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साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई compleet

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Guest
साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई

दोस्तो ये कहानी पिंकी ने लिखी है मैं इसे आपके लिए पोस्ट कर रहा हूँ

दोस्तो, कहानी में कुछ घटना-क्रम एकदम वास्तविक है और कुछ आपके मनोरंजन के लिए अपनी कलम से लिख रही हूँ!

सर- डॉली ये क्या है? इस बार भी फेल.. आख़िर तुम करती क्या हो..? पढ़ाई में तुम्हारा ध्यान क्यों नहीं लगता। जब स्कूल-टेस्ट में ये हाल है तो बोर्ड के इम्तिहान में क्या खाक लिखोगी?

ये सर हैं चेतन वर्मा जिनकी उम्र 35 साल है और ये साइन्स के टीचर हैं..

थोड़े कड़क मिज़ाज के हैं। इनका कद और जिस्म की बनावट अच्छी है.. और एकदम फिट रहते हैं।

डॉली- सॉरी सर प्लीज़.. मुझे माफ़ कर दो.. अबकी बार अच्छे नम्बर लाऊँगी.. प्लीज़ प्लीज़…

दोस्तो, यह है डॉली सिंह.. अच्छे ख़ासे पैसे वाले घर की एक मदमस्त यौवन की मालकिन.. जिसकी उम्र 18 साल, कद 5’3″.. छोटे सुनहरे बाल.. गुलाब की पंखुड़ी जैसे पतले गुलाबी होंठ.. भरे हुए गोरे गाल.. नुकीले 30″ के मम्मे.. पतली कमर और 32″ की मदमस्त गाण्ड।

स्कूल में कई लड़के डॉली पर अपना जाल फेंक रहे हैं कि काश एक बार उसकी मचलती जवानी का मज़ा लूट सकें..

मगर वो तो तितली की तरह उड़ती फिरती थी।

कभी किसी के हाथ ना आई !

और हाँ आपको यह भी बता दूँ कि गंदी बातों से दूर-दूर तक उसका वास्ता नहीं था।

वो शरारती थी.. मगर शरीफ़ भी थी।

उसको चुदाई वगैरह का कोई ज्ञान नहीं था।

सर- नो.. अबकी बार तुम्हारी बातों में नहीं आऊँगा.. कल तुम अपने मम्मी-पापा को यहाँ लेकर आओ.. बस अब उनसे ही बात करूँगा कि आख़िर वो तुम पर ध्यान क्यों नहीं देते।

डॉली- सर आप मेरी बात तो सुनिए.. बस साइन्स में मेरे नम्बर कम आए हैं और बाकी सब विषयों में मेरे अच्छे नम्बर आए हैं।

सर- जानता हूँ इसी लिए तो हर बार तुम्हारी बातों में आ जाता हूँ.. तुम बहुत अच्छी लड़की हो.. सब विषयों में अच्छे नम्बर लाती हो.. मगर ना जाने विज्ञान में तुम पीछे क्यों रह गई.. आज तो मुझे बता ही दो आख़िर बात क्या है?

डॉली- व..वो.. सर आप तो जानते ही हो.. मैं रट्टा नहीं मारती.. सारे विषयों को समझ कर याद करती हूँ.. विज्ञान का पता ही नहीं चलता क्या लिखा है… क्यों होता है.. बस इसी उलझन में रहती हूँ तो ये सब हो जाता है और नम्बर कम आ जाते हैं।

सर- क्या.. अरे तुम क्या बोल रही हो..? मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा ठीक से बताओ मुझे।

डॉली- वो.. वो.. सर मानव अंगों के बारे में मेरी सहेलियाँ पता नहीं क्या-क्या बोलती रहती हैं.. बड़ा गंदा सा बोलती हैं.. म…म..मुझे अच्छा नहीं लगता.. बस इसलिए मैं विज्ञान में इतनी रूचि नहीं लेती हूँ।

डॉली की बात सुनकर चेतन सर के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।

सर- अच्छा तो ये बात है.. ऐसा करो शाम को तुम किताब लेकर मेरे घर आना.. वहाँ बताना ठीक से.. अभी मेरा क्लास लेने का वक्त हो रहा है.. देखो आ जाना नहीं तो कल तुम्हारे पापा से मुझे मिलना ही होगा।

डॉली तो फँस गई थी.. अब चेतन शाम को उसका फायदा उठाएगा.. आप यही सोच रहे हो ना..

मेरे प्यारे दोस्तों देश बदल रहा है.. सोच बदलो.. खुद देख लो।

शाम को 6 बजे डॉली चेतन सर के घर पहुँच जाती है।

सर- अरे आओ आओ.. डॉली बैठो.. अरे अनु ज़रा यहा आना.. देखो डॉली आई है, मैंने बताया था ना तुमको…

ललिता- जी अभी आई।

दोस्तो, यह है ललिता वर्मा.. यह चेतन सर की पत्नी है, दिखने में बड़ी खूबसूरत है, इसका फिगर 34″ 32″36″ है।

इनकी शादी को 3 साल हो गए हैं।

दोनों बेहद खुश रहते हैं।

अरे यार आप ललिता को भूल गए.. हाँ भाई ये वही ललिता गुप्ता और चेतन हैं.. जो पहले लवर थे, अब इनकी शादी हो गई है और ललिता गुप्ता से वर्मा बन गई है.. चलो अब आगे का हाल देखते हैं।

ललिता- हाय डॉली कैसी हो?

डॉली- मैं एकदम ठीक हूँ मैम!

सर- डॉली, ये है मेरी पत्नी ललिता.. सुबह तुमने अपनी प्राब्लम मुझे बताई थी ना.. मैंने अनु को सब बताया है.. अब मैं नहीं ये ही तुम्हारी मदद करेंगी। चलो तुम दोनों बातें करो मैं थोड़ी देर में बाहर जाकर आता हूँ ओके..।

डॉली- ओके सर थैंक्स।

ललिता- हाँ तो डॉली.. अब बताओ तुम्हारी प्राब्लम क्या है और देखो किसी भी तरह की झिझक मत रखना.. सब ठीक से बताओ ओके..

डॉली- ओके मैम बताती हूँ।

ललिता- अरे ये मैम-मैम क्या लगा रखा है मुझे दीदी भी बोल सकती हो.. अब बताओ तुम्हारी सहेलियाँ क्या बोलती हैं?

डॉली- व..ववो दीदी… मैंने उनसे एक बार पूछा ये योनि और लिंग किसे कहते हैं तब उन्होंने मेरा बड़ा मज़ाक उड़ाया और मेरे यहाँ हाथ लगा कर कहा.. इसे योनि कहते हैं और इसकी ठुकाई करने वाले डंडे को लिंग कहते हैं।

डॉली ने अपना हाथ चूत पर रखते हुए यह बात बोली तो ललिता की हँसी निकल गई।

डॉली- दीदी आप भी ना मेरा मज़ाक उड़ा रही हो.. जाओ मैं आपसे बात नहीं करती। इसी लिए मैं किसी से इस बारे में बात नहीं करती हूँ।

ललिता- अरे तू तो बुरा मान गई.. देख मेरा इरादा तेरा मजाक उड़ाने का नहीं था.. बस ये सोच कर हँसी आ गई कि तुम किस दुनिया से आई हो जो इतनी भोली हो.. अब सुनो मैं जो पूछू उसका सही जबाव देना और जो बोलूँ उसको ध्यान से सुनना।

डॉली- ठीक है दीदी आप कहो।

ललिता- सबसे पहले यह बता कि तेरी उम्र क्या है.. और तुम्हारे घर में कौन-कौन है.. तुम सोती किसके साथ हो?

डॉली- दीदी मैं 18 की हूँ.. मैं पापा-मम्मी की इकलौती बेटी हूँ.. हमारा घर काफ़ी बड़ा है। मैं करीब 6 साल से अलग कमरे में सोती हूँ.. नहीं तो पहले मम्मी के कमरे में ही सोती थी।

ललिता- अच्छा यह बात है.. तुम सेक्स के बारे में क्या जानती हो.. किसी से कुछ सुना होगा… वो बताओ।

डॉली- ये सेक्स क्या होता है दीदी.. मुझे नहीं पता.. हाँ मेरी सहेलियाँ अक्सर बातें करती हैं.. बस उनसे मैंने सुना था कि लड़कों का पोपट होता है.. और लड़की का पिंजरा.. मगर मेरे कभी कुछ समझ नहीं आया।

ललिता- ओह ये बात है.. तेरी सहेलियाँ कोडवर्ड में बातें करती हैं और तुम सच में बहुत भोली हो। अच्छा ये बताओ क्या कभी किसी ने तुम्हारे सीने पर हाथ रखा है या इनको छुआ या दबाया है..? तुमने किसी लड़के को पेशाब करते देखा है?

डॉली- छी छी.. दीदी आप भी ना.. मैं क्यों किसी को पेशाब करते देखूँगी और आज तक किसी ने मुझे नहीं छुआ है।

ललिता- अच्छा ये बात है.. तभी तुम ऐसी हो.. अब अपने अंगों के नाम बताओ.. मैं भी तो देखूँ तुम क्या जानती हो।

ललिता ने डॉली के गुप्तांगों के नाम उससे पूछे।

डॉली- दीदी ये सीना है.. ये फुननी है और ये पिछवाड़ा बस।

ललिता- अरे भोली बहना.. अब सुन ये सीना को मम्मों.. चूचे या कच्ची लड़की के अमरूद भी बोलते हैं और इसको चूत या बुर बोलते हैं समझी और ये पिछवाड़ा नहीं.. एस या गाण्ड है.. जिसको मटका-मटका कर तुम चलती हो और लड़कों के लौड़े खड़े हो जाते हैं।

ललिता बोलने के साथ डॉली के अंगों पर हाथ घुमा-घुमा कर मज़े ले रही थी। डॉली को बड़ा अजीब लग रहा था मगर उसको मज़ा भी आ रहा था।

डॉली- उफ़फ्फ़ आह दीदी ये लौड़ा क्या होता है?

ललिता- अरे पगली दुनिया की सबसे अच्छी चीज़ के बारे में नहीं जानती..? लड़कों की फुननी को लौड़ा बोलते है जो चूत के लिए बना है.. बड़ा ही सुकून मिलता है लौड़े से।

डॉली- दीदी कसम से.. मुझे इन सब बातों के बारे में कुछ भी पता नहीं था.. थैंक्स आपने मुझे बताया.. मगर मेरी एक बात नहीं समझ आ रही इन सब बातों का मेरे इम्तिहान में फेल होने से क्या सम्बन्ध?

ललिता- अरे डॉली.. तू सब विषयों में अच्छी है क्योंकि तुझे उन सबकी समझ है.. मगर विज्ञान में तू अनजान है क्योंकि तुझे कुछ पता नहीं.. ये चूत.. लौड़ा और चुदाई सब विज्ञान का ही तो हिस्सा हैं। अब देख मैं कैसे तुझे सेक्स का ज्ञान देती हूँ और देखना अबकी बार कैसे तेरे नम्बर अच्छे आते हैं.. बस तू मेरी बात मानती रहना, जैसा मैं कहूँ वैसा करती रहना।

डॉली- ओके दीदी.. मैं आपकी सब बात मानूँगी.. बस मेरे नम्बर अच्छे आने चाहिए।

ललिता ने आधा घंटा तक डॉली को लड़की और लड़के के बारे में बताया और उसको जाते समय एक सेक्स की कहानी वाली किताब भी दी।

डॉली- दीदी ये क्या है?

ललिता- ये असली विज्ञान है.. रात को अपने कमरे में कुण्डी लगा कर सारे कपड़े निकाल कर इस किताब को पढ़ना.. और कल शाम को आ जाना.. बाकी सब कल समझा दूँगी।

डॉली- सारे कपड़े निकाल कर.. नहीं दीदी मुझे शर्म आ रही है।

ललिता- अरे पगली मैं किसी के सामने नंगी होने को नहीं बोल रही हूँ.. अकेले में ये करना है और नहाते वक्त क्या कपड़े पहन कर नहाती हो जो इतना शर्मा रही हो..? पास नहीं होना है क्या..?

डॉली- सॉरी दीदी.. जैसा आपने कहा, वैसा कर लूँगी।

डॉली वहाँ से अपने घर चली जाती है।

रात को 10 बजे खाना खाकर डॉली अपने कमरे में चली जाती है।

उसने हल्के हरे रंग की नाईटी पहनी हुई थी..

वो शीशे के सामने खड़ी होकर अपने आपको देखने लगती है।

उसके दिमाग़ में ललिता की कही बातें घूम रही थीं।

डॉली ने अपनी नाईटी निकाल कर रख दी अब वो ब्रा-पैन्टी में थी..

