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वतन तेरे हम लाडले complete

राज ने उसे बताया कि मुझे मिलना नहीं है राफिया से, बस आप बस मेरी इतनी मदद कर दें कि मुझे उसकी गाड़ी दिखा दें। मुझे कर्नल साहब ने भेजा है मिस राफिया की सुरक्षा हेतु। गुप्त सूचना के अनुसार पड़ोसी देश के कुछ ख़ुफ़िया एजेंसी के लोग मिस राफिया का अपहरण करना चाहते हैं ताकि कर्नल इरफ़ान से अपनी बातें मनवा सकें। यह सुनकर रिसेप्शन पर मौजूद महिला के चेहरे पर डर के आसार देखे जा सकते थे, वह मेजर को फ़ौरन ही पार्किंग एरिया में ले गई और वहां मौजूद व्यक्ति से राफिया की कार के बारे में पूछ कर मेजर को कार दिखा दी। मेजर ने उस महिला को धन्यवाद दिया और कार का नंबर मॉडल और कलर मन मे याद करता हुआ वापस अपनी कार में चला गया जहां समीरा उसका इंतजार कर रही थी। जाने से पहले मेजर राज ने महिला को एक बार फिर अपना नाम बताया और बोला ये टॉप सीक्रेट बात है, मिस राफिया को भी इसके बारे में पता नहीं चलना चाहिए नहीं तो वह परेशान हो जाएंगी।

कार में बैठने के बाद राज ने समीरा को भी राफिया की कार के बारे में जानकारी दी और साथ ही मौजूद एक दुकान के पास अपनी कार लगाकर खड़ा हो गया। करीब 2 बजे मेजर ने देखा कि दूर विश्वविद्यालय बिल्डिंग से कुछ लोग निकल रहे हैं और पार्किंग क्षेत्र की ओर जा रहे हैं। फिर पार्किंग से वाहन निकलना शुरू हुए तो कुछ ही देर बाद समीरा ने एक कार का बताया कि गेट से बाहर निकलने ही वाली थी। मेजर राज गाड़ी देखते ही पहचान गया था यह राफिया की ही गाड़ी थी। बीएमडब्ल्यू बी 4 कार भी काले रंग की ही थी। ड्राइविंग सीट पर एक सुंदर लड़की बैठी थी और उसके साथ फ़्रीनट सेट पर एक लड़का बैठा था। ड्राइविंग सीट पर मौजूद लड़की वास्तव में राफिया ही थी मेजर राज ने गाड़ी चलाई और धीमी गति के साथ इस कार के पीछे जाने लगा। एक घंटे तक लगातार इस कार का पीछा करने के बाद मेजर राज लाहोर के आर्मी रीज़ीडीनशियल क्षेत्र में मौजूद था। यहाँ राफिया की कार बड़े बंगला नुमा घर में चली गई, जबकि राज की गाड़ी उस घर के सामने से होती हुई इस क्षेत्र से बाहर आ गई और अब फिर से जिन्ना नगर जा रही थी। मेजर राज कर्नल इरफ़ान का निवास देख चुका था जो उसके लिए एक बड़ी सफलता थी।

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अमजद के मन में जैसे ही यह विचार आया उसने तुरंत सरमद और काशफ को नींद से जगाया और उनसे मेजर राज और समीरा के बारे में पूछा, जब उन्होने भी कोई जानकारी होने से इनकार किया तो अमजद की परेशानी और बढ़ गई, अमजद को यूँ परेशान देखकर सरमद ने पूछा क्या हुआ? सब कुशल तो है न ?? अमजद ने उसे बताया कि अब तक वे दोनों नहीं पहुंचे न समीरा ने संपर्क करने की कोशिश की है। मुझे चिंता है कि वे दोनों कर्नल इरफ़ान के हाथ लग गए हैं। अमजद की बात सुनकर सरमद ने तुरंत काशफ को देखा और बोला मैंने तुम्हें कहा था कि पिछली बस में वे दोनों हैं और इसी चेक पोस्ट पर वे दोनों पकड़े गए होंगे।

सरमद की बात सुनकर अमजद को विश्वास हो गया कि मेजर राज और समीरा पकड़े गए हैं। उसने तुरंत सरमद और काशफ को अपना सामान बांधने का कहा ऊपर जाकर आज़ाद कश्मीर के कश्मीरी परिवार को भी खतरे से आगाह कर दिया। यूं तो वह परिवार आम नागरिक के रूप में ही रह रहे थे और उनका अमजद की गतिविधियों से बिल्कुल कोई संबंध नहीं था मगर कश्मीरी होने के नाते उन्हें अमजद की सहानुभूति ज़रूर थी और वे जानते थे कि अमजद कैसे पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हुए है।

अमजद ने उन्हें खतरे से अवगत कराया तो उन्होंने भी अपना जरूरी सामान साथ ले लिया और चलने के लिए तैयार हो गए। नीचे अमजद और उसके साथी भी जाने के लिए तैयार थे कि कमरे में मौजूद टेलीफोन की घंटी बजी। 2 बार घंटी बजने के बाद फोन बंद हो गया। अमजद थोड़ी देर के लिए रुका और फिर से फोन आने का इंतजार करने लगा। 2 बार फोन की घंटी बजी और फिर से बंद हो गई अब अमजद के चेहरे पर खुशी के आसार आए और तीसरी बार फिर फोन आया और इस बार तीसरी घंटी भी बजी अमजद खुशी से चिल्लाया .....ये समीरा का फोन है और तुरंत आगे बढ़कर फोन अटेंड कर लिया।

यह वास्तव में उनका कोड वर्ड था अनजान नंबर से आने वाला फोन अमजद रिसीव नहीं करता था। इसलिए समीरा को जब भी अमजद को अनजान नंबर से फोन करना होता तो वो दो बार फोन कर 2 बैल होने पर फोन बंद कर देती थी और तीसरी बार फोन करती तो अमजद समझ जाता था कि यह समीरा का फोन है। अमजद ने जैसे ही फोन रिसीव किया और हाय कहा तो आगे से समीरा की आवाज सुनाई दी। समीरा ने अमजद को सलाम किया और पूछा कैसे हैं आप भाई जान ??? अमजद ने समीरा को जवाब देने की बजाय कहा तुम कहाँ हो और अब तक पहुंचे क्यों नहीं हम कब से तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं ....

अमजद की बात समाप्त हुई तो समीरा बोली में इस समय तो किचन में हूँ और आपके मेजर साहब के लिए नाश्ता बना रही हूँ। और आप हमारा इंतजार न करें हम नहीं आएंगे। समीरा की बात सुनकर अमजद थोड़ा हैरान हुआ और बोला- क्या मतलब तुम लोग नहीं आओगे और अब तुम हो कहाँ ??? समीरा ने कहा कि मुझे नहीं मालूम बस हम खैरियत से हैं। बाकी तो उचित समय देखकर आपको में बताउन्गी कि हम कहां हैं।

यह कह कर समीरा ने फोन बंद कर दिया और अमजद ने शांति की सांस ली। अमजद ने सरमद और काशफ भी बताया कि वह दोनो ठीक हैं मगर कहां हैं यह समीरा ने नहीं बताया। इतने में ऊपर रहने वाला कश्मीरी परिवार अपना सामान समेट कर नीचे आ चुका था मगर अमजद ने उन्हें बताया और कहा कि सब ठीक है समीरा की कॉल आ गई है वह कुशल से है। मेरा शक गलत था आप लोग जाओ और आराम से रहें। उन्होंने भी सुख का सांस लिया और वापस अपने पोर्शन में चले गए। थोड़ी देर बाद फिर से उसी नंबर से फोन आया कि अमजद ने पहली बैल में ही रिसीव कर लिया। अब की बार आगे राज की आवाज आई। अमजद ने पूछा कहां हो यार हम कब से तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। राज ने कहा भैया मैं तो हनीमून मनाने लाहोर आ गया हूँ। यहाँ मस्ती कर रहा हूँ। और अब अपनी पत्नी के साथ शहर की सैर कर रहा हूँ। आप चिंता न करें बस हमने सोचा कि मायके वापस आने से पहले क्यों न लाहोर की सैर ही कर लें। इसलिए आपके यहाँ आने की बजाय हम सीधे लाहोर आ गए हैं। कुछ दिनों मे हमारी वापसी हो जाएगी। आप चिंता न करें समीरा मेरे साथ है और खुश है अपने नए जीवन से। यह कह कर राज ने फोन बंद कर दिया। और अमजद ठहाके मार मार कर हंसने लगा।

सरमद और काशफ उसकी शक्ल देख रहे थे। अमजद ने दोनों कोअपनी ओर सवालिया नज़रों से देखते हुए पाया तो बोला यार ये राज बहुत पहुंची हुई चीज़ है उसका दिमाग बहुत तेज चलता है। और उसको यह भी पता है फोन पर बात कैसे करनी है, दोनों लाहोर में हैं अब और हनीमून मना रहे हैं। हनीमून का सुनकर सरमद और काशफ की आँखें खुली की खुली रह गईं। अमजद ने दोनों के आश्चर्य को कम करने के लिए कहा कि यार वह कोड वर्ड में बात कर रहा था नहीं, अगर कोई हमारा नंबर ट्रेस कर भी रहा हो तो वह यही समझेगा कि यह समीरा का मायका है जहां राज और समीरा ने आना था मगर वह यहां आने की बजाय लाहोर चले गए हैं हनीमून मनाने। फिर अमजद ने सीरियस होते हुए कहा, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आया कि ये दोनों इतनी जल्दी लाहोर कैसे पहुंच गए ?? जामनगर से लाहोर तक की बस यात्रा 14 घंटे की है इतनी जल्दी लाहोर पहुंचना संभव नहीं ... हो सकता है वे दोनों यहीं मुल्तान हों और कुछ देर में आ जाएं।

यह सोच कर अमजद ने भी कुछ आराम करने की ठानी सारी रात की यात्रा और फिर इतनी देर पेट्रोल पंप पर खड़े होकर उसकी हालत खराब हो गई थी। आराम करने के क्रम में अमजद भी उसी कमरे में लेट गया जहां बाकी लोग मौजूद थे, 4, 5 घंटे आराम करने के बाद रात 9 बजे के करीब अमजद की आंख टेलीफोन की घंटी सुनकर खुली। अमजद ने फोन रिसीव किया तो राज की आवाज थी, राज ने अमजद को कहा कि वह मुल्तान में ही थोड़ी आतिशबाजी की व्यवस्था करे ताकि लोगों को पता लगे हमारी शादी हुई है और साथ ही सरमद या काशफ को जामनगर भेजकर मेरे दोस्तों को वहीं रोको, वह मेरा हनीमून खराब करने लाहोर तक न आ जाएं। उन्हें बताओ कि मैं अभी जामनगर में ही हूँ। यह कह कर राज ने फोन बंद कर दिया। अमजद मेजर राज के इस मैसेज को पूरी तरह समझ गया था और वह समझ गया था कि अब मेजर राज कार्रवाई के मूड में है।

