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जिससे सावित्री का चूतड़ एकदम से नंगा हो गया और सुक्खु का नंगा लंड दोनो गोल गोल काले रंग के कसे हुए चूतदों पर रगड़ने लगा. ऐसा देखते ही गुलाबी दोनो ही चिल्ला उठी “...तू धन्नो दोनो को छ्चोड़ दे...आज इनकी भी मर्दानगी की ताक़त देख लूँ मैं...बहुत मर्द बनते हैं ... .बोलते हैं कि असली मर्द हूँ...आज देखूं कि असली मरद है कि नकली ..” इस इतनी बात सुनकर सुक्खु सावित्री को काबू करने की कोशिस करने के साथ साथ गुलाबी की ओर देखकर बोला बोला “...मैं तेरे पति की तरह नामार्द नही हूँ...समझी ना...नकली बोलती है...तुझे तो खुद ही पता हैं ना ..तेरे पति ने खुद ना जाने कितनी बार मुझसे चोद्ते हुए देखा ...लेकिन एक बार भी हिम्मत नही हुई कि ज़ुबान भी खोल दे....” ऐसी बात सुनकर गुलाबी अपने मुँह को दोनो हाथों से ढँक कर हंस दी और धन्नो भी गुलाबी के कंधे पर एक हल्का थप्पड़ मारते हुए ज़ोर से हंस पड़ी और गुलाबी से बोली “....अरी..रंडी... अपने पति की कुच्छ तो इज़्ज़त कर...वो बेचारे तुझे इनके नीचे दबा देखकर घर की इज़्ज़त की लिए कुच्छ नही बोलते तो इसका यह मतलब थोड़ी है कि तू अपने पति के सामने अपनी टाँग उठा कर दूसरे से चुदवाये....” गुलाबी अभी सुक्खु के ही बात पर अपना मुँह मानो लाज़ के मारे ढँक कर ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी कि धन्नो की बात का जबाव देते हुए सुक्खु बोला “अरी धन्नो भौजी ...तुम इस ग़लतफहमी मे मत रहना कि इसका पति घर के लाज़ के मारे चुप रहता है....सच तो यह है कि वो जब मेरा मोटा लंड इसकी बुर मे फँसा देखता है तो मेरे लंड की मोटाई को देख कर उसकी गांद काँप जाती है और कुच्छ बोलने की हिम्मत नही होती....” इतना कहते ही सुक्खु ने सावित्री की एक चुचि को समीज़ के उपर से ही कस मे मसल दिया और सावित्री सिसकार उठी. गुलाबी सुक्खु के इस बात पर फिर ज़ोर से मुँह ढँक कर हँसी तो धन्नो बोली “....सच तो है ...असली मरद के नीचे अपनी बीबी को दबी देखकर ...नकली मरद भला क्या बोलेगा...” इतना सुनकर गुलाबी अपने मुँह से हाथ हटा कर बोली “...बहुत असली मरद बन रहे हो....मेरे पति नमार्द हैं और ...ये हैं असली मरद.....” यह सुनकर सुक्खु सावित्री के कमर को एक हाथ से कस कर दबोचे हुए पीछे से उसकी एक चुचि को दूसरे हाथ से मीस्थे हुए बोला “तो और क्या...असली मरद वही होता है ..जो दूसरे की बीबी को चोद डाले....” इतना सुनकर गुलाबी फिर मुँह ढँक कर हंस पड़ी फिर बोली “....असली मर्द तभी पता चलेगा जब इस लौंडिया को हम दोनो के सामने घोड़ी बना के चोदोगे....” यह सुनकर सुक्खु बोला “...इसे घोड़ी क्या...जो कहोगी वो बना कर चोदुन्गा.... कुतिया की तरह चुदेगि मेरे मोटे लंड से...लो देखो अब...” तब गुलाबी बोली “...लेकिन हम दोनो इसमे कुच्छ भी नही करेंगे...अकेले ही इसे काबू कर के चोद्ना होगा....हां ये भी सुन लो..” ऐसी चुनौती सुनकर सुक्खु बोला “...मैं तेरे पति की तरह नामार्द नही हूँ...जिसकी बीबी दूसरों की लंड खा कर सोती हो....मैं इसे अकेले ही चोदुन्गा...और जब ये असली मर्द का लंड पाएगी तो खुद ही किसी कुतिया की तरह सीधी खड़ी हो कर चुद्वायेगि...” यह सुनकर सावित्री भी शर्म से सिहर गई. सुक्खु उसकी चुचिओ को बारी बारी से मीस भी रहा था. सावित्री सुक्खु के हाथों से छूटना भी चाह रही थी लेकिन चुचिओ की मीसाई से सावित्री की बुर काफ़ी गरम हो चुकी थी. बुर की दरार हल्की गीली भी हो चुकी थी. इसी कारण से सावित्री भले ही रुनवांसी मुँह बनाई थी मानो रो देगी लेकिन चुचिओ के मीसावट और बुर के गरम होने के कारण ज़्यादा विरोध नही कर रही थी लेकिन फिर भी कोशिस कर रही थी कि सुक्खु के हाथ से निकल जाय. तभी सुक्खु सावित्री के कमर वाले हाथ से कमर को आज़ाद कर दिया और जैसे ही सावित्री सुक्खु के पकड़ से भागना चाही कि सुक्खु तुरंत उसका एक हाथ कस के पकड़ लिया और दूसरे हाथ को सावित्री के आगे से दोनो जांघों के बीच मे ले जाकर बुर के हिस्से के पास से हाथ को दोनो जाँघो के आर पार कर दिया और सावित्री कुच्छ समझ पाती तबतक सुक्खु उस हाथ से सावित्री को कस के हवा मे उठा लिया जैसे कोई पहलवान किसी दूसरे पहलवान को पटाकने के लिए करता है. सावित्री जैसे ही हवा मे उठी तो उसे लगा मानो गिर जाएगी तब डर कर चीख उठी “...आआ आ आ रीए माइ..रे ..माइ गिर..जाब...रे माइ...” और दूसरे ही पल सावित्री पहले सुक्खु के सर को फिर गले को और बाद मे कंधे को कस के पकड़ ली ताकि गिर ना सके. सुक्खु जैसे ही देखा कि सावित्री उसके कंधे को कस के पकड़ ली है तब तुरंत उसके जांघों के बीच के फँसे हाथ को निकाल कर एक पैर को बगल मे बिछे चारपाई पर टीका दिया और खुद सावित्री के पूरे वजन को मानो कंधे के सहारे लेते हुए खड़ा रहा. ऐसा करने से सावित्री का दूसरा पैर भी हवा मे दूसरी ओर था जिससे बुर पूरी तरह से फैली हुई थी.
क्रमशः………………………………………..
क्रमशः………………………………………..