उसके चूचे ब्रा से बाहर निकलने को मचल रहे थे।

गोरा बदन शीशे के सामने था.. जिसे देखकर शीशा भी शर्मा रहा था।

पैन्टी पर चूत की जगह गीली हो रही थी.. शायद डॉली कुछ ज़्यादा ही ललिता की बातें सोच रही थी।
 


दोस्तो, इस बेदाग जिस्म पर काली ब्रा-पैन्टी भी क्या सितम ढा रही थी।

इस वक़्त कोई ये नजारा देख ले तो उसका लौड़ा पानी छोड़ दे।

डॉली- ओह्ह.. दीदी अपने सच ही कहा था कि अपने नंगे बदन को शीशे में देखो.. मज़ा आएगा।

कसम से वाकयी में.. मेरे पूरे जिस्म में आग लग रही है.. बड़ा मज़ा आ रहा है।

डॉली ने कमर पर हाथ ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया और अपने मचलते चूचे आज़ाद कर दिए।

सुई की नोक जैसे नुकीले चूचे आज़ाद हो गए दोस्तों डॉली के निप्पल हल्के भूरे रंग के.. एकदम खड़े हो रहे थे।

अगर कोई गुब्बारा इस समय उसकी निप्पल को छू जाए तो उसकी नोक से फूट जाए।

अब डॉली का हाथ अपनी पैन्टी पर गया वो धीरे-धीरे उसको जाँघों से नीचे खिसकने लगी और उसकी चूत ने अपना दीदार करवा दिया।

उफ़फ्फ़ क्या.. बताऊँ आपको.. सुनहरी झाँटों से घिरी उसकी गुलाबी चूत.. जो किसी बरफी की तरह नॉकदार और फूली हुई थी।

आज़ाद हो गई दोस्तो, उसकी चूत से रस निकल रहा था.. जिसके कारण उसकी फाँकें चमक रही थीं और हल्की-हल्की एक मादक

खुशबू आने लगी।

डॉली ने अपने चूचों पर हाथ घुमाया और धीरे-धीरे अपनी चूत तक ले गई।

उसकी आँखें बंद थीं और चेहरे के भाव बदलने लगे थे।

इससे साफ पता चल रहा था कि उसको कितना मज़ा आ रहा होगा। थोड़ी देर डॉली वैसे ही अपने आपको निहारती रही और उसके बाद गंदी कहानी की किताब लेकर बिस्तर पर पेट के बल लेट गई और कहानी पढ़ने लगी।

वो कहानी दो बहनों की थी कि कैसे बड़ी बहन अपने बॉय-फ्रेंड से चुदवाती है और अपनी छोटी बहन के साथ समलैंगिक सम्बन्ध बनाती है..

आख़िर में उसका बॉय-फ्रेंड उसकी मदद से उसकी छोटी बहन की सील तोड़ता है।

कहानी पढ़ते-पढ़ते ना चाहते हुए भी डॉली का हाथ चूत पे जा रहा था और वो कभी सीधी.. कभी उल्टी हो कर किताब पढ़ रही थी और चूत को रगड़ रही थी।

करीब आधा घंटा तक वो किताब पढ़ती रही और चूत को रगड़ती रही।

दोस्तो, डॉली तो चुदाई से अंजान थी.. मगर ये निगोड़ी जवानी और बहकती चूत तो सब कुछ जानती थी..

हाथ के स्पर्श से चूत एकदम गर्म हो गई और डॉली कामवासना की दुनिया में पहुँच गई।

अब उसकी चूत किसी भी पल लावा उगल सकती थी। उसको ये सब नहीं पता था.. बस उसे तो असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही थी।

वो ज़ोर-ज़ोर से चूत को मसलने लगी और बड़बड़ाने लगी।

डॉली- आह.. आह.. दीदी उफ़फ्फ़ आपने ये कैसी कहानी की किताब दे दी आहह.. मेरी फुननी तो.. नहीं.. नहीं… अब इसे चूत ही कहूँगी.. आआ.. आह मेरी चूत तो जलने लगी है आहह.. हाथ हटाने को दिल ही नहीं कर रहा.. उफफफ्फ़ उउउ आआहह..

डॉली अपने चरम पर आ गई.. तब उसने पूरी रफ्तार से चूत को मसला और नतीजा आप सब जानते ही हो.. पहली बार डॉली की चूत ने वासना को महसूस करके पानी छोड़ा।

दोस्तो, कुछ ना जानने वाली डॉली ने रात भर में पूरी किताब पढ़ डाली और 3 बार बिना लौड़े के अपनी चूत से पानी निकाला और थक-हार कर नंगी ही सो गई।

सुबह डॉली काफ़ी देर तक सोती रही उसकी मम्मी ने उसे जगाया.. तब वो जागी आज वो बड़ा हल्का महसूस कर रही थी और उसके चेहरे की ख़ुशी साफ बता रही थी कि रात के कार्यक्रम से उसको बड़ा सुकून मिला है।

नहा-धो कर वो स्कूल चली गई.. रोज की तरह आज भी कुछ लड़के गेट पर उसके आने का इंतजार कर रहे थे ताकि उसकी मटकती गाण्ड और उभरे हुए चूचों के दीदार हो सकें।

रोज तो डॉली नज़रें झुका कर चुपचाप चली जाती थी.. मगर आज उसने सबसे नज़रें मिला कर एक हल्की मुस्कान सबको दी और गाण्ड को हिलाती हुई अपनी क्लास की तरफ़ चली गई।

रिंकू- उफ़फ्फ़ जालिम.. आज ये क्या सितम ढा गई मुझपे.. साला आज सूरज कहाँ से निकला था.. मेरी जान ने आज नज़रें मिलाईं भी और हँसी भी।

खेमराज- हाँ यार क्या क़ातिल अदा के साथ मुस्कुराई थी.. मेरा तो दिल करता है.. अभी उसके पास जाकर कहूँ.. आ सेक्स की देवी.. अपने इन मखमली होंठों से छूकर मेरे लौड़े को धन्य कर दो।

रिंकू- अबे साले चुप.. मैं तो ये कहूँगा कि आ स्वर्ग की अप्सरा.. एक बार मेरे लौड़े को अपनी चूत और गाण्ड में लेकर मेरा जीवन सफल कर दो।

मॅडी- चुप भी करो सालों.. हवस के पुजारियों.. वो आज हँसी.. इसका मतलब हम में कोई तो है.. जिससे वो फंसी.. अब पता लगाना होगा कि वो सेक्स बॉम्ब किसके लौड़े पर फटेगा।

तीनों खिलखिला कर हँसने लगते हैं।

दोस्तों इन के बारे में आपको बताने की जरूरत नहीं..

आप खुद जान गए होंगे कि ये डॉली के साथ ही स्कूल में पढ़ते हैं। बाकी की जानकारी जब इनका खास रोल आएगा तब दे दूँगी।

फिलहाल स्टोरी पर ध्यान दो।

डॉली का दिन एकदम सामान्य गया.. चेतन सर ने भी उससे कुछ बात नहीं की।

वो आज बहुत खुश थी।

हाँ इसी बीच वो तीनों मनचले जरूर उससे बात करने को मचलते रहे।

मगर डॉली ने उनको भाव नहीं दिया, शाम को उसी वक़्त डॉली पढ़ने के बहाने ललिता के घर की ओर निकल गई।

डॉली ने आज गुलाबी से रंग की एक चुस्त जींस और नीली टी-शर्ट पहनी हुई थी।

उसको देख कर रास्ते में ना जाने कितनों की ‘आह’ निकली होगी और क्या पता कौन-कौन आज उसके नाम से अपना लौड़ा शान्त करेगा।

ललिता- अरे आओ आओ.. डॉली बैठो आज तो बहुत खिली-खिली लग रही हो।

डॉली- क्या दीदी आप भी ना…

ललिता- मैंने कल क्या समझाया था.. तुझे शर्म को बाजू में रख कर मुझसे बात किया करो.. ओके.. चल, अब बता कल क्या-क्या किया और स्टोरी कैसी लगी?

डॉली इधर-उधर नज़रें घुमाने लगी।

ललिता- अरे इधर-उधर क्या देख रही है..? बता ना…

डॉली- वो सर कहीं दिखाई नहीं दे रहे?

ललिता- क्यों कल का सारा किस्सा चेतन को बताएगी क्या.. वो बाहर गए हैं.. चल अब बता…

डॉली का चेहरा शर्म से लाल हो गया मगर फिर भी उसने हिम्मत करके रात की सारी बात ललिता को बता दी।

ललिता- अरे वाहह.. क्या बात है पहली बार में ही तूने हैट्रिक मार दी.. चल अच्छा किया.. अब बता तुझे क्या समझ नहीं आया?

डॉली- दीदी स्टोरी तो मस्त थी.. मगर उसमें बहुत सी बातें मेरे ऊपर से निकल गईं.. जैसे आज तो तेरी सील तोड़ दूँगा.. अब ये सील क्या होती है और हाँ.. एक जगह लिखा था आज तेरे रसीले चूचों का सारा रस पी जाऊँगा.. दीदी ये चूचे तो समझ आ गए.. मगर इनमें रस कहाँ होता है?

 


ललिता के चेहरे पर एक कामुक मुस्कान आ गई।

ललिता- अरे मेरी मासूम बहना.. सील का नहीं पता.. अब सुन तेरी चूत में अन्दर एक पतली झिल्ली है.. उसे सील कहते हैं… जब पहली बार लौड़ा चूत में जाता है ना.. तब लौड़े के वार से वो झिल्ली टूट जाती है। उसी को सील तोड़ना कहते हैं।

डॉली- ओह्ह.. अच्छा और रस?

ललिता- तू सुन तो सही यार.. देख जब लड़का मम्मों को चूसता है.. यानी निप्पल को चूसता है तब उसमें से आता कुछ नहीं मगर उसको और लड़की को मज़ा बहुत आता है.. बस लड़का उसी को रस कहता है।

डॉली- अच्छा ये बात है.. मगर सच कहूँ अब भी ये बात मेरी समझ के बाहर है।

ललिता- मेरी जान ऐसे तो तू कभी कुछ नहीं सीख पाएगी.. देख इसका आसान तरीका यही है कि मैं तुम्हें प्रेक्टिकल करके समझाऊँ तभी तू कुछ समझ पाएगी।

डॉली- हाँ दीदी ये सही रहेगा।

ललिता- तो चल कमरे में चल कर अपने सारे कपड़े निकाल.. मैं भी नंगी हो जाती हूँ, तभी मज़ा आएगा।

डॉली- छी.. नहीं दीदी.. मुझे बहुत शर्म आ रही है… मैं आपके सामने बिना कपड़ों के कैसे आऊँगी?

ललिता- अरे यार तू तो ऐसे शर्मा रही है जैसे मैं कोई लड़का होऊँ? यार.. मैं भी तो नंगी हो रही हूँ ना.. और तेरे पास ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है.. अब चल।

बेचारी डॉली क्या बोलती.. चल दी उसके पीछे-पीछे।

कमरे में जाकर ललिता ने कहा- तू दो मिनट यहीं बैठ मैं अभी आई।

डॉली- दीदी सर तो नहीं आ जाएँगे ना और प्लीज़ उनसे कुछ मत बताना.. वर्ना स्कूल में उनके सामने जाने की मेरी हिम्मत ना होगी।

ललिता- अरे तू पागल है क्या.. ऐसी बातें किसी को बताई नहीं जाती और चेतन तो बहुत सीधा आदमी है.. तभी तो तुमको मेरे पास ले आया ताकि मैं तुझे ठीक से समझा सकूँ.. अब चल तू बैठ.. मैं अभी आई।

दोस्तो, कहानी को रोकने के लिए माफी चाहती हूँ मगर एक बात आपको बताना जरूरी है कि उस दिन चेतन ने ललिता से क्या कहा था डॉली के बारे में?

अब तक आपको लग रहा होगा चेतन को कुछ पता नहीं इस बारे में.. आप वो जान लो फिर कहानी में एक नया ट्विस्ट आ जाएगा।

उस दिन स्कूल से जब चेतन घर आया।

ललिता- अरे आओ मेरे पतिदेव क्या बात है बड़े थके हुए लग रहे हो।

चेतन- नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं है.. तुमसे एक बात करनी है बैठो यहाँ।

ललिता वहीं सोफे पर बैठ जाती है और चेतन उसको डॉली के साथ हुई पूरी बात बता देता है।

ललिता- हे राम इतनी भी क्या नादान है वो लड़की… जो ये सब नहीं जानती? और तुमने शाम को उसे यहाँ क्यों बुलाया? क्या इरादा है मुझ से मन भर गया क्या.. जो उस कमसिन कली को समझाने के बहाने भोगना चाहते हो?

चेतन- अनु तुम भी ना.. बस बिना मतलब की बकवास करने लगती हो.. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है.. बस वो आए तब उसे तुम समझा देना और कुछ नहीं…

ललिता- ओह्ह.. ये बात है… अच्छा मान लो अगर वो तुमसे चुदवाना चाहे तो क्या तुम अपना लौड़ा उसकी चूत में डालोगे?

ललिता की बात सुनकर चेतन का बदन ठंडा पड़ गया और डॉली को चोदने की बात से ही उसका लौड़ा पैन्ट में तन गया जिसे ललिता ने देख लिया।

चेतन- क्या बकवास कर रही हो तुम..? मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा।

ललिता- ओए होये.. मेरा राजा.. ये नखरे कुछ नहीं करोगे तो ये लंड महाराज क्यों फुंफकार रहा है हाँ?

