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लण्ड और चूत चुदाई
मेरा नाम जय है। मैं जब छोटा था.. तब मेरे माँ और पिताजी की एक रोड दुर्घटना में मौत हो गई थी। मेरे पिताजी के एक छोटे भाई और एक बहन हैं, मेरे पिताजी उन सब में बड़े थे।
रजनी बुआ- 32 साल
चाचा- 28 साल
चाची- 26 साल
एक और छोटी चाची भी थीं रिश्ते में जो मेरे परिवार के साथ ही बगल के एक कमरे में रहती थीं.. उनके वाले चाचा बाहर गाँव काम करते थे।
मेरी रजनी बुआ का पति दुबई में काम करता है.. वो साल में एक महीने के लिए गाँव आता है।
मेरे चाचा के घर में तीन बेडरूम हैं। एक में चाचा-चाची सोते थे। एक स्टोर रूम था और एक कमरा मेरा था।
मेरी जिंदगी अच्छे से चल रही है। जब मैं बड़ी कक्षा में गया.. तब मेरे स्कूल में मेरे दोस्त नंगी फोटो देख कर उनकी ही बातें करते हैं। मुझे भी फोटो देखकर कुछ-कुछ होता.. हालांकि तब मुझे पता नहीं था कि मेरा लण्ड खड़ा क्यों होता है।
एक दिन मैं मेरी रजनी बुआ के घर काम के लिए गया था। मेरे चाचा ने मुझे रजनी बुआ के घर उनके पैसे देने के लिए भेजा था। मैं हमेशा देखता था कि रजनी बुआ की सहेली का भाई राज अक्सर एक दिन के लिए आता है। जब भी रजनी बुआ की सहेली का भाई राज उनके घर आता.. तब बुआ अपने बच्चों को पिक्चर देखने या फिर चाचा के घर खेलने भेज देती थीं।
उस दिन भी रजनी बुआ ने अपने बच्चों को पिक्चर देखने भेज दिया।
जब मैं बुआ के घर पर गया.. तो घर पर कोई नहीं दिखा। मैं जब बुआ के कमरे के पास गया.. तब मैंने जो देखा उस पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था।
राज बुआ के दूध चूस रहा था, बुआ भी अजीब-अजीब सी आवाज निकाल रही थीं।
कुछ देर बाद बुआ की सहेली का भाई राज ने बुआ के पेटीकोट में हाथ डाल कर उनका नाड़ा खोल दिया। बुआ अब बिल्कुल नंगी हो चुकी थीं, राज ने भी अपने कपड़े निकाल दिए।
राज का लण्ड लगभग 6 इंच का था। बुआ ने राज को चूत चाटने के लिए कहा.. पर राज ने मना किया और अपना लण्ड बुआ की चूत में डाल दिया। सूखी चूत में लण्ड डालने से बुआ जोर से चीख पड़ीं.. पर राज उनकी चीख की परवाह किए बिना ही अपने लण्ड को अपनी बहन की सहेली की चूत में डाल कर धक्के पर धक्के दे रहा था। लगभग 10 मिनट तक धक्के लगाने के बाद राज जोर से चिल्ला कर बुआ के ऊपर गिर गया।
बुआ- क्या राज.. तुम हमेशा बिना मेरी चूत चाटे ही.. अपना लण्ड मेरी चूत में डाल देते हो..
राज- रजनी तुम्हें तो पता है.. कि मुझे चूत चाटना पसंद नहीं है।
बुआ- लेकिन तुम मेरी चूत को गीली किए बिना ही लण्ड पेल देते हो..
राज- क्या करूँ.. अब तो आदत हो गई है।
बुआ- हाँ तो तुम्हारी पुरानी आदत है.. अब तो खैर.. मुझे भी आदत हो गई है।
राज- हाँ.. अब 6 साल से तुम्हारी चुदाई कर रहा हूँ.. अब भी तुम वैसे ही चुदाई का मजा ले रही हो.. जैसे पहली बार चुद रही हो।
बुआ- तुम मेरी सूखी चूत में लण्ड डालोगे.. तो मेरी चीख नहीं तो क्या हँसी निकलेगी?
