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लण्ड और चूत चुदाई

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Guest
लण्ड और चूत चुदाई

मेरा नाम जय है। मैं जब छोटा था.. तब मेरे माँ और पिताजी की एक रोड दुर्घटना में मौत हो गई थी। मेरे पिताजी के एक छोटे भाई और एक बहन हैं, मेरे पिताजी उन सब में बड़े थे।

रजनी बुआ- 32 साल

चाचा- 28 साल

चाची- 26 साल

एक और छोटी चाची भी थीं रिश्ते में जो मेरे परिवार के साथ ही बगल के एक कमरे में रहती थीं.. उनके वाले चाचा बाहर गाँव काम करते थे।

मेरी रजनी बुआ का पति दुबई में काम करता है.. वो साल में एक महीने के लिए गाँव आता है।

मेरे चाचा के घर में तीन बेडरूम हैं। एक में चाचा-चाची सोते थे। एक स्टोर रूम था और एक कमरा मेरा था।

मेरी जिंदगी अच्छे से चल रही है। जब मैं बड़ी कक्षा में गया.. तब मेरे स्कूल में मेरे दोस्त नंगी फोटो देख कर उनकी ही बातें करते हैं। मुझे भी फोटो देखकर कुछ-कुछ होता.. हालांकि तब मुझे पता नहीं था कि मेरा लण्ड खड़ा क्यों होता है।

एक दिन मैं मेरी रजनी बुआ के घर काम के लिए गया था। मेरे चाचा ने मुझे रजनी बुआ के घर उनके पैसे देने के लिए भेजा था। मैं हमेशा देखता था कि रजनी बुआ की सहेली का भाई राज अक्सर एक दिन के लिए आता है। जब भी रजनी बुआ की सहेली का भाई राज उनके घर आता.. तब बुआ अपने बच्चों को पिक्चर देखने या फिर चाचा के घर खेलने भेज देती थीं।

उस दिन भी रजनी बुआ ने अपने बच्चों को पिक्चर देखने भेज दिया।

जब मैं बुआ के घर पर गया.. तो घर पर कोई नहीं दिखा। मैं जब बुआ के कमरे के पास गया.. तब मैंने जो देखा उस पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था।

राज बुआ के दूध चूस रहा था, बुआ भी अजीब-अजीब सी आवाज निकाल रही थीं।

कुछ देर बाद बुआ की सहेली का भाई राज ने बुआ के पेटीकोट में हाथ डाल कर उनका नाड़ा खोल दिया। बुआ अब बिल्कुल नंगी हो चुकी थीं, राज ने भी अपने कपड़े निकाल दिए।

राज का लण्ड लगभग 6 इंच का था। बुआ ने राज को चूत चाटने के लिए कहा.. पर राज ने मना किया और अपना लण्ड बुआ की चूत में डाल दिया। सूखी चूत में लण्ड डालने से बुआ जोर से चीख पड़ीं.. पर राज उनकी चीख की परवाह किए बिना ही अपने लण्ड को अपनी बहन की सहेली की चूत में डाल कर धक्के पर धक्के दे रहा था। लगभग 10 मिनट तक धक्के लगाने के बाद राज जोर से चिल्ला कर बुआ के ऊपर गिर गया।

बुआ- क्या राज.. तुम हमेशा बिना मेरी चूत चाटे ही.. अपना लण्ड मेरी चूत में डाल देते हो..

राज- रजनी तुम्हें तो पता है.. कि मुझे चूत चाटना पसंद नहीं है।

बुआ- लेकिन तुम मेरी चूत को गीली किए बिना ही लण्ड पेल देते हो..

राज- क्या करूँ.. अब तो आदत हो गई है।

बुआ- हाँ तो तुम्हारी पुरानी आदत है.. अब तो खैर.. मुझे भी आदत हो गई है।

राज- हाँ.. अब 6 साल से तुम्हारी चुदाई कर रहा हूँ.. अब भी तुम वैसे ही चुदाई का मजा ले रही हो.. जैसे पहली बार चुद रही हो।

बुआ- तुम मेरी सूखी चूत में लण्ड डालोगे.. तो मेरी चीख नहीं तो क्या हँसी निकलेगी?

राज- इसी लिए तो मैं तुम्हारे बच्चों को पिक्चर देखने भेजता हूँ।

बुआ- तुम बहुत चालाक हो.. हमेशा किसी ना किसी बहाने से मेरी चूत मारने आ ही जाते हो।

राज- तुम्हारी तरह मेरी बीवी चुदाई में मेरा साथ नहीं देती है।

बुआ- अब उठो.. बच्चे आने वाले होंगे।

राज- हाँ.. उठता हूँ।

मैं यह बात सुनकर घर से जल्दी बाहर आया, फिर थोड़ी देर बाद में घर का दरवाजा खटखटाया।

रजनी बुआ ने मुझे अन्दर आने को कहा और मुझे राज के पास छोड़ कर अन्दर चली गईं।

राज- क्या बात है जय.. क्या हुआ.. ऐसे चुप क्यों हो?

जय- कुछ नहीं भैया.. थोड़ी तबियत खराब है।

राज- क्यों क्या हुआ?

जय- कुछ ख़ास नहीं वो..

राज- अरे यार.. ये ‘वो.. वो..’ क्या लगा रहे हो?

मैंने मन में सोचा कि तुम्हारी चुदाई देख कर परेशान हूँ और बोला- कुछ नहीं भैया ऐसे ही..

राज- अरे यार तुम मुझे अपना दोस्त समझकर बता दो.. डरो मत।

मैंने सोचा कि इसे चूतिया बनाता हूँ और कहा- भैया.. वो क्या है कि मेरे क्लास के लड़के गंदी पिक्चर देख कर मुझे बोलते हैं.. कि ये देख.. तेरी रजनी बुआ कैसी नंगी है.. ये देख तेरी बुआ के दूध कितने बड़े हैं। मुझे उन पर गुस्सा आता है।

राज- देख जय.. तुम्हारी बुआ के बारे में कोई भी कुछ कहे.. उन पर गुस्सा मत करना.. लोग कितना भी कुछ कहें.. फिर भी तुम्हारी बुआ आखिर तुम्हारी बुआ है।

जय- हाँ आप ठीक कह रहे हो।

तभी बुआ अन्दर आईं।

तो मैंने बुआ को पैसे देते हुए कहा- बुआ, ये लो पैसे… चाचा ने भिजवाए हैं।

जय- ठीक है बुआ.. अब मैं चलता हूँ.. अच्छा भैया फिर मिलते हैं।

घर आकर मैं खाना खा कर सो गया। करीब 4 बजे मेरी नींद खुल गई मैंने देखा कि मेरी पैंट पर एक दाग लगा हुआ है। मैंने अपनी पैंट उतारी तो मेरी चड्डी पर भी दाग लगा हुआ था.. मैंने तुरंत चड्डी निकाल दी और दूसरे कपड़े पहन कर बाहर खेलने चला गया।

मैं क्रिकेट खेल रहा था.. तब बॉल ग्राउंड के पास वाले स्टोर हाउस में चली गई। वो स्टोर हाउस हमेशा बंद रहता है।

बॉल चली जाने से सब बच्चे अपने-अपने घर चले गए थे.. पर बॉल मेरी थी.. इसी लिए मैंने बॉल ढूंढने का फैसला किया।

लगभग 6 बज रहे थे और सूरज भी ढल चुका था। मैं स्टोर हाऊस के पीछे चला गया और कोई खिड़की ढूंढने लगा। तभी मुझे एक खिड़की खुली मिल गई। मैं चुपके से अन्दर गया और बॉल ढूंढने लगा.. पर स्टोर हाउस बड़ा था और अंधेरा भी हो चुका था।

तभी मुझे खिड़की से कुछ लड़के अन्दर आते दिखाई दिए.. मैं जल्दी से छुप गया।

मैंने देखा मेरी स्कूल के 12वीं क्लास के दो लड़के और उनकी क्लास की लड़की अन्दर आ गए और घास पर बैठ गए।

वो लड़की दोनों लड़कों के बीच में बैठी थी और दोनों लड़के उसके दूध दबा रहे थे।

पहला लड़का- तेरे आम तो मस्त हैं।

दूसरा लड़का लड़की के चूतड़ों पर भी हाथ फेरता हुआ बोला- हाँ यार.. इसके आम और तरबूज दोनों मस्त हैं!

लड़की- तुम लोग क्या सिर्फ बातें करने आए हो.. या फिर कुछ करोगे भी?

पहला लड़का- तेरे लिप्स तो इतने मीठे दिख रहे है.. कि मैं तो दिन भर इनको चूसता ही रहूँ।

दूसरा लड़का- जल्दी से अपने कपड़े उतार.. अब कण्ट्रोल नहीं होता है।

लड़की- हाँ.. उतार रही हूँ.. मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं हो रहा है.. जब से तुम दोनों ने ये आदत लगा दी है.. तब से मुझे मेरी चूत में बहुत खुजली हो जाती है।

पहला लड़का- ले मेरा लण्ड चूस..

दूसरा लड़का- मैं तेरी चूत चाट कर साफ करता हूँ।

लड़की- आह.. अआह्हह्हह.. मस्त मजा आ रहा है।

पहला लड़का- यार अब तू मेरी जगह आ और मैं तेरी जगह आता हूँ।

दूसरा लड़का- आह आ.. जल्दी आ..

लड़की- क्या चूसना लगा रहे हो.. पहले मेरी चूत मारो न..

थोड़ी देर चूत चाटने के बाद उस लड़के ने अपना लण्ड लड़की की चूत में डाल दिया और धक्का मारने लगा और दूसरा लड़का अपना लण्ड लड़की के मुँह में डालकर उसका मुँह चोदने लगा। अब फिर से दोनों अपनी जगह बदली की और चुदाई शुरू की।

मैंने भी अपना लण्ड बाहर निकाला.. मेरा लण्ड कड़क हो गया था। मैंने अपना हाथ थोड़ा आगे-पीछे करने लगा.. मुझे अच्छा लग रहा था। फिर मैंने हाथ को जोर-जोर से हिलाना शुरू किया।

उधर उन दोनों लड़कों ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। फिर थोदी देर बाद वो हाँफने लगा। मुझे भी लगा कि मेरी ‘सूसू’ निकल जाएगी।

पर मैंने देखा कि मेरी सूसू की जगह पर कुछ सफेद और गाढ़ा पानी निकल गया। शुरूआत में मुझे ऐसा लग रहा था.. जैसे मेरे ऊपर किसी ने 100 किलो सामान रख दिया हो और अब वो सामान मेरे ऊपर से निकल गया हो.. अब मैं हल्का महसूस कर रहा था।
 
पहला लड़का- यार.. आज फिर मजा आ गया।

दूसरा लड़का- हाँ यार.. इसकी लेने में बहुत मजा आता है।

लड़की- मैं तो थक गई.. यार एक साल से तुम दोनों मेरी चुदाई कर रहे हो.. सच में बहुत मजा आता है.. कल फिर मिलते हैं इसी जगह पर.. ठीक है अब चलो..

