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ये क्या हो रहा है?



बापूजी को देखते ही मेरे चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी, मैं भागकर बापूजी के गले लिपट गया....

मैं – बापूजी, इस बार आपने आने में इतने दिन कैसे लगा दिए, मैं तो कब से आपकी राह देख रहा था,

बापूजी – कुछ नही बेटा वो तो सवारी को कुछ जरूरी काम आन पड़ा था, इसलिए मजबूरन मुझे भी रुकना पड़ा, पर इस बार पैसे भी अच्छे मिले है, और मैं तुम लोगो के लिए कुछ लेकर भी आया हूँ शहर से,

मैं – “सच में बापूजी” मेरी ख़ुशी का ठिकाना नही था ये सुनकर कि बापूजी हमारे लिए शहर से कुछ लेकर आये है....

बापूजी – पहले अंदर तो चलो, फिर दिखता हूँ सबको...

मैं और बापूजी अंदर आ गये, तब तक दीदी भी कपडे चेंज कर चुकी थी, बापूजी को देखते ही दीदी भी उनसे आकर गले मिली....

मैं – दीदी, पता है बापूजी हमारे लिए शहर से कुछ लेकर आये है इस बार...

नीलू दीदी – सच में ...जल्दी दिखाओ ना बाबा....

बापूजी – रुको बेटा, पहले तुम्हारी माँ को तो बुला लो... तब तक मैं भी हाथ मुंह धो लेता हूँ...

मैं – पर बापूजी माँ तो ताईजी के यहाँ गयी है....

बापूजी – ठीक है तो तुम जाकर बुला लाओ उसे,

बापूजी की बात सुनकर मैं जल्दी से खड़ा हुआ और सीधा ताईजी के घर की तरफ दौड़ पड़ा, मैं चाहता था कि जल्द से जल्द माँ को बुला लाऊं, ताकि मैं देख सकूं कि बापूजी मेरे लिए क्या लेकर आये है शहर से...

2 मिनट में ही मैं ताईजी के घर के सामने पहुंच चूका था, मैंने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की पर आज भी ताईजी का घर अंदर से बंद था, मुझे बड़ा अजीब लगा, अभी मैं दरवाजे पर दस्तक देने ही वाला था कि तभी मेरे कानो में एक हलकी सी सिसकारी की आवाज़ पड़ी......मैं बिलकुल चोंक गया....

सिस्कारियो की आवाज़ सरला ताई के कमरे से आ रही थी, जिसमे उस दिन मैंने सरला ताई के भाई और उनकी चुदाई देखी थी, और अब तक तो मैं भी इतना समझ चूका था कि ऐसी आवाज़े चुदाई के दौरान आती है, पर सवाल ये था कि सरला ताई किसके साथ चुदाई कर रही है...

“क्या सरला ताई फिर से अपने भाई के साथ......... पर उनका भाई तो कल ही वापस अपने घर जा चूका है....... फिर वो किसके साथ....... कहीं रामू ताउजी.......नही पर वो तो लाला की दुकान पर ही होंगे अभी तो.....राजू भैया और चंदा भी आज खेत में ही रुकने वाले है रात को फसल में पानी देने के लिए..... तो फिर कौन हो सकता है.” मैं समझ नही पा रहा था कि सरला ताई आखिर किसके साथ चुदाई कर रही है..........

आखिरकार मैंने फैसला लिया कि उस दिन की तरह ही मुझे इस नीम के सहारे चढ़कर अंदर जाना चाहिए पर दिल के एक कोने में डर भी था क्यूंकि पिछली बार भी सुमेर ने मुझे लगभग देख ही लिया था, वो तो मेरी किस्मत अच्छी थी कि मैं बच गया, वरना सहमत आ जाती

दिमाग कह रहा था कि रहने दे, अंदर जाना खतरे से खाली नही है, अगर पकड़ा गया तो गांड ठुकाई हो जायेगी... पर दिल कह रहा था कि चल अंदर चलकर दोबारा एक बार चुदाई का मस्त नज़ारा देखते है.....

दिमाग और दिल की इस अजीब उहापोह में मैं फंसा हुआ था, पर आखिरकार जीत दिल की हुई, हवस ने मेरे डर पर काबू कर लिया, और मैंने ठान लिया कि अब तो सरला ताई की चुदाई देखनी ही पड़ेगी...

मैं अब दबे पांव एक चोर की तरह नीम पर चढ़ने लगा, और कुछ ही देर में मैं अब नीम के सहारे चढ़कर उनके घर की छत पर पहुंच गया, मुझे पता था कि ताई के कमरे का रोशन दान सीढियों पर है, जहाँ से मैंने पिछली बार भी उनकी चुदाई का नज़ारा देखा था...

मैं धीरे धीरे सीढियां उतरता हुआ उस रोशनदान की तरफ बढ़ने लगा, मेरे दिल की धडकन तेज़ हो चुकी थी, एक अनजाना सा डर मुझ पर हावी हो रहा था, माथे पर पसीने की बूंदे भी चमकने लगी थी... मन कर रहा था कि रहने देते है अगर पकड़े गए तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी...

पर तभी अचानक एक जोर की सिसकारी मेरे कानो में पड़ी.....और मेरी हवस ने दोबारा डर को काबू में कर लिया... अब मैं दबे पांव धीरे धीरे चलता हुआ बिलकुल रोशन दान के करीब पहुँच गया...

अब मैं होले होले अंदर झाँकने लगा, कमरे में थोडा सा अँधेरा था, पर मेरी आँखे सरला ताई को ढूँढना शुरू कर चुकी थी,

पर जैसे ही मैंने अंदर झांक कर देखा मेरे होश ही उड़ गये.... मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मुझे किसी ने जोर का बिजली का झटका दे दिया हो, पांव कांपने लगे, माथे पर पसीना आ गया, शरीर बिलकुल गरमा गया....

मुझे यकीन नही हो रहा था कि जो मैं अंदर देख रहा हूँ वो हकीकत है या कोई सपना.... अंदर चारपाई पर सरला ताई बिलकुल नंगी लेटी हुई थी और मेरी अम्मा सरला ताई की चूत चाटे जा रही थी, मुझे तो समझ ही नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है..... एक ओरत कैसे दूसरी ओरत के साथ....

मेरी नज़रे अभी भी अंदर गडी हुई थी... सरला ताई का नंगा बदन मेरी आँखों के सामने चमक रहा था पर गनीमत थी कि कम से कम मेरी माँ ने पुरे कपडे पहन रखे थे, पर मेरी अम्मा एक कुतिया की तरह सरला ताई की चूत के अंदर अपनी जीभ घुसा घुसा के चाट रही थी....

तभी अचानक सरला ताई थोड़ी सी बैठी और फिर पलट कर घोड़ी बन गयी.... मेरी आँखों के सामने उनकी बिलकुल नंगी चुत दिखाई दे रही थी...

इस क्षण मुझे लग रहा था जैसे मेरा लण्ड पानी फेंक देगा, मुझे समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करू, मैंने आज तक ऐसा नज़ारा कभी नहीं देखा, मेरा 9 इंच लम्बा लोडा अब बुरी तरह फुंकार रहा था, लंड की नसे फटने को तैयार पड़ी थी

सरला ताई की लपलपाती फूली सी चूत वाकई जानलेवा नज़र आ रही थी, और तभी मेरी अम्मा ने दोबारा उनकी चूत को अपने होठो से चुसना शुरू कर दिया, आज के दिन में मैंने इतना कुछ देख लिया था कि.... सबसे पहले सरजू काका को उनकी बेटी रानी के साथ चुदाई करते हुए, फिर मेरी नीलू दीदी को नंगा नहाते हुए, और अब सरला ताई की नंगी चूत को मेरी माँ के द्वारा चाटते हुए..........

मैं अभी देख ही रहा था कि अचानक जैसे सरला ताई का जिस्म अकड़ने लगा, उनकी जांघे भिचने लगी, अगले ही पल उनकी चूत से ढेर सारा पानी निकलने लगा, और मेरी अम्मा उस पानी को नारियल पानी की तरह चाट रही थी..... ये नज़ारा देखकर मुझे लगा कि मेरा भी पानी निकल जायेगा.. पर यहाँ ऐसा करना खतरे से खाली नही था, इसलिए मैंने खुद पर कण्ट्रोल रखा

कुछ पलो में ही खुद पर काबू करके मैं दोबारा अंदर झाँकने लगा था, अब दोनों ओरते बिस्तर पर सीधी लेटी थी...और लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी....

सरला ताई – वाह सुधिया, तेरी जीभ सच में कमाल की है रे, जब भी अंदर जाती है, ढेर सारा पानी निकाल कर ही बाहर निकलती है... पर चल अब मैं तुझे अपनी जीभ का कमाल दिखाती हूँ..

सुधिया – नही सरला, आज तो काफी वक्त हो चूका है, इसलिए आज नही फिर कभी...