राज- इसी लिए तो मैं तुम्हारे बच्चों को पिक्चर देखने भेजता हूँ।
बुआ- तुम बहुत चालाक हो.. हमेशा किसी ना किसी बहाने से मेरी चूत मारने आ ही जाते हो।
राज- तुम्हारी तरह मेरी बीवी चुदाई में मेरा साथ नहीं देती है।
बुआ- अब उठो.. बच्चे आने वाले होंगे।
राज- हाँ.. उठता हूँ।
मैं यह बात सुनकर घर से जल्दी बाहर आया, फिर थोड़ी देर बाद में घर का दरवाजा खटखटाया।
रजनी बुआ ने मुझे अन्दर आने को कहा और मुझे राज के पास छोड़ कर अन्दर चली गईं।
राज- क्या बात है जय.. क्या हुआ.. ऐसे चुप क्यों हो?
जय- कुछ नहीं भैया.. थोड़ी तबियत खराब है।
राज- क्यों क्या हुआ?
जय- कुछ ख़ास नहीं वो..
राज- अरे यार.. ये ‘वो.. वो..’ क्या लगा रहे हो?
मैंने मन में सोचा कि तुम्हारी चुदाई देख कर परेशान हूँ और बोला- कुछ नहीं भैया ऐसे ही..
राज- अरे यार तुम मुझे अपना दोस्त समझकर बता दो.. डरो मत।
मैंने सोचा कि इसे चूतिया बनाता हूँ और कहा- भैया.. वो क्या है कि मेरे क्लास के लड़के गंदी पिक्चर देख कर मुझे बोलते हैं.. कि ये देख.. तेरी रजनी बुआ कैसी नंगी है.. ये देख तेरी बुआ के दूध कितने बड़े हैं। मुझे उन पर गुस्सा आता है।
राज- देख जय.. तुम्हारी बुआ के बारे में कोई भी कुछ कहे.. उन पर गुस्सा मत करना.. लोग कितना भी कुछ कहें.. फिर भी तुम्हारी बुआ आखिर तुम्हारी बुआ है।
जय- हाँ आप ठीक कह रहे हो।
तभी बुआ अन्दर आईं।
तो मैंने बुआ को पैसे देते हुए कहा- बुआ, ये लो पैसे… चाचा ने भिजवाए हैं।
जय- ठीक है बुआ.. अब मैं चलता हूँ.. अच्छा भैया फिर मिलते हैं।
घर आकर मैं खाना खा कर सो गया। करीब 4 बजे मेरी नींद खुल गई मैंने देखा कि मेरी पैंट पर एक दाग लगा हुआ है। मैंने अपनी पैंट उतारी तो मेरी चड्डी पर भी दाग लगा हुआ था.. मैंने तुरंत चड्डी निकाल दी और दूसरे कपड़े पहन कर बाहर खेलने चला गया।
मैं क्रिकेट खेल रहा था.. तब बॉल ग्राउंड के पास वाले स्टोर हाउस में चली गई। वो स्टोर हाउस हमेशा बंद रहता है।
बॉल चली जाने से सब बच्चे अपने-अपने घर चले गए थे.. पर बॉल मेरी थी.. इसी लिए मैंने बॉल ढूंढने का फैसला किया।
लगभग 6 बज रहे थे और सूरज भी ढल चुका था। मैं स्टोर हाऊस के पीछे चला गया और कोई खिड़की ढूंढने लगा। तभी मुझे एक खिड़की खुली मिल गई। मैं चुपके से अन्दर गया और बॉल ढूंढने लगा.. पर स्टोर हाउस बड़ा था और अंधेरा भी हो चुका था।
तभी मुझे खिड़की से कुछ लड़के अन्दर आते दिखाई दिए.. मैं जल्दी से छुप गया।
मैंने देखा मेरी स्कूल के 12वीं क्लास के दो लड़के और उनकी क्लास की लड़की अन्दर आ गए और घास पर बैठ गए।
वो लड़की दोनों लड़कों के बीच में बैठी थी और दोनों लड़के उसके दूध दबा रहे थे।
पहला लड़का- तेरे आम तो मस्त हैं।
दूसरा लड़का लड़की के चूतड़ों पर भी हाथ फेरता हुआ बोला- हाँ यार.. इसके आम और तरबूज दोनों मस्त हैं!
लड़की- तुम लोग क्या सिर्फ बातें करने आए हो.. या फिर कुछ करोगे भी?
