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रंडी खाना complete

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“रुको “मेरी आवाज से निशा रुक गई जिसने अभी अभी मेरे लिए दरवाजा खोला था,

जेल से आने के समय काजल फिर के होटल चले गई थी ,निशा ने दरवाजा खोला और सर झुकाए जाने लगी ,मुझे ये बात बहुत ही तकलीफदेह लग रही थी की मेरी ही बहन मुझसे ऐसे पेश आ रही थी ,शायद वो उस दिन की मेरी बातो को अब भी अपने दिमाग में बसा कर रखे थी…

“तुम ऐसे मुझसे भाग क्यो रही हो “निशा पलट भी नही रही थी और सर झुकाए खड़ी थी …

“कुछ भी तो नही भइया “

“पूर्वी कैसी है “

“ठिक है अपने कमरे में है “मैंने निशा से अभी बात करना उचित नही समझा ,मैं सीधे ही उनके कमरे की ओर बढ़ा,आज उसने मुझे नही रोका ,मैं कमरे में था और मेरे सामने मेरी प्यारी बहन पूर्वी लेटी हुई थी,मुझे देखते ही वो खुसी से उछाल पड़ी,वो आज ही घर आयी थी और मैं उससे अभी मिल रहा था…

“कैसी है मेरी जान “मैं उसके पास ही बिस्तर में जाकर बैठ गया ,वो उठाने को हुई लेकिन मैंने उसे लिटा दिया ..

“अरे मुझे कोई उठाने क्यो नही देता है “

उसकी मासूमियत में तो दुनिया कुर्बान थी ..

मैं हंसा

“मैं पूरी तरह से ठीक हु भइया अब तो मैं कालेज भी जा सकती हु “

कालेज ?????

मैंने तो ये सोचा ही नही था,अब क्या मेरी बहनों का कालेज जाना ठीक होगा क्योकि जो मैंने किया था उससे पूरे कालेज में इन्ही की चर्चा हो रही होगी,और उनको खतरा भी होगा …

मेरे मनोभाव शायद पूर्वी की समझ में आ गए थे..

“अरे जिसका आपके जैसा भाई हो उन्हें अब कोई कुछ नही बोलेगा आप क्यो फिक्र कर रहे हो “

पूर्वी ने मेरे मन की बात सुन ली थी ,

“कुछ दिन रेस्ट कर ले फिर मैं ही तुझे कालेज छोड़कर आ जाऊंगा “मैंने उसके बालो को सहलाते हुए कहा ,

“क्या भइया आप भी ….कितना रेस्ट करूँगी मैं ,बोर होई जाती हु यंहा लेटे लेटे ..और आप फिक्र मत करो मेरी अब मुझे कुछ भी नही होगा “

“ह्म्म्म “

मैं भी चुप हो गया और उसके जख्मो को देखने लगा ,ज्यादा गहरा घाव नही बना था,लेकिन जलने वाली जगह में निशान बच गया था,घाव पूरी तरह से ठीक था और उसकी चमड़ी से उसके नस दिख रहे थे,ऊपर की त्वचा जल गई थी ,मुझे उसे देखकर फिर से बड़ा दुखी हुआ ,

“देखो ना भइया सब तो ठीक हो गया है और मुझे कोई कमजोरी भी नही है अब “

वो उठकर मेरे गले में झूल गई ,मुझे मेरी पुरानी पूर्वी वापस मिल गई थी ,मैं उसे अपने गले से लगा कर रखा रहा,मेरी नजर उस कमरे में पड़ी…..

यही वो कमरा था जंहा मेरे आने से मेरी बहनों को परेशानी थी ,आज उन्हें कोई परेशानी नही हो रही थी इसका मतलब था की उन्होंने वो चीज हटा दी होगी ,मैं ध्यान से देखने लगा सभी कुछ तो ठीक था बस एक चीज के ,एक दीवाल जो की बिस्तर के बाजू ने ही था,मुझे लगा की उसपर कोई पोस्टर चिपका हुआ रहा होगा जिसे अभी अभी निकाला गया था,क्योकि पोस्टर तो निकल गया था लेकिन उस जगह का कलर बाकी दीवाल के कलर से अलग था,मैं फिर से नजर दौड़ाया और मुझे वो पोस्टर भी दिख गया,जो की निशा के स्टडी टेबल के नीचे में मोड़कर रखा गया था,क्या था उस पोस्टर में जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ,???

मैं ज्यादा खुफिया गिरी नही करना चाहता था …

मुझे निशा का आभास हुआ जो की मेरे पीछे ही खड़ी थी ,मैं जब पलटा तो उसने फिर से नजर झुका लिया,मैंने पूर्वी को देखा और आंखों ही आंखों में पूछा कि क्या हुआ ..

उसने उसने अपनी नजर बड़ी करके मुझे बताया की आपके ही कारण हुआ है ये अब मनाओ ...उसका चहरा और एक्प्रेशन देखकर मुझे हँसी आ गई लेकिन मैं बस मुस्कुराया …

मैंने निशा का हाथ पकड़ा और बिस्तर में बिठा दिया ,वो अब भी नजर गड़ाए हुए बैठी थी ,

“मुझसे नाराज हो ???”

मैंने कहा ही था की वो वँहा से उठ कर चली गई ,मैंने देखा था की उसके आंखों में आंसू थे ...हम दोनो ही उसे जाते हुए देखते रहे लेकिन कोई कुछ भी नही बोल पाया ,वो कमरे से बाहर चली गई शायद किचन में …

“इसे क्या हो गया है “मैं पूर्वी की तरफ मुड़ा जो की उदास दिख रही थी ..

“भईया ……..”वो भी चुप हो गई और उसने उस पोस्टर की तरह उंगली की जो की गोल मोड़कर रखा गया था,मुझे पता था की यही वो पोस्टर है जोकि कभी इस दीवार मके लगा रहा होगा ..

“उसे देखो “

पूर्वी ने उदास स्वर में ही कहा ..

मैं उठकर उस तक पहुचा और उसे खोला …

मेरी नजर फ़टी की फ़टी रह गई थी ,ये था जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ……

मैं चौक कर फिर से पूर्वी को देखने लगा

“हम नही चाहते थे की आपको इसका पता चले लेकिन …..दीद आपसे बहुत प्यार करती है भइया और ये इसका सबूत है ,”

मेरी बहन मुझसे प्यार करती है तो इसमें छिपाने वाली क्या बात थी ???

ये उस पोस्टर से पता लग रहा था,जिसके बीच में एक दिल बना हुआ था जिसपर मेरी फ़ोटो लगी थी ,उसके चारो ओर सिर्फ मेरी ही फ़ोटो थी,ऐसा लग रहा था की किसी नवजवान लड़की को प्यार हो गया हो और वो अपने महबूब की तस्वीरों से दीवाल को सजाने के लिए इसे बनाया हो ,निशा की मेहनत इसमें साफ नजर आ रही थी ,मेरी कुछ चुनिंदा तस्वीरों से उसने एक आदमकद का पोस्टर बनाया था...मेरी आंखे भर गई ..

“मैं भी आपसे प्यार करती हु भइया लेकिन दिदि का प्यार कुछ अलग ही है ...वो आपके लिए पागल है ,यहां तक की जब आपकी शादी हुई थी तब सबसे ज्यादा वही रोइ थी ...मैं जानती हु की ये गलत है लेकिन ………..”

पूर्वी थोड़ी चुप हो गई ,मुझे काजल ने कुछ तो बता दिया था लेकिन आज मैं इसे फील भी कर सकता था …

“दिदि ने तो भाभी को भी धमका दिया था ,वो तो भाभी को भी ……..”जैसे पूर्वी को होशं आया हो की वो क्या बोल रही है ,वो चुप हो गई जैसे कोई सदमा लगा हो ,मैं उसके पास जा बैठा

“भाभी को भी क्या “

पूर्वी के चहरे में एक डर आ गया था मैं जानता था की वो क्या बोलना चाहती थी ..

“कुछ नही भइया “

“मुझसे कब तक तुम लोग झूट बोलकर निशा को बचाने की कोशिस करोगे ..मैं जानता हु की उसने काजल को मारने की कोशिस की थी और तुझे भी …..”कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया था …

“मैं ये भी जानता हु की जो एसिड अटैक तेरे ऊपर हुआ वो उसी ने करवाया था…”

अब पूर्वी रोने लगी थी ,

मैंने उसे अपने सीने से जकड़ लिया ,

“मैं जानता हु मेरी जान की तुम निशा को कितना प्यार करती हो ,उसकी हर गलतियों के बावजूद और मैं ये भी जानता हु की निशा के लिए ये सहना बहुत ही मुश्किल होता है की मैं उसके अलावा किसी और को प्यार दिखाऊ,मैं जानता हु की वो बीमार है और उसे अगर कुछ ठीक कर सकता है तो मेरा प्यार ..लेकिन इसका ये तो मतलब नही हुआ की मैं तुझे प्यार करना बंद कर दूंगा ……….अब तो निशा भी जानती है की मुझे उसके बारे में पता चल गया है शायद इसी लिए वो मुझसे इतनी दूर भाग रही है,लेकिन वो दिल की अच्छी है ,वरना अभी तक वो काजल और तुझपर और भी हमले करवा सकती थी ,उसे अपनी गलती का अहसास है लेकिन वो बीमार है ,जब उसे उत्तेजना होती है तब उसमें कुछ भी सोचने समझने की शक्ति नही बच पाती,और जब गलती हो जाए तो फिर पछताने के सिवा और कोई चारा नही बचता “

पूर्वी मेरे सीने से लगी हुई सिसक रही थी ..

“भइया सच में दिदि अच्छी है ,मेरे ऊपर हमला तो करवा दिया लेकिन फिर वो इतना रोइ है ,,,,,,,वो तो ठीक से खाना भी नही खा पा रही है प्लीज् उसे मनाओ शायद जब आप उसे समझाओगे तभी तो ठीक हो पाएगी...सच में हमशे बहुत बड़ी गलती हो गई,हमे आपको सब कुछ पहले ही बता देना था ,अगर हम आपको पहले ही बता देते तो शायद मुझेपर ये अटैक ना होता और ना ही भाभी मुसीबतों में फंसती “वो रोती रही ..

“फिक्र मत कर मेरी जान मैं सब कुछ सम्हाल लूंगा अब उसे सम्हालना मेरे ऊपर है …”

मैं थोड़े देर और पूर्वी के साथ ही बैठा रहा और फिर बाहर जाकर निशा की ओर रुख किया ,वो अभी किचन में ही थी………

“ये क्या कर रही हो “

मैं निशा को देखकर चौक गया था,उसके बाल बिखरे हुए थे और वो किचन में जमीन में बैठी थी ,ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत ही रोई हो ,उसने मुझे देखा उसकी आंखे बता रही थी की उसकी हालत क्या थी ,आंखों का काजल आंसुओ की वजह से फैल गया था,कपड़े अस्त व्यस्त थे जैसे उसने उसे जोरो से खिंचा हो ,वो एक बहुत ही दर्दनाक मानसिक द्वंद से गुजर रही थी …

लेकिन मेरे लिए डर का कारण था वो धारदार चाकू जो उसने अपने हाथो में पकड़ रखा था...मुझे देखते ही वो ऐसे चौकी जैसे कोई चोर चौक जाता है,

उसके इरादे समझ कर मेरे दिल की धड़कने ही रुक गई ..

“नही निशा …”मैं जोरो से बोल गया और दौड़कर उसके पास पहुचा ,वो मुझसे बचने लगी जैसे मैं उसका बलात्कार करने वाला हु …

वो मुझे खुद को छूने भी नही देना चाहती थी

“नही भइया मत छुओ मुझे ..मैंने पाप किया है भइया ...मैंने पाप किया है…”

मैंने हाथ बढ़ाया लेकिन वो फिर से पीछे हट गई ..

‘मेरी बहन मेरी बात सुन मैं तुझसे बहुत प्यार करता हु ,निशा मेरी जान सुन मेरी बात “

मेरे आंखों में पानी आने लगा,ऐसा लगा जैसे उसकी इस हालत का जिम्मेदार मैं ही था,दिल तडफ गया और आंखों से वो पानी टूटकर गिर पड़ा ,

“नही भइया ,मैंने पाप किया है भइया मुझे मत छूना आप भी गंदे हो जाओगे भइया,मुझे मर जाना चाहिए मुझे मर जाने दो ..”

मैं जैसे रो ही पड़ा लेकिन निशा को जैसे कुछ फर्क ही नही पड़ रहा था,वो अभी भी सिमटी हुई बैठी थी मेरे रोने से उसे कोई फर्क नही पड़ रहा था,वो अपने ही धुन में थी लेकिन उसकी इस हालत को देखकर मैं बुरी तरह से टूट गया था ,

लेकिन ये समय टूटने का नही था,अगर मैं टूटा तो हो सकता था की मैं अपनी बहन को हमेशा के खो दु,क्या मैं इतना भी मजबूत नही था जितनी मेरी छोटी बहन और मेरी बीवी थी जिन्होंने इतने दिनों तक मुझसे ये बात छुपाए रखी थी ...और निशा को पूरी तरह से सम्हाल कर रखा था…

लेकिन आज निशा की हालत सबसे खराब थी ,कारण था मेरे द्वारा उसे बोले गए वो शब्द जो उसे अंदर ही अंदर से खोखला कर रहे थे,अगर मुझे पता होता की इसकी हालत ऐसी हो जाएगी तो मैं उस पर कभी ये जाहिर ही नही होने देता की मुझे सब कुछ पता है ,मैं इसे साधारण ऑब्सेशन समझ रहा था लेकिन आज मुझे पता चला की काजल ने मुझे जल्दी कुछ करने को क्यो कहा था,

निशा बहुत ही बेचैन और डरी हुई लग रही थी ,जैसे किसी लड़की के साथ जबरदस्ती की जा रही हो और वो एक कोने में सिमट कर बैठी हो ,वही हालत इस समय निशा की थी वो एक कोने में सिमट कर बैठी हुई थी ...और मुझे दूर रखने को कह रही थी ,

मेरे सामने सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी वो चाकू जिसे उसने कस कर पकड़ रखा था ,मैंने उसका ध्यान भटकना ही ठीक समझा ..

“निशा ,,,मेरी बहन मेरी आंखों में देख ,क्या तुझे लगता है की मैं तुझसे नाराज हु ….”

