप रहो. मीना तू बना ले ग्रूप

सी चाची-नेहा ,नीता, राज और राजेश पहले मिलेंगे ,फिर पूजा दीदी सुमन दीदी कविता और लीना का ग्रूप होगा. सीतल स्वेता सीमा दीदी और विद्या , उसके बाद मैं रानी कोमल और अवी मिलेंगे.

कविता-मामी आप का कोई जवाब नही

सी चाची-और लास्ट मे हम बच्चो के साथ मिलेंगे पिताजी से.

पूजा बुआ-तूने सही ग्रूप बनाए है.

चाचा-हो गये ग्रूप

पूजा बुआ-हाँ

चाचा-तो चलो मेरे पीछे पीछे आ जाओ

और हम अपने ग्रूप के साथ चाचा के पीछे पीछे जाने लगे.

छोटी चाची ने ऐसे ग्रूप बनाए कि 2 बच्चो के साथ 2 बड़े.

और अगर कोई कुछ पूछेगा तो वो उनको चुप करा सकते है.

राज तो ज़्यादा सवाल नहीपुछेगा जिस से नीता बुआ उनके ग्रूप को संभाल सकती है.

कविता और लीना ज़्यादा सवाल पूछती है ऐसे मे उनके साथ पूजा बुआ और बड़ी चाची को रखा ताकि उनके एक आवाज़ मे दोनो चुप हो जाएगी.

सीतल को स्वेता दीदी संभाल लेगी. और विद्या रिपोर्ट देख कर चुप रहेगी.

हमारे ग्रूप मे रानी और छोटी चाची थी. रानी छोटी चाची की हर बात मानती है. और छोटी चाची मेरे ध्यान रखेगी.

चाचा हमे दादाजी वाले कमरे के पास ले आए.

इस सेक्षन मे काफ़ी शाती थी. और वीआइपी टाइप सेक्षन था. बहुत कम हलचल थी ईसतरफ

दादाजी के कमरे के गेट के पास एक नर्स और डॉक्टर हमारा इंतजार कर रहे थे

चाचा ने हमे वेटिंग चेर पे बैठने को कहा. और चाची बुआ के साथ हमारे सामने डॉक्टर से रिपोर्ट के बारे मे पूछने लगी.

नेहा बुआ-डॉक्टर पिताजी कैसे है

डॉक्टर-आप खुद देख लीजिए

डॉक्टर ने नर्स को बोल कर परदा हटा दिया. और ग्लास की दीवार से हम दादाजी को देखने लगे.

दादाजी को देखने के लिए सब खड़े हो गये.

दादाजी बेड पर लेटे हुए थे.उनकी आँखे छत की तरफ थी.और एक डॉक्टर दादाजी का चेकप कर रहे थे.

नेहा बुआ-डॉक्टर पिताजी तो वैसे है ,उनमे कोई सुधार नही दिख रहा

डॉक्टर-2 महीने पहले उनके हाथो मे थोड़ी मूव्मेंट की थी पर 1 हफ्ते पहले वो वापस पहले जैसे हो गये.

नेहा बुआ-इतने साल हो गये फिर भी कुछ सुधार नही हुआ. दीदी हमे पिताजी को कहीं और ले जाना चाहिए

पूजा बुआ-नेहा, दूसरी तरफ ले गये तो पिताजी को ज़िंदा रखना मुश्किल होगा.

डॉक्टर-सही कहा आपने, यहाँ हम पूरी खोसिश कर रहे है. कुछ महीनो से काफ़ी इंपोर्व्मेंट हुई है.

सी चाची-क्या इंप्रूव्मेंट हुई है वो बाद मे देख लेंगे.पहले बच्चों को उनके दादाजी से मिलने दीजिए

डॉक्टर-चलिए मेरे साथ. पर एक साथ इतने लोग अंदर जाएँगे तो प्राब्लम होगी.

ब चाची-नेहा पहले तुम जाओ,

पूजा बुआ भी यही चाहती थी कि नेहा पहले अपने पिताजी से मिले. नेहा बुआ ने नीता बुआ का हाथ पकड़ लिया और कमरे के अंदर चली गयी.राज और राजेश भी उनके साथ अंदर चले गये.

हम ग्लास से कमरे के अंदर देखने लगे.

एक डॉक्टर अंदर कमरे मे था तो दूसरे डॉक्टर के साथ छोटी चाची और पूजा बुआ बात कर रही थी.

नेहा बुआ अंदर जाते ही दादाजी के पैरो मे गिर कर रोने लगी.

चाची को पता था कि अंदर नेहा बुआ खुदको रोक नही पाएगी .इस लिए नीता बुआ और राजेश को उनके साथ भेजा था.

नीता बुआ नेहा बुआ की जान थी. और राजेश को वो अपना बेटा मानती थी.

नीता बुआ ने नेहा बुआ को संभालना शुरू किया.

राज भी अपने दादाजी और मौसी को रोता हुआ देख कर रोने लगा,

पर डॉक्टर के कुछ कहने पर नेहा बुआ ने रोना कम किया और पिताजी के हाथ को अपने हाथो मे पकड़ कर उनके साथ बाते करने लगी.

दादाजी तो बस छत की तरफ देख रहे थे.

पर नेहा बुआ की बात कहीं ना कहीं उनके दिल को धड़कने मे मदद कर रही थी.

दादाजी नेहा बुआ ,नीता बुआ, राज और राजेश की बाते सुन रहे थे .पर उनके तरफ से रिप्लाइ नही आ रहा था.जिस से नेहा बुआ को फिर रोना आ गया.

पता नही अंदर नेहा बुआ क्या बात कर रही थी. पर राज और राजेश को नीता बुआ ने जल्दी बाहर भेज दिया .

और नेहा बुआ पागलो की तरह दादाजी से बाते करने लगी. नीता बुआ भी नेहा बुआ का साथ दे रही थी.

शायद अपने पास्ट की बाते कर रही होगी और उनके बाद फॅमिली मे क्या हुआ वो बताने लगी.उनको कितना मिस करती है ये बता रही होगी

नेहा बुआ का दादाजी के लिए प्यार देख कर मुझे अपने पापा की याद आ गयी.

नेहा बुआ को ज़्यादा टाइम लग गया .उनको ज़बरदस्ती कमरे से बाहर निकाला गया.नेहा बुआ तो दादाजी से दूर जाना नही चाहती थी .पर बाकियो को मिलना था.