वो तीनों बाहर चले गए.. मैं भी बाहर चला गया.. क्योंकि मुझे उस लड़की का चेहरा देखना था। जब मैं बाहर आया तो देखा दो लड़के पेड़ के पास खड़े हैं।

मुझे लगा कि ये दोनों वही हैं.. पर उनके साथ लड़की नहीं दिखी.. थोड़ी देर बाद पेड़ के पीछे से एक लड़की बाहर आई।

मेरा मुँह खुला का खुला रहा गया- ये क्या… ये तो कामिनी है.. और ये क्या दोनों लड़कों में से एक उसका भाई है.. लड़का उसका बड़ा भाई है जो 2 साल से 12 वीं क्लास में फेल हो रहा है.. और दूसरा उसका ब्वॉयफ्रेंड.. मुझे मालूम था कि बचपन में उसकी और कामिनी की शादी फिक्स की गई थी।

जिस कामिनी के ब्वॉयफ्रेंड से उसकी शादी होने वाली है.. वो भी 2 साल 12 वीं क्लास में फेल हो रहा था।

वो तीनों चले गए.. मैं भी घर आकर खाना खाया और सोच रहा था कि आज के दिन में दो चुदाई देखने को मिल गईं।

एक मेरी बुआ और उसकी सहेली के भाई की चुदाई।

दूसरी कामिनी और उसके अपने सगे भाई और होने वाले पति की चुदाई।

मैं सोच में पड़ गया था कि आज तक मुझे लण्ड और चूत चुदाई जैसे शब्द पता थे.. पर आज मुझे उसका असली मतलब समझ में आया.. शायद ही मुझे कोई बता सकता था।

अब मुझे भी चुदाई करनी थी.. पर कैसे और किसके साथ.. वो पता नहीं था।

दूसरे दिन..

मैं सवेरे सवेरे ही स्कूल चला गया। मेरा स्कूल सुबह 7 से 11:30 तक है। आज हमारे क्लास की टेस्ट के रिजल्ट मिले। गणित के विषय में मुझे सबसे ज्यादा 70 मार्क मिले।

मैंने अपनी क्लास में गणित विषय में टॉप किया.. थोड़ी देर बाद लंच ब्रेक हुआ में बाहर ग्राउंड में खेलने लगा। तभी हमारे गणित विषय की शिक्षिका ने मुझे बुलाया।

मैडम- जय बेटा.. तुम्हारे मार्क तो बहुत अच्छे आए हैं।

जय- हाँ मैडम.. अच्छे हैं.. सब आपकी वजह से हुआ।

मैडम- इसमें मैंने क्या किया.. ये तो तुम्हारी मेहनत का फल है।

जय- लेकिन जो पुराने सर थे.. तब तो मुझे गणित से डर लगता था.. पर आप कितना अच्छा और सिंपल तरीके से पढ़ाती हो.. जिसके वजह से ही ऐसा हुआ है।

मैडम- ऐसा कुछ नहीं है.. हर टीचर के पढ़ाने का तरीका अलग होता है.. किसी को मेरा पढ़ाना अच्छा लगता है और किसी को पुराने सर का..

जय- फिर अभी आपकी वजह से मुझे अच्छे मार्क मिले हैं।

मैडम- मेरी तारीफ़ मत करो.. में सिर्फ 6 महीनों के लिए तुम्हारे स्कूल में पढ़ाने आई हूँ.. अब तो सिर्फ 1 महिना ही बाकी बचा है.. फिर मैं चली जाउंगी। तुम्हें फिर से पुराने सर ही पढ़ायेंगे।

जय- पर मैडम.. आप हमेशा के लिए हमारे स्कूल में क्यों नहीं पढ़ाती हो?

मैडम- नहीं जय.. मुझे वापस अपने स्कूल जाना होगा.. ये तो कुछ एक्सपेरिमेंट करने के वजह से मैं इस स्कूल में.. और तुम्हारे सर मेरे स्कूल पढ़ा रहे हैं। ये सब हम चैक कर रहे हैंकि शहर और गाँव में पढ़ाने में अंतर और मेंटल कैपेसिटी में कुछ बदलाव आता है या फिर हम जैसे तरीके से पढ़ा रहे हैं.. वही तरीका ठीक है। ट्रांस्फर एक्सपेरीमेंट से दोनों का ही फायदा है.. स्टूडेंट को नए टीचर और टीचर को नए स्टूडेंट मिल रहे हैं.. सबको एस्पिरियन्स मिल जाएगा।

जय- तो फिर आप चली जाएंगी?

मैडम- हाँ जाना तो पड़ेगा.. और मैं यहाँ पर अकेली हूँ.. मेरे पति और बच्चे तो शहर में ही हैं.. मुझे तो जाना ही पड़ेगा।

जय- पर आप हमेशा मेरी बेस्ट टीचर रहेंगी।

मैडम- ये अब छोड़ो.. मुझे प्रिंसीपल ने कहा है कि अगर तुम अच्छे से मेहनत करोगे तो तुम गणित में टॉप कर सकते हो..

जय- मैं तो पूरी मेहनत कर रहा हूँ मैडम।

मैडम- अरे ऐसा नहीं है.. तुम्हें और ज्यादा पढ़ना पड़ेगा और ज्यादा प्रेक्टिस करनी पड़ेगी।

जय- ठीक है मैडम.. मैं पूरी मेहनत करूँगा।

मैडम- प्रिंसिपल सर ने कहा है कि मैं तुम्हें स्कूल के बाद भी पढ़ाया करूँ.. क्या तुम पढ़ने को तैयार हो?

जय- हाँ क्यों नहीं मैडम.. मैं दोपहर में आपके घर आ जाऊंगा।

मैडम- हाँ ये ठीक है.. तुम मेरे घर ही आ जाया करो.. प्रिंसिपल सर तो कह रहे थे कि स्कूल में ही पढ़ाना पड़ेगा.. पर मैं सर को समझा दूंगी। आज 3 बजे आ जाना और साथ में बाकी विषय की भी तैयारी करना होगी।

जय- ठीक है मैडम मैं आ जाऊंगा।

मैडम- देखो.. लंच ब्रेक अभी खत्म हुआ.. चलो जाओ अपनी क्लास में..

जय- ओके मैडम..

क्लास में आते ही मैं कामिनी के बारे में सोचने लगा। कितने गोरे दूध थे कामिनी के.. कितनी अच्छी दिख रही थी बिना कपड़ों के.. मैं सपने में खोया था कि पता चला कि आज हिस्ट्री सब्जेक्ट के टीचर नहीं आए हैं.. तो हम सभी को बाहर ग्राउंड पर खेलने भेज दिया गया। ग्राउंड पर और भी क्लास के स्टूडेंट खेल रहे थे.. हम सब भी खेलने में लग गए.. पर मुझे कामिनी और उसका ब्वॉयफ्रेंड कहीं भी नहीं दिख रहे थे।

मैं उन्हें ढूंढने लग गया। ढूंढते-ढूंढते मैंने स्पोर्ट रूम के पास जाकर देखा.. तो कामिनी का भाई बाहर खड़ा था और स्पोर्ट रूम का दरवाजा अन्दर से बंद था। मुझे लगा कि कामिनी और उसका ब्वॉयफ्रेंड अन्दर चुदाई कर रहे होंगे.. इसी लिए मैं स्पोर्ट रूम की खिड़की से देखने गया.. पर अन्दर देखा कि कामिनी और उसका ब्वॉयफ्रेंड के साथ हमारे प्रिंसिपल सर हैं और वो भी नंगे थे।

कामिनी- सर जल्दी से मेरी चुदाई करो.. ज्यादा टाइम नहीं है।

सर- चुप कर कुत्ती साली.. चुपचाप पहले मेरा लण्ड चूस..

ब्वॉयफ्रेंड- कामिनी चूस न जल्दी.. क्यों नाटक कर रही है?

कामिनी- हाँ कर तो रही हूँ।

सर- चल छोड़ वो सब.. चल जल्दी कुत्ती की तरह बैठ।

कामिनी- ये लो सर बन गई आपकी कुत्ती।

सर- अब देख तेरा कुता कैसे तुझे चोदेगा।

इसी के साथ सर ने अपना लण्ड कामिनी की चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगे। करीब 10 मिनट के बाद.. चुदाई खत्म हो गई।
 
ब्वॉयफ्रेंड- सर अब तो हम पास हो जाएंगे न..

कामिनी- हाँ सर.. अब इन्हें पास कर दो।

सर- ठीक है.. तेरी चुदाई का फल तो तुझे मिल जाएगा.. तेरे भाई और तेरे ब्वॉयफ्रेंड को पास कर दूंगा।

ब्वॉयफ्रेंड- थैंक्स सर..

कामिनी- चलो अब मुझे कपड़े पहनने दो।

सर- हाँ चलो बहुत देर हो गई.. अब मैं चलता हूँ.. नहीं तो लोगों को शक हो जाएगा।

सर के रूम से बाहर जाने के बाद कामिनी का भाई अन्दर आ गया।

कामिनी- कामिनी चलो.. तुम्हारा काम हो गया..

कामिनी का भाई- अभी कहाँ हुआ.. अभी तो हमें भी तेरी चुदाई करनी है।

ब्वॉयफ्रेंड- हाँ यार सर की चुदाई देख कर मैं भी गर्म हो गया हूँ।

कामिनी- नहीं.. अभी नहीं.. शाम को स्टोर हॉउस में करना।

ब्वॉयफ्रेंड- पर यार.. सर से तेरी चुदाई देख कर मैं बहुत गर्म हो गया हूँ। अभी क्यों नहीं करवा रही है?

कामिनी- यहाँ रिस्क है.. समझा करो मेरे साजन।

ब्वॉयफ्रेंड- चलो ठीक है..

कामिनी का भाई- हाँ चलो।

तीनों स्पोर्ट रूम से चले गए और मैं भी कामिनी और सर की चुदाई देख कर खुश हो गया और अपने घर चला गया।

मैं अब दोपहर में मैडम के घर की तरफ चला गया, मैडम घर में अकेली रहती हैं.. उनके पति और बच्चे शहर में रहते हैं।

मैडम दिखने में सुंदर हैं.. उनके मम्मों की छटा बहुत दिलकश है.. किसी पके हुए आम की तरह उठे हुए चूचे हैं। उनके मम्मों को एक बार देख लो तो बस बार-बार देखने की इच्छा होती है। मैडम की उम्र लगभग 30 साल की होगी। मैडम के बारे में जितना बोलूँ.. उतना कम है।

मैंने मैडम के घर पहुँच कर का गेट खटखटाया.. थोड़ी देर बाद मैडम ने दरवाजा खोल दिया। इस वक्त मैडम एक नाइटी में थीं।

मैडम के आम लटक रहे थे.. मैं तो बस उनको देखते ही रह गया। मैडम ने मुझे आवाज दी.. तब मैं होश में आया।

मैडम ने मुझे अन्दर बुला लिया।

मैडम अन्दर पानी लेने चली गई। मैं अपने आपको गाली देने लगा.. क्योंकि जिस तरह से मैं मैडम को देख रहा था.. उससे मुझे खुद पर गुस्सा आया। ये सब कल से शुरु हुआ.. जब से मैंने अपनी लाइफ की पहली चुदाई देखी.. तब से मेरा हर औरत को देखने का नजरिया बदल गया।

मैडम पानी लेकर आईं.. मुझे पीने के लिए दिया.. मैंने पानी पी लिया और अपनी किताबें निकालने में लग गया।

जैसे ही मैंने किताब निकाली.. मैडम ने मुझे रोक दिया- अरे जय तुम किताबें अन्दर बैग में ही रहने दो।

जय- पर मैडम अगर मैंने किताबें बैग में रख दीं.. तो मैं पढूंगा कैसे?

