• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

संक्रांति काल - पाषाण युगीन संघर्ष गाथा

नए सदस्यों के आगमन के चिन्ह

अम्बी में भावनात्मक व शारीरिक परिवर्तन होते देख जादौंग विस्मित था ,मगर अम्बी को शायद इसका कारण समझ आ चुका था । जब ऐसे ही परिवर्तन अपनी जननी मेंं दृष्टिगत

हुए थे अम्बी को तब उसे हर बात बारीकी से समझाई थी

धारा ने । इसीलिए उसे अपने गर्भ मेंं पलते जीव का पूरी तरह

भान था ।

जादौंग की जिज्ञासा को बडी सहजता से अम्बी ने सुलझा

दिया । गुफा के द्वार पर ही विशालकाय वृक्ष की टहनी पर

एक पंछी युगल के परिवार में नन्हे चूजे का आगमन हुआ,

इस जोड़े को कल्लोल करते अकसर जादौंग व अम्बी मग्न

होकर देखा करते थे । चूजे को दिखाकर अम्बी ने अपने

पेट की ओर इशारा किया तथा मुसकुरा कर पलकें झुका

लीं । कुछ ही देर मेंं जादौंग समझ गया कि उसके और

अम्बी के प्रेम को पूर्णता मिलने वाली है ,उनकी गुफा का

विस्तार होने जा रहा है ।

घंटों तक उल्लसित जादौंग बच्चों की तरह अठखेलियाँ करता रहा ,पेड़ों की टहनियों पर झूलता ,हिरणों के साथ कुँलाचें

भरता ,मानो सभी के साथ अपनी खुशी साझा करने का

पागलपन सवार हो गया हो उसपर । अम्बी उसकी इन

हरकतों को देख घंटों खिलखिलाती रही ।

नाराजगी और पश्चाताप

अम्बी के गर्भ का समय शायद पूर्ण हो आया था ,पीड़ा की

वजह से व्यवहार में चिड़चिड़ापन भी बढ़ रहा था । अभी

जरा भी भारी कार्य नहीं कर पा रही थी अम्बी । ऐसा नहीं

कि जादौंग उसका खयाल नहीं रख रहा था ,उसके कार्य

व्यवहार मेंं एक जिम्मेदार पति की झलक दिख रही थी ,

शिकार करने के बाद माँस पकाना ,और शक्तिवर्धक पेय

बनाना भी सीख लिया था उसने ।

कभी कभी ,शायद कार्य की अधिकता से अम्बी पर खीज

भी उठता ,मगर कुछ ही देर में खुद से ही शांत भी हो जाता ।

मगर आज दोनों ही अधिक आक्रोशित हो गए । जादौंग

का बनाया जड़ी बूटियों का शक्तिवर्धक पेय को भी अम्बी

ने रूठकर फैंक दिया और जादौंग गुस्से में पैर पटकता ,

जंगल की ओर चला गया ।

दरअसल जादौंग को अम्बी से पुरुष संतान की अपेक्षा है

और अम्बी मादा संतान चाहती है । जादौंग सोचता है कि

गुफा और परिवार की सुरक्षा पुरुषों द्वारा ही हो सकती है,

जबकि अम्बी सोचती है कि मादा सुरक्षा करने में भी सक्षम

है तो पोषण भी वही करती है ।

जादौंग के जाने के बाद काफी देर तक अम्बी रोती रही ।

भाँऊ उसके पैरों को चाटता हुआ उससे अपनी हमदर्दी

व्यक्त करता रहा , फिर गुफा के भीतर से कुछ फल उठा

कर अम्बी के लिए ले आया ,और पूँछ हिलाकर अम्बी से

अनुनय करता रहा कि वह कुछ खाले ।

आँसुओं के बहने से जब दिल हलका हो गया तो शांत

होकर अम्बी ने कुछ फल खा लिए और भाँऊ को भी

थोड़ा माँस खाने को दिया । उसे लग रहा था कि जादौंग

भी थोड़ी ही देर मेंं लौट आएगा पछताकर ।

पर सूर्यास्त होने पर भी जब जादौंग नहीं आया तो अम्बी

को चिंता और घबराहट होने लगी । उसने जंगल की ओर

जाने का निश्चय किया । उसने भाँऊ को साथ लिया और

बड़ी कठिनाई से दस ही कदम चली कि अचानक से होने

लगी तेज पीड़ा ने उसके पाँव अवरुद्ध कर दिया ।तेज चीख के साथ अम्बी वहीं बैठ गई ।

भाँऊ उसे उठाने के प्रयास मेंं उसके चारों तरफ गोल गोल

चक्कर काटते हुए भौंकने लगा , पर शायद अम्बी पर मूर्छा

छा रही थी ,उसकी आँखें धुँधलाने लगी थीं । अचानक

मौसम में भी भयानक परिवर्तन दिखाई देने लगे । बिजलियाँ

कड़कने लगीं ,काले गहरे घन आकाश मेंं छा गए । लग रहा था कि भारी तूफान आने को है ।

बारिश चालू हो गई ,और बूंदों से अम्बी की मूर्छा भी टूट

गई । पर उसके अंदर खड़े होकर गुफा के भीतर जाने की शक्ति भी शेष ना थी । धूँधली नजरों से वो भाँऊ को

जंगल की ओर भागते हुए देख पा रही थी ।

अम्बी ने रेंगते हुए गुफा मेंं जाने का प्रयास किया गुफाद्वार

तक आते आते उसकी हिम्मत जवाब दे चुकी थी । कीचड़

में लथपथ अम्बी एक चट्टान की आड़ में अधलेटी अवस्था

मेंं टिक गई । दर्द असह्य होता जा रहा था और रह रहकर

उसके गले चीखें निकल रही थी । पहली बार अम्बी को

अपने अकेले होने का अहसास डरा रहा था । बारिश के

शोर के साथ उसे अचानक हिंसक गुर्राहट का स्वर सुनाई

दिया ।

इससे पहले कभी किसी गुर्राहट ने अम्बी को इस कदर

नहीं डराया था , डर और दर्द का मिलाजुला असर उससे

उसकी चेतना छीनना चाहता था,मगर वो जानती थी

कि इसका परिणाम ना सिर्फ उसके लिए बल्कि उसकी

संतान के लिए भी घातक होता । गुर्राहट का स्वर उसे

अपने करीब आता महसूस हुआ । कुछ ही कदमों की

दूरी पर दो जोड़ी आँखें चमकती नजर आई उसे

खतरा बहुत समीप था उसके । दर्द भी बढकर चरम पर

आ गया था । दर्द से तड़पती हुई अम्बी पूरी शक्ति लगाकर चीखी थी शायद नये मेहमान ने उस बरसात को महसूस करने के लिए पूरी शक्ति लगाकर अम्बी का साथ दिया ।

हाँ वह आ चुके थे अम्बी व जादौंग के परिवार का हिस्सा बनने को । एक नहीं तीन संतान एक बेटी और दो बेटे ।
 
अम्बी के चेहरे पर मु्स्कान की जगह भय ने ले ली वो दो शैतान शायद इसी मौके की ताक में थे।उन गलीच लक्कड़बग्घों के मुख से टपकती लार को देखकर तो

