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साजिश Thriller

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“चलो राजू अभी घर चलते हैं। कल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से इस केस को नए नजरिए से देखेंगे।”दूसरे दिन करीब 12:00 बजे इंस्पेक्टर मनोज ने अविनाश को फोन करके पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी दी।

“मनोज,पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या मिला है?”

“जिस समय रानू की हत्या हुई उस समय उसने बहुत ही ज्यादा शराब पी रखी थी और नशे में उसकी दम घुटने से मौत हो गई। ऐसा मालूम पड़ता है कि किसी ने नशे की हालत में मुंह और नाक पर कुछ रख दिया था। जैसे कोई तकिया हो या तौलिया हो और दम घुटने से उसकी मौत हो गई।”

“मौत का समय और दिन क्या था?”

“11 जून को करीब रात के 11:00 बजे के आस पास।”

“अच्छा बहुत-बहुत धन्यवाद।” उसके बाद अविनाश ने बेबी और राजू को अपने केबिन में बुला लिया और उन्हें भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी।

बेबी ने कहा,-“लेकिन सर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तो कुछ भी जाहिर नहीं होता है। नशे की हालत में रानू की दम घुटने से मौत हो गई।”

तब तक राजू बोला,-“ सर मैं इसमें कुछ बोलूं।”

“हां राजू बोलो।हो सकता है कि रानू की हत्या करने के बाद मेरा मतलब है 11 जून के बाद सुबोध ठाकुर फरार हो गया।पर सर आप सोचो क्या सुबोध इतना बेककूफ है कि वो रानू की लाश को अपने फार्म हाउस के लान मे गाड़ेगा?वो रानू की लाश को कहीं भी फेक सकता है।”बेबी बोली,-“राजू ऐसा भी तो हो सकता है कि उसने रानू की हत्या खुद न की हो किसी से कारवाई हो।”

“जो भी बात हो पर वो किसी भी सूरत मे लाश को अपने लान मे गाड़ने का खतरा नहीं लेगा।”अविनाश बोला,-“बेबी मुझे राजू की बात मे दम नज़र आ रहा है।”

बेबी बोली,-“सर कहीं ऐसा तो नहीं कि रानू की तरह सुबोध की भी किसी ने हत्या कर दी हो।और हम गलत दिशा मे भटक रहें हो।”

राजू,-“क्या बात है बेबी आज कल बड़े सुझाव दे रही हो।”“अरे ये सर की संगति का असर है।”

अविनाश बोला,-“अच्छा बेबी चलो तुम्हारी बात मान लेते हैं कि सुबोध ठाकुर की भी हत्या हुयी है।उसकी हत्या से सबसे ज्यादा फायदा किसको पहुंचेगा।”

राजू ने कहा,-“जहां तक मेरा ख्याल है सर, सबसे ज्यादा फायदा उसकी बीवी रीमा को पहुंचेगा। उसके बाद सारे जायदाद की मालकिन वह हो जाएगी। दूसरा उसके छोटे भाई सुशांत ठाकुर को पहुंचेगा।”

“और सोनाली के बारे में तुम लोगों का क्या विचार है?”

बेबी बोली,-“सोनाली बाजारू किस्म की औरत है।सुबोध के मरने में उसे क्या फायदा हो सकता है? मेरे ख्याल से सुबोध के जीवित रहने मे उसका फायदा है।”

“लेकिन तुम एक बात भूल रहे हो कि उसके नाजायज संबंध सुबोध से ही नहीं है। उसके संबंध और लोगों से भी हैं। हो सकता है यह औरत के चक्कर में हत्या हो।आज कल ज्यादा यही सुनने मे आता है।यदि सुबोध ठाकुर की हत्या हुई है तो तुम सोनाली को भी अपने शक के दायरे से बाहर नहीं कर सकते।हाँ तुम्हारी यह बात सही है कि अभी हमें सीधे सोनाली को फायदा होता दिखाई नहीं दे रहा है।”

बेबी बोली,-“ सर सुबोध बहुत पैसे वाला आदमी है।कहीं इस पैसे के चक्कर मे तो उसकी हत्या नहीं हो गई।”

अविनाश बोला,-“एक काम करते हैं इस्पेक्टर मनोज की मदद से हम सब के पिछले एक महीने के अकाउंट डिटेल को चेक करते है।”

बेबी बोली,-“यह काम हमको पहले कर लेना चाहिए था।” अविनाश तुरंत इंस्पेक्टर मनोज को फोन लगाता है।

“मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मैं चाहता हूं कि इस केस में जितने भी लोग इन्वॉल्व हैं सुबोध, सुशांत, रीमा रानू,साहिल और सोनाली सभी के पिछले एक महीने की बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल मिले।”

“मैं कोशिश करता हूं।”

“जितनी जल्दी रिपोर्ट मिल जाए उतना अच्छा रहेगा।”फोन रखने के बाद से अविनाश तुरंत फोन रीमा को मिला देता है।
 
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“रीमा जी आपके कॉल रिकार्ड्स में एक नंबर है अमन का। अमन जिससे आप की लगातार बात होती है।आप बताने का कष्ट करेंगी की अमन कौन है?

“अमन मेरा बॉयफ्रेंड है। अमन ही मेरा सब कुछ है। आपको पता लग गया कि मैं और खुलकर बताऊं।”

“नहीं अब आपको और बताने की जरूरत नहीं है। अमन क्या काम करता है?”

“उसका अपना मोटर गैराज है। उसके पास सुबोध इतना पैसा तो नहीं है लेकिन वह मुझे प्यार देता है, इज्जत देता है।मैं अमन के साथ ही रहूंगी।सुबोध मुझे तलाक दे या ना दे।”

“आपको सुबोध की कोई खबर मिली।”

“न ही मैं जानती हूं और ना मैं जानना चाहती हूं।”

“आपको पता है रीमा जी कि आपके पति के केयरटेकर रानू की लाश आपके फार्म हाउस से ही बरामद हुई है।”

“नहीं। मैं तो आपके ही मुंह से सुन रही हूं।”

“क्या लगता है कि किसने रानू का कत्ल किया होगा?”

“मुझे क्या पता रानू का कत्ल किसने किया होगा। यह पता लगाना आपका काम है। पता लगाइए।”

“वह तो हम पता लगा ही लेंगे। फिलहाल यदि सुबोध की कोई खबर मिले तो हमें तुरंत फोन कीजिएगा।” फोन रखने के बाद अविनाश सोच में पड़ जाता है।

“कुछ भी कहो राजू, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है।कोई क्लू नहीं मिल रहा है।।राजू बेबी तुम लोग जाओ। बैंक अकाउंट डिटेल आने के बाद फिर कुछ सोचते हैं।”दोनों के जाने के बाद अविनाश आंख बंद कुछ सोचने लगता है। आखिर में सुबोध कहां गया?कहीं वाकई उसकी भी हत्या.........

इसके इसके बाद अविनाश उठकर के इंस्पेक्टर मनोज के पास चला जाता है।

“क्या हुआ अविनाश यहां कैसे?

“जब तक हमें सुबोध का पता नहीं लगेगा बहुत ही मुश्किल है कि हम यह पता लगा सके कि रानू की हत्या किसने की। सुबोध काफी दिन से गायब है पर उसकी चिंता ना उसके भाई को है ना उसकी चिंता उसके बीवी को है ना उसकी चिंता उसके प्रेमिका को है। मनोज, मैं चाहता हूं कि सराय रानी से लेकर के आजमनगर तक के आसपास तुम पता करवाओ कि क्या कहीं कोई लाश बरामद हुई है या कार दिखाई दी है।”

“ठीक है, मैं अभी अपने कुछ खबरियों को इस काम पर लगा देता हूं।और कल तक तुम्हें सबकी अकाउंट डिटेल्स भी मिल जाएगी।” इसके बाद अविनाश उठकर अपने घर चला जाता है और शांति से इस केस के बारे में मंथन करता है। दूसरे दिन करीब लंच बाद उसे अकाउंट डिटेल फैक्स पर मिलती है। वो बेबी और राजू तीनों बड़ी बारीकी से अकाउंट डिटेल देखने लगते हैं। बेबी कहती है,-“सर एक जून को रात को करीब 2:00 बजे रानू ने आजमनगर के बलरामपुर इलाके से एटीएम से पैसे विड्रॉल किए हैं। सर आपने बताया था कि बीच-बीच में रानू रात में कहीं गायब हो जाता था। कहीं ऐसा तो नहीं कि वह आजमनगर आता था।”

अविनाश कहता है,-“बेबी यह तो तुमने बड़ी अहम बात नोट की है। बलरामपुर एरिया में सिर्फ होटल हैं। रात को 2:00 बजे उसने एटीएम से पैसे निकाले हैं तो वह जरूर किसी होटल में जाता होगा। इसकी ज्यादा संभावना है।”