मैडम- सॉरी जय.. वो क्या है मैं घर में अकेली बोर हो जाती हूँ.. इसी लिए मैंने तुम्हें यहाँ बुलाया है।

जय- पर मैडम मेरी पढ़ाई?

मैडम- पढ़ाई घर पर कर लेना।

जय- पर आपने तो कहा था कि आप मुझे गणित पढ़ाओगी।

मैडम- देखो जय.. तुम होशियार हो.. स्मार्ट हो.. खुद घर पर पढ़ाई कर सकते हो। रही बात तेरे पास आने की.. तो मुझे यही तरीका सही लगा.. इसी लिए मैंने तुम्हें यहाँ बुलाया है।

जय- पर मेरी पढ़ाई?

मैडम- क्या पढ़ाई-पढ़ाई लगा रहे हो.. रुको मैं तुम्हें कुछ दिखाती हूँ। देखो जय मेरे हाथ मेरे रबर है… तुम महसूस करो कि ये तुम हो.. अब मैं इसे खींचती हूँ। देखो रबर अब कितना लंबा हो गया.. अब अगर मैंने इसे थोड़ा और खींचा.. तो ये टूट जाएगा। इसी तरह तुम्हारी भी एक लिमिट है.. अगर तुम उसे पार करोगे.. तो तुम्हें प्रॉब्लम हो सकती है। मैं ऐसा कह रही हूँ कि लिमिट क्रॉस करने से लॉस ही होता है.. पर कभी-कभी प्रॉफिट भी होता है। सबको वो प्रॉफिट नहीं मिलता.. ज्यादातर नुकसान ही होता है। देखो तुम स्मार्ट हो.. तुम कोई कितना भी पढ़ाए.. ये तुम पर है कि तुम कितना गेन कर सकते हो। मैं तुम्हें ये नहीं कह रही हूँ कि तुममें वो काबिलियत नहीं है… तुमको खुद उसे बाहर निकालना है।

जय- हाँ.. मैं कुछ-कुछ समझ गया।

मैडम- तो ठीक है.. आज से तुम रोज दोपहर को मेरे घर मुझसे बातें करने आया करो।

जय- ठीक है.. मैडम मैं आपके घर आया करूँगा।

मैडम- देखो इतना लेक्चर देने से मेरा गला सूख गया.. रुको मैं कॉफी बनाती हूँ।

जय- ठीक है मैडम..

कुछ देर बाद:

मैडम- ये लो कॉफी..

जय- थैंक्स मैडम..

मैडम- क्या हुआ कॉफ़ी नहीं पी रहे हो?

जय- वो क्या है मैडम.. मैंने इससे पहले कभी कॉफ़ी नहीं पी है।

मैडम- देखो जय.. लाइफ में कोई ना कोई काम पहली बार करना पड़ता है.. उस वक्त थोड़ी प्रॉब्लम होगी.. पर बाद में तू उस काम को ‘एन्जॉय’ करना सीख जाओगे।

जय- ओके..

मैंने कॉफ़ी पी ली.. पहला घूंट मुझे अच्छा नहीं लगा.. पर बाद में मैं कॉफी को एन्जॉय करने लगा।

मैडम- तो जय कैसी थी कॉफ़ी?

जय- अच्छी थी.. मुझे पसंद आई।

मैडम- कहा था न.. तुम्हें अच्छी लगेगी।

जय- हाँ.. सही कहा आपने। आपके परिवार में कौन-कौन है?

मैडम- मेरे परिवार में मेरे पति और मेरा बेटा है।

जय- तो वो दोनों शहर में रहते हैं न?

मैडम- हाँ.. वो दोनों शहर में रहते हैं.. एक महीने के बाद मैं भी शहर चली जाउंगी।

कुछ देर इसी तरह की बात होती रहीं फिर मैंने पूछा- मैडम टाइम क्या हुआ।

मैडम- अभी 4.30 हुए है.. क्यों कहीं जाना है?

जय- हाँ.. वो ग्राउंड पर खेलने जाना है..

मैडम- ठीक है.. जाओ.. कल फिर आना और कोई पूछे तो यही बताना कि पढ़ने गया था।

जय- ठीक है मैडम!

मैडम के घर से निकलने के बाद.. मैं सीधे घर गया और खेलने चला गया। पर खेलते समय मेरा सारा ध्यान स्टोर हाउस की ओर था कि कब कामिनी आएगी और कब मुझे उसकी चुदाई देखने मिलेगी।

दूसरे दिन कल की तरह आज भी स्कूल में कुछ नहीं हुआ। शायद हुआ होगा.. पर मुझे नहीं दिखा।

दोपहर में मैं मैडम के घर गया, आज भी मैडम ने नाइटी पहनी थी।

फिर हमारी बातें शुरू हुईं।

मैडम- कुछ पियोगे।

जय- हाँ.. एक कप कॉफ़ी..

मैडम- क्या बात है.. कल तो मना कर रहे थे.. और आज खुद मांग रहे हो।

जय- मैडम आपने ही तो कहा था कि पहली बार के बाद एन्जॉय करोगे.. इसी लिए।

मैडम- ठीक है बैठो.. मैं कॉफ़ी बनाती हूँ।

मैं सोफे पर बैठा मैडम के घर को देख रहा था कि तभी मुझे उनके बिस्तर के नीचे एक बुक पड़ी हुई मिली। मैंने वो किताब उठा ली और टेबल पर रख दी।

किताब पर न्यूज पेपर से कवर किया हुआ था.. पर पंखे की स्पीड ज्यादा होने से कुछ पन्ने पलट गए। जब मेरी नजर उस किताब पर पड़ी.. तो उसमें लड़कियों की नंगी फोटो बनी थीं।

मैंने किताब उठा ली और देखने लगा। तभी अन्दर के कमरे से कुछ आहट हुई.. मैंने झट से वो किताब गलती से मेरे बैग में डाल ली।

मैडम कॉफी लेकर आईं और हम दोनों ने कॉफी पी.. और बातें करने लगे।

मैडम- जय तुम्हारा गाँव बड़ा अच्छा है।

जय- हाँ मैडम अच्छा तो है।

मैडम- तुम्हारे गाँव के लोग थोड़े अजीब हैं।

जय- अजीब हैं मतलब?

मैडम- जब भी मैं बाहर निकलती हूँ तो मुझे घूर-घूर कर देखते हैं।

जय- क्या मैडम.. अगर आप इस ड्रेस में बाहर जाओगी.. तो लोग घूर कर देखेंगे ही न..

मैडम- नहीं मेरा मतलब है.. जब भी स्कूल जाती हूँ तब.. यानि कि मैं साड़ी में होती हूँ.. तब भी लोग मुझे घूर-घूर कर देखते हैं।

जय- मैडम आप गाँव में सबसे सुंदर हो.. इसीलिए सब आपको घूर-घूर कर देखते हैं।

मैडम- और एक बात पूछूँ?

जय- हाँ पूछिये न मैडम?

मैडम- वो दुकान के पास पीले रंग का घर किसका है?

जय- मैडम वो घर तो हमारे स्कूल की लड़की कामिनी का है।

मैडम- ये कामिनी कौन सी क्लास में है?

जय- 12वीं क्लास में है।

मैडम- उसके घर में एक लड़का भी देखा था मैंने।

जय- वो शायद उसका भाई होगा। वो भी 12वीं क्लास में है और 2 साल से फेल हो रहा है.. पर मैडम ये आप क्यों पूछ रही हो?

मैडम- ऐसे ही.. वो क्या है कि जब भी में स्कूल जाती हूँ.. तो वो मुझे देखता रहता है।

जय- मैडम वो और उसकी बहन दोनों ही गंदे हैं।

मैडम- गंदे मतलब?

जय- गंदे मतलब.. गंदे.. जाने दो मैडम.. अब मुझे जाना होगा देर हो गई है.. कल मिलते हैं।

मैडम- हाँ चलो ठीक है.. कल जरूर आना और खाना भी मेरे साथ ही खाना.. ठीक है।

जय- ठीक है मैडम।

मैं घर जाने के बाद सीधे ग्राउंड पर खेलने चला गया। पर आज कामिनी और उसका भाई और ब्वॉयफ्रेंड आज स्टोर हाउस की ओर नहीं आये।

कल की घटना की वजह से वो शायद आज नहीं आये होंगे।

खेलने के बाद मैं घर चला गया। खाना खाने के बाद चाचा के साथ कुछ बातें की और अपने कमरे की ओर चला गया। आज रात को होमवर्क करने के लिए जैसे मैंने बैग खोला.. तो मुझे एकदम से झटका लगा। मेरे बैग में मैडम के घर की किताब मिली। मैं उसे भूल ही गया था..

मैं वो किताब देखने लगा। उस किताब में अलग-अलग लड़कियों की नंगी फोटो थीं।

कुछ बड़ी उम्र की औरतों की भी नंगी फोटो थीं। कुछ फोटो स्तन चूसने की.. कुछ चूत चाटने की.. लण्ड चूसने की और कुछ चुदाई की थीं।

ये सभी फोटो देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मेरा लण्ड खड़ा हो गया तो जैसे मैंने एक बार मुठ मारी थी.. वो भी स्टोर हाउस में.. पर मुझे मालूम नहीं था कि उसे मुठ मारना कहते हैं। उसी तरह आज मैंने अपने आइटम को हिलाना शुरू कर दिया।
 
किताब पढ़ते-पढ़ते आखिरी पेज पर कुछ लिखा था, शायद वो मैडम ने लिखा था ‘मेरे पति का लण्ड 6 इंच लंबा है।’

यह पढ़कर.. मेरे दिमाग में मुझे भी लण्ड नापने की सूझी।

मैंने अपने बैग में से स्केल पट्टी निकाली और खड़े लण्ड के साथ लगा दी पर मुझे लम्बाई पता नहीं चल रही थी.. तो फिर मैंने अपनी पैन्ट और चड्डी एक साथ निकाल दी।

फिर एक बार मैंने स्केल अपने लण्ड से लगा दिया।

स्केल पट्टी पर पेन्सिल से मार्क किया, फिर मैंने स्केल अपने लण्ड से हटा दी.. और चड्डी और पैन्ट पहन ली।

स्केल के मार्क को देखने लगा.. तब मुझे अपने लण्ड की लंबाई पता चली। अचानक बाहर से चाची की आवाज आई- जय सो जा.. देर हो गई है.. कल स्कूल भी जाना है।

मैंने स्केल को किताब में लगा कर बिस्तर के नीचे रख दिया और सो गया।

दूसरे दिन सब ठीक रहा।

मैं स्कूल गया, स्कूल में भी कुछ ख़ास नहीं हुआ। सिर्फ मुझे होमवर्क ना करने की वजह से सजा मिली। स्कूल के बाद मैं घर आया।

मैंने चाची से कहा- मैं थोड़ा कम खाना खाऊंगा।

‘क्यों?’