यही अनुमान हो रहा था गुर्राहट के साथ एक आगे बढा,अम्बी ने देवता से मदद माँगी

भाँऊ के भौंकने की ध्वनि ने जादौंग की तंद्रा भंग की,

वो एक वृक्ष के सूखे तने पर बैठ कर बारिश में भीगते

हुए अम्बी के साथ करे अपने रूखे व्यवहार पर पछता

रहा था । भाँऊ के भौंकने का तरीका जादौंग को स्पष्ट

कर चुका था कि अम्बी ठीक नहीं है । वह बिना पल भी

भी गँवाए अपनी गुफा की ओर दौड़ पड़ा ।

भाऊँ और जादौंग दौड़ते हुए गुफा की और जा रहे थे।

अम्बी की दर्द से भरी चीख सुनकर जादौंग का दिल बेठने लगा था की गुफा द्वार के पास चमकती दो जोड़ी आँखों

को देखकर अनिष्ट की आशंका से काँप उठा उसने वहीं से अपना अस्त्र उन चमकती आँखों पर फैंक कर मारा।

तेजी से आता हुआ जादौंग का भाला आगे वाले हैवान के जिस्म में घुसकर उसे काफी दूर तक खींचता चला गया

दूसरा शायद खतरा भाँप कर पहले ही भाग चुका था ।

सुरक्षित होने के अहसास के साथ धीरे धीरे अम्बी की

आँखें मुँदने लगीं ।

जादौंग ने बेसुध अम्बी को कंधे पर उठाया ही था की अपने प्रेम के साकार स्वरूप पर दृष्टि पड़ी ,जिनका रोना भी घबराहट में सुन नहीं पाया था वह आँखों से आँसुओं के साथ उसकी समस्त कुंठाएँ और अपराधबोध पूरी तरह बह गया था । पिता बनने का अहसास तो हर काल में समान ही सुख देता है ना फिर चाहें सभ्यता कोई भी हो ..भावना रिवाजों के दायरे में कहाँ आती हैं।

बारिश पूरी रात पड़ती रही , प्रकाश के देवता ने धरा पर लालिमा बिखरा दी थी जितनी भयानक रात उतनी ही खुशनुमा सुबह है आज ।जादौंग नन्हे शिशुओं को निहारता अम्बी के बालों को सुलझाने का यत्न करता उसके सिर

को सहला रहा था । अम्बी पुलकित नयनों से शिशुओं को निहार रही थी।
 
◆◆◆◆◆【5】◆◆◆◆◆

रात की घटना ने जादौंग को बड़ा सबक दिया था ।उसने सुरक्षा के विषय में गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया ।

धीरे धीरे प्रगति करते हुए जादौंग के परिवार में भाऊँ के अतिरिक्त दो कुत्ते नर और एक मादा कुत्ती भी जुड़ चुके

थे ।

पहले गुफा मानवों का ये परिवार जो पूरी तरह से शिकार

पर निर्भर था ,अब फलों व कन्दमूलों का उपयोग ज्यादा बेहतर तरीके से करना सीख गए थे। चूँकि अम्बी की अपनी जननी धारा के समय से ही वनस्पतियों मे अधिक रूचि

रहती थी ,अनेक पेड़ पौधों व जड़ों के चिकित्सकीय गुणों

को समझने लग गयी थी । लकड़ी के पहिये के अविष्कार

ने शिकार व फल, कंद-मूलादि एकत्रित करना सहज हो

गया था ,बच्चों ने तो अपने खेलने के लिए भी गाड़ी बना

ली थी ।खाल के वस्त्र से शरीर ढंकना भी प्रचलन में आ

चुका था ।

अब अंबी ,जादौंग के साथ शिकार पर नहीं जाती थी ,

अपने बच्चों के साथ वन से फलों व कंदमूलादि इकट्ठा करती ,और गुफा पर लौटकर आग जला कर उन जडों

व फलों पर प्रयोग करती ।

जादौंग शिकार से आकर बच्चों के साथ मिलकर अम्बी

को फलों और जड़ो को भूनते व उबालते देखता तो हँस

कर खिल्ली उड़ाता । जिससे चिढकर अम्बी मूँह को गुब्बारे की तरह फुला लेती थी । बच्चे सारे के सारे जादौंग पर

झूल जाते तो वह अपने लम्बे बाजुओं पर उन्हे झुलाता

और पूरी गुफा बच्चों की किलकारियों से गूँज उठती ।
 
ऐसा नहीं है की अन्य कहीं और गुफामानव भी ऐसा ही जीवन जी रहे होंगे , दरअसल सम्पूर्ण धरा पर ही सभ्यताएँ अस्तित्व में आ चुकी थीं और हम यह नहीं कह सकते की समान रूप से ही विकसित रही हों । बहुत से कारक जैसे भौगोलिक स्थिति ,वातावरण,पशुओं की उपलब्ध जातियाँ आदि उनके विकास की गति में निश्चित रूप से फर्क लाते

रहे होंगे ।

पर चूँकि उस काल का मनुष्य पशुओं से मात्र इतनी भिन्नता रखता था की उसने जीवन में सामाजिकता की जरूरत

को समझना व छोटे स्तर पर यंत्रों का इस्तेमाल व आग

का प्रयोग करने का ज्ञान रखता था । इसलिए आमतौर पर आदिम मानवों को अपने आसपास का जितना दिखाई देता था ,शायद उसके आगे की दुनिया की वे कल्पना ही नहीं

कर पाते होंगे। अम्बी व जादौंग का परिवार अधिक तेज

गति से विकास कर रहा था क्योंकि अम्बी की बौद्धिक

क्षमता उस काल के मानवों से बहुत बेहतर थी और जादौंग की भी कल्पनाशीलता अद्भुत थी । वह दोनों ही भावी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया करते और उसी आधार

पर नई तैयारियां किया करते ।

वैसे तो अम्बी और जादौंग के लिए तो उनके पास उपस्थित उनका परिवार ही उनका समाज था । पर चूँकि वे पूरी तरह अपने परिवार की संख्या और क्षमता पर ही निर्भर थे ,

उनके द्वारा हासिल प्रत्येक उपलब्धि उनके विशेष कोशल

का प्रतीक थी उनकी प्रत्येक खोज उनकी आवश्यकताओं पर केन्द्रित थीं ।

ऐसे ही आराम से जीवन कट रहा था । आठ वर्ष गुजर गए जादौंग और अम्बी के साथ रहते हुए । अम्बी ने जादौंग के संसर्ग से चार बार प्रजनन के द्वारा तीन पहली संतानों के

अतिरिक्त आठ संतान और उत्पन्न की । उनकी कुल ग्यारह संतानों मेंं चार मादा व सात पुरुष संतान हैं । ये संख्या तेरह

होती यदि अंतिम दो संतान जन्म लेते ही मर ना गई होती।

सदमा

इस बार अम्बी की गर्भावस्था के दौरान जादौंग के स्वभाव

में अचानक बहुत ज्यादा बदलाव आ गया था । हमेशा परिवार के साथ खुश रहने वाला जादौंग , अचानक अपने