“राजू, तुम रानू की तस्वीर लेकर जाओ और पता लगाओ कि क्या वो कभी किसी होटल में आता था।” उसके बाद बेबी और राजू तुरंत बलरामपुर को चल दिये।

थोड़ी देर बाद बेबी और राजू बलरामपुर पहुंचते हैं। होटल सर्च करने पर एक होटल का मैनेजर रानू को पहचान लेता है। होटल का मैनेजर कहता है कि रानू उनके होटल में अक्सर आता है।राजू मैनेजर से 1जून की सीसीटीवी फुटेज मांगता है। उस फुटेज में देखने पर यह पता चलता है कि रानू के साथ उस वक्त सोनाली ने होटल में इंटर किया था। तुरंत राजू और बेबी वापस चले आते हैं और अविनाश को सीसीटीवी के बारे में बताते हैं।अविनाश कहता है,-“एक बात बताओ राजू, रानू सिर्फ सोनाली के साथ ही उस होटल मे जाता था या कोई और लड़की के साथ भी जाता था।”

“सर इस बात पर तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया। हमको तो जैसे ही सोनाली सीसीटीवी मे दिखी हम खुशी से सीधे वापस चले आए।”

“हो सकता है कि रानू की हत्या में सोनाली के अलावा किसी और लड़की का भी हाथ हो। ऐसा करो जहां तक संभव हो पिछले एक महीने के सीसीटीवी रिकॉर्ड तुम होटल से ले लो। होटल का मालिक कोई दिक्कत करे तो मैं अभी इंस्पेक्टर मनोज को फोन कर देता हूं।तुरंत जाओ और तुरंत सीसीटीवी फुटेज ले कर के वापस आओ। राजू थोड़ी देर मे दोबारा वापस आ जाता है। फिर वो तीनों मिलकर अपनी साईं डिटेक्टिव एजेंसी में फुटेज को खंगालने लगते हैं। सीसीटीवी रेकॉर्ड देखने से ये पता चलता है कि सोनाली के साथ बीच-बीच में रानू सुबोध ठाकुर की पत्नी रीमा के साथ भी होटल में रात बिताने गया है। बेबी बोलती है,-“ सर यह रानू तो बहुत पहुंचा हुआ निकला। मुझे लगता है सर लड़कियों के शौक ने ही इसकी जान ले ली।”

तब तक राजू बोला,-“ सर इसमें कोई भी शक नहीं है की सुबोध ने गुस्से में रानू की हत्या कर दी और अपनी कार लेकर फरार हो गया है।जब मामला थोड़ा ठंडा हो जाएगा तो वह वापस आकर सरैंडर कर देगा।और वैसे भी रानू की हत्या का सबूत तो अभी हमारे पास कुछ खास है नहीं। सिर्फ हमारे पास मकसद है।”

“अगर हमें मकसद का पता चल जाता है तो सबूत तो खुद ब खुद मिल जाएंगे। सबसे पहले सोनाली और रीमा से बात करके देखते है।” अविनाश तुरंत सोनाली को फोन लगा देता है।

“हेलो सोनाली जी, मैं प्राइवेट डिटेक्टिव अविनाश बोल रहा हूं। पहचाना मुझे।”

“अरे आप को कैसे भूल सकती हूं। और बताइए अविनाश साहब कैसे हैं? कुछ ख़बर लगी सुबोध की।”

“नहीं सुबोध के बारे में तो खबर नहीं लगी है लेकिन रानू से आपकी यारी के बारे में ख़बर लगी।”

“मैं कुछ समझी नहीं। पता लगा है कि आप रानू के साथ होटल में काफी रात बिताती थी।”

“किसी के साथ होटल में रात बिताना क्या चोरी है?”

