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लाइफ हो तो ऐसी complete

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अपडेट 143

मामा ने कार निकाल ली माँ और माया दीदी मेरे साथ बैठ गई. मामा ने मामि चाचा चाची और

बहनो को राहुल और रोहित की गाड़ी में आने को कहा. सब उनकी गाडियो में बैठ

गये. थोड़ी ही देर में हम टेम्पल पहुच गए. रूपा और मेरा होने वाला ससुर

पहले ही आ चुके थे. माँ ने पुजारी को बोला पूजा शुरु की जाए. पुजारी अपनी

पूजा करने लगा. मन्त्रो के साथ साथ वो हमे कुछ फूल दे रहा था भगवान के

उपर चढाने को. पूजा ३० मिनट में ख़तम हो गई .आज रूपा का रूप कुछ जियादा ही निखर गया था. मेरी नज़र उस से नहि हट रही थी. फिर माँ ने बोला शादी का मुहूरत आ गया हे इनकी शादी भी शुरू करवा दो. पुजारी ने हम दोनों की शादी शुरु कर दी मेरी बहने खुश थी सब खुश थे. २ घंटो की मन्त्रो की मगज मारी के बाद माँ ने सर को बोला बधाई हो आज से रूपा मेरी बेटी हुई.

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शादी हो चुकी थी मामा ने बोला होटल में खाना भी हो जाये अब इतने

लोगो का खाना क्या बनवाना घर में हम सब ने हा में जवाब दिया. माँ बोली

ठीक हे चलो होटल में. हम होटल में पहुचे . माँ ने लंच का ऑर्डर दे दिया.

लंच वाक़ई बहुत अच्छा था सब ने भर पेट् खाया. फिर हम सब घर आ गये.

चाची और मामि ने रस्म पूरी की आस पड़ोस वाले भी आज हमारे घर आये. में

अपणे दोस्तों के साथ बिज़ी था. शादी तो हो गई थी अब एग्जाम की तेयारी करना जरुरी था

ईस लिए माँ ने साफ बोल दिया था जब तक एग्जाम क्लियर नहि हो जाते. में रूपा एक रूम

मे नहि सो सकते. मामा ने भी माँ को सपोर्ट किया. आज का दिन थका देणे वाला

था. सुबह से भागम भाग हो रही थी. डिनर करके में सीधा अपने रूम में

चला गया. रूपा माँ के साथ सोने वाली थी. में अपने रूम में बिस्तर पे गिरा तो

पता ही नहि चला कब सो गया.

सुबह जब आंख खुली तो में बिस्तर पर पड़ा हुआ था. में उठ के फ्रेश हुआ. निचे आया तो सब ब्रेकफास्ट टेबल पर बैथे थे. मुझे देख के चाची बोली बेटा कैसे हो. मैंने बोला मुझे क्या हो सकता हे. में एक दम ठीक हूँ. चाची ने

मज़ा लेने के लिए बोला कैसी नींद आई. मुझे कुछ समझ नहि आ रहा था चाची

पूछना क्या चाहती हे. मैंने सिद्ध बोला में तो घोड़े बेच के सोया पता ही नहि

चला कब नींद आ गई. चाची कुछ और पूछे उस से पहले मैंने बोला ब्रेकफास्ट

मिलेगा क्या? की सवालों से ही पेट् भरु. मामी बोली अब रजत की चुटकी लेना बंद

करो मामी ने मुझे ब्रेकफास्ट दिया. मैंने ब्रेक फ़ास्ट किया तभी रोहित आ गया.

रोहित मेरे बैग को देख के बोला भाई कॉलेज जा रहा हे. मैंने बोला हा.

रोहित “बोला आज स्टडी नहि होनि हे सर ने कॉलेज में तुम्हारी शादी की पार्टी रखी हे हम बच्चों के लिए.

मैं बोला “मुझे तो नहि बताया”. में रूपा की तरफ देखने लगा.

रूपा बोली “मुझे डैड ने बताया था सॉरी भूल गई थी”.

राहुल बोला “तुम भी रेडी हो जाओ आज पार्टी जो हे”.

काया बोली “माया दी आप भी चलो आज मज़ा आयेगा भाई के कॉलेज में”.

माया दी बोली “मुझे अपने पार्लर में कुछ पेपर वर्क करना हे तो नहि आ सकती”.

में बोला “क्या यार सर भी, नेक्स्ट मंथ एग्जाम हे, और वो पार्टी के चक्करो मे पड़ रहे हे”.

राहुल बोला “भाई एग्जाम के बाद सर भी रिटायर्ड हो जायेंगे. इस लिए पहले ही पार्टी दे रहे हे,भाई चल न तेरे को क्या प्रॉब्लम हे जो बहस कर रहा हे,ब्रकफास्ट हो गया हे तो चल”.

मैं बोला “ठीक हे काया तुमको आना हो तो, रूपा के साथ आ जाना”.

हम घर से बाहर निकले तो राहुल भी मेरा ही वेट कर रहा था.

मैंने राहुल से हाथ मिलाया राहुल ने बताया की केस बंद हो गया हे. तो अब मेरे पे कोई शक़ नहि करेगा. में अपनी नॉर्मल लाइफ जी सकता हूँ .

मैंने राहुल को बोला अब इस सिटी से मन भर गया हे. इस लिए यहाँ से गोवा शिफ्ट हो रहा हूँ.

राहुल बोला “ये तो बहुत अच्छी बात हे नई सिटी में मन भी लगा रहेगा तुम लोगो का,में भी सोच रहा हूँ गोवा में ट्रांसफर होने का कम से कम वहा यहाँ जितनी मगज मारी तो नहि है” राहुल बोला “कब जा रहे हो”?.

मैंने बोला वहा एक बँगला ले लिया हे,माँ के

लिये शॉप भी ले ली हे और वहा काम भी शुरू करवा दिया हे”.

राहुल बोला “बहुत अच्छा पुरी प्लानिंग कर ली तुम सब ने, अच्छा किया”.

मैं बोला “गोवा में ही में होटल खोलने की सोच रहा हूँ” .

राहुल बोला “कोई हेल्प चाहिए होगी, तो मुझे बता देना, मेरे कई कॉन्टैक्ट्स हे वहा”.

मैं बोला “इट्स ओके अगर लगेगी तो बोल दूंगा”.

फिर राहुल बोला “कॉलेज जा रहे हो”.

रोहित बोला “मोसा जी आज कॉलेज पढ़ने नहि मस्ती करने जा रहे है सर ने पार्टी दी हे”.

राहुल बोला “ठीक हे मस्ती के साथ स्टडी पे भी ध्यान दो ओके”.

रोहित बोला “ओके जी” .

फिर राहुल चला गया. हम कॉलेज पहुचे तो गेट पे ही सारे फ्रेंड्स और जुनियर भी मेरा वेट कर रहे थे. सब के सब फूलो के साथ मेरा स्वागत करने की तैयारी में थे. जैसे ही हम पहुचे रूपा काया भी पहुच गई. सब ने हमारा फूलो के साथ स्वागत किया. सब ने हमे शादी की बधाई दी. कॉलेज के ग्राउंड मे एक स्टेज सजा रखा था. सर ने हमे स्टेज पे दो चेयर पे बैठा दिया. सारे फ्रेंड्स हमे ग्रीटिंग्स दे रहे थे. फिर सर ने मनोरंजन का प्रोग्राम भी बना रखा

था. कॉलेज की लड़कियो और लड़को ने डांस प्रोग्राम रखा था. सब एक से बढ़ कर एक डांस कर रहे थे. फिर लंच का भी आरेंजमेन्ट किया हुआ था. सब ने भर पेट लंच

खाया. फिर सर ने बोला की नेक्स्ट मंथ की एग्जाम का डेट क्लियर हो गई हे तो सब मन

लगा के पढ़ना भी शुरू कर दो. में रूपा और काया को लेकर घर आ गया. धीरे

धेरे वक़्त का पहिया घुमा एग्जाम भी हो गए इन दो मंथ में ना तो माया काया

मेरे पास आई न माँ ने रूपा कोा आने दिया. में भी मन लगा के पढ़ाई की थी.

माँ बोली बस नेक्स्ट वीक हम अपने नये घर में जायेंगे. मैंने सब की एयर टिकट

करवा ली हे. सब अपना जरुरी कपडे पैक कर लो. मैं बोला “माँ इतनी जल्दी क्या थी”?

