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रंगीला लाला और ठरकी सेवक

लाजो मात्र एक छोटी सी कच्छि में बिछबन पर लेट गयी, और भोला से कहा, लो भोला राजा शुरू करो, पहले डिब्बे से थोड़ी सी रबड़ी मेरी चुचियों पर लगाकर उन्हें चाटो…!

लाजो की गोल-गोल भरी हुई गोरी-गोरी मांसल चुचियों को देख कर भोला अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए उनके उपर रबड़ी टपकाने लगा..,

खूब सारी रबड़ी दोनो चुचियों पर लेपने के बाद वो उनपर टूट पड़ा.., कुछ ही देर में वो उनपर से सारी रबड़ी चाट गया,

लेकिन मिठास अभी तक वाकी थी सो वो बुरी तरह से उसके कंचे जैसे कड़क हो चुके निप्प्लो को चूसने लगा…,

चूस-चुस्कर उसने उन्हें लाल सुर्ख कर दिया.., नीचे बिस्तर पर पड़ी लाजो किसी जल बिन मछलि की तरह लहराते हुए सिसक रही थी…

सस्सिईइ…आअहह….मेरे भोले..राजा…चूसो, और ज़ोर्से…हान्णन्न्…म्म्माआ…. मार्रीि…, अब बस करो, और रबड़ी नीचे की तरफ डालकर चाटो..राजा…!

लाजो की फरियाद सुनकर भोला रुक गया, चुचियों को चूसना बंद करके उसने डिब्बे से रबड़ी निकली, उसके पेट और नाभि में भर दी, जब वो उसे चाट रहा था तब…,

लाजो का पेट किसी भूकंप के आने पर जैसे इमारत हिलती है इस तरह हिल रहा था, फिर जैसे ही भोला ने उसकी गहरी नाभि में भरी रबड़ी को अपनी जीभ से चाटा,

वो मारे उत्तेजना और गुदगुदी के दोहरी हो गयी, उसने भोला के कंधों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसके रबड़ी से सने होंठों पर टूट पड़ी…!

लाजो उसके होंठों को बुरी तरह से कुचल रही थी, उसके होंठों की मिठास उसे रबड़ी से भी ज़्यादा स्वादिष्ट प्रतीत हो रही थी,

फिर जैसे ही भोला का मुँह थोड़ा सा खुला, लाजो ने फ़ौरन अपनी लिज-लीजी जीभ उसके मुँह में ठेल दी..,

ऐसा खेल भोला ने अपने जीवन में कभी नही खेला था, वासना की आँधी अपनी पूर्ण गति से दोनो को उड़ाए ले जा रही थी…,

दीन दुनिया से बेख़बर दोनो युवा दिल मानो एक दूसरे में समाहित हो चुके थे, काफ़ी देर तक जब लाजो अपनी जीभ का कमाल दिखा चुकी, तो भोला ने उसके कंधे थाम कर उसे अपने से अलग किया और उसकी चुचियों को मसल्ते हुए बोला…

लाजो रानी बहुत हुआ तेरा ये नाटक, अब मुझे अपनी रबड़ी खाने दे री…,

चूँकि उसे रबड़ी का स्वाद लाजो के बदन से चाटकर खाने में ज़्यादा मज़ा दे रहा था, सो उसने उसे वापिस लिटा दिया…

और फिर उसके शरीर पर वाकी बची हुई कच्छी को भी निकाल कर ढेर सारी रबड़ी उसकी गुदाज जांघों के बीच उडेल दी..,

अब भोला उसकी चूत प्रदेश को चाटने वाला है, ये ख्याल मन में आते ही लाजो की वासना अपने चरम पर पहुँच गयी, इसी एहसास ने उसकी मुनिया को रस छोड़ने पर मजबूर कर दिया…!

भोला किसी भूखे भेड़िए की तरह उसके यौनी प्रदेश पर पड़ी रबड़ी पर टूट पड़ा…,

एक तो मीठी रबड़ी, उपर से लाजो की सफाचट गोरी-गोरी जांघों के बीच उसकी चिकनी चूत, भोला को जन्नत का मज़ा दे रही थी..,

जैसे ही राबड़ी की उपरी सतह उसने चाट ली, तब उसे लाजो की चूतरस का मिश्रित स्वाद मिला, खट्टे-मीठे स्वाद को वो पूरी तन्मयता से चटकारे ले-लेकर चाटने लगा…

जब उसकी जीभ नीचे से लेकर उपर को उसकी चूत के होंठों को रगड़ते हुए जाती, लाजो बुरी तरह से सिसक पड़ती… सस्स्सिईईई….

आअहह….उउउंम्म…मेरे राजा…

खा जाओ मेरी चूत को…उउउफ़फ्फ़…म्म्माआ….कितना मज़ा है इसमें…चाटो, और ज़ोर्से…हहुउऊंम्म…

अच्छी तरह से चूत चाटने के बाद भोला ने लाजो को पलटा दिया, उसके मुलायम उभरे हुए चुतड़ों की मनमोहिनी सुंदरता देख कर भोला ने उनमें अपने दाँत गढ़ा दिए…,

आआयईी…म्म्माआ… काटो मत भोला.., दर्द होता है.., सिसक कर लाजो बोल पड़ी..

भोला उसकी चिकनी गान्ड, कमर और फिर चौड़ी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोला – आअहह… तू बहुत सुंदर है लाजो.., मेने आज तक तेरी जैसी औरत नही चोदि…!

लाजो उन्माद में डूबे स्वर में बोली – तो अब चोदो मेरे राजा.., इंतजार किस बात का कर रहे हो.., मेरी चूत में आग जल रही है, उसे अपने मीठे जल से बुझा दो भोला…!

भोला – अब इतनी देर इंतजार किया है तो थोड़ा और सही, इस बची-खुचि रबड़ी को तेरे पूरे बदन का स्वाद लेकर ही ख़तम करूँगा…, उसके बाद चोदने का मज़ा ही अलग होगा…!

लाजो अपनी गर्दन घूमाकर बोली – बड़े स्वार्थी हो, मेरे लिए थोड़ा सा भी नही बचाओगे…?