वो थोड़ी देर को शांत हुई
 


“देख मेरी आंखों में मैं तो दुनिया में सबसे ज्यादा तुझसे ही प्यार करता हु ..फिर ये गलत कैसे हुआ मेरी बहन ...क्या तू भूल गई उस दिन को अगर काजल नही आती तो हम एक ही हो जाते ….है ना “

मेरी बात से वो बहुत ही शांत हो गई थी लेकिन अब भी उसके हाथ चाकू पर मजबूती से बंधे हुए थे ..

वो एक सोच में पड़ गई थी जिसने मुझे एक मौका दिया ..

“अगर तुझे मेरी बात पर यकीन नही तो मेरे कमरे में चल ,मैं तुझे पूर्वी और काजल से भी ज्यादा प्यार करता हु ,मैं तुझे सब से ज्यादा प्यार करता हु “

मैं एक उमंग में बोल गया ,मैंने अपने बात में पूरी तरह से फिलिंग भरी क्योकि मैं नही चाहता था की उसे मेरे झूट का पता चले ,

“सच्ची ..”उसकी आवाज में एक अद्भुत भोलापन था

“आप झूट तो नही बोल रहे हो “

वो धीरे से बोली

“पागल मेरी बात तुझे झूट लग रही है ..मेरे गले से लग के देख ..आ मेरे पास आ “

वो अब भी झिझक रही थी ,मैं उसके पास नही जा रहा था क्योकि वो हड़बड़ाहट में कोई गलत कदम भी उठा सकती थी ..

“आना ...अपने भाई पर तुझे भरोषा नही है ,मैं तो सोचता था की तुम मुझे बहुत प्यार करती हो लेकिन तुम्हे तो मुझपर भरोषा ही नही है …”मैंने रूठने की एक्टिंग की

“और जब भरोषा ही नही है तो छोड़ो मैं जा रहा हु “

ये बोलते हुए मेरे दिल की धड़कने भी रुक गई थी क्योकि मैं वँहा से नही जाना चाहता था लेकिन निशा को ये बोलना पड़ा ,अगर वो कोई प्रतिक्रिया नही करती तो मेरे लिए सचमे एक मुसीबत खड़ी हो जाती ..मैं थोड़ा मुड़ने को हुआ

“नही …”

निशा की आवाज ने मुझे हिम्मत दी मैं झट से उसकी ओर हुआ

“नही मैं आपके ऊपर भरोषा करती हु भइया “

उसके आंसू सुख चुके थे वो अभी अभी नार्मल कंडीसन में नही आयी थी और मुझे अभी उसे नार्मल नही करना था अभी तो मुझे उसके हाथ से वो चाकू छुड़वाना था

“तो आ मेरे गले लग जा ,वरना मैं चला “

वो मेरे आंखों में देखने लगी जैसे मुझे नाप रही हो …

“सच में तू मुझसे प्यार वयार नही करती ,सब दिखावा है तेरा “

मैं हल्के गुस्से में बोला ताकि उसके दिल में बात लगे और वो तुरंत कुछ ऐसा करे जिससे मुझे मौका मिल जाए ,

“नही भइया मैं आपसे बहुत प्यार करती हु “

वो मेरी ओर बड़ी और मैने उसे खीचकर अपने सीने के लगा लिया ,जैसे एक ज्वालामुखी फटा हो वो जोरो से रोने लगी ,मुझसे लिपटे हुए उसके आंसुओ से मेरे कपड़े भीगने लगे थे मैंने उसे अपने सीने से ऐसे कसा था जैसे मैं उसे अपने अंदर समाना चाहता था ,मैं जानता था की उसके लिए रोना कितना जरूरी था,,,मैंने उसके हाथो से वो चाकू निकाल कर दूर रख दिया और उसे जकड़कर बस वही बैठ गया ,उसका रोना बंद नही हुआ लेकिन उसने मेरे गालो में चुम्बनों की बरसात ही कर दी ,उसके थूक से मेरा पूरा चहरा गीला हो गया था,वो मुझे पागलो की तरह चूम रही थी ..

“I LOVE YOU BHAIYA ...I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,....I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA ...I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,....I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA “

वो बोलते हुए थक भी नही रही थी और मुझे चूमे जा रही थी उसके मुह से बस एक ही बात निकल रही थी ,मैंने तो जैसे उसके सामने खुद को सिलेंडर ही कर दिया था ,जब वो रुकी तो मैंने फिर से उसे जोरो से जकड़ा ,मैं उसे उठाकर अपने कमरे में ले गया और बिस्तर में डाल दिया ,उसके आंखों में अब भी आंसू थे ,मैं उसके बाजू में सोया और उसे जकड़ लिया ,वो फिर से मुझे चूमने लगी ..

“भइया क्या आप सच कह रहे हो सबसे ज्यादा मुझे प्यार करते हो …”

मैं मुस्कुराया

“कैसे साबित करू ,इतना भी यकीन नही है अपने भइया पर “

वो मुझसे लिपट गई

“नही भइया मैं बस आपको खोना नही चाहती “

“दुनिया की कोई ऐसी ताकत है क्या जो मुझे मेरी बहन से जुदा कर दे ...और तुझे काजल और पूर्वी से क्या डर है ,क्या तुझे लगता है की उनके कारण मैं तुझसे अलग हो जाऊंगा ,अरे पागल तू मेरी है और मैं तेरा हु,तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया की काजल और पूर्वी तुझे मुझसे अलग कर देंगे ,,,क्या तुझे मेरे प्यार में विस्वास ही नही है “

ना जाने कब मैं एक्टिंग करते करते सच बोलने लगा था,मेरी हर बात मानो मेरे दिल से आ रही थी और मेरे आंखों का वो आंसू भी झूठा नही था जो अभी अभी मेरे आंखों से गिरा था …

“मुझे माफ कर दो भइया मैं आपको समझ ही नही पाई “

मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ,वो सुबकते हुए ही मेरे सीने में समाई हुई सोने लगी थी ,वो मानसिक थकान उसके ऊपर हावी हो गया था और वो धीरे धीरे नींद के आगोश में जा रही थी ...मेरे दिल में आया की मैं उसके होठो को चूम लू लेकिन आज वो सही समय नही था ,मुझे अपनी बहन की बेहद ही फिक्र हो रही थी ,जिस तरह की मानसिक स्थिति उसकी थी वो प्यार से ज्यादा पागलपन बन चुका था ,मुझे पहले अपने प्यार के बल में ही उसे सही करना था और मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार था……...

“हद हुई है, अब हुई है, जीने मरने दीजिये,..

.छोड़कर दुनिया मुझे वैरागी बनने दीजिए,

घूम आया हुआ फ़क़त दुनिया की सारी भीड़ में ,भीड़ ही मैं बन न जाऊ , कुछ अपना सा करने दीजिये ………”

दिल से निकली एक शायरी जो ना जाने क्यो दिल के किसी कोने से निकल आयी ,

निधि अब भी मेरी बात को ध्यान से सुन रही थी ,उसने हाथ से अपना चहरा ठिका रखा था और उसकी निगाहे मुझे ही देख रही थी ,हम टेबल में बैठे हुए थे मेरे सामने नाश्ता लगा हुआ था लेकिन मेरे अंदर के कुछ निकलने को बेताब हो रहा था,पूर्वी और निशा दिनों ही मेरी बातो को ध्यान से सुन रहे थे…

“भइया आप क्यो बैरागी बनोगे ?/”

पूर्वी का स्वाभाविक सा प्रश्न था,

“बस कुछ अब सो जाना चाहता हु ,सब कुछ छोड़कर ..”

“ऐसा क्यो बोल रहे हो “निशा चौकी

“क्या बोल रहा हु”

“क्या छोड़ना चाहते हो आप ,अपनी जिम्मेदारियां ??

या हमे ..”

उससे पहले की निशा की आंखों में आंसू आ जाए मैं हँस पड़ा ..

“पागल हो तुम लोग तुम्हे क्यो छोड़ने लगा मैं ,मैं तो सोच रहा था की काम बहुत हो गया,क्यो ना कही छुट्टी मनाने चले ..”

देखते ही देखते मेरी दोनो परियों के चहरे खिल गए ,

“वाओ भइया यकीन नही होता की आप ऐसा बोल रहे हो “पूर्वी बोल पड़ी

“क्यो ?? क्यो यकीन नही होता “मैं चौका

“अरे आप तो वर्कोहोलिक(जिसे काम का नशा हो ) हो,मुझे लगा था की आप कभी छुट्टी नही लेते “पूर्वी फिर से बोल पड़ी लेकिन इस बार उसके होठो में मुस्कान थी ,

“तो डिसाइड करो की कहा जाना है मैं शाम को मिलता हु “

दोनो ही खुस हो गए …

“जगह तो अच्छी है लेकिन तुम जानते हो की मैं नही जा पाऊंगी “

काजल ने फोन में ही अपनी मजबूरी जाता दी ,मैं जानता था की वो नही जा पाएगी ...इसीलिए तो ये प्लान किया था ..

“ओके जान लेकिन मैं बहनों को प्रोमिश कर चुका हु “

“ठीक है जानू ,आप सब चले जाओ 3 दिनों की ही तो बात है,ऐसे भी अभी मेरे पास बहुत सा काम है”

काजल ने एक गहरी सांस छोड़ी जैसे सच में काम से बहुत थक गई हो……

“तो तुम तैयार हो क्या सोचा तुमने “

मैं रश्मि के केबिन में बैठा था ,

“मेरा जवाब हा है ,”

मेरे जवाब से वो सुबह के फूलो की तरह से खिल गई

“थैंक्स देव “वो उठी और मेरे गले से लग गई ,पहली बात मैं उसके इतने पास था ,उसके बदन से आते हुए खुसबू ने मुझे बहुत शुकुन पहुचाया और मैं उसे एक अपनत्व का अहसास दिलाने हल्के से जकड़ लिया,ऐसा लग ही नही रहा था की वो मेरी बॉस है बल्कि ये लग रहा था की वो मेरी दोस्त है ,

“तो पेकिंग करना शुरू करो “

वो उछलते हुए बोली जैसे की बच्ची हो

“डोंट वरी वो आज ही हो जाएगा और कल से 3 दिनों के लिए मैं केशरगढ़ में “

वो बहुत ही खुस लग रही थी ,

“जानते हो ना तुम्हे किससे मिलना है …तुम उनसे मिल चुके हो “

उसने मुझे याद दिलाया

“हा जानता हु,डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवादवाले ...उर्फ डॉ चुतिया से……. “

रश्मि का चहरा खिल चुका था ………...

 
कार अपने रफ्तार में चल रहा था,पीछे पूर्वी बैठे बैठे ही सो गई थी ,मेरे मन में कई सवाल मचल रहे थे वही उसके साथ ही एक उत्सुकता भी मेरे मन में थी ,

मेरे बाजू में बैठी हुई निशा जैसे पूर्वी के सोने का ही इंतजार कर रही थी वो बार बार मेरे हाथो से अपने हाथो को टच करती और ऐसे दिखाती जैसे की वो बिल्कुल ही अनजाने में हो गया हो ,मैं गाड़ी चला रहा था और वो मेरे बाजू की सीट पर ही बैठी थी ,उसके इस हरकत से मेरे होठो में एक मुस्कान सी खिल जाती थी ,

ऐसे लग रहा था जैसे कोई जोड़ा अभी अभी बंधन में बंधा हो और एक दूसरे को लुभाने का प्रयास कर रहा हो ,मुझे काजल के साथ बिताये कालेज के समय की याद आ गई जब हमारे जिस्म नही मिले थे लेकिन मन मिल चुके थे,छोटी छोटी बातो पर शर्माना फिर हल्के से मुस्कुराना,छोटी छोटी सी वो शरारते,वो जवानी के सबसे अच्छे दिन होते है ,हल्की छेड़छाड़ और बहुत सारा प्यार ….

मैं वो सब सोच कर एक गहरी सांस ली ,और निशा की तरफ देखा ,काजल इसी उम्र की थी जब हम दोनो प्यार में पड़ गए थे,ये उम्र होती ही ऐसी है …..

मैं निशा को देखकर मुस्कुराया और वो बिल्कुल ही स्वाभाविक रूप से शर्मा गई …

मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे हम दोनो हनीमून में जा रहे हो ,वही एक अजीब सा डर और उत्साह दोनो ही एक साथ होता है…

शायद निशा मुझसे एक प्रेमी सा वर्ताव चाहती थी ,शायद वो चाहती थी की मैं ही आगे बढूं लेकिन क्या मैं ये कर पाऊंगा ,वो मेरी प्रेमिका नही थी वो मेरी बहन थी ,मेरी सगी छोटी बहन …..ये सब सोच कर मेरे शरीर में एक झुनझुनी सी भर गई ,बड़ी अजीब सी दशा थी मेरी ,मेरी बहन चाहती थी की मैं उसके साथ प्रेमियों जैसा वर्ताव करू,और मेरे दिल में भी उसके लिए एक आग उठने लगी थी ,बस डर यही थी की कही उस आग में हमारी मर्यादा ही ना जल जाए ,उस आग में रिश्तों की महीन डोर ही ना जल जाए ,हवस की आग बड़ी ही जालिम होती है वो कभी भी नही देखती की सामने कौन है …

मैं इस सोच में जैसे डूब ही गया ,मेरा शरीर हल्के से कांप गया था,लेकिन मेरे नजरो के सामने उस दिन का नजारा भी घूम गया जब मैं और निशा आगे बढ़ चुके थे ,उसके जिस्म का हर कटाव मेरे आंखों के सामने से होकर गुजर गया,मैं बुरी तरह से घबराया और तुरंत ही निशा की ओर देखा ..

वो मुझे ही घूर रही थी लेकिन उसकी आंखे कुछ और ही कह रही थी ,

क्या वो भी वही सोच रही थी जो की मैं सोच रहा था ,जैसे वो एक नशे में थी ,आंखे हल्की सी बोझील थी,क्या वो हवस के नशे में थी ????

