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लौड़ा साला गरम गच्क्का ... complete

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" निवारण करने में आपका उत्तर सहायक सिद्ध होगा ...!" शास्त्री की बातों में गंभीरता थी !

"10 तारिख से 15 तारिख तक .." लजाते हुए तनु ने कह ही दिया !

"यानि 5 दिन ...चक्र तो ठीक हे ....चक्र के कितने दिन पश्चात .... आपका मन सम्भोग के लिए

व्याकुल होने लगता हे ....?"

" एक हफ्ते बाद ...!"

" यानि जो समय इस वक़्त चल रहा हे ...ठीक वाही "

" जी ..." तनु की लाज और भी बढ़ गई !

आखिर क्या बात थी उस शास्त्री की जो वो उससे इतना शर्मा रही थी वर्ना वो बहुत मोर्डेन थी !

" वीर्य पतन के कितनी देर बाद आप बिस्तर से उठती हे ..?"

शास्त्री तनु की गुदाज हथेलियों को धीरे धीरे सहला रहा था !

" मतलब ...?" ये प्रश्न तनु की समझ में आ गया था पर .....

" सम्भोग के पश्चात जब आपके पति का वीर्य आपकी योनि में भर जाता हे ...तो उस क्षण के कितनी देर बाद आप

बिस्तर से उठ कर मूत्र त्याग के लिए जाती हे ....?"

शास्त्री ने धीरे से अपनी धोती को थोडा ऊपर उठा लिया !

लाल रंग की लंगोट पर तनु की नजरें ना चाहते हुए भी ठिठकी !

शास्त्री की नजरों ने तनु की आँखों का केंद्र भांप लिया था !

" इस प्रश्न का क्या मतलब हुआ ..?" तनु के गलों पर लालिमा छ गई थी ! :( :( ;) ;)
 
:roll: :roll: :roll: :roll: शिशु का निर्माण से होता हे ..जिसे वंश -अंश भी कहते हे .."

शास्त्री जी की बात पूरी ही नहीं हुई की तनु बोल पड़ी-

" मुझे इतनी शुद्ध हिंदी समझ में नहीं आती ' ...

तनु जान बूझकर शास्त्री जी अश्लील भाषा का प्रयोग करने के लिए उकसा रही थी !

पुरुष कोई भी हो किसी स्त्री के कामुक संकेतों को अनदेखा नहीं कर सकता !

एक पल के लिए शास्त्री जी ने तनु की कजरारी आँखों में झाँका और फिर थोडा

तनु के पास आ कर बोले -

" आपके पति आपकी बूर को ठीक से चोदते हे या नहीं ....?"

" इस्सस ....प्लीज ऐसा मत बोलिए ..."

तनु ने अपनी पलकें बंद करली उसका एक एक पोर झनझना कर रह गया !

उसकी इस अदा पर शास्त्री की आँखों में वासना के साये लहराने लगे ! :? :?
 
तभी तनु को अपनी हथेली के मध्य किसी गर्म वास्तु का अहसास हुआ !

उसने पलकों को खोल कर देखा और बस -

"उई मम्मी ...ये क्या हे ?..."

उसकी हथेलियों के मध्य शास्त्री का नो इंच का काला और विकराल मोटा मुसल जेसा लंड था जिसे उसने अपनी

लंगोट के बाहर निकाल कर तनु के हाथ में थमा दिया था !

" स्त्री की योनि को छेदने वाला ओजार .....और देहात में इसे कहते हे लोंडिया की बूर को फाड़ कर

उसकी चूत का भोसड़ा बनाकर ....उस भोसड़ी में बीज उगलने वाली मशीन ...यानि लौड़ा ....!"

शास्त्री कितना कामी पुरुष था ये उसकी भाषा से स्पष्ट था !

इस तरह की भाषा शेली कभी तनु ने नहीं सुनी थी इसलिए उत्तेजने और डर की वजह से उसके दिल

की धडकने काफी तेज हो गई थी !

" बच्चा पैदा करना चाहती हे ?...'

शास्त्री की भाषा अब सत्कार वाली नहीं दुत्कार वाली थी !
 
जिसे सुनकर तनु की योनि धुकधुकाने लगी थी मानो बच्चा पैदा करने के नाम पर उसकी भी फट रही हो !

पर उत्तेजना की वजह से उसने वो शास्त्री का काला मोटा लंड कस कर भींच लिया था !

लजाते हुए उसने अपने सर को हाँ में हिलाया !

" चल नंगी हो भेन की लौड़ी ...!"

शास्त्री चारपाई से उतरा अपनी बनियान और धोती उतारी और लंगोट को खोल कर झोंपड़े के एक कोने में फेंक दिया

और पूरा नंगा हो गया ! उसे उसके पति का कोई डर नहीं था वो समझ गया की ये बड़े लोगों के चोंचले हे जो

ये अनजान लोगों से चुदवाने जाते हे ! और वो आज इसे खुल कर जंगली तरीके से चोदना चाहता था !