मेजर राज कर्नल इरफ़ान घर को देखकर वापसी के लिए मुड़ा और अब उसकी मंजिल क्लब लीबिया था। यहां भी समीरा राज को मोबाइल की मदद से रास्ता बता रही थी और 20 मिनट के बाद मेजर राज और समीरा क्लब पहुंच चुके थे जो उस समय बंद पड़ा था। मेजर ने क्लब के आसपास अच्छी तरह निरीक्षण किया और वहां से निकलने वाले विभिन्न मार्गों का अच्छी तरह निरीक्षण किया ताकि समय पड़ने पर अगर भागना पड़े तो यहां से निकलने वाले रास्तों का अच्छा ज्ञान हो। इसके बाद मेजर ने समीरा से अमजद नंबर पूछकर उसको कुछ आवश्यक निर्देश दिए फिर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बेवजह फिरता रहा। मेजर का उद्देश्य मुख्य मार्गों के बारे में जानकारी प्राप्त करना था। विशेष रूप से क्लब लीबिया से आर्मी रीज़ीडीनशल क्षेत्र तक जाने वाले विभिन्न मार्गों पर अमजद ने बार बार राउंड लगाया ताकि वह इस रास्ते मन में याद कर सके साथ ही उसने समीरा से भी कहा कि वह भी इन मार्गों को अच्छी तरह समझ ले और यहाँ से वापस जिन्ना नगर तक जाने का रास्ता भी ध्यान में कर ले।

कुछ देर आवारा फिरने के बाद मेजर राज शाम 7 बजे वापस अपने जिन्ना नगर वाले घर में पहुँच चुका था और अब रात की तैयारी कर रहा था। उसने एक अपराधी समूह से संपर्क किया और उन्हें राफिया की तस्वीर भी सेंड कर दी। मेजर राज ने उन्हें फोन पर मौजूद व्यक्ति से कहा कि इस लड़की को हर हाल में आज रात अपहरण करना है, लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि कोई दंगा फसाद नहीं चाहता, अपने लोगों को पिस्तौल आदि देकर न भेजना, कोई खून ख़राबा नहीं चाहिए, और ज़्यादा शोरगुल भी न हो चुपचाप 3, 4 लोग जाएं और इस लड़की को कार में डाल कर मेरे वांछित ठिकाने तक पहुंचा दें। आधी राशि तुम्हारे बैंक खाते में पहुंच चुकी है शेष राशि काम होने के बाद आप मिल जाएगी मगर लड़की एक खराश तक नहीं आनी चाहिए।

यह कर कर मेजर ने फोन बंद कर दिया। समीरा ने पूछा कि उसे अगवा करके क्या करोगे ??? मेजर राज ने समीरा को आँख मारी और बोला- तुम तो किसी काम आती नहीं चलो समीरा के साथ ही आज की रात मस्ती कर लूँगा . मेजर की बात सुनकर समीरा के चेहरे पर मुस्कान भी आई और उसने कृत्रिम क्रोध व्यक्त करते हुए राज को 2, 4 सुना दी अब राज ने समीरा को तैयार होने को कहा इन दोनों ने क्लब लीबिया जाना था। फिर समीरा कुछ देर में ही यानी 1 से 2 घंटे में तैयार होकर निकली तो मेजर राज समीरा को देखकर पलक झपकाना ही भूल गया और मन ही मन में शाजिया को याद करने लगा जिन्होंने इतना सेक्सी ड्रेस भेजा था।

बिना बटन का केसर रंग का यह ड्रेस समीरा के सीने के उभारों से होता हुआ 2 भागों में विभाजित होकर समीरा की गर्दन तक जा रहा था और गर्दन के पीछे जाकर दोनों भागों को समीरा ने हल्की सी गाँठ लगा रखी थी। समीरा के सीने के उभार इस ड्रेस में काफी स्पष्ट हो रहे थे, पोशाक का नीचला हिस्सा वैसे तो समीरा के पांव तक आ रहा था और पीछे से कपड़े का कुछ हिस्सा जमीन को छू रहा था मगर समीरा की इस ड्रेस में एक कट था जिसकी वजह से समीरा का बाँया पैर थाई से लेकर नीचे टखने तक दिख रहा था, समीरा की गोरी दूध जैसी बाल मुक्त टांग देख कर मेजर राज की पेंट में कुछ होने लगा था। समीरा ने मेजर को यों आँखें फाड़ फाड़ कर देखते हुए पाया तो उसकी आंखों में थोड़ा अहंकार स्पष्ट होने लगा, इतने हुश्न पर थोड़ा अहंकार तो बनता ही था। अब समीरा इठलाती हुई मेजर से बोली ऐसे ही देखते रहोगे या क्लब चलोगे ??? यह कह कर समीरा आगे चल पड़ी, अब मेजर ने समीरा को पीछे से जो देखा तो उसकी पैंट में लंड का उभार स्पष्ट होने लगा था। समीरा का यह ड्रेस बहुत ही सेक्सी था। यानी समीरा की कमर बिल्कुल नंगी थी और उसके ब्रा की कोई स्ट्रिप भी नज़र नहीं आ रही थी जिसका मतलब था कि इस ड्रेस के नीचे से समीरा ने कोई ब्रा नहीं पहना। इस सोच ने मेजर राज को 240 वोल्ट का झटका मारा था और नीचे समीरा की 32 इंच की गाण्ड अलग ही नजर आ रही थी। कूल्हों से ड्रेस टाइट होने के कारण समीरा के चूतड़ों का उभार काफी स्पष्ट था। संक्षेप में समीरा इस ड्रेस में किसी फिल्म की सेक्सी हीरोइन लग रही थी ऊपर से उसके कंधों तक सुंदर बाल और चेहरे पर एक बल खाती लट उसके हुस्न को चार चांद लगा रही थी। हल्की लाल रंग की लिप स्टिक समीरा के रसीले होंठो को ज़्यादा आकर्षक बना रही थी।

 


समीरा ने फिर पीछे मुड़कर मेजर राज को देखा जो अब तक सकते की स्थिति में समीरा की सुंदरता और उसकी नग्न कमर को देखकर अपनी आँखें ठंडी कर रहा था, समीरा ने मुस्कुराते हुए मेजर को देखा और बोली मेजर साहब इसी तरह लड़कियों को देखकर लट्टू होते रहोगे तो कर ली आपने कर्नल इरफ़ान की जासूसी, अब होश में आओ और चलने वाली बात करो। समीरा की बात सुनकर मेजर राज अपने होश में वापस आया और मुस्कराता हुआ बोला अब तुम इतनी हॉट हॉट ड्रेसिंग करोगी तो मुझ जैसा शरीफ इंसान तो सकते में आ ही जाएगा ना ... समीरा उसकी बात सुनकर मुस्कुराई और बोली आपने ही ऐसा ड्रेस मेरे लिए चुना है मुझे तो पता भी नहीं था कि आपने शाजिया जी से क्या खरीदा है। ऐसे ही बातें करते दोनों अपनी कार के पास आ चुके थे और समीरा महसूस कर रही थी कि गली में मौजूद जो कुछ लोग थे उनकी नजरें भी समीरा के शरीर का जी भर कर मुआयना करने में व्यस्त थीं। मेजर ने कार स्टार्ट की और क्लब लीबिया की ओर रवाना हो गया। रास्ते में समीरा ने पूछा कि अगर राफिया का अपहरण ही कराना था तो हमें वहाँ जाने की क्या जरूरत है अपहरण करने वाले खुद ही राफिया का अपहरण करके हमारी कही हुई जगह पर पहुंचा देते।

मेजर ने समीरा की तरफ देखा और बोला वास्तव में उसे अपहरण नहीं करवाना बल्कि अपहरण होने से बचाना है। इसलिये मेरा वहाँ जाना ज़रूरी है समीरा ने हैरान होकर पूछा क्या मतलब? यह जो आप ने गुण्डों को इतनी बड़ी राशि दी है कि अपहृत होने से बचाने के लिए दी है ???

मेजर बोला नहीं अपहरण करने के लिए ही दी है, लेकिन जब वह अपहरण करेंगे तो मैं बॉलीवुड के हीरो की तरह एंट्री मारकर राफिया का अपहरण होने से बचा लूँगा और गुण्डों को पैसे इसलिए दिए हैं कि सब कुछ असली लगे . नाटक करने के लिए किराए के लोग भेजूँगा तो किसी को भी संदेह हो सकता है, लेकिन असली गुंडे अपना काम अच्छी तरह करना जानते हैं। समीरा ने कहा और अगर इस सब मैं तुम्हें कुछ हो गया तो ???

मेजर ने समीरा को देखा और मुस्कुराते हुए बोला तुम्हें मेरी बड़ी चिंता हो रही है ... कहीं मुझसे प्यार तो नहीं हो गया ?????

समीरा मेजर की बात सुनकर सटपटा गई और बोली नहीं वह तो मैंने तो वैसे ही पूछा है कि कुछ भी हो सकता है ऐसी स्थिति में फिर कहाँ तुम्हें अस्पतालों में लेकर फिरूँगी। समीरा का जवाब सुनकर मेजर हंसने लगा और फिर से कार चलाने लगा। क्लब लीबिया से कुछ दूरी पर मेजर ने कार को एक कम रोशनी वाली जगह पर रोक दिया और खुद गाड़ी से उतर कर समीरा को ड्राइविंग सीट पर आने के लिए कहा, समीरा गाड़ी से उतरी और अपनी ऊंची एड़ी वाली सैंडल पहने बल खाती नाजुक कमर के साथ चलती हुई कार तक आई और मेजर राज की नजरें एक बार फिर उसके शरीर का एक्स-रे करने लगीं।

कार के पास आकर समीरा ड्राइविंग सीट पर बैठी तो उसके ड्रेस का निचला कट वाला हिस्सा उसकी टांग से सरकता हुआ नीचे चला गया और उसका बायाँ पैर थाई से लेकर नीचे तक नंगा हो गया मगर समीरा ने इस बात का कोई नोटिस नहीं लिया क्योंकि यह उसके लिए मामूली सी बात थी मगर मेजर राज के लिए अब अपने ऊपर नियंत्रण करना मुश्किल होता जा रहा था। जब समीरा ने मेजर को देखा और उसे दूसरी तरफ से आने का इशारा किया, लेकिन मेजर ने थोड़ा झुककर समीरा को बताया कि वह क्लब लीबिया अकेली जाए और अंदर किसी भी डांस फ्लोर पर जाकर एंजाय करे। चाहे तो डांस करे चाहे तो किसी टेबल पर बैठ कर किसी भी व्यक्ति से खुश गपियां करे। और जैसे ही राफिया अंदर आए उस पर नजर रखे कि वह अंदर किससे मिलती है और कोई भी असामान्य बात दिखे तो तुरंत मेजर राज को उसके फोन कॉल कर दे। यह कहते हुए मेजर राज ने एक महंगा मोबाइल समीरा की तरफ बढ़ाया और उसे कहा इस मोबाइल का उपयोग करते हुए तुम मुझे फोन कर सकती हो। समीरा ने वह मोबाइल अपने पास मौजूद पर्स में रखा और राज से पूछा कि तुम कहाँ होगे ??? राज ने बताया वह भी क्लब लीबिया में ही होगा मगर वहाँ हम दोनों एक दूसरे से नहीं मिलेंगे और न ही कोई बातचीत होगी, और कुछ देर अंदर रुकने के बाद शायद मैं वापस चला जाऊं मगर तुम्हें अंदर ही रहना है तब तक जब तक राफिया वहाँ से निकल नहीं जाती, उसके बाद आप चाहें तो गाड़ी लेकर वापस जिन्ना नगर चली जाना मैं राफिया को गुंडों से बचाकर सिचुएशन के अनुसार फैसला करूंगा कि मुझे रात को घर वापस आना है या रात कहीं और गुजारनी है। साथ ही मेजर ने समीरा को विशेष निर्देश दिया कि नाइट क्लब में शराब और व्हिस्की आदि बिल्कुल न पिये वरना स्थिति बिगड़ भी सकती है।

