S
StoryPublisher
Guest
838 ब
हम ने आधे से ज़्यादा सफ़र तय कर दिया था.पर नाश्ता और लंच तो करना था.
दादाजी से मिलते ही हम प्यास भूक भूल जाएँगे ये बात छोटी चाची को पता थी. हमे दादाजी के आश्रम जाने के जितना समय लगने वाला था उसमे से 3/4 सफ़र तय किया था अब बस 1 घंटे का सफ़र बाकी था फिर भी चाची ने लंच करने के लिए बस रोक दी
ड्राइवर ने एक अच्छे से ढाबा टाइप के होटेल पर बस रोक दी.
सी चाची-चलो हम यहाँ लंच करके फिर आश्रम जाएँगे
कोमल-मामी ,हम ने सुबह नाश्ता किया था ,अब तो सीधे दादाजी से मिलने के बाद लंच करेंगे
पूजा बुआ-कोमल अभी के लिए थोड़ा नाश्ता कर लो
सीतल दीदी-माँ ,1 घंटे का सफ़र तो बाकी है.
पूजा बुआ-मैं ने क्या कहा सुना नही या दुबारा बताऊ
राज-मैं ने सुन लिया .और मैं तो गरम गरम समोशा खाउन्गा. और कोल्ड ड्रिंक पीऊंगा.
नीता बुआ-देखो राज को भूक लगी है. चलो थोड़ा थोड़ा नाश्ता करते है
बडो के सामने छोटो की चलती कहाँ है
हम एक एक करके बस से उतरने लगे.
सी चाची-विद्या वो परान्ठे वाला बॅग भी लेना
विद्या-जी चाची
हम लाइन मे लग कर नीचे उतरने लगे .मैं लास्ट मे था और मेरे आगे रानी थी.मैं ने धीरे से रानी से बात की
अवी-कैसा लगा मेरा पंच
रानी-ऐसा लगा कि अभी भी दर्द हो रहा है तुम्हारे पंच से
अवी-कहाँ दर्द हो रहा है
रानी-तुम ने तो सीधे दिल पे मारा पंच ,दिल मे दर्द हो रहा है
अवी-तुम ने तो आत्मा में मारा है ,उसका क्या
कोमल-रानी कितनी देर लगा रही हो,चलो मेरे साथ
कोमल रानी को लेके वॉशरूम मे चली गयी. और हम सब टेबल पर जाकर बैठ गये
कविता-मामी मेनू कार्ड देना
नेहा बुआ-कोई मेनू कार्ड नही मिलेगा. हम जो खाएँगे वही तुम्हे खाना होगा
नेहा बुआ की बात से कविता ने अपना मूह टेडा किया.
म चाची-ये तो टूर है मैं तो अपनी पसंद का खाना खाउन्गी
लीना-मामी हमारे साथ बैठिए हम बताते है
नेहा बुआ-आँखे दिखाते हुए लीना...........
लीना और कविता मेरी तरफ एक उम्मीद से देखने लगी
मैं खड़ा हो गया.
अवी-ये फॅमिली टूर है. यहाँ जिसे जो करना है खाना है वो खा सकता है. नो रेस्टिक्षन
नीता बुआ-सिर्फ़ कविता और लीना को छोड़ कर
लीना-माँ, ये चीटिंग है
नीता बुआ-मैं मज़ाक कर रही थी ,ये लो मेनू कार्ड
नेहा बुआ-नीता तू ये क्या कर रही है
पूजा बुआ-नेहा ,बच्चो के लिए तो टूर पे आए है. करने दो इनको एंजाय
पूजा बुआ की बात सुनते सब खुश हो गये.
फिर क्या था मेनू कार्ड के लिए झगड़े शुरू हो गये.
कविता के लिए दूसरे के टेबल पे रखा हुआ मेनू कार्ड लाया.
ऑर्डर के वक्त क्या हुआ ये तो पूछो ही मत
वेटर तो ऑर्डर लेते लेते परेशान हो गया. कविता और लीना और राज क्या कम थे सीमा चाची भी उनके साथ शामिल हो गयी.
चाचा ड्राइवर के साथ बैठ थे. ताकि वो सब का हिसाब किताब करे
ब चाची-मैं तो परान्ठे खाउन्गी. विद्या परान्ठे देना
विद्या ने जैसे ही परान्ठे का टिफिन ओपन किया सब ने एक एक परान्ठे और अचार उठा लिया
सी चाची-ये क्या ,तुम सब ने ऑर्डर दिया फिर परान्ठे क्यूँ खा रहे है
स्वेता दीदी-मामी सुबह का टाइम है ऑर्डर आने मे टाइम लगेगा. तब तक परान्ठे खा कर पेट पूजा करते है.
