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साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई compleet



डॉली- आह्ह.. उफ़फ्फ़ आपका लौड़ा मोटा है.. मज़ा आ गया.. ज़ोर से एक साथ पूरा घुसा दो ना आह्ह..

सुधीर ने लौड़ा पीछे किया और ज़ोर से एक झटका मारा.. पूरा लौड़ा जड़ तक चूत में समा गया।

डॉली- ओह्ह.. उफ़फ्फ़ चोदो आह्ह.. अब ज..ज़ोर से चोदो आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. मेरी चूत की सारी खुजली मिटा दो.. आह्ह.. अपनी भी ख्वाहिस पूरी कर लो आह्ह.. चोदो..

सुधीर जोश में आ गया और रफ्तार से चोदने लगा.. एक कमसिन कली को चोदने के अहसास से ही उसकी नसों में उफान आ रहा था.. वो उम्र से ज़्यादा जोश दिखा रहा था.. लेकिन डॉली जैसी यौवना के आगे बुढ़ापा कहाँ तक रेस लगाता.. कुछ देर बाद वो थक गया और उसकी रफ्तार टूटने लगी।

डॉली- आह्ह.. आह क्या हुआ.. आह्ह.. रफ्तार से चोदो ना.. आह्ह.. प्लीज़ मज़ा आ रहा था.. आह्ह…

सुधीर चोदने के साथ-साथ उसके मम्मों को भी चूस रहा था। लौड़े की रफ्तार के साथ उसके मुँह की रफ्तार भी कम हो गई।

वो अब बिल्कुल झटके नहीं मार रहा था।

बस लौड़ा जड़ तक घुसा कर डॉली पर लेट गया।

डॉली- हटो मेरे ऊपर से.. उफ़फ्फ़ सारा मज़ा खराब कर दिया.. छोड़ो ना आ प्लीज़ छोड़ो…

सुधीर ने लौड़ा चूत से निकाल लिया और बिस्तर पर ढेर हो गया।

सुधीर- आह्ह.. मेरी हिम्मत नहीं है अब… आजा तू ऊपर आजा.. कूद मेरे लौड़े पे आ..

डॉली ने बातों में समय खराब नहीं किया और झट से सुधीर के लौड़े पर बैठ गई और रफ्तार से कूदने लगी।

वो बहुत ज़्यादा उतेज़ित हो गई थी।

अब उसके बर्दाश्त के बाहर हो गया था.. और उसने इस अदा के साथ चुदना शुरू किया कि सुधीर ज़्यादा देर टिक ना सका और चरम पर पहुँच गया।

सुधीर- आह उहह.. ज़ोर से कूद आह्ह.. मेरा पानी आने वाला है.. आह…

डॉली- आहइ आहइ उईईइ कककक आह मेरा भी आह.. आने वाला है अयेए ईई…

दो मिनट बाद डॉली की चूत ने पानी का फव्वारा खोल दिया.. उसके साथ ही सुधीर भी आँखें बन्द करके झड़ने लगा.. मगर उसके लौड़े से बहुत कम पानी बाहर निकला और उसमें कोई रफ्तार भी नहीं थी।

डॉली- आ आह्ह.. मेरा हो गया उईइ आह्ह.. तुम भी जल्दी से पानी निकालो आह्ह..

सुधीर- उफ़फ्फ़ आह्ह.. मेरा निकल गया आह्ह.. अब उतर जाओ आह्ह..

डॉली नीचे उतर कर उसके लौड़े को देखने लगी जो बिजली की तेज़ी से छोटा होने लगा था और कुछ ही देर में वो सो गया।

डॉली- आह मज़ा आ गया.. लेकिन आपका पानी बहुत कम निकला.. मुझे पता भी नहीं चला.. कब निकल गया।

सुधीर- अरे तू क्या जाने.. इस उम्र में तेरी जैसी कमसिन कली को चोद लिया.. ये ही बहुत बड़ी बात है.. वरना इस उम्र में तो कोई 40 साल की औरत भी नहीं मिलती.. इतना पानी भी कहाँ से निकल आया.. पता नहीं।

डॉली- हाँ ये बात तो है.. मैंने तो सोचा था आपका खड़ा भी नहीं होगा मगर आपने तो मुझे संतुष्ट कर दिया.. पावर तो है आपके लौड़े में…

सुधीर- मैंने तो सोचा भी नहीं था.. तू ऐसी होगी.. एकदम पक्की रंडी जैसे चुदी है तू.. मगर मैं जानता हूँ.. तू रंडी नहीं है.. ज़्यादा चुदी हुई भी नहीं है मगर वो कौन ख़ुशनसीब है जिसने तेरी सील तोड़ी?

डॉली- है बस कोई भी.. आपको उससे क्या? आपने तो मज़ा ले लिया ना.. अब मुझे जाना होगा वरना मम्मी गुस्सा होगी।

सुधीर- एक बात कहूँ.. कभी भी मेरी किसी भी तरह की हेल्प की जरूरत हो, तो मुझे बोल देना.. मैं हमेशा तैयार रहूँगा और हो सके तो कभी-कभार इस बूढ़े के लौड़े का भी ख्याल रख लेना.. माना कोई तगड़ा लौड़ा तुम्हें मज़े देता होगा.. मगर मेरे लौड़े से भी कभी शिकायत का मौका नहीं दूँगा।

डॉली आगे बढ़ी और सुधीर को एक चुम्बन किया।

डॉली- आप चिंता मत करो.. जल्दी ही आपको दोबारा मज़ा देने आऊँगी और कभी कुछ काम होगा तो बता दूँगी.. ओके बाय.. मॉम गुस्सा करेगी।

सुधीर के चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए.. वो खड़ा होकर कपड़े पहनने लगा। इधर डॉली ने भी कपड़े पहन लिए थे।

डॉली- अच्छा एक बात बताओ आप मुझे मलहम लगाने लाए थे.. उस समय आपके मन में क्या था? सच बताना।

सुधीर- अरे मैं झूठ क्यों बोलूँगा… सुनो उस वक्त मैंने सोचा कि तुम नादान लड़की हो इसलिए ऐसे बीच रास्ते में चूत खुजा रही हो.. मैंने मलहम की बात इसलिए कही कि अगर तुम मान जाओ तो मलहम लगाने के बहाने कम से कम तुम्हारी चूत को छूने का मौका मिल जाएगा और किसी तरह तुम्हें गर्म करके चोदने का ख्याल भी मन में था.. मगर तुम मेरी उम्मीद से ज़्यादा मस्त निकलीं।

डॉली- ओह्ह इतने गंदे ख्याल थे.. मन में.. चलो कोई बात नहीं.. अबकी बार आऊँगी तब इस बात का जवाब दूँगी.. अब जाती हूँ बाय..

सुधीर- अरे रूको.. मैं तुम्हें घर तक छोड़ आता हूँ।

डॉली- नहीं.. इसकी कोई जरूरत नहीं है.. आप यहीं रहो.. ओके बाय..

डॉली वहाँ से निकल गई और अपने घर की और बढ़ने लगी।

इधर ललिता रोटी बना रही थी और चेतन किसी काम में बिज़ी था.. तभी फ़ोन की घंटी बजी ललिता बाहर आई और फ़ोन उठाया।

सामने से डॉली की माँ थी।

ललिता- नमस्ते आंटी.. कैसी हो आप.. अब आपके भाई की तबियत कैसी है? आपके पास मेरे घर का नम्बर कहाँ से आया?

डॉली की माँ- हाँ अब ठीक है.. नम्बर तो तुमने फ़ोन किया था ना.. मेरे फ़ोन में कॉलर आईडी है.. उस पर नम्बर आ गया था और मैंने लिख लिया था.. तुम कैसी हो?

ललिता- अच्छा ये बात है.. हाँ मैं ठीक हूँ.. कैसे फ़ोन किया आपने?

डॉली की माँ- बेटी वो डॉली को भेज दो.. मैंने सोचा वो आ जाएगी.. मगर अब तक नहीं आई.. मैंने उसे कहा भी था कि हम शाम तक आ जाएँगे।

ललिता के चेहरे का रंग उड़ गया था क्योंकि डॉली को गए एक घंटा होने को आया था जबकि रास्ता इतना लंबा नहीं था.. वो कुछ बोलना चाहती थी मगर उसकी आवाज़ गले में अटक गई।

डॉली की माँ- अरे लो आ गई.. अच्छा बेटी मैंने तुमको ऐसे ही परेशान किया.. अच्छा रखती हूँ।

डॉली भाग कर अपनी माँ से चिपक गई और प्यार करने लगी। उसकी माँ ने भी उसका माथा चूमा और बस इधर-उधर की बातें करने लगी।

इधर ललिता सकते में आ गई कि आख़िर डॉली इतनी देर तक कहाँ थी।

चेतन- अरे जानेमन कहाँ खो गईं जल्दी से रोटी बनाओ, भूख लग रही है.. उसके बाद तुम्हारी ठुकाई भी करनी है।

ललिता- अरे कर लेना मेरे राजा.. मगर ये डॉली इतनी देर कहाँ थी।

चेतन के पूछने पर ललिता ने सारी बात बता दी।

चेतन- अरे कोई फ्रेंड रास्ते में मिल गई होगी.. उसके साथ कहीं चली गई होगी या बाहर खड़े-खड़े वक्त निकल गया होगा.. तू ज़्यादा सोच मत.. कल उससे पूछ लेना.. चल अब खाना बना…

ललिता उसी सोच में रसोई में चली गई। खाना तैयार करके वो कमरे में ले गई और दोनों ने बड़े प्यार से एक-दूसरे को खाना खिलाना शुरू कर दिया।

दोस्तों ये तो पति-पत्नी हैं इनका प्यार तो रोज का है.. चुदाई भी रोज होती है.. चलो आपको आगे ले चलती हूँ।

रात में चेतन ने 3 बार ललिता की चूत और गाण्ड का मज़ा लिया और दोनों नंगे ही सो गए।

सुधीर से चुदवा कर डॉली को रात अच्छी नींद आई सुबह बड़ी मुश्किल से उसकी मॉम ने उसे उठा कर स्कूल भेजा। स्कूल के गेट पर आज सिर्फ़ मैडी ही खड़ा हुआ था जैसे ही डॉली आई.. उसने हल्की मुस्कान दी.. बदले में डॉली भी मुस्कुरा दी।

मैडी- डॉली तुमने कोई जवाब नहीं दिया.. सोमवार को आओगी ना?

डॉली- आ तो जाऊँगी.. मगर तुम्हारे दोस्त मुझसे कोई बदतमीज़ी ना करें इसकी गारन्टी दो पहले…

मैडी- अपनी माँ की कसम ख़ाता हूँ कोई कुछ नहीं कहेगा.. बस तुम आ जाना प्लीज़…

डॉली- ओके पक्का आ जाऊँगी.. आज गुरुवार है ना.. अभी तो बहुत दिन बाकी हैं ओके बाय…

डॉली गाण्ड को मटकाती हुई स्कूल में चली गई मैडी वहीं खड़ा बस उसकी गाण्ड को देखता रहा।

 


तभी एक तरफ छुप कर खड़े खेमराज और रिंकू भी उसके पास आ गए।

रिंकू- मान गए यार तूने साली को मना ही लिया.. अब आएगा मज़ा.. वैसे तूने सोचा क्या है.. उसको चुदने के लिए कैसे पटाएगा?

खेमराज- साली कुतिया क्या बोल रही थी कि तुम्हारे दोस्तों को कुछ बदतमीज़ी नहीं करना चाहिए.. एक बार आ तो सही साली.. बड़ी शराफत से तुझे चोदेंगे हा हा हा हा…

मैडी- चुप करो सालों.. कोई सुन लेगा.. अब सोमवार तक उसके आस-पास भी नहीं जाना.. नहीं तो बना बनाया काम बिगड़ जाएगा।

रिंकू- यार कहीं ऐसा ना हो तू अकेला मज़ा लूट ले.. और हम लौड़ा हाथ में लिए हिलाते और खड़े रहें.. देख एक लड़की के लिए दोस्ती मत तोड़ देना..

मैडी- साले इतना ही भरोसा है क्या मुझ पे.. तुम दोनों के बिना मैं कुछ नहीं करूँगा ओके.. अब चलो अन्दर.. वक्त हो गया…

क्लास में सब सामान्य चल रहा था, जब चेतन आया.. तब डॉली ने एक हल्की मुसकान दी, मगर चेतन बस देख कर अनजान बन गया और किताब लेकर पढ़ाने लगा।

चेतन- अच्छा बच्चों इम्तिहान के लिए जरूरी सवालों पर निशान लगा लो.. जो याद करने हैं।

कुछ लड़के और लड़कियां एक-दूसरे से धीरे-धीरे कुछ बोल रहे थे और ध्यान नहीं रहे थे। चेतन का गुस्सा तेज था बच्चे उससे डरते थे.. मगर आज पता नहीं क्यों सब ध्यान नहीं दे रहे थे।

चेतन ने जब ये देखा तो गुस्सा हो गया और ज़ोर से चिल्लाया- क्या बकवास लगा रखी है.. चुपचाप निशान लगाओ..

सब चुप हो गए.. चेतन काफ़ी देर तक सवालों के निशान लगवाता रहा इस दौरान वो बार-बार डॉली को देख रहा था और डॉली भी बहुत कामुक मुस्कान दे रही थी।

चेतन को लगा शायद डॉली कुछ कहना चाहती है क्योंकि वो बार-बार ऊँगली से कुछ इशारा कर रही थी.. मगर वो समझ नहीं पा रहा था।

चेतन- डॉली खड़ी हो जाओ।

डॉली खड़ी हो गई और चेतन को देखने लगी।

चेतन- जाओ स्टाफ-रूम में.. जहाँ एक फाइल रखी है.. उस अलमारी में उसमें एक पेपर रखा है.. वो लेकर आओ।

डॉली ‘ओके सर’ कह कर वहाँ से निकल गई..

उसको गए हुए कोई एक मिनट भी नहीं हुआ था कि चेतन भी निकलने को हो गया।

चेतन- बच्चों शोर मत करना.. मैं अभी आता हूँ और डॉली वो पेपर ले आए तो उससे कहना कि बोर्ड पर उसमें लिखे सवाल लिख दे और सब कॉपी कर लेना.. वो कुछ ऐसे सवाल हैं जो किताब में नहीं हैं मैंने बनाए हैं। अक्सर इम्तिहान में सवालों को घुमा कर देते हैं उत्तर किताब में ही होता है मगर बच्चे समझ नहीं पाते हैं.. तो ध्यान से सब लिख लेना।

चेतन क्लास-रूम से बाहर निकल गया मगर फ़ौरन वापस अन्दर आया शायद उसे कुछ याद आ गया।

चेतन- प्रिया.. तुम क्लास की मॉनीटर हो.. ध्यान रखना पीछे से कोई शोर ना हो ओके…

प्रिया- ओके सर..

