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वक़्त के हाथों मजबूर compleet

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वक़्त के हाथों मजबूर--17

राधिका उठ कर बाथरूम में जाती हैं और कुछ देर में अपने कपड़े पहेन कर वापस आती हैं.राहुल भी अब अपने कपड़े पहन चुका था.

राहुल आब राधिका के पीछे जा कर राधिका से एकदम सटा कर खड़ा हो जाता है. और अपने दोनो हाथ धीरे से बढ़ाते हुए उसके बूब्स को अपने दोनो हाथों में कस कर पकड़ लेता हैं और अपने होंठ राधिका के गर्दन पर रख देता हैं.

राधिका- ये क्या कर रहे हो राहुल. अभी भी तुम्हारा मन नही भरा क्या???

राहुल-सच में जान तुम किसी नशे की तरह हो. जितना किया जाए उतना ही चढ़ता हैं. पता नहीं क्यों तुमसे मेरा जी ही नही भरता. जी करता हैं सुबह शाम बस तुम्हें ऐसे ही प्यार करू.

राधिका- ओ...मिस्टर. आशिक़ . मुझे अब घर भी जाना हैं. अभी इस वक़्त, मैं आपकी बीवी नहीं हूँ. जब आपकी बीवी बन जाउन्गि तो आप अपना पूरा हक़ जताना.

राहुल- अच्छा तो बस एक प्यारा सा लिप किस दे दो. फिर मैं तुम्हें घर छोड़ दूँगा.

राधिका- देख रहीं हूँ राहुल तुम्हारी शैतानी बढ़ती ही जा रही हैं. अब मुझे देर हो रही हैं.

राहुल अपने होंठ धीरे से सरकाते हुए राधिका के कान के नीचे अपनी जीभ फिरा देता हैं और राधिका फिर से मचल जाती हैं.

राधिका- बस राहुल........ मत करो ना...मैं फिर से बहक जाउन्गि....

राहुल- तो बहक जाओ ना..............

राधिका राहुल को अपने से दूर करते हुए- बस करो ना राहुल अगर मैं फिर से गरम हो गयी तो इस बार तुम्हारी खैर नहीं..........

राहुल तुरंत दूर हटते हुए- अरे क्यों डरा रही हो जान. सच में मैने आज तक तुम्हारा ऐसा रूप कभी नहीं देखा था.

राधिका- चलो कम से कम मेरे से कोई पोलिसेवला तो डरता हैं......इतना कहकर राधिका भी मुस्कुरा देती हैं.

राहुल- मत जाओ ना जान. मुझे तुम्हारे बिना एक पल भी अच्छा नहीं लगता.

राधिका- नही राहुल मुझे जाना होगा. मैं तुम्हारे पास हर वक़्त तो नही रह सकती ना. लेकिन तुम तो मेरी साँसों में , मेरी हर धड़कन में बसे हो. क्या तुमसे दूर रहकर मुझे एक पल भी चैन आता हैं .मैं भी हर एक पल तुम्हारे लिए बेचैन रहती हूँ.

राहुल- अपनी आँखें बंद करो ना जान. मैं तुम्हें कुछ दिखाना चाहता हूँ.

राधिका भी धीरे से अपनी आँखें बंद कर लेती हैं.

राहुल उठकर वही ड्रॉयर में से एक पायल की जोड़ी निकालता हैं और फिर जाकर सीडी प्लेयर ऑन कर देता हैं. सीडी प्लेयर में फिर वही गीत बजने लगता हैं..........

चाँद सी महबूबा हो मेरी कब मैने ऐसा सोचा था.............

हां तुम बिल्कुल वैसे हो जैसे मैने सोचा था...........

फिर वो राधिका के एक दम करीब जाता हैं और बड़े प्यार से उसे अपनी बाहों में ले लेता हैं.

राहुल- आँखें खोलो ना जान.

राधिका धीरे से अपनी आँखें खोलती हैं.

राधिका- बोलो ना राहुल क्या दिखाने वाले हो...........

राहुल धीरे से अपना एक उंगली राधिका के लिप्स पर रख देता हैं और चुप रहने का इशारा करता हैं.

राहुल- कुछ मत कहो ना जान..........बस ये गीत सुनो .................. इसमें मैं तुम्हें हर पल पल महसूस किया हैं. राधिका भी उस गाने मे खोने लगती हैं और राहुल भी उसकी आँखों में बड़े प्यार से देखने लगता हैं.

राहुल- जानती हो जान ये गीत सिर्फ़ मेरा फ़ेवरेट गाना ही नही हैं बल्कि इस गाने से मेरी सारी यादें तुमसे जुड़ी हुई हैं. मैने बस हर लम्हे में तुमको पाया हैं , तुमको पूजा हैं. अब तो लगता हैं कि तुम मेरी ज़िंदगी से बढ़कर हो.......अब तो मेरी मौत.......राहुल इससे पहले कुछ कहता राधिका अपना हाथ उसके मूह पर रख देती हैं.

राधिका- आगे कुछ मत कहना राहुल. अगर तुमपर ज़रा भी आँच आए तो उसके पहले राधिका तुम्हारे कदमों में बिछ जाएगी मगर तुम पर कोई आँच नही आने देगी.

राहुल- मेरी किस्मत हैं राधिका कि तुम मेरी ज़िंदगी में हो. सच कहता हूँ कि मैने पछले जनम में कोई अच्छा कर्म ज़रूर किया होगा. इस लिए मुझे इसका फल के रूप में तुम मिली हो.

फिर राहुल धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर पायल को राधिका के हाथ में दे देता हैं.

राधिका- ये क्या हैं राहुल. मुझे ये सब नहीं चाहिए. मुझे बस तुमसे प्यार हैं ना कि इन सब चीज़ों से...........

राहुल- मैं जानता हूँ कि मेरी हर चीज़ पर तुम्हारा पूरा हक़ हैं और जो मेरा हैं वो तुम्हारा भी तो हैं. ये तो मैं अपने होने वाली दुल्हन को प्यार के सौगात के रूप में दे रहा हूँ. रख लो ना इसे मुझे अच्छा लगेगा.

राधिका भी बड़े प्यार से राहुल के लब चूम लेती हैं और उसे अपने सीने से लगा लेती हैं. और फिर ना जाने कितने देर तक वो दोनो ऐसे ही एक दूसरे की बाहों में खोए रहते हैं.

थोड़े देर बाद -

राधिका-अब जाने दो ना राहुल मुझे अब देर हो रही हैं. घर पर भैया आए होंगे तो मुझसे कई तरह के सवाल करेंगे. और तुम जानते हो कि मुझसे झूट बोला नही जाता.

राहुल- काश राधिका ये वक़्त यहीं पर थम जाए. इस हसीन पल में मैं अपना सब कुछ भूलकर बस तुम में खोना चाहता हूँ.

राधिका- वक़्त तो राहुल ठहर नहीं सकता मगर मैं तुम्हारे साथ बीते हर पल को, हर एक लम्हे को तुम्हारी यादों को अपने सीने में प्यार से सँजोकर रखा है.

राहुल- आइ लव यू जान................ इतना कहकर राहुल बड़े प्यार से राधिका के लब को चूम लेता हैं और जवाब में राधिका भी उसके लबो को प्यार से चूम लेती हैं.

राधिका- लव यू टू.................राहुल.

राहुल-चलो अब मैं तुम्हें घर तक छोड़ देता हूँ और वही से अपने थाने भी चले जाऊँगा.
 
राहुल फिर राधिका को अपनी कार में बैठा कर उसे उसके घर से कुछ दूरी पर ड्रॉप कर देता हैं और वो सीधे अपने थाने चला जाता हैं.

जैसे ही राधिका घर पर पहुँचती हैं उसके भैया पहले से ही घर पर आ चुके थे.

कृष्णा- कहाँ थी अब तक राधिका. 6 बज चुके हैं और तुम्हारा कॉलेज तो 3 बजे तक बंद हो जाता हैं . और वैसे भी आज सनडे हैं तो कॉलेज तो बंद ही होगा ना..

राधिका वो भैया... बस ऐसे ही मैं...निशा के घर गयी थी.