इससे पहले मैं कुछ भी समझ पाता वो इठलाकर मेरे पास आ गई और मेरे बांहो को अपने हाथो से जकड़ कर अपना सर मेरे कंधे में ठिका दिया,उसने अपनी आंखे बंद कर ली और मुझे बहुत ही सुकून का आभास हुआ,

मैं आराम से गाड़ी चला रहा था जबकि वो मुझे किसी प्रेमिका की तरह जकड़े हुए थी ,वो एक हल्के गुलाबी से कसे हुए सलवार कमीज में थी,भगवान ने उसे बहुत ही सुंदर बनाया था ना सिर्फ सुंदर चहरा दिया था जबकि कसे हुए शरीर से भी नवाजा था,उसकी छातिया जैसे किसी पहाड़ सी उसके कमीज से बाहर झांक रही थी ,ना जाने उसने ये जानबूझ कर किए था या ये किसी और कारण से हुआ था लेकिन उसका दुपट्टा उसके सीने से गिरकर उसके गोद में आ गया था और उसके वो पहाड़ मुझे अपने तराइयों को दिखा रहे थे,उसने जो काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी उसकी इलास्टिक तक मुझे दिखने लगी थी ,मैं तो कुछ देर के लिए नजर जमा नही बैठा था जैसे पहली बार किसी महिला के यौवन को देख रहा हु ,

मैंने अपना सर झटका ,’ये मेरी बहन है ‘

मरे दिमाग ने मुझसे कहा ,लेकिन अगर ये मेरी बहन ना भी होती तो भी इसे देखने का कोई कारण मेरे पास नही था क्योकि मैंने कभी किसी पराई लड़कियों की तरह नजर नही गड़ाई थी ,मैं बहुत शर्मिला लड़का रहा हु ,हा ये बात अलग थी की कुछ लड़कियों के साथ मेरे संबंध बन गए है लेकिन वो सिर्फ एक इत्तफाक ही था और साथ ही साथ वो अभी किसी अलग तरह की लडकिया थी ,लेकिन मैंने कभी किसी अच्छी लड़की के लिए बुरा नही सोचा था ,मैं तो उन लड़कियों के लिए भी बुरा नही सोचा था ,लेकिन किस्मत ही ऐसी थी की लड़कियों की फ़ौज मेरे सामने आ गई ,और अब उनमे मेरी खुद की बहन भी शामिल हो गई थी ……

करीब 4 घण्टो के सफर के बाद हम केशरगढ़ के उस गेस्टहाउस में पहुच गए जंहा हमे रुकना था,कोई खास बड़ी जगह नही थी वो ,किसी कस्बे जैसा था लेकिन बहुत ही उन्नत लग रहा था ,हरियाली और साफ सफाई मेरी बहनों को ये जगह पसन्द आने वाली थी ,पास ही एक किला भी था और ऊंचे ऊंचे पहाड़ भी गेस्टहाउस से दिख रहे थे ,शहर से ऐसी जगह आने पर कुछ नही बस हरियाली ही दिख जाए तो काम हो जाता है ,मुझे बहनों को थोड़ा घूमना था और डॉ से मिलकर कुछ पता करना था ,वो भी मुझे यही मिलने वाले थे,

मैंने निशा को सीट में ही लिटा दिया था वो बैठे बैठे सो गई थी ,पूर्वी तो पहले से ही सोई हुई थी ,गेस्टहाउस पहुचते ही मैंने उन्हें उठाया …

“आइये साहब हम आपकी बहुत ही देर से प्रतीक्षा कर रहे थे ,”एक अधेड़ सा आदमी भागते हुए हमारे पास आया,ये सरकारी गेस्ट हाउस था,कुछ पुलिस के लोग भी दिख रहे थे ,सभी मुझे इतनी इज्जत दे रहे थे जैसे मैं कोई ऑफिसर हु ,शायद डॉ ने ही ये अरेंजमेंट किया था,पता नही डॉ मुझे क्या दिखाने वाला था और क्या समझने वाला था लेकिन इसके लिए मैं बहुत ही उत्साहित था साथ ही रश्मि भी ,उसने जल्दी से जल्दी मुझे डॉ से मिलने का आदेश दिया था,पता नही केशरगढ़ क्या क्या खेल खेलने वाला था,एक तरफ मेरी बहन थी जो मुझे अपना प्रेमी या शायद पति मान बैठी थी और दूसरी तरफ डॉ के द्वारा बताया जाने वाला रहस्य था ...मैं एक गहरी सांस लेकर छोड़ा और गेस्टहाउस के अंदर जाने लगा ………..

कमरे की बत्तियां हल्के प्रकाश फैला रही थी और मैं बेचैन सा लेटा हुआ छत को निहार रहा था,आज पूर्वी और निशा दोनो ही बाजू के कमरे में सो चुकी थी ,मुझे तो लगा था की वो मेरे साथ सोने की जिद करेंगी लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ था…

अचानक दरवाजा खुला ,जैसा मुझे यकीन था निशा अंदर आयी वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ,उस हल्के रोशनी में भी उसके जिस्म का हर कटाव मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था,वो मेरे पास आकर लेट गई थी ,उसने एक बहुत ही पतली सी नाइटी डाल रखी थी ,उसे देखकर मैं थोड़ा घबराया क्योकि मुझे पता था की आज हमे रोकने वाला कोई भी नही है ,लेकिन मैंने खुद को वक्त के हाथो में सौपने की ही ठान ली ,

उसके आंखों में एक अजीब सा नशा था जो आजतक मैंने किसी भी दूसरी लड़की के आंखों में नही देखा था,एक अजीब सी चाहत और जुनून उसकी आंखों में दिख रहा था,

अगर वो मेरी बहन ना होकर मेरी बीवी होती तो शायद मैं उसे देखकर खुस हो जाता लेकिन ये नशा ना जाने क्यो मुझे डरा रहा था…

“नींद नही आ रही है क्या “

मैंने उससे पूछ लिया ,वो मेरे बांहो में आके सो गई थी,

“कैसे आएगी भइया जब आप मेरे पास नही हो “

उसकी आवाज थोड़ी भारी थी जैसे उसने अभी अभी गहरी सांस ली हो शायद उसकी सांसे भी तेज हो रही थी ,वो मेरे पास आने से पहले ही उत्तेजना के शिखर में थी …

“क्या चाहती हो “मैं अनायास ही बोल गया ...

“भइया अब मैं कुछ भी नहीं करना चाहती ,मैं बस आपकी होना चाहती हु ,पूरी तरह से आपकी ,मुझे नहीं पता मैं क्या करूँगी पर मुझे इतना पता है ,जो भी होगा वो मेरा प्यार होगा,'

मैंने सजल नैनों से उसके मस्तक पर एक चुम्बन का तिलक किया ,और अपने होठो से उसके होठो को मिला दिया और हमारे बीच की सभी दूरिय उसी क्षण से ख़तम हो गयी ,हम अब एक ही थे और कोई दूजा ना था ,हम बस अपने को एक दूजे में समेटने की पूरी कोसिस कर रहे थे,,, ना जाने कितने समय तक हम एक दुसरे के होठो को चूसते रहे थे हमारी सांसे थी पर मेरे लिंग में कोई भी अकडन नहीं थी और ना ही इसका भान ही रह गया,समय जैसे रुक सा गया हो ,हम एक दूजे को अपनी बांहों में भरे बस खो जाना चाहते थे ,मुझे तब थोडा होश आया तब मेरा हाथ निशा के स्कर्ट के अंदर घुस आया था, और उसकी पीठ को सहला रहा था ,उसकी नंगी पीठ पर अपने हाथो को चलते हुए मैंने उसके स्कर्ट को निकल फेका मेरा सीना पहले से ही नग्न था ,निशा के नर्म स्तनों के आभास ने मुझे फिर से किस के खुमार से बहार निकला मैंने अपने हाथो से उसे दबाना शुरू किया पर होठो को नहीं छोड़ा निशा ने अपने हाथो को मेरे सर पर कस लिए थे और पूरी शिद्दत से मेरे होठो को अपने में समां रही थी ,उसे शायद मेरे हाथो के हलचल तक का आभास नहीं हो रहा था ,पर जब मैंने पूरी ताकत से एक वक्ष को दबाया ,

'आहह भइया थोडा धीरे ,'निशा साँस लेती हुई बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुई थी ,वो साँस ले पाती इससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुह उसके मुह में घुसा दिया ,मैंने उसे पीठ के सहारे लिटाया और उसके ऊपर छा सा गया,मैंने दोनों हाथो से उसका चहरा पकड़ा और उसके होठो को छोड़ा फिर ,फिर उसके गाल ,उनकी आँखे उनकी नाक ,उसका माथा ,आँखों की पुतलिया,गरदन ,कन्धा ,छाती ,उजोर ,पेट ,नाभि ,...मैं बस चूसता गया मुझे नहीं पता था की मैं क्या कर रहा हु ,ना निशा को ही पता था,हम बस खो से गए थे मैंने फिर उसके उजोरो को पकड़ा और उसके उन्नत निपलो को अपने होठो में समां लिया ,निशा बस छटपटा रही थी ,

'आः आःह भइया,आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई ,'मैंने अपने मन भर उसे चूसा जब तक की वो लाल नहीं हो चुके थे, नीचे मुझे उसकी पेंटी के ऊपर से जन्घो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दिया,मुझे अपने जांघो के बीच एक विशाल खम्भे सा दिखाई दिया ,जिसकी अकडन से अब मुझे दर्द होने लगा था,मैंने उसे आजाद कर दिया ,मैंने पेंटी के छोरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ा,मैंने निशा की और देखा निशा काप रही थी ,वो एक दिवार थी जो मुझे हमेशा के लिए गिरानी थी ,जिसे गिराकर ही मैं निशा को अपना बना सकता था,

“इजाजत है “

मैंने निशा को छेड़ा

“अब भी इजाजत लोगे क्या “

मुस्काते हुए उसने पूछा और मुझे अपने ऊपर खीच लिया मेरे होठो को फिर अपने होठो में भर लिया ,

“मेरे भइया ,”

निशा ने मेरे हाथो को पेंटी के ओर ले गयी वो मेरे आँखों में ही देख रही थी उसके चहरे पर अब भी वो मुस्कान थी और आँखों में वही प्यार ,मेरे हाथो में दबाव बनाते वो पेंटी को निकल दी और अपने पैरो से निकाल निचे फेक दिया ,वो अब मेरे सामने नंगी थी ,पर मुझे इसकी फिकर ही नहीं थी ना ही मैंने ये देखने की जहमत की ,मैं तो फिर निशा के होठो को चूसने लगा ,हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे मैं उसके ऊपर लेटा था ,और निशा अपनी आँखे बंद किये बस खोयी हुई थी ,मेरा अकड़ा लिंग निशा के गिले योनी में हलके हलके घिस रहा था,थोडा गीलापन से भीग कर लिंग भी फिसलने लगा मैंने एक दबाव दिया पर वो जन्घो से जा टकराया ,ऐसा कई बार होता रहा पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ,क्योकि ये बिलकुल स्वाभाविक तौर से हो रहा था ,मैं कोई मेहनत नहीं कर रहा था,मैंने तो निशा को किस करने में डूबा हुआ था,पर निशा ने मेरे लिंग को पकड़ा जैसा की उसका पहला मौका नहीं था उसने उसे सही जगह लगाया ,वहा पहुचकर वो चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग को फिर से घेर लिया ,मैंने स्वभावतः फिर झटका मारा लेकिन ये क्या मेरे मुह से एक चीख सी निकली जो निशा के होठो में खो सी गयी ,मेरी लिंग की चमड़ी ने इस घर्षण का आभास किया था लेकिन उस अतिरेक आनद से बढकर मेरे लिए कुछ भी नही रह गया था,मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और ,

'आआह्ह्ह्ह भा ईई या भा ईईईईईईई या '

'निशा आआआआ आह्ह्ह्ह 'हमारा मिलन हो चूका था पर अभी तो उफान की शुरुवात भर थी ,

मैंने और निशा ने आँखे खोलकर एक दूजे को देखा ,हम एक रहत की साँस ले रहे थे ,हमारी आँखे मिली दोनों के चहरे पर एक मुस्कान फैली और मैंने फिर एक जोरदार धक्का मार दिया ,

'अआह्ह्ह 'दोनों के मुह से निकला और दोनों एक दूजे को देख हस पड़े ,,,मैंने धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा ,मेरा लिंग निशा के योनी रस से पूरी तरह से गिला हो चूका था और हम फिर एक गहन तन्द्रा में प्रवेश कर रहे थे जहा बस प्यार था और दुनिया की कोई शय नहीं..

हमारी आँखे फिर बंद होने लगी... मैं तो किसी भी तरह से आंखे खोल भी पा रहा था पर निशा की आँखे इतनी बोझिल हो चुकी थी वो अपनी आँखे खोल ही नहीं पा रही थी ,मेरे धक्के एक लय पकड़ चुके थे और हमारी सांसे और आंहे ,उसी लय में चल रहे थे ,समय खो चूका था ,और सारा जहा भी खो चूका था ,हम एक दुसरे को काट रहे थे ,चूस रहे थे चूम रहे थे ,पर हमें नहीं पता था की हम क्या कर रहे है ,कोई कण्ट्रोल हमरे ऊपर नहीं था ,ना हमारा ना और किसी का ,पहले धीरे धीरे आःह आह्ह से लेकर तेज तेज सांसे और आह उह ओह तक पहुच जाते फिर धीरे- मध्यम- तेज ये सिलसिला ना जाने कब तक चलता रहा ,हमें आँखे खोल एक दूजे को देखने की फुर्सत नहीं थी ,जैसे किसी ने कहा है ,’

बिना किसी के परवाह के ,बिना किसी मांग के ,बिना किसी तलाश के ,बिना किसी चाह के ,हम थे और बस हम थे,,,...एक दूजे में ऐसे घुल रहे थे की पता लगाना भी मुस्किल था की मैं और तू अलग भी है ,बस मेरा मुझमे ना रहा जो होवत सो तोर ,तेरा तुझको सोपते क्या लागत है मोर...

सांसो में अपनी अंतिम गहराई तक हमें डूबा दिया ,जब लक्ष्य करीब आने को थी तो बस थोड़ी देर के लिए सांसे रुक गयी मेरे अंदर से एक विस्फोट हुए ना जाने कितनी ताकत से मैं धक्के लगाये जा रहा था लेकिन उस विस्फोट ने मुझे शांत कर दिया एक गढ़ा सफ़ेद ,चिपचिपा सा द्रव्य ,मेरे अंदर से निकल निशा की योनी को भिगो दिया वही निशा की योनी से ना जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थी ,लडकियों की एक खासियत होती है की अगर वो प्यार की गहराई का आभास कर पायी और उससे सेक्स करे जिसे वो प्यार करती है तो वो एक नहीं कई चरम सुख (ओर्गोस्म )का अनुभव आसानी से कर पाती है ,एक सम्भोग में लगभग 7 तालो का ओर्गोस्म संभव है ,ऐसा शोधो ने पता लगाया है ...निशा ने भी आज किसी गहरे तालो पर इसका अनुभव किया था ,और मैंने भी ,तूफ़ान तो शांत हो चूका था पर जैसे हम जम ही चुके थे ,हमारे शरीर एक दूजे से अलग ही नहीं हो रहे थे ,हम पसीने से भीगे थे हमारी सांसे उखड़ी थी ,पर हमारे चहरे में एक परम शांति का आभास था,सबकुछ शून्य हो चूका था ,खो चूका था ,इतनी शांति का आभास मैंने कभी नहीं किया था,ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाली हो चूका हु ,बिलकुल हल्का ....हम एक दूजे के चुमते रहे हमारे होठ जैसे कभी एक दूजे से ना बिछड़ेंगे वैसे ही चिपके रहे ,हमारे शरीर इक दूजे के पसीने से सने थे ,चहरा और होठ एक दूजे की लार से सने थे और निशा की योनी से मेरा वीर्य अब बहार आने लगा था ,मेरे कमर अब भी हलके हलके चल रह थे…….