सरला ताई – चल कोई नही, पर यार तू बड़ी कमाल की है रे, क्या मस्त चुसाई करती है.... मुझे तो जन्नत की सैर करवा दी तूने..

सुधिया – कहाँ सरला, जन्नत की सैर तो तभी होती है जब एक बड़ा सा मुसल लंड चूत में घुसकर उसकी धज्जियाँ उडाता है.....

अम्मा के मुंह से ऐसी बात सुनकर मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही ना रहा,

सरला ताई – हाँ री, बात तो तेरी 100 टका सही है, पर हम कर भी क्या सकते है, एक तो मेरा मर्द वैसे ही 4 इंच की छोटी सी लुल्ली लेकर घुमत है और उपर से अब तो वो भी अंदर लिए हुए 2 साल होने को आ गये है, सचमुच बड़े ही बेदर्द है हमरे मर्द

सुधिया – सही कह रही है सरला, समीर के बापू भी महीने में कोई 2-3 दिन ही घर आवत है, और उन दिनों में भी कुछ नही करते है.... मैं तो मन मारकर ही रह जाती हूँ.. पर अब करे भी का करे... लगता है अब तो आदत सी हो गयी है.... 3 साल होने को आये... उन्होंने पिछले 3 साल से अपना वो छोटा सा लंड भी मेरी चुत में नही डाला है...

सरला – हाँ सुधिया, कभी कभी तो लगता है कि राजू के बापू को बोल दूँ कि मेरी चुदाई कर दो, पर फिर शर्म ऐसी चीज़ है कि कहे भी तो कैसे कहे...

सुधिया – सही कहा सरला, पर लगता है अब तो यही हमारी ज़िन्दगी बन चुकी है, घुट घुट कर बिना लंड के जीना

सरला – पर तू चिंता क्यों करती हैं, अगर हमारे मर्द हमारा ख्याल नही रखते तो क्या हुआ, हम एक दुसरे का ख्याल रख लेंगे, और वैसे सुमेर तो है ही..

सुधिया – सुमेर के साथ तो तुम ही चुदाई करो, मुझे उसके साथ कुछ नही करना, वैसे भी दिन भर नशा ही करता रहता है, कहीं कुछ मुंह से निकल गया तो जीना मुश्किल हो जायेगा...

सरला – अरे पर तू चिंता काहे करती है, अब मुझे देख मैं भी तो उससे साल में 4-5 बार चुद ही लेती हूँ, पर आज तक किसी को पता नही चला..... तो मेरी मान एक बार तू भी अपनी चूत में उसका लंड लेले.... कम से कम एक बार के लिए थोड़ी ख़ुशी तो मिलेगी...

सुधिया – पर तू तो कहती है कि उसका लंड तो अब बड़ी मुश्किल से खड़ा होता है.. तो वो चुदाई क्या खाक करेगा..

सरला – हाँ ये तो है, नशे की वजह से अब तो उसका लंड खड़ा ही नही होता, बड़ी मुश्किल से खड़ा किया था अभी परसों...

सुधिया – हाँ वो तो मुझे पता चल ही गया था कि सुमेर आया है तो पक्का एक बार तो चुदाई कर ही लेगी तू...

सरला – यार सुधिया, मेरे दिमाग में एक तरकीब है, जिससे हमारी ये अकेलेपन की समस्या दूर हो सकती है, पर तू बुरा मत मानना

सुधिया – मैं जानती हूँ कि तू क्या कहने वाली है, पर मैं किसी अनजान मर्द से चुदाई नही करने वाली, चाहे मेरी चूत प्यासी ही पड़ी रहे

सरला – हाँ हाँ मैं जानती हूँ तू नही करेगी किसी अनजान मर्द के साथ... पर अगर हम उस मर्द के साथ चुदाई करे जिसे हम जानते है, तो ....

सुधिया – क्या... पर पर कौन ...

सरला – देख सुधिया अब मैं जो कहने वाली हूँ उसे बहुत ध्यान से सुनना, और बुरा मत मानना....

सुधिया – ठीक है, पर तू बता तो सही कि ऐसा कोनसा मर्द है जिससे हम चुदाई कर सकते है.....

मैं वहा सीढ़ियों में खड़ा सोच रहा था कि आखिर ताई किसकी बात कर रही है....

सरला - वो मर्द कोई और नही बल्कि.......बल्कि..

सुधिया – अरे बता ना कौन है वो...

सरला – वो कोई और नही बल्कि तेरा बेटा समीर है...

ताई की बात सुनकर तो जैसे मुझे चक्कर सा आ गया......मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे किसी ने जोर से कस के थप्पड़ मार दिया और मैं वहीँ सुन्न सा हो गया हूँ.... और शायद यहीं हालत अम्मा की भी थी..

सुधिया – सरला, तू पागल तो नही हो गयी है.....कैसी बहकी बहकी बाते कर रही है.. कहीं कोई नशा वशा तो नही कर लिया.....

सरला - नही सुधिया, देख तू मेरी बात तो सुन....

सुधिया – नही नही सरला, पागल मत बन, भला एक माँ अपने बेटे के साथ... छि छि मुझे तो सोचते हुए भी शर्म आ रही है.....

सरला – इसमें शर्म कैसी... वैसे भी समीर तेरा कौनसा सगा बेटा है.... वो तेरे पेट से थोड़े ही ना निकला है.....

सुधिया- नही नही सुधिया..... मैं तो अपने बेटे के साथ ऐसा नही कर सकती.....और वैसे भी वो अभी बच्चा है..

सरला – अरे कहाँ से बच्चा लग रहा है वो तुझे.... एक ओरत की नज़र से देखेगी तो मस्त लंड नज़र आएगा तुझे....

सुधिया – नही नही सरला, मैं ऐसा नही कर सकती....... अगर तुझे आग लगी पड़ी है तो अपने बेटे राजू के साथ कर ले ना....

सरला – अब तुझे क्या बताऊ... सच तो ये है कि मैं तो राजू के साथ ही ये करना चाह रही थी ताकि घर की बात घर में ही रहे... पर

सुधिया – पर क्या...

सरला – राजू भी अपने बाप पर गया है.... उसका लंड तो मुश्किल से तीन साढ़े तीन इंच होगा...

सुधिया – अरे कमीनी, तूने अपने बेटे का लंड भी देख लिया, कब देखा कहाँ देखा...

सरला – वो खेत में एक दिन मैं दोपहर को गयी थी खाना लेकर, तब झाड़ियो के पीछे राजू मुठ मार रहा था, और उसका लंड बहुत छोटा है, लगता है इनके पुरे खानदान में ही छोटे लंड की परम्परा है,

सुधिया – हाँ वो तो है, समीर के बापू का भी मुश्किल से चार साढ़े चार इंच का है...

सरला – तभी तो मैं कह रही हूँ... क्यूँ ना समीर के साथ ही हम दोनों अपनी चुत की खुजली मिटा ले, क्या पता उसका लंड बाकियों से थोडा सा बड़ा हो

सुधिया – पर समीर तो अभी बच्चा है, उसका भी इनके बराबर ही होगा...

सरला – पर अगर वो थोडा बड़ा हुआ तो अपना काम चल जाएगा...

इधर मैं खड़ा सोच रहा था कि अगर इनको पता चला कि मेरा लंड तो साढ़े आठ इंच लम्बा है तो इनका क्या होगा...

सुधिया – नही सरला, मैं ये नही कर पाउंगी......

सरला – चल ठीक है, तू मत कर, पर मुझे तो करने देगी ना

सुधिया – वो....मैं... चल ठीक है, अगर तू चाहती है तो कर लेना... पर तुझे पता कैसे चलेगा कि उसका लंड भी छोटा तो नही है

सरला – इसमें तुझे मेरी मदद करनी होगी..

सुधिया – मुझे ..पर कैसे

सरला – देख सुधिया, तू उसके साथ रहती है, ना की मैं.... इसलिए तेरे लिए ये पता करना ज्यादा आसान है, कि उसका लंड मेरे जैसी खेली खाई ओरत को संतुस्ट कर सकता है या नही

सुधिया – पर अगर उसका लंड भी छोटा हुआ तो..

सरला – तो... हम समझ लेंगे कि हमारी किस्मत में अब चुदाई का सुख नही है....

सुधिया – चल ठीक है.. तेरे लिए मैं ये भी कर दूंगी.... पर मैं अपने बेटे के साथ कुछ नही करूंगी... याद रखना...

सरला – हाँ ठीक है....

मैं तो ये सोच कर ही उत्तेजित हो गया कि मेरी अम्मा मेरा लंड देखने की कोशिश करेगी..

सुधिया – चल तो ठीक है, अब मैं घर जाती हूँ..... काफी समय हो चूका है...

मैं भी अम्मा की बात सुनकर सीढ़ियों से दोडा और नीम से निचे उतरकर थोडा बाहर की तरफ आ गया.. और वापस ताई के घर की तरफ जाने का नाटक करने लगा...