भोला – क्या तू भी खाएगी ? चल कोई ना छोड़ दूँगा तेरे लिए भी, इतना कहकर उसने रबड़ी की धार उसकी पीठ से लेकर उसकी गान्ड तक फैला दी, और उसे उपर से लेकर नीचे तक चाट’ता चला गया…!

लाजो किसी मछली की तरह उसके नीचे तड़पति रही, सिसकती रही, फिर जैसे ही वो उसकी गान्ड तक आया, लाजो के कूल्हे स्वतः ही उपर को उठ गये…!

रबड़ी के साथ-साथ भोला उसके दोनो पर्वत शिखारों को भी दाँत गढ़ा देता, जिस’से लाजो सिसक पड़ती…!

'उसे आज से पहले इतना मज़ा कभी नही आया था…, इसी मज़े के चलते उसने अपनी जांघें खोल दी, नतीजा गान्ड की दरार में काफ़ी जगह बन गयी, जिसमें ढेर सारी रबड़ी समा गयी…!

लेकिन चटोरा भोला भला कहाँ छोड़ने वाला था, उसकी चटोरी जीभ ढूंड-ढूंड कर रबड़ी चाटने लगी…!

भोला की जीभ लाजो की गान्ड की दरार से रबड़ी निकाल निकाल कर चाट रही थी, वहीं लाजो का उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो रहा था..,

उसने अपने होंठों को कस कर दाँतों के बीच दबा रखा था वरना वो बुरी तरह से चीखने चिल्लाने पर मजबूर हो जाती..,

फिर भी जब जब भोला की जीभ उसके गान्ड के छेद के उपर से गुजरती, उसकी सिसकी निकल ही जाती.., जब उसकी सहन शक्ति जबाब दे गयी तो उसकी मुनिया बहने लगी,

लाजो सिसक कर बोली – आहह…सस्सिईइ…उउउफ़फ्फ़..भोला अब चोदो मुझे प्लीज़, अब सबर नही हो रहा मुझसे !

 
इधर भोला का कड़ियल नाग भी बुरी तरह बिफर्ने लगा था, सो उसने उसे फिर से चित्त कर दिया और उसकी जाँघो के नीचे हाथ डालकर उसकी चूत को उपर उठा लिया…

चूत के मोटे-मोटे होंठ स्वतः ही खुल गये, भोला ने अपने नाग के फन को पकड़ कर लाजो की सुरंग के मुंहाने पर रखा और एक करारा सा झटका अपनी कमर में दे मारा……..!

सर्र्र्र्र्र्र्र्ररर…से उसका कोबरा आधे से ज़्यादा उसके बिल में सरक गया..,

लाख गीली होने के बबजूद उसकी छूट चिर्ति चली गयी, लाजो के मुँह से एक लंबी.. सी मादक कराह निकल पड़ी…,

वो बुरी तरह से हाँफ रही थी.., आअहह… भोला.. बड़े निर्दयी हो.., थोड़ा आराम से डाला करो ना.., मेरी चूत फाड़ दी तुमने,

ये कहकर वो अपना सिर उपर उठा कर अपनी चूत के दर्शन करने की कोशिश करने लगी,

लेकिन उसे सिवाय उसके काले कड़ियल के अलावा और कुछ नही दिखा, जो अभी भी लगभग 1/3 बाहर था, किसी मोटे डंडे जैसा

सख़्त…!

थोड़ी देर रुक कर भोला ने अपने डंडे को थोड़ा बाहर खींचा, और फिर से एक तगड़ा सा धक्का दे मारा..,

इस बार पूरा का पूरा लंड लाजो की चूत में समा गया, लाजो बुरी तरह कराह उठी, लेकिन इस बार उसे उसके लंड का अगला सिरा अपने पेट में जाता महसूस हुआ…!

उसने अपने पेडू पर हाथ रख कर उसे महसूस किया और सिसकते हुए बोली – हआयईए..रामम, कितना लंबा है ये, देखो तो मेरे पेट तक पहुँच गया…!

भोला ने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – तभी तो पूरा मज़ा देता है मेरी रानी, अब ले मज़े इसके…, ये कह कर उसने धीरे-धीरे अपने धक्के लगाने शुरू कर दिया…!

लाजो को मज़ा आने लगा, और वो भी अपनी कमर को नीचे से उचकाने लगी, ये देख कर भोला के धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी..

लाजो की चूत किसी बहती नदी में परिवर्तित हो गयी, वो लगातार रस छोड़ने लगी..,

 
भोला ने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – तभी तो पूरा मज़ा देता है मेरी रानी, अब ले मज़े इसके…, ये कह कर उसने धीरे-धीरे अपने धक्के लगाने शुरू कर दिया…!

लाजो को मज़ा आने लगा, और वो भी अपनी कमर को नीचे से उचकाने लगी, ये देख कर भोला के धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी..

लाजो की चूत किसी बहती नदी में परिवर्तित हो गयी, वो लगातार रस छोड़ने लगी..,

फुच्च..फुच्च..धाप..धाप्प की आवाज़ के साथ दोनो चुदाई का मज़ा लूटने लगे, लगभग 20 मिनिट के बाद दोनो के बदन अकड़ने लगे और फिर झड कर एक दूसरे से चिपक गये…!

बड़ी देर तक वो दोनो एक दूसरे से चिपके पड़े रहे, कुछ थकान कम होने के बाद भोला उसके उपर से बगल में लुढ़क गया और उसके बदन पर हाथ फेरते हुए बोला –

बड़ी मस्त औरत है तू लाजो, तेरे साथ चुदाई करने में मज़ा आ गया.., लाजो भी उसके मुरझाए हुए लौडे को अपने हाथ में लेकर बोली – तुम भी कुछ कम नही हो…

तुम्हारा ये पप्पू तो मेरे मन को भा गया है, ये कहकर वो उठ बैठी और उसे चूम लिया…!

भोला ने बगल में रखे राबड़ी के डिब्बे को उसे थमाते हुए कहा – ले अब अपने हिस्से की राबड़ी खा ले..!