नेहा बुआ को फिर से मिलने का प्रॉमिस करके बाहर निकाला.

उनके बाहर आते ही पूजा बुआ अपने ग्रूप के साथ अंदर चली गयी.

नेहा बुआ नीता बुआ केगले लग कर रो रही थी. उनको रोता हुआ देख कर हमे भी रोना आ रहा था.

नेहा बुआ को पानी दे कर,कुछ घंटो के लिए नींद आए इतनी मात्रा मे नींद का इंजेक्षन दे कर शांत किया गया.

नेहा बुआ के सोते ही ,हम वापस ग्लास मे से दादाजी कोदेखने लगे.

विद्या वहाँ की नर्स के साथ बात कर रही थी.

कविता और लीना हँसी मज़ाक करते हुए दादाजी से मिल रही थी.

अपने किस्से सुना कर दादाजी को हंसाना चाहती थी.

कविता और लीना काफ़ी हिम्मत और समझदारी का एग्ज़ॅंपल दे रही थी

कविता और लीना की बाते सुनकर पूजा बुआ और बड़ी चाची ने उनको गले लगा लिया.

नेहा बुआ रोई पर कविता छोटी होकर हिम्मत से काम ले रही थी.

दादाजी का आशीर्वाद लेके वो भी बाहर आ गये.

उनके बाद स्वेता दीदी का ग्रूप दादाजी से मिलने चला गया.

स्वेता दीदी ने दादाजी का आशीर्वाद लेके उनसे बाते करनी शुरू की.

सीमा चाची ने अपना सर दादाजी के पैरो को मे रख कर उनका आशीर्वाद लिया जैसे बड़ी चाची ने लिया था.

विद्या जल्दी बाहर आ गयी जिस से राज और राजेश को वापस अंदर भेज दिया.

हम इस इंतजार मे थे कि हमे कब दादाजी से मिलने मिलेगा.

3 घंटे हो गये हम दादाजी को ग्लास से देख रहे थे.

कोमल भी दादाजी से मिलने के लिए बेताब थी. कोमल ने 3 घंटे मे एक बार भी मेरा हाथ नही छोड़ा.

और बार बार पूछती थी कि हम कब दादाजी से मिलेंगे.

मैं कोमल को रुकने के लिए बोल रहा था.

रानी को पता था कि सब काफ़ी सालो बाद दादाजी को मिल रहे है. ऐसे मे सब को टाइम तो लगेगा ही.

छोटी चाची रानी को कुछ बता रही थी.

विद्या लगातार नर्स से बाते कर रही थी

ठाकुरजी की वजह से हमे इतनी देर तक दादाजी सेमिलने दिया जा रहा है.

अगर ठाकुरजी ना होते तो हम सिर्फ़ 2 घंटे मिल पाते जैसे बाकी पेशेंट के साथ होता है.

सब दादाजी से मिलके भावुक हो रहे थे.

दादाजी को मिलने की खुशी थी तो उनकी हालत देख कर रोना आ रहा था.

सब को दादाजी से मिलके अच्छा लग रहा था.

कितना कुछ दादाजी को बताना था.

टाइम कम था फिर भी सब खुश थे.

एक दूसरे के गले लग कर. या उनके हाथ पकड़कर बैठ कर दादाजी के बारे मे बात कर रहे थे,

सब के दिल रो रहे थे

और चेहरे पे खुशी दिख रही थी.

नेहा बुआ नींद से उठेगी तो उनको संभालना मुश्किल होगा.

उनके उठने से पहले सबका दादाजी से मिलके हो जाना चाहिए.

स्वेता दीदी दादाजी से मिलके बाहर आ गयी.

स्वेता दीदी ने अपने शादी के लिए अभी से आशीर्वाद ले लिया.

उनकी बाते तो बहुत लंबी थी.

सीमा चाची राजेश के साथ बाहर आ गयी. और पूजा बुआ को अंदर भेज दिया.

राजेश ने अपनी कामयाबी के बारे मे दादाजी को बताया होगा.

पूजा बुआ ,स्वेता दीदी, सीतल दीदी और राज ,पूरी फॅमिली ने दादाजी का आशीर्वाद लिया .स्वेता सीतल की शादी की बात बता कर पूजा बुआ बाहर आ गयी.

डॉक्टर को हर ग्रूप को ज़बरदस्ती बाहर भेजना पड़ा.क्यूँ कि कोई दादाजी से दूर जाना ही नही चाहता था.

स्वेता दीदी के बाहर आते मेरी धड़कने तेज चलने लगी.

मुझे दादाजी से मिलने दिया जा रहा है.

मेरी तरह कोमल भी दादाजी से मिलने ,उनको देखने, उनसे बात करने के लिए तय्यार थी.

रानी भी मेरे दादाजी का आशीर्वाद लेना चाहती थी.

सी चाची-अवी अपने दादाजी से मिलोगे नही.

चाची की बात सुनते हम होश मे आ गया

और दादाजी के कमरे की तरफ अपने कदम बढ़ाने लगा.

कोमल मेरा हाथ पकड़ कर अंदर आ रही थी.

हम चारो के अंदर आते ही मैं दादाजी को देख कर अपनी जगह पर जम गया.

कोमल और रानी दादाजी के पास जाकर बैठ गयी.

छोटी चाची मेरे पास खड़ी हो गयी.

चाची ने डॉक्टर से मिलके उस ग्लास पे परदा लगाने को कहा. जिस से बाहर से अंदर देखा जा सकता था.

परदा लगाने के बाद चाची ने डॉक्टर को इशारा करके बाहर जाने को कहा.

चाची ने हमारे लिए पूरी प्राइवसी कर के रख दी.

हमारी मुलाकात सबसे लास्ट मे इस लिए रखी ताकि ,चाची को दादाजी से बहुत सी बाते करनी थी.
 
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चाची ने हमारे लिए कमरे मे पूरी प्राइवसी रखी.

रानी और कोमल ने कमरे मे आते के साथ दादाजी के पैर छु कर आशीर्वाद लिया.

मैं दादाजी के से थोड़ी दूर खड़ा होकर उनको देखने लगा.

दादाजी एक ज़िंदा लाश की तरह बेड पर लेटे हुए थे.

उसकी आँखो मे मूव्मेंट हो रही थी बाकी उनके शरीर मे कोई हरकत नही हो रही थी.

दादाजी की ऐसी हालत देख कर मुझे दुख हुआ पर उनसे मिलने की खुशी होरही थी.