चेतन ने पैन्ट में लौड़े को ठीक करते हुए ललिता की तरफ़ घूर कर देखा।

ललिता- अच्छा बाबा ग़लती हो गई बस.. मगर एक बात कहूँ अगर वो खुद चुदवाने को राज़ी हो जाए तो मुझे कोई दिक्कत नहीं यार.. मैं तुमसे प्यार करती हूँ और जानती हूँ एक कच्ची कली को चोदने का सपना हर मर्द का होता है.. अब मुझसे क्या शर्माना।

चेतन- अच्छा ठीक है.. सुनो.. डॉली बहुत सुन्दर है.. मानता हूँ कि उसको देख कर कोई भी उसको भोगने की चाहत करेगा मगर तुम तो जानती हो मैं कोई गली का गुंडा नहीं जो छिछोरी हरकतें करूँगा.. हाँ अगर वो खुद से राज़ी हो और तुम्हें कोई दिक्कत ना हो तब मैं उसे जरूर चोदना चाहूँगा।

चेतन की बात सुनकर ललिता के होंठों पर एक क़ातिल मुस्कान आ गई।

ललिता- ये हुई ना बात.. अब बस तुम अपनी अनु का कमाल देखो.. कैसे मैं उस कच्ची कली को लाइन पर लाती हूँ ताकि वो आराम से तुमसे चुदने को राज़ी हो जाए।

दोस्तो, यह थी उस दिन की बात और डॉली के सामने चेतन बाहर जरूर गया था मगर दूसरे दरवाजे से अन्दर आकर उनकी सारी बातें उसने सुन ली थीं।

अब आज क्या हुआ चलो आपको बता देती हूँ।

ललिता कमरे से निकल कर दूसरे कमरे में गई जहाँ चेतन पहले से ही बैठा था।

ललिता- काम बन गया.. अब सुनो मैं उसके साथ थोड़ा खेल लेती हूँ… तुम खिड़की से उसके नंगे जिस्म को देख कर मज़ा लो.. ओके.. अब मैं जाती हूँ वरना उसको शक हो जाएगा।

चेतन- ओके मेरी जान.. जाओ आज तुमको भी कच्ची चूत का रस पीने को मिल जाएगा हा हा हा हा।

ललिता- धीरे हँसो.. वो सुन लेगी.. अब मैं जाती हूँ।

डॉली- ओह दीदी आप कहाँ चली गई थीं।

ललिता- अरे कुछ नहीं.. अब चल.. हो जा नंगी.. मस्ती का वक्त आ गया है।

डॉली- आप भी निकालो.. दोनों साथ में निकालते हैं।

ललिता ने तो नाईटी पहनी हुई थी और अन्दर कुछ नहीं पहना था झट से निकाल कर बगल में रख दी।

डॉली- हा हा हा दीदी आप भी ना अन्दर कुछ नहीं पहना और आपके मम्मों को तो देखो कितने बड़े हैं।

ललिता- मेरी जान तेरी उम्र में मेरे भी इतने ही थे.. ये तो चेतन ने दबा-दबा कर इतने बड़े कर दिए।

डॉली- दीदी आप भी ना कुछ भी बोल देती हो.. सर ने क्यों दबाए.. उम्र के साथ बढ़ गए होंगे।

ललिता- अरे पगली तू उम्र की बात करती है तुम से कम उम्र की लड़की के मम्मों को तुझ से बड़े मैंने देखे हैं अब क्या कहेगी तू?

डॉली- सच्ची दीदी.. मगर ऐसा क्यों?

ललिता- अरे पगली तेरे सर ने इनको दबा-दबा कर इनका रस चूसा है। वे कहते थे कि आम का स्वाद आता है।

डॉली खिलखिला कर हँसने लगती है।

ललिता- अब हँसना बंद कर और निकाल अपने कपड़े।

डॉली ने पहले अपनी टी-शर्ट निकाली तब सफेद ब्रा में से उसके नुकीले मम्मे ब्रा को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिखने लगे।

चेतन खिड़की पर खड़ा ये नजारा देख रहा था।

ललिता- वाउ यार.. क्या मस्त मम्मे हैं.. अब ज़रा इन्हें आज़ाद भी कर दे।

डॉली बस मुस्कुरा कर रह गई और उसने पैन्ट का हुक खोल कर नीचे सरकाना शुरू किया.. तब उसकी गोरी जांघें बेपरदा हो गईं और सफेद पैन्टी में उसकी फूली हुई चूत दिखने लगी।

 


ललिता बस उसको देखती रही और डॉली अपने काम में लगी रही। अब उसने ब्रा के हुक खोल दिए और अपने रस से भरे हुए चूचे आज़ाद कर दिए।

चेतन का तो हाल से बहाल हो गया और होगा भी क्यों नहीं.. ऐसी मस्त जवानी को.. वो अपने सामने नंगा होते देख रहा था।

अब उसने अपनी पैन्टी भी निकाल दी। सुनहरी झाँटों से घिरी गुलाबी चूत अब आज़ाद हो गई थी।

ललिता तो बस उसके यौवन को देखती ही रह गई.. मगर जब उसकी नज़र झाँटों पर गई।

ललिता- अरे ये क्या… इतनी मस्त चूत पर ये झांटें क्यों..? मेरी जान ऐसी चूत को तो चिकना रखा करो ताकि लौड़ा टच होते ही फिसल जाए।

डॉली सवालिया नजरों से ललिता की ओर देखती है।

ललिता- अरे पगली चूत पर जो बाल होते हैं उन्हें झांट कहते हैं। अब इतना भी नहीं पता क्या और कभी इनको साफ नहीं किया क्या तुमने?

डॉली- दीदी अब आप के साथ रहूँगी तो सब सीख जाऊँगी और इनको साफ कैसे करते हैं? मैंने तो कभी नहीं किया..

ललिता- ओह्ह.. तभी इतनी बड़ी खेती निकल आई है.. वैसे मानना पड़ेगा गुलाबी चूत पर ये सुनहरी झांटें किसी भी मर्द को रिझाने के लिए काफ़ी हैं लेकिन मुझे तो चूत को चिकना रखना ही पसन्द है। जब पहली बार चेतन ने मेरी चूत देखनी चाही थी.. मैंने भी झांटें साफ नहीं की हुई थीं। किसी तरह बहाना बनाकर दूसरे दिन एकदम चकाचक चमकती चूत उसको दिखाई थी। वो तो देखते ही लट्टू हो गया था।

डॉली- ओह दीदी.. आप भी ना बेचारे सर को अपने जाल में फँसा लिया हा हा हा हा!

ललिता- अरे पगली सारे मर्दों को चिकनी चूत बहुत पसन्द आती है और खास कर तेरी जैसी कच्ची कली की चूत तो चिकनी ही रहनी चाहिए.. चल सबसे पहले तुझे झांटें साफ करना सिखाती हूँ।

डॉली- ठीक है दीदी.. कहाँ चलना है अब?

ललिता- अरे कहाँ का क्या मतलब है.. बाथरूम में… चल तू वहाँ कमोड पर बैठ जाना.. मैं साफ कर दूँगी।

डॉली- ओह्ह.. दीदी आप कितनी अच्छी हो जो मुझे सब सिखा रही हो।

ललिता- अच्छा एक बात तो बता.. तू 18 साल की हो गई है तुझे वो तो आती है ना.. मेरा मतलब मासिक धर्म जो हर महीने आता है।

डॉली- हाँ दीदी इसका मुझे पता है लेकिन जब मैं 13 साल की थी मुझ पेट में बहुत दर्द हुआ.. बुखार भी हो गया.. दो दिन तक ऐसा चला.. तब माँ ने मुझे सब समझाया कि अब तुझे पीरियड शुरू होंगे.. तू खून देख कर डरना मत.. बस उस दिन से सब पता चल गया।

ललिता- चल कुछ तो पता चला तुझे.. आ बैठ यहाँ.. मैं अभी वीट लगा कर तेरी चूत को चमका देती हूँ।

डॉली- दीदी बाथरूम का दरवाजा तो बन्द करो.. कोई आ गया तो?

ललिता- अरे यार घर में सिर्फ़ हम दोनों हैं और कमरे की कुण्डी बन्द है ना.. कोई कैसे आएगा..? अब चुपचाप बैठ जा यहाँ।

डॉली इसके बाद कुछ नहीं बोली.. 15 मिनट में ललिता ने उसके चूत के बाल के साथ-साथ उसके हाथ-पाँव के भी बाल उतार दिए।

उसको एकदम मक्खन की तरह चिकना बना दिया।

ललिता- वाउ अब लगी ना… ‘सेक्सी-डॉल’.. चल अब बाहर आजा.. आज तुझे चूत का मज़ा देती हूँ।

 


डॉली ने पानी से अपने आपको साफ किया और तौलिया से जिस्म पौंछ कर बाहर आ गई और बिस्तर पर सीधी लेट गई।

ललिता- मेरी जान.. कल तूने स्टोरी पढ़ के चूत को ठंडा किया था ना.. अब देख आज मैं तुझे कैसे मज़ा देती हूँ।

दोस्तो, चेतन अब भी खिड़की के पास ही खड़ा था.. उसने अपना 8″ का लौड़ा पैन्ट से बाहर निकाल लिया था और डॉली को देख कर उसे सहलाने लगा था।

वो कुछ बड़बड़ा भी रहा था।

चेतन- उफ्फ.. साली क्या चूत है तेरी.. साला लौड़ा बेकाबू हो गया… तेरे रसीले चूचे तो मुझे पागल कर रहे हैं… काश अभी इनको चूस-चूस कर तेरा सारा रस पी जाऊँ।

ललिता ने डॉली के पैरों को मोड़ कर उसकी चूत पर एक चुम्बन कर लिया।

डॉली सिहर गई और जल्दी से बैठ गई।

डॉली- छी.. छी.. दीदी ये आप क्या कर रही हो.. ये गंदी जगह पर चुम्बन क्यों कर रही हो?

ललिता- अरे तुझे क्या पता पगली.. दुनिया में कामरस से बढ़कर कुछ नहीं है और ऐसी अनछुई कच्ची चूत का रस तो किसी नसीब वाले को ही मिलता है.. काश मैं लड़का होती तो आज तेरी सील तोड़ कर पूरा लौड़ा अन्दर घुसा देती.. हाय री मेरी फूटी किस्मत.. अब तो तेरी चूत चाट कर ही अपने आपको धन्य समझ लूँगी।

इतना बोलकर ललिता चूत को अपनी जीभ से चाटने लगी।

डॉली- आहह उफ़फ्फ़ दीदी आहह.. उई मज़ा आ गया आहह आई उफ़फ्फ़ आराम से दीदी आहह.. काटो मत ना आहह..

ललिता जीभ की नोक को चूत के अन्दर तक घुसाने की कोशिश कर रही थी, मगर कुँवारी चूत में जगह कहाँ थी।

अब ललिता चूत के दाने को जीभ से चाटने और चूसने लगी।

डॉली- आह आह… ये आ.. आपन..ने आहह.. क्या कर दिया आहह.. मेरे आहह..प पु पूरे जिस्म में करंट जैसा लग र..र..रहा है।

ललिता ने अपना मुँह ऊपर किया और डॉली को आँख मारते हुए कहा।

ललिता- मेरी जान इसे चूत का दाना कहते हैं जिसको छूने से चूत की आग भड़क जाती है और किसी आग की भट्टी की तरह चूत जलने लगती है.. यही सही समय होता है लौड़ा घुसाने का.. इस वक्त कितनी भी छोटी चूत क्यों ना हो.. बड़े से बड़े लौड़े को अन्दर ले लेती है.. मेरा बहुत मन कर रहा है कि तेरे मम्मों का रस पिऊँ मगर ये मैंने किसी और को देने का वादा किया है।

आख़िर की लाइन ललिता ने धीरे से बोली ताकि डॉली सुन ना सके।

डॉली- दीदी आहह.. चाटो ना प्लीज़ आहह.. मज़ा आ रहा था ऐसे मुझे गर्म करके आप बीच में नहीं छोड़ सकती.. आह्ह प्लीज़।

ललिता- देखा मेरा काम था तुझे गर्म करने का और अब तू एकदम गर्म हो गई है.. आजा अब तू भी मेरी चूत को चाट कर मज़ा ले।

डॉली- नहीं दीदी ये मुझसे नहीं होगा.. मुझे घिन आ रही है प्लीज़ आप अच्छा चाट रही थीं.. आ जाओ ना।

ललिता- अच्छा तुझे चाटने से घिन आएगी और चटवाने में बड़ा मज़ा आ रहा है.. ऐसा कर 69 के पोज़ में आ जा.. मेरी तू चाट तेरी मैं चाट कर मज़ा देती हूँ।

डॉली पर सेक्स का खुमार छा गया था.. उसे अब अच्छे बुरे की कहाँ पहचान थी। बस ललिता की बातों में आ गई।

अब दोनों एक-दूसरे की चूत को चाट रही थीं। शुरू में डॉली को अच्छा नहीं लगा.. मगर ललिता जिस तरीके से उसकी चूत चूस रही थी।

वो मजबूर हो गई और बैसे ही वो ललिता की चूत चाटने लगी।

दोस्तों इन दोनों के चक्कर में आप चेतन को भूल गए.. बेचारा बाहर खड़ा बड़ी रफ्तार से लौड़े को आगे-पीछे कर रहा था।

ये दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे की चूत चाटती रहीं।

फिर ललिता अपनी ऊँगली से डॉली की चूत चोदने लगी.. उसको थोड़ा दर्द तो हुआ मगर मज़ा बहुत आ रहा था।

आख़िरकार डॉली की चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसे ललिता चाटने लगी।

उसी पल ललिता ने भी डॉली के मुँह पर पानी छोड़ दिया।

डॉली को घिन आई और उसने मुँह हटा लिया मगर ललिता उसके मुँह पर बैठ गई ना चाहते हुए भी डॉली को रस पीना पड़ा।

दोनों अब अलग होकर शान्त पड़ गईं। उधर चेतन भी हल्का हो चुका था।

डॉली- छी दीदी.. आप बहुत गंदी हो.. चूत का पानी पी गईं और मुझे भी पिला दिया.. उह कितना अजीब सा स्वाद था।

ललिता- अबे बस उल्टी करेगी क्या बिस्तर पे..? भूल जा उसको.. ये बता मज़ा आया कि नहीं तुझे।

डॉली- दीदी सच बताऊँ.. जब आप चूत चाट रही थी ना.. बड़ा मज़ा आ रहा था और आपने जब ऊँगली अन्दर डाली.. मेरे तो बदन में से जान ही निकल गई थी.. कसम से बहुत मज़ा आया।

‘इसकी जगह लंड अन्दर गया होता तो तुझे और मजा आता।’

डॉली- दीदी आप कब से लंड के बारे में बोल रही हो आख़िर ये होता कैसा है.. जरा मुझे भी तो दिखाओ।

ललिता- ओये होये.. मेरी प्यारी बहना बड़ी जल्दी है तुझे लंड देखने की.. तुझे अगर अभी देखना है तो बुला लूँ.. तेरे चेतन सर को.. उनका लंड देख लेना।

डॉली- दीदी आप भी ना.. सर को बताने के लिए मैंने मना किया है।

ललिता- तो मेरी रानी मेरे पास कौन सा लंड है.. जो तुझे निकाल कर दिखा दूँ.. मेरे पास तो ये चुदी हुई चूत है… इसे ही देख ले हा हा हा हा हा।

डॉली भी ललिता के साथ हँसने लगी।

ललिता- चल तेरी तमन्ना मैं आज पूरी कर ही देती हूँ तू यहीं बैठ.. मैं अभी दूसरे कमरे से तेरे लिए लंड लेकर आई।