मों बोली “हे वहा का काम भी शुरू करवाना हे,मैंने कुछ वर्कर ढूंढ लिए है, तो शॉप ओपनिंग करनी जरुरी है, अब सब काम तो हो गये, नेक्स्ट मंथ तक तुम्हारे सर भी अपने गाव के स्कूल को ज्वाइन कर लेंगे”.

मैं बोला “ठीक हे माँ में जैसा आप को अच्छा लगे कर लो, हुमे तो साथ चलने से मतलब हे”.

माँ बोली “राहुल जी का ट्रांफर भी वहि हो रहा हे तो तुमको कंपनी मिल जायेगी,रोहित से बात कर लो तुम दोनों वहि कोई जॉब या बिजनेस शुरू कर देना”

मैंने बोला “मैंने अभी कोई प्लानिंग नहि की माँ, रोहित से पूछना पडेगा, उसकी फॅमिली हमारे साथ चलति तो बात और थी”.

माँ बोली “कोई बात नहि में बात कर लुंगी उसकी माँ डैड से”. काया बोली भाई मेरा एडमिशन भी वह करवाना है तो आप प्लीज् मेरे स्कूल जा के ट्रंसफर फॉर्म भर दो”.

मैं बोला “मैंने पहले ही बात कर ली हे डोन्ट वर्री, और तेरा एड़मीशन भी करवा दिया हे, घर के पास ही हे बेस्ट मेडिकल कॉलेज हे”.

काया बहुत खुश हो गई.

माया दी बोली “मैंने भी अपणा पार्लर वहा शुरू करने के लिए कुछ लोगो से बात की हे”.

रूपा बोली “दी में भी आप के पार्लर में काम करुँगी आप के साथ”.

माया दी बोली “सब काम करेंगे तो भाई के साथ कोण रहेगा”.

काया बोली “ये अच्छा हे तुम सब काम करो, मे भाई के साथ रहूंगी”.

माँ बोली “क्यों तुम्हारा भाई भी वहा जा के अपना बिजनेस स्टार्ट करने वाला हे, उसे वेसे ही वक़्त नहि मिलेगा”. मैं बोला वहा की वहा देखेंगे,अभी यहा मुझे भूख लगी हे”.

माँ बोली “डिनर रेडी हे बेटा”

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हम सब ने डिनर कया आज माया दी मुझे मुस्कुरा के देख रही थी. मैंने इशारे में रूम में आने को बोला.

 
अपडेट 144

मे अपने रूम में माया दी का वेट कर रहा था . १ घंटा हो गया.

मैं बेड पे लेटा लेटा वेट कर रहा था १ मंथ से मैंने चुदाई नहि की मेरा लंड एक

दम सिद्ध खड़ा था. मैंने अपनी पेंट की जीप खोल दी और लंड सहलाने लगा. मुठ मारने में भी मज़ा नहि आ रहा था. तभी दरवाजे पे नॉक हुआ. में ख़ुशी में दरवजा खोलने भागा जल्दी में लंड अंदर करना भी भूल गया. मैंने डोर खोला तो सामने माँ थी. माँ की नज़र सीधे मेरे लंड पे गई माँ ने मेरे लंड को पकड़ लिया और खीचते हुए अंदर ले गयी. मुझे बेड पे बीठा के मेरे लंड को सेहलाने लगी मैंने माँ की चुचुओ को पकड़ लिया. माँ ने सिर्फ नाइटी ही पहनि थी हाथ लगाते ही उनकी नरम चूचिया दबाने में मज़ा आने लगा.

माँ बोली “क्यों बेटा आज बहुत बेचैन हो”.

मैंने बोला “माँ इतने दिनों से चुदाई नहि की तो लंड बहुत प्रेषण कर रहा हे”.

मैंने मोम की नाइटी उतारना शुरू कर दिया.माँ ने रोका मुझे

माँ बोली “बेटा रुको अभी, में तो यहाँ बात करने आई हूँ”

मैं बोला “माँ बात भी कर लेंगे”.

माँ बोली “नहि अभी बात करनी हे ये जरुरी हे बेटा”.

मोम मेरा लंड सहला रही थी

मैं बोला “ठीक हे बोलो क्या हुआ”?.

माँ बोली “तुमको पता ही हे रूपा को हमारे घर के बारे में सब पता हे, उसको ये भी पता हे की तूम हम तीनो को बहुत प्यार करते हो”.

मैं बोला “ये तो उसे पता ही हे”.

माँ बोली “पर आगे जा के हमे रिश्तो को सुधारना होगा”.

मैं बोला “कोई जरुरत नहि में तुम तीनो को ही बहुत प्यार दूंगा, अगर काया किसी और से शादी करना चाहेगी तो करवा दूँगा, वरना उसे भी उसके हिस्से का प्यार मिलता रहेगा”.

माँ मेरे लंड के टोपे को दबाने लगी बहुत मज़ा आ रहा था.

माँ बोली “पर एक बार रूपा से भी बात कर लेना”.

मैं बोला “मोम उसे एतराज नहि हमारे संबंधों से आप फ़िक्र मत करो,और मुझे आज आप को बहुत प्यार करना हे”.

माँ बोली “जानती हूँ तुम्हारा प्यार सारी रात बदन तोड़ के रख दोंगे”.

माँ ने लंड को पकड़ के मुह में दाल लिया.मोम मेरा लंड मज़े से चूसने लगी.

माँ बोली “बेटा आज वाइल्ड सेक्स करे, मेरी एक सहेली ने बताया हे उसमे बहुत मज़ा आता हे”

मैं बोला “माँ वो कैसे होता हे”?

माँ बोली “उसमे गन्दी गालिया देते हे, जो मन आये वो करते हे”.

मैं बोला “माँ उसे छोड़ो हम प्यार से करते है, रहा वाइल्ड सेक्स, तो वो हम गोवा जायेंगे तब करेंगे”.

माँ बोली “जैसी तेरी मरजी”.

मोम की सूरत उतर गई जिसे देख के में बोला “साली जल्दी जल्दी चूस क्या मरीजो जैसा लंड चूस रही है”.

मेरे मुह से गाली सुन माँ के चहेरे पर मुस्कान आ गई.

माँ बोली “चुस तो रही हूँ”.

फिर में बोला “जा रंडी दरवाजा बंद करके आ”.

मोम ने लंड मुह से निकाल दिया.

मोम दरवाजा बंद करके बेड के पास खड़ी हो गई मैंने बोला “भोसडी की वहा क्यों खड़ी हे अब आ मेरे पास”.

माँ बोली “आ रही हूँ मेरे राजा”.

मैं बोला “जलदी से कपडे उतार रंडी की तरह आज तेरी चुत फाड़ूंगा”.

माँ बोली “तुम्हारा सब कुछ हे जैसे चाहो फाडो”. माँ ने कपडे उतार दिये.

मैं बोला “चल आ छिनाल मेरे पास”.

माँ मेर पास नंगी लेट गई मैंने मोमकी चुचीयो को जोर से पकड़ के दबा दिया. माँ चीख पड़ी “ओह मा मर गयी बेटा धीरे से दबा”

मैं बोला “साली रंडी क्यों चिल्ला रही हे”.

मोम बोली “इतनी जोर से दबाते हो दर्द होता हे”.

मैं बोला “मादरचोद जूबान तेरी बहुत चलति हे” माँ बोली “मादरचोद तू हे तभी अपनी माँ को चोदता है”.

मैं बोला “में तो तेरी बेटी भी चोदता हूँ छिनाल,तू बहुत बड़ी चुदक्कड़ है,आज तेरी गांड और चुत दोनों में दाल के इतना ठोकूंगा की कल चल भी नहि पायेगी”.

मोम बोली “तेरे लंड में हे दम तो मेरी चुत भी नहि कम समझा कुत्ते”.

अब मज़ा आने लगा था माँ भी गालिया दे रही थी. मैं अपने कपडे उतार के नंगा हो गया.

माँ बोली “राजा जी अब नंगे खड़ेही रहोगे की कुछ करोगे भी”.

मैं बोला “भोसडी की चल मेरा लंड मुह में दाल में तेरी चुत चूसता हूँ”. में लेट गया.

मोम मेरे मुह पे चुत रख के ६९ पोज में लंड चुस्ने लगी. मैंने माँ की चुत मे तीन उंगलिया दाल के बोला “साली कुतीया तेरी चुत तो बहुत रस भरी हे”.

माँ बोली “ओर तेरा ये लंड गधे के जैसा हे रस छोड़ता हे तो पेट् मेरा भर देता हे”.