दादाजी की हालत देख कर मेरा दिल रो रहा था,

पर उनके चेहरे पे अभी भी एक तेज था.ऐसी हालत मे भी उनके चेहरे पे एक सुकून दिख रहा था.

रानी तो सिर्फ़ खड़ी रह कर दादाजी को देख रही थी.

कोमल दूसरी तरफ ,दादाजी का हाथ अपने हाथो मे लेकर उनसे बाते करने लगी.

कोमल दादाजी से मिलने से इतनी एग्ज़ाइट हुई कि वो क्या बोल रही थी वो उसे ही पता होगा.

चाची मेरे पीछे खड़ी होकर मेरे कंधे पे हाथ रख कर मुझे हिम्मत दे रही थी.

मेरे मूह से अभी तक एक वर्ड भी नही निकला था पर आँखो मे आसू ज़रूर आ गये थे.

कोमल तो अपनी ही दुनिया मे खोई थी. रानी मेरी हालत को समझ सकती थी.

कोमल काफ़ी देर तक 2 साल मे जो जो हुआ वो दादाजी को बता रही थी.

" और लास्ट मे कोमल ने दादाजी के कान मे धीरे से कुछ कहा .जिसे सुनकर दादाजी ने अपनी पलकें झुका दी."

दादाजी की पलके झुकने को कोमल ने उनका सहमति समझ ली.

पता नही कोमल ने दादाजी के कान मे क्या कहा .पर दादाजी के पलकें झुकाते ही कोमल खुश हो गयी.

और कोमल मेरे गले लग कर अपनी खुशी हमारे साथ बैठने लगी.

कोमल दादाजी से बात करके बहुत खुश दिख रही थी.

ऐसा लग रहा था कि कोमल जिस वजह से दादाजी से मिलने आई थी वो पूरी हो गयी.और दादाजी ने उसको आशीर्वाद दिया.

कोमल नेहा बुआ को मिलने के लिए बाहर चली गयी.

कोमल के जाते ही चाची ने दादाजी से बात करनी शुरू की

चाची-पिताजी मैं आपके पोते को लेकर आ गयी.

और चाची ने मुझे दादाजी के पास जाने को कहा.

मैं ने दादाजी का आशीर्वाद लिया और उनके हाथ को अपने हाथो मे लेकर उनके पास बैठ गया.

सी चाची-पिताजी. जैसा आप चाहते थे मैं ने अवी को वैसा बना दिया . आपके जैसा बनाया है अवी को

सी चाची-पिताजी ,अवी आपके बताए हुए रास्ते पे चल रहा है. अपनी फॅमिली को एक कर रहा है. एक धागे से बाँध कर रख रहा है. हमारी फॅमिली की परंपरा टूटने नही दी अवी ने, हमारा अवी आपका नाम चला रहा है.

ये चाची क्या बोल रही थी

इस बार दादाजी ने चाची की बात का जवाब दिया.अपनी पलकें झुका कर

अवी-दादाजी ,

मेरी आवाज़ सुनते ही दादाजी ने अपनी आँखे मेरी तरफ घुमा दी.

अवी-दादाजी, आपके बिना हमारी फॅमिली अधूरी है.मुझे आपकी ज़रूरत है. हमारी फॅमिली को आपकी ज़रूरत है.

दादाजी ने वापस छत की तरफ देखना शुरू किया.

सी चाची-पिताजी ,देखिए अवी आपसे किस को मिलाने लाया है. ये रानी है. हमारे अवी की रानी, हमारे घर की बहू. आपको शालिनी भाभी जैसी बहू चाहिए थी ना मैं ने वैसी बहू ढूँढ ली है. रानी मे शालिनी भाभी की सारी खूबिया है. रानी हमारे अवी का हर कदम पे साथ देगी.

दादाजी ने रानी की तरफ देखा और फिर से छत की तरफ देखने लगे

चाची के मूह से मेरी माँ का नाम सुनकर ,मेरी माँ का नाम सुनते ही मेरी आँखो मे आसू आ गये.

शालिनी मेरी माँ का नाम था. मेरे दादाजी मेरी माँ को अपनी बेटी की तरह मानते थे. मेरी माँ को याद करते ही सबकी आँखो मे पानी आ जाता है. पता नही मेरी माँ ने ऐसा क्या किया था जो हर कोई उनको इतना याद करता है.

यहाँ तक कि मेरी माँ का नाम सुनते ही नेहा बुआ भी रोने लगती है.

चाची-पिताजी आपने जो जो कहा था वो मैं ने पूरा किया है. आपको अवी को आपने जैसा बनाना था वैसा बना दिया. आपको अवी के लिए ऐसी बहू ढूँढनी थी जो शालिनी भाभी जैसी हो वैसी बहू मैं ने ढूँढ ली है. आप अवी से जो जो करवाना चाहते थे मैं ने वो उस से करवाया है. अवी ने मेले का काम खुद संभाला है. जैसा आप चाहते थे ..मेले का काम करके उसने आपका नाम रोशन किया है.

और चाची ने मुझे और रानी को एक साथ आशीर्वाद लेने को कहा.

हमारे आशीर्वाद लेते ही दादाजी ने फिर से अपनी पलकें झुका कर मुझे और रानी को आशीर्वाद दिया.

रानी ने दादाजी का आशीर्वाद लेते हुए अपनी आँखे बंद की .जैसे दादाजी को वचन दे रही हो कि वो शालिनी भाभी जैसी बनकर दिखाएगी

रानी ने आशीर्वाद लेते ही अपने आँखे खोल कर कर मेरी तरफ देखा और मुझे गले लगा लिया.

फिर चाची रानी को लेकर बाहर चली गयी. और मुझे दादाजी से अकेले मे मिलने दिया.

अवी-दादाजी, मुझे ये पता नही कि आप क्या चाहते है. आप मुझे कैसा बनाना चाहते थे. पर मैं आपको वचन देता हूँ कि मैं अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करूँगा. अपनी फॅमिली को मेरी वजह से कभी दुख नही होने दूँगा. पूरी फॅमिली को प्यार के धागे से बाँध कर रखूँगा.छोटी चाची जो कहेगी उसे आपका हुकुम मान कर पूरा करूँगा.बस आप जल्दी ठीक हो जाइए.आपके बिना फॅमिली अधूरी सी लगती है.

इतना कह कर मैं रोने लगा.