समीरा मेजर को ठीक है कह कर क्लब लीबिया की ओर निकल गई जबकि मेजर राज क्लब के बाहर इधर उधर भटक कर घूमने लगा। फिर क्लब के बाहर मौजूद एक छोटी सी दुकान पर बैठ कर सिगरेट पीने लगा। राज स्मोकर नहीं था मगर कभी-कभी अपने आप को आम आदमी दिखाने की खातिर ना चाहते हुए स्मोकिंग भी करता था। तब भी वह एक आवारा व्यक्ति नजर आ रहा था जिसको सारा दिन आवारा फिरने के अलावा कोई काम न हो। कुछ देर इधर उधर फिरने के बाद अब मेजर राज एक दुकान पर बैठा कोक पी रहा था और टाइम पास करने की कोशिश कर रहा था। मगर समय था कि जैसे रुक सा गया था। रात के 10 बजने को थे मगर अब तक राफिया का कोई अता-पता नहीं था।

दूसरी ओर समीरा क्लब लीबिया पहुंची तो उसके सामने ही कार लगाकर गाड़ी से उतर गई, एक वेले भागता हुआ समीरा के पास आया और गाड़ी की चाबी लेकर पार्क करने चला गया जबकि समीरा कर पार्किंग का टोकन अपने पर्स में रखते हुए नाइट क्लब में प्रवेश कर गई . करीब 9:30 का समय था इसलिए नाइट क्लब में अभी ज्यादा गहमागहमी नहीं थी कुछ लोग ही अंदर मौजूद थे कुछ कपल थे तो कुछ पुराने लोग भी थे। कुछ युवा अपनी गर्लफ्रेंड फ्रेंड्स के साथ डांस फ्लोर पर डांस करने में मगन थे। समीरा चलती हुई एक खाली टेबल देखकर उस पर बैठ गई, और डांस फ्लोर पर युवाओं को डांस करता देखने लगी।

फिर समीरा ने एक ड्रिंक का ऑर्डर दिया जो कुछ ही मिनटों में ही आ गई, अब समीरा ड्रिंक पीने के साथ साथ पैर पर पैर रखे युवक-युवतियों को डांस करता देखकर एंजाय कर रही थी। समीरा के आसपास बैठे कुछ बूढ़े लोगों की नजरें समीरा पर ही थीं और वह यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे थे कि क्या यह खूनी हसीना अकेली है या उसके साथ कोई प्रेमी आदि भी है। कुछ देर इंतजार होने के बाद एक व्यक्ति ने हिम्मत की और अपनी सीट से उठकर समीरा के करीब आ गया, और बड़े आत्मविश्वास से समीरा को संबोधित करते हुए कहा, हाय ब्यूटी फुल महिला, इफ यू डांट माइंड मे आई सिट हियर ?? समीरा ने उस आदमी को सिर से पैर तक देखा और बोली यू डांट नीड माई पर्मीशन यह कह कर समीरा फिर डांस देखने लगी और वह व्यक्ति समीरा के साथ वाली चेयर पर बैठ गया मगर समीरा उसे इग्नोर कर रही थी।

इस व्यक्ति की उम्र 35 के करीब होगी मगर शायद युवा लड़कियों के लिए उत्सुक था। समीरा के पास बैठ कर उसने समीरा को फिर से संबोधित किया और अपना हाथ समीरा की ओर बढ़ाते हुए अपना परिचय करवाया, समीरा ने फिर से एक पल उसकी ओर देखा और फिर अपना हाथ बढ़ाकर उससे हाथ मिलाया और अपना नाम अंजलि बताया । इस व्यक्ति का नाम सुभाष था। पहले पहल तो समीरा ने उसे कोई विशेष लिफ्ट न करवाई मगर फिर उसे एहसास हुआ कि राफिया के आने में अभी समय है क्योंकि नाइट क्लब की मूल रौनक तो 11 से 12 बजे के बीच ही आती हैं तो टाइम पास करने के लिए इस लंगूर को थोड़ी बहुत लिफ्ट करा देनी चाहिए। अब समीरा ने उस व्यक्ति से बातचीत शुरू की तो वह अपने बारे मे समीरा को बताने लगा, अपना व्यापार और पर्सनल लाइफ के बारे में वह बिना हिचक समीरा को सब कुछ बता रहा था। और समीरा भी अपने मन में कहानी बना रही थी कि अगर यह मेरे बारे में कुछ पूछता है तो मैं क्या बताऊँ .

कुछ ही देर के बाद सुभाष ने समीरा को डांस की पेशकश कर दी जो समीरा ने थोड़ा संकोच के बाद स्वीकार कर ली। इस समय रोमांटिक सल्लू संगीत चल रहा था तो समीरा ने टेबलों के बीच में ही इस व्यक्ति के साथ सल्लू कपिल डांस करना शुरू कर दिया, समीरा ने अपना एक हाथ उसके हाथ में दे रखा था जबकि दूसरा हाथ उसके कंधे पर रखा हुआ था जबकि सुभाष का दूसरा हाथ समीरा की कमर पर था और वह हौले हौले समीरा की कमर पर हाथ फेर रहा था। इसी तरह कुछ और कपल्स भी कपल डांस करने में संलग्न थे और जो पुरुष पहले समीरा को घूर रहे थे वे अब अपने आप को कोस रहे थे कि अगर वे पहल कर लेते तो शायद इस हसीना के साथ अब वह बाहों में बाहें डाले डांस कर रहे होते।

डांस के दौरान सुभाष अपनेलबों को समीरा के कानों के पास लाकर उस से बातें कर रहा था और समीरा भी हल्की आवाज में उसकी बातों का जवाब दे रही थी, समीरा ने उसे बताया कि वह सिंगल है और उसका कोई प्रेमी नहीं वह यहाँ अकेले टाइम पास करने आई है। यह जानकर सुभाष की मर्दानगी ने एक अंगड़ाई ली और उसे लगा कि आज समीरा का अकेलापन वह मिटा सकता है। यह जानकर कि समीरा अकेली है अभी सुभाष थोड़ा रिलैक्स हो गया था और डांस करते करते उसने समीरा को अपने करीब कर लिया था। समीरा ने भी कोई विरोध नहीं किया और उस व्यक्ति को अपने पास होने दिया वह जानती थी कि किसी भी समय वह आसानी से जान छुड़वा सकती है। समीरा के मम्मे सुभाष के सीने को स्पर्श कर रहे थे और सुभाष भी नजरें बचाकर बार बार समीरा के सीने में बनने वाली सुंदर क्लीवेज़ को देख रहा था जबकि उसका एक हाथ लगातार समीरा की कमर की मालिश कर रहा था। वह समीरा की गर्दन से लेकर उसके चूतड़ों से कुछ ऊपर तक जहां तक समीरा की कमर नंगी थी अपने हाथ से समीरा के शरीर की गर्मी को महसूस कर रहा था।

 
करीब 15, 20 मिनट दोनों इसी तरह डांस करते रहे और उसके बाद संगीत रुक गया और सभी कपल अपनी अपनी जगह पर वापस जाकर बैठ गए जबकि डांस फ्लोर पर अब तक तेज संगीत चल रहा था और वहाँ युवा लड़के लड़कियां बेमेल डांस में व्यस्त थे। अब सुभाष और समीरा फिर से बैठे बातें करने में व्यस्त थे। समीरा सुभाष के साथ अब बिल्कुल सामान्य तरीके से बात कर रही थी जैसे वह उसे बहुत समय से जानती हो और बात बात पर खिलखिला कर हंस रही थी। जबकि सुभाष की नजरें लगातार समीरा के नसवानी हुश्न के आसपास घूम रही थीं जिसका समीरा को भी अच्छी तरह पता था मगर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी . सुभाष ने समीरा को ड्रिंक की पेशकश भी की मगर समीरा ने बता दिया कि कोल्डड्रिंक चलेगा व्हिस्की आदि नहीं जिस पर सुभाष ने अपने लिए व्हिस्की और समीरा के लिए कोक मंगवाई जिसको समीरा सीप लेकर पीने लगी।

बाहर राज को भी घूमते हुए काफी देर हो चुकी थी, कोई 11 बजे के करीब राज को एक बीएमडब्ल्यू नाइट क्लब की ओर आती दिखाई दी, राज ने फौरन गाड़ी पहचान ली ये राफिया की ही गाड़ी थी और राफिया खुद ड्राइव कर रही थी जबकि उसके साथ वाली सीट पर वही लड़का बैठा था जो विश्वविद्यालय से निकलते हुए राफिया के साथ था। अब राज चौकन्ना हो गया था और इधर उधर देखने लगा कि राफिया की कोई निगरानी तो नहीं हो रही? या उसके साथ आसपास कोई गार्ड आदि मौजूद तो नही हैं . आख़िर कर्नल इरफ़ान की इकलौती बेटी थी क्या पता उसकी रक्षा के लिए पूरी सेना मौजूद हो आसपास, लेकिन कुछ देर बाद राज को संतोष हो गया कि राफिया की न तो निगरानी हो रही है और न ही उसके आसपास कोई मौजूद है। राफिया अभी क्लब में प्रवेश कर चुकी थी, राज ने फिर से एक नंबर मिलाया और बोला कि आधे घंटे बाद अपने आदमियों को क्लब लीबिया भेज दो, लड़की क्लब में जा चुकी है और उम्मीद है कि रात 1 से 2 बजे तक ही निकलेगी। लेकिन किसी भी कारण से वह पहले भी बाहर आ सकती है इसलिए अपने आदमी अब भेज दो।