तभी सामने से अम्मा आती हुई दिखाई दी.. मैंने अम्मा को आज तक इस नज़र से नही देखा था जैसे कि अभी देख रहा था... अम्मा वाकई काफी खुबसूरत दिखती थी..... कितनी गोरी थी.....भरा भरा बदन... मस्त बलखाती चूचियां, सांचे में ढली हुई कमर, भारी सी गांड, कुल मिलाकर बेहद जानलेवा बदन था अम्मा का

मैं सोच ही रहा था कि तभी अम्मा मेरे पास आ गयी.....

सुधिया – अरे समीर बेटा, तुम यहाँ क्या कर रहे हो...

मैं – अ...अम्मा वो बापूजी घर आ गये है..... इसलिए आपको बुलाने आया था..

सुधिया – अच्छा.. चल फिर जल्दी चल..

और फिर मैं और अम्मा वापस घर की तरफ चल पड़े....

 


जल्द ही मैं और अम्मा वापस घर की तरफ चल पड़े, सरला ताई और अम्मा की बाते मेरे दिमाग में पुरे रस्ते घूम रही थी, और ये सोच कर तो मैं और भी ज्यादा उत्तेजित महसूस कर रहा था कि अम्मा मेरा लंड देखने की कोशिश करेगी, और जब उन्हें ये पता चलेगा कि मेरा लोडा बहुत ही लम्बा और मोटा है तो क्या होगा, ये सोचकर ही मेरे मन में एक झुरझुरी सी पैदा हो रही थी,

अम्मा – समीर बेटा तेरे बापू को आये कितनी देर हो चुकी है??

मैं – लगभग 20 मिनट होने हो आई अम्मा, बापूजी ने आते ही आपको बुलाने भेज दिया था....

अम्मा – पर तू तो अभी अभी आया था ना सरला के घर पे......

मैंने देखा कि अम्मा थोड़ी सी घबरा गई थी मेरी बात सुनकर, मुझे भी अपनी गलती का एहसास हो गया था कि मुझे ये नही बोलना चाहिए था कि बापूजी ने आते ही मुझे ताई के घर भेज दिया, अब मैं माँ को क्या बोलता....कि इतनी देर कैसे लगा दी मैंने ताई के घर आते आते जबकि उनका घर तो मुश्किल से दो तीन मिनट की दुरी पर ही था.... तभी मेरे दिमाग में एक तरकीब आई

मैं – वो अम्मा, वो रस्ते में मुझे चमकू मिल गया था, इसलिए उससे बाते करने में टाइम लग गया...

अम्मा – ओह...अच्छा ठीक है...

मैंने देखा कि मेरा जवाब सुनकर अम्मा थोड़ी सुकून में आई....

जल्द ही हम घर पहुंच गये, बापूजी और अम्मा एक दुसरे को देखकर बड़े खुश हुए, फिर बापूजी ने हम सबको शहर से लाये हुए तोहफे दिए..... बापूजी मेरे लिए शहर से नयी पेंट लाये थे, जबकि दीदी और अम्मा दोनों के लिए रात को सोने से पहले पहनने वाली मैक्सी लाये थे, दरअसल अम्मा कई दिनों से बापूजी को बोल रही थी कि घाघरा चोली में उन्हें सोने में थोड़ी तकलीफ होती है, क्यूंकि उसका कपडा थोडा खुरदुरा था, इसीलिए बापूजी अम्मा और दीदी दोनों के लिए ही मैक्सी ले आये,

मैक्सी देखकर अम्मा और दीदी बहुत खुश हुए, फिर हम सब ने मिलकर खाना खाया, आज दीदी ने खाने में बापूजी के पसंद की चीज़े बनाई थी, खाना खाकर बापूजी ने थोड़ी देर हम सबको शहर के बारे में कुछ बाते बताई जैसा कि वो हर बार अपनी यात्रा से आने के बाद बताया करते थे, वैसे तो बापूजी कई कई शहरो में जाकर आते थे, पर जब भी वो भोपाल के बारे में कुछ बताते ना जाने मुझे ऐसा क्यों लगता जैसे मैं उस शहर को पहले से जानता हूँ, पता नही क्यों ऐसी फीलिंग मेरे मन में आती थी जैसे मेरा उस शहर से कोई पुराना नाता है, मैं अपने दिमाग पर जोर देने की कोशिश भी करता पर सिवाय एक धुंधलाहट के और कुछ नज़र ना आता

बापूजी हमे अपनी यात्रा के बारे में बताते रहे, हम भी बड़े ही आराम से उनकी बाते सुनते, इसी बातचीत में कब दस बज गये हमे पता ही नही चला.....

बापूजी – चलो ठीक है बच्चो अब जाकर तुम दोनों सो जाओ, बाकि कि बाते कल करेंगे... वैसे भी तुम्हे कल खेत में जाना है,

मैं – पर बापूजी कल तो आप भी तो चलोगे हमारे साथ खेत में, सब लोग मिलकर जायेगे ना...

बापूजी – नही बेटा, कल मैं लालाजी के यहाँ जा रहा हूँ, इस महीने का ब्याज जमा करने, पीछे से घर पर तेरी अम्मा हम सब के लिए खाना बनाने को रुकेगी..... इसलिए कल तू और तेरी बहन ही खेत में जाओगे... वैसे भी सुधिया बोल रही है कि खेत में कल ज्यादा काम नही है,

मैं – ठीक है बापूजी, जैसा आप कहे....

बापूजी – चलो ठीक है तो अब तुम दोनों जाओ और सो जाओ...

फिर मैं और दीदी अपने अपने तोहफे लेकर अपने कमरे में चले गये, माँ बापू भी अपने कमरे में जा चुके थे.....

कमरे में आने के बाद हमने दरवाज़ा बंद किया और आकर बिस्तर पर बैठ गये....

मैं – दीदी देखो ना बापू मेरे लिए कितनी सुंदर पेंट लेकर आये है शहर से....

दीदी – हाँ , पर मेरी मैक्सी भी तो कितनी सुंदर है....

मैं – हां दीदी....

कुछ देर हम ऐसे ही बाते करते रहे, और कब रात के 11 बज गये हमे पता ही नही चला...

दीदी - अच्छा चल अब सो जाते है, कल सुबह जल्दी भी उठना है....

अब सोना तो मैं चाहता था पर मुझे तो निक्कर पहनकर ही नींद आती थी, और मैं निक्कर के अंदर अंडरवियर भी नही पहनता था, अक्सर मैं बाथरूम में जाकर ही चेंज कर लेता था, पर आज तो काफी रात हो चुकी थी और अब बाहर जाने से माँ बापू की नींद खुल सकती थी....

दीदी – क्या हुआ, क्या सोच रहा है, सोता क्यूँ नही है तू...

मैं – “पर वो दीदी मुझे अपना निक्कर पहनना है....” मुझे पेंट में नींद नही आती..

दीदी – हाँ तो पहन ले ना...

मैं – पर दीदी अब अगर बाथरूम में गया तो माँ बापू की नींद ना खुल जाए कहीं...

दीदी – हाँ तो अंदर ही पहन ले ना,

मैं – नही दीदी अंदर मुझे आपसे शर्म आती है...

दीदी – “अरे मुझसे क्यों शर्माता है....” दीदी के चेहरे पर एक मुस्कान सी आ गयी..

मैं – नही दीदी मुझे शर्म आती है... वो मैं अंदर मेरा मतलब है कि निक्कर के अंदर कुछ नही पहनता

मेरी बात सुनकर दीदी को हलकी सी हंसी आ गयी....

मैं – क्या दीदी आप तो मेरा मजाक उड़ा रही हो...

दीदी – अच्छा माफ़ करना... चल एक काम करते है... मैं उधर मुंह कर लेती हूँ... तू जल्दी से निक्कर पहन ले ...क्यों ठीक है ना

मैं – हाँ ये ठीक रहेगा...

दीदी – हाँ तो चल जल्दी से पहन ले अब.. काफी रात हो चुकी है....

दीदी ने दूसरी तरफ मुंह कर लिया और मैं अब जल्दी से अपनी पेंट उतारने लगा, पेंट उतारते ही मेरा लंड जो अभी अर्धसुप्त अवस्था में था, वो चड्डी में उभार बनाकर खड़ा था, मेरे लंड के उभार को साफ़ साफ़ महसूस किया जा सकता था, मैं अब दीदी की तरफ देखने लगा जो मेरी तरफ पीठ करके बैठी थी,

मैं अब धीरे धीरे अपनी चड्डी उतारने लगा

दीदी – “अरे कितनी देर लगाएगा” और दीदी ये कहते हुए पीछे मुड गयी.... “हे भगवान.....” दीदी के मुंह से सिर्फ इतना ही निकला....