मैंने चाची को बताया कि मुझे मैडम ने खाने पर बुलाया है।

दोपहर को मैं मैडम के घर चला गया, आज मैडम ने साड़ी पहनी थी, वे लाल रंग की साड़ी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं।

मैडम के चहरे पर वो तेज नहीं था जो हमेशा रहता था।

मैडम ने दो थाली में खाना लगा कर एक मुझे दी और एक उन्होंने ली।

खाना सच में अच्छा था।

खाना खाने के बाद में सोफे पर बैठ गया।

मैडम- खाना कैसा था जय?

जय- अच्छा था मैडम।

मैडम- एक बात बताओ जय।

जय- हाँ पूछिये।

मैडम- क्या तुम यहाँ से कोई किताब लेकर गए हो?

जय- नहीं मैडम.. मैंने कोई किताब नहीं ली और अगर मुझे कोई किताब चाहिए थी.. तो मैं आपसे मांग सकता था।

मैडम- ठीक है.. शायद मैंने ही कहीं रख दी होगी।

जय- क्या कोई ख़ास किताब थी मैडम?

मैडम- नहीं.. ऐसी कोई ख़ास तो नहीं.. पर मैं उसे रोज रात को पढ़ती थी।

जय- कोई स्टोरी बुक थी क्या? अगर हो तो मेरे पास भी कुछ स्टोरी बुक हैं.. वो मैं आपको ला देता हूँ।

मैडम- नहीं रहने दो.. जब मैं शहर जाऊंगी.. तब दूसरी ले लूँगी।

जय- जैसा आप कहें!

मैं सोचने लगा कि कहीं मैडम को पता तो नहीं चल गया कि वो किताब मेरे पास है। मैं कल ही यहाँ किताब रख दूंगा।

मैडम शायद अपने मन में सोच रही थीं कि उन्हें पूरा यकीन है कि किताब जय के पास ही है। मेरे घर में जय के अलावा कोई नहीं आता है और मैं तो किताब हमेशा बिस्तर के नीचे रखती हूँ। शायद जय डर गया होगा इसी लिए झूठ बोल रहा है।

‘कॉफ़ी पियोगे?’

जय- हाँ क्यों नहीं..

कॉफी पीने के बाद में घर चला आया, रास्ते में मैं किताब के बारे में ही सोच रहा था।

दोपहर में.. मैं मैडम के घर चला गया। आज मैडम का मूड कल के मुकाबले ठीक था।

मैडम- जय क्या बात है.. आज थोड़ा उदास लग रहे हो।

जय- नहीं मैडम.. वो क्या है न कि नींद ठीक से नहीं आई।

मैडम- रुको में तुम्हें गर्म-गर्म कॉफी पिलाती हूँ।

जय- ठीक मैडम।

मैडम के किचन के अन्दर जाते ही मैंने मैडम की सेक्सी किताब बैग से निकाल कर वहीं बिस्तर के नीचे.. जहाँ मुझे मिली थी.. वहीं रख दी।

मैडम- ये लो कॉफी.. और बताओ क्या चल रहा है।

जय- कुछ ख़ास नहीं।

मैडम- तुम्हारी उम्र के हिसाब से तुम स्कूल के विद्यार्थी नहीं लगते हो।

जय- वो क्या है न कि.. मेरे माता-पिता की मृत्यु की वजह से मुझे एक ही क्लास में दुबारा बैठना पड़ा था.. नहीं तो आज मैं कॉलेज में होता।

कुछ देर की गपशप के बाद..

जय- मैडम मैं चलता हूँ.. कल फिर आऊंगा।

मैडम- क्या कोई काम है.. आज इतनी जल्दी जा रहे हो।

जय- वो बुआ के घर जाना है।

मैडम- ठीक हे.. कल फिर आना।

जय- बाय मैडम।

मैं मन में सोचने लगा कि अच्छा हुआ आज किताब रख दी.. चलो अभी बुआ के घर चला जाता हूँ।

नाश्ता करने के बाद मैं सीधा ग्राउंड पर चला गया। थोड़ी देर खेलने के बाद घर चला गया। शायद कामिनी ने स्टोर हाउस आना बंद कर दिया, मेरा चुदाई देखना भी बंद हो गया।

रात को सोते वक्त मैं वो किताब वापस तो रख आया था.. पर शायद मुझे वो बिस्तर के नीचे नहीं रखनी थी। मैडम ने उस जगह पर किताब को ढूंढा होगा और आज उसी जगह पर किताब मिल जाने से मैडम को पता चल जाएगा कि मैंने ही किताब वापस रख ही है। कल मैडम के पूछने से पहले ही सब बता दूंगा।

दूसरे दिन..

स्कूल से घर आने पर चाची के साथ बात की, खाना खा कर सो गया फिर दोपहर मैं डरते-डरते मैडम के घर चला गया।

स्कूल में मैडम ने मुझसे अच्छे से बात की.. फिर भी मुझे डर लग रहा था। मैडम के घर जाकर मैं सोफे पर बैठ गया। मैडम ने आज भी नाइटी पहन रखी थी।

मैडम- जय कॉफी पियोगे?

जय- हाँ..

कुछ देर बाद मैडम और मैं चुपचाप कॉफ़ी पीने लगे।

जय- मैडम आपसे एक बात कहनी थी।

मैडम- हाँ कहो क्या कहना है जय।

जय- वो वो.. क्या है कि मैडम..

मैडम- अरे बताओ.. क्या बात है?

जय- वो आपकी किताब मैंने ही ली थी।

मैडम- क्या?

जय- हाँ.. वो गलती से टेबल पर रखने की जगह मैंने बैग में रख ली थी।

मैडम ने मन में मुस्कुराते हुए कहा- पर तुमने तो कहा था कि तुमने नहीं ली।

जय- वो.. मैं डर गया था.. पर कल मैंने वो वापस रख दी थी।

मैडम- तुम अब क्यों बता रहे हो? मुझे किताब मिल गई।

जय- वो मुझे लगा कि वापस उसी जगह रखने से आप को पता चल गया होगा कि किताब मैंने ही ली थी। इसी लिए आपके पूछने से पहले मैंने ही बता दिया!

मैडम- कोई बात नहीं।

जय- आप गुस्सा तो नहीं हैं न मुझ पर?

मैडम- नहीं.. मैं क्यों गुस्सा होऊँगी तुम पर.. तुमने किताब वापस कर तो दी है।

उनके चेहरे से लग रहा था कि जैसे वो सोचने लगी थीं कि अगर मैं तुम पर गुस्सा हो गई और तुमने किताब वाली बात सब को बता दी.. तो मेरी कितनी बदनामी होगी। मुझे ये थोड़े आराम से करना है।

जय- तो आपने मुझे माफ़ कर दिया?

मैडम- हाँ मैंने तुम्हें माफ़ कर दिया.. पर ये किताब वाली बात किसी से भी मत करना।

जय- मैं ये बात किसी से भी नहीं कहूँगा।

मैडम- अच्छा ठीक है अब तुम जाओ.. और कल सन्डे है.. तुम 12 बजे आ जाना ठीक..

जय- हाँ मैं आ जाऊंगा समय पर मैडम..

अगले दिन.. फिर मैं घर से खाना खाने के बाद मैडम के घर की ओर निकल पड़ा।

मैडम का घर..

मैडम- जय तुम्हें आज दिन भर कुछ काम तो नहीं है?

जय- नहीं मैडम आज मैं फ्री हूँ।

मैडम ने अपनी चूचियाँ खुजाते हुए पूछा- तुमने वो किताब पढ़ी है?

जय- हाँ बस एक बार।

मैडम- वो किताब देख कर तुम्हें कैसा लगा।

जय- कुछ अजीब लग रहा था।

मैडम- क्या तुमने ऐसी किताब पहले भी देखी है।

जय- हाँ मेरे कुछ दोस्तों ने दिखाई थी।

मैडम- तुम्हें पसंद हैं ऐसी किताबें?

जय- पसंद तो नहीं हैं.. पर बार-बार देखने की इच्छा होती है।

मैडम- क्या तुम्हारे पास भी ऐसी किताब है?

जय- नहीं मैडम मेरे पास तो नहीं है।

मैडम- क्या तुम्हें वो किताब चाहिए?

जय- नहीं मुझे नहीं चाहिए। अगर मेरी चाची ने देख ली तो मुझे मार पड़ेगी।

मैडम- इसको ऐसे छुपा कर रखो अपने कमरे में.. किसी को पता नहीं चले कि तुम्हारे पास ऐसी किताब है।

जय- मैडम आपने भी तो छुपा कर रखी होगी। फिर भी मुझे मिल गई न.. वैसे ही अगर मेरी चाची को मिल गई तो..??

मैडम- अरे ये मेरी गलती की वजह से तुम्हें मिल गई।

जय- नहीं मैडम मुझे नहीं चाहिए।

मैडम- ठीक है.. मत लो मुझे क्या।

जय- मैडम आप गुस्सा मत हो। मैं डरता हूँ कि अगर मेरी चाची को किताब मिल गई तो क्या होगा.. और चाची ने अगर चाचा को बता दिया तो मुझे घर से निकाल देंगे।

मैडम- ठीक है जाने दो.. मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाती हूँ।

जय- ह्म्म्म्म…

मैडम- ये लो कॉफी जय।

जय- थैंक यू मैडम.. मैडम एक बात पूछूँ?

मैडम- हाँ हाँ पूछो।

जय- आप गुस्सा तो नहीं करोगी?

मैडम- नहीं करूँगी.. पूछो क्या पूछना है?

जय- वो किताब में लिखा था कि..

मैडम- हाँ बोलो ना.. रुक क्यों गए हो?

जय- वो किताब में लिखा था कि आप।के पति का लण्ड 6 इन्च का है।

मुझे लगा कि जैसे मैडम ने मन में सोचा कि अच्छा हुआ इसने पूछ लिया.. नहीं तो मैं सोच रही थी बात कैसे शुरू करूँ।

‘हाँ है तो.. और ये तुम्हें लण्ड जैसे शब्द क्यों बोल रहे हो.. तुम्हें शर्म नहीं आती.. मैडम के सामने ऐसे शब्द बोल रहे हो?’

जय- सॉरी मैडम.. गलती हो गई.. फिर नहीं बोलूंगा।
 
मैडम- अरे तुम तो नाराज हो गए। मैं तो मजाक कर रही थी, मुझे पता है गांव में ऐसे शब्द बोले जाते हैं। पूछो और क्या पूछना है।

जय- सभी लोगों के लण्ड 6 इन्च के ही होते हैं?