आप मेंं खोया हुआ रहने लगा । ना वो अम्बी से ही बात

कर रहा था ,ना ही बच्चों के साथ खेलता ।

अम्बी गर्भवती होने के बाद भी अपने सभी कार्य तत्परता

से करती और बच्चों को भी वन में ले जाकर जड़ी बूटियों तथा कंद,मूल ,फलादि की पहचान करवाती और दोपहर

तक उन्हें एकत्रित कर वापस गुफा पर आ जाती थी। उसके

पश्चात भी थकान को चेहरे पर नहीं आने देकर जादौंग का

स्वागत प्रफुल्लित होकर करती , मगर जादौंग के बर्ताव

में रूखापन उसे तोड़ देता था।बात बात पर उन दोनों के

मध्य विवाद उत्पन्न होने लग गए ।

उस दिन अंबी और जादौंग में बच्चों के कार्य बांटने पर

विवाद हो गया था । अम्बी चाहती थी की उसकी चारों

मादा संतान खाना पकाने के साथ साथ शिकार करना

भी सीखें , पर जादौंग का मन इस पर सहमत नहीं था।

वह भी शायद अब पुरुषों वाला दंभ पालने लग गया

था । विवाद इतना बढा की कई दिनों तक दोनो ने

एक दूसरे के साथ सोना ही नहीं वार्तालाप भी बंद कर

दिया ।

पर अम्बी के नारी हृदय में जादौंग के चेहरे पर तनाव और दुख देख करुणा उत्पन्न होने लगी और अपने अहं को त्याग उसने विचार किया की आज जादौंग को मना कर उसका तनाव उतार देगी । रात गहराने पर भी जब जादौंग वन से वापस नहीं आया तो अनिष्ट की आशंका से अम्बी का दिल घबराने लग गया पूरी रात वह तारों को देखती रही ।

जब भी नींद आने लगती किसी पत्ते की आहट में जादौंग

का अंदेशा कर उठ बेठती । बच्चे उसे घेरकर निश्चिंत सो

रहे थे शीत का अहसास हुआ तो देखा लकड़ियाँ बुझ चुकी

थीं और बच्चे एक दुसरे में सिमटकर अपने शरीर को ठंड

से बचा रहे थे , वह उठी और खालों से बने लबादे लाकर सभी बच्चों को ढ़क दिया ,एक लबादा कुत्तों को उढ़ा दिया।

द्वार की शिला पर बैठकर अतीत के पन्ने पलटने लगी और सोचते सोचते कब आँख लग गई उसकी पता ही नहीं चला ।

सूर्य की पहली किरण के आगमन के साथ ही उसकी नींद खुल गई , जादौंग अभी तक वापस नहीं आया था।बच्चों

को सोता देखकर अम्बी जादौंग को खोजने निकल पड़ी। उसने भाँऊ को साथ लिया और बच्चों की सुरक्षा के लिए बाकी दोनों कुत्तों को वहीं गुफा पर छोड़ दिया ।

उसे अनुमान था वन के उन हिस्सों का जहाँ जादौंग

अमूमन जाया करता था , पहाडी वन में एक झरना था

जहाँ कई बार वो जादौंग के साथ जा चुकी थी । वो

झरना एक गुफा मुख के ऊपर से झरता था और यूँ

प्रतीत होता था मानों गुफा पर पानी से बनी दीवार हो ।

पहले भी जादौंग अम्बी से नाराज होकर दो दिन तक

उस झरने वाली गुफा में आकर रुका था ,उसे लगा की

आज भी वो उसे वहीं मिलेगा । पर इस हाल में इस

दृश्य का अनुमान नहीं लगा पाई थी अम्बी ,लगा पाती

तो कभी अपने अंतर्मन को ये दर्द दिलाने कभी यहाँ

नहीं आती।
 
◆◆◆◆◆【6】◆◆◆◆◆

आँखों से आँसु ढुलक पड़े अम्बी के जब जादौंग को झरने पर एक दूसरी मादा के साथ संसर्ग करते देखा। जादौंग की पीठ उसकी ओर थी वह चाहती थी की दोनों के मध्य जाकर उन्हे पृथक कर दे ,या जाकर उस मादा को वहीं गुफा के द्वार से पीछे खाई में धकेल दे ! पर वो नहीं कर सकी

उसके चारों तरफ उसे अपने पिता और भाईयों के अट्टाहास करते चेहरे दिखाई देने लगे । वह कानों को बंद करके सन्नाटे में खो जाना चाहती थी ,पर वो चेहरे पुरुष सत्ता का दंभ भरते अब भी वैसे ही अट्टाहास कर रहे थे उनकी हँसी का शोर

कानों में उंगलिया डाल लेने के बाद भी कम नहीं हो पा रहा था ।

पुरुष के जिस कुरूप चेहरे को वह जादोंग के प्रेम में भुला चुकी थी वह आज पुनः उसकी आँखों में उतर आया । उसे लगा की उसके भाई कुआँग ने हँसते हँसते जादौंग पर अपने भारी अस्त्र से प्रहार कर उसे मार दिया उसका पिता जादौंग के साथ संसर्ग करती उस लड़की को नौचने लगा और कुआँग अम्बी को दबोचकर अपनी हिंसक भूख शांत करने लगा । उसके स्पर्श के भय से अनायास ही अम्बी के मुख से चीख निकल गई..!

वो सपने से बाहर आ चुकी थी जादौंग उसके कंधे पर हाथ रख उसके सम्मुख खड़ा मुस्कुरा रहा था उसके बाजू में वो दूसरी औरत ,लगभग जादौंग के कंधों पर झूलती हुई खड़ी मुस्कुरा रही थी वो मुस्कान अम्बी को बुरी तरह से छलनी

कर रही थी अम्बी को लगा वो एक पल और खडी रही तो नीचे गहरी खाई में जा गिरेगी

वह जादौंग के हाथों को झटक कर वापस मुड़ के अपनी गुफा की और भागने लगी । जादौंग ने पीछे से उसे पुकार

कर रोकने का प्रयास किया पर वो अब रुकना नहीं चाहती थी ,वो भागती रही भागती रही जब तक गुफा के द्वार पर नहीं आ पहुँची !

उसे मालूम था की जादौंग को वो दोष दे ही नहीं सकती

थी। वैसे भी उस काल में अभी रिश्तों मेंं मर्यादा और बंधन सिर्फ जरूरतों से जुड़े थे । पुरुष का एक मादा के साथ

वफादार रहना तो विषय ही नहीं था ,क्यूंकि वह तो उसके लिए उस मालिक की तरह था जो उसकी सुरक्षा और भोजन के बदले उसके साथ संसर्ग करता ,उसकी शारीरिक व मानसिक भूख को तृप्त करने का साधन मात्र थी मादा

फिर दगा और बेवफाई जैसा कुछ बचा ही कहाँ ।

"पर नहीं "अम्बी फिर सोचती है "नहीं जादौंग तो ऐसा

नहीं था ,उन दोनों के मध्य तो ऐसा व्यवहार था ही नहीं,

जादौंग का प्रेम महसूस किया है उसने ,वह मात्र भूख नहीं

प्रेम ही था

मगर नहीं ,दोष जादौंग का नहीं है ,दोष खुद उसका है

उसे खुद पहले सोचना था की जब वो जादौंग की जरूरत

पूरी नहीं करेगी तो वो कोई और साथी ढूंढेगा जो उसकी

भूख मिटाए । यह तो स्वाभाविक प्रक्रिया ही तो है । जिससे वह बिलकुल अपरिचित नहीं है । जादोंग को मिलने से पूर्व वह इस प्रक्रिया को रोज ही तो देखा करती थी " निरंतर