 
लिंग की चमड़ी में वो कोमल सा अहसास,

“आह “

मेरे मुह से अनायास ही निकले हुए शब्द थे…….

मैं अभी अर्धसुषुप्त अवस्था में था,ना जगा ही था ना ही पूरी तरह से सोया था,अपने लिंग की कसावट कुछ महसूस हो रही थी ,

ना जाने समय क्या हुआ था लेकिन मुझे लग रहा था की मैं सपनो में खोया हुआ हु,लेकिन धीरे धीरे ही मुझे अहसास हुआ की मैं जाग रहा हु ,और सचमे कोई गीली सी और कसी हुई चीज मेरे लिंग में घर्षण कर रही है…..

मेरे हाथ अनायास ही नीचे चले गए सोचा की सपने में शायद मजा आ रहा हो तो हाथो से ही शांत कर लू,

लेकिन ये क्या ????

नीचे किसी के कोमल बालो का संपर्क मेरे हाथो में हुआ ,मैं थोड़ा चौका …

“:आह”

मजे के अतिरेक में फिर के मेरे मुह से निकला…

ओह क्या अहसास था,मेरी लिंग की चमड़ी को चूसा जा रहा था,जिससे वो फैल गई थी और मेरे हाथ उस सर पर रख गए जो की उसे चूस रही थी …

मुझे याद आया की मैं कहा हु और वो कौन हो सकती है जो मुझे ये सेवा दे रही थी ,कमरे की खिड़कियों से आती हुई धूप से इतना तो समाज आ चुका था की ये मेरे जागने का समय है ,मैं अपने सर को हल्के से उठा कर देखने की कोशिस की …..

मेरे इस हलचल से निशा कोई भी समझ आ गया था की मैं जाग चुका हु,उसने अपना सर उठाया और हमारी आंखे मिली…………

जैसे नए जोड़े सुहागरात के बाद शर्मा रहे हो ,निशा के चहरे में मुझे देखते ही लाली आ गई ,लेकिन मैं उत्तेजित था,मैंने उसे प्यार से देखा और अपना हाथ उसके सर पर रखकर उसे हल्के से दबा दिया ,वो जैसे ,मेरा इशारा समझ गई थी और उसने फिर से मेरे लिंग में अपना मुह गड़ा दिया ….

कल तक जिस बहन के लिए मैं दुनिया की हर खुसी लाने को तैयार था आज वो मेरे जांघो के बीच मेरे लिंग को चूस रही थी ,...

मैं भी क्या करता असल में यही तो उसके लिये जीवन की सबसे बड़ी खुसी थी …..

जिस बहन को अपने बांहो में झुलाया था,जिसके इज्जत की पिता की तरह रक्षा करने की कसम हर रक्षाबंधन में खाई थी आज उसकी उसी इज्जत का मैं लुटेरा बन गया था,या शायद ये कहु की मैं उसकी इज्जत का मलिक था…….

जिसके कदमो में दुनिया बिछाने के ख्वाब देखे थे वो आज खुद मेरे लिए नंगी बिछी पड़ी थी ,......

गीले गीले होठो की लार मेरे लिंग से मिलकर मुझे सुकून दे रही थी और ना जाने निशा को क्या सुख दे रही थी की वो और भी जोरो से इसे चूसने लगी ,मैं अपने चरम में पहुचने वाला था…

“ओह मेरी रानी बहन चूस भइया का …….ओह नही “

मेरे मुख से ना जाने क्यो ये निकलने लगा था ..

वो इस बात के परेशान होने की बजाय और भी मस्ती में आ जाती थी और जोरो से चूसना शुरू कर देती थी ,उसके होठो से लार नीचे टपकने लगा था वही मेरी हालत और भी खराब हो रही थी ..

सांसे फूल रही थी और उसके मुख का चोदन कर रहा था,मैं अपने कमर को उठा उठा कर उसे स्वीकृति दे रहा था और वो भी अपने भाई के लिंग को पूरी तल्लीनता से चूस रही थी ,उसे देखकर तो ऐसा लग रहा था की उसे फिर खाने को कुछ ना मिलेगा और यही धरती पर एक ही चीज है जिसे चूसकर वो अपनी भूख मिटा पाएगी

वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी …..

मैंने उसे अपने ऊपर आने का संकेत दिया ,

वो मेरे ऊपर चढ़ गई ,

मैं उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगा,मेरे ही वीर्य के कुछ बून्द मेरे ही होठो में आ रहे थे……

हम दोनो ही मुस्कुरा उठे ,ये वो पल था जब हमारे बीच की सभी दीवारे ढह गई ,

सेक्स तो उत्तेजना में भी हो सकता है लेकिन जब बिना किसी अवरोध और उत्तेजना के भी जिस्म मिल जाए और ग्लानि की जगह जब होठो की मुस्कुराहट ले ले तो समझो की दीवार गिर गई

“केशरगढ़ के महल उस खण्डर में जाकर के क्या करोगे साहब “

उस छोटे से और भद्दे से आदमी ने कहा ..

“तुझे क्या करना है तू चल रहा है की नही “

मैंने उसे घूरा ,ये गाइड के रूप में मुझे दिया गया था ये हमे पूरा केसरगढ़ घुमाने वाला था,”

“अरे साहब नाराज क्यो होते है छलिए छलिए लेकिन वँहा घूमने लायक कोई जगह नही है “

मैंने उसे फिर से घूरा क्योकि मेरी बहने उसकी बात को सीरियसली ले सकती थी लेकिन मुझे डॉ ने वही मिलने को कहा था,

“तू चल ना यार क्या नाम है तुम्हारा “

“छेदीलाल छिछोरे “

“क्या हा हा हा “निशा जोरो से हँस पड़ी ,पूर्वी के साथ साथ मैं भी मुस्कुरा उठा ,

“ये कैसा नाम है छिछोरे ??”

लेकिन उस शख्स ने हमारी बात का बिल्कुल भी गुस्सा नही किया जैसे उसे पता ही हो की हम ऐसा ही कुछ रिएक्ट करेंगे ,

“वो क्या है सर मैं छ को छ बोलता हु “

उसने अपने बड़े बड़े सड़े हुए दांत हमे दिखाए

“वो तो सभी छ को छ ही बोलते है “

पूर्वी बोल पड़ी

“नही मेडम आप समझी नही मैं छ को छ बोलता हु “

हम सभी कन्फ्यूज़ थे तभी एक स्टाफ वाले ने हमे देख लिया ,

“सर वो ये कह रहा है की वो च को छ बोलता है ,और इसका नाम छेदीलाल चिचोरे है “

“बड़ा अजीब सरनेम है है यार तुम्हारा “

वो फिर से अपने सड़े हुए दांत मुझे दिखा दिया ,मेरी बहने थोड़ी सी हँसी लेकिन इस बार ज्यादा नही …

****

“साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे “

हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,

“अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है “

छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई

“हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये”

पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,

“ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका “

दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ …

अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..

“आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना “

ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,

“हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है “

वो मुस्कुराई ,

“आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता “वो मुस्कुराते हुए बोली

“मलीना ये देव है ,देव….श्रुति का पति “

मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था…

मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,

“अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी “

मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को …

काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी …..डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,

“कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर “

डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई …

“अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब “

इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी …….

मैं अभी अपनी बहनों के साथ मलीना मेडम के घर में बैठा हुआ था,वो मेरी बहनों से ऐसे घुल गई थी जैसे की वो उन्हें बहुत सालो से जानती हो ,डॉ निशा के नजर में आये बिना ही वँहा से जा चुका तथा शायद निशा को डॉ की जानकारी थी,मलीना मेडम हमे लंच के लिए अपने साथ ही ले आयी थी,मैं सोफे में बैठा इधर उधर देख रहा था वही मेरी बहने मेडम से गुफ्तगुह करने में व्यस्त थी ,मेरी नजर एक तस्वीर पर पड़ी और मेरी आंखे चौड़ी हो गई ,अभी तक तो मुझे डॉ और मलीना की हरकते ऐसे भी समझ नही आ रही थी लेकिन इस तस्वीर से तो मैं और भी परेशान हो गया था..

तस्वीर में एक लड़का और दो लडकिया थी ,अजीब बात थी की मैं दोनो ही लड़कियों को पहचानता था,लड़के के एक बाजू में खड़ी थी मलीना मेडम और दूसरे में जो खड़ी थी उसे मैं अभी तक काजल की माँ के रूप से ही जानता था,जी हा मुझे काजल ने उसी औरत को अपनी माँ कहा था,जो की उसके बचपन में ही गुजर गई थी ,बीच का शख्स मेरे लिए अनजान था जिसके हाथो में एक छोटी सी बेबी थी ,उसकी आंखे मुझे काजल की याद दिलाती थी ……..

क्या वो सच में काजल है ???

अगर ऐसा है तो क्या काजल मलीना की बेटी है या फिर उस औरत की जिसे काजल अपनी माँ कहती है,क्या काजल का नाम काजल ही है या फिर श्रुति जैसा की मलीना ने कहा ….

बहुत से सवाल मेरे दिमाग में थे ,सबसे बड़ी ये बात थी की अगर मलीना सच बोल रही है तो ऐसी क्या मजबूरी हो गई की काजल को अपना नाम बदलना पड़ा..और मुझसे ये बात छुपानी पड़ी ……..

 
“ये किसके साथ फ़ोटो खिंचाया है आपने “

काजल वो फ़ोटो देखकर बहुत ही उत्त्साहित लग रही थी जो की निशा ने अपने वाट्सअप के स्टेटस में डाला था,जिसमे निशा ने मेरे,पूर्वी और मलीना मेडम के साथ सेल्फी ली थी ..

“पहचानो ..तुम इन्हें जानती हो “

“हा जानती तो हो मैं इन्हें ,इन्ही की तो पुस्तके पढ़ती रही हु मैं ,मेडम मलीना “

काजल ने ऐसे कहा जैसे पुस्तको के अलावा मलीना से उसका कोई संबंध ही नही था,क्या वो सच में झूट बोलने में इतनी माहिर थी की अपनी माँ को पहचानने से भी इतने सफाई से इनकार कर दे …

“हम्म ये केशरगढ़ के किले में मिली हमे ,निशा और पूर्वी सके अच्छी ट्यूनिंग हो गई तो उन्होंने अपने घर खाने पर बुला लिया …”

“वाओ बहुत ही अच्छा “

झूट बोलने वाला कितना भी महारथी क्यो ना हो कुछ कमियां तो हर इंसान में होती है,काजल की आवाज थोड़ी धीमी हो चुकी थी शायद वो अपने भरे हुए गले को छुपाने की कोसीस कर रही थी ,मैंने उसे थोड़ा और कुरेदने की सौची शायद मैं जान पाउ की वो सच में भावनाओ में है या नही ..

“मैंने उन्हें तुम्हरे बारे में बतलाया वो बहुत खुस हुई की तुम उनके किताब की दीवानी हो “

काजल थोड़ी देर को चुप थी,

“फ़ोटो भी दिखाई क्या मेरी “

“ओ यार भूल गया ,कल दिखाऊंगा “

“नही ……..वो नही क्या जरूरत है “

लेकिन तब तक उसकी नही ने मेरे दिमाग में पूरा मामला साफ कर दिया था ,वो नही को थोड़ा जोर से बोल गई थी जिसका शायद आभास उसे भी हो गया था ,दोनो में कुछ तो संबंध जरूर है वरना कहा पुरातत्व विज्ञान और कहा वो मैनेजमेंट की लड़की ,मुझे तो पहले भी ये बात अजीब लगती थी की क्यो काजल उनकी और सिर्फ उनकी ही किताब पढ़ती है ..

“हम्म्म्म ओके …….”

“जान आपकी बहुत याद आ रही है “

काजल ने बात को बदलने की कोशिस की ,मुझे उसकी आवाज में वो भारीपन मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी ,समझने में कोई भी देरी नही लगी की ये बातो को घूमना चाहती है वरना उसे मेरी याद आएगी और वो इतनी दुखी हो जाएगी की उसकी आवाज ही भर जाए ये तो मुझे मुमकिन नही लगता था ,,,,

“तुम भी आ जाओ फिर यंहा ,अच्छी जगह है ,एक दो दिन और रुकने की सोच रहा हु “

“नही ..मत रुको जल्दी आ जाओ ,,मैं अपने काम कर कारण वँहा नही जा सकती “

वो मुझे आकर्षित करने के लिए अपनी आवाज को नशीली बनाने लगी …

“आ जाओ ना मुझे मसलने “उसने बड़ी ही सेक्सी अदा में कहा ..

“तुम्हे मसलने के लिए तो खान वँहा बैठा है “

मैंने एक व्यंग कर दिया जिससे वो बुरी तरह से बौखला गई

“तुम ...तूम ना ….कितनी बार कहा की ये सब को हमारे बीच में मत लाओ …”

उसके आवाज से नाराजगी साफ साफ थी..मैं जोरो से हँसने लगा ..

“अच्छा छोड़ो उसे मैं एक दो दिन में ही आता हु ,और तुम्हे कुछ चाहिए यंहा से …”

“बस तुम आ जाओ और कुछ भी नही चाहिए “

काजल की आवाज में वो गर्मी अब नही रही ,मुझे लगा कि शायद मुझसे कोई गलती हो गई है .

“नाराज हो गई क्या ,लव यु जान “

मैं अपनी आवाज नरम करके बोलने लगा ..वो हल्के से हँसी

“बहुत सारा लव यु ….ऊऊऊम्म्मम्माआआ “

वो खुस थी और उसकी आवाज में चहक वापस आ गया था ..

“अब जल्दी आओ ,बहुत सी बाते करनी है तुमसे ..”