मैडम- नहीं ऐसा नहीं है.. कुछ लोगों के उससे भी बड़े होते हैं.. लेकिन तुम क्यों पूछ रहे हो?

जय- वो क्या है कि मेरे दोस्त..

मैं सोचने लगा कि.. रजनी बुआ की सहेली का भाई राज.. कामिनी का भाई और कामिनी का ब्वॉयफ्रेंड उन सबके भी इतने ही हैं।

मैडम- मुझे लगता है तुम्हें कुछ और पूछना है लेकिन तुम डर रहे हो। डरो मत.. खुल कर पूछो.. तुम्हें क्या पूछना है?

जय- वो मेरा एक दोस्त (मेरे मन में कोई दोस्त नहीं था.. मैं खुद को रख कर पूछ रहा था) है.. वो बोल रहा था कि उसका लण्ड 6 इन्च से भी बड़ा है। लेकिन मुझे उसकी बात पर यकीन नहीं है।

मैडम- वो बोल रहा है.. तो होगा उसका बड़ा.. इसमें यकीन ना करने की क्या बात है।

जय- नहीं मुझे लगता है कि उसे कोई बीमारी होगी.. इसी लिए उसका लण्ड बड़ा होगा।

मैडम- अरे कोई बीमारी से थोड़े ही लण्ड लंबा होता है.. वो तो हार्मोन की वजह से होता है। किसी का 6 इन्च से लंबा.. तो किसी का 6 इन्च से छोटा.. पर ज्यादातर लोगों का 6 इन्च के आस-पास ही होता है.. समझे…

जय- हाँ समझ गया मैडम.. एक गिलास पानी मिलेगा।

मैडम- हाँ लाती हूँ।

जय- शुक्र है भगवान का.. मैं समझ रहा था कि कहीं मुझे कोई बीमारी तो नहीं है। अच्छा हुआ मैडम से पूछ लिया नहीं तो मैं हमेशा बेचैन रहता।

मैडम- ये लो पानी।

जय- थैंक्स मैडम।

मैडम अपने मन में सोचने लगी थीं कि ये किसी दोस्त की नहीं बल्कि खुद की बात कर रहा है। इसे लगता है कि मैडम को कुछ पता नहीं चलेगा.. पर तुम ये भूल रहे हो कि मैंने तुमसे से ज्यादा दुनिया देखी है। एक तो इसका लण्ड छोटा या फिर बड़ा हो सकता है। अगर छोटा हुआ तो मेरे किसी काम का नहीं होगा। अगर लंबा हुआ.. मेरी तो चांदी ही चाँदी हो गई।

जय- मैडम आप क्या सोच रही हो?

मैडम- कुछ नहीं तुम्हारे दोस्त के बारे में सोच रही हूँ।

मैडम ने शायद सोचा कि मेरा लण्ड देखने के लिए उन्हें कुछ झोल तो करना ही पड़ेगा।

मैंने हैरान होते हुए पूछा- क्यों क्या हुआ मेरे दोस्त को।

मैडम ने मेरे चहरे पर परेशानी देख कर कहा- मुझे लगता है शायद तुम्हारे दोस्त को बीमारी भी हो सकती है।

जय- क्या बीमारी हो सकती है?

मैडम- हाँ अगर मैं उसके लण्ड को देख लूँगी.. तो बता सकती हूँ कि उसे बीमारी है या नहीं।

मैं कुछ सोचने लगा।

मैडम- तुम्हें क्या हुआ? तुम क्यों सोच रहे हो। तुम्हारे दोस्त को बीमारी है.. तुम्हें नहीं।

जय- वो क्या है कि..

मैडम मन में हँसने लगीं- अब आ रहा है लाइन पर फिर वे बोलीं- हाँ हाँ बोलो.. क्या बोल रहे हो।

जय- वो मैंने आपसे झूट बोला कि..

मैडम- हाँ बोलो?

जय- कि मेरे दोस्त का लण्ड लंबा है।

मैडम ने उदास होकर सोचा कि सब काम खराब हो गया फिर पूछा- तो क्या छोटा है?

जय- नहीं लंबा तो है.. पर मेरे दोस्त का नहीं बल्कि..

मैडम मन में- ये तो मुझे हार्ट अटैक लाकर ही दम लेगा- हाँ साफ़-साफ़ बोल.. कि क्या बात है?

जय- वो मेरे दोस्त का नहीं बल्कि मैं अपनी बात कर रहा था।

मैडम- क्या..??

जय- हाँ मुझे लगता है मेरा लण्ड लंबा है।

मैडम- यह तो देखना पड़ेगा.. तभी मुझे पता चलेगा। मुझे यकीन तो नहीं है शायद फिर से तुम झूट बोल रहे होगे।

जय- नहीं मैडम.. मैं सच बोल रहा हूँ। वो तब मैं डर गया था कि आप से कैसे पूछूँ.. इसी लिए मेरे दोस्त के जरिये आप से पूछ लिया।

मैडम- चलो कोई बात नहीं। अब तो तुम तुम्हारे सवालों के जवाब मिल गए न?

जय- हाँ पर आपने कहा था कि कुछ बीमारी भी हो सकती है।

मैडम- वो तो देख कर ही बता सकती हूँ ऐसे-कैसे बता दूँ।

जय- लेकिन मैं आपको कैसे दिखा सकता हूँ.. मुझे शरम आ रही है।

मैडम- अगर तुम शरमाते रहोगे तो बीमारी बढ़ सकती है।

जय ने मन में सोचा कि बीमारी के डर के वजह से नहीं.. फिर बिन्दास बोल दिया- नहीं नहीं.. मैं दिखाता हूँ।

मैंने अपनी पैन्ट और चड्डी निकाल दी।

इतनी देर से लण्ड के बारे में बातें करने से मेरा लण्ड हार्ड हो चुका था। लण्ड मैडम को सलामी दे रहा था। मेरे लण्ड को देखते ही मैडम का मुँह खुला का खुला ही रह गया। मैडम तो एक मूरत की तरह खड़ी एकटक मेरे लण्ड को देख रही थीं। ऐसा लग रहा था कि मैडम को किसी साँप ने काट लिया हो।

मैं भी मैडम का रिएक्शन देख कर परेशान हो गया। मुझे लग रहा था कि कहीं मुझे बीमारी तो नहीं है। मेरा डर हर सेकण्ड के साथ बढ़ रहा था।

मैडम ना कुछ बोल रही थीं.. ना कुछ कर रही थीं.. वो बस मेरे लण्ड को ही देख रही थीं। जैसे रूम में सिर्फ मैडम और मेरा लण्ड ही हो।

मुझे लग रहा था कि मेरा डर मुझ पर हावी हो रहा है।

मैंने मैडम को आवाज दी.. पर मैडम ने कोई जवाब नहीं दिया, फिर मैंने मैडम को हिलाया.. तब जाकर मैडम होश में आईं।

जय- क्या हुआ मैडम?

मैडम- कुछ नहीं.. वो वो त..तुम्हारा लण्ड क्या सच में.. क्या ये रियल का है?

जय- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है मैडम..

मैडम ने नॉर्मल होते हुए कहा- अरे कुछ नहीं।

जय- फिर आप इस तरह खड़ी क्यों थीं.. बताइये न मैडम क्या कोई प्रॉब्लम तो नहीं है?

मैडम- रुको पहले मुझे ठीक से देखने दो फिर मैं बताती हूँ।

जय- हाँ ठीक है.. लो देखो।

मैडम- अरे जय तुम्हारा लण्ड तो सच में लंबा है। मैंने अपने लाइफ में इतना बड़ा लण्ड कभी नहीं देखा।

जय- क्या मुझे कोई बीमारी तो नहीं है?

मैडम ने सोचा कि इसका लण्ड देख कर मेरी चूत में तो पानी आ गया। मुझे कुछ सोचना पड़ेगा। एक आइडिया तो है उससे मेरी चुदाई भी होगी और इसको भी बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा। ऐसी बीमारी जो कभी इसे थी ही नहीं।

‘जय मुझे देखना पड़ेगा कि तुम्हें बीमारी है कि नहीं..’

जय- हाँ जल्दी देख लीजिये।

मैडम- रुको में अन्दर से तेल लेकर आती हूँ।

जय- तेल क्यों?

मैडम- बीमारी है कि नहीं.. ये चैक करने के लिए।

जय- हाँ लेकर आइए।

मैडम ने तेल मेरे लण्ड पर डाल दिया और लण्ड पर अच्छे से लगाने लगीं। मुझे भी इसमें मजा आ रहा था.. पर डर भी था कहीं कोई बीमारी तो नहीं मुझे। मैडम ने अब अपने हाथों को हिलाना शुरू किया। मुझे स्टोर हाउस की यादें याद आ गईं.. जब पहली बार मैंने इसी तरह अपने हाथों से लण्ड को हिलाया था। मैडम ने अब अपने हाथों की गति बढ़ा दी। लगभग 10 मिनट तक हिलाने के बाद मुझे लगा कि मेरे लण्ड में कुछ हार्डनेस बढ़ गई।

फिर से मेरे लण्ड से वैसा ही सफेद पानी निकलने लगा जैसे स्टोर हाउस में निकला था। मेरे लण्ड से पानी निकल गया.. पर मैडम ने वो पानी अपने हाथों में ले लिया।

मैडम- ये देखो जय.. इससे पता चलेगा कि तुम्हें कोई बीमारी है कि नहीं।

जय- लेकिन इससे कैसे पता चलेगा?

मैडम- मैं इसे चख कर देखूंगी.. तब मुझे पता चलेगा।

जय- लेकिन ये तो गंदा होगा।

मैडम- नहीं ये गंदा नहीं होता है। इसी से बच्चा पैदा होता है।

जय- कैसे?

मैडम- जब ये पानी किसी लड़की की चूत में जाता है.. तब बच्चा पैदा होता है।

‘मतलब..?’

मैडम- चुदाई के बाद ही ये पानी लड़की के चूत में जाता है.. रुको मैं पहले चैक करती हूँ कि तुम्हें बीमारी है कि नहीं।

मैडम ने मेरा पानी अपनी जीभ से चाट लिया। थोदी देर बाद मैडम के चेहरे पर ख़ुशी देख कर मुझे भी थोड़ी राहत मिली।

जय- क्या हुआ मैडम.. सब ठीक तो है न?

मैडम ने अपनी चूत खुजाई और सोचा कि अब तो जय से चुदना ही पड़ेगा।

‘हाँ.. सब ठीक है..’

जय- मुझे कोई बीमारी तो नहीं है?

मैडम सोचने लगीं कि गाँव में लड़के छोटी उम्र से ही लण्ड.. चूत.. चुदाई शब्द का उपयोग करते हैं पर उनको पूरा ज्ञान नहीं होता।

‘डरने की कोई बात नहीं है। तुमको कोई बीमारी नहीं है।’

जय- फिर ये लण्ड इतना बड़ा क्यों है?