मैंने उंगलियां दाल के चुत को चोदना शुरू कर दिया. माँ भी मज़े से मेरा लंड चुस

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रही थी. कुछ देर माँ चुत चुस्वाति रही और में लंड माँ के मुह में धक्के मारता रहा.

फिर मैंने मोम को अपने ऊपर से उतार दिया. मैंने माँ को लिटा दिया उसके ऊपर लेट के उनकी चूचियों को दबा दबा के चुस्ने लगा.

मैं बोला “मादरचोद छिनाल तू बहुत कामुक हे तुझे देख के मुझे भी जोश आ जाता हे”.

माँ बोली “तुमसे तो कम हूँ,तुम्हारा बस चले तो हर वक़्त हम सब को रंडियो की तरह चोदते रहो

मैं बोला “वो तो सच हे तुम सब मेरी रण्डिया ही तो हो,और तुम सब का काम मेरे लंड की सेवा करना हे समझि साली कुतिया”.

माँ बोली “हा भडवे जानती हु तभी तो हर वक़्त तेरे लंड के निचे आने को तरसती हूँ”. मेरा लंड माँ की चुत से टकरा रहा था घुसे जा रहा था. मैंने माँ की दोनों टांग उठा के

पकड़ लिया. और लंड चुत की सिध पे रख के जोर से धक्का मार दिया. माँ की तो

चीख निकल गई मेरा लंड पूरा माँ की चुत फाड़ता हुआ अंदर घुस गया.

माँ की चुत में जोर जोर से धक्के मारता रहा. माँ की चीखे निकलने लगी फिर माँ की कामुक सिसकिया पुरे रूम में गुजने लगी.

“चोद जोर से रुक मत”

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माँ कामुक आवाजे निकालती हुई झड़ने लगी. माँ

की चुत बहुत पाणी छोड़ रही थी . मैंने भी मोम की चुत ताबड़तोड़ चोदता रहा. माँ झड चुकी थी.

मैं बोला “चल छिनाल कुतिया बन तेरी गांड मारता हूँ”.

माँ बिना वक़्त गवाये कुतिया बन गई मैंने माँ की गांड में अँगूठा दाल के छेद को चौड़ा करने लगा .

मैं बोला “भोसडी की तेरी गांड फिर टाइट हो गई” माँ बोली “कुते तू गांड़ मारता नहि तो कहा से खुलेंगी ये”.

मैंने मोम की गांड से अंगूठा निकाला मोम की चुत में दो उंगली दाल के मोम का पाणी निकाला और गांड में वहि उंगलिया घूसा के गांड गिली करने लगा .

माँ कराहे जा रही थी . मैंने माँ की गांड की सुराख़ पे लंड रखा और जोर से धक्का दे दीया गांड टाइट थी तो लंड आधा ही अंदर गया . माँ चिल्लाई “मादरचोद छोड़ मेरी गांड फट जायेगी”.

मैं बोला “कतिया चिल्लाती है आज गांड ही तो फाडनी हे मैंने”

माँ की गांड में जोर से एक और धक्का मार दिया.

माँ छटपटाने लगी.

“कुते मार डाला मुझे दर्द बहुत हो रहा हे,निकाल लंड” .

मैंने माँ की बात न सुन के गांड में दो तीन धक्के मारे . माँ अपनी गांड सिकोड़ रही थी उनको बहुत दर्द हो रहा था.मैंने आगे की तरफ़ झुक के उनकी चूचियों को पकड़ लिया और गांड मारने लगा.मोम सिसकिया लेने लगी अब दर्द भी कम हो गया था , मैंने जोर दार धक्के मारने शुरु कर दिये माँ चिल्ला रही थी. में चूचियों को दबा दबा के गांड मारने लगा.

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मोम पस्त हो चुकी थी. बस गांड उठा के मरवाती रही. मैंने माँ की कमर पकड़ के धक्के मारना सही समझा झुके झुके मेरी कमर दर्द होने लगी थी.

मेरा पाणी निकलने वाला था. माँ की गांड दुखने लगी थी मैंने जोर दार धक्के मारकर जैसे ही लंड से पाणी निकलने वाला था. मैंने लंड निकाल के माँ के मुह में डाल दिया और बोला “पि जा मादर चोद छिनाल अमृत हे”.

माँ मेरे मोठे लंड से निकलने वाली पिचकारियो को पिने लगी. मेरा बहुत पाणी निकला माँ सारा पि गई. में भी पस्त हो के बेड पे लेट गया. माँ मेरे बाजु में लेट गई .

मैं बोला “माँ रूपा को अब मेरे साथ सोने को बोल दिया करो अकेले नहि सोउंगा”.

माँ बोली “तुमको कोण कहता हे अकेले सोने को, जिसे चाहो सुला लो अपने साथ”.

मैं बोला “हा माँ वो तो हे, गोवा जा कर में ऐसा ही करूँगा, तुम सब को जब चाहे चोदूगा” .

माँ बोली “ठीक हे बेटा अब सो जा में बहुत थक चुकी हूँ तेरी चुदाई से”.

मैं बोला “अभी नहि अभी एक बार ओर तुम्हारी गांड और चुत मारूँगा,मेरा लंड खड़ा होने लगा है”

मैंने फिर से माँ की चुत और गांड दोनों जम के मारी और पूरी तरह संतुष्ट माँ के साथ चिपक के सो गया.

 
दोस्तो ज्यादा काम की वजह से कुछ दिन से अपडेट नही दे पा रहा था पर अब रेगुलर अपडेट देने की कोशिश करूंगा धन्यवाद...सतीश
 
अपडेट 145

रात बहुत रंगीन थी सुबह आँख खुली तो सामने रूपा खड़ी थी. आज दो महीने बाद या बोलू तो शादी के बाद पहली बार मेरे रूम में आई थी . हम बाहर ही कॉलेज में मिलते थे किस एक दूसरे को देते थे इस से जियादा कुछ नहि रूपा करने देती थी. रूपा ने गाउन पहन रखा था. आंख खुली तो देखा वो खड़ी खड़ी मुझे ही देख रही हे. उसकी आँखों में प्यार साफ नज़र आ रहा था.

मै “गुड मॉर्निंग जान” रूपा तो जैसे कही खोई हुई थी. मेरे गुड़ मॉर्निंग बोलने के बावजूद उसने कुछ नहि बोला. में उठ के बैठ गया और फिर बोला जान क्या

हुआ कहा खोई हो .

रूपा - अपनी जानू में खो गई थी .

मै- अच्छा जी

रूपा - हा जी

में - ऐसा क्या देख रही थी मुझे में इतना भी हैंडसम नहि हूँ.

रूपा - कोण बोला? तुम बहुत प्यारे लग रहे हो आज मुझे.

मैन- तो क्या पहले प्यारा नहि लगता था .

रूपा - लगते थे जाणू जी बस आज कुछ ज्यादा ही लग रहे हो.

मैंने रूपा का हाथ पकड़ के खीच लिया रूपा मेरी गोद में बैठ गई.

मै - वो तो तुम भी लग रही हो. में रूपा की कमर में हाथ दाल के सहलाने लगा.

रूपा - छोड़ो जाने दो ब्रेक फास्ट बनाना है.

मै - चोद दू तुमको.

रूपा – “नहि जी मैंने बोला छोड़ दो ना की चोद दो”.

मैन – “में भी तो वहि कह रहा हूँ चोद दू तुमको”

रूपा – “नो नो लीव मि नोट फ़क मी”.

मैं - क्यों छोड़ दू. अब तो चोदूंगा. मेरी गोद में बैठने से मेरा लंड खड़ा हो गया था और रूपा की गांड में धस रहा था. रूपा बार बार अपनी गांड हिला के लंड अडजैस्ट कर रही थी.

रूपा – “नही जान सुबह सुबह नहि. मुझे ब्रेक फास्ट भी बनाना हे माँ गुस्सा करेंगी”.

मैन – “मुझे कुछ नहि पता,मुझे प्यार करना हे तो करना हे”.

रूपा – “जान जिद मत करो ना काम हे मुझे”.

मैन – “मुझे कुछ नहि सुनना”. मैंने अपना एक हाथ रूपा के चूचि पर रख दीया”.

मुझे ऐसा लगा रूपा की चूचिया पहले से बड़ी हो गई हे.मैंने चूचि को दबाया.

रूपा – “जान छोड़ दो ना आह”

मै – “जाणू तुम्हारे बोओब्स बहुत बड़े हो गये हे कैसे”?.