मैं काजल से बात करके पलटा ही था की दरवाजे में मुझे निशा दिखाई दी ,वो अपने बालो में उंगलिया फिराते हुए मुझे घूर रही थी ,उसके होठो में एक कातिल सी मुस्कान थी और वो अपने पारदर्शी कपड़ो से अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी ,जवानी के इस मोड़ पर उसके जिस्म में पूरा भराव आ चुका था और वो कपड़े को फाड़ डालने को बेताब हो रहा था,अब वो मेरी बहन नही रह गई थी की मैं उसके जिस्म के भराव को ना निहारु…

वो इठलाते हुए मेरे पास आयी ,और अपनी बांहे मेरे गले में डालकर झूल गई ….

“हम यंहा पर हनीमून मनाने आये है और आप मेरी सौत से लगे हुए हो “

उसकी मुस्कान में नाराजगी भी मिक्स थी ,मैंने उसे कुछ बोलना सही नही समझा और अपने होठो को उसके होठो से मिला दिया ,

सभी बाते बस तूफान में बह गई वो प्यार का तूफान था ये की हवस का ??????

मुझे लगता है की वो हवस का ही तूफान था क्योकि प्यार का रिश्ता तो हम पीछे छोड़ आये थे ………….

जिस्म की प्यास बुझ चुकी थी और मैं अपनी खिड़की से बाहर झांक रहा था ,बाहर मुझे छिछोरे दिखाई दिया ,मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई और उसकी हरकतों को देखने लगा,

वो नाम का ही नही काम का भी छिछोरा था ,

इसी रेस्टरूम में काम करने वाली एक महिला को पकड़े हुए दिखाई दिया ,वो दोनो झाड़ियों के पीछे थे लेकिन मैं दूसरी मंजिल में खड़ा हुआ था ,गार्डन की झाड़ियों के पीछे का दृश्य देखकर मैं अपनी हँसी रोक नही पाया ,क्योकि वो महिला शादीशुदा थी और छिछोरे के बीवी तो नही थी ……

“छेदीलाल “

मैं जोरो से चिल्लाय जिसे सुनकर वो दोनो ही अलग हुए और मुझे ऊपर खड़ा देख जैसे उनके प्राण ही सुख गए …

महिला दौड़ती हुई भागी वही छेदीलाल बस मूर्ति बना हुआ मुझे ताक रहा था ,मैं खिलखिला के हँस पड़ा ,मैं अपनी शर्ट पहन नीचे आया ही था की छेदीलाल मेरे पाव में गिर गया ..

“मुझे माफ कर दीजिये दीजिये साहब,किसी को मत बताइयेगा वरना नॉकरी जाएगी वो अलग लेकिन इसका पति मार मार के मेरा भर्ता ही बना देगा “वो गिड़गिड़ाने लगा और मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई

“अच्छा पहले बोल की चंदू के चाचा ने चंदू के चाची को चांदी के चमचे से चटनी चटाई ..”

मैं मुस्कुराकर उसे देखने लगा ,वो हड़बड़ाया सा मुझे देखने लगा

“छंदू के छाछा ने छंदू के छाछि को छांदी के छमचे से छटनी छटाई”वो बड़ी ही मुश्किल से बोल पाया

मैं जोरो से हँस पड़ा और उसका मुह मुरझा गया ..

“अच्छा चल मेरा एक काम कर तेरा कमरा कहा है “

वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,मैं उसे लेकर उसके कमरे में चला गया

एक छोटा सा रूम था उसका ..

मैंने मोबाइल निकाल कर उसे काजल की तस्वीर दिखाई

“इसे पहचानता है “उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जिसका मतलब मुझे समझ आ रहा था की ये इसे जानता है …

……………..

“साहब आपके पास इनकी तस्वीर कहा से आयी “

“तू वो बता जिसे मैं पूछ रहा हु “

“जी साहब जानता हु ..”

वो हड़बड़ा रहा था …

“कौन है ये “

“श्रुति श्रुति मेमसाहब”

उसकी जबान बुरी तरह से लड़खड़ा रही थी लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल चुका था की काजल असल में कौन है ..इससे पहले की मैं और कुछ पूछता मेरा मोबाइल बज उठा ,नंबर डॉ का था ..

“उससे पूछने से तुम्हे तुम्हारे सवालों का सही जवाब नही मिलेगा ,कल तुम मुझसे मिलो अकेले में …”

उन्होंने पता तो बता दिया लेकिन मैं और भी चकित रह गया क्योकि डॉ मुझपर भी नजर रखे हुए था …..

 
मैं बड़ी मुश्किल से डॉक्टर से बोल पाता हु,

“वो चाहती क्या हैं, “

मैं झुंझलाया था …..

“वह चाहती क्या है यह तो शायद वही बता पाएगी ,लेकिन एक चीज मैं तुम्हें बता देना चाहता हूं की बदले की आग व्यक्ति से कुछ भी करा सकती है.. चाहे वह कितना ही कमजोर क्यों ना”

हो डॉक्टर की बात मेरी समझ में आ रही थी लेकिन फिर भी मैं असमंजस की स्थिति में था आखिर काजल इतना परेशान क्यो थी ?

क्या मेरा कोई वजूद नहीं था शायद उसके लिए….शायद नही वो मुझसे प्यार करती है , वह मेरे लिए बहुत मायने रखती थी रखती है और रखती रहेगी, मेरे सामने काजल का अतीत घूम रहा था उसके बचपन की यादें रह रहकर मुझे सता रही थी न जाने कितने दुख उसने झेले थे जिसके बारे में वह बात नहीं करती ..शायद उसने कभी मुझसे यह नहीं चाहा कि मैं उसका साथ दु या शायद वो जानती थी कि मैं उसका साथ नहीं दे सकता, बात इतनी आसान तो नहीं थी जितना मैं समझ रहा था उसने कई दुख देखे हैं जो मेरी समझ से परे हैं, काजल मेरी अपनी काजल मैं उसे कैसे किसी सीमाओं में बांध पाऊंगा वो हर सीमाओं से परे है ,उस पानी की तरह जो बस बहती जाती है,वह उस सावन की तरह है जो कब आएगी इसका अंदेशा किसी को नहीं , मैं दर्पण में खड़ा अपने अक्स को निहार रहा था ,परछाई... वह तस्वीरें... वह हल्की हवा की खुशबू ,महक का जादू अतीत की कही अनकही कहानियां थी जो मुझे जानने थी, मैं परेशान था व्याकुल था मेरा दिल गवाही नहीं दे रहा था कि वह गलत है और वही हुआ मुझे जितना भी अब तक पता चला मुझे यही समझ आया कि काजल गलत नहीं थी ना वह है और शायद वह नहीं होगी उसके साथ जो बीती थी वह एक दर्दनाक घटना थी शायद उसका रोग उसके जीवन में आज भी कायम था, मैं अपनी पलकें गड़ाए डॉक्टर को निहार रहा था डॉक्टर भी मुझे घूर कर देख रहा था,, जैसे जानना चाहता हो कि मेरे दिल में क्या चल रहा है…

आखिर उसने कहा

“ मैंने जो भी तुम्हें बताया है कभी इसका जिक्र काजल से मत करना न जाने उसके लिए कितनी बड़ी बात होगी वह हर चीज तुमसे छुपाना चाहती है, क्योंकि उसे पता है तुम्हें बताने से सिर्फ उसका दुख बढ़ेगा, उसे खुशी देना हो सके तो उस का साथ देना मैं जानता हूं कि तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल होगा लेकिन मैं जानता हूं कि तुम यह कर सकते हो…”

डॉक्टर वहां से उठ कर चला गया और मैं बस एक तक दिवाल को घूरता रहा…

*******************

घूमते-घूमते ना जाने मैं कहा जा रहा था, मैं उन जगहों में घूम रहा था जहां काजल की पूरी जिंदगी थी ,लेकिन उसने कितने राज अपने सीने में छुपाए हुए थे वह 2 साल पहले ही तो यहां आई थी लेकिन मुझे कभी पता नही चल पाया …

मैं उस होटल में पहुंचा जहां से इन सब की शुरुआत हुई थी नाम था आदित्य इंटरनेशनल

मैं बस निहारे जा रहा था वह एक शानदार होटल था...

वह वापस अपनी बहनों के साथ आया और लजीज खाने का लुफ्त उठा रहा था आसपास नजर दौड़ाई कुछ खास नहीं कुछ ऐसा नहीं जिससे मुझे संदेह हो..

“भइया खाना तो बहुत अच्छा है” निशा ने कहा

“ हां” मैंने जवाब दिया…

अचानक ही मैं बहुत गुस्से में आ गया

“यह सब क्या है” मैंने जोरों से कहा वहां पर बेटर तुरंत उपस्थित हुआ.

“ क्या हुआ सर”

“ यह क्या है”

मैंने प्लेट में पड़े हुए एक काक्रोच की तरफ इशारा किया ,वह बुरी तरह चौका

“ सर सर यह कहां से आया”

मैंने उसे घूरकर देखा,

“ यह खाना तुमने ही लाया था ना “

वह चकित हुआ

“ जी जी सर,पता नहीं सर यह कैसे हुआ”

लेकिन मैं क्रोधित था मैंने उसकी एक न सुनी

“अपने मैनेजर को बुलाओ “ मैं फिर जोर से बोला, वह डरता हुआ भागा थोड़ी देर में होटल का मैनेजर मेरे सामने था, वह मुझसे माफी मांग रहा था लेकिन मैंने एक तमाशा खड़ा कर दिया..

आखिरकार थक कर उन्होंने कुछ फोन किए,और मेरे होठो में मुस्कान खिल गई …

कुछ ही देर में वहां एक लंबा चौड़ा सा व्यक्ति आकर खड़ा हुआ और बड़ी नम्रता से मुझसे कहा

“सर जो भी हुआ उसके लिए हमें माफ कर दीजिए मैं इस होटल का मालिक हूं आपका खाना फ्री है और आशा करता हूं कि यह बात यहां से बाहर नहीं जाएगी “

मैंने उस व्यक्ति को घूरा और उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया जैसे वह समझ गया हो कि मैं मान गया हूं..

“ हेलो सर मेरा नाम अयूब खान है मैं इस होटल का मालिक हूं” मैंने अपना हाथ बढ़ाया वह कुछ 25 साल का शख्स था, दिखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम लग रहा था आयूब मैंने मन ही मन दोहराया अच्छा तो यह अजीम का भाई है, मेरे चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई…

आयूब को देख पूर्वी के चेहरे पर एक अलग स्वभाव आया .मैं उस को पहचानता था मैं जानता था की पूर्वी उसकी तरफ आकर्षित है ,यह इस उम्र की नजाकत थी कि किसी भी स्मार्ट और हैंडसम लड़के को देखकर एक लड़की तथा किसी भी खूबसूरत लड़की को देखकर एक लड़का आकर्षित हो जाए एक सामान्य सी बात है मैं उससे हंसकर बात करने लगा और थोड़ी देर में वह हमसे बहुत ही घुल मिल गया देखते ही देखते निशा और पूर्वी की उससे दोस्ती हो गई ,हमने उससे विदा लिया और उसे शहर आने का निमंत्रण दिया जब उसे पता चला कि मैं एक होटल का मैनेजर हूं तो वह मुझसे और भी खुल गया और जब उसे पता चला कि मैं रश्मि के साथ काम करता हूं तो उसका चेहरा अचानक सूख गया मैं उसकी भावनाओं को समझ सकता था ,मैंने हंसा

“ कोई बात नहीं जो हुआ सो हो गया लेकिन मुझे एक चीज समझ नहीं आती आखिर खान साहब के दो बेटे हैं तो क्यों अजीम को ही अपना बेटा मानते हैं या ये कहे कि दुनिया के सामने सिर्फ अजीम ही आता है मुझे तो आज तक पता नहीं था कि खान साहब के दो बेटे हैं”

उसका चेहरा और मुरझा गया उसने बात को बदलना चाहा और मैंने भी कोई जोर नहीं डाला क्योंकि मैं जानता था की असलियत क्या है और यही असलियत शायद मुझे काजल का बदला लेने में मदद करने वाली थी

********

“तो मुझे लगता है तुम्हें आयूब बहुत पसंद आया”

मैंने हंसकर निशा और पूर्वी से कहा ,पूर्वी तो जैसा शर्मा ही गई मैंने पहली बार उसे शरमाते हुए देखा था मैं भी थोड़ा हंसा और निशा भी क्योंकि मुझे पता था कि निशा का आकर्षण सिर्फ मेरे लिए है ..

लेकिन क्या मैं पूर्वी का इस्तेमाल करूंगा ???

शायद???

मेरे लिए यह सोचना भी पाप है लेकिन क्या सच में ??

मैं सोच में गुम हो गया मैं यही सोच रहा था कि क्या मैं सच में पूर्वी का इस्तेमाल करना चाहता हूं आयुष को फसाने के लिए.. शायद नहीं, शायद हां ,शायद पता नहीं,

मैं असल में दोनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता था मैं चाहता था जो हो बस हो जाए, अगर इस दौरान मुझे कुछ ऐसी चीज पता चले या कुछ ऐसा हो जाए जिससे मैं काजल की मदद कर सकूं तो शायद वह कार्य मुझे करना चाहिए और अगर ऐसा ना हो तो ???

जिस तरह मैंने आयूब व पूर्वी को नजर मिलाते देखा था मुझे लग रहा था इन दोनों के बीच कुछ तो खिचड़ी पक सकती हैं अभी मैं कुछ कह नहीं सकता था लेकिन पूर्वी मेरी सबसे प्यारी बहन है मेरे लिए यह करना बहुत मुश्किल था कि मैं उसे मछली के दाने की तरह इस्तेमाल करू, मैं उसे उसकी स्वतंत्रता में रहने देना चाहता था ,मैं चाहता था कि अगर वह प्यार करें तो सफल हो, मैं चाहता था कि वह खुश रहे और शायद इसी प्यार में और इसी खुशी में मुझे मेरी मंजिल मिल सकती थी, मैं सोच में गुम सा हो गया मुझे डॉक्टर की बताई बातें याद आ रही थी तो साथ ही पूर्वी का उस लड़के को देखना ,उन दोनों की निगाहों में एक अजीब सा आकर्षण एक दूसरे के लिए ,वह आकर्षण किसी भी नौजवान की आंखों में जब देखा जाता है तब बड़े ही आराम से बताया जा सकता है कि आखिर उनके दिल में चल क्या रहा है लेकिन क्या आयूब एक अच्छा लड़का है ??