लाजो ने उसे पकड़ते हुए कहा – अभी थोड़ा रूको, मे भी इसे स्पेशल तरीक़े से ही खाउन्गी..

भोला उसके मुँह को ताकते हुए बोला – मतलब तू मेरे बदन को चाटेगी..?

लाजो मुस्करा कर बोली – पूरे बदन को नही, बस इसके उपर रख कर, ये कहकर उसने उसके आधे खड़े हो चुके लंड को अपनी मुट्ठी में कस लिया..!

लाजो की बात समझते ही भोला रोमांच से भर उठा, उसका ढीला पड़ा हुआ नाग फिर से फन फैलाने लगा…!

उसके बाद लाजो ने उसके लंड को डिब्बे में ही डुबो दिया और बाहर निकाल कर उसके उपर से राबड़ी खाने लगी, चूस-चूस कर उसने लंड को चमका दिया, इतने से वो फिर से डंडे जैसा कड़क हो गया,

इस बार वो घोड़ी की तरह औंधी हो गयी, भोला ने पीछे से उसकी मखमली गान्ड सहलाते हुए अपना मूसल पीछे से उसकी सुरंग में पेल दिया…!

पूरा लंड जाते ही लाजो का मुँह उपर को उठ गया, वो गे की तरह रंभाते हुए चुदाई का आनंद लूटने लगी…!

सुबह के चार बजे तक उनका ये खेल जमकर चलता रहा, जब दोनो थक कर चूर हो गये,

दोनो की आँखों में नींद और थकान की खुमारी ज़ोर मारने लगी , तब जाकर लाजो ने उससे विदा ली और अपनी हवेली लौट आई…!

इधर सुषमा ने लाला जी से पर्मिशन लेकर एक लेटर कॉलेज प्रिन्सिपल के नाम लिख कर शंकर को थमा दिया…

वो खुशी-खुशी कॉलेज गया, और लेटर देखते ही उसे ब्कॉम में तुरंत अड्मिशन मिल गया…

वजह थी लाला जी कॉलेज के दानियों की लिस्ट में बहुत उपर का स्थान रखते थे…

इस बात से सबसे ज़्यादा खुशी सलौनी को हुई, क्योंकि अब उसे अकेले स्कूल नही जाना पड़ेगा, उसका भाई उसे लेकर जानेवाला था, अब वो ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त अपने भाई के नज़दीक रह सकती थी…!

शंकर यहीं रहकर अपनी आगे की पढ़ाई करने वाला है, इससे लाला जी को भी कोई आपत्ति नही थी, वक़्त-बे-वक़्त वो उनके काम तो करता ही रहेगा, और पढ़-लिखकर वो उनके कारोबार को संभालने लायक भी हो जाएगा…!

कहीं ना कहीं उनके दिल में अपने खून वाली भावना तो थी ही, उपर से वो अभी से इतना समझदार और साहसी था, जिस कारण से लाला जी दिल से चाहते थे कि वो उनके कारोबार में सहभागी रहे…

बस दिक्कत थी तो उसे वो खुलेआम अपना नाम नही दे सकते थे…, जिसकी फिलहाल उन्हें कोई ज़रूरत भी महसूस नही हो रही थी…!

यौं तो शंकर इतना संस्कारी था, तो वैसे ही उसके कुछ खर्चे नही थे, फिर भी सुषमा उसकी जेब हमेशा भरे रखती थी, ये बात रंगीली भी अच्छे से जानती थी..!

कुछ दिनो बाद ही सुप्रिया के यहाँ से भी सुखद समाचार मिल ही गया, कि वो माँ बनाने वाली है, और गोद भराई में सबको बुलाया है…!

बस फिर क्या था.., माँ-बाप तो जा नही सकते थे, बेटी के यहाँ का पानी तक पीना हराम है, कल्लू भैया वैसे ही नकारा थे, तो सभी औरतों को लेजाने की ज़िम्मेदारी शंकर को ही उठानी पड़ी,

 
लाजो ने बहाना बनाकर साथ जाने से मना कर दिया, उसे तो अब दिन-रात भोला का लंड ही दिखाई देने लगा था…!

बची अकेली सुषमा जाने को सो उसने अपने साथ के लिए सलौनी को ले लिया, जिससे वो उसकी बेटी को संभालने में भी मददगार रहे..,

तीनों जने शंकर की जीप से चल पड़े सुप्रिया की गोद भराई में शामिल होने…!

सबसे ज़्यादा खुश सलौनी थी, उसे पहली बार अपने गाओं और स्कूल के अलावा बाहर घूमने का मौका मिला था, सोने पे सुहागा अपनी माँ की गैर मौजूदगी में वो पहली बार अपने सबसे प्यारे भाई के साथ जो जा रही थी…!

गाड़ी में फिलहाल वो गौरी को लेकर पीछे की सीट पर उसके साथ खेल रही थी…

आगे शंकर के बाजू में सुषमा एक डार्क क्रीम कलर के साड़ी और बहुत ही डीप गले का ब्लाउस जो पीठ पर सिर्फ़ दो डोरियों से बँधा था…,

गाओं से बाहर निकलते ही सुषमा ने अपना आँचल ढालका लिया जिससे उसके ब्लाउस में कसे हुए दूधिया उभारों के बीच की गहरी खाई पूरी तरह से नुमाया हो रही थी…!

प्रेग्नेन्सी की बजह से उसकी उसकी चुचियाँ और ज़्यादा ही सुडौल और आकर्षक हो गयी थी, जिनपर बीच बीच में शंकर की नज़र पड़ ही जाती जिससे उसके पॅंट में उभार बन’ने लगा…!