मैडम- अरे तुम्हें तो भगवान का शुक्रिया करना चाहिए कि तुम्हें इतना अच्छा लण्ड मिला है। बहुत कम लोगों का इतना बड़ा होता है समझे..

जय- थैंक यू मैडम.. आपने मेरे सर से कितना बड़ा बोझ हल्का कर दिया.. मैं बता नहीं सकता।

मैं अब भी नंगा ही खड़ा था।

मैडम- सुनो जय.. ये जो आज सब कुछ हुआ.. वो किसी से कहना मत।

जय- नहीं कहूँगा।

मैडम सोचने लगीं कि मुझसे चुदाई के लिए कैसे कहूँ।

‘जय जैसे आज मैंने तुम्हारा लण्ड देखा है.. वैसे ही तुमने कभी किसी की चूत देखी है?’

जय (झूठ बोलते हुए)- नहीं मैडम!

मैडम- देखना चाहोगे?

जय- हाँ देखने की इच्छा तो है।

मैडम- मेरी चूत देखोगे।
 
जय- आपकी चूत?

मैडम- हाँ मेरी चूत..

जय- अगर आप दिखायेंगी तो जरूर देखूंगा।

मैडम- तो चलो मेरे बेडरूम में..

बेडरूम में जाने के बाद मैडम ने अपनी नाइटी उतार दी। मैडम नाइटी के अन्दर पूरी नंगी थीं। जैसे ही नाइटी जमीन पर गिरी.. मैडम मेरे सामने नंगी खड़ी थीं। मैं भी कमर के नीचे नंगा था। मैडम की चूत चिकनी थी। मैडम के दूध पके हुए आम की तरह दिख रहे थे।

जिस तरह मैडम मेरे लण्ड को देख कर एक मूरत की तरह खड़ी थीं.. उसी तरह मैं भी मैडम को नंगा देख कर मूरत की तरह खड़ा था।

मैडम के चेहरे पर लण्ड मिलने की ख़ुशी झलक रही थी- जय.. जय.. कैसी लगी तुम्हें मेरी चूत?

मैडम की आवाज सुनकर मैं होश में आया.. पर मैडम ने क्या पूछा.. वो मुझे सुनाई नहीं दिया।

मैडम- जय, मेरे पास आ जाओ!

मैं मैडम के पास चला गया। मैडम और मेरे बीच बस कुछ कदमों का फासला रह गया था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

मैडम- हाथ लगाकर देखो मेरी चूत को..

जैसे ही मेरे हाथों ने मैडम की चूत को छुआ.. मेरे शरीर में करंट लगा और मैं पीछे हो गया।

मैडम- क्या हुआ.. पसंद नहीं आई मेरी चूत?

जय- हम्म..

मैडम- क्या तुमने इससे पहले कभी चूत देखी है।

मैंने ‘ना’ में गर्दन हिला दी।

मैडम- क्या तुमने कभी चुदाई की है।

जय- नहीं मैडम.. मैंने किसी की चूत ही नहीं देखी.. और ये चुदाई का क्या मतलब है?

मैडम- करना चाहते हो?

जय- हाँ..

मैडम- तो शुरू करो न।

जय- मुझे चुदाई करना नहीं आती।

मैडम- मैं तुम्हारी मैडम हूँ तो आज मैं तुम्हें चुदाई कैसे करते हैं.. सिखाती हूँ। मुझसे सीखोगे?

जय- हाँ.. मुझे चुदाई करना सीखना है.. आप मुझे सिखा दो।

मैडम- मैं तुम्हें ऐसी चुदाई सिखाऊँगी कि तुम हर लड़की और हर औरत को खुश कर सकोगे।

जय- ह्म्म्म।

मैडम- पहले मुझे किस करो।

मैंने मैडम के लिप्स पर अपने होंठ रख दिए। लगभग 5 सेकण्ड बाद मैंने उसने छोड़ दिया.. क्योंकि मैडम ने मुझे धक्का दिया था।

मैडम- अरे सिर्फ होंठों के ऊपर होंठ रखने से किस नहीं किया जाता.. तुम मेरे होंठों को अपने होंठों में रख कर चूसो। कभी ऊपर के होंठों को.. तो कभी नीचे के होंठों को.. होंठ चूसते हुए मुँह खुले पर अपनी जबान सामने वाले के मुँह में डाल कर उसकी जबान से साथ खेलो। फिर एक-दूसरे की जबान को चूसो। समझे कि नहीं अब.. तो फिर अब शुरु करो..

जैसे मैडम ने कहा.. वैसे ही मैंने किस करना चालू किया। मैं अपने होंठों को मैडम के होंठों पर रख कर चूसने लगा, कभी ऊपर के.. तो कभी नीचे के होंठ को चूसने लगा।

जैसे ही मैडम ने अपना मुँह खोला.. मैं मैडम की जीभ को अपने होंठों में पकड़ कर चूसने लगा। लगभग 10 मिनट तक चूमता रहा। बाद में हमने चूमना छोड़ दिया।

मैडम- तुम तो जल्दी सीख गए।

जय- मैंने ठीक किया।

मैडम- ठीक क्या.. तुमने बहुत अच्छा किया। अब मेरे गालों को चूमो चूसो.. पूरे चहरे पर चूमो.. बाद में मेरे कानों को भी चूमो।

जैसे मैडम ने कहा.. मैंने वैसा ही किया। मैडम के मुँह से आवाज निकल रही थी। दस मिनट तक वो सब करने के बाद मैं रुक गया।

मैडम- अब मेरी गर्दन पर चूमो।

मैंने वैसे ही किया। मैडम जोर-जोर से साँसें ले रही थीं।

मैडम- अब मेरे दूध को हाथों से दबाओ। पहले आराम से दबाना.. फिर थोड़ी देर बाद जोर से दबाना.. कभी लेफ्ट कभी राइट वाला.. ठीक है।

‘ठीक है..’

‘फिर मेरे निप्पल को थोड़ा खींचना और थोड़ा सहलाना। फिर अपनी जबान को मेरे निप्पल पर घुमाना.. फिर मुँह में लेकर चूसना। जितना अन्दर तक हो सके.. उतना मुँह में लेना और दूसरे दूध को हाथों से दबाते रहना।

‘जी ठीक है..’

मैडम के दूध कॉटन की तरह नरम थे। मैडम के दूध के साथ खेलने में मजा आ रहा था।

वो बीच-बीच में चिल्ला रही थीं कि और जोर से और जोर से दबाओ..

मेरे दूध चूसने से मैडम मदहोश होने लगीं.. वे थोड़ी देर बाद अकड़ गईं। मुझे कुछ समझ नहीं आया। मैं तो मैडम के दूध के साथ खेलता रहा।

फिर थोड़ी देर बाद मैडम नॉर्मल हो गईं। मेरे दूध चूसने के बाद मैडम बाथरूम में चली गईं।

बाथरूम से आने के बाद मैडम के चेहरे पर एक चमक थी।

मैडम- जय.. सच में.. तुम जल्दी सीख जाते हो.. आज तक मेरे पति ने भी इस तरह से मेरे दूध चूसे नहीं है।

जय- वो तो.. जैसे आप बता रही हो.. मैं तो वैसा ही कर रहा हूँ।

मैडम- अब तुम मेरी नाभि के साथ खेलो.. उसमें अपनी उंगली डालो उसे किस करो.. उसमें अपनी जीभ डालो.. और फिर अपनी जीभ को नाभि में आगे-पीछे करो.. ठीक है?

‘जी मैडम..’

मैं अपनी उंगली मैडम की नाभि में डाल कर खेलने लगा। फिर उस पर हल्के से चाटने लगा.. जैसे कुल्हड़ की कुल्फी चाट रहा होऊँ.. मैं अपनी जीभ को नाभि में डाल कर आगे-पीछे करने लगा।

मैडम को भी इसमें मजा आ रहा था।

मैडम- आह्ह.. जय अब रुक जाओ.. अब तुम्हें असली काम सिखाने जा रही हूँ। उसे ध्यान से सुनो.. तुम अपनी उंगली से मेरी चूत के साथ खेलो.. वैसे ही जैसे निप्पल के साथ किया था। फिर मेरे दाने के साथ खेलो।

‘दाना किधर है मैडम?’

उन्होंने मुझे हाथ लगाकर दिखा दिया।

‘तुम अपनी उंगली को धीरे-धीरे मेरी चूत में अन्दर तक डाल देना। मैं पहले चुदाई कर चुकी हूँ.. इसी लिए पहले एक उंगली.. फिर एक साथ दो उंगली.. डाल कर आगे-पीछे करना। तब तक करना जब तक तुम्हारी उंगली गीली नहीं हो जाती.. यानि कि मेरा पानी नहीं निकलता.. तब तक मेरी चूत में उंगली करना।

‘ठीक है..’

‘और हाँ.. किसी कुंवारी लड़की के साथ करते समय सिर्फ एक उंगली ही डालना। नहीं तो.. उसे ज्यादा दर्द हुआ तो वो तुमसे चुदाई नहीं करेगी।

‘जी ठीक है..’

‘इसके बाद तुम मेरी चूत पर हल्के-हल्के चुम्मी करना शुरू देना, मेरे दाने को होंठों से पकड़ कर खेलना, फिर अपनी जीभ से मेरी चूत को साफ़ करना। फिर जिस तरह नाभि में जीभ डाल कर आगे-पीछे किया.. बिल्कुल उसी तरह चूत में डाल कर करना.. और तब तक करना.. जब तक मेरा पानी नहीं निकलता और वो सारा पानी पी लेना।

औरत को ये अच्छा लगता है और हाँ उंगली करते वक्त पानी निकले ऐसा जरूरी नहीं है.. थोड़ी देर उंगली करना फिर जीभ से चूत के साथ खेलना।

ध्यान रखना की जीभ से चुदाई करते वक्त पानी जरूर निकलना चाहिए, नहीं तो औरत को गुस्सा आता है। अगर कोई कुंवारी हो तो पानी निकलने के पास आकर रुक जाना, इससे क्या होगा कि वो तुमसे चुदाई की भीख मांगेगी.. फिर तुम आराम से उसकी चुदाई कर सकते हो।

जिस तरह से मैडम ने कहा.. मैंने उसी तरह से करना चालू किया। मुझे तो मजा आ रहा था, पहली बार चूत को इतने पास से देख रहा था।

मैंने पहले हल्के-हल्के से चूत को चूसना शुरू किया, फिर जोर-जोर से चूसा। जैसे ही.. मैंने अपनी गति बढ़ाई.. वैसे ही मैडम ने मेरे सर को पकड़ कर चूत पर दबाने लगीं, दूसरी बार मैडम ने पानी छोड़ा.. पहली बार दूध की चुसाई करते वक्त छोड़ा था।

मैडम के पानी छोड़ने के बाद भी मैंने चूत चूसना बंद नहीं किया, मैं पागलों की तरह चूत चाटने में लगा हुआ था, मैडम ने फिर से पानी छोड़ दिया।