चलती विचार प्रक्रिया को विराम दिए बगैर जल्दी जल्दी कदम बढाती अम्बी ,भाऊं के साथ वापस गुफा में आ गई ।

उसके बच्चे भूखे और सहमें हुए बेठे थे उसकी अनुपस्थिति की वजह से । पूरा दिन अजीब सा सन्नाटा गुफा में छाया रहा अम्बी पूरा दिन खामोश बैठ कर विचारमग्न रही उसकी तीनों बड़ी संतान नीमा ,औमन व तार्षा ने ही छोटे भाई बहनों और कुत्तों के खाने के लिए शोरबा और भुनी जडे़ तैयार कर खिला दीं ।

अम्बी ने भी कुछ फल खाए और फिर वन की और निकल पड़ी ।अम्बी का मन ना शिकार करने में लगा ,ना ही वो जडें और जलाने की लकड़ियाँ ही समेट पाई। खाली हाथ ही वापस आ गई थी वो ।

गुफाद्वार पर आते ही अम्बी चीखकर बेसुध हो गई ,आवाज

सुनकर सभी बच्चे भागकर उसके पास आ गए,तीनों कुत्ते

जोर जोर से भौंकने लगे । प्रसव वेदना वक्त से पहले शुरू हो

गई ।

इस रात भी बारिश हुई ,और पूरी रात होती रही ,भयानक तुफानी रात थी वो । बहुत कुछ छीन लिया अम्बी से इस रात

ने । एक बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ ,और दूसरा पैदा होने के

बाद मर गया । पूरी रात गुफा में कोई नहीं सो पाया ,बच्चे

बस अपनी माँ को घेरकर बैठे कुतुहल से मृत शिशुओं को

देखते रहे । आधी रात के पश्चात अंबी को चेत हुआ । जादौंग

को अब तक वापस ना आया देखकर वह और टूट गई ,

मगर वह रो नहीं रही थी ,यहाँ तक कि मृत शिशुओं को देखकर भी आँसु नहीं आए ।

कुछ देर को रुकी बारिश पुनः शुरू हो गई ,सभी गुफा में अन्दर जाने लगे कि, अँधेरे में बिजली चमकी तो हलकी झलक नजर आई ,वे चार साए थे ,दो वयस्क और दो शायद

बच्चों के । जादौंग दूसरी मादा को साथ लिए आ रहा था गुफा की ओर , उनके साथ दो साए और नजर आए अम्बी को वो शायद दो बच्चे थे ।
 
दो मृत शिशु देख आहत हुआ जादौंग ,मगर साथ ही लज्जित

भी हुआ अम्बी के दुःख से । शिशुओं को देवता के सुपुर्द किया जादौंग ने ।

जादौंग के रहस्योद्घाटन से अम्बी कुछ हद तक संतुष्ट थी। सारकी नाम था उस औरत का जो जादौंग के पुरानी गुफा बस्ती के मुखिया की पसंदीदा मादा थी ..! जादौंग कबीले

का शक्तिशाली शिकारी था और उसके मजबूत कंधे व सुडोल देह की वजह से कबीले की अधिकतर मादाएँ उसे अपना साथी चुनना चाहती थी,पर जादौंग को बस सारकी

ही पसंद थी ।

सारकी भी मन से जादौंग को ही चाहती पर मुखिया के

अस्त्र का भय उन दोनों को निकट नहीं आने देता

मुखिया देवता से वार्तालाप कर सकता था और देवता का भय दिखा कर पूरे कबीले को नियंत्रण में रखता। उसने

देवता का फरमान बताकर सारकी को देवसेवा के लिए अपनी गुफा जिसे वो देवता के आने जाने का मार्ग बताता

था उसमें नजरबंद कर रखा था ।कबीले में कोई उसका विरोध नहीं कर सकता था ,क्योंकि देवता उसी की बात सुनता था ।

उस दिन सारकी की चीखें जिन्हे मुखिया देवता के साथ

के आनंद से निकली ध्वनि बताता था जादौंग के कानों

में पड़ी ।जादौंग अपने भाई गौरांग के साथ शिकार पर निकला था और सारकी की चीख सुनकर मुखिया की

गुफा की तरफ जाने को उद्दत हुआ , गौरांग उसे रोकना चाहता था । गौरांग को धकेलकर जादौंग मुखिया की उस गुफा में प्रवेश कर गया जहाँ कबीले के किसी पुरुष का

आना निषेध कर रखा था मुखिया ने ।

गुफा में सारकी के हाथ और बंधन मेंं थे और मुखिया उसकी

देह से अजीबोगरीब खिलवाड़ कर रहा था । जादौंग उस

दृश्य को देख कर देवता के भय से भयभीत तो हुआ मगर

सारकी की याचना करती दृष्टि और तड़प को भी नहीं सह

सका । उसने बिना कुछ सोचे मुखिया पर आक्रमण कर

दिया ,और उसे जख्मी करके सारकी को वहाँ से निकाल लाया ।

मुखिया ने देवता के अपमान का आरोप लगाकर उसे

कबीले से निष्कासित कर दिया था ।देवता के क्रोध से

डरकर कोई विरोध ना कर पाया । वहाँ से आने के बाद उसकी मुलाकात अम्बी से हुई और वो एक हो गए ।

सारकी के गर्भ में जादौंग के साथ की निशानी पल रही थी इसकी जानकारी नहीं थी उसे पर चालाक मुखिया ताड़ चुका था । उसने सारकी को सबक सिखाने के लिए उसके गर्भ को देवता को समर्पित करने का आदेश कबीले को

सुनाया ,पर सारकी जादौंग के भाई की सहायता से जान बचाकर भाग निकली !

उसके छः माह के बाद सारकी ने वन में दो जुड़वा लडकी

को जन्म दिया , वो कई साल से वन में ही एक घने बड़े पेड़ पर अपना छोटा सा घौंसलेनुमा घर बना कर रहने लगी और जादौंग को तलाश करती रही ।

जादौंग से वह दो रोज पहले ही मिली थी जादौंग के गुफा पर वापस ना आने का भी यही कारण था ।अम्बी ने सारकी और उसकी बेटियों को उनके साथ रहने की अनुमति दे दी ।

पर मन में कई बार द्वेष भाव उत्पन्न हो जाता था पर शीघ्र ही समझ भी आ जाता था की द्वेष करने की वजह है ही नहीं धीरे धीरे वे लोग आपस में एक दूसरे को परिवार मानने लग गए थे ।अम्बी ने सारकी की बेटियों जारा और साना को अपनी बेटियों में ही शुमार कर लिया था और सारकी भी

हर काम में पूरा हाथ बंटाती थी ।

ऐसे ही कई वर्ष गुजर गए । धीरे धीरे स्थितियाँ सामान्य हो गई थी ,जादौंग का परिवार अब सुखी था । शुरुआत में परिवार बढ़ने से आवास के स्थान ,माँस व अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में कमी पड़ने लगी ,पर कुछ बेहतरीन उपलब्धि या उन्नति व नई खोजों की मदद इस समस्या का कुछ ही दिनों में सटीक समाधान निकाल लिया इस गुफा मानव जादौंग के परिवार ने ।

