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सगुण: ".. क्या गाली देती थी..?"
मुसम्मि: ".. गुस्सा आती थी ... तो खूब गंदी गंदी.. गाली देती थी.."
सगुण: ".. जैसे..?"
मुसम्मि: ".. दोगला.. हरामी... कुत्ता... यही सब.."
सगुण: ".. ससुर क्या बोलता.. ?"
मुसम्मि: "कुच्छ नही...बस परेशान करता रहता था.."
सगुण: ".. बड़ा ताकतवर था क्या..?"
मुसम्मि: ".. हां .. चार चार आदमी के बराबर ताक़त थी.. खूब हट्टा कट्टा शरीर था.. "
सगुण: ".. जैसे तुली बाबू.. की तरह क्या..?"
मुसम्मि: ".. हां .. इसी तरह वो भी शरीर वाले थे..."
सगुण: ".. जब इतनी ताक़त वाला था .. तब तो तेरी पेटिकोट मे भी हाथ डालता रहा होगा..?"
मुसम्मि: "हां .. वो बहुत हरामी था..बड़ी लाज़ लगती थी.."
सगुण: ".. जब पेटिकोट मे हाथ डाल देता था.. तब तो उंगली भी करता रहा होगा.. नशे मे..?"
मुसम्मि: "... हां .. लेकिन जब नशे मे रहता था तभी .. वैसे नही.."
सगुण: ".. हां .. हां .. नशे की ही बात कर रहा हूँ... नशे मे उंगली चोद देता था .. क्यों..?"
मुसम्मि: ".. छी.. अब ये सब मत पुछिये..."
सगुण: "... तू सच मे अभी काफ़ी अनाड़ी है.... तुझे ऐसी बात करने मे बहुत लाज़ आती है..."
मुसम्मि: ".. मुझे ये सब अच्छा नही लगता है.."
सगुण: ".. इसी लिए तो तेरे गाँव की वो भौजाई सही कहती थी .. कि तू अभी दुनिया देखी नही है.."
मुसम्मि: " कैसे?"
सगुण: ".. देख .. दिन मे तुली बाबू आया था.. हम दोनो एकदम से खूल कर चोदा चोदि की बातें किए.., और वो भी अपनी पहली बहू की चुदाई की बात खूल कर बताया.. और ना उसे लाज़ आई .. और ना ही मुझे शरम आई.. दिन भर खूब मज़ा लिए..., "
मुसम्मि: ".. तो मैं क्या करू.."
सगुण: ".. तू इतना लज़ा मत.. अपनी भी बातें खूल कर बताओ.. , ऐसी चोदा चोदि की बातें तो गाँव की औरतो के मुँह सुनी है कि नही...?"
मुसम्मि: "सुनी है..."
सगुण: ".. तो गाँव मे औरतें चोदा चोदि की बातें क्यों खूल कर करती हैं...?"
मुसम्मि: " क्यों करती हैं..?"
सगुण: "... मज़े के लिए करती हैं... जब ऐसी बातें आपस मे कर लेती हैं तो ... बुर गरम हो जाती है .. और फिर मरद से चुदवाने मे खूब पानी छूटता है.. और मज़ा भी चार गुना आता है.."
मुसम्मि: ".. हूँ.."
सगुण: ".. इसीलिए तो कह रहा हूँ.. कि तेरी गाँव वाली भौजाई सही कहती थी.. कि तू कुच्छ नही जानती है.."
मुसम्मि: ".. मुझे लाज़ आती आयी.."
सगुण: "... तू देख .. मुझे तो लाज़ नही आती आयी... दिन मे तुली बाबू भी खूब बात किया .. उसे भी लाज़ नही आई.."
मुसम्मि: "... अरी. तो आप लोग आदमी हैं... ना..."
मुसम्मि: ".. गुस्सा आती थी ... तो खूब गंदी गंदी.. गाली देती थी.."
सगुण: ".. जैसे..?"
मुसम्मि: ".. दोगला.. हरामी... कुत्ता... यही सब.."
सगुण: ".. ससुर क्या बोलता.. ?"
मुसम्मि: "कुच्छ नही...बस परेशान करता रहता था.."
सगुण: ".. बड़ा ताकतवर था क्या..?"
मुसम्मि: ".. हां .. चार चार आदमी के बराबर ताक़त थी.. खूब हट्टा कट्टा शरीर था.. "
सगुण: ".. जैसे तुली बाबू.. की तरह क्या..?"
मुसम्मि: ".. हां .. इसी तरह वो भी शरीर वाले थे..."
सगुण: ".. जब इतनी ताक़त वाला था .. तब तो तेरी पेटिकोट मे भी हाथ डालता रहा होगा..?"
मुसम्मि: "हां .. वो बहुत हरामी था..बड़ी लाज़ लगती थी.."
सगुण: ".. जब पेटिकोट मे हाथ डाल देता था.. तब तो उंगली भी करता रहा होगा.. नशे मे..?"
मुसम्मि: "... हां .. लेकिन जब नशे मे रहता था तभी .. वैसे नही.."
सगुण: ".. हां .. हां .. नशे की ही बात कर रहा हूँ... नशे मे उंगली चोद देता था .. क्यों..?"
मुसम्मि: ".. छी.. अब ये सब मत पुछिये..."
सगुण: "... तू सच मे अभी काफ़ी अनाड़ी है.... तुझे ऐसी बात करने मे बहुत लाज़ आती है..."
मुसम्मि: ".. मुझे ये सब अच्छा नही लगता है.."
सगुण: ".. इसी लिए तो तेरे गाँव की वो भौजाई सही कहती थी .. कि तू अभी दुनिया देखी नही है.."
मुसम्मि: " कैसे?"
सगुण: ".. देख .. दिन मे तुली बाबू आया था.. हम दोनो एकदम से खूल कर चोदा चोदि की बातें किए.., और वो भी अपनी पहली बहू की चुदाई की बात खूल कर बताया.. और ना उसे लाज़ आई .. और ना ही मुझे शरम आई.. दिन भर खूब मज़ा लिए..., "
मुसम्मि: ".. तो मैं क्या करू.."
सगुण: ".. तू इतना लज़ा मत.. अपनी भी बातें खूल कर बताओ.. , ऐसी चोदा चोदि की बातें तो गाँव की औरतो के मुँह सुनी है कि नही...?"
मुसम्मि: "सुनी है..."
सगुण: ".. तो गाँव मे औरतें चोदा चोदि की बातें क्यों खूल कर करती हैं...?"
मुसम्मि: " क्यों करती हैं..?"
सगुण: "... मज़े के लिए करती हैं... जब ऐसी बातें आपस मे कर लेती हैं तो ... बुर गरम हो जाती है .. और फिर मरद से चुदवाने मे खूब पानी छूटता है.. और मज़ा भी चार गुना आता है.."
मुसम्मि: ".. हूँ.."
सगुण: ".. इसीलिए तो कह रहा हूँ.. कि तेरी गाँव वाली भौजाई सही कहती थी.. कि तू कुच्छ नही जानती है.."
मुसम्मि: ".. मुझे लाज़ आती आयी.."
सगुण: "... तू देख .. मुझे तो लाज़ नही आती आयी... दिन मे तुली बाबू भी खूब बात किया .. उसे भी लाज़ नही आई.."
मुसम्मि: "... अरी. तो आप लोग आदमी हैं... ना..."