पहला लड़का- तेरे लिप्स तो इतने मीठे दिख रहे है.. कि मैं तो दिन भर इनको चूसता ही रहूँ।
दूसरा लड़का- जल्दी से अपने कपड़े उतार.. अब कण्ट्रोल नहीं होता है।
लड़की- हाँ.. उतार रही हूँ.. मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं हो रहा है.. जब से तुम दोनों ने ये आदत लगा दी है.. तब से मुझे मेरी चूत में बहुत खुजली हो जाती है।
पहला लड़का- ले मेरा लण्ड चूस..
दूसरा लड़का- मैं तेरी चूत चाट कर साफ करता हूँ।
लड़की- आह.. अआह्हह्हह.. मस्त मजा आ रहा है।
पहला लड़का- यार अब तू मेरी जगह आ और मैं तेरी जगह आता हूँ।
दूसरा लड़का- आह आ.. जल्दी आ..
लड़की- क्या चूसना लगा रहे हो.. पहले मेरी चूत मारो न..
थोड़ी देर चूत चाटने के बाद उस लड़के ने अपना लण्ड लड़की की चूत में डाल दिया और धक्का मारने लगा और दूसरा लड़का अपना लण्ड लड़की के मुँह में डालकर उसका मुँह चोदने लगा। अब फिर से दोनों अपनी जगह बदली की और चुदाई शुरू की।
मैंने भी अपना लण्ड बाहर निकाला.. मेरा लण्ड कड़क हो गया था। मैंने अपना हाथ थोड़ा आगे-पीछे करने लगा.. मुझे अच्छा लग रहा था। फिर मैंने हाथ को जोर-जोर से हिलाना शुरू किया।
उधर उन दोनों लड़कों ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। फिर थोदी देर बाद वो हाँफने लगा। मुझे भी लगा कि मेरी ‘सूसू’ निकल जाएगी।
पर मैंने देखा कि मेरी सूसू की जगह पर कुछ सफेद और गाढ़ा पानी निकल गया। शुरूआत में मुझे ऐसा लग रहा था.. जैसे मेरे ऊपर किसी ने 100 किलो सामान रख दिया हो और अब वो सामान मेरे ऊपर से निकल गया हो.. अब मैं हल्का महसूस कर रहा था।
मेरा नाम जय है। मैं जब छोटा था.. तब मेरे माँ और पिताजी की एक रोड दुर्घटना में मौत हो गई थी। मेरे पिताजी के एक छोटे भाई और एक बहन हैं, मेरे पिताजी उन सब में बड़े थे।
रजनी बुआ- 32 साल
चाचा- 28 साल
चाची- 26 साल
एक और छोटी चाची भी थीं रिश्ते में जो मेरे परिवार के साथ ही बगल के एक कमरे में रहती थीं.. उनके वाले चाचा बाहर गाँव काम करते थे।
मेरी रजनी बुआ का पति दुबई में काम करता है.. वो साल में एक महीने के लिए गाँव आता है।
मेरे चाचा के घर में तीन बेडरूम हैं। एक में चाचा-चाची सोते थे। एक स्टोर रूम था और एक कमरा मेरा था।
मेरी जिंदगी अच्छे से चल रही है। जब मैं बड़ी कक्षा में गया.. तब मेरे स्कूल में मेरे दोस्त नंगी फोटो देख कर उनकी ही बातें करते हैं। मुझे भी फोटो देखकर कुछ-कुछ होता.. हालांकि तब मुझे पता नहीं था कि मेरा लण्ड खड़ा क्यों होता है।
एक दिन मैं मेरी रजनी बुआ के घर काम के लिए गया था। मेरे चाचा ने मुझे रजनी बुआ के घर उनके पैसे देने के लिए भेजा था। मैं हमेशा देखता था कि रजनी बुआ की सहेली का भाई राज अक्सर एक दिन के लिए आता है। जब भी रजनी बुआ की सहेली का भाई राज उनके घर आता.. तब बुआ अपने बच्चों को पिक्चर देखने या फिर चाचा के घर खेलने भेज देती थीं।
उस दिन भी रजनी बुआ ने अपने बच्चों को पिक्चर देखने भेज दिया।
जब मैं बुआ के घर पर गया.. तो घर पर कोई नहीं दिखा। मैं जब बुआ के कमरे के पास गया.. तब मैंने जो देखा उस पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था।
राज बुआ के दूध चूस रहा था, बुआ भी अजीब-अजीब सी आवाज निकाल रही थीं।
कुछ देर बाद बुआ की सहेली का भाई राज ने बुआ के पेटीकोट में हाथ डाल कर उनका नाड़ा खोल दिया। बुआ अब बिल्कुल नंगी हो चुकी थीं, राज ने भी अपने कपड़े निकाल दिए।
राज का लण्ड लगभग 6 इंच का था। बुआ ने राज को चूत चाटने के लिए कहा.. पर राज ने मना किया और अपना लण्ड बुआ की चूत में डाल दिया। सूखी चूत में लण्ड डालने से बुआ जोर से चीख पड़ीं.. पर राज उनकी चीख की परवाह किए बिना ही अपने लण्ड को अपनी बहन की सहेली की चूत में डाल कर धक्के पर धक्के दे रहा था। लगभग 10 मिनट तक धक्के लगाने के बाद राज जोर से चिल्ला कर बुआ के ऊपर गिर गया।
बुआ- क्या राज.. तुम हमेशा बिना मेरी चूत चाटे ही.. अपना लण्ड मेरी चूत में डाल देते हो..