सारकी ने गुफा में स्थान की कमी का निदान अब लकडी घास व लताओं,आदि के इस्तेमाल से छोटी आरामगाह का निर्माण करना सभी को सिखा दिया था ।लड़कियों ने आराम के लिए चार पाँच मचाननुमा आरामगाह गुफा के आसपास तैयार कर ली थीं । अब उनके पास रहने की जगह के लिए अधिक विकल्प थे और गुफा पर आश्रित रहना आवश्यक नहीं रहा ।

अम्बी ने सारकी की मदद से पेड़ के तने को विशेष आकार में काट कर , शिकार व फलों के वाहन में पहिये लगा कर आवागमन और सुगम कर लिया था । सारकी के पिछले

सामाजिक जीवन का अनुभव यहाँ काम आया ।

साना ,जारा,नीमा,तार्षा और पीयू पाँचों मादा संतान फल , कंदमूल और वनस्पति एकत्र करने अम्बी के साथ गाड़ी ले कर जाती और शाम तक उन्हे पूरा भर कर वापस लाती थीं । तार्षा ने तो पेड़ की लताओं की सहायता से एक झुला

भी बना लिया था ,जिसपर झूलने के लिए बच्चे आपस मे

झगड़ पड़ते थे ।

इसी तरह सभी लड़के जिनमें ओमन सबसे बड़ा था शिकार के लिए जादौंग साथ ले जाता था और लड़कों ने भी अपने लिए अतिरिक्त पाँच छः छकडे तैयार कर लिए थे जिससे अच्छी मात्रा में अस्त्र साथ लेकर जाते और वापसी में काफी बड़ा शिकार भी आसानी से ले आते थे ।बड़ा लाभ यह रहा की पहले जो हड्डियाँ और खालादि कई बार अनुपयोगी समझ छोड़ने पड़ते थे अब साथ ही आ जाते ।

खालों से पहनने योग्य वस्त्र तैयार करने में सारकी और

जारा दोनों बहुत अभ्यस्त थे । पुरुष संतानों में ओमन

मीचेंग,व ओरांग हड्डियों के इस्तेमाल से अस्त्र बनाना सीख गए थे अब वे बेहतर धारदार अस्त्र तैयार करने लग गए थे जो शिकार करने में बहुत कारगर सिद्ध होते थे ।

सबसे महत्वपूर्ण खोज रही कि, वे ऊँटों को पालने लगे ,यह ऊँट खच्चर के आकार के थे ,और छकड़े के साथ आदमी का वजन भी आसानी से खींच लेते थे । एक मादा व एक नर

ऊँट जादौंग गहन वन से पकड़ लाया था । नर ऊँट को वजन

खींचने के लिए काम में लेने लगे ,पर मादा ऊँट ,छकड़े को

नहीं खींचती थी जिससे जादौंग को लगा की वह अनुपयोगी

सिद्ध हो रही है । जादौंग उसे माँस के लिए मारना चाहता था

पर अम्बी ने उसे ऐसा नहीं करने दिया ,दरअसल उसका

प्रसव होने वाला था जिसका अम्बी को भान था । पहले तो

जादौंग नाराज हुआ पर जब उसने शिशु ऊंट को जन्म दिया

तब उसे बहुत खुशी हुई । एक दिन जादौंग को अम्बी ने एक स्वादिष्ट पेय दिया पीने के लिए जिसे पीकर उसे बेहद अच्छा महसूस हुआ , यह मादा ऊँट का दूध था जिसे अम्बी ने खोजा था ।

भोजन ,आवास आदि की समस्या का तो समाधान हो गया

परन्तु एक नई समस्या उत्पन्न हो गई वह थी परिवार में द्वेष भाव की उत्पत्ति ।
 
◆◆◆◆◆【7】◆◆◆◆◆

परिवार बढ़ रहा था । जारा और साना भी सरल हृदय से अपने नये परिवार को अपना चुकी थीं ,और सारकी से अधिक अम्बी में उन्हे अपनी जननी नजर आती थी । अम्बी

के मन में तो उसकी स्वाभाविक सरलता ने किसी द्वेष को

बाकि नहीं रखा पर शायद सारकी को अम्बी और जादौंग

का साथ कष्ट देता था ।सारकी के अन्दर पनप रही ईर्ष्या धीरे

धीरे बलवती हो रही थी । उसे लग रहा था की उसकी संतान पर भी अम्बी का नियंत्रण हो रहा है और जादौंग भी अम्बी को ही प्रेम करता है। वह भूल गई की कैसे आसानी से अम्बी ने उसे और उसकी बेटियों को अपना लिया था ।उसे अम्बी की अच्छाईयाँ छल लगने लगी थी । उसके चेहरे से उसके भावों को अम्बी ने अनुभव कर लिया था ।

बच्चों में आपस में परस्पर स्नेह बरकरार था ,बस कभी

कभी अम्बी पर अपना आधिपत्य जताने के लिए उलझ

पड़ते थे । पर अम्बी उन्हे बेहतरीन तरीके से उदाहरण

द्वारा मिलकर रहना सिखाती थी । पर उस दिन साना

की तकरार तार्षा (जादौंग अम्बी से उत्पन्न बडी बेटी ) से

हो रही थी । साना ने अम्बी के लाए फल ,जो सभी बच्चों बेहद पसंद थे ,छिपा दिए थे । तार्षा ने उसे ऐसा करते देख लिया और इसी बात पर दोनो एक दूसरे के बाल खींचती गुत्थमगुत्था हो गईं ।

अम्बी जो कुत्तों को माँस के टुकड़े खिला रही थी बच्चों के कोलाहल को सुन कर वहाँ आ गई उसे खराब लगा की सारकी बच्चों को लड़ते देख हँस रही थी । अम्बी के गुस्से में चिल्लाने पर दोनों लड़कियाँ अलग हो गईं ,और नजरें नीचे कर खडी रहीं । सारकी जो इतनी देर से मजे से देख रही थी वो भी अब गंभीर दिखने का अभिनय करने लगी ।

जारा समैत सारे बच्चे साना की ही गलती मान रहे थे ,क्योंकि

साना ने सबके हिस्से के फल छिपा कर हडप रही थी । तार्षा

ने जब वजह समझाई तब अम्बी ने साना को डांटकर फल

वापस मंगवाए और सभी बच्चों को बाँटकर दे दिए ।

चूँकि साना ने गलती की थी उसको दंड स्वरूप एक भी फल नहीं मिला । साना को दुखी देखकर सारकी उसे अपने साथ

ले कर वन की और चली गई । सब सामान्य हो गया था पर

सारकी ने द्वेषवश साना के मन में अम्बी के प्रति जहर भरने

का प्रयास किया । साना को लगा की अम्बी ने उसके साथ अन्याय किया ,और सारकी भी बार बार उसको यही बोल कर चिढाती रही । मासूम मन को भटकाने में मुश्किल ही क्या होनी थी ।