मैं भी अब थक गया था। जैसे ही मैं उनसे अलग हुआ.. मैडम ने मुझे गले लगा लिया।

मैडम- आज तो तुम ने मुझे जन्नत दिखा दी।

जय- मैडम थोड़ा पानी मिलेगा।

मैडम- अभी तो दो बार में अपनी चूत का पानी पिला चुकी हूँ। फिर भी तुम्हें पानी चाहिए।

जय- मैडम मैं थक गया हूँ थोड़ा।

मैं हँस दिया।

मैडम मुझे आँख मारते हुए हँसने लगीं- तुम उस पानी की बात कर रहे हो.. मुझे लगा कि.. और पीना चाहते हो।

मैडम ने मुझे शर्बत लाकर दिया।

मैडम- चलो अब आखिरी चैप्टर भी पढ़ लो।

जय- मतलब चुदाई।

मैडम- हाँ चुदाई अब इतना भी खुश मत हो.. नहीं तो मैं आखिरी चैप्टर नहीं पढ़ाऊँगी।

जय- नहीं मैडम ऐसा मत करो। ये मेरी पहली चुदाई होगी।

मैडम- ठीक है मेरे चोदू राजा.. मैं तो मजाक कर रही हूँ.. अब सुनो। मुझे जल्दी तुम्हारा लण्ड अपनी चूत में चाहिए। इसलिए में तुम्हारा लण्ड मुँह में नहीं लूँगी।

तुम लण्ड पहले मेरी चूत पर रगड़ना.. फिर लण्ड को मेरी चूत में डालना, पहले लण्ड का जो लाल भाग है.. उसे अन्दर डालना।

फिर एक झटका मार कर दो इंच तक अन्दर डालना, फिर एक झटका मार कर और 2 इंच तक अन्दर डालना।

फिर थोड़ी देर रुक कर मेरे दूध के साथ खेलना, फिर और एक झटका मारना जिससे तुम्हारा आधे से ज्यादा लण्ड मेरी चूत में होगा..

अब जरूरी बात ध्यान से सुनो.. मेरे पति का लण्ड 6 इंच का है और तुम्हारा उससे बड़ा है.. तो तुम मुझे किस करना शुरू करना और साथ में हाथों से मेरे दूध भी दबाते रहना।

जब मैं थोड़ी नॉर्मल हो जाऊँ.. तो एक झटके में पूरा अन्दर डाल देना। मुझे थोड़ा दर्द होगा.. तो तुम मेरे दूध को दबाना चालू रखना.. अगर मेरी आँखों से पानी आए तो भी दूध को दबाते रहना।

‘जी ठीक है..’

‘जैसे ही मैं शांत हो जाऊँ.. तो लण्ड को बाहर निकाल कर फिर से अन्दर डाल देना। थोड़ी देर ऐसे ही करते रहना। फिर आधा लण्ड बाहर निकाल कर फिर अन्दर डाल देना। जब मैं कहूँ कि जोर से धक्के मारो या फिर अगर मैं भी अपनी कमर हिलाना चालू कर दूँ तो समझ जाना कि अब ट्रेन की स्पीड बढ़ा देनी है।’

‘ट्रेन की स्पीड.. मतलब..?’

‘अबे बुद्धू अपनी चोदने की गति बढ़ा देना। कभी अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर अन्दर डालना.. कभी गति बढ़ा देना और हाँ.. किसी कुंवारी लड़की के साथ भी ऐसा ही करना। बाद में तुम अपना पानी मेरे अन्दर ही डालना। अगर कुंवारी लड़की के साथ करोगे तो भी अपना पानी अन्दर डालना.. पर बाद में दुकान से प्रेग्नेंसी की गोली लाकर जरूर खिला देना।

‘ठीक है..’

‘चलो अब मुझे चोदो..’ मैडम ने अपनी चूत पसार दी।

मैं लण्ड को पकड़ कर मैडम की चूत पर रगड़ने लगा। थोड़ी देर रगड़ने के बाद मैंने लण्ड को चूत पर रख कर एक धक्का मारा.. लण्ड का लाल वाला भाग मैडम की चूत में चला गया।

मैडम की हल्की चीख निकल गई..

फिर भी मैंने दूसरा धक्का मारा.. मेरा 4 इंच तक अन्दर चला गया।

मैडम ने अपने होंठ दातों में दबाकर रखे हुए थे।

मैंने मैडम को किस करना चालू किया.. साथ ही दूध भी दबाना चालू किए।

फिर एक और झटका मारा.. मेरा 6 इंच तक अन्दर चला गया। मैडम की चीख मेरे मुँह में दब गई। मैडम तड़पने लगी ठीक उसी तरह.. जैसे मुर्गी की गर्दन काटने पर मुर्गी तड़पती है।
 
मैडम के नॉर्मल होते ही एक करारा झटका और मारा कि मेरा पूरा लण्ड मैडम की चूत में चला गया।

मैडम मुझे बाहर निकालने को कह रही थीं.. पर मैं उनके दूध को चूसने लगा।

करीब 5 मिनट के बाद मैडम नॉर्मल हो गईं।

फिर मैंने धक्का लगाना शुरू किए।

मैडम- और जोर से जय.. और जोर से.. फाड़ दे मेरी चूत.. आहईई… ऊम्मम्म.. ऊऊऊआ आआहह..

मैडम भी कमर उठा-उठा कर चुदा रही थीं ‘आहअम्म म्मम्म.. ऊऊऊऊह..’

कुछ देर बाद मैंने भी अपना पानी मैडम की चूत में छोड़ दिया।

मेरी पहली चुदाई 20-25 मिनट तक चली.. क्योंकि मैं पहले ही अपना पानी निकाल चुका था।

साथ ही मैडम की चूत चूसने से गर्म हो गया था.. फिर भी मैं 20 मिनट तक मैडम को चोदता रहा।

इसी बीच मैडम दो बार पानी निकाल चुकी थीं। हम दोनों हाँफने लगे। थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हो गए।

मैडम बाथरूम में चली गईं, फिर थोड़ी देर बाद मैं भी बाथरूम हो कर आया।

जब तक मैं बाथरूम में था मैडम ने हम दोनों के लिए कॉफी बनाई।

मैडम- आज लाइफ में पहली बार सेक्स करते समय इतना मजा आया कि मेरे पास बताने के लिए शब्द नहीं है.. शुक्रिया जय..

जय- आप क्यों ‘थैंक्स’ बोल रही हो थैंक्स तो मुझे कहना है। आपकी वजह से मैं चुदाई करना सीखा.. थैंक्यू मैडम..

मैडम- यह बात किसी से मत करना.. समझे.. और तुम्हारी चुदाई का एक चैप्टर तो अभी बाकी है.. वो मैं तुम्हें कल बताऊँगी।

जय- मैं किसी की नहीं बताऊंगा। वैसे टाइम क्या हुआ मैडम।

मैडम- शाम के 6 बजे होंगे।

अगले दिन..

मैं स्कूल में चुदाई के बारे में ही सोच रहा था और आज मैडम जो चुदाई का अगला चैप्टर पढ़ाएंगी.. उसी के बारे में सोच कर मैं पागल हुआ जा रहा था।

जैसे-तैसे स्कूल की छुट्टी हो गई और मैं घर आ गया।

जब मैं मैडम के घर जाने के लिए निकल रहा था.. तब छोटी चाची ने कहा- वो आज शाम को मैडम से मिलने आ रही हैं।

फिर मैं उदास सा मैडम के घर की ओर चल दिया।

मैडम- क्या बात है.. कुछ परेशान लग रहे हो।

जय- नहीं.. कोई बात नहीं है।

मैडम- कल जो हुआ उसकी वजह से परेशान हो?

जय- नहीं..वो बात नहीं है।

मैडम- फिर क्या बात है?

जय- वो कल बड़ी चाची ने मुझसे पूछा था कि इतनी देर क्यों हो गई।

मैडम- तो क्या तुमने चाची को बता दिया??

जय- नहीं.. मैंने कुछ नहीं बताया। मैंने तो कहा कि मैं नया चैप्टर पढ़ रहा था इसी लिए देर हो गई।

मैडम- तो परेशान क्यों हो।

जय- मुझे लगता है कि बड़ी चाची को शक हो गया है.. इसी लिए आज छोटी चाची आप से मिलने आने वाली हैं।

मैडम- तुम परेशान मत हो.. मैं सब सम्भाल लूँगी।

मैंने थोड़ा नॉर्मल हुआ।

मैडम- अब यह बताओ.. कल मजा आया था या नहीं?

जय- हाँ.. बहुत मजा आया।

मैडम- फिर करना चाहोगे?

जय- हाँ..

मैडम- ठीक है.. अरे हाँ.. तुम्हारा आखिरी चैप्टर भी तो बाकी है।

साफ़ दिख रहा था कि वो अपने मन में सोच रही थीं कि उन्हें तो अपनी गाण्ड मरवाने में बड़ा मजा आता है.. पर शायद उनका पति कभी भी गाण्ड नहीं मारता.. आज उनकी यह तमन्ना भी पूरी हो जाएगी।

जय- हाँ बता दीजिये.. आखिरी चैप्टर क्या है?

मैडम- पहले तुम वो करो.. जो मैंने कल सिखाया था। फिर मैं तुम्हें आखिरी चैप्टर भी बता दूंगी।

मैंने मैडम के कहते ही.. मैडम को पकड़ कर पागलों की तरह चूमने लगा। मेरे चुम्बन करने से मैडम भी जोश में आ गईं.. मैंने चूमते-चूमते मैडम की नाईटी निकाल दी।

मैडम तो नाइटी के अन्दर कुछ नहीं पहनती हैं। सो मैडम.. एक ही झटके में नंगी हो गईं।

मैडम ने मेरे भी कपड़े निकाल दिए।

फिर मैंने मैडम की चूची को चूसना शुरू किया और साथ ही चूत में उंगली डाल कर आगे-पीछे करने लगा। फिर मैं धीरे-धीरे मैडम की छाती से चूत की ओर जाने लगा।

मैडम की चूत गीली हो गई, मैं मैडम की जीभ से चुदाई करने लग गया।

मैडम को पूरा मज़ा आ रहा था, वो आह… उह… करके परम आनन्द पर आ गई और मैडम ने अपनी चूत का सारा रस मेरे मुँह में बहा दिया, मैंने भी मैडम की योनि का सारा रस चाट लिया।

मैडम- अब रुको.. जब तुम मेरी चूत में लण्ड डाल कर चुदाई करोगे.. तब अपनी एक उंगली में तेल लगाकर मेरी गाण्ड के छेद के साथ खेलना। फिर खेलते-खेलते उंगली को गाण्ड के छेद में डाल देना.. और आगे-पीछे करना..