डॉली- दीदी ये आप क्या बोल रही हो… प्लीज़ किसी को मत बुलाना प्लीज़ प्लीज़।

ललिता- अरे पगली मैं तो ट्रिपल-एक्स डीवीडी लाने जा रही हूँ.. उसमें लंड देख लेना और चुदाई कैसे होती है.. वो भी तुझे पता चल जाएगा।

डॉली- दीदी आप ऐसे ही जा रही हो.. कपड़े तो पहन लो।

ललिता- यार चेतन तो देर से आएगा और दूसरा कोई यहाँ है नहीं.. तो कपड़ों की क्या जरूरत है.. बस अभी आई।

ललिता वहाँ से निकल कर दूसरे कमरे में चली गई.. बाहर चेतन खड़ा था। वो भी उसके पीछे-पीछे चला गया।

चेतन- मेरी जानेमन.. क्या कमाल का खेल खेला है तुम दोनों ने.. मेरी तो हालत ख़स्ता हो गई.. साला लौड़ा है की बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था.. हाथ से शान्त किया। फिर भी देखो कैसे फुंफकार मार रहा है।

ललिता- अरे मेरे राजा… सब्र करो संभालो अपने आपको.. डॉली अभी चुदाई के लिए तैयार नहीं है… कहीं जल्दबाज़ी में बना बनाया काम बिगड़ ना जाए।

चेतन- अरे मेरी प्यारी अनु.. कैसे करूँ सब्र.. साली क्या मस्त लड़की है.. उसकी चूत देख कर मेरा तो दिमाग़ घूम गया। पुरानी याद ताज़ा हो गई.. याद है मैंने कैसे तुम्हारी सील तोड़ी थी।

ललिता- हाँ सब याद है.. अब मुझे जाने दो वरना उसको शक हो जाएगा।

ललिता डीवीडी लेकर वापस डॉली के पास चली गई और डीवीडी चालू करके उसके पास बिस्तर पर बैठ गई।

डॉली बड़ी गौर से फिल्म देख रही थी। उसका मुँह आश्चर्य से खुला हुआ था।

फिल्म में एक आदमी एक स्कूल-गर्ल के मम्मों को चूसता है और अपना लंबा लौड़ा उसे चुसवाता है।

लड़की भी मज़े से लौड़े को चूस रही थी। उसके बाद वो आदमी उसे घोड़ी बना कर खूब चोदता है।

डॉली- ओह्ह.. माँ.. ये क्या हो रहा है.. लंड ऐसा होता है.. इतना बड़ा..? मैंने तो बच्चे की फुननी देखी थी.. मगर बड़ी होकर ये फुननी ऐसी हो जाती है.. कभी सोचा भी नहीं था।

ललिता- हाँ प्यारी.. यही है लौड़ा.. इसी में सारी दुनिया का मज़ा है.. देख वो छोटी सी लड़की कैसे मज़े से चुद रही है.. उसको कितना मज़ा आ रहा होगा।

डॉली- हाँ दीदी उसको तो मज़ा आ रहा है मगर मुझको डर लग रहा है.. इतना मोटा लौड़ा उसकी चूत में जा रहा है.. उसको दर्द तो हो रहा होगा ना?

ललिता- अरे नहीं.. देख अगर उसको दर्द होता तो वो रोती ना.. मगर वो तो मज़े से चुद रही है और बार-बार बोल रही है.. ‘फक मी.. फक मी हार्ड…’ कुछ समझी बुद्धू.. चुदाई में मज़ा बहुत आता है।

ललिता ने बहुत कोशिश की मगर डॉली चुदने को राज़ी ना हुई। फिर ललिता ने दूसरा पासा फेंका।

ललिता- चल किसी आदमी से मत चुदाना.. तुझे पता है रबड़ का भी लौड़ा आता है जिससे तुम खुद चुदाई का मज़ा ले सकती हो और किसी आदमी के सामने तुम्हें नंगी भी नहीं होना पड़ेगा।

डॉली- ओह्ह.. सच दीदी.. मुझे कल पक्का दिखाना.. अभी तो बहुत वक्त हो गया.. मुझे घर भी जाना है वरना मम्मी गुस्सा हो जाएगी।

डॉली ने अपने कपड़े पहने और वहाँ से निकल गई।

 


उसके जाने के बाद चेतन कमरे में आया उसने उन दोनों की बातें सुन ली थीं।

चेतन- अनु ये तुमने उसको क्या बोल दिया नकली लंड से उसको चोदोगी तो मेरा क्या होगा जान.. तुमने मुझे कच्ची कली को चोदने का सपना दिखाया.. अब नकली लौड़े की बात कर रही हो।

ललिता- अरे मेरा राजा.. आप बहुत भोले हो अपने वो कहावत नहीं सुनी क्या.. हाथी के दाँत दिखाने के और होते हैं और खाने के और… बस कल देखना.. मैं कैसे नकली को असली बना देती हूँ.. अब आ जाओ देखो मैंने अब तक कपड़े भी नहीं पहने हैं.. आज तो आप बड़े जोश में हो.. जरा मेरी चूत को मज़ा दे दो।

चेतन- अरे क्यों नहीं मेरी रानी.. चल बन जा घोड़ी.. आज तुझे लंबी सैर कराता हूँ।

ललिता पैरों को मोड़ कर घोड़ी बन गई और चेतन ने एक ही झटके में अपना लौड़ा उसकी चूत में घुसा दिया।

ललिता- आहह.. उई मज़ा आ गया राजा.. अब ज़ोर-ज़ोर से झटके मारो उफ्फ.. फाड़ दो चूत को.. अई आह्ह..

चेतन के दिमाग़ में डॉली घूम रही थी और उसी कारण वो दे दनादन ललिता की चूत में लौड़ा घुसा रहा था।

ललिता- आह्ह.. अई वाहह.. मेरे राजा आ..आज बड़ा मज़ा दे रहे हो.. अई लगता है डॉली समझ कर तुम मुझे चोद रहे हो.. अई उई अब तो रोज उसका नंगा जिस्म तुमको दिखना पड़ेगा.. अई ताकि तुम रोज इसी तरह मेरी ठुकाई करो।

चेतन- उहह उहह.. ले रानी उहह.. अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.. आज तुम बहुत चुदासी लग रही हो ओह्ह ओह्ह।

लगभग 30 मिनट तक ये चुदाई का खेल चलता रहा.. दोनों अब शान्त हो गए थे।

ललिता- जानू मज़ा आ गया.. आज तो काफ़ी दिनों बाद ऐसी मस्त चुदाई की तुमने.. अच्छा अब सुनो… कल किसी भी हाल में एक नकली लंड ले आना.. उसका साइज़ तुम्हारे लवड़े के जैसा होना चाहिए।

चेतन- ठीक है.. ले आऊँगा मगर तुम उसकी चूत की सील नकली लौड़े से तोड़ोगी.. तो मेरा क्या होगा यार.. ऐसी मस्त चूत का मुहूर्त मुझे करना है।

ललिता- तुम ले आना बस.. मैंने कहा ना सब मुझ पर छोड़ दो.. कल देखना मैं क्या करती हूँ।

चेतन ने ललिता की बात मान ली और आगे कुछ नहीं बोला।

वो उठ कर बाथरूम में चला गया।

दोस्तो, अब यहाँ कुछ नहीं है.. चलो डॉली के पास चलते हैं।

घर जाकर डॉली ने अपनी मम्मी को बोल दिया कि टयूशन में वक्त लग गया और रात का खाना खाकर अपने कमरे में जाकर सो गई।

अगले दिन भी डॉली जब स्कूल गई, तब गेट पर तीनों उसके आने का इन्तजार कर रहे थे, मगर आज डॉली ने उनको नज़रअंदाज कर दिया और सीधी निकल गई।

दोस्तो. अब स्कूल के पूरे 8 घंटे की दास्तान सुनोगे क्या.. चलो सीधे मुद्दे पर आती हूँ।

शाम को डॉली ने पीले रंग का टॉप और काला स्कर्ट पहना हुआ था।

जब वो ललिता के घर की ओर जा रही थी.. तब रास्ते में एक कुत्ता एक कुतिया को चोद रहा था।

डॉली ने जब उनको देखा उसे बड़ा मज़ा आया।

ये सब देख कर उसको कल वाला वीडियो याद आ गया और ना चाहते हुए भी उसका हाथचूत पर चला गया।

डॉली भूल गई कि वो बीच सड़क पर खड़ी कुत्ते की चुदाई देख रही है और अपनी चूत को मसल रही है।

तभी वहाँ से एक 60 साल का बूढ़ा गुजरा, उसने सब देखा और डॉली के पास आ गया।

बूढ़ा- बेटी इस तरह रास्ते में खड़ी होकर ये हरकत ठीक नहीं.. अगर इतनी ही खुजली हो रही है तो चलो मेरे साथ घर पर.. कुछ मलहम लगा दूँगा।

उसकी बात सुनकर डॉली को अहसास हुआ कि उसने कितनी बड़ी ग़लती कर दी।

वो बिना कुछ बोले वहाँ से भाग खड़ी हुई और सीधी ललिता के घर जाकर ही रुकी।

ललिता- अरे क्या हुआ..? ऐसे भागते हुए क्यों आई हो.. इतना हाफ़ रही हो.. यहाँ बैठो मैं पानी लेकर आती हूँ।

डॉली वहीं बैठ गई.. ललिता ने उसे पानी पिलाया और उससे भागने का कारण दोबारा पूछा।

तब डॉली ने उसको सारी बात बताई।

ललिता- हा हा हा हा तू भी ना कुत्ते की चुदाई में ये भी भूल गई कि कहाँ खड़ी है और तेरी चूत में खुजली होने लगी.. हा हा हा हा और वो बूढ़ा क्या बोला.. मलहम लगा देगा.. अगर तू उसके साथ चली जाती ना.. तो आज बूढ़े के मज़े हो जाते हा हा हा हा।

डॉली- दीदी आप भी ना.. कुछ भी बोलती रहती हो.. पता नहीं मुझे क्या हो गया था। अच्छा ये सब जाने दो.. आप आज मुझे वो नकली लंड दिखाने वाली थीं ना.. कहाँ है वो?

ललिता- अरे वाह.. बेबी लंड देखने के लिए बड़ी उतावली हो रही है.. चल कमरे में… मैंने वहीं रखा है।

दोनों कमरे में चली जाती हैं।

डॉली बिस्तर पर बैठ जाती है और ललिता अलमारी से लौड़ा निकाल लेती है.. जो दिखने में एकदम असली जैसा दिख रहा था।

लौड़े के साथ दो गोलियाँ भी थीं।

डॉली तो बस उसको देखती ही रह गई।

ललिता- क्यों बेबी कैसा लगा..? है ना.. एकदम तगड़ा लौड़ा।

डॉली- हाँ दीदी.. ये तो वो फिल्म जैसा एकदम असली लगता है.. ज़रा मुझे दिखाओ मैं इसे हाथ से छूकर देखना चाहती हूँ।

ललिता- अरे इतनी भी क्या जल्दी है.. ऐसे थोड़े तुझे हाथ में दूँगी.. आज तो खेल खेलूँगी तेरे साथ..

ये देख शहद की बोतल.. इसमें से शहद निकाल कर इस लौड़े पे लगाऊँगी.. उसके बाद तू इसको चूसना.. तब असली जैसी बात लगेगी.. समझी मेरी जान…

डॉली- ओके दीदी.. बड़ा मज़ा आएगा आज तो…

ललिता ने बगल में रखी दो काली पट्टी उठाईं और डॉली को दिखाते हुए बोली।

ललिता- मज़ा ऐसे नहीं आएगा.. ये देखो आज ‘ब्लाइंड-सेक्स’ करेंगे।

एक पट्टी तेरी आँखों पर और दूसरी हाथ पर बांधूंगी उसके बाद असली मज़ा आएगा।

डॉली- ये पट्टी से क्या मज़ा आएगा दीदी.. नहीं ऐसे ही करेंगे ना।

ललिता- नहीं मैंने कहा ना.. तुम पहली बार लौड़ा चूसने जा रही हो.. अगर आँखें खुली रहेगीं तो ये नकली लौड़ा तुझे दिखेगा और तेरे अन्दर लौड़े वाली मस्ती नहीं आएगी। मगर आँखें बन्द रहेगीं.. तब तू ये सोचना कि तू असली लौड़ा चूस रही है। तब मज़ा दुगुना हो जाएगा और ये देख इस लौड़े के साथ ये बेल्ट भी है.. मैं इसे अपनी कमर पर बाँध लूँगी। इससे मैं आदमी बन जाऊँगी और मेरी चूत की जगह ये लौड़ा आ जाएगा.. क्यों अब बोल क्या बोलती है।

डॉली- हाँ दीदी.. आपने सही कहा.. इस तरह ज़्यादा मज़ा आएगा मगर ये हाथ तो खुले रहने दो ना।

ललिता- नहीं मेरी जान हाथ बाँधने जरूरी हैं वरना तुझे ऐसा लगेगा कि लौड़े को हाथ से पकडूँ और जैसे ही तू लौड़ा पकड़ेगी असली वाली बात ख़तम हो जाएगी।

डॉली- ओके दीदी.. जैसा आपको ठीक लगे.. चलो पट्टी मेरी आँखों पर बाँध दो।

ललिता- अरे मेरी जान पहले ये कपड़े तो निकाल.. उसके बाद ये पट्टी बाँधूंगी।

ललिता खुद भी नंगी हो गई और डॉली को भी नंगा कर दिया। उसके बाद उसके दोनों हाथ पीछे करके पट्टी से बाँध दिए उसकी आँखों पर भी अच्छे से पट्टी बाँध दी।

दोस्तो, ये ललिता का प्लान था ताकि चेतन अन्दर आ जाए और डॉली उसको देख ना सके।

डॉली बिस्तर पर घुटनों के बल बैठ गई ललिता ने चेतन को इशारा कर दिया वो अन्दर आ गया।

वो एकदम नंगा था उसने पहले ही दूसरे कमरे में कपड़े निकाल दिए थे। उसका लौड़ा भी एकदम तना हुआ था।

डॉली- दीदी अब तो लौड़ा मेरे मुँह में दे दो.. बड़ा मान कर रहा है चूसने का।

ललिता- हाँ यार देती हूँ.. पहले कमर पर बाँध तो लूँ.. उसके बाद शहद डाल कर तेरे मुँह में दूँगी।

ललिता ने चेतन के लौड़े पर अच्छे से शहद लगा दिया और चेतन बिस्तर पर चढ़ गया। लौड़े की टोपी को डॉली के खुले मुँह में हल्के से फँसा दिया।

डॉली तो इसी इंतजार में थी, वो झट से अपनी जीभ से टोपी को चाटने लगी।

आनन्द के मारे चेतन की आँखें बन्द हो गईं.. ललिता वहीं पास में बैठी अपनी चूत सहला रही थी।

डॉली लौड़े को जीभ से चाट रही थी और टोपी को अपने होंठों में दबा कर चूस रही थी। उसको बहुत मज़ा आ रहा था।

ललिता- अरे मेरी जान पूरा मुँह में ले.. तब असली मज़ा आएगा.. इतने से क्या होगा?