इतना बोलकर चेतन फ़ौरन स्टाफ-रूम की तरफ गया।

डॉली वो पेपर लिए वहीं खड़ी उसका इन्तजार कर रही थी।

चेतन- हाँ अब कहो.. क्या इशारा कर रही थीं और सब के सामने ऐसे मुस्कुराया मत करो.. अगर किसी को शक हो गया तो?

डॉली- सर किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.. आप बेफिकर रहो.. आज सुबह आते समय दीदी को चोद कर आए हो क्या…

चेतन- नहीं तो.. रात को मस्त ठुकाई की थी.. सुबह कहाँ वक्त मिलता है.. मगर तुम क्यों पूछ रही हो?

डॉली- आपकी पैन्ट की ज़िप खुली हुई है.. क्लास में सब देख रहे थे ये तो अच्छा है कि अन्दर चड्डी है.. वरना आपका लौड़ा बाहर आ जाता हा हा हा हा…

चेतन- अरे धीरे.. कोई सुन लेगा.. ये कैसे खुली रह गई.. बच्चे क्या सोच रहे होंगे.. अच्छा अब तुम जाओ वरना किसी को शक हो जाएगा।

डॉली- मेरे राजा जी एक बार लण्ड के दर्शन करवाओ ना.. बड़ा मन मचल रहा है।

चेतन- तू पक्का मरवाएगी.. शाम को जितना चाहे देख लेना.. अभी जा यहाँ से…

डॉली जाते-जाते लौड़े को सहला कर चली गई।

चेतन डर सा गया अगर कोई आ जाता तो क्या होता…

डॉली के जाने के बाद चेतन फाइल में कुछ देखने लगा… उधर डॉली क्लास में गई तब प्रिया खड़ी हुई और चेतन की कही बात उसको बताई वो बोर्ड पर सवाल लिखने लगी।

काफ़ी देर तक जब चेतन नहीं आया तो क्लास में शोर होने लगा.. सवाल भी सबने लिख लिए थे।

तभी वहाँ चेतन आ गया सब खामोश हो गए और सब की नज़र उनकी ज़िप पर गई जो अब बन्द थी।

कुछ बच्चों ने मुसकान देकर चेतन को अहसास करा दिया कि वो क्यों हँस रहे थे।

चेतन- प्रिया खड़ी हो जाओ.. कब से देख रहा हू तुम दाँत निकाल रही हो.. क्या हुआ तुम क्लास की मॉनीटर हो… अगर तुम ऐसा विहेव करोगी तो बाकी पर क्या असर पड़ेगा।

प्रिया- सर सॉरी…

चेतन- रिंकू तुम मार खाओगे.. क्या ख़ुसुर-फुसुर कर रहे हो?

रिंकू- कुछ नहीं सर सॉरी…

चेतन- हाँ मैं जानता हूँ तुम सब क्यों हँस रहे थे.. यार मैं भी इंसान हूँजल्दबाज़ी में ग़लती हो गई.. अब इसका ये मतलब थोड़े ही है कि तुम मेरा मजाक उड़ाने लगो।

चेतन की बात सुनकर सब बच्चे समझ गए कि सर क्या कहना चाहते हैं।

सब ने एक साथ ‘सॉरी’ कहा.. तभी दूसरे विषय का घंटा बज गया और चेतन वहाँ से चला गया।

दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि ये मैं क्या खिचड़ी पका रही हूँ मगर माफ़ करना.. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है।

यह जो कुछ मैंने लिखा इसका आगे की कहानी से गहरा सम्बन्ध है.. इसलिए आज का ये वाकया बताना जरूरी था ओके..

अब आगे आनन्द लीजिए।

बाकी का दिन सामान्य ही गुजरा.. छुट्टी के बाद डॉली जाने लगी.. तब प्रिया ने उसको पीछे से आवाज़ दी।

प्रिया- डॉली रूको.. मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

दोस्तो, यह है प्रिया इसकी उम्र 19 वर्ष की है.. इसका रंग साफ नहीं है.. थोड़ी साँवली है.. फिगर 30-26-30 का है मगर लड़के इसे भाव नहीं देते हैं और ये भी ज़्यादा किसी से बात नहीं करती है… बस अपनी धुन में रहती है।

हाँ एक बात और यह रिंकू के चाचा की लड़की है यानी रिंकू की चचेरी बहन है।

एक वजह यह भी है कि स्कूल में कोई लड़का इसके पास नहीं आता है।

आप तो जानते ही हो.. रिंकू और उसके दोस्त एक नम्बर के आवारा हैं और किसकी मजाल जो उनकी बहन को पटाने की सोचे..

डॉली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है.. क्या बात करनी है।

प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है.. इसी लिए भाग कर आई हूँ।

डॉली- अच्छा चल बता.. क्या बात है?

प्रिया ने बात बताना शुरू किया तो डॉली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पर साफ दिख रही थीं।

डॉली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।

प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या…

डॉली- थैंक्स यार…

प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना…

डॉली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी…

प्रिया फिर बोलने लगी और डॉली बस आँखें फाड़े उसको देखने लगी।

आप ऐसा समझो कि डॉली को उसकी बात सुन कर बहुत बड़ा झटका सा लगा।

डॉली- तू पागल हो गई है क्या.. ऐसा नहीं हो सकता.. तूने ये सब सोचा भी कैसे.. मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं करूँगी ओके…

प्रिया- देख सोच ले.. तूने पहले हाँ कही है.. अब अगर तू ना करेगी तोमैं कुछ कर बैठूंगी.. बाद में तुमको पछताना पड़ेगा।

डॉली- यह क्या बकवास है मुझे क्यों पछताना पड़ेगा हाँ.. और तूने यह सोच भी कैसे लिया.. मेरी तो समझ के बाहर है।

प्रिया ने फिर एक बात उसको कही और इस बार तो डॉली ने अपने हाथ मुँह पर रख लिए..

आज प्रिया उसको एक के बाद एक झटके दे रही थी।

डॉली का गला सूख गया.. बड़ी मुश्किल से उसने बोला।

डॉली- यार मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा तुझे ये कैसे पता चला…. चल इस बात को गोली मार.. देख प्रिया तू अच्छी तरह सोच समझ कर देख ले उसके बाद भी अगर तुमको लगता है यह सही है तो ओके मैं तुम्हारा ये काम कर दूँगी.. मगर ये बात राज़ ही रखना।

प्रिया- मैंने अच्छी तरह सोच कर ही तुमको कहा है।

डॉली- नहीं तू कल मुझे फाइनल बता देना.. उसके बाद समझूंगी.. ओके..

प्रिया- चल ठीक है.. कल बता दूँगी.. अब तू जा और प्लीज़ तू भी किसी को बताना मत…

डॉली- तू पागल है क्या.. ये बात किसी को बताने की है क्या चल बाय… कल मिलते हैं।

 


लो दोस्तो, चक्कर आने लगा ना.. कि यह क्या उलझन हो गई..

आख़िर यह प्रिया कहाँ से आ गई और ऐसी क्या बात की उसने डॉली से..

अब ये सब जानना है तो कहानी को ध्यान से पढ़ते रहना पड़ेगा ना..

क्योंकि आप तो मेरा स्टाइल जानते ही हो तो मजा लीजिए दोस्तो, वादा करती हूँ आपका मज़ा बढ़ता ही रहेगा।

चलो अब कहानी पर वापस आती हूँ।

डॉली वहाँ से सीधी घर चली जाती है और खाने के बाद पढ़ाई में लग जाती है। एक घंटा पढ़ाई करने के बाद उसको नींद आ जाती है और वो गहरी नींद में सो जाती है।

शाम को डॉली की मॉम उसे जगाती है तब उसे ख्याल आता है कि चेतन सर इन्तजार कर रहे होंगे.. वो झट से तैयार होती है और घर से निकल जाती है। रास्ते में उसे सुधीर जाता हुआ दिखाई देता है.. वो पीछे से आवाज़ लगती है।

सुधीर- अरे आओ आओ.. डॉली में कब से यहाँ खड़ा तुम्हारी ही राह देख रहा था.. मगर आज इधर से आने की बजाय दूसरी तरफ से कैसे आ रही हो ये बात समझ नहीं आई।

डॉली- मैं रोज पढ़ने जाती हूँ.. आज लेट हो गई तो घर से आ रही हूँ.. समझे आप..

सुधीर- अच्छा अच्छा.. ये बात है.. चलो आज मलहम नहीं लगवाना क्या?

डॉली- नहीं आज नहीं.. इम्तिहान करीब हैं.. तैयारी करनी है.. फिर कभी लगवाऊँगी.. अच्छा आपसे एक काम था…

सुधीर- हाँ बोलो.. इसमें पूछने की क्या बात है.. तुम तो बस हुकुम करो..

डॉली ने सुधीर को बताया कि उसको क्या काम है.. सुधीर थोड़ा चौंका मगर जब डॉली ने पूरी बात समझाई.. तब सुधीर सामान्य हो गया।

सुधीर- अरे ये तो बहुत छोटा सा काम है.. कल ही कर दूँगा और कुछ सेवा करवानी है तो बताओ…

डॉली- नहीं अंकल बस ये काम कर दो जल्दी.. फिर आपके पास मलहम लगवाने आऊँगी ओके.. अब मुझे जाने दो.. पहले ही देर हो गई है।

सुधीर- अरे कितनी बार समझाऊँ.. अंकल नहीं.. सुधीर बोलो.. तुम्हारे मुँह से मेरा नाम ज़्यादा अच्छा लगेगा.. ओके.. अब जाओ.. कल इसी वक्त मिलना.. समझो तुम्हारा काम हो गया।

डॉली वहाँ से सीधी ललिता के घर चली जाती है वो अभी गेट पर ही पहुँची कि उसको ललिता की आवाज़ सुनाई दी।

ललिता- चेतन.. आज डॉली नहीं आई क्या बात है?

चेतन- हाँ अब तक आ तो जाना चाहिए था.. पता नहीं क्यों नहीं आई स्कूल में तो बड़ी उतावली हो रही थी लौड़े के लिए.. पर अब तक नहीं आई।

चेतन ने स्कूल से आते ही ललिता को सारी बात बता दी थी।

ललिता- नादान है इसलिए ऐसा किया उसने.. मैं फ़ोन करके पूछती हूँ।

तबियत तो ठीक है ना उसकी..

डॉली- हैलो.. तुमने पुकारा और मैं चली आई.. चूत चिकनी करके आई.. हा हा हा हा…

ललिता- बदमाश चुप कर खड़ी हमारी बातें सुन रही थी और गाने का मतलब बदल दिया तूने हा हा हा…

चेतन- मेरी जान इम्तिहान की जरा भी फिकर नहीं है क्या.. जो इतना देरी से आई.. अब कब पढ़ोगी और कब चुदोगी।

ललिता- आज तो पढ़ाई और चुदाई एक साथ चलने दो।

चेतन- हाँ यह आइडिया अच्छा है.. चल आजा कमरे में… जल्दी से कपड़े निकाल स्कूल में बहुत परेशान किया तूने.. आज ऐसे झटके मारूँगा कि तेरी सारी मस्ती निकल जाएगी।

ललिता- आप दोनों पढ़ाई और चुदाई का मज़ा लो.. मुझे तो खाना बनाना है..

डॉली- अरे ये क्या दीदी आप भी साथ में रहो ना… ज़्यादा मज़ा आएगा।

ललिता- अरे नहीं रात को ही चेतन ने बहुत ठुकाई की है और वैसे भी इतना वक्त कहाँ कि हम तीनों साथ में मस्ती कर सकें.. तुम मज़ा लो रविवार को सुबह जल्दी यहाँ आ जाना तब पूरा दिन खूब मज़ा करेंगे।

डॉली- ओके दीदी यह सही रहेगा.. आप जाओ खाना बनाओ।

ललिता के जाते ही डॉली कपड़े निकालने में लग गई।

चेतन- अरे वाह.. इतनी रफ्तार से.. लगता है आज चूत में बड़ी खुजली हो रही है.. चल निकाल.. मैं भी निकालता हूँ।

डॉली- आपका लौड़ा है ही ऐसा की मन ही नहीं भरता और आज तो आपसे पढ़ते हुए चुदवाऊँगी.. नया फन हो जाएगा।

दोनों नंगे हो जाते हैं. चेतन डॉली को बिस्तर पर लिटा कर उसके मम्मों को चूसने लगता है और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगता है।

डॉली- आह्ह.. ऑउच.. आज क्या हो गया आपको.. इतनी ज़ोर से क्यों दबा रहे हो आह्ह..