“चोरी तो नहीं है लेकिन किसी भी इंफॉर्मेशन को छुपाना गैर कानूनी है। रानू की हत्या हो गई। उसकी लाश भी मिल गई। और आपने हमें बताना एक बार भी जरूरी नहीं समझा कि आप उसके साथ होटल में जाकर रंगरेलियां मनाती थी।”

“मैंने यह बात जरूरी नहीं समझी।”

“आपको किस बात का डर था। आप की कोई इज्जत तो समाज में है नहीं।”

“देखिए आप मेरी बेइज्जती कर रहे हैं।”

“मैडम सोनाली आपको जितना पता है बता दीजिए। मुझे पता है कि आपको सुबोध ठाकुर के बारे में पता है कि वह कहां है? वैसे पुलिस अपने ढंग से इन चीजों को कबूलवा लेगी।”

“मैं आपको सही बताती हूं। माना की मुझसे गलती हो गई है कि रानू के संबंध को मैंने आपसे छुपाया है क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मेरे इन संबंध के बारे में किसी को पता चले और खास करके सुबोध को। मैं आपसे सच बता रही हूं मुझे सुबोध के बारे में कुछ भी नहीं पता है।मुझे रानू की हत्या के बारें मे भी कुछ पता नहीं है।”

“सोनाली,अभी मैं फोन रखता हूं। कोई भी इंफॉर्मेशन आपको मिले तो आप मुझे तुरंत फोन करिएगा।” इसके बाद तुरंत अविनाश रीमा को फोन लगा देता है।

“हेलो रीमा जी कैसी हैं?”

“मैं ठीक हूं। कैसे याद किया मुझे?”

“मैं देख रहा हूं कि इतने दिनों से आपके हस्बैंड गायब है और आपको उनकी कोई फिक्र नहीं है।”

“मुझे क्यों उनकी फिक्र होने लगी? वैसे भी उनके चाहने वाले बहुत हैं।”

“लेकिन उनका एक चाहने वाला तो मर चुका है।कहीं ऐसा तो नहीं रानू की हत्या आपने ही की है।”

“मैं रानू की हत्या क्यों करने लगी।”

“हो सकता है रानू आप को ब्लैकमेल कर रहा हो? आप उसके साथ होटल में रात बिताती थी।”

“यह आप क्या कह रहे हैं?”
 
“मैडम मेरे पास सीसीटीवी फुटेज है।आप पिछले काफी दिनो से उससे होटल मिलने गई है। अंतिम बार आप उससे मिलने 6 जून को गई थी।अब हमें यह बताइए कि आप उससे होटल मिलने क्यों जाती थी?आपके और रानू के बीच क्या पक रहा था।”

“यह बात सही है कि मैं रानू के साथ होटल में रात बिताने जाती थी। लेकिन सिर्फ इसलिए मैं रानू को पसंद करती थी।”

“पर आपका बॉयफ्रेंड तो अमन है।”

“देखिए अमन से मेरी यारी तो अभी 3 महीने पहले हुयी हैं। रानू से मेरे जिस्मानी संबंध काफी पहले से हैं। पिछले साल जब मैं सुबोध के फार्महाउस रहने गई थी उसी समय से हमारे रानू से संबंध हो गए थे। मेरे सुबोध से कोई खास संबंध नहीं थे।”

“कहीं ऐसा तो नहीं रीमा जी कि सुबोध को आपके और रानू के संबंध की भनक लग गई हो उसने गुस्से में आकर रानू की हत्या कर दी हो।”

“आप शायद बिल्कुल ठीक कह रहे हैं।ऐसा हो सकता है कि उसको मेरे और रानू के संबंधों के बारे में पता लग गया हो और वो रानू की हत्या करके भाग गया हो।पर मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है।वैसे भी मुझे उसके साथ नहीं रहना है लिहाजा मेरे किससे संबंध हो उससे क्या मतलब? आप सुबोध को ढूंढने की कोशिश कीजिए। रानू की हत्या की सारी गुत्थी खुद-ब-खुद सुलझ जाएगी।और मुझे उससे तलाक भी चाहिए।”

“आप मुझे सलाह मत दीजिए की मुझे क्या करना है?अभी मैं फोन रखता हूं लेकिन जैसे सुबोध की हमें कोई खबर मिले आप हमें तुरंत इत्तला करेंगी।”

राजू कहता है सर,-“अपने सुबोध के छोटे भाई सुशांत को बड़ा इग्नोर किए हुआ हैं। यह भी तो हो सकता है कि सोनाली के चक्कर में उसी ने रानू को मार दिया हो।”

“लेकिन क्यों?”