मेरे आसू की कुछ बूद दादाजी के हाथो पे गिरते ही ,मुझे रोता हुआ देख कर दादाजी की हार्टबीट बढ़ने लगी.

मशीन से आवाज़ निकलते ही डॉक्टर अंदर आ गये और दादाजी को चेक करने लगे.और मुझे बाहर भेज दिया.

मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था.

डॉक्टर के इस तरह अंदर आने से छोटी चाची मेरे पास आ गयी.

सी चाची-क्या हुआ पिताजी को ,क्या कहा तूने

अवी-मैं ने वो

सी चाची-तू रोया था.

अवी-हाँ,

सी चाची-तुझे कहा था रोना मत, देखा क्या हो गया. कभी तो मेरी बात माना कर

चाची की बात सुनते ही मैं उनके गले लगा.

अवी-चाची. दादाजी को क्या हुआ.

सी चाची-कुछ नही हुआ. डॉक्टर हैना वो संभाल लेंगे.

अवी-मेरे वजह से दादाजी की हालत खराब हो रही है

सी चाची-ऐसा होता रहता है. देख तू फिर रोएगा तो मैं भी तुम से बात नही करूगी.

अवी-मैं फिर नही रोउंगा आप दादाजी को ठीक कर दो

सी चाची-चलो मेरे साथ

चाची मुझे वापस कमरे मे ले गयी.

डॉक्टर हमे बाहर जाने को बोल रहे थे पर चाची ने उनकी बात नही सुनी

पिताजी की हार्टबीट नॉर्मल हो रही थी. डॉक्टर अपना काम कर रहे थे

चाची मुझे दादाजी के पास लेकर जाकर बैठ गयी.

सी चाची-पिताजी हमारे अवी ने हमारी फॅमिली की ज़िम्मेदारी उठाना शुरू कर दी है.

डॉक्टर-आप बाहर जाइए ,इनकी हार्टबीट बढ़ गयी है.

चाची ने डॉक्टर की बात को इग्नोर कर दिया

सी चाची-पिताजी पता है,हमारे अवी ने स्वेता और सीतल की शादी इतने बड़े घर मे करवाई है. स्वेता और सीतल को उनके पसंद जा जीवन साथी से अवी ने मिलाया है.

दादाजी की हार्ट बीट मेरे बारे मे सुनते ही नॉर्मल होने लगी है.

सी चाची-कोमल को हमारा अवी इतना खुश रखता है कि नेहा भी अवी से प्यार करने लगी. नेहा पिछली बाते भूल गयी है

नेहा बुआ और मेरे प्यार के बारे मे सुनते ही दादाजी की हार्टबीट नॉर्मल हो गयी है.

डॉक्टर-आप बाते करती रहें इनकी हीट बीट नॉर्मल हो रही है.

अवी-दादाजी ,मेले का काम पूरा करते ही नेहा बुआ ने मुझे गले लगाया था. अवी की दी हुई साड़ी को डेली पहनती है. मेरा पूरा ख़याल रखती है.

सी चाची-कविता और लीना तो अवी के बिना रहती ही नहीं .हमारा अवी जादूगर है

अवी-दादाजी राजेश भी अब खुश रहता है. उसने टॉप करके हमारी फॅमिली का नाम रोशन किया है.

सी चाची-पूजा दीदी, नेहा ,नीता की सारी परेशानी को अपनी परेशानी समझ कर अवी हल करता है.

चाची और मेरी बात सुनते ही दादाजी नॉर्मल हो गये.

दादाजी के नॉर्मल होते ही डॉक्टर बाहर चले गये.

सी चाची-पिताजी , माजी का सपना पूरा हुआ है. हम माँ बन गयी है. अवी के चाचा बाप बन गये है.

अवी-दादाजी मैं बड़ा भाई बन गया हूँ .

सी चाची-पिताजी. हमे माँ अवी ने बनाया है.

चाची की बात सुनते ही मैं उनकी तरफ देखने लगा.

सी चाची-पिताजी हम फॅमिली के भले के लिए ,अवी की मदद से माँ बन गयी . माजी का सपना पूरा किया है. आप खुश हो ना ये बात सुनकर

दादाजी ने पलकें झुका का अपना जवाब दिया.

सी चाची-पिताजी ,अवी ने फॅमिली के बारे मे सोच कर, हमारी ख़ुसीयो का ध्यान रख कर हमे माँ बनाया है. इस फॅमिली को नये वारिश मिले है.

दादाजी इस बात से खुश दिख रहे थे.

सी चाची-पिताजी, आपके दोस्त की फॅमिली मे खुशियाँ भी अवी की वजह से आई है.अवी ने रणजीतसिंघ, कुवरसिंघ को मिला कर ठाकुरजी को खुश कर दिया है.आपकी दोस्ती को एक नयी उँचाई पे ले गया है अवी. रणजीतसिंघ, कुवरसिंघ से दोस्ती करके आपका असली वारिश बन गया है

ये सुनते ही दादाजी ने फिर से अपनी पलकें झुका कर मुझे आशीर्वाद दिया.

सी चाची-पिताजी मैं अवी के बेटो से आपको मिलाती हूँ. मेरे बच्चों को आपका आशीर्वाद देना.

इतना बोल कर चाची बाहर चली गयी.

दादाजी को वापस नॉर्मल देखते ही मैं रिलॅक्स हो गया.

और दादाजी को अपने किस्से बताने लगा.

दादाजी मेरे क़िस्सों को सुनकर अपने पलके झुका देते.

मुझे दादाजी से बहुत सी बाते करनी थी ,पर अगर उल्टा कुछ बोल दिया तो फिर गड़बड़ हो जाएगी.

मैं इतने से खुश था कि मुझे दादाजी से मिलने को मिला.

मैं ने रानी को दादाजी से मिलने दिया.मुझे और रानी को दादाजी का आशीर्वाद मिला.

मुझे आगे क्या करना है वो पता चला.

मुझे दादाजी का नाम रोशन करना है.

मुझे अपनी फॅमिली को अपने प्यार से बाँध कर रखना है.

मुझे योगेंद्रसिंघ बनना था.

मैं ने थोड़ी देर दादाजी से अकेले मे बात की

उनके साथ दुख शेयर नही कर सकता था जिस से मैं अपने हसीन किस्से बताने लगा.