अब साना ने अम्बी की बात सुनना बंद कर दिया था ,कई

बार तो अम्बी को अपमानित करने के लिए उसकी दी हुई वस्तु उसके सामने ही फैंकने लग जाती । जादौंग को परिवार में क्या घट रहा है अक्सर कम ही ध्यान पड़ता था । पर सारकी की दुर्भावना धीरे धीरे असर दिखाने लगी थी ।

साना ने जारा के मन में भी अम्बी के प्रति नफरत पैदा करने का प्रयास करना शुरू कर दिया था ,पर जारा अधिक समझदार थी और उसको उल्टा समझाती की अम्बी कितनी

भली है । कितना प्यार करती है हम सभी को। अम्बी साना के व्यवहार से दुःखी रहने लगी थी ,वो पूरी कोशिश कर रही थी की उसे समझा सके , पर शायद सारकी ने उसके जहन में जहर कुछ ज्यादा ही भर दिया था।

यह समस्या आसानी से हल ना होती अगर एक घटना पुनः

इस परिवार को साथ नहीं ले आती । कई बार जीवन में आने

वाली मुसीबतें भी कितनी लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं ।

बच्चों के बढते वैमनस्य को खत्म नहीं कर पा रही थी

अम्बी।सारकी के द्वेष से अब अनभिज्ञ नहीं थी वो ।

उसका यही प्रयास रहता कि किसी तरह सारकी सभी

बच्चों के साथ घुल मिल जाए ,और गुफा को अपना

परिवार मानने लगे ।

इस वजह से की सारकी ज्यादा वक्त गुफा मे गुजारे अम्बी

ने शिकार पर जाना पुनः शुरू कर दिया था ।

जादौंग इन बातों पर कम ही ध्यान देता था ,उसको तो

यह वरदान ही मानो कि अम्बी किसी परेशानी को उस

तक पहुंचने ही नहीं देती थी। ज्यादातर परेशानियाँ तो ऊसकी सूझबुझ से हल हो जाती थी।

उस दिन भी अम्बी शिकार के लिए ही निकली थी और घने वनों में पहुँच गई ।अचानक एक हिंसक गुर्राहट ने उसका ध्यान आकृष्ट किया ।उसने सधे पांवों से घूमकर देखा उहहह वही गलीच जानवर । दो लकड़बग्घे शायद किसी

शिकार पर झपटने की पूरी तैयारी में थे। अम्बी ने थोड़ा गौर से देखा तो आँखें अचरज से कुछ चौडी हो गई उसकी । वह एक मानव था जो शायद इतना जख्मी था कि उन लकड -बग्घों को अपनी ओर बढते देखकर भी बचाव का कोई प्रयास नहीं कर रहा था ।

अम्बी ने बिना एक पल की देर किए अपना धारदार भालेनुमा अस्त्र ,निशाना साधकर उन हैवानों पर फैंका
 
तेज स्वर करते हुए वो अस्त्र एक लकडबग्घे

को चीरकर धराशायी कर चुका था ।प्रहार इतना तीव्र था

की उस जानवर को तड़पने का भी अवसर नहीं मिला था ।

दूसरे हैवान ने अपने साथी का हश्र देख कर भय और हिंसा क मिश्रित भावों से आक्रमणकारी को देखा । अम्बी को हाथ मे दूसरा अस्त्र उठाए आक्रमण की मुद्रा मे खडी देखकर उसके हौसले पस्त हो चुके थे, एक डरी हुई गुर्राहट जिसमें चेतावनी कम और विनती ज्यादा थी निकालते हुए वो गहन वन की ओर भागकर विलुप्त हो गया ।

जानवर के भागते ही अम्बी दौडकर उस मानव के पास आ गई । पर उस पुरुष के चेहरे पर निगाह पडते हीअम्बी की आँखे और फटती चली गईं। वो पुरुष जो अभी मूर्छित ही पडा था वो दिखने में हूबहू जादौंग की ही शकल का था। अगर अम्बी जादौंग के शरीर के हर हिस्से को करीब से ना जानती होती तो उसे जादौंग ही समझ लेती । जादौंग के

अनुपात मे यह पुरुष कुछ कमजोर था ,और शायद वय भी कम थी उसकी ।

अम्बी ने अनुमान लगाया कि हो ना हो यह जादौंग का

भाई गौरांग है जिसका जिक्र जादौंग करता रहता था ।

तभी अम्बी को उसकी हालत देख कर खयाल आया कि

इसे गुफा पर ले जाना चाहिए । वो अपनी शिकार ढोने

वाली गाड़ी को खींच कर,उस मूर्छित पडे इंसान के पास

ले आई ।

उसे गाड़ी पर डालने के लिए अम्बी ने जब स्पर्श किया तो लगा मानो आग मे हाथ डाल दिया हो। वो बुरी तरह से तप रहा था । अम्बी को मालूम था कि ऐसी तपन पर नियंत्रण

ना किया जाए तो परिणाम घातक हो जाते है ,उसे याद

आया जब वो छोटी थी तब इसी तरह की तपन उसे भी हुई थी,और तब धारा ने उसके पूरे शरीर को ठंडे जल से पौँछ

कर ठंडा किया था ।

अम्बी त्वरित गति से खाल को सिलकर बनाए मशक नुमा पात्र मे जलाशय से पानी भर लाई । एक पतली साफ खाल को भिगोकर अम्बी उस पुरूष की देह को पौंछ कर शीतल करने का प्रयास करने लगी ।ठंडे जल का स्पर्श पाकर पुरुष के जिस्म मे हलचल हुई । अम्बी ने उसे उठाना चाहा और उसकी आँखों व चेहरे को पौंछा एक पल के लिए उसने

आँख खोली पर शायद मूर्छा अधिक थी इसलिए आँख

पुनः मुंद गई ।

किसी तरह काफी प्रयास के बाद अम्बी उस अजनबी को अपनी गाड़ी मे खींच कर गुफा पर ले आई।अम्बी को आते देख सभी लडके लडकियां सभी दौड कर उसके पास आ गए और कोतुहल के साथ गाड़ी पर पडे अजनबी को देखने लगे।जादौंग को आने मे अभी वक्त था,पर सारकी जो अभी अपने कुत्ते को माँस के टुकडे खिला रही थी कोलाहल सुनकर आ गई। अजनबी को देखते ही सारकी के चेहरे पर पहले हर्ष के और फिर तुरंत ही चिंता के भाव स्पष्ट नजर आने लगे । अम्बी ने उसके चेहरे के बदलते भावों को देख

लिया था ,उसने सारकी की ओर प्रश्नवाचक नजरों से देखा ।

"गौ रांग ।" ,सारकी के मुख से निकला ,और वो दौड

कर मूर्छित पडे गौरांग के समीप आकर घुटनों के बल बैठ गई। सारकी गौरांग के सीने पर हाथ रखकर शायद उसके जीवित होने की पुष्टि करना चाहती थी तभी उसको छूकर देखने के बाद चेहरे से चिंता के निशान लुप्त हो गए थे।
 
अनजानी आशंका

सूरज पूरी तरह छिपा नहीं था पर धुँधलका गहराने लगा था, छोटे बच्चे अपने घर लौटते परिंदों के पीछे कोलाहल करते