मुझे नहीं पता था जितना मैं उसे जान सका या जितना मैंने दूसरों के द्वारा सुना था.. जी हां मैं आज दिनभर यही तो कर रहा था होटल आदित्य इंटरनेशनल की पूरी जानकारियां मेरे पास थे आयूब की जानकारी मेरे पास थी, जितना मैंने उसे जाना मुझे बस इतना ही समझ आया कि वह एक बड़ा सुलझा हुआ लड़का है शायद पूर्वी के लिए अच्छा है, शायद ना भी हो?

लेकिन मैं इन दोनों को स्वतंत्रता देना चाहता था देखना चाहता था कि आखिर कितनी आगे बढ़ते हैं खैर जो भी हो मैं थक चुका था जमाने भर के विचार मेरे दिमाग में घूम रहे थे और अब मुझे जरूरत थी आराम की और शायद उससे पहले निशा की…

**************

पता नहीं क्यों लेकिन मुझे निशा की आदत सी पड़ रही थी उसका मुझे इतना प्यार करना मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई मुझे इतना भी प्यार कर सकता है, रही बात काजल की मैं जानता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती हैं लेकिन वह मेरी बीवी थी और निशा मेरी बहन दोनों के व्यक्तित्व में जमीन आसमान का फर्क है, न जाने क्यों लेकिन मैं दिन-ब-दिन निशा की और आकर्षित होते जा रहा हूं ,जिसे मैंने निशा को बचाने के लिए शुरू किया था ,जिसे मैंने अपनी बहन की भलाई के लिए शुरू किया था अब वह मेरे लिए पाप नहीं रह गया था अब शायद वह मजा बन गया एक ऐसा मजा जिसमें मैं डूबते जा रहा हूं ,उसके शरीर कण कण उसके अंग प्रत्यंग उसके कटाव उसके एक एक घुमाव, उसके जिस्म का भराव , उसकी मासूमियत ,उसकी हंसी ,उसके बाल ,उसके गाल, उसके होठों की लाली ,उसकी मतवाली चाल, उसके पसीने की सुगंध, उसका हंसना ,उसका बोलना, उसका चलना, उसका रुकना, उसका देखना, उसका मुझे छूना ,उसका मुझे प्यार करना उसका हर एक बर्ताव ,उसकी अदाएं ,उसके नखरे, उसके झूठ, उसकी सच, उसकी हया, उसकी बेहयाई , उसकी नजाकत उसकी फितरत उसकी मोहब्बत उसकी सिहरन, उसकी उलझन ,उसका द्वेष उसका राग ,उसकी सीमाओं को तोड़ना और नई सीमा बना देना ,उसका मेरे बालों पर हाथ फेरना.. उसके आंसू ...जब वह कहती है कि आप मेरे हो सिर्फ मेरे.. उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और आंखों का वह काला घेरा जो काजल से बनता है, उसकी आंखों से झड़ते हुए प्यार के झरने उसका दिल जो इतना सख्त होकर भी कितना नरम है, मुझे कभी-कभी लगने लगा कि मैं कहीं पूरी तरह से तो उसका नहीं हो जा रहा हूं, हां शायद लेकिन नहीं शायद,

वह मेरी बीवी नहीं थी वह मेरी प्रेमिका नहीं थी लेकिन अब वह मेरे लिए इन दोनों से बढ़कर है मैं क्या हूं ? मैं क्यों हूं ? मैं किसका हूं ???यह सवाल बड़े पेचीदे हैं लेकिन उसका एक जवाब निशा के पास है कि ‘आप मेरी जान हो आप मेरे लिए हो और आप मेरे हो’ उसकी प्यार भरी बातें जिसका शायद कोई मूल्य ना हो, जो तर्क की सीमाओं में नहीं बंधती जो तर्क से बाहर है वो अलग ही दुनिया की बात है जो एक प्रेमिका एक प्रेमी से करती हैं,या एक बच्ची करती है अनगढ़ सी ,बेमतलब सी , वैसी बातें यह सब निशा की खूबी थी तर्क से दूर प्यार की किसी दुनिया में खोई हुई थी ,एक सागर में खोई हुई थी जिसका कोई किनारा उसके पास में ना था …

वह मुझे अपनी गहराई में पाना चाहती थी, वह हमेशा मुझ में समाना चाहती थी, उसके पास इसके सिवा और कोई काम नहीं था उसकी जिंदगी में इसके सिवा और कोई मकसद नहीं था और शायद यही बात मुझे उसकी ओर इतना आकर्षित करती है ,क्योंकि काजल की जिंदगी में एक मकसद है और वह मकसद मैं नहीं हूं…

लेकिन निशा की जिंदगी में जो मकसद है वह सिर्फ मैं हूं………………………………………

 
रसदार होठों का चुंबन ले कर, जीभ में जीभ घुसकर जीभ से जीभ मिलाकर और दिल की धड़कनों को एक साथ करें फकत उसके होठों को अपने दांतो में गड़ा कर मैं मदहोश हो रहा था….

निशा की जवानी में डूब कर उसके गद्देदार पिछवाड़े अपने हाथों से सहलाते हुए उसके गीले गीले होठों पर मैं और थूक ,मिला रहा था,

जीवन का यह सुख शायद सभी को नसीब होता है लेकिन मेरे जैसा नहीं, क्योंकि नीचे पड़ी वह लड़की कोई और नहीं थी वह मेरी बहन थी मेरी अपनी बहन जिस की जवानी के उठान को हम अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए उपयोग में ला रहा थे.. “भैया भैया भैया भैया भैया थोड़ा धीरे धीरे कीजिए ना इतना क्यो उतावले हो रहे हो, इतने क्यों मतवाले हो रहे हो आपकी ही हु , आपकी ही रहूंगी इतने उतावले मत हो “

निशा कहे जा रही थी लेकिन उसकी बातो का मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था, मैं तो बस उस में डूबना चाहता था उस गहराई तक जहां तक आज तक मैंने डूबा नही था, हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे और मेरे हाथ उसके गद्देदार पिछवाड़े को सहलाते हुए उसे अपनी ओर खींच रहे थे..

दो नंगे जिस्म एक दूसरे से सटे हुए एक दूसरे में गुथे जा रहे थे सांसे तेज थी धड़कन मध्यम थी, जितना हो सके एक दूसरे से मिलने की ख्वाहिश थी ,दीवानगी सर पर चढ़ी हुई थी मेरा लिंग अकड़ कर अपनी प्यास बुझाने को बेताब था , वही निशा की योनि रस से भरी हुई छलक रही थी ,मेरे लिंग की चमड़ी थोड़ी पीछे हुई और वह धीरे-धीरे निशा की योनि में समाते गई.. एहसास ..वह एहसास इतना सुखदाई था कि हम दोनों के ही मुंह से सिसकी निकल गई निशा ने मेरे बालों को जोरों से पकड़ा और अपनी और खींचा मैंने भी उसके टांगों को हल्का सा फैलाया और अपने लिंग को और भी अंदर दबाने लगा जब तक कि वह अपनी पूरी गहराई में नहीं चला गया..

निशा ने मेरे होठों को अपने दांतो से काटा शायद मुझे दर्द होना चाहिए था लेकिन वह दर्द इतना मीठा था कि मैं बार-बार लेना चाहता था, रात के अंधेरे में हल्की रोशनी से कमरे में फैली दूधिया रोशनी में दो जिस्म एक हो रहे थे ,कमर हल्की-हल्की चल रही थी निशा के यौवन से भरपूर उसके स्तन मेरे हाथों में थे ,कभी उसके फूलों को अपने होठों से चूमता और उसमें रस के भंडार को और निचोड़कर पीने की कोशिश करता..

दोनों डूबे थे मस्ती अपने चरम में थी मैं निशा के ऊपर उछले जा रहा था और वह अपने कमर को मेरे कमर से मिलाने की पूरी कोशिश कर रही थी, निशा ने मुझे नीचे पटक दिया और मेरे ऊपर आकर अपने कमर को हिलाने लगी..

“ भैया मैं मर जाऊंगी ...आह आह ..मुझे अपना बना लो ...आह आह ..सिर्फ अपना बना लो ...आह आह ..बस मेरे हो जाओ ओह भईया ...आह आह ..आह आह .. और मुझे कुछ नहीं चाहिए,जोरो से भइया आह मुझे अपने प्यार में डूबा लो भइया जोरो से आह भइया .. मैं और कुछ नहीं चाहती आई लव यू भैया ,आई लव यू ,आई लव यू भैया, आई लव यू,...आह आह .....आह आह आह आह आह आह .”

अब वह मेरे ऊपर थी और पूरा कंट्रोल उसके ही हाथों में था मैं शांत पड़ा हुआ उसके चेहरे को देख रहा था वह मेरे ऊपर आ गिरी थी और उसके बाल मेरे चहरे के चारों तरफ फैल गए, निशा की सांसे बहुत जोरों से चल रही थी जो मेरे गालों से टकरा रही थी उसकी आंखें अधमुंदी थी जैसे कोई नशे में हूं थोड़ी देर बाद जैसे तूफान हल्का सा शांत हुआ और कमर धीरे धीरे चलने लगे हवस की गहराई प्यार की गहराई में बदलने लगी थी, हम दोनों एक दूसरे के जिस्म का पूरा एहसास कर पा रहे थे और वो प्यार जिस्म से लेकर मन तक पहुंच रहे थे हम एक दूसरे की रूह को छूने में कामयाब हो पा रहे थे, मैं उसके बालो को सहला रहा था और वह मेरे ऊपर गिरी हुई अपने जिस्म को सिर्फ मेरे लिए छोड़ दी थी उसके नाज़ुक शरीर का एहसास मेरे त्वचा से होता हुआ मेरे मन की गहराइयों में उतर रहा था..

मैं उसे बहुत प्यार करने लगा था, पहले भी करता था लेकिन अब प्यार का स्वरूप भी बदल चुका था, मैंने उसके बालों को अपने चेहरे से हटाया और उसको अपनी बाहों में जोरों से खींचा वह कसमसाई हुई मेरे बाहों में समा गई वह अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी और मेरे जिस्म को सहला रही थी वह किसी समर्पण की प्रतिमा सी थी अपने आप को मेरे लिए समर्पित कर चुकी थी, मैंने आंखें खोली एक हल्का सा प्रकाश दरवाजे के माध्यम से कमरे में आता हुआ दिखाई दिया ..

देखा तो दो आंखें देखते ही समझने में देर नहीं लगी कि वह और कोई नहीं बल्कि पूर्वी है ,पूर्वी का मासूम चेहरा मेरे सामने खिलकर आ गया था..

हम दोनों की नजरें मिली वह जाने को हुई लेकिन अचानक से फिर रुक गई उसकी आंखों में आंसू थे एक अजीब सा दर्द शायद छलकने को था, शायद मैं उस दर्द को समझ पाता वह अपने आंखों से कैसे देख पा रही थी कि उसका खुद का भाई अपनी सगी बहन के साथ नंगा सोया है.. किसी के लिए भी यह सोच पाना मुश्किल है लेकिन मेरी प्यारी सी छोटी सी बहन इतने बड़े दर्द को किस प्रकार झेल पा रही होगी. उसके आंखों का आंसू मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आया मैंने अपने हाथ उठाया है और उसे अपने पास बुलाया, उसने अपना सिर ना में हिलाया लेकिन मैंने उसे फिर से आंखों ही आंखों में इशारा किया आजा शायद मुझे तेरी जरूरत है उसने एक बार निशा की और देखा मैंने आंखों से कहा कि इसकी फिक्र मत कर, वह हल्के कदमों से कमरे में आई मैंने उसका हाथ थामा और अपनी ओर खींच लिया वह सकुचाई सी धीरे से बिस्तर में बैठी निशा ने अचानक अपना सिर उठाया कभी वह पूर्वी को देखती तो कभी मुझे मैंने प्यार से निशा के चेहरे को सहलाया

“क्या यह मेरी बहन नहीं है, मैं जानता हूं कि तुम दोनों को ही पता है कि क्या हो रहा है लेकिन मैं किसी से छुपाना भी नहीं चाहता, निशा मैं उससे बहुत प्यार करता हूं और इस प्यार में कोई बंटवारा नहीं है कभी यह मत सोचना कि मेरे लिए पूर्वी और तू दो अलग हैं तुम दोनों ही मेरे लिए एक ही हो.. हां यह जिस्म का रिश्ता जो तेरे साथ मेरा बन गया है वह शायद एक भाई बहन के रिश्ते में नहीं होना चाहिए था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं पूर्वी को भूल जाऊं या तेरे ऊपर मेरा कोई विशेष अधिकार हो गया तुम दोनों आज भी मेरे लिए मेरी जान हो ,मेरी बहने हो ,आज भी मेरी कलाई में राखी तुम्हारे नाम की बंधती है…..”

“ निशा मेरी बात को समझना जितना अधिकार तुम्हारा मेरे ऊपर है उतना ही पूर्वी का भी है ..यह जिस्मानी रिश्ता केवल मेरे और तुम्हारे बीच ही रहेगा ,लेकिन मुझे पूर्वी को भी प्यार करने दे “

निशा बहुत भावुक हो चुकी थी उसकी आंखों में आंसू था साथ में पूर्वी के भी शायद इन दिनों जब उसके मन से सभी के लिए नफरत निकल चुका था और वह मेरे ही दुनिया में खोई हुई थी इस समय में और इस खुशी में उसे सोचने पर मजबूर किया था की सच में हम दोनों भाई बहन हैं हमारा जो रिश्ता बन चुका है उसे भुलाया नहीं जा सकता उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन निशा का मेरे ऊपर एकाधिकार चाहना शायद निशा को यह बात समझ आ गई थी कि प्यार में अधिकार नहीं होता ,या समझ नहीं आई थी..??

मैंने फिर से निशा की आंखों में देखा

“बहन... मेरी जान... प्यार में कोई एकाधिकार नहीं होता असला प्यार में तो अधिकार ही नहीं होता प्यार में होता है तो सिर्फ और सिर्फ समर्पण जो तूने किया है मेरे लिए, लेकिन अगर तू यह चाहती है कि कि तेरा मेरे ऊपर अधिकार हो तेरे प्यार नहीं बस जिस्म की हवस होगी यह वासना होगी, अधिकार की चाह करना ही वासना है”

निशा ने मेरी आंखों की गहराइयों में झांका और मेरे होठों पर हल्का सा चुंबन दिया,

“ भैया मैं जानती हु कि आप क्या कहना चाहते हो लेकिन क्या करूं ..जब आपको किसी दूसरे को प्यार करते देखती हु तो दिल जल जाता है सांसे रुक जाती हैं लगता है कि कोई आपको मुझसे छीन लेगा मैं इस बात से परेशान हो जाती हु कि कैसे आपके प्यार का बटवारा करूँगी ,भैया मैं मानती हूं कि मुझसे गलती हुई लेकिन क्या आप मुझे माफ नहीं करोगे..”