मैं भी शर्म के मारे जल्दी से पीछे मुड गया

“दीदी ने पक्का मेरा लंड देख लिया होगा, अब क्या होगा, अगर उन्होंने अम्मा को बता दिया तो...” मेरे मन में अजीब अजीब विचार चल रहे थे, पर मैंने उन सब विचारो को हटाया और जल्दी से अब निक्कर पहन लिया...और फिर आकर बिस्तर पर दीदी के साथ बैठ गया...

मैं – दीदी, आप पीछे क्यों मुड़ी....” मैं थोड़े शिकायत भरे लहजे में बोला

दीदी – अरे तू इतना वक्त जो लगा रहा था....” अब दीदी भी मेरी तरफ मुंह करके बैठ चुकी थी...

मैं –“दीदी...वो आपने कुछ देखा तो नही ना” मैं सकुचाते हुए बोला...

दीदी – “ नही मैंने तो कुछ नही देखा...”

दीदी के बोलते ही मुझे बहुत ही सकूँ सा महसूस हुआ ये जानकर कि दीदी ने कुछ नही देखा...

दीदी –“बस एक बड़ा सा डंडा ही दिखा मुझे तो...हा हा हा” और ये बोलकर दीदी हंसने लगी..

मेरी तो बोलती बंद हो गयी उनकी बात सुनकर......माथे पर हल्का सा पसीना आ गया... और मन में एक अजीब सी घबराहट होने लगी.... अभी मैं इस सदमे से उबरा भी नही था कि दीदी ने मुझ पर एक और बम फ़ेंक दिया...

दीदी – समीर एक बात बता...

मैं – ब....बोलो....दीदी.....

दीदी – आज शाम को तू बाथरूम के अंदर ताक झांक कर रहा था क्या जब मैं अंदर नहा रही थी...

दीदी की बात सुनकर मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे खिंच कर थप्पड़ मार दिया हो, या किसी ने जोर से बिजली का झटका दे दिया हो, मेरी तो डर के मारे हालत ख़राब हो गयी.... मैं बुरी तरह घबरा चूका था, मुझे पसीना आने लगा था....

दीदी – घबरा म़त, बस मुझे सच सच बता दे, मैं वादा करती हूँ कि किसी को कुछ नही बोलूंगी.... बस मुझे सच सच बताना

अब मुझे डर तो लग रहा था पर दिमाग के एक कोने से आवाज़ आई कि दीदी को सच बताने में ही भलाई है वरना अगर झूठ बोलने से कहीं वो नाराज़ हो गयी तो शामत आ जानी है मेरी तो.........

दीदी – अरे बोलता क्यों नही तू, वो तू ही था ना

मैं – दीदी, वो मुझे माफ़ कर देना.... मुझसे गलती हो गयी.... मैंने जानबुझकर नही किया पक्का.... मैं आगे से ऐसा कभी नही करूँगा

मैं चाह रहा था कि दीदी सिर्फ इस बार मुझे माफ़ कर दे, फिर तो कभी भी उनकी तरफ आँख उठाकर भी नही देखूंगा....पर दीदी ने मुझसे जो सवाल पूछा उसकी उम्मीद तो मैंने सपने में भी नही की थी....

दीदी – देख मैं तुझे एक शर्त पर माफ़ कर सकती हूँ...

मैं – हाँ बोलो दीदी, मुझे आपकी सभी शर्ते मंजूर है...

दीदी – तो ठीक है, मैं तुझसे जो भी पूछूँ तू मुझे खुलकर और सब सच सच बतायेगा....बोल मंजूर है ना..

मैं – ठ.....ठीक है दीदी...

दीदी – अच्छा तो ये बता, जब तूने मुझे नहाते हुए देखा तो तुझे कैसा लगा ......???

मैं भला अब क्या जवाब देता.... तो बस चुपचाप दीदी की तरफ देखता रहा..

दीदी – अरे बोलता क्यों नही है..... देख तूने वादा किया है कि मेरे सारे सवालों के सही सही जवाब देगा...

मैं – पर दीदी...

दीदी – पर वर कुछ नही ... अगर तूने जवाब नही दिए तो मैं बापूजी को बता दूंगी कि तू मुझे नहाते हुए देख रहा था...बोल बता दूँ क्या...

मैं – “नही नही दीदी..ऐसा मत करना... अगर बापूजी को पता चला तो वो मुझे घर से निकाल देंगे... मैं आपके सभी सवालों के जवाब देने को तैयार हूँ....” मैं घबरा कर बोला....मुझे लग रहा था शायद मेरे ही पाप है जो मुझे ये सब झेलना पड़ रहा है..... मैंने सोच लिया था कि आज के बाद इन झमेलों में पड़ना ही नही है मुझे...

दीदी – हाँ तो अब बता कि जब तूने मुझे नहाते हुए देखा तो तुझे कैसा लगा....

मैं – अच्छा लग रहा था दीदी....

दीदी – सिर्फ अच्छा या बहुत अच्छा

मैं – बहुत अच्छा ..

दीदी – तूने मेरे बदन में क्या क्या देखा ....

मैं – वो दीदी मैंने तो सब कुछ देखा था....

दीदी – ऐसे नही नाम लेकर बता...क्या क्या देखा.....

मैं – दीदी मैंने वो आपके बाल, चेहरा, पीठ, टांगे... और बाकी सब भी देख लिया था...

दीदी – अरे तो नाम बता ना... ये सब तो तू वैसे भी रोज़ देख लेता है..... और इनके अलावा क्या क्या देखा..

मैं – दीदी वो मैंने आपकी छाती भी देख ली थी...” मुझे समझ नही आ रहा था कि दीदी के सामने चूत , गांड मम्मे जैसे अल्फाज़ कैसे इस्तेमाल करूँ...

दीदी – लगता है तू ऐसे नाम नही बतायेगा, मैं अभी बापूजी के पास जाती हूँ...

मैं – नही नही दीदी... मैं बता रहा हूँ.....

दीदी – हाँ तो बोल.. और क्या क्या देखा था...

मैं – दीदी वो मैंने आपके मम्मे भी देखे थे....

दीदी – हाय राम... मेरे मम्मे भी देख लिए तूने... कैसे लगे तुझे मेरे मम्मे....

मैं (बड़ी मुश्किल से थूक निगलता हुआ) – दीदी, वो आपके मम्मे सच में बहुत खूबसूरत है.....दिल कर रहा था कि...

दीदी – क्या दिल कर रहा था बोल ना...

मैं – नही दीदी, आप नाराज़ हो जाओगी सुनकर...” अब मुझे भी इन सबमे मजा आने लगा था...

दीदी – अरे नही होउंगी....तू खुलकर बता ना...क्या दिल कर रहा था मेरे मम्मे देखकर.....

मैं – वो दीदी मेरा मन कर रहा था कि इन्हें जी भरकर चुसुं.....

दीदी – अच्छा जी.. तो जनाब मेरे मम्मे चुसना चाहते है.......अच्छा और क्या देखा तूने..

मैं – मैंने वो आपके पीछे ...मेरा मतलब है आपकी वो ....गांड भी देखी थी...

दीदी – अरे राम....तू तो बड़ा ही बेशर्म है रे.... मेरी गांड भी देख ली तूने...

इस बार मैं दीदी के बिना पूछे ही बोल पड़ा....

मैं – दीदी, आपकी गांड सच में बहुत ही भारी है... कसम से बहुत ही मस्त गांड है आपकी... कितनी मांसल गोरी गोरी... एकदम चिकनी सी गांड.. मैंने आज तक इतनी सुंदर गांड नही देखी दीदी....

दीदी – मरजान्या....कैसी कैसी बाते करता है.. अपनी दीदी की गांड देखते हुए शरम ना आई तेरे को...” दीदी झूटमूठ का गुस्सा करते हुए बोली...

मैं – पर दीदी आप ही बोल रही थी कि खुलकर बताऊँ सब कुछ.. अगर आप नही चाहती तो मैं नही बताता.....

दीदी - अरे नही नही, तू बता, मैं तो ऐसे ही बोल रही थी....

मैं – और क्या बताऊ दीदी....

दीदी – मम्मे और गांड के अलावा भी कुछ देखा या नही

मैं – “नही दीदी और तो कुछ नही देखा” मैंने झूट बोल दिया..

दीदी – “सच में तूने और कुछ नही देखा...”

मैं – नही दीदी और तो कुछ नही देखा...

दीदी – “ऐसा कैसा हो सकता है... अच्छे से याद कर ना समीर, तूने जरुर कुछ और भी देखा होगा...” दीदी अधीर होती हुई बोली

मैं – “अम्म्म...नही दीदी...और तो कुछ मुझे याद नही...” मैं दीदी के मजे ले रहा था अब

दीदी –“ठीक है तो सोजा, याद नही तो” दीदी गुस्सा करती हुई मेरी तरफ पीठ करके लेट गई....