कृष्णा- राधिका तुमने कब से झूट बोलना शुरू कर दिया. जहाँ तक मैं तुम्हें जानता हूँ की तुम कभी झूट नहीं बोलती. और वैसे भी मैं निशा के पास फोन कर के पूछ चुका हूँ और उसने मुझे बताया हैं कि वो आज तुमसे मिली ही नहीं हैं.

कृष्णा- राधिका अब मैं तुमसे यही उमीद करूँगा कि तुम जो भी मुझसे बात कहोगी सच कहोगी................................................बोलो राधिका क्या हैं सच..........................................

राधिका- भैया वो मैं आपको नही बता सकती.

कृष्णा- राधिका मेरा इतना तो हक़ बनता हैं की मेरी बेहन कहाँ जाती हैं, क्या करती हैं और किससे मिलती हैं.

राधिका-भैया वो बात हैं .........कि.

कृष्णा- बोल ना राधिका. विश्वास कर मेरा मैं तुझे कुछ नही कहूँगा.

राधिका- भैया वो............ दर-असल मैं राहुल से प्यार करती हूँ और उससे शादी करना चाहती हूँ. इस वक़्त मैं उससे ही मिलकर आ रही हूँ.

इतना सुनकर कृष्णा को एकदम से गुस्सा आ जाता हैं लेकिन वो अपने गुस्से को पूरा कंट्रोल करके बोलता हैं.

कृष्णा- अच्छा वो पोलीस वाला. कहीं वही तो नही हैं ना ....................राहुल मल्होत्रा यहाँ का सब-इनस्पेक्टर.

कृष्णा- क्यों तुझे और कोई नही मिला था क्या. दिल भी लगाया तो एक पोलिसेवाले से .जानती नहीं हैं तू इन पोलीस वालों को. बहुत हरामी चीज़ होते हैं ये. बस तेरे बदन से खिलवाड़ करके तुझे छोड़ देंगे. कोई प्यार व्यार नही होता बस अपनी हवस को मिटाने के लिए तुझे इस्तेमाल कर रहा हैं वो इनस्पेक्टर.

राधिका- नहीं भैया राहुल ऐसा नहीं हैं. वो मुझ से सच्चा प्यार करता हैं.

फिर कृष्णा की नज़र राधिका की पहनी हुई हीरे की अंगूठी पर पड़ती हैं.

कृष्णा- राधिका के हाथ की ओर इशारा करते हुए- अच्छा तो वो तुझसे शादी करना चाहता हैं इसलिए उसने तुझे अपनी सगाई के तौर पर ये अंगूठी दी हैं.क्यों सच हैं ना..........

राधिका- प्लीज़ भैया मुझे ग़लत मत समझिए, मैं भी उससे बहुत प्यार करती हूँ.

कृष्णा- कब से चल रहा हैं ये सब.

राधिका- यही कोई 6 महीने से............

कृष्णा- तब तो वो तेरे साथ सो भी चुका होगा. हैं ना................

राधिका भी अपना सिर नीचे झुका लेती हैं और नीचे फर्श की ओर देखने लगती हैं. कृष्णा को भी सब समझ में आ जाता हैं.

कृष्णा- एक बात जान ले राधिका अगर वो पोलिसेवला तेरे साथ कोई खिलवाड़ किया ना तो उस साले को मैं ज़िंदा ज़मीन में दफ़न कर दूँगा. और फिर उसके बाद मैं तेरा क्या हाल करूँगा तू फिर समझ लेना.

राधिका चाह कर भी एक शब्द नही बोल पाती हैं और बस नीचे अपना सिर झुकाए देखती हैं.

कृष्णा भी उसके पास आता हैं और फिर उसके चेहरे को अपने दोनो हाथों से उपर की ओर करता हैं.

कृष्णा- देख राधिका, मैं ज़्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं हूँ मगर दुनिया दारी अच्छे से जनता हूँ. मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूँ और मैं कभी नहीं चाहूँगा कि तुझे कोई तकलीफ़ हो. बस मैं यही कहूँगा कि जवानी के जोश में कोई ऐसा ग़लत कदम ना उठा लेना की आगे चलकर कोई तेरे पर उंगली उठाए.

राधिका भी झट से अपने भैया के सीने लग जाती हैं - भैया मुझे माफ़ कर दो ये बात मैने आप से इतने दिनो से छुपाकर रखी. मैने कई बार आपसे इस बारे में बात करने की कोशिश की मगर आप से मुझे कहने की हिम्मत नही हुई.

कृष्णा- कोई बात नहीं राधिका. मैं जानता हूँ कि तू कोई काम ग़लत कर ही नहीं सकती. चल अब झट से मुझे एक गरमा गरम चाइ पिला.

थोड़े देर में उसका बाप भी आ जाता हैं और फिर सब मिलकर चाइ पीते हैं. राधिका फिर घर का सारा काम ख़तम कर लेती हैं और रात में बिस्तेर पर जाकर सोने चली जाती हैं. आज उसके मन बहुत हल्का हो गया था. उसे इस बात की खुशी थी की उसके भैया ने भी अब राहुल को आक्सेप्ट कर लिया हैं.

........................................

कहते हैं ना कि खुशियों को ग्रहण लगते देर नहीं लगती. ऐसा ही कुछ आज के बाद राधिका के साथ भी होने वाला था, जो अब उसकी जिंदगी में तूफान लाने के लिए काफ़ी था.

........................................

 
दूसरे दिन सुबह वो उठकर जल्दी से फ्रेश होती हैं और फिर किचन में जाकर चाइ बनाने लगती हैं. सुबह सुबह ही उसके पिताजी घर से निकल गये थे. इस वक़्त बस कृष्णा और राधिका ही घर पर थे.

कृष्णा भी झट से उठकर अपने हाथ मूह धोता हैं और फ्रेश होकर सीधा राधिका के पास जाकर उसके कमर में अपना दोनो हाथ डालकर राधिका की गर्दन को चूम लेता हैं.

राधिका- ये क्या भैया, आप ऐसे आते हैं कि बिल्कुल पता भी नहीं चलता. मैं तो समझी थी कि आप मुझसे नाराज़ होंगे ..

कृष्णा- मैं भला अपनी ही बेहन से कैसे नाराज़ हो सकता हूँ.

राधिका- लेकिन आपने मुझसे कहा था कि मैं तेरी मर्ज़ी से ही छुउंगा. फिर................

कृष्णा- तू हैं ही ऐसी जब तक तुझे ऐसे अपनी बाहों में नही ले लेता हूँ मुझे चैन ही नहीं मिलता.

राधिका- चलिए भैया मैं आभी चाइ लेकर आती हूँ.

फिर कृष्णा वही दूसरे रूम में चला जाता हैं और कुछ देर में राधिका भी दो सीशे के ग्लास में चाइ डालकर एक ट्रे में लेकर अपने भैया के पास जाती हैं.

कहते हैं कि अगर कुछ बुरा होने वाला होता हैं तो इंसान को उसका आभास पहले से ही हो जाता हैं. आज सुबह से ही राधिका का दिल बहुत बेचैन था. पता नहीं क्यों पर उसके दिल में एक अजीब सा डर जनम ले रहा था.....

राधिका जैसे ही ट्रे लेकर जाती हैं उसका पाँव फिसल जाता हैं और वो गिरते गिरते बचती है मगर उसके हाथ से ट्रे छूट कर फर्श पर गिर जाती हैं और सीशे के दोनो ग्लास टूट कर फर्श पर बिखर जाते हैं...

कृष्णा भी सीशे के टूटने की आवाज़ सुनकर दौड़कर राधिका के एक दम करीब आता हैं.

कृष्णा- क्या हुआ राधिका. ये ट्रे कैसे छूट कर नीचे गिर गया.

राधिका के आँख से आँसू निकल पड़ते हैं और वो दौड़ कर कृष्णा के गले लग जाती हैं.

कृष्णा भी उसे अपनी बाहों में ले लता हैं.

कृष्णा- बोल ना राधिका तू ऐसे क्यों रो रही है. क्या हुआ कहीं चोट तो नहीं लगी ना...

