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Guest
फिर धनिया आगे बोलती हुई कही
"सुंरी ने उस दिन खूब चॅट पकोडे खाए और उधार के सारे पैसे शंभू ने दुकान वाले को दे दिए और तबसे शंभू उसकी अक्सर चुदाई करता था और चॅट पकोडे के पैसे भी देता है, और जब भी सुंरी चॅट पकोडे खाने जाती है तब दुकान वाला बिना चोदे चॅट पकोडे नही देता, सच कह रही हूँ वो शंभू ठीक ही कहता है की सुंरी अब चुदैल हो गयी है."
अभी भी धनिया को संतोष नही हुआ फिर सुंरी के बारे मे आगे बोलने लगी ....
"शंभू क्या कहेगा आप खूद कभी ध्यान से देखो जब सुंरी पूरा गाओं घूम कर घर आती है ....हरजाई ..सीधे चल नही पाती.... , और दोनो पैर फैलाए हुए चलती है.. इतनी चुदाई सब करते हैं की बुर के साथ साथ पैर भी फैल जाता है....."
बात जारी रखते हुए बोली...
"मैं तो रोज देखती हू उस हरजाई को ....घर मे घुसते ही नाली के पास मूतने बैठती है और मुतेगि क्या हरजाई बुर मे तो कई मर्दों का गाढ़ा पानी भरा होता है........., और उसके बैठते ही मर्दों की मेहनत सामने दीखने लगती है...जहाँ उसकी बुर रगड़ से लाल होती है...., वहीं लाल बुर के चौड़े मुँह से जब एक एक पाव सफेद मलाई गिरने लगता है तो मेरी आखें फट जाती हैं..मैं तो ऐसा देख कर बोल देती हूँ की लगता है पूरे गाओं से चुदवा कर आ रही है लेकिन उस रंडी पर कोई असर नही पड़ता"
अपनी बेटी के बारे मे इतना सुनकर बिरजू चिड़चिड़ा मुँह बनाते हुए बोला "छोड़ो ये सब बातें...मेरी तकदीर ही बहुत खराब है...क्या करूँ..."
धनिया झल्ला कर बोली ...
"..जब सारा गाओं मिल कर चोद डाला , तब मिर्ची तो लगेगी ही सुनकर....."
इतना सुनकर बिरजू ने अपनी नज़र दूसरी ओर फेरते हुए बोला...
"सुंरी को घर से बाहर मत जाने दिया करो..."
धनिया ने अपने ससुर के इस बात का जबाव देते हुए कही...
"मेरे कहने पर क्या मानेगी ...जैसे आपके गले मे शराब गये बिना शांति नही मिलती...., वैसे ही उसे भी अपनी बुर मे लंड डलवाए बिना चैन थोड़ी मिलने वाला है"
आगे गुस्से मे बोली
फिर धनिया ने अपनी सारी के पल्लू को अपनी छाती पर ठीक करते हुए बोली...
"अब उसकी शादी के भी बारे मे सोचो...यही सही समय है ..... अब गाओं के मर्दों ने उसे रगड़ रगड़ कर बड़ा कर दिया है , और कोई भी लड़का उसकी कसी हुई जवानी को देखते ही शादी के लिए तैयार हो जाएगा....सच पुछिये तो आज कल के लड़के भी गरम लड़कियाँ ही खोजते हैं...जो सुंरी को गाओं वाले बना दिए हैं...., यदि लड़का तैयार हो गया तो कम पैसे मे शादी भी हो जाएगी,"
चुपचाप धनिया की बातें सुन रहे बिरजू को समझाते हुए आगे बोली
" सच मे सुंरी की चुचियाँ बहुत बड़ी बड़ी हो गयी हैं..लड़का तो देखते ही मर जाएगा .. "
फिर धनिया अपनी चुदाई के वजह से कुच्छ उलझ चुके बालों को ठीक करते हुए बोली...
"शंभू बहुत झूठ बोलता है आपसे..बहुत चोदु है साला दारू पीला कर बहू और बेटी दोनो का मज़ा लूट रहा है....अब उससे कहिए की कहीं से लड़का ढूँढ कर सुंरी की शादी करवा दे..."
फिर बिरजू कुच्छ सोच कर धनिया से बोला ..
" साला मेरी बात नही सुनेगा...तुम ही उससे कहो..."
"ठीक है.." धनिया राज़ी होते बोली
फिर बिरजू धनिया की ओर देखते बोला...
"इसीलिए मैं सोचता हूँ की शंभू को नाराज़ करना ठीक नही है.....जब साला बदमाशी किया है तो शादी भी कहीं करवा दे....उसके जानने वाले बहुत हैं...वह सुंरी के लिए लड़का ज़रूर ढूँढ लेगा....तुम भी कभी उसके उपर गुस्सा मत करना..."
फिर बहू हंस दी और बोली
"मैं कहा उसे रोक रही हूँ जबसे मेरा पति कमाने गया है तबसे तो शंभू मेरी आग शांत करता रहा है,,... और इस चाम की थैली मे ना जाने कितने लोग अपनी ताक़त लगा चुके है और इस शंभू के ज़ोर लगाने से क्या फरक पड़ता है.. वैसे भी ये कोई घिसने वाली चीज़ थोड़ी है.."
हंसते हुए अपने ससुर को कुच्छ चिढ़ाने के अंदाज़ मे बोली
" हर दूसरे दिन नई हो जाती है" इतना कह कर धनिया हँसने लगी.
फिर बिरजू की बहू ने सीसे मे देखकर अपने माथे की बिंदिया ठीक की और लिपीसटिक लगाते हुए आगे बोली
"आज घर चल कर मैं माँस मुर्गा बनाउन्गि .."
