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साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई compleet



चेतन- अरे चुपचाप क्यों बैठी है.. देख मैंने आज तेरे लिए लौड़ा कैसा चमकाया हुआ है.. चूसेगी नहीं आज।

प्रिया के तो होश उड़ गए वो तो डॉली का प्रोग्राम चौपट करने आई थी.. यहाँ तो मामला ही दूसरा हो गया।

वो कुछ बोलती इसके पहले चेतन ने एक और धमाका कर दिया.. उसने लोवर नीचे सरका दिया।

अब लौड़ा आधा खड़ा प्रिया के होंठों के एकदम करीब था।

चेतन- अरे जानेमन क्या बात है.. नाराज़ हो क्या.. ले अब चूस ले.. देख कैसा चिकना हो रहा है.. इसे तेरे लिए ही चमकाया है.. आज तेरी चूत और गाण्ड की खैर नहीं…

प्रिया अब बुरी तरह डर गई थी और अपने ही जाल में फँस भी गई थी, उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे और क्या ना करे।

चेतन ने उसके मम्मों को दबाने शुरू कर दिए और लौड़ा को उसके होंठों से स्पर्श कर दिया।

चेतन- अरे क्या हुआ.. कुछ तो बोल.. आज मौन व्रत रख कर आई है क्या.. और तेरे मम्मे इतने कड़क क्यों लग रहे हैं.. कुछ अलग ही लग रहे हैं.. आ ले अब तो लौड़ा होंठ के पास आ गया.. चूस ना यार…

चेतन के चूचे दबाने से अब प्रिया का मन मचल गया और उसने धीरे से लौड़े की टोपी मुँह में ले ली और चूसने लगी।

चेतन- आह्ह.. मज़ा आ गया.. अरे मुँह में पूरा ले ना आह्ह..

चेतन का लौड़ा झटके से एकदम अपने असली रूप में आ गया था।

प्रिया ने डरते-डरते पूरा लौड़ा मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।

चेतन- आह मेरी जान ओफ्फ मज़ा आ गया आह्ह.. आज तो तू कुछ अलग ही अंदाज में चूस रही है आह्ह.. उफ़फ्फ़…

प्रिया अब वासना की आग में जलने लगी थी उसकी चूत रिसने लगी थी। वो और जोश में लौड़ा चूसने लगी।

चेतन की आँख अब ठीक थी.. उसने आँखें खोल ली थीं और प्रिया को डॉली समझ कर उसकी गाण्ड दबा रहा था।

दरअसल प्रिया की पीठ उसकी तरफ थी और वो लौड़ा चूस रही थी। उसका जिस्म भी डॉली जैसा ही था.. बस चमड़ी की रंगत का फ़र्क था.. जिसके कारण चेतन को अब तक कुछ पता नहीं लगा।

वो बस लौड़े की चुसाई का आनन्द ले रहा था और प्रिया भी मज़े ले रही थी।

चेतन- ओफ्फ आह्ह.. चूस.. मेरी जान आह्ह.. आज तेरी चूत और गाण्ड का भुर्ता बना दूँगा आह्ह.. अब बस भी कर.. लौड़ा को चूस कर ही ठंडा करेगी क्या आह्ह..? चल अब चूत का मज़ा लेने दे आजा मेरी जान…

चेतन ने प्रिया के सर को पकड़ कर लौड़े से हटाया और उसके चेहरे पर नज़र पड़ते ही उसके होश उड़ गए।

प्रिया भी एकदम से घबरा गई.. जैसे लंबी बेहोशी के बाद होश में आई हो।

अब चेतन से नज़रें मिला पाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था, उसने नजरें झुका लीं।

ओह.. सॉरी मित्रों.. आपको थोड़ा रुकना होगा कुछ जरूरी बात बतानी है.. आपको बता दूँ.. डॉली जब ललिता के पीछे गई थी।

तभी प्रिया यहाँ आई थी।

सारी घटनाएं एक साथ हो रही हैं तो आपको बता दूँ कि डॉली वहाँ बिज़ी थी।

प्रिया यहाँ अब अपनी हीरोइन कहाँ तक पहुँची देख आते हैं, कहीं ऐसा ना हो वो आ जाए और दोनों को इस हाल में देख ले।

डॉली वापस रिक्शा में आ रही थी तभी रास्ते में मैडी और खेमराज बाइक पर जा रहे थे.. दोनों ने उसे देख लिया डॉली की भी नज़र उन पर पड़ गई।

डॉली- अरे ये कहाँ से आ गए.. अब सर के घर जाना ठीक नहीं.. क्या पता ये पीछे आ जाएं।

डॉली ने रिक्शा अपने घर की ओर ले लिया और घर के पहले मोड़ पर उतर गई।

मैडी भी उसका पीछा करता हुआ आ गया।

डॉली ने उनको नज़रअंदाज किया और घर की तरफ चल दी।

मैडी- डॉली एक मिनट रूको तो प्लीज़…

डॉली- अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो.. बोलो क्या बात है?

मैडी- डॉली कहाँ जाकर आई हो तुम?

डॉली- एक्सक्यूज मी.. तुम होते कौन हो मुझसे सवाल पूछने वाले?

मैडी- सॉरी यार.. तुम तो बुरा मान गईं.. मेरा वो मतलब नहीं था.. कल आ रही हो ना?

डॉली- हाँ यार पक्का आऊँगी.. बोला ना अब जाओ. मुझे ऐसे रास्ते में खड़ा होना पसन्द नहीं है।

मैडी- ओके थैंक्स.. बाय.. चल बे क्या खड़ा है चल…

दोनों वहाँ से जाने लगे.. डॉली वहीं खड़ी उनको जाते हुए देख रही थी.. वो बात करते हुए जा रहे थे।

खेमराज- यार साली, दिन पे दिन क़यामत होती जा रही है.. कल का क्या सोचा है.. अब तो बता दे.. कहीं ऐसा ना हो.. कल ये आए भी और हम कुछ भी ना कर सकें।

मैडी- अबे चूतिया साला.. जब भी बोलेगा उल्टी बात ही बोलेगा… इसके लिए मैंने इतना खर्चा किया.. ऐसे थोड़े ही साली को जाने दूँगा.. चल रिंकू के पास चलते हैं, तीनों मिलकर बात करेंगे.. उसके सामने ही कल का प्लान बताऊँगा.. तब तुझे समझ आएगा।

खेमराज- अरे अभी नहीं.. बाद में जाएँगे पहले एक जरूरी कम निपटा आते हैं.. उसके बाद पूरा दिन में फ्री हूँ यार…

मैडी- कौन सा जरूरी काम बे?

खेमराज- यार पापा के दोस्त के घर ये पेपर देने हैं बस उसके बाद फ्री ही फ्री.. चल अभी तो बाइक भी है.. बाद में आते हैं ना रिंकू के पास…

मैडी ने ना-नुकुर की और फिर मान गया दोनों वहाँ से चले गए।

डॉली- चले गए हरामी.. अब जाती हूँ मेरे राजा जी के पास बेचारे राह देख रहे होंगे दीदी भी नहीं हैं घर पर.. वो तो वहाँ अपनी सहेली के साथ बिज़ी हैं।

डॉली चेतन के घर की तरफ बढ़ने लगती है।

अरे दोस्तो, अब क्या होगा प्रिया भी वहीं है.. चलो आपको वापस वहाँ ले चलती हूँ.. मज़ा आएगा।

चेतन- प्प..प्प..प्रिया तुम.. यहाँ क्या कर रही हो?

प्रिया- व..व..वो सर मैं स..सवाल पूछने आई थी.. मगर आपने..

चेतन- ओह्ह.. मैंने समझा डॉली आई.. न..न..नहीं मेरी बीवी आई है.. ऐसा समझा सॉरी.. ग़लती से डॉली मुँह से निकल गया।

चेतन ने तब तक लोवर ऊपर कर लिया था उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था।

प्रिया- आप मुझे डॉली ही समझ रहे थे.. मैं सब जानती हूँ।

चेतन- क..क्या तुमको कैसे पता?

प्रिया- वो सब बाद में बताऊँगी.. डॉली कहाँ है.. मैं उसके लिए ही आई थी।

चेतन- अभी तक तो नहीं आई.. आने ही वाली होगी.. तुम जल्दी से निकलो.. अगर वो आ गई तो गड़बड़ हो जाएगी.. तुमको फिर कभी मज़ा दूँगा।

प्रिया- सॉरी आप गलत समझ रहे हो.. डॉली ने कई बार मुझसे आपके बारे में कहा.. मैंने हमेशा मना ही किया और आज भी मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। बस सब इत्तफ़ाक़ से हो गया.. ओके मैं जाती हूँ प्लीज़ आप भी उसको कुछ मत बताना।

चेतन- अच्छा इत्तफ़ाक़ से हो गया.. लौड़ा तो बड़े मज़े से चूस रही थी.. अब जाने दो तुम्हारी मर्ज़ी.. अच्छा अब जाओ.. मैं क्यों उसको बताऊँगा?

प्रिया जब दरवाजे के पास गई.. बस खोलने ही वाली थी कि चेतन भाग कर उसके पास आ गया।

चेतन- रूको पहले मुझे देखने दो बाहर कोई है तो नहीं ना?

प्रिया साइड में हो गई.. चेतन ने थोड़ा सा दरवाजा खोला ही था कि सामने से डॉली आती हुई नज़र आई चेतन ने जल्दी से दरवाजा बन्द कर लिया।

चेतन- लो आ गई डॉली.. अब तुमको यहाँ देखेगी तो हम दोनों से ना जाने कितने सवाल पूछेगी.. तुम ऐसा करो वो सामने वाले कमरे में छुप जाओ जब मैं उसको लेकर इस कमरे में चला जाऊँ.. तब तुम निकल जाना।

प्रिया- मगर सर… छुपने की क्या जरूरत है..??

वो आगे कुछ बोलती चेतन उसका हाथ पकड़ कर दूसरे कमरे में ले गया और दरवाजा बन्द कर दिया।

तभी डॉली ने घन्टी बजा दी।

प्रिया- मेरी पूरी बात भी नहीं सुनी.. डॉली को बोल देती सवाल पूछने आई थी.. सर भी ना पागल है.. वैसे लौड़ा बड़ा मस्त है उनका.. तभी डॉली उनके प्यार में पागल हो गई है।

चेतन- आ रहा हूँ रूको…

चेतन ने दरवाजा खोला और डॉली को देख कर उसको मुस्कान दी।

चेतन- अब आ रही हो.. तुम्हारा कब से इन्तजार कर रहा हूँ।

डॉली- हाँ जानती हूँ.. अकेले बोर हो रहे होगे.. अब अन्दर भी चलो.. क्या सारी बात यही करोगे?

चेतन पीछे हट गया.. डॉली अन्दर आ गई।

चेतन- तुमको कैसे पता मैं अकेला हूँ?

डॉली- व्व..वो बस ऐसे ही अंदाज से बोल दिया मैंने.. तो क्या सच में दीदी घर पर नहीं है?

 


चेतन- हाँ अपनी सहेली से मिलने गई हैं.. तुम इतनी देरी से क्यों आई हो?

डॉली- वो घर पर थोड़ा काम था मुझे.. अब क्या सवाल करने लगे आप.. चलो थोड़ी मस्ती करते हैं।

चेतन- आ जा मेरी जान कमरे में.. आज तो पूरा दिन तेरी चूत और गाण्ड बजा कर मज़ा लूँगा..

डॉली- वहाँ नहीं आज इस कमरे में चुदवाऊँगी.. हमेशा एक ही कमरे में मज़ा नहीं आता.. आज दूसरे कमरे में चलो..

जिस कमरे में प्रिया थी.. डॉली उसी तरफ बढ़ने लगी।

चेतन- रूको डॉली आज तुम्हें क्या हो गया है.. उस कमरे में क्या खास है? चूत में लौड़ा डालना है.. चाहे इस कमरे में डालो या उसमें क्या फ़र्क पड़ जाएगा?

डॉली- मुझे तो कुछ नहीं हुआ मगर आपको शायद कुछ हो गया इतने घबरा क्यों रहे हो कोई और लड़की है.. क्या इस कमरे में हा हा हा…

चेतन- त..तू भी पागल है.. और कौन आएगी.. यहाँ चल उसमें ही चल आज तुझे वहीं चोदता हूँ।

डॉली- ये हुई ना बात.. चलो इस कमरे में जाने का कारण है कि मैं घर के हर एक कोने में आपसे चुदना चाहती हूँ ताकि घर का कोना-कोना हमारे मिलन को याद रखे.. अब आ जाओ।

प्रिया अन्दर से दोनों की बात सुन रही थी उसको बड़ा मज़ा आ रहा था।

उनकी बातों को सुनकर वो पर्दे के पीछे छुप गई। डॉली ने दरवाजा खोला तो चेतन की सांस कुछ देर के लिए थम गई।

वो जल्दी से अन्दर आया और चारों तरफ़ निगाह घुमाई।

डॉली- आ जाओ मेरे राजा जी, ये पलंग भी अच्छा है.. आज यही मज़ा लेंगे।

जब प्रिया कमरे में नहीं दिखी तो रिंकू की जान में जान आई.. मगर उसकी निगाहें अब भी उसे ढूँढ रही थीं.. उसको तो पता था कि वो यहीं कहीं छुपी हुई है।

डॉली- राजा जी कपड़े मैं निकालूँ.. या आप निकालोगे?

चेतन- अरे मेरी जान मैं ही निकालूँगा.. आजा मेरी रानी आज तो बड़ी जबरदस्त चुदाई करूँगा तेरी..

डॉली के सामने खड़ा होकर चेतन उसके कपड़े निकालने लगा। तभी पर्दे के पीछे से प्रिया ने झाँक कर अपनी मौजूदगी उसे बता दी कि मैं यहाँ हूँ।

चेतन ने इशारे से उसे वहीं रहने को कहा और डॉली को नंगा करने में लग गया।

चेतन- जान मैंने कहा था ना.. ब्रा का साइज़ अब बड़ा ले आओ.. देखो कैसे तूने इसमें ज़बरदस्ती चूचों को जकड़ा हुआ है..

डॉली- मेरे राजा आप शायद भूल गए ब्रा आपको ही लाकर देनी है.. मुझे भी अब महसूस हो रहा है.. आज बड़ी मुश्किल से ब्रा पहनी मैंने देखो.. पहले इस पहले हुक में बन्द करती थी.. अब तो आखिरी वाले में भी बड़ी मुश्किल से आई है।

चेतन अब थोड़ा खुल कर बात कर रहा था शायद वो प्रिया को रिझाने के लिए ये सब बोल रहा था।

चेतन- मेरी जान आज तेरी चुदाई के बाद साथ में जाएँगे.. तुझे ब्रा के साथ नई पैन्टी भी दिला दूँगा.. तेरी गाण्ड भी अब बड़ी होने लगी है।

डॉली- हाँ.. राजा उफ्फ क्या कर रहे हो मेरे चूचे इतनी ज़ोर से दबा दिए.. अब देखो आज आपके लौड़े को खा जाऊँगी।

चेतन ने लोवर निकाल दिया.. डॉली के कपड़े निकालते हुए उसका लौड़ा तन गया था।

चेतन- लो जानेमन लौड़ा हाजिर है.. खा जाओ इसको।

डॉली घुटनों के बल बैठ गई और लौड़े को मुँह में लेकर बड़े मज़े से चूसने लगी।

चेतन- आह.. चूस जान आह्ह.. एक बात कहूँ रात को सपने में एक परी आई थी… वो लौड़ा को बड़े अलग तरीके से चूस रही थी.. बड़ा मज़ा आया मुझे वैसे चूसो ना…

चेतन ने प्रिया को सुनाने के लिए ये बात कही ताकि उसको अच्छा लगे.. दरअसल चेतन की नियत प्रिया पर बिगड़ गई थी। अब वो किसी भी तरह उसको चोदना चाहता था।

डॉली- आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. आज तो आपका लौड़ा बहुत कड़क हो रहा है.. आह्ह.. कोई परी मुझसे अच्छा कोई नहीं चूस सकती.. मैं हूँ लौड़े की सबसे बड़ी दीवानी आह्ह..