उन्हें इस तरह गुस्सा करते देख मुझे उन पर बड़ा ही प्यार आ गया.....मैंने धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा तो उन्होंने कंधे को झटकते हुए मेरा हाथ हटा दिया....मैंने दोबारा से उनके कंधे पर एक हाथ रखा और उन्हें मेरी तरफ पलट लिया.....

दीदी – क्या है, सोने क्यूँ नही देता अब...

मैं – वो बस मैं तो ये ही बता रहा था कि मैंने एक और चीज़ देखी थी आपकी...

दीदी – “क्या देखी थी....” दीदी नाराज़गी से ही बोली...

मैं – “आपकी ये प्यारी से चुत......”ये कहकर मैंने दीदी की हलके से हाथ फेर दिया.....

दीदी के मुंह से हलकी सी सिसकारी निकल गयी....

मैं – और दीदी सच कहूँ तो आपकी इस प्यारी सी फुद्दी का मैं तो दीवाना हो चूका हूँ.... इतनी खूबसूरत चूत मैंने कभी नही देखी... कितनी प्यारी सी गुलाबी सी गोरी सी चूत है आपकी.....

दीदी – नही तू झूठ बोल रहा है, बस मुझे मनाने के लिए...

मैं – नही दीदी.. मैं आपकी कसम खाकर बोलता हूँ...... मुझे आपकी चूत सच में बहुत अच्छी लगी.....

दीदी – चल ठीक है, मान ली तेरी बात... चल अब सोजा... कल जल्दी उठना है....

मैं – पर दीदी...

दीदी – “पर क्या...” दीदी मुस्कुराते हुए बोली...

मैं –“वो मैं सोच रहा था कि...”

दीदी – सोचना वोचना कल.. अब चुपचाप सोजा......कल जल्दी उठाना है हमे....

अब मैं और क्या बोलता.. कहाँ तो मैं सोच रहा था कि आज रात रंगीन होने वाली है और कहाँ साला अब खड़े लंड पर धोका हो गया

दीदी – सोजा अब....

आखिर हारकर मुझे भी सोना ही पडा....पर एक बात बिलकुल साफ थी कि दीदी भी मुझसे चुदने के लिए तैयार है..... बस थोडा सा शर्मा रही है...... मैंने मन ही मन सोच लिया कि चाहे जो हो आज रात ही दीदी के सोने के बाद उनकी चूत का उद्घाटन मैं कर दूंगा......

मैं अब दीदी के सोने का इंतज़ार करने लगा.......दीदी ने आज एक नाईटी पहन रखी थी.... करीब करीब 1 घंटे बाद मुझे लगा कि शायद अब दीदी सो गयी है... मैंने उनकी तरफ मुड कर देखा....

मेरा लंड खुशी के मारें झटके लेने लगा… सामने वो दिल कश हसीना मेरे बिस्तर पर लेटी हुई थी…उसकी पीठ मेरी तरफ थी…मैंने गोर से देखा…नीलू की नाइटी उसके घुटनो तक ऊपर चढ़ि हुई थी... जैसे आज वो उसे जान बुझ कर ऊपर उठा कर लेटी हुई हों…

मैं बिना एक पल की देरी किए उसके और करीब आकर लेट गया…और धीरे-2 उसकी तरफ खिसकने लगा…जब मैं दीदी के बिल्कुल साथ हो गया…तो मेरा लंड एक दम अकड़ गया.. और मेरे निक्कर को ऊपर उठा दिया…मुझे लंड को निक्कर में रखने में दिक्कत होने लगी…

मैंने थोड़ा सा पीछे हो कर अपने लंड को निक्कर से बाहर निकाल लिया…और दीदी के पीछे से उनके साथ लग गया…मेरा लंड उनकी नीले रंग की नाइटी को उसकी गांड की दरार में धकेलता हुआ उसकी गांड के सूराख पर जा लगा….

दीदी थोड़ा सा हिली, और पीछे की तरफ अपनी गांड को थोड़ा सा दबा दिया…जैसे वो नींद में ये सब कर रही हो…मैंने दीदी की नाइटी को धीरे-2 ऊपर करना चालू कर दिया…जो पहले से उसके घुटनो तक उठी हुई थी…

मैं बड़े ध्यान से दीदी की नाइटी को ऊपर उठाता रहा…और जब उनकी नाइटी उनकी जाँघों तक ऊपर उठ गयी…मैंने अपने लंड को पीछे करके दीदी की नाइटी को ऊपर उठा दिया…वाउ सामने का नज़ारा देख मेरा लंड की नसें फूलने लगी…

आज दीदी ने पीले रंग की पैंटी पहनी हुई थे…जैसे आज पूरी तैयारी के साथ आई हो…मैं अपने आप पर काबू ना रख सका… पीले रंग की पैंटी दीदी के बड़े-2 गोल मटोल चौड़ी गांड को नही ढक पा रही थे…अब मैं एक दम पागल हो चुका था…

अब मैं बिना किसी बात की परवाह किए बगैर अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसकी गांड के नीचे से उसकी फुद्दि पर लगा दिया…मैं तो मानो जैसे जन्नत में उड़ रहा था…इस बार दीदी फिर से थोड़ा सा हिली पर फिर से शांत पड़ गयी…मैं धीरे-2 अपने लंड को दीदी की पैंटी के ऊपर उसकी फुद्दि के लिप्स पर रगड़ने लगा….

पर दीदी की जांघ आपस में जुड़ी हुई थी…जिससे मेरा लंड गांड की नीचे से थोड़ा ही आगे जा पा रहा था…मैं अपने लंड को धीरे-2 रगड़ता हुआ आगे पीछे करने लगा.. पर हर बार दीदी की जांघ के कारण आधे रास्ते में रुक जाता…दीदी की पीले पैंटी में मुझे अपने लंड पर कुछ-2 गीला सा महसूस हुआ…ओह्ह्ह्ह ये क्या दीदी की फुद्दि तो गीली हो चुकी थे…क्या वो जाग रही हैं….हाँ शायद वो कुछ बोले बिना ही मज़ा लेना चाहती हैं…

मैं अपने लंड को पीछे उसकी फुद्दि पर पैंटी को ऊपर से रगड़ते हुए…और आगे करने की कोशिश करने लगा…फिर वो हुआ जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था…दीदी ने अपनी ऊपर वाली जाँघ को हल्का सा ऊपर कर लिया…जैसे ही दीदी की जाँघ ऊपर हुई…मेरा तना हुआ लंड दीदी की दोनो जाँघों के बीच में से उसकी फुद्दि के होठों के बिल्कुल बीचो-बिच जा कर दब गया….

मेरे पूरे बदन में वासना की लहर दौड़ गयी…दिल उतेजना के मारें तेज़ी से धड़कने लगा…दीदी ने फिर धीरे-2 अपनी ऊपर वाली जाँघ को नीचे वाली जाँघ पर वैसे ही रख दिया…मेरा तना हुआ लंड दीदी की दहक्ती हुई जाँघो और फुद्दि में लगा हुआ था..

मत पूछो मुझे आज तक इतना मज़ा कभी नही आया…अब मेरा हौसला बढ़ चुका था…पर मैं फिर भी थोड़ा सा डर रहा था…मैंने ये सोच लिया…जैसे नीलू दीदी को पसंद हैं…मैं भी बिना कुछ बोले ही उनको सारी दुनिया का प्यार आज दे दूँगा..

मैंने थोड़ी देर लेटने के बाद…अपना हाथ आगे लेजा कर उनकी नाइटी के ऊपर से उनके राइट मम्मे पर रख दिया…ओह्ह्ह्ह क्या नरम और गोश्त से भरे हुए मम्मे हैं दीदी की…मैं धीरे-2 दीदी के मम्मे को ऊपर से दबाने लगा…जैसे-2 मैं दीदी के मम्मे को दबा रहा था… वैसे -2 दीदी अपने गांड को पीछे की ओर हल्के-2 दबा रही थे…ताकि मुझे पता ना चले..पर मैं तो पहले से ही सब महसूस कर रहा था…दीदी की नाइटी भी बेहद पतली सी थे……पीछे दीदी की नाइटी के ऊपर का हिस्सा काफ़ी खुला था….

मैने अपने काँप रहे होंठों को, नीलू की नाइटी के ऊपर के खुले हिस्से पर लगा दिया… जैसे ही मेरे होंठ उसकी नंगी पीठ पर पड़े…वो एक दम से सीईईई करके सिसक उठी…आवाज़ बहुत धीमी थी…पर मुझे सुनाई दे गयी….मैं नीलू दीदी की पीठ पर अपने होंठो को रगड़ने लगा…उसका नतीजा ये हुआ कि, उसने अपनी गांड को धीरे धीरे मेरे लंड पर पुश करना शुरू कर दिया.…

नीलू दीदी की साँसें और तेज़ी से चलने लगी…मेरा हाथ उनकी नाइटी के ऊपर से उसके मम्मे पर था….और मैं उसके मम्मे को धीरे-2 दबा रहा था…दीदी की तेज़ी होते साँसों से उनके मम्मे तेज़ी से ऊपर नीचे हो रह थे…जो मैं अपने हाथ से अच्छी तरह से महसूस कर रहा था…

अब मेरे बर्दास्त से बाहर हो चला था…मैने अपने होंठो को दीदी के जिस्म पर रगड़ते हुए…उसकी गर्दन पर आ गया…और पीछे से उसके गर्दन को चूमने लगा…मैं दीदी के चेहरे से उठ रही गरमी को साफ महसूस कर रहा था..उसकी नाक से साँस लेने तक की आवाज़ भी मैं साफ-2 सुन पा रहा था….