सभ्य तरीके से तो पति से चुदती थी पर संतुष्ट नहीं होती थी ! लगता हे इसे ऐसा ही मजा चाहिए की कोई

उसे रोंद डाले !

शास्त्री की दुत्कार से डर कर तनु की चूत पनियाने लगी थी !

वो भी सकुचाते हुए अपनी जींस और टॉप उतार कर गुलाबी ब्रा और गुलाबी कच्छी में अर्ध नंगी हो गई !

दोनों अधो वस्त्र छोटे थे इसलिए अपने हाथों और टांगों को चिपका कर अपनी नग्नता ढकने का असफल प्रयास

कर रही थी !
 
उसकी ये मुद्रा देख कर शास्त्री के भीतर का व्यभिचारी जंगली पुरुष जाग उठा और उसके मुह से ये फूटा -

" सुवरण को खोजत फिरे ,कवी व्यभिचारी ,चोर .....!"

किसी भूखे भेडीए की तरह जो कई दिनों से भूखा हो और उसे कोई मुलायम मांस का के खरगोश का

बच्चा मिल जाये और वो झपट पड़े !

अब तनु का नाजुक बदन उस हट्टे कट्टे विलासी व्यभिचारी मर्द की बाँहों में था

और तनु उसमे किसी मोरनी की तरह मचल रही थी !

डर और उत्तेजना के मिले झूले उन्माद से !

और शास्त्री तो जेसे उस नाजुक शहरी कलि को पा कर जेसे पागल ही हो गया था -

" पुरे पंद्रह साल हो गए मेरी बीवी को गुजरे ....और आज तू मिली हे इतने सालों के बाद .....

में इस हवस के हथोड़े से तेरी चुत की धज्जियाँ उड़ा दूंगा ....तेरी पूरी इज्जत ख़राब करके भेजूंगा .......

हरामजादी ...रंडी ...मेरे वीर्य में सो पुरुषों की सिद्धि हे .....जो बच्चा पैदा होगा वो हरामी का होगा .....

बोल चाहिए तुझे हरामी का पिल्ला .....बोल भेन की लौड़ी बोल ....!"
 
फिर तो शास्त्री ने तनु के लिपस्टिक से सजे मुलायम होंटो को अपने खुरदरे होंटों और दांतों से कुचलना शुरू कर दिया !

मानो किसी भिखारी को छप्पन भोग की थाली मिल गई हो !

सोचिये - वो क्या खायेगा क्या गिराएगा !

और शास्त्री तो सोच रहा था आज जो मजे लेना हे लेलो क्या पता फिर कब ऐसा मौका आये आज उसके भाग्य

पंद्रह साल बाद जागे हे !

कुछ देर होंट चुसे ,गाल चूमे फिर दोनों को कच कचा कर काट खाए !

भयानक चूमा चाटी के बाद जब शास्त्री ने उसे गोद में उठा कर चारपाई पर पटका

तब तक श्रृंगार से सजा उसका चेहरा , होटों की फेली लिपस्टिक ....जगह शास्त्री के दांतों के निशान और

उसके मुह के थूक से बुरी तरह सन चूका था !

पुरुष का किसी पागल कुत्ते की तरह ऐसा आक्रमण तनु के लिए एक नया रोमांच था !

स्त्री को भोगने के लिए ऐसा जानवर पन आज तक नहीं देखा था !

तनु डर के मारे सहम गई !

वो कुछ कुछ पछताने भी लगी थी रोमांच को पाने के लिए उसकी हालत ख़राब हो रही थी पर

बिलकुल नया हो रहा था जो आज तक उसके जीवन में नहीं हुआ था !

उसे इन्तजार था अपने पति "मन " का जो किसी भी वक़्त यहाँ आकर उसे शास्त्री के

हाथों से तितर -बितर होने से बचा लेगा !

पर उसका पति मन था कहाँ ...?

वो झोंपड़े की खिड़की के पास खड़ा होकर भीतर का भयानक नज़ारा देख कर .......

खुद उत्तेजित हो कर हस्तमैथुन कर रहा था .....! :oops: :oops: :?:
 
मन का चेहरा वासना से लाल भभूका हो रहा था और उसका और उसका हाथ अपने पतले और छोटे पर पूरी तरह से उत्थित लिंग

पर तेजी से चल रहा था !

वो चाहता तो ये सब रोक सकता था पर वो खुद अपनी काम वासना से ग्रसित था !

उसे इन्तजार था अपने स्खलन का !

इधर कमरे के भीतर -

" बोल रंडी ..तू मेरी रखेल हे ..." शास्त्री अपने काले लोड़े के सुपाडे पर थूक चुपड़ता बोला !

" हाँ ...में आपकी रखेल हूँ ..." तनु उत्तेजना से कांपने लगी थी !

"चोद - चोद के तुझे हिरोइन से छिनाल रांड बना दूंगा ...चल भेन की लौड़ी मुह खोल ...!"

तनु के बालों को शास्त्री ने मुटठी में पकड़ के खींचा की दर्द से तनु का मुह खुल गया !

शास्त्री गरजा " साली अपनी जीभ को पूरा बाहर निकाल "

डर के मारे तनु ने अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपना मुह खोल दिया ! और उसी वक़्त -

"गप्प ...."

शास्त्री ने अपना लोडा उसके खुले मुह में आधा ठूंस दिया !

" बहुत दिनों से इसमें से पेशाब की बदबू आ रही हे ...चाट कर साफ़ कर साली रांड ......

छिनाल कहीं की .....बच्चा चाहिए तुझे ....में दूंगा तुझे बच्चा ...साली के पांव भारी कर दूंगा ...

तेरे पेट को ढोल बना दूंगा ...पर पहले साली छिनाल इसे चूस ...कुत्ती ...पूरा चूस ..!"

और तनु डर के मारे चपड चपड कर चाटने लगी ! उसे डर था की कहीं ये उसके मुह और हलक में ही इस मूसल को

धकेल कर कहीं फाड़ ही नहीं डाले !

इस डर से कभी पति के लंड को मुह नहीं लगाने वाली इस अजनबी के लंड को चाट रही थी !

खिड़की पर देख रहे मन के चेहरे पर उसे लंड चूसते देख कर हेरत बरस रही थी !

उसकी कामनाये अब तनु के लिए कटु हो रही थी और वो इस खेल को और देखना चाहता था !
 
:geek: :ugeek: :| :roll: :evil: " साली शादी शुदा हो कर भी लोंडिया के जेसे जींस पहनती हे ....चुतड मटका के चलती हे ....

गांड के छेद में ये खूंटा गाड कर गांड का होद बना दूंगा मादरचोद के ....साली लंड की चट्टी ....

हलक तक अन्दर ले इसे पूरा झड तक मुह में जाना चाहिए ..वर्ना रंडी तेरा मुह फाड़ दूंगा ....साली

कुत्ते की मूत मादरचोद .....तेरी माँ का भोस्ड़ा में ये बम्बू फंसा दूंगा ...!"

और वो उसके बालों को पकड़ कर उसके मुह को अपने लौड़े की तरफ दबाये जा रहा था साथ ही उसके कुल्हे भी

तेजी से आगे पीछे हो रहे थे ! लार बहकर उसके मुह को चिकना कर रही थी और उस चिकने मुलायम मुह को

शास्त्री बूर समझ कर खूब तेजी से चोद रहा था !

ऐसी बुरी तरह से की गई उसके मुह की चुदाई को महसूस कर तनु की आत्मा तक कांप गई थी !

लेकिन अपनी सुन्दरता से पंडित जी जेसे किसी सभ्य पुरुष को बौराते देख कर खुद भी मस्ता गई थी !

आखिर वो थी भी इतनी सुन्दर और कामुक की जब तक कोई उसे जानवर बन कर नहीं चोदे वो भी

तृप्त नहीं होती थी !

इसी लिए इन पति पत्नी का येही काम था किसी पुरुष को चुटिया बना कर उत्तेजित करे जिसे देख कर

दोनों मियां बीबी उत्तेजित हो जाते फिर अचानक आ कर मन उस पुरुष को ऐसे ही रख देता और घर जाकर तनु की

जानवरों की तरह चुदाई करता !

पर आज वो लेट हो रहा था शास्त्री जितना आगे कोई नहीं बढ़ा था आज तक !

आज क्या पता वो क्या करना चाहता था उसके मन को भी शास्त्री के लौड़े की मोटाई लम्बाई मंत्र मुग्ध कर रही थी !

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:eek: :eek: :( :( :shock: :shock: :x :x

तनु को अपनी सुन्दरता पर कुछ अभिमान हो रहा था !

थोड़ी देर पहले जो पुरुष सभ्य इंसान था उसके योवन के ताप से जल कर वहशी हो चूका था !

यही तो वो चीज हे जो ओरत को कामुक बनाती हे !

तनु को आज पता चला की उसके योवन में किसी नर के व्यक्तित्व को किस सीमा

तक बदलने की क्षमता हे !

ये सोच कर उसके चुचक कड़े हो गए मांसल चूचियां पूरी तरह से तन गई और चूत में बह रहे पानी

का गाढ़ा पन और बढ़ गया !

कामुकता की ज्वाला उसकी योनि के भीतर दहकने लगी !

वह इस बौराये हुए पुरुष के मोटे काले विशाल लंड का आक्रमण अपनी चिपकी योनि के छोटे से छेद

पर झेलने के लिए उत्तेजित थी !
 
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