हालाँकि 5 महीनों के बाद सुषमा का पेट थोड़ा सा बाहर निकल आया था, फिर भी वो इस समय निहायत ही कामुक लग रही थी,

दोनो बस आँखों आँखों में ही अपने अपने भाव प्रदर्शित कर रहे थे क्योंकि पीछे सलौनी बैठी उनकी सारी गति विधियों पर नज़र रखे हुए थी…

वो अब कोई बच्ची नही रही थी, कुछ दिनो में ही 10थ पास करने वाली थी, स्त्री पुरुष के संबंधों से अच्छी तरह वाकिफ़ थी..,

सुषमा शंकर को तिर्छि नज़रों से देख लेती, फिर जैसे ही दोनो की नज़रें चार होती, वो होंठों ही होंठों में मुस्करा जाते..,

कुछ देर बाद सुषमा ने बात शुरू करने की गर्ज से पुछा – और शंकर भैया तुम्हारा कॉलेज कैसा चल रहा है, कोई लड़की वॉड्की पटाई या नही…!

इससे पहले की मे कोई जबाब देता, पीछे से सलौनी बोल पड़ी – आपको लगता है भाभी, भैया किसी लड़की को घास डालता होगा..?

लड़कियाँ खुद इसके पीछे मक्खियों की तरह भिन-भिनाति रहती हैं, पर ये जनाब किसी को लिफ्ट तो क्या किसी की तरफ देखते तक नही हैं.., पता नही अपने आपको क्या समझता है..!

ये सुनकर सुषमा मन ही मन खुश होते हुए बोली – क्या शंकर भैया, ये सलौनी क्या कह रही है, ऐसा मत किया करो वरना बेचारी लड़कियाँ तुम्हारे बारे में क्या सोचेंगी…!

एक-दो तो ऐसी होंगी ही जिन्हें तुम्हारी घास मिल ही सकती हो.., ये कहकर उसने चुपके से शंकर की जाँघ पर चिकोटी काट ली..,

वो चिहुनक कर सुषमा की तरफ देख कर बोला – क्या भाभी आप भी मेरी खिंचाई करने लगी, ये सलौनी की बच्ची कुछ ज़्यादा ही सिर चढ़ गयी है..,

फालतू में कुछ भी बोलती रहती है, ऐसा कुछ नही है, और फिर मेरे पास समय ही कहाँ है जो किसी की तरफ ध्यान दूँ..!

शंकर ये शब्द सुनकर सुषमा उसे बलिहारी नज़रों से देखने लगी, वो मन ही मन सोचने लगी, देखो कितना संस्कारी और सिन्सियर लड़का है ये, भला हो रंगीली काकी का जिन्होने मेरे सम्बंध इसके साथ बनवा दिए…!

उसने मन ही मन शंकर को अपने कारोबार की कमान सौंपने का निर्णय ले लिया..,

फिर प्रत्यक्ष में बोली – धन्य है रंगीली काकी, जिन्हें तुम्हारे जैसा बेटा मिला है..!

अब तुम मन लगाकर जल्दी से अपना ग्रॅजुयेशन कंप्लीट करो जिस’से में तुम्हें कुछ ज़िम्मेदारियाँ सौंप सकूँ…!

बातें करते करते वो लगभग आधे रास्ते तक आ चुके थे, तभी गौरी का प्रेशर बन गया, और उसने गाड़ी रुकवा दी..!

 
शंकर ने अपनी जीप रोड से नीचे उतारकर साइड में खड़ी करदी, सलौनी उसे थोड़ा रोड से हटके झुर्मुट के पीछे फारिग कराने ले गयी..,

मौका देख कर सुषमा ने शंकर के गले में अपनी बाहें डाल दी और वो उसके होंठ चूमकर बोली – तुम सच में बहुत अच्छे हो शंकर, मुझे ऐसे ही सहारे की ज़रूरत थी..,

शंकर ने उसके हाथ अपने गले से हटाने चाहे, लेकिन सुषमा ने उसे और ज़ोर्से उसे कस लिया, शंकर उसकी अधनंगी चुचियों को अपने हाथों से दबाते हुए बोला-

हम रोड पर हैं भाभी, कोई आ गया तो क्या सोचेगा.., सुषमा उस’से अलग होकर उसकी गोद में ही जा बैठी और उसके होंठों पर हमला बोलते हुए बोली-

मुझे किसी की परवाह नही है शंकर मेरे राजा, तुम मुझे प्यार करो.., ये सुनकर शंकर ने भी अपनी बाहें उसकी कमर के इर्द-गिर्द कस दी..,

सुषमा की मांसल गान्ड की गर्मी पाकर उसका कोब्रा पॅंट के अंदर फुफ्कारने लगा.., दोनो के शरीर किस करते हुए गरम होने लगे..,

तभी आगे से उन्हें एक खुली जीप आती दिखाई दी, जिसमें 5-6 लोग बैठे हुए थे, उसे देखते ही शंकर ने सुषमा को अपनी गोद से उठने के लिए कहा…!

इससे पहले की वो उसकी गोद से उठकर अपनी सीट पर बैठ पाती, तब तक सामने वाली जीप उनके पास तक आ गई, और शंकर की जीप के बराबर में आकर एक झटके के साथ रुक गयी…!

जीप के रुकते ही उसमें से दो आदमी जो तकरीबन 25-28 साल के रहे होंगे, शक्लो-सूरत से ही मक्कार किस्म के नज़र आरहे थे…!

जीप से कूदते ही वो दोनो तालियाँ बजाते हुए उनकी तरह आने लगे, उनमें से एक आदमी बोला – क्या रे लैला-मजनू, खुली सड़क पे ही रोमॅन्स चल रहा है..,

थोड़ा हमें भी शामिल करले यार…, कसम उड़ान छल्ले की मज़ा दुगना ना हो जाए तो कहना…!

उनलोगों की बात सुनकर जहाँ सुषमा बुरी तरह सहम गयी वहीं शंकर फ़ौरन जीप से नीचे कूदने के बाद बोला – अरे नही भाई ऐसा कुछ नही है, हम तो बस ऐसे ही बैठे थे…!

तब तक वो दोनो उनके बहुत करीब पहुँच चुके थे, सुषमा अभी जीप में ही थी.., वो शंकर के पास जाकर बोला – ओये लौन्डे हमें चूतिया समझता है,

डूर से ही हमने ताड़ लिया था, ये छमिया तेरी गोद में बैठी थी.., वैसे ये तेरी कॉन लगती है…!