ब चाची-खाने दो, हम भी कुछ मँगाते है
पूजा बुआ-मैं ने तुम्हारा भी ऑर्डर दिया है. चल परान्ठे खाते है
हमारे परान्ठे खाने तक रानी और कोमल भी आ गयी.
कोमल मेरे बाजू मे और उसके बाद रानी बैठ गयी. ये तो गड़बड़ हो गयी.कोई बात नही पूरा टूर बाकी है मेरे पास
कोमल-ये क्या हमारे आने पहले खाना शुरू किया
राजेश-दीदी, ये तो मामी ने लाए हुए परान्ठे थे
कोमल-हम ऑर्डर करते है
रानी-तुम ऑर्डर करो, तब तक मैं जो टिफिन लाई थी वो ख़तम करते है
कविता-दीदी आप टिफिन लाई ,पहले क्यूँ नही बताया ,हम आपके लिए परान्ठे रखते
कोमल-अब तो हम भी तुम्हे हमारे टिफिन से कुछ नही देंगे
राज-दीदी ,मैं आपके लिए परान्ठे रखने वाला था,पर भुकः लगी तो आपका पराठा भी मैं ने खा लिया
रानी-कोई बात नही ,मैं सब के लिए टिफिन लाई हूँ.
और रानी ने मुझे उसका बॅग लाने को कहा.
रानी मिठाई लाई थी लड्डू , बारपी, चकली, और चिवाड़ा
रानी ने कमाल कर दिया.
चिवाड़ा देखते ही ,होटेल का नाश्ता कौन करेगा. हम तो रानी का लाया हुआ नाश्ता करने लगे.
वाउ ,रानी और आंटी के हाथो मे जादू है. हर एक बाइट पे तारीफे हो रही थी.
हम ज़्यादा मेंबर थे जिस से हमारे हिस्से मे ज़्यादा खाना नही आया ,जिस होटेल का नाश्ता भी कर लिया.
नाश्ते करने के बाद कोई स्वीट तो कोई कोल्ड्ड्रिंक पी रहा था.
बुआ और चाची शरबत पी रही थी तो चाचा भी ड्राइवर का ख़याल रखते हुए नाश्ता कर रहे थे.
छोटी चाची सरबत पीने की जगह स्वेता दीदी को लेकर वॉशरूम मे गयी.
स्वेता दीदी ने कोल्ड्ड्रिंक पीने तक रुकने को कहा था पर पूजा बुआ ने आँखो से इशारा करके स्वेता दीदी को छोटी चाची के साथ भेज दिया.
हम ने आधे से ज़्यादा सफ़र तय कर दिया था.पर नाश्ता और लंच तो करना था.
दादाजी से मिलते ही हम प्यास भूक भूल जाएँगे ये बात छोटी चाची को पता थी. हमे दादाजी के आश्रम जाने के जितना समय लगने वाला था उसमे से 3/4 सफ़र तय किया था अब बस 1 घंटे का सफ़र बाकी था फिर भी चाची ने लंच करने के लिए बस रोक दी
ड्राइवर ने एक अच्छे से ढाबा टाइप के होटेल पर बस रोक दी.
सी चाची-चलो हम यहाँ लंच करके फिर आश्रम जाएँगे
कोमल-मामी ,हम ने सुबह नाश्ता किया था ,अब तो सीधे दादाजी से मिलने के बाद लंच करेंगे
पूजा बुआ-कोमल अभी के लिए थोड़ा नाश्ता कर लो
सीतल दीदी-माँ ,1 घंटे का सफ़र तो बाकी है.
पूजा बुआ-मैं ने क्या कहा सुना नही या दुबारा बताऊ
राज-मैं ने सुन लिया .और मैं तो गरम गरम समोशा खाउन्गा. और कोल्ड ड्रिंक पीऊंगा.
नीता बुआ-देखो राज को भूक लगी है. चलो थोड़ा थोड़ा नाश्ता करते है
बडो के सामने छोटो की चलती कहाँ है
हम एक एक करके बस से उतरने लगे.
सी चाची-विद्या वो परान्ठे वाला बॅग भी लेना
विद्या-जी चाची
हम लाइन मे लग कर नीचे उतरने लगे .मैं लास्ट मे था और मेरे आगे रानी थी.मैं ने धीरे से रानी से बात की
अवी-कैसा लगा मेरा पंच
रानी-ऐसा लगा कि अभी भी दर्द हो रहा है तुम्हारे पंच से
अवी-कहाँ दर्द हो रहा है
रानी-तुम ने तो सीधे दिल पे मारा पंच ,दिल मे दर्द हो रहा है
अवी-तुम ने तो आत्मा में मारा है ,उसका क्या
कोमल-रानी कितनी देर लगा रही हो,चलो मेरे साथ
कोमल रानी को लेके वॉशरूम मे चली गयी. और हम सब टेबल पर जाकर बैठ गये
कविता-मामी मेनू कार्ड देना
नेहा बुआ-कोई मेनू कार्ड नही मिलेगा. हम जो खाएँगे वही तुम्हे खाना होगा
नेहा बुआ की बात से कविता ने अपना मूह टेडा किया.