राज- रजनी तुम्हें तो पता है.. कि मुझे चूत चाटना पसंद नहीं है।
बुआ- लेकिन तुम मेरी चूत को गीली किए बिना ही लण्ड पेल देते हो..
राज- क्या करूँ.. अब तो आदत हो गई है।
बुआ- हाँ तो तुम्हारी पुरानी आदत है.. अब तो खैर.. मुझे भी आदत हो गई है।
राज- हाँ.. अब 6 साल से तुम्हारी चुदाई कर रहा हूँ.. अब भी तुम वैसे ही चुदाई का मजा ले रही हो.. जैसे पहली बार चुद रही हो।
बुआ- तुम मेरी सूखी चूत में लण्ड डालोगे.. तो मेरी चीख नहीं तो क्या हँसी निकलेगी?
राज- इसी लिए तो मैं तुम्हारे बच्चों को पिक्चर देखने भेजता हूँ।
बुआ- तुम बहुत चालाक हो.. हमेशा किसी ना किसी बहाने से मेरी चूत मारने आ ही जाते हो।
राज- तुम्हारी तरह मेरी बीवी चुदाई में मेरा साथ नहीं देती है।
बुआ- अब उठो.. बच्चे आने वाले होंगे।
राज- हाँ.. उठता हूँ।
मैं यह बात सुनकर घर से जल्दी बाहर आया, फिर थोड़ी देर बाद में घर का दरवाजा खटखटाया।
रजनी बुआ ने मुझे अन्दर आने को कहा और मुझे राज के पास छोड़ कर अन्दर चली गईं।
राज- क्या बात है जय.. क्या हुआ.. ऐसे चुप क्यों हो?
जय- कुछ नहीं भैया.. थोड़ी तबियत खराब है।
राज- क्यों क्या हुआ?
जय- कुछ ख़ास नहीं वो..
राज- अरे यार.. ये ‘वो.. वो..’ क्या लगा रहे हो?
मैंने मन में सोचा कि तुम्हारी चुदाई देख कर परेशान हूँ और बोला- कुछ नहीं भैया ऐसे ही..
