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शैतान से समझौता

कनौजिया एक नोन क्रिमिनल था जो कि अवैध रूप से मुजरिमों को हथियार फायर आर्म्स वगर सप्लाई करता था। उसके सर कुछ हत्याएं भी थीं।सुबह सुबह ही पुलिस के एक मुखबीर ने फोन पर ये खबर दी थी कि वो शहर से दूर एक अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग के बेसमेंट में कोई मिटिंग करने वाला है।

दिया अपने आफिस में थी जब उसके पास उसके आर्फनेज के मैनेजर का फोन आया।

"मैडम आप कुछ देर के लिये यहां आ सकती हैं? वो बच्ची जो कल यहां आई थी न उसकी तबियत ठीक नहीं और वो आपको ही याद किये जा रही है"

"कौन अर्शिया?" दिया ने पूछा

"जी मैडम शायद एक बार मिल लेगी तो उसे तसल्ली हो जाएगी"

दिया फ़ोन रख कर सोचने लगी... क्या करूं? विनय ने मना किया था उससे मिलने को..पर क्यूं..वो एक बच्ची ही तो है और अभी तो बिमार भी है...जल्दी से मिल के आ जाती हूं विनय को नहीं बताउंगी...नहीं तो वो गुस्सा होगा

उधर विनय पूरे दल बल के साथ उस बिल्डिंग में पहुंचा जहां कनौजिया नाम के अपराधी के होने की खबर मिली थी। आफरा तफरी मच गई। एक लंबी मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उनके तीन आदमियों को पकड़ लिया और एक को शूट कर दिया जो पुलिस ,

पर ही गोलियां चला रहा था।

कनौजिया छिप कर भागने लगा पर विनय ने उसे देख लिया। वो उसके पीछे भागा। भागते भागते सामने एक दिवार आ गई...वो पलटा..उसके हाथ मे एक पिस्टल थी..

जबकि उसके भागने से विनय ने सहज ही सोच लिया था कि वो निहत्था था। विनय ने फुर्ती से उसके पिस्टल वाले हाथ पर गोली चलाई पर तब तक...

वो ट्रिगर दबा चुका था.....

उसे हल्की हल्की बातचीत की आवाज सुनाई दे रही थी। वो जैसे गहरी नींद से उठा हो।

"किस्मत अच्छी थी..बस फ्लैश वूंड है..डाक्टर बोल रहे थे कि जान का खतरा नहीं पर बुलेट ने लोअर रिब्स को हिट किया है..."

विनय ने धीरे से आंखें खोली..वो हास्पिटल में था। उसे दिया उसके पास ही खड़ी थी और सब इंस्पेक्टर अर्जुन भी।

"दि...य..या..." विनय कराहता सा क्षिण स्वर में बोला

"विनय!"। दिया जल्दी से उसके पास आ गई "तुम ठीक हो...तुम्हें कुछ नहीं हुआ..सब ठीक है..." वो रो रही थी..

विनय हल्का सा मुस्कुराया

तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और...

अर्शिया अंदर आ गई

विनय की आंखे खौफ़ से फैल गईं। उसने एक फूलों का गुलदस्ता पकड़ रखा था। उसने मुस्कुरा कर विनय को देखा और उसकी बगल वाली टेबल पर गुलदस्ता रख दिया।

विनय का अभी अभी आपरेशन हुआ था और अर्शिया का वहां होना उसके लिये किसी सदमें से कम न था। उसने बोलने की कोशिश की पर नहीं बोल पाया...घबराहट से उसकी सांसें जोर जोर से चलने लगी..

,

"विनय!!!" दिया घबरा गई। तभी वहां डाक्टर और एक नर्स आ गए।

"आपलोग बाहर जाईये प्लीज़" डाक्टर बोला। विनय बहुत कुछ बोलना चाहता था पर उसके चेहरे पर आक्सीजन कैप लगा दिया गया। फिर जल्दी से उसे सीडेटिव का इंजेक्शन दे दिया गया।

विनय लाचारी से देख रहा था...वो अंतत: कुछ नहीं कर पाया..अर्शिया दिया की उंगली पकड़े खड़ी थी और विनय को देख कर व्यंग से मुस्कुरा रही थी....

"वो ठीक हो जाएंगे.." अर्शिया, दिया की आंखे पोछती हुई बोली। दिया ने सर हिलाया

"आप चाहती हैं मैं आज आपके साथ रहूं? आपको अकेले नहीं रहना चाहीये..." अर्शिया बोली।

दिया ने उसके मासूम चेहरे को देखा और चाह कर भी मना नहीं कर पाई।
 
अर्शिया, दिया के बेडरूम में बैठी टीवी देख रही थी। दिया किचन में उसके लिये सैंडविच बना रही थी। विनय को लेकर वो चिंतित थी चोट तो उसे आई थी पर राहत की बात थी कि वो खतरे से बाहर था।

"अर्शिया..." उसने आवाज़ लगाई। "सैंडविच"

वो डाईनिंग टेबल से फालतू सामान उठाने लगी। अर्शिया नहीं आई न उसने जवाब दिया।

"अर्शिया!" दिया अपने बेडरूम में आई। टीवी चल रही थी पर अर्शिया वहां नहीं थी। कहां गई! बाथरूम...बालकनी..

वो कहीं नहीं थी।

उधर हास्पीटल में विनय को होश आया। वो कराहता हुआ बेड से उतर गया। उसने महसूस किया उसके सीने पर पट्टीयां बंधी थी। उसने हाथों में लगी ड्रिप भी नोच कर फेंक दी। सब इंस्पेक्टर अर्जुन ,

अंदर आया...

"अरे सर आप...इस..तरह" वो हड़बड़ाया

"जल्दी पहुंचना होगा..मेरी रिवाल्वर कहां है? गाड़ी स्टार्ट करो जल्दी" वो कपड़े पहनने लगा

"सर आपको गोली लगी है..." वो मिमिया कर बोला

"टाईम नहीं है...इट्स माई आर्डर डैम इट..." विनय जोर से गरजा।

दिया को अर्शिया कहीं नहीं मिली। वो परेशानी से हाल में खड़ी थी। उसने किसी को फोन लगाया..फोन कान से लगाए हुए उसकी नज़र छत पर पड़ी..तो...फोन उसके हाथों से छूट गया!

अर्शिया किसी छिपकली की तरह छत से चिपकी हुई थी। उसकी पीठ छत से चिपकी थी जबकि चेहरा दिया तरफ था और वो उसे गुस्से घूरे जा रही थी।

दिया जोर से चीखी।

वो किसी छिपकली की तरह ही रेंगती हुई छत से दिवार पर और दिवार से फर्श पर आई और दिया के सामने खड़ी हो गई। उसकी आंखें पूरी काली थीं उनमें सफेद हिस्सा नहीं था। उसके हाथ और पैर भी पंजे जैसे दिख रहे थे...

वो दिया की तरफ हौलनाक अंदाज़ में बढ़ने लगी

"तुम्हें अपने मंगेतर की बात माननी चाहीये थी....

उसके गले से वही तीखा कर्कश स्वर निकला जो विनय दो बार फोन पे सुन चुका था। वो किसी नौ साल की बच्ची की आवाज़ तो हरगिज़ नहीं थी।

"उसने कहा था न..मुझसे दूर रहना.. .

दिया पीछे हटने लगी...वो बेहोश होने ही वाली थी तभी..

फ्लैट का दरवाज़ा खुला और विनय धड़धड़ता हुआ अंदर आ गया। ,

वो अर्शिया और दिया के बीच में खड़ा हो गया और अर्शिया पर गन तान दी। उसका चेहरा दर्द से भिंच गया था पर वो मज़बूती से खड़ा था।अर्शिया हंसने लगी..एक भयानक हंसी...

तभी दाएं तरफ का बालकनी वाला दरवाज़ा खुल गया और एक लंबी काली आकृति अंदर आ गई।

विनय को याद आया उसने पिछली रात भी शायद इसी आकृति को बालकनी में देखा था। वो कोई लंबी सी औरत थी जिसने लंबा काला चोगा जैसा कुछ पहन रखा था। वो बिलकुल अर्शिया के सामने खड़ी हो गई। विनय ने देखा अर्शिया वापस सामान्य दिख रही थी और अपने सामने खड़ी औरत को डर के देख रही थी। उसने अर्शिया की कलाई पकड़ ली

"छोड़ो मुझे.."अर्शिया चिल्लाई। वो औरत उसे खींच कर ले जाने लगी। विनय हैरान था। अर्शिया की उस औरत पर एक नहीं चल रही थी।

"छोड़ो मुझे...मैं घर नहीं जाउंगी ..ममा!! छोड़ो"

विनय ने चौंक कर उस औरत को देखा जिसकी पीठ उसकी तरफ थी। वो फ्लैट के दरवाजे तक पहुंच गई थी।

तो ये थी!! अर्शिया की मां!!!

दरवाजे पर पहुंच के वो ठिठकी और मुड़कर बेहोश दिया को देखने लगी। उसने अपना पूरा चेहरा ढंक रखा था सिर्फ आंखे खुलीं थी जिनमें इस वक्त अफ़सोस भरा था। वो चली गई।

विनय वहीं खड़ा ठगा सा देखता रहा। उस औरत ने भले ही चेहरा ढंक रखा हो पर उन आंखों को विनय पहचान चुका था....

तो इसलिये अर्शिया उसे जानी पहचानी लगती थी...

उसे याद आया जब वो पहली बार अर्शिया से मिला था तो उसे कैसा झटका लगा था। हमेशा लगता था कि वो उसे पहले कहीं देख ,

चुका था! अब समझ आया कि वो क्यों जानी पहचानी लगती थी!

वो बिलकुल अपनी मां जैसी जो थी..हूबहू!

तभी उसके खयालों को एक झटका सा लगा...

अरे! अगर "वो" अर्शिया की मां थी तो इसका मतलब...इसका मतलब...ओह गाॅड! विनय कटे पेड़ सा लहराया और वहीं फर्श पर बैठ गया...

भयंकर सच्चाई किसी खंजर की तरह उसके दिल में उतर गई... वो जान चुका था कि....

अर्शिया उसकी अपनी बेटी थी!

विनय ही अर्शिया का पिता था!
 
"बस बहुत हो गया..बहुत मनमानी कर ली..अब और नहीं.." वो दांत पीसती हुई बोली।

"ममा मुझे वहां नहीं रहना..प्लीज़..साॅरी अब मैं बाहर नहीं जाऊंगी..प्राॅमिस!" अर्शिया मिमियाती हुई बोली।

"जाओगी तो तब न जब दरवाजा खुलेगा..." वो कहर भरी आवाज़ में बोली और अर्शिया को घसीटती हुई घर के आखरी कमरे तक ले गई। वहां एक बंद दरवाजा था।

"नहीं ममा प्लीज़..मुझे नहीं जाना.." दरवाजे को दहशत से देखती अर्शिया चीखी।

उसकी मां ने दरवाजा खोला उसे अंदर धक्का दे कर जल्दी से दरवाजा़ बंद कर दिया। अर्शिया अंदर बुरी तरह चीख रही थी...जैसे उसकी मां ने उसे कमरे में नहीं आग में धक्का दे दिया हो।

वो वहीं दरवाजे से टिक कर फर्श पर बैठ गई। अंदर से अभी भी अर्शिया के चीखने की आवाज़े आ रही थीं।

उसे रह रह के वो दिन याद आ रहा था जब वो उसे उसके पैदा होते ही मार डालने वाली थी। पर एन मौके पर उसकी हिम्मत जवाब दे गई थी (जहां से कहानी शुरू हुई थी-पहला भाग)

अगर तब उसने वो कर दिया होता तो.....

"आई एम साॅरी...विनय...सब मेरी गलती है..." वो सुबक रही थी...

वो एक बहुत बड़ी कंपनी का विशाल आफिस था। विनय रिसेप्शन पर पहुंचा।

"मेकप हो गया हो तो इधर आना' विनय खीज के बोला।

रिसेप्शनिष्ट ने जल्दी से लिपस्टिक ड्रार में डाली और विनय के पास आ गई।

"गुड मार्निंग सर! मे आई हेल्प यू?" वो जबरन मुस्कुराई।

"हरमन अंदर है? तुम्हारा बाॅस?" विनय ने रूखेपन से पूछा।

वो हड़बाई। हरमन ओबेराॅय उस कंम्पनी का मालिक था। पहले कभी किसी ने इस तरह उसे नहीं पूछा था।

"सर! डू यू हैव अपाइंटमेंट" वो पूछी। जवाब में विनय ने अपना आईडी कार्ड दिखा दिया। वो सकपकाई और पीछे एक बंद दरवाजें की तरफ इशारा कर दिया।

वो एक भव्य आॅफिस था जिसमें एक विशाल सी मेज के पीछे एक एक्ज़क्युटिव चेयर पर वो बैठा था..वही जिसके जूते से लेकर टाई पिन तक हर चीज से विनय को नफ़रत थी। उसके हाथ में फोन का रीसीवर था..जाहीर था उसे रिसेप्शन से ने विनय की सूचना मिल गई थी।

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"वैसे तो मैं किसी की धौंस नहीं खाता..पुलिस की भी नहीं पर अब आ ही गए हो तो बोलो..क्या चाहीये?" वो फोन रखता हुआ ठंडे लहजे में विनय से बोला। विनय के अंदर गुस्सा उबलने लगा।

साला ऐसे बन रहा था जैसे मुझे पहचानता ही नहीं....

"जेनिफर कहां है?" खुद पर काबू करते हुए विनय ने पूछा।

"क्या? कौन जेनिफ़र..किसकी बात कर रहे हो?" वो रूखे स्वर में बोला।

"वही जेनीफ़र जिसके पीछे तू दुम हिलाता फिरता था कालेज में...भूल गया?" विनय एक एक शब्द चबाता हुआ सा बोला।

वो गुस्से में कुर्सी से उठ खड़ा हुआ।

"बहुत बरदाश्त कर लिया तुम्हें..नाओ लीव़!!" वो दरवाजे की तरफ उंगली दिखाता हुआ बोला। "वैसे भी तुम इस शहर के नहीं लगते...कमीश्नर तक पहुंच है मेरी..तुम्हारी वर्दी उतरवा सकता हूं इस बद्तमीज़ी के लिये"

उधर हास्पीटल में दिया को होश आया। उसे नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था। एक रात पहले अर्शिया नाम की वो अनाथ बच्ची! कुछ और ही निकली! उसे याद करके अब भी उसे सिहरन हो रही थी।

"दिया!!..बच्चा!!..." उसके पापा पास आए। विनय ने दिया के माता पिता को फोन कर दिया था।

"पापा! विनय कहां है?" दिया धीरे से बोली।

"उसे कुछ काम था बेटा..पुलिस की नौकरी जो ठहरी" दिया की मां बोली। दिया को फिक्र हो रही थी। विनय को गोली लगी थी..,वो कहां था...

विनय अपने पुराने शहर में था। जहां वो पुलिस की नौकरी से पहले रहा करता था। जहां उसका कालेज था।

,

एक शानदार चमचमाती कार रोड पर दौड़ी जा रही थी। शाम हो रही थी वो थोड़ा सूनसान इलाका था। रोड पर कोई गिरा हुआ था। कार एक भीषण चरमराहट के साथ रूक गई।

"ओह गाड! आर यू ओके! क्या हुआ?" कार से उतरता हरमन ओबेराॅय उस आदमी के पास पहुंचा जो रोड पर पड़ा था। वो विनय था!

"यू?? ये सब..." उसकी बाकि की बातें उसके मुंह में रह गई। विनय का एक जबरजस्त घूंसा उसके चेहरे से टकराया।

"कमीश्नर को बुलाएगा!!" विनय फुंफकारता सा बोला और उसकी कालर पकड़ कर उसे उसी की कार पर टिका दिया। "चल बुला.." विनय ने उसकी जेब से मोबाईल निकाला और जबरन उसके हाथ में थमाता हुआ बोला।

"तू फोन कर मैं घोड़ा दबाता हूं" विनय बोला। उसके हाथ में उसकी गन थी।वो गुस्से से उबल रहा था।

"लिसन लिसन...तुम क्यों मेरे पीछे पड़े हो मैं तो तुम्हें जानता भी नहीं" वो गिड़गिड़ाया।

"अच्छा!!नहीं जानता!!" विनय गुस्से में बोला और गन वाला हाथ उपर उठाया। वो उसकी नाक तोड़ने ही वाला था कि

"अरे कुछ बताओ तो सही..मेरे बाप" वो कलपा।

विनय ने एक लंबी सांस ली जैसे अपने गुस्से पर काबू कर रहा हो फिर उसे सब कुछ बताया।

"लिसन मैन.." वो खीजता सा बोला.."मेरा आफिस तुम देख ही चुके हो, मेरी कार देखो! मुझे देखो! मैं फारेन ग्रेजुएट हूं। मेरी तो स्कूलिंग तक यूएस से हुई है। तुम्हें लगता है तुम जिस मिडिल क्लास कालेज का नाम ले रहे हो मैं वैसे कालेज में कभी कदम भी रखूंगा!!!"

विनय सोचने लगा।

"बिलीव मी मैं कभी उस कालेज में नहीं गया तो वहां की किसी ,

स्टूडेंट..अ..जेनिफ़र? को कैसे जान सकता हूं!"

वो अपने होठ पर हाथ फिराता बोला जो विनय के मुक्के से कट गया था। विनय को वो सच बोलता लग रहा था पर ये कैसे संभव था!

"पहले वो बुढ्ढा गोवानी और अब तुम..." वो अपनी कालर ठीक करता हुआ बोला।

"कौन??" विनय ने पूछा।

"एक बुढ्ढा आया था मेरे आफिस में वो भी किसी जेनिफ़र को पूछ रहा था...लगभग दो साल हो गए"

"कौन था वो?" विनय ने जल्दी से पूछा।

"मुझे क्या पता.." उसने लापरवाही से कंधे उचकाए..."पर मैं पता करने की कोशिश करूंगा" वो विनय के चेहरे के भाव देखता हुआ जल्दी से सुर बदला "हो सकता है उसकी सीसीटीवी फुटेज मिल जाए..."

विनय को उम्मीद कम थी की दो साल पुरानी एक गैरजरूरी सीसीटीवी फुटेज अब भी मौजूद होगी पर क्या किया जा सकता था।

"विनय! कहां हो तुम? मुझे टेंशन होने लगी थी..ऐसे बिना बताए कहां चले गए?" दिया फोन पर बोली

"डिपार्टमेंट का काम था दिया आना जरूरी था जल्द ही लौटूंगा.." विनय ने साफ झूठ बोल दिया।

"पर तुम्हारा जख्म.."

"मैं ठीक हूं..रखता हूं..लव यू..बाय..." वो जल्दी से बोला और फोन कट कर दिया। जब दिया को जेनिफ़र के बारे में पता चलेगा तो..वो..., इसके आगे वो सोचता ही नहीं था। उसे रह रह कर याद आ जाता था कि जिस रात वो अर्शिया से मिल कर लौटा था उस रात उसने जो भयानक घटनाएं देखी उनमें दिया उसे छोड़ कर जा रही थी... "तुमने मुझे धोखा दिया..झूठ बोला.." उसके शब्द थे!

हां अर्शिया! ये मेरे दिल में दफ़न मेरा सबसे बड़ा डर है! उसने मन ही मन सोचा।

सीसीटीवी फुटेज तो नहीं मिली पर जब सारी बातें आफिस के गार्ड को पता चली तो उसने आसानी से बता दिया कि वो बुढ्ढा गोवानी कौन था। वो उसे पहले से जानता था।

उसका नाम मारियानो था जो पेशे से प्लंबर था। उसका एक ठिकाना भी बताया जो कि बीच के पास का एक गंदा सा खपरैल पुराने जमाने का बार था। बार क्या देशी शराब का अड्डा था।

"मारियानो कहां मिलेगा?" विनय कैश काउंटर पर खड़े एक व्यक्ति से पूछा। वो भले ही वर्दी में नहीं था पर उसकी आवाज का रौब कद काठ और कमर में खुंसी रिवाल्वर उसके पुलिसीया होने की चुगली करते थे।

"वो...वो जो आखरी वाली बेंच पे बैठा है‌ वो ब्राउन ब्लेज़र वाला.." वो जल्दी से बोला।

वो बैठा क्या सामने की मेज पर लुढ़का पड़ा था। वो एक बहुत ही दुबला पतला सा मरघिल्ला सा आदमी था।विनय उसके कंधे पकड़ कर झकझोर दिया। वो नहीं उठा। उसके गाल थपथपाने लगा पर वो नहीं उठा।

"मारियानो!!!" वो कान में चिल्लाया। उसका पारा चढ़ने लगा।

"अबे उठ!!!" उसने मुक्का तान दिया। अचानक मारियानो ने एक हाथ से उसका मुक्का हवा में ही रोक लिया...विनय कुछ समझ पाता इसके पहले ही दूसरे हाथ का प्रचंड घूसा उसके पेट में पड़ा। वो दोहरा हो गया और हैरान भी!

विनय खुद हट्टा कट्टा छ: फीट का था...दूसरी तरफ ये मरीयल सा बूढ़ा और इतनी ताकत!

"भाव नहीं खाने का...समझा!" वो उठकर खड़ा हो गया था "जो ,

कुछ भी बोलने का विद रिस्पेक्ट बोलने का" मारियानो बोला।

दिन ढल रहा था। विनय और वो बूढ़ा मारियानो बीच पर एक चट्टान पर बैठे थे। सामने समुद्र हिलोरे मार रहा था।

"तू विनय है न...मैं जानता तेरे को..जेनिफ़र ने बताया था"

"मैं उसे ही ढूंढता हुआ आया हूं..कहां है वो और तुम कैसे जानते हो उसको?"

"हां मै जानता उसको...तुम बोलो कोई पंगा?" मारियानो एक सिगरेट मुंह में दबाता हुआ बोला। विनय असहाय भाव से इधर उधर देखने लगा।

"देख भिड़ू! हेल्प चाहीये तो पूरा बात बताने का..तभीच्च मैं कुछ कर पाएंगा" मारियानो दुबारा बोला। जवाब में विनय ने सारी आपबीती सुना दी।

"जीजस!!!" वो सदमें से बोला.."अभी कैसा है वो? तेरा फियांसी?"

"हास्पिटल में है..नर्वस ब्रेकडाउन...

"नहीं..तेरेको इस पंगे में नहीं पड़ने का मैन..वापिस जा अपना लव से शादी बना..खुश रह..भूल जा सबकुछ। जेनिफ़र से कोई मिस्टेक हो गया होएंगा जो बेबी लिलियाना तेरेको ढूंढ लिया। अब वो ध्यान रखेंगा। तू जा...पंगा मत ले"

"लिलियाना!!...वो बच्ची??" विनय ने पूछा

"शशशशशश...भूल जा ...बोला न तू जा... मैं जेनिफर को मिल के सब सेटल करता है"

"नहीं..मैं नहीं जाउंगा बिना सबकुछ जाने तो नहीं। पहले तो वो अचानक गायब हो गई..ढूंढे नहीं मिली और अब जब मैं अपनी जिंदगी में खुश था सब ठीक होने लगा था तो वो अचानक वापस आ गई क्यों??"

वो बहुत देर तक समुद्र को घूरता रहा..,सूरज डूब रहा था।

"तब मैं पोंडा में था बोले तो मेरा होम टाउन.. आई वाज़ ट्वैंटी सिक्स इयर्स ओल्ड..जब 'वो' मेरेको मिली.."

बुढ़ऊ रोमांटिक हो रहा था...

"मैं साला टिन का पिचटा कनस्तर और वो! किसी एंजील के माफिक ब्यूटीफुल! जब वो मेरे को भाव देने लगा, आई वाज़ फीलींग लाईक...मतलब मैं साला पूरे वर्ल्ड का सबसे लकी परसन। बाद में शादी भी बनाया उससे..और मेरा डाटर जेनिफ़र मेरा लाईफ में आया...."

"क्या??? विनय चौंकता सा बोला.."जेनिफर तुम्हारी बेटी है!"

उसने सहमति में सर हिलाया। उसकी आंखों के कोर गीले होने लगे थे।

"पर मेरा वाईफ अलीशा...स्ट्रेंज! कभी चर्च नहीं जाता था..प्रे नहीं करता था..और मैं! अक्खा ईडीयट उसके ब्यूटीफुल फेस के अलावा मेरेको कुछ दिखता किधर था!" वो कड़वाहट से बोला।

"जब बेबी जेनिफ़र टू ईयर्स का हो गया तो उसने बताया कि वो वापिस से प्रेंग्नेंट। मैंने उससे बोला कि मैं टू चिल्डरन्स नहीं अफोर्ड कर सकता। वो बहुत आरग्यू किया मेरे से और अपने डैडी के घर चला गया"

शायद वो पहली बार किसी से अपने दिल की बात कह रहा था...

"मैं उसे लेने उसके डैडी के घर गया। वहां मेरे बहुत से इनलाज़ थे। रिलेटिव्स..फिरेंड्स..नेबर्स..

एक रात डिनर पर उन लोगों ने जो मेरेको बताया..मेरा लाईफ..चेंज्ड!..जीजस.." वो आह भरता सा बोला।

"क्या बताया?" विनय ने पूछा

"मेरा वाईफ..बोले तो..बोले तो वो..

हाफ़ डीमन(शैतान).."

,

उसने जबड़े भींच लिये जैसे ये बोलने भर से उसे बहुत चोट पहुंची हो।

"क्या??" विनय हैरानी से बोला.. "डीमन!!!"

"हां मेरा वाईफ ही क्यों उसके पैरेंट्स, रिलेटिव सभी..ह..हाफ ड..डीमन्स.."

सन्नाटा सा छा गया। विनय चुप रहा।

"फिर मेरा फादर इन ला बोला कि उसका अलीशा ने कोई खाली फोकट मेरे जैसे हलकट से शादी नहीं बनाया..बोले तो मैं भी साला ह....." वो चुप हो गया।

विनय चुप रहा। मारियानो ने अपने ब्लेज़र के पाकेट से एक बाटल निकाल ली और उसका एक लंबा घूंट भरा। मानो आगे बोलने के लिये ताकत बटोर रहा हो।

"बाद में मुझे पता चला कि वो लोग अकेले नहीं थे। उनके जैसे और भी थे। अक्खा गोवा बल्कि अक्खा कंट्री में थे। ह्यूमन के कपेरीज़न में बहुत कम थे...पर थे। और यही उनका मोटिव था.. अपना माफिक लोगों का पापुलेशन बढ़ाने का..

"अलीशा बोला मेरेकू कि मैं खुद को लकी समझे कि मैं भी टू चिल्ड्रेन्स का कांट्रीब्यूशन कर रहा है..और जेनिफ़र..

"जेनिफर क्या?" विनय ने पूछा

"वो बहुत पावरफुल था और उसका बर्थ भी खास कंडीशन में हुआ था..वो टेम आने पर डेविल को स्पेशल करके सर्व करेगा ऐसा खुद..जेनिफ़र का मदर बोला.."

"तो तुम्हारा दूसरा बच्चा...?" विनय ने पूछना शुरू किया

"सेकेंड बेबी..माय फुट.." उसने नफरत से थूंक दिया जमीन पर।

"नेक्स्ट डे या नाईट बोले तो अलीशा का 'बेबी शावर सेरेमनी' था...घर के पीछू वाले जंगल में। वो भयानक था" उसके शरीर ने जोर की झुरझुरी ली। "वो लोग वहां डेविल का पूजा करता। सारा

हाफ डीमन प्रेज़ेट था वहां। वो डिफरेंट डिफरेंट वाइस में चिल्ला रहे थे। कोई पेड़ से उल्टा लटकता तो कोई पैदल ही पेड़ पे चढ़ता...हारीबल"

बोले तो मैं हेडेक का बहाना बनाके वापस बस्ती में लौट आया और तैयारी करने लगा...

"कैसी तैयारी?" विनय ने पूछा।

"जब वो ब्लडी डीमन्स पार्टी करके वापिस आए न तो मैंने सबके गुड नाईट बोलने का वेट किया...फिर उस बस्ती में ही आग लगा दिया" मारीयानो खौफ़नाक लहजे में बोला।

विनय भौचक्का सा उसका मुंह देखता रहा।

"देख तो साला मेरेको!" वो हंसने लगा..

"पुलिस वाले कू बता रहा है कि मैं मर्डर कियेला है" फिर वो गंभीर हो गया।

"पर ये गाॅड कि दुनिया है... इधर डीमन काय को रहेगा पर जेनिफ़र!..नहीं उसे नहीं मार पाया मैं..क्या करेंगा..हाफ डीमन है मैं..पर साला हाफ ह्यूमन भी तो है" उसका गला भर आया।

"वहीच्च मिस्टेक हो गया मेरे से। मैं उसको ले के इस शहर में आ गया सोचा था कि सारे लोचा से दूर उसे एक नार्मल ह्यूमन की तरह बड़ा करेंगा..पर किधर.."

"क्या हुआ?" विनय ने पूछा

"अब कुछ तो बराबर हुआ न मैन....वरना बेबी लिलीयाना जैसा पावरफुल डीमन कहां से आता!.. हम सारे हाफ डीमन हैं हमेरे अंदर थोड़ा बहुत डीमोनिक ब्लड है पर वो..वो पूरा डीमन ही है..बस थोड़ा सा ही ह्यूमन है..

विनय नज़रें चुराने लगा।

,

"तेरेको क्या हुआ?" मारियिनो ने पूछा।

"जेनिफ़र ने बोला था..वो मेरा बच्चा है..अर्शिया मेरा मतलब है लिलियाना...

मारियानो जोर से हंसने लगा। विनय को कुछ कुछ वो हंसी वैसी ही लगी जैसी वो फ़ोन पे सुन चुका था।

"वो तेरा डाटर नहीं होना सकता" मारियानो बोला। "तू देखा न उसको..वो कितना पावरफुल, अपना मदर, बोले तो जेनिफ़र से भी जादा पावरफुल..पर तू तो क्लीन है। नार्मल है। तू? और उसका 'फादर'? नक्को.."

"पर ये सारा झमेला क्या है?" विनय खीजता सा सवाल किया। "कौन हैं ये 'हाफ डीमन' ? कहां से आए?"

मारियानो दुबारा समुद्र की तरफ देखने लगा। एक सिगरेट और सुलगाया...

"कभी काउंट ड्रेकुला का कहानी पढ़ा है?" वो नाक से धुआं छोड़ता हुआ बोला। विनय ने उसे असमंजस से देखा।

"बहुत ब्रेव किंग था वो, तुर्की लोगों से अपना लोगों की सेफ्टी वास्ते वार किया। पर जब उसका लविंग क्वीन एलीजाबेथ का डेथ हुआ तो अपना सारा नोबलटी भूल के उसने डेविल से डील किया बोले तो शैतान से समझौता किया और पिशाच करके बन गया"
 
"वैसा ही कहानी ब्लैक फिलिप का है। वो शैतान का सेकेटरी टाईप काम करता है। इनोसेंट गर्ल से अपना डायरी पर साईन मांगता है। वो गर्ल्स लोगों को स्पेशल पावर मिलता पर बदले में वो विच(डायन) में बदल जाता..एग्रीमेंट हुआ न!"

वो सांस छोड़ता सा बोला "मेरेको नहीं पता ये सब स्टोरीज कितना सच है पर हम हाफ डीमन्स लोगों का भी ऐसा ही कहानी है। हमेरे ,

भी किसी बाप दादा ने कभी शैतान से समझौता किया होएंगा। शैतान को इस अर्थ पर अपना औलाद चाहीये था, वो हो गया..हम सब वही तो हैं..मैं भी!"

विनय ने उसकी आवाज़ में कड़वाहट साफ महसूस की।

क्या ये बूढ़ा शराबी सच बोल रहा था!! उसके पास से शराब सिगरेट और पसीने के अलावा एक अजीब सी गंध और आ रही थी जो कि विनय को किसी जानवर जैसी लग रही थी!!

इसके अलावा पीछे बार में जो मुक्का उसे पड़ा था वो इस "डेढ़ पसली" के हिसाब से जादा नहीं था!! इतनी ताकत!!

"तुम्हें ये सब पसंद नहीं?..बाकियों को तो शायद है.!" विनय बोला जिसे अब मारीयानो पे भरोसा हो गया था।

मारियानो कुछ पल तक उसे घूरता रहा फिर उसने अपना ब्लेज़र उतार दिया और शर्ट की आस्तीन चढ़ा ली।

"ये देख इधर.." वो अपना हाथ विनय को दिखाता हुआ बोला

"जब भी मैं चर्च जाता मेरा स्कीन हर टेम एसहीच्च बर्न होता

हर टेम..मेरा चाईल्डहुड से यहीच होता आ रहा है"

विनय ने देखा उसके दोनों हाथों पे जलने के निशान थे

"पर मैं चर्च जाना नहीं छोड़ेगा..." वो सख्त चेहरे से बोला

"पहले मैं हर संडे जाता था जब से पता चला मैं हाफ डीमन है मैं डेली जाता..." वो जिद भरे स्वर में बोला।

"मेरे अंदर का डीमन हर बार जलता है चर्च में मैं उसे और जलाता है..मैं कैसे किधर को पैदा हुआ ये मैं कंट्रोल नहीं करना सकता पर मैं कैसे मरेंगा और मरने के पहले क्या करेंगा ये तो मेरे ही हाथ है न?"

वो थोड़ा देर रुका और सिगरेट के कश लगाता रहा।

,

"मैं मेरा वाईफ का मर्डर किया इनलाज़ का भी मर्डर किया चाहता तो मैं भी शैतान को फालो करता पर नहीं...मैं ओनली बाॅडी से हाफ़ डीमन..बाई हार्ट? पूरा ह्यूमन..समझा!"

विनय के मन में इस वक्त अपने बगल में बैठे उस आदमी के लिये असीम सम्मान था। एक दुबला पतला सा शराब और तम्बाकू की बदबू से भरा हुआ भी वो किसी संत की तरह पवित्र लग रहा था।

"काश जेनिफ़र भी मेरी तरह सोचता.." वो आह भरता हुआ बोला। विनय ने उसको सवालिया नज़रों से देखा

"बोले तो जब वो प्रेंगनेंट था तभी समझ गया था कि उसका बेबी नार्मल नहीं है। उसे बुरे बुरे विज़न्स आते थे..वो अपना बेबी का हर फीलींग खुद फील कर सकता था बिलकुल क्लिअर! जो कि मोस्ट आफ द टाईम वर्स्ट ही रहता"

उसके चेहरे का भाव सख्त हो गया था

"मेरेको उसका मदर का बात याद आया..कि समय आने पर वो शैतान को इस्पेसल करके ट्रीट करेगा.." उसके शरीर ने स्पष्ट झुरझुरी ली।

"तब मैंने उसको सबकुछ बताया वो कौन है उसका मदर कौन था पर सबसे बड़ा प्राबलम था कि जो आने वाला था वो कौन है!!!

"सबकुछ जानने के बाद वो सबसे दूरी बना लिया..तुमसे भी..

मैने उसे समझाया कि जो आ रहा है वो एक डेंजरस डीमन है जो अपना इंडीकेशन्स पहले ही दे रहा है, उसको फिनिश करना जरूरी। पर जेनिफ़र भी तो थोड़ा सा ह्यूमन था न अपना बेबी को फिनिश करने के नाम पे उसक कलेजा हिलता था"

उसकी आवाज भर्रा रही थी।
 
फिर वो मान गया। नया बाजार के पास मेरा एक खोली बोले तो फिलैट है छोटा सा। बंद ही रहता था। मेरा बोलने पर जेनिफ़र उधर ,

चला गया...जब बेबी आने को था। उसने मेरे से प्रामिस भी किया था कि बेबी का आते ही वो उसे मार डालेगा...पर नहीं मार पाया होएंगा। दो दिन बाद जब मैं उधर गया तो फिलैट खुला था पर वहां कोई नहीं..वो चला गया था। मेरे को बाद में दूसरा लोगों से पता चला कि वो यहां से दूर किसी और शहर में अपना बेबी लिलियाना के साथ रहता। सबकुछ ठीक चल रहा था। मैं कई बार चुपके से उन दोनों को देखने गया पण..."

"पर क्या?" विनय ने पूछा

"टू ईयर्स पहले जब मैं वहां गया तो खोली को ताला लगा था। पता नही वो मदर-डाटर किधर गया! शायद उनको मेरा आने का पता चल गया? या कुछ और? फिर मैंने जेनिफ़र के कालेज का फिरेंड लोगों से बात करने का डिसाइड किया.."

"तुम हरमन ओबेराॅय के पास भी गए.." विनय बोला। उसने सहमति में सर हिलाया।

"पर उसका ये सबसे कोई मतलब नहीं। वो नार्मल है तुम्हेरी तरह। और वो हलकट से खुद का बिवी तो पिरेगनेंट होता नहीं हां उसका सेकेटरी बोले तो तीन बार हो चुका"

विनय ने घूर कर उसे देखा। वो खिसियाना सा हंसा।

"पर वो हमारे कालेज में था और जेनिफ़र के पीछे भी पड़ा था?" विनय बोला।

"नक्को.." मारियानो सर हिलाता हुआ बोला..."उसने मुझे उस ड्यूरेशन का अपना बहुत सा फोटू और बाकि का चीज दिखाया..वो तब अमरीका में था..जो हरमन तुमलोगों के साथ कालेज में था..वो 'कोई और' था..." वो रहस्यमयी आवाज़ में बोला।

"तो अब जेनिफ़र कहां है तुम्हें नहीं मालूम?" विनय ने पूछा

,

उसने न में सर हिला दिया। विनय उठने लगा।

"किधर को जाता मैन?" मारियानो बोला।

"उन दोनो को ढूंढना तो पड़ेगा ही!" विनय बोला

मारियानो भी हड़बड़ाता हुआ खड़ा हो गया।

"मरने का है तेरेको???" वो दहशत से बोला। "अब तो तू जानता न वो कौन है या बोले तो 'क्या' है? वो इस्पेसल करके तेरे और तेरा फियांसी के पीछू पड़ा और तू फिर से उसीच्च को ढूंढने जाता?"

"हम्म..बोले तो मैं भी साला हाफ ह्यूमन" उसके लहजे की नकल करता विनय बोला।

मारियानो सकपकाया "और बाकि का हाफ?"

"पुलिसवाला है न" विनय हल्केपन से बोला।

"जोक मारता है मैन! मसखरी करता!"

"जोक??" विनय अब गंभीर लहजे में बोला..."उस लड़की ने दो बसों का एक्सीडेंट कराया जिसमें से एक बस तो मासूम बच्चों से भरी हुई थी...मनोज वर्मा, उस बेचारे ने जिसने उसे गोद लिया था उसे बरबाद कर दिया। अगर मौके पर जेनिफ़र नहीं पहुंचती तो शायद मेरा और दिया का भी वही हाल होता..नहीं बिना सबकुछ 'ठीक' किये मैं वापस नहीं जाने वाला। वो लड़की खतरा है सबके लिये"

मारियानो बहुत देर तक चिंतित भाव से उसे देखता रहा।

"चलो.." विनय बोला

"किधर?"

"नया बाजार वाली तुम्हारी 'खोली' जहां जेनिफ़र अपनी डीलिवरी के समय थी"

"अब उधर क्या रखा है..वो तो बंद पड़ा कब से.." मारियानो बोला।

विनय ने जवाब नहीं दिया और उठ कर चल दिया। मरियानो आह ,

भरता सा उसके पीछे चलने लगा...

मारियानो ने ताला खोला और धूल उड़ाते हुए दरवाजा खुला। उसने एक बत्ती जलाई..मकड़ियों के मोटे मोटे जाले चमकने लगे। वहां सबकुछ अस्त व्यस्त और धूल से भरा था। उनके अंदर आते ही चूहे इधर उधर भागने लगे।

विनय टिपिकल पुलिसिया अंदाज में वहां की तलाशी लेने लगा।

"तेरेको जेनिफ़र इधर ड्रोअर में मिलेंगा क्या.." मारियानो खीजता हुआ बोला। विनय अपना काम करता रहा।

कुछ देर बाद उसे सफलता मिली जब वो उस दीमक लगे पलंग के नीचे चेक कर रहा था।

"वहां क्या है!!!" वो हैरानी से बोला

"चूहा होएंगा और क्या.." मारियानो बोरीयत से बोला

वो एक घिसापिटा सा कागज था जो थोड़ा फर्श से चिपक भी गया था। विनय ने सावधानी से उसे बाहर निकाला। उस पर मोटी धूल जमी थी और किनारे भी चूहों ने कुतर डाले थे। उस पर कुछ लिखा हुआ था जिसकी स्याही भी धुंधला गई थी..पर इतनी नहीं कि पढ़ी ना जा सके...

ये वही चिट्ठी थी जो उस फ्लैट को छोड़ने से पहले जेनिफ़र ने लिखी थी!

विनय के लिये लिखी थी!

जिसे अब...पूरे नौ सालों बाद वो पढ़ने जा रहा था..

"डियर विनय

जानती हूं तुम मुझे ढूंढते यहां जरूर आओगे...."

,

ज्यों ज्यों वो उस चिट्ठी को पढ़ता जा रहा था उसकी हैरानी भी बढ़ती ही जा रही थी। "हाफ डीमन्स" के बारे में मारियानो ने अब तक जो उसे बताया था वो तो...कुछ भी नहीं था!!!

वो डाईनिंग टेबल पर बैठी हुई थी। हास्पीटल से आए हुए चार दिन हो चुके थे पर अब भी उसका चेहरा मुर्झाया हुआ सा था। सबसे जादा उसे विनय की कमि खल रही थी। उसे तो यहां होना चाहीये था। कहां गायब था वो।

तभी उसकी सूप के बाउल में उपर से कुछ गिरा। वो चौंक गई। वो बाउल में देखने लगी। उसी वक्त उसके हाथों पर भी कुछ गिरा। उसने परेशानी से छत की तरफ देखा

"कहां से ये....

और उसकी सांस हलक में ही अटक गई।

वो वहीं थी! छत से चिपकी हुई! किसी छिपकली की तरह! उसकी आंखे पूरी काली थी और हाथ पैर ने पंजों की शक्ल ले ली थी। लंबे सुनहरे बाल उसके डरावने चेहरे के चारों तरफ़ झूल रहे थे...

दिया कुछ समझ पाती इससे पहले उस "चीज" ने उस पर छलांग लगा दी

वो चिल्लाती हुई उठ खड़ी हुई। उसकी कुर्सी पीछे गिर गई। दोनों हाथों से अपना चेहरा ढंक कर वो जोर जोर से चीखने लगी।

"दिया!! दिया क्या हुआ!! दिया!!"

"कुछ बोल तो सही!! दिया!!!"

दिया शांत हुई हाथों से चेहरा हटाया‌। सामने उसके मम्मी पापा चिंतित से खड़े थे।। हिम्मत करके उसने उपर देखा तो खाली छत दिखी। फिर वही भयानक सपना!

अब तो दिन में भी...तभी

"दिया!.."

दिया थोड़ा चिहुंक के पलटी..सामने विनय खड़ा था। वो वापस आ चुका था।

"विनय!!! " वो भागती हुई उससे लिपट गई।

"कहां थे तुम.." वो उसके कंधे पर सर रख के सुबक रही थी।

"सब ठीक है..ठीक है.." उसके बालों में उंगली फिराता विनय बोला..."अच्छा सुनो मुझे कुछ बात करनी है तुमसे.."

कई सालों पहले की एक रात...

सड़कें सूनसान थीं...घोर सन्नाटा पसरा हुआ था वहां। बस आवारा कुत्तों के भौंकने की आवाज़े आ रहीं थी थोड़ी थोड़ी देर में। अचानक दूर कहीं से किसी के भागने आवाज आयी। थोड़ी देर में एक लड़की का साया दिखा जो सड़क पर बेतहाशा भागी जा रही थी। वो असमान्य लंबे कद की थी और उसके बाल भागते वक्त पीछे की ओर लहरा रहे थे।ऐसा लग रहा था वो किसी से डर कर भाग रही थी।

भागते भागते वो छायाओं में कहीं गुम हो गई।

"किधर गयी? अब्बी तो यहीं थी" एक मर्दाना आवाज आयी।

कहां जाएगी...होगी यही कहीं ढूंढो" दूसरी आवाज़ आई

"स्साली! मिले तो सही सारी शानपट्टी निकाल देंगें" कोई और बोला।

"अबे घोंचूओं! बात ही करते रहोगे क्या? हाथ पैर भी हिलाओ.."

वो चार पांच लोग होंगे। अभी वो लोग बहस कर ही रहे थे कि..

"तड़... " कि आवाज़ से सबसे पास का स्ट्रीट लैंप बुझ गया।

,

सब चौंक कर उधर ही देखने लगे और सकते में आ गए!

उस बुझ चुके लैंप के नीचे 'वो' खड़ी थी जो थोड़ी देर पहले भाग रही थी..बिलकुल शांत खड़ी थी वो!

अंधेरे में उसका चेहरा या कुछ और नहीं दिख रहा था। पीछे से आती दूसरी स्ट्रीट लाईट की रोशनी में बस एक लंबी आकृति दिख रही थी।

"ये तो खुदिच्च सामने आ गी" उनमें से एक बोला.."क्या लोचा है?"

वो धीरे धीरे उनकी तरफ बढ़ने लगी। उसके हाई हील्स की आवाज़ गूंज रही थी। वो रौशनी में आई तो सबकुछ भूल कर वो पांचो फिर से लार बहाने लगे।

वो बहुत खूबसूरत बनी थी। गहरी भूरी आंखे, गोरा रंग, लंबे लहराते धूसर काले बाल और असमान्य रूप से लंबा कद...वो खूबसूरत शक्ल और "कुछ और" देखने में इतने खोये हुए थे कि अब उस शक्ल पे आ चुके खतरनाक भाव उन्हें नहीं दिखे।

"अब कहां जाएगी.." वो सब आगे बढ़ने लगे...

तभी वातावरण में बहुत सी धीमी धीमी और गुस्से से भरी गुर्राहटें भरने लगीं। सभी ने चौंक कर आस पास देखा। थोड़ा अंधेरा था..फिर भी दिख गया...वो खौफ़नाक मंज़र!
 
बहुत से आवारा कुत्ते उन्हें घेरे खड़े थे और खतरनाक तरीके से गुर्रा रहे थे..वो सामान्य गुर्राहटें नहीं थी

क्या हो रहा था!

वो लड़की अभी भी बिलकुल स्थिर खड़ी थी। अब थोड़ी रहस्यमयी भी लग रही थी। उसकी पलकें दो तीन बार झपकी और अचानक ही वो सारे कुत्ते उन लफंगों पर टूट पड़े

,

दस मीनट तक उन कुत्तों ने मन भर कर अपने दांत और पंजे साफ किये उन लोगों पर। फिर वो पूंछ हिलाते उस लड़की के पास आ गए। वो बहुत देर तक उन्हें पुचकारती रही फिर अंधेरे में कहीं गायब हो गई।

"धड़ धड़, धड़ धड़..धड़ धड़.." कोई जोर से दरवाजा पीट रहा था।

"क्या मैन! कोन आ गया सुबा सुबा.." वो खीजती हुई दरवाजा खोली। सामने मारियानो खड़ा था।

"क्या मांगता अभी तेरेको?" वो अप्रसन्न भाव से बोली। मारियानो ने उसकी बांह पकड़ी और खीचता हुआ अंदर ले आया। उसके हाथ में उस दिन का लोकल अखबार था।

"ये देख..देख इधर छापे में क्या है?" वो थोड़ा कलपता हुआ बोला और पेपर उस लड़की को दिखाया। उसमें पिछली रात वाले लफंगों की खबर थी।

"तो इसका मैं क्या करे?" वो एक आंख चढ़ाती हुई बोली।

"ये वहीच्च लोग न जो तेरा फिरेंड के ब्रदर का धुलाई किया और तेरा फिरेंड से बद्तमीजी किया!!" मारियानो बोला

उस लड़की ने सबकुछ अनसुना कर दिया और लापरवाही से किचन में काम करने लगी।

"चाय पियेंगा? के सुबा सुबा बाटली मार के आया..हंह?" वो बोली। मारियानो ने असहाय भाव से सर हिलाया और वहीं स्टूल पे बैठ गया।

"मैं तेरेको कितना टेम समझाया पंगा नई लेने का..लो प्रोफाईल रहने का...पण तेरेको कुछ समझता किधर है" वो मरी हुई आवाज में बोला

"और मैं भी समझाया कि अपना काम से काम रखने का" वो लड़की तपाक से बोली "काय को भेजा खाता मारियानो!" अब वो ,

मेकप कर रही थी।

मारियानो थोड़ा और बिफर गया।

"कभी डैडी भी बोल दिया कर मेरेको..या पप्पा..जो तेरा मन मे आए..बाप है मै तेरा.."

"मेरेको लेट होता कालेज वास्ते.." वो उसकी बात अनसुनी करती सी बोली और दरवाजे से बाहर निकल गई।

"अरे मेरा बात सुन.." पीछे से मारियानो आवाज आई

"जेनी!!..जेनिफ़र!! "

कालेज का कैंटीन। वो बहुत से स्टुडेंट्स से घिरी बैठी थी। साफ दिख रहा था कि वो उनमें बहुत पापुलर थी। वो थी भी वैसी। कई लड़के उसे घूर रहे थे चोरी छिपे ही सही। कभी कोई भी उससे सीधे तौर पर नहीं उलझता था।

"अभी क्या करने का है?" जेनिफ़र बोली

"तुझे बुलाने ही आया था चल" सेकेंड ईयर का एक स्टुडेंट बोला।

"किधर?"

"केमेस्ट्री लैब अभी खाली है। पवन और रौशनी सारे फर्स्ट ईयर के स्टुडेंट को लेके वहीं हैं"

"सालीड इंट्रो लेंगे सबका" एक काईंया से चेहरे वाली लड़की बोली।

वो सारे डरे सहमे से एक लाईन में खड़े थे। उन दिनों रैगिंग एक नाईटमेयर हुआ करती थी। सारे सीनियर्स उनसे बेहूदा सवाल कर रहे थे और छेड़खानी कर रहे थे। जेनिफ़र को आज रैगिंग में मज़ा नहीं आ रहा था। हूटिंग और फब्तियों के उपर उसकी नज़र तो एक नीली चेक्स की शर्ट पहने लंबे से लड़के पर टिकी हुई थी।

उसने इशारे से उसे पास बुलाया...वो आ गया..

"क्या नाम है तेरा?" वो उस लड़के से बोली

"विनय" लड़के ने जवाब दिया...

एक साल बाद...

रात के नौ बज रहे थे। वो दोनों बीच पर बैठे थे। धीमे धीमे समुद्र की लहरों की आवाजें आ रही थी।

"तु सेकेंड ईयर में आ गया" जेनिफ़र बोली

"और तुम 'फिर से' सेकेंड ईयर में आ गई" विनय थोड़ा हंसते हुए बोला।

"बराबर न..तु क्या सोचता! स्साला मैं इधर से पास आउट और तू उधर दूसरी गर्लफिरेंड बना ले!!" वो आंखे दिखाती हुई बोली "वैसे भी वो प्रेता... बहुत भाव देती तेरेको.."

"पृथा.." विनय सुधारता हुआ बोला "और तुम मेरी गर्लफ्रेंड कब से बन गई!!"

एक साल में ही उन दोनों में काफी गहरी दोस्ती हो गयी थी!!

वो अब उसके लिये "मैम" से "जेनी "बन चुकी थी... जेनिफ़र दोस्ती से ही खुश नहीं थी वो 'आगे' बढ़ना चाहती थी पर विनय के लिये ये सब "टू अर्ली" था!!

"अबी किधर को बनी मैं तेरी गर्लफ्रेंड..और बनेगी भी कैसे!..किस्सी विस्सी तो तू करता नई.." वो चिढ़ कर बोली

"चल आ ईधर तेरेको बाॅयफ्रेंड बनाती मैं अभी.." उसकी कालर पकड़कर अपनी तरफ खींचती हुई जेनिफ़र बोली।

"जेनिफ़र क्या कर रही हो..लोग देख रहे हैं." विनय हड़बड़ा गया।

"इधर कौन है मैन.." जेनिफ़र बोलती हुई रुक गई..उसे महसूस हुआ कोई उन दोनो पे नज़र रखा हुआ था। दूर अंधेरे में बस एक परछाईं सी दिख रही थी

"कल देखती मैं तेरेको.." वो फुंफकारती हुई उस 'परछाई' को देख कर बोली और विनय की कालर छोड़ दी।

विनय भी उस तरफ देखने लगा पर उसे कुछ नहीं दिखा।

वो एक मोटर गैराज था। ठीक ठाक सा था। कुछ मैकेनिक अपना काम कर रहे थे। वहीं भारी मसल्स वाला जींस और बनियान पहना एक लड़का अपनी बाईक पेंट कर रहा था। उसके गले में बहुत सी चैन थी और कान में एक बाली भी। अगर बाएं गाल पे एक जख्म का निशान नहीं होता तो वो अच्छा दिखता। वो बाईक पर झुका हुआ था जब बाईक भरभरा कर उसपर आ गिरी...

"व्हाट द फ..... अरे जेनी! तू!" उसके मुंह से निकला।

सामने जेनिफ़र खड़ी थी जिसने लात मार कर उसपर बाईक गिरा दी थी।

"कित्ती बार बोला.....दूर रह मेरे से" वो गुस्से से फुंफकारती हुई बोली "मैं किधर जाता..किस से मिलता क्या करता..नन आॅफ योर बिज़नेस!!! अभी बात घुसा मगज में कि मैं खोपड़ी तोड़ के घुसाए!!" वो गुस्से से हिल रही थी।

"जेनिफ़र!!" एक गोल मटोल गंजा लुढ़कता हुआ पहुंचा वहां

"क्यों चिल्ला रही है?" वो जेनिफ़र को घूरता हुआ बोला

"पूछ न अपने छोकरे से.." वो वापस उस बाईक वाले लड़के को देखती हुई बोली।

"ओह! लगता है उस छोकरे ने नाराज़ कर दिया तुझे तभी मूड खराब" वो लड़का व्यंग से हंसता हुआ बोला। उसका नाम विक्टर था।

वो हंस ही रहा था जब जेनिफ़र का एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसे पड़ा। उसे अपना जबड़ा टूटता सा महसूस हुआ।

वो गुर्राता हुआ जेनिफ़र की तरफ बढ़ा पर किसी ने बीच में ही ,

उसकी गर्दन दबोच ली और हवा में उठा दिया। विक्टर फटी हुई आंखों से सामने देख रहा था। असल में वहां मौजूद सभी की आंखें बाहर को आ गईं थीं।

वो मारियानो था जिसने विक्टर जैसे पहाड़ को हवा में उठा रखा था। उसकी आखें मानो गुस्से से दहक रही थीं।

"डोन्ट यू डेयर ब्लडी सन आॅफ बिच!!" वो थूंक उड़ता बोला और उसे जोर से जमीन पर पटक दिया। जबकि विक्टर उससे साईज़ में दोगुना तो आराम से था। जेनिफ़र भी हैरानी से मारियानो को घूर रही थी।

"जेनिफ़र ने बोला न दूर रहने का...तो रहने का.." अब वो शांत स्वर में बोलने की कोशिश कर रहा था पर अंदर से उबल ही रहा था।

" मुझे अब वैसे भी कोई इटरेस्ट नहीं तुम में और तुम्हारी छोकरी में" गंजा नाराजगी से बोला जो विक्टर का बाप था

"पर डैड.." विक्टर बोलना शुरु किया

"शटअप!!" वो फिर मारियानो की तरफ मुड़ा "तू साला चर्च जाने वाला और तेरा ये डाटर! उस मामूली छोकरे को डेट करता..तुम दोनो बाप बेटी को कम्युनिटी की तो पड़ी ही नही"

जेनिफ़र उसकी बात सुनकर उलझन में आ गई।

"क्या बोला मैन? चर्च जाने से तेरे को वांदा क्या?"

वो गंजा कभी जेनिफ़र को तो कभी मारियानो को देखने लगा। वो समझ गया था कि जेनिफ़र नहीं जानती थी कि वो "क्या" थी!

"जेनी चल इधर से..पागल है साला" मारियानो जल्दी से बोला और जेनिफ़र का हाथ पकड़कर खींचने लगा।

"तुम बहुत ज़िद्दी है मारियानो! नहीं तो मेरा विक्टर इस लड़की के लिये पर्फेक्ट होता" गंजा फिर बोला।

,

मारियानो जेनिफ़र का हाथ पकड़े वहां से चला गया।
 
"साला एक बात समझ नहीं आया.." विक्टर अपना गला मलता हुआ बोला.. "मैं तो कल रात बीच पर गया ही नहीं!!!"

"मेरेको भी एक बात नही समझ आया" वहीं खड़ा एक मेकेनिक बुदबुदाया..."ये बेवड़ा क्या विस्की में हार्लिक्स मिलाता!"

"बताया नहीं मेरेको!" मारियानो बोला.."तेरा ब्वाय फिरेंड.."

"नक्को.." जेनिफ़र बोली "ब्वाफ्रैंड टाईप कुछ भी नहीं..आजतक उंगली भी नहीं टच किया वो मेरा.."

"क्यों?"

"क्या पता" वो गहरी निराशा से बोली "मैं शायद बास मारता होएंगा उसको.."

"गे होएंगा.." मारियानो उम्मीद भरे स्वर में बोला। जेनिफर ने त्यौरीयां चढ़ा ली

"वैसे कौन है वो?..बोले तो नेम?"

"हां ताकि तुम मेरा ब्रेकअप करा सके है न! उसको जा के बोल देंगा मैं चुड़ैल है!!"

"तेरेको कैसे पता??" हड़बड़ाहट में मारियानो के मुंह से निकल गया।

जेनिफ़र ने उसे कहरभरी नजरों से देखा।

"मेरा बात सुन जेनी" वो चाशनी भरे लहजे में बोला.."कुछ नहीं रखा इस लव में..रीलेशनशिप में..सब कचरा। किसी को भाव नहीं देने का बस अपने में खूस रहने का" उसने ज्ञान बघारा।

"एक बात तो बता डैडी" जेनिफ़र भी वैसे ही मिश्री घुले स्वर में मुस्कुराती हुई बोली

"अगर ये सब कचरा तो तू क्या मेरेको को गमले में उगाया था!!!" मारियानो का मुंह लटक गया।

मारियानो और उसकी बेटी जेनिफ़र दोनो ही हाफ डीमन याने कि ,

शैतान थे। मारियानो ने ये बात जेनिफ़र से छुपा रखी थी। पर एक दिन विक्टर की नज़र उसपर पड़ गई और क्योंकि जेनिफ़र बहुत ही खूबसूरत और ताकतवर थी इसलिये वो उसके पीछे पड़ गया था। विक्टर की फैमली भी डीमन फैमली थी जो डेवील को सर्व करते थे!

दूसरी तरफ मारियानो सामान्य जीवन जीने का ढोंग कर रहा था। वो नहीं चाहता था कि कभी जेनिफ़र मां बने क्योंकि उसका बच्चा एक और हाफ डीमन हो सकता था। और इस बात का उसे हमेंशा पछतावा होता था। जेनिफ़र में उसकी जान बसती थी!!

इन सबसे अंजान जेनिफ़र की एकमात्र समस्या थी कि विनय उसको 'भाव' नहीं देता था। एक दिन पहले ही उन दोनों का झगड़ा हुआ था।

"कुछ भी कर के आज मना लूंगा उसे!..सोचते हुए विनय कालेज में दाखिल हुआ। अभी वो जेनिफ़र को ढूंढ ही रहा था कि एक तेज हार्न की आवाज़ आई और देखते ही देखते एक चमचमाती कार कंपाउंड में आ गई। कार से एक लंबा सजा धजा खूब फैशनेबल लड़का नीचे उतरा। न जाने क्यों उसी पल से विनय बिना मिले ही उससे चिढ़ने लगा।

क्लास रूम में घुसते ही विनय को दूसरा झटका लगा।

वो लड़का जेनिफ़र से सट के बैठा था और दोनों ऐसे घुट घुट के बात कर रहे थे मानो कब से जानते हैं एकदूसरे को!

विनय को पता चला कि उसका नाम हरमन ओबेराॅय था और वो बहुत बड़े बिज़नेसमैन का बेटा था।

जेनिफ़र कोई कसर नहीं छोड़ रही थी विनय को जलस फील कराने की!

"ये लड़कियां!" धीरे से बुदबुदाते हुए वो अपनी जगह पर बैठ गया।

,

आने वाले दिनों में जैसे कालेज में हरमन-जेनिफ़र के अलावा कोई टाॅपिक ही नहीं था लोगों के पास।

उन दोनो को डेट करते एक लंबा समय बीत गया था। एक शाम वो उसे बीच के पास वाले रिसार्ट में ले कर गया। बेहतरीन मौसम था। हिलोरे मारता समंदर और हवाएं। जेनिफ़र ने एक लंबा नेवी ब्लू गाऊन पहन रखा था और उसके लंबे गहरे भूरे बाल यूं ही बेतरतीबी से बिखरे हुए थे। चेहरे पर नपा तुला मेकअप था। इस वक्त वो किसी फिल्म स्टार से कम नहीं लग रही थी।

एक लंबे रोमांटिक कैंडल लाईट डिनर के बाद बिना किसी औपचारिकता के हरमन ने उसे प्रपोज़ कर दिया।

जेनिफ़र थोड़ा सकपका गई। उसने तो ये सब सिर्फ विनय की अटेंशन पाने के लिये किया था..पर यहां तो बात बढ़ती ही जा रही थी!

"हरमन प्लीज़ डोंट माईंड पर अभी मैं इसके लिये रेडी नहीं है..बोले तो इट्स टू अर्ली न" वो बोली और खुद ही चौंक गई।

"टू अर्ली!" यही तो विनय भी बोलता था..इसका मतलब वो भी उससे प्यार नहीं करता था जैसे वो हरमन से नहीं करती थी! शायद उसकी ये उलझन उसके चेहरे पर दिख गई थी।

"ओके रिलैक्स!" हरमन मुस्कुराता सा बोला "मैं वेट कर सकता हूं..वैसे तुम्हारे लिये एक और सरप्राईज़ है!

"क्या?" जेनिफ़र सकपकाई

वो उसी रिसाॅर्ट का एक खूबसूरती से सजा हुआ केबिन था। अंदर बहुत सी लाल रंग की मोमबत्तियां रोशन थीं। मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। पूरे केबिन में ताजे लाल गुलाब बिखरे हुए थे। पर्दे, बेडशीट सभी का रंग लाल था। वहां सेंटर टेबल पर रेड वाईन ,

की एक बोतल और स्फटिक के दो गिलास रखे हुए थे।

जेनिफ़र ये सब देख कर बहुत असहज महसूस करने लगी।

"ये तो हनीमून वास्ते रिजर्व्ड केबिन है?" वो बोली

"साॅरी कोई दूसरा अवलेवल नहीं था" हरमन हंसता हुआ बोला। "आज मेरा बर्थडे! और मैं इसे बस तुम्हारे साथ सेलिब्रेट करना चाहता हूं"

जेनिफ़र ने नोटिस किया वहां धीमा म्यूज़िक भी चल रहा था।

केक कट करने के बाद और दो पैग हलक से उतारने के बाद वो डांस करने लगे। जेनिफ़र को महसूस हुआ वो बार बार उसके नज़दीक आने की कोशिश कर रहा था..धीरे..धीरे..

"नो!!" उसने खुद को जल्दी से उससे छुड़ा लिया।

"ये नहीं होना सकता..ये गलत है.." वो जल्दी से बोली

"ओके..ओके..मैं तो बस...

"मैं विनय को लाईक करती..." न जाने कैसे उसके मुंह से ये निकल गया। वो उस समय इतनी असहज थी कि विनय का नाम भी उसे राहत दे रहा था। जैसे ये एक शब्द दीवार बन गया हो उसके और हरमन के बीच में।

"क्या?" हरमन बोला "व्हाट डिड यू से?"

"सारी" बोलती हुई वो जल्दी से केबिन के बाहर आ गई। पीछे उसे हरमन की आवाज़ सुनाई दी जो उसे पुकार रहा था पर वो नहीं रूकी। वो भागते हुए रिसार्ट से निकल गई।

और फिर उस दिन के बाद से कालेज में हरमन ओबेराॅय कभी नहीं देखा गया! वो मानो गायब हो चुका था।
 
तीन चार दिन से जेनिफ़र भी अपने कमरे में ही बंद थी। कालेज जाने का उसका मन नहीं हो रहा था। और सबसे अजीब बात! उसे फिर से लग रहा था कि कोई उसपर नज़र रखे है। उसे खिड़की से एक दो बार किसी साए की झलक मिली जो अक्सर उस से बहुत दूर होता था पर दूर से भी जेनिफ़र को खुद पर उसकी नज़रें चुभती सी लगती।

परेशान करने वाली बात ये थी कि विक्टर भी उन दिनों लाकअप में बंद था..तो उसका पीछा कर कौन रहा था!!!

एक शाम वो उकता कर अपने रूम से निकली और सीधा विनय से टकरा गई जो उसका दरवाजा खटखटाने ही वाला था।

"विनय!!" वो हैरानी से बोली। "तुम इधर!!"

"तुमसे मिलने आया..तुम कालेज ही नहीं आ रही इतने दिनो से!" वो मुस्कुराता हुआ बोला।

जेनिफ़र को बहुत राहत महसूस हो रही थी।

"क्या मैं अंदर....

"हां आओ न" वो उससे कस के लिपट जाने की अपनी इच्छा को दबाती हुई जल्दी से बोली। कहीं वो दरवाजे से ही भाग न जाए।

वो अपने और विनय के लिये काफी बना रही थी जब विनय पीछे से आया और उसके हाथ जेनीफ़र की कमर पर कस गए। आज वो कुछ दूसरे ही 'मूड' में लग रहा था। वो खिलखिलाने लगी। यही तो वो चाहती थी। उसे अपने कंधों पे विनय की गर्म सांसें महसूस हो रहीं थीं...

"तेरेको एक साल का कसर एक ही दिन में निकालने का क्या!!" वो विनय के कान में फुसफुसाई।

विनय ने मुस्कुरा कर उसे छोड़ दिया और उसके बेड पर जा बैठ गया। जेनिफ़र सोच रही थी...विनय पहले कभी इस तरह उसके रूम में नहीं आया था! उसका हाथ पकड़ने में भी दस बार सोचता

था! और आज तो...बहुत आराम से उसके बेड पर बैठा था..बैठा क्या पसरा हुआ था! अचानक उसके रोमांटिक मूड को एक झटका सा लगा...कुछ गड़बड़ जरूर थी!

"काफी फिनिश्ड!" वो काॅफी का डब्बा लहराती हुई विनय से साफ झूठ बोली।

"मैं नीचे से लेकर आता तुम इधर वेट करने का" वो बोली और जल्दी से बाहर आ गई। वो जहां रहती थी उसके एक फ्लोर नीचे एक छोटा सा प्रोविज़न स्टोर था। न जाने क्या सोच कर उसने वहीं से जल्दी से विनय के हास्टल में फोन लगाया।

उसके पैरों तले जमीन खिसक गई जब पांच मिनट बाद विनय कि आवाज़ उसके कानों में पड़ी

"जेनिफ़र! तुम कहां गायब हो? कालेज भी नहीं आ रही हो? हैलो! हैलो?? जेनिफ़र?.."

जेनिफ़र का गला सूखने लगा...

विनय तो अपने हास्टल के रूम में था!! तो फिर उपर रूम कौन था!!

वो एक लोहे की राॅड पकड़े धीरे धीरे अपने कमरे में आई। वहां कोई नहीं था जिस बेड पर 'विनय' बैठा था वहां...

काॅफी का डिब्बा खुला हुआ पड़ा था और काॅफी पाउडर पूरे बेड पर बिखरा हुआ था!

जेनिफ़र सदमें से वहीं बैठ गई। क्या हो रहा था! क्या सचमुच विनय आया भी था या ये बस उसकी कल्पना थी क्योंकि वो उससे मिलने के लिये बहुत बेचैन थी।

पर उसने उसे छुआ तो था! उसके शरीर में सिहरन दौड़ गई..

,

उसने शोशल मीडिया पर हरमन ओबेराॅय को सर्च किया था। उसे वो मिला भी... वही चेहरा वही मुस्कान! दिक्कत ये थी कि वो इस वक्त कैलफोर्निया की किसी युनिवर्सिटी में था...तो फिर इतने दिन तक कालेज में उसके साथ जो था वो कौन था??

ये कैसे संभव था? क्या प्रिंस चार्मिन जैसी पर्सनाल्टी वाला वो हरमन, सिर्फ उसी के लिये वहां आया था जो उसके मना करते ही मानो हवा में घुल गया था।

वो अपने खयालों में गुम चली जा रही थी कि...

"हे जेनी! कैसा है?"

जेनिफ़र ने सर उठाया सामने विक्टर मुस्कुरा रहा था।

"फक यू.."वो आगे बढ़ने लगी

"जेनी..जेनी मेरा बात तो सुन" वो उसका रास्ता रोक के खड़ा हो गया "तु क्यों नफरत करता मेरे से? मैंने आजतक कभी तेरे से मिसबिहेव किया? तेरे अलावा किसी छोकरी को देखा? मैं लाकअप में था पता क्यों? क्योकि मैं तेरे कालेज के दो छोकरा लोग को पीटा जो तेरा और हरमन के बारे में बुरा बुरा बोलता.."

जेनिफ़र ठहर के उसकी बात सुनने लगी।

"मैं तेरेको इधर से लाईक करता जेनी" वो अपने सीने को छूता हुआ बोला "और फिर तू समझती नहीं मैं..मैं ही सही तेरे लिये वो..वो सब छोकरे नई बिलकुल नई..तू समझ न..मैं कुछ बोलेगा तो तेरा बाप फाड़ के सुखा देगा मेरेको"

"बोल.. क्या बोलने का" जेनिफ़र ठंडेपन से उसकी आंखों में देखती हुई बोली।

विक्टर असहाय भाव से इधर उधर देखने लगा। तभी उसकी नजर पास वाले कूड़ेदान के पास खड़े दो आवारा कुत्तों पर पड़ी। वो मुस्कुराते हुए जेनिफ़र की तरफ मुड़ा और उसे दिखाते हुए उन कुत्तों को आंखों से कुछ इशारा किया।

वो कुत्ते किसी रोबोट की तरह जमीन पर लोटत हुए विक्टर के पास ,

आ गए। विक्टर ने मुस्कुरा कर जेनिफ़र को देखा

"तुझे क्या लगा ये लोग सिर्फ तेरा इशारा समझता? ये हम जैसे सब लोगों का इशारा समझता..सिर्फ हम जैसों का!"

जेनिफ़र हैरान दिख रही थी अब तक तो वो यही सोचती थी कि गलि के कुत्तों से उसकी खूब बनती थी पर..ये..तो..

"तू मेरा पीछा क्यों करता था?" वो बोली जैसे उससे झगड़ने का ठान ही चुकी हो

"मैं कब तेरेको फालो किया जेनी!" वो उकताहट भरे स्वर में बोला। "तूने कभी देखा मेरे को?"

"हां सेरेवल टाईम...

"क्लियर देखा..मैं ही था?"

जेनिफ़र चुप हो गई। उसने तो हर बार बहुत दूर से किसी परछाई को ही देखा था और विक्टर की हरकतों को देखते हुए सहज ही मान लिया था कि वो विक्टर है।

"हम जैसों से तेरा क्या मतलब?" इस बार वो धीमे स्वर में बोली।

तभी कोई लड़का भागता हुआ उन दोनों के पास आने लगा। वो जेनिफ़र को आवाज़ भी लगा रहा था।

"सुन.." विक्टर जल्दी से बोला चार दिन बाद 31 अक्टूबर बोले तो हैलोवीन, मेरे से जंगल वाले हैलोवोन फेयर में मिलना मैं सब बताएगा तेरेको और...सब दिखाएगा भी"

वो कुछ सोचता सा रुका फिर बोला

"और जेनी प्लीज़..इस बार अकेले आना, तेरा बाप नहीं मांगता मेरेको..अगर तू सच में सब कुछ जानना चाहता है तो..." तभी

"जेनी" एक लड़का हांफते हुए उसके पास आकर रुका।

,

"क्या है? क्यों चिल्लाता?" जेनिफ़र झिड़कते हुए बोली।

"वो तेरा.. बाप वो मारियानो..

"क्या हुआ?" जेनिफ़र जल्दी से बोली

"वो बेहोश हो गया..उधर..बोले तो चर्च में..

"तेरा बाप नहीं सुधरेंगा" विक्टर व्यंग से हंसता हुआ बोला

पर जेनिफ़र कुछ सुनने के लिये नहीं रुकी। वो चर्च की तरफ़ भागने लगी।

"नहीं जेनिफ़र!!!" विक्टर ज़ोर से चिल्लाया.."रुक जा!! उधर मत जा!!" वो उसके पीछे भागने लगा।

जेनिफ़र आज तक चर्च नहीं गई थी। उसे बस वहां से आती आवाजे थोड़ी "अनकंफर्टेबल" लगती थीं जैसे की मंदिर की घंटियों की ध्वनि भी लगती थीं। वैसे भी वो अपनी जिंदगी से नाखुश थी और उसे भगवान पर भरोसा नहीं था।

"जेनी रुक...!!!" बोलता हुआ विक्टर चर्च के कैंपस के गेट पर ही रुक गया जबकि जेनिफ़र धड़धड़ाती हुई चर्च के अंदर चली गई।

"मारियानो!!!!" वो चिल्लाई....और उसी पल से कुछ अजीब सा होने लगा...

उसके आसपास की हवा जैसे ठोस होने लगी थी..उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी...उसकी चमड़ी में जलन होने लगी जैसे सैकड़ों अदृश्य सुईंयां उसकी चमड़ी को भेद रहीं हों। उस चर्च का दरवाजा,बेंच,छत पे बनी तस्वीरें,फर्श, झरोखों के रंगीन कांच,पिलर्स सब उसे अहसास दिला रहे थे कि... उसे वहां नहीं होना चाहीये!!

उसे बहुत से घूरते चेहरे दिखे जिन पर साफ नापसंदगी का भाव था। अब जेनिफ़र को थकान होने लगी थी मानो वो मीलों दौड़ के आई हो! इस अजीब और अटपटे अहसास को झटक कर वो जल्दी से मारियानो के पास पहुंची।
 
"तू ठीक है? क्या हुआ तेरेको?" वो कांपती आवाज़ में बोली।

मारियानो एक बेंच पे लुढ़का पड़ा था।

उसी समय सभी ने एक तीव्र झटका सा महसूस किया भूकंप जैसा! फिर तेज आंधी तुफान ने पूरे चर्च को आगोश में ले लिया! बत्तियां जलने बुझने लगीं! जेनिफ़र घबरा गई मौसम को भी अभी ही खराब होना था! वो पहले से ही बिमार महसूस कर रही थी।

एक लगभग पचास साल का चशमा लगाया वृद्ध वहां पहुंचा।

"यहां से जाओ बेटा..जल्दि। चलो मैं तुम्हारी मदद करता हूं" बोलते हुए उसने मारियानो का एक हाथ पकड़ा।

"पर बाहर तो.." जेनिफर कमजोरी से बोली

उस आदमी ने कुछ नहीं सुना और मारियानो को पकड़कर बाहर चल दिया।

चर्च के बाहर आते ही जेनिफ़र की हैरानी का कोई ठिकाना न रहा...बाहर तो सब कुछ सामान्य था!!

वो खुद भी बहुत हल्का महसूस कर रही थी। तो फिर अंदर वो सब!! क्या था! उसने देखा एक बड़े और पुराने पेड़ के पीछे से विक्टर उसे देख रहा था और उसके चेहरे पर गहन उपेक्षा के भाव थे।

मारियानो बुरी तरह टुन्न था। जेनिफ़र का पारा सांतवे आसमान पर पहुंच चुका था। पिछला एक हफ्ता बहुत भारी और रहस्यों से भरा हुआ था।

उसने मारियानो के चेहरे पर पानी मारा

"उठ!!!!" वो चिल्लाई "दारू पी के चर्च जाता हलकट!!"

वो गुस्से से बोली।

"पियें..गा नई...तो कि..धर को जाएंगा...बहुत ट्रबल हो..होता न उधर" मारियानो नशे में बड़बड़ाया। जेनिफ़र चौंक गई

"ट्रबल होता!

,

"वो अर्थक्विक आया उधर? तुफान भी आया? वहीच्च ट्रबल?"

"नक्को रे.." मारियानो पागलों की तरह हंसा "वो तो तेरे जाने से आया...मै जाता तो जो भी हो..होता ब..बस मेरेको होता पण तू!! बहुत पावरफुल है न तू....साला! सबको हिला कर रख दिया.." वो फिर हंसने लगा।

जेनिफ़र के चेहरे पर हवाईंया उड़ रही थी। इन सबका क्या मतलब था!

"बोले तो मैं पावरफुल?अरे बोल न..." वो मारियानो का सर पकड़कर हिलाई।

"तेरा मां बोलता था ऐसा..माई...ल.. लविंग वाईफ़ अलीशा! मैं मर्डर किया उस..का..डीमन होने का.." वो फिर लुढ़क गया।

जेनिफ़र के हाथों से पानी का गिलास छूट गया। मारियानो ने हमेशा उसे बताया था कि उसकी मां की मौत सिलेंडर फटने से हुई थी। उसके गालों पे आंसू बहने लगे थे।

मारियानो फिर बड़बड़ाया

"बे..बेबी जेनी..वेरी इसपेसल..बोले तो..उसका पीछे...

शैतान आएगा!!!"

जेनिफ़र चिहुंक कर खड़ी हो गई। एक अनजानी सी दहशत उसकी रगो में दौड़ रही थी। गली के आवारा कुत्ते! रहस्मयी हरमन! उस दिन उसके रूम में आया वो बहरूपिया विनय! विक्टर की अजीब बातें और आज जो कुछ भी चर्च में हुआ...वो सर पकड़ कर बैठ गई और अपने बाप को घूरने लगी।

ये सब सिर्फ एक बेवड़ की बकवास थी या हकीकत!!

शैतान आएगा!! उसके पीछे आएगा!!!

उसे बेचैनी होने लगी। उसने उठ कर खिड़की खोल दी और एक ,

बार फिर...

"ओह यस! तेरेको मैं कैसे भूल गई! तू भी तो है!!"

खिड़की के बाहर अंधेरा हो चुका था। और दूर रोड पर लगी स्ट्रीट लाईट के पीछे से कोई उसे घूर रहा था। उसका सर उपर उठा हुआ था! ये वही रहस्यमयी धुंधली सी परछाईं थी!जो एक बार फिर जेनिफ़र का पीछा कर रही थी…..

"जेनिफ़र!" किसी ने आवाज लगाई।

जेनिफ़र ने पूरे दस दिनों के बाद कालेज में कदम रखा था। हाल ही में उसके साथ जो हुआ था उसने उसके पूरे अस्तित्व को हिला कर रख दिया था। उसने फैसला किया था कि वो फालतू की बातों पर ध्यान नहीं देगी, विक्टर और अपने बाप जैसे लोगों से दूर रहेगी और भरसक एक सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश करेगी। शुरूआत के तौर पर वो सब कुछ भूल कर आज कालेज आई थी जब उसके क्लासमेट रोहित ने उसे आवाज लगाई।

"हाय जेनिफ़र! कहां थी तुम?" रोहित बोला "तुम दोनों ही कालेज नहीं आ रहे थे तो टेंशन हो रही थी..आल ओके?"

जेनिफ़र थोड़ा झेंप गई।

"मेरेको हरमन का कोई बात नहीं करने का है...

"मैं विनय की बात कर रहा हूं" रोहित उसकी बात काटता हुआ बोला "खैर बाद में तो क्लिअर हो ही गया"

जेनिफ़र ने चौंक कर सर उठाया

"क्या बोला,? विनय भी कालेज नहीं आता??"

"तुमको नहीं मालूम?" रोहित दबे स्वर में बोला।

"उसकी मम्मी गुज़र गईं"

जेनिफ़र अब विनय के हास्टल जा रही थी। वो खुद से नाराज़ थी। वो अपनी परेशानियों में ही इतनी उलझी हुई थी कि उसे ध्यान ही नहीं गया कि विनय कि भी कुछ परेशानियां हो सकती हैं। वो जब भी साथ होते बस जेनिफ़र के ही बारे में बात होती..विनय कैसा महसूस करता है..उसकी जिंदगी के बारे में कभी उसने पूछा ही नहीं!

अगर विनय उसमें इटरेस्ट नहीं लेता तो सिर्फ इस वजह से वो उसके जैसे सच्चे दोस्त को खो देगी? नहीं उसने तो कभी नहीं कहा कि वो उसे चाहता है! फिर नाराज़गी कैसी! वो जबरजस्ती तो नहीं कर सकती न...

विनय अपने हास्टल में नहीं था। शायद वो अब तक अपने घर से नहीं लौटा था..और उसका घर कहां था ये जेनिफ़र मैम ने कभी पूछा ही नहीं।

वो शाम के वक्त एक बार में कुछ घंटे वेट्रेस की पार्ट टाईम जाॅब करती थी। अब उसका कालेज जाने का मन नहीं हो रहा था तो उसने जल्दी काम पर जाने का फैसला कर लिया।

शाम छ: पर उसने अपनी शिफ्ट पूरी की और कपड़े बदल कर बार से निकल गई।

बाहर मारियानो उसका इंतज़ार कर रहा था।

जेनिफ़र ने एक सर्द निगाह उस पर डाली और आगे बढ़ने लगी।

"जेनी! मैं कब से इधर तेरा वेट करता था..अरे सुन तो.."

"अभी भी तेरेको कुछ सुनाने का क्या!!" वो कड़वाहट से बोली।

,

"जेनिफ़र प्लीज़ मेरा बात सुनने का" वो गिड़गिड़ात सा बोला "मैं प्लीज़ करके बोलता है..अरे तेरेको बस आधा सच ही मालूम न"

"मेरेको तेरा आधा पौना कैसा भी बात नहीं सुनना..ब्लडी मर्डरर!" वो गुस्से से बोली "मेरा मदर को छीन लिया तू मेरे से..आज वो होता तो मेरा स्साला लाईफ ही कुछ और होता..मेरे को नई मांगता तू" वो गुस्से से पांव पटकती चली गई।

"हां जेनी..सही बोला तू तेरा मदर होता तो तेरा लाईफ कुछ और होता..वही 'और' तो नहीं मांगता था मेरेको.." मारियानो हताशा से बुदबुदाया।

दिन ढल रहा था जब जेनिफ़र बीच पर पहुंची। उसे विनय की बहुत याद आ रही थी। वो उसी टीले के पास आ गई जहां अक्सर वो और विनय बैठ कर कुल जहान की बातें करते थे।

कोई वहां पहले से बैठा था..जेनिफ़र ने गौर से देखा तो उसकी बांछें खिल गईं..वो विनय ही था!

वो आगे बढ़ी ही थी कि उसे अपने पीछे कुछ आवाज सी आई। वो पलटी। पीछे बहुत से पेड़ और झाड़ीयां थीं। क्या फिर कोई उस पर नज़र रखे था! उन झाड़ीयों के पीछे कोई था।

उसे दिमाग से झटकते हुए वो वापस विनय की ओर मुड़ी और...उसकी सांसे मानो बर्फ हो गयी!!!!!

वो वहीं था..विनय के ठीक पीछे खड़ा था...वो जो उसका पीछा किया करती थी..वो अजनबी परछाई!

जेनिफ़र मुश्किल से उस से तीस फीट की ही दूरी पर थी पर फिर भी वो 'चीज' उसे साफ नहीं दिख रही थी। ऐसा लग रहा था मानो वो उसे एक घिसे हुए कांच से देख रही थी। धुंधली सी काली परछाईं! मानव आकृति पर कुछ भी साफ नहीं!

वो चिल्ला कर विनय को बताना चाहती थी पर उसकी आवाज कहीं गायब हो गई थी। विनय समंदर की और मुंह किये बैठा था।

जेनिफ़र की तरफ उसकी पीठ थी।

उसी वक्त फिर उसके पीछे से एक चरमराने जैसी कुछ आवाज़ आई जैसे किसी ने सूखे पत्तों पे पांव रख दिया हो। वो पलटी पर दिखा कुछ नहीं.. वैसे भी अब अंधेरा घिर रहा था। तभी,

"जेनिफ़र!!"

वो चिहुंक कर पलटी। सामने विनय खड़ा था जो उसे देख कर पास आ गया था। जेनिफ़र ने उसके कंधे के पीछे से देखा..परछाई गायब हो चुकी थी।

"ओ विनय..बेब ..." उसने विनय को बाहों में भर लिया। विनय ने भी ऐतराज़ नहीं किया। फिर दोनों हाथों से उसका चेहरा पकड़े हुए वो बोली "आई एम साॅरी..मेरेको नहीं पता था.."

"कोई बात नहीं" धीमी आवाज़ में बोला। जेनिफ़र ने देखा वो दुबला दिख रहा था और चेहरे पे दुख की छाप थी।

वो दोनों काफी देर तक उसी टीले पर बैठे रहे। जेनिफ़र आज जानती थी कि वो क्या महसूस कर रहा है। दोस्त तो वो पहले से ही थे पर आज पहली बार उन दोनों में एक सामंजस्य दिख रहा था था..शायद अपने अपने दुख की वजह से वो जुड़ गए थे...नजदीक आ गए थे।

जेनिफ़र को फील हो रहा था कि 'गर्लफिरेंड' बनने के लिये मन को टटोलना जादा कारगर था बजाय "किस्सी विस्सी" करने के!

वैसे जेनिफ़र का शक गलत नहीं था कि पीछे झाड़ीयों में कोई उसका पीछा कर रहा था।

वहां विक्टर था।

विक्टर भी मारियानो और जेनिफ़र की ही तरह हाफ डीमन था और जेनिफ़र से शादी करना चाहता जो कि बहुत ही खूबसूरत और ,

शक्तिशाली हाफ डीमन थी। वो बात अलग थी कि जेनिफ़र ये नहीं जानती थी।

वो इस वक्त झाड़ीयों के पीछे से जेनिफर और विनय को देख रहा था और अंगारों पे लोट रहा था। जेनिफ़र बिलकुल विनय की बगल में बैठी थी और उसका सर भी विनय के कंधे पर था।

"आई विल किल यू.." वो विनय को देखता हुआ गुस्से से बुदबुदाया।

जैसे जेनिफ़र को कुछ याद आया... उसने विनय के कंधे से अपना सर उठाया..

"इस फ्राईडे क्या करता?" वो विनय से बोली

"क्यों क्या हुआ?" विनय बोला

"मेरेको हैलोवीन पार्टी में जाने का...

"यहां कौन हैलोवीन पार्टी करता है?" विनय ने पूछा

"होता न..बराबर होता..पर किसी होटल,माल या पब में नहीं बोले तो...जंगल में होता है"

"क्या" विनय ने अचकचा के पूछा

"हां टेन पीएम को स्टार्ट फिर अक्खा नाईट पार्टी...मेरेको जाना...

"नहीं तुम नहीं जाओगी..पूरी रात..जंगल में..स्ट्रेंज!" विनय ने साफ मना कर दिया।
 
जेनिफ़र को भी पार्टी से कोई मतलब नहीं था पर विक्टर ने उसे बताया था कि उस पार्टी में उसे उसके हर सवालों के जवाब मिलेंगे इसलिये वो जाना चाहती थी पर विक्टर के साथ नहीं, विनय के साथ।

वो 'पार्टी' सिर्फ सामान्य लोगों के लिये हैलोवीन पार्टी होती थी। हैलोवीन का नाम तो सिर्फ एक आड़ था। असल में वो सारे हाफ डीमन्स का जमघट होता था जो एकत्र हो कर शैतान की पूजा करते ,

थे। पर ये डर तो था ही कि सारी सावधानीयों के बावजूद, और सबकुछ एक भयंकर वीरान जंगल में होने के बावजूद भी किसी सामान्य इंसान की नज़र उन पर पड़ सकती थी इसलिये इसे हैलोवीन को किया जाने लगा, हैलोवीन की आड़ में किया जाने लगा।

हाफ डीमन्स को पूरा भरोसा था कि उस रात उनके बुलाने पर शैतान खुद धरती पर आता है। और जो भी हाफ डीमन्स इस रिचुअल में शामिल होता है उसपर शैतान की नज़र पड़ती है और वो दिन पे दिन ताकतवर होता जाता है।

(हैलोवीन मुख्यत: यूरोपीय देशों में मनाया जाने वाला फेस्टिवल है जो रात के वक्त मनाया जाता है। ये अवधारणा है कि इस रात धरती पर भूत प्रेत और मृत आत्माएं आती हैं। लोग अजीब अजीब से डरावने कपड़ों और मेकअप में घूमते हैं, ताकि उन्हें डरा सकें। अब भारत में भी कहीं कहीं हैलोवीन मनाया जाने लगा है)

जेनिफ़र बस एक बार उस पार्टी में जाना चाहती थी ताकि वो सबकुछ जान सके। उसे नहीं मालूम था कि सबकुछ कितना टेढ़ा सा था और सब जान लेने के बाद सामान्य जीवन जी पाना कितना मुश्किल हो सकता था! पर वो यही सोचती थी कि सब जानने के बाद वो अपनी जिंदगी जीती रहेगी..शांति से विनय की 'हां' का इंतज़ार करेगी और भगवान ने चाहा तो आगे सब कुछ ठीक ही रहेगा।

वो नहीं जानती थी कि उस जैसों कि किस्मत भगवान नहीं, कोई 'और' तय करता था!

"तेरेको तेरा पिरामिस तो याद न? आज हैलोवीन है" विक्टर ने जेनिफ़र से बोला। वो इस वक्त उसी के बार में एक स्टूल पर बैठा ,

था और जेनिफ़र उसे ड्रिंग सर्व कर रही थी

"चुपचाप गटक और निकल यहां से" वो दबे स्वर में बोली।

"तू डरती है तो सीधा बोल न" विक्टर ने ताना मारा।

"तेरे को और कुछ मांगता बियर के साथ? बोले तो इधर का बाऊंसर लोग मस्त खिलाता"

विक्टर ने देखा एंट्रेंस के पास दो भीमकाय बाऊंसर खड़े थे।

"एक बात बोलने का..उस 'चिकनचिली' के साथ उधर नहीं आने का" विक्टर बोला और अपना खाली बियर का मग काउंटर पर पटक कर चला गया।

"साला हलकट! बोलता था फालो नहीं करता" उसके पीछे जेनिफ़र फुसफुसाई।

सात बजे विनय ने जेनिफ़र को फोन किया।

"मैने मूवी के टिकट बुक कराये हैं, लेट नाईट शो.."

वो तय कर लेना चाहता था कि जेनिफ़र हेलोवीन पार्टी में ना जाए।

"साॅरी विनय! पर आज तो मै अक्खा नाईट नताशा के घर पर है..मैं इतना दिन कालेज नहीं आया न तो सारा फ्रैंड्स लोग कंप्लेन करता था ईसीलिये.. उधर रागिनी और सौम्या का भी आने का" जेनिफ़र ने साफ झूठ बोला और जानबूझ कर अपनी तीन ऐसी सहेलियों के नाम गिनाए जिनसे विनय बुरी तरह कतराता था क्योंकि वो सारी उस पर दिल रखती थीं।

जेनिफ़र जंगल में जाने का मूड बना चुकी थी वो भी अकेले!

क्योंकि विनय उसे रोक रहा था और विक्टर को वो झेलना नहीं चाहती थी।

रात नौ तीस पर वो घर से निकली। उसने एक जींस के साथ हुडी जैकेट पहन रखा था जिसकी कैप चढ़ा रखी थी। अभी वो सोच ही रही थी कि कहां जाऊं..और उसे वो दिख गया!

वही काला साया उसकी सामने वाली नीम अंधेरी गली में मौजूद ,

था।

वो अंदर ही अंदर थोड़ा घबरा रही थी। हर बार वो साया कुछ देर दिख के गायब हो जाता था पर आज वो स्थिर था।

देखते देखते दस मिनट गुजर गए। फिर थोड़ा हिम्मत करके जेनिफ़र ने एक कदम उस साये की ओर बढ़ाया।

वो आकृति पलटी और हवा में तैरती हुई सी जेनिफ़र से दूर जाने लगी। जेनिफ़र उसके पीछे चलने लगी उस आकृति के पीछे जो कि सिर्फ जेनिफ़र को ही दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था वो किसी सम्मोहन में बंधी चली जा रही हो।
 
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