डॉली ने ललिता की बात सुनकर पूरा लौड़ा में भर लिया और चूसने लगी।

चेतन को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था और आएगा क्यों नहीं एक कमसिन कली जिसके पतले होंठों में उसका लौड़ा फँसा हुआ था।

अब चेतन लौड़े को आगे-पीछे करने लगा।

एक वक्त तो लौड़ा पूरा डॉली के गले तक पहुँच गया और उसी वक़्त डॉली ने झट से मुँह हटा लिया और चेतन ने जैसे ही लौड़ा

आगे किया उसकी गोटियाँ डॉली के मुँह के पास आ गईं.. डॉली को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

वो गोटियों को चूसने लगी.. तब उसको थोड़ा अजीब सा लगा और उसने मुँह हटा लिया।

ललिता- अरे क्या हुआ रानी चूस ना।

डॉली- दीदी मुझे ये लौड़ा एकदम असली जैसा लग रहा है और शहद के साथ-साथ कुछ नमकीन सा और भी पानी मेरे मुँह में आ रहा है इसकी गोटियों की चमड़ी भी बिल्कुल असली लग रही है।

ललिता- अरे पगली ये सब आँख बन्द होने का कमाल है.. असली लवड़ा कहाँ से आएगा? तू चूसती रह.. इसके बाद देख.. आज मैं तेरे निप्पल और चूत को नए अंदाज से चुसूंगी।

बेचारी भोली-भाली डॉली ललिता की बातों में आ गई और दोबारा से लौड़ा चूसने लगी।

करीब 5 मिनट बाद चेतन ने इशारे से ललिता को कहा- अब इसको लेटा दो.. मैं इसके चूचों को मसलना और चूसना चाहता हूँ।

 


ललिता- बस डॉली अब मेरी बारी है तू सीधी लेट जा.. अब मैं तुझे स्वर्ग की सैर कराती हूँ।

डॉली- मैं कैसे लेटूं दीदी.. मेरे हाथ तो पीछे बँधे हैं।

ललिता ने उसके हाथ खोल दिए उसको सीधा लिटा कर बिस्तर के दोनों बगल से उसके हाथ बाँध दिए।

डॉली- अरे अरे.. ये क्या कर रही हो दीदी अब तो मेरे हाथ खुले रहने दो ना…

ललिता- नहीं मेरी जान.. आज तू ऐसे ही मज़ा ले.. बस अब कुछ मत बोल.. देख मैं तुझे कैसे मज़े देती हूँ.. इतना बोल कर ललिता ने चेतन को इशारा कर दिया कि टूट पड़ो इस सेक्स की मलिका पर..

चेतन को तो बस इसी मौके का इन्तजार था।

वो डॉली के ऊपर लेट गया और सबसे पहले उसके मखमली होंठों को चूसने लगा।

उसका अंदाज ऐसा था कि डॉली भी उसका साथ देने लगी।

वो दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे.. मगर चेतन सिर्फ़ होंठों से ही थोड़े खुश होने वाला था..

थोड़ी देर बाद वो नीचे खिसकने लगा और अब उसके होंठों में डॉली के निप्पल थे।

वो दोनों हाथों से उसके कड़क चूचे दबा रहा था और निप्पल चूस रहा था.. जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो।

डॉली- आह आआ दीदी अई मज़ा आ गया उह.. धीरे से दबाओ ना उफ़फ्फ़.. दर्द होता है अई काटो मत ना… दीदी आइ मज़ा आ रहा है।

दोस्तो, ललिता का प्लान तो अच्छा था मगर एक पॉइंट ऐसा था जिसके कारण डॉली को थोड़ा शक हुआ कि कहीं ललिता की जगह उसके ऊपर कोई आदमी तो नहीं है ना।

ना ना.. टेंशन मत लो.. आपको सोचने की जरूरत नहीं है.. मैं खुद बता देती हूँ आपको।

जब चेतन होंठ चूस रहा था उसका सीना डॉली के मम्मों को दबा रहा था और उसके सीने के बाल डॉली महसूस कर रही थी उसने मन में सोचा भी कि अगर दीदी मेरे ऊपर हैं तो उनके मम्मों और मेरे मम्मों को आपस में टकराने चाहिए.. मगर ये तो एकदम सपाट सीना है और बाल भी हैं।

मगर ना जाने क्या सोच कर वो चुप रही।

चेतन को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था और आएगा क्यों नहीं एक कमसिन कली जिसके पतले होंठों में उसका लौड़ा फँसा हुआ था।

अब चेतन लौड़े को आगे-पीछे करने लगा।

एक वक्त तो लौड़ा पूरा डॉली के गले तक पहुँच गया और उसी वक़्त डॉली ने झट से मुँह हटा लिया और चेतन ने जैसे ही लौड़ा आगे किया उसकी गोटियाँ डॉली के मुँह के पास आ गईं.. डॉली को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

अब चेतन मम्मों से नीचे उसके पेट तक चूमता हुआ आ गया और आख़िर कर वो अपनी असली मंज़िल यानी चूत तक पहुँच गया।

चेतन की गर्म साँसें डॉली अब अपनी चूत पर महसूस कर रही थी और छटपटा रही थी कि कब दीदी के होंठ चूत पर टिकेंगे और कब उसको सुकून मिलेगा।

चेतन ने चूत के होंठों को कस कर अपने मुँह से भींच लिया। डॉली की सिसकी निकल गई।

चेतन बड़े प्यार से चूत को चूस रहा था और अपनी जीभ से अन्दर तक चाट रहा था.. डॉली एकदम गर्म हो गई थी।

डॉली- अया ऐइ उफ़फ्फ़.. दीदी आह.. प्लीज़ चूत के अन्दर ऊँगली करो.. ना आ आहह.. चूत में बहुत बेचैनी हो रही है।

ललिता- मेरी जान तेरी चूत की आग अब ऊँगली से ठंडी नहीं होने वाली.. इसको तो अब लौड़े की जरूरत है.. बोल क्या बोलती है।

डॉली- दीदी आहह.. डाल दो ना.. आहह.. आपके पास तो इतना मस्त लौड़ा है आहह.. पूछ क्यों रही हो.. अई आहह.. शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था कि अपने सर से ही अपनी सील तुड़वाऊँ आहह.. प्लीज़ चेतन सर आहह अब बर्दाश्त नहीं होता.. डाल दो ना आहह..

डॉली की बात सुनकर ललिता और चेतन दोनों ही भौंचक्के रह गए.. दोनों का मुँह खुला का खुला रह गया।

ललिता- त..त..तू.. ये क..क्या.. बोल रही है व..चेतन यहाँ क..क..कहाँ है?

डॉली- अई आह.. दीदी आह.. मानती हूँ मुझे चुदाई का अनुभव नहीं है.. मगर इतनी भी भोली नहीं हूँ कि औरत और मर्द के शरीर में फ़र्क ना महसूस कर सकूँ और दूसरी बात आपकी आवाज़ मेरे बगल से आ रही है जबकि आपके हिसाब से आप मेरी चूत चाट रही हो.. आह्ह.. अब ये पट्टी खोल दो.. मुझे कोई ऐतराज नहीं कि सर मेरी चूत की सील तोड़ें.. प्लीज़ आह्ह..

चेतन और ललिता की नज़रें मिलीं और आँखों ही आँखों में दोनों की बात हो गई।

चेतन ने पहले डॉली के हाथ खोले.. उसके बाद आँखों की पट्टी निकाल दी।

डॉली- ओह.. सर आपका लौड़ा कितना मोटा और बड़ा है.. उफ़फ्फ़ जब मेरे मुँह में था.. कसम से बड़ा मज़ा आ रहा था.. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह विज्ञान के चक्कर में चुदाई का ज्ञान मिल जाएगा.. पहले मुझे कुछ पता नहीं था.. मगर इन दो दिनों में मुझे पता चल गया कि चुदाई में जो मज़ा है.. वो किसी और चीज़ में नहीं है।

ललिता- मेरी जान मैं तो कब से कह रही थी कि चेतन को बुलाऊँ क्या.. मगर तुम ही हो कि बस मना कर रही थीं।

डॉली- दीदी सच कहूँ.. तो जब आप सर का नाम लेती थीं.. मेरी चूत में पानी आ जाता था.. मगर शर्म के मारे आपसे कुछ बोल ना पाती थी.. अभी जब लौड़ा चूस रही थी.. तब मुझे पक्का पता चल गया कि ये लौड़ा नकली नहीं.. असली है और सर के सिवा यहाँ कौन आ सकता था.. इनके सीने के बाल भी मैंने महसूस किए थे।

चेतन- ओह.. मेरी रानी… तुम जितनी सुन्दर हो.. उतनी ही समझदार भी हो।

ललिता- अब बातों में क्यों वक्त खराब कर रहे हो.. जल्दी से लौड़ा अन्दर डालो ना.. इसकी चूत में..

डॉली- रूको सर.. उस वक्त तो मेरी आँखें बन्द थीं और हाथ भी बँधे हुए थे.. पर अब मैं आपके लौड़े को छूकर देखना चाहती हूँ.. खुली आँखों से.. इसे चूसना चाहती हूँ.. आहह.. क्या मस्त कड़क हो रहा है।

डॉली ने लौड़े को अपने मुलायम हाथों में ले लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी।

चेतन की तो किस्मत ही खुल गई थी.. डॉली अब एकदम कामुक अंदाज में लौड़े को चूसने लगी।

चेतन- उफ़फ्फ़.. डॉली तेरे होंठों के स्पर्श से कितना मज़ा आ रहा है.. जब मुँह में इतना मज़ा आ रहा है तो तेरी चूत में कितना मज़ा आएगा.. आह.. चूस जान आज तेरी चूत का मुहूर्त है.. कर दे एकदम गीला मेरे लंड को उफ्फ.. आज तो बड़ा मज़ा आएगा..

डॉली ने लौड़े को चूस कर एकदम गीला कर दिया।

ललिता- बस भी कर अब.. क्या चूस कर ही पानी निकालोगी.. चल सीधी लेट जा.. तेरी चूत को खोलने का वक्त आ गया है।

डॉली- हाँ दीदी.. मगर सर का लौड़ा बहुत बड़ा है.. ये अन्दर कैसे जाएगा और मुझे दर्द भी होगा ना…

ललिता- अरे पगली.. मैंने तुझे क्या समझाया था.. चूत कितनी भी छोटी क्यों ना हो.. बड़े से बड़े लौड़े को खा जाती है.. पहली बार तो सभी को दर्द होता है.. लेकिन उसके बाद चुदवाने का लाइसेंस मिल जाता है.. तू कभी भी कहीं भी किसी से भी चुदवा सकती है जान.. बस थोड़ा सा दर्द सहन कर ले.. फिर देख दुनिया की सारी खुशियाँ एक तरफ और चुदाई से मिली ख़ुशी एक तरफ.. डर मत.. चेतन बहुत एक्सपर्ट खिलाड़ी है.. बड़े आराम से तेरी सील तोड़ेगा।

ये दोनों बातें कर रही थीं तभी चेतन डॉली की चूत को चूसने लगा.. उसके दाने को जीभ से टच करने लगा।

डॉली- आह आह आह.. उफ़फ्फ़ सर.. ये आपने क्या कर दिया.. आहह.. मेरी चूत में आग भड़क गई है.. ऊह.. डाल दो.. अब जो होगा देखा जाएगा उफ्फ.. आज कर दो मेरी चूत का मुहूर्त आह…

चेतन ने मौके का फायदा उठा कर ललिता के दोनों पैर मोड़ दिए और लौड़े की टोपी चूत पर सैट किया। ललिता ने ऊँगलियों से चूत की दोनों फांकें खोल दीं जिसके कारण टोपी चूत की फांकों में फँस गई।

ललिता ने जल्दी से अपने होंठ डॉली के होंठों पर रख दिए और चेतन को इशारा कर दिया।

चेतन ने कमर पर दबाव बनाकर एक झटका मारा.. लौड़ा चूत की दीवारों को चौड़ा करता हुआ अन्दर घुस गया।

अभी एक इन्च ही घुसा था कि डॉली ‘गूं-गूं’ करने लगी… वो जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी। अभी तो उसकी सील भी नहीं टूटी थी.. बस लौड़ा जाकर सील से टच हुआ था।

चेतन ने कमर को पीछे किया और ज़ोर से आगे की ओर धक्का मारा। अबकी बार आधा लौड़ा सील को तोड़ता हुआ चूत में समा गया।

डॉली की तो आँखें बाहर को निकल आईं.. उसका सर चकराने लगा।

चेतन ने देरी ना करते हुए आधा लौड़ा पीछे खींचा और पूरी रफ्तार से वापस चूत में घुसा दिया। अबकी बार लौड़ा चूत की जड़ तक घुस गया था। चेतन की गोटियाँ डॉली के चूतड़ों से टकरा गई थीं।

डॉली तो सोच भी नहीं सकती थी कि अचानक उस पर दर्द का पहाड़ टूट पड़ेगा।

अभी बेचारी पहले के दर्द से ही परेशान थी कि 5 सेकंड में ही दूसरा तगड़ा झटका उसको मिल गया।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और चीखें ऐसी कि अगर ललिता ने कस कर उसके होंठ अपने होंठों से ना भींचे होते.. तो शायद बाहर दूर-दूर तक उसकी आवाज़ पहुँच जाती।

चेतन लौड़ा जड़ तक घुसा कर अब बिल्कुल भी नहीं हिल रहा था और बस ऐसे ही पड़ा… डॉली के मम्मों को चूस रहा था।

लगभग 5 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा डॉली अब शान्त पड़ गई थी। तब ललिता बैठ गई और डॉली के सर पर हाथ घुमाने लगी।

डॉली- दीदी आहह.. अई उउउ उउउ प्लीज़.. मुझे बचा लो अई.. सर प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है आ.. निकाल लो आहह…

ललिता- अरे मेरी जान.. अब निकाल कर क्या फायदा.. तेरी सील तो टूट गई..