राज- अरे यार तुम मुझे अपना दोस्त समझकर बता दो.. डरो मत।
मैंने सोचा कि इसे चूतिया बनाता हूँ और कहा- भैया.. वो क्या है कि मेरे क्लास के लड़के गंदी पिक्चर देख कर मुझे बोलते हैं.. कि ये देख.. तेरी रजनी बुआ कैसी नंगी है.. ये देख तेरी बुआ के दूध कितने बड़े हैं। मुझे उन पर गुस्सा आता है।
राज- देख जय.. तुम्हारी बुआ के बारे में कोई भी कुछ कहे.. उन पर गुस्सा मत करना.. लोग कितना भी कुछ कहें.. फिर भी तुम्हारी बुआ आखिर तुम्हारी बुआ है।
जय- हाँ आप ठीक कह रहे हो।
तभी बुआ अन्दर आईं।
तो मैंने बुआ को पैसे देते हुए कहा- बुआ, ये लो पैसे… चाचा ने भिजवाए हैं।
जय- ठीक है बुआ.. अब मैं चलता हूँ.. अच्छा भैया फिर मिलते हैं।
घर आकर मैं खाना खा कर सो गया। करीब 4 बजे मेरी नींद खुल गई मैंने देखा कि मेरी पैंट पर एक दाग लगा हुआ है। मैंने अपनी पैंट उतारी तो मेरी चड्डी पर भी दाग लगा हुआ था.. मैंने तुरंत चड्डी निकाल दी और दूसरे कपड़े पहन कर बाहर खेलने चला गया।
मैं क्रिकेट खेल रहा था.. तब बॉल ग्राउंड के पास वाले स्टोर हाउस में चली गई। वो स्टोर हाउस हमेशा बंद रहता है।
बॉल चली जाने से सब बच्चे अपने-अपने घर चले गए थे.. पर बॉल मेरी थी.. इसी लिए मैंने बॉल ढूंढने का फैसला किया।
लगभग 6 बज रहे थे और सूरज भी ढल चुका था। मैं स्टोर हाऊस के पीछे चला गया और कोई खिड़की ढूंढने लगा। तभी मुझे एक खिड़की खुली मिल गई। मैं चुपके से अन्दर गया और बॉल ढूंढने लगा.. पर स्टोर हाउस बड़ा था और अंधेरा भी हो चुका था।
तभी मुझे खिड़की से कुछ लड़के अन्दर आते दिखाई दिए.. मैं जल्दी से छुप गया।
मैंने देखा मेरी स्कूल के 12वीं क्लास के दो लड़के और उनकी क्लास की लड़की अन्दर आ गए और घास पर बैठ गए।
वो लड़की दोनों लड़कों के बीच में बैठी थी और दोनों लड़के उसके दूध दबा रहे थे।
पहला लड़का- तेरे आम तो मस्त हैं।
दूसरा लड़का लड़की के चूतड़ों पर भी हाथ फेरता हुआ बोला- हाँ यार.. इसके आम और तरबूज दोनों मस्त हैं!
लड़की- तुम लोग क्या सिर्फ बातें करने आए हो.. या फिर कुछ करोगे भी?
पहला लड़का- तेरे लिप्स तो इतने मीठे दिख रहे है.. कि मैं तो दिन भर इनको चूसता ही रहूँ।
दूसरा लड़का- जल्दी से अपने कपड़े उतार.. अब कण्ट्रोल नहीं होता है।
लड़की- हाँ.. उतार रही हूँ.. मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं हो रहा है.. जब से तुम दोनों ने ये आदत लगा दी है.. तब से मुझे मेरी चूत में बहुत खुजली हो जाती है।
पहला लड़का- ले मेरा लण्ड चूस..
दूसरा लड़का- मैं तेरी चूत चाट कर साफ करता हूँ।
लड़की- आह.. अआह्हह्हह.. मस्त मजा आ रहा है।
पहला लड़का- यार अब तू मेरी जगह आ और मैं तेरी जगह आता हूँ।
दूसरा लड़का- आह आ.. जल्दी आ..
लड़की- क्या चूसना लगा रहे हो.. पहले मेरी चूत मारो न..
थोड़ी देर चूत चाटने के बाद उस लड़के ने अपना लण्ड लड़की की चूत में डाल दिया और धक्का मारने लगा और दूसरा लड़का अपना लण्ड लड़की के मुँह में डालकर उसका मुँह चोदने लगा। अब फिर से दोनों अपनी जगह बदली की और चुदाई शुरू की।
मैंने भी अपना लण्ड बाहर निकाला.. मेरा लण्ड कड़क हो गया था। मैंने अपना हाथ थोड़ा आगे-पीछे करने लगा.. मुझे अच्छा लग रहा था। फिर मैंने हाथ को जोर-जोर से हिलाना शुरू किया।
उधर उन दोनों लड़कों ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। फिर थोदी देर बाद वो हाँफने लगा। मुझे भी लगा कि मेरी ‘सूसू’ निकल जाएगी।
पर मैंने देखा कि मेरी सूसू की जगह पर कुछ सफेद और गाढ़ा पानी निकल गया। शुरूआत में मुझे ऐसा लग रहा था.. जैसे मेरे ऊपर किसी ने 100 किलो सामान रख दिया हो और अब वो सामान मेरे ऊपर से निकल गया हो.. अब मैं हल्का महसूस कर रहा था।