राधिका का दाए हाथ की एक उंगली मे सीशे का एक टुकड़ा लग गया था जिसके वजह से उसके उंगली से खून निकल रहा था. कृष्णा की नज़र उसपर पड़ती हैं और वो झट से राधिका की उंगली को अपनी मूह में लेकर चूसना शुरू कर देता हैं. कुछ देर में उसका खून बंद हो जाता हैं. मगर राधिका के आँसू नहीं बंद होते.

कृष्णा- तू रो.. क्यों रही हैं. देख ना अब तो खून भी बंद हो गया हैं.

राधिका- भैया ये सब कुछ ठीक नही हो रहा हैं. शीशे का ऐसे टूटना अपषगुन माना जाता हैं. और पता नही क्यों आज जब से मैं उठी हूँ मेरा दिल में अजीब तरह का डर लग रहा हैं.. पता नहीं भैया क्या होने वाला हैं.

कृष्णा- तू बेवज़ह परेशान हो रही हैं. अरे ये सब बेकार की बातें हैं. ऐसा कुछ नहीं होता.

फिर कृष्णा झुक कर पूरे काँच को उठाता हैं और उसे डस्टबिन में डाल देता हैं. राधिका फिर से चाइ बनाती हैं और कुछ देर में कृष्णा भी काम पर निकल जाता हैं.

राधिका फिर सोच में डूब जाती हैं. उस दिन भी तो राहुल के हाथों ऐसे सिंदूर का गिर का बिखर जाना, फिर आज शीशे का ऐसे टूटना हो ना हो ये दोनो चीज़ें का ऐसे एक साथ होना ज़रूर किसी अपषगुन का संकेत हैं....................................

राधिका बहुत देर तक इसी सोच में डूबी रहती हैं लेकिन उसकी घबराहट कम नही होती. फिर कुछ सोचकर वो आज कॉलेज ना जाने का फ़ैसला करती हैं. थोड़े देर में घर का काम ख़तम कर के वो अपने बिस्तेर पर जाकर लेट जाती हैं.

उधेर राहुल भी फ्रेश होकर अपने जीप से पोलीस स्टेशन चल देता हैं.रास्ते में उसके दोस्त विजय का फोन आता हैं.

विजय- कहाँ पर हो यार. आज कल लगता हैं बहुत बिज़ी रहते हो.

राहुल- नही विजय ऐसी कोई बात नही हैं. मैं अभी इस वक़्त पोलीस स्टेशन जा रहा हूँ अभी रास्ते में हूँ और मैं तुझे पहुँच कर थोड़े देर में फोन करता हूँ.

राहुल फोन काट देता हैं. फिर कुछ देर ड्राइव करता हुए वो कुछ दूर जाता हैं तो उसका ध्यान मिरर के बॅकसाइड पर जाता हैं. एक ट्रक उसके पीछे बहुत देर से आ रहा था. वो उसे साइड देता हैं मगर ट्रक की स्पीड तुरंत बढ़ जाती हैं और फिर एक ज़ोरदार टक्कर होती हैं और राहुल की जीप अनबॅलेन्स होकर पलट जाती हैं और ट्रक तेज़ी से वहाँ से निकल जाता हैं.
 
ट्रक की टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि राहुल की जीप का आधा हिस्सा पूरा चकनाचूर हो गया था. और राहुल भी वही पर तुरंत बेहोश हो जाता हैं. उसके हाथ और शरीर के कई हिस्सों में से खून बहने लगता था. उसके सर पर भी चोट आई थी इसके वजह से वो बेहोश हो गया था. वहाँ आस पास काफ़ी भीड़ जमा हो जाती हैं और फिर कुछ देर में राहुल को हॉस्पिटल में अड्मिट करा दिया जाता हैं.

करीब 2 घंटे के बाद उसे होश आता हैं और वो सबसे पहले राधिका का नाम लेता हैं. तभी उसका फ्रेंड अभय जो कि एम.डी हैं वो वहाँ पर आता हैं और उसे रिलॅक्स होने को बोलता हैं.

अभय- अरे भाई ये सब कैसे हो गया. भगवान का शुक्र मनाओ कि तुम्हें ज़्यादा चोट नही लगी वरना जिस तरह से तुम्हारी गाड़ी का आक्सिडेंट हुआ था तुम्हारा बचना शायद मुश्किल था.

राहुल- पता नही अभय. मैं भी तो बस घर से पोलीसेस्टेशन ही आ रहा था मगर मेरे पीछे एक ट्रक बहुत देर से मेरे पीछे था. और मुझे पूरा यकीन है कि ये आक्सिडेंट हुआ नही कराया गया हैं.

अभय- डॉन'ट माइन राहुल . अभी अपने दिमाग़ पर इतना स्ट्रेस मत दो. इस वक़्त तुम्हें आराम की ज़रूरत हैं.

तभी ख़ान भी वहाँ पर आ जाता हैं.

ख़ान- ये सब कैसे हो गया साहेब.

राहुल- पता नहीं ख़ान पर ये आक्सिडेंट कराया गया हैं. कोई मुझे जान से मारना चाहता हैं.

ख़ान- आप कहें तो मैं उस ट्रक का पता लगवाता हूँ. साला बच कर कहाँ जाएगा उसका नंबर प्लेट आपने देखा क्या.

राहुल- कोई फ़ायदा नही हैं ख़ान. मैं जानता हूँ कि वो ट्रक का नंबर भी जाली होगा. खैर पता कर्वाओ कौन हैं इस सब के पीछे...

करीब 10 बजे राधिका का मोबाइल पर एक अननोन नंबर से कॉल आता हैं. राधिका फोन रिसेव करती हैं.

राधिका- हेलो !! कौन बोल रहा हैं.

फोन ख़ान का था.

ख़ान- क्या आप राधिका बोल रहीं हैं.

राधिका- हां बोल रहीं हूँ . आप कौन???

ख़ान- मैं इनस्पेक्टर ख़ान बोल रहा हूँ. आप इस वक़्त कहाँ पर हैं.

राधिका- कहिए ख़ान जी. आपने मुझे कैसे याद किया. क्यों कोई ज़रूरी बात हैं क्या.

ख़ान- क्या आप इस वक़्त सिटी हॉस्पिटल आ सकती हैं ..

राधिका एकदम से घबराते हुए- क्यों क्या हुआ. आप ऐसे क्यो पूछ रहे हैं.

ख़ान- जी बात ये हैं कि राहुल सर....................

राधिका- क्या हुआ?? बोलिए ना ख़ान क्या हुआ मेरे राहुल को................और राधिका के आँखों से आँसू निकल पड़ते हैं.

ख़ान- जी........ उनका आक्सिडेंट हो गया हैं और इस वक़्त वो सिटी हॉस्पिटल में अड्मिट हैं और आपको याद कर रहे हैं.
 
राधिका इतना सुनते ही उसके आँखों के सामने अंधेरा सा छा जाता हैं और वो वो वहीं सोफे पर बैठ जाती हैं. उसे समझ में नही आता कि वो क्या बोले. बस उसके आँखों से लगातार आँसू बहने लगते हैं.

ख़ान- आप ठीक तो हैं ना....प्लीज़ आप जितनी जल्दी हो सके यहाँ पर आ जाइए. साहेब बस आपको याद कर रहे हैं.

राधिका फिर फोन रखती हैं और फिर जैसे रहती हैं उसी अवस्था में वो अपना घर लॉक करके वो हॉस्पिटल के लिए निकल पड़ती हैं. लेकिन उसकी आँखो से आँसू नही थमते. जैसे तैसे वो एक ऑटो में बैठकर वो हॉस्पिटल पहुँच जाती हैं.

हॉस्पिटल में......................

राधिका जैसे ही हॉस्पिटल में एंटर होती हैं सामने उसे ख़ान दिखाई देता हैं.

ख़ान- आओ राधिका मैं आपका ही इंतेज़ार कर रहा था .

राधिका- कैसा हैं मेरा राहुल. ठीक तो हैं ना. आप कुछ बताते क्यों नहीं.