म चाची-ये तो टूर है मैं तो अपनी पसंद का खाना खाउन्गी
लीना-मामी हमारे साथ बैठिए हम बताते है
नेहा बुआ-आँखे दिखाते हुए लीना...........
लीना और कविता मेरी तरफ एक उम्मीद से देखने लगी
मैं खड़ा हो गया.
अवी-ये फॅमिली टूर है. यहाँ जिसे जो करना है खाना है वो खा सकता है. नो रेस्टिक्षन
नीता बुआ-सिर्फ़ कविता और लीना को छोड़ कर
लीना-माँ, ये चीटिंग है
नीता बुआ-मैं मज़ाक कर रही थी ,ये लो मेनू कार्ड
नेहा बुआ-नीता तू ये क्या कर रही है
पूजा बुआ-नेहा ,बच्चो के लिए तो टूर पे आए है. करने दो इनको एंजाय
पूजा बुआ की बात सुनते सब खुश हो गये.
फिर क्या था मेनू कार्ड के लिए झगड़े शुरू हो गये.
कविता के लिए दूसरे के टेबल पे रखा हुआ मेनू कार्ड लाया.
ऑर्डर के वक्त क्या हुआ ये तो पूछो ही मत
वेटर तो ऑर्डर लेते लेते परेशान हो गया. कविता और लीना और राज क्या कम थे सीमा चाची भी उनके साथ शामिल हो गयी.
चाचा ड्राइवर के साथ बैठ थे. ताकि वो सब का हिसाब किताब करे
ब चाची-मैं तो परान्ठे खाउन्गी. विद्या परान्ठे देना
विद्या ने जैसे ही परान्ठे का टिफिन ओपन किया सब ने एक एक परान्ठे और अचार उठा लिया
सी चाची-ये क्या ,तुम सब ने ऑर्डर दिया फिर परान्ठे क्यूँ खा रहे है
स्वेता दीदी-मामी सुबह का टाइम है ऑर्डर आने मे टाइम लगेगा. तब तक परान्ठे खा कर पेट पूजा करते है.
ब चाची-खाने दो, हम भी कुछ मँगाते है
पूजा बुआ-मैं ने तुम्हारा भी ऑर्डर दिया है. चल परान्ठे खाते है
हमारे परान्ठे खाने तक रानी और कोमल भी आ गयी.
कोमल मेरे बाजू मे और उसके बाद रानी बैठ गयी. ये तो गड़बड़ हो गयी.कोई बात नही पूरा टूर बाकी है मेरे पास
कोमल-ये क्या हमारे आने पहले खाना शुरू किया
राजेश-दीदी, ये तो मामी ने लाए हुए परान्ठे थे
कोमल-हम ऑर्डर करते है
रानी-तुम ऑर्डर करो, तब तक मैं जो टिफिन लाई थी वो ख़तम करते है
कविता-दीदी आप टिफिन लाई ,पहले क्यूँ नही बताया ,हम आपके लिए परान्ठे रखते
कोमल-अब तो हम भी तुम्हे हमारे टिफिन से कुछ नही देंगे
राज-दीदी ,मैं आपके लिए परान्ठे रखने वाला था,पर भुकः लगी तो आपका पराठा भी मैं ने खा लिया
रानी-कोई बात नही ,मैं सब के लिए टिफिन लाई हूँ.
और रानी ने मुझे उसका बॅग लाने को कहा.
रानी मिठाई लाई थी लड्डू , बारपी, चकली, और चिवाड़ा
रानी ने कमाल कर दिया.
चिवाड़ा देखते ही ,होटेल का नाश्ता कौन करेगा. हम तो रानी का लाया हुआ नाश्ता करने लगे.
वाउ ,रानी और आंटी के हाथो मे जादू है. हर एक बाइट पे तारीफे हो रही थी.
हम ज़्यादा मेंबर थे जिस से हमारे हिस्से मे ज़्यादा खाना नही आया ,जिस होटेल का नाश्ता भी कर लिया.
नाश्ते करने के बाद कोई स्वीट तो कोई कोल्ड्ड्रिंक पी रहा था.
बुआ और चाची शरबत पी रही थी तो चाचा भी ड्राइवर का ख़याल रखते हुए नाश्ता कर रहे थे.
छोटी चाची सरबत पीने की जगह स्वेता दीदी को लेकर वॉशरूम मे गयी.
स्वेता दीदी ने कोल्ड्ड्रिंक पीने तक रुकने को कहा था पर पूजा बुआ ने आँखो से इशारा करके स्वेता दीदी को छोटी चाची के साथ भेज दिया.