ठाकुरजी के साथ कैसा रहना है वो मुझे पता चल गया है. दादाजी के लिए ठाकुरजी दोस्त से बढ़ कर थे

मैं दादाजी के नक्शे कदम पर चलता रहूँगा.

चाची के आने तक मैं दादाजी से जितना हो सका उतनी देर बाते करता रहा.
 
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चाची के आने तक मैं दादाजी से बाते करने लगा.

चाची मेरे बेटो को लाने के लिए गयी.मेरे दादाजी मेरे बच्चों को अपना आशीर्वाद देंगे

तीनो चाची अपने अपने बच्चों को लेकर कमरे मे आ गयी. साथ मे चाचा भी आ गये

चाचा-पिताजी, देखिए मेरे बच्चे अपने दादाजी का आशीर्वाद लेने आए है

ब चाची-पिताजी मेरे बेड़े बेटे से तो आप ने मिल लिया .अब छोटे बेटे से मिलिए ,अमित ,मीना का बेटा.

और बड़ी चाची ने अमित को दादाजी का आशीर्वाद दिया.और दादाजी ने अपने पलके झुका कर अमित को आशीर्वाद दिया.

सी चाची-पिताजी अमित के बाद हमारे घर मे लक्ष्मी ने जनम लिया जिसका नाम परी रखा है. सीमा दीदी की बेटी, हम सबकी प्यारी परी

दादाजी बेटी को भी बेटे जैसा प्यार देते थे. इसी लिए पूजा बुआ, नेहा बुआ, और नीता बुआ उनके इतने करीब है

परी ने दादाजी के पास जाते ही रोना बंद किया. और उनका प्यार मिलते ही हँसने लगी.

म चाची-पिताजी ,हमारी फॅमिली का सब से छोटा मेंबर, सुमन दीदी का बेटा सुमित, हमारी दीदी का हमारा बेटा सुमित

बड़ी चाची का बेटा सुमित ,उसको तो सबसे ज़्यादा प्यार मिला दादाजी का

चाचा-पिताजी, माँ की इच्छा पूरी हो गयी. मैं बाप बन गया. एक नही 2 नही 3 बच्चों का बाप बन गया.

ब चाची-तीन नही ,4 बच्चे है , अवी हमारा बड़ा बेटा.

मेरा नाम सुनते ही दादाजी को ज़रूर अच्छा लगा होना.

बच्चों को ज़्यादा देर पिताजी के पास नही रख सकते थे.

बच्चे भी इस कमरे मे ज़्यादा देर रुके तो रोना शुरू हो जाएगा.

फिर भी चाचा के कहने पे चाची थोड़ी देर रुक गयी.

चाचा दादाजी से बाते करते हुए रोने लगे .और दादाजी की कमी उनको कितनी हो रही उसकी शिकायत करने लगे.

दादाजी के बीमार होते ही चाचा पे ज़्यादा ज़िमेदारी आ गयी थी. पर चाची केवजह से सब ठीक हो गया.

चाचा को लगता था कि वो ज़्यादा काम करते है. पर चाची बिना उनको पता लगे बहुत से काम करती है.

फिर डॉक्टर के आने पर हम सब बाहर चले गये.

हम सब ने आराम से दादाजी से मुलाकात कर ली. अपने बारे मे बहुत सी बाते बताई.

कोमल तो बहुत ज़्यादा खुश थी.

रानी भी मेरे दादाजी से मिलके ,उनका आशीर्वाद लेके खुश थी.

अगर दादाजी की हालत मे सुधार आता तो कितना अच्छा होता.

कितने साल हो गये दादाजी की हालत जैसी थी वैसी ही है.

हम सब ने दादाजी को अपने दिल की बात बता दी.

कुछ पल के लिए क्यूँ ना हो दादाजी से मिलके हमको अच्छा लग रहा था.

डॉक्टर ने कहा कि अब हम दादाजी से नही मिल सकते है

अभी तो दोपेहर के 4.00 बज रहे थे.अगर और थोड़ी देर मिलने दिया जाए तो हम सब खुश हो जाएँगे.

नेहा बुआ भी नींद से उठ गयी.

नेहा बुआ दादाजी से मिलने के लिए ज़िद करने लगी.

छोटी चाची ने डॉक्टर से रिक्वेस्ट की.

डॉक्टर ने 1 घंटे बाद मिलने की इजाज़त दे दी. तब तक वो दादाजी का चेकप करेंगे और हम आश्रम के होटेल मे जाकर पेट पूजा कर सकते है.

चाचा सबको आश्रम के होटेल मे ले जाने लगे.

सब का ध्यान दादाजी पर था जिस से खाना तो कोई खा नही पाएगा फिर भी थोडा नाश्ता तो करना होगा.

छोटी चाची और बड़ी चाची डॉक्टर से कुछ बाते करने लगी.और बाकी सब होटेल की तरफ चले गये.

अवी-विद्या चलो ,नाश्ता करके आते है.

विद्या-अवी दादाजी को क्या हुआ है.उनकी हालत ऐसे कैसे हुई है

अवी-दादाजी को हार्ट अटॅक आया था. जिस से उनको यहाँ लाया गया है.

विद्या-हार्ट अटॅक, कब आया था.

अवी-बहुत साल हो गये. पर तुम क्यूँ पूछ रही हो

विद्या-मैं ने नर्स को पूछा तो वो घुमा फिरा के बता रही थी.

अवी-तुम भी तो नर्स हो. तुम्हे तो पता होगा.

विद्या-हाँ, पर हार्ट अटॅक आने से ऐसी हालत होना पासिबल नही है

अवी-क्या?

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सी चाची-थॅंक यू डॉक्टर, आप ना होते तो हमारा पिताजी से मिलना मुश्किल होता.

डॉक्टर-ठाकुरजी के दोस्त के लिए उनके फॅमिली के लिए इतना तो कर ही सकता हूँ.

ब चाची-किसी ने ज़्यादा सवाल नही पूछे वरना गड़बड़ हो जाती.

डॉक्टर-वैसे मैं तय्यार था.पर एक लड़की काफ़ी सवाल पूछ रही थी.

ब चाची-आपने संभाल लिया ना.

डॉक्टर-मुझे नही ,हमारी नर्स को पूछ रही थी. शायद वो भी नर्स थी.

सी चाची-कहीं उसका नाम विद्या तो नही.

डॉक्टर-यही नाम था.उसे थोड़ा शक हुआ है.

ब चाची-आपने कुछ बताया तो नही ना.