ख़ान कुछ बोलना ठीक नहीं समझता और वो राधिका के साथ राहुल के वॉर्ड की ओर चल देता हैं

जैसे ही राधिका की नज़र राहुल पर पड़ती हैं वो लगभग चीखते हुए राहुल के पास दौड़ कर पहुँच जाती हैं और उसे अपने सीने से लगा लेती हैं.

राहुल- क्या हुआ जान. तुम क्यों इतना परेशान हो. मैं बिल्कुल ठीक हूँ. बस थोड़ी सी चोट आई हैं.

राधिका ज़ोर ज़ोर से राहुल से लिपटकर रोने लगती हैं..

राधिका- ये सब कैसे हो गया राहुल. मुझे पता था कि आज ज़रूर कुछ बहुत बुरा होने वाला हैं. मैं जब से आज सुबह से उठी थी तब से ना जाने क्यों मेरे दिल में बहुत घबराहट हो रही थी. और तो आज सुबह शीशे का टूट जाना क्या ये सब अपषगुन नहीं हैं तो और क्या हैं.

राहुल- रिलॅक्स जान. मैं ठीक हूँ. चिंता मत करो मेरा साथ तुम्हारा प्यार हैं मुझे कुछ नहीं होगा.

अभय- हां राहुल सही कह रहा हैं. जिस तरह से इनके गाड़ी का आक्सिडेंट हुआ हैं इनका बचना शायद मुमकिन नही था. मगर ये शायद कोई चमत्कार ही कह सकते है कि बस एक दो जगह थोड़े ज़्यादा चोट आई हैं. ये बस एक दो दिन में ठीक हो जाएँगे.

ख़ान- मैने अभी विरलेशस मेसेज भेज दिया हैं. आप चिंता ना करे मैं उस ट्रक और उसके ड्राइवर का 2 दिनो के अंदर पता लगा ही लूँगा.

अभय- देखो राहुल आभी तुम्हें आराम की ज़रूरत हैं. इस वक़्त तुम बस आराम ही करो.

राहुल- तुम्हारे रहते मुझे कुछ नही होगा अभय. यू आर दा बेस्ट डॉक्टर. और तुम्हारे पास सभी बीमारी का इलाज़ मौज़ूद हैं. और सबसे बड़ी बात कि तुम मेरे दोस्त भी हो. तो तुम्हारे रहते मुझे किस बात की फिकर हैं.

राहुल- बस करो ना जान. कब तक इन आँखों से आँसू बहाओगी. मैं ठीक हूँ. और राहुल अपने हाथ बढाकर राधिका के बहते आँसू पोंछ देता हैं.

राधिका भी अब कुछ नॉर्मल हो जाती हैं और जाकर अपना मूह धोकर वापस आती हैं.

ख़ान- अपनी तो साली लाइफ ही बेकार हैं. अगर ईमानदारी से नौकरी करो तो कोई ना कोई जान से मारने के पीछे पड़ा रहता हैं. और ना करो तो जनता कहती हैं कि साला करप्ट हैं . साला इधेर पहाड़ और उधर खाई.

राहुल- ख़ान ये ज़िंदगी इतनी आसान नही होती . यहाँ पर हर पल हर घड़ी ,स्ट्रगल हैं. जीने के लिए हर पल फाइट करना पड़ता हैं. अरे यही तो ज़िंदगी का दस्तूर हैं कभी खुशी तो कभी गम..........................................

 
Radhika uth kar bathroom mein jati hain aur kuch deer mein apne kapdey pehen kar wapas aati hain.rahul bhi ab apne kapdey pehan chuka tha.

rahul aab radhika ke peeche jaa kar radhika se ekdum satkar khada ho jata hai. aur apne dono haath dheere se badhate hue uske boobs ko apne dono hathon mein kas kar pakad leta hain aur apne honth radhika ke garden par rakh deta hain.

radhika- ye kya kar rahe ho rahul. aabhi bhi tumhara mann nahi bhara kya???

Rahul-sach mein jaan tum kisi nashe ki tarah ho. jitna kiya jaye utana hi chadta hain. pata nahin kyon tumse mera jee hi nahi bharta. jee karta hain subah shaam bus tumhein aise hi pyaar karu.

radhika- o...Mr. aashiq . mujhe aab ghar bhi jana hain. abhi is waqt, main aapki biwi nahin hoon. jab aapki biwi ban jaungi to aap apna pura haq jatana.

rahul- aacha to bus ek pyara sa lip kiss de do. fir main tumhein ghar chodh dunga.

radhika- dekh rahin hoon rahul tumhari shaitani badti hi jaa rahi hain. aab mujhe deer ho rahi hain.

rahul apna honth dheere se sarkate hue radhika ke kaan ke neechey apni jeebh fira deta hain aur radhika fir se machal jati hain.

radhika- bus rahul........ mat karo na...main fir se behak jaungi....

rahul- to behak jao naa..............

radhika rahul ko apne se door karte hue- bus karo na rahul agar main fir se garam ho gayi to is baar tumhari khair nahin..........

rahul turant door hatate hue- are kyon dara rahi ho jaan. sach mein maine aaj tak tumhara aisa roop kabhi nahin dekha tha.

radhika- chalo kum se kum mere se koi policewala to darta hain......itana kehkar radhika bhi muskura deti hain.

rahul- mat jao na jaan. mujhe tumhare bina ek pal bhi aacha nahin lagta.

radhika- nahi rahul mujhe jaana hoga. main tumhare paas har waqt to nahi reh sakti na. lekin tum to meri saanson mein , meri har dhadkan mein base ho. kya tumse door rehkar mujhe ek pal bhi chain aata hain .main bhi har ek pal tumhare liye bechain rehti hoon.

rahul- apni aankhein band karo na jaan. main tumhein kuch dikhana chahta hoon.

radhika bhi dheere se apni aankhein band kar leti hain.

rahul uthkar wahi drawer mein se ek payal ka jodi nikalta hain aur fir jakar cd player on kar deta hain. cd player mein fir wahi geet bajane lagta hain..........

Chand si mehboba ho meri kab maine aisa socha tha.............

haan tum bilkul waise ho jaise maine socha tha...........

fir wo radhika ke ek dum kareeb jata hain aur bade pyaar se use apni bahon mein le leta hain.

rahul- aankhein kholo na jaan.

radhika dheere se apni aankhein kholti hain.

radhika- bolo na rahul kya dikhane wale ho...........

rahul dheere se apna ek ungali radhika ke lips par rakh deta hain aur chup rehne ka ishara karta hain.

rahul- kuch mat kaho na jaan..........bus ye geet suno .................. ismein main tumhein har pal pal mehsoos kiya hain. radhika bhi us gane mei khone lagti hain aur rahul bhi uski aankhon mein bade pyaar se dekhne lagta hain.

rahul- janti ho jaan ye geet sirf mera favorite gana hi nahi hain balki is gane se meri sari yaadein tumse judi hui hain. maine bus har lamhe mein tumko paya hain , tumko puja hain. ab to lagta hain ki tum meri zindagi se badhkar ho.......ab to meri maut.......rahul isse pehle kuch kehta radhika apna haath uske mooh par rakh deti hain.

radhika- aage kuch mat kehna rahul. agar tumpar zara bhi aanch aaye to uske pehle radhika tumhare kadmon mein bich jayegi magar tum par koi aanch nahi aane degi.

rahul- mera kismat hain radhika ki tum meri zindagi mein ho. sach kehta hoon ki maine pechley janam mein koi aacha karm zaroor kiya hoga. is liye mujhe iska fal ke roop mein tum mili ho.

fir rahul dheere se apna haath badhakar payal ko radhika ke haath mein de deta hain.

radhika- ye kya hain rahul. mujhe ye sab nahin chahiye. mujhe bus tumse pyaar hain na ki in sab cheezon se...........

rahul- main janta hoon ki mere har cheez par tumahara pura haq hain aur jo mera hain wo tumhara bhi to hain. ye to main apne hone wali dulhan ko pyaar ke saugaat ke roop mein de raha hoon. rakh lo na isey mujhe aacha lagega.

radhika bhi bade pyaar se rahul ka lab choom leti hain aur use apne seene se laga leti hain. aur fir na jane kitne deer tak wo dono aise hi ek dusare ki bahon mein khoye rehte hain.

thode deer baad -

radhika-aab jane do na rahul mujhe ab deer ho raha hain. ghar par bhaiya aaye honge to mujhse kai tarah ke sawl karenge. aur tum jante ho ki mujhse jhoot bola nahi jata.

rahul- Kaash radhika ye waqt yahin par tham jaye. is haseen pal mein main apna sab kuch bhoolkar bus tum mein khona chahta hoon.