“सर यह भी तो हो सकता है कि सुशांत ने रानू का मर्डर कर दिया हो और सुबोध को फसाने के लिए लाश उसके लॉन में गाड़ दी हो।”“इस बात में भी दम है। हमारे पास सुशांत के खिलाफ भी तो कोई सबूत नहीं है। लाश तो उसके लान से बरामद हुई नहीं है।कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा है।” अविनाश कुछ देरी विचार करता है और इंस्पेक्टर मनोज को फोन लगा देता है और सारी बातों के बारे में उसको जानकारी दे देता है।

“अविनाश तुम्हारे कहने के हिसाब से मैंने सुबोध और उसके कार की खोज आसपास की पर उसका कोई भी नामोनिशान हमें नहीं मिल रहा है।”

“जब तक सुबोध पकड़ा नहीं जाएगा तब तक रानू की हत्या की गुत्थी हल नहीं होगी।एक बार मैं सुबोध के फॉर्म हाउस की तलाशी फिर से लेना चाहता हूँ।शायद कुछ मिल जाए।”
 
7

“ठीक है जैसा तुम ठीक समझो और कोई जरूरत होगी तो मुझे फोन कर देना।” इसके तुरंत बाद अविनाश अपनी कार से सीधे सराय रानी सुबोध ठाकुर के फार्म हाउस पहुंच गया। वह गेट खोल कर के अंदर गया। साफ सफाई ना होने के कारण वहाँ काफी खर पतवार, घास फूस इकट्ठा हो गई थी।वो पूरे लान की बड़ी बारीकी से तलाशी करने लगा। तलाशी करते-करते वह वहां पर पहुंच गया जहां पर रानू की लाश मिली थी। चारों तरफ बारीकी से देखने उसे एक एटीएम स्लिप लान मे गिरी दिखाई दी। उसने उसको खोलकर देखा और उसने तुरंत राजू को फोन लगाया।

राजू तुम एक बात बताओ, 1जून को रात में करीब 2:00 बजे रानू ने 4000 रुपये निकाले थे।क्या ये सही है?”

राजू ने कहा,-“हाँ सर।इसके बारें मे आपको पहले से पता है।”

“मैं तो बस ज़रा कंफर्म कर रहा था कि यहां पर जो एटीएम स्लिप मुझे मिली है वही एटीएम स्लिप है या नहीं।यह बात सही है कि यह वही एटीएम स्लिप है।लेकिन यहाँ कैसे गिरी है वो भी रानू के लाश के पास।”अविनाश ने 2 मिनट सोचा और तुरंत इंस्पेक्टर मनोज को फोन लगा दिया। “मनोज ऐसा करो अपने 4 कांस्टेबल के साथ फार्म हाउस पहुंच जाओ।”

“क्यों क्या हुआ? कोई खाश बात।”

“बस तुम तुरंत चले आओ।” तुरंत ही मनोज अपने 4 कांस्टेबल के साथ पहुंच जाता है।

“अविनाश भाई मुझे 4 कांस्टेबल के साथ किस लिए बुलाया है।”

“एक काम करो जिस जगह हमें रानू की लाश मिली थी, अपने कांस्टेबल से कहो कि उसी जगह खुदाई करनी शुरू करें।” करीब उन्होंने 10 फीट गड्ढा खोद दिया पर उन्हे कुछ नहीं मिला। मनोज ने अविनाश के पूछा कि आगे क्या करना है।यहाँ कुछ मिल ही नहीं रहा है।

अविनाश बोला,-“ऐसा करो 5 फीट और खोदो।” करीब 5 फीट खोदने के बाद से उन्हें एक लाश मिली। लाश को बाहर निकाला गया। लाश काफी सड़ गई थी।

अविनाश ने कहा,-“मनोज मुझे उम्मीद है कि यह सुबोध ठाकुर की लाश है।”

एक कांस्टेबल ने कहां,-“ सर हमें लाश के साथ तीन और चीजें बरामद हुई है।एक तो छोटी काँच की बॉटल है और दूसरा एक जोड़ी सफ़ेद दस्ताने और लाश की पैंट की जेब से एक चाबी।”अविनाश ने कहा,-“ मनोज बॉटल और दस्ताने पर से फिंगरप्रिंट्स निकलवाने की कोशिश करो और यह भी पता लगाओ कि इस बोतल में क्या है?देखने से तो लग रहा है कि पोटेशियम साइनाइड है। और सुबोध की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो। हमें एक चाबी भी बरामद हुई है। यह इससे फार्म हाउस की चाबी लगती है।फिर भी मैं एक बार खोल कर चेक कर लेता हूं।” वो फार्म हाउस की ही चाबी निकली और चाबी के छल्ले पर ST भी लिखा हुआ था।