फोन करके राज खुद भी क्लब के अंदर चला गया। वैसे तो मेजर राज की उम्र 32 के करीब थी लेकिन इस समय अपने हुलिए और ड्रेसिंग के कारण वह 25, 26 साल का जवान और लापरवाह लड़का लग रहा था।क्लब के अंदर जाकर राज ने देखा तो खूब हल्ला गुल्ला था, शोर, रोशनी और लोगों के बोलने की आवाज, राज को ऐसे लग रहा था जैसे वह किसी बकरा बाजार में आ गया है। कान पड़ी आवाज सुनाई नहीं देती थी यहाँ तो। कुछ ही देर के बाद राज की दृष्टि राफिया पर पड़ी जो अपने साथ आए लड़के के साथ संगीत पर डांस कर रही थी उल्टे सीधे स्टेप करने को आजकल की युवा पीढ़ी डांस का नाम देती है, और यही कुछ राफिया कर रही थी, उसके साथ मौजूद लड़के को भी डांस के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं थी वे भी उलटे सीधे हाथ चला रहा था, और कभी उसके हाथ राफिया की कमर पर होते तो कमर से होते हुए राफिया के हिप्स तक भी जरूर जाते, राफिया ने नीली चड्डी पहन रखी थी जिसकी वजह से उसके चूतड़ों के बीच में मौजूद लाइन और पैर और चूतड़ों का जोड़ तक स्पष्ट हो रहा था ऊपर राफिया ने एक ढीली सी शर्ट पहन रखी थी जिसमें उसके मम्मे हिलते स्पष्ट महसूस हो रहे थे। यानी उसने नीचे ब्रा नहीं पहना हुआ था।

डांस करते हुए कभी राफिया लड़के की तरफ अपनी पीठ करती तो लड़का राफिया के पेट पर हाथ रख कर उसे अपने साथ लगा लेता जिससे राफिया के चूतड़ इस लड़के के शरीर से स्पर्श होते, और दोनों की हाइट एक जैसी होने के कारण राफिया की गाण्ड और लड़के के लंड का आपस में मिलान हो रहा था। राज एक साइड पर बैठ कर राफिया पर नजर रखे हुए था कि अचानक उसकी नजर समीरा पर पड़ी जो अब तक सुभाष के साथ बैठी बातें कर रही थी। और राज को ऐसे लग रहा था जैसे समीरा बहुत समय से सुभाष को जानती हो। समीरा को क्लब में आए 2 घंटे से अधिक का समय हो चुका था मगर वह अभी फ्रेश लग रही थी जबकि राज का बाहर खड़े हो कर बुरा हाल हो गया था।सुभाष और समीरा डांस फ्लोर पर युवाओं का डांस देखने में व्यस्त थे और समीरा की नजरें बार बार राफिया को देख रही थीं। समीरा मेजर राज को भी देख चुकी थी मगर इससे नजरें नहीं मिला रही थी ताकि किसी को शक न हो सके।

अब समीरा अपनी मेज से उठा और वह भी डांस फ्लोर पर चली गई पीछे सुभाष भी डांस फ्लोर पर गया और अब की बार दोनों ने डांस शुरू किया तो डांस फ्लोर पर जैसे तहलका सा मच गया। समीरा तो पहले से ही डांसर थी मगर सुभाष भी लगता था कि डांस में खासा माहिर है। समीरा और सुभाष को डांस करता देखकर कुछ युवा रुक गए और अपना डांस भूल कर उन लोगों को देखने लगे। डीजे भी जब समीरा और सुभाष को डांस करते देखा तो उसने म्यूजिक चेंज किया और शेखर के हिप्स डांट लाई लगा दिया जिस पर समीरा का शरीर थिरकने लगा तो सभी युवा समीरा और सुभाष के आसपास जगह बना कर खड़े हो गए और दोनों का डांस देखने लगे, समीरा का शरीर संगीत की बीट्स के साथ हिल रहा था समीरा कभी सुभाष की बाँहों में होती जो उसे दोनों हाथों से हवा में उठा लेता, हवा में समीरा अपनी टांगों से अलग स्टेप करती और वापस ज़मीन पर आकर उसका शरीर फिर से थिरकने लगता। राफिया भी अब अपना डांस छोड़कर समीरा का डांस देखने लगी। कुछ देर के बाद हिप्स डांट लाई समाप्त हुआ तो समीरा का डांस भी खत्म हो गया।

समीरा और सुभाष अब डांस फ्लोर से नीचे उतरने लगे तो सभी लोगों ने वॅन्स मोर वॅन्स मोर की आवाज लगाई मगर समीरा ने सबसे क्षमा माँगी और नीचे आ गई जबकि बाकी लोग फिर से डांस करने लगे। समीरा अब भी सुभाष के साथ ही थी। सुभाष को भी जब समीरा जैसी सुंदर लड़की का साथ मिला तो वह समीरा के साथ चिपक ही गया था और कहीं और जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। जबकि राज एक साइड पर बैठा सबसे अलग राफिया पर नजर रखे हुए था।

12 बजे राफिया डांस फ्लोर से नीचे आई और नीचे पड़े टेबल पर एक टेबल चुन एक ही लड़के के साथ बैठ गई, लड़के ने व्हिस्की ऑर्डर की और रफिया के हाथों में हाथ देकर बैठ गया दोनों एक दूसरे से बातें करने में ऐसे बिजी थे कि उन्हें एक दूसरे का विचार ही नहीं था। राज समझ चुका था कि अभी उनका यहां से निकलने का कोई इरादा नहीं है। लड़का अभी तक व्हिस्की के 2 गिलास अंदर डाल चुका था जबकि राफिया अब तक पहला गिलास ही लिए बैठी थी। राज को एक बार फोन कॉल भी आई और लड़की के बारे में पूछा तो राज ने कहा तुम जानो और तुम्हारा काम। लड़की डांस क्लब में ही है जब बाहर आए तो तुम्हारा काम अपहरण करना है। बाहर खड़े होकर वेट करो। जब तक वह खुद बाहर नहीं आ जाती।

राज की चिंता अब बढ़ने लगी थी, रात के 1 बजने वाला था मगर ऐसे लग रहा था कि राफिया का आज रात यहीं रुकने का कार्यक्रम है। राफिया और उसका दोस्त अब भी हाथ में व्हिस्की का गिलास थामे सल्लू संगीत पर डांस कर रहे थे। जबकि दूसरी ओर समीरा सुभाष के साथ बैठी बातें कर रही थी मगर उसकी नज़रें बार बार राफिया को देख रही थीं। अब राज सोचने लगा कि आखिर राफिया को कैसे बाहर निकाला जाए। फिर उसने एक वेटर को समीरा की टेबले की ओर आते देखा, राज इस वेटर की ओर बढ़ा और जब वह वेटर बिल्कुल समीरा की टेबल पर पहुंचा तो राज ने साइड से उसे हल्का सा धक्का दिया और वह सुभाष की ओर गिरने लगा, वेटर तो बच गया मगर उसके हाथ में मौजूद ट्रे में व्हिस्की का एक गिलास सुभाष के ऊपर गिर गया। ये हरकत करके राज भीड़ में गायब हो गया जबकि सुभाष वेटर को डाँटने लगा। समीरा ने देख लिया था कि यह धक्का राज ने दिया है वह समझ गई थी कि राज उससे कोई बात करना चाहता है उसने अपने पर्स से एक टिश्यू पेपर निकाला और आगे बढ़कर सुभाष के कपड़ों को सॉफ करने लगी। और वेटर को वहां से जाने का इशारा किया। वेटर के जाने के बाद समीरा ने सुभाष को कहा कि आपके कपड़े खासे खराब हो गए हैं बेहतर है शौचालय में जाकर थोड़ा पानी डाल लें, आपके चेहरे पर भी व्हिस्की गिरी है उसे भी साफ कर आएँ मगर सुभाष तो समीरा को एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ना चाह रहा था, उसे लग रहा था कि वह एक मिनट के लिए भी इधर उधर हुआ तो समीरा पर कोई और कब्जा कर लेगा। लेकिन समीरा के कहने पर वह न चाहते हुए भी शौचालय चला गया, उसके जाते ही राज भीड़ से वापस निकला और समीरा के पास आकर बोला कि रात काफी हो गई है, जो हरकत मैंने तुम्हारे इस प्रेमी के साथ है वही हरकत तुम राफिया के साथ करो ताकि उसको बाहर जाने का होश आए . इसके बाद चाहें तो सारी रात अपने इस प्रेमी के साथ गुजार दो। यह कह कर राज ने समीरा को आँख मारी और क्लब से बाहर निकल गया। बाहर अब भीड़ बहुत कम थी कुछ लोग डांस क्लब के आसपास टहल रहे थे बाकी रात अधिक होने की वजह से अपने घरों को जा चुके थे।

उन में राज ने बहुत आसानी से कुछ ऐसे लोगों को पहचान लिया जो शरीर से ही अपराधी लग रहे थे और किसी के इंतजार में थे। राज समझ गया था कि यही वह लोग हैं जो राफिया का अपहरण करने की कोशिश करेंगे। राज एक साइड पर कुछ दूरी पर छुप कर बैठ गया और राफिया के बाहर आने का इंतजार करने लगा।कुछ ही देर के बाद राज ने देखा कि पार्किंग से राफिया की कार डांस क्लब के गेट के सामने आकर रुकी और अंदर से वेले निकला। राज समझ गया कि समीरा ने भीतर अपना काम कर दिया है और राफिया अब बाहर आ रही है। उसने अपनी कार सामने ही मंगवा ली थी पार्किंग से। सच यही हुआ कुछ ही देर में राज को राफिया आती दिखायी दी और राज चौकन्ना हो गया।

राफिया की कार देखकर वह गुंडे भी चौकन्ने हो गए थे क्योंकि राज ने राफिया की कार का मॉडल और नंबर भी इन गुंडों को बता दिया था। जैसे ही राफिया क्लब से बाहर निकली वह गुंडे गाड़ी की ओर बढ़ने लगे। राज ने देखा कि यह टोटल 3 गुंडे थे। जबकि करीब ही एक कार खड़ी थी जिसमें एक व्यक्ति ड्राइविंग सीट पर बैठा था और उन गुंडों को आगे बढ़ता देख कर उसने अपनी कार स्टार्ट कर ली थी। राज अभी तक अपनी जगह पर ही था। जैसे ही राफिया कार के पास पहुंची और कार में बैठने लगी गुण्डों में से एक ने आगे बढ़कर राफिया के मुंह पर हाथ रखा और उसे खींचते हुए दूसरी ओर ले जाने लगा। इस अचानक हमले से राफिया बुरी तरह डर गई थी उसने चिल्लाने की कोशिश की मगर उसके मुंह पर गुंडे का हाथ था।