मैने दीदी के मम्मे से अपना हाथ हटा कर, उनके कंधे की नीचे बाजू पर रख दिया…और अपनी कमर के नीचले हिस्से को पीछे कर अपने लंड को उसकी जांघों के दरम्यान से बाहर निकाल लिया…और थोड़ा सा पीछे हो कर उनके बाजू को पकड़ कर अपनी तरफ करने लगा…

थोड़ी ही देर में दीदी ने धीरे-2 मेरी तरफ करवट बदल ली…अब दीदी पीठ के बल लेटी थे…तेज़ी से चल रही साँसों से उसके 32 साइज़ के एक दम सख़्त मम्मे ऊपर नीचे हो रहे थे, और मैं अपनी वासना से भरी नज़रों से देख रहा था…मैं नीलू के ऊपर झुक गया…मेरा कमर का नीचे का हिस्सा बिस्तर पर था…और बाकी का हिस्सा नीलू दीदी के ऊपर था…पर मैने उन पर वजन नही डाला था…वो अभी भी अपनी आँखे बंद किए हुए थी…उसके होंठ काँप रहे थे…आँखों की पलकें हिल रही थी…और उसके पेट कमर पर कंपन हो रहा था….

ये सब करते हुए मेरा दिल इतने जोरो से धड़क रहा था कि, मुझे पूरा यकीन है कि, नीलू दीदी भी मेरे दिल की धड़कनो की आवाज़ को सुन सकती होंगी…मेरे हाथ पैर अजीब से डर और उतेजना के मारे काँप रहे थे….मैने अपने काँपते हाथो से नीलू दीदी की नाइटी के दोनो स्ट्रॅप्स को पकड़ा और धीरे-2 उनके कंधो से स्ट्रॅप्स को नीचे करने लगा….मुझे पूरा यकीन था कि, नीलू जागी हुई है…पर फिर भी मैं ऐसे नाइटी के स्ट्रॅप्स को नीचे कर रहा था…जैसे मुझे नीलू के जाग जाने का ख़तरा हो…धीरे-2 नीलू की नाइटी के स्ट्रॅप्स उसके कंधो से उतार कर उसके बाज़ुओं पर आ चुके थे…अब उसकी नाइटी के स्ट्रॅप्स उसकी बाज़ुओं पर कोहानियों के पास थे….और अब मुझे नाइटी के स्ट्रॅप्स को उसकी बाज़ुओं को मोड़ कर उनसे निकालना था….

मैने एक हाथ से नीलू के लेफ्ट बाज़ू को पकड़ा और दूसरे हाथ से नाइटी के स्ट्रॅप को पकड़ कर धीरे-2 नीलू के बाज़ू को कोहनी से मोडते हुए, स्ट्रॅप को बाहर निकालने लगा…इसमे मुझे ज़रा भी मुस्किल नही हुई….सब इतनी आसानी से हो गया…जैसे नीलू खुद मेरी मदद कर रहे हो….फिर मैने ठीक उसी तरह दूसरी तरफ का स्ट्रॅप भी बाज़ू से निकाल दिया…और जैसे ही मैने नीलू दीदी की नाइटी को पकड़ कर उनके मम्मों से नीचे खैंचा….तो सामने का नज़ारा देख मेरे लंड ने निक्कर में जोरदार झटका खाया….नीलू के बड़े-2 32 साइज़ के मम्मे रेड रंग की ब्रा में एक दम फँसे हुए थे…..जैसे ज़बरदस्ती उनको उस छोटी सी ब्रा में क़ैद कर दिया हो….अब मेरे बर्दास्त से बाहर हो चुका था….

मैने अपने होंठो को नीलू की गर्दन पर रख दिया…और गर्दन को चूमने लगा…मेरे होंठ नीलू के गर्दन के हर हिस्से को चूम रहे थे…मैने नीलू के हाथों की तरफ देखा…नीलू ने अपने हाथों से अपनी कमर के पास बिस्तर को कसकर पकड़ा हुआ था… मैं नीलू की गर्दन को किस करता हुआ नीचे आने लगा…और उसके बूब्स के ऊपर वाले हिस्से को अपने होंठो से चूमने लगा…अब मैं हिम्मत करके उसके ऊपर आ गया…नीलू ने अपने टाँगों को घुटनो से मोड़ा हुआ था…जिससे उसकी नाइटी सरक कर उसकी जांघो की जडो तक आ गयी थी…और उसकी पीले रंग की वीशेप की पैंटी साफ दिख रही थी…उसकी गोरी गोश्त से भरी जांघे एक दम साफ थी

जैसे ही मैं नीलू के ऊपर आया… तो नीलू ने अपनी जाँघों को खोल लिया… मैं नीलू की जाँघों के दरमियान घुटनो के बल बैठ गया…और अपने दोनो हाथों से नीलू की छोटी सी रेड रंग की ब्रा में क़ैद एक दम कसे हुए मम्मो को हाथ में ले लिया….मेरा लंड नीलू की रेड रंग की पैंटी के एक तरफ से उसकी फुद्दि के लिप्स के नज़दीक रगड़ खा रहा था….नीलू का चेहरा एक दम सुर्ख हो चुका था…और वो अपने सर को ऊपर की तरफ उठाए हुए, अपने होंठो और मूह को थोड़ा सा खोल कर ठीक से साँस लेने की कोशिश कर रही थी…

मैने नीलू के मम्मो को दोनो हाथों में लेकर धीरे-2 दबाना चालू कर दिया… उसके नर्म मुलायम मम्मो को दबा कर मैं और गरम हुआ जा रहा था…पर अब वक़्त आ गया था…जब मैं अपने आप को रोक नही सकता था…और नीलू की ब्रा के कप्स को नीचे से पकड़ कर ऊपर उठाने की कोशिश करने लगा.. पर ब्रा बेहद टाइट थी… और ब्रा के हुक्स नीलू की पीठ पर थे…और नीलू पीठ के बल लेटी हुई थी… अब मेरा दिल नीलू की ब्रा में दिख रहे ब्राउन रंग के आधे इंच के निपल्स को मूह में लेकर चूसने को कर रहा था…

मैं नीलू की पीठ के दोनो साइड से अपने हाथों को नीलू की पीठ के नीचे ले जाने की कोशिश करने लगा…पर नीलू की पीठ नीचे बिस्तर पर दबी हुई थी…और मैं अपने हाथों को नीचे ब्रा के हुक्स के पास नही ले जा रहा था…पर फिर वो हुआ जिससे मेरा लंड और झटके खाने लगा…नीलू ने अपनी आँखों को बंद किए हुए अपनी पीठ को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया…मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नही था…मैने जल्दी से अपने हाथों को नीलू की पीठ के पीछे लेजा कर नीलू की ब्रा के हुक्स को खोल दिए, और अपने हाथों को आगे लेजा कर नीलू के ब्रा के कप्स को ऊपर उठा दिया….

मेरा तो जैसे गला ही सुख गया…एक दम सख़्त गोश्त से भरे हुए नीलू के 32 साइज़ के मम्मे मेरी आँखों के सामने थे…मम्मो के निप्पल तन कर एक दम सख़्त हो चुके थे…ब्राउन रंग के निप्पल को देख कर मैं एक दम पागल हो गया….नीलू के वेल शेप्ड बूब्स को देख कर मैं एक दम से पागल हो गया…और नीलू के दोनो मम्मो को अपने हाथों में पकड़ कर दबाने लगा…जिससे नीलू के मम्मो के निप्पल और नुकीले हो कर बाहर की तरफ आ गये….