“इसका मतलब अविनाश यह सुबोध ठाकुर के फार्म हाउस की चाबी है।”

“ठीक है मनोज यह चाबी तुम अपने पास रख लो। और एक काम करो कि कल सुबह 10:00 बजे के आसपास सुबोध ठाकुर के भाई सुशांत ठाकुर, रानू का दोस्त साहिल, सुबोध ठाकुर की प्रेमिका सोनाली, उसकी बीवी रीमा और रीमा का बॉयफ्रेंड अमन को कल 10:00 बजे थाने बुला लो।और सबके फिंगर प्रिंट लेकर दस्ताने और बोतल पर मिले फिंगर प्रिंट से मिलवा लेना।”

“क्या तुम्हें कातिल पता लग गया?”

“कातिल का पता नहीं लगा है। पहले पोस्टमार्टम तो आ जाने दो।मैं तुम लोगों से 11 बजे थाने मे मिलूंगा।”

“लेकिन इतने लोगों को इकट्ठा क्यों कर रहे हो? कभी-कभी साथ साथ बयान लेने से भी काफी चीजें निकल कर के सामने आती हैं।” उसके बाद अविनाश वापस अपने घर चला जाता है। वो फोन करके राजू और बेबी को भी थाने 11:00 बजे बुला लेता है।सुबह 11:00 बजे सब लोग इंस्पेक्टर मनोज के थाने में उपस्थित रहते हैं।मनोज अविनाश को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फिंगर प्रिंट रिपोर्ट देता है।अविनाश पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फिंगरप्रिंट रिपोर्ट बड़े ही ध्यान से पढ़ता है।
 
8

पढ़ने के बाद वो सबसे पहले रीमा की तरफ मुखातिब होता है,-“ रीमा जी मुझे आपके हस्बैंड के कत्ल का बहुत दुख है।” रीमा बोली,-“मैं सुबोध से तलाक लेना चाहती थी पर मेरी कभी ऐसी मंशा नहीं थी कि सुबोध का कत्ल हो जाए। कल रात से मैं काफी सदमे में हूं। हालांकि हमारे उनके संबंध कभी अच्छे नहीं रहे।”

तब तक सुशांत भी बोलता है,-“ हां सर मैं भी यही कहना चाहता हूं कि मेरे भैया से रिलेशन कभी बहुत अच्छे नहीं थे लेकिन फिर भी मैं कभी यह नहीं चाहता था सुबोध इस दुनिया से चला जाए।”

अविनाश ने सिगार जलाते हुए कहा,-“आखिर सुबोध और रानू की हत्या किसने की है? रीमा जी आपको यह जान करके हैरानी होगी कि आपके पति की हत्या रानू ने की है।” सब लोग एकाएक चौक गए।

सोनाली ने कहा,-“वो कैसे?”

“पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में लिखा है जो साइनाइड की बोतल हमें सुबोध की लाश के पास से बरामद हुई थी, उसी साइनाइड से सुबोध ठाकुर की हत्या हुई है। और जो दस्ताने हमें पाए गए हैं उस दस्ताने के अंदर वाले हिस्से पर रानू की उंगलियों के निशान है। मुझे लगता है कि क्योंकि साइनाइड की बोतल थी इसलिए उसने दस्ताने पहन कर के रात के खाने में साइनाइड मिला दी थी और खाना खाते ही सुबोध ठाकुर की मौत हो गई। इसके बाद उसने सुबोध ठाकुर की लाश को ले जाकर के जमीन के 15 फुट नीचे गाड़ दिया और लाश गाड़ते वक्त ही मुझे लगता है ये एटीएम स्लिप गिर गई होगी जो मुझे कल लान मे मिल गई।और सुबोध की हत्या करीब 7 जून को रात मे 900 बजे हुयी थी।” अविनाश तुरंत ही सोनाली की तरफ मुखातिब हुआ। “क्यों सोनाली रानू से तो तुम्हारे नाजायज तालुकात थे। वैसे तो तुम्हारे बहुत लोगों से नाजायज तालुकात हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि सुबोध की हत्या में तुम्हारा हाथ है।”

तब तक सोनाली बोल पड़ी,-“ लेकिन सुबोध को मार करके मुझे क्या मिलेगा? मैं तो खुद चाहती थी कि सुबोध अपनी पत्नी को तलाक दे और मुझसे शादी कर ले।”

“कहