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सावित्री एकदम से हड़बड़ा गई और जल्दी से अंदर की ओर जाने लगी लेकिन ठसाठस जीप मे जगह ना होने के कारण अंदर जाना एकदम से मुश्किल था. और वह खलासी अभी भी हाथ को सावित्री के चूतड़ पर रख कर दबाव बनाए हुए बोल रहा था "अरे...अंदर जाने दो भाई...लेडीज़ है ...जगह दे दो इसे.." धोती कुर्ता मे वह अधेड़ आदमी जीप मे एकदम से अंदर की ओर बैठा था जो सावित्री को अपनी बगल मे बिठाने के लिए इधेर उधेर हो रहा था फिर भी सीट पर जगह नही बन पा रही थी. सावित्री के जवान गुदाज़ बदन को देखकर वो अधेड़ आदमी बोला "आओ बैठ जाओ यहाँ..." इतना बोलकर वो अधेड़ आदमी अपनी बगल मे सीट पर जो जगह दिखा रहा था वो बैठने के लिए काफ़ी कम था. किसी तरह उसमे अंदाज कर बैठना मुश्किल था. फिर भी अपने चूतड़ पर खलासी का हाथ सावित्री को एकदम से बेचैन कर चुका था और घबराहट मे सावित्री उस कम जगह की ओर तेज़ी से अपनी चूतड़ को घुमा कर ले गई. इतना करने मे खलासी का हाथ तो चूतड़ पर से हट गया लेकिन उस अधेड़ के बगल मे जो सीट बैठने के लिए खाली थी मानो केवल चार अंगुल ही थी. सावित्री उस चार अंगुल सीट पर बार बार अपनी नज़रें ले जा रही थी और उसे समझ मे नही आ रहा था कि क्या करे और उस कम जगह मे कैसे बैठे. तभी जीप के पीछे वाले हिस्से मे लोग लटक भी गये और जीप के अंदर बाहर से आने वाली रोशनी भी कम हो गई. उधेर मुसम्मि को वो खलासी अपने साथ आगे वाली सीट पर ले कर बैठाने लगा. आगे वाली सीट पर एक तरफ मुसम्मि किसी तरह से बैठ गई और उससे सॅट कर खलासी भी बैठ गया. सावित्री किसी तरह यह देखी कि मुसम्मि बैठ गई है कि नही तभी उसकी नज़र मुसम्मि पर पड़ी जो खलासी और एक और मरद के बीच मे दबी हुई थी. अभी भी सावित्री जीप के अंदर झुकी हुई थी तभी अचानक जीप चल पड़ी और सावित्री जीप के अंदर लड़खड़ा गई और उसका पैर एक औरत के पैर के उपर चढ़ गया और वह औरत दर्द से चिल्ला उठी " अयाया री माई...अरी...ये किसका पैर है रे....मेरी पैर को कुचल दिया..." और तभी उस औरत ने गौर से अपने पैर को हटाते हुए देखी कि सावित्री का ही पैर था. तब गुस्से मे बोली "....आरीए...हरजाई..तू मेरा पैर क्यो दबा दी...बैठती क्यों नही...कुतिया चूतड़ ले कर इधेर उधेर कर रही है...मेरे पैर को कुचल कर रख दी हराम्जादि..."