पर ध्यान रखना कि उंगली धीरे धीरे आगे-पीछे करना क्योंकि मेरे पति ने कभी भी मेरी गाण्ड नहीं मारी.. तो मुझे थोड़ा दर्द होगा।

जब मुझे मजा आने लगे तो दो उंगली डाल कर आगे-पीछे करना।

जब मेरी चूत से पानी निकल जाए.. तब लण्ड को बाहर निकाल लेना और लण्ड पर तेल लगा कर मेरी गाण्ड के छेद से रगड़ना।

जैसे कल तुमने मेरी चूत मारी.. ठीक उसी तरह धीरे-धीरे मेरी गाण्ड मारना।

अगर मैं कहूँ कि बाहर निकालो.. तब तुम मेरी कोई बात मत सुनना.. जब तक तुम्हारा पानी ना निकले.. तब तक मेरी गाण्ड मारते रहना।

अब मेरे पास आ जाओ.. मैं तुम्हारे लण्ड को गीला कर देती हूँ।

मैं मैडम के पास चला गया, मैडम मेरे लण्ड को अपनी जीभ से चाटने लगीं, फिर लण्ड को मुँह के अन्दर लेकर चूसने लगीं, मेरा आधा लण्ड मैडम के मुँह में था।

दो मिनट तक चूसने के बाद मैडम ने लण्ड बाहर निकाल दिया।

अब मेरी बारी थी मैडम को खुश करने की, मैंने लण्ड को एक झटके में आधे से ज्यादा मैडम की चूत में डाल दिया। मैडम की चीख निकल गई.. पर मुझे कुछ नहीं कहा।

फिर दूसरे झटके के साथ ही मैं मैडम की चूत मारने लगा।

जब मैं मैडम की चूत मार रहा था.. तब मैंने अपनी उंगली पर तेल डाल ली और मैडम की गाण्ड के छेद के साथ खेलने लगा। फिर उंगली पर थोड़ा जोर देने से मेरी उंगली अन्दर चली गई।

मैडम के मुँह से ‘आह्ह्ह्ह..’ जैसे शब्द निकल गए.. फिर थोड़ी देर बाद में दो उंगली से मैडम की गाण्ड मारने लगा। मेरी दो उंगली अन्दर जाते ही मैडम ने कुछ मिनट में ही पानी छोड़ दिया और नॉर्मल हो गईं।

फिर मैंने लण्ड को उनकी चूत से बाहर निकाला। मैडम ने मेरे लण्ड पर तेल डाल कर चिकना किया और अपनी गाण्ड पर भी तेल डाल दिया।

अब मैडम ने गाण्ड मारने को कहा।

मैंने लण्ड को मैडम की गाण्ड पर रख कर दवाब दिया ही था कि मेरा लण्ड का लाल भाग मैडम की गाण्ड में चला गया।

मैडम चीख पड़ीं..

पर मैंने उस चीख की परवाह किए बिना ही अपना लंड अन्दर को धकेला, अब मेरा लण्ड 6 इंच तक अन्दर चला गया।

मैडम चिल्लाने लगीं.. पर मैडम की चीख टीवी की आवाज से साथ दब गई।

मैडम मुर्गी की तरह तड़पने लगीं। मैडम की आँखों से पानी आ रहा था। मैडम मुझे लण्ड को बाहर निकालने को कह रही थीं।

मुझे मैडम की बात याद आ गई कि चुदाई करते समय मेरी बात मत सुनना।

फिर क्या था.. मैंने आखिरी झटका मारा और मेरा पूरा लण्ड मैडम की गाण्ड में चला गया।

मैडम एक चीख के साथ बेहोश हो गईं।

मुझे लगा कि मैंने कुछ गलत कर दिया। फिर मैंने टेबल पर रखे हुए पानी को मैडम के चहरे पर मारा.. जिससे मैडम होश में आ गईं और मुझे गालियाँ देने लगीं।

मैडम- मैंने कहा था कि रुक जाओ.. पर तुम रुके क्यों नहीं।

जय- मैडम आपने ही तो कहा था कि चुदाई के वक्त आपकी बात ना मानूँ।

मैडम- पर थोड़ा धीरे तो कर सकते थे न..

जय- मुझे लगा कि लण्ड को जल्दी से अन्दर डाल दूँ.. फिर लण्ड को धीरे-धीरे आगे-पीछे करूँ।

मैडम- वाह मेरे राजा.. क्या सोचते हो.. अब ये क्या.. अब तक लण्ड को मेरी गाण्ड में ही रखा है.. चल निकाल इसे बाहर..

जय- मैडम अब पूरा अन्दर चला गया है.. अब तो आगे-पीछे ही तो करना है.. करने दो न मैडम।

मैडम- ठीक है.. चूचियाँ दबा और लण्ड को धीरे-धीरे चलाना।

फिर मैं धीरे-धीरे मैडम की गाण्ड मारने लगा।

थोड़ी देर बाद मैडम को भी मजा आने लगा, मैंने गति बढ़ा दी। दस मिनट तक गाण्ड मारने के बाद मेरा वीर्य मैडम की गाण्ड में निकल गया और मैं मैडम के ऊपर गिर गया।

थोड़ी देर बाद मैं मैडम के ऊपर से सरक गया, लण्ड को मैडम की गाण्ड से बाहर निकाला।

मेरे लण्ड पर खून लगा था।

जब मैडम ने मेरे लण्ड को देखा- देखा तुमने मेरी गाण्ड से खून निकाला।

जय- सॉरी मैडम।

मैडम- अरे सॉरी क्यों बोल रहे हो मुझे तो मजा आया।

जय- पर आपका खून निकलने पर भी आपको मजा आया।

मैडम- पहली बार तो खून निकलता ही है.. उसमें नया क्या है।

जय- हाँ.. अब समझा कि चूत से भी खून निकलता है।

मैडम- अरे तुम तो समझदार निकले। मैं बाथरूम होकर आती हूँ।

मैंने देखा कि मैडम मुझसे गाण्ड मराने के बाथरूम की ओर जा रही थीं। मैडम थोड़ा लड़खड़ा कर चल रही थीं।

मुझे भी लण्ड पर थोड़ा दर्द हो रहा था, शायद जल्दी डालने के चक्कर में दर्द हो रहा था।

मैडम के बाथरूम से आने के बाद में बाथरूम में चला गया।

कल की तरह मैडम ने मेरे बाथरूम जाते ही कॉफी बनाने में लग गईं।

फिर हम दोनों ने कॉफ़ी पी ली।

मैडम- तुमने तो आज मेरी जान निकाल दी थी.. लेकिन अच्छा किया जो तुमने मेरी बात नहीं मानी। अगर तुम मेरी बात मान जाते तो मैं दुबारा कभी गाण्ड नहीं मरवाती.. थैंक्स जय।

मुझे आज भी कामिनी की चुदाई देखने को नहीं मिली।

फिर मंगलवार से शनिवार तक रोज भी मैडम की जम कर चुदाई की। कभी मैडम की चूत मारी.. तो कभी मैडम की गाण्ड मारी। फिर वो दिन आया.. जिसे मैं भूल नहीं सकता.. वो दिन रविवार था।

दोपहर में मैं मैडम के घर गया.. तो मैडम अपना सामान पैक कर रही थीं।

जय- मैडम, ये सब क्या है?

मैडम- मैं अब वापस जा रही हूँ।

जय- पर आप तो अगले महीने जा रही थीं।

मैडम- वो क्या है.. मेरा बेटा बीमार है और वैसे भी कभी न कभी तो जाना है.. तो मैं आज शाम को जा रही हूँ।

जय- पर मैडम?

मैडम- मुझे पता है.. अब तुम्हें चुदाई का चस्का लग गया है.. अब तुम दूसरा शिकार ढूँढ लो और आज आखिरी बार मेरी चुदाई कर लो। मेरी चुदाई करके मुझे गुरूदक्षिणा दे दो।

मैडम के कहते ही में मैडम को चूमने लगा पर अब मैं धीरे-धीरे चूमाचाटी कर रहा था।

मैंने मैडम की नाईटी निकाल दी.. उनके स्तन को मसलने लगा। फिर धीरे-धीरे जीभ से निप्पल को चाटने लगा। फिर चूचुक को मुँह में लेकर चूसने लगा, कभी लेफ्ट साइड का दूध तो कभी राइट का दूध चूसने लगा।

मैं मैडम की चूत में उंगली करके उन्हें मज़ा देने लगा।

मैंने अपने कपड़े निकाल दिए फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए। मैडम पागलों की तरह मेरा लण्ड चूसने लगीं। मैं भी पागलों की तरह चूत में जीभ डाल कर.. तो कभी किस करके उन्हें चूसने लगा।

मुझे पता था कि कल से मुझे मैडम की चूत नहीं मिलेगी.. इसी लिए मैं इस आखिरी चुदाई का पूरा मजा लेने लगा।

फिर मैडम घोड़ी बन गईं.. मैंने एक ही झटके में पूरा लण्ड चूत में डाल दिया।

मैडम चीख पड़ीं.. पर मुझे इस आखिरी चुदाई का मजा लेना था।

थोड़ी देर चूत मारने के बाद अब गाण्ड मारने लगा, कभी मेरा लण्ड चूत में.. तो कभी गाण्ड में चलता रहा।

एक लम्बी चुदाई के बाद मैंने अपना वीर्य मैडम की चूत में डाल दिया।

जैसे ही मैंने अपना पानी मैडम की चूत में डाला.. तभी मुझे लगा कोई हमें देख रहा है।

मैं जल्दी से खिड़की के पास गया.. पर वहाँ कोई नहीं था, वहाँ मैडम का दुपट्टा रखा हुआ था.. ये देख मुझे राहत मिली।

मैडम- आज तो मजा आ गया।

जय- हाँ.. मुझे भी मजा आया।

मैडम- मैं फ्रेश होकर आती हूँ।

मैडम के आने के बाद मैं भी मैडम की मदद करने लगा। एक घंटे के बाद मैडम के पति आ गए। थोड़ी देर बातें करने के बाद मैडम चली गईं।

मैं मैडम को जाते हुए देख रहा था.. मेरी आँखों से पानी निकल रहा था।

पर ये तो एक ना एक दिन होना ही था। जाते-जाते मैडम ने मुझे कहा- घर को ताला लगाकर चाबी प्रिंसिपल सर को दे देना।

मैं ताला लगाने गया.. पर मुझे लगा कि आखिरी बार घर में जाकर उस चुदाई को याद करूँ।

मैं बिस्तर के पास गया, बिस्तर पर मैडम की किताब रखी हुई थी, साथ में एक चिट्ठी भी थी।

‘जय तुमने मुझे 7-8 दिनों में जो सुख दिया.. वो मुझे 7 जन्मों तक याद रहेगा। मैं तुम्हें कभी नहीं भूल पाऊँगी। मेरे पति के बाद तुमने मुझे वो सुख दिया.. जिसका कोई मोल नहीं.. तुम्हें मैंने जो सिखाया है.. उसे कभी भूलना मत और हाँ.. मुझे कभी याद मत करना। मुझे एक सपने की तरह भुला देना.. नहीं तो तुम जी नहीं पाओगे। इस चिट्ठी को पढ़ने के बाद जला देना.. मैं और लिख नहीं पाऊँगी।

तुम्हारी मैडम’
 
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