रूपा जानू यह तुम्हारी माँ की ही कृपा हे”.

मैन – “ओह तो माँ के साथ खूब मस्तिया मारी गई हे”.

रूपा – “जाणू तुम्हारी याद आती थी तो क्या करती माँ से ही चिपक जाती थी”.

मैंने रूपा का गाउन खोल दिया. रूपा की चूचिया ३८ साइज की लग रही थी. एक दम टाइट

निप्पल ब्राउन कलर का और भी मस्त लग रहा था. मैंने रूपा के निप्पल को पकड़ लिया. दोनों उँगलियों से निप्पल को सेहलाने लगा.निप्पल एक दम हार्ड हो गए थे.

रूपा के बड़े निप्पल देख के मुह में पाणी आ रहा था.

रूपा बोली “जान तूमको चूचिया बहुत पसंद हे वो भी बड़ी वाली माँ ने बोला था इस लिए माँ से दबवा दबवा के बड़ी कर ली”.

मै – “जाणू इनका रस चुस्ने में बहुत मज़ा आता हे”.

रूपा – “तो देख क्या रहे हो चुसो ना”.

मैंने रूपा के एक निप्पल को मुह में दाल लिया और चुस्ने लगा. रूपा ऑंखे बन्द करने लगी. दूसरी चूचि को दबाने लगा. रूपा की सॉफ्ट चूचि कई मंथ बाद चुस रहा था. जब से रूपा मिली थी एक बार ही उसे चोदा था. उसकी जवानी का रस पिया था. रूपा की धड़कने तेज़ चलने लगी थी. मैंने रूपा का गाउन उतारदीया रूपा एक दम नंगी थी. ऐसा करते ही रूपा ने शर्मा के अपनी आँखों पे अपणे हाथ रख लिए. मैंने रूपा को लिटा दिया उसके हाथ साइड में करके उसे देखने लगा. ऐसा करने से रूपा और भी शर्माने लगी. रूपा सच में रूप की देवी थी

उसकी नशीली ऑंखे मुझे मदहोश कर रही थी. उसकी बड़ी चूचियों को देख के मुह में पानी आ रहा था. फिर नज़र पड़ी उसकी गुलाबी चुत पे. जिसपे हलके हलके बाल थे. एक दम हॉट लग रही थी. में रूपा के साइड लेट गया उसकी एक चूचि को पकड़ दबाने लगा. तभी रूपा ने मेरा लंड पकड़ लिया.

रूपा - जान बहुत तरसी हूँ तुम्हारे लिये, बहुत दिनों से प्यासी हूँ मेरी प्यास बुझा दो”.

मै – “जाणू आज ऐसी प्यास बुझाऊंगा की प्यास ही नहि लगेगी”

मैंने अपना दूसरा हाथ उसकी चुत पे रख दिया. रूपा की चुत भट्टी की तरह तप रही थी. मैंने रूपा की चुत के फांको के बिच उंगली घूसा दी रूपाकी मधहोसी में सिसकी निकल गई. रूपा की चुत से रस रिस रहा था. मैंने चूचियों को दबा दबा के चुसना शुरू कर दिया.

रूपा भी मेरे सर को सहला रही थी मेरे लंड को मुट्ठी में कस कर दबा रही थी.

 
अपडेट 146

मैंने रूपा की प्यास देख के उसकी टांगो के बिच आने का फैसला कर लिया. में उठ के बैठ गया रूपा मुझे दख रही थी. मैंने रूपा को देखा और उसने अपनी तांगे खोल के चुत दिखाइ . उसे देख के मेरे लंड ने सलामी दी . मैंने रूपा की जांघो को पकड़ लिया. रूपा की सांसे और तेज़ हो गई वो समझ चुकी थी अब क्या होने

वाला हे उसकी आँखों में प्यास की वजह से लाली आ गई थी. मैंने झुक के उसकी चुत को

एक चूमा दिया. रूपा मोमबत्ती की तरह पिघलने लगी. उसकी बदन में के कपकपी सी उठी पूरा बदन कांप गया. मैंने जीभ निकाल के रूपा की चुतमे घूसा दिया.

रूपा की आह निकल गई. रूपा की चुत आज भी कुवारी की तरह छोटी सी दिख रही थी. मैंने फांको को फैला दीया आंदर चुत की गुलाबी सुराख को चाटने लगा. रूपा ने मेरे सर को पकड़ लिया और दबाने लगी. में भी जोर जोर

से चुत के दाने को सहलाने लगा. मेरी जीभ चुत के छेद में घुस रही थी थी.

रूपा की चुत का पाणी मुझे और गरम कर रहा था.

रूपा – “जान तुम तो मज़े ले रहे हो मुझे भी मज़े लेने दो”.

में उसका मतलब समझ चुक्का था. मैंने खड़ा हो के रूपा के मुह में लंड घूसा दिया और ६९ पोज मे चुत चटने लगा हम दोनों नंगे एक दूसरे को चाट चुस रहे थे. रूपा भी मज़े के

साथ मेरा लंड मुह मे ले रही थी. मैंने उसकी चुत को फैला के जीभ अंदर दाल के

चोदना शुरू कर दिया. रूपा भी मेरे लंड को पकड के पूरा मुह में लेने की

भरकम कोशिश कर रही थी. रूपा बार बार अपनी चुत मेरे मुह पे घिस रही थी.

मैंने रूपा की चुत में उंगली दाल के फैला के चाटना शुरू कर दिया. रूपा बहूत गरम हो गई थी . उसकी चुत एक दम लाल और गर्म हो गई थी पाणी रुक ही नहि रहा था. मैंने रूपा के मुह से लंड निकल लिया. और टांगो के बिच आ गया.

चुदाई की हवस उसकी आँखों में झलक रही थी. रूपा अपनी नशीली आँखों से मुझे

उपर आने का इशारा कर रही थी. मैंने रूपा की टांगे पकड़ ली मेरा लंड उसकी चुत

से रगड खाने लगा. रूपा ने मुझे अपने ऊपर आने को बोला. में रूपा के ऊपर

लेट गया.मेरा लंड रूपा की चुत की फांको के बिच रगड खा रहा था. मैंने रूपा

के लिप्स को चुमना शुरू कर दिया. रूपा मेरे सर को सेहलाने लगी. हम दोनों एक

दूसरे के लिप्स को बुरी तरह चूम रहे थे. मैंने रूपा के मुह में अपनी जीभ

घूस दी. रूपा मेरी जीभ चुस्ने लगी. मैंने अपना हाथ निचे ले जा के उसकी चूचि

पे रख दिया और दबाने लगा. रूपा अपनी कमर उठा उठा के लंड से रगड रही थी.

मैंने देखा यही सही मोका हे. मैंने लंड चुत की सुराख़ पे रखा और जोर से धकेल दिया. मेरे ऐसा करते ही रूपा की चीख निकल गई. मैंने उसका मुह अपणे मुह से बंद कर रख था चीख दब गई. जोर से धक्का मारने के बावजूद भी मेरा अभी २ इंच लंड ही घूसा था. एक दम कुंवारी चुत लग रही थी जब की मैंने ही रूपा की सिल तोड़ि थी. रूपा की ऑंखे नम हो गई. उसकी आँखों से आँसू

बाहर निकलने लगे. मैंने उसके आसुओ को चाटना शुरू कर दिया.

रूपा की सिसकी निकल रही थी. “जान वेट बहुत दर्द हो रहा हे थोड़ा रुक जाओ, फिर ड़ालना”.

मैंने बोला “जानु जी डोन्ट वरि में धीरे धीरे ही डालूँगा”. मैंने रूपा की चूचियों को

मसलना शुरू कर दिया उसके होठो को चूसता रहा. रूपा की अभी कोई प्रतिकिरिया

नही थी. वो बेजान सी पड़ी हुई थी. और में उसको चूम चाट रहा था. थोड़ी देर चाटने के बाद मैंने फिर से धक्का मारा इस बार मेरा ५ इंच लंड अंदर घूस गया. रूपा की चीख निकल गई. मैं उसके होठो गालो को चूम के बोला “कुछ नहि हुआ जान बस हो ही गया हे अब दर्द नहि होगा”.

रूपा बोली “जान दर्द तो होगा ही अभी आधा जो गया हे”.

मैं बोला “जाणू दर्द के बाद मज़ा भी तो आएगा”.