राफिया के साथ मौजूद लड़के ने जब यह देखा तो वह भागता हुआ गुंडों के पास गया और उनमें से एक गुंडे को जोर से धक्का दिया जो लुढ़कता हुआ दूर जा गिरा, अब वह लड़का राफिया की तरफ बढ़ने लगा तो दूसरे गुंडे ने जेब से खंजर निकाल लिया और लड़के से चाकू लहराता हुआ बोला चल शाबाश निकल यहाँ से वरना जान से जाएगा। आसपास मौजूद लोग भी यह देखकर इकट्ठे हो गए थे और राफिया और बाकी गुंडों के आसपास घेरा डाल लिया था। जब गुंडों ने देखा कि मामला खराब हो सकता है जिसने राफिया को पकड़ रखा था उसने राफिया को घुमा कर उसकी गर्दन के आसपास अपना एक हाथ डाल लिया और दूसरे हाथ में चाकू पकड़ कर राफिया गर्दन पर रख दिया। इतनी देर में पहला गुन्डा जिसको राफिया के दोस्त ने धक्का दिया था वह भी खड़ा हो चुका था और अपनी जेब से खंजर निकला लोगों को दूर होने का कह रहा था। जबकि राफिया अब चीखें मार रही थी और बचाओ बचाओ की आवाज लगा रही थी।

मगर खंजर देखकर किसी में आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी। राफिया चीख चीख कर कह रही थी अराज मुझे बचाओ, अराज मुझे बचाओ, लेकिन अराज साहिब में खंजर देखकर आगे बढ़ने की हिम्मत खत्म हो गई थी।ऊपर से जिस व्यक्ति को अराज ने धक्का दिया था वह खंजर लहराता हुआ अब अराज के पास आया और उसकी गर्दन पर चाकू रखता हुआ बोला जान प्यारी है तो निकल ले इधर से वरना इधर तेरी गर्दन अलग कर दूंगा। खंजर देख अब अराज साहब के पैर कांपने लगे थे और उसने बुद्धिमानी दिखाते हुए वहां से दौड़ लगाने में ही खैरियत जानी। अराज को यूँ दौड़ता देखकर राफिया और जोर से अराज को आवाज देने लगी प्लीज़ अराज मुझे छोड़ कर ना जाओ, यू लव मी ना ... अराज प्लीज़ वापस आओ ... मगर अराज साहब का लव हवा में उड़ चुका था और अब उन्हें सिर्फ अपनी जान की चिंता थी।

जब राफिया ने देखा कि अब अराज वापस आने वाला नहीं तो उसने गुंडों को धमकी देते हुए कहा, मेरे पापा आर्मी में कर्नल हैं वे तुम्हें छोड़ेंगे नहीं ... छोड़ दो मुझे जाने दो। मगर गुण्डों को तो पैसे मिले थे वह भला कैसे छोड़ सकते थे राफिया को। अराज को भागता देख अब जो लोग गुंडों के चारों ओर खड़े थे वह भी एक एक करके साइड पर होने लगे और पहला गुंडा राफिया की गर्दन पर चाकू रख धीरे-धीरे लोगों की भीड़ से निकलने लगा। अब मौका था राज का सलमान वाली एंट्री मारने का।

 
राज आवारा लड़कों की तरह गले में चैन डाल और उसे हाथ में घुमाते भीड़ से निकला और बोला यार ये कौन चीख रही है चुप करवा उसे .... यह कह कर वो एकदम ऐसे चुप हुआ जैसे उसे सांप सूंघ गया हो। उसने सभी को यह शो करवाया कि उसे यहाँ होने वाली घटना के बारे में पता नही वो तो बस लड़की की चीखें सुनकर आ निकला इधर मगर अब उसके साथ ही एक गुंडा हाथ में खंजर लिए खड़ा था, जबकि दूसरा अभी कार तक पहुंच चुका था और कार के दोनों दरवाजे खोल चुका था ताकि राफिया को कार में डालकर तुरंत यहां से सेल्टिक मारी जाए। और जिस गुंडे ने राफिया को पकड़ रखा था वह धीरे धीरे राफिया को घसीटते हुए वहां से कार की ओर जाने की कोशिश कर रहा था।

राज के साथ जो गुन्डा था वह अब की बार राज की ओर खंजर लहराया और बोला चल बे शियाने निकल तू भी इधर से वरना अपनी जान जाएगा। राज अबकी बार बोला अरे बाप रे तुम लोग तो लड़की का अपहरण कर रहे हो। यह कह कर वह डरने की एक्टिंग करने लगा और उस गुंडे से थोड़ा दूर हो गया और फिर बोला देखो मेरे भाई ऐसे ना करो यह मासूम लड़की है छोड़ दो उसे ... जाने दो उसे क्या मिलेगा तुम्हें एक मासूम लड़की का अपहरण करके। अबकी बार एक गुन्डा गुर्राया और बोला चुप कर बे। कोई आगे बढ़ने की हिम्मत न करे नही तो हम किसी का लिहाज़ नहीं करेंगे।

गुंडे लगातार गाड़ी की ओर बढ़ रहे थे जबकि राज भी उनके साथ एकएक कदम कार की ओर बढ़ा रहा था जबकि बाकी मौजूद लोग धीरे धीरे दूर हट रहे थे। राफिया अब भी चिल्ला रही थी मेरे पापा तुम लोगों को नहीं छोड़ेंगे वह तुम्हारे पूरे परिवार को बर्बाद कर देंगे। मगर गुंडों पर राफिया की इन धमकियों का तनिक भी असर नही हो रहा था।राफिया ने अब मेजर राज को अपनी ओर देखकर उससे मदद की अपील शुरू कर दी थी एक राज ही तो था जो अभी तक दूर हटने की बजाय एकएक कदम गुंडों की ओर बढ़ रहा था और उन्हें समझा रहा था। और अपने साथ वाले गुंडे से कुछ ही कदम की दूरी पर था। और राफिया की आख़िरी उम्मीद भी अब वही था। राफिया राज को नहीं जानती थी मगर फिर भी उससे मदद मांग रही थी

अब वह गुंडा राफिया को लेकर कार के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था जबकि दरवाजे खोलने वाला गुण्डा कार की दूसरी साइड पर जाकर कार में बैठ चुका था। पहले गुंडे ने अब राफिया की गर्दन से खंजर हटाया और उसे कार की पिछली सीट पर धकेलने लगा, मेजर राज इसी बात के इंतजार में था जैसे ही गुंडे ने राफिया की गर्दन से खंजर हटाया मेजर राज ने एक ही छलांग में साथ वाले गुंडे पर हमला कर दिया और चाकू छीन कर उसके सीने पर चला दिया, मेजर ने खंजर इस तरह मारा कि चाकू सीने में घुसने की बजाय मात्र उसकी चमड़ी को छील दे और खून शुरू हो जाए। इस गुंडे के लिए इस हमले की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी खंजर की धार सीने में लगते ही उसने एक चीख मारी और जमीन पर बैठ गया उसकी चीख सुनकर दूसरे गुंडे ने पीछे मुड़ कर देखा जोकि राफिया को कार में धक्का देने के लिए तैयार था, लेकिन जैसे ही उसने पीछे मुड़ कर देखा उसको अपनी जांघ में लोहे का सीरिया घुसता लगा और वह भी अपने पैर पकड़ कर जमीन पर गिर पड़ा , राज ने पहले गुंडे पर वार करते ही उसी से खंजर को गुंडे की जांघ पर दे मारा था जो राफिया को कार में बिठाने की कोशिश कर रहा था, चाकू मारने के साथ ही मेजर राज 2 छलाँगों में गुंडे के करीब पहुंच चुका था और उसने अब राफिया का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए दूसरी तरफ भागने लगा, लेकिन राफिया जो इस समय डरी हुई और सहमी हुई थी ऊपर से उसने बड़ी एड़ी वाली जूती पहन रखी थी वह भाग नही सकी और वहीं पर गिर गई, इतनी देर में कार से शेष दो गुंडे भी निकल आए और राज की ओर लपके। दोनों के हाथ में चाकू थे।

राज अबकी बार राफिया के आगे आ गया और राफिया जो जमीन पर गिर गई राज के पीछे छुप गई आगे बढ़ने वाले गुंडे ने राज पर हमला किया जिसको राज ने पीछे की ओर झुक कर खाली जाने दिया, खंजर राज के सीने से कुछ ही इंच दूरी से गुज़रा था, अभी राज इस हमले से बच कर सीधा ही हुआ था कि दूसरे गुंडे ने भी राज पर वार किया लेकिन राज ने हाथ आगे बढ़ा कर उसके वार को अपने हाथ से रोका और अपना हाथ घुमा कर ऐसा झटका दिया कि खंजर उसके हाथ से निकल कर जमीन पर जा गिरा जो राज ने पहली बार में ही नीचे झुक कर उठा लिया और उसी गुंडे की ओर वार करने के लिए लपका मगर पहले वाला गुण्डा जिसका वार खाली गया था राज पर अगला वार कर चुका था, इस गुंडे ने राज के पैर पर वार किया था राज ने फुर्ती के साथ अपनी टांग बचाते हुए एक दूसरी ओर घूमने की कोशिश की, राज इस खतरनाक वार से बच तो गया मगर खंजर की नोक उसकी थाई की एक साइड को हल्का सा चीरती हुई निकल गई जिससे तुरंत मेजर राज को अपने पैर में तेज जलन महसूस होने लगी।

लेकिन इस अवसर पर पैर की जलन को भूलकर मेजर राज ने फिर से उस गुंडे पर हमला किया और इस बार उसके सीने पर जोरदार किक मारा जिससे उसको अपना सांस रुकता हुआ महसूस होने लगा और वह नीचे झुकने लगा, मेजर ने मौका बर्बाद किए बिना उसकी गर्दन पर अपना विशिष्ट वार किया जिससे एक गुंडा बेहोश होकर जमीन पर गिर गया जबकि दूसरे गुंडे ने मेजर राज की लापरवाही का फायदा उठाकर एक जोरदार लात मेजर की कमर पर मारी जिससे मेजर राज कलाबाज़ी खाता हुआ 3, 4 फीट दूर जा गिरा, इस गुंडे ने अब फिर से राफिया की तरफ बढ़ना शुरू किया जो अब तक जमीन पर डरी हुई बैठी थी मगर राज ने कराटे शैली में एक क़लाबाज़ी लगाई और एक ही पल में गुंडे और राफिया के बीच में आ गया और उसकी गर्दन पर एक करेट चाप रसीद किया जिससे उसका दम घुट गया और वह गर्दन पकड़ कर जमीन पर आ गिरा पहले दो गुंडों में से एक तो अभी तक अपनी टांग को पकड़ कर बैठा था जिसमें मेजर राज का मारा हुआ खंजर अब तक घुसा हुआ था जबकि दूसरे गुंडे ने हिम्मत की और मेजर राज पर हमला किया लेकिन मेजर राज अब पूरी तरह तैयार था और उसने नीचे झुकते हुए गुंडे के घूसे से अपना चेहरा बचाया मगर साथ ही पीछे कलाबाज़ी खाकर अपनी टांग से उस पर वार किया जो उसके जबड़े हिला गया। , मेजर राज ने सीधे होते ही एक जोरदार लात उसकी कमर पर मारी जिससे वह गुंडा भी जमीन पर ढेर हो गया।

बाकी खड़े लोग महज तमाशा देख रहे थे किसी में आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी। अब मेजर राज ने राफिया को देखा जो सहमी हुई आँखों से अपने चारों ओर देख रही थी, मेजर राज ने उसका हाथ पकड़ के उठाया और फिर से भीड़ से दूर भागने लगा मगर इस बार फिर से भागा नहीं गया और वह लड़खड़ाने लगी। राफिया पैर बुरी तरह कांप रही थी। वह बहुत डर गई थी, अब मेजर राज ने उसके कूल्हों के आसपास अपना बाजुओ को फैलाया और उसे अपने कंधे पर उठाकर भीड़ से दूर भागने लगा, भागते भागते उसने राफिया से पूछा आप के पास कार है ??? राफिया ने हांफते हांफते कहा हां है, क्लब के सामने खड़ी है, मेजर राज पहले से ही जानता था कि उसकी गाड़ी क्लब के सामने खड़ी है मगर राफिया को शक न हो इसीलिए उसकी कार के बारे में पूछा मेजर पहले ही क्लब ओर भाग रहा था।

कार के पास पहुंचकर उसने राफिया को दरवाजा खोले बिना ही फ्रंट सीट पर बिठाया और खुद कूद लगाकर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया। अब मेजर ने राफिया से गाड़ी की चाबी मांगी तो उसने इधर उधर देखना शुरू किया, लेकिन उसके पास चाबी नहीं थी, फिर उसने अपने पर्स में देखा तो पर्स में भी नहीं थी मेजर समझ गया कि चाबी कहीं बाहर गिरी है, मेजर ने अपने मन पर जोर दिया तो उसे याद आया वेले से चाबी पकड़ जब राफिया कार की ओर आई थी तो तभी गुंडे ने उसे पकड़ लिया था, और राफिया के हाथ से चाबी नीचे गिर गई थी। मेजर छलांग लगाकर फिर से कार से बाहर निकला और अपने आसपास चाबी ढूंढने लगा आखिरकार मेजर को कार से कुछ ही दूर चाबी मिल गई, मेजर ने तुरंत चाबी को उठाया और कार की तरफ बढ़ा मगर इससे पहले कि वह कार में बैठता उसको ऐसे लगा जैसे उसकी टांग को कोई चीज़ चीरती हुई दूसरी तरफ निकल गई हो। पीछे मौजूद एक गुंडे ने अपना खंजर राज की ओर फेंका था जो सीधा उसकी टांग पर जाकर लगा और 2 इंच के करीब राज के मांस को चीरता हुआ अंदर चला गया। मेजर राज ने मुड़ कर देखा तो वह गुंडा अभी दूर था और यह वही था जिसके पैर में मेजर राज ने चाकू मारा था। मेजर ने तुरंत अपने हाथ से चाकू पकड़ा और एक झटके से खींच कर पैर से निकाल लिया मगर उसका दर्द की तीव्रता से बुरा हाल हो गया। अब मेजर राज अपनी परेशानी को भला कर पुनः लंगड़ाता हुआ कार के पास गया और फिर से कार के दरवाजे से फलाँगता हुआ ड्राइविंग सीट पर बैठ गया। मेजर ने कार स्टार्ट की और गेयर लगाया और तेजी के साथ डांस क्लब से दूर जाने लगा।

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इधर कस्बे से उस महिला के बताए हुए रास्ते पर कर्नल इरफ़ान अपने काफिले सहित रवाना हुआ मगर मुल्तान पहुंचने तक न तो उसे मेजर राज मिला और न ही कोई गाड़ी मिली। लेकिन अपनी जीप की हेड लाइट्स की रोशनी में कर्नल इरफ़ान को एक कार के टायरज़ के निशान जरूर मिले कुछ जगहों पर . आगे चलने पर वहां भी कर्नल ने कार के टायर के निशान देखे जिससे उसकी उम्मीद और बढ़ जाती है कि वे सही दिशा में जा रहा है मगर मुल्तान पहुंचने तक भी उसको कोई कार नहीं मिली तो वह सीधा मुल्तान में मौजूद सेना मुख्यालय चला गया। कर्नल लगातार सीआईडी के एसीपी और आईएसआई के उच्च अधिकारियों से संपर्क में था मगर कोई नहीं जानता था कि मेजर राज को आसमान खा गया या जमीन निगल गई। सुबह के समय कर्नल को उस सिपाही की कॉल आई जिसे कर्नल ने अमजद उर्फ सरदार सन्जीत सिंह का पीछा करने के लिए भेजा था। उसने फोन पर अमजद के बारे में बताया कि उस पर शक करना सही नहीं वह काफी देर से उनके बताए हुए पेट्रोल पंप पर खड़ा है लेकिन वहाँ कहीं भी किसी आतंकवादी के आने के आसार दिखाई नहीं देते।

तब कर्नल ने जवान को कहा कि सरदार जी से कहो अब यहां से जाए और किसी सुरक्षित ठिकाने पर जाकर रहें कहीं फिर से आतंकवादियों के हाथ न लग जाएं। उसके बाद कर्नल ने दूसरी भेजी टीम से संपर्क किया कि शायद कर्नल का विचार गलत हो और मेजर राज मुल्तान की बजाय उधर से चला गया हो, लेकिन वहां भी उसे यही रिपोर्ट मिली हर बस और प्रत्येक वाहन की जांच की गई मगर वांछित व्यक्ति अब तक नहीं मिल सके। कर्नल अब सिर पकड़ कर बैठा था कि आखिर राज को ढूंढे तो ढूँढे कैसे ???

अब यह कर्नल की आन का मुद्दा बन गया था। और वह हर मामले में मेजर राज को पकड़ कर इबरत नाक सजा देना चाहता था। एक पल को कर्नल के मन में यह बात भी आई कि हो सकता है जहां पर उसे राज के उपयोग में मोबाइल मिला था राज उधर से ही बंदरगाह से चला गया हो और राज मार्ग नंबर 6 पर गैस पंप पर जो वीडियो कर्नल ने देखा वह राज न हो, परन्तु उसके मैच का कोई व्यक्ति हो ... मगर फिर कर्नल ने इस विचार को भी झटका दिया क्योंकि सरदार सन्जीत सिंह के पकड़े जाने और उसका यह बताना कि 2 आतंकवादी और 1 लड़की जामनगर बाईपास रोड से कच्चे क्षेत्र से गए थे और फिर वो मूंछों वाला व्यक्ति जो कर्नल ने वीडियो में देखा, कर्नल की आँखें धोखा नहीं खा सकतीं वो वास्तव राज ही था, इस विचार के आते ही कर्नल ने बंदरगाह जाने वाले विचार को मन से निकाल दिया और फिर से सोचने लगा कि आखिर राज कहाँ जा सकता है, कौन से ऐसे क्षेत्र हैं जहां से राज को मदद मिल सकती है और वह कहां शरण ले सकता है ???

मगर कर्नल का अपना दिमाग खाली हो रहा था उसके सोचने-समझने की योग्यता समाप्त होती जा रही थीं। कर्नल ने शाम के समय एक बैठक भी बुलाई जिसमें सेना के 2 कर्नल राठौर सिंह और समीर इलियास शामिल थे और उनके साथ आईएसआई की पेशेवर टीम भी थी जो फोन की मदद से किसी भी व्यक्ति को ट्रेस करने में माहिर थीं। मगर उनके लिए भी मेजर राज नाम की समस्या का निवारण असंभव नजर आ रहा था। उन्हें मेजर की अंतिम लोकेशन जामनगर बाईपास ही मिल रही थी जिसका उल्लेख सरदार सन्जीत सिंह ने कर्नल इरफ़ान के सामने किया था। जब कुछ न बन पाया तो आखिरकार सबने यही फैसला किया कि अब फिर से सरदार सन्जीत सिंह की तलाश की जाए ताकि उससे ज़्यादा पूछताछ हो सके और हो सकता है वह मेजर राज के साथ मिला हुआ हो और उसने जान बूझ कर कर्नल को गलत रास्ते से भेज दिया है। जबकि कर्नल इरफ़ान ही इस फैसले के पक्ष में नहीं था क्योंकि उसने अमजद यानी सरदार सन्जीत सिंह की बातों में सच्चाई और विश्वास देखा था और कर्नल इरफ़ान का मानना था कि वह कभी धोखा नहीं खा सकता। इसलिए वह इस फैसले के खिलाफ था, लेकिन बाकी दोनों करनलज़ और आईएसआई के शीर्ष नेतृत्व के दबाव के तहत सरदार सन्जीत सिंह को ढूंढने का फैसला कर लिया गया।

ये फ़ैसला होने के बाद मीटिंग ख़तम हुई और मुल्तान शहर में सादे कपड़ों में पुलिस, सीआईडी और आईएसआई के लोग सरदार सन्जीत सिंह की खोज में निकल पड़े, कर्नल इरफ़ान ने अपने टैबलेट में मौजूद वीडियो दिखाकर अमजद की तस्वीरें भी निकाल ली थीं और सभी डीपार्टमनटस को भेज दी थी कि अगर इस हुलिए का कोई भी व्यक्ति दिखे तो उसे तुरंत हिरासत में लेकर सेना मुख्यालय पहुंचा दिया जाए।

कर्नल इरफ़ान पिछले दो दिन से मेजर राज की वजह से अपमानित हो रहा था। पहले तो उसने अपने हाथों से अपने वफादार दाऊद इश्माएल और उसके गिरोह का सफाया कर दिया था और अब मेजर राज को ढूंढने में वह बुरी तरह नाकाम दिख रहा था। अब वह थोड़ा रिलैक्स करना चाहता था। रिलैक्स करने के क्रम में कर्नल अब अपने कार्यालय से निकला और जामनगर में मौजूद आर्मी कॉलोनी पहुंच गया जहां वह एक कैप्टन को जानता था। कैप्टन का नाम साजिद चोपड़ा था जो कुछ समय पहले ही लाहोर में कर्नल इरफ़ान से प्रशिक्षण लेकर आया था और अब उसकी पोस्टिंग मुल्तान में थी जहां वह अपनी पत्नी सबीना के साथ रहता था। कैप्टन की शादी को अब सिर्फ 3 महीने हुए थे और लाहोर से लौटने पर वह कर्नल इरफ़ान को विशेष रूप से अपने यहां आमंत्रित का कह कर आया था। जब कर्नल इरफ़ान ने आराम करने का सोचा तो उसके मन में कैप्टन का दिया हुआ निमंत्रण याद आ गया, कर्नल ने सोचा कि यहाँ रहकर अपना दिमाग खराब करने से बेहतर है उसके घर जाकर थोड़ी देर आराम करूँगा और नहा धोकर ताजा होकर फिर अपने मिशन पर लग जाऊंगा। थकान दूर होगी तो उसका मन पहले की तरह तेजी से काम करना शुरू कर देगा।

कर्नल ने कैप्टन साजिद के दरवाजे पर दस्तक दी तो दूसरी दस्तक पर कैप्टन ने दरवाजा खोला और कर्नल को अपने सामने पाकर बहुत खुश हुआ और एक जोरदार सलयूट मारा। कर्नल ने खुश्दिलि आगे बढ़ कर केप्टन से हाथ मिलाया और केप्टन उसे सीधा अपने घर ले गया। अंदर लाकर साजिद ने कर्नल को सोफे पर बिठाया और उसका हालचाल पूछने लगा। कर्नल इरफ़ान कमरे में मौजूद बड़े सोफे पर बैठ गया था जबकि साजिद उसके सामने पड़े सोफे पर बैठ गया और बातें करने लगा। कर्नल इरफ़ान ने जब साजिद ने पूछा कि वह कब से मुल्तान में मौजूद हैं तो पहले तो कर्नल अपनी पूरी कहानी बताने लगा लेकिन फिर यह सोचकर चुप हो गया कि एक कैप्टन क्या सोचेगा कि उसका अधिकारी एक भारतीय एजेंट को गिरफ्तार नहीं कर सका। । बल्कि वह कर्नल की कैद से निकल कर भाग भी गया और अभी तक पकड़ा नहीं जा सका।

कर्नल ने जैसे ही यह सोचा उसने त्वरित बात बना दी कि बस मुल्तान में एक आवश्यक बैठक थी, तो बैठक खत्म करके विचार आया। और सोचा कि आप से भी मिल लें और अभी तुम्हारी नई शादी हुई है तो तुम्हें और तुम्हारी पत्नी को शादी का कोई उपहार भी दे दें। कैप्टन साजिद कर्नल की बात सुनकर बहुत खुश हुआ और बोला कि सर सबीना तो अभी नहा रही है जैसे ही वह बाथरूम से निकलती है तो मैं उसको कहता हूं कि कर्नल साहब आए हैं हमारे गरीबखाने में और एक आर्मी ऑफिसर के लिए सबसे बड़ा उपहार तो उसकी पदोन्नति ही होती है। अगर मुझे कैप्टन से मेजर के पद पर प्रमोट कर दें तो आपकी बड़ी कृपा होगी। कर्नल ने कैप्टन की बात सुनी तो सपाट स्वर में बोला तरक्की इतनी आसानी से नहीं होती साजिद, बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं अपने अधिकारियों को खुश करना पड़ता है, मेहनत करनी पड़ती है जिससे अधिकारी की नजरों में अपनी अहमियत बढ़ जाए और फिर टेस्ट पास करना भी जरूरी होता है। कर्नल की बात सुनकर साजिद खिसियानी हंसी हंसने लगा और बोला सर आपको तो पता ही है मेरे प्रदर्शन के बारे में और मैंने टेस्ट भी दे रखा है। अगर आप चाहें तो मुझे इस परीक्षण में पास करवा सकते हैं और मेरी सिफारिश कर मुझे तरक्की भी दिलवा सकते हैं।

 
दोस्तो अपडेट छोटा है पर कुछ ना करने से कुछ करना अच्छा है
 
कैप्टन की बात सुनकर मेजर ने एक लंबी हूँ हूँ हूँ की और बोला साजिद मियां तुम तो ऐसे समझ रहे हो जैसे तरक्की मेरे कहने पर ही होनी है। अपने अधिकारियों को खुश करो तरक्की हो जाएगी तुम्हारी। साजिद फिर बेशर्म बनते हुए बोला सर आप तो मेरे अधिकारियों के भी अधिकारी हैं आप कहेंगे तो भला किस में साहस है कि मेरी तरक्की को रोक सके। इससे पहले कि कर्नल इरफ़ान उसकी बात का जवाब देता कमरे में मौजूद दूसरा दरवाजा खुला और एक 23 वर्षीय लड़की ने कमरे में प्रवेश किया। ये सबीना थी साजिद की पत्नी। कमरे में आते ही सबीना साजिद से मुखातिब हुई जानू अब मैंने नहा लिया है आज रात खूब मज़े। । । । । । ।

इससे पहले कि सबीना और कुछ कहती उसकी नजर सामने बैठे कर्नल इरफ़ान पर पड़ गई और उसकी बोलती यहीं बंद हो गई। साजिद भी सबीना की बात सुनकर थोड़ा शर्मिंदा हुआ और मगर सबीना को हाथ के इशारे से आगे बुलाया और कर्नल इरफ़ान की ओर इशारा करते हुए बोला सर को प्रणाम करो। यह हमारे कर्नल साहब हैं जिनके बारे में मैंने तुम्हें बताया था।

कर्नल का नाम सुनते ही सबीना ने अपने चेहरे पर मुस्कान सजा ली और आगे बढ़कर कर्नल इरफ़ान के सामने झुकी . कर्नल इरफ़ान अपने सोफे पर ही बैठा हुश्न की इस प्रतिमा को देख रहा था, सबीना जब कर्नल के सामने झुकी तो उसके हाफ ब्लाऊज़ से उसके 36 आकार के बूब्स का उभार देखकर कर्नल को साजिद की किस्मत पर रश्क आने लगा। कर्नल ने अपने हाथ से सबीना के कंधे पर थपकी दी जो उसके सामने झुक कर उसे सलाम कर रही थी, झुकते हुए जल्दी में उसका दुपट्टा गिर गया था जिससे कर्नल को सबीना के सीने पर मौजूद 2 सुंदर मम्मों के बीच बनने वाली सुंदर लाइन को देखने का मौका मिला था। कर्नल ने जब सबीना के कंधे पर हाथ रखकर थपकी दी तो उसका शरीर गर्म और गीला था। वह नहा कर सीधी उसी कमरे में आई थी और उसने अपना शरीर टावल से साफ करना भी गवारा नही किया था।

सबीना जब कर्नल को सलाम करके सीधी हुई तो उसने अपने दुपट्टे को फिर से सीने पर सजा लिया और कर्नल के सामने दोनों हाथ जोड़कर का उसे प्रणाम किया। सबीना सीधी खड़ी हुई तो अब उसके गीले बदन पर पानी की बूँदें दिखने लगी, कर्नल इरफ़ान की टकटकी सबीना के पेट पर मौजूद उसकी सुंदर नाभि पर पड़ी जहां पानी का एक मोटा ड्रॉप नाभि के छेद में अटका हुआ था, कर्नल का दिल किया कि अपनी ज़ुबान सबीना की नाभि पर रखकर पानी की इस बूँद को पी जाये मगर वह ऐसा नहीं कर सका और सिर्फ अपनी इस इच्छा को ही पी सका। साजिद ने सबीना को बैठने का इशारा किया तो वह कर्नल के साथ ही उसके सोफे पर थोड़ी दूरी पर बैठ गई। कर्नल इरफ़ान ने उसका हालचाल पूछा और फिर साजिद के बारे में पूछना शुरू किया कि यह खुश तो रखता है ना तुम्हें ?? तो सबीना ने शरमाते हुए हाँ में सिर हिलाया .

कर्नल अब भी अपनी आँखों को सबीना के गीले बदन की खूबसूरती से चकाचौंध कर रहा था। अंतिम बार उसने बॉलीवुड अभिनेत्री ज़रीन खान की चुदाई की थी जिसका शरीर बहुत भरा और भारी था और इस समय उसके सामने एक जवान दुबली लेकिन गर्म शरीर वाली लड़की बैठी थी और कर्नल इरफ़ान का लंड बार बार उसके कान में कह रहा था कि इस लड़की की चूत की गर्मी की जाँच करनी चाहिए।

साजिद को भी इस बात का एहसास हो गया था कि कर्नल की नजरें उसकी पत्नी के गीले बदन पर हैं। कर्नल कभी सबीना के मम्मों पर नजरें जमाता तो कभी साइड से उसके पेट के कुछ हिस्से पर नजरें जमाता हुआ साजिद और सबीना से बातें कर रहा था, कभी कभी कर्नल इरफ़ान सबीना की नंगे पीठ के भी दर्शन करने से बाज नहीं आ रहा था। कर्नल इरफ़ान को इस तरह अपनी पत्नी को देखते हुए साजिद को स्वाभाविक रूप से गुस्सा आना चाहिए था मगर शायद वह किसी और तबियत का मालिक था। गुस्सा करने की बजाय वह खुश हो रहा था कि कर्नल साहब को उसकी पत्नी का शरीर पसंद आया है और वह बार बार उसके शरीर का नज़ारा कर रहे हैं। यहीं केप्टन साजिद के मन में एक घटिया विचार आया कि मैं अपने अधिकारी को खुश करूँ या न करूं मगर मेरी पत्नी सबीना कर्नल इरफ़ान को खुश कर सकती है और इस तरह मेरी तरक्की पक्की है। यह सोच आते ही उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आ गई और वह बहाने से दूसरे कमरे में गया और सबीना को भी आवाज दी।

सबीना कर्नल इरफ़ान से अनुमति लेकर अपनी जगह से उठी और अपने पति की बात सुनने दूसरे कमरे में चली गई। साजिद ने सबीना के अंदर आते ही उसको अपनी बाहों में भर लिया और अपना हाथ उसकी गीली कमर पर फेरता हुआ बोला आज तो मेरी जान क़यामत लग रही है। यह गीला बदन और उस पर तुम्हारे स्तनों का उभार ये सब मुझे पागल कर रहे हैं। साजिद के मुंह से अपने सेक्सी शरीर की प्रशंसा सुनकर सबीना बोली केवल तुम्हें ही नहीं तुम्हारे इस बुढ्ढे ठरकी अधिकारी को भी मेरा शरीर पागल किए दे रहा है।

सबीना की बात सुनकर साजिद धीरे हंसा और बोला हां मैंने देखा है उसकी नजरें तो तुम्हारे शरीर से हटने का नाम ही नहीं ले रहीं। बस तुम अब अपने पति का एक काम कर दो। सबीना ने सवालिया नज़रों से साजिद को देखा कि कौन सा काम ??? तो साजिद ने कहा बस इसी तरह कर्नल साहब के पास बैठी रहो, बल्कि थोड़ा सा करीब होकर बैठ जाओ तो कर्नल सहाब तुम्हारे शरीर की गंध का भी हो आनंद ले सके, उससे थोड़ा हँसी मज़ाक करो जिससे उसे यह अपना ही घर मालूम हो, उसे खुश करो ताकि तुम्हारा पति कैप्टन के पद से मेजर के पद पर तरक्की पा सके ...