डॉली जीभ से चेतन के लौड़े और गोटियों को चूस और चाट रही थी।

डॉली की पीठ प्रिया की तरफ थी।

प्रिया थोड़ी सी पर्दे के बाहर निकल कर सब देख रही थी। उसकी चूत भी पानी-पानी हो गई थी और ना चाहते हुए भी उसका हाथ चूत पर चला गया.. जिसे चेतन ने देख लिया।

चेतन- आह्ह.. चूस जान.. तेरी चूत की खुजली ऐसे नहीं जाएगी आह्ह.. इसे मेरा लौड़ा ही मिटा सकता है.. आह्ह.. तू एक बार मेरा लौड़ा आह्ह.. लेकर तो देख आह्ह.. बड़ा मज़ा आएगा आह्ह..

डॉली- हाँ मेरे राजा जी.. ज़रूर लूँगी एक बार क्या.. बार-बार लूँगी आह्ह.. अब मेरी चूत चाट कर बस घुसा दो लौड़ा.. आह्ह.. जल्दी से घुसा दो चूत जलने लगी है।

चेतन ने डॉली को बिस्तर पर ऐसे सुलाया कि उसका सर प्रिया की तरफ़ हो वो कुछ देख ना पाए और उसकी टाँगों को पूरा मोड़ कर उसकी चूत पे निगाह मारी।

चेतन- अरे दीपा रानी आज ये चूत ऐसे खुली हुई कैसे लग रही है.. क्या रात को कोई मोटा डंडा घुसाया है तूने इसमें?

डॉली सकपका गई.. भिखारी ने चूत को खोल दिया था और चेतन ने देख भी लिया।

डॉली- आह्ह.. आपके डंडे के सिवा और डंडा कहा से लाऊँगी आह्ह.. रात को बहुत मन था तो ऊँगली से मज़ा ले रही थी.. आह्ह.. अब आप मत तड़पाओ चाटो ना आह्ह.. मेरी चूत को…

चेतन ने अपनी जीभ चूत में घुसा दी और बस चाटने लगा।

डॉली- आ सर उह मज़ा आ गया आह्ह.. सच्ची आपके चाटने का तरीका बहुत मस्त है आह्ह.. चाटो मेरी चूत आ चाटो मेरे राजा।

प्रिया की अब हिम्मत बढ़ने लगी थी.. वो थोड़ी और बाहर निकल कर उनकी चुसाई-लीला देख रही थी और अपनी चूत मसल रही थी।

चेतन ने जब चूत से मुँह ऊपर उठाया प्रिया आँखें बन्द करके चूत रगड़ रही थी.. जिसे देख के चेतन के लौड़े में ज़्यादा तनाव आ गया और आना ही था.. डॉली को वो कई बार चोद चुका था.. प्रिया नई थी और किसी नई चूत के लिए लंड की लालसा.. आप जानते ही हो.. वो और ज़्यादा अकड़ गया।

चेतन- बस जानेमन.. अब तेरी चूत में लौड़ा डाल कर आज इसका भुर्ता बना दूँगा.. देख आज लौड़ा तुझे देख कर कैसे फुंफकार मार रहा है।

प्रिया ने आँखें खोल कर लौड़े पर नज़र डाली.. वो सब समझ रही थी कि चेतन जो कुछ भी बोल रहा है.. उसे देख कर ही बोल रहा है।

डॉली- आह्ह.. घुसा दो राजा.. अब बर्दास्त नहीं होता कर दो चूत को ठंडा.. आह्ह.. आज तो ये निगोड़ी चूत बहुत जल रही है।

चेतन ने एक ही झटके से पूरा लौड़ा चूत में पेल दिया।

डॉली- आईईइ मज़ा आ गया आह्ह.. सर आपकी ये फोर्स एंट्री बहुत मज़ा देती है.. आह्ह.. अब शुरू हो जाओ आह्ह.. रगड़ो आह्ह.. चोदो मेरे राजा.. मेरी चूत आह्ह.. आपकी ही है.. आह्ह.. चोदो।

चेतन घपाघप लौड़ा पेलने लगा। ये सब देख कर प्रिया की हालत खराब होने लगी थी.. मगर वो ना जाने क्यों छुपी हुई थी.. अब उसने स्कर्ट के अन्दर हाथ डाल लिया था और चूत को मसल रही थी।

चेतन ने इशारे से उसे स्कर्ट निकालने को कहा तो वो मुस्कुरा दी।

डॉली- आह्ह.. चोदो फास्ट.. आह्ह.. राजा मज़ा आ रहा है आह उईईइ…

चेतन- ले मेरी जान तेरे लिए तो जान हाजिर है.. आह्ह.. ऐसे मज़ा नहीं आएगा खुल कर मज़ा लो.. शर्म को उतार कर फेंक दो.. चूत आज़ाद ही अच्छी लगती है.. उसे ऐसे जकड़ कर मत रखो.. बस चुदवाती रहो आह्ह.. ले जान उहह उहह पूरा ले आह्ह.. ले..

चेतन की बातें डॉली समझ नहीं पा रही थी.. मगर प्रिया अच्छी तरह सब समझ रही थी.. उस पर वासना हावी हो गई थी और चेतन की बातें उस पर असर करने लगीं।

उसने स्कर्ट और पैन्टी नीचे कर दी।

अब उसकी फूली हुई चूत चेतन को दिखने लगी। वो और जोश में डॉली को चोदने लगा।

डॉली- आह’ उह.. मर गई.. उई आह मेरा पानी आह निकलने उई वाला है ओफ्फ.. मैं गई आआह्ह..

डॉली की चूत ने पानी छोड़ दिया मगर चेतन कहाँ झड़ने वाला था.. वो तो दे-दनादान चुदाई कर रहा था।

इधर प्रिया भी चूत में ऊँगली कर रही थी।

डॉली- आ आह्ह.. मेरे राजा आह्ह.. मेरी चूत ठंडी हो गई आह्ह.. अब गाण्ड मार लो आह्ह.. चूत से आह्ह.. निकाल लो।

चेतन ने लौड़ा निकाला और झट से डॉली को उठा कर दूसरी तरफ़ झुका दिया यानि घोड़ी बना दिया और लौड़ा गाण्ड में पेल दिया।

डॉली- आह इतने भी क्या बेसब्र हो रहे हो अई कमर में झटका लग गया आह्ह.. छोड़ो अब आह्ह.. मेरी गाण्ड का मज़ा लो मेरे राजा आह्ह..

अब चेतन की पीठ प्रिया की तरफ़ थी.. वो लगातार डॉली की गाण्ड में शॉट लगाते जा रहा था।

कोई दस मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई के बाद चेतन के लौड़े से लावा फूट गया और लौड़ा जड़ तक गाण्ड में घुसा कर वो झड़ने लगा।

 


चेतन- आह मज़ा आ गया साली.. तेरी गाण्ड आज भी टाइट की टाइट है। चूत तो थोड़ी ढीली हो गई आह्ह…

प्रिया तेज़ी से ऊँगली कर रही थी मगर ऐसे खड़े हुए उसे ज़्यादा मज़ा नहीं आ रहा था।

वो थोड़ी देर और करती तो शायद झड़ जाती मगर तब तक चेतन ने लौड़ा गाण्ड से बाहर निकाल लिया और पीछे हाथ करके प्रिया को छुपने का इशारा कर दिया।

डॉली- आह्ह.. मेरे राजा आज तो पहली बार में ही अपने चूत और गाण्ड दोनों का मज़ा ले लिया। मुझे भी बड़ा मज़ा आया ओफ्फ क्या

मस्त चुदाई की आपने…

थोड़ी देर दोनों बात करते रहे.. प्रिया वहीं छुपी रही.. उसने स्कर्ट अब पहन लिया था।

डॉली- मेरे राजा आज तो आपका लौड़ा बड़ा तना हुआ था.. मेरी गाण्ड की हालत खराब कर दी.. मैं बाथरूम जाकर आती हूँ।

डॉली के बाथरूम में जाते ही चेतन झट से खड़ा हुआ प्रिया भी पर्दे के पीछे से बाहर आ गई।

प्रिया ने धीरे से कहा- अब मैं निकल जाती हूँ।

चेतन- क्यों मज़ा आया ना.. कभी तुमको भी लेना हो तो बता देना।

प्रिया ने मुस्कुरा कर नजरें नीची कर लीं.. चेतन अब भी नंगा था उसका लौड़ा सोकर लटक गया था।

प्रिया- सोचूँगी इसके बारे में….

प्रिया ने लौड़ा की तरफ इशारा करके ये बात कही.. चेतन ने झट से उसे गले लगा लिया और उसके होंठ चूसने लगा।

प्रिया ने भी साथ दिया मगर ये चुम्बन ज़्यादा नहीं चला.. डॉली कभी भी आ सकती थी।

चेतन- अब तुम जाओ.. डॉली आती होगी आज पूरा दिन उसकी चुदाई करूँगा.. कभी मन हो तो आ जाना.. अब जाओ जल्दी से…

प्रिया जल्दी से बाहर निकल गई.. वासना की आग में जलती हुई वो अपने घर की तरफ जा रही थी। उसकी चूत में आग लगी हुई थी

अधूरी जो रह गई थी वो….

प्रिया- उफ़फ्फ़ आज मन नहीं था मगर सर ने चूत में आग लगा दी.. अब तो रिंकू को बुलाना ही होगा।

प्रिया बड़बड़ाती हुई जा रही थी तभी सामने से रिंकू आता दिखाई दिया.. उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।

प्रिया- ओह्ह.. भाई अच्छा हुआ आप यहाँ मिल गए.. चलो आपकी मुराद पूरी कर दूँ।

रिंकू- तू कहाँ जाकर आई है.. और कहाँ चलें?

प्रिया- वो सब बातें बाद में.. चलो ये देखो चाभी मेरे पास ही है वो घर खाली है.. वो आदमी वहाँ शाम को आएगा।

रिंकू- मुझे पता ही था वहाँ कोई नहीं होगा.. वो साली सुबह झूठ बोली।

प्रिया- अरे नहीं भाई वो सच बोल रही थी। वो आदमी घर से अभी निकला है.. वो अकेला रहता है.. शाम तक आएगा.. अब चलो।

रिंकू- अच्छा चल.. वो नहीं आई.. क्या उस साली के चक्कर में तो मैं बहनचोद बना हूँ।

प्रिया- वो आ जाएगी.. पहले हम तो पहुँचे वहाँ…

रिंकू ने इधर-उधर देखा और दोनों सुधीर के घर की ओर चल पड़े।

वो दोनों सुधीर के घर में दाखिल होने ही वाले थे कि मैडी और खेमराज बाइक पर वहाँ से गुजर रहे थे..

खेमराज की नज़र दोनों पर पड़ गई।

खेमराज- अरे रुक… रुक..

मैडी ने ज़ोर से ब्रेक लगाया..

मैडी- क्या हुआ बे साले गाण्ड में साँप घुस गया क्या.. जो इतनी ज़ोर से उछला तू..?

खेमराज- अबे साले.. मैंने जो देखा.. तू भी देख लेता ना.. तो ऐसे ही उछलता…

मैडी- अब क्या देख लिया तूने.. साले वैसे भी आजकल तू कुछ ज़्यादा ही देखने लगा है।

खेमराज- यार अभी-अभी उस घर में रिंकू और प्रिया गए हैं।

मैडी- साले ऐसा क्या खास देख लिया तूने उसमें जो तुझे हर जगह प्रिया नज़र आ रही है।

खेमराज- नहीं यार सच.. अन्दर वो दोनों ही गए हैं।

मैडी- अबे गए होंगे.. तो इसमें चौंकने वाली क्या बात है? किसी से मिलने गए होंगे.. कोई काम होगा उनको.. वो भाई-बहन हैं डॉली

और रिंकू होते तो शायद मुझे अजीब लगता.. अब चलूँ या तू यहीं रुक कर उनका इन्तजार करेगा..?

खेमराज- कहाँ जा रहा है.. रिंकू से मिलकर कल के बारे में बात करनी है ना.. भूल गया क्या? वो बाहर आएगा तब यहीं से उसको साथ ले लेंगे.. इसी बहाने प्रिया को भी देख लेना।

मैडी- अभी वो गए हैं क्या पता कितनी देर में आयें.. हम शाम को बात कर लेंगे। अभी मुझे घर जाना है.. तू रुक.. तू ही देख तेरी काली प्रिया को.. मैं चला….

खेमराज को थोड़ा गुस्सा आया.. मगर वो कुछ ना बोला और वहीं रुक गया। मैडी अपने घर की ओर चल दिया।

खेमराज वहीं खड़ा कुछ सोच रहा था।

खेमराज- साला ये घर किसका है.. यहाँ से कभी किसी को आते-जाते नहीं देखा.. मेरे हिसाब से यहाँ कोई नहीं रहता है.. वो दोनों किसके पास गए होंगे?

थोड़ी देर बाद उसके दिमाग़ में झटका सा लगा और अपने आप से ही उसने बात की।

खेमराज- अरे बेटा खेमराज बन्द घर में दोनों एक साथ गए है दाल में जरूर कुछ काला है.. अब तो ताक-झाँक करनी ही पड़ेगी…

खेमराज घर के पास जाकर अन्दर झाँकने की कोशिश करने लगा.. पीछे की तरफ एक खिड़की उसे खुली हुई दिखी.. बस वो अन्दर घुस गया।

उधर डॉली बाथरूम से बाहर आ गई और चेतन को देख कर मुस्कुराने लगी।

चेतन- क्या हुआ मेरी जान.. मुस्कुरा क्यों रही हो?

डॉली- कुछ नहीं.. ऐसे ही.. बस आप ऐसे दरवाजे पर क्यों खड़े हो.. क्या इरादा है?

चेतन- अरे नहीं.. मुझे लगा बाहर कोई है तो बस देखने चला आया।

डॉली- अच्छा ये बात है.. आप आज कुछ बदले-बदले लग रहे हो सर….

चेतन- क्या बोल रही हो.. मैं तो वैसा ही हूँ जैसा रोज रहता हूँ।

डॉली- अच्छा वैसे ही हो.. तो आप नंगे ही दरवाजे पर देखने गए थे कि कौन है बाहर.. वाह वेरी गुड….