Radhika- waqt to rahul thehar nahin sakta magar main tumhare saath beete har pal ko, har ek lamhe ko tumhari yaadein ko apne seene mein pyaar se sanjokar rakha hai.

Rahul- I love you jaan................ itana kehkar rahul bade pyaar se radhika ke lab ko chum leta hain aur jawab mein radhika bhi uske lab ko pyaar se chum leti hain.

Radhika- love you too.................rahul.

Rahul-chalo aab main tumhein ghar tak chodh deta hoon aur wahi se apne thane bhi chale jawunga.

rahul fir radhika ko apni car mein baithkar use uske ghar se kuch door par drop kar deta hain aur wo seedhay apne thane chala jata hain.

Jaise hi radhika ghar par pahunchti hain uske bhaiya pehle se hi ghar par aa chukey they.

krishna- kahan thi aab tak radhika. 6 baj chukey hain aur tumhara college to 3 baje tak band ho jata hain . aur waise bhi aaj sunday hain to college to band hi hoga naa..

radhika wo bhaiya... bus aise hi main...nisha ke ghar gayi thi.

krishna- radhika tumne kab se jhoot bolna shuru kar diya. jahan tak main tumhein janta hoon ki tum kabhi jhoot nahin bolti. aur waise bhi main nisha ke paas phone kar ke pooch chuka hoon aur usne mujhe bataya hain ki wo aaj tumse mili hi nahin hain.

krishna- radhika ab main tumse yehi umeed karunga ki tum jo bhi mujhse baat kahogi sach kahogi................................................bolo radhika kya hain sach..........................................

radhika- bhaiya wo main aapko nahi bata sakti.

krishna- radhika mera itana to haq banta hain ki meri behan kahan jati hain, kya karti hain aur kisse milti hain.

radhika-bhaiya wo baat hain .........ki.

krishna- bol na radhika. vishwaas kar mera main tujhe kuch nahi kahunga.

radhika- bhaiya wo............ da-asal main rahul se pyaar karti hoon aur usse shadi karna chahti hoon. is waqt main usse hi milkar aa rahi hoon.

Itana sunkar krishna ko ekdum se gussa aa jata hain lekin wo apna gusse ko pura control karke bolta hain.

Krishna- aacha wo police wala. kahin wahi to nahi hain na ....................rahul malhotra yahan ka sub-inspector.

krishna- kyon tujhe aur koi nahi mila tha kya. dil bhi lagaya to ek policewale se .janti nahin hain tu in police walon ko. bahut harami cheez hote hain ye. bus tere badan se khilwaad karke tujhe chodh denge. koi pyaar vyaar nahi hota bus apni hawas ko mitane ke liye tujhe istemal kar raha hain wo inspector.

radhika- nahin bhaiya rahul aisa nahin hain. wo mujse saccha pyaar karta hain.

fir krishna ki nazar radhika ke pehney hue heere ke anguthi par padhti hain.

Krishna- radhika ki haath ki ore ishara karte hue- aacha to wo tujhse shaddi karna chahta hain isliye usne tujhe apni sagai ke taur par ye anguthi di hain.kyon sach hain naa..........

radhika- please bhaiya mujhe galat mat samajhiye, main bhi usse bahut pyaar karti hoon.

krishna- kab se chal raha hain ye sab.

radhika- yehi koi 6 maheeney se............

krishna- tab to wo tere saath so bhi chuka hoga. hain na................

radhika bhi apna sir neeche jhuka leti hain aur neeche farsh ki ore dekhney lagti hain. krishna ko bhi sab samajh mein aa jata hain.

krishna- ek baat jaan le radhika agar wo policewala tere saath koi khilwaad kiya na to us saale ko main zinda jameen mein dafan kar dunga. aur fir uske baad main tera kya haal karunga tu fir samajh lena.

radhika chah kar bhi ek shabdh nahi bol pati hain aur bus neechey apna sir jhukaye dekhti hain.

krishna bhi uske paas aata hain aur fir uske chehrey ko apne dono hathon se upar ki ore karta hain.

krishna- dekh radhika, main jyada padha likha to nahin hoon magar duniya dari aache se janta hoon. main tujhse bahut pyar karta hoon aur main kabhi nahin chahunga ki tujhe koi takleef ho. bus main yehi kahunga ki jawani ke josh mein koi aisa galat kadam naa utha lena ki aage chalkar koi tere par ungali uthaye.

radhika bhi jhat se apne bhaiya ke seenay lag jati hain - bhaiya mujhe maaf kar do ye baat maine aap se itney dino se chupakar rakhi. maine kai baar aapse is baare mein baat karne ki koshish ki magar aap se mujhe kehne ki himmat nahi hui.

krishna- koi baat nahin radhika. main janta hoon ki tu koi kaam galat kar hi nahin sakti. chal ab jhat se mujhe ek garma garam chai pila.

thode deer mein uska baap bhi aa jata hain aur fir sab milkar chai peetay hain. radhika fir ghar ka sara kaam khatam kar leti hain aur raat mein bister par jakar sone chali jati hain. aaj uske mann bahut halka ho gaya tha. use is baat ki khushi thi ki uske bhaiya bhi aab rahul ko accept kar liye hain.

........................................

kehte hain naa ki khushiyon ko grahan lagte deer nahin lagti. aisa hi kuch aaj ke baad radhika ke saath bhi hone wala tha, jo aab uski jindagi mein toofan lane ke liye kafi tha.

........................................
 
dusare din subah wo uthkar jaldi se fresh hoti hain aur fir kitchen mein jakar chai banane lagti hain. subah subah hi uske pitaji ghar se nikal gaye they. is waqt bus krishna aur radhika hi ghar par they.

krishna bhi jhut se uthkar apne haath mooh dhota hain aur fresh hokar seedha radhika ke paas jakar uske kamar mein apana dono haath dalkar radhika ke garden ko chum leta hain.

radhika- ye kya bhaiya, aap aise aate hain ki bilkul pata bhi nahin chalta. main to samjhi thi ki aap mujhse naraz honge ..

krishna- main bhala apni hi behan se kaise naraz ho sakta hoon.

radhika- lekin aapne mujhse kaha tha ki main teri marzi se hi chuwunga. fir................

krishna- tu hain hi aisi jab tak tujhe aise apni bahon mein nahi le leta hoon mujhe chain hi nahin milta.

radhika- chailye bhaiya mai aabhi chai lekar aati hoon.

fir krishna wahi dusare room mein chala jaa hain aur kuch der mein radhika bhi do seeshe ke glass mein chai dalkar ek tray mein lekar apne bhaiya ke paas jati hain.

kehte hain ki agar kuch bura hone wala hota hain to insaan ko uska aabhaas pehle se hi ho jata hain. aaj subah se hi radhika ka dil bahut bechain tha. pata nahin kyon par uske dil mein ek ajeeb sa dur janam le raha tha.....

radhika jaise hi tray lekar jati hain uska pawn fisal jata hain aur wo girte girte bachti hai magar uske haath se tray choot kar farsh par gir jata hain aur seeshay ke dono glass took kar farsh par bikher jate hain...

krishna bhi seesha ke tootney ki awaz sunkar daudkar radhika ke ek dum kareeb aata hain.

krishna- kya hua radhika. ye tray kaise choot kar neeche gir gaya.

radhika ke aankh se aansoon nikal padtey hain aur wo daud kar krishna ke gale lag jati hain.

krishna bhi use apni bahon mein le lata hain.

krishna- bol na radhika tu aise kyon ro rahi hai. kya hua kahin chot to nahin lagi na...

radhika ka daya haath ki ek ungali seesha ka ek tukda lag gaya tha jiske wajah se uske ungli se khoon nikal raha tha. krishna ki nazar uspar padti hain aur wo jhat se radhika ke ungali ko apni mooh mein lekar chusana shuru kar deta hain. kuch deer mein uska khoon band ho jata hain. magar radhika ke aansoon nahin band hotey.

krishna- tu ro.. kyon rahi hain. dekh na ab to khoon bhi band ho gaya hain.

radhika- bhaiya ye sab kuch theek nahi ho raha hain. sheeshay ka aise tootna apshagun mana jata hain. aur pata nahi kyon aaj jab se main uthi hoon mera dil mein ajeeb tarah ka durr lag raha hain.. pata nahin bhaiya kya hone wala hain.

krishna- tu bewazah pareshan ho rahi hain. are ye sab bekar ki baatein hain. aisa kuch nahin hota.

fir krishna jhuk kar pure kaanch ko uthata hain aur use dustbin mein dal deta hain. radhika fir se chai banati hain aur kuch deer mein krishna bhi kaam par nikal jata hain.

radhika fir soch mein doob jati hain. us din bhi to rahul ke haathon aise sindoor ka gir ka bikhar jana, fir aaj sheeshay ka aise tootna ho na ho ye dono cheezein ka aise ek saath hona zaroor kisi apshagun ka sanket hain....................................