मैंने रूपा की चूचि को दबा के होठ चुसना शुरू कर दीया.ठोड़ी देर में रूपा को आराम मिल गया. मैंने अपना लंड बाहर निकल के धीरे

धीरे अंदर बआहार करने लगा. रूपा को भी कम दर्द इस से हो रहा था.

५ मिनट्स सहलाने के बाद रूपा का दर्द भी ग़ायब हो गया. अब रूपा भी अपनी कमर धीरे धीरे हिलाने लगी. रूपा बोली “जान एक ही बार में बचा हुआ लंड दाल दो”. मैंने रूपा की टांगो को मोड़ के पकड़लिया और जोर से धक्का मार दिया मेरा लंड रूपा की चुत फाडता हुआ पूरा अंदर घुस गया. इसके साथ ही रूपा की

चीख भी निकल गई.

मैं बोला “जान कुछ नहि हुआ कुछ नहि हुआ चुप हो जाओ”.

रूपा बोली “यहाँ मेरी जान निकल रही हे और तूम बोल रहे हो कुछ नहि हुआ”.

मैं हस्ते हुए बोला “कुछ पाने के लिए थोड़ा दर्द तो झेलना ही पडता हे”.

मुझे मुस्कराता देख रूपा बोली “तुम मर्द बहुत कमीने होते हो हम ओरतो को दर्द दे के खुश होते हो”.

मैंने रूपा के लिप्स को चूसना शुरू कर दिया. रूपा की चुत से खून निकलने लगा था. रूपा को दर्द हो रहा था इस लिए में उसकी चूचियों को सहला के चूम के उसको आराम देणे की कोशिश कर रहा था. कुछ पालो बाद रूपा भी मेरा साथ देणे लगी. वो भी मेरे होठ को चूसने लगी. अपनी कमर को हिलाने लगी. ये देख के मैं भी चुत में लंड अंदर बाहर करने लगा. रूपा मेरे सर को सहलाती हुई सिसकिया ले रही थी. अब रूपा को दर्द कम आनंद ज्यादा मिल राह था. हम दोनों एक दूसरे की शरीर को सहला रहे था. मैं रूपा की चुत में लंड जोर जोर से घुसाना शुरू कर दिया. रूपा ने भी अपनी टांगे मेरी कमर से लपेट ली.

थोड़ी देर उसे चोदने के बाद रूपा को तकलीफ

होने लगी तो वो बोली “जान तुम निचे आ जाओ में ऊपर आती हूँ”.

मुझे रूपा की बात सहि लगी. में रूपा के ऊपर से हट गया. लंड निकालते ही चुत से खून की एक धार निकली.रूपा की बुर खून से लाल हो गई थी. मैं लेट गया. मेरा लंड सलामी दे रहा था. रूपा ने अपनी चुत देखि. उस से

खून निकल रहा था. रूपा ने अपने गाउन से चुत साफ की और मेरे ऊपर आ गई.

रूपा मेरे खड़े लंड को पकड़ के अपनी चुत से लगाने लगी. फिर रूपा ने लंड पे

बैठना शुरू कर दिया. मेरा लंड रूपा की चुत फाढ़ता हुआ अंदर घूसने लगा.

रूपा पूरा दबाव दाल के लंड पे बैठ गई. लंड चुत में पूरा घुस गया.फीर रूपा धीरे धीरे लंड पे कुदने लगी. मैंने रूपा की चूचियों को पकड लिया और दबाने लगा. में भी रूपा की चुत में धक्का मारने लगा. रूपा लंड पे कुदने के साथ

साथ सिसकिया ले रही थी कामुक सिसकिया रूपा मेरे ऊपर लेट गई. और

मे जोर जोर से धक्के मारने लगा लिपट के. रूपा भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

थोड़ि ही देर में रूपा झड गई और पस्त हो गई.

 
अपडेट 147

रूपा मेरे खड़े लंड को पकड़ के अपनी चुत से लगाने लगी. फिर रूपा ने लंड पे

बैठना शुरू कर दिया. मेरा लंड रूपा की चुत फाढ़ता हुआ अंदर घूसने लगा.

रूपा पूरा दबाव दाल के लंड पे बैठ गई. लंड चुत में पूरा घुस गया.फीर रूपा धीरे धीरे लंड पे कुदने लगी. मैंने रूपा की चूचियों को पकड लिया और दबाने लगा. में भी रूपा की चुत में धक्का मारने लगा. रूपा लंड पे कुदने के साथ

साथ सिसकिया ले रही थी कामुक सिसकिया रूपा मेरे ऊपर लेट गई. और

मे जोर जोर से धक्के मारने लगा लिपट के. रूपा भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

थोड़ि ही देर में रूपा झड गई के पस्त हो गई. पर में ढके मरता गया . फिर

मैंने रूपा को घोड़ी बनने को बोला रूपा लंड के ऊपर से उतर के

खड़ी हो गई. में भी बेड से निचे उत्तर गया. रूपा की चुत देखि तो सुज रही थी.

रूपा को मैंने बोला मेरे सामने खड़ी हो जाओ. रूपा बेड से निचे उत्तर गई और

बेड के सहारे झुक के कहड़ी हो गई . मैंने रूपा की चुत को सहलाया एक दम गिल्ली

ति. फिर मैंने झुक के रूपा की चुत चटने लगा. रूपा की चुत एक दम नमकिन

पाणी छोड़ रही थी. मैंने थोड़ी देर चाटने के बाद में खड़ा हुआ. मैंने लंड चुत पे रखा और जोर से धक्का मार दिया. मैंने रूपा की गांड को पकड़ लिया और

मसलने लगा. मैंने अपना अँगूठा गांड में घूसा दिया. रूपा को ऐसा करने से

थोड़ि तकलीफ हुई. में उसकी गांड पकड़ के जोर जोर से मसल के धक्के मारने लगा.

मेरे धक्कों के साथ उसकी बड़ी चूचिया हवा में लटक के लहरा रही थी. मैं जोर

जोर से धक्के मारने लगा. रूपा अब तक दो बार झड चुकी थी. अब में भी चरम पे पहुच गया था. मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी. और ताबड़ तोड़ रूपा की

चुत मारने लगा.

थोड़ी देर में में झड़ने लगा और मेरे साथ रूपा भी झड़ने लगी. रूपा बेड पे लेट गयी मैं रूपा के ऊपर लेट गया. थोड़ी देर बाद में साइड हुआ की चुत से खून मिश्रित दोनो का वीर्य बहने लगा. जिसे रूपा

ने गाउन से साफ किया. फिर गाउन पहन लिया. मेरा लंड मुर्झा गया था उसपे चुत

का पाणी लगा हुआ था. रूपा ने लंड को मुह में लेकर चूसा फिर बोली “अब खुश हो चलो रेडी हो के निचे आ जाओ ब्रेकफास्ट कर लो”. मैंने रूपा के लिप्स को चूमा और

बाथरूम में घुस गया नहाने के लिए नहा के बाहर आया रेडी हुआ और निचे गया.

माँ बैठी हुई थी माया काया नज़र नहि आ रही थी. रूपा किचन मे

काम कर रही थी. में माँ के पास जा के बैठ गया. माँ मुझे देख के बोली

बेटा हमें कल सुबह ही यहाँ से निकलना होगा. टिकट आ गई हे वहा घर रेडी

हो गया हे तो यहाँ रुक के क्या फ़ायदा वहा का काम जरुरी हे. मैंने बोला माँ ठीक है आप जरुरी सामान पैक कर लो. माँ बोली वो तो कर दिया हे. बस तेरी बहन की

शॉप आज बिक जायेगी तो अमाउंट भी आज ही मिल जायेगी. मैंने बोला माँ क्या जरुरत

थी दी की शॉप बेचने की. माँ बोली कोण उसे देखता. मैंने बोला ख़ुशी तो थी ना

ओ देख लेती शोप को उसको भी पार्लर का काम आता था. माँ बोली पहले नहि बताया तूने. मैंने बोला छोड़ो ब्रेकफास्ट दो. रूपा ब्रेक फस्ट लेकर आई मैंने

ब्रकफास्ट किया फिर माँ को बोला माँ में बाहर जा रहा हूँ रोहित के घर से होकर शम को आऊँगा. माँ बोली ठीक हे जल्दी आना. फिर में बाहर चला गया मे घर से बहार निकला. सिधा रोहित के घर गया. बेल्ल बजाई तो ख़ुशी ने दरवाजा खोला. मुझे देख के ख़ुशी बोली तो ज़नाब को फुर्सत मिल ही गई हमसे मिलने की . मैंने बोला “क्या यार तू खुद तो बिज़ी हे और मुझे बोलती हे मिलने नहि आता तू भी तो आ सकती थी”.

ख़ुशी बोली “अब शादी शुदा हो, घर में बिवी हे कैसे आती”.

तभी आंटी की अवाज आई “कोण हे बेटा”? ख़ुशी बोली “रजत आया हे”.

मैंने पूछा “आंटी क्या कर रही हे”?.

ख़ुशी बोली “वो किचन में बर्तन ढो रही हे”.

मैंने बोला ठीक हे में वहि मिल लेता हूँ. में किचन में पंहुचा वहा आंटी गांड लेहरा लेहरा के बरतन धो रही थी. आंटी ने नाइटी पेहन रखी थी. नाइटी उनकी गांड में घुसी हुई थी जो देखने में बहुत हॉट लग रही थी. मैंने आंटी की गांड को देख के अपने लंड को पेण्ट के ऊपर से मसला. आंटी अभी भी बर्तन धोने में बिज़ी थी. में उनके पीछे जा के खड़ा हो गया. उनके बदन से पसीने की महक आ रही थी जो मुझे उतेजित कर रही थी. मैंने आंटी की कमर में हाथ दाल दिया एक पल के लिए आंटी डर गई फिर

मुझे देख के मुस्कुरा के बोली तुमैंने तो मुझे डरा ही दिया . में आंटी के गालो

को चुमते हुए बोला “मुझसे क्यों डर गई”. आंटी बोली “तुम बाहर बैठो में अभी आती हूँ”. मेरा लंड पेण्ट में एक दम रॉड हो गया था. में आंटी से लिपटा हुआ था.

आंटी बोली “रजत तुम्हारा वो मुझे चुभ रहा हे”.

मैंने बोला “वहि चुभाने तो आया हूँ”.

मैंने आंटी को कस के पकड़ लिया. आंटी भी मस्त मुझसे लिपटी खड़ी रही. मैंने नाइटी में हाथ दाला तो आंटी ने अंदर कुछ भी नहि पहना था. मैंने आंटी की चुत पे हाथ रख दिया. आंटी भी गरम हो रही थी. में लंड आंटी की गांड से रगड़ने लगा. चुत को मसलने लगा. आंटी-भागो क्या कर रहे हो हटो काम करने दो”. मैंने नाइटी खोल दी. आंटी मुझे रोकती रही मैंने आंटी को नंगा कर दिया. तभी ख़ुशी आ गई. आंटी को नंगा देख के बोली “क्यों हमेशा आंटी का खयाल रहता हे मेरी तो किसी को परवाह नहि”.

मैंने आगे बढ़ कर उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खीच लिया. ख़ुशी मेरे सीने से लग गई.

मैंने बोला “क्यों नही तुम्हारा खयाल आया तभी तो आया हूँ”.

ख़ुशी बोली झूठ बोल रहे हो”.

मैंने बोला “सच यार”.

ख़ुशी बोली ऐसा होता तो मेरे कपडे उत्तरते मौसी के नहि”.

मैंने बोला “क्यों नाराज हो रही हो तुमको भी नंगा कर देता हूँ”. मैंने ख़ुशी की टीशर्ट

उत्तारणा शुरू कर दिया. आंटी फ्री हो गई थी उनका काम ख़तम हो गया था.

मैंने ख़ुशी के सारे कपडे उतार दिये. फिर हमतीनो हॉल में आ गए में सोफ़े पर बैठ गया. आंटी मेरे बाजु में बैठ गई. ख़ुशी मेरी गोद में बैठ गई.

मैंने बोला “आज कुछ नया हो जाये”.

ख़ुशी बोली “हा क्यों नहि”.

मैंने बोला “कल में यहाँ से चला जाउँगा”.

 
अपडेट 148

मुझे देख के मुस्कुरा के बोली तुमने तो मुझे डरा ही दिया . में आंटी के गालो

को चुमते हुए बोला “मुझसे क्यों डर गई”. आंटी बोली “तुम बाहर बैठो में अभी आती हूँ”. मेरा लंड पेण्ट में एक दम रॉड हो गया था. में आंटी से लिपटा हुआ था.

आंटी बोली “रजत तुम्हारा वो मुझे चुभ रहा हे”.

मैंने बोला “वहि चुभाने तो आया हूँ”.

मैंने आंटी को कस के पकड़ लिया. आंटी भी मस्त मुझसे लिपटी खड़ी रही. मैंने नाइटी में हाथ दाला तो आंटी ने अंदर कुछ भी नहि पहना था. मैंने आंटी की चुत पे हाथ रख दिया. आंटी भी गरम हो रही थी. में लंड आंटी की गांड से रगड़ने लगा. चुत को मसलने लगा. आंटी-भागो क्या कर रहे हो हटो काम करने दो”. मैंने नाइटी खोल दी. आंटी मुझे रोकती रही मैंने आंटी को नंगा कर दिया. तभी ख़ुशी आ गई. आंटी को नंगा देख के बोली “क्यों हमेशा आंटी का खयाल रहता हे मेरी तो किसी को परवाह नहि”.

मैंने आगे बढ़ कर उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खीच लिया. ख़ुशी मेरे सीने से लग गई.

मैंने बोला “क्यों नही तुम्हारा खयाल आया तभी तो आया हूँ”.

ख़ुशी बोली झूठ बोल रहे हो”.

मैंने बोला “सच यार”.

ख़ुशी बोली ऐसा होता तो मेरे कपडे उतारते मौसी के नहि”.

मैंने बोला “क्यों नाराज हो रही हो तुमको भी नंगा कर देता हूँ”. मैंने ख़ुशी की टीशर्ट

उत्तारणा शुरू कर दिया. आंटी फ्री हो गई थी उनका काम ख़तम हो गया था.

मैंने ख़ुशी के सारे कपडे उतार दिये. फिर हमतीनो हॉल में आ गए में सोफ़े पर बैठ गया. आंटी मेरे बाजु में बैठ गई. ख़ुशी मेरी गोद में बैठ गई.

मैंने बोला “आज कुछ नया हो जाये”.

ख़ुशी बोली “हा क्यों नहि”.

मैंने बोला “कल में यहाँ से चला जाउँगा”.

रोहित को मैंने बोला हे हम दोनो वहा होटल खोलेंगे. राहुल ने भी

अपणा ट्रांसफर गोवा करवा लिया हे. तुम लोगो ने क्या सोचा हे. आंटी मेरी पेण्ट

खोलते हुए बोली मैंने रोहित के डैड से बात की वो बोले हे जहा मन करे वहा रह

लो उनको तो बाहर ही रहना होता हे. मैंने तुम्हारे बारे में बताया तो बोले ठीक हे

तूम सब भि पैकिंग कर लो. राहुल को फ्लैट के लिए बोला था उसने अरेंज कर दिया है. रोहित अपने और ख़ुशी के कॉलेज ट्रांसफर के पेपर ही लेने आज गया हे. आंटी ने मेरी पेण्ट उतार दी .

मैंने ख़ुशी को बोला “ख़ुशी जरा नाच के दिखाओ”.

ख़ुशी खड़ी हो के लटके झटके दिखाने लगी. आंटी ने मेरे सारे कपडे उतार दिए.

मैंने बोला “ऐसे मज़ा नहि आ रहा डीवीडी पे सांग चलाओ और तुम दोनों डांस करो”. आंटी ने डीवीडी पे सांग चालू कर दिया. दोनों एक दूसरे के सामने कमर हिलाने लगी.

में उनको देख के अपना लंड सहलाने लगा. ख़ुशी आंटी की चूचियों को अपनी जीभ निकाल के चाटने लगी. आंटी भी उसकी चूचियों को पकड़ के दबाने लगी. दोनो एक दूसरे से चिपक के नाच रहे थे. तभी मुझे आईडिया आया.

मैंने बोला तुम दोनों घुम के कड़ी हो जाओ, में अभी आता हूँ. में किचन में गया तो देखा. किचन में एक ९ इंच की तुरई पड़ी हुई हे में उसे उठा लया . तुरई को देख दोनों सोचने लगी क्या करने वाला है.

आंटी बोली बेटा ये क्या हे”.

मैंने बोला “आप झुक के खड़ी रहो सब पता चल जायेगा”.

मैंने ख़ुशी को आंटी के आगे झुकने को

बोला.