डॉली की बात से चेतन थोड़ा भ्रमित हो गया और झुंझला गया।

चेतन- तुम तो किसी शक्की बीवी की तरह बात कर रही हो.. इतना तो मुझे कभी ललिता ने भी नहीं कहा।

डॉली- इसमें शक की तो कोई बात ही नहीं.. मैं तो बस ये कह रही हूँ.. आपको कोई टेन्शन है क्या..? आज बदले से लग रहे हो…

चेतन ने बात को संभालते हुए कहा- जान सॉरी बस थोड़ा गुस्सा आ गया.. यहाँ आओ मेरी रानी…

डॉली भाग कर चेतन के सीने से लिपट गई।

डॉली- सर आई लव यू.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मुझसे कभी गुस्सा मत करना.. मैं आपकी छोटी वाइफ हूँ ना…

चेतन- हाँ मेरी जान.. तू तो मेरी छोटी परी है.. चुदने वाली परी.. तूने तो मुझे अपनी चूत और गाण्ड दी है.. वो भी एकदम सील पैक.. तुझे कभी गुस्सा नहीं करूँगा.. चल आजा बिस्तर पर आ जा.. देख तेरे चिपकने से लौड़ा खड़ा हो रहा है।

डॉली ने हल्के से लौड़े पर एक चपत मारी।

डॉली- बड़ा बदतमीज़ है.. जब देखो खड़ा हो जाता है.. चल आजा तुझे प्यार से सुलाती हूँ चूस-चूस कर आज तेरा सारा पानी निकाल दूँगी.. फिर होना कड़क…

चेतन- हा हा हा चल आजा मेरी जान.. निकाल दे इसका पानी.. तेरे चूचे मुझे बुला रहे हैं पहले इनका रस पी लूँ.. उसके बाद लौड़े के साथ जो करना है.. तू कर लेना।

चेतन चूचों से ऐसे चिपक गया.. जैसे बहुत भूखा हो और चूचों से दूध आ रहा हो.. डॉली सीधी लेट गई और चेतन उसके मम्मों को चूसता रहा।

डॉली- आहह.. अई.. सर आप बहुत बदमाश हो.. अई उफ़ आराम से चूसो ना.. आहह.. मुझे गर्म कर दोगे फिर क्या.. आहह.. खाक मैं लौड़े को चूस कर पानी निकालूंगी आहह.. फिर तो चूत में ही लेना पड़ेगा मुझे आहह…

चेतन- हाँ मेरी दीपा रानी यही तो मज़ा है… कमसिन कली के साथ चुदाई करने का.. थोड़ा सा उसको चूसो.. बस गर्म हो जाती है और चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है.. तू कौन सी पक्की रंडी है.. जो कितना भी में चूसूँ तू बर्दास्त कर जाएगी.. वाह क्या चूचे है तेरे…

डॉली- आहह.. राजा जी.. आहह.. आप बार-बार रंडी की बात आहह.. बीच में ले आते हो.. कभी ठीक से आहह.. समझाया नहीं.. किसी रंडी के बारे में आहह…

चेतन- मेरी जान.. जो तरह-तरह के लौड़े ले चुकी हो और थोड़ी बहुत चुसाई से उसे कुछ फ़र्क ना पड़े.. बल्कि सामने वाले का लौड़ा बिना चूत में लिए पानी निकाल दे.. उसे कहते है रंडी.. आहह.. मज़ा आ रहा है…

डॉली- आहह.. राजा उई.. चूत में गुदगुदी हो रही है.. आहह.. प्लीज़ थोड़ी देर चूत चाटो ना.. आहह.. पक्की रंडी को जाने दो.. अपनी इस कच्ची रंडी को थोड़ा मज़ा दो हा हा हा…

चेतन भी उसके साथ हँसने लगा।

चेतन अब उसकी चूत चाटने लगा डॉली ने कहा- अब 69 के पोज़ में आ जाओ.. मुझे भी लौड़ा चूसना है।

मगर चेतन ना माना और बस उसकी चूत चाटता रहा।

डॉली- आहह.. सर आहह.. मज़ा आ रहा है.. उफ़फ्फ़ अब पेल दो लौड़ा आहह.. मेरी चूत में.. आहह.. अब बर्दास्त नहीं होता.. आहह.. ससस्स ईयी उफफफ्फ़…

चेतन ने डॉली की टाँगें पकड़ कर उसे घुमा दिया यानि बिस्तर के बाहर उसका आधा बदन निकाल दिया और खुद बिस्तर के नीचे खड़ा हो गया।

डॉली- आहह.. राजा.. ये कौन सा तरीका है.. उफ़ आहह…

चेतन- यह नया तरीका है जान.. मैं खड़ा-खड़ा आज तेरी चूत का बैंड बजाऊँगा.. तू बस देखती जा…

चेतन ने डॉली के पैरों को मोड़ दिया और लौड़ा चूत में घुसा दिया।

डॉली- आहह.. मज़ा आ गया.. लौड़ा चूत में जाते ही बड़ा आराम मिलता है.. आहह.. अब चोदो राजा.. अपनी छोटी रानी को.. मज़ा ले लो मेरी चूत का.. आज आहह…

चेतन ‘दनादन.. दे-दनादन’ लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा.. बस एक ही रफ़्तार से वो चूत को चोदे जा रहा था और बड़बड़ा रहा था।

चेतन- आ आहह.. उहह ले.. मेरी जान.. आहह.. तूने मेरे लौड़े को कच्ची चूत का आदी बना दिया है आहह.. ले ओह ओह.. अब तेरी चूत आह उह आहह.. को चोद-चोद कर इसका भोसड़ा बना दूँगा.. आ आहह.. दोबारा कच्ची चूत कहाँ से मिलेगी मुझे.. आहह.. तू कोई रास्ता बता आहह…

डॉली- आहह.. अई छोड़ो मेरे राजा.. आहह.. अब मेरी चूत का तो आपने भोसड़ा बना ही दिया दोबारा अई ऐइ कच्ची कैसे करूँ इसे आहह…

चेतन- ओह.. तू चाहे तो आहह.. किसी दूसरी कच्ची चूत को आहह.. मेरे लौड़े के लिए ला सकती है आहह…

डॉली- आहह.. रफ़्तार से चोदो.. आहह.. मैं कहाँ से लाऊँ.. आहह.. मज़ा आ रहा है राजा और फास्ट आहह.. आहह…

चेतन ने ज़्यादा खुल कर कहना ठीक नहीं समझा और बात को घुमा कर बोल दिया।

चेतन- उहह उहह आहह.. तेरी चूत फट गई.. आहह.. है.. आह ओह इसे आ किसी दर्जी के पास सिलवा ले.. आहह.. आ हा हा हा।

डॉली- हा हा हा अई.. अच्छा अईउफ़ मजाक करते हो आप आहह.. चोदो आहह.. मेरी चूत में .. आहह.. पानी आहह.. अई आने वाला है आईईइ मैं गईइइ आहह.. फास्ट फक मी.. आह फास्ट आह आईईईई…

चेतन ने चोदने की रफ़्तार और तेज कर दी थी.. वो भी थक गया था और उसकी उत्तेजना भी चरम सीमा पर थी.. बस लौड़े की ठाप से चूत को पीट रहा था.. जैसे ही डॉली की चूत का पानी निकल कर लौड़े से स्पर्श हुआ..

चेतन ने लौड़े को जड़ तक घुसा कर एक लंबी सांस ली और उसका बाँध भी टूट गया.. दो नदियों का संगम हो गया.. काफ़ी देर तक दोनों उसी हालत में पड़े रहे।

 


इनका तो हो गया.. अब आप सोच रहे होंगे रिंकू और प्रिया अन्दर गए थे.. पीछे से खेमराज भी गया था.. वहाँ क्या हंगामा हुआ.. तो चलो हम वहीं जाकर देखते हैं।

सुधीर के घर में जाते ही प्रिया ने मुख्य दरवाजा बन्द कर दिया और रिंकू से चिपक गई।

उसने अपने होंठ उसके होंठों पर टिका दिए।

रिंकू भी उसका साथ देने लगा और उसकी गाण्ड को दबाते हुए उसे चुम्बन करने लगा।

थोड़ी देर बाद दोनों अलग हुए।

रिंकू- मेरी प्यारी बहना.. यहाँ नहीं.. कमरे में चल.. वहाँ आज तेरी गाण्ड मारूँगा…

प्रिया- नहीं भाई.. पहले तो मेरी चूत को शान्त करो.. लौड़े के लिए ये बड़ी तड़प रही है.. उसके बाद आप गाण्ड मार लेना…

दोनों कमरे में चले जाते हैं और वहाँ जाते ही प्रिया नीचे बैठ कर रिंकू की ज़िप खोल कर लौड़ा बाहर निकाल लेती है और मज़े से चूसने लगती है।

रिंकू- आहह.. अरे बहना.. आहह.. कपड़े तो निकालने देती.. उफ़ ऐसे ही शुरू हो गई तू आहह…

दोस्तो, इसी पल खेमराज खिड़की से अन्दर आया था और आपको बता दूँ वो रसोई की खिड़की थी.. यह उसके पास के कमरे में थी.. खेमराज जब खिड़की से अन्दर कूदा दूसरे कमरे में.. इन दोनों को आवाज़ सुनाई दी।

रिंकू ने जल्दी से प्रिया के मुँह से लौड़ा निकाला और पैन्ट के अन्दर करके ज़िप बन्द कर ली।

प्रिया- भाई बाहर कोई आया है.. आवाज़ आई ना अभी?

रिंकू- चुप चुप.. आराम से.. उस कुर्सी पर बैठ जा.. शायद डॉली आ गई होगी…

प्रिया- नहीं भाई.. चाभी मेरे पास है.. दरवाजा बन्द है.. वो कैसे अन्दर आ सकती है.. शायद घर वाला आ गया है.. उसके पास तो दूसरी चाभी होगी ना…

रिंकू- तू यहीं बैठ.. मैं बाहर जाकर देखता हूँ.. वो हुआ तो कह देंगे डॉली ने यहाँ मिलने के लिए बुलाया था.. ओके.. मैं अभी आता हूँ।

रिंकू कमरे से बाहर निकला.. उधर खेमराज भी दबे पांव रसोई से बाहर आ रहा था। दोनों आमने-सामने हो गए नजरें मिलीं और…

रिंकू- अरे साले.. मादरचोद.. डरा दिया.. तू यहाँ क्या कर रहा है?

खेमराज- तुझे देख कर ही यहाँ आया हूँ.. तू बता प्रिया के साथ यहाँ क्या कर रहा है?

अब रिंकू की हवा निकल गई.. वो हकलाने लगा- श..श..सी.. क्या बोल रहा है प्प..प्रिया को तूने क..कब देखा?

खेमराज- जब तुम दोनों मुख्य दरवाजे से अन्दर घुसे.. तब देखा और पीछे की खिड़की से यहाँ आया हूँ.. अब सच-सच बता.. तुम दोनों इस खाली घर में क्या करने आए हो..? दूसरा तो कोई दिखाई ही नहीं दे रहा यहाँ।

रिंकू कुछ बोलता.. उसके पहले प्रिया कमरे से बाहर आ गई और बोल पड़ी।

प्रिया- खेमराज.. मैं बताती हूँ.. हम यहाँ क्यों आए हैं।

रिंकू हक्का-बक्का सा बस प्रिया को देखने लगा।

खेमराज- हाँ.. बताओ.. बताओ.. मैं भी सुनना चाहूँगा।

प्रिया- तो सुनो तुमने और मैडी ने भाई को पागल कर दिया है.. बिगाड़ कर रख दिया है.. उस उस डॉली के चक्कर में भाई दिन-रात उसी के बारे में सोचते रहते हैं.. मुझसे ये देखा नहीं गया.. तब मैंने भाई से कहा कि मैं डॉली को उनसे मिलवा देती हूँ.. बस आज यहाँ इसी लिए आए हैं डॉली भी आने वाली है.. समझे…

प्रिया ने इतनी सफ़ाई से झूठ बोला कि रिंकू तो बस उसको देखता रह गया और खेमराज का भी मुँह खुला का खुला रह गया।

खेमराज- क्या डॉली यहाँ आ आने वाली है.. व्व..वो मानी कैसे? और द..रिंकू तुमने हमें बताया क्यों नहीं.. कि प्रिया हमारा साथ दे रही है?

अब तो रिंकू में जान आ गई थी.. खेमराज प्रिया के झूठ के जाल में फँस गया था।

रिंकू- बहन के लौड़े.. तुझे बड़ी जल्दी है हर काम की.. वो साला मैडी प्लान बना रहा है मगर कुछ बता नहीं रहा.. तो मैंने सोचा क्यों ना प्रिया के जरिए डॉली तक पहुँच जाऊँ मगर तू यहाँ अपनी माँ चुदवाने आ गया.. अगर वो आ गई और तुझे यहाँ देख लिया तो हाथ से गई समझ.. उसके बाद तो मैं तुझे देख लूँगा।

खेमराज- अरे यार मुझे क्या पता.. मैं तो समझा तुम दोनों यहाँ…

रिंकू- क्या सोचा बे.. मादरचोद.. बोल साले तेरी ज़ुबान काट के हाथ में दे दूँगा.. अगर कुछ भी उल्टा-सीधा बोला तो.. बता अब…

खेमराज बेचारा क्या बोलता.. उसकी तो जान आफ़त में आ गई थी और रिंकू तो बस पूछो मत उल्टा चोर कोतवाल को डांटने पर तुल गया था।

खेमराज- अरे कुछ नहीं सोचा मेरे बाप.. अब मैं जाता हूँ मगर जाने के पहले बस एक बार डॉली को देख लूँ.. मेरे मन को तसल्ली मिल जाएगी।

प्रिया- हाँ देख लेना.. वो आती ही होगी.. जाओ छुप जाओ और सुनो उसके सामने मत आ जाना.. भाई भी यहाँ छुपने ही मेरे साथ आए थे.. बस वो मुझसे मिलने आ रही है।

रिंकू ने कुछ और बोलना ठीक ना समझा और खेमराज के साथ रसोई में छुप गया।

उन दोनों के जाने के बाद प्रिया बड़बड़ाने लगी।

प्रिया- ओह.. गॉड.. बाल-बाल बची.. डॉली अब आ भी जाओ.. एक तो सर ने मेरी चूत को पानी-पानी कर दिया.. अब ये बीच में खेमराज आ गया.. सर जल्दी से डॉली को चोद कर भेज दो.. नहीं तो खेमराज को समझाना मुश्किल हो जाएगा।

रिंकू- साले तुझे ऐसे खिड़की से किसी के घर में घुसते हुए ज़रा भी डर नहीं लगा…

खेमराज- कैसा डर.. तुम दोनों को जाते देख लिया तो बस मन नहीं माना और यहाँ देखने आ गया।

रिंकू- मैं जानता हूँ साले.. तू एक नम्बर का हरामी है.. जरूर कुछ गलत सोच कर देखने आया होगा।

खेमराज- ऐसी बात नहीं है यार.. अच्छा ये सब जाने दे.. पहले ये बता डॉली यहाँ आ रही है.. ये सब जुगाड़ कैसे किया.. प्रिया को सब बातों का पता है क्या?