चेतन- मेरी जान तेरे अनारों को दबाऊँगा.. तभी तो ये आम बनेंगे ना.. उफ्फ.. कितनी बार दबा चुका हूँ.. साले अब तक वैसे के वैसे ही कड़क हैं.।

डॉली- आह.. आह्ह.. सर मुझे भी लौड़ा चूसना है.. आह.. साइड बदलो ना.. आह्ह.. प्लीज़ उईईइ।

चेतन- अभी नहीं.. जब तेरी चूत चाटूँगा.. तब चूस लेना, अभी तो तेरे चूचे दबाने दे.. आज इनको बड़ा करके ही दम लूँगा।

डॉली- आह्ह.. आह.. आप पर ये कैसा भूत सवार हो गया आह.. मेरी चूत को बड़ा करो ना.. आह्ह.. दीदी क्या बोलती हैं उईइ आईईइ भोसड़ी बना दो.. आह मेरी चूत की.. मगर आह मम्मों पर रहम खाओ…

चेतन- साली स्कूल में बड़ा मन मचल रहा था ना तेरा.. पूरी रंडी वाली हरकतें कर रही थी.. आज तेरा सारा रंडीपना उतार दूँगा।

दस मिनट तक चेतन चूचों को मसलता रहा.. उसका लौड़ा तन कर एकदम कड़क हो गया था और डॉली की चूत भी गीली हो गई थी।

डॉली- आह्ह.. अब तो चूसने दो आह्ह.. आपका लौड़ा भी आह्ह.. कैसे मेरी टाँगों में चुभ रहा है।

चेतन- चल साली आजा.. अब मेरी ऊपर आकर अपनी चूत का स्वाद लेने दे.. तू आराम से लौड़ा चूस।

दोनों 69 कि स्थिति में आ गए, डॉली बड़े प्यार से लौड़ा चूसने लगी थोड़ी देर बाद वो दाँतों से लौड़े को दबाने लगी।

चेतन- आआ.. साली.. ये क्या कर रही है.. लौड़ा काटने का विचार है क्या? दर्द होता है।

डॉली- हा हा हा क्यों मेरे मम्मों को दबाया था.. तब नहीं सोचा कि मुझे भी दर्द हो रहा होगा।

चेतन- अच्छा ये बात है.. बदला ले रही है.. चल तू अबकी बार काट.. देख में तेरी चूत को कैसे खा जाता हूँ।

डॉली- नहीं नहीं.. प्लीज़ चूत पर मत काटना.. बहुत दर्द होगा। मैं कुछ नहीं करूँगी।

चेतन- अब आई ना लाइन पे… चल चूस मेरी जान.. मुझे भी चूत रस का मज़ा लेने दे।

काफ़ी देर तक ये चटम-चटाई चलती रही.. उसके बाद चेतन ने डॉली से कहा कि जो सवाल मैंने बताए थे उनमें से जो याद हो.. उसका उत्तर बताओ मैं लौड़ा चूत में डाल कर तुझे चोदता हूँ ओके…

डॉली- हाँ मेरे राजा जी.. ये आइडिया अच्छा है.. आप सुन भी लोगे और चोद भी लोगे.. मज़ा आएगा।

चेतन ने डॉली की टाँगें कंधे पर रखी और ‘घप्प’ से पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया।

डॉली- आईईइ मर गई रे आह… चेतन- आह.. नहीं सवाल का जवाब दो.. उहह उहह उहह.. वो दिल वाला ओके.. पूरी क्रिया बोलो…

डॉली- आह्ह.. ओके आह्ह.. सर इंसान के आह्ह.. जिस्म में.. आह्ह.. चोदो आह्ह.. दिल का आह्ह.. बड़ा महत्वपूर्ण आह्ह.. मज़ा आ गया कार्य होता है.. आह ऐसे ही आह्ह.. रफ्तार से लौड़ा अन्दर-बाहर करो आह्ह..

चेतन- वेरी गुड.. अच्छा बोल रही हो उह्ह ले उहह.. आगे बता।

पंद्रह मिनट तक चेतन लौड़े को अन्दर-बाहर करता रहा.. तब तक डॉली ने चुदाई के साथ-साथ तीन सवालों के जवाब बता दिए थे।

डॉली- आह्ह.. मैं गई.. आह पैर दुखने लगे हैं आह मेरा पानी आ रहा है आह्ह.. फास्ट फास्ट आह…

चेतन ने उसके पैरों को कंधे से उतार कर मोड़ दिया और पूरी ताक़त से चोदने लगा.. वो भी चरम पर आ गया था।

दो मिनट बाद लौड़े से पिचकारी निकली और चूत की दीवार से जा टकराई.. डॉली भी गर्म वीर्य के अहसास से झड़ने लगी।

काफ़ी देर तक चेतन उस पर ऐसे ही पड़ा रहा। उसके बाद उठकर बाथरूम चला गया।

डॉली अब भी वैसे ही पड़ी छत को देख रही थी।

चेतन- अरे उठो.. जाओ बाथरूम में जाकर चूत साफ कर लो और कपड़े पहन लो.. पढ़ाई नहीं करनी क्या.. अब बहुत काम हैं।

डॉली- हाँ मेरे राजा जी.. पढ़ना भी जरूरी है.. नहीं तो एक बार और चुदवा लेती।

चेतन- तू एकदम पक्की चुदक्कड़ बन गई है.. अब तुझे एक बार से कहाँ सबर आएगा.. रविवार को पूरा दिन चोदूँगा.. अभी पढ़ना जरूरी है।

डॉली उठ कर बाथरूम चली जाती है उसके बाद पढ़ाई चालू।

एक घंटा पढ़ने के बाद डॉली घर चली जाती है।

रात का खाना खाकर वो अपने कमरे में बैठी हुई कुछ सोच रही थी। डॉली को प्रिया की कही बात दिमाग़ में घूमने लगी वो अपने आप से बातें करने लगी।

डॉली- क्या ऐसा हो सकता है प्रिया के मन में ये बात आई कैसे.. छी: मुझे तो सोच कर ही घिन आ रही है।

ओह्ह.. दोस्तो, सॉरी आपका दिमाग़ घुमाने के लिए.. आप सोच रहे होंगे आख़िर ऐसी क्या बात कही प्रिया ने जो डॉली इतना सोच रही है।

चलो आपको ज़्यादा परेशान नहीं करूँगी… सुबह क्या हुआ.. वो बता देती हूँ इसके लिए कहानी को वापस थोड़ा पीछे ले जाना होगा तो चलो मेरे साथ।

डॉली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है? क्या बात करनी है?

प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है इसी लिए भाग कर आई हूँ।

डॉली- अच्छा चल बता क्या बात है?

प्रिया- यार जब तू स्कूल आई थी तब मैडी से बात करने के बाद जब अन्दर गई.. तब खेमराज और रिंकू भी वहाँ आ गए।

प्रिया ने उनके बीच हुई बात डॉली को बताई.. डॉली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पे साफ दिख रही थीं।

 


डॉली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।

प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या?

डॉली- थैंक्स यार।

प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना।

डॉली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी।

प्रिया- देख यार तू तो जानती है ना स्कूल में मुझे कोई भाव नहीं देता और वैसे भी मेरे मन में बस रिंकू बसा हुआ है.. किसी और का ख्याल मेरे दिमाग़ में आता ही नहीं मगर तू जानती है वो मेरा दूर का चचेरा भाई है। अब सुन वो तुम्हें चोदना चाहता है और मैं उससे चुदना चाहती हूँ.. बस तू कुछ भी जुगाड़ करके मुझे रिंकू से चुदवाने में मदद कर दे।

प्रिया बोलती रही और डॉली बस आँखें फाड़े उसको देखने लगी। आप ऐसा समझो कि डॉली को उसकी बात सुन कर बहुत बड़ा झटका सा लगा।

डॉली- तू पागल हो गई है क्या? ऐसा नहीं हो सकता.. तूने ये सब सोचा भी कैसे? मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं करूँगी ओके…

प्रिया- देख सोच ले तूने पहले ‘हाँ’ कही है अब अगर तू ना करेगी तो मैं कुछ कर बैठूँगी.. बाद में तुमको पछताना पड़ेगा…

डॉली- ये क्या बकवास है.. मुझे क्यों पछताना पड़ेगा हाँ.. और तूने ये सोच भी कैसे लिया.. मेरी तो समझ के ही बाहर है।

प्रिया- अच्छा तू चेतन सर से चुदे वो ठीक और मैं गलत.. ना ना ज़्यादा सोच मत.. मैं बताती हूँ.. जब तू पेपर लेने गई और काफ़ी देर तक नहीं आई.. मैं तुमको बुलाने वहाँ आई थी.. मगर सर को देख कर मैं एक तरफ छुप गई थी और तब तुम लोगों की बात मैंने सुनी हैं। अब जाहिर सी बात है इतना तो ज्ञान है मुझे.. कि बिना चुदे तो तू ऐसी बात सर से करेगी नहीं…

डॉली ने अपने हाथ मुँह पर रख लिए.. आज प्रिया उसको एक के बाद एक झटके दे रही थी।

डॉली का गला सूख गया… बड़ी मुश्किल से उसने बोला।

डॉली- यार मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.. चल इस बात को गोली मार.. देख प्रिया तू अच्छी तरह सोच समझ कर देख ले.. उसके बाद भी अगर तुमको लगता है कि ये सही है तो ओके.. मैं तुम्हारा ये काम कर दूँगी.. मगर ये बात राज़ ही रखना।

प्रिया- मैंने अच्छी तरह सोच कर ही तुमको कहा है।

डॉली- नहीं.. तू कल मुझे फाइनल बता देना.. उसके बाद समझूंगी… ओके..

प्रिया- चल ठीक है.. कल बता दूँगी अब तू जा और प्लीज़ तू भी किसी को बताना मत…

डॉली- तू पागल है क्या.. ये बात किसी को बताने की है क्या.. चल बाय कल मिलते हैं।

तो दोस्तों अब आपको सारी बात समझ में आ गई होगी.. सॉरी मैंने पिछले डायलोग दोबारा यहाँ लिखे मगर ऐसे आपको समझ नहीं आता.. चलो अब आगे की कहानी का मजा लीजिए।

डॉली सोचते-सोचते अचानक से उठी उसे कुछ याद आया और उसने एक छोटी डायरी देखना शुरू की.. थोड़ी देर बाद उसने एक नम्बर को गौर से देखा और उस पर फ़ोन लगाया।

फ़ोन की घन्टी बजने लगी.. थोड़ी देर बाद किसी ने फ़ोन उठाया।

डॉली- हैलो क्या मैं प्रिया से बात कर सकती हूँ?

प्रिया- अरे डॉली तू.. हाँ बोल क्या बात है और मेरा नम्बर तुझे कहाँ से मिला?

डॉली- अरे यार पिछले साल इम्तिहान के वक्त तूने ही तो दिया था.. याद है?

प्रिया- हाँ याद आया.. मगर अभी तुझे क्या जरूरत पड़ गई.. फ़ोन करने की.. वो तो बता?

डॉली- देख ऐसे फ़ोन पर मैं नहीं बता सकती.. तू कल स्कूल के बाद मेरे साथ मेरे घर आ सकती है क्या? बहुत जरूरी बात करनी है।

प्रिया- हाँ पढ़ाई के बहाने से आ तो सकती हूँ मगर ये बात तो तू कल भी बोल सकती थी.. अभी फ़ोन क्यों किया।

डॉली- नहीं कल बोलती तो तू घर में किसी को कैसे बताती अब सुन सुबह स्कूल आने के पहले अपनी मॉम को बता कर आना ताकि किसी को कोई शक ना हो समझी।

प्रिया- हाँ यार ये तो मैंने सोचा ही नहीं चल ओके बाय… कल मिलते हैं।

अगले दिन डॉली स्कूल जा रही थी तब मैडी रास्ते में उसको मिल गया।

मैडी- हाय डॉली गुड मॉर्निंग कैसी हो?

डॉली- गुड मॉर्निंग क्या बात है आज गेट पर नहीं खड़े हुए.. यहाँ क्या कर रहे हो?

मैडी- तुम्हारा इन्तजार कर रहा था.. वहाँ वो मेरे दोस्त होते है ना..

तुमको अच्छा नहीं लगता इसलिए मैंने सोचा यहीं बात कर लूँ।

डॉली- देखो मैडी वैसे तो मुझे तुम भी पसन्द नहीं हो क्योंकि तुम तीनों के ही चर्चे स्कूल में होते रहते हैं मगर तुम्हें मैंने कभी किसी को परेशान करते हुए नहीं देखा इसलिए तुमसे बात की.. अब ऐसे अकेले में यहाँ-वहाँ मुझसे बात मत किया करो।

मैडी- थैंक्स जो तुमने मुझे समझा मगर तुम गलत सोच रही हो मैं यहाँ किसी जरूरी काम से आया हूँ।

डॉली- कैसा काम?

मैडी- प्लीज़ बुरा मत मानना.. तुम सोमवार को आ रही हो ना.. बस ये कनफर्म करना था क्योंकि अगर तुम आओगी तो मैंने सोचा है होटल में पार्टी दूँगा.. और अगर नहीं आओगी तो इतना खर्चा क्यों करूँ.. घर में ही सब को बुला लूँगा।

डॉली- अच्छा इस बात का मैं क्या मतलब निकालूँ.. सिर्फ़ मेरे लिए ही तुम खर्चा करना चाहते हो और किसी की कोई वेल्यू नहीं है क्या?

मैडी- तुम फिर गलत समझ रही हो देखो तुम अच्छी लड़की हो.. अगर तुम आओगी तो कुछ खास लोगों के साथ हम चुपचाप में होटल में पार्टी कर लेंगे उसके बाद में घर आकर दोबारा मेरे फालतू दोस्तों के साथ शामिल हो जाऊँगा.. उनको मैं तुम्हारे सामने नहीं लाना चाहता.. बस यही असली बात है।

मैडी की बातों ने डॉली को काफ़ी प्रभावित किया उसको बड़ी ख़ुशी हुई ये जानकार कि खास उसके लिए मैडी ये सब कर रहा है मगर उसको एक बात और समझ में आ गई कि मैडी उसको दाना डाल रहा है सारा चक्कर चूत चोदने का है बस।

डॉली- मैं 100% आऊँगी जाओ तुमको जो तैयारी करनी है कर लो।

मैडी एकदम खुश हो गया और वहाँ से चला गया। डॉली भी स्कूल की तरफ बढ़ने लगी।

दोस्तो, आज चेतन सर ने डॉली को कई बार देखा मगर आज डॉली ने बस हल्की सी मुस्कान दी उसका ध्यान तो प्रिया पर था.. दिन ऐसे ही बीत गया।

छुट्टी के बाद प्रिया को लेकर वो घर की तरफ जाने लगी।

डॉली- हाँ तो अब बता तूने क्या सोचा?

प्रिया- सोचना क्या था मेरा तो अब भी वही जवाब है कि हाँ.. मुझे रिंकू चाहिए बस।

डॉली- अच्छा एक बात तो बता तेरे दिमाग़ में ये ख्याल आया कैसे और रिंकू ही क्यों और कोई भी तो हो सकता है.. अगर तू कहे तो सर से बात कर लूँ.. इसमें दो फायदे हैं.. एक तो सर मज़ा बहुत देते हैं दूसरा तू भाई के साथ सेक्स के पाप से बच जाएगी।

प्रिया- नहीं नहीं सर को बताना भी मत.. समझी और कैसा पाप.. आजकल तो सगे भाई-बहन मज़ा ले रहे हैं.. फिर ये तो दूर के चाचा का बेटा है.. तू ये ज्ञान देना बन्द कर.. बस ‘हाँ’ कह दे कि मेरी हेल्प करेगी और आइडिया कैसे आया ये लंबी कहानी है.. घर चल कर बताऊँगी।

डॉली- अच्छा हाँ.. बस खुश.. मगर तूने क्या सोच कर मुझे ये बात बताई है.. मैं कैसे तेरी मदद करूँगी?

प्रिया- कल जब उन तीनों की बात मैंने सुनी.. उसी वक्त मुझे एक आइडिया दिमाग़ में आया कि वो तीनों तेरे ऊपर लट्टू हैं.. अगर कुछ ऐसा हो कि तेरी जगह मैं आ जाऊँ और उनसे चुदवा लूँ.. बस यही सोचकर मैंने तेरे को बताई ये बात..

डॉली- मगर कैसे यार?

प्रिया- तू इसकी टेन्शन मत ले.. मैंने बहुत सी चुदाई की कहानी पढ़ी हैं.. एक से एक आइडिया मेरे पास हैं।

डॉली- लो बातों में पता भी नहीं चला.. घर भी आ गया।

दोनों घर में चली जाती है सामान्य सी फॉरमॅलिटी के बाद दोनों साथ खाना खा लेती हैं और डॉली के कमरे में पढ़ाई के बहाने चली जाती हैं।

डॉली- चल आजा अब यहाँ बैठ कर सबसे पहले मुझे ये बता कि रिंकू का ख्याल तुझे कैसे आया और दूसरी बात क्या कभी तूने किसी के साथ कुछ किया है?

प्रिया- नहीं यार मैंने ऊँगली के सिवा कभी कुछ नहीं किया.. हाँ रिंकू के बारे में तुझे शुरू से सब बताती हूँ। तभी तुमको मेरी चाहत समझ में आएगी।

डॉली- चल बता में भी तो सुनू कि आख़िर माजरा क्या है?

प्रिया- अच्छा सुन देख तू तो जानती है रिंकू और उसके दोस्त कितने बिगड़े हुए हैं।

डॉली- हाँ यार पता है तू अपनी बात बता ना…

प्रिया- तू सुन तो.. बीच में मत बोल।

डॉली- सॉरी चल.. अब नहीं बोलूँगी.. आगे की बात बता।

प्रिया- कई बार रिंकू अपने दोस्तों के साथ शराब पीकर घर आ जाता था.. किसी को पता नहीं चलता था।

डॉली एकदम ध्यान से सब सुन रही थी।

प्रिया- अब सुन मेरी बात पिछले एक साल से मैं चुदाई की कहानी पढ़ रही हूँ और हर तरह की कहानी मैंने पढ़ी हुई हैं.. उसमें भाई-बहन की कहानी भी शामिल थीं। मेरे दिमाग़ में चुदाई करने की इच्छा ने जन्म ले लिया।

स्कूल में कोई मुझे देखता भी नहीं था और मेरी चुदने की इच्छा दिन पर दिन बढ़ने लगी।

एक बार चाचा जी को रिंकू के शराब पीने की आदत का पता चल गया और उन्होंने उसे बहुत मारा और घर से निकाल दिया। मेरे पापा का स्वभाव थोड़ा नर्म है और चाचा बहुत तेज गुस्से वाले हैं।

तब मेरे पापा रिंकू को हमारे यहाँ ले आए उसे जरा भी होश ना था.. बड़ी मुश्किल से ऊपर मेरे कमरे के पास वाले कमरे में उसे लिटा कर पापा चले गए।

उनके जाने के बाद माँ ने कहा कि उसके कमरे में पानी रख आओ और कुछ फल वगैरह भी रख दो.. होश आएगा तो खा लेगा।

 


जब मैं कमरे में गई वो बैठा हुआ था जैसे ही मैं उसके पास गई उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगा- स..सुन तो यार म..मेरी बात गौर से सुन.. साला जिन्दगी का कचरा हो गया है खेमराज.. तू मेरा भाई है ना.. तू.. मुझे अरे यार साला बात के बीच में मूत आ गया यार.. मेरा हाथ पकड़ कर बाथरूम तक ले चल ना.. स..साली आज तो ज्ज..ज़्यादा चढ़ गई है।

मुझे कुछ समझ नहीं आया क्या करूँ.. क्योंकि वो मुझे अपना दोस्त समझ रहा था।

मैंने उसका हाथ पकड़ा और बाथरूम तक ले गई।

डॉली- यार क्या बोल रही है.. किसी ने देखा नहीं..?

प्रिया- अरे कमरे में बाथरूम था यार बाहर नहीं गई.. अब तू सुन…

रिंकू- अरे स..साली ज़िप नहीं खुल रही आह्ह… साला मूत भी अन्दर ही निकल जाएगा।

प्रिया- मुझे लगा ये यहीं सूसू कर देगा.. मैंने नीचे बैठ कर उसकी ज़िप खोली.. उसने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी। सीधे ही उसका लण्ड मेरी आँखों के सामने आ गया.. यार सोया हुआ भी बड़ा मस्त लग रहा था और मज़े की बात एकदम क्लीन था।

मैंने हाथ से पकड़ कर उसे बाहर निकाला।

डॉली- ऊह.. माँ.. तुझे शर्म नहीं आई छी: अपने ही भाई का लण्ड हाथ में ले लिया और तुझे जरा भी डर नहीं लगा कि होश में आने के बाद वो क्या सोचेगा?

प्रिया- अरे नहीं रे.. वो बहुत टल्ली था उसे कहाँ कुछ याद रहता है। चाचा उसको मार रहे थे तब भी पता नहीं किस का नाम ले रहा था कि तुझे देख लूँगा।

डॉली- ओह.. अच्छा आगे बता.. क्या हुआ वो बता…

प्रिया- होना क्या था नीचे से माँ की आवाज़ आ रही थी.. मैं घबरा गई उसने बहुत ज़्यादा सूसू की.. मैंने जल्दी से उसकी ज़िप बन्द की.. उसको बिस्तर पर लिटा कर कमरे से बाहर निकल गई।

डॉली- उसके बाद तेरे मन में रिंकू का ख्याल आया।

प्रिया- नहीं यार उसके बाद मैं अपने कमरे में आ कर सोचने लगी.. बस मेरे दिमाग़ में रिंकू का लण्ड घूमने लगा.. मैंने जल्दी से कहानी की किताब निकाली और भाई-बहन की कहानी पढ़ने लगी.. जब रात ज़्यादा हो गई और मेरे जिस्म की गर्मी बढ़ने लगी.. तो मैं चुपके से नीचे गई।

मॉम-डैड के कमरे से खर्राटों की आवाज़ आ रही थी, वो गहरी नींद में सो रहे थे।

उसके बाद मैं ऊपर रिंकू के पास गई.. वो अब भी बेसुध लेटा हुआ था मैंने हिम्मत करके उसकी पैन्ट का हुक खोला और लौड़ा बाहर निकाला।

अरे यार तुझे क्या बताऊँ.. पहली बार लौड़े को ऐसे देख रही थी और सेक्सी कहानी क कारण मेरी चूत एकदम गीली हो रही थी।

मैंने उसके लौड़े को सहलाना शुरू किया कुछ ही देर में वो अपने असली आकार में आने लगा।

रिंकू तो बेसुध सा पड़ा हुआ.. ना जाने क्या बड़बड़ा रहा था.. मुझे तो बस लौड़े से मतलब था.. तन कर क्या मस्त 7″ से भी ज़्यादा हो गया होगा और मोटा भी खूब था यार.. तुझे क्या बताऊँ लौड़ा देख कर मेरी तो हालत खराब हो गई..

डॉली- अच्छा उसके बाद तूने क्या किया.. यार तेरी कहानी में मज़ा आ रहा है।

प्रिया- यार क्या बताऊँ बस उसको सहलाती रही.. कहानी में लण्ड चूसने के बारे में पढ़ा था कि बड़ा मज़ा आता है लेकिन यह सच होता है, यह नहीं पता था।

डॉली- अरे एकदम सच होता है.. बड़ा मज़ा आता है मैंने भी…

डॉली जोश-जोश में बोल तो गई मगर जल्दी ही उसको ग़लती का अहसास हो गया और वो एकदम चुप हो गई।

प्रिया- अच्छा तो ये बात है… हाँ बड़े मज़े ले चुकी है तू.. तो अब बता भी दे.. कितनी बार चूस चुकी है और कैसा मज़ा आया?

डॉली- अभी नहीं सब बताऊँगी मगर पहले तू बता पूरी कहानी।

डॉली को उसकी बातों में बड़ा रस आ रहा था उसकी चूत भी गीली होने लगी थी।

प्रिया- यार पहली बार मैंने लण्ड को होंठों से छुआ.. उफ्फ कितना गर्म था वो.. डरते डरते मैंने उसकी टोपी को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। सच्ची वो ऐसा अहसास था जिसे मैं शब्दों में ब्यान नहीं कर सकती।

डॉली- चुप क्यों हो गई बोल ना यार प्लीज़..

प्रिया- यार बोल तो रही हूँ.. उस दिन को याद करके मुँह में पानी आ गया।

उसके बाद मैं आराम से लौड़े को चूसने लगी।

अब मैंने जड़ तक उसको चूसना शुरू कर दिया। बड़ा मज़ा आ रहा था जीभ से उसको पूरा चाट रही थी।

मैंने उसकी गोटियाँ भी चूसीं.. कोई 15 मिनट तक मैं चूसती रही उसके लौड़े से कुछ पानी की बूँदें आईं जिसका स्वाद खट्टा सा.. नमकीन सा पता नहीं कैसा था.. मगर मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था।

कसम से मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी। जब कोई 25 मिनट हो गए होंगे मुझे चूसते हुए तो मैंने रफ़्तार से मुँह को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया.. जैसे चुदाई होती है बस फिर क्या था उसका लौड़ा फूलने लगा और मेरे मुँह में ही उसने सारा माल छोड़ दिया।

डॉली- ओह.. तूने क्या किया.. पी गई या थूक दिया बाहर…

प्रिया- अरे नहीं मैं तैयार नहीं थी कि कब पानी आएगा.. अचानक से ये सब हो गया और उसके पानी की धार भी बहुत तेज़ी से आई.. सीधे गले में चली गई.. मजबूरन पीना ही पड़ा। मगर हाँ एक बात है.. शुरू में गंदी फीलिंग आई.. उसके बाद बड़ा अच्छा लगा।

डॉली- यार तूने कितनी हिम्मत का काम किया.. मैं होती तो शायद कभी नहीं करती।

प्रिया- अरे इसमें क्या हिम्मत.. आगे सुन.. उसका तो पानी निकल गया मगर मैं काम-वासना की आग में जलने लगी.. मेरी चूत से लगातार रस टपक रहा था और अब बर्दास्त के बाहर था। मैंने नाईटी निकाली जो में रात को पहनती हूँ.. पैन्टी भी एक तरफ रख दी और अपनी कुँवारी चूत पर उसका लौड़ा रगड़ने लगी.. जो अब धीरे-धीरे बेजान हो रहा था.. तू यकीन नहीं करेगी मुरझाए हुए लौड़े ने भी वो कर दिया जो तू सोच भी नहीं सकती जैसे ही मेरी चूत पर मैंने लौड़ा स्पर्श किया.. झट से मेरी चूत का फुव्वारा फूट गया और इतना पानी निकला कि कभी ऊँगली से इतना नहीं निकला होगा यार…

डॉली- यार तेरी बातों ने तो कमरे का माहौल गर्म कर दिया पूरा जिस्म आग की तरह जल रहा है।

प्रिया- अरे तेरा जिस्म जल रहा है बात करते-करते मुझे बस रिंकू का लौड़ा ही नज़र आ रहा है.. मेरी पूरी पैन्टी गीली हो गई यार..

डॉली थोड़ा सा झिझक कर बोली- यार ऐसा ही हाल मेरा भी है।

प्रिया- हाँ जानती हूँ कब से तू पैरों को इधर-उधर कर रही है।

डॉली- उसके बाद क्या हुआ.. उसका दोबारा कड़क किया तूने?

प्रिया- नहीं यार मॉम शायद उठ गई थीं.. वे पानी पीने आई थीं या पता नहीं.. मगर मैंने नीचे कुछ आवाज़ सुनी तो मैंने जल्दी से उसके लौड़े को पैन्ट में करके अपने कपड़े ठीक किए और वहाँ से भाग गई अब तो तुझे समझ आ गई ना मेरी बात.. बस मैं उसी वक्त ये सोच चुकी थी कि अब किसी भी तरह रिंकू को फंसाऊँगी और अपनी चूत का मुहूर्त उसी से करवाऊँगी।

डॉली- यार सुबह कुछ नहीं कहा उसने.. रात की कोई तो बात उसे याद होगी?

प्रिया- अरे कहाँ यार.. वो तो माँ से ये पूछ रहा था मैं यहा कैसे आया.. उसको तो चाचा की मार भी याद नहीं थी।

डॉली- यार एक बात तो तुझे पता है कि रिंकू एक नम्बर का आवारा है.. तू थोड़ी सी कोशिश करके देख वो खुद तुझे चोदने को राज़ी हो जाएगा।

प्रिया- जानती हूँ.. मगर कैसे करूँ यार.. एक ही घर में होते तो ऐसा न था.. अब रिंकू को बस स्कूल में देखती हूँ.. घर तो समझो वो बस खाना खाने जाता है.. बाकी वक्त अपने दोस्तों के साथ ही रहता है। उसे अपने जिस्म के जलवे दिखाने का मुझे कोई मौका ही नहीं मिलता.. अब रात को तो मैं उसके घर बिना काम के जा नहीं सकती हूँ।

डॉली- हाँ ये बात भी सही है.. यार तूने इतनी हिम्मत कर ली वो ही बहुत बड़ी बात है।

प्रिया- यार क्या करूँ.. उसका लौड़ा था ही ऐसा कि बस मेरी चूत फड़फड़ाने लगी और हिम्मत अपने आप आ गई।

डॉली- यार तेरी बातें सुनकर चूत की हालत पतली हो गई.. तू रूक मैं बाथरूम जाकर आती हूँ।

प्रिया- अरे बाथरूम में जाकर ऊँगली करेगी.. इससे अच्छा तो यहीं कर ले और मैं तो कहती हूँ चल मज़ा करते हैं.. मैंने कहानी में पढ़ा है कि कैसे दो लड़कियाँ आपस में चुदाई का मज़ा लेती हैं।

प्रिया ने डॉली के मन की बात बोल दी थी.. उसे ललिता के साथ का सीन याद आ रहा था.. वो झट से मान गई।

डॉली- चल निकाल कपड़े.. नंगी होकर खूब मज़ा करेंगे यार..

प्रिया- हाँ यार.. नंगी होकर ही ज़्यादा मज़ा आएगा।

दोनों ने कपड़े निकालने शुरू कर दिए।

 


दोस्तो, प्रिया का फिगर तो आपको पता ही है 30-26-30 चलो अब प्रिया को नंगी भी देख लो।

जैसा कि मैंने पहले आपको बताया था प्रिया थोड़ी साँवली है लेकिन दोस्तों रंग का कोई महत्व नहीं होता..

कुदरत ने प्रिया के गुप्तांगों को बड़ा ही तराशा था.. उसके मम्मे एकदम गोल.. जरा भी इधर-उधर नहीं..

एकदम परफ़ेक्ट जगह पर और थोड़े ऊपर को उठे हुए चुदाई की भाषा में ‘तने हुए मम्मों बोल सकते हैं और उन गोल मम्मों पर उसके खड़े निप्पल.. एकदम गुलाबी.. जैसे किसी ने गुलाब की पत्ती तोड़ कर वहाँ चिपका दी हो और पतली कमर जिसमें एक गड्डा बना हुआ था.. जिससे उसकी गाण्ड का उठाव अलग ही नज़र आता था।

भले ही वो साँवली हो मगर कोई इसको ऐसी हालत में देख ले उसका लौड़ा बिना चोदे ही पानी टपकने लगेगा।

चलो अब प्रिया को नंगा तो अपने देख लिया।

अब इन दोनों कमसिन कलियों की रगड़लीला भी देख लो।

डॉली- वाउ यार तेरे मम्मे तो बहुत अच्छे हैं गोल-गोल…।

प्रिया- रहने दे यार इतने ही अच्छे हैं तो कोई देखता क्यों नहीं.. जिस्म तो तेरे पास है.. एकदम गोरा.. बेदाग किसी को भी अपनी और खींचने वाला..

डॉली- अरे यार अब बहस में क्या फायदा.. चल आजा मस्ती करते हैं।

दोस्तो, दोनों कमसिन कलियां बिस्तर पर नंगी पड़ी.. एक-दूसरे को चूमने लगीं.. कभी डॉली उसके मम्मों दबाती और चूसती.. तो कभी वो।

दोनों एकदम गर्म हो गई थीं प्रिया चुदी हुई नहीं थी मगर कहानी से उसने काफ़ी कुछ सीखा हुआ था.. वो मम्मे चूसने के साथ-साथ डॉली की चूत भी रगड़ रही थी।

काफ़ी देर तक दोनों एक-दूसरे के साथ मस्ती करती रहीं।

डॉली- उफ़फ्फ़ आह प्रिया मेरी चूत में कुछ हो रहा है प्लीज़ आह्ह… थोड़ी देर चाट ले ना आह्ह… मैं भी तेरी चाटती हूँ आह्ह… आजा 69 का स्थिति बना ले।

प्रिया- हाँ यार उफ़फ्फ़.. चूत जलने लगी है.. बड़ा मज़ा आएगा चल आजा..

दोनों अब एक-दूसरे की चूत का रस चाट रही थीं डॉली तो पहले चूत चाट चुकी थी.. उसको तो बड़ा मज़ा आ रहा था मगर प्रिया की चूत पर पहली बार होंठ लगे थे.. वो तो आनन्द की असीम सीमा पर पहुँच गई थी।

उसको बहुत मज़ा आ रहा था और उसी जोश में वो डॉली की चूत को बड़े मज़े से चाट रही थी।

दोनों पहले से ही गर्म थीं ज़्यादा देर तक चूत-चटाई बर्दास्त ना कर पाईं और एक-दूसरे के मुँह में झड़ गईं।

झड़ने के 5 मिनट बाद तक दोनों शान्त पड़ी रहीं।

प्रिया- उफ़फ्फ़… साली ये चूत भी क्या कुतिया चीज है.. बड़ा मज़ा आया आज तो.. यार अगर तू लड़की होकर इतना मज़ा दे सकती है तो रिंकू मुझे कितना मज़ा देगा।

डॉली- हाँ यार लौड़े से जो मज़ा आता है.. वो कहीं किसी से नहीं मिलता और मैंने जो चूत चाटी.. वो कुछ नहीं है.. मर्द की ज़ुबान जब चूत पर लगती है.. अय..हय.. उसका मज़ा कुछ अलग ही होता है।

प्रिया- सच्ची..! ऐसा मज़ा मिलता है..

यार प्लीज़ इसी लिए तो कह रही हूँ.. कुछ कर रिंकू को मेरा बना दे.. जब उन्होंने एक बार तेरा नाम लिया तो मुझे बड़ा गुस्सा आया.. मगर बाद में मैंने सोच लिया कि अब तू ही मेरी मदद करेगी।

डॉली- यार यही बात करने तो तुझे यहाँ बुलाई हूँ.. अब तू ही बता.. मैं उसको राज़ी कैसे करूँ.. तुझे चोदने के लिए।

प्रिया- देख सीधी सी बात है.. वो तीनों तुझे चोदना चाहते हैं.. अब तू सच-सच बता.. उनसे चुदना चाहती है या नहीं.. उसके बाद मैं आइडिया बताती हूँ।

डॉली- नहीं यार.. मैं उनसे नहीं चुदना चाहती.. वो स्कूल में बदनाम कर देंगे… मुझे उन पर ज़रा भी विश्वास नहीं है।

प्रिया- मैं जानती थी तू यही कहेगी.. अब सुन तुझे चुदना नहीं है.. बस चुदने की एक्टिंग करनी है।

डॉली- वो कैसे यार?

प्रिया- सुन.. मैडी तेरे ज़्यादा करीब आ रहा है.. तू उसको सीधे बोल दे कि तुझे उनकी बात पता चल गई है और तू खुद भी यही चाहती है.. मगर तेरी एक शर्त है कि जगह तुम बताओगी और अंधेरे में सब काम करना होगा। तू उनके सामने नंगी नहीं होना चाहती।

डॉली- इससे क्या होगा और मैं ऐसा क्यों कहूँ..? मुझे नहीं चुदना यार उनसे…

प्रिया- अरे यार सुन तो जब वो मान जाए.. तो हम दोनों किसी ऐसी जगह का इंतजाम कर लेंगे।

मैं छुप कर रहूंगी.. तू वहाँ ये कहना कि मैं कुँवारी हूँ और पहले रिंकू से चुदवाऊँगी.. उसके बाद दोनों से एक-एक करके करना होगा.. कमरे में रिंकू के आने के बाद तुम लाइट बन्द कर देना।

मैं वहीं छुपी रहूंगी.. बस आवाज़ तुम्हारी जिस्म मेरा.. वो चोद लेगा मुझे.. तू बस साइड में चुपचाप बैठी रहना यार।

प्रिया की बात सुनकर डॉली बस उसको देखती रही।

प्रिया- अरे ऐसे मुँह क्या फाड़ रही है कुछ बोल ना आइडिया कैसा लगा?

डॉली- यार ऐसे आइडिया तेरे दिमाग़ में आए कहाँ से और मुझे नहीं करना ये सब.. बात तो वहीं की वहीं है.. भले ही चुदेगी तू.. मगर उनकी नज़र में तो मैं ही हूँ ना.. वो तो मुझे पूरे स्कूल में बदनाम कर देंगे।

प्रिया- अरे यार अब तू ही कुछ सोच ले.. मुझे तो जो समझ आया मैंने तुझे बोल दिया।

डॉली- देख प्रिया तू मेरी बात मान ले.. चेतन सर का लौड़ा 8″ का है और मोटा भी बहुत है.. उन्हें चोदने का बहुत ज़्यादा अनुभव भी है.. तू अपनी सील उनसे ही तुड़वा ले।

प्रिया- नहीं यार, तू मुझे सर के लौड़े का लालच मत दे… मैंने पक्का मन बना लिया है.. सील तो रिंकू से ही तुड़वाऊँगी.. उसके बाद चाहे उसके दोस्त भी चोद लें या कोई और… मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

डॉली- यार तूने मुझे दुविधा में डाल दिया.. कुछ सोचना पड़ेगा मुझे.. तू ऐसा कर आज रहने दे.. मैं कल बताती हूँ कि कैसे रिंकू को राज़ी करना है… अब तो कुछ भी हो जाए तेरी चूत की सील रिंकू ही तोड़ेगा।

प्रिया- थैंक्स यार उम्म्म्मा…

ख़ुशी के मारे प्रिया ने डॉली को चूम लिया।

डॉली- अब ये सब बातें भूल जा देख आज शुक्रवार है.. मैडी का जन्मदिन सोमवार को है.. अभी काफ़ी वक्त है। मैं कुछ ना कुछ सोच लूँगी चल अभी थोड़ी पढ़ाई कर लेते हैं यार…

प्रिया- अरे यार तू इतनी अच्छी स्टूडेंट है.. तू तो पक्का पास हो जाएगी.. तो क्यों इतना पढ़ती है.. चल मुझे अपनी कहानी सुना ना..

डॉली- नहीं अभी बस स्टडी.. और कुछ नहीं। फिर कभी अपनी बात बता दूँगी।

प्रिया बुझे मन से उसके साथ पढ़ने लगी।

शाम तक प्रिया वहीं रही.. उसके बाद डॉली ने उसे भेज दिया और खुद चेतन सर के घर जाने की तैयारी में लग गई।

सबसे पहले तो वो नहा कर फ्रेश हुई उसके बाद उसने ब्लू जींस और सफ़ेद टी-शर्ट पहनी.. बाल भी खुले रखे और घर से निकल गई।

दोस्तों इस ड्रेस में डॉली बहुत सुन्दर दिख रही थी.. चुस्त टी-शर्ट में से उसके मम्मे साफ दिख रहे थे और जींस में से गाण्ड एकदम बाहर को निकल रही थी।

कोई अगर उसको पीछे से देख ले तो उसके मन में बस यही विचार आए कि काश एक बार इसकी गाण्ड मार लूँ.. उसका लौड़ा तो बगावत कर दे कि अभी मुझे इसकी गाण्ड में घुसना है..

मगर ऐसा हो नहीं सकता ना.. चलो ये सब बातें जाने दो कहानी पर आती हूँ।

डॉली आराम से अपनी धुन में चली जा रही थी।

सुधीर उसी जगह खड़ा उसका इन्तजार कर रहा था।

उसको देखते ही सुधीर की आँखों में चमक आ गई।

सुधीर- वाह क्या क़यामत लग रही हो.. आज तो क्यों इस बूढ़े पर सितम ढा रही हो.. ऐसे जलवे मत दिखाओ.. देखो लौड़ा हरकत में आ गया तुमको देख कर।

डॉली- हा हा हा आप भी ना अंकल ओह.. उप्पस सॉरी सुधीर जी…

सुधीर- हाय.. मार डाला रे जालिम आज क्या कत्ल करने का इरादा है…

डॉली- आप को ऐसा क्यों लगा.. मैंने कौन सा हाथ में खंजर ले रखा है।

सुधीर- बेबी तुमको खंजर की क्या जरूरत.. तेरे पास तो ऐसे-ऐसे बॉम्ब हैं कि आदमी को एक ही वार में ढेर कर दें।

डॉली- अब ये पहेलियां अपने पास रखो.. मैंने जो काम बताया था वो किया आपने?

सुधीर- जानेमन ऐसा हो सकता है क्या कि तुम कोई बात कहो और मैं ना करूँ.. अरे तुमने तो मुझे वो दिया है जो मरते दम तक मैं तेरा अहसानमंद रहूँगा.. ले ये रही तेरी चाभी.. मगर एक बात का ध्यान रखना… अपने दोस्त को मेरे बारे में कुछ ना बताना.. बस कोई बहाना बना देना ठीक है।

अरे अरे ना ना.. दोस्तों दिमाग़ मत लड़ाओ कि कैसी चाभी.. कहाँ की चाभी आप शायद भूल गए होंगे कि कल डॉली और सुधीर के बीच कुछ काम की बात हुई थी.. बस यही था वो काम..

मैं आपको बताती हूँ कल डॉली ने सुधीर से उसके घर की डुप्लिकेट चाभी माँगी थी..

तब वो चौंका था मगर डॉली ने उसे समझाया कि उसका कोई दोस्त है उसके साथ वो कभी दिन में वहाँ मज़े लेने आएगी.. जब सुधीर होटल पर रहेगा..

बस सुधीर मान गया और उसने आज चाभी दे दी।

अब आप ये सोच रहे होंगे कि कौन दोस्त तो आपको बता दूँ डॉली के मन में मैडी का ख्याल आया था कि शायद कभी उसको अपनी चूत का मज़ा दे दूँ तो जगह तो चाहिए ना.. बस यही सोच कर उसने चाभी ली।

 


डॉली- थैंक्स अब मैं जाती हूँ देर हो रही है।

सुधीर- अरे ये क्या.. आज भी मुझे सूखा रहना होगा.. जान बस थोड़ी देर के लिए आ जाओ ना.. उसके बाद चली जाना…

डॉली- नहीं.. नहीं.. ऐसा करो आने के वक्त मैं आती हूँ.. अभी जल्दी जाना जरूरी है।

सुधीर ने बुझे मन से उसको जाने दिया मगर उससे वादा लिया कि आते समय वो उसके घर आएगी।

डॉली सीधी चेतन के घर जा पहुँची।

ललिता- ओये होये.. क्या बात है.. आज तो बड़ी मस्त लग रही हो.. क्या इरादा है मेरी दीपा रानी का…

डॉली- इरादा तो आप जानती ही हो.. कहाँ हैं मेरे राजा जी.. दिखाई नहीं दे रहे।

ललिता- अन्दर बैठे हैं तेरा ही इन्तजार कर रहे हैं.. जा जाकर मिल ले बड़े उतावले हो रहे हैं तेरे लिए…

जब डॉली कमरे में गई तो चेतन को देख कर चौंक गई.. चेतन एकदम नंगा बैठा लौड़े को सहला रहा था।

डॉली- ऊह.. माँ.. ये क्या है सर.. आप ऐसे क्यों बैठे हो.. इतनी भी क्या जल्दी थी आपको.. मेरे आने का इन्तजार भी नहीं किया और लौड़े को कड़क करने बैठ गए.. मैं कब काम आऊँगी।

चेतन कुछ बोलता तभी पीछे से ललिता आ गई।

ललिता- हा हा हा हा चेतन जवाब दो.. हा हा हा चुप क्यों हो.. हा हा हा…

चेतन- बस भी करो.. इतना हँसोगी तो पेट में दर्द हो जाएगा।

डॉली- अरे कोई मुझे भी बताएगा कि क्या हुआ?

चेतन- अरे कुछ नहीं डॉली… हम दोनों मजाक-मस्ती कर रहे थे… बस उसी दौरान लौड़े पर ज़ोर से चोट लग गई.. बड़ा दर्द हुआ.. इसी लिए पैन्ट निकाल कर इसे सहला रहा था कि तुम आ गईं.. बस इसी बात पर अनु को हँसी आ रही है।

ललिता अब भी हँसे जा रही थी.. डॉली जल्दी से बिस्तर पर चढ़ गई और लौड़े को देखने लगी।

डॉली- ओह.. लाओ मुझे दो मेरे प्यारे लौड़े को.. मैं अभी सहला कर इसका दर्द मिटा दूँगी।

डॉली लौड़े को बड़े प्यार से सहलाने लगी और फूँक मारते-मारते उसने लौड़े को चूसना शुरू कर दिया।

ललिता- लो अब आपका सारा दर्द भाग जाएगा.. आपकी दीपा रानी के मुलायम होंठ जो लग रहे हैं लौड़े पर…

चेतन- आ.. आह्ह.. हाँ सही कहा तुमने.. अब ये आ गई है तो सब ठीक कर देगी।

डॉली कुछ ना बोली बस अपने काम में लगी रही। लौड़ा अब अपने पूरे शबाव पर आ गया था।

चेतन- उफ़फ्फ़ मज़ा आ रहा था मुँह से निकाला क्यों मेरी जान चूसो ना…

डॉली- अब बस चुसवाते ही रहोगे क्या.. मेरी चूत में जो जलन हो रही है.. उसका क्या?

चेतन- आज तो बड़ी मस्त लग रही है.. क्या बात है चल थोड़ी देर और चूस.. उसके बाद तेरी चूत की आग मिटाऊँगा।

डॉली होंठ भींच कर लौड़े को चूसने लगती है।

चेतन- आ आह्ह.. उफ्फ मज़ा आ रहा है मस्त.. मेरी जान ऐसे ही मज़ा देती रहना..

तभी फ़ोन की घंटी बजती है ललिता फ़ोन उठाती है और चेतन को आवाज़ देती है कि उनके लिए है।

चेतन का सारा मूड ऑफ हो जाता है वो बेमन से जाता है और बात करने के बाद तो उसका चेहरा और ज़्यादा उतर जाता है।

डॉली- क्या हुआ मेरे राजा जी.. परेशान दिख रहे हो?

चेतन- ये साले ट्रस्टी को भी आज ही आना था.. स्कूल से फ़ोन आया है.. हमारे ट्रस्टी साहब आए हैं.. पूरा स्टाफ वहाँ होना जरूरी है.. मेरा तो दिमाग़ खराब हो गया है।

ललिता- तो चले जाना.. पहले लौड़े को तो शान्त कर लो.. देखो बेचारी कैसे आँखें फाड़े तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

चेतन- अरे नहीं यार.. फ़ौरन जाना होगा.. उनके आने से पहले जाना जरूरी है.. मैं अपनी इमेज खराब नहीं कर सकता।

डॉली भी बाहर आ गई थी और उसने सब सुन लिया था।

डॉली- सर आप जाओ आज नहीं तो कल सही.. मैं कहाँ भागे जा रही हूँ।

चेतन- थैंक्स जान.. तुम अपनी दीदी के साथ मज़ा करो ओके.. अगर जल्दी आ गया तो तेरी चुदाई पक्का करूँगा।

चेतन ने आनन-फानन में कपड़े पहने और निकल गया।

ललिता- क्यों बहना.. क्या इरादा है चूत चाट कर मज़ा लेगी या अपनी चूत चटवा कर शान्त होगी।

डॉली- नहीं दीदी कुछ नहीं.. मैं भी जाती हूँ आज मुझे अपनी फ्रेंड से मिलने जाना है.. मैं यहाँ आने वाली ही नहीं थी मगर सर गुस्सा करते इसलिए आ गई।

ललिता- अरे कौन सी फ्रेंड से मिलने जा रही है और हाँ.. कल मैं पूछना भूल गई.. उस दिन तू यहाँ से तो कब की निकल गई थी मगर घर इतनी देर बाद पहुँची?

डॉली थोड़ी चौंक सी गई और बस ललिता को देखने लगी।

ललिता- अरे चौंक मत तेरी माँ का फ़ोन आया था कि डॉली को भेज दो… तब तुम्हें गए हुए काफ़ी देर हो गई थी.. मैं कुछ बोलती उसके पहले तुम घर पहुँच गई थीं।

डॉली को याद आ गया जब वो घर गई थी.. उसकी माँ ने उसके सामने फ़ोन रखा ही था।

डॉली- व्व..वो दीदी मेरी एक फ्रेंड है प्रिया.. वो रास्ते में मिल गई थी.. त..त..तो बस देर हो गई।

ललिता- बहना तू बहुत भोली है तुझे झूठ बोलना बिल्कुल नहीं आता.. तेरे चेहरे से साफ पता चल रहा है कोई तो बात है.. जो तू छुपा रही है।

डॉली- न न नहीं दीदी ऐसी क..कोई बात नहीं है।

ललिता- देख तू नहीं बताना चाहती.. तो मत बता… लेकिन एक बात सुन ले.. मैंने तुझे चुदाई का ज्ञान दिया है और इस नाते मैं तेरी गुरू हूँ.. अब आगे तेरी मर्ज़ी.. मैं तो बस तेरी भलाई ही चाहती हूँ।

ललिता ने डॉली को इस तरह ये बात कही कि डॉली बहुत शरमिंदा हो गई और उसने ललिता से माफी माँगी फिर सारी बात ललिता को बता दी।

ललिता- हे राम तू लड़की है या क्या है.. इतनी बड़ी बात मुझे अब बता रही है.. तू इतनी भोली लगती है मगर है नहीं.. कौन था वो बूढ़ा उसके तो मज़े हो गए.. साले ठरकी को कमसिन चूत मिल गई और ये प्रिया कहाँ से टपक गई.. उसको पता चल गया.. अब वो चेतन और तुझे सारे स्कूल में बदनाम कर देगी।

डॉली- दीदी आप पूरी बात सुनो.. वो कुछ नहीं कहेगी।

डॉली फिर बोलने लगी.. ललिता सुकून से सब बातें सुन रही थी डॉली ने अब तक की सारी बात बता दीं.. मैडी और उसके दोस्तों की भी प्रिया के साथ आज जो लेसबो किया और आते वक्त सुधीर से मिली.. सब बात बता दीं।

ललिता- हम्म.. तो ये बात है प्रिया की चूत अपने ही भाई के लौड़े के लिए तड़फ रही है और उसने तुझे बलि का बकरा बना दिया।

डॉली- हाँ दीदी.. अब आप ही कुछ उपाय बताओ और प्लीज़ सर को कुछ मत बताना.. मैंने शर्म के मारे ही आप दोनों को अब तक कुछ नहीं बताया था।

ललिता- कैसी शर्म?

डॉली- आप क्या सोचते मेरे बारे में.. कि मैंने कैसे एक बूढ़े से चुदवा लिया..

ललिता- अरे ऐसा कुछ नहीं है ये चूत की भूख होती ही कुछ ऐसी है.. जब इसे लौड़ा चाहिए तो ये कभी नहीं सोचती कि लौड़ा किसका है… बस लौड़ा होना चाहिए.. अब जवान हो या बूढ़ा.. घर हो या बाहर.. सब चलता है।

डॉली- ओह्ह दीदी आप बहुत अच्छी हो… अब बताओ भी मुझे क्या करना चाहिए?

ललिता- देख वैसे तो वो लड़के सही नहीं है और तू भी उनसे चुदना नहीं चाहती.. मगर प्रिया को उनसे चुदने में कोई एतराज नहीं है.. तू ऐसा कर मैं जो बताऊँ वो कर.. तुम्हारी चिंता भी खत्म हो जाएगी और प्रिया का अरमान भी पूरा हो जाएगा।

ललिता ने कुछ टिप्स डॉली को दिए और अच्छे से उसको समझा दिया कि बड़े ध्यान से सब करना।

डॉली- ओह्ह.. दीदी यू आर ग्रेट.. क्या आइडिया दिया है.. अब तो बस सारी परेशानी ख़त्म हो गई.. अच्छा अब मुझे जाने दो सुधीर को भी थोड़ा खुश कर दूँ ताकि काम में कोई रूकावट ना आए।

ललिता- अच्छा जा मेरी बहना कभी मौका मिला तो मैं भी उस बूढ़े को अपनी चूत का स्वाद दे दूँगी मगर उसको मेरे बारे में अभी कुछ मत बताना।

डॉली- नहीं नहीं दीदी मैं कुछ नहीं कहूँगी.. आप बेफिकर रहो…

दोस्तो, ललिता की कही बात अगर मैं यहाँ लिखती तो आगे आपको कहानी का को पढ़ने में मज़ा नहीं आता.. इसलिए अब आगे जो भी होगा या डॉली करेगी आप समझ जाना कि ललिता ने ये सब डॉली को समझाया था.. इसमें दो फायदे हैं एक तो मुझे एक ही बात को दो बार नहीं लिखना पड़ेगा और दूसरा आपको मज़ा ज़्यादा आएगा कि अब क्या होगा?

तो चलिए वापस कहानी पर आती हूँ।

डॉली वहाँ से निकल कर सुधीर के घर की ओर चल पड़ी और कुछ ही देर में वो सुधीर के घर पहुँच गई। दरवाजा खुला था तो वो सीधे अन्दर चली गई।

सुधीर बैठा हुआ शराब पी रहा था उसको पता नहीं चला कि डॉली कब उसके पीछे आकर खड़ी हो गई।

 


सुधीर- ओह्ह.. मेरी छोटी सी गुड़िया जल्दी आ जाना.. उफ़फ्फ़ तेरे इन्तजार मैं तेरा ये आशिक मरा जा रहा है.. उफ्फ आज तू कितनी सेक्सी लग रही थी.. बस एक बार आजा मेरी जान.. जब तू जा रही थी तेरी गाण्ड बड़ी मटक रही थी.. आज तो तेरी गाण्ड ही मारूँगा..

सुधीर ना जाने क्या-क्या बोले जा रहा था.. डॉली पीछे खड़ी मुस्कुरा रही थी।

डॉली- अच्छा तो ये बात है.. मेरी पीठ पीछे आप मेरे बारे में इतना गंदा सोचते हो।

सुधीर एकदम से चौंक गया और उसने पीछे मुड़ कर देखा तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना ना रहा।

सुधीर- ओह्ह.. मेरी डॉली तू आ गई.. कसम से कब से तेरा इन्तजार कर रहा था.. तू इतनी जल्दी आ जाएगी, ये तो मैंने सोचा ही नहीं था.. आओ मेरे पास आओ।

डॉली- नहीं आती.. अपने शराब क्यों पी.. मुझे चिढ़ है शराब और शराबी से.. अब मैं जा रही हूँ।

सुधीर- अरे नहीं.. नहीं.. बस थोड़ी सी पी है मैंने.. मुझे अगर पता होता पहले तो कभी ना पीता.. प्लीज़ तुम मत जाओ.. इस बूढ़े पर थोड़ा तो रहम खाओ.. बरसों बाद तो मेरे सोए हुए लौड़े को तूने जगाया है.. अब इसको ऐसे ही छोड़ कर मत जाओ।

डॉली- अरे अरे.. इतने भावुक मत हो आप… अच्छा नहीं जाती बस… सुधीर खुश हो गया और उसने डॉली के होंठों पर अपने होंठ रख दिए.. मगर डॉली ने फ़ौरन मुँह हटा लिया।

डॉली- छी: छी: कितनी गंदी बदबू आ रही है.. आपके मुँह से उह..हो.. मेरा तो जी बैचेन हो गया..

सुधीर- सॉरी सॉरी.. आज के बाद कभी नहीं पिऊँगा.. अच्छा चल चुम्बन नहीं करता.. आज तूने बहुत अच्छे कपड़े पहने हैं. मैं अपने हाथों से आज एक-एक करके सारे कपड़े निकालूँगा और तुझे नंगी करूँगा।

डॉली- जो करना है.. जल्दी करो आज मैंने पढ़ाई भी नहीं की.. वहाँ से फ्रेंड से मिलने का बहाना करके आपके पास आई हूँ।

सुधीर- ओह.. माय डार्लिंग.. यू आर सो स्वीट.. मेरे लिए तूने इतना सोचा चल आ जा कमरे में.. जल्दी से सब करूँगा… आज तेरी मटकती गाण्ड मारूँगा.. बड़ा मन हो रहा है मेरा..

डॉली- वो तो ठीक है.. मार लेना मगर आपका लौड़ा बस एक ही बार खड़ा होता है.. अगर गाण्ड मारोगे तो मेरी चूत की आग कैसे शान्त करोगे?

सुधीर- उसकी फिकर तू मत कर.. मैं सब कर दूँगा.. चल अब आ भी जा मेरी जान.. कब से तड़फा रही है।

सुधीर कमरे में जाते ही डॉली को नंगा करने लगा। डॉली भी अदाएं दिखाती हुई कपड़े निकलवा रही थी।

जब डॉली पूरी तरह से नंगी हो गई तो सुधीर ने अपने कपड़े भी निकाल फेंके और डॉली के मम्मे दबाने और चूसने लगा।

डॉली भी सुधीर के लौड़े को हाथ से पकड़ कर हिलाने लगी.. जो अभी आधा-अधूरा ही कड़क हुआ था।

डॉली- ऊ आह्ह.. आराम से दबाओ ना.. आह्ह.. क्या करते हो उफ्फ…

सुधीर- जानेमन भगवान ने तुझ जैसा नायाब तोहफा मुझे दिया है तो जरा खुलकर मज़ा लेने दो ना.. आह्ह.. क्या कड़क चूचे हैं तेरे…

थोड़ी देर में ही डॉली ने लौड़े को दबा-दबा कर कड़क कर दिया था।

सुधीर अब मम्मे को छोड़ कर डॉली की गाण्ड को दबाने लगा और निप्पल चूसने लगा।

डॉली अब पूरी तरह गर्म हो गई थी और उसका मन लौड़े को चूसने का कर रहा था।

उसने सुधीर को धक्का देकर बिस्तर पे गिरा दिया और टूट पड़ी लौड़े पर..

सुधीर- हाय मार डाला रे.. अरे गुड़िया लौड़ा चूसने का इतना शौक है तो किसी जवान लड़के का चूसा कर.. आह्ह.. मेरे लौड़े में इतनी सहनशक्ति नहीं है.. चल घोड़ी बन जा मुझे गाण्ड मारने दे.. कहीं आज भी मेरा सपना टूट ना जाए।

सुधीर की हालत समझते हुए डॉली ने लौड़ा मुँह से निकाल दिया और घुटनों के बल बैठ गई।

डॉली- लो मेरे बूढ़े आशिक मार लो गाण्ड.. आप भी क्या याद रखोगे कि किस से पाला पड़ा है।

सुधीर ने लौड़ा गाण्ड के छेड़ पर रखा और ज़ोर का धक्का मारा.. पूरा लौड़ा ‘फच’ की आवाज़ के साथ गाण्ड में समा गया।

डॉली- आह मज़ा आ गया.. उफ़फ्फ़ अब चोदो.. उह्ह.. आपका लौड़ा आज तो बहुत गर्म हो रहा है.. गाण्ड में ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कोई गर्म लोहे का सरिया घुसा दिया हो.. आई.. आह्ह.. चोदो मेरे प्यारे अंकल आह्ह…

सुधीर- उह्ह उह्ह.. अरे कितनी बार बोलूँ.. आह्ह.. सुधीर बोलो.. जानू बोलो.. ये अंकल क्यों बोलती हो…

डॉली- उई आह्ह.. अब बस मुझे जो समझ में आह्ह.. आएगा.. मैं बोल दूँगी.. आह्ह.. ज़ोर से चोदो ना आ.. आह्ह..

सुधीर अपनी पूरी ताक़त से लौड़े को आगे-पीछे कर रहा था। डॉली भी गाण्ड को हिला-हिला कर सुधीर का साथ दे रही थी।

कोई 15 मिनट तक सुधीर गाण्ड मारता रहा.. मगर 60 साल का बूढ़ा घोड़ा कब तक दौड़ लगाता.. थक गया.. मगर उसने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पूरी ताक़त से डॉली की गाण्ड मारने लगा।

सुधीर- आह्ह.. आ.. हहा हहा.. ले अहहा.. हहा.. ले मेरी जान आह्ह..

डॉली- आह आई.. अरे वाहह… आ.. अंकल आह्ह.. आप तो जोश में आ गए आह.. हाँफ क्यों रहे हो.. आह्ह.. थोड़ा रेस्ट कर लो.. आह्ह.. मेरी चूत में भी बहुत खुजली हो रही है.. आई.. आपको उसको भी आहहह.. चोदना है अभी आह…

सुधीर के लौड़े ने लावा उगल दिया और डॉली की गाण्ड को पानी से भर दिया।

अब सुधीर एक तरफ लेट कर हाँफने लगा था।

डॉली- आह ससस्स क्या गाण्ड मारी है अई.. आपने… मज़ा आ गया.. अरे ये क्या आह्ह.. मेरी चूत की आग तो ठंडी करो.. आह्ह.. प्लीज़ उठो ना…

सुधीर- मेरी जान लौड़ा तो अब उठेगा नहीं.. तू ऐसा कर चूत मेरे मुँह के पास ले आ.. ऐसा चाटूँगा कि तेरी सारी खुजली मिटा दूँगा।

डॉली मन मार कर अपनी चूत सुधीर की तरफ कर देती है और बड़बड़ाने लगती है।

डॉली- उह्ह.. मेरा भी दिमाग़ खराब है जो इस बूढ़े लौड़े से चुदने आ गई कोई जवान होता तो मज़ा आता.. सर भी ना आज चले गए। अब तो कुछ करना ही पड़ेगा.. ये चूत की आग तो दिन पे दिन बढ़ती ही जा रही है।

सुधीर- अरे क्यों बड़बड़ा रही है.. मैं आज रात किसी काम के सिलसिले में बाहर गाँव जा रहा हूँ.. कल देर रात तक आऊँगा.. तू अपने उस दोस्त को कल यहाँ ले आ.. जितना चुदना है.. उससे चुद लेना.. अब मुझे चूत चाटने दे…

सुधीर की बात डॉली को समझ आ गई और उसने कुछ सोच कर हल्की सी मुस्कान देते हुए कहा।

डॉली- हाँ अंकल अब लाना ही पड़ेगा आह्ह.. आप अभी तो मुझे शान्त करो आइईइ.. मेरी चूत जल रही है.. आह प्लीज़ आह्ह.. ऐसे ही आह्ह.. मज़ा आ रहा है चाटो आइईइ.. उफ़फ्फ़ प्लीज़ आह उफ़फ्फ़ क्या मज़ा आ रहा है…

सुधीर चूत को होंठों में दबा कर उसको ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था।

डॉली आनन्द के मारे छटपटाने लगी थी और ज़्यादा देर वो इस चुसाई को सहन ना कर पाई और कमर उठा-उठा कर सुधीर के मुँह में झड़ने लगी।

सुधीर भी पक्का रण्डीबाज था.. सारा रस ऐसे चाट रहा था जैसे कोई रसमलाई की मलाई हो।

चूत की आग ठंडी होने के बाद डॉली ने सुधीर के गाल पर एक पप्पी दी और अपने कपड़े पहनने लगी।

सुधीर- अरे रूको गाण्ड पर मेरा वीर्य लगा है.. साफ कर लो कपड़े गंदे हो जाएँगे।

डॉली- ओह.. मैंने देखा नहीं.. आप ही साफ कर दो ना प्लीज़…

सुधीर ने पास पड़े एक कपड़े से डॉली की गाण्ड साफ की और ललचाई निगाहों से उसको देखने लगा।

डॉली- क्या हुआ.. ऐसे क्या देख रहे हो?

सुधीर- क्या बताऊँ ये तो उमर का तकाजा है.. वरना ऐसी मस्त गाण्ड को बार-बार मारने का दिल करता है.. काश तुम मेरी जवानी में मुझे मिली होतीं तो बताता कि मैं क्या चीज था।

डॉली की हँसी निकल जाती है.. वो अपने कपड़े पहनने लगती है और सुधीर को देख कर आँख मारते हुए कहती है- जो बीत गया..सो बीत गया.. उसको भूल जाओ.. जो सामने है.. उसका मज़ा लो.. चलती हूँ अंकल.. आपको समय-समय पर ठंडा करने आती रहूँगी ओके.. बाय अब चलती हूँ।’

डॉली अपने घर चली गई और जैसा कि आप जानते हो चुदाई के साथ साथ उसको पढ़ाई की भी फिकर रहता है.. तो पढ़ने बैठ गई।

 


अगले दिन जब डॉली स्कूल गई खेमराज और रिंकू गेट के पास खड़े थे मैडी उनसे दूर खड़ा किसी लड़के से बात कर रहा था।

जैसे ही डॉली की नज़र रिंकू पर गई.. उसको प्रिया की कही हुई बात याद आ गई और उसकी नज़र रिंकू की पैन्ट पर चली गई शायद उसकी आँखें लौड़े का दीदार करना चाहती हों.. मगर यह कहाँ मुमकिन था।

वो बस देखती हुई गाण्ड को मटकाती हुई चली गई।

हाँ.. आज डॉली थोड़ा ज़्यादा ही अदा के साथ चल रही थी.. शायद उनको तड़पाने का इरादा हो।

खेमराज- अरे यार.. ये साली तो दिन पे दिन क़यामत होती जा रही है.. कसम से साली की गाण्ड देखी तूने.. क्या लहरा रही थी…

डॉली अन्दर चली गई थी तब तक मैडी भी उनके पास आ गया था।

रिंकू- यार मुझे शक हो रहा है।

मैडी- कैसा शक बे.. बता तो…

रिंकू- यार मुझे लगता है.. हम पेड़ के नीचे बैठ कर आम के पकने का इन्तजार कर रहे हैं और कोई साला पेड़ पर चढ़कर कच्चे आम का ही मज़े ले रहा है।

खेमराज- यार पहेली मत बुझा.. सीधे से बता ना क्या हुआ?

रिंकू- तूने गौर नहीं किया क्या.. साली के चूचे बड़े-बड़े लग रहे हैं और गाण्ड भी बाहर को निकली हुई है.. लगता है कोई साला इसकी ज़बरदस्त ठुकाई कर रहा है.. हम साले लौड़े हिलाते रह गए हैं।

मैडी- क्या बकवास कर रहा है साले.. हमारे सिवा किसके लौड़े से चुदवाएगी ये.. तुझे भ्रम हो गया लगता है..

खेमराज- हाँ यार.. ऐसी निराशा वाली बातें मत कर.. बस दो दिन की बात है सोमवार को तो ये हमारी हो ही जाएगी।

रिंकू- अबे सालों.. माना मैंने किसी को नहीं चोदा.. मगर ये नजरें कभी धोखा नहीं खा सकतीं.. बहुत सी लड़कियों को ताड़ चुका हूँ भाभियों को भी नहीं बख्शा.. कुँवारी और चुदी हुई लड़की की चाल में बहुत फ़र्क होता है.. तुम मानो या ना मानो.. ये पक्का चुद चुकी है।

मैडी- अबे बस भी कर साले… जब ये हाथ आएगी ना, तब देख लेना, इसकी सील में ही तोड़ूँगा.. तब बोलना जो तुझे बोलना है।

रिंकू- चल लगी 1000 की शर्त.. अगर ये सील पैक हुई तो मैं हारा.. नहीं तो तुम.. ओके…

मैडी- चल लगी.. अब तो तेरे 1000 लेने ही है।

तीनों बस इसी उलझन में अन्दर चले गए.. क्लास शुरू हो गई।

क्लास में आज वैसे तो कुछ खास नहीं हुआ.. हाँ एक बात हुई.. आज उनके इम्तिहान के बारे में बताया गया।

चेतन सर ने ही सबको बताया।

चेतन- देखो बच्चों तुम सबको इम्तिहानों के प्रवेश-पत्र तो मिल ही गए हैं। इम्तिहान मंगलवार से शुरू होना है.. तो सब अच्छे से तैयारी करना.. वैसे तो स्कूल की 15 दिन पहले छुट्टी हो जानी चाहिए थी मगर तुमको ज़्यादा पढ़ने का मौका मिल जाए.. इसलिए आज से छुट्टी कर दी गईं हैं.. बस आज ही स्कूल लगेगा.. कल रविवार की छुट्टी तो अब सोमवार को भी आप सब घर पर ही अपनी तैयारी करना। आज स्कूल का आखिरी दिन है.. किसी को कुछ पूछना हो तो पूछ लेना।

सभी खुश थे कि स्कूल से निजात मिल गई.. मगर वो तीनों दोस्त खुश नहीं थे।

उनको तो डॉली को देखे बिना चैन ही नहीं आता था।

सब कुछ नॉर्मल रहा और छुट्टी हो गई। प्रिया और डॉली एक साथ बाहर निकलीं। मैडी भी उनके पीछे-पीछे चलने लगा।

मैडी- डॉली रूको.. एक मिनट तुमसे बात करनी है।

डॉली- क्या है बोलो?

मैडी- वो आज स्कूल का आखिरी दिन है.. अब कल से हम मिल नहीं पाएँगे.. तुम अपना नम्बर दे दो ना.. ताकि पार्टी के लिए तुमको बता सकूँ।

डॉली- ओह्ह.. ऐसा करो तुम अपना नम्बर दो.. मैं खुद कॉल करके पूछ लूँगी।

मैडी खुश हो गया और अपना नम्बर उसे दे दिया। जाते-जाते मैडी ने प्रिया को भी आने की दावत दे दी।

प्रिया- यार अब तो मैं भी आ रही हूँ क्या सोचा तुमने… कैसे करना है।

डॉली- मेरी जान फिकर मत कर.. मैंने वादा किया है ना.. तुझे रिंकू से जरूर चुदवा दूँगी.. अब घर जा.. पढ़ाई कर, मुझे पता है क्या करना है.. तू मुझे रिंकू का नम्बर दे दे।

प्रिया- नम्बर का क्या करोगी… उसको फ़ोन करके कहोगी क्या?

डॉली- अरे यार तू सवाल बहुत करती है.. तू बस नम्बर दे बाकी मैं संभाल लूँगी।

प्रिया ने नम्बर दे दिया।

प्रिया- ओके यार मुझे तुझ पर विश्वास है.. अच्छा बाय चलती हूँ।

प्रिया अपने रास्ते निकल गई.. खेमराज और रिंकू दूर खड़े उन दोनों को देख रहे थे।

खेमराज- यार ये क्या चक्कर है.. डॉली की प्रिया से कब से दोस्ती हो गई?

रिंकू- अबे काहे की दोस्ती.. इम्तिहान के बारे में बात कर रही होगीं.. दोनों ही पढ़ाकू जो ठहरीं।

खेमराज- यार एक बात कहूँ.. प्रिया का रंग साँवला है.. मगर दिखने में नाक नक्शा ठीक-ठाक है।

रिंकू- अबे बहन के लौड़े.. क्या बकवास कर रहा है.. वो मेरी बहन है.. समझा साले.. तू दोस्त है तब ऐसी बात बोल गया.. अगर किसी और ने बोली होती ना.. तो मैं साले का मुँह तोड़ देता।

हैलो दोस्तों.. सॉरी.. कहानी को रोक कर मैं बीच में आ गई.. मगर क्या करूँ.. बात ही ऐसी टेंशन की है.. ये रिंकू तो प्रिया के बारे में इतना चिढ़ रहा है.. तो उसके ऊपर कैसे चढ़ेगा? मेरा मतलब है.. कैसे चोदेगा उसको? अब डॉली क्या करेगी?

चलो इन सब सवालों के जबाव आगे मिल जाएँगे.. अभी कहानी पर ध्यान दीजिएगा।

रिंकू वहाँ से किसी काम के लिए चला गया मगर खेमराज ने शायद आज पहली बार ही प्रिया को इतने गौर से देखा था। उसका मन प्रिया के लिए मचल गया था।

खेमराज वहाँ से सीधा मैडी के घर गया और उसको जरूरी काम है बताकर बाहर बुलाया।

मैडी- अरे क्या है.. अभी तो साथ थे.. तब अपना काम क्यों नहीं बताया.. अब क्या हो गया?

खेमराज- भाई आज मैंने वो देखा है.. जो अपने शायद कभी ना देखा हो।

मैडी- ऐसा क्या देख लिया तूने?

खेमराज- डॉली के साथ आज प्रिया बात कर रही थी ना.. तब मैंने बड़े गौर से उसकी जवानी पर नज़र डाली.. भाई क्या मस्त आइटम है वो.. क्या फिगर है उसका…

वो आगे कुछ बोलता.. मैडी ने उसे चुप करा दिया।

मैडी- चुप.. चुप.. क्या बकवास किए जा रहा है.. भूल गया क्या प्रिया कौन है.. साले रिंकू की बहन है वो.. और रिंकू को तू जानता है ना.. कितना अड़ियल दिमाग़ का है.. उसे पता चल गया ना, तेरा मुँह तोड़ देगा वो।

खेमराज- क्या कर लेगा वो.. प्रिया कौन सी उसकी सग़ी बहन है और तू भूल गया.. जब मेरी बुआ की लड़की यहाँ आई थी.. तो उस पर सबसे पहले रिंकू ने ही नियत खराब की थी.. उसको चोदने तक का प्लान बना लिया था.. क्या वो मेरी बहन नहीं थी?

मैडी- साले उसको तो तू भी चोदना चाहता था.. ये तो अच्छा हुआ वो यहाँ एक दिन भी नहीं रूकी… चली गई वरना सबसे पहले तू ही उसको चोदता।

खेमराज- कुछ भी हो.. अगर रिंकू उसके बारे में गंदा बोल सकता है तो मैं भी बोलूँगा और यार.. अगर डॉली हाथ ना आई तो हम सारी जिंदगी क्या लण्ड हाथ से ही हिलाते रहेंगे.. प्रिया का कोई ब्वॉयफ्रेण्ड नहीं है.. मौका अच्छा है पटा लेते है साली को.. यार रंग पर मत जा.. उसका फिगर देख बस…

मैडी- शुभ-शुभ बोल साले डॉली के लिए तो दिन रात तड़फ रहा हूँ वो हाथ कैसे नहीं आएगी।

खेमराज- अच्छा आ जाएगी.. बस मगर प्रिया भी फँस जाए तो इसमें बुराई क्या है? कभी उसको भी चोद लेंगे।

मैडी- साले मैं कोहिनूर हीरा माँग रहा हूँ और तू कोयले की बात कर रहा है।

खेमराज- बस.. बस.. इतनी भी काली नहीं है.. तू मान या ना मान मेरा तो प्रिया

पर दिल आ गया.. अब मैं तो उसको फँसा कर रहूँगा.. तू साथ दे या ना दे ओके.. अब चलता हूँ।

मैडी- जा तुझे जो करना है कर.. मैं इस काम में तेरा साथ नहीं दूँगा ओके…

खेमराज वहाँ से चला गया और मैडी भी अपने घर वापस आ गया।

चलो दोस्तों डॉली के पास चलते हैं वो क्या कर रही है।

डॉली अपने कमरे में बैठी पढ़ाई में बिज़ी थी.. मगर उसको बार-बार प्रिया का ख्याल आ रहा था। अचानक वो उठी और रिंकू को फ़ोन लगा दिया।

रिंग बजी सामने से शायद किसी और ने फ़ोन उठाया।

डॉली ने काट दिया.. ऐसे ही 2 या 3 बार उसने फ़ोन लगाया.. मगर रिंकू ना होने के कारण फ़ोन काट दिया। अब उसका मन नहीं माना तो वो वापस पढ़ने बैठ गई और पढ़ते-पढ़ते उसकी आँख लग गई।

 


दोस्तो, डॉली काफ़ी देर बाद हड़बड़ा कर उठी.. शायद उसको कोई सेक्सी सपना आ रहा था क्योंकि उठते ही उसने अपनी चूत पर ऊँगली रखी और बड़बड़ाने लगी।

डॉली- शिट.. ये तो सपना था मगर था अच्छा.. कैसे चूत पानी-पानी हो गई.. आज तो सर से खूब चुदवाऊँगी बहुत मन हो रहा है.. ओह्ह.. वक्त भी होने वाला है.. ऐसा करती हूँ तैयार हो जाती हूँ।

डॉली बाथरूम गई और फ्रेश होकर बाहर आई.. कपड़े चेंज करने ही वाली थी कि फ़ोन की घन्टी बजने लगी.. जब काफ़ी देर तक किसी ने नहीं उठाया तो वो बाहर गई और फ़ोन उठाया।

डॉली- हैलो…

ललिता- हैलो डॉली.. मैं ललिता बोल रही हूँ.. अच्छा किया तूने फ़ोन उठा लिया.. यार आज पढ़ने मत आना चेतन की फैमिली आई हुई है.. आज कुछ नहीं हो पाएगा।

डॉली- उह्ह.. दीदी अपने तो सारा मूड ही खराब कर दिया.. आज बड़ा मन था मेरा…

ललिता- अरे तो बूढ़ा किस दिन काम आएगा.. आज उसके पास चली जा..

डॉली- कहाँ दीदी.. आज वो भी नहीं है.. दूसरे शहर किसी काम से गया है।

ललिता- तो मेरी जान मैंने जो आइडिया बताया था.. आज वो ही आजमा ले शायद तेरी परेशानी भी ख़त्म हो जाएगी और चूत को आराम भी मिल जाएगा।

डॉली- आप सही बोल रही हो.. मैं स्कूल से आई तब से ट्राइ कर रही हूँ मगर वो फ़ोन पर आ ही नहीं रहा.. कोई और ही उठा रहा है।

ललिता- ट्राई करती रह.. ऐसा कर अब लगा… शायद काम बन जाए।

डॉली- ठीक है.. दीदी करती हूँ ओके बाय.. रखती हूँ.. अब कल ही बताऊँगी। पहले उसको फ़ोन तो कर लूँ।

ललिता- ओके मेरी बहना.. बाय.. बेस्ट ऑफ फक हा हा हा हा…

डॉली भी हँसने लगी और फ़ोन रख दिया। वो फ़ौरन अपने बैग के पास गई.. प्रिया ने जो नम्बर दिया था उसको देखा और उसको फ़ोन लगा दिया।

डॉली की किस्मत अच्छी थी.. अबकी बार सामने से रिंकू ने ही फ़ोन उठाया।

डॉली- हाय रिंकू.. कैसे हो.. क्या कर रहे हो…?

रिंकू- मैं ठीक हूँ.. तुम कौन बोल रही हो…?

डॉली- मैं डॉली बोल रही हूँ।

रिंकू- ओह्ह.. हाय डॉली.. अच्छा हूँ यार.. मुझे यकीन नहीं हो रहा तुमने फ़ोन किया।

डॉली- ओके ओके.. ठीक है ये बताओ क्या कर रहे हो.. फ्री हो क्या अभी…?

रिंकू- अरे यार एकदम फ्री हूँ और अगर नहीं भी होता तो तुम्हारे लिए सब काम छोड़ कर फ्री हो जाता.. कहो क्या बात है?

डॉली- मेरा घर जानते हो ना..?

रिंकू- हाँ जानता हूँ।

बस उसी रास्ते पर एक बीएसएनएल का बड़ा सा बोर्ड लगा है.. उसके पास एक गली जा रही है.. तुम उस गली में अभी आ जाओ.. एक बहुत जरूरी बात करनी है।

रिंकू की तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।

रिंकू- मैं अभी आया बस 10 मिनट लगेंगे।

डॉली- और हाँ प्लीज़ अकेले ही आना.. अपने दोस्तों को साथ मत ले आना और उनको बिल्कुल भी मत बताना कि मैंने फ़ोन किया.. बहुत जरूरी बात है सिर्फ़ तुमको बतानी है.. प्लीज़ उनको बिल्कुल मत बताना।

रिंकू- ठीक है.. मैं अकेला आ रहा हूँ.. बस अभी निकलता हूँ।

फ़ोन रखने के बाद डॉली ने एक फोन और किया और फिर अपने कपड़ों में से क्या पहनूं ये सोचने लगी और आख़िर उसे एक ड्रेस पसन्द आई.. झट से उसको पहनने के लिए उठा लिया।

रिंकू जल्दी से तैयार हुआ.. खूब सारा परफ्यूम लगा कर वो घर से निकल गया।

इधर डॉली भी तैयार हो गई थी मगर वो अपने कमरे में बैठकर घड़ी की ओर देख रही थी।

कुछ देर बाद डॉली ने अपने आप से बात की।

डॉली- दस मिनट हो गए.. अब तक तो वो आ गया होगा.. अब मुझे भी निकलना चाहिए।

डॉली अपनी मॉम को बाय बोलकर निकल गई।

दोस्तों आपको बताना भूल गई आज डॉली ने पारदर्शी एकदम पतली सी ब्लॅक टी-शर्ट और उस पर सफ़ेद जैकेट पहना था.. जो बड़ा ही फैंसी था.. और नीचे एक गुलाबी शार्ट स्कर्ट पहना..

उसकी जांघें साफ दिख रही थीं।

इस ड्रेस में कोई अगर उसको देख ले तो उस पर चोदने का जुनून सवार हो जाए।

आजकल तो वैसे ही लोगों की सोच लड़की के लिए गंदी ही होती है.. अब डॉली ने इतना सेक्सी ड्रेस पहन लिया तो ना जाने आज रास्ते में क्या क़यामत आने वाली है।

डॉली घर से निकल गई और जल्दी ही उस गली के मोड़ पर पहुँच गई.. रिंकू वहाँ खड़ा उसका ही इन्तजार कर रहा था।

जैसे ही उसकी नज़र डॉली पर गई उसकी आँखें बाहर को निकल आईं और लौड़ा पैन्ट में तंबू बनाने लगा।

क्योंकि डॉली उसकी तरफ बड़े ही सेक्सी अंदाज में आ रही थी।

उसके चूचे उसकी चाल के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे..

उसकी चिकनी जांघें रिंकू को पागल बना रही थीं।

डॉली उसके एकदम करीब आकर खड़ी हो गई।

वो पागलों की तरह बस उसको देखे जा रहा था।

डॉली- हैलो किस सोच में डूबे हो?

रिंकू- क्क्क..कुछ भी नहीं.. तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो आ…आज तक तुमको बस स्कूल ड्रेस में देखा.. आज तो एकदम प्प….

वो आगे कुछ बोलता.. डॉली ने अपनी आँखें बड़ी कर लीं और थोड़ा सा गुस्से का इज़हार किया।

रिंकू- ओह.. क..क्या कहना चाहती थी तुम.. जो मुझे यहाँ बुलाया…?

डॉली- देखो बात बहुत जरूरी है.. मैं यहाँ नहीं बता सकती।

रिंकू- त..तो कहाँ चलें…?

डॉली- देखो मेरे पास एक सेफ जगह है.. जहाँ बात हो सकती है.. मैं चलती हूँ.. मुझ से दूरी बना कर पीछे चलो.. किसी को जरा भी शक ना हो कि हम साथ जा रहे हैं।

रिंकू ने ‘हाँ’ में सर हिला दिया और डॉली के पीछे चलने लगा।

जब डॉली चल रही थी.. उन कपड़ों में उसकी गाण्ड कुछ ज़्यादा ही सेक्सी लग रही थी। बेचारा रिंकू तो पागल हुआ जा रहा था।

उसका लौड़ा आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था.. वासना उसके दिमाग़ में चढ़ गई.. एक अजीब सा नशा उस पर सवार हो गया।

आज उसने मन में ठान लिया कि अगर मौका मिला.. तो आज डॉली को ज़बरदस्ती ही सही.. चोद कर ही दम लेगा।

डॉली चलती रही और रिंकू किसी कठपुतली की तरह उसके पीछे चलता रहा।

कुछ देर बाद सुधीर के घर के पास जाकर डॉली ने जल्दी से दरवाजा खोला और अन्दर चली गई।

रिंकू को भी इशारे से जल्दी अन्दर आने को कहा.. डॉली बाहर दोनों तरफ गौर से देख रही थी कि कहीं कोई उनको देख ना ले।

रिंकू जल्दी से अन्दर आ गया और उसके चेहरे पर अचरज के भाव थे।

बहुत से सवाल एक साथ उसके दिमाग़ में आ गए.. मगर वो कुछ बोलता उसके पहले डॉली ने उसे सोफे पर बैठने को बोल दिया और खुद उसके सामने वाले सोफे पर पर पैर चढ़ा कर इस तरह बैठ गई कि रिंकू जरा सा नीचे झाँके तो उसकी पैन्टी दिख जाए।

रिंकू- ये किसका घर है और वो कौन सी जरूरी बात के लिए मुझे यहाँ बुलाई हो?

डॉली कुछ नहीं बोली..

बस हल्की सी मुस्कान देती रही और अपनी टांग को हिलाती रही..

जिससे रिंकू का ध्यान उस पर जाए और जो वो दिखाना चाहती थी.. उसको दिख जाए…

और हुआ भी वही..

रिंकू की नज़र उसकी जाँघों के बीच चली गई..

जहाँ से गोरी-गोरी जाँघों के बीच डॉली की काली पैन्टी जो बड़ी ही सेक्सी थी उसकी झलक दिख गई..

उस बेचारे का तो पहले ही हाल बुरा था.. अब तो पैन्ट में लौड़ा कसमसाने लगा.. उसका हलक सूख गया।

रिंकू- यार क..कुछ तो बोलो.. ऐसे चुप रहोगी तो कैसे पता चलेगा?

डॉली- मैं भी उसी का इन्तजार कर रही हूँ आख़िर क्या बात है बोलो?

रिंकू एकदम चौंक गया क्योंकि बात करने डॉली ने उसे बुलाया था.. अब उसको क्या पूछ रही है?

रिंकू- त..तुम ये क्या कह रही हो त.. तुमने मुझे यहाँ ब्ब..बुलाया है.. बात तुम बताओ…

डॉली- अरे इतना घबरा क्यों रहे हो.. कूल यार.. मेरे कहने का मतलब है कि तुम तीनों मेरे करीब आने की कोशिश कर रहे हो.. खास मेरे लिए मैडी होटल में पार्टी दे रहा है.. इन सब के पीछे तुम लोगों का कुछ तो मकसद होगा.. बस वो ही जानना चाहती हूँ?

रिंकू के पसीने निकल गए.. हमेशा चुपचाप रहने वाली लड़की आज इतनी सेक्सी ड्रेस पहन कर आई है.. वो भी एक ऐसी जगह.. जहाँ कोई नहीं है और बातें इतनी गहराई की कर रही है। वो चौंक सा गया कि अब क्या जबाव दे..

 
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