दौड रहे थे, तीनों बडी लडकियाँ आग जलाने और रात को खाने के लिए माँसादि सेंकने मे लगी हुई थी कोई मशक मे पानी भर के ला रहा था तो कुछ लडके आग के लिए लकडियाँ इकट्ठी कर रहे थे । अम्बी गुफा से कुछ दूरी पर खडी हुई, जादौंग की प्रतिक्षा कर रही थी।

सूरज के छिपते ही जादौंग का गुफा पर आ जाना एक नियमित प्रक्रिया बन चुकी थी अम्बी के लिए कभी

कभी वो सोचती कि शायद जादौंग ने खुद को एक डोर

से सूरज के साथ बांध रखा है और इसी लिए वो डूबते

सूरज के साथ खिंचा चला आता है ।

वो दूर से मदमस्त चाल से चला आ रहा था ,एक कन्धे

पर शिकार की गाड़ी से बंधी रस्सी का दूसरा छोर था जिसे नीचे से अपने पंजे मे सख्ती से लपेट रखा था और दूसरे

कंधे पर भारी खाल उठा रखी थी। आगे चल रहे कुत्तों के साए उसकी छवि को और आकर्षक कर रहे थे।

""वाकई जादौंग अपने कबीले की मादाओं को अपने पीछे पागल बना देता होगा किसी बडे मैमथ जैसा मजबूत

और सिंह सा खूंख्वार ,सारकी का क्या दोष है इसमें !" अम्बी जादौंग को निहारती हुई सोच रही थी।

सभी लडके लड़कियाँ जादौंग को घेरकर उसके चिपट रहे थे। तभी सारकी उसका हाथ पकड़ गुफा मे खींचने लगी ,

पर जादौंग अम्बी की ओर देख रहा था ,मानो उसकी

अनुमति माँग रहा हो। अम्बी ने आँखों से स्वीकारोक्ति दी

,तब वो सहज भाव से सारकी के साथ चल दिया। गौरांग मूर्छा से उठ चुका था मगर शरीर मे शक्ति नहीं थी उसके। एक दूसरे के सम्मुख होते ही दोनों के चेहरे चमक उठे ।

चिंता ,हर्ष ,भय,क्रोध ना जाने कितने भावों का उतार चढाव हुआ जादौंग के पथरीले चेहरे पर जब गौरांग ने उसे अपने साथ घटित घटनाक्रम और आने वाले खतरे से अवगत कराया । अन्त मे चिंता की लकीरें उतर आई जादौंग के

माथे पर और फिर अगले ही पल उसका चेहरा कठोर होता चला गया ,,,,,,,,,,,,और

मानो जल बरसाने से पूर्व देवता ने गर्जना की हो बहुत ही भयानक ध्वनि मे चिंघाड़ उठा जादौंग । बच्चे बुरी तरह से सहम गए थे, खुद अम्बी भी सिहर उठी ,उसने जादौंग को इतने भयानक रूप मे पहले कभी नहीं देखा था पर

उसे जिज्ञासा भी थी ,ये जानने की कि आखिर क्या बात हुई है जादौंग की ,अपने भाई गौरांग से जो वह इस कदर परेशान हो गया है ।

वो हिम्मत ना जुटा पाई जादौंग से कुछ भी पूछने, पर इतना समझ गई थी कि जो भी बात है वो जादौंग के पुराने आवास से जुडी है, तभी सारकी भी उनमें शरीक है ।
 
रूमानी यादें

रात्रि का तीसरा पहर था ,सभी सदस्य गुफा के भीतर सो रहे थे सिवाय अम्बी के । गुफा द्वार बनाए गड्ढे मे अंगारे अब भी काफी तेज सुलग रहे थे । अम्बी अपने स्थान से उठकर गुफाद्वार पर आ गई ।

सामने के समतल स्थान पर उसकी दृष्टि जादौंग पर गई ,वह एकटक आसमान को निहार रहा था। अम्बी ने संसर्ग के वक्त को छोड और किसी भी वक्त जादौंग को गुफा मे सोते नहीं देखा । सर्द रात्रियों मे भी वो यूँ ही पूर्ण नग्न इस समतल पर ही सोता था ।

अम्बी को याद आया कि ,कैसे ऐसी ही एक सर्द रात मे वो खालों के लबादों में दुबकी हुई अंगारों के पास भी काँप रही थी। और जादौंग के शरीर पर एक रेशा भी ना था ,पर वो बडे आनंद से उसके सामने नाचता हुआ उसे रिझाने के यत्न कर रहा था। उसकी भाव भंगिमाओं को देख खिलखिला पडी थी अम्बी, और वो झूमता आया और अपना हाथ बढाकर एक ही हाथ से अम्बी को उस खालों के लबादे से अनावृत कर अपने कन्धे पर उठा लिया था । अम्बी विरोध करना

चाहती थी क्योंकि शीत से उसे बहुत भय होता था मगर उसे जादौंग के स्पर्श की ऊष्णता से शीत का अहसास ही नहीं रहा था और जादौंग का जादू पूरी रात चलता रहा था एक सिहरन सी दौड गई अम्बी की देह मे।

स्नेहिल नैत्रों से निहारती हुई अम्बी जादौंग के नजदीक आकर लेट गई और उसके कंधे और सीने के मध्य अपना सिर टिका । उसके जिस्म मे अभी तक वही ऊष्णता बाकि थी ।अम्बी का स्पर्श पाकर जादौंग की तल्लीनता भंग सी हो गई।

हाँ वो अभी तक सोया नहीं था ।अम्बी के साथ इस तरह आकाश तले लेटे हुए भी तो अरसा हो गया था उसे । दोनो

के अहसास ताजा हो रहे थे शायद। जादौंग ने अम्बी के गिर्द अपनी बाहों का घेरा बनाकर अपने और करीब ले लिया ।

अम्बी का पसंदीदा अहसास था ये सर्दी मे गुनगुनी धूप जैसा और जादौंग के लिए मानो काफी देर किसी दुष्कर शिकार के पीछे भाग कर जब जिस्म आग उगलने लगे और वहीं शीतल पानी का झरना मिल गया हो और वो अपनी पूरी आग उस झरने मे डूब कर बुझा रहा हो ।

काफी देर तक दोनों इकदूसरे मे डूबते उतरते रहे ,अपने बेहद अजीज़ अहसासों को जीते रहे ,अम्बी की देह पर चमकता पसीना स्वर्णिम आभा दे रहा था चांदनी रात में और जादौंग मानो आग मे तपकर लाल हुआ कुंदन सा निखर आया था ।

रहस्य का खुलासा / नरपिशाच

जादौंग और अम्बी दोनों के चेहरों पर पूर्णता से प्राप्त आनंद के भाव स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहे थे। जादौंग ने अम्बी माथे पर चुम्बन लिया । अम्बी के नैत्रों मे प्रश्नचिन्ह देख लिया था उसने जादौंग अम्बी को सब कुछ बडी शान्ति से बताने लगा , जिसे जानकर अम्बी का चेहरा जो अभी कुछ पल पूर्व तक दमक रहा था अब चिंता से पीला दिखने लगा।

