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वह भी अधेड़ के मुँह से जवाब का इंतज़ार कर रही थी.
फिर अधेड़ आगे बोला " बेटी चार नही ...अब कैसे कहूँ कि चार के बजाय सांड के पाँच पैर होते हैं..." यह सुनकर मानो दोनो चौंक सी गई और मुसम्मि फिर तपाक से पुछि "क्या कह रहे हैं बाबू जी ..कि सांड के पाँच पैर होते हैं...मैं तो चार पैर देखी हूँ...ये पाँचवा पैर कहाँ होता है..?" यह सुनकर वह अधेड़ आदमी काफ़ी शालीनता के साथ धीमी आवाज़ मे मुस्कुराते होये बोला "बेटी तुम दोनो भी पाँचवा पैर देखी हो लेकिन.. बेटी ... तुम दोनो से मैं उल्टी सीधी बात नही कर सकता .... लेकिन जब बीच मे सवाल आ ही गया तो बता देता हूँ..."
फिर अधेड़ आदमी कुच्छ धीमी आवाज़ मे पुछा "...बेटी ...तुम दोनो सांड को देखी हो...... जो गाँव मे इधेर उधर घूमता है...और दूसरों के खेत को चरता है....." यह सुनकर मुसम्मि एक पल सावित्री के चेहरे की ओर देखती है फिर हंस कर बोली "...हा हां देखी है..." तब उस अधेड़ ने आगे पुछा " तो बताओ कि सांड का और क्या काम होता है....खेत चरने के अलावा...?" यह सुनकर मुसम्मि समझ गई कि वह अधेड़ आदमी उससे क्या बोलवाना चाहता है. फिर बगल मे बैठी सावित्री को अपने हाथ से धकियाते हुए हंस कर बोली "....तू बता दे ....सांड कौन सा काम करता है ...हे हा हा ....." सावित्री अपनी जगह पे चुप चाप नज़रें झुका के बैठी रही लेकिन कुच्छ बोली नही. तब वह अधेड़ श्यांबाबू मुसम्मि से पुछा "....तो तुम ही बता दो .... सांड का और क्या काम करता है..." तब मुसम्मि हंस कर सावित्री की ओर देखती हुई उसे फिर धकियाते हुए बोली "....मैं तो बस खेत चरते हुए देखी हूँ....और कुच्छ तो नही देखी...." इतना बोल कर सावित्री को फिर धकिया दी और अपना मुँह टॉप कर हँसने लगी.
यह सुनकर वह अधेड़ शयंबाबू आगे बोला "...तुम दोनो बेटी की उमर की हो इसलिए मैं खोल के नही बोल रहा ..... वैसे समझ रही हो ना कि सांड क्या करता है...." यह सुनकर मुसम्मि एक बार फिर हंसते हुए बोली "..जी बाबू जी....हम दोनो गाँव की रहने वाली हैं....मालूम है..." तब वह अधेड़ श्यांबाबू आगे बोला "....बेटी....जैसे सांड आज़ादी से घूमता है और हमेशा दूसरों के खेत को चारता है....वही काम मैं भी करता हूँ...इसीलिए सब औरतें मुझे सांड कहती हैं..." यह बात मानो मुसम्मि और सावित्री को समझ मे नही आई, तब मुसम्मि कुच्छ अचरज भरे भाव से पुछि "...बाबू जी समझी नही....माना कि सांड हमेशा दूसरे के खेत को चरता है...लेकिन आप क्या करते हैं कि औरतें सांड कहती हैं....?" इतनी बात सुनकर अधेड़ श्यांबाबू मुस्कुरा कर बोले "अब यही तुम्हारी नादानी हैं ना ..... मैं भी वही करता हूँ जो सांड करता है....यानी मैं भी दूसरे का ही ख़ाता हूँ...फरक बस इतना है कि सांड खेत चरता है और मैं दूसरे लोगों की औरतों के खेत चरता हूँ...ख़ाता हूँ..." मुसम्मि कुच्छ हैरान होते पुछि "औरतों के खेत....ये क्या होते है...?" तब अधेड़ श्यांबाबू बोले ".....औरतो की खेत पेटिकोट मे होती है .... जिसे मैं चर लेता हूँ ..जैसे कोई सांड किसी का खेत चरता है....इसलिए औरतें मुझे सांड कहती हैं...." इतना बोल कर श्यांबाबू हँसने लगे. फिर मुसम्मि भी हँसने लगी और रह रह कर बगल मे बैठी सावित्री को धकियाति रही. सावित्री अपनी नज़रें झुकाए ही रही.
क्रमशः………………………………………..
फिर अधेड़ आगे बोला " बेटी चार नही ...अब कैसे कहूँ कि चार के बजाय सांड के पाँच पैर होते हैं..." यह सुनकर मानो दोनो चौंक सी गई और मुसम्मि फिर तपाक से पुछि "क्या कह रहे हैं बाबू जी ..कि सांड के पाँच पैर होते हैं...मैं तो चार पैर देखी हूँ...ये पाँचवा पैर कहाँ होता है..?" यह सुनकर वह अधेड़ आदमी काफ़ी शालीनता के साथ धीमी आवाज़ मे मुस्कुराते होये बोला "बेटी तुम दोनो भी पाँचवा पैर देखी हो लेकिन.. बेटी ... तुम दोनो से मैं उल्टी सीधी बात नही कर सकता .... लेकिन जब बीच मे सवाल आ ही गया तो बता देता हूँ..."
फिर अधेड़ आदमी कुच्छ धीमी आवाज़ मे पुछा "...बेटी ...तुम दोनो सांड को देखी हो...... जो गाँव मे इधेर उधर घूमता है...और दूसरों के खेत को चरता है....." यह सुनकर मुसम्मि एक पल सावित्री के चेहरे की ओर देखती है फिर हंस कर बोली "...हा हां देखी है..." तब उस अधेड़ ने आगे पुछा " तो बताओ कि सांड का और क्या काम होता है....खेत चरने के अलावा...?" यह सुनकर मुसम्मि समझ गई कि वह अधेड़ आदमी उससे क्या बोलवाना चाहता है. फिर बगल मे बैठी सावित्री को अपने हाथ से धकियाते हुए हंस कर बोली "....तू बता दे ....सांड कौन सा काम करता है ...हे हा हा ....." सावित्री अपनी जगह पे चुप चाप नज़रें झुका के बैठी रही लेकिन कुच्छ बोली नही. तब वह अधेड़ श्यांबाबू मुसम्मि से पुछा "....तो तुम ही बता दो .... सांड का और क्या काम करता है..." तब मुसम्मि हंस कर सावित्री की ओर देखती हुई उसे फिर धकियाते हुए बोली "....मैं तो बस खेत चरते हुए देखी हूँ....और कुच्छ तो नही देखी...." इतना बोल कर सावित्री को फिर धकिया दी और अपना मुँह टॉप कर हँसने लगी.
यह सुनकर वह अधेड़ शयंबाबू आगे बोला "...तुम दोनो बेटी की उमर की हो इसलिए मैं खोल के नही बोल रहा ..... वैसे समझ रही हो ना कि सांड क्या करता है...." यह सुनकर मुसम्मि एक बार फिर हंसते हुए बोली "..जी बाबू जी....हम दोनो गाँव की रहने वाली हैं....मालूम है..." तब वह अधेड़ श्यांबाबू आगे बोला "....बेटी....जैसे सांड आज़ादी से घूमता है और हमेशा दूसरों के खेत को चारता है....वही काम मैं भी करता हूँ...इसीलिए सब औरतें मुझे सांड कहती हैं..." यह बात मानो मुसम्मि और सावित्री को समझ मे नही आई, तब मुसम्मि कुच्छ अचरज भरे भाव से पुछि "...बाबू जी समझी नही....माना कि सांड हमेशा दूसरे के खेत को चरता है...लेकिन आप क्या करते हैं कि औरतें सांड कहती हैं....?" इतनी बात सुनकर अधेड़ श्यांबाबू मुस्कुरा कर बोले "अब यही तुम्हारी नादानी हैं ना ..... मैं भी वही करता हूँ जो सांड करता है....यानी मैं भी दूसरे का ही ख़ाता हूँ...फरक बस इतना है कि सांड खेत चरता है और मैं दूसरे लोगों की औरतों के खेत चरता हूँ...ख़ाता हूँ..." मुसम्मि कुच्छ हैरान होते पुछि "औरतों के खेत....ये क्या होते है...?" तब अधेड़ श्यांबाबू बोले ".....औरतो की खेत पेटिकोट मे होती है .... जिसे मैं चर लेता हूँ ..जैसे कोई सांड किसी का खेत चरता है....इसलिए औरतें मुझे सांड कहती हैं...." इतना बोल कर श्यांबाबू हँसने लगे. फिर मुसम्मि भी हँसने लगी और रह रह कर बगल मे बैठी सावित्री को धकियाति रही. सावित्री अपनी नज़रें झुकाए ही रही.
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