खुशी आंटी के आगे झुक गई. में आंटी के पास गया उनके होठो को चूमने लगा. आंटी भी मेरे होठो को चुस रही थी. तुरई २ इंच मोटी थी.

मैंने तुरई को आंटी की चुत के सामने रखा और जोर से धकेल दिया. आंटी की चीख निकल गई. आधी तुरई आंटी के अंदर थी.

मैंने आंटी की चूचियों पे थपप्पड मारा और फिर ख़ुशी की गांड के छेद में उंगली दाल दी. ख़ुशी भी अपनी गांड हिलाने लगी. मैंने उंगली उसकी गांड में पूरी घुसेड़ी. मैं तुरई को पकड़ के आंटी की चुत में अंदर बाहर किया तो आंटी ने अपणी तांग उठा ली.

मैं बोला “अब आंटी म्यूजिक की लय पे आप ख़ुशी को चोदो”.

आंटी बोली “इसमें आज बहुत मज़ा आएगा”.

मैंने बोला “आप शुरू तो करो आज ऐसा मज़ा दूंगा की दोनों मस्त हो जाओगी”.

में सोफ़े पे बैठ गया और बोला “ट्रस्ट करो”.

आंटी ने खुशी की गांड पकड़ ली ख़ुशी बोली “मसि मेरी गांड पे थुक लगा देना वरना बहुत जलान होगी”

आंटी बोली “फ़िक्र मत कर”.

आंटी ने ख़ुशी की गांड के छेद में थूका.

मे उन दोनों को देख के अपना लंड सेहलाने लगा .

फिर मैंने ख़ुशी को बोला “ख़ुशी मेरे पास आओ”.

ख़ुशी मेरे पास आ गई मैंने बोला “लंड चुसो झुक के गांड हवा में ही रखना”.

ख़ुशी ने लंड मुह में रख के गांड हवा में उठा ली. मैंने आंटी को गांड में तुरई ड़ालने को कहा. आंती ने तुरई पकड़ के ख़ुशी की गांड में घूसाने लगी. जैसे जैसे गांड़ में तुरई घुस रही थी ख़ुशी को तकलीफ हो रही थी. ख़ुशी के मुह में मेरा लंड था इस लिए उसकी अवाज नहि आ रही थी. अब आधी तुरई आंटी की चुत में ओर आधी ख़ुशी के गांड में थी. ख़ुशी लंड को चाट रही थी

 
अपडेट 149

मेरी गोलियो को दबा रही थी आंटी धीरे धीरे पकड़ के तुरई को चुत में और गांड में डाल रही थी.

थोड़ी देर बाद मैंने ख़ुशी को बोला “अब में आंटी की गांड मारने वाला हूँ तो तू सोफे को पकड़ के खड़ी हो जाओ, क्यों की में आज तुम दोनों को, एक साथ चुदाई का मज़ा दूंगा”.

ख़ुशी ने लंड मुह से निकल दिया. और सोफ़े को पकड़ के खड़ी हो गई. में आंटी के पीछे गया. उनकी गांड को पकड़ के दबाया. आंटी धीरे धीरे धक्के मार रही थी. मैंने आंटी की गांड पे थप्पड़ मारा. आंटी ने ख़ुशी की गांड पे थप्पड़ का बदला उसे थप्पड़ मार के लिया. ख़ुशी की सिसकिया निकल गई. मैंने आंटी की गांड फैलाई और लंड पे थुक लगा के एक ही बार में गांड में घूसा दीया.

आंटी चीख़ने लगी “धीरे डालो जान निकल दी मेरी”.

मैंने बोला “आंटी धीरे ही डाला हे”.

मैंने झुक के आंटी कि चूचिया पकड़ ली आंटी ने झुक के ख़ुशी की चूचियों को पकड़ के दबाना शुरू कर दिया. मैंने धक्के मारने शुर कर दिया. मेरे धक्कों के साथ ख़ुशी और आंटी की अंदर तुरई भी घूसने लगी थी अभूत मज़ा आ रहा था. आंटी और ख़ुशी की सिसकिया गूंज रही थी. में बुरी तरह चूचियों को मसल रहा था .आंटी की गांड मारने में बहुत मज़ा आ रहा था. आंटी की चुत से पाणी

निकलने लगा. ख़ुशी की गांड में जलन होने लगी थी. अब मैंने भी धक्कों की स्पीड बडा दी. फुक फुक की अवाज गांड से आने लगी थी .मैंने आंटी की गांड मारनी बंद की.

खुशी की कमर दर्द होने लगी थी. मैंने आंटी को तुरई बाहर निकलने को बोला आंटी ने ख़ुशी की गांड से बाहर निकाल दि. में सोफ़े पे बैठ गया. ख़ुशी को घुमा के लंड पे बैठने को बोला ख़ुशी जल्दी से अपनी चुत मेरे लंड पे रख के बैठ गई. आंटी की चुत में अभी भी तुरई थी. ख़ुशी मेरे लंड पे धीरे धीरे उछलने लगी. और में आंटी की चुत में तुरई घुसाने लगा.आंटी अपनी चूचियों को मसल रही थी.ऑन्टी फिर से खडी होगई मैंने ख़ुशी को पकड़ लिया और जोर जरो से धक्के

मारने लगा ख़ुशी पागलो की तरह उछलने लगी “और जोर से चोदो फाड् डालो मेरी हहहा और जोर से”, मैं बहुत तेज़ धक्के मारे जा रहा था. ख़ुशी की चुचियो को जोर से पकड़ रक्खा था. मेरे धक्कों से धप धप धप धप की

आवाज आने लगी ऐसा लग रहा था इंजन चल रहा हो. गप् गप् गप् चुत लंड को

लिये जा रही थी. ख़ुशी पस्त हो गई दो बार झड चुकी थी में भी झड़ने वाला हो गया था. मैंने लंड चुत से निकाला. आंटी और ख़ुशी सामने बैठ गई दोनों के चेहेरे मुह पे पिचारिया मारने लगा.झड के में बैठ गया. दोनों एक दूसरे के चहरे को चाट चाट के साफ कर रही थी. फिर दोनों ही मेरे लंड को चाट के साफ की. और मेरे बाजु में बैठ गई दोनों नंगी मेरे साथ सट के बैठी थी. हम तीनो नंगे बाते कर रहे थे. में दोनों की चूचियों को दबा रहा था.

ख़ुशी बोली “तुम सब तो गोवा चले जाओगे मेरा क्या होगा”?.

आंटी बोली “क्यों फ़िक्र कर रही हे में हूँ सब संभाल लुंगी”.

मैंने बोला “में कल जा रहा हूँ गोआ नेक्स्ट वीक तक तुम लोग भी आ जाओ”.

आंटी की बुर में भी तुरई थी. में निकलने जा रहा था.

आंटी बोली “रहने दो आज सारा दिन इसे चुत में लेकर घूमूंगी”.

मैंने बोला “जैसी तेरी मरजी मुझे थोड़ा काम हे में चलता हूँ रोहित आये तो बोल देना आया था”.

आंटी बोली “ठीक हे”.

मैंने कपडे पहने और घर की तरफ चल पड़ा फिर मन किया दीदी के पार्लर भी होता चलू देखु क्या हुआ उनके काम का. में दीदी के पार्लर की तरफ चल पड़ा. दीदी पार्लर में थी और दो आदमी भी थे. पार्लर खरीदने आये थे. दीदी के पार्लर का सौदा हो गया था एग्रीमेन्ट पे साइन भी हो गए. फिर में दी और काया के साथ घर आ गया. माँ ने डिनर रेडी कर रखा था.

मैंने पूछा “रूपा कहा है”?

माँ बोली “पैकिंग कर रही हे तुम्हारी, हमने तो कर ली थि तुम ही हो जो अभी तक कोई पैकिंग नहि किये”.

मैंने बोला “इतनी भी क्या देर हुई है दस मिनिट तो लगते मुझे”. रूपा तभी आ गई. रूपा सुबह से जियादा ही

हॉट और खूबसूरत लग रही थी.

 
अपडेट 150

रूपा सुबह से ज्यादा ही हॉट और खूबसूरत लग रही थी

रूपा का रूप आज निखरा हुआ लग रहा था दिन भर की मेहनत

करके में थक गया था फटा फट सब ने डिनर किया फिर सब अपने अपने

रूम में चले गए आज का दिन सच में बहुत बिजी था दूसरी सिटी शिफ़्ट होने से पहले

मॉम घर के देख भाल के लिए एक नोकर भी रख ली थी ये घर डैड की आखरी निशानि थी दिन भर तीन ओरतो को चोद के बदन एक दम चुर हो गया था बिस्तर पे गिरते ही नींद आगयी सुबह रोहित ही आवाज से मेरी नींद खुली रोहित को देख

के मैं बोला

“साले तू इतनी सुबह सुबह मेरे घर क्यों आ गया तुझे और कोई काम नही ?