जादौंग ने बताया कि," उसकी पूर्व गुफाबस्ती पर मानव पिशाचों ने हमला किया था । "मानव पिशाच " इस नए शब्द से पूरी तरह से अनभिज्ञ थी अम्बी जिज्ञासा से जादौंग को देखने लगी कि जादौंग बोला ये मानव पिशाच सागर से निकल कर आते हैं और इनकी ताकत

का कोई मुकाबला नही कर सकता ! मेरे बाबा ने बताया

था मुझे पर मैंने इन्हें पहले कभी नहीं देखा बस एक

बार जब छोटा था तब दूर से उनके धूलं उडाते सायों

को मैंने और गौरांग ने छिपकर देखा था । मेरे जनक ,मेरे भाइयों और कबीले की ज्यादा तर मादाओं को ले गए थे

वो पिशाच ।

वो पिशाच जिस ओर का रुख करते हैं वहाँ की समस्त

मादाओं और युवा पुरुषों को अपने साथ लेकर जाते हैं।

और उन्हें अपना गुलाम बनाकर रखते हैं । अधिक आयु

के पुरुष जो ज्यादा काम नहीं कर सकते उन्हें वे खत्म कर देते है ।

उन्होंने मेरी पूर्व गुफाबस्ती में भी कोहराम मचा दिया और बस्ती की सारी मादाओं को अपने साथ ले गए। गौरांग ने तांत्रिक के साथ उन पिशाचों को हँसते देख लिया था ,पर उनकी नजर से नहीं बच पाया। और बचने के लिए झरने

मे छलांग लगा दी थी । गौरांग ने बताया कि तांत्रिक ने उन पिशाचों को हमारी गुफा की जानकारी दी थी और पिशाचों

से मित्रता कर ली थी। हमारी गुफा मेरी पूर्व बस्ती से बहुत ज्यादा दूर नहीं है । अगर वो सीधे आते है और हमें ढूँढ लेते

हैं तो बडी आसानी से कुछ ही दिन में हम तक पहुंच जाएंगे" सुन कर अम्बी को भी मसले की भयावहता का अनुमान हो गया था।

उसने जादौंग से ही बचाव का रास्ता पूछा ,तो काफी देर

चुप्पी के बाद वो धीरे से बुदबुदाया "गुफा छोड कर जाना पडेगा।"

जवाब सुनकर दिल काँप उठा था अम्बी का ।" पूरा जीवन जिस गुफा को बनाया , कितनी यादें हैं उसकी और जादौंग की , नहीं छोड सकती वो इस गुफा को। उसकी आँखों से अश्रु धारा बह निकली थी । जादौंग ने उसे और कसकर अपने से चिपका लिया । अम्बी को अपने बालों पर गीले

पन का अहसास हुआ । वह चौंक गई थी मन ही मन में

"क्या पत्थर भी पिघलता है जादौंग रो रहा है !

क्या पुरुष भी रोता है ? वो भी जादौंग जैसा

सख्त पुरुष !! आज कितने नए रूप देख लिए उसने जादौंग के ?लेटते ही खर्राटे लेकर सो जाने वाला जादौंग पूरी रात आकाश को अपनी चिंता बताता

रहा ,और सोया ही नहीं 1!! बड़े बड़े दानवों

का शिकार बड़ी निर्भयता से करने वाला जादौंग आज परिवार के लिए भयभीत था ,रो रहा था !

नहीं जाएंगे मुकाबला करेंगे

अम्बी ने जादौंग की अपने गिर्द पकड को ढीला किया और उठकर बैठ गई जादौंग की गीली हुई आँखो को अपनी हथेलियो से पौंछा और उसके सिर को अपनी गोद मे रख लिया । अम्बी रो नहीं रही थी अब ,बल्कि आत्मविश्वास की चमक थी चेहरे पर । जादौंग की निगाहें उसके चेहरे का तेज देख आश्चर्य से स्थिर थी।

"हम नहीं जाएंगे मुकाबला करेंगे !" अम्बी ने मानो फैसला कर लिया था !! जादौंग ने देखा था कि अम्बी विपरीत परिस्थितियों मे भी जो निर्णय लेती है पूरी तरह विवेक पूर्ण होते है, पर आज पहली बार वो उसके निर्णय

से सहमत ना हो पा रहा था ।

अम्बी ने उसे याद दिलाया कि ,""कैसे जब वे दोनो बिल्कुल अकेले रह गए थे धारा के जाने के बाद ,उन्होंने मिलकर इस गुफा को हर जरूरत के मुताबिक तैयार किया था। उन दोनों ना जाने कितनी नई खोजें की थी ,जीवन को आसान करने के लिए । जिस नाक पर सींग वाले महादानव को जादौंग ने अवध्य माना था क्या उन दोनों ने मिलकर उसका वध नहीं किया था!!""

जादौंग को वो घटना स्मरण हो आई थी 1

"पूर्व बस्ती से मिले अनुभव के आधार पर ,जादौंग यही जानता था की नाक पर सींग वाला वज्र दानव अवध्य है ,

और उसने देखा भी था कि जिस वज्रदानव को तांत्रिक मुखिया ने काबू कर रखा था अस्त्र के प्रहार से उसे खँरोच

भी नहीं आती थी। मुखिया कहता था कि देवता ने प्रसन्न होकर ये वज्रदानव उपहार मे दिया है उसे।

जब एक दिन वैसे ही एक वज्रदानव को अपनी गुफा के पास विचरते देखा ,तब भी उसने अम्बी से गुफा छोड़कर चलने के लिए कहा पर अम्बी ने मुकाबला करने का फैसला किया था । जादौंग को याद आया कि वो तब भी डर गया था ,

वह डर गया अम्बी के अज्ञान से ,आखिर वो कुछ भी तो नहीं जानती थी उस दानव के विषय में !!

अम्बी ने खाल को चर्बी मे डुबो कर दो मशाल तैयार की थी। जादौंग ने इससे पहले सिर्फ मुखिया के द्वारा ही अग्नि देव को बाँधने का चमत्कार देखा था ,अम्बी को ऐसा करते देख उसके चेहरे पर विश्वास नजर आने लगा था ।

जादौंग को यह चमत्कार से कम नहीं लगा कि उसने और अम्बी ने अग्नि देवता की सहायता से वज्रदानव को वन मे खदेड़ दिया था डराकर । तब जादौंग को अम्बी के अन्दर दैवीय शक्ति का आभास हुआ था उसे यह निश्चय हो

गया था कि अम्बी कुछ भी कर सकती है ।

"हाँ ,अम्बी कुछ भी कर सकती है हम नहीं जाएंगे

अपनी गुफा छोडकर यही रहेंगे हम मुकाबला करेंगे

उन पिशाचों का !" जादौंग दृढता के साथ बोल रहा था।

अम्बी ने जादौंग के अधरों पर अपने अधर टिका दिए ।

आकाश मे भोर के पंछियों का कलरव होने लगा दो

जिस्म जो अभी तक जुडे हुए थे ,एकदूसरे से पृथक हुए ,और जलाशय की ओर चल पडे। आज बहुत सारी

तैयारियां करनी थी उन्हें । गुफा द्वार से दो डबडबाई

आँखें उन्हें दूर जाते देख रही थी हाँ ,वो सारकी थी।
 
Back
Top