उसकी बात सुनकर शंकर को भी तैश आ गया और गुर्राते हुए बोला – तुमसे मतलब, हम कुछ भी करें तुम कों होते हो किसी के काम में दखल देने वाले..!

शंकर की बात सुनकर दूसरा आदमी तैश में आकर बोला – रोहन पकड़ साले को, भेन्चोद कल का लौंडा हमें आँख दिखता है…, इसकी तो माँ…कििई…..

इससे पहले कि वो अपनी गाली पूरी कर पाता, शंकर ने आगे बढ़कर उसका गला अपनी हथेली में दबा लिया.., और भभक्ते स्वर में बोला – माँ की गाली देता है हराम जादे…!

वो आदमी अपने को शंकर की पकड़ से छूटने के लिए फड़फड़ाने लगा, लेकिन ये शंकर के हाथ की पकड़ थी, वो अपनी जगह से हिल भी ना सका, गला दबने से उसकी साँसें अटकने लगी…!

अपने साथी को यौं असहाय देख कर दूसरा जिसका नाम रोहन था, वो शंकर की तरफ झपटा, इस’से पहले कि वो उस तक पहुँचता, शंकर की लंबी टाँग हवा में घूमी, और फड़डाक़्कक से उसके थोबदे पर पड़ी…!

वो वही पीछे ज़मीन पर उच्छल कर गान्ड के बल जा गिरा, उसके होंठों से और नाक से खून रिसने लगा…!

अपने दो साथियों का ये हश्र देख कर वाकी के 4 लोग जो अभी भी जीप में ही थे, एक साथ कूदकर उनकी तरफ दौड़ पड़े…!

उन लोगों को ये कतई उम्मीद नही थी कि एक छोटी सी उम्र का लौंडा जिसकी अभी ठीक से दादी मूँछे भी नही निकली हैं, उनके दो आदमियों को चुटकी बजाकर धूल चटा देगा…!

उन सभी लोगों को एक साथ अपनी तरफ आते हुए देख कर सुषमा जो अभी तक शांति से जीप में बैठी तमाशा देख रही थी, डर से थर-थर काँपते हुए बोली-

शंकर वो सब लोग इधर आ रहे हैं…, अब क्या होगा..?

शंकर – कुछ नही होगा भाभी, आप चुप-चाप बैठो, चाहे कुछ भी हो गाड़ी से बाहर मत आना, मे इनसे निपटता हूँ…!

इससे पहले की सुषमा आगे कुछ बोलती, वो लोग शंकर के बेहद नज़दीक तक आ पहुँचे थे, शंकर उस आदमी को जिसका गला उसने दबा रखा था, वो अब लगभग बेहोसी की हालत में पहुँच चुका था…!

उसने उसे अपने दोनो हाथों से अपने सिर के उपर उठाया और उन लोगों के उपर उछाल दिया..

नतीजा वो उन चारों के उपर किसी अनाज के बोर की तरह जा गिरा.., उन चारों को इतने बड़े दुस-साहस की उस कम उम्र लड़के से कतई उम्मीद नही थी,

लाख संभलने के बावजूद वो लड़खड़ा गये, उनमें से एक-दो तो ज़मीन पर भी गिर पड़ा..!

उन्हें बिना मौका दिए शंकर उन लोगों पर पिल पड़ा, अपने फौलादी घूँसों से उनकी धुनाई शुरू कर दी.., वो लोग भी उस’से टक्कर लेते रहे, लेकिन शंकर उनपर 21 पड़ता दिखाई दे रहा था..!

जो भी उसके हाथ पड़ जाता वो उसे किसी खिलौने की तरह उठाकर दूर उछाल देता..!

सुषमा किसी मूक दर्शक की तरह भय और आश्चर्य के भाव अपने चेहरे पर लिए शंकर की वीरता को अपनी आँखें फाड़ कर देख रही थी…!

अब तक उसे शंकर किसी भी सूरत में उन 6 लोगों के मुक़ाबले में कम पड़ता नज़र नही आया था..,

शंकर उसे एक साधारण मानव ना होकर किसी देवदूत जैसा लग रहा था…!

उधर अब तक गौरी पॉटी करके फारिग हो चुकी थी, उसको लेकर सलौनी जैसे ही झुर्मुट के पीछे से रोड की तरफ आई, सामने का घमासान देखकर वहीं ठिठक गयी…!

गौरी को उसने अपनी टाँगों से सटा लिया जिससे वो ये देख कर मुँह से कोई आवाज़ ना निकल सके..,

उसे अपने भाई पर पूरा भरोसा था, और उसे सामने दिख भी रहा था कि वो उन लोगों पर भारी पड़ रहा है, खम्खा वो उनके बीच जाकर उसके लिए कमज़ोरी का कारण नही बन’ना चाहती थी…!

सो ये सोचकर वो गौरी को लेकर एक मोटे से पेड़ की आड़ में जा खड़ी हुई.., और वहीं से दम साधे अपने भाई का कमाल देखने लगी.., जो अभी तक उन सभी गुण्डों पर भारी पड़ रहा था…!

उन सभी लोगों के कहीं ना कहीं से खून बह रहा था, और अब वो पस्त पड़ते नज़र आ रहे थे,

उन बेचारों को क्या पता था, कि उन्होने जिस लड़के को अल्हड़ समझ कर पंगा ले लिए था वो एक आल्मास्ट सांड को भी परास्त कर चुका है…!

अब वो अपनी जान बचाकर भागने की फिराक में थे, एक-दो ने भागने की कोशिश भी की, लेकिन शंकर अब उन्हें भागने भी नही दे रहा था, जो भी उठने की कोशिश करता वो उसे ही फ़ौरन दबोच लेता…!

फिर कुछ ऐसा हुआ जिसका शंकर को गुमान भी नही था, उनमें से एक गुंडा किसी तरह नज़र बचाकर उसकी जीप के दूसरी तरफ आ गया,

अपनी जेब से रामपुरी चाकू निकाल कर उसने जीप में बैठी सुषमा की गर्दन पर रख दिया.., वो डर के मारे एकदम से चीख पड़ी – शंकरर्र….. बचाऊओ…!