मेरे होठों पर मुस्कान आ गई मैंने पूर्वी का हाथ पकड़ा और उसे अपने ऊपर खींचा मेरी एक बाह में निशा थी वहीं दूसरी बाह में पूर्वी..

निशा के जिस्म में एक भी कपड़ा नहीं था उसकी योनि में अभी भी मेरा लिंग पूरी तरह से समाया हुआ था लेकिन पूर्वी?? पूर्वी मासूम निश्चल सी मेरे बाहों में खुद को सामने की कोशिश कर रही थी वह अचानक से रो पड़ी

“भैया यह क्या हो रहा है मैंने कभी ऐसा तो नहीं सोचा था मैंने आपका प्यार चाहा है , मैं दीदी का प्यार चाहा है , मैं चाहती थी कि आप दोनों मिलो ,मैं आपके और दीदी के बीच नहीं आना चाहती थी ..लेकिन ??

यह क्या हो रहा है क्या प्यार करना इसी को कहते हैं क्या प्यार करने के लिए दो जिस्म का मिलना जरूरी है???

क्या जिस्मों के बाहर प्यार नहीं होता??

अगर दीदी आप से प्यार करती थी क्या जरूरी था कि उनका जिस्म आपके जिस्म से मिले क्या जरूरी था वह करना जो दुनिया की नजर में गलत है????”

मेरी मासूम बहन ने मुझसे ऐसा सवाल पूछ लिया था जिसका जवाब मेरे पास नहीं था शायद उसने मुझे आइना दिखा दिया था लेकिन अब देर हो चुकी थी बहुत देर मैं प्यार से उसके बालों को सहला रहा था इधर निशा मेरे गालों को चूमते हुए अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी बड़ी अजीब सी कंडीशन थी ...एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसके साथ मेरी जिस्मानी संबंध है और एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसे बेहद प्यार करता था जिसके बारे में मैं गलत सोच भी नहीं सकता था ..

मासूमियत हवस और प्यार तीनों एक साथ हैं थे जज्बात मोहब्बत और भावनाओं का उफान सब कुछ एक साथ थे.. जिस्म की आग ,प्यार की ठंडकता सब कुछ एक साथ थे, निशा रो रही थी पूर्वी भी रो रही थी और मेरे आंखों में पानी था.. दो जिस्म नंगे पड़े थे लेकिन आंखों में पानी लिए, मेरा लिंग मेरी बहन की योनि की गहराइयों में था उसमें अकड़ भी थी और वह योनि के रस से भीगा हुआ भी था लेकिन मन में हवस का एक कतरा भी नहीं बचा था, निशा भी रोते हुए अपने कमर को हल्के हल्के हिलाए जा रही थी और मेरा अभी भी उसके मांसल चूतड़ों को सहलाया जा रहा था.. मेरी दोनों बहनें मेरे साथ थी, उस रूप में जो दोनों चाहती थी एक को बस प्यार चाहिए था और दूसरे को मुझ पर अधिकार मेरे जिस्म पर अधिकार.. दोनों को वो मिला था जो वह चाहते थे और मुझे???

मुझे मिली थी जन्नत, मेरे साथ दोनों थे दोनों का प्यार मेरे साथ था , मेरा मन शांत था मैं खुश था मानो पूरे दुनिया की जन्नत मेरे कदमों में हो, पूरी दुनिया की खुशियां मेरे कदमों में है अपने दोनों बहनों को प्यार करना चाहता था उस तरह से जिस तरह से वह चाहती थी.. एक से जिस्मानी होकर तथा दूसरे से रूहानी होकर .....

 
मासूमियत हवस और प्यार तीनों एक साथ हैं थे जज्बात मोहब्बत और भावनाओं का उफान सब कुछ एक साथ थे.. जिस्म की आग ,प्यार की ठंडकता सब कुछ एक साथ थे, निशा रो रही थी पूर्वी भी रो रही थी और मेरे आंखों में पानी था.. दो जिस्म नंगे पड़े थे लेकिन आंखों में पानी लिए, मेरा लिंग मेरी बहन की योनि की गहराइयों में था उसमें अकड़ भी थी और वह योनि के रस से भीगा हुआ भी था लेकिन मन में हवस का एक कतरा भी नहीं बचा था, निशा भी रोते हुए अपने कमर को हल्के हल्के हिलाए जा रही थी और मेरा अभी भी उसके मांसल चूतड़ों को सहलाया जा रहा था.. मेरी दोनों बहनें मेरे साथ थी, उस रूप में जो दोनों चाहती थी एक को बस प्यार चाहिए था और दूसरे को मुझ पर अधिकार मेरे जिस्म पर अधिकार.. दोनों को वो मिला था जो वह चाहते थे और मुझे???

मुझे मिली थी जन्नत, मेरे साथ दोनों थे दोनों का प्यार मेरे साथ था , मेरा मन शांत था मैं खुश था मानो पूरे दुनिया की जन्नत मेरे कदमों में हो, पूरी दुनिया की खुशियां मेरे कदमों में है अपने दोनों बहनों को प्यार करना चाहता था उस तरह से जिस तरह से वह चाहती थी.. एक से जिस्मानी होकर तथा दूसरे से रूहानी होकर .....

जीवन की सभी करामातों ने मुझे और भी अधिक मजबूत बना दिया था,अभी अभी मैं छुट्टी से वापस आया था और आके अपने कमरे में बैठा हुआ सोच रहा था की आगे क्या करना चाहिए कि मेरे मोबाइल की बत्ती जल उठी ,,

“हैल्लो “

“आ गए जान “

दूसरी ओर से काजल ने कहा

“कहा हो तुम देखने को दिल कर रहा है “

वो हँसी ..

“होटल आयी थी यार ,और कहा शाम को मिलते है ,तुम भी जाओ मेडम रश्मि तुम्हारा इंतजार कर रही होगी “

मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई क्योकि काजल ने मेडम रश्मि बोला ही कुछ इस तरह जैसे वो इस बात को लेकर जलती हो …

मुझे काजल से मिलने का बहुत ही मन कर रहा था मैं उसके सामने मलीना की बात करना चाहता था और उसके चहरे का एक्सप्रेशन देखना चाहता था की आखिर वो फिर मुझसे कैसे छिपाती है ,

मैं जल्दी से तैयर हुआ और उसके होटल की तरफ भागा ..

पहली बात तो मैं उसे सरप्राइज देना चाहता था ,

मैं सोच में पड़ गया की आखिर कैसे पता करू की वो कहा होगी ,सीधे उसके पास जाने से पहले मैं सोच रहा था मेरे दिमाग में एक आईडिया आया मैंने शबनम को फोन लगाया ,

“अरे कहा हो मेरी जान “शबनम की नशीली आवाज मेरे कानो में आयी

“बस छुट्टियां खत्म हो गई है अभी अभी पहुचा हु “

“ओह तो इस कनीज को कैसे याद कर लिया “

वो फिर से अपनी मादक आवाज में बोली

“तुम मेरी कनीज नही तुम तो मेरी मलिका हो “मैं मुस्कुरा उठा

“ओहो ऐसी बात है ..”वो जोरो से हँसी

“लगता है साहब को कोई जरूरी काम आ गया है “

उसने मेरी चपलिसी की वजह समझने में ज्यादा देर नही की

“बस मैं चाहता हु की तुम पता करो को काजल कहा है ,असल में मैं उसे सरप्राइज देना चाहता हु “

शबनम थोड़ी देर सोचने लगी

“अरे क्या हुआ “

“सोच लो कही तुम्हारा सरप्राइज देना तुम्हारे लिए मुश्किल ना पैदा कर दे “

वो जोरो से हँसने लगी ,हा मैं कैसे भूल गया था की काजल क्या क्या करती है ,शबनम की बातो में तो दम था लेकिन फिर भी मुझे तो काजल से मिलना ही था

“तुम पता तो करो वो होटल में है तो आखिर है कहा और ये भी बताने की जरूरत नही है की उसे पता नही चलना चाहिए की मैं आ रहा हु “

वो शायद मुस्कुराई होगी

“ओके जैसा आप कहे मेरे आका “वो फिर से खिलखिलाई

**********************

होटल के बाहर ही मुझे हर्ष मिल गया शायद उसने मुझे पहचान लिया था …

“हैल्लो सर “

मैं हड़बड़ाया ,मैं कैसे भूल गया था की यंहा पर मुझे बहुत से लोग जानते है ,

“ओह हैल्लो “

“आप तो काजल मेडम के फ्रेंड है ना “

“हम्म “

“कहा है तुम्हारी मेडम “

“वो तो ……..”

वो चुप हो गया जैसे सोच रहा हो ,

“क्या हुआ “

“कुछ नही सर वो तो असल में खान साहब के फॉर्म हाउस में है “

मेरे दिल में एक जोर का धक्का लगा

“ओह और फार्महाउस कहा पर है “

“मुझे नही पता सर बस इतना ही बताया था मेडम ने ,वो दोनो किसी डील के कारण वँहा गए है ,आप एक बार फोन करके कन्फर्म कर लीजिए “

वो थोड़ा झेप गया क्योकि उसके मुह से शायद कुछ गलत निकल गया था ,

*********************

मुझे शबनम काल कर रही थी

“हैल्लो “

“मजनू जी के लिए बुरी खबर है “

उसकी बात सुनकर मैं थोड़ी देर तक कुछ भी नही बोला

“काजल मेडम तो होटल में नही है “

“तो कहा है ???”

“वो तो उसने नही बताया है बस इतना ही कहा की वो अभी 2 घण्टे बाद ही होटल पहचेगी “

“ओक्के “

“मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी “

मैंने थोड़ा जोर दिया

“हा पूछो ना “

“खान का फार्महाउस कहा पर है “

मेरी बात से शबनम थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गई

“ओ तो काजल वँहा गई है ,यार देव क्यो आग से खेलना चाहते हो ,छोड़ो काजल को मैं हु ,यंहा आ जाओ तुम्हे जन्नत दिखाउंगी “

वो बहुत ही कमीनी सी आवाज में बोली

“जो पूछा है वो तो बताओ “

उसने मुझे पूरा पता बताया लेकिन साथ ही हिदायतें भी दे डाली ,लेकिन मैं उसकी हिदायतें कहा मानने वाला था …

मैंने गाड़ी घुमा दी ..

मैं कर में ही था की काजल का फोन आ गया

“तुम होटल आये थे,हर्ष ने बलताय “

लग रहा था की मेरा होटल आना उसे पसंद नही आया ,या हर्ष का मुझे बतलाना

“हा सोचा था की सरप्राइज दूंगा ,लेकिन अब वापस जा रहा हु ,तुम तो अपने खान को खुस करने में बिजी हो “

थोड़ी देर तक उधर से कोई भी जवाब नही आया

“देव प्लीज् …….”

उसकी आवाज में एक निराशा थी

“अगर मुझे कुछ पता नही होता तो बात और थी ,जबकि मुझे सब पता है तो भी तुम मुझसे ये सब छिपाने की कोशिस कर रही हो “

मैं उसे समझते हुए कहा

“हा क्योकि असलियत तुम्हे जला देगी और मैं नही चाहती की तुम जलो ,तुम्हे दुख हो ..माना की तुम्हे सब कुछ पता है लेकिन फिर भी मेरी बात सुनकर तुम्हे जलन होगी मैं वो बिल्कुल नही करना चाहती ,मैं तो इसे बस जल्द से जल्द खत्म करके तुम्हारे साथ ही अपना पूरा जीवन बिताना चाहती हु ……..अब प्लीज् देव ऐसे मजाक भी मत किया करो क्योकि इससे मुझे लगने लगता है की मैं तुम्हारे साथ धोखा कर रही हु ..

हाँ अगर तुम भी वैसे होते तो अलग बात थी “

मैं उसकी बात सुनकर चौका

“कैसा ???”

वो थोड़ी देर तक चुप थी

“अरे बताओ भी क्या हूं “

“cuckoldry का नाम सुना है “

वो धीरे से बोली ...मैं उसकी बात सुनकर सन्न रह गया और फोन काट दिया ,मुझे इसके बारे में ज्यादा तो नही पता था लेकिन मैं कुछ तो जानता ही था …………..

 
“तुम्हें मलिनी कैसी लगी”

काजल ने मुझसे लिपटकर कहा.

“ बहुत अच्छी,लगा ही नहीं जैसे किसी अनजान से बोल रहा हूं”

काजल का चेहरा चमक उठा, वह किसी बच्चे की तरह उछल पड़ी ,

” काश मैं उन्हें देख पाती”

“ तो चलो कभी चलते हैं”

उसका चेहरा थोड़ा सा उदास हो गया

“और क्या-क्या किए” उसने बात को पलटा

“और कुछ नहीं बस घूमे फिरे और हां डॉक्टर से भी मिला”

काजल चौकी, वह मेरी बाहों से अलग हो गई

“क्या तुम डॉक्टर साहब से मिले”

“ हां क्यों यहां हमारी पहचान तो हो ही चुकी थी वह मुझे वहां दिख गए थे”

काजल का चेहरा गंभीर होता गया..

“ क्या हुआ डॉक्टर का नाम सुनते ही तुम्हारे चेहरे में क्या हो गया”

मैंने उसे परखने के अंदाज में कहा उसने अपने आप को तुरंत संभाला

“कुछ भी तो नहीं “

थोड़ी देर सोचती रही

“ अच्छा मैंने जो तुम्हें कहा था उसके बारे में क्या सोचा”

उसने थोड़ी नजाकत के साथ और थोड़ी शरारत के साथ मुझसे पूछा

“ किस बारे में???”

“ अरे वही जो मैंने तुम्हें कहा था cuckoldry के बारे में”उसके होठो में मुस्कान थी

“ तुम पागल हो गई हो क्या”

मैं अपनी भावनाओं को छुपाते हुए कहा

“ ऐसी कोई बात नहीं लेकिन फिर भी मुझे लगता है की तुम्हे कितना दुख होता होगा , उससे अच्छा है कि दर्द का मजा लिया जाए”

मैंने अपना सिर झटका

“दर्द का मजा “वह मेरे ऊपर आ चुकी थी उसने मेरे होठों पर अपने तपते हुए होठ रखें वह चुंबन कुछ देर तक चलता रहा..

मैं उसके जिस्म को सहलाता रहा और वह मादक सिसकियां लेते रही

“क्यों दर्द में मजा नहीं है क्या???

