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विवाह compleet

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अक्षय (साला)



दीदी दो मिनिट चुप रही फिर थोड़ा शरमा कर बोली कि अक्षय, उसने फिर से मेरे स्तन को छुआ. छुआ ही नही, थोड़ा दबाया भी, पर मुझे बुरा नही लगा, मैं असल मे मन ही मन यही सोच रही थी कि देखें यह उस दिन वाली बात दुहराती है क्या. जिस तरह से उसने मुझे छुआ, मेरे निपल को हल्के से अपनी हथेली से घिसा, मुझे थोड़ी एग्ज़ाइट्मेंट हुई. इस बात पर मैने दीदी को खूब चिढाया और फिर ....... काफ़ी मस्ती कर ली, उसमे आधा घंटा चला गया. मामा मामी वापस आए तो मैं अपने कमरे मे भाग लिया.

असल मे काफ़ी थकान भी महसूस हो रही है, पिछले हफ्ते भर दीदी ने मुझे ज़रा भी आराम नही करने दिया, ना जाने क्या हो गया है उसे, ऐसी बहकती है ... मामा मामी जैसे ही बाहर हुए मुझे अपनी सेवा मे बुला लेती है. कितनी सुंदर है दीदी, उसकी उस सुंदरता के आगे मैं अपनी सारी थकान भूल जाता हूँ< जो वह चाहती है खुशी से करता हूँ, मेरी तो चाँदी हो जाती है. उस दिन बाद मे जब जम थक कर लस्त पड़े थे तो दीदी हान्फते हान्फते बोली कि कल नीलिमा दीदी उसे मॉल मे ले जाने वाली है, शॉपिंग को. मैने पूछा कि कैसी शॉपिंग तो मुन्ह बना कर बोली कि लिंगरी शॉपिंग के लिए. मैने

उसे पूछा कि क्या पहन कर दिखाने वाली है अपनी ननद को तो दीदी क्या शरमाई, देख कर मज़ा आ गया.

मैने दीदी को पूछा की दीदी, नयी नयी ब्रा और पैंटी ले लोगी तो ये इतनी सारी ढेर सी पुरानी ब्रा और पैंटी का क्या करोगी? दीदी मेरा गाल को दबाकर बोली कि तुझे दे जाऊन्गी, बहन की निशानी के स्वरूप, मुझे याद तो किया करेगा. मैं तो मस्ती मे पागल होने को आ गया. मैं मन मे सोच रहा था कि इसी तरह अगर नीलिमा और सुलभाजी की ब्रा और पैंटी मिल जाएँ तो सोने मे सुहागा हो जाए. यह मैने दीदी से नही कहा नही तो वह नाराज़ हो जाती. हाँ दीदी को यह ज़रूर कहा कि 'दीदी, तेरी ब्रा और पैंटी तो मैं खजाने जैसे संभाल कर रखूँगा पर तू इतनी दूर जा रही है उसका क्या? मैं तो पागल हो जाऊन्गा!'

दीदी ने मुझे सांत्वना दी, अपने ख़ास तरीके से. बहुत मज़ा आया. कुछ देर बाद उसने मेरे सिर को उपर उठाया, जहाँ मेरा सिर था वहाँ से उठाने को उसे मेरे बाल खींचने पड़े क्योंकि वहाँ से मैं अपने आप तो हटने वाला नही था. बोली कि वह कुछ ना कुछ इन्तजाम कर लेगी, आख़िर काफ़ी दिन अभी वह पूना मे ही रहने वाली थी. मैं तो इसी आशा पर हूँ कि दीदी से बीच बीच मे मिलता रहूँगा, उसके घर जा कर. और एक बार उसके घर आना जाना होने लगा तो स्वाभाविक है कि दीदी की ननद नीलिमा और सास सुलभाजी के दर्शन भी होंगे. वे मेरी बार बार आने जाने को माना ना करें यही मैं भगवान से मना रहा हूँ. पर वे ऐसी क्यों करेंगी, आख़िर मैं भी अब उनके परिवार का सदस्य बन जाऊन्गा. नीलिमा की छाती का वह उभार याद आता है तो अब भी मेरा .... याने दिल डौल जाता है. और सुलभा जी के आँचल मे से दिख रहे उनके .... ओह गॉड.

 


लीना (दुल्हन)


ये अक्षय कहाँ चला गया आज, बिन बताए, मुझे उसकी बहुत ज़रूरत है. मन काबू मे नही है, वह होता तो उसे ऐसा .... इतनी उत्तेजित मैं कभी नही हुई. डर लग रहा है, मन अब कहाँ कहाँ भटकता है, कैसे कैसे ख़याल मन मे आते हैं पर साथ ही मन मे जो अजीब आनंद उभर रहा है वैसा मैने आज तक महसूस नही किया. परसों अक्षया मुझे चिढ़ा रहा था, जब मैने उसे नीलम दीदी की हरकत के बारे मे बताया तो. मुझे भी समझ मे नही आता यह क्या चल रहा है, ऐसा तो किसी भी बहू के साथ नही हुआ होगा पर मेरा मन भी इतना मचलता है, कि क्या कहूँ, उसे ये सब बातें लगता है बहुत अच्छी लगती हैं. अक्षय को जब मैने अपनी सारी पुरानी ब्रा और पैंटी देने के बारे मे कहा तो क्या खुश हुआ वह बदमाश लड़का!

उसके तो प्यारे खिलौने हैं ये. वैसे सब ब्रा और पैंटी पुरानी हैं, सस्ती भी हैं, पर बेचारा अक्षय, मेरा प्यारा छोटा भाई, उन्हीमे

इतना खुश है कि देख कर मेरा मन भर आता है. अक्षय मेरा भैया, मेरा बहुत कुछ, कैसे रहूंगी रे तेरे बिना मैं!

इसलिए मैने सोच लिया है कि बचे दिनों मे उसका जितना साथ मिले, उसका आनंद उठा लूँ. आज कल मैं उसे एक पल अकेला नही छोड़ती, पास ही रखती हूँ. याने जब मामा मामी घर मे ना हों तब! वे बेचारे शादी की तैयारी मे जुटे हैं, अक्सर बाहर रहते हैं इसलिए मेरी और अक्षय की बन आती है. मस्त एकांत मिलता है. अक्षय भी खुश है पर बेचारा थक जाता है, कभी कभी भूनभुनाने लगता है कि दीदी अब छोड़ो ना, मैं थक गया. पर मैं मुझे जो करना है करती रहती हूँ जब तक मेरा

मन ना भर जाए.

अक्षय को मैने नीलिमा दीदी के बारे मे बताया कि कैसे वह मेरी ब्रा के बारे मे पूछ रही थी और कैसे बातों बातों मे उसने मेरे स्तन को छू लिया. पर अक्षय को मैने यह नही बताया कि नीलिमा ने ना सिर्फ़ मेरे स्तन को छुआ, बल्कि टटोल कर दबा कर भी देखा कि ब्रा ठीक से फिट होती है या नही. फिर बोली कि लीना, तेरी ब्रा अच्छी है पर दुल्हन को तो सब नयी चाहिए, ऐसा करते हैं कि पूरा नया सेट ले लेते हैं तेरे लिए. वह शायद महँगे ब्रांड याने एनमोर, लवबल आदि के बारे मे बोल रही होगी.

मैने तो आज तक वे पहनी नही, बेचारे अक्षय ने ही एक बार शौक से अपना जेब खर्च बचाकर मेरे जन्मदिन पर जॉकी ला दी थी, बस वही एक अच्छी है मेरे पास. अब तो सब नयी ले डालून्गी, मुझे अच्छी ब्रा और पैंटी पहनने का बहुत शौक है, मुझे मालूम है कि मैं सुंदर हूँ और इन अच्छे कपड़ों मे और निखर कर दिखेगा मेरा रूप. वैसे उसका क्या फ़ायदा होगा भगवान जाने. यायाह ये अनिल, मेरी होने वाला पति ना जाने किस मिट्टी का बना है! उसके बर्ताव से लगता नही है कि उसे मुझमे ज़्यादा इंटेरेस्ट है. पर उसकी कमी ननद और सास करा देती हैं, मुझे बहुत प्यार करती हैं लगता है दोनों.

एक और बात मैने अक्षय को नही बताई, वह बहक जाता. वैसे ही वह बदमाश अब धीरे धीरे नीलिमा दीदी के अलावा माजी के बारे मे भी इंटरेस्ट लेने लगा है. उसे इस बात के बारे मे बताया तो पागल ही हो जाएगा मस्ती से. असल मे हुआ यह कि परसों मैं जब वापस आने को उठी तो माजी बोलीं कि लीना ज़रा रुक, मैं भी साथ चलती हूँ मुझे भी बाहर जाना है, तुझे घर के पास छोड़ दून्गी. वे अपने बेडरूम मे चली गयीं कपड़े बदलने को. नीलिमा दीदी अपनी सहेली के यहाँ निकल

गयीं.

 


मैं वहीं बैठी एक मॅगज़ीन देख रही थी तभी माजी ने अंदर से आवाज़ दी कि लीना बेटी, ज़रा यहाँ आना. मैं अंदर गयी तो थोड़ा शरमा गयी क्योंकि सुलभाजी कपड़े बदल रही थी. सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट मे खड़ी थी. साड़ी बाजू मे रखी थी. ब्रा भी आधी पहनी हुई थी, स्ट्रॅप पीछे लटक रहे थे. माजी बोलीं कि लीना, देख, इस साड़ी पर मॅचिंग ये मोतिया रंग की ब्रा मैने बहुत दिनों बाद निकाली, लगता है मैं मोटी हो गयी हूँ या साइज़ बदल गया है, हुक नही लग रहे हैं, ज़रा लगा दे ना प्लीज़. मैने स्ट्रॅप खींच कर हुक लगा दिए. ब्रा वाकई बहुत टाइट थी.

अब स्वाभाविक है कि मुझे इतने पास से उनकी वो गोरी चिकनी पीठ और कमर दिखी. सामने के आईने मे ब्रा का आगे का हिस्सा दिख रहा था. ब्रा बहुत अच्छी थी, लेस लगी और एकदम पतले चिकने सटिन की बनी हुई, काफ़ी महँगी होगी. सुलभाजी सच मे काफ़ी रूपवती हैं, कपड़ों मे उमर के कारण एकदम उनका रूप दिखता नही है पर एकदम कंचन काया है उनकी. बहुत अच्छा मेनटेन किया है. उरोज भी कसे हुए थे, शायद अंडरवाइर ब्रा थी, नही तो इस उमर मे ऐसा जोबन किसका होता है! कमर भी एकदम सुडौल और मासल थी, बस एक हल्का सा टाइयर निकल आया था. पेटीकोट मे से उनके फूले गुदाज नितंबों का आकार भी दिख रहा था. अगर सही कहूँ तो मैं थोड़ी एग्ज़ाइट हो गयी. आज तक मुझे कभी दूसरी

स्त्रियों के प्रति यौन आकर्शण नही हुआ और यहाँ तो मेरे सामने मेरी होने वाली सास थी. इसलिए बाद मे मैने मन ही मन खुद को खूब कोसा और कहा कि लीना, क्या कर रही है, कैसी कैसी बातें सोच रही है, ज़रा शरम कर!

माजी ने शायद मेरे चेहरे पर के भाव देख लिए क्योंकि वे तुरंत मुस्कुरा कर बड़े प्यार से बोलीं कि 'लीना बेटी, अब मेरी उमर हो चली है इसलिए मैं ऐसे कपड़े क्यों पहनती हूँ यही सोच रही है ना तू?' मैने उन्हे तुरंत सांत्वना दी, कहा कि 'माजी आप बहुत सुंदर हैं, बस पांटयस की लगती हैं, यह साड़ी आप पर खूब फबेगी. वे खुश हो गयीं और बड़े लाड से मेरी ओर देखते हुए मेरे पास आईं. मेरे गाल को चूमा और बोलीं कि 'लीना, मेरी प्यारी बच्ची, तू तो मेरी प्यारी बेटी है' लाज से

मेरे गाल लाल हो गये तो बोलीं कि अरी शरमाती क्यों है, गाल को चूमा इसलिए? अरे बड़े तो लाड करते हैं ही छोटों का, मेरे लिए तो तू छोटी ही है'

मैं बहुत शरमाई पर मन मे बहुत अच्छा लगा. मैने माजी को वो स्लीवलेस स्लीवलेशस ब्लाउज पहनने मे मदद की. माजी बोली कि इतना कर रही है तो साड़ी भी बन्धवा दे, ये स्टार्च की हुई साड़ी लपेटने मे हमेशा मेरी आफ़त होती है. उन्हे साड़ी बाँधने मे मदद करते हुए उनके बदन की भीनी भीनी खुशबू मुझे महसूस हो रही थी. शायद उस साड़ी मे से आ रही होगी, पहले का सेंट लगा होगा पर उस सुगंध मे एक अजब मादकता थी. मेरी मन फिर डोलने लगा पर किसी तरह मैने अपना मन काबू मे रखा. साड़ी अच्छे से बंधने पर माजी ने मुझे फिर से शाबासी दी, मुझे एक पल लगा कि शायद फिर मुझे

चूमेगी और मैने आँखें बंद कर लीं पर उन्होने सिर्फ़ मेरे गाल को लाड से सहलाया. मेरे मन मे एक अजीब से गुदगुदी होने लगी. सच मे मुझे समझ मे नही आता कि मुझे क्या हो गया है. अक्षय को ये सब बताती तो वह फिर से मुझे चिढाने लगता.

 


कल मैं नीलिमा दीदी के साथ लिंगरिए लाने गयी. एकदम एक्सक्लूसिव दुकान थी. बस बड़े बड़े ब्रांड थे. मुझे सब तरह की लिंगरी दिखाई, एक से एक सेक्सी और अच्छी क्वालिटी की. अक्षय देखता तो पागल हो जाता. उसके बाद एक घंटे तक उसने मुझसे ट्राइयल करवाई. ट्रायल ट्राइयल रूम मे नही, वहाँ और भी कस्टमर लाइन लगाए थे. अंदर एक छोटा कमरा था,

नीलिमा मुझे वहीं ले गयी. दुकान की मालकिन, रूपा अरोरा उसकी सहेली थी. उसने सारा कलेक्शन वहीं भिजवा दिया. मुझे लगा कि नीलिमा अब बाहर चली जाएगी और मुझे अकेला छोड़ देगी पर वह भी मेरे साथ अंदर आई और दरवाजा लगा लिया. फिर मुझे बोली कि सब ट्राइ करके देखो. अब उससे मैं कैसे कहती कि तुम बाहर जाओ. आख़िर बड़ी ननद है. मुझे बड़ी शरमा आ रही थी पर फिर भी मैने आख़िर अपना ब्लाउस निकाला और नीलिमा की ओर पीठ करके अपनी पुरानी ब्रा भी निकाली और एक एक करके सब नयी ब्रा पहन कर देखी. पीठ नीलिमा की ओर थी पर सामने आईना था इसलिए उसे सब दिख रहा था. एक दो ब्रा उसने मुझे खुद पहनने दीं और फिर मुझे मदद करने लगी.

उसने तो मेरे स्तन दबाना ही शुरू कर दिया! हर ब्रा पहनने के बाद वह मेरे स्तन दबा कर देखती, उंगलियाँ लाइनिंग पर घुमाती, नोक पर पकड़ कर खींच कर देखती, बोलती टाइट तो नही है लीना, या ढीली लग रही है? निपल फँस रहे हैं क्या?' मैं शरम से पानी पानी हो रही थी पर क्या कहती. बीच मे ही नीलिमा ने मेरे फिगर की तारीफ़ की. बोली कि 'बड़े सुडौल उरोज हैं तेरे लीना, ज़्यादा बड़े भी नही हैं और छोटे भी नही हैं, तू तो मोडीलिंग कर सकती है, सच' बीच बीच मे उसके हाथ मेरे निपल पर लगते, एक दो बार तो शायद उसने उन्हे दबा भी लिया, मैने उसकी ओर देखा तो वह ब्रा की फिटिंग पर गौर कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही ना हो. मुझे भी ना जाने क्या हो गया था, बहुत उत्तेजना लग रही थी, निपल खड़े हो गये थे.

उसने तुरंत मेरी स्थिति भाँप ली. मेरे निपालों को उंगली और अंगूठे के बीच पकड़कर हल्के से मसल कर बोली कि 'हाय लीना, ये क्या हो रहा है तुझे. एक्सआइट एग्ज़ाइट तो नही हो गयी तू? वैसे अनिल तो यहाँ नही है फिर क्यों ये हालत हो गयी तेरी? अरे शरमा रही है, खैर जाने दे, मैं मज़ाक कर रही थी, ऐसा अक्सर होता है औरतों को जब वे इस खूबसूरत

माहौल मे आती हैं और ब्रा की ट्रायल लेती हैं' अब मैं उसे कैसे बताती कि नीलिमा दीदी, आपके छूने से यह उत्तेजना हुई है, अनिल की याद से नही.

वैसे उस भोन्दू ने अब तक मेरे साथ किया ही क्या है जो मैं उत्तेजित होऊ! मेरी उत्तेजना का एक और कारण था नीलिमा दीदी का वह रूप जो आज मैं इतने पास से देख रही थी और उसके शरीर की भीनी भीनी खुशबू जो उसके नज़दीक खड़े होने से मेरी साँसों मे भीं रही थी. आज नीलिमा लो कट सीलवलेस ब्लाउस और हिप्सटर साड़ी पहन कर आई थी. ब्लाउज तो लो कट था ही, उसने शायद एकदम छोटे कप वाली ब्रा पहनी थी को ऐसे ब्लाउस मे भी छिप जाती है. उसके गुदाज स्तन उसमे समा नही रहे थे और उफन कर जैसे बाहर आने को कर रहे थे. अचानक मेरे मन मे आया कि इन्हें छू लूँ, दबा कर देखूं. पर फिर मैने मन को लगाम दी, वैसे मुझे लगता है कि मैं अगर ऐसी करती तो भी नीलिमा बुरा नही मानती. फिर मेरे मन मे आया कि हो सकता है वह यह एक्सपेक्ट कर रही हो और मेरे कुछ ना करने पर थोड़ी निराश हो गयी हो, पर मैं ऐसा करने का साहस कैसे करती!

 


अच्छा, बात यहीं खतम हो जाए ऐसी भी नही हुआ. ब्रा सेलेक्ट करने के बाद पैंटी की बारी आई. मैं ना नुकुर कर रही थी पर नीलिमा दीदी अड़ गयी. इस बार मैने मना कर दिया, आख़िर शरम की भी कोई हद होती है. मैने मना किया तो मुझे आँख दिखा कर मुझे डाँट कर बोली 'अरे शरमाती क्यों है इतना? मैं क्या गैर हूँ? मेरे लिए तो छोटी बहन जैसी है तू. अरे नाप वाप का चक्कर हो गया तो फिर से आने को अब टाइम नही है' मैने घुटने टेक दिए, चुपचाप अपनी साड़ी, पेटीकोट

और पहनी हुई पैंटी निकाली और नयी वाली पहन कर देखीं. सब की ट्राइयल करने के बाद नीलिमा का समाधान हुआ. इस बार उसने मुझे छुआ नही, बस मेरी कमर के नीचे देखती रही, शायद पैंटी की फिटिंग देख रही हो पर मुझे तो और ही कुछ लगता है. मैं साड़ी फिर से पहन रही थी तब मुझे आँख मार कर बोली कि 'लीना, अनिल बड़ा लकी है. फिर बोली कि

अच्छा हुआ कि मैं शेव वग़ैरहा नही करती आजकल की युवतियों जैसी, उससे औरत की नॅचुरल ब्यूटी खतम हो जाती है.'

मैने मन ही मन कहा कि बड़ी आई मेरी नॅचुरल ब्यूटी की बात करने वाली, इसे क्या करना है? वैसे मुझे गुस्सा नही आया, बल्कि अच्छा लगा कि वह मेरे शरीर की तारीफ़ कर रही है, मेरा एग्ज़ाइट्मेंट भी थोड़ा बढ़ गया. हमने करीब सात आठ सेट लिए और बाहर आए. बिल हुआ सात हज़ार रुपये. मेरा दिल धड़कने लगा, किसी तरह मैं बोली की नीलिमा दीदी, मैं देती हूँ. वैसे मैं कहाँ से देती, मेरे पार्स मे सिर्फ़ दो हज़ार थे! पर नीलिमा मुझे आँख दिखा कर बोली कि खबरदार अब कभी पैसे देने की बात की, तू हमारे घर की बहू है, तेरे रूप को सजाना हमारा फ़र्ज़ है. उसके बाद हमने वहीं बारिस्ता मे काफ़ी ली. काफ़ी पीते समय नीलिमा दीदी बड़ी आत्मीयता से बातें कर रही थी, बार बार मेरा हाथ पकड़ लेती. मुझे ये बहुत अच्छा लगा. उस सुंदर नारी की मैं अब तक पूरी फन बन चुकी थी.

 


मुझे सच मे समझ मे नही आ रहा है कि ये सब क्या हो रहा है. पर इतना मालूम है कि इतनी खुश मैं पहले कभी नही थी. बस एक बात ख़टकती है कि ये सारी खुशी सिर्फ़ नीलिमा और माजी के बर्ताव के कारण है, मेरे होने वाले पति अनिल का इस मे कोई योगदान नही है. शादी के पहले ये हाल है तो शादी के बाद ना जाने क्या होगा. पर अभी तो अक्षय को ढूँढती हूँ और पकड़कर अपने कमरे मे ले आती हूँ. उस मूरख को भी अभी बाहर जाने की सूझी जब मामा मामी घर पर

नही है, अपनी प्यारी दीदी की सेवा करने का इतना सुनहरा मौका गवाना क्या ठीक है?




अनिल (दूल्हा)


शादी की तारीख पास आ गयी है. लीना पिछले हफ्ते हमारे घर आई थी. मैने कुछ देर गप्पें मारी, फिर सटक लिया. उसे शायद बुरा लगा होगा पर मैने सोचा कि फालतू मे उस सुंदर युवती के एक्सपेक्टेशन बढाना उचित नही है. वैसे वह दोपहर भर हमारे यहाँ थी और ममी और दीदी ने उसके साथ बड़े प्यार से बातें की. जाते समय लीना बहुत खुश थी ऐसा जब ममी ने कहा तो नीलिमा ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी. बोली कि अरे अनिल, आज उसे पता चल गया कि उसकी होने वाली सास कितनी सुंदर है इसीलिए खुश होगी. ममी ने नीलिमा का कान पकड़कर उसे चुप कराया पर वह भी मुस्करा रही थी. हमारी ममी भी कुछ कम नही है, उसने ज़रूर कोई गुल खिलाया होगा लीना के साथ. अब तो बहू घर मे आने वाली है इसलिए उसका उत्साह दुगना हो गया है. शाम होते ही वह क्या फॉर्म मे आ जाती है मुझे मालूम है, मुझसे और नीलिमा दोनों मिलकर भी उसे नही संहाल पाते. मानो दस साल घट जाती है उसकी उमर रात को.

परसो दीदी नीलिमा को शॉपिंग को ले गयी थी. वापस आते ही गुस्से मे मुझपर बरस पड़ी. बोली कि कैसा मूर्ख है तू, इतनी सुंदर अप्सरा जैसी पत्नी को छोड़कर शादी के बाद वापस उस जेसन के पास जाने वाला है. मैने कहा कि दीदी, जाने के पहले अप्सरा का प्रसाद लेकर ही जाऊन्गा, बाद मे तुम मा बेटी मिलकर संभाल लेना उस अप्सरा को. मुझे अप्सरा नही चाहिए या अच्छी नही लगती ऐसा थोड़े ही है. जेसन के पहले मैं करता ही था ना अपनी दोनों अप्सराओं की ... मेरा मतलब है इन दो

देवियों की पूजा! अब ज़रा मामला बदल गया है, देवियों के साथ साथ देव की पूजा करने का भी मन होता है मेरा.

फिर दीदी ने बड़े डीटेल मे अपनी होने वाली भाभी के रूप का बखान किया. मा बड़ी तल्लीन होकर सुन रही थी. नीलिमा की बात सुनकर बोली कि 'अरे मैं कब से कह रही थी कि मुझे भी ले चल पर यह बदमाश नीलिमा माने तब ना, मुझे डाँट कर घर पर ही रहने को कहा.' दीदी ने मा को समझाया, वह बेचारी नयी नवेली होने वाली दुल्हन, अगर हम दोनों साथ हो लेते तो घबरा नही जाती! मैं अकेली थी इसलिए मैने संभाल लिया. अब मुझसे बहुत घुल मिल गयी है. अब घर आएगी शादी

के बाद तो अपनी सास से भी उतना ही घुल मिल जाएगी. लीना की सुंदरता का बखान सुनकर मेरा भी मन डोल गया. मैने

ममी से कहा कि अगर तुम दोनों कहो तो मैं भी जर्मनी जाना कॅन्सल कर देता हूँ. मा बोली कि नही बेटा, ऐसा मत कर, जेसन राह तकता होगा तेरी, तू जा और मौज मस्ती कर ले, फिर वापस आएगा तब रह लेना बहू के साथ. तेरी गैर हाज़िरी मे हम दोनों ख़याल रखेंगे तेरी पत्नी का, उसे ट्रैनिंग भी तो देनी पड़ेगी हमारे घर के रीति रिवाजों की. हमारा भी समय मज़े मे कटेगा, तू चिंता ना कर. नीलिमा बड़े नटखट अंदाज मे सुन रही थी और मुस्करा रही थी.
 


मैं समझ गया कि इन दो मा बेटी के मन मे क्या चल रहा है. मेरे पीछे बहू की ये कैसी खातिर करेंगी मुझे मालूम है. क्या क्या खेल सूझते हैं इन दोनों को, वैसे आपस मे खेलती रहती हैं पर अगर मैं घर पर हुआ तो मिलकर मेरे पीछे पड़ जाती हैं. अब नया खिलाड़ी मिल गया है ... या मिल गयी है, अब सारे प्रयोग उसके उपर होंगे. मैने उनसे फिर वही कहा जो उस दिन लड़की पसंद करने के बाद घर पर आकर मैने कहा था कि दीदी, ज़रा संभाल कर, मुझे डर लगता है कि जोश जोश मे तुम उस बेचारी का ना जाने क्या हाल कर दो. मुझे तुम दोनों पर तनिक भी भरोसा नही है इस मामले मे, आख़िर मैने भी तो बचपन से सहा है .. मेरा मतलब है कि बहुत सुख भी पाया है मैने पर फिर भी अपनी जो हालत हुई थी वह मैं कैसे भूल सकता हूँ!

ममी बोली कि मेरे राजा बेटा, तू चिंता ना कर. हम ठीक से सब संभाल लेंगे. पहले पहले बहू की पसंद से ही करेंगे पर कुछ कुछ बातें जो कब से मन मे हैं, वे फिर धीरे धीरे बाद मे करेंगे, ज़ोर ज़बरदस्ती करनी पड़ी तो वो भी करेंगे, बहू यहाँ ठीक से हम दोनों मे घुल मिल जाए उसके बाद. अगर रोएगी धोएगी तो मना लेंगे प्यार से बाद मे. आख़िर यहाँ इतने सुख भी तो हैं. तुझे भी तो मालूम है कि जो जो सीडी या डीवीडी वग़ैरहा तू हर बार जर्मनी से लाता है उसमे कैसे कैसे मजेदार खेल होते हैं. मुझे कैसा कैसा लगने लगता है वो देखकर, वैसे ही प्रयोग करने की इच्छा होती है पर करें किस पर, ये नीलिमा तो अब घाट घाट का पानी पी चुकी है इन बातों मे, अब मज़ा आएगा जब कोई नया सदस्य मिलेगा ये सब करने को. अब मौका मिला है, कब से मै मना रही थी कि कोई सुंदर सी सीधी साधी बहू आए घर मे. और तू सीडी और डीवीडी के साथ वो जो तरह तरह के यन्त्र और खिलौने लाता है, वे भी वैसे ही पड़े हैं, किसी पर अभी तक इस्तेमाल भी नही किए.

मैं मान गया कि मैं लीना को उन दोनों के पास छोड़कर जर्मनी चला जाऊन्गा. वैसे मुझे मालूम है कि मा और नीलिमा मन की अच्छी हैं, बहुत ज़्यादती नही करेंगी, लीना की सेहत पर आँच नही आने देंगी.हां इस प्यार के अनोखे खेल मे लीना को थोड़ा बहुत तो सहना पड़ेगा, आख़िर बहू बन कर आ रही है इस घर की. बीच मे एक दो बार मैं लीना के घर मिलने को गया था. लीना से बातें की पर मेरा ध्यान असल मे अक्षय की ओर था. पहली बार लीना सामने थी इसलिए जिस तरह से बोलना चाहता था वैसे बोल नही पाया. दूसरी बार लीना घर पर नही थी. मौके का फ़ायदा उठाकर अक्षय के साथ खूब गप्पें लड़ाईं. सच मे मस्त चिकना छोकरा है, लीना का भाई बनने लायक है. लड़कियों के कपड़े पहना दें तो लगेगा नही कि लड़का

है. साला उस दिन एक टाइट जींस पहनकर बैठा था. उसके उस गोल मटोल बबल बॉटम का आकार उसकी जींस मे से दिख रहा था. मन तो हो रहा था कि उसे सहलाऊ या दबा दूं, फिर सोचा कि अभी जल्दी करना ठीक नही है, कहीं बिचक ना जाए, बाद मे तो आएगा ही पकड़ मे. उस दिन सिर्फ़ खेल खेल मे उसकी जाँघ पर हाथ रखा था तो कैसे मुझे देख रहा था!

 


उसके मन मे काफ़ी प्रश्न हैं ऐसा लगता है. कभी कभी बड़ी उत्सुकता से मेरी ओर देखता है जैसे जायज़ा ले रहा हो कि मेरे मन मे क्या है. समझ जाएगा बाद मे. पर मुझे लगता है कि एक बार हाथ आ जाए, तो बड़े प्यार से अपने आप को मेरे हवाले कर देगा. उसे मेरी पर्फ्यूम लगता है बहुत पसंद आई है. मेरी हर बात बाद मे उसे अच्छी लगेगी, कहाँ से कहाँ ले जाऊन्गा उसे. वैसे बाद मे मैने उसे एक पर्फ्यूम की बॉटल गिफ्ट मे दी. खुश हो गया पठ्ठा. आख़िर पचास डालर डॉलर की परफ्यूम है. मैने मन मे कहा कि मेरे राजा, मुझसे ठीक से दोस्ती करो, मेरे मन की मुराद पूरी करो तो जो चाहोगे वे

मिलेगा. उसकी कमसिन जवानी देखकर मुझे अपना बचपन याद आता है. क्या मतवाले दिन थे वे! जब पहली बार दीदी और ममी ने मुझे .... याने साथ मे लिया तो कैसे दोनों मुझे खुश करने को तरह तरह के तोहफे देती रहती थी.

जैसे जैसे शादी की तारीख पास आ रही है, मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा है. जेसन के पास जाने को भी मन कर रहा है और यहाँ भी रहने को मन करता है. शादी के बाद का पहला महीना बहुत इंट्रेस्टिंग होगा. और ख़ास कर लीना के लिए तो वह बड़ा ही अलग होगा. देखता हूँ. अगर अक्षय हाथ लग जाए तो सोच रहा हूँ कि जर्मनी छोड़ कर फिर वापस यहीं आ जाऊ.

 


नीलिमा (ननद)


लीना अच्छी घुल मिल गयी है हमारे साथ. कल शादी है, फिर वह घर मे आ जाएगी. पिछले हफ्ते से वह मेरे बहुत करीब आ गयी है. मैं उसे अच्छी लगती हूँ यह पक्का है. असल मे मैं जिस तरह प्रेम से थोड़ा

अधिकार जता कर उससे पेश आई, उससे वह मेरी गिरफ़्त मे आनी ही थी. वैसे मेरा रूप भी इस के लिए ज़िम्मेदार है, मुझे बड़ा गर्व है अपनी सुंदरता पर. मामी ने ही तो सिखाया है कि कैसे अपने रूप का इस्तेमाल किया जाता है. जिस किसी की भी रगों मे जवान खून है, चाहे वह मेरे भाई जैसा मर्द हो या फिर लीना जैसी प्यार प्यारी युवती, मैं उसे रिझा सकती हूँ.

लीना का हुस्न भी ऐसा है कि किसी को भी पागल कर देगा. उस दिन लीना के लिए ब्रा और पैंटी खरीदते समय मेरा मन कितना भी डोल रहा हो, मैने उसके साथ बिलकुल नॉर्मल नॉर्मल बनी रही. फिर भी वह बिचारी बहुत शरमा रही थी. हां, जब वह पैंटी बदल रही थी तब मैं अपने आप को बड़ी मुश्किल से रोक पाई. मन तो कर रहा था कि अंदर से दरवाजा बंद कर दूं और वहीं उसे .... खैर किसी तरह सब्र कर गयी.

परसों मैने उसे किस किया. बिलकुल खेल खेल मे, उसपर बिना ज़रा भी दवाब डाले. शॉपिंग के बाद हम दोनों एक मूवी देखने गये थे. वह मेरे पास बैठी थी, बालकनी मे, कोने की सीट पर. भीड़ नही थी इसलिए आस पास कोई नही था. एक बड़ा रोमांटिक रोमटिक सीन सीन चल रहा था. परदे पर हीरो ने हेरोयिन को किस किया तो मैं लीना के पास सरक कर उसके कान मे फुसफुसाई "लीना रानी. क्या सीन है, अगर मैं अपने बॉय बाय्फ्रेंड के साथ होती तो ज़रूर चुम्मा ले लेती और अगर अनिल यहाँ होता तेरे साथ तो वह ज़रूर तुझे ऐसे चूम लेता" और इसके पहले कि वह कुछ कहती, मैने उसे पास खींच कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. वह बिचक गयी, पहले उसे समझ मे नही आया कि क्या करे. आख़िर मैं उसके ननद थी, उसे डर था कि अगर मुझे दूर धकेलेगी तो मैं बुरा ना मान जाऊ. मैने मौके का फ़ायदा उठाकर उसके रेशमी बालों मे उंगलियाँ चलाईं और फिर से उसके होंठ चूम लिए, इस बार ज़रा ज़्यादा देर तक. उसका तना हुआ बदन अचानक ढीला पड़ गया और उसने मुझे अपना चुंबन लेने दिया, दूर हटाने का प्रयत्न नही किया, सिर्फ़ लाज से पानी पानी हो कर पुतपुताई की क्या नीलिमा दीदी आप भी...बड़ी शैतान हैं.

मैने फिर से उसे किस नही किया, हां उसका हाथ अपने हाथ मे ले लिया. उसने भी हाथ छुड़ाने की कोशिश नही की. बीच मे एक बेडरूम सीन आया. मैने फिर से उसके कान मे कहा कि लीना, क्या हॉट सीन है, है ना ... और उसका हाथ अपनी छाती पर दबा लिया. वह बेचारी वैसे ही बैठी रही अपना हाथ मेरे स्तनों के बीच रखकर. बहुत शर्मा रही थी बेचारी. फिर अनजाने मे, जब हीरो हेरोयिन से कुछ कर रहा था, उसने मेरा स्तन दबा दिया. अनजाने मे ही उससे यह हुआ होगा, आख़िर वह भी इंसान है बेचारी, कहाँ तक अपने आप को रोक पाएगी!

 


मूवी खतम हुई तो वह मुझसे नज़रें चुरा रही थी. मेरी ओर देखने को तैयार नही थी. गर्दन झुकाकर शरमाकर चल रही थी.

मैने एक दो इधर उधर की बातें कीं, उसे संभालने का मौका देने को. फिर हम एक होटल मे खाना खाने को गये. डिनर तक वह फिर मुझसे खुल कर बातें करने लगी थी. अब वह मुझसे आँखें मिलाने मे भी नही कतरा रही थी. शायद वह कुछ कुछ समझ गयी थी कि यह सब क्या चल रहा है. मैने मौके का फ़ायदा उठाकर उससे उसके छोटे भाई अक्षय के बारे मे पूछा कि तुम दोनों बहुत करीब लगते हो. पहले तो वह कुछ घबराई और बात टालने की कोशिश करने लगी. मैने फिर कहा कि तेरा भाई तो बड़ा भक्त लगता है अपनी दीदी का. सुनकर लीना ने मुझसे नज़र मिलाकर कहा कि हां दीदी, मुझसे बहुत प्यार करता है, बेचारा मुझसे बिछड़ने की बात सोच सोच कर ही रोने को आ जाता है. मैने कहा कि लीना, सब लड़कियाँ शादी के बाद अपने भाई से थोड़ी बहुत तो दूर चली ही जाती हैं.

लीना ने बड़े सधे अंदाज मे कहा कि दीदी, वह मेरा भाई ही नही, मित्र भी है, मेरा यार है. और ज़्यादा कुछ नही बोली पर मैं समझ गयी. मन ही मन उसकी इस ढिठाई पर मैने उसे मुबारकबाद भी दी. मैने भी सहजता से उसे कहा कि लीना, चिंता ना कर, बुला लिया कर उसे जब मान चाहे, उसे ये भी बता कि अब लीना दीदी जैसी एक और दीदी भी मिल जाएगी उसे याने मैं, नीलिमा दीदी. पहले वह मेरी ओर देखती रह गयी फिर हँसने लगी. इतनी हँसी कि उसकी हँसी रुक ही नही रही थी. किसी तरह हँसना रोक कर बोली कि हां दीदी, कह दून्गी, वह तो खुशी से उछल पड़ेगा. लीना को छोड़ने मैं उसके घर तक गयी. रात काफ़ी हो गयी थी. उसके घर के थोड़ा पहले ही मैने कार रोकी. लीना दरवाजा खोल कर उतरने लगी तो मैने कहा कि लीना, अगर अनिल होता मेरी जगह, तो ज़रूर तुझसे गुड नाइट किस मागता. अब मेरा यहा उल्लू का पठ्ठा भाई तो नही है पर उसकी जगह तू किस मुझे दे दे, मैं उसे दे दून्गी. पहले लीना कुछ देर मेरी ओर देखती रही, उसके गाल गुलाबी हो गये थे, फिर अचानक उसने मेरा सिर अपने हाथों मे लिया और मुझे एक पप्पी दी, सीधी सादी गाल वाली पप्पी नही, बल्कि मेरे होंठों पर होंठ रखकर एक गहरा चुंबन लिया. वह भी अच्छा एक मिनिट का चुंबन! फिर उतर कर भागी.

जाते जाते हंस कर मुझे कह गयी कि दीदी, अनिल को देकर मुझे बताना कि कैसा लगा मेरा यह चुंबन!

 
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