सुषमा की चीख सुनते ही शंकर के हाथ पैर वहीं रुक गये, जिसका फ़ायदा उठाकर उनमें से दो लोगों ने उसे आजू-बाजू से पकड़ लिया..,

अब पासा पलट चुका था, उस गुंडे ने सुषमा को जीप से बाहर खींच लिया और उसकी गर्दन पर चाकू रख कर गुर्राया…,

बहुत हाथ-पैर चला लिए लौन्डे, अब अगर तूने अपने हाथ पैर हिलाए भी तो इस छमिया की मंडी धड़ से अलग पड़ी मिलेगी.., फिर अपने साथियों से बोला –

मारो साले को, हाथ पैर तोड़ दो मदर्चोद के.., बहुत दम-खम दिखा रहा था भेन्चोद…!

शंकर उनकी क़ैद में जकड़ा, सुषमा की जान की खातिर अपने हाथ पैर भी नही हिला पा रहा था, लेकिन ज़मीन पर थूकते हुए भभके स्वर में बोला –

थू है साले नामर्दो, एक असहाय औरत की आड़ लेकर अपनी मर्दानगी दिखना चाहते हो..,

उसकी बात सुनकर उनमें से एक गुंडे ने अपने घुटने का वार उसके पेट पर करते हुए कहा.., भेन्चोद साले.. तू हमारी सोच से कुछ ज़्यादा ही दमदार निकला…,

 
शंकर बेबस हो चुका था, अब वो 5 लोग शंकर पर पिल पड़े, लात घूँसों से वो उसकी धुनाई करने लगे, कुछ देर तक वो उन लोगों की मार खड़े खड़े ही झेलता रहा..,

लेकिन घूँसों की मार उसके पेट पर पड़ने से उसके घुटने मुड़ने लगे, और वो अपने घुटनो पर बैठ गया.., तभी उनमें से एक बोला.., क्या हुआ भोसड़ी के.. निकल गयी सारी हेकड़ी..,

उसे यौं पिट’ता देख कर सुषमा रो पड़ी, और रोते हुए ही बोली – तुम मेरी चिंता मत करो शंकर, मारो इन्हें.., तुम्हें मेरी कसम..,

लेकिन शंकर ने फिर भी बचने की कोई कोशिश नही की और पिट’ता ही रहा…!

उधर सलौनी बदले हुए हालत देख कर सकते में आ गई, वो अपने भाई को यौं पिट’ता हुआ देख कर उसका कलेजा छल्नि हुआ जा रहा था,

सुषमा को कोई हानि ना पहुँचे इसके लिए उसका भाई पिट रहा था, वो बेबसी में अपने होंठों को कुचलने लगी, एक हाथ से उसने गौरी का मुँह ढक रखा था जिस’से उसके मुँह से कोई चीख ना निकले…!

बेबसी में ही उसने अपनी नज़रें इधर-उधर दौड़ाई.., पास ही उसे लकड़ी का एक मोटा सा डंडा पड़ा दिखाई दिया..!

सलौनी ने मन ही मन कुछ फ़ैसला लिया, फिर उसने गौरी के कान में फूस-फुसाकर उसे समझाया, कि वो वहीं छुपी रहे…!

उसे समझाकर उसने वो डंडा अपने हाथ में लिया, दबे पाँव वो उस गुंडे के पीछे जा पहुँची जो सुषमा को चाकू से कवर किए हुए था..!

उस गुंडे को भनक भी नही लगी और सलौनी उसके सिर पर जा पहुँची, फिर उसने पूरी शक्ति से डंडा घुमाया और उस गुंडे के सिर पर दे मारा…!

एक भयानक चीख मारते हुए वो त्यौरकर धडाम से ज़मीन पर जा गिरा..,

गुंडे की चीख सुनकर शंकर की नज़र उस पर पड़ी, सुषमा को आज़ाद देख कर उसके शरीर में फिर से बिजली भर गयी..,

इधर सलौनी उन तक जा पहुँची और जो उसके सामने पड़ा डंडे की मार से धो डाला साले को,

उधर गौरी ने जैसे ही अपनी माँ को गुंडे के चंगुल से आज़ाद होते देखा, वो पेड़ के पीछे से निकल कर मम्मी मम्मी चीखते हुए उस’से आकर लिपट गयी..

दोनो भाई-बेहन ने मिलकर 5 मिनिट में ही उनकी वो दशा कर दी अब वो 6 के 6 लोग बस ज़मीन पर पड़े बुरी तरह कराह रहे थे..,

फिर वो दोनो जैसे ही उन्हें ठोक-पीटकर सुषमा के पास पहुँचे शंकर ने अधीर होकर पुछा – आप ठीक तो हैं ना भाभी..?

सुषमा गौरी को छोड़कर सलौनी के गले से जा लगी, बहुत देर तक वो उससे लिपटी रही, फिर अलग होते हुए उसके बाजू पकड़ कर एक तक उसे निहारने लगी..!

सलौनी ने मुस्कुरा कर कहा – ऐसे क्या देख रही हो भाभी..?

सुषमा – भाई तो भाई, बेहन भी झाँसी की रानी से कम नही है, क्या हिम्मत दिखाई तुमने.., थॅंक यू बेहन.., ये कहकर उसने उसे फिर से अपने सीने से लगा लिया…!

आज तुम इतनी हिम्मत नही करती तो ना जाने क्या हो जाता..? फिर शंकर को डपट’ते हुए बोली – तुमने उन्हें मारा क्यों नही.., रुक क्यों गये थे..?

शंकर – उसने आपके गले पर चाकू रखा हुआ था, आपको कुछ कर देता तो..?

सुषमा ने पास खड़ी सलौनी की भी परवाह नही की, और शंकर के गले से लगकर फफक पड़ी – मेरे लिए तुमने इतनी मार खाई.., तुम बहुत अच्छे हो शंकर…!

ये देखकर सलौनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी, वहीं शंकर सुषमा के कुल्हों पर हाथ फेर्कर उसे शांत करा रहा था..,

कुछ देर बाद वो साडे तीन लोग उन गुण्डों को उसी हालत में छोड़ फिर से अपनी आगे की यात्रा पर निकल पड़े…!