सबीना ने अपने पति की बात सुनी तो बोली वह सब तो ठीक है मगर इस बुढ्ढे की नीयत खराब हो जानी है तुम्हारी पत्नी पर। साजिद, जोकि यही चाहता था कि इरफ़ान की नीयत खराब हो और वह सबीना के शरीर का आनंद लें, लेकिन सबीना को खुलकर नहीं कह रहा था, बोला उसकी नीयत खराब हो भी जाए तो वह बूढ़ा आखिर क्या कर लेगा तुम हटी कट्टि हो एक देना उसको उल्टे हाथ की, मैं भी तुम्हारे साथ हूँ डरने की क्या बात है। बस तुम उसका थोड़ा मनोरंजक करो, मैं किसी बहाने से थोड़ी देर के लिए बाहर चला जाऊंगा ताकि वह बूढ़ा भी अपनी ठरकी पूरी कर सके मगर बदले में तुम उससे मेरी पदोन्नति की बात जरूर करना।

सबीना ने साजिद से कहा और अगर उसने ज़्यादा बढ़ने की कोशिश की और मेरे साथ कुछ गलत करना चाहा तो ??? कैप्टन साजिद ने कहा तो ............. तुम देख लेना तुम्हें क्या करना है ... संभालने की कोशिश करना मामला ज्यादा खराब हो तो मुझे फोन कर लेना मैं तुरंत ही आ जाऊंगा .

सबीना ने सकारात्मक सिर हिलाया और वापस कर्नल इरफ़ान के पास जाकर बैठ गई लेकिन अब की बार वो इरफ़ान के थोड़ा करीब बैठी थी और उस का दुपट्टा जो पहले उसके सीने पर फैला था, अब बीच में सिकुड़ गया था जिससे सबीना की क्लीवेज़ की लाइन स्पष्ट हो गई थी और अब कर्नल सॉफ सॉफ सबीना की क्लीवेज़ की लाइन की सुंदरता को देख सकता था।

कुछ देर तक तीनों बैठे बातें करते रहे और सबीना बहाने से कर्नल के ज़्यादा करीब हो गई थी, अब सबीना के बदन की मीठी खुशबू कर्नल के शरीर में आग लगा रही थी और उसे पहले से ज़्यादा सबीना के बदन की तलब महसूस होने लगी थी। इससे पहले कि कर्नल इरफ़ान की तलब और बढ़े साजिद ने कर्नल की हालत को देखते हुए वहाँ से खिसकने का सोचा, वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और बोला सर मैं आपके खाने आदि की व्यवस्था करता हूँ, बाजार से कुछ खाने को ले आउन्गा तब तक आप और सबीना बैठ कर बातें करें। और हाँ सबीना, सर से मेरी पदोन्नति की बात जरूर करना, शायद तुम्हारी बात मान जाएं सर . यह कह कर कैप्टन साजिद तुरंत कमरे से निकल गया और पीछे सोफे पर साजिद की जवान पत्नी सबीना अपने गीले बदन के साथ कर्नल इरफ़ान को अपने बदन की गर्मी से खुश करने का पूरा प्लान बना चुकी थी।

साजिद के जाते ही सबीना बिना समय बर्बाद किए कर्नल इरफ़ान के बिल्कुल करीब होकर बैठ गई, सबीना का नंगा गीला हाथ अब कर्नल के हाथ से लग रहा था और सबीना ने अपना हाथ कर्नल के कंधे पर रखा और दूसरा हाथ कर्नल के पैर पर रख कर उसको सहलाते हुए बोली कि सर अगर मैं कहूँ तो क्या वास्तव में आप मेरे पति की तरक्की करवा देंगे ??? सबीना की इस तरह त्वरित प्रतिक्रिया ने कर्नल इरफ़ान को थोड़ा हैरान तो किया लेकिन वह कहते हैं न अंधा क्या मांगे दो आँखें, जिस चिकने बदन को चोदने की इच्छा कर्नल पिछले आधे घंटे से दिल में दबाए बैठा था वह खुद ही चुदने के लिए लिए तैयार थी।

कर्नल ने अपना हाथ सबीना की कमर पर लपेटा और अपना हाथ से उसकी कमर को मसलता हुआ उसके पेट तक ले आया और सबीना केपेट को मसलते हुए बोला तुम्हारी बात नहीं मानेंगे हम तो भला और किसकी मानेंगे ??? कर्नल ने अपने हाथ से सबीना के पेट पर एक चुटकी काटी जिस पर सबीना ने अपने निचले होंठ को दांतों में दबा एक सिसकी ली और बोली ओयईईईईई माँ ..... और फिर सबीना अपना हाथ कर्नल के पैर से उठा कर उसके सीने पर फेरने लगी। कर्नल ने अभी तक अपनी वर्दी पहन रखी थी जिसकी शर्ट के ऊपरी बटन सबीना ने तुरंत ही खोल लिये थे और कर्नल के सीने पर हाथ फेरने लगी।

कर्नल ने भी बिना समय बर्बाद किए हाथ सबीना की कमर पर रखा और उसकी कमर को खींचकर सबीना को अपने सामने अपनी गोद में ले आया, सबीना ने अपनी दोनों टाँगें फैला ली और कर्नल की गोद में पैर सोफे पर लगा कर बैठ गई। सबीना का दुपट्टा अब भी सबीना के सीने पर था मगर उसकी क्लीवेज़ लाइन से हट चुका था और एक साइड पर सिमटा हुआ था। कर्नल ने सबीना के कंधे से दुपट्टा हटाया और नीचे गिरा दिया। अब सबीना कर्नल के सामने अपने सूट में उसकी गोद में बैठी थी। सबीना का सूट उसके मम्मों के ऊपरी भाग को छिपाने के लिए अपर्याप्त था, मम्मों के ऊपर वाला हिस्सा कर्नल की आँखों के सामने था और सूट की फिटिंग सबीना के मम्मों को आपस में मिलाए हुए थी जिसकी वजह से मम्मों के बीच गहरी लाइन बन रही थी जो किसी भी औरत की सुंदरता का प्रतीक होती है, और मम्मों की इसी लाइन पर पुरुष आकर्षित होते है। सबीना का सूट मम्मे समाप्त होते ही उसके पेट पर एकदम टाइट चिपका हुआ था उसके बाद का शरीर नाभि के नीचे तक एकदम मस्त था यहां तक कि सबीना के बदन पर कही भी बिल्कुल भी फालतू चर्बी नही थी कर्नल का हाथ सबीना की पीठ की मालिश कर रहा था। गर्दन से लेकर नीचे शलवार तक सबीना की कमर नंगी थी सूट सिर्फ़ महज १२ बारीक डोरयों से आपस में कसा हुआ था जबकि उसकी कमर और बाकी का सुंदर बदन अब भी काफी गीला था और पानी की बूंदे उसके बदन की खूबसूरती को चार चांद लगा रही थीं।

कर्नल की आदत थी कि वह हमेशा सेक्स की शुरूआत लड़की के होंठ चूस कर करता था मगर आज सबीना के गर्म जवान बदन पर मौजूद पानी की बूंदें कर्नल का दिल ले चुकी थी और उसने सबीना के होंठों से शहद पीने की बजाय उसके बदन से से निकला पीना शुरू कर दिया। कर्नल ने अपने होंठ पहले सबीना के कंधे और गर्दन के बीच वाली हड्डी पर रखे और बहुत प्यार के साथ होठों को आपस में मिलाकर सबीना के शरीर के इस हिस्से में मौजूद पानी को चूस लिया, तो मेजर ने अपनी जीभ बाहर निकाली और सबीना की गर्दन से लेकर उसके मम्मों के उभार तक कर सारा पानी अपनी जीभ से चाट लिया। जैसे-जैसे कर्नल सबीना के बदन से अमृत पी रहा था वैसे-वैसे सबीना की सिसकियाँ कर्नल का उत्साह बढ़ा रही थीं और उसकी पेंट में लंड ने सिर उठाना शुरू कर दिया था।

सबीना घुटनों बाल कर्नल की गोद में बैठी अपने मम्मों को कर्नल के आगे कर रही थी ताकि वह अधिकतम सबीना के बदन को चाट सके मम्मों पर मौजूद पानी को कर्नल ने शहद समझकर अपने होंठों से पिया और फिर मम्मों से नीचे अपने होंठ लाते हुए सबीना के पेट के ऊपरी हिस्से से नाभि तक पूरे बदन को अपने होंठों और जीभ से चाटने और चूसने लगा। सबीना अब पीछे की ओर झुकी हुई थी जबकि उसका पेट आगे की ओर निकला हुआ था जिस पर कर्नल की जीभ तेज तेज चल रही थी और पानी की एक एक बूंद पीने में व्यस्त थी,

कर्नल ने अपने हाथ सबीना की कमर पर रख कर उसको पीछे झुकने में सहारा दे रखा था। छुई मुई सी सबीना का वजन कुछ ज्यादा नहीं था इसलिए कर्नल ने एक हाथ सबीना की कमर से हटाया और उसके सूट के ऊपर से ही उसके बायें दायें मम्मे पर हौले से रखा। अपने मम्मों पर कर्नल का मजबूत हाथ देखा तो सबीना ने भी एक सिसकी ली और अपना एक हाथ कर्नल के हाथ पर रख कर धीरे से दबा दिया। जिसका मतलब था कि कर्नल अपने हाथ से सबीना के कोमल और नाजुक मम्मे को दबाना शुरू करे, और कर्नल ने यही किया जहां एक ओर उसकी ज़ुबान अब सबीना की नाभि में गोल गोल घूम रही थी वहीं उसका बायां हाथ सबीना के दाए मम्मे को धीरे धीरे दबा रहा था।

सबीना अपना एक होंठ दांतों में प्रेस कर आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, उमम्म्म्म ममममममम उमम्म्म्म ममम की हल्की-हल्की सिसकियाँ ले रही थी। जब कर्नल सबीना के गीले बदन से सारा पानी पी चुका तो उसने सबीना को कमर से पकड़ा और सोफे पर लिटा कर खुद उसके ऊपर आ गया, सबीना का एक पैर सोफे पर सीधा था जबकि दूसरा आधा खुला था और सोफे से नीचे था जबकि उसकी दोनों टांगों के बीच में कर्नल का एक पैर था, सबीना को सोफे पर लिटा कर कर्नल ने अपनी के वर्दी शर्ट के सारे बटन खोल दिए और शर्ट उतारकर साथ मौजूद टेबल पर रख दी और उसके बाद अपनी बनियान भी उतार दी। कर्नल के सीने पर हल्के हल्के बाल थे जिन्हें देखकर सबीना ने एक बार अपने होंठों पर जीभ फेरी और फिर कर्नल की ओर एक फ्लाइंग किस फेंकी,

सबीना होंठ जब गोल गोल घूमते और आपस में मिलते देखा तो कर्नल के होंठ भी पागल हो गये और कर्नल उसके ऊपर झुक कर दीवाना वार उसके होंठों को चूसने लगा जबकि सबीना की दीवानगी भी कुछ कम नहीं थी वह अपने दोनों हाथ कर्नल की कमर पर फेर रही थी और कर्नल का पूरा पूरा साथ दे रही थी, सबीना ने अपना मुँह खोला और कर्नल की ज़ुबान को अंदर जाने का रास्ता दिया, जैसे ही कर्नल ने अपनी ज़ुबान सबीना के गर्म गर्म मुंह में डाली सबीना ने मुंह बंद कर लिया और उसकी ज़ुबान को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

 
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