इतना बोलकर वह औरत सावित्री को खा जाने वाली नज़रों से घूर्ने लगी. सावित्री उस औरत के गुस्से को देखकर डर सी गई. तभी वो अधेड़ आदमी सावित्री के कूल्हे को पकड़ कर अपनी ओर खींचते बोला "...अरी..गुस्सा क्यों कर रही हो...ये बेचारी क्या करेगी...जगह इतना कम है कि ..." फिर वह अधेड़ आदमी सावित्री के कूल्हे के साथ उसकी एक जाँघ को अपने हाथ मे पकड़ कर उस सीट मे खाली कम जगह पर धकेलते हुए सावित्री से बोले "बैठ जा इसी मे....जीप चलेगी तो खुद जगह बन जाएगी...ऐसे झुक कर कब तक खड़ी रहेगी ....आ बैठ जा..." इतना बोलकर उस आदमी ने सावित्री को कस के उस सीट पर बैठने के लिए मज़बूर कर दिया. लेकिन सावित्री का चौड़ा चूतड़ भला उस चार अंगुल वाली जगह मे कैसे समा पाता. सावित्री जैसे उस जगह मे अपनी चूतड़ रखने की कोशिस की आगे वाली सीट के पिच्छले हिस्से और उस अधेड़ आदमी के बीच एकदम से बैठ नही पाई लेकिन उस अधेड़ ने दुबारा कस कर बैठने पर जैसे ही मज़बूर किया तो मज़बूर सावित्री बैठ गई लेकिन चूतड़ का आधा हिस्सा उस खाली जगह मे समाने की कोशिस कर रही थी और चूतड़ का आधा हिस्सा यानी गांद के कटाव के बाद वाला एकतरफ का हिस्सा उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से टिक गया. सावित्री अपने एक चूतड़ को उस अधेड़ मर्द के जाँघ पर टिक जाने से एकदम सनसना गई. उसके बदन मे लाज़ की लहर दौड़ गई. वह अपनी नज़रें आगे वाली सीट पर बैठे लोगों की ओर ऐसे कर ली मानो उसे कुच्छ मालूम ही नही हो. तभी वो अधेड़ आदमी बोला "...इतनी कम जगह मे किसी तरह बैठ जाओ...अब कोई परेशानी नही होगी...." लेकिन सावित्री को ही पता था कि उसके उपर क्या गुजर रही थी. सावित्री के चूतड़ मे उस आदमी की जाँघ काफ़ी सख़्त महसूसू हो रही थी. सावित्री ऐसा लग रहा था की दोनो चूतड़ गांद की दरार से फट कर अलग अलग हो जाएगे, क्योंकि एक चूतड़ उसके जाँघ पर था और दूसरा उस कम जाग मे लटक रहा था. तभी जीप किसी गड्ढे मे हिचकोले खाई और सावित्री को ऐसे लगा मानो वह आदमी उसे चार अंगुल के करीब खाली जगह की ओर खिसक रहा हो और ऐसा करने से सावित्री के चूतड़ की दरार उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से आ गया. अब ऐसा लग रहा था मानो सावित्री अपने चूतदों को उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से रख दी हो और गांद की लकीर उसके एक जाँघ के ठीक बीचोबीच आ गई हो. जीप जिस सड़क से जा रही थी वह सड़क काफ़ी खराब थी. जब जब जीप हिचकोले लेती, तब तब सावित्री की गंद उस आदमी के जाँघ पर एकदम से रगड़ जाती. सावित्री को एकदम से लाज़ आ जा रही थी. लेकिन उस ठसाठस भरी जीप मे मानो वह हिल भी नही सकती थी. जीप मे बैठे कई लोगो ने गौर से देखा जगह ना होने की मजबूरी मे सावित्री उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से बैठी है. तभी जीप के अंदर एक आदमी ने चिल्ला कर बोला "अरी...ड्राइवर साहेब ..गाड़ी मे कोई गाना बाज़ाना नही रखे हो का...?" यह सुनकर जीप के ड्राइवर ने टेप को चालू कर दिया. और तेज़ आवाज़ मे एक मशहूर गाना बजने लगा.
चुदैल जवानिया के मज़ा लूटो, गमच्चा बिच्छा के चटाई बिच्छा के
जवानिया के मज़ा लूटा ये राजा, बेलन मे तेल्वा लगा के
भर दुपहरिया जवान छोकरिआ, घूमे खेत खलिहान बगीच
ऐसन छोकरिआ के पटक के पीटो, बेलन मे तेल्वा लगा के
परदेसी भयो जिस औरत के मर्दा, उस औरत को बेलना दिख्वो
बेलना दिखाओ रे बेलना दिखवॉ, जो देखे बेलना तो बेलना हिलाओ
हिलत बेलना रे हिलत बेलना, पड़ोसीन देखे हिलत बेलाना
गद्रैल पड़ोसीन के पटक गाल काटो, साडी उठाई मार बेलना
पड़ोसीन के बलमा भयो परदेसी, लुटो पड़ोसीन के चीर सरका के
जवानिया के मज़ा लूटा ये राजा, बेलन मे तेल्वा लगा के
क्रमशः………………………………………..
इतना बोलकर वह औरत सावित्री को खा जाने वाली नज़रों से घूर्ने लगी. सावित्री उस औरत के गुस्से को देखकर डर सी गई. तभी वो अधेड़ आदमी सावित्री के कूल्हे को पकड़ कर अपनी ओर खींचते बोला "...अरी..गुस्सा क्यों कर रही हो...ये बेचारी क्या करेगी...जगह इतना कम है कि ..." फिर वह अधेड़ आदमी सावित्री के कूल्हे के साथ उसकी एक जाँघ को अपने हाथ मे पकड़ कर उस सीट मे खाली कम जगह पर धकेलते हुए सावित्री से बोले "बैठ जा इसी मे....जीप चलेगी तो खुद जगह बन जाएगी...ऐसे झुक कर कब तक खड़ी रहेगी ....आ बैठ जा..." इतना बोलकर उस आदमी ने सावित्री को कस के उस सीट पर बैठने के लिए मज़बूर कर दिया. लेकिन सावित्री का चौड़ा चूतड़ भला उस चार अंगुल वाली जगह मे कैसे समा पाता. सावित्री जैसे उस जगह मे अपनी चूतड़ रखने की कोशिस की आगे वाली सीट के पिच्छले हिस्से और उस अधेड़ आदमी के बीच एकदम से बैठ नही पाई लेकिन उस अधेड़ ने दुबारा कस कर बैठने पर जैसे ही मज़बूर किया तो मज़बूर सावित्री बैठ गई लेकिन चूतड़ का आधा हिस्सा उस खाली जगह मे समाने की कोशिस कर रही थी और चूतड़ का आधा हिस्सा यानी गांद के कटाव के बाद वाला एकतरफ का हिस्सा उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से टिक गया. सावित्री अपने एक चूतड़ को उस अधेड़ मर्द के जाँघ पर टिक जाने से एकदम सनसना गई. उसके बदन मे लाज़ की लहर दौड़ गई. वह अपनी नज़रें आगे वाली सीट पर बैठे लोगों की ओर ऐसे कर ली मानो उसे कुच्छ मालूम ही नही हो. तभी वो अधेड़ आदमी बोला "...इतनी कम जगह मे किसी तरह बैठ जाओ...अब कोई परेशानी नही होगी...." लेकिन सावित्री को ही पता था कि उसके उपर क्या गुजर रही थी. सावित्री के चूतड़ मे उस आदमी की जाँघ काफ़ी सख़्त महसूसू हो रही थी. सावित्री ऐसा लग रहा था की दोनो चूतड़ गांद की दरार से फट कर अलग अलग हो जाएगे, क्योंकि एक चूतड़ उसके जाँघ पर था और दूसरा उस कम जाग मे लटक रहा था. तभी जीप किसी गड्ढे मे हिचकोले खाई और सावित्री को ऐसे लगा मानो वह आदमी उसे चार अंगुल के करीब खाली जगह की ओर खिसक रहा हो और ऐसा करने से सावित्री के चूतड़ की दरार उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से आ गया. अब ऐसा लग रहा था मानो सावित्री अपने चूतदों को उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से रख दी हो और गांद की लकीर उसके एक जाँघ के ठीक बीचोबीच आ गई हो. जीप जिस सड़क से जा रही थी वह सड़क काफ़ी खराब थी. जब जब जीप हिचकोले लेती, तब तब सावित्री की गंद उस आदमी के जाँघ पर एकदम से रगड़ जाती. सावित्री को एकदम से लाज़ आ जा रही थी. लेकिन उस ठसाठस भरी जीप मे मानो वह हिल भी नही सकती थी. जीप मे बैठे कई लोगो ने गौर से देखा जगह ना होने की मजबूरी मे सावित्री उस आदमी के एक जाँघ पर पूरी तरह से बैठी है. तभी जीप के अंदर एक आदमी ने चिल्ला कर बोला "अरी...ड्राइवर साहेब ..गाड़ी मे कोई गाना बाज़ाना नही रखे हो का...?" यह सुनकर जीप के ड्राइवर ने टेप को चालू कर दिया. और तेज़ आवाज़ मे एक मशहूर गाना बजने लगा.
चुदैल जवानिया के मज़ा लूटो, गमच्चा बिच्छा के चटाई बिच्छा के
जवानिया के मज़ा लूटा ये राजा, बेलन मे तेल्वा लगा के
भर दुपहरिया जवान छोकरिआ, घूमे खेत खलिहान बगीच
ऐसन छोकरिआ के पटक के पीटो, बेलन मे तेल्वा लगा के
परदेसी भयो जिस औरत के मर्दा, उस औरत को बेलना दिख्वो
बेलना दिखाओ रे बेलना दिखवॉ, जो देखे बेलना तो बेलना हिलाओ
हिलत बेलना रे हिलत बेलना, पड़ोसीन देखे हिलत बेलाना
गद्रैल पड़ोसीन के पटक गाल काटो, साडी उठाई मार बेलना
पड़ोसीन के बलमा भयो परदेसी, लुटो पड़ोसीन के चीर सरका के
जवानिया के मज़ा लूटा ये राजा, बेलन मे तेल्वा लगा के
क्रमशः………………………………………..