जितना दर्द होना था हो गया.. अब बस थोड़ी देर में तुझे मज़ा आने लगेगा और तू खुद कहेगी कि और ज़ोर से चोदो मुझे…

डॉली- आहह.. दीदी मुझे नहीं पता था इतना दर्द होगा वरना मैं कभी ‘हाँ’ नहीं करती आहह..

कुछ देर चेतन ने डॉली के मम्मों को चूसा तो डॉली को कुछ दर्द से राहत सी मिलती लगी।

चेतन- अरे रानी.. कुछ नहीं हुआ है, बस थोड़ी देर रुक जा.. उसके बाद मज़े ही मज़े हैं.. अब तुझे दर्द कम हुआ ना..

डॉली- आहह.. हाँ सर अब थोड़ा सा कम हुआ है।

चेतन अब धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा और डॉली के निप्पलों को चूसने लगा।

डॉली को दर्द तो हो रहा था.. वो सिसक रही थी मगर अब उसमें ना जाने कहाँ से हिम्मत आ गई थी.. बस वो चुपचाप चुद रही थी।

दस मिनट तक चेतन धीरे-धीरे चोदता रहा।

अब डॉली का दर्द कम हो गया था और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी.. जिसके कारण लौड़ा आसानी से आगे-पीछे हो रहा था।

डॉली- आहह.. सर दर्द हो रहा है.. उई मेरी चूत में अई.. आह्ह.. कुछ हो रहा है.. उफ़फ्फ़ अई मेरा पानी छूटने वाला है.. उई ज़ोर से आहह.. ज़ोर से क..करो आह..

मौके का फायदा उठा कर चेतन अब रफ्तार से झटके मारने लगा था।

डॉली चरम सीमा पर थी और अब उसकी चूत ने लावा उगल दिया था.. उसका बदन झटके खाने लगा था। वो काफ़ी देर तक झड़ती रही.. मगर चेतन अब भी दे दनादन शॉट पर शॉट मार रहा था।

ललिता ने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया.. वो भी एकदम गर्म हो गई थी।

चेतन- ओह्ह ओह्ह.. डॉली आहह.. क्या टाइट चूत है तेरी.. आह्ह… मज़ा आ गया.. लौड़ा बड़ी मुश्किल से आगे-पीछे हो रहा है आह्ह… डॉली आह..

लगभग 10 मिनट तक चेतन उसको चोदता रहा.. डॉली दोबारा गर्म हो गई।

उसकी चूत में अब दर्द के साथ-साथ मीठा-मीठा करंट भी दौड़ रहा था.. वो दोबारा चरम पर पहुँच गई थी और पहुँचती भी कैसे नहीं 8″ का लौड़ा ताबड़तोड़ उसकी चूत में आगे-पीछे हो रहा था।

डॉली- आह आह आह सर प्लीज़.. ज़ोर से आह्ह… मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है आआह आह्ह…

चेतन- आह.. ले मेरी दीपा रानी ओह्ह ओह्ह ओह्ह.. मेरा भी पानी निकलने वाला है.. आह्ह… आज तेरी चूत को पानी से भर दूँगा 18 सालों से ये प्यासी थी.. आज इसकी प्यास बुझा दूँगा आह्ह… आह…

चेतन के लौड़े से पानी की तेज धार निकली और डॉली की चूत की दीवारों से जा टकराई.. गर्म-गर्म वीर्य के अहसास से उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया। अब दोनों शान्त पड़ गए.. दोनों के पानी का मिलन हो गया।

 


काफ़ी देर बाद चेतन को ललिता ने ऊपर से हटाया।

ललिता- चेतन अब उठो भी क्या ऐसे ही पड़े रहोगे.. बेचारी को सांस तो लेने दो।

चेतन जब ऊपर से हट कर बगल में हुआ.. तो बिस्तर पर खून लगा हुआ था।

उसका लौड़ा भी वीर्य और खून से लथपथ था।

डॉली को कोई होश ही नहीं था.. वो तो बस आराम से लेटी हुई थी।

ललिता- लो जी.. मज़ा आपने लिया और सज़ा मुझे मिली.. चादर पर खून लग गया.. अब मुझे ही साफ करनी पड़ेगी।

खून का नाम सुनते ही डॉली चौंक गई और जल्दी से उठने की कोशिश करने लगी.. मगर उससे उठा ही नहीं गया।

उसकी चूत में तेज़ दर्द हुआ और उसकी टाँगें भी जबाव दे गई थीं।

ललिता- अरे डॉली चौकों मत.. ऐसे झटके से मत उठो.. अभी तो चूत में दर्द है और ये खून तो शगुन का निकला है मेरी जान.. आज से तुझे चुदवाने का लाइसेंस मिल गया है।

डॉली- दीदी क्या इसी लिए मुझे इतना दर्द हुआ और बहुत ज़्यादा खून निकला है?

ललिता- अरे पागल.. थोड़ा सा निकला है.. चल मेरा हाथ पकड़ कर बैठ जा और खुद देख ले।

डॉली ने जब देखा तो उसको समझ आ गया कि घबराने की कोई बात नहीं है.. ज़रा सा खून निकला है।

चेतन- तुम दोनों बातें करो.. मैं बाथरूम में जाकर लौड़े को साफ करके आता हूँ।

ललिता- अच्छा जी.. चुदाई ख़तम तो मुँह फेर लिया.. अकेले ही कहाँ जा रहे हो मेरे राजा.. डॉली की चूत कौन साफ करेगा.. चलो इसको भी उठाओ और साथ लेकर जाओ।

डॉली- नहीं दीदी.. मैं खुद से चली जाऊँगी.. सर को जाने दो।

दोस्तों चुदाई का खुमार उतारते ही डॉली को शर्म आने लगी थी.. वो पाँव को सिकोड़ कर बैठी थी।

ललिता- ये देखो चूत में 8″ की खाई खुदवा कर अब इसे शर्म आ रही है.. तब तो बड़ा उछल रही थी.. आह्ह… ज़ोर से करो सर.. तब शर्म नहीं आई?

डॉली ने अपने हाथों से अपना चेहरा छुपा लिया।

डॉली- दीदी प्लीज़.. वो सब बातें मत दोहराओ.. मुझे तो सोच कर ही शर्म आ रही है.. छी: ये मैंने क्यों किया? ये सब वो भी सर के साथ…

चेतन- अनु लगता है इसकी शर्म उतारनी ही पड़ेगी। तू जा कुछ खाने का इंतजाम कर.. तब तक हम फ्रेश हो जाते हैं और हाँ.. ऐसे ही नंगी जाना।

ललिता गाण्ड को मटकाती हुई वहाँ से चली गई।

चेतन बिना कुछ बोले डॉली के पास गया और उसको बांहों में उठा कर बाथरूम में ले गया..

वहाँ उसको कमोड पर बैठा कर बाथटब में गर्म पानी डाला और उसी गर्म पानी से हल्के-हल्के हाथ से डॉली की चूत पर लगा खून साफ किया।

डॉली- आह्ह… सर मैं कर लूँगी.. आह्ह… आप रहने दो.. उई दुखता है…

चेतन- अरे जान.. अब ये सर को गोली मारो.. अनु मुझे राजा कहती है.. तुम भी ऐसे ही कहो और अब कैसी शर्म.. मुझे करने दो.. थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा।

इसके बाद डॉली कुछ ना बोली और बस चेतन को चूत साफ करते हुए देखती रही।

फिर ना जाने उसको क्या समझ में आया कि अपने हाथ पर पानी डाल कर वो चेतन के लौड़े को साफ करने लगी।

उसका अंदाज इतना प्यारा और सेक्सी था कि चेतन के सोए लंड में जान आ गई और वो फिर से अकड़ने लगा।

डॉली- ऊ माँ.. ये तो फिर से खड़ा हो गया…

चेतन- सोए हुए नाग को जगाओगी तो फुंफकार ही मारेगा ना…

डॉली- ओह्ह.. सर आप भी ना…

चेतन- अरे अभी बताया ना.. राजा बोलो.. जानू बोलो यार…

डॉली- ओके ओके बाबा.. अब से राजा नहीं.. राजा जी कहूँगी.. मगर अब इसका क्या करना है.. ये तो तनता ही जा रहा है।

चेतन- यार भूखे को सिर्फ़ एक निवाला देकर रुक जाओगी तो उसकी तो भूख और बढ़ जाएगी ना.. और वो एकदम बेसब्र हो जाएगा.. बस इसी तरह मेरे प्यासे लौड़े को एक बार कच्ची चूत देकर तुम रुक गईं.. अब ये तो फुंफकार ही मारेगा ना…

डॉली- ना बाबा ना.. अब मैं नहीं दूँगी.. पहले ही बहुत दर्द से लिया मैंने.. अब तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

चेतन- अरे मेरी जान.. दर्द पहली बार में ही होता है और तुम तो 18 साल की हो यार.. इतनी उम्र की और लड़कियाँ भी चुद जाती हैं.. उनको कितना दर्द होता होगा.. जरा सोच कर देख.. तू तो बच्चा भी पैदा कर सकती है यार.. पहले जमाने में तेरी उम्र में 2 बच्चे हो जाते थे।

डॉली- सच्ची ओह्ह.. माँ.. पहले कितनी जल्दी शादी कर देते थे ना.. बाल-विवाह.. अच्छा हुआ अब ऐसा नहीं होता…

चेतन- ये सब बातें जाने दे.. चल टब में बैठ जा.. गर्म पानी से चूत को अच्छे से सेंक ले.. ये सब बातें फ़ुर्सत में करेंगे.. मैं बाहर जाकर ललिता को देखता हूँ.. इतनी देर से वो क्या कर रही है।

हाय दोस्तो.. क्यों मज़ा आ रहा है ना.. डॉली की चुदाई में..

अरे नहीं नहीं कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई मैं ऐसे ही आपसे बात करने आ गई..

प्लीज़ दोस्तो, कहानी का मज़ा लो…

पर मुझे गंदे मैसेज भेजना बन्द करो.. थैंक्स…

आओ दोबारा कहानी की तरफ ले चलती हूँ:

चेतन वहाँ से निकल कर सीधा रसोई में गया।

ललिता ट्रे में कुछ चिप्स और बिस्कुट रख रही थी..

चाय भी रेडी थी।

चेतन चुपके से उसके पीछे जाकर उससे चिपक गया, लौड़ा ठीक गाण्ड के छेद पर टिका हुआ था और आगे से चेतन उसके मम्मों को दबाने लगा।

ललिता- ओह्ह.. क्या करते आप भी.. अभी सब नीचे गिर जाता.. छोड़ो भी।

चेतन- जान आज तो बड़ी मस्त लग रही हो.. मन करता है ऐसे खड़े-खड़े ही तुम्हारी गाण्ड मार लूँ…

ललिता- बस बस.. मुझे ज़्यादा उल्लू मत बनाओ.. तुम्हें डॉली जैसी मस्त लड़की मिल गई.. अब कहाँ मेरे बारे में सोचोगे।

चेतन- अरे नहीं अनु.. ऐसा कुछ नहीं है तुम तो मेरी जान हो.. डॉली तो आज आई है.. मैं तो तुम्हें कब से चाहता हूँ और जिंदगी भर चाहता रहूँगा.. ऐसी किसी भी लड़की के आ जाने से मेरे प्यार में कोई फ़र्क नहीं आएगा।

ललिता- अच्छा अच्छा.. ज़्यादा दु:खी मत हो.. मैंने ऐसे ही बोल दिया था.. मैं कहाँ भाग कर जा रही हूँ.. जब चाहे चोद लेना.. अभी तो उस कमसिन कली के मज़े लो।

चेतन- कहाँ यार.. वो तो अब साफ मना कर रही है।

ललिता- अरे मेरे भोले राजा.. जब चूत को एक बार लंड की लत लग जाती है ना.. तो कुछ भी हो जाए उसको लौड़ा लिए बिना चैन नहीं मिलता.. वो शर्मा रही है.. बस देखो अभी कैसे उसको तैयार करती हूँ.. तुम तो आज बस उसको चोद-चोद कर लंड की आदी बना दो ताकि मैं कभी गाँव जाऊँ तो तुम्हें तड़पना ना पड़े.. अपने आप वो चुदवाने चली आए.. समझे…

चेतन- हाँ ये तो ठीक है मगर अभी कहाँ वो चुदवाएगी.. उसका जाने का वक्त भी हो गया है।

ललिता- मेरे पास एक तरकीब है.. चलो अन्दर जाकर बताती हूँ।

दोनों वहाँ से वापस कमरे में आ जाते हैं, तब तक डॉली भी अच्छे से चूत की सिकाई करके नहा कर रूम में आ जाती है।

डॉली वैसे ही नंगी बैठी हुई अपनी चूत को देख रही थी।

ललिता- क्या बात है बहना.. चूत को बड़ी गौर से देख रही हो.. क्या इरादा है?

डॉली- कुछ नहीं.. बस देख रही हूँ कि कैसे सूज कर लाल हो गई है.. दर्द अब भी हो रहा है।

ललिता- एक बार और चुदवा ले.. सारा दर्द भाग जाएगा और मज़ा भी मिल जाएगा।

डॉली- नहीं दीदी.. आज के लिए इतना काफ़ी है.. अब मुझे जाना होगा मम्मी इन्तजार कर रही होंगी।

ललिता- डॉली तेरी मम्मी को पता है ना.. तू कहाँ पढ़ने आती है।

डॉली- हाँ मैंने बताया है और खास आपके बारे में बताया है कि कैसे आप मेरा ख्याल रखती हो।

ललिता- वेरी गुड.. अब चल जल्दी से अपने घर का फ़ोन नम्बर दे।

डॉली- क्यों दीदी.. आप क्या करोगी?

ललिता- अरे पगली ऐसी हालत में घर जाएगी तो तेरी माँ को शक हो जाएगा.. तू एक-दो घंटा यहाँ रुक.. मेरे पास दर्द की दवा है.. तुझे दूँगी… तू जब एकदम बराबर सही से चलने लगेगी.. तब जाना।

डॉली- वो तो ठीक है.. पर फ़ोन नम्बर से क्या होगा?

ललिता- तू सवाल बहुत करती है.. नम्बर दे, अभी पता चल जाएगा।

डॉली से नम्बर लेकर ललिता उसके घर फोन करती है।

वो कहते हैं ना देने वाला जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है।

ललिता- हैलो मैं ललिता बोल रही हूँ, वो आंटी क्या है ना कि मेरे पति किसी काम से बाहर गए हैं, मैं घर पर अकेली हूँ, मेरी तबीयत भी ठीक नहीं है.. आप को ऐतराज ना हो तो डॉली थोड़ा बाद में आ जाएगी।

डॉली की मम्मी- अरे नहीं नहीं.. ललिता बेटी… मुझे क्या दिक्कत होगी… बल्कि तुमने फ़ोन करके मेरी बहुत बड़ी परेशानी ख़त्म कर दी.. दरअसल मेरे भाई की तबीयत खराब है.. मुझे और डॉली के पापा को गाँव जाना था, मगर डॉली के कारण मुश्किल हो रही थी। इसके इम्तिहान करीब हैं इसको साथ नहीं ले जा सकते.. और यहाँ अकेली किसी के पास छोड़ नहीं सकते.. अब मेरी दिक्कत ख़तम हो गई.. तुमको परेशानी ना हो तो प्लीज़ एक दिन इसे अपने पास रख लो.. बड़ी मेहरबानी होगी तुम्हारी.. कल शाम तक हम आ जाएँगे।

ललिता- अरे आंटी आप ये कैसी बात कर रही हो… डॉली मेरी छोटी बहन जैसी है, आप चिंता मत करो.. मैं संभाल लूँगी।

 


डॉली की मम्मी- अच्छा सुनो.. सुबह इसे जल्दी उठा देना स्कूल के लिए तैयार होने में इसे बहुत वक्त लगता है और इसका बैग और ड्रेस तो यहीं है प्लीज़ तुम सुबह इसके साथ आ जाना मैं घर की चाबी गमले में रख दूँगी डॉली को पता है कहाँ है गमला…

ललिता- ओके आंटी.. जरूर.. आप बेफिकर रहो।

डॉली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आख़िर क्या हो रहा है।

उसने जब अपनी मम्मी से बात की तब उसको समझ आया और उसने भी ‘हाँ कह दी- आप बेफिकर होकर जाओ दीदी बहुत अच्छी हैं.. मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।

चेतन को अभी भी कुछ समझ नहीं आया था.. वो बस दोनों को देख रहा था।

फ़ोन रखने के बाद चेतन ने ललिता से पूछा- क्या हुआ?

ललिता- मेरे राजा आपकी किस्मत बहुत अच्छी है.. मैंने तो सोचा डॉली को एक घंटा और रोक लूँ.. ताकि आपको एक बार और इसकी मचलती जवानी को भोगने का मौका मिल जाए.. मगर भगवान ने तो इसे कल शाम तक यहीं रोक दिया अब तो सारी रात आप इसके साथ रासलीला कर सकते हो।

डॉली- छी: .. दीदी आप भी ना कितनी गंदी बातें करती हो और आपने झूट क्यों बोला कि दवा दोगी मुझे.. आपका इरादा तो कुछ और ही है।

ललिता- अरे नहीं मैंने कोई झूट नहीं बोला तुमसे.. दवा तो अब भी दूँगी.. पहले नास्ता तो कर लो और हाँ चेतन के साथ चुदाई तो दवा लेने के बाद भी कर सकती हो यार.. मौका मिला है तो इस पल को अच्छे से एंजाय करो ना.. चल अब नास्ता कर ले बाकी बातें बाद में होती रहेंगी।

तीनों नंगे ही बैठे नाश्ता करने लगे.. उनको देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कोई आदिवासी कबीले के लोग हैं जिनको कपड़े क्या होते हैं.. पता ही नहीं है.. उनमें कोई शर्म नहीं थी।

नाश्ता करते हुए डॉली ने ललिता से कहा।

डॉली- दीदी एक बात अभी तक समझ नहीं आई.. सर आपके पति हैं फिर भी आपको कोई ऐतराज नहीं कि ये मेरे साथ सेक्स कर रहे हैं बल्कि आप खुद इनसे मुझे चुदवा रही थीं.. ऐसा क्यों?

ललिता- अरे डॉली.. मैं उन औरतों जैसी नहीं हूँ जो पति को पल्लू से बाँध कर रखती हैं। तुमको नहीं पता उनके पति उनसे छुपकर कहीं ना कहीं मुँह काला करते हैं और उनको प्यार भी दिखावे का करते हैं मगर मेरा चेतन मुझ पर जान छिड़कता है.. इसी लिए मुझे भी अपने पति का ख्याल है.. लौड़े का तो कोई नुकसान होता नहीं है.. कितनी भी चूत मार लो.. तो मुझे क्या दिक्कत.. और इसमें मेरा एक और फायदा है.. कभी अगर मेरे मन में ना हो तो पति को नाराज़ नहीं करूँगी.. सीधा तुम्हें बुला लूँगी.. तुम चुदवा लेना इससे चेतन भी खुश.. मैं भी खुश।

डॉली- और मेरी ख़ुशी का क्या?

चेतन- अरे मेरी जान.. तेरी ख़ुशी के लिए ये लौड़ा है ना.. तू जब चाहे इसको अपनी चूत में डाल लेना हा हा हा हा…

चेतन के साथ ललिता भी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी।

डॉली- उहह सबको अपनी पड़ी है.. जाओ नहीं चुदवाती में.. अब क्या कर लोगे तुम.. दीदी आप बहुत गंदी हो अपने मतलब के लिए मुझे इस्तेमाल किया आपने।

ललिता- अरे रे रे.. तू तो बुरा मान गई.. कसम से मैं तो मजाक कर रही थी यार.. तुझे सब अच्छे से समझ आ जाए और तू भी मज़ा ले सके.. बस इसलिए मैंने ये किया…

डॉली- हा हा हा हा निकल गई ना हवा.. जब मुझे छेड़ रहे थे दोनों.. तब बड़ा मज़ा आ रहा था.. मैंने थोड़ा सा गुस्सा होने का नाटक किया तो आप डर गईं।

चेतन- ले अनु तुझे नहले पे देल्हा मार दिया इसने…

ललिता- हाँ वाकयी में एक बार तो मैं डर गई थी।

डॉली- नहीं दीदी.. आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है.. आपने जो किया अच्छा किया.. अब हम दोनों राजा जी से चुदाएंगे.. बड़ा मज़ा आएगा…

ललिता- ओये होये राजा जी.. क्या बात है अब तक तो सर बोल रही थी.. तेरी चूत की सील तोड़ते ही सीधे राजा जी.. गुड.. आगे खूब तरक्की करोगी तुम…

चेतन- डॉली ऐसी सेक्सी बातें करोगी तो मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा देख मेरे लौड़े में तनाव आने लगा है.. अब नास्ता भी हो गया.. आजा मेरी जान तेरी चूत का स्वाद चखा दे मेरे लौड़े को…

डॉली- सब्र करो पहले मुझे दवा तो लेने दो वरना फिर से मेरी जान निकल जाएगी।

ललिता- अरे हाँ.. पहले दवा ले ले उसके बाद चुदाई का मज़ा लेना.. चुदाई करवा के आराम से सो जाना…

चेतन- अनु तुम भी कहाँ सोने की बात कर रही हो.. ऐसी कमसिन कली साथ होगी तो नींद किसे आएगी.. आज तो सारी रात बस इसकी चूत में लौड़ा डालकर पड़ा रहूँगा।

ललिता- अच्छा बच्चू.. और मेरा क्या होगा.. कब से मेरी चूत में खुजली हो रही है…

डॉली- दीदी मेरे बाद आप चुदवाना.. प्लीज़ मुझे आपकी चुदाई देखनी है…

ललिता- ठीक है देख लेना.. अच्छा रुक मैं तुझे दवा देती हूँ। उसके बाद तुम दोनों मज़े करना.. मुझे बाजार जाना है एक जरूरी काम है।

ललिता ने एक गोली डॉली को दे दी और जाने लगी।

डॉली- नहीं दीदी आप यहीं रहो ना प्लीज़…

ललिता- अरे पगली बस अभी जाकर आती हूँ कुछ समान लाना है.. अभी लेकर आ जाती हूँ और कुछ खास काम भी है.. आकर तुझे बताऊँगी।

डॉली बुझे मन से ललिता को जाने देती है। ललिता के जाने के बाद चेतन उसके पास बैठ जाता है और उसके मम्मों को सहलाने लगता है।

चेतन- क्या हुआ रानी.. ललिता के जाने से खुश नहीं हो क्या.. मैं हूँ ना.. तुम्हारा ख्याल रखने को…

डॉली- नहीं सर.. ओह्ह.. सॉरी.. राजा जी ऐसी बात नहीं है मैं खुद यही चाहती हूँ कि दीदी कहीं चली जाए और मैं आपसे खुलकर बात कर सकूँ.. पर दीदी के बारे में सोच कर दुखी हूँ.. कोई तो बात है जिसके कारण वो अपने पति को किसी अनजान से चुदवाते देख रही हैं कहीं उनकी कोई मजबूरी तो नहीं?

चेतन- ओ बेबी कूल.. ऐसा कुछ नहीं है.. हम दोनों में कोई ऐसी बात नहीं है तुम गलत समझ रही हो.. वो किसी मजबूरी में नहीं बल्कि ख़ुशी से ये सब कर रही है।

डॉली के चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए और वो चेतन से लिपट गई।

चेतन- ये हुई ना बात अब चल जब तक ललिता आए हम एक बार और खुलकर चुदाई का मज़ा ले लेते हैं.. कसम से तेरी चूत बहुत दमदार है साली लौड़े को ऐसे जकड़ लेती है जैसे कभी छोड़ेगी ही नहीं।

डॉली- आप भी दीदी की तरह बेशर्म हो।

चेतन- अरे रानी.. अगर चुदाई का मज़ा लेना है ना.. तो जितना हो सके, गंदी बातें करो.. बेशर्मी में जो मज़ा है.. वो और कहीं नहीं.. अगर यकीन नहीं आता तो आजमा लो और देखो कितना मज़ा आएगा।

डॉली- मैंने उस स्टोरी में ये सब पढ़ा था.. चलो मैं ट्राइ करती हूँ।

चेतन- हाँ ठीक है.. मैं भी तुम्हारा साथ दूँगा।

डॉली- अरे मेरे चोदूमल आ जा देख तेरे इन्तजार में कैसे चूत टपक रही है.. जल्दी से अपने लौड़े को घुसा दे और मेरी चूत को ठंडा कर दे हा हा हा हा हा मुझसे नहीं होगा कुछ भी हा हा हा।

चेतन- अरे हँस मत.. अच्छा बोल रही थी तू.. प्लीज़ जान बोलो ना.. मज़ा आएगा।

डॉली- ओके ओके.. आप पहले मेरे इस डायलाग का तो जबाव दो।

चेतन- अरे जानेमन.. अभी देख कैसे मैं अपने लंबे लौड़े से तेरी चूत की गर्मी निकालता हूँ।

डॉली फिर ज़ोर से हँसने लगी इस बार चेतन भी उसके साथ हँसने लगा और हँसते-हँसते उसने डॉली को बांहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा।

डॉली भी उसका साथ देने लगी।

अब दोनों हँसी-मजाक से दूर काम की दुनिया में खो गए थे।

चेतन उसके निप्पलों को चूस रहा था तो वो अपने हाथ से उसके लौड़े को दबा रही थी।

डॉली- आह्ह… उफ्फ.. आपका ये अंदाज बहुत अच्छा लगता है.. उई आह्ह… ऐसे ही चूसो.. मज़ा आ रहा है आह्ह… मुझे आपका लौड़ा चूसना है.. पता नहीं क्यों मेरे मुँह में पानी आ रहा है और मन कर रहा है लौड़ा चूसने को…

चेतन- मेरी जान मुझे भी तो अपनी कमसिन चूत का मज़ा दो.. चलो तुम मेरे ऊपर आ जाओ.. अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दो और तुम आराम से लौड़ा चूसो।

दोनों 69 की अवस्था में आ गए और मज़े से चुसाई करने लगे।

डॉली की सूजी हुई चूत को चेतन की जीभ से बड़ा आराम मिल रहा था।

वो एकदम गर्म हो गई थी और टपकने लगी थी.. इधर चेतन पर भी चुदाई का खुमार चढ़ने लगा था.. पानी की बूँदें तो उसके लौड़े से भी आ रही थीं क्योंकि डॉली होंठों को भींच कर मुँह को ज़ोर-ज़ोर से हिला रही थी जिससे चेतन को बड़ा मज़ा आ रहा था।

दस मिनट तक ये खेल चलता रहा। चेतन ने चूत को चाटना बन्द किया और डॉली को हटने को कहा।

डॉली- उफ्फ.. कितना मज़ा आ रहा था क्या हुआ हटाया क्यों.. आपके लौड़े में क्या मज़ा है.. सच्ची.. दिल करता है बस चूसती रहूँ।

चेतन- अरे चूस लेना मेरी जान.. पहले इसको चूत का मज़ा लेने दे.. साली तेरी टाइट चूत को पहले चोद-चोद कर ढीला कर दूँ.. उसके बाद जितना मर्ज़ी लौड़ा चूसना.. चल अब तू घोड़ी बन जा.. तुझे नए तरीके से चुदना सिखाता हूँ।

डॉली- हाँ मज़ा आएगा.. मैंने डीवीडी में देखा था.. चलो मैं घोड़ी बन जाती हूँ.. पर आराम से डालना.. मुझे मज़ा लेना है.. प्लीज़ दर्द मत देना।

 


चेतन- अरे मेरी जान तूने लौड़े को चूस कर इतना चिकना कर दिया है कि तेरी चूत में फिसलता हुआ सीधा अन्दर जाएगा।

डॉली घुटनों के बल घोड़ी बन जाती है मगर अनुभव ना होने क कारण कमर को काफ़ी उँचा कर लेती है।

चेतन- अरे जान तू घोड़ी की जगह ऊँठ बन गई.. कमर को नीचे कर.. ताकि तेरी चूत में लौड़ा आराम से जाए…

चेतन ने उसको ठीक से बताया तब वो सही आसन में आई।

चेतन ने लौड़े को चूत के मुँह पर रख कर धीरे से धक्का मारा.. आधा लौड़ा चूत में ‘पक्क’ से घुस गया।

डॉली- आआह्ह… आराम से डालो ना.. दुःखता है आह्ह…

चेतन- मेरी जान जब तक तू दो-तीन बार मुझसे चुदवा नहीं लेगी.. ये दर्द होता रहेगा.. अब इससे धीरे मुझसे नहीं होगा, चल थोड़ा बर्दाश्त कर ले.. मैं पूरा डालता हूँ.. उसके बाद आराम से झटके मारूँगा।

चेतन ने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और धीरे-धीरे झटके मारने लगा। लगभग 5 मिनट बाद डॉली को दर्द कम हुआ और उसको मज़ा आने लगा।

डॉली- आ.. आह उहह.. राजा जी आह्ह… अब मज़ा आ रहा है.. पूरा लौड़ा बाहर निकाल कर एक साथ अन्दर डालो आह्ह… मेरी चूत में बड़ी खुजली हो रही है।

चेतन- अभी ले मेरी रानी तेरी चूत बहुत टाइट है साली.. ऐसी नुकीली चूत चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है.. ले ओह्ह ओह्ह और ले आह्ह… मज़ा आ गया मेरा लौड़ा आह्ह… साली चूत को टाइट मत कर आह्ह… लौड़ा आगे-पीछे करने में दुःखता है आह्ह…

डॉली- आआह्ह… आईईइ उहह.. ससस्स चोदो आह्ह… अई कककक ज़ोर-ज़ोर से आह्ह… चोदो मज़ा आ रहा है मेरे लौड़ूमल आह्ह… मज़ा आ रहा है।

चेतन पर अब जुनून सवार हो गया वो सटासट लौड़ा पेलने लगा। अब उसकी रफ्तार बढ़ गई थी.. डॉली भी गाण्ड को पीछे झटके दे कर चुद रही थी। कोई 15 मिनट बाद डॉली का रस निकल गया चेतन भी झड़ने के करीब था।

आख़िर डॉली की गर्म चूत में उसका लौड़ा ज़्यादा देर तक टिका नहीं रह सका उसने भी दम तोड़ दिया.. चूत का कोना-कोना पानी से भर गया।

पानी निकाल गया मगर चेतन ने लौड़ा अब भी बाहर नहीं निकाला और डॉली की गाण्ड सहलाने लगा।

डॉली- उफ़फ्फ़ राजा जी.. आप तो बड़े मस्त चोदते हो.. मेरी टाँगें दु:खने लगी हैं.. अब तो लौड़ा निकाल लो.. अब क्या इरादा है।

चेतन- जान तेरी गाण्ड भी बहुत मस्त है… सोच रहा हूँ अबकी बार तेरी गाण्ड ही मारूँ.. साली क्या मक्खन जैसी चिकनी गाण्ड है.. बड़ा मज़ा आएगा इसे मारने में।

डॉली- अभी तो लौड़ा बाहर निकालो बाद की बाद में देख लेना और गाण्ड कैसे मारोगे.. इसमें कैसे लौड़ा जाएगा? चेतन एक तरफ सीधा लेट गया.. डॉली उसके सीने पर सर रख कर उसके लौड़े को देखने लगी.. जो अब ढीला हो गया था।

चेतन- मेरी जान जैसे चूत में जाता है उसी तरह गाण्ड में भी चला जाएगा.. तू बस देखती जा मैं कैसे-कैसे तुझे चोदता हूँ।

डॉली- हाँ मेरे राजा जी.. अब तो मैं आप की हूँ जैसे चाहो चोद लेना.. सच में अगर पहले पता होता कि चुदाई में ऐसा मज़ा मिलता है.. तो कब की अपनी चूत चुदवा लेती मैं.. अच्छा एक बात पूछू?

चेतन- हाँ रानी पूछो।

डॉली- ये लौड़ा अभी कितना नर्म हो गया है और छोटा भी.. मगर चोदने के वक्त कैसे लंबा और कड़क हो जाता है.. ये बात मेरी समझ में नहीं आई।

चेतन- अरे ये तो साधारण सी बात है देखो ये इसकी असली अवस्था है.. जब आदमी के दिमाग़ में कोई गंदी बात आती है या वो कुछ ऐसा देख ले जिससे उसकी उत्तेजना जाग जाए.. तब दिमाग़ इसे आदेश देता है और इसकी नसें अकड़ने लगती हैं या यूँ कहो.. लंड में तनाव आने लगता है।

डॉली- अच्छा तो कुछ गंदा सोचने या देखने से ही ये अकड़ता है क्या?

चेतन- नहीं.. इसके अलावा भी बहुत से कारण हैं.. जैसे किसी ने इसे सहला दिया हो या किसी लड़की के साथ जाँघ से जाँघ मिला कर बैठने से भी इसमें तनाव आ जाता है.. कई बार तो आदमी को पता भी नहीं चलता कि ये क्यों खड़ा है.. बस इसके संपर्क में कोई भी लड़की या औरत आ जाए तो इसका तनाव शुरू हो जाता है।

डॉली- अच्छा अगर कोई भी पास ना हो.. दिमाग़ में कोई गंदी बात भी ना हो, तब तो ये सोया ही रहता है ना…

चेतन- नहीं.. एक और बड़ा कारण है जिसकी वजह से ये खड़ा हो जाता है। देखो हफ्ते या दस दिन में अगर वीर्य बाहर नहीं निकाला जाता तो रात को सोते हुए ये खड़ा हो जाता है और वीर्य बाहर फेंक देता है.. उसे नाइट-फाल या स्वप्नदोष कहते हैं।

डॉली- बापरे ये तो बहुत शैतान है.. इसको तो बस किसी ना किसी बहाने खड़ा होना है.. वैसे एक बात है.. इन दो दिनों में मुझे बहुत ज्ञान की बातें पता चल गई हैं थैंक्स सर.. जो अपने मेरी इतनी मदद की।

चेतन- अरे मैंने कहा ना सर नहीं बोलो राजा जी अच्छा था..

डॉली- नहीं.. मुझे कभी-कभी सर बोलने दो.. वरना स्कूल में कहीं मुँह से राजा जी निकल गया तो मामला बिगड़ जाएगा।

चेतन- हाँ बात तो सही है।

डॉली- अच्छा एक बात और बताओ.. ये एक दिन तो में यहीं हूँ.. उसके बाद अगर मेरी चुदने की इच्छा हुई तो मैं क्या करूँगी?

चेतन- अरे मेरी रानी में हूँ ना.. जब चाहो आ जाना.. मेरा लौड़ा हमेशा तेरी चूत के लिए खड़ा रहेगा।

डॉली- और दीदी का क्या होगा? मुझे तो अब भी बहुत अजीब लग रहा है कि वो कैसे अपने पति को किसी अनजान लड़की से चुदाई की इजाज़त दे रही है।

चेतन- अरे उसकी चिंता तुम मत करो वो तो रोज रात को चुदवाती है.. तुम शाम को आ जाना.. मैं तेरी चूत को ठंडा कर दूँगा.. वैसे ललिता के ऐसा करने में उसका कोई ना कोई स्वार्थ तो जरूर है और देख लेना वक़्त आने पर वो जरूर बता देगी.. अब तू ज़्यादा सोच मत बस मजे ले।

डॉली बड़े प्यार से चेतन के लौड़े को सहला रही थी और बातें कर रही थी। करीब आधा घंटा दोनों वैसे ही लिपटे बातें करते रहे।

डॉली- सर देखो.. इसमें तनाव आने लगा है।

चेतन- तो इसमें देखने की क्या बात है.. तेरे मुलायम हाथ कब से इसे सहला रहे हैं तनाव तो आएगा ही.. अरे मैं तो जवान हूँ अगर तू ऐसे किसी बूढ़े का लौड़ा सहलाती ना.. तो उसमें भी जान आ जाती।

डॉली- क्यों बूढ़े आदमी का खड़ा नहीं होता क्या?

चेतन- होता तो है मगर बहुत ज़्यादा उत्तेजित होने पर.. वरना नहीं और वैसे भी बूढ़े लौड़े में कसाव कहाँ होता है.. अगर ग़लती से खड़ा भी हो जाए तो क्या कर लेगा.. चुदाई करना उनके बस में नहीं.. इसके लिए घुटनों में जान होनी चाहिए.. कोई बूढ़ा अगर झटके मारेगा तो साले के घुटने में दर्द हो जाएगा या कमर अकड़ जाएगी हा हा हा हा…

दोनों खिलखिला कर हँसने लगे.. चेतन का लौड़ा अब अपने विकराल रूप में आ गया था, जिसे देख कर डॉली के मुँह में पानी आने लगा और उसने झट से लौड़े को मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।

तभी ललिता वापस आ गई।

ललिता- वाह क्या बात है.. मुझे गए हुए कितना वक्त हो गया.. मैंने सोचा अब तक तो तुम दोनों मज़े से चुदाई करके थक गए होगे.. मगर यहाँ तो अभी तक लौड़ा चूसा जा रहा है.. इतनी देर क्या भजन गा रहे थे।

चेतन- अरे आओ आओ.. मेरी जान.. तुम वहीं खड़ी बोलती रहोगी क्या.. यहाँ बिस्तर पर तो आओ।

ललिता- क्या चेतन.. आप भी ना.. अब इसे लौड़ा चुसा रहे हो.. चोदोगे कब?

इतने वक्त तक क्या कर रहे थे.. कम से कम एक बार तो आपको चोद ही लेना चाहिए था ना…

डॉली ने लौड़ा मुँह से बाहर निकाला और थोड़े गुस्से में बोली।

डॉली- क्या दीदी आप भी बिना बात सुने.. बोले जा रही हो.. सर ने मुझे घोड़ी बना कर चोदा है.. ये तो सर का लौड़ा दोबारा खड़ा हो गया.. इसलिए बस चूस कर मज़ा ले रही थी कि अपने सब चौपट कर दिया।

ललिता- ओह्ह.. तो ये बात है.. घोड़ी बन कर चुद चुकी हो.. हाँ और अब भी तेरी प्यास मिटी नहीं कि दोबारा लौड़े को चूस कर तैयार कर रही हो.. क्या बात है लगता है दवा असर कर गई.. तेरा दर्द ख़तम हो गया क्या?

डॉली- हाँ दीदी आज ही तो चुदना सीखा है.. इतनी जल्दी थोड़े ही मेरी प्यास मिटेगी.. अब दर्द काफ़ी कम है पहली बार तो दर्द हुआ दूसरी बार थोड़ा मज़ा आया.. अबकी बार तो और ज़्यादा मज़ा आएगा ना..

चेतन- हाँ मेरी छोटी रानी… तू सही बोली.. चुदाई का मज़ा हर बार बढ़ कर ही आता है।

ललिता- बस भी करो.. तुम दोनों चुदाई का मज़ा लेते रहोगे तो क्या मैं बेलन घुसाऊँगी अपनी चूत में… चेतन एक बार तो मेरी भी चूत मार लो यार.. उसके बाद तुम्हारे लौड़े में दम नहीं रहेगा।

चेतन- अरे मेरी जान.. एक बार क्यों चल दो बार तेरी मारूँगा.. उसके बाद इसको चोदूँगा और तुझे क्या पता मेरे लौड़े में कितना दम है.. आज तो पूरी रात ये ऐसे ही खड़ा रहेगा.. चल आजा तेरी चूत की खुजली भी मिटा देता हूँ।

डॉली- हाँ दीदी.. मुझे भी आपकी चुदाई देखनी है.. अब तो आप आ ही जाओ बस।

ललिता- अरे अभी नहीं रात को चुदवाऊँगी यार.. अभी खाना भी बनाना है…

डॉली- दीदी खाना बाद में बना लेना ना.. प्लीज़ आ भी जाओ।

चेतन- हाँ अनु.. अब तो आ जाओ.. देखो मेरा लौड़ा भी कैसे तन कर फुंफकार मार रहा है।

 
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