मैने नीलू के मम्मो के एक निप्पल को मूह में ले लिया…और धीरे-2 चूसने लगा…नीलू ने अपने हाथों से बिस्तर को कस के पकड़ लिया…और उसके मूह से एक हल्की सी आह निकल गयी..अब मैं किसी भी बात पर ध्यान दिए बिना. नीलू के मम्मे की निप्पल को चूस रहा था…नीलू का बदन मस्ती में गरम हो कर काँप रहा था…मैं नीलू के मम्मे को ज़ोर-2 से सक करने लगा….नीलू के मूह से अहह सीयी की बहुत ही धीमी आवाज़ निकल रही थे…और वो अपने होंठो को अपने दाँतों में दबाए हुए अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही थी

मैं अपने एक हाथ से नीलू के दूसरे मम्मे को धीरे-2 दबा रहा था..नीलू के निप्पल और कड़े हो कर तन चुके थे…मैं नीलू के दूसरे मम्मे के निप्पल को अपने हाथ की उंगलियों में लेकर मसलने लगा, और नीलू और ज़्यादा कसमसाने लगी…

नीलू के बाल बिखर चुके थे…और मैं नीलू के मम्मे को लगतार किसी बच्चे की तरह चूसे जा रहा था…मैं करीब 5 मिनट तक नीलू के एक मम्मे को चूस-2 कर लाल कर दिया था…मैने नीलू के मम्मे को मूह से निकाल कर, नीलू के दूसरे मम्मे को मूह में लेकर चूसना शुरू कर दिया…

और पहले वाले मम्मे को अपने हाथ में लेकर दबाने लगा…नीलू की आँखे अभी भी बंद थी…वो शायद अपनी आँखे खोल कर मेरा सामना नही करना चाहती थे.. मैं भी नीलू को बिना कुछ बोले, नीलू के मम्मे को चूस रहा था…करीब 15 मिनट तक नीलू के दोनो मम्मो को चूसने और दबाने के बाद में धीरे-2 अपने होंठो को नीलू के बदन पर रगड़ता हुआ, नीचे आने लगा….

मेरे होंठ नीलू के बदन के हर इंच को रगड़ रहे थे, और मैं नीलू के बदन पर अपनी ज़ुबान फेर कर चाट रहा था…

मैं अपनी आँखों को ऊपर करके, नीलू के चेहरा को देख रहा था…उनके चेहरे पर पसीना आ चुका था…होंठ थरथरा रहे थे….और बालों की लट माथे और चेहरा पर बिखरी हुई थी… और वो तेज़ी से साँस ले रही थी…

मैं नीलू के जिस्म को अपने होंठों और जीभ से चूमता हुआ, नीलू की नाभि पर आ गया…और अपनी जीभ निकाल कर नीलू की नाभि के चारों तरफ गोल-2 घुमा कर चाटने लगा…नीलू बुरी तरह तड़प कर रह गयी…और अपने हाथों को एक झटके में ऊपर करके सर के नीचे रखे तकिये को दोनो हाथों में कस कर पकड़ लिया…. नीलू के पेट में कंपन के कारण हल्की -2 लहरे उठ रही थी…नीलू के पेट की हल्की चरबी थरथरा रही थी….और वो अपने होंठो को दाँतों में दबाए हल्की आवाज़ में उम्ह्ह्ह्ह्ह उंघ कर रही थी….

मैने अपनी जीभ निकाल कर नीलू की नाभि में डाल कर चाटने लगा…नीलू एक दम से मस्त हो गयी…उसकी कमर झटके खाने लगी….जिसकी वजह से उसकी नाइटी सरक कर उसकी कमर पर आ चुकी थी…और पैंटी फुद्दि के सूराख की जगह से एक दम गीली हो चुकी थे…मैं नीलू की नाभि को 5 मिनट तक चाटता रहा…और फिर नाभि को छोड़ कर नीचे की तरफ आने लगा…जैसे-2 मैं नीचे की ओर आ रहा था…नीलू की साँस लेने की आवाज़ और तेज होती जा रही थी

मैं नीलू के बदन की हर एक इंच को चूमता हुआ, नीलू की पैंटी के ऊपर आ गया…और नीलू की पैंटी के ऊपर से ही अपने होंठो को उसकी फुद्दि के ऊपर रगड़ने लगा…नीलू मेरी इस हरकत से और तड़पने लगी….मैं नीलू की फुद्दि को पेंटी के ऊपर से ही चाटने लगा…नीलू की जांघे मेरे सर पर कसने लगी…जब मुझे थोड़ी दिक्कत होने लगी…मैने नीलू की जांघो को दोनो हाथों से पकड़ कर खोल दिया….और घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठा दिया… और नीलू की फुद्दि के सूराख के ठीक ऊपर पैंटी के ऊपर से चाटने लगा….

नीलू की जांघो को ऊपर करने के बाद, मैने अपने हाथों को नीलू की टाँगों से हटा दिया…और नीलू की पैंटी के ऊपर लाकर, नीलू की पैंटी को चाटते हुए, उसकी फुद्दि के धीरे-2 दबाने लगा….नीलू के पैर फिर से धीरे-2 नीचे की ओर आने लगी…मैं समझ गया था, कि नीलू से बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा है…मैने जल्दी से अपना निक्कर उतरा और सीधा होकर उसके जांघ के दरमियाँ घुटनो के बल बैठ गया….और उसकी पैंटी को दोनो हाथों से पकड़ कर नीचे करने लगा….

इस बार नीलू ने बिना कोई देर किए….अपने गांड को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया…मेरे होंठो पर मुस्कान फैल गयी…मैने पैंटी को धीरे-2 नीचे सरकाना चालू कर दिया…जैसे-2 नीलू की फुद्दि मेरी आँखों के सामने आ रही थे…वैसे-2 मेरा लंड हवा में झटके खा रहा था…मैने पैंटी को नीलू की टाँगों से निकाल कर बिस्तर के एक साइड में रख दिया…और नीलू की जांघ को पूरी तरह खोल कर ऊपर कर दिया…जैसे ही नीलू के घुटनो से मूडी हुई टाँगें ऊपर हुई…नीलू के फूली हुई फुद्दि, जो नीलू की फुद्दि से निकले गाढ़े पानी से लबालब थे… मेरी आँखों के सामने थे…

नीलू की फुद्दि के लिप्स आपस में जुड़े हुए थे…और वासना के कारण थोड़े खुल और बंद हो रहे थे…मैने नीलू को घुटनो से पकड़ कर नीलू की टाँगों को और ऊपर करके फैला दिया…जिससे नीलू की फुद्दि के लिप्स थोड़ा सा फैल गये…और उसकी फुद्दि का गुलाबी सूराख जो उसके काम रस से भीगा हुआ था, मुझे थोड़ा-2 दिखाई देने लगा….

मैं नीचे झुक गया…और उसकी फुद्दि के लिप्स को दोनो हाथों की उंगलियों से फैला दिया…नीलू की फुद्दि का गुलाबी सूराख उसके काम रस से भीगा हुआ था…मैने बिना टाइम वेस्ट किए, नीलू की फुद्दि के पानी से लबलबा रहे सूराख पर, अपने मूह को रख दिया…और अपनी जीभ निकाल कर नीलू की फुद्दि के सूराख को चाटने लगा… नीलू बुरी तरह छटपटाने लगी…नीलू की कमर नीचे से झटके खाने लगी…और उसने तकिये को कस कर दोनो हाथों से पकड़ लिया….

मैं अपनी आँखों को ऊपर करके नीलू को देखने लगा…नीलू अपने होंठो को दाँतों में दबाए हुए…अपने सर को इधर से उधर पटक रही थी…और नीलू के मूह से सीईइ अहह सीयी अहह की धीमी-2 आवाज़ आ रही थे…

मैं नीलू की फुद्दि के लिप्स को फैला कर उसकी फुद्दि के गुलाबी सूराख को जीभ से अंदर तक चाट रहा था….बीच-2 में में नीलू की फुद्दि के लिप्स को अपने होंठो में दबा कर खींच देता…नीलू और तड़पने लग जाती….करीब 5 मिनट फुद्दि को चाटने के बाद…मैने नीलू की क्लिट जो उतेजना के मारें काफ़ी फूल चुका था…उसे मूह में ले लिया…

जैसे ही मैने नीलू के क्लिट को मूह में लिया…नीलू की कमर झटके खाने लगी… और वो और ज़ोर से अपने सर को इधर से उधर पटाकने लगी…पर अभी तक उसके मूह से सिसकारियों के अलावा एक अलफाज़ नही निकला था….

में नीलू की फुद्दि के क्लिट को पागलों की तरह चूस रहा था…मैं नीलू के क्लिट को मूह में भर कर अपनी जीभ से रगड़ने लग जाता…नीलू पूरी तरह गरम हो कर सीयी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह करते हुए, अपनी गांड को हिला रही थे…

मैने नीलू की फुद्दि पर से अपना मूह हटा लिया… और अपने लंड के सुपाडे को नीलू की फुद्दि पर लगा दिया…जैसे ही मेरे लंड का सुपाडा उसकी दहकती फुद्दि के सूराख पर लगा…नीलू के बदन ने एक झटका खाया…और उसके होंठो पर एक हल्की सी मुस्कान फैल गयी…जिससे साफ पता चल रहा था, कि वो चुदवाने के इस खेल का पूरा मज़ा ले रही हैं….

