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जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया की तरफ देखा तो, नाज़िया ने फिर से अपनी आँखे बंद कर ली….”सीईइ नाज़िया नज़ीबा की ज़ुबान बहुत मीठी है….तुम्हारी सौतन ने तो अपने होंटो और ज़ुबान के जाम पिला कर अपने मुझे खुश कर दिया है….तुम मुझे खुश नही करोगी…” मैने नाज़िया के कान के पास अपने होंटो को लेजा कर सरगोशी में कहा तो, और फिर नाज़िया के कान को अपने होंटो में लेकर जैसे ही चूसा…नाज़िया एक दम से तड़प उठी….मैने हाथ से नाज़िया के फेस को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंटो को अपने होंटो में लेकर सक करना शुरू कर दिया…..
पर नाज़िया ने फिर से कोई रेस्पॉन्स नही दिया….मुझे पता था कि, नाज़िया अभी भी शरमा रही है….आख़िर उसकी बेटी साथ मे थी….जो शरम हया उसमे थी….उसे दूर करने में मुझे पता नही कितना वक़्त लगने वाला था….इसीलिए मैने नाज़िया के होंटो को छोड़ आगे बढ़ने की सोची….मैने नाज़िया के फेस से हटा कर नाज़िया के पेट पर उसकी नाफ़ के पास रखा….और उसके कमीज़ को पकड़ कर धीरे-2 ऊपर करना शुरू कर दिया…जैसे ही नाज़िया को इस बात का अहसास हुआ तो, नाज़िया ने हिलना शुरू कर दिया.. क्योंकि नाज़िया का कोई भी हाथ फ्री नही था….जिससे वो मुझे रोक पाती….”अह्ह्ह्ह समीररर ये क्या कर रहे हो….क्यों मुझे शर्मिंदा कर रहे हो….प्लीज़ समीर छोड़ दो मुझे… ऐसे तो ना करो…”
मैं: बड़ी बदजुबान हो तुम…….कैसी बेबाकी से अपने शोहर का नाम ले रही हो…. मुझे लगता है तुम्हारी जिंदगी में मेरी कोई अहमियत है ही नही….
मेरी बात सुन कर नाज़िया ने अपनी आँखे खोल कर मेरी तरफ देखा…और रुआंसी सी आवाज़ मे बोली….”सॉरी पर ऐसे तो ना करिए….”
मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए उसकी कमीज़ को ऊपेर करना शुरू कर दिया…नाज़िया ने भी मान लिया था कि, अब वो कुछ नही कर सकती…नाज़िया ने हथियार डालते हुए फिर से अपनी आँखे बंद कर ली…. मैने नाज़िया की कमीज़ को उसके गले तक ऊपेर उठा दिया….जैसे ही नाज़िया की कमीज़ उसके गाले तक ऊपेर हुई, मैने नाज़िया की ब्रा को एक हाथ से नीचे से पकड़ कर नज़ीबा की तरफ देखते हुए नज़ीबा को दूसरी मम्मे के नीचे से ब्रा पकड़ने का इशारा किया तो, नज़ीबा ने शरामते हुए नज़रें झुका ली…
.”तुमने सुना नही मैने क्या कहा…” मैने थोड़ा गुस्से में कहा तो, नज़ीबा ने दूसरी साइड से नाज़िया के ब्रा को पकड़ लिया….
“ऊपेर उठाओ….” और फिर मैने नज़ीबा ने एक हाथ से नाज़िया के ब्रा को जैसे ही ऊपेर उठाया…नाज़िया के गोरे 38 साइज़ के मम्मे उछल कर बाहर आ गये…मैने अपने साइड वाले मम्मे को अपने हाथ में लेकर दबाते हुए नज़ीबा की तरफ देखा….जो नज़रें झुका कर लेटी हुई थी….”ये देखो तुम्हारी अम्मी के मम्मे कितने बड़े है…सीईइ देखो इनके निपल कैसे सख़्त हो चुके है….” मेरी बात सुन कर नाज़िया ने ऐसे होंका भरा जैसे वो रो रही हो….”हाईए मैं मर गयी… मैं अब तुम दोनो के साथ आँखे कैसी मिलाउन्गी….नज़ीबा प्लीज़ इस तरफ मत देखना….”
मैं: क्यों क्यों नही देखना उसे….उसने देखना भी है और अपनी सौतन के मम्मों को चूसना भी है….