Radhika bahut der tak isi soch mein doobi rehti hain lekin uski ghabarahat kum nahi hoti. fir kuch sochkar wo aaj college na jane ka faisala karti hain. thode der mein ghar ka kaam khatam kar ke wo apne bister par jakar let jati hain.

udher rahul bhi fresh hokar apne jeep se police station chal deta hain.raste mein uske dost vijay ka phone aata hain.

vijay- kahan par ho yaar. aaj kal lagta hain bahut busy rehte ho.

rahul- nahi vijay aisi koi baat nahi hain. main abhi is waqt police station jaa raha hoon abhi raste mein hoon aur main tujhe pahunch kar thode der mein phone karta hoon.

rahul phone kat deta hain. fir kuch deer drive karta hue wo kuch door jata hain to uska dhyaan mirror ke backside par jata hain. ek truck uske peeche bahut deer se aa raha tha. wo use side deta hain magar truck ki speed turant badh jati hain aur fir ek zordaar takkar hoti hain aur rahul ki jeep unbalance hokar palat jati hain aur truck tezi se wahan se nikal jata hain.

truck ki tukkar itni zordaar thi ki rahul ki jeep ka aadha hissa pura chaknachoor ho gaya tha. aur rahul bhi wahi par turant behosh ho jata hain. uske haath aur shareer ke kai hisson mein se khoon behne lagta tha. uske sar par bhi chot aayi thi iske wajah se wo behosh ho gaya tha. wahan aas paas kafi bheed jama ho jati hain aur fir kuch der mein rahul ko hospital mein admit kara diya jata hain.

kareeb 2 ghante ke baad use hosh aata hain aur wo sabse pehle radhika ka naam leta hain. tabhi uska friend Abhay jo ki M.D hain wo wahan par aata hain aur use relax hone ko bolta hain.

abhay- are bhai ye sab kaise ho gaya. bhagwaan ka shukra manao ki tumhein jyada chot nahi lagi warna jis tarah se tumhari gadi ka accident hua tha tumhara bachana shayad mushkil tha.

rahul- pata nahi abhay. main bhi to bus ghar se policestation hi aa raha tha magar mere peeche ek truck bahut deer se mera peechey tha. aur mujhe pura yakeen hai ki ye accident hua nahi karaya gaya hain.

abhay- don't mine rahul . abhi apne dimag par itna stress mat do. is waqt tumhein aaram ki zaroorat hain.

tabhi khan bhi wahan par aa jata hain.

khan- ye sab kaise ho gaya saheb.

rahul- pata nahin khan par ye accident karaya gaya hain. koi mujhe jaan se marna chahta hain.

khan- aap kahen to main us truck ka pata lagwata hoon. sala bach kar kahan jayega uska number plate aapne dekha kya.

Rahul- koi fayada nahi hain khan. main janta hoon ki wo truck ka number bhi jali hoga. khair pata karwao kaun hain ye sab ke peechay...

kareeb 10 baje radhika ka mobile par ek unknown number se call aata hain. radhika phone recieve karti hain.

radhika- hello !! kaun bol raha hain.

phone khan ka tha.

khan- kya aap radhika bol rahin hain.

radhika- haan bol rahin hoon . aap kaun???

khan- main inspector khan bol raha hoon. aap is waqt kahan par hain.

radhika- kahiye khan ji. aapne mujhe kaise yaad kiya. kyon koi jaruri baat hain kya.

khan- kya aap is waqt city hospital aa sakti hain ..

radhika ekdum se ghabrate hue- kyon kya hua. aap aise kyo puch rahe hain.

khan- ji baat ye hain ki rahul sir....................

radhika- kya hua?? boliye na khan kya hua mere rahul ko................aur radhika ke aankhon se aansoon nikal padtey hain.

khan- ji........ unka accident ho gaya hain aur is waqt wo city hospital mein admit hain aur aapko yaad kar rahe hain.

radhika itna sunte hi uske aankhon ke samne andhera sa chaa jata hain aur wo wo wahin sofe par baith jati hain. use samajh mein nahi aata ki wo kya bole. bus uske aankhon se lagataar aansoon behney lagte hain.

khan- aap theek to hain naa....please aap jitni jaldi ho sake yahan par aa jaiye. saheb bus aapko yaad kar rahe hain.

radhika phir phone rakhti hain aur fir jaise rehti hain usi awatha mein wo apna ghar lock karke wo hospital ke liye nikal padti hain. lekin uski aankon se aansoon nahi thamte. jaise taise wo ek auto mein baithkar wo hospital pahunch jati hain.

hospital mein......................

radhika jaise hi hospital mein enter hoti hain samney use khan dikhai deta hain.

khan- aawo radhika main aapka hi intezaar kar raha tha .

radhika- kaisa hain mera rahul. theek to hain naa. aap kuch batate kyon nahin.

khan kuch bolna theek nahin samajhta aur wo radhika ke saath rahul ke ward ki ore chal deta hain

jaise hi radhika ki nazar rahul par padti hain wo lagbhag cheektay hue rahul ke paas daud kar pahunch jati hain aur use apne sene se laga leti hain.

rahul- kya hua jaan. tum kyon itana pareshan ho. main bilkul theek hoon. bus thoda si chot aayi hain.

radhika zor zor se rahul se lipatkar rone lagti hain..

radhika- ye sab kaise ho gaya rahul. mujhe pata tha ki aaj zaroor kuch bahut bura hone wala hain. main jab se aaj subah se uthi thi tab se na jane kyon mere dil mein bahut ghabarahat ho rahi thi. aur to aaj subah sheeshey ka toot jana kya ye sab apshagun nahin hain to aur kya hain.

rahul- relax jaan. main theek hoon. chinta mat karo mera saath tumhara pyaar hain mujhe kuch nahin hoga.

abhay- haan rahul sahi keh raha hain. jis tarah se inke gadi ka accident hua hain inka bachana shayad mumkin nahi tha. magar ye shayad koi chamatkaar hi keh sakte hai ki bus ek do jagah thode jyada chot aayi hain. ye bus ek do din mein theek ho jayenge.

khan- maine abhi wirless message bhej diya hain. aap chinta naa kare main us truck aur uske driver ka 2 dino ke aander pata laga hi loonga.

abhay- dekho rahul aabhi tumhein aaram ki zaroorat hain. is waqt tum bus aaram hi karo.

rahul- tumhare rehte mujhe kuch nahi hoga abhay. you are the best doctor. aur tumhare paas sabhi bimari ka ilaz mauzood hain. aur sabse badi bat ki tum mere dost bhi ho. to tumhare rehte mujhe kis baat ki fikar hain.

rahul- bus karo na jaan. kab tak in aankhon se aansoon bahogi. main theek hoon. aur rahul apne haath badhakar radhika ke behtey aansoon ponch deta hain.

radhika bhi ab kuch normal ho jati hain aur jakar apna mooh dhokar wapas aati hain.

khan- apni to sali life hi bekar hain. agar imandari se naukari karo to koi na koi jaan se marne ke peeche pada rehta hain. aur na karo to janta kehti hain ki sala corrupt hain . sala idher pahad aur udher khai.

rahul- khan ye zindagi itani aasan nahi hoti . yahan par har pal har ghari ,struggle hain. jeene ke liye har pal fight karna padta hain. are yehi to zindagi ka dastoor hain kabhi khushi to kabhi gum..........................................

 
वक़्त के हाथों मजबूर--18

ख़ान- आपने ठीक कहा सर!!! लाइफ ईज़ आ स्ट्रगल. यहाँ पर हर पल जीने के लिए संघर्ष करना पड़ता हैं.

राधिका भी चुप चाप उनकी बातें सुन रही थी. अब वो पहले से बेहतर महोसूस कर रही थी.

ख़ान- एक बात बोलू साहेब. ये आप पर पाँचवा हमला हुआ हैं. मुझे तो लगता हैं कि कोई आपसे दुश्मनी निकाल रहा हैं. और जो भी हो वो बहुत शातिर हैं क्यों कि वो आपकी पल पल की खबर रखता हैं. मुझे तो लगता हैं कि इन सब के पीछे कोई बहुत आपका करीबी आदमी हैं.

ख़ान की बातें सुनकर राधिका भी चौंक जाती हैं और राहुल भी गहरे विचार में डूब जाता हैं.

ख़ान- क्या सोच रहे हैं सर. आपको किसी पर शक हैं क्या???

राहुल एक नज़र राधिका के तरफ देखता हैं फिर वो ना में इशारा करता हैं. राधिका को इस बार राहुल पर बहुत ज़्यादा गुस्सा आता हैं मगर अभी ऐसे हालत नहीं थे कि वो इस बारे में कुछ बहस करे. इसलिए वो चुप ही रहती हैं.

अभय- यार हम भी कैसे इंसान हैं. तेरी लवर तुझसे मिलने आई हैं और हम बीच में काँटा बने बैठे हैं. और फिर ख़ान और अभय रूम से बाहर निकल जाते हैं. राहुल भी मुस्कुरा देता हैं.

राहुल राधिका को अपने करीब आने को कहता हैं और जैसे ही राधिका उसके करीब बिस्तर पर बैठती हैं वो उसे अपनी बाहों में जाकड़ लेता हैं.

राधिका- ये क्या कर रहे हो राहुल. छोड़ो मुझे. तुम तो अब हॉस्पिटल में भी शुरू हो गये. शरम नही आती इतनी चोट लगी हैं और आपको रोमॅन्स सूझ रहा हैं.

राहुल- अरे जान इस दर्द का ही तो इलाज़ कर रहा हूँ. बस एक बार प्यार से अपने लब चूम लेने दो देखना मेरा आधा दर्द दूर हो जाएगा.

राधिका- अच्छा तो बचा हुआ आधा दर्द के लिए क्या करना पड़ेगा.

राहुल- वही जो कल हमने किया था. अगर बोलो तो मैं यहाँ पर भी वो सब करने को तैयार हूँ.

राधिका- बहुत बिगड़ गये हो. सुधेर जाओ नहीं तो....................

राहुल बोलो ना नही तो क्या यहीं पर अपने कपड़े निकाल दोगि क्या....और राहुल मुस्कुरा देता हैं.

राधिका- बेशरम कहीं के... जाओ मुझे तुमसे अब कोई बात नहीं करनी.

राहुल- दे दो ना जान एक किस ही तो माँग रहा हूँ. देखना मैं दो दिन में फिर से पहले जैसे हो जाऊँगा.

राधिका धीरे से अपना लब राहुल के लब पर रख देती हैं और उसे बड़े प्यार से चूम लेती हैं.

राहुल- बस इतना छोटा सा........... ये तो ना-इंसाफी हैं.

राधिकल- पहले ठीक हो जाओ फिर जैसे कहोगी वैसे दूँगी.

राधिका- एक बात बताओ राहुल तुमने ख़ान जी से झूट क्यों बोला. क्यों तुम्हें नहीं लगता कि इन सब के पीछे विजय का हाथ होगा.

राहुल- नही राधिका मैं उसपर शक नही कर सकता. और मेरे पास फिलहाल कोई सुबूत भी नही है. और एक बात बता दूँ कि मेरा ज़मीर भी मुझे कभी इसकी इज़ाज़त नही देगा कि मैं अपने ही दोस्त की एंक्वाइरी करवाउ. बहुत एहसान हैं उसके घरवालों और विजय का मुझपर. और मैं उनके खिलाफ कभी नही जा सकता.

राधिका- ठीक हैं राहुल मैं तुम्हारे दोस्ती के बीच में कभी नही ऑजी मगर दोस्त पर भी इतना विश्वास नही करनी चाहिए की कल को तुम्हें पछताना पड़े. और एक बात मैं कहना चाहूँगी की विजय की नियत मुझे ठीक नही लगती. और मेरा दिल कहता हैं कि उसकी नज़र मुझपर भी है. कहीं राहुल ऐसे ना हो जाए की जब तक तुम ये बात समझो तब तक बहुत देर हो जाए.............. इतना कहकर राधिका के मन में उस दिन वाले बात घूमने लगती हैं.
 


राहुल- छोड़ो ना जान तुम भी क्या लेकर बैठ गयी.

इतनी देर में ख़ान और अभय भी अंदर आ जाते हैं.

ख़ान- सर अब मुझे चलना चाहिए.

राहुल- ठीक हैं ख़ान आप एक काम कीजिए ज़रा राधिका को भी उसके घर पर ड्रॉप कर दीजिएगा.

ख़ान- आइए भाभी जी चलिए मैं आपको घर छोड़ देता हूँ.

राधिका भी ख़ान के मूह से भाभी जी सुनकर मुस्कुरा देती है और वो ख़ान के पीछे चल देती हैं.

राधिका के जाने के बाद वो फिर से उसकी कही हुई बातों उसके दिमाग़ में आने लगती हैं. तो क्या राधिका का शक सही है ,क्या इन सब के पीछे विजय का हाथ हैं. उस दिन भी तो विजय का मुझपर हमला होने के पहले फोन आया था. और आज भी ऐसा ही हुआ. लेकिन विजय तो रोज़ मुझसे ऐसी ही बात करता हैं. ऐसा कोई दिन नहीं गया जब उसका फोन ना आया हो. नही नही मैं अपने दोस्त पर शक नही कर सकता.

तभी एक बात उसके दिमाग़ में आती हैं. हां अगर विजय आज मुझसे मिलने यहाँ आता हैं तो वो ये सब में शामिल नही हो सकता.अगर वो यहाँ पर नहीं आया तो मैं कल से ख़ान को बोलकर उसकी एंक्वाइरी शुरू करवा दूँगा. क्यों कि मैं अच्छे से जानता हूँ कि कोई भी मुजरिम गुनाह करने के बाद वहाँ पर मौजूद नही होता.. इससे ये बात भी क्लियर हो जाएगा और मेरा शक भी दूर हो जाएगा.

ऐसे ही बहुत डियर तक उधेरबुन में राहुल की आँख लग जाती हैं. और वो सो जाता हैं.

करीब शाम को 4 बजे विजय भी वहाँ पर आ जाता हैं. और राहुल के पास जाकर बैठ जाता हैं. विजय को देखकर राहुल का बचा खुचा शक भी दूर हो जाता हैं.

विजय जैसे ही उसके पास बैठता हैं वो राहुल को अपने गले लगा लेता हैं.

विजय- ये सब क्या हो गया मेरे दोस्त. अच्छा ख़ासा तो तू ठीक था फिर ये सब.....................

राहुल- पता नहीं यार कौन मेरे पीछे पड़ा हुआ हैं. समझ में नही आ रहा कि आख़िर मेरे से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती हैं.

विजय- रिलॅक्स यार. ये सब तू टेन्षन मत ले. और वैसे भी तो तू पोलीस वाला हैं ना तू तो उसे पता कर ही लेगा.

राहुल- आख़िर जो भी हो वो मुझसे कब तक बचेगा.