डॉक्टर-नही.पर वो रिपोर्ट को देखना चाहती थी तो मैं ने आपका नाम बताकर मना किया.वो वहाँ जिस लड़के से बात कर रही है वही है वो

ब चाची-मीना विद्या तो अवी से बात कर रही है अगर विद्या ने कुछ ऐसा वैसा अवी को बता दिया तो

सी चाची-डॉक्टर जल्दी मुझे किसी इजेक्षन का नाम बताओ जो हार्ट अटॅक पेशेंट के लिए होता है

डॉक्टर ने चाची को नाम बता दिया .और छोटी चाची ने बिना देर किए मुझे आवाज़ दी

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अवी-क्या?

विद्या कुछ बताती उस से पहले छोटी चाची ने मुझे आवाज़ दी

सी चाची-अवी ,अवी

अवी-क्या हुआ चाची.

सी चाची-अवी यहाँ कोई नर्स नही है. और डॉक्टर ने एक इंजेक्षन लाने को कहा है.

विद्या-मुझे बताइए मैं लेके आती हूँ

सी चाची-तुम डॉक्टर के पास रूको ,अवी लेकर आ जाएगा

चाची ने मुझे इंजेक्षन का नाम बताया और मैं भाग कर स्टोर रूम की तरफ चला गया.

सी चाची-तुम ये सब क्या कर रही हो.

विद्या-चाची मैं ने क्या किया.

सी चाची-तू नर्स को क्या पूछ रही थी. और अवी से क्या बात कर रही थी.

विद्या-चाची मुझे आपको एक ज़रूरी बात बतानी है

सी चाची-क्या?

विद्या-चाची मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है. दादाजी का सही से ट्रीटमेंट नही हो रहा है. उनको हार्ट अटॅक नही आया है. डॉक्टर हम से कुछ छुपा रहे है,शायद वो पैसे कमाने के लिए झूठ बोल रहे होंगे

सी चाची-तुम ज़्यादा अपना दिमाग़ मत लगाओ, मुझे पता है क्या हो रहा है.यहाँ से अच्छा इलाज कही नही हो सकता.

विद्या-पर चाची. मेरी बात तो सुनिए

सी चाची-तू पहले बता अवी को इसके बारे मे कुछ बताया तो नही.

विद्या-बताने वाली थी कि आप आ गयी.

सी चाची-अवी को कुछ बताना मत,

विद्या-पर क्यूँ

सी चाची-क्यूँ कि अवी के दादाजी को हार्ट अटॅक नही आया था. उनको उनके दुश्मन ने बिल्डिंग से नीचे गिराया था.

विद्या-तो ये बात अवी से क्यूँ छुपाई है

सी चाची-क्यू कि अगर अवी को सच पता चला तो वो बदला लेगा .और हम अवी को खोना नही चाहते. इसी लिए अवी को बताया कि पिताजी को हार्ट अटॅक आया था.

विद्या-समझ गयी. अवी के भले के लिए झूठ कहा है

सी चाची-तू किसिको कुछ मत बताना.

विद्या-ये राज़ मुझ तक ही रहेगा.

सी चाची-और कभी कुछ ऐसे सवाल या डाउट हो तो पहले

विद्या-आप से बात करूगी.

सी चाची-अब अवी आएगा तो क्या बताओगि.

विद्या-यही कि. दादाजी को ये 3र्ड हार्ट अटॅक था .ये हार्ट अटॅक बड़ा था जिस से उनकी ऐसी हालत हो गयी है.

सी चाची-शाबाश, और अवी के आते उसे नाश्ता करने ले जाना

विद्या-आप नही आएगी.

सी चाची-मुझे डॉक्टर से पिताजी के बारे मे बात करनी है.

विद्या-जी.

मैं इजेक्षन लेके आ गया .और इजेक्षन चाची को दे दिया.

चाची के जाते ही मैं विद्या से बात करने लगा.

अवी-तुम क्या कह रही थी.

विद्या-मैं ,कुछ भी तो नही

अवी-हार्ट अटॅक की बात कर रही थी.

विद्या-हाँ, भगवान का करिश्मा है जो 3र्ड हार्ट अटॅक के बाद दादाजी ज़िंदा है

अवी-3र्ड

विद्या-हाँ,डॉक्टर ने बताया कि 3र्ड हार्ट अटॅक बड़ा था. फिर भी दादाजी बच गये.

अवी-चाची ने बताया नही की दादाजी को 3र्ड अट्क आया है और किस वजह से आया है

विद्या- चाची जो करती है वो बिना वजा नही करती , और तुमने पूछा ही नही होगा कि अटॅक क्यूँ आया है

अवी- तुम सही कह रही हो , और पता है मेरे पूछने पे चाची क्या कहेगी

विद्या - क्या?

अवी-सही समय आने दो , फिर बता दुगी

विद्या-चाची सही कहती है

अवी-एक काम करो तुम यही रुक जाओ दादाजी की देखभाल करने

विद्या-यहाँ मुझसे काफ़ी टॅलेंटेड नर्स है. वो पूरा ध्यान रखेगी .दादाजी का

अवी-तो क्या हुआ.

विद्या-मैं गाँव मे तुम्हारा ध्यान रुखूँगी.

अवी-मुझे क्या हुआ है.

विद्या-हुआ नही होने वाला है.

अवी-क्या होने वाला है.

विद्या-अगर तुम ने अभी कुछ खाया नही तो चक्कर आ जाएगा.

अवी-मैं तो चाची के लिए रुका हूँ.

विद्या-चाची डॉक्टर के साथ रुक कर दादाजी के बारे मे पूछ ताछ करने वाली है. और मुझे कहा है कि तुम्हे नाश्ता करवा दूं

अवी-चाची ने कहा

विद्या-हाँ

अवी-चलो फिर

और मैं विद्या के साथ कॅंटीन मे नाश्ता करने चला गया.
 
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दादाजी को मिलने के बाद मैं कॅंटीन मे चला गया जहाँ पर बाकी सब नाश्ता कर रहे थे.

मेरे आते ही कोमल ने मुझे अपने पास बैठने को कहा.

मैं कोमल और रानी के बीच मे बैठ गया और दोनो की प्लेट से नाश्ता करने लगा.

सब अपनी अपनी बाते कर रही थी. दादाजी से क्या बाते की वो एक दूसरे को बताने लगी.

राज तो सबकी रोते हुए निकाली फोटो को देख कर हंस रहा था.