“दर्द में शायद मजा हो सकता हैं लेकिन तड़प में नहीं ,जलन में नहीं, उस पीड़ा में नहीं जब भी मैं सोचता हूं कि तुम किसी और के साथ हो तुम्हें नहीं पता कि मेरे अंदर क्या बीतती है ऐसा लगता है कि मार डालो तुम्हें भी और उसे भी जो तुम्हारे साथ हैं….”

काजल को देर तक गंभीरता से मुझे देख तेरे फिर अचानक से हलके से मुस्कुराई

“ यही तो तड़प है जो तुम्हें मजा देगा “

उसकी बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी मैं उसे गौर से देखता रहा उसका प्यारा सा चेहरा खिला हुआ था,वो मन में कुछ सोच कर मुस्कुरा रही थी..

“ ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो क्या तुम्हें सच में लगता है कि मैं वह करूंगा “

उसने अपना सिर ना में हिलाया

“मुझे नहीं लगता कि तुम ऐसा कर पाओगे लेकिन हां अगर तुम ऐसा करोगे तो शायद मुझे बहुत खुशी हो “

मैंने उसे बड़े आश्चर्य से देखा

“ ऐसा क्यों कह रही हो “

“क्योंकि मुझे हमेशा दुख रहता है कि तुम जल रहे हो सिर्फ और सिर्फ मेरे कारण तुम्हें इतनी तकलीफ है झेलनी पड़ रही है सिर्फ मेरे कारण तुम चाहे मानो या ना मानो लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं बेबी”

काजल की आंखों में अनायास ही आंसू आ गए,

“ हो सकता है कि यह करने से तुम्हें थोड़ा सुकून मिलेगा”

“ सुकून कैसा सुकून तुम्हें लगता है कि तुम्हें दूसरे के साथ देख कर मुझे सुकून मिलेगा”

मैंने उसके आंसुओं को अपनी उंगलियों से हटाया, वह हलके से मुस्कुराई उसकी प्यार भरी नजरें भी मुझे देख रही थी..

“ मैंने तो सुना है कि कुछ लोगों को इससे सुकून मिलता है मजा मिलता है मुझे लगा शायद तुम भी ऐसा कर पाओगे चलो ठीक है कोशिश कर लेना मैं यह नहीं कहूंगी कि तुम ऐसा करो या ना करो यह तुम्हारे ऊपर है लेकिन अगर तुम इस बात का मजा लेता है तो शायद यह मेरे लिए सबसे अच्छी बात होगी कम से कम मैं उस दर्द से मुक्त हो जाऊंगी कि मैं तुम्हें तकलीफ दे रही हूं,”

“तो तुम ऐसा कर ही क्यो रही हो काजल कि तुम्हें मुझे तकलीफ देनी पड़ रही है”

मैं उसे घूरता रहा वह मेरे आंखों में झांकती रही ….

“देव मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूं “

,मैंने उसे फिर से एक बार आश्चर्य से देखा

“क्या “मेरा स्वर ठंडा था

“ अपना अतीत जो सुनना तुम्हारे लिए शायद बहुत जरूरी है”

मैं सोच में पड़ा था कि काजल ने कहना शुरू किया

“जानते हो देव जब मैं एक छोटी बच्ची थी मेरे पापा एक चॉकलेट लेने के लिए भी 10 बार सोचते थे ,”

मैं उसे देखता रहा और वह कहती रही

“ इतनी तकलीफ देखी है, इतने दर्द सहे हैं... मैंने देखा है गरीबी किसे कहते हैं हर तरफ बस लोगों की बुरी नजर रहती है जब मैं 16 साल की थी तब लोगों ने मुझे ऐसे देखा था जैसे मुझे खा जाएंगे, उनकी आंखों में हवस साफ दिखाई देते थे , लेकिन मैंने अपने आप को बचा लिया…”

काजल की बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी लेकिन बस मैं सुन रहा था ..

“देव जब मैं बच्ची थी मेरे पापा मुझे एक दुकान ले गए , उन्होंने मुझसे कहा कि कौन सी मिठाई खाएगी,मैं मिठाइयों को घूरते रह गई सामने कई प्रकार की मिठाइयां थी रंग बिरंगी ऐसी ऐसी जो मेरे साथ कभी देखी नहीं थी मैं बस उसे देखते रह गई थोड़ी देर बाद मैंने एक मिठाई के ऊपर हाथ रखा मैंने कहा मुझे इसे खाना है पापा ने दुकानदार से रेट पूछा दुकानदार ने जो कीमत बताई पापा सोच में पड़ गए.. थोड़ी देर इधर उधर की बातें करते रहे मुझे बहला रहे थे , उनके पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वह उस मिठाई को खरीद पाय मैंने उनका चेहरा देखा था ,वह उदास थे दुखी थे सिर्फ मेरी वजह से ,सोची वह उस मिठाई को खरीद नहीं पाया जो मेरी जरूरत थी और वो जरूरत नहीं थी और बस मेरी तमन्ना थी मैं उनके आंखों में झांकती रही थोड़ी देर बाद पापा एक दूसरी मिठाई लेकर वहां से निकल गए,मैं उनके साथ चल रही थी मैं एक बच्ची थी देखो बस एक बच्ची लेकिन मुझे सब समझ आ रहा था..पैसे की कमी ,इतनी कमी की उन्होंने मेरी जरूरत को ठीक नहीं समझा था हम थोड़ी देर तक चलते रहे फिर पापा ने मुझे कहा क्यों बेटा तुम्हें यह मिठाई पसंद है ना मैंने कहा नहीं पापा मुझे तो वही मिठाई पसंद थी जो आपने दिखाई थी..

पापा मेरे चेहरे को देखते रहे बस देखते रहे बिना कुछ बोले मेरा हाथ पकड़ कर वह मुझे फिर से उसी दुकान में ले गए, उन्होंने वही मिठाई ली जिसे मैंने कहा था हां यह अलग बात है उसके बाद मेरे पापा की जेब में थोड़ा भी पैसा नहीं था हम दोनों पैदल ही घर गए क्योंकि हमारे पास ना तो ऑटो ना ही रिक्से का पैसा था,पाप ने अपने लिए वो जूते भी नही लिए जिसे लेने के लिये उन्होंने महीने भर से पैसे जोड़े थे,...

वह दिन था और आज के दिन है मुझे पैसे की अहमियत समझ आ गई “

वह बस इतना ही बोल पाई थी लेकिन मेरे दिल से एक बात निकल गई

“अच्छा तो अगर ऐसा है तो हम दोनो ही कमाते है काजल ,हमारे पास पैसे की क्या कोई इतनी कमी है की तुम्हे अपना जिस्म बेचना पड़े “

काजल के आंखों से आंसू छलक गए थे,साथ ही मेरे भी ..

“बात अभी पूरी नही हुई है देव …”

उसने मेरी बात को फिर से कांटा ..

“मैंने तुम्हे बतलाया था ना की मेरी मा का देहांत बहुत पहले ही हो चुका है …”

काजल की मा ,हा उसने बतलाया तो था लेकिन मैं तो आज भी कन्फ्यूज़ हु की उसकी असली माँ कौन है और उसका असली पिता कौन है ...मैंने हा में सर हिलाया

“असल में उनका देहांत प्राकृतिक रूप से या किसी बीमारी से नही हुआ था ..”

मैं उसकी बात सुनता ही रहा

“उन्हें मारा गया था “

“क्या “इस बार मैं बुरी तरह से चौका

“हा देव उनका बलात्कार किया गया था और उसके कुछ दिनों के बाद हत्या “

मैं उसे बस देखता ही रहा

“मेरे पिता जी जिस होटल में काम करते थे,मेरी मा भी उसी होटल में काम करती थी ,होटल का मालिक एक बहुत ही कामुक इंसान था ,वो तो खुद भी शादीशुदा था लेकिन फिर भी वँहा काम करने वाली सभी औरतों पर उसकी नजर रहती थी ,मेरी मा पर भी उसकी नजर थी ...उसने पहले तो मेरे पिता की गरीबी का फायदा उठाना चाहा लेकिन जब वो नही मानी तो उसने उनका बालात्कार किया,जब मेरे पिता जी और मा पुलिस के पास पहुचे तो उस होटल के मालिक ने अपनी पहुच लगाकर उन्हें ही अंदर करवा दिया ,उस दिन मुझे दूसरी बार पैसे की वेल्यू का पता चला,मेरे पिता जी को छोड़ने के लिए उसने फिर से मेरी मा के साथ बालात्कार किया,इस बार उसका साथ वो इंस्पेक्टर भी दे रहा था ,उन्होंने मेरे ही घर में मेरे ही सामने मेरी मा की इज्जत लूटी थी ,मैं रोती रही अपने भाई को गोद में लिए हुए ...पूरे मोहल्ले को पता था की मेरे घर में क्या हो रहा है लेकिन किसी की इतनी हिम्मत ही नही हुई की वो कुछ कर पाए……”

कमरे में शांति फैल गई थी ,काजल की आंखों में मानो खून उतर आया था उसकी आंखे लाल हो चुकी थी और उसके आंसू सुख चुके थे …

“आज भी मेरे कानो में मेरी मा के हर चीख़ घुंजा करते है देव...मैं उसे नही भुला सकती ,मैं उन लोगो को नही भुला सकती जिन्होंने ये किया है ...वो दरिंदे वँहा भी नही रुके ,मेरे पिता ने जेल से छूटने के बाद उनसे बदला लेने के लिए एक आदमी की मदद ली थी ...जिसे तुम आज डॉ के नाम से जानते हो ,उन्होंने थोड़ा प्रयास किया जिससे इंस्पेक्टर तो सस्पेंड हो गया और होटल का मालिक वँहा से भाग निकला लेकिन जाते जाते उन्होंने मेरी मा को भी मार दिया,बिना उसके बयान के दोनो ही रिहा हो गए ,डॉ भी कुछ नही कर पाए …...मेरे पिता जी के लिए भी वँहा रहना मुश्किल था वो भी वँहा से निकल आये,और छोटी मोटी नॉकरी करके मुझे पढ़ाया ……..डॉ को मैं तब से जानती हु ,वो मेरे लिए मेरे पिता के समान है ,”

काजल की आंखे सुखी हुई थी आंसू की एक बून्द भी उनमे नही थी लेकिन था तो एक दर्द एक गहरा दर्द ,,,

आंखे लाल...सुर्ख लाल हो चुकी थी जैसे की अंगारे हो ,मैं उसे देखकर ही कांप गया ,ऐसे भी मैं कई तरह के कन्फ्यूजन से घिरा हुआ था,

“जानते हो देव वो होटल का मालिक कौन था “

काजल ने फिर से कहा ,मैंने ना में सर हिलाया

“होटल आदित्य इंटरनेशनल का मलिक ,मिस्टर खान ….”

इस बार चौकाने के लिए मेरे पास बहुत से कारण थे

“क्या??????”

मैं बुरी तरह से चिल्लाया

“तुम्हे आज तक यही लगता रहा की अजीम ने मुझे इस धंधे में उतारा और मैं उसके जयजात के लालच में हु इसलिए मैं ये सब कर रही हु ,या ये लगा होगा की तुम्हारी बहन के कहने पर ये सब कर रही हु ,जैसा की मैंने तुम्हे बतलाया था…

लेकिन देव असल बात तो यही है की ना तो निशा ना ही अजीम मुझे इस बिजनेस में लाये है ,मैं यंहा आयी हु बस और बस उन्हें बर्बाद करने ...मैं चाहती तो खान और उस इंस्पेक्टर को एक ही बार में मार सकती थी लेकिन नही देव उन्हें तो पल पल करके मरूँगी ,उन्हें इतना तड़फाउंगी की वो मारने की दुवा मांगे लेकिन मर ना पाए …”

काजल की सांसे तेज हो चुकी थी वो गुस्से से दहक रही थी ,चहरा लाल हो चुका था ,उसके एक एक बात में मुझे सच्चाई दिखाई दे रही थी

“और जानते हो देव मैंने तुम्हे ऐसा प्रस्ताव क्यो दिया था …??क्योकि मैं चाहती हु की अब तुम मेरी मदद करो ...बहुत हो गया देव मैं अकेले ये सब नही कर सकती मैं बस खान की रंडी बनकर रह जाऊंगी ,मुझे उन्हें नंगा करके रास्ते में भीख मांगने पर मजबूर कर देना है ,देव”

काजल ने मेरी बांहो को मजबूती से जकड़ लिया

“तुम्हे मेरा साथ देना होगा देव,सोचो की मैं उन दरिंदो के नीचे खुद को रौंदाती हु फिर भी उफ नही करती ,तो क्या तुम मुझे देख भी नही सकते ????

मेरे लिए देव मेरे लिए “

इस बार वो रो पड़ी ,मैं अपने को इतना मजबूर कभी महसूस नही किया था ,ये क्या हो रहा था मेरे जीवन में

“मैं सब कुछ करूँगा मेरी जान “

मेरे मुह से ये शब्द सीधे मेरे दिल से निकल कर आ रहे थे ,मैं जानता था की काजल मुझसे क्या मांग रही थी लेकिन उसकी कहानी जो की मुझे सच ही लग रही थी उसे सुनने के बाद मैं उसका। साथ ना दु ऐसा तो हो ही नही सकता था …

“देव तुम्हे मेरा साथ देना ही होगा ..मैं जानती हु की तुम्हारे लिये ये कितना मुश्किल होने वाला है लेकिन तुम्हे उस दर्द में मजा भी ढूंढना ही होगा ...मैंने ढूंढा है इसीलिए आज मैं उन लोगो के नीचे आने से थोड़ा भी नही झिझकती जिन्होंने मेरी मा को मारा था और जिन्होंने उनका बलात्कार किया था ,तुम्हे भी वो रास्ता ढूंढना होगा देव...तुहे बहलाने वाले तो यंहा पर बहुत मिलेंगे ,निशा मुझे कभी भी पसंद नही करती थी ,और अब तो अजीम और खान के जयजात पर रश्मि की भी नजरे है ,दोनो ही तुम्हे मेरा साथ देने से रोकेंगे लेकिन तुम्हे फैसला करना होगा देव,ये बहुत ही निर्णायक वक्त है जबकि हम अपना मास्टर स्ट्रोक खेल सकते है ..”

वो जैसे बोल कर चुप हुई और मेरे आंखों में देखते हुए मेरे जवाब का इंतजार करने लगी ..

“मैं तुम्हारे साथ हु काजल “

मैं बस इतना ही बोल पाया था और वो मेरे गले से लग गई …..

 
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