नाज़िया: नही…..
मैने देखा कि नज़ीबा बड़ी ही नशीली नज़रों से मेरी तरफ देख रही थी….मैने उसकी तरफ देखते हुए नाज़िया के मम्मे के ऊपेर झुकते हुए, जितना हो सकता था.. उसके मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईईईईईईई अहह….” जैसे ही नाज़िया को अपने मम्मे पर मेरी गरम ज़ुबान फील हुई, नाज़िया एक दम से तड़प उठी…
मैने नाज़िया का राइट मम्मा पकड़ा और मुँह में डाल लिया फिर रूम में मुकामल खामोशी छा गयी ....मैं नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए नज़ीबा की आँखो में देख रहा था…मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए, नाज़िया के दूसरे मम्मे को पकड़ कर दबाया…तो नाज़िया के दूसरे मम्मे का निपल और तीखा होकर बाहर निकल आया….मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए आँखो ही आँखो से नज़ीबा को नाज़िया के मम्मे को सक करने को कहा तो, नज़ीबा ने नाज़िया के ऊपेर झुकते हुए,नज़ीबा ने पूरा मुँह खोला और नाज़िया का मम्मा मुँह में डाल लिया...जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया के दूसरे मम्मे को चूसना शुरू किया...
तो नाज़िया ऐसे तडपी, जैसे उसे करेंट लग गया हो….”हाए मैं गयी… हाई ओईए खुदा ये तुम दोनो आअहह मेरे साथ कियाअ कर रहे हो…ओह्ह्ह्ह नज़ीबा तुम तो ऐसा ना करो….तुम तो आह तुम तो मेरी बेटी हो…प्लीज़ ऐसा ना करो…” नाज़िया बुरी तरह तड़प रही थी….मैने नाज़िया के मम्मे को बाहर निकाला तो नज़ीबा ने भी ने भी नाज़िया के मम्मे को मुँह से निकालना चाहा…पर मैने उसे मना कर दिया…नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को सक करना शुरू कर दिया… “बेड रूम में वो तुम्हारी बेटी नही है….आज के बाद बेडरूम के अंदर तुमने उसे बेटी नही कहना….” नज़ीबा बड़ी नफ़ासत से नाज़िया के मम्मे को सक कर रही थी...
नाज़िया: अह्ह्ह्ह ऐसा करने से सच्चाई तो बदल नही जाएगी….
मैं: अच्छा अगर मेरी बात का यकीन ना हो…तुम खुद ही नज़ीबा से पूछ लो… बताओ नज़ीबा नाज़िया बेडरूम में ये तुम्हारी क्या लगती है….
मैने फिर से झुक कर नाज़िया के मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईई ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अब्ब बस भी करो….मुझे बहुत शर्म आ रही है….”मेरी बात सुन कर नज़ीबा ने नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह से बाहर निकाला और सरगोशी से भरी आवाज़ में कहा…”मैं आपकी बेटी नही…आपकी सौतन हूँ बाजी…” और नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईई ओह हाईए तुम पागल हो गयी है….सीयी ओह्ह्ह्ह मुझसे बर्दास्त नही हो रहा…अहह बस करो….” नाज़िया बुरी तरह मस्ती में सिसक रही थी….
नाज़िया: आह मेरे बाज़ू में दर्द हो रहा है…
नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे कंधे के नीचे से खेंचते हुए कहा…तो मैं खुद ही थोड़ा ऊपेर हो गया….नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे नीचे से निकाल लिया…मेरे और नज़ीबा के दरम्यान मम्मे चूसने का मुक़ाबला स्टार्ट हो चुका था.. ....हम दोनो ने मम्मे चूस चूस कर नाज़िया को इस क़दर मजबूर कर दिया कि उस ने अपने दोनो हाथ हम दोनो के बालों में फेरने शुरू कर दिए.....”ओह्ह ये तुम मुझसे क्या करवा रहे हो….अह्ह्ह्ह हइईए आह नज़ीबा ओह जी मुझे कुछ हो रहा है…अहह मैने मर जाना है….ओह्ह्ह्ह,……”
मैं: क्या हो रहा है सच क्यों नही कहती कि तुम्हे अपने मम्मे चुसवा कर मज़ा आ रहा है….
नाज़िया: आहह खुदा के लिए चुप हो जाओ आप….