उधर सुप्रिया के यहाँ गोद भराई की तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही थी, और हो भी क्यों ना, शादी के इतने सालों के बाद उनके घर वारिस जो आने वाला था…

उसके सास ससुर की खुशी तो देखते ही बनती थी.., पूरे घर को किसी दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था, मेहमानों के लिए 5 स्टार होटेल बुक कर दिया गया..!

लेकिन सुषमा, शंकर और सलौनी को उन्होने अपने घर में ही रखा, अगले दिन बड़ी धूम धाम से गोद भराई के रसम संपन्न हुई…

सेलेब्रेशन के बाद प्रिया उन सबको अपने घर ले गयी जहाँ उन सभी का जोरदार स्वागत किया गया.., सलौनी तो शहर आकर मानो अपने आप को भूल ही गयी,

गाओं की जिंदगी शहर की जिंदगी से कितनी अलग तरह की होती है ये उसे पहली बार पता चला, उसे तो जैसे स्वर्ग में ले आए हों ये लोग..,

पहले सुप्रिया का घर और अब प्रिया के यहाँ आते ही वो मानो किसी दूसरे लोक में ही पहुँच गयी थी हो, वो गौरी को लेकर पूरे घर में इधर से उधर दौड़ती भागती फिर रही थी..,

शाम को प्रिया उन सभी को सुप्रिया के यहाँ छोड़ने ले गयी, लेकिन काम के बहाने वो शंकर को अपने साथ लेकर अपने होटेल जा पहुँची…!

होटेल के उसी शानदार सूट में पहुँचते ही वो शंकर के साथ लिपट गयी, उसके चेहरे, बालों, कान, नाक सभी जगह चुंबनो से उसे गीला कर दिया…!

उसका उतावलापन देख कर शंकर ने मुस्कराते हुए पुछा – ये क्या है प्रिया दीदी, आप तो मानो मुझे देख कर अपना आपा ही खो बैठी, थोड़ा साँस तो लो…

वो उसे लेकर सोफे पर आ गयी, और खुद उसकी गोद में बैठकर बोली – तुम नही समझोगे शंकर तुम्हें अकेला पाकर मे कितनी खुश हूँ…!

तुम्हारे जाने के बाद से ऐसा एक भी दिन नही गया जब मेने तुम्हारी कमी महसूस ना की हो, ये कैसा जादू कर दिया है तुमने मेरे उपर,

शंकर ने हँसते हुए कहा – मैने.. क्या जादू कर दिया..?

प्रिया अधीर होते हुए बोली – पुछो मत.., तुम्हारी कल्पना मात्र से ही मे गीली हो जाती थी, तुम्हारा वो चुदाई का अंदाज निराला था शंकर..,

प्लीज़ अब बातों में वक़्त जाया मत करो, जल्दी से मुझे बिस्तर पर ले चलो और मेरी सारी हसरतें पूरी करदो मेरे राजा…!

शंकर ने उसके रसीले लज़्जत से भरे होंठों को चूमते हुए उसकी गोल-गोल सुडौल चुचियों को सहलकर कहा – इतनी भी क्या जल्दी, थोडा आराम से बैठते हैं,

उउम्मन्णन…नही शंकर, हमें समय पर घर भी पहुँचना है, वरना

खम्खा लोगों को हम पर शक होगा, अपने किस को तोड़ते हुए पिया बोली…

शंकर तो था ही उसके हुक्म का गुलाम, फ़ौरन उसने उसे अपनी गोद से उठाया, और उसकी साड़ी खींच दी..,

 
प्रिया के पीछे सॅट कर खड़े होकर अपने लौडे को उसकी मखमली गान्ड पर दबाते हुए उसने उसके सुडौल उरोजो को मसल्ते हुए कहा…, जैसी आपकी मर्ज़ी..

चुचियों की मिंजाई से प्रिया सिसक पड़ी.., आअहह…सस्सिईइ…बेड पर चलो ना…

शंकर ने अपना हाथ नीचे करके उसके पेटिकोट के नाडे को खींच दिया और ब्लाउस के बटन खोलते हुए बोला..,

बेड पर आपकी मुनिया का रस अच्छे से पीने नही मिलता, ये कहते हुए उसने उसके ब्लाउस और ब्रा को भी एक तरफ उछाल दिया..!

दूध जैसी गोरी, गोल-मटोल इलाहाबादी अमरूद जैसी प्रिया की गदराई चुचियों को देख कर शंकर बौरा उठा, और वो उनके उपर भूखे कुत्ते की तरह टूट पड़ा…!

एक को चूस्ता, दूसरी को हाथ से मींजता, कभी उसके निपल को उमेठ देता.., फिर दूसरी को चूस्ता और पहली के साथ खेलने लगता..!

प्रिया बस अपना मुँह छत की तरफ उठाए बुरी तरह सिसक रही थी.., आअहह…सस्सिईइ..

शंकर.. मेरे राजा… ख़ाआ जाऊ…इन्हें उउऊयईी…माआ.., निपल ज़ोर्से मत खींचूओ..,

कुछ देर बाद वो उसकी टाँगों के बीच बैठ गया, मिनी पैंटी में प्रिया की चूत की फूली हुई फाँकें पैंटी से बाहर दिखाई दे रही थी,

उत्तेजना और वासना के वशीभूत उसकी मुनिया इतनी लार टपका चुकी थी कि उसकी छोटी सी पैंटी उसके कामरस से गीली हो चुकी थी,

शंकर ने एक बार उसकी गीली मिनिया को पैंटी के उपर से ही चूम लिया.., फिर अपने बड़े से हाथ में उसकी माल पुआ जैसी चूत को भर लिया..,

मारे उत्तेजना के प्रिया दोहरी हो गयी और उसने शंकर के बालों को पकड़ कर उसका मुँह अपनी चूत पर दबा दिया..,

शंकर ने अपना मुँह उठाकर प्रिया की तरफ देखा जो अपने एक हाथ से अपनी ही चुचि को मसल रही थी, उसकी पैंटी में उग्लियाँ फँसा कर आँखों में देखते हुए शरारत भरे लहजे में बोला…!