रिंकू- अरे नहीं साले.. उसको थोड़ी ये बोल सकता हूँ कि डॉली को चोदना चाहता हूँ.. मैंने प्रिया को झूट-मूट प्यार का नाम ले दिया इसी लिए उसने डॉली को यहाँ बुलाया है।

खेमराज- ओह.. ये बात है.. प्यार के चक्कर में फँसा कर चोदेगा.. चल अच्छा है.. कैसे भी आए.. चूत मिलनी चाहिए बस….

रिंकू कुछ बोलना चाह रहा था.. तभी दरवाजे की घन्टी बजने लगी शायद डॉली आ गई थी।

दोस्तो, दूसरी बार चुदने के बाद डॉली ने चेतन से कहा- उसको अब जाना होगा.. जरूरी काम है।

चेतन ने बहुत रोकना चाहा मगर वो वहाँ से बहाना बना कर निकल गई और अब दरवाजे के बाहर खड़ी है।

प्रिया झट से गई.. दरवाजा खोला और धीरे से कहा।

प्रिया- सस्स.. कुछ मत कहना.. खेमराज यहीं है ऐसी कोई बात करना उसको कुछ पता नहीं है।

डॉली- अरे शिट.. उसको यहाँ क्यों बुलाया?

प्रिया- चुप रह ना.. सब बता दूँगी अन्दर तो आ.. किसी ने नहीं बुलाया.. खुद आ गया.. अब आ जा…

खेमराज रसोई की खिड़की से डॉली को आता देख रहा था, तभी रिंकू ने उसको वहाँ से हटा दिया।

रिंकू- साले हट.. वो देख लेगी तो बना-बनाया काम बिगड़ जाएगा।

प्रिया और डॉली उस कमरे में चली गईं वहाँ जाकर प्रिया ने सारी बात डॉली को समझा दी।

खेमराज- अरे यार तू सच में खिलाड़ी है.. डॉली आ गई.. काश अभी प्रिया यहाँ ना होती तो साली को अभी चोद देते…

रिंकू- अबे चुप बहन के लौड़े.. अब चल निकल जा यहाँ से और सुन बाहर इंतजार कर.. मैं बस 5 मिनट में आता हूँ.. वहीं रहना।

खेमराज की उसी खिड़की से बाहर निकल गया रिंकू ने खिड़की बन्द कर दी और कमरे में चला गया।

प्रिया- गया क्या वो? आज तो बाल-बाल बचे.. वैसे क्या बोला अपने उसे?

रिंकू- कुछ नहीं.. यही कि तुम डॉली को मेरे प्यार के बारे में बता कर यहाँ बुलाकर लाने वाली हो.. अब मैं जाता हूँ.. साला वो बाहर ही खड़ा है.. कहीं उसको शक हो गया तो गड़बड़ हो जाएगी।

प्रिया- ठीक है आप जाओ।

डॉली- अरे मेरे आशिक.. तेरी किस्मत में आज भी मेरी चूत नहीं लिखी.. जा मैडी से मिल.. उसका कल का प्लान पता कर.. नया बदलाव में फ़ोन पे बता दूँगी तुम्हें ओके….

रिंकू- मेरी जान अब कोई टेन्शन नहीं है.. जब चाहूँ तुझे चोद लूँगा.. फिलहाल तो मैं जाता हूँ.. उस हरामी खेमराज के रहते मैं कोई ख़तरा मोल नहीं ले सकता.. तुम दोनों यहीं रहो.. मैं जाता हूँ.. जल्दी आने की कोशिश करूँगा।

रिंकू के जाने के बाद डॉली आराम से बिस्तर पर लेट गई।

डॉली- आह.. बड़ा सुकून मिल रहा है आज तो कमर दुखने लगी।

प्रिया- तू तो सर के लौड़े से चुद कर आई है मेरी चूत की हालत खराब है.. ये खेमराज कुत्ता भी ऐन मौके पर आ गया.. नहीं तो रिंकू के लौड़े से अब तक मेरी चूत ठंडी भी हो जाती।

डॉली- शुक्र कर.. कुछ शुरू होने के पहले वो आ गया.. नहीं तो तुम दोनों को भारी पड़ जाता और रिंकू के साथ वो भी अभी तेरी चूत के मज़े ले रहा होता।

 


प्रिया- लेता तो ले लेता.. मगर मेरी चूत की आग तो शान्त हो जाती.. अब पता नहीं रिंकू वापस आएगा भी या नहीं…

डॉली- मैंने तो तुझे कहा था सर के लौड़े से चुद ले.. मगर तू नहीं मानी.. क्या मज़ा आया आज.. बेचारे मुझे रोक रहे थे.. मैं ही ज़बरदस्ती आई हूँ.. सोचा था कि आज रिंकू के लौड़े से भी चुद कर देख लूँ.. उसमें कैसा मज़ा आता है.. मगर यहाँ तो तू ही सूखी बैठी है.. चल निकाल कपड़े.. मैं ही तेरी चूत चाट कर तुझे मज़ा देती हूँ.. क्या याद करेगी कि किस से पाला पड़ा है।

प्रिया- अरे चाट ले मेरी जान.. तू चाट कर बड़ा मज़ा देती है.. तूने तो आज बड़े पोज़ बदल-बदल कर चुदाई करवाई सर से.. अब मेरी चूत भी चाट कर मज़ा दे मुझे।

डॉली- हाय.. तुझे कैसे पता.. मैं सर से कैसे चुदी..?

प्रिया- अंदाज लगाया यार.. अब सर तेरी जैसी कली को चोदेंगे तो पोज़ बदल बदल कर ही चोदेंगे ना…

डॉली- ओह.. अच्छा चल हो ज़ा नंगी.. अभी तुझे आराम देती हूँ…

प्रिया ने जल्दी से कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर चित्त लेट गई।

प्रिया- अरे तू भी निकाल ना अपने कपड़े…

डॉली- नहीं.. मैं नहीं निकालूंगी.. तुझे मजा देती हूँ.. मेरा अभी मन नहीं है।

प्रिया- ओके ओके.. चल आ जा यार.. चूत में बड़ी खुजली हो रही है…

डॉली अपने काम में लग गई.. प्रिया आहें भरने लगी और चूत चटाई का मज़ा लेने लगी।

दोस्तो, रिंकू जब बाहर गया.. तो क्या हुआ चलो देखते हैं।

खेमराज घर के बाहर ही खड़ा था.. जब रिंकू आया.. उसके चेहरे पर सवाल आ गया कि रिंकू मेन गेट से बाहर आया है यानि वो डॉली से मिलकर आ रहा है।

रिंकू- अबे साले.. ऐसे क्या घूर कर देख रहा है.. चल अब..

खेमराज- अरे कुछ नहीं सोचा मेरे बाप.. अब मैं जाता हूँ.. मगर जाने के पहले बस एक बार डॉली को देख लूँ.. मेरे मन को तसल्ली मिल जाएगी।

खेमराज- वो दोनों तो अन्दर हैं क्या बात हुई डॉली से मिले क्या तुम…?

रिंकू- अबे साले सारे सवाल यहीं पूछ लेगा क्या.. प्रिया उसको समझा रही है.. काम बन जाएगा.. चल चाय पीकर आते हैं.. वो साले मैडी को भी बुला लेंगे मिलकर बात करेंगे।

दोनों वहाँ से चल पड़ते हैं.. अभी थोड़ी दूर ही गए होंगे कि खेमराज के पापा रास्ते में मिल गए और कुछ जरूरी काम है बोलकर खेमराज को अपने साथ ले गए।

रिंकू ने कहा- शाम को मिलते हैं।

उनके जाने के बाद रिंकू ने अपने आप से बात की।

रिंकू- चल बेटा रिंकू.. साला कबाब में हड्डी चला गया.. अब तो डॉली भी आ गई है आज साली की चूत का मज़ा ले ही लूँ।

रिंकू जाने लगा तो प्रिया के पापा यानि रिंकू के चाचा उसे दिखाई दे गए और वो वहीं रुक गया।

रिंकू- अरे अंकल आप कहाँ से आ रहे हो?

अंकल- तेरा कोई पता ठिकाना भी है क्या.. बेटा कितने समय से तेरे पापा के पास बैठ कर आया हूँ.. वो दरअसल मैं और तेरी चाची प्रिया की नानी से मिलने जा रहे हैं.. उनकी तबीयत खराब है.. शाम को जाएँगे.. प्रिया के

इम्तिहान हैं तो उसको नहीं ले जा रहे हैं.. तेरे पापा को बोलने गया था उसे अपने पास रख ले।

रिंकू- ओह.. आप बेफिकर होकर जाओ हम है ना.. प्रिया को संभाल लेंगे…

चाचा- हाँ बेटा सही है.. अच्छा चलता हूँ.. शाम को मिलेंगे अभी थोड़ा काम है…

रिंकू की ख़ुशी दुगनी हो गई.. प्रिया भी रात को उसके घर रहेगी.. वो तेज रफ़्तार से सुधीर के घर की ओर जाने लगा।

आपको याद नहीं तो मैं याद दिला दूँ.. रिंकू के जाने के बाद वो दोनों बिना मुख्य दरवाजे को लॉक किए ही मस्ती में लग गई थीं।

रिंकू जब आया दरवाजे की घन्टी बजाने के पहले उसने दरवाजे को हाथ लगाया तो वो खुल गया।

उसे दोनों पर बड़ा गुस्सा आया.. वो अन्दर आया.. दरवाजा लॉक किया और कमरे की तरफ़ बढ़ गया।

प्रिया- आ आहह.. ज़ोर से चाटो.. उई मेरा पानी निकलने वाला है अई अई..

डॉली भी रफ़्तार से चूत को चाटने लगी और साथ-साथ ऊँगली से चूत के ऊपर रगड़ने लगी।

प्रिया का बाँध टूट गया और वो झड़ गई।

डॉली ने सारा रस चाट कर चूत को साफ कर दिया।

ये नजारा देख कर रिंकू के लौड़े में तनाव आ गया और उसने पैन्ट निकाल दी।

प्रिया- अरे भाई.. आप कब आए पता भी नहीं चला।

रिंकू- तुम दोनों ने दरवाजा बन्द क्यों नहीं किया.. कोई और आ जाता तो.. और तुमको ऐसी हालत में देख लेता तो?

डॉली- दूसरा यहाँ कौन आएगा और आ भी जाता तो उसको भी चूत का स्वाद मिल जाता.. यार तेरा तो क्या मस्त लौड़ा खड़ा है। डॉली उठकर रिंकू के पास आ गई और लौड़े को हाथ में ले लिया।

रिंकू- साली.. मैं समझता था अपने भाई के बारे में सोचने वाली मेरी बहन ही रंडी है.. मगर तू उससे बड़ी रंडी निकली.. कोई आ जाता तो उसको भी स्वाद मिल जाता.. ऐसा बोलकर तूने साबित कर दिया.. कि तू भी रंडी है।

डॉली- हा हा हा रंडी.. और तू क्या है.. तुझे पता है? कल तक मुझे चोदना चाहता था.. कुत्ते की तरह मेरे आगे-पीछे घूमता था और अब तक तुझे मेरी चूत नहीं मिली.. तूने शुरूआत भी की तो अपनी बहन के साथ छी: छी:.. तू तो कितना बड़ा बहनचोद है।

प्रिया- डॉली बस भी करो.. बार-बार ये बात भाई को बोलकर गुस्सा मत दिलाओ.. नहीं तो आज तुम्हारी चूत की खैर नहीं.. गुस्से में ये बड़े ख़तरनाक तरीके से चोदते हैं।

डॉली- अच्छा.. ये बात है.. चल आज देख ही लेती हूँ.. तेरे भाई का जोश…

इतना बोलकर डॉली उसका लौड़ा चूसने लगी अपने होंठों को भींच कर सर को हिलाने लगी रिंकू की तो बोलती बन्द हो गई.. बस मज़े में आँखें बन्द किए खड़ा लौड़ा चुसवाता रहा।

डॉली को देख कर प्रिया में भी जोश आ गया और वो भी उसके पास आकर रिंकू की गोटियां चाटने लगी।

दो कमसिन कलियां अपना जादू चला रही थीं और रिंकू आनन्द की अलग ही दुनिया में चला गया था।

रिंकू- आहह.. उफ़फ्फ़ साली आहह.. सच में तुम दोनों ही ज़बरदस्त चुदक्कड़ हो आहह.. चूसो उफ़ मज़ा आ गया आहह…

प्रिया ने डॉली के मुँह से लौड़ा निकाल कर अपने मुँह में डाल लिया। डॉली ने उसकी गोटियाँ पूरी मुँह में ले लीं और ज़बरदस्त चुसाई शुरू कर दी।

रिंकू- आहह.. अइ बस भी करो आहह.. पानी निकालने का इरादा है क्या आहह.. साली अभी मुझे तेरी चूत का स्वाद भी चखना है।

डॉली- अच्छा तो रोका किसने है.. चख लेना पहले तेरे लौड़े का रस तो पिला दे.. उसके बाद जो चाहे कर लेना…

रिंकू- आहह.. ठीक है जान.. आहह.. ले चूस आहह.. प्रिया इसे चूसने दे आहह.. तूने तो एक बार मेरा रस पिया है ना.. आज इसे पीने दे आहह.. चूसो…

प्रिया ने लौड़ा मुँह से छोड़ दिया.. डॉली झट से लौड़े पे टूट पड़ी.. प्रिया भी उसके पास ही बैठी रही।

रिंकू ने डॉली के सर को पकड़ लिया और उसके मुँह में दनादन लौड़ा पेलने लगा।

रिंकू- आ आहह.. मज़ा आ रहा है आहह.. साली तेरा मुँह भी किसी चूत से कम नहीं आहह.. उफ़ चूस आहह.. साली रंडी.. आहह.. तू क्या देख रही है मेरे टट्टे चूस.. आहह.. पानी तो इनमें ही तो भरा हुआ है आहह.. चाट…

प्रिया भी उसकी टाँगों के बीच घुस कर गोटियाँ चाटने लगी।

वो रफ़्तार से डॉली के मुँह को चोद रहा था और प्रिया की जीभ उसकी गोटियों को चाट रही थी..

कब तक वो इन दो कमसिन कलियों के आगे टिका रहता.. उसका लौड़ा फूलने लगा और उसने पूरा लौड़ा डॉली के मुँह में घुसा कर झड़ना शुरू कर दिया।

रिंकू- आह उफ़फ्फ़ कितना हसीन पल है ये उफ़ आहह.. मज़ा आ गया…

रिंकू के लौड़े ने डॉली के गले तक पानी की पिचकारी मारी और वो सारा वीर्य गटक गई।

अब उसने लौड़ा मुँह से निकल जाने दिया.. उसके मुँह में अभी भी थोड़ा वीर्य था जो उसने अपनी जीभ की नोक पर रख लिया प्रिया ने झट से उसकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसा और बाकी वीर्य वो पी गई।

 


अब उसने लौड़ा मुँह से निकल जाने दिया..