नाज़िया ने अपने दोनो बाज़ुओं में मेरे और नज़ीबा के सर को कस लिया…और हम दोनो के सर को अपने मम्मों पर दबाने लगी….वो कभी कभी सीयी की आवाज़ निकालती...मगर और कुछ ना कहती...नज़ीबा और मेरे गाल आपस में टकरा रहे थे...हम दोनो नाज़िया को ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा दे कर नाज़िया को भरपूर गरम करने की कोशिश कर रहे थे...नाज़िया भी अपने हाथों के ज़ोर से हमारे सिर अपने मम्मों पर दबा रही थी...
नाज़िया की कमीज़ और ब्रा उस के गले में थी...हम तीनो उस वक़्त खामोश थे और कुछ भी बोलने के मूड में नही थे....बस मैं और नज़ीबा इशारों से और ऐक दूसरे को देख कर समझाते हुए कर रहे थे…नाज़िया की सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी….नज़ीबा ने भी अपनी साइड संभाली हुई थी…और नाज़िया के राइट मम्मे को चूस रही थी….
नाज़िया भी पूरी गरम हो चुकी थी…अब वो किसी भी तरह का विरोध नही कर रही थी…नाज़िया को मस्त होकर अपने मम्मे चुस्वाते देख कर थोड़ी ही देर बाद मैने नाज़िया की कमीज़ को पकड़ कर तोड़ा सा खींच कर नाज़िया को उतारने का इशारा दिया...नाज़िया नशे में डूबी हुई उठ बैठी और अपनी कमीज़ को आगे पीछे से पकड़ कर उतारा नज़ीबा ने भी उस की मदद करते हुए ब्रा का हुक खोल कर उस को भी उतार दिया...
नाज़िया ने नशीली निगाहों से पहले नज़ीबा के फेस पर अपनी लंबी पलकें झुका कर उस को देखा ..फिर ऐसे ही मेरे चेहरे को देखा…फिर जैसे ही मैने नाज़िया को अपनी बाजुओं में लेकर उसे गले से लगाया…..तो नज़ीबा ने भी नाज़िया को अपनी बाहों में कस लिया….नाज़िया भी उस वक़्त फुल गरम हो चुकी थी…उसने मुझे और नज़ीबा को अपने बाज़ुओं के घेरे मे ले लिया…जैसे ही मैने नाज़िया के गालों को चूमना शुरू किया…तो मुझे देख कर नज़ीबा ने फॉरन नाज़िया के गाल चूमते हुए उस को प्यार करना शुरू कर दिया...
नज़ीबा आहिस्ता आहिस्ता किस करते हुए गर्दन पर आइ फिर नाज़िया की चेस्ट को मुँह में ले लिया और उस को चूसने लगी...नाज़िया ने तड़प कर सिसकी की आवाज़ निकाली और मेरे फेस को अपने फेस के सामने ला कर मेरे होंठो पर अपने नर्म ओ नाज़ुक होन्ट रख दिए.
मैने पागल होते हुए नाज़िया के होंठों का जाम अपने होंठो से लगा लिया ...नाज़िया को आहिस्ता आहिस्ता बेड पर लेटा दिया….और पूरी शिदत से मेरे होन्ट चूसने लगी उधर नज़ीबा भी नाज़िया की चेस्ट को हाथों में ले कर चूस रही थी..
मेरा एक हाथ खुद ही नाज़िया के एक मम्मे पर चला गया जिस को नज़ीबा ने पहले ही पकड़ रखा था मैं नज़ीबा के हाथ के ऊपेर से ही मम्मा दबाने लगा… नाज़िया मज़े के नशे में डूबी हुई सिसकारियाँ भर रही थी….मैने नज़ीबा का हाथ पकड़ कर नाज़िया के मम्मे से नीचे करते हुए धीरे-2 नाज़िया के पेट की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….जैसे -2 नाज़िया नज़ीबा के हाथ को अपने पेट की तरफ नीचे जाता हुआ महसूस कर रही थी…वैसे -2 उसका जिस्म उसकी कमर रुक-2 कर झटके खा रहे थे….फिर जैसे ही नज़ीबा और मेरा हाथ नाज़िया की शलवार के नैफे से टकराया….तो मैने नज़ीबा के हाथ से अपना हाथ हटा कर नाज़िया की शलवार का नाडा पकड़ा और नज़ीबा की आँखो में देखते हुए धीरे-2 नाज़िया की शलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….