"सुंरी ने उस दिन खूब चॅट पकोडे खाए और उधार के सारे पैसे शंभू ने दुकान वाले को दे दिए और तबसे शंभू उसकी अक्सर चुदाई करता था और चॅट पकोडे के पैसे भी देता है, और जब भी सुंरी चॅट पकोडे खाने जाती है तब दुकान वाला बिना चोदे चॅट पकोडे नही देता, सच कह रही हूँ वो शंभू ठीक ही कहता है की सुंरी अब चुदैल हो गयी है."
अभी भी धनिया को संतोष नही हुआ फिर सुंरी के बारे मे आगे बोलने लगी ....
"शंभू क्या कहेगा आप खूद कभी ध्यान से देखो जब सुंरी पूरा गाओं घूम कर घर आती है ....हरजाई ..सीधे चल नही पाती.... , और दोनो पैर फैलाए हुए चलती है.. इतनी चुदाई सब करते हैं की बुर के साथ साथ पैर भी फैल जाता है....."
बात जारी रखते हुए बोली...
"मैं तो रोज देखती हू उस हरजाई को ....घर मे घुसते ही नाली के पास मूतने बैठती है और मुतेगि क्या हरजाई बुर मे तो कई मर्दों का गाढ़ा पानी भरा होता है........., और उसके बैठते ही मर्दों की मेहनत सामने दीखने लगती है...जहाँ उसकी बुर रगड़ से लाल होती है...., वहीं लाल बुर के चौड़े मुँह से जब एक एक पाव सफेद मलाई गिरने लगता है तो मेरी आखें फट जाती हैं..मैं तो ऐसा देख कर बोल देती हूँ की लगता है पूरे गाओं से चुदवा कर आ रही है लेकिन उस रंडी पर कोई असर नही पड़ता"
अपनी बेटी के बारे मे इतना सुनकर बिरजू चिड़चिड़ा मुँह बनाते हुए बोला "छोड़ो ये सब बातें...मेरी तकदीर ही बहुत खराब है...क्या करूँ..."
धनिया झल्ला कर बोली ...
"..जब सारा गाओं मिल कर चोद डाला , तब मिर्ची तो लगेगी ही सुनकर....."
इतना सुनकर बिरजू ने अपनी नज़र दूसरी ओर फेरते हुए बोला...
"सुंरी को घर से बाहर मत जाने दिया करो..."
धनिया ने अपने ससुर के इस बात का जबाव देते हुए कही...
"मेरे कहने पर क्या मानेगी ...जैसे आपके गले मे शराब गये बिना शांति नही मिलती...., वैसे ही उसे भी अपनी बुर मे लंड डलवाए बिना चैन थोड़ी मिलने वाला है"
आगे गुस्से मे बोली
फिर धनिया ने अपनी सारी के पल्लू को अपनी छाती पर ठीक करते हुए बोली...
"अब उसकी शादी के भी बारे मे सोचो...यही सही समय है ..... अब गाओं के मर्दों ने उसे रगड़ रगड़ कर बड़ा कर दिया है , और कोई भी लड़का उसकी कसी हुई जवानी को देखते ही शादी के लिए तैयार हो जाएगा....सच पुछिये तो आज कल के लड़के भी गरम लड़कियाँ ही खोजते हैं...जो सुंरी को गाओं वाले बना दिए हैं...., यदि लड़का तैयार हो गया तो कम पैसे मे शादी भी हो जाएगी,"
चुपचाप धनिया की बातें सुन रहे बिरजू को समझाते हुए आगे बोली
" सच मे सुंरी की चुचियाँ बहुत बड़ी बड़ी हो गयी हैं..लड़का तो देखते ही मर जाएगा .. "
फिर धनिया अपनी चुदाई के वजह से कुच्छ उलझ चुके बालों को ठीक करते हुए बोली...
"शंभू बहुत झूठ बोलता है आपसे..बहुत चोदु है साला दारू पीला कर बहू और बेटी दोनो का मज़ा लूट रहा है....अब उससे कहिए की कहीं से लड़का ढूँढ कर सुंरी की शादी करवा दे..."
फिर बिरजू कुच्छ सोच कर धनिया से बोला ..
" साला मेरी बात नही सुनेगा...तुम ही उससे कहो..."
"ठीक है.." धनिया राज़ी होते बोली
फिर बिरजू धनिया की ओर देखते बोला...
"इसीलिए मैं सोचता हूँ की शंभू को नाराज़ करना ठीक नही है.....जब साला बदमाशी किया है तो शादी भी कहीं करवा दे....उसके जानने वाले बहुत हैं...वह सुंरी के लिए लड़का ज़रूर ढूँढ लेगा....तुम भी कभी उसके उपर गुस्सा मत करना..."
फिर बहू हंस दी और बोली
"मैं कहा उसे रोक रही हूँ जबसे मेरा पति कमाने गया है तबसे तो शंभू मेरी आग शांत करता रहा है,,... और इस चाम की थैली मे ना जाने कितने लोग अपनी ताक़त लगा चुके है और इस शंभू के ज़ोर लगाने से क्या फरक पड़ता है.. वैसे भी ये कोई घिसने वाली चीज़ थोड़ी है.."
हंसते हुए अपने ससुर को कुच्छ चिढ़ाने के अंदाज़ मे बोली
" हर दूसरे दिन नई हो जाती है" इतना कह कर धनिया हँसने लगी.
फिर बिरजू की बहू ने सीसे मे देखकर अपने माथे की बिंदिया ठीक की और लिपीसटिक लगाते हुए आगे बोली
"आज घर चल कर मैं माँस मुर्गा बनाउन्गि .."