विजय- ठीक हैं दोस्त तू आराम कर और अपना ध्यान रखना. अगर कोई भी चीज़ की परेशानी हुई तो तेरा ये दोस्त हैं ना. जब चाहे तू मुझे याद कर लेना. मैं हाजिर हो जाउन्गा.

राहुल- अरे यार तू इतना ही मेरे पास आ गया तो मेरे दिल से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया. चल मैं ठीक हूँ तुझे तो अपने क्लिनिक भी तो जाना हैं ना.

विजय- हां अब मैं चलता हूँ तू अपना ख्याल रखना. और विजय वहाँ से निकल जाता हैं.

विजय के चेहरे पर फिर से एक बार कुटिल मुस्कान तैर जाती हैं और मन ही मन सोचता हैं. साला इस बार भी बच गया. सला मेरी तो किस्मत ही खराब हैं. जब से इस कुत्ते के पीछे पड़ा हूँ इसकी किस्मेत भी अब बुलंद हो गयी हैं. कब तक आख़िर मुझसे बचेगा... आख़िर कब तक बकरा अपनी खैर मनाएगा. कभी ना कभी तो किसी कसाई के हाथों हलाल होगा ही..................................

राधिका जैसे ही घर पहुचती है उसके भैया घर पर आ चुके थे. आज वो पूरे नशे में थे. और राधिका के आने का ही इंतेज़ार कर रहे थे.

कृष्णा- आ गयी तू. इतनी देर कहाँ लगा दी. मैं कब से तेरा ही इंतेज़ार कर रहा था.

राधिका- भैया आज भी आपने शराब पी रखी हैं. और आज आप इतनी जल्दी काम से कैसे आ गये.

कृष्णा- वो बस ऐसे ही तू बता कहाँ रह गयी थी. क्या आज भी तू उस पोलिसेवाले से मिलकर आ रही हैं.

राधिका- भैया आज.....राहुल का आक्सिडेंट हो गया हैं. मैं बस हॉस्पिटल से ही आ रही हूँ.

कृष्णा- क्यों.....क्या हुआ उसे.

राधिका-वो किसी ट्रक वाले ने पीछे से ठोकर मार दी. थोड़ी ज़्यादा चोटें आईं हैं पर अब ख़तरे से बाहर हैं.

कृष्णा- अच्छा फिर ठीक हैं मैं कल काम पर जाउन्गा तो उससे मिलते हुए जाउन्गा.

राधिका भी बड़े प्यार से कृष्णा के गले लग जाती हैं.

राधिका- यकीन नहीं होता भैया की आप मेरे लिए इतनी भी बदल सकते हैं. सच में मैं बहुत खुस हूँ.

मगर शायद राधिका की खुशी ज़्यादा देर तक नही रहने वाली थी क्यों कि अब उसकी खुशी को जल्दी ही ग्रहण लगने वाला था.

कृष्णा- चल बहुत बातें करती हैं , मेरे लिए फटाफट चाइ बना कर ला, मैं थोड़ा हाथ मूह धो कर आता हूँ.

तभी उसके घर का बेल बजती हैं.कृष्णा जाकर मेन डोर खोलता हैं. सामने बिहारी था और साथ में उसके तीन आदमी भी थे.

बिहारी को देखकर कृष्णा के चेहरे का रंग बदल जाता हैं और वो एक साइड होकर खड़ा हो जाता हैं. बिहारी तो पहले उसे बड़े गौर से देखता हैं फिर वो घर के अंदर आ जाता हैं. वही सामने भी राधिका खड़ी थी.

कृष्णा- क्यों बिहारी जी कैसे आना हुआ मेरे घर पर कोई काम हैं क्या???

बिहारी- ज़ोर का एक लात कृष्णा के पट पर मारता हैं और कृष्णा वही पर दर्द से बैठ जाता हैं. हरामी कहीं का जब तक मेरे ख़ाता था तब तक मालिक बोलता था और आज नाम लेकर बुला रहा हैं. तू तो साला नमक हराम निकला रे. मैने तो तुझे अपने बच्चे की तरह चाहा था. तू तो आस्तीन का साँप हैं ...........

कृष्णा कुछ बोलता नहीं हैं बस वही पर चुप चाप बैठा रहता हैं. मगर राधिका को ये सब बर्दास्त नहीं होता और वो जाकर बिहारी के गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मार देती हैं. थप्पड़ इतना ज़ोरदार था की बिहारी का सिर घूम जाता हैं.

राधिका- लगता हैं कि आप तमीज़ बिल्कुल भूल गये हैं. किसी के घर जाते हैं तो किसी से किश तरह पेश आया जाता हैं लगता हैं आपको नहीं मालूम. बेहतर यही होगा कि आप इस वक़्त यहाँ से चले जाइए.

बिहारी- तेरी हिम्मत कैसी हुई मुझपर हाथ उठाने की. लगता हैं कि तू मुझे अच्छे से नहीं जानती.

राधिका- तुझ जैसे लोग को जाने की भी ज़रूरत नही हैं. बेहतर यही हैं कि आप यहाँ से अभी इसी वक़्त चले जाओ.

बिहारी- तुझसे तो मैं बाद में बात करता हूँ पहले तेरे भाई से कुछ बात करनी हैं.
 


बिहारी फिर कृष्णा की तरफ अपना मूह करके बोलता हैं.

बिहारी- क्यों रे कुत्ता. आज कल तू मेरे चौखट पर अपने पाँव नही रखता .. बात क्या हैं. कहीं अपनी बेहन से तो तुझे इश्क़ नही हो गया ना...... वैसे भी तेरी बेहन तो पूरी पाताका हैं.

कृष्णा- बिहारी ज़ुबान संभाल कर बात कर. मैं अभी तक चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं है कि मैं तुझसे डरता हूँ. मैं तो बस अब कोई भी बात आगे नहीं बढ़ाना चाहता. अच्छा होगा की अब तू मुझे भूल जा और कोई नया आदमी मेरी जगह पर रख ले.

बिहारी एक बार फिर कृष्णा को घूर कर देखता हैं.....

बिहारी- अपने साथी की ओर इशारा करते हुए- देखो कल तक ये मेरे आगे पीछे दुम हिलाता था और आज मुझसे ये कैसी बातें कर रहा हैं. मुझे समझ में नही आ रहा हैं कि तुझसे हो क्या गया हैं. तेरी बेहन ने तुझपर कौन सा जादू कर डाला हैं जो तू अपने बचपन के मालिक को ही भूल जाने की बात कर रहा हैं.

कृष्णा- बिहारी जी आप प्लीज़ यहाँ से चले जाइए. मैं इस बारे में अब कोई भी बात नहीं करना चाहता.

बिहारी- चले जाउन्गा. इतनी जल्दी भी क्या हैं. ज़रा मैं भी तो देखू कि तेरी बेहन में कितनी गर्मी हैं.

कृष्णा- नहीं बिहारी. जो बात करनी हैं मुझसे कर. मेरी बेहन को तू क्यों बीच में ला रहा हैं. उसका हम दोनो से कोई लेना देना नहीं हैं. और कृष्णा राधिका को अंदर जाने का इशारा करता हैं.

बिहारी के तीनों आदमी झट से आगे बढ़ते हैं और कृष्णा के दोनो हाथ पकड़कर दो तीन घूसा उसके मूह और पेट पर जड़ देते हैं. पंच इतना ज़ोरदार था कि कृष्णा का होंठ फट जाता हैं और उसके मुँह से खून निकलने लगता हैं. ये सब नज़ारा देखकर अब राधिका को बर्दास्त नही होता और वो दौड़कर कृष्णा के पास जाकर उससे लिपट जाती हैं और बिहारी के आदमी भी कृष्णा पेर हाथ उठाना अब बंद कर देते हैं.

राधिका- प्लीज़ मेरे भैया को मत मरो. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ. प्लीज़ रुक जाइए आप सब.........

राधिका को ऐसे कृष्णा से लिपटा देखकर बिहारी के चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ जाती हैं.

बिहारी- वाह!!! वाह!!! क्या नज़ारा हैं. भाई बेहन का ऐसा प्यार तो मैने आज तक नही देखा. देखो मार ये खा रहा है और दर्द इसे हो रहा है.

 
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