इजाज़त हो तो इस दो इंच के कपड़े को भी निकाल दूँ दीदी..,

प्रिया इतनी आतुर हो चुकी थी कि उस’से एक-एक पल निकालना मुश्किल हो रहा था, सो नागिन की तरह फुफ्कार्ते हुए बोली – नाटक मत कर मदर्चोद, जो करना है जल्दी कर..,

यहाँ मेरी चूत में आग लगी पड़ी है, और भोसड़ी का पुछ्ता है, पैंटी उतारू क्या.., भेन्चोद तुझे कब्से इजाज़त लेने की ज़रूरत पड़ गयी.., जल्दी कर अब बैठा क्या देख रहा है मेरी तरफ…!

शंकर भी पूरे मज़े लेने के मूड में था, उसने पैंटी उतारने की वजाय एक तरफ को करदी, और अपनी बीच की उंगली जड़ तक उसकी रसीली चूत में पेल दी…!

सस्सिईईई…..आआहह….इसी से चोद…, हां चाट ले मेरा राजा भीयया..शाबास बेटा आआईय… ये क्या किया री…, मुम्मय्यी….मेरी चुत्त……गायईयी…, क्लिट को पपॉर्ते ही प्रिया की चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसे शंकर पूरा चट कर गया…!

अच्छी से झड़ने के बाद प्रिया ने राहत की साँस ली, शंकर को खड़ा करके उसके होंठों को चूम कर बोली….

सही में बहुत जालिम है रे तू.., कैसा औरत को अपनी उंगलियों पर नाचता है.., कहाँ से सीखी ये कला..,,हान्न्न…!

शंकर उसकी चुचियों को मसलते हुए बोला – वो बाद में बताउन्गा, पहले अब आप मेरे लौडे की थोड़ी सेवा करो, वरना ये मेवा नही खिलाएगा आपकी मुनिया को…!

शंकर की बात सुनते ही प्रिया फ़ौरन अपने पंजों पर बैठ गयी, उसकी जीन्स खोलकर नीचे खिसका दी, तब तक शंकर ने अपनी टी-शर्ट निकाल फेंकी..!

अंडर वेअर में फुफ्कार मार रहे उसके लौडे को प्रिया ने हाथ से मसलते हुए कहा – मेरी मुनिया पर नही तो कम से कम अपने इस मूसल पर ही रहम कर लिया कर बेहन के लौडे..,

कैसा अंदर ही अंदर फडफडा रहा है बेचारा, ये कहते हुए उसने उसे अंडरवेर से बाहर निकाल लिया..,

खुली हवा में साँस लेते ही शंकर का घोड़ा पछाड स्प्रिंग लगे गुड्डे की तरह फुदक कर प्रिया के होंठों से जा लगा, जिसे उसने बड़े प्यार से दुलार कर चूम लिया..,

सुरमुई सुपाडे को खोलकर अपनी जीभ की नोक से उसे चाटा.., शंकर के मुँह से आअहह… निकल गयी..,

प्रिया ने उसकी तरफ देख कर उसके गरम दहक्ते लंड को अपने मुँह में भर लिया.., उत्तेजना के वशीभूत होकर शंकर के मुँह से अनाप शनाप निकलने लगा..

आअहह…चूस ले मेरी पालतू कुतिया.., साअली बहुत भूखी है तू मेरे लंड.., उउफ़फ्फ़.., क्या मस्त चुस्ती है साली किसी रंडी की तरह..,

प्रिया आश्चर्य से उसकी तरफ देखते हुए बड़े मज़े ले-लेकर उसके लौडे को चूसे जा रही थी, उसे शंकर की गालियाँ बड़ी सुहानी लग रही थी..,

जब शंकर को लगने लगा कि अब कंट्रोल रखना मुश्किल होता जा रहा है, सो उसने अपने लॉड को प्रिया के मुँह से बाहर खींच लिया और उसे गोद में उठाकर बेड पर लाकर पटक दिया…!

प्रिया की चूत फिर से रस छोड़ने लगी थी, शंकर ने देर ना करते हुए उसकी जांघों को अपनी मजबूत जांघों पर चढ़ाया, अपने रोड जैसे सख़्त हो चुके लंड को उसके छेद पर रखा और एक करारा सा धक्का अपनी कमर में लगा दिया…!

आआययययी….मुम्मय्यी…मर गयी.., हरअमजाड़े…कुत्तीए…आअरराां…सी.. डाल..ना….., उउउफ़फ्फ़.. मार डाला भेन्चोद..,

आधे से ज़्यादा लंड एक झटके से अपनी चूत में लेकर प्रिया बिल-बिला उठी..,

शंकर ने वहीं रुक कर उसके होंठ चूस लिए, फिर उसकी चुचियों को सहलाते हुए

वाकी का लंड भी पेल दिया..,

दर्द से प्रिया का सिर पीछे को हो गया, अपनी छाती आगे निकाल कर वो कराह उठी.., आहह..शंकर.., मर गयी रे..,

शंकर फिर से उसके होंठ चूसने लगा.., कुछ देर ठहर कर उसने धीरे-धीरे अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए..,

अब प्रिया भी लय में आती जा रही थी.., शंकर के धक्कों में तेज़ी आते ही वो भी अपनी मक्खमली गान्ड उपर उछाल-उछाल कर चुदने लगी..,

सस्सिईई…आअहह…उउम्म्मन्णन…और तेज हान्ं.. और ज़ोर्से.. फाड़ इसे.. शनकाररर.. हुन्न्ं…ले मेरी जान…और ले..झेल मेरे लंड को..रान्नीी…,

ऐसे ही कुछ गरमा गरम शब्दों से होटल का वो शानदार आलीशान सूट गूँज रहा था…, कोई किसी से कम नही पड़ना चाहता था…!

ऐसा लग रहा था जैसे ये चुदाई कभी ख़तम होने वाली नही है..,

आधे घंटे के उस घमासान युद्ध के बाद तूफान थमा, जिसमें प्रिया तीसरी बार अपना पानी छोड़ रही थी,

 
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