रोहित : “भाई नींद में हो क्या ११ बज गये है एक घंटे से तो निचे वेट कर रहा हु”

मैं : “ओह तेरी इतना टाइम हो गया पता ही नहि चला”

में रोहित को बोला

“तू चल निचे फ्रेश हो के आता हूँ”

में थोड़ी देर में फ्रेश हो के निचे गया तो मॉम ने ब्रेक फास्ट रेडी कर रखा था और रोहित बैठ के खा रहा था उसे देख के में बोला “क्यों भूककड़ सुबह खा के नहि आया था क्या ?

मॉम : “बेटा तू तो कोई काम करता नहि इस लिए कल मैंने रोहित को बोल दिया था सुबह आने को”

मैं : “मॉम अब कोण सा काम था जो इसे तकलीफ दी तुमने”

मॉम : बेटा घर में बहुत कॅश था और रात को तुम्हारी दीदी भी लेकर आई थी इतना सारा कैश अकेले लेकर जाने में डर लग रहा था तो रोहित को बोला था सुबह आने के लिये”

बैंक के मैंनेजर से बात हो गई थी सुबह १० बजे बुलाया था हम भी

ठीक १० बाजे पहुच गये हमारा काम जल्दी हो गया”.

मैं : “मॉम थोड़ा वेट कर लेती में खुद ट्रांसफर कर देता दूसरे बैंक में”

मॉम : “अब तो हो गया और मेरे सर से बोझ भी हट गया”

मॉम बोली “अब तू भी बैठ के खाले”

मैं : “रोहित तू कब आ रहा हे और आगे क्या करना हे”

रोहित : “भाई तूम आगे आगे चलो में भी नेक्स्ट वीक आ रहा हु”

मैं : “मॉम मैंने सोचा हे वह जा के एमबीए कर लु होटल तो खोलना ही है साथ साथ स्टडी करता रहूँगा”

मॉम : “गुड बेटा जैसा मन करे तुम दोनों ने ही करना हे”

रोहित : “भाई एमबीए करना जरुरी हे क्या ऐसे भी तो होटल चल सकता है”

मॉम : बेटा एमबीए कर लोगो तो तुम लोगो को परेशानी कम होगी”

रोहित ने हा में सर हिला दिया हम दोनों ब्रेकफास्ट करते हुए आगे की प्लानिंग करने लगे तभी माया दी आ गई मने उनको बोला दी मैंने आप के पार्लर के लिए भी सोच रखा हु,होटल में ही खोल देता हूँ इस तरह हमारे कस्टमर भी अपनी ब्यूटी का खयाल रख लेंगे होटल में एक स्पा भी खोल देंगे जेंट्स कस्टमर की मसाज भी कर दिया करेंगे इस से हमारा होटल ज्यादा ही चल पड़ेगा”

माया दी: “भाई तुम सही बोलते हो लेडीज से ज्यादा जेन्ट्स आज कल मसाज करवाते है इसके लिए हम होटल के ऊपर स्पा खोल देंगे वेसे भी गोवा में परमिट लेने में दिक्कत नहि होगी वहा पे विदेशी टूरिस्ट ज्यादा आते हे”

रोहित : “भाई पैसे बहुत खर्च हो जायेंगे सोच समझ के करना जो करना है”

मैं : “डोंट वरी बहुत पैसा हे हमारे पास कम पड़ा तो ये घर भी बेच देंगे”

मॉम : “बेटा नहि कम पड़ेगा मैंने सब मैनेज कर रखा हे शाम को हमारी फ्लाइट है तो रोहित बेटा तुम अपनी फॅमिली के साथ हमारे घर ही डिनर आज कर लेना”

मैं : “हा रोहित ये ठीक रहेगा”

फिर में और रोहित बाहर घुमने निकल गये दोस्तों से मिले यहाँ वहा घूम के शाम को घर आ गये मॉम ने रोहित की मॉम को फ़ोन करके बुला लिया था हम दोनों जैसे ही अंदर घुसे मॉम बोली

मॉम : “में जानती थी तुम दोनों घूम फिर के आ जाओगे,रोहित बेटा मैंने सुबह बोला था फॅमिली के साथ आने को”

रोहित : “सॉरी, आंटी भूल गया”

मॉम : “कोई बात नहि मैंने तुम्हारी मॉम और सीस को बुला लिया था”

हम दोनों अंदर आये तो आंटी और ख़ुशी रूपा और माया दी से बाते कर रही थी, काया टीवी में बिज़ी थी में और रोहित भी काया के पास बैठ गये थोड़ी देर टीवी देखने के बाद मॉम बोली बेटा आ जाओ डिनर रेडी हे हम सब बाते करते करते डिनर करने लगे एक दूसरे को अपनी प्लानिंग बताने लगे सब ने डिनर कर लिया

९ बज गए थे रोहित बोला

रोहित : “आंटी ९ बज गये हे १० बजे फ्लाइट हे हमे निकलना चाहिए” रोहित ने अपनी मॉम को घर जाने को बोला ख़ुशी बोली में भी रजत को छोड़ने चलूँगी”

रोहित बोला “ठीक हे चल मॉम आप भी चलो अकेले कैसे जाओगी”

आंटी भी रेडी हो गई हमारे साथ एयरपोर्ट जाने के लिए मॉम ने टैक्सी मांगवा ली फिर मॉम ने नोकर को कॉल किया वो थोड़ी ही देर में आ गया और टैक्सी भी मॉम ने उस में सूटकेस रखवा दिएये नोकर को चाबिया दी और हम एयरपोर्ट की तरफ निकल गये ९;४० पे हम

एयरपोर्ट पहुच गये फिर हमने अपना सामान चेक करवा के लगेज पे अपना टैग लगा दिया और हम सब वेट एरिया में आ के बैठ गये रोहित और उसकी फॅमिली भी थोड़ी देर तक बैठी रही जब तक हम प्लेन में नहि बैठ गये फिर रोहित चला गया हम लोग अपनी अपनी सीटो पे बैठ गये जिन्दगी में पहली बार प्लेन में बैथे थे थोड़ा डर लग रह था पर सेक्सी और होत एयरहोस्टेस को देख के मेरा डर ग़ायब हो गया मॉम मेरे साथ बैठी थी और माया काया रूपा हमारे पीछे थी थोड़ी देर में प्लेन रनवे पे था शरीर थर थर कांपने लगा ऐसा लग रहा था की मेरा दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा हो प्लेन हवा में जब गया तो एयर होस्टेज ने थोड़ी देर बाद सब को बताया हम ७ घँटो में गोवा पहुच जायेंगे फिर उसने हमसे खाने पिने के बारे में पूछा हम खा के तो आये थे तो आराम से सो गये बैठे बैठे कब हम गोवा पहुचे पता ही नहि चला जब एयरहोस्टेज ने बोला की हम २ मिनट में लैंडिंग कर रहे हे, तब आंख खुली प्लेन रनवे पे उत्तर गया, हम लोग प्लेन से बाहर आये फिर वेटिंग की रो में खड़े रह के अपने सामान का वेट करने लगे, मॉम ने टैक्सी मँगवा ली थी, हम लोगो ने अपना अपना बैग उठाया, और अपनी टैक्सी की तरफ चल पड़े, एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही, हमारी टेक्सी आ गई, फिर मॉम ने एड्रेस बताया,टेक्सी वाला हमको हमारी मंजिल की तरफ ले चला सुबह हो गई थी, अभी दुकाने खुल ही रही थी, मॉम ने एक जगह से दूध और ब्रेड ले लिया, थोड़ी देर में हम एक बंगल के सामने थे.

 
दोस्तो माफी चाहता हु कुछ फॅमिली प्रॉब्लम की वजह से मैं बहुत दिनों से अपडेट नही दे पा रहा था पर अब सब ठीक है तो अब रेगूलर अपडेट मिलते रहेंगे इस कहानी के अपडेट मैंने लिखने शुरू किये है जरा देर से मिलेंगे साथ बने रहने के लिये धन्यवाद...सतीश

 
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