नेहा बुआ भी राज के साथ फोटो देख कर अपना मन हल्का कर रही थी.

कोमल अपनी खुशी किसी के साथ शेयर नही कर रही थी.रानी के पूछने पर भी नही बताया ,उसने कहा कि ये उसके और दादाजी के बीच की बात है.

कुछ भी हो इस फॅमिली टूर का मकसद पूरा हो रहा था. हर कोई खुश था.

जब मैने ने बताया कि हमे फिर से दादाजी से मिलने दिया जा रहा है तो सब राजधानी की स्पीड से खाना खाने लगे.ताकि जल्दी दादाजी से मिल सके

नेहा बुआ तो मेरी बात सुनते ही उठ कर दादाजी के पास चली गयी.

चाचा-अवी ,होटेल मे रूम बुक किए हैना

अवी-हमारे रूम बुक है. राजेश फोन करके बोल दो कि हमे देर हो जाएगी

राजेश-मैं ने फोन कर दिया है.

चाचा-हम वहाँ कब तक पहोच जाएँगे

अवी-यहाँ से 2 घंटा लग जाएगा.

चाचा-मतलब 9.00 पीएम बज जाएगा. अच्छा है वहाँ जाते ही आराम कर लेंगे.

अवी-मैं भी यही सोच रहा हूँ.

फिर नाश्ता करते ही सब अपने अपने ग्रूप के साथ दादाजी से मिलने लगे.

नेहा बुआ दादाजी से मिलने के लिए पहले चली गयी.

नेहा बुआ तो वहीं रुक गयी बाकी के मेंबर दादाजी से मिलके वापस आ जाते.

मेरा नंबर तो लास्ट था .इस लिए मैं सबकी नज़रें बचा कर रानी को अलग ले गया.

अवी-रानी ,दादाजी ने तो हमे आशीर्वाद दे दिया.

रानी-तो क्या अभी शादी करना चाहते हो

अवी-शादी तो आराम से करेंगे.क्यूँ ना हम होटेल मे एक रूम मे रुके

रानी-मुझे कोई प्रॉब्लम नही है. तुम कोमल को संभाल लो

अवी-यही तो नही कर सकता ,वैसे 3 दिन है. उसमे थोड़ा प्यार तो कर ही लूँगा.

रानी-तुम्हे रोका किसने है.पर

अवी-पर क्या

रानी-दादाजी ने मुझे इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी दी हैउसे पूरी करनी होगी

अवी-कैसी ज़िम्मेदारी

रानी-मुझे तुम्हारी माँ जैसा बनना है.

अवी-ये मुश्किल होगा. क्यूकी तुम्हे मेरी माँ के बारे मे कुछ पता नही है.

रानी-छोटी चाची हैना ,अब हटो मुझे दादाजी से मिलना है.

अवी-अब तो हट रहा हूँ पर शादी के बाद

रानी-फिर से मुझे डरा रहे हो. अब भूलो मत छोटी चाची और सीमा चाची मेरे साथ है.सीमा चाची से तुम्हारी शिकायत करूगी.

अवी-लो ,मिल लो दादाजी से

मैं ने रानी को जाने के लिए रास्ता दे दिया.

रानी ने जाते हुए एक छोटा सा किस दे कर मुझे खुश कर दिया.

एक एक करके हम सब ने दादाजी से मुलाकात की. उनसे बाते की. अपनी लाइफ के हसीन किस्से शेर किए.

दादाजी से मिल कर हमे तो पता ही नही चला कि आज का दिन कैसे ख़तम हो गया.

डॉक्टर ने हमे बताया कि अब हम दादाजी से नही मिल सकते .तब ऐसा लगा कि डॉक्टर का खून कर दूं.

डॉक्टर की बात सुनते सबका चेहरा उतर गया.

ऐसा लगा जैसे हमे हमारी मनपसंद चीज़ छिन ली हो.

पर हमे जाना तो होगा.

चाचा ने हमे बस मे जाने को कहा और वो डॉक्टर को थॅंक्स कहने लगे.

छोटी चाची और बड़ी चाची ने भी डॉक्टर का शुक्रिया अदा किया.

बस मे जाने के बाद भी हम विंडो से दादाजी वाले सेक्षन की तरफ देखने लगे.

नेहा बुआ अभी भी रो रही थी. औरनीता बुआ नेहा बुआ को सहारा दे रही थी.

चाचा के आते हम सबने दादाजी को अलविदा करते हुए होटेल की तरफ जाने लगे.

बस चालू होने के बाद कोई कुछ नही बोल रहा था.

दादाजी से दूर जाने के गम मे सब अपने अपने ख़यालो मे खोए थे

कविता और लीना एक दूसरे से बाते करते हुए दादाजीको याद कर रहे थे.

राजेश होटेल फोन करके बता रहा था कि हम होटेल 2 घंटे मे पहोच जाएँगे.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी ने जो अपने सर पे ओढनी ओढ़ ली थी उसे वैसे रख कर दादाज़ीके साथ बिताए बचपन के दिनो को याद कर रही थी.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी ने अपनी शादी के लिए दादाजी का आशीर्वाद लिया.

मैं भी विंडो से बाहर देखते हुए दादाजी के बारे मे सोचने लगा

उधर चाची और बुआ की हालत भी वैसी ही थी.

ऐसा लग नही रहा था कि हम टूर पे एंजाय करने जा रहे है.

पिन ड्रॉप साइलेंट था बस मे,बस आवाज़ आ रही थी आसू के नीचे गिरने की.

पूजा बुआ हम सब मे बड़ी थी जिस से वो हम सब को संभाल रही थी.

बड़ी चाची भी थोड़ी भावुक हो गयी थी पर छोटी चाची पत्थर की तरह हिम्मत बनाए हुई थी.

सी चाची-पूजा दीदी.

पूजा बुआ-हाँ,

सी चाची-मैं ने कहा था सब ठीक हो जाएगा.

पूजा बुआ-तेरी जितनी तारीफ करूँ उतनी कम है. तूने सब संभाल लिया. वरना अवी अपने दादाजी को ऐसी हालत मे देखता तो पता नही क्या हो जाता.

सी चाची-हम जब तक साथ है तब तक सब अच्छा ही होगा.

ब चाची-मीना तू ना होती तो कभी हम इतने खुश नही होते

सी चाची-मैं ने वही किया जो हमारे फॅमिली के लिए अच्छा था.