उसके मुँह में अभी भी थोड़ा वीर्य था जो उसने अपनी जीभ की नोक पर रख लिया प्रिया ने झट से उसकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसा और बाकी वीर्य वो पी गई।

अब दोनों जीभ से चाट-चाट कर लौड़े को साफ कर रही थीं। रिंकू के तो मज़े हो गए उसको लौड़े को साफ करवाते हुए बड़ा मज़ा आ रहा था।

रिंकू- आह चाटो.. मेरी रण्डियों.. मज़ा आ रहा है.. डॉली मेरी जान चल अब बिस्तर पर आ जा.. आधी नंगी तो है ही.. अब पूरी हो जा अपनी चूत के दर्शन करवा दे.. कब से तड़प रहा हूँ मैं.. तेरी चूत में लौड़ा डालने के लिए.. बस एक बार तेरी चूत चाट कर मज़ा लिया है.. आज चोद कर मज़ा लूँगा.. आज तो मैं तेरी गाण्ड भी मारूँगा…

प्रिया- भाई मेरी चुदाई कब करोगे आप?

रिंकू- अरे तू तो रात भर मेरे पास मेरे घर में रहेगी अभी तो डॉली का मज़ा लेने दे मुझे….

प्रिया- वो कैसे भाई?

रिंकू ने उसे सारी बात बता दी.. वो ख़ुशी से झूम उठी।

प्रिया- वाउ.. मज़ा आ जाएगा.. आज तो पूरी रात चुदाई करेंगे.. अभी डॉली के मज़े लो भाई.. मैं भी देखूँ.. जिस डॉली के लिए आप पागल बने घूमते हो.. आज उसको कैसे चोदते हो…

डॉली- लो मेरे आशिक.. हो गई नंगी.. आओ जाओ चढ़ जाओ मुझ पर….

रिंकू- हाँ साली.. आज बरसों की तमन्ना पूरी होने जा रही है.. आज तो तुझे जी भर के चोदूँगा।

डॉली बिस्तर पर टाँगें फैला कर सीधी लेट जाती है। प्रिया भी उसके पास लेट जाती है।

रिंकू बिस्तर पर आकर डॉली की चूत को गौर से देखने लगता है।

रिंकू- अबे डॉली.. साली रंडी किस-किस से चुदवाती है रे तू बहन की लौड़ी.. चूत का मुँह तो ऐसे खुला हुआ है जैसे मूसल घुसवा कर आई हो…

ये सुनकर प्रिया की हँसी निकल जाती है मगर वो अपने आप को रोक लेती है।

डॉली- रिंकू ज़्यादा स्मार्ट मत बनो.. चोदना है तो चोदो नहीं तो अपना लण्ड उठाओ और भाड़ में जाओ.. ऐसे झूटे इल्ज़ाम ना लगाओ.. बस मेरा एक ही राजा है वो ही मेरी चूत का मज़ा लेता है.. या अब तुम लेने जा रहे हो।

डॉली नहीं चाहती थी कि किसी और का नाम प्रिया को पता चले.. उसे शर्म सी महसूस हुई कि वो कैसे एक भिखारी और बूढ़े सुधीर से चुदवा भी चुकी है।

रिंकू- कोई बात नहीं रंडी.. चूत का भोसड़ा अभी बना नहीं है.. मैं बना दूँगा और गाण्ड तो सलामत है.. या उसको भी फड़वा चुकी हो?

डॉली- पहले चूत का मज़ा लो.. उसके बाद गाण्ड भी देख लेना मेरे आशिक.. पता चल जाएगा मेरे राजा जी तेरी तरह लौड़ा हाथ में लिए नहीं घूमते रहते.. वो बड़े ही समझदार इंसान हैं चूत और गाण्ड का मुहूर्त ऐसे किया कि हर कुँवारी लड़की उनसे ही अपनी सील तुड़वाना चाहे.. तेरी तरह नहीं कि तुमने प्रिया की जान ही निकाल कर रख दी थी।

रिंकू- अच्छा ये बात है.. तो उसका नाम क्यों नहीं बताती तू?

डॉली- बातों में समय खराब मत कर.. चल लग जा चूत चटाई पे..

रिंकू ने भी ज़्यादा बहस करना ठीक नहीं समझा और डॉली की चूत को चाटने लगा।

प्रिया- भाई थोड़ा कमर को ऊपर करो आप चूत चाट कर डॉली को गर्म करो.. मैं आपके लौड़े को चूस कर कड़क करती हूँ।

रिंकू ने प्रिया की बात मान ली.. अब दोनों अपने काम में लग गए।

डॉली बस ‘आहें’ भर रही थी.. पहले तो चेतन ने खूब चोदा.. अब रिंकू के नए लौड़े के सपने देखने लगी थी कि कैसा मज़ा आएगा…

डॉली- आहह.. चाटो.. उफ़ मेरे आशिक आहह.. मज़ा आ रहा है…

रिंकू भी जीभ की नोक से उसकी चूत चोदने लगता है.. इधर प्रिया ने लौड़े को चूस-चूस कर एकदम टाइट कर दिया था।

अब तीनों ही वासना की आग में जलने लगे थे।

डॉली- आहह.. अई बस भी कर.. चूत का पानी मुँह से ही निकलेगा क्या.. तेरे लौड़े की चोट कैसी है.. वो तो बता मुझे…

रिंकू- साली रंडी तुझे क्या पता चलेगा लौड़े की चोट का.. तू तो पहले से तेरे उस गुमनाम यार के पास ठुकवा आई है.. साला है बड़ा हरामी कैसे तेरे चूचे मसके होंगे उसने.. कैसे तेरी चूत की ठुकाई की होगी.. तभी चूत का भोसड़ा जैसा बन गया है।

डॉली- आह अई तुझे आहह.. क्या पता बहनचोद आहह.. वो ऐसे वैसे नहीं हैं.. आहह.. बड़े अच्छे हैं ऐइ चूत और गाण्ड को बड़े प्यार से चोद कर होल बड़े किए हैं.. आहह.. अब तू भी लौड़ा पेल कर मेरी चूत की गर्मी महसूस कर ले….

रिंकू- अरे मेरी रंडी बहना.. अब लौड़ा चूसना बन्द कर.. ये डॉली रंडी की चूत मचलने लगी है.. अब में इसको चोद कर ही ठंडा करूँगा।

प्रिया- क्या भाई.. आप भी ना क्या रंडी-रंडी लगा रखा है प्यार से ‘जान’ या ‘रानी’ ऐसा कुछ भी बोल सकते हो ना….

डॉली- अरे नहीं प्रिया.. चुदाई का मज़ा गाली और गंदी बातों से बढ़ जाता है.. तू भी अजमा लेना.. मज़ा आएगा.. बोल रिंकू बहनचोद जितना बोलना है बोल.. फाड़ दे मेरी चूत को.. घुसा दे अपना लौड़ा मेरी चूत में…

प्रिया- हाँ मैंने कहानी में पढ़ा था.. गाली देकर ही चुदाई का मज़ा आता है।

रिंकू- तो बहन की लौड़ी ज्ञान क्या दे रही है बोल कर दिखा छिनाल की औलाद.. साली तू तो वेश्या से भी आगे निकल गई.. अपने भाई के लौड़े पर नज़र रखती है…

प्रिया- हाँ भड़वे बोल रही हूँ.. मेरी क्या बात करता है कुत्ते.. तू खुद क्या था.. जरा सोच गंदी नाली का कीड़ा भी तुझसे अच्छा होगा हर आने-जाने वाली लड़कियों की चूची और गाण्ड देखता था.. तेरे जैसा हरामी तो बहन ही चोदेगा और कहाँ से तुझे लड़की मिलेगी?

डॉली- वा..वाह.. प्रिया क्या बोली है तू.. पक्की रंडी बनेगी मेरी तरह आ भड़वे.. अब क्या नारियल फोडूँ तेरे लंड पर.. तब चूत में डालेगा.. क्या पेल जल्दी से बहनचोद…प्रिया- हाँ डाल दे मेरा भड़वे भाई.. इस छिनाल की चूत में अपना लौड़ा.. हरामजादी कब से बोल रही है.. इसका मन भी नहीं भरा.. अभी-अभी चुदवा कर आई है.. दोबारा कुतिया की चूत में खुजली हो गई।

रिंकू- क्या.. अभी चुदवा कर आई है साली रंडी.. तभी इतनी देर से आई है.. ले अब तेरी चूत का भुर्ता बनाता हूँ अभी.. देख छिनाल कितना चुदेगी तू.. ले मैं भी देखता हूँ।

रिंकू ने लौड़ा चूत पर टिकाया और ज़ोर से झटका मारा.. पूरा लौड़ा चूत की अंधी खाई में खो गया।

डॉली- आआहह.. हरामखोर आहह.. इतनी ज़ोर से झटका मारा.. कमर में दर्द हो गया.. कुत्ते.. पूरा बदन का वजन मेरे ऊपर डाल दिया आहह.. झटके मार.. साले हरामी आहह.. मज़ा आ गया तेरा लौड़ा है बड़ा गर्म.. आहह.. चोद ऐइ मार झटके आहह…

रिंकू- उहह उहह आहह.. हाँ साली.. तू भले ही चुदी हुई है आहह.. मगर तेरी चिकनी चूत में लौड़े को बड़ा मज़ा आ रहा है.. आहह.. अन्दर-बाहर करने में आहह…

प्रिया- सस्स भाई.. क्या झटके मार रहे हो आहह.. लौड़ा डॉली की चूत में जा रहा है.. मज़ा मेरी चूत को आ रहा है आहह…

डॉली- आहह.. मार ज़ोर से.. आहह.. चोद दे आहह.. फाड़ दे आहह.. मेरी चूत को आहह.. प्रिया आह.. तू वहाँ बैठी है.. क्या चूत रगड़ रही है आ आजा आ मेरे मुँह पर आ.. तेरी चूत रख दे.. मैं चाट कर तुझे डबल मज़ा देती हूँ आ…

रिंकू अपनी पूरी ताक़त से डॉली को चोद रहा था.. प्रिया ने डॉली की बात मान कर उसके मुँह के पास चूत ले आई और मज़े से चटवाने लगी।

दस मिनट तक रिंकू ताबड़तोड़ लौड़ा पेलता रहा.. अब उसका बाँध टूटने वाला था।

रिंकू- आह उहह उहह रंडी आहह.. मेरा पानी निकलने ही वाला है अब आहह.. आहह…

प्रिया- आहह.. चाट आहह.. डॉली आहह.. मेरी चूत भी आह लावा उगलने वाली है.. आईईइ कककक उफफफ्फ़ आह…

रिंकू के लौड़े ने गर्म वीर्य डॉली की चूत में भर दिया और डॉली भी प्रिया का पानी गटक गई।

डॉली को न जाने क्या समझ आया कि प्रिया को जल्दी से हटा कर रिंकू को ज़ोर से धक्का दिया वो भी एक तरफ़ हो गया और एक सेकंड के सौंवें हिस्से में डॉली रिंकू के मुँह पर बैठ गई यानि अपनी चूत उसके मुँह पर टिका दी।

डॉली- आह चाट बहनचोद आहह.. अपना पानी तू खुद चाट रंडी बोलता है ना… आहह.. उह.. ले मेरा रंडी वाला रूप देख.. आहह.. तू तो झड़ गया आहह.. मैं अभी अधूरी हूँ.. मेरी चूत को चाट कर ठंडा कर आहह.. उह.. जल्दी कर भड़वे आह…

 


डॉली की चूत से रिंकू का वीर्य बह कर बाहर आ रहा था। उसके साथ डॉली का भी चूत-रस मिक्स होकर आ रहा था।

रिंकू ना चाहते हुए भी वो चाट रहा था.. वो शायद दुनिया का पहला लड़का होगा जो अपना ही वीर्य गटक गया। डॉली की चूत भी चरम पे थी.. कुछ ही देर में उसने झड़ना शुरू कर दिया.. रिंकू ने वो भी चाटना शुरू कर दिया।

डॉली- आआआ एयाया अई चाट आहह.. गई मैं.. आह मज़ा आ गया अई..कककक..उईईइ…

प्रिया तो एक तरफ़ लेटी लंबी साँसें ले रही थी.. उसकी आँखें बन्द थीं और अभी के चरम-सुख का आनन्द वो बन्द आँखों से ले रही थी।

कुछ देर बाद तीनों बिस्तर पे लेटे हुए एक-दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे।

रिंकू- मान गया साली तेरे को.. कसम से तू वाकयी में लाजबाव है.. किस के पास चुदी.. कितनी बार चुदी.. ये मैं नहीं जानता मगर तेरी चूत मैंने पहली बार मारी.. उसमें इतना मज़ा आया.. काश तेरी सील तोड़ना मेरे नसीब में होता तो मज़ा आ जाता।

प्रिया- भाई आपको मेरी सील तोड़ने में मज़ा नहीं आया क्या?

रिंकू- अरे बहना बहुत मज़ा आया.. तुझे बता नहीं सकता मैं मगर डॉली पर कब से नज़र थी मेरी.. इसकी सील तोड़ने का सपना था मेरा.. इसलिए ऐसा बोल रहा हूँ।

डॉली- रिंकू एक बात कहूँ तुमसे.. तुम सब लड़के एक जैसे होते हो.. सब का एक सपना होता है बस.. एक बार सील-पैक चूत मिल जाए.. मगर तुमने ये सोचा है कभी कि जब सील टूटती है तो लड़की को कितनी तकलीफ़ होती है।

रिंकू- अरे तकलीफ़ के बाद ही तो मज़ा है यार…

डॉली- हाँ माना मज़ा है.. मगर मान लो प्रिया को तुमने एक बार चोद कर इसकी सील तोड़ दी तो क्या अब इसकी चूत कुँवारी नहीं है या खुल गई है… भगवान ने भी हम लड़कियों के साथ नाइंसाफी की है.. सील दी मगर ऐसी कि बस एक बार में टूट जाए.. मैं तो कहती हूँ ऐसी सील देते कि उसे तोड़ने के लिए लड़कों को ज़ोर लगाना पड़ता.. उनके लौड़े की टोपी छिल जाती.. कोई 20-30 बार चुदवाती तब जाकर उसकी सील टूटती.. तब लड़कों को तकलीफ़ होती और हमें मज़ा आता।

प्रिया- हाँ यार सही कहा.. फिर कोई लड़का पहले चोदने को नहीं बोलता.. दूसरे से कहता तू चोदले पहले.. मैं बाद में चोदूँगा और लौड़े की तकलीफ़ से डर जाता।

डॉली- हाँ यार तब ये बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं होतीं.. कोई लड़का किसी कुँवारी लड़की को चोदने की हिम्मत नहीं करता।

रिंकू- वाह.. रे दीपा रानी.. क्या ख्याली पुलाव पका रही है.. वैसे सोचा जाए तो सही है कोई भी 3 कुँवारी लड़कियाँ जिनकी सील टूटी हुई ना हो.. मिलकर कभी एक लड़के का ब्लात्कार नहीं कर सकतीं.. क्योंकि अगर वो करेंगीं तो दर्द उनको ही होगा.. ऐसे ही दर्द के डर से लड़के भी नहीं करते.. अच्छा सोचा तूने गुड यार….

डॉली- मेरे सोचने से क्या होता है.. भगवान को सोचना चाहिए…

प्रिया- अब बस भी कर यार जाने दे.. ये बता कल का क्या सोचा तुमने? मैडी की पार्टी में जाएगी या नहीं?

डॉली- पहले मन नहीं था.. मगर अब जाऊँगी उन दोनों के लौड़े का मज़ा भी चख लूँ यार.. बाद में इम्तिहान शुरू हो जाएँगे तो फिर कहाँ लौड़े नसीब में होंगे…

रिंकू- अरे मेरी जान मैं हूँ ना.. इम्तिहान के बाद रोज चुदवा लेना किसने मना किया है।

डॉली- बस बस.. बोलना आसान है.. इम्तिहान की टेन्शन में किसको चुदाई याद आएगी.. आज और कल तुझे जितना मज़ा लेना है.. लेले.. उसके बाद इम्तिहान ख़त्म होने तक सोचना भी मत…

रिंकू- ठीक है मेरी रानी.. कल उन दोनों के साथ मिलकर तेरी चूत और गाण्ड का मज़ा लूँगा और उस साले मैडी से हजार का नोट भी लेना है कड़क-कड़क….

डॉली- साले कुत्ते दिखा दी ना अपनी औकात.. किस बात के पैसे बे.. क्या चल रहा है तेरे दिमाग़ में..?

रिंकू- अरे अरे.. मेरी जान तू गलत समझ रही है मैं तेरी चूत की दलाली नहीं करूँगा.. मैंने शर्त लगाई थी उसके पैसे लेने हैं।

डॉली- कैसी शर्त?

रिंकू ने उसे सारी बात विस्तार से बताई तब डॉली को सब समझ आया।

डॉली- ओह.. ये बात है.. बड़ा हरामी है तू तो.. साले पहले ही पता लगा लिया कि मेरी सील टूट गई है.. अब सुन तू.. उनसे आज मिल और जो मैं बताती हूँ वैसा कर.. ताकि उनको पता ना चले कि मैं किसी से चुदवा चुकी हूँ.. अगर मेरे बारे में उनको कुछ पता लगा ना.. तो देख लेना तेरा और प्रिया का राज़ भी राज़ नहीं रहेगा…

प्रिया- ये तुम क्या बोल रही हो डॉली.. रिंकू मेरा भाई है किसी को पता लग गया तो मैं मर जाऊँगी।

रिंकू- साली राण्ड.. धमकी देती है बहन की लौड़ी…

डॉली- अरे कूल.. मेरे आशिक, मैं धमकी नहीं दे रही अपने आप को सेफ करने के लिए बोल रही हूँ.. बदनामी का डर मुझे भी है.. बस तुम मेरा राज़ छुपाओ.. मैं तुम्हारा.. ठीक है ना…

रिंकू- ओके जान ठीक है.. अब बता उनको क्या बोलना है.. वो दोनों तुझे चोदना चाहते हैं और मैं भी चाहता हूँ कि तू उनसे चुदे.. आखिर वो मेरे खास दोस्त हैं।

डॉली- ठीक है चुद जाऊँगी उनसे.. मगर ऐसे कि उनको मेरे पे ज़रा भी शक ना हो। अब सुन.. जैसा मैं बताती हूँ वैसा कर.. शाम को उनसे मिलना और…

डॉली बोलती रही, रिंकू बड़े गौर से सब सुनता रहा।

काफ़ी देर बाद प्रिया और रिंकू के चेहरे पर मुसकान आ गई और खुश होकर उसने डॉली के होंठों को चूम लिया।

रिंकू- वाह क्या आइडिया दिया मेरी जान.. मज़ा आ गया। अब चलो दोनों शुरू हो जाओ मेरे लौड़े को चूसो.. अब अभी मुझे तेरी गाण्ड भी मारनी है।

प्रिया तो जैसे रिंकू के बोलने का ही इंतजार कर रही थी.. झट से उसने लौड़े को सहलाना शुरू कर दिया।

डॉली- अच्छा मेरे आशिक.. मेरी गाण्ड भी मारनी है.. तो लाओ अभी लौड़े को चूस कर तैयार कर देती हूँ।

प्रिया लौड़े को सहला रही थी मगर डॉली तो लंड की प्यासी थी। सीधे होंठ रख दिए लौड़े पर और टोपी पर जीभ घुमाने लगी। उसको देख कर प्रिया भी लेट गई और गोटियाँ चूसने लगी।

रिंकू- आहह.. मेरी रानियों.. चूसो आहह.. मेरे लौड़े को मज़ा आ रहा है आज अभी डॉली की बस गाण्ड ही मारूँगा और रात को प्रिया की.. साली ना मत कहना.. ऐसा मौका दोबारा नहीं आएगा…

प्रिया- मार लेना भाई.. जब चूत आपको देदी तो गाण्ड में क्या है.. मार लेना जी भर कर मारना बस….

रिंकू का लौड़ा चूसा से फनफना गया था अपने वो असली रूप में आ गया।

रिंकू- बस साली रण्डियों.. अब चूसना बन्द करो.. आहह.. लौड़ा मस्त खड़ा हो गया। अब बन जा साली घोड़ी.. तेरी गाण्ड मारने का समय आ गया है।

डॉली भी अब देर नहीं करना चाहती थी उसकी बात मान गई और घोड़ी बन गई।

डॉली- आजा प्रिया आगे बैठ जा तेरी चूत चाट देती हूँ।

प्रिया- नहीं डॉली आज के लिए बस मेरा हो गया.. तुम मज़ा करो.. मैं बस देखती हूँ भाई गाण्ड कैसे मारते हैं।

रिंकू ने डॉली की गाण्ड को बड़े प्यार से सहलाया.. उसके छेद में ऊँगली डाली तो डॉली थोड़ी सी आगे हुई.. जिससे रिंकू को लगा गाण्ड ज़्यादा खुली हुई नहीं है.. तभी डॉली आगे खिसकी…

रिंकू- वाह साली तेरी गाण्ड तो बड़ी मुलायम है.. चोदने में बड़ा मज़ा आएगा.. तेरी गाण्ड को देख कर लौड़ा भी देख कैसे झटके मारने लगा है.. आहह.. क्या मस्त गाण्ड चोदने को मिली है.. तेरी गाण्ड मक्खन जैसी है।

डॉली- हाँ मेरे आशिक पेल दे लौड़ा गाण्ड में.. उसके बाद देख तेरे को कितना मज़ा मिलता है….

रिंकू ने लौड़े के सुपारे को गाण्ड पर फिराया और टोपी गाण्ड के छेद पर रख कर ज़ोर से धक्का मारा.. आधा लौड़ा ‘फच’ की आवाज़ से अन्दर चला गया।

डॉली- आहह.. अई आराम से बहनचोद.. फाड़ेगा क्या गाण्ड को….

डॉली ने जानबूझ कर ये सब कहा ताकि रिंकू को लगे कि उसने गाण्ड ज़्यादा नहीं मरवाई।

रिंकू- आह.. मज़ा आ गया साली लौड़ा अन्दर जाते ही खुश हो गया तेरे उस हरामी यार ने तेरी गाण्ड कम मारी है.. साला कुत्ता बस चूत ही चोदता है क्या…?

डॉली- आहह.. डाल दे पूरा.. साले कुत्ते आहह.. क्यों तड़पा रहा है आहह.. हरामी होगा तू.. वो तो मेरा आहह.. राजा है आह…

रिंकू ने लौड़े को पूरा बाहर निकाला और ज़ोर से झटका मारा.. लौड़ा जड़ तक गाण्ड में समा गया।

डॉली- आहह.. मार डाला रे जालिम.. आहह.. तेरा लौड़ा बहुत मोटा है आहह.. अब मार झटके आहह.. मेरी गाण्ड को तेरे रस से मालामाल करदे आहह.. भर दे पूरा लण्ड-रस मेरी गाण्ड में.. मार आहह.. ज़ोर से चोद आहह.. चोद आहह…

रिंकू ने रफ़्तार पकड़ ली.. प्रिया बस उनकी चुदाई देख रही थी।

डॉली- आ साली कुतिया ऐसे फ्री बैठी है आह चल मेरे नीचे आ आहह.. मेरी चूत चाट आहह.. गाण्ड के साथ-साथ चूत को भी मज़ा मिल जाएगा आहह.. आजा जल्दी से…

प्रिया- हाँ छिनाल.. आ रही हूँ.. तू तो बहुत बड़ी चुदक्कड़ है.. तुझे तो चूत में खुजली होगी ही.. ले अभी चाट देती हूँ…

प्रिया नीचे से चूत चाटने लगी और रिंकू गाण्ड की ठुकाई में लगा रहा।

करीब 25 मिनट तक ये खेल चला। डॉली की चूत ने तो पानी फेंक दिया जिसे प्रिया ने चाट लिया मगर रिंकू का लौड़ा अभी भी जंग लड़ रहा था।

रिंकू- उहह उहह आहह.. साली आहह.. क्या मस्त गाण्ड है तेरी.. आहह.. मज़ा आ गया आहह.. उहह उहह…

डॉली- अई आह अबे भड़वे आहह.. कब से मेरी गाण्ड का भुर्ता बना रहा है.. आहह.. अब तो मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया.. आहह.. तेरा लौड़ा कब उल्टी करेगा आहह…

रिंकू- चुप साली रंडी.. बस मेरा भी होने वाला है आहह.. उफ़फ्फ़ आ अई आह…

रिंकू के लौड़े ने भी लंबी दौड़ के बाद हार मान ली और वीर्य डॉली की गाण्ड में भर दिया।

 


कुछ देर तक लौड़ा गाण्ड में रखने के बाद रिंकू ने बाहर निकाला।

रिंकू- आह ले मेरी रंडी बहना चूत-रस तो तू पी गई.. अब ये गाण्ड और लण्ड का मिला जुला रस भी चाट मज़ा आएगा।

प्रिया- हाँ मेरे बहनचोद भाई.. अभी साफ कर देती हूँ.. डॉली तू भी आ जा.. तेरी गाण्ड से लौड़ा बाहर निकल गया इसका स्वाद ले ले।

दोनों ने मिलकर लौड़े को चाट-चाट कर साफ कर दिया। कुछ देर वो तीनों वहीं बातें करते रहे.. उसके बाद वहाँ से निकल गए।

उधर ललिता भी अपनी सहेली के यहाँ से घर आ गई तो उसने देखा कि चेतन सोया हुआ था।

डॉली की चुदाई के बाद उसको अच्छी नींद आई।

ललिता- अरे क्या बात है मेरे सरताज.. सो रहे हो.. मेरी सौतन कहाँ है? नहीं आई क्या आज…??

चेतन- आह उहह आ गईं तुम.. अरे आई थी दो बार जम कर चोदा.. मगर किसी काम का बहाना करके चली गई.. मुझे भी चुदाई के बाद अच्छी नींद आ गई तो सो गया…

ललिता- चलो अच्छा है.. मैं तो डर गई थी कि मैं भी चली गई वो भी नहीं आई.. आप शायद नाराज़ होकर सो गए होंगे।

चेतन- अरे नहीं मेरी जान.. तुमसे मैं कभी नाराज़ हो सकता हूँ क्या?

ललिता- सच्ची अगर मुझसे कोई ग़लती हो जाए तो भी नहीं?

चेतन- हाँ कभी नहीं.. कितनी भी बड़ी ग़लती हो.. मैं माफ़ कर दूँगा.. तुमने मेरे लिए कितना किया है.. अब मुझे भी मौका दो यार…

ललिता- ठीक है कभी ऐसा हुआ तब आपसे बात करूँगी.. अभी थोड़ा फ्रेश हो जाऊँ उसके बाद खाना भी बनाना है।

दोस्तो, अब यहाँ बताने को कुछ नहीं बचा उधर डॉली भी घर जाकर पढ़ने बैठ गई।

चलो खेमराज के पास चलते हैं.. वहाँ कुछ है आपको बताने लायक।

चाय की एक छोटी सी दुकान के बाहर मैडी और खेमराज बैठे थे और चाय की चुस्की ले रहे थे।

खेमराज दोपहर की बात मैडी को बता रहा था।

मैडी- साले तू अन्दर घुस गया.. तेरे को क्या लगा.. वो दोनों वहाँ क्यों गए थे?

खेमराज- यार तुम तो जानते हो ना.. शैतान दिमाग़ है.. मुझे लगा कि साला रिंकू वहाँ प्रिया को चोदने ले गया होगा.. इसी लिए मैं घर में घुस गया।

मैडी- अबे साले तू पागल है क्या.. वो उसकी बहन है साले.. कुछ भी सोच लिया।

खेमराज- तुमको नहीं पता.. आजकल ऐसा बहुत सुनने में आ रहा है साली कौन बहन.. कौन भाई.. पता ही नहीं चलता.. अच्छा जाने दे आगे तो सुन…

मैडी- सुना.. तेरी बकवास कहानी.. आगे क्या बाकी है अब?

खेमराज ने सारी बात जब बताई मैडी के होश उड़ गए।

मैडी- अरे इसकी माँ का.. साला रिंकू.. क्या गेम खेला रे.. प्रिया का सहारा लेकर डॉली तक पहुँच गया.. हो गया बंटाधार.. कल लौड़े को मुठ मारना.. अब डॉली तो आने से रही। साले रिंकू ने जल्दबाज़ी में सारा काम बिगाड़ दिया होगा।

इतने में रिंकू भी वहाँ आ गया।

रिंकू- अबे चूतिया साले.. मैंने कुछ काम नहीं बिगाड़ा.. सब नॉर्मल है.. तू बता कल क्या करने वाला है?

मैडी- आ गया तू.. साले पहले ये बता क्या हुआ.. डॉली ने क्या कहा?

रिंकू- अरे कुछ नहीं.. तू पहले कल का प्लान बता.. बाद में तुम दोनों को सारी बात बता दूँगा…

मैडी- देख सीधी सी बात है.. डॉली ऐसे सीधी तरह तो हमसे चुदेगी नहीं.. मैंने ‘उसका’ का इंतजाम कर लिया है.. बस किसी तरह उसको दे देंगे। उसके बाद उस पर मस्ती चढ़ जाएगी। मैंने होटल में कमरा बुक कर लिया.. पहले ही मैं उसको वहाँ ले जाऊँगा वो खुद चुदना चाहेगी.. मगर मैं ना कहूँगा उसके बहुत ज़्यादा बोलने पर ही मैं उसको चोदूँगा.. उसके बाद तुम दोनों भी मज़ा लेना और हाँ हम उसका वीडियो बना लेंगे ताकि उसको दिखा सकें कि देख तूने खुद कही, तब ही ये सब हुआ…

ये सब इंतजाम में मेरी तो साली गाण्ड फट गई.. एक तो साली ये गोली भी बहुत मुश्किल से मिली है…

रिंकू- प्लान तो अच्छा बनाया मगर साले ये रेप ही हुआ ना.. हम जब बोलते थे तब तूने मना किया.. और आज तूने खुद ऐसा घटिया प्लान बनाया।

मैडी- क्या बकवास कर रहा है.. ये प्लान घटिया है साले.. मस्ती छाएगी उस पर.. खुद साथ देगी हमारी चुदाई में.. कोई रेप नहीं होगा.. उसको लगेगा कि उसकी ग़लती है।

रिंकू- वाह.. मान गए उस्ताद.. उसको लगेगा कि उसकी ग़लती है.. साले उसको कुछ पिलाएँगे.. तेरी पार्टी है.. नाम तुझपे ही आएगा और वो इतनी भी पागल नहीं है कि समझ ना पाए.. उसको हम तीनों पर पहले से ही शक है.. समझे और ये सब करने की कोई जरूरत नहीं.. वो कल होशो हवाश में हमसे चुदेगी.. समझे साला.. बड़ा आइडिया लाया है हट….

खेमराज- क्या बोल रहा है यार.. होश में चुदेगी कसम से तेरे मुँह में कच्ची चूत.. अगर ऐसा हुआ तो मज़ा आ जाएगा यार…

मैडी- क्यों लंबी फेंक रहा है तू साले?

रिंकू- अबे चूतिया आज पूरी दोपहर में उसे चोद चुका हूँ और तुम दोनों के लिए भी मना लिया समझे…

खेमराज- अरे बाप रे.. साला मेरे को लगा ही था. कुछ ना कुछ गड़बड़ है.. मगर ये चमत्कार हुआ कैसे? प्रिया भी तो वहीं थी.. ये सब कैसे हुआ यार?

मैडी- बकवास.. मैं नहीं मानता एक ही दिन में तूने उसे पटा भी लिया और चोद भी लिया नामुमकिन…

रिंकू- तुझे मेरी बात पर भरोसा नहीं ना.. रात को वो तुझे फ़ोन करेगी.. तब पता चल जाएगा समझे…

मैडी- क्या.. वो मुझे फ़ोन क्यों करेगी और ऐसा क्या हो गया जो वो खुद राज़ी होगी चुदने के लिए…

खेमराज- माँ कसम.. मज़ा आ जाएगा यार साली की जवानी के मज़े लेंगे..काश रिंकू तू सच बोल रहा हो।

रिंकू- अबे चूतिया साले काश का क्या मतलब है.. मैं सच ही बोल रहा हूँ.. कल देख लेना और हाँ मैडी तुझे तो रात को ही पता चल जाएगा.. ओके अब चलो मुझे घर पर थोड़ा काम भी है यार…

तीनों वहाँ से चाय पीकर निकल गए मैडी अब भी सोच रहा था कि रिंकू की बात सही है या गलत.. इसी उलझन में वो घर चला गया।

रिंकू की माँ ने बताया कि प्रिया आज यही रहेगी तो दोनों एक ही कमरे में सो जाओ.. और अपने इम्तिहान की तैयारी करो।

रिंकू के मन की मुराद पूरी हो गई वो तो सोच रहा था रात को सब के सोने के बाद प्रिया के कमरे में जाएगा मगर यहाँ तो सारी बाजी ही उसके हाथ में आ गई।

उधर डॉली आज पूरे दिन की चुदाई से थक कर चूर हो गई थी। खाना खाने के बाद अपने कमरे में बैठी सुस्ता रही थी.. तभी अचानक से उसे

कुछ याद आया और वो फ़ौरन फ़ोन के पास चली गई। उसने मैडी को फ़ोन लगाया।

मैडी- हैलो कौन?

डॉली- मैडी मैं हूँ डॉली.. तुमसे एक जरूरी बात कहनी थी.. सुबह तुम रिंकू से मिल लेना.. कल मैं 11 बजे तक फ्री होकर आ जाऊँगी मगर सुबह रिंकू से जरूर मिल लेना और होटल का खर्चा मत करना.. बस नॉर्मल सी पार्टी रखना.. वहाँ सिर्फ़ तुम तीन दोस्त और मैं और किसी को मत बुलाना समझे…

मैडी- मगर ये सब अचानक कैसे.. रिंकू शाम को मिला था.. कुछ बता रहा था.. क्या वो बात सही है?

डॉली- वो सब कल आकर बता दूँगी ओके बाय.. अभी मैं जरा बिज़ी हूँ।

डॉली ने फ़ोन काट दिया मगर मैडी अब भी मूर्ति बना हुआ वहीं खड़ा रहा.. उसको यकीन ही नहीं हो रहा था।

काफ़ी देर बाद वो नॉर्मल हुआ और खुश होकर अपने कमरे में चला गया।

उसके दिमाग़ में यही था कि कल क्या होगा।

डॉली भी थकी हुई थी.. तो वो अपने कमरे में जाकर सो गई।

उधर खाना ख़त्म करके रिंकू और प्रिया कमरे में चले गए।

प्रिया- भाई किताबें निकाल लो.. अभी सब जाग रहे हैं.. तब तक पढ़ाई कर लेते हैं.. अगर कोई अन्दर भी आए तो किसी को सके ना हो….

रिंकू को प्रिया की बात समझ आ गई और दोनों पढ़ने बैठ गए.. थोड़ी देर बाद ही उसकी मम्मी देखने आई और उनसे कहा- ये गर्म दूध पी लो दिमाग़ फ्रेश हो जाएगा…

मम्मी के जाने के काफ़ी देर बाद रिंकू खड़ा हुआ और घर का मुआयना करके आया कि सब सो गए या नहीं…

प्रिया- क्या हुआ भाई.. कहाँ गए थे आप बड़ी देर में आए?

रिंकू- अरे मेरी चुदक्कड़ बहना.. सब सोए या नहीं.. ये देखने गया था।

प्रिया- ओह.. क्या हुआ.. सो गए क्या?

रिंकू- हाँ जानेमन सो गए.. अब जल्दी से कपड़े निकाल आज तेरी गाण्ड का मुहूरत करूँगा.. साली आज तक डॉली की मटकती गाण्ड देख कर लौड़ा खड़ा होता था.. आज तेरी गाण्ड के नाम से ही देख.. कैसे पजामे में तंबू बन रहा है।

प्रिया- हाँ भाई.. दिख रहा है मगर मुझे थोड़ा डर लग रहा है.. आपका इतना लंबा लौड़ा मेरी छोटी सी गाण्ड में कैसे जाएगा।

रिंकू- अरे पगली.. जब चूत में चला गया.. तो गाण्ड में भी चला जाएगा.. तू डर मत.. पहली बार में थोड़ा दर्द होगा.. उसके बाद सब ठीक हो जाएगा।

प्रिया- नहीं भाई पहली बार जब चूत में गया था.. मेरी जान निकलते-निकलते बची थी।

रिंकू- अरे वो तो मैं गुस्से में तुझे चोद रहा था.. अब तो बड़े प्यार से तेल लगा कर तेरी गाण्ड में लौड़ा डालूँगा.. तू डर मत मेरी प्यारी बहना…

प्रिया- ठीक है भाई.. जैसी आपकी मर्ज़ी.. आ जाओ अब आप ही मुझे नंगी कर दो।

रिंकू उसके करीब गया और उसके कपड़े निकाल दिए.. और खुद भी नंगा हो गया.. उसका लौड़ा झटके खा रहा था।

प्रिया- भाई देखो कैसे ये झटके खा रहा है.. बड़ा हरामी है.. इसको पता लग गया कि आज ये मेरी कसी हुई गाण्ड में जाएगा।

रिंकू- हाँ मेरी जान ये सब महसूस करता है पहले तुझे अच्छे से चूमूँगा.. चाटूँगा.. उसके बाद ही तेरी गाण्ड मारूँगा।

रिंकू और प्रिया अब एक-दूसरे के होंठों का रस पीने लगे थे।

 


इसी दौरान रिंकू का हाथ प्रिया की गाण्ड को दबा रहा था.. प्रिया को बड़ा मज़ा आ रहा था।

दोनों बिस्तर पर लेट गए और चूसने का प्रोग्राम चालू रहा.. रिंकू अब प्रिया के निप्पल को चूसने लगा।

प्रिया- आ आह्ह.. भाई मज़ा आ रहा है.. उह.. ये निप्पल का कनेक्शन आह्ह.. चूत से है क्या.. आह्ह.. आप चूस रहे हो और अह.. चूत में मीठी खुजली शुरू हो गई आह्ह..

रिंकू- हाँ मेरी बहना निप्पल और चूत की तारें आपस में जुड़ी हुई हैं अब तू मज़ा ले.. मुझे भी तेरे आमों का रस पीने दे.. उफ़ बड़े रसीले हैं तेरे आम..

रिंकू काफ़ी देर तक प्रिया के मम्मों को चूसता रहा.. अब वो नीचे आकर चूत को चाटने लगा था। प्रिया तो बस आनन्द के मारे सिसकियां ले रही थी। रिंकू का लौड़ा लोहे जैसा सख़्त हो गया था।

रिंकू- साला ये लंड भी ना.. परेशान कर रहा है.. ठीक से चूत चाटने भी नहीं दे रहा.. प्रिया घूम जा तू.. लौड़े को चूस.. मैं तेरी चूत को ठंडा करता हूँ.. उसके बाद तेरी गाण्ड का मज़ा लूँगा..

प्रिया घूम गई अब दोनों 69 की अवस्था में आ गए थे.. रिंकू बड़े सेक्सी अंदाज में चूत को चाटने लगा। प्रिया भी तने हुए लौड़े को ‘घपाघप’ मुँह में चूसे जा रही थी। उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी.. क्योंकि रिंकू चूत चाटने के साथ-साथ अपनी ऊँगली पर थूक लगा कर उसकी गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा था।

प्रिया को बहुत मज़ा आ रहा था.. उसे गाण्ड में ऊँगली करने से गुदगुदी हो रही थी और चूत पर जीभ का असर उसे पागल बना रहा था।

करीब 10 मिनट बाद उसकी चूत ने उसका साथ छोड़ दिया और वो झड़ने लगी।

रिंकू ने सारा चूतरस पी लिया।

रिंकू- आह्ह.. मज़ा आ गया मेरी रानी.. चल अब तैयार हो जा गाण्ड मरवाने के लिए मेरा लौड़ा भी कब से तड़फ रहा है।

प्रिया- भाई आपका लौड़ा बहुत गर्म हो गया है.. चुसाई से जल्दी ही झड़ जाएगा.. मैं मुँह से ही चूस कर पानी निकाल देती हूँ दूसरी बार कड़क हो जाए तब आप गाण्ड मार लेना।

रिंकू- नहीं मेरी जान.. लौड़े को इतना क्यों चुसवाया.. पता है.. ताकि ये तेरी गाण्ड में जाने के लिए तड़पे.. तब तेरी गाण्ड मारने का मज़ा दुगुना हो जाएगा..

प्रिया- ठीक है मेरे गान्डू भाई.. आप नहीं मानोगे.. लो मार लो कौन सी अवस्था पसन्द करोगे।

रिंकू- आज गधी बन जा.. तुझे गधी बना कर मैं तेरी सवारी करूँगा..

प्रिया- क्या भाई.. कभी कुतिया.. कभी गधी.. आप घोड़ी भी तो बोल सकते हो।

रिंकू- देख अब तू चाहे कुछ भी बन.. लौड़ा तो तेरी गाण्ड में ही जाना है। क्या फ़र्क पड़ता है कि तू क्या बनी है।

प्रिया- अच्छा भाई.. लो आपके लौड़े के लिए तो गधी भी बन जाती हूँ लो अपनी गधी की गाण्ड में लौड़ा डाल दो।

प्रिया घुटनों के बल हो गई। कमर को सीधा कर लिया पैर फैला लिए.. ताकि गाण्ड का छेद थोड़ा खुल जाए.. मगर कुँवारी गाण्ड थी तो कहाँ छेद खुलने वाला था।

रिंकू ने लौड़े पर अच्छे से थूक लगाया और प्रिया की गाण्ड में भी ढेर सारा थूक लगा कर ऊँगली से अन्दर तक करने लगा।

प्रिया- उइ आई आह्ह.. भाई ऊँगली से ही दर्द हो रहा है.. लौड़ा कैसे जाएगा.. प्लीज़ आप चूत ही मार लो, लौड़े का अन्दर जाना मुश्किल है।

रिंकू- अरे साली रंडी बनने का शौक तुझे ही चढ़ा था.. अब दर्द से क्या घबराती है.. बस आज की बात है.. उसके बाद तो तेरे दोनों छेद खुल जायेंगे.. तू पक्की रंडी बन जाएगी.. मैं रोज तुझे चोदूँगा।

प्रिया- नहीं भाई मुझे कोई रंडी नहीं बनना.. बस आपके सिवा मैं किसी के बारे में नहीं सोचूँगी.. आह्ह.. रंडी तो वो डॉली है.. जो सब के पास जा जा कर चुदती है उई आह्ह..

रिंकू- अच्छा.. तू रंडी नहीं बनेगी तो क्या मेरी बीवी बनने का इरादा है?

प्रिया- हाँ भाई हम कहीं भाग जाते हैं वहाँ शादी कर लेंगे.. अपना घर बसाएंगे हम..

रिंकू- अब ये सपने देखना बस भी कर.. हम भाई-बहन हैं.. ये नामुमकिन है.. चल अब रेडी हो जा.. लौड़ा गाण्ड में लेने के लिए.. मैंने तेरी गाण्ड में अच्छे से थूक लगा दिया है.. अब दर्द कम होगा.. लौड़ा आराम से अन्दर जाएगा।

प्रिया- आप भी ना भाई कोई क्रीम लगाते या तेल लगाते.. आप ना थूक लगा रहे हो..

रिंकू- अरे मेरी बहना थूक लगा कर गाण्ड मारने का मज़ा ही अलग होता है.. अब बस बात बन्द कर.. मुझे लौड़ा घुसड़ेने दे।

रिंकू ने लौड़े पर और थूक लगाया और प्रिया के छेद पर लौड़ा टिका कर दबाव देने लगा.. लौड़ा फिसल कर ऊपर निकल गया.. दोबारा किया तो फिसल कर नीचे हो गया। रिंकू थोड़ा झुंझला सा गया।

रिंकू- तेरी माँ की चूत.. साला अन्दर ही नहीं जा रहा..।

प्रिया- भाई मेरी गाण्ड बहुत छोटी और आपका लौड़ा बहुत बड़ा है.. नहीं जाएगा आप समझो बात को.. आह्ह..

रिंकू- चुप बहन की लौड़ी.. साली कब से ‘पक-पक’ कर रही है.. जाएगा क्यों नहीं.. अबकी बार देख कैसे जाता है।

प्रिया समझ गई कि ये गुस्सा हो गया.. वो चुप रही और दाँत भींच लिए अपने ताकि दर्द हो तो चींख ना निकले।

रिंकू ने लौड़े पर और थूक लगाया और प्रिया के छेद पर लौड़ा टिका कर दबाव देने लगा.. लौड़ा फिसल कर ऊपर निकल गया.. दोबारा किया तो फिसल कर नीचे हो गया। रिंकू थोड़ा झुंझला सा गया।

रिंकू- तेरी माँ की चूत.. साला अन्दर ही नहीं जा रहा..

प्रिया- भाई मेरी गाण्ड बहुत छोटी और आपका लौड़ा बहुत बड़ा है.. नहीं जाएगा आप समझो बात को.. आह्ह..

रिंकू- चुप बहन की लौड़ी.. साली कब से ‘पक-पक’ कर रही है.. जाएगा क्यों नहीं.. अबकी बार देख कैसे जाता है।

प्रिया समझ गई कि ये गुस्सा हो गया.. वो चुप रही और दाँत भींच लिए अपने ताकि दर्द हो तो चींख ना निकले।

अबकी बार रिंकू ने दोनों हाथों से गाण्ड को फैलाया और टोपी छेद पर रख कर थोड़ा सा दबाव बनाया तो टोपी गाण्ड के छेद में अटक गई.. बस यही मौका था उसके पास.. उसने जल्दी से एक हाथ से लौड़ा पकड़ा दूसरे हाथ से प्रिया की कमर को पकड़ा और दबाव बनाया.. दो इंच लौड़ा अन्दर घुस गया।

प्रिया- आह आह.. भाई उआई.. बहुत दर्द हो रहा है…

रिंकू- अरे मेरी जान तेरी गाण्ड है ही इतनी टाइट.. थोड़ा दर्द तो होगा ही.. तू बस बर्दास्त कर.. उसके बाद बड़ा मज़ा आएगा..।

रिंकू ने प्रिया की कमर को पकड़ कर दोबारा लौड़े पर दबाव बनाया.. दो इंच लौड़ा और अन्दर घुस गया।

रिंकू का लंड गाण्ड में एकदम फँस सा गया था जैसे उसे किसी ने शिकंजे में फंसा दिया हो.. उधर प्रिया की हालत भी खराब हो रही थी। दर्द के मारे उसकी आँखों में आँसू आ गए थे.. मगर वो दाँत भींचे.. बस सिसक रही थी।

रिंकू- आह्ह.. मज़ा आ गया.. कैसी कसी हुई गाण्ड है तेरी.. साला लौड़ा अन्दर जकड़ सा गया है।

प्रिया- आई भाई उफ़ ससस्स.. अब और मत डालना.. आह्ह.. मेरी गाण्ड फट जाएगी.. बहुत आआह्ह.. आह.. दर्द हो रहा है प्लीज़.. आह्ह.. इतने से ही आप काम चला लो आह्ह..

रिंकू- हाँ बहना जानता हूँ.. तुझे तकलीफ़ हो रही है.. डर मत मैं बड़े आराम से तेरी गाण्ड मारूँगा।

रिंकू का 4″ लौड़ा गाण्ड में फँसा हुआ था। अब वो धीरे-धीरे उसे अन्दर-बाहर करने लगा.. प्रिया को दर्द हो रहा था मगर कुछ देर बाद दर्द के साथ उसको एक अलग ही मज़ा भी आने लगा। वो उत्तेजित होने लगी.. उसकी चूत भी पानी छोड़ने लगी।

प्रिया- आ आह.. हाँ ऐसे ही भाई.. आह्ह.. आराम से करो आह्ह.. स..सस्स मज़ा आ रहा है.. आई धीरे.. अभी दर्द है मगर आह्ह.. कम हो रहा है आह्ह..

रिंकू अब थोड़ी रफ्तार बढ़ा रहा था और लौड़े पे दबाव बना रहा था ताकि और वो अन्दर तक चला जाए।

दस मिनट तक ये सिलसिला चलता रहा। अब रिंकू भी चरम सीमा पर पहुँच गया था.. प्रिया की दहकती गाण्ड में लौड़ा ज़्यादा देर नहीं टिक पाया उसको लगा कि अब कभी भी पानी निकल जाएगा तो उसने प्रिया की कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ लिया।

रिंकू- बहना मेरा पानी किसी भी पल निकल सकता है… अब बर्दास्त नहीं होता.. मैं पूरा लौड़ा तेरी गाण्ड की गहराई में उतार रहा हूँ संभाल लेना तू…

प्रिया- आह्ह.. आई.. भाई आह्ह.. अब मना करूँगी आह्ह.. तो आप मानोगे थोड़ी.. आह डाल दो आह्ह.. अब आधा गया तो आह पूरा भी पेल दो आह्ह..

बस इसी पल रिंकू ने लौड़ा गाण्ड से बाहर निकाला और तेज झटका मारा। प्रिया की गाण्ड को चीरता हुआ लौड़ा जड़ तक उसमें समा गया।

ना चाहते हुए भी प्रिया के मुँह से चीख निकल गई.. मगर वो इतनी ही चीखी कि बस उसकी आवाज़ कमरे से बाहर ना जा पाए।

 


रिंकू अब रफ्तार से पूरा लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा.. कसी हुई गाण्ड में बड़ी मुश्किल से लौड़ा जा रहा था।

प्रिया- आआआ आआआ उयाया.. भाई मर गई आह्ह.. उह..

रिंकू- आह्ह.. उहह बहना.. बस एक मिनट आह्ह.. मेरा पानी निकलने वाला है आह्ह.. सब्र कर आह्ह…

रिंकू ने तीन-चार जोरदार झटके मारे और अंत में उसके लौड़े का जवालामुखी फट गया।

वो प्रिया की गाण्ड में वीर्य की धार मारने लगा।

रिंकू के गर्म-गर्म वीर्य से प्रिया को गाण्ड में बड़ा सुकून मिला।

उसने एक लंबी सांस ली।

प्रिया- आई ससस्स.. भाई आह.. आपने तो मेरी गाण्ड का हाल बिगाड़ दिया उफ़ अब लौड़ा निकाल भी लो मर गई रे आह्ह…

रिंकू ने ‘फक्क’ की आवाज़ के साथ लौड़ा गाण्ड से बाहर निकाल लिया और एक साइड होकर लेट गया.. फ़ौरन प्रिया भी उसके सीने पर सर रख कर लेट गई..

लौड़े की ठापों से उसकी गाण्ड एकदम लाल हो गई थी।

रिंकू- आह्ह.. मज़ा आ गया बहना.. तेरी टाइट गाण्ड में साला लौड़ा.. बड़ी मुश्किल से जा रहा था.. उफ़ क्या गर्मी थी गाण्ड में.. साली लौड़े को झड़ने पर मजबूर कर दिया।

प्रिया- भाई आपके लौड़े ने मेरी गाण्ड का क्या हाल कर दिया.. देखो नर्म बिस्तर पर भी ठीक से नहीं टिक पा रही है।

रिंकू- मेरी जान ये तो तूने लंड को चूस-चूस कर अधमरा कर दिया था.. गाण्ड में ज़्यादा देर टिक ना सका। अबकी बार बराबर ठोकूँगा ना.. सारा दर्द हवा हो जाएगा और देखना तुझे मज़ा भी खूब आएगा।

प्रिया- बाप रे बाप.. आप दोबारा मेरी गाण्ड मारोगे.. ना बाबा अबकी बार चूत से काम चला लो.. मुझे नहीं मरवानी गाण्ड.. बड़ा दर्द होता है…

रिंकू- अरे रानी तू फिकर क्यों करती है.. बस आज की रात ही हम साथ-साथ हैं.. कल से कहाँ ऐसा मौका मिलेगा.. ला इन रसीले मम्मों का थोड़ा रस पिला.. ताकि जल्दी से लौड़े में ताक़त आए और अबकी बार जमकर तेरी ठुकाई करूँ।

प्रिया- अच्छा कर लेना.. पहले मुझे बाथरूम जाना है.. आपके लौड़े ने गाण्ड में हलचल मचा दी है.. मैं आती हूँ अभी…

प्रिया के जाने के बाद रिंकू कल के बारे में सोचने लगा कि मैडी और खेमराज की नज़र में वो हीरो बन जाएगा मगर हक़ीकत कोई नहीं जनता कि ये हीरो ऐसे ही नहीं बना.. बल्कि अपनी बहन को चोदने के बाद बना है।

प्रिया के बाथरूम से आने के बाद रिंकू दोबारा शुरू हो गया.. उसके मम्मों को दबा कर रस पीने लगा।

जब उसका लौड़ा फनफना गया तो दोबारा उसकी गाण्ड में पेल दिया और अबकी बार 35 मिनट तक दे-दनादन उसको चोदता रहा।

रात भर में उसने 2 बार प्रिया की गाण्ड और एक बार चूत मारी.. बेचारी प्रिया का तो हाल से बहाल कर दिया।

दोस्तो, कहानी लंबी हो रही है.. हर एक चुदाई को पूरा लिखना अब मुमकिन नहीं.. आपके भी सब्र का बाँध टूट गया है अब.. वो आपके ईमेल से पता चलता है..

तो चलिए आगे कहानी का रस लीजिए।

सुबह का सूरज सब के लिए एक अलग ख़ुशी लेकर आया था।

रिंकू की मम्मी ने करीब 8 बजे उनको उठाया.. तब कहीं जाकर उनकी आँख खुली..

वैसे रात को दोनों ने कपड़े पहन लिए थे ताकि सुबह किसी के दरवाजे खटकाने पर तुरन्त दरवाजा खोल दिया जाए।

और हुआ भी वैसा ही रिंकू जल्दी से उठा.. एक चादर ज़मीन पर डाली तकिया डाला और दरवाजा खोल दिया।

उसकी मम्मी के पूछने पर बता दिया कि प्रिया ऊपर सोई और वो नीचे.. सब ठीक रहा.. प्रिया की गाण्ड में दर्द था तो वो नहीं उठी..

रात की ठुकाई से उसे बुखार भी हो गया था।

रिंकू नहा-धोकर घर से निकल गया। उधर मैडी भी रिंकू से मिलने को बड़ा उतावला था।

तो फ़ौरन वो भी करीब 8 40 को घर से निकल गया।

दोस्तो, डॉली सुबह 7 बजे उठ गई और काम में अपनी मम्मी का हाथ बंटाने लगी।

चेतन ने रात को ललिता की खूब ठुकाई की.. अब उसके दिमाग़ में प्रिया घूम रही थी।

तो दोस्तो, आज सोमवार आ गया जिसका आपको बड़ी बेसब्री से इन्तजार था यानि कहानी अपने चरम पर आ गई..

तो चलिए देखते हैं आज क्या होता है?

करीब 10 बजे वहीं जहाँ कल उनकी मुलाकात हुई थी.. तीनों चाय का मज़ा ले रहे थे और साथ ही बातों का भी मज़ा ले रहे थे।

मैडी- यार रिंकू पूरी रात नींद नहीं आई.. साले ऐसा क्या जादू कर दिया तूने.. एक ही मुलाकात में.. कि साली तेरे से चुद गई.. और आज हमसे भी चुदने को राज़ी हो गई।

रिंकू- तूने वो कहावत तो सुनी होगी बेटा बेटा होता है और बाप बाप.. तो सालों मैं तुम्हारा बाप हूँ।

खेमराज- अरे मेरे बाप.. अब तू बता दे कसम से बड़ी चुल्ल हो रही है.. कल क्या हुआ था.. जब मेरे साथ तू बाहर आया उसके बाद वापस जाकर ऐसा क्या हुआ..? बता ना यार…

रिंकू- बस तुम चूत का मज़ा लो.. बाकी सारी बातें भूल जाओ.. मेरे पास एक ऐसी बात है.. जिसकी वजह से अब डॉली रोज हमसे चुदवाएगी समझे.. अब ज़्यादा सवाल किए ना.. तो सालों लौड़े हिलाते रह जाओगे.. मैं रोज अकेला मज़ा लूँगा।

खेमराज- अच्छा बाबा माफ़ कर दे.. कब आ रही है और कहाँ?

रिंकू- इस मैडी को पूछो.. बड़ा होटल का प्लान बना रहा था ना साले…

मैडी- प्लान क्या.. शालीमार में कमरा बुक कर लिया है.. वो 11 बजे आएगी.. अच्छा अब गोली-वोली की तो जरूरत नहीं.. तो ऐसा कर कि पावर वाली गोली हम ले लें.. साली को जमकर चोदेंगे।

खेमराज- हाँ यार पहली बार चूत मिल रही है.. ऐसे तो साली के गोरे जिस्म को देखते ही लौड़ा उल्टी कर देगा.. गोली लेने में ही भलाई है.. तभी उसको जमकर चोद पाएँगे।

रिंकू- जाओ ले आओ.. अब मैं जाता हूँ तुम वहाँ पहुँचो.. मैं उसको लेकर वहीं आता हूँ।

खेमराज- अरे मेरे बाप.. अब तू बता दे कसम से बड़ी चुल्ल हो रही है.. कल क्या हुआ था.. जब मेरे साथ तू बाहर आया उसके बाद वापस जाकर ऐसा क्या हुआ..? बता ना यार…

रिंकू- बस तुम चूत का मज़ा लो.. बाकी सारी बातें भूल जाओ.. मेरे पास एक ऐसी बात है.. जिसकी वजह से अब डॉली रोज हमसे चुदवाएगी समझे.. अब ज़्यादा सवाल किए ना.. तो सालों लौड़े हिलाते रह जाओगे.. मैं रोज अकेला मज़ा लूँगा।

खेमराज- अच्छा बाबा माफ़ कर दे.. कब आ रही है और कहाँ?

रिंकू- इस मैडी को पूछो.. बड़ा होटल का प्लान बना रहा था ना साले…

मैडी- प्लान क्या.. शालीमार में कमरा बुक कर लिया है.. वो 11 बजे आएगी.. अच्छा अब गोली-वोली की तो जरूरत नहीं.. तो ऐसा कर कि पावर वाली गोली हम ले लें.. साली को जमकर चोदेंगे।

खेमराज- हाँ यार पहली बार चूत मिल रही है.. ऐसे तो साली के गोरे जिस्म को देखते ही लौड़ा उल्टी कर देगा.. गोली लेने में ही भलाई है.. तभी उसको जमकर चोद पाएँगे।

रिंकू- जाओ ले आओ.. अब मैं जाता हूँ तुम वहाँ पहुँचो.. मैं उसको लेकर वहीं आता हूँ।

रिंकू वहाँ से वापस घर आ गया तब तक प्रिया भी उठ गई थी।

उसको बुखार था तो वो बस मुँह-हाथ धोकर बैठी थी।

रिंकू की माँ ने उसे नहाने नहीं दिया था और गुस्सा भी किया कि इतनी देर रात जागने की क्या जरूरत थी मगर प्रिया ने पढ़ाई का बहाना बना दिया था।

रिंकू- हाय माय स्वीट सिस्टर गुड मॉर्निंग।

प्रिया- गुड मॉर्निंग भाई।

रिंकू- आख़िर कर उठ ही गई मेरी प्यारी बहना.. चल जरा डॉली को फ़ोन तो लगा.. मुझे उससे बात करनी है।

डॉली- हाँ जानती हूँ क्या बात करनी है.. आपका अब तक मन नहीं भरा क्या.. रात भर तो चुदाई की है..?

रिंकू- तू भी कैसी बात करती है चूत से भला कभी मन भरता है क्या और वो भी दोस्तों के साथ मिलकर चुदाई का तो मज़ा ही दुगुना आएगा.. चल अब बातें बन्द कर.. फ़ोन लगा उसको…

प्रिया ने डॉली को फ़ोन लगाया तो उसकी मम्मी ने उठाया और डॉली को दे दिया।

तब रिंकू ने उसे होटल की बात बता दी..

डॉली ने कहा- दस मिनट में घर से निकल रही हूँ.. तुम भी बाहर आ जाओ…

रिंकू ने ‘ओके’ बोलकर फ़ोन रख दिया और बाहर जाने लगा।

प्रिया- भाई जा रहे हो आप.. बेचारी को आराम से चोदना.. तुम तीन वो अकेली.. कहीं कुछ हो ना जाए…

रिंकू- अरे उसको क्या होगा साली रंडी है वो.. तू टेन्शन मत ले.. बड़े प्यार से चोदेंगे उसको.. अच्छा अब चलता हूँ।

प्रिया- बेस्ट ऑफ लक भाई।

रिंकू घर से निकल गया.. उधर डॉली भी आज अपनी मम्मी को प्रिया का नाम लेकर घर से निकल गई।

 
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