इसीलिए जैसे ही मैने हल्का सा झटका दिया…मेरे लंड का सुपाडा उसकी फुद्दि के सूराख के अंदर घुसने की कोशिश करने लगा.. मुझे उसकी फुद्दि की दीवारें मुझे अपने लंड पर कसी हुई महसूस हो रही थे….और उसकी फुद्दि की दीवारें मेरे लंड की सुपाडा को कभी कस्ति और कभी ढीला छोड़ रही थी….

नीलू की फुद्दि एक दम गरम और गीली हो चुकी थी…मैंने बिना कोई देर किए, एक और झटका मारा…मेरा आधा लंड नीलू की फुद्दि में समा गया…और नीलू के मूह से एक और दबी हुई आहह निकल गयी…और मुझे अपने लंड पर कुछ गिला गिला पानी जैसा महसूस हुआ....

जैसे ही मेरा आधा लंड नीलू की फुद्दि में घुसा…मैं नीलू के ऊपर झुक गया…नीलू के तने हुए एक निप्पल को मूह में लेकर चूसने लगा…और दूसरा हाथ नीचे लेजा कर नीलू के क्लिट को अपने हाथ के अंगूठे से मसलने लगा. जैसे-2 मैं नीलू की फुद्दि के क्लिट को अपने अंगूठे से रगड़ रहा था…वैसे-2 नीलू अपनी कमर को नीचे से हिला रही थी…

नीलू के मम्मो को मैं पागलों की तरह चूस रहा था…फिर थोड़ी देर बाद मैने नीचे से हाथ हटा लिया…और अपने दोनो हाथों से नीलू के मम्मो को चूस्ते हुए दबाने लगा…

अब नीलू बहुत गरम हो चुकी थी…उसकी साँसे बहुत तेज़ी से चल रही थे…नीलू ने नीचे अपनी फुद्दि को धीरे-2 ऊपर मेरे लंड पर दाबना चालू कर दिया…नीलू की गीली फुद्दि में मेरा लंड फुद्दि की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा… अब मैंने बिना देर किये एक और जोरदार शॉट मारा और कुछ ही पलों में मेरा पूरा का पूरा लंड नीलू की फुद्दि में समा गया…

मैने नीलू के चेहरा की तरफ देखा…नीलू की आँखे अभी भी बंद थी…साँसें तेज़ी से चल रही थी…और वो अपने होंठो को दाँतों में दबाए हुए थी…शायद उसके मुंह से चीख भी निकल जाती पर उसने अपने आपको पूरी तरह कण्ट्रोल किया हुआ था....

मैं - नीलू तुम्हारी फुद्दि बहुत गरम और टाइट है…देखो ना मेरा लंड कैसे तुम्हारी फुद्दि के पानी से भीगा हुआ है…

पर ये बात सुनते ही, नीलू ने अपने होंठो को दाँतों से निकाल लिया….और मेरी बात को सुनते ही उसके होंठो पर हंसी आ गयी…पर ना तो उसने अपनी आँखों को खोला और ना ही वो कुछ बोली….शायद वो बोलना ही नही चाहती थी….मैं अपने लंड को धीरे-2 अंदर बाहर करने लगा…लंड नीलू की फुद्दि से बह रहे काम रस से चिकना हो कर धीरे-2 अंदर बाहर हो रहा था…नीलू ने एक बार फिर से अपने होंठो को दाँतों से काटना शुरू कर दिया था….

थोड़ी देर बाद ही मैं नीलू के मम्मो को चूस्ते हुए अपने लंड को पूरा बाहर निकाल-2 कर शॉट मार रहा था… लंड फच-2 की आवाज़ से अंदर बाहर हो रहा था…नीलू ने अपनी टाँगों को घुटनो से मोड़ कर मेरी कमर के ऊपर रख लिया था… ताकि वो मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों में महसूस कर सकें….

मैं - अहह नीलू तुम्हारी फुद्दि सच में बहुत कसी हुई है रे ….मेरे इतने बड़े लंड को अपने अंदर लेकर दबा रही हैं….

मैं नीलू के चेहरा की तरफ देखते हुए…अपने लंड को उसकी फुद्दि के अंदर बाहर कर रहा था…पर नीलू बिना कुछ बोले अपनी आँखों को बंद किए लेटी रही… मैं सीधा हो कर घुटनो के बल बैठ गया….और नीलू की टाँगों को घुटनो से पकड़ कर धीरे-2 अपने लंड को उसकी फुद्दि से बाहर निकालने लगा…मेरे लंड का सुपाडा नीलू की गीली और गरम फुद्दि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ बाहर आने लगा….

जैसे ही मेरा लंड सुपाडा तक नीलू की फुददी से बाहर निकला…मैने एक गहरी साँस ली... और अपनी पूरी ताक़त लगाकर एक जोरदार धक्का मारा…लंड का सुपाडा पूरी तेज़ी से नीलू की फुद्दि की दीवारों को फैलाता हुआ. अंदर घुस गया…धक्का इतना ज़बरदस्त था, कि नीलू के मूह से अहह की हल्की सी चीख निकल गयी…

मैं वापिस नीलू के ऊपर झुक गया, और नीलू के मम्मो को चूस्ते हुए अपने लंड को तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा…लंड फ़च-2 की आवाज़ से अंदर बाहर होने लगा…मेरे हर धक्के के साथ नीलू के मूह से हल्की से उन्घ की आवाज़ निकल जाती…और कभी आह सीईइ की आवाज़ सुन जाती…. लंड अब आसानी से नीलू की फुद्दि के अंदर बाहर हो रहा था…

मैने नीलू के मम्मो को छोड़ कर अपने होंठो को नीलू के रसीले होंठो की तरफ बढ़ा दिया…और नीलू ने जैसे ही मेरे होंठो को अपने होंठो पर महसूस किया…नीलू ने अपने होंठो को खोल लिया…मैं नीलू के गुलाबी रस से भरे होंठो को चूसने लगा… नीलू भी मेरा पूरा साथ दे रही थी….मैने धीरे-2 अपने धक्को की रफ़्तार को और बढ़ा दिया…नीलू का बदन अकड़ने लगा…और वो तेज़ी से अह्ह्ह्ह अहह सीईईईईई उंह करने लगी… नीलू फारिघ् होने के करीब थी…मैं और जोश में आकर अपने लंड को और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा…आख़िर कार नीलू का बदन अकड़ गया…और उसने अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग करके तेज़ी से साँस लेना शुरू कर दिया….

और फिर नीलू एक दम से तड़पते हुए अकड़ने सी लगी ..मैने भी फुल स्पीड से घस्से मारने शुरू कर दिए…..और ऐसे 2- शॉट मारे कि, पूरा कमरा पक -पक फच-फच की आवाज़ो से गूँज उठा….”ओह्ह्ह दीदी मैं फारिघ् होने वाला हूँ….जल्दी बताओ कहाँ पानी निकालु….जल्दी…” जैसे ही मैने कहा तो, नीलू ने अपने दोनो हाथो को तकिये से हटा मेरी पीठ को अपनी बाज़ुओं में ज़ोर से कस लिया….उसके मम्मे मेरी छाती पर दब गये…और अगले ही पल नीलू ने अपनी टाँगो को उठा कर मेरी कमर पर रखते हुए सरगोशी से भरी आवाज़ में कहा…”अंदर फारिघ् मत होना समीर…सीईइ….” नीलू की बात सुनते ही मैंने झट से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे लंड से लंबी-2 पिचकारियाँ निकालने लगी… और मैने नीलू के पेट को अपने गरम लावे से भरना शुरू कर दिया…

मैं भी पूरी तरह थक चुका था…मेरा लंड रह-2 नीलू की फुद्दि के उपर झटके खा रहा था….जिसे महसूस करके बीच-2 में नीलू का जिस्म भी काँप जाता….वो मेरी पीठ पर अपने हाथ फेर रही थी…थोड़ी देर बाद में नीलू के ऊपर से हट कर उसकी बगल में लेट गया…और अपनी साँसों को दुरस्त करने लगा… और सो गया...

 
Is site pr sirf writers hi comments krte h ....or har writer sbhi khaniyo me cmnt kr deta h... Kind of joke.....so many views but very few comments... I think mod should do smthing .. may be only members can read or something like that... It will increase ur site repo
 
Jaise ki writer update hi na de, jab tak ki naye members comments na kre,

Isliye m bhi ye decide kr rha hu...ki m is site pr ab tab tak update nhi dunga jab tak 10 naye members comments na kre
 
Isliye jo ye khani read kr rhe h wo plz sign up krke cmmnts kre.... Kyunki writers ke lie ye jruri h....

M baki writers se bhi yhi apil krunga...
 
Agr koi or writer is khani ko pura krna chahta h to i have no problem.......

But i wont be able to give any update from now on....

Its a bye from me.. .
 
Sorry, i wont be able to complete this one...

Time nhi h itna....

Or kuch mhino ke lie bda busy schedule rhega....soory again

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