म चाची-मीना ,तूने हमारी फॅमिली के लिए जोकिया है वो क़ाबिले तारीफ है

सी चाची-आपके साथ के बिना मैं कुछ नही कर पाती

ब चाची-मीना इन 2 साल मे अवी मे जो बदलाव आया है वो तेरे वजह से आया है.

म चाची-हम तो थक गये थे पर पता नही तूने क्या जादू किया जो कल का उदास रहने वाला अवी आज इतना खुश है

सी चाची-अवी के खुशी के पीछे हम सब है. उसकी 6 माँ है. ऐसे मे वो खुश तो रहेगा ना

नीता बुआ-ये तेरा बड़प्पन है. वरना हमे पता है हमने क्या किया है और तू क्या कर रही है.

सी चाची-डूबते हुए को तिनके का सहारा भी बहुत लगता है. अवी के लिए हम ने जो किया वो कम ज़्यादा नही हो सकता. हमारा प्यार अवी को बर्बर मिला है.

पूजा बुआ-ये सही कहा.पर तूने अवी को ज़िम्मेदार बना कर अच्छा किया. हमारी फॅमिली का वो अकेला वारिस था.

म चाची-अब अकेला नही है. अमित और सुमित है

ब चाची-सीमा तू तो समझदार हो गयी.

म चाची-आपके साथ का असर है.

सी चाची-अवी अपने भाई बहनों को साथ लेकर चल रहा है.

पूजा बुआ-सब को साथ मे हँसता खेलता देख कर अच्छा लगता है

नेहा बुआ-दीदी , वक्त बदलते देर नही लगती.

नीता बुआ-नेहा अब तू फिर शुरू मत हो जाना

ब चाची-बोलने दो उसे

नेहा बुआ-दीदी आप भूल रही है कि हम बचपन मे कैसे रहते थे .फिर क्या हुआ था वो तो अच्छे से जानती हो

पूजा बुआ-पास्ट रिपीट नही होता है.

नेहा बुआ-आप इतने यकीन के साथ कैसे बोल सकती है. क्या आपने सोचा था भैया (अवी के पापा ) ऐसा करेंगे

नीता बुआ-भैया और अवी मे बहुत फरक है

ब चाची-इस बात को यही ख़तम कर दो

पूजा बुआ-नेहा अब रहने दो ,पिछली बातों को याद करके रोने से अच्छा है प्रेज़ेंट के साथ जिओ और फ्यूचर के बारे मे सोचो

नेहा बुआ-मैं वही कर रही हूँ. फ्यूचर के बारे मे सोच रही हो. भैया और अवी मे कोई फरक नही है

नीता बुआ-हमारा अवी वैसा नही है.

नेहा बुआ-अवी की रगों मे खून भैया का है ये मत भूलो

सी चाची-तुम ये भी मत भूलो कि अवी मे शालिनी भाभी का खून भी है.

नेहा बुआ-शालिनी भाभी की वजह से तो चुप हूँ वरना.

नीता बुआ-नेहा तेरे पैर पड़ती हूँ ,भगवान के लिए चुप रहो.

ब चाची-नेहा देखना एक दिन मेरा अवी तेरी सोच बदल देगा.

नेहा बुआ-इतने सालो मे कुछ नही हुआ .अब क्या होगा.

सी चाची-सब होगा. देखती जाओ, और ये मत भूलो कि चट्टान को चीर कर रिवर रास्ता बना ती है.

नेहा बुआ-ध्यान से कहीं ऐसा ना हो उस चट्टान से गिर कर तुम भी मेरी तरह ज़ख्मी ना हो जाओ

सी चाची-अवी है मेरे पास मलम लगाने को. और तुम भी तो ,क्यूँ मेरे गिरने पे तुम मुझे सहारा नही दोगि.

नेहा बुआ-पहला हाथ मेरा ही होगा सहारा देने को

नीता बुआ-अभी झगड़ा कर रही थी और अभी मदद करने की बात कर रही हो.

नेहा बुआ-क्यूँ कि हम एक हाथ की 6 उंगलिया है.साथ मे रहेगी तो मुट्ठी बन जाएगी.

म चाची-ऐसी मुट्ठी कि जिस से टकरा कर पत्थर भी मिट्टी बन जाए.

सी चाची-हम साथ है तभीतो हमारी फॅमिली खुश है.

पूजा बुआ-हम ने साथ रहने का फ़ैसला करके अच्छा किया था.पिताजी के बीमार पड़ते ही हमारी फॅमिली तो बिखर जाती अगर मीना ने साथ रहने की बात ना की होती.

ब चाची-हमारी मीना जैसी कोई नही हो सकती.

नीता बुआ-आज शालिनी भाभी होती तो वो भी यही कहती ,मीना लाखों मे एक है

सी चाची-शालिनी भाभी के बारे मे सुन सुन कर ही तो सीखा है साथ रहना

पूजा बुआ-आज शालिनी भाभी हमारे साथ होती तो हमे कभी कोई परेशानी नही होती.

सी चाची-शालिनी भाभी के बारे मे अवी को बताना होगा.

नेहा बुआ-कोई ज़रूरत नही है.

सी चाची-मैं शालिनी भाभी की बात कर रही हूँ

नीता बुआ-शालिनी भाभी के बारे मे बताओगी तो भैया के बारे मे बताना होगा. और भैया के बारे मे बताॉगी तो पता हैना क्या होगा.

सी चाची-एक दिन तो बताना होगा ना.

ब चाची-ज़रूरत पड़ी तभी बताएँगे वरना नही.और इस बात पे कोई बात नही होगी.

पूजा बुआ-सुमन ने कहा वैसा ही होगा.

म चाची-मुझे तो लगता है वो दिन जल्दी आने वाला है.

ब चाची-सीमा मैं ने क्या कहा था

म चाची-सॉरी दीदी.

सी चाची-बात ख़तम करते है. लगता है होटेल आ रहा है.

चाची और बुआ ने बात ख़तम की तो राजेश ने बताया कि होटेल आ गया.

होटेल का नाम सुनते ही सब खुद को ठीक करने लगे .

चाची ने बच्चों का समान पॅक करने लगी.

राजेश मेरे पास आकर बताने लगा कि हमे क्या करना है.

मेरा मूड नही था फिर भी मैं ने राजेश की बात सुन ली.

और ड्राइवर के ब्रेक मारते हमारी मंज़िल आ गयी.होटेल आ गया
 
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