नज़ीबा मदहोशी से भरी नज़रों से कभी मुझे और कभी नाज़िया की शलवार के नाडे को खुलता हुआ देख रही थी….जैसे ही नाज़िया का शलवार का नाडा खुला…मैं उठ कर बैठ गया….और नाज़िया की टाँगो को खोल कर उसकी टाँगो के दरम्यान आते हुए, उसकी शलवार को दोनो साइड से पकड़ कर जैसे ही नीचे करने लगा तो, नाज़िया ने मेरा हाथ पकड़ लिया….नही प्लीज़ इसे मत उतारो….” नाज़िया ने बिना आँखे खोले ही कहा….
“तुमने मुझे फुद्दि प्यार से देनी है या मार खा कर देनी है….” मैने नाज़िया की शलवार को नीचे की तरफ झटकते हुए कहा….पर नाज़िया ने अपनी शलवार को नही छोड़ा..
“जो करना है कर लो….पर प्लीज़ ये लाइट ऑफ कर दो….” नाज़िया ने सिसकते हुए कहा….
पर मैने नाज़िया की एक ना सुनी और नाज़िया की शलवार के साथ-2 नाज़िया की पैंटी की इलास्टिक को भी पकड़ कर ज़ोर से नीचे खेंचा…जैसे ही नाज़िया के हाथो से उसकी शलवार निकली मैने नाज़िया की शलवार और पैंटी को उतार कर साइड में रख दिया…मेरी नज़र नाज़िया की पैंटी पर पड़ी….जो उसकी फुद्दि वाली जगह से एक दम गीली थी….मैने नाज़िया की पैंटी को पकड़ा और नज़ीबा को दिखाते हुए कहा….”ये देखो तुम्हारी सौतन की फुद्दि कितना पानी छोड़ रही है….देखो लंड लेने के लिए कितनी बेकरार है…फिर भी नखडे कर रही है….” मैने नज़ीबा की तरफ पैंटी बढ़ाई…तो नज़ीबा ने शरमाते हुए नाज़िया की पैंटी को पकड़ कर जैसे देखना शुरू किया.. तो नाज़िया ने झपट्टा मार कर उसके हाथ से पैंटी छीन ली…
नाज़िया: नज़ीबा तुम भी बेशर्मी पर उतर आई हो….
नाज़िया ने पैंटी को बेड के दूसरी साइड पर फेंकते हुए कहा….तो मैने नज़ीबा की तरफ अपना हाथ बढ़ाया…तो नज़ीबा ने जैसे ही अपना हाथ मेरे हाथ में दिया… मैने नज़ीबा को अपनी तरफ खेंचा…नज़ीबा उठ कर घुटनो के बल बैठ गयी…मैने नज़ीबा को अपने आगे नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आने को कहा… जैसे ही नज़ीबा नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आई…नाज़िया ने अपने सर के नीचे रखे हुए तकिये को उठा कर अपनी फुद्दि पर रख लिया…
.”नज़ीबा तुम्हारी सौतन तो बहुत शरमाती है….” मैने पीछे से अपने बाज़ुओं को आगे करते हुए, नज़ीबा के मम्मों को कमीज़ के ऊपेर से पकड़ते हुए कहा….और धीरे नज़ीबा के मम्मों को दबाने लगा….सामने लेटी नाज़िया हम दोनो को नशीली नज़रों से देख रही थी...
जैसे ही मेरी नज़रें नाज़िया की नज़रों से टकराती तो, नाज़िया अपनी नज़रें फेर लेती… “इसे उतारो….” मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए नज़ीबा की कमीज़ को पकड़ कर उसे उतारने के लिए कहा…..तो नज़ीबा ने अपनी कमीज़ को पकड़ लिया....नज़ीबा भी उस वक़्त मदहोश हो चुकी थी…. उस ने फॉरन कमीज़ पकड़ कर ऊपेर करते हुए उतार दी... मैने उसकी ब्रा के हुक्स फॉरन ही खोल दिए…फिर उसने अपनी स्किन कलर की ब्रा को भी उतार दिया...फिर मैने नज़ीबा की शलवार का नाडा पकड़ कर खेंचा और नज़ीबा को खड़े होने के लिए कहा…जैसे ही नाज़िया की टाँगो के दरम्यान नज़ीबा खड़ी हुई, मैने उसकी शलवार के साथ-2 उसकी पैंटी को भी पकड़ कर नीचे खेंच दिया….
जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया की तरफ देखा तो, नाज़िया ने फिर से अपनी आँखे बंद कर ली….”सीईइ नाज़िया नज़ीबा की ज़ुबान बहुत मीठी है….तुम्हारी सौतन ने तो अपने होंटो और ज़ुबान के जाम पिला कर अपने मुझे खुश कर दिया है….तुम मुझे खुश नही करोगी…” मैने नाज़िया के कान के पास अपने होंटो को लेजा कर सरगोशी में कहा तो, और फिर नाज़िया के कान को अपने होंटो में लेकर जैसे ही चूसा…नाज़िया एक दम से तड़प उठी….मैने हाथ से नाज़िया के फेस को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंटो को अपने होंटो में लेकर सक करना शुरू कर दिया…..
पर नाज़िया ने फिर से कोई रेस्पॉन्स नही दिया….मुझे पता था कि, नाज़िया अभी भी शरमा रही है….आख़िर उसकी बेटी साथ मे थी….जो शरम हया उसमे थी….उसे दूर करने में मुझे पता नही कितना वक़्त लगने वाला था….इसीलिए मैने नाज़िया के होंटो को छोड़ आगे बढ़ने की सोची….मैने नाज़िया के फेस से हटा कर नाज़िया के पेट पर उसकी नाफ़ के पास रखा….और उसके कमीज़ को पकड़ कर धीरे-2 ऊपर करना शुरू कर दिया…जैसे ही नाज़िया को इस बात का अहसास हुआ तो, नाज़िया ने हिलना शुरू कर दिया.. क्योंकि नाज़िया का कोई भी हाथ फ्री नही था….जिससे वो मुझे रोक पाती….”अह्ह्ह्ह समीररर ये क्या कर रहे हो….क्यों मुझे शर्मिंदा कर रहे हो….प्लीज़ समीर छोड़ दो मुझे… ऐसे तो ना करो…”
मैं: बड़ी बदजुबान हो तुम…….कैसी बेबाकी से अपने शोहर का नाम ले रही हो…. मुझे लगता है तुम्हारी जिंदगी में मेरी कोई अहमियत है ही नही….
मेरी बात सुन कर नाज़िया ने अपनी आँखे खोल कर मेरी तरफ देखा…और रुआंसी सी आवाज़ मे बोली….”सॉरी पर ऐसे तो ना करिए….”
मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए उसकी कमीज़ को ऊपेर करना शुरू कर दिया…नाज़िया ने भी मान लिया था कि, अब वो कुछ नही कर सकती…नाज़िया ने हथियार डालते हुए फिर से अपनी आँखे बंद कर ली…. मैने नाज़िया की कमीज़ को उसके गले तक ऊपेर उठा दिया….जैसे ही नाज़िया की कमीज़ उसके गाले तक ऊपेर हुई, मैने नाज़िया की ब्रा को एक हाथ से नीचे से पकड़ कर नज़ीबा की तरफ देखते हुए नज़ीबा को दूसरी मम्मे के नीचे से ब्रा पकड़ने का इशारा किया तो, नज़ीबा ने शरामते हुए नज़रें झुका ली…
.”तुमने सुना नही मैने क्या कहा…” मैने थोड़ा गुस्से में कहा तो, नज़ीबा ने दूसरी साइड से नाज़िया के ब्रा को पकड़ लिया….
“ऊपेर उठाओ….” और फिर मैने नज़ीबा ने एक हाथ से नाज़िया के ब्रा को जैसे ही ऊपेर उठाया…नाज़िया के गोरे 38 साइज़ के मम्मे उछल कर बाहर आ गये…मैने अपने साइड वाले मम्मे को अपने हाथ में लेकर दबाते हुए नज़ीबा की तरफ देखा….जो नज़रें झुका कर लेटी हुई थी….”ये देखो तुम्हारी अम्मी के मम्मे कितने बड़े है…सीईइ देखो इनके निपल कैसे सख़्त हो चुके है….” मेरी बात सुन कर नाज़िया ने ऐसे होंका भरा जैसे वो रो रही हो….”हाईए मैं मर गयी… मैं अब तुम दोनो के साथ आँखे कैसी मिलाउन्गी….नज़ीबा प्लीज़ इस तरफ मत देखना….”
मैं: क्यों क्यों नही देखना उसे….उसने देखना भी है और अपनी सौतन के मम्मों को चूसना भी है….
नाज़िया: नही…..
मैने देखा कि नज़ीबा बड़ी ही नशीली नज़रों से मेरी तरफ देख रही थी….मैने उसकी तरफ देखते हुए नाज़िया के मम्मे के ऊपेर झुकते हुए, जितना हो सकता था.. उसके मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईईईईईईई अहह….” जैसे ही नाज़िया को अपने मम्मे पर मेरी गरम ज़ुबान फील हुई, नाज़िया एक दम से तड़प उठी…
मैने नाज़िया का राइट मम्मा पकड़ा और मुँह में डाल लिया फिर रूम में मुकामल खामोशी छा गयी ....मैं नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए नज़ीबा की आँखो में देख रहा था…मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए, नाज़िया के दूसरे मम्मे को पकड़ कर दबाया…तो नाज़िया के दूसरे मम्मे का निपल और तीखा होकर बाहर निकल आया….मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए आँखो ही आँखो से नज़ीबा को नाज़िया के मम्मे को सक करने को कहा तो, नज़ीबा ने नाज़िया के ऊपेर झुकते हुए,नज़ीबा ने पूरा मुँह खोला और नाज़िया का मम्मा मुँह में डाल लिया...जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया के दूसरे मम्मे को चूसना शुरू किया...
तो नाज़िया ऐसे तडपी, जैसे उसे करेंट लग गया हो….”हाए मैं गयी… हाई ओईए खुदा ये तुम दोनो आअहह मेरे साथ कियाअ कर रहे हो…ओह्ह्ह्ह नज़ीबा तुम तो ऐसा ना करो….तुम तो आह तुम तो मेरी बेटी हो…प्लीज़ ऐसा ना करो…” नाज़िया बुरी तरह तड़प रही थी….मैने नाज़िया के मम्मे को बाहर निकाला तो नज़ीबा ने भी ने भी नाज़िया के मम्मे को मुँह से निकालना चाहा…पर मैने उसे मना कर दिया…नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को सक करना शुरू कर दिया… “बेड रूम में वो तुम्हारी बेटी नही है….आज के बाद बेडरूम के अंदर तुमने उसे बेटी नही कहना….” नज़ीबा बड़ी नफ़ासत से नाज़िया के मम्मे को सक कर रही थी...
नाज़िया: अह्ह्ह्ह ऐसा करने से सच्चाई तो बदल नही जाएगी….
मैं: अच्छा अगर मेरी बात का यकीन ना हो…तुम खुद ही नज़ीबा से पूछ लो… बताओ नज़ीबा नाज़िया बेडरूम में ये तुम्हारी क्या लगती है….
मैने फिर से झुक कर नाज़िया के मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईई ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अब्ब बस भी करो….मुझे बहुत शर्म आ रही है….”मेरी बात सुन कर नज़ीबा ने नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह से बाहर निकाला और सरगोशी से भरी आवाज़ में कहा…”मैं आपकी बेटी नही…आपकी सौतन हूँ बाजी…” और नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईई ओह हाईए तुम पागल हो गयी है….सीयी ओह्ह्ह्ह मुझसे बर्दास्त नही हो रहा…अहह बस करो….” नाज़िया बुरी तरह मस्ती में सिसक रही थी….
नाज़िया: आह मेरे बाज़ू में दर्द हो रहा है…
नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे कंधे के नीचे से खेंचते हुए कहा…तो मैं खुद ही थोड़ा ऊपेर हो गया….नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे नीचे से निकाल लिया…मेरे और नज़ीबा के दरम्यान मम्मे चूसने का मुक़ाबला स्टार्ट हो चुका था.. ....हम दोनो ने मम्मे चूस चूस कर नाज़िया को इस क़दर मजबूर कर दिया कि उस ने अपने दोनो हाथ हम दोनो के बालों में फेरने शुरू कर दिए.....”ओह्ह ये तुम मुझसे क्या करवा रहे हो….अह्ह्ह्ह हइईए आह नज़ीबा ओह जी मुझे कुछ हो रहा है…अहह मैने मर जाना है….ओह्ह्ह्ह,……”
मैं: क्या हो रहा है सच क्यों नही कहती कि तुम्हे अपने मम्मे चुसवा कर मज़ा आ रहा है….
नाज़िया: आहह खुदा के लिए चुप हो जाओ आप….
नाज़िया ने अपने दोनो बाज़ुओं में मेरे और नज़ीबा के सर को कस लिया…और हम दोनो के सर को अपने मम्मों पर दबाने लगी….वो कभी कभी सीयी की आवाज़ निकालती...मगर और कुछ ना कहती...नज़ीबा और मेरे गाल आपस में टकरा रहे थे...हम दोनो नाज़िया को ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा दे कर नाज़िया को भरपूर गरम करने की कोशिश कर रहे थे...नाज़िया भी अपने हाथों के ज़ोर से हमारे सिर अपने मम्मों पर दबा रही थी...
नाज़िया की कमीज़ और ब्रा उस के गले में थी...हम तीनो उस वक़्त खामोश थे और कुछ भी बोलने के मूड में नही थे....बस मैं और नज़ीबा इशारों से और ऐक दूसरे को देख कर समझाते हुए कर रहे थे…नाज़िया की सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी….नज़ीबा ने भी अपनी साइड संभाली हुई थी…और नाज़िया के राइट मम्मे को चूस रही थी….
नाज़िया भी पूरी गरम हो चुकी थी…अब वो किसी भी तरह का विरोध नही कर रही थी…नाज़िया को मस्त होकर अपने मम्मे चुस्वाते देख कर थोड़ी ही देर बाद मैने नाज़िया की कमीज़ को पकड़ कर तोड़ा सा खींच कर नाज़िया को उतारने का इशारा दिया...नाज़िया नशे में डूबी हुई उठ बैठी और अपनी कमीज़ को आगे पीछे से पकड़ कर उतारा नज़ीबा ने भी उस की मदद करते हुए ब्रा का हुक खोल कर उस को भी उतार दिया...
नाज़िया ने नशीली निगाहों से पहले नज़ीबा के फेस पर अपनी लंबी पलकें झुका कर उस को देखा ..फिर ऐसे ही मेरे चेहरे को देखा…फिर जैसे ही मैने नाज़िया को अपनी बाजुओं में लेकर उसे गले से लगाया…..तो नज़ीबा ने भी नाज़िया को अपनी बाहों में कस लिया….नाज़िया भी उस वक़्त फुल गरम हो चुकी थी…उसने मुझे और नज़ीबा को अपने बाज़ुओं के घेरे मे ले लिया…जैसे ही मैने नाज़िया के गालों को चूमना शुरू किया…तो मुझे देख कर नज़ीबा ने फॉरन नाज़िया के गाल चूमते हुए उस को प्यार करना शुरू कर दिया...
नज़ीबा आहिस्ता आहिस्ता किस करते हुए गर्दन पर आइ फिर नाज़िया की चेस्ट को मुँह में ले लिया और उस को चूसने लगी...नाज़िया ने तड़प कर सिसकी की आवाज़ निकाली और मेरे फेस को अपने फेस के सामने ला कर मेरे होंठो पर अपने नर्म ओ नाज़ुक होन्ट रख दिए.
मैने पागल होते हुए नाज़िया के होंठों का जाम अपने होंठो से लगा लिया ...नाज़िया को आहिस्ता आहिस्ता बेड पर लेटा दिया….और पूरी शिदत से मेरे होन्ट चूसने लगी उधर नज़ीबा भी नाज़िया की चेस्ट को हाथों में ले कर चूस रही थी..
मेरा एक हाथ खुद ही नाज़िया के एक मम्मे पर चला गया जिस को नज़ीबा ने पहले ही पकड़ रखा था मैं नज़ीबा के हाथ के ऊपेर से ही मम्मा दबाने लगा… नाज़िया मज़े के नशे में डूबी हुई सिसकारियाँ भर रही थी….मैने नज़ीबा का हाथ पकड़ कर नाज़िया के मम्मे से नीचे करते हुए धीरे-2 नाज़िया के पेट की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….जैसे -2 नाज़िया नज़ीबा के हाथ को अपने पेट की तरफ नीचे जाता हुआ महसूस कर रही थी…वैसे -2 उसका जिस्म उसकी कमर रुक-2 कर झटके खा रहे थे….फिर जैसे ही नज़ीबा और मेरा हाथ नाज़िया की शलवार के नैफे से टकराया….तो मैने नज़ीबा के हाथ से अपना हाथ हटा कर नाज़िया की शलवार का नाडा पकड़ा और नज़ीबा की आँखो में देखते हुए धीरे-2 नाज़िया की शलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….
नज़ीबा मदहोशी से भरी नज़रों से कभी मुझे और कभी नाज़िया की शलवार के नाडे को खुलता हुआ देख रही थी….जैसे ही नाज़िया का शलवार का नाडा खुला…मैं उठ कर बैठ गया….और नाज़िया की टाँगो को खोल कर उसकी टाँगो के दरम्यान आते हुए, उसकी शलवार को दोनो साइड से पकड़ कर जैसे ही नीचे करने लगा तो, नाज़िया ने मेरा हाथ पकड़ लिया….नही प्लीज़ इसे मत उतारो….” नाज़िया ने बिना आँखे खोले ही कहा….
“तुमने मुझे फुद्दि प्यार से देनी है या मार खा कर देनी है….” मैने नाज़िया की शलवार को नीचे की तरफ झटकते हुए कहा….पर नाज़िया ने अपनी शलवार को नही छोड़ा..
“जो करना है कर लो….पर प्लीज़ ये लाइट ऑफ कर दो….” नाज़िया ने सिसकते हुए कहा….
पर मैने नाज़िया की एक ना सुनी और नाज़िया की शलवार के साथ-2 नाज़िया की पैंटी की इलास्टिक को भी पकड़ कर ज़ोर से नीचे खेंचा…जैसे ही नाज़िया के हाथो से उसकी शलवार निकली मैने नाज़िया की शलवार और पैंटी को उतार कर साइड में रख दिया…मेरी नज़र नाज़िया की पैंटी पर पड़ी….जो उसकी फुद्दि वाली जगह से एक दम गीली थी….मैने नाज़िया की पैंटी को पकड़ा और नज़ीबा को दिखाते हुए कहा….”ये देखो तुम्हारी सौतन की फुद्दि कितना पानी छोड़ रही है….देखो लंड लेने के लिए कितनी बेकरार है…फिर भी नखडे कर रही है….” मैने नज़ीबा की तरफ पैंटी बढ़ाई…तो नज़ीबा ने शरमाते हुए नाज़िया की पैंटी को पकड़ कर जैसे देखना शुरू किया.. तो नाज़िया ने झपट्टा मार कर उसके हाथ से पैंटी छीन ली…
नाज़िया: नज़ीबा तुम भी बेशर्मी पर उतर आई हो….
नाज़िया ने पैंटी को बेड के दूसरी साइड पर फेंकते हुए कहा….तो मैने नज़ीबा की तरफ अपना हाथ बढ़ाया…तो नज़ीबा ने जैसे ही अपना हाथ मेरे हाथ में दिया… मैने नज़ीबा को अपनी तरफ खेंचा…नज़ीबा उठ कर घुटनो के बल बैठ गयी…मैने नज़ीबा को अपने आगे नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आने को कहा… जैसे ही नज़ीबा नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आई…नाज़िया ने अपने सर के नीचे रखे हुए तकिये को उठा कर अपनी फुद्दि पर रख लिया…
.”नज़ीबा तुम्हारी सौतन तो बहुत शरमाती है….” मैने पीछे से अपने बाज़ुओं को आगे करते हुए, नज़ीबा के मम्मों को कमीज़ के ऊपेर से पकड़ते हुए कहा….और धीरे नज़ीबा के मम्मों को दबाने लगा….सामने लेटी नाज़िया हम दोनो को नशीली नज़रों से देख रही थी...
जैसे ही मेरी नज़रें नाज़िया की नज़रों से टकराती तो, नाज़िया अपनी नज़रें फेर लेती… “इसे उतारो….” मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए नज़ीबा की कमीज़ को पकड़ कर उसे उतारने के लिए कहा…..तो नज़ीबा ने अपनी कमीज़ को पकड़ लिया....नज़ीबा भी उस वक़्त मदहोश हो चुकी थी…. उस ने फॉरन कमीज़ पकड़ कर ऊपेर करते हुए उतार दी... मैने उसकी ब्रा के हुक्स फॉरन ही खोल दिए…फिर उसने अपनी स्किन कलर की ब्रा को भी उतार दिया...फिर मैने नज़ीबा की शलवार का नाडा पकड़ कर खेंचा और नज़ीबा को खड़े होने के लिए कहा…जैसे ही नाज़िया की टाँगो के दरम्यान नज़ीबा खड़ी हुई, मैने उसकी शलवार के साथ-2 उसकी पैंटी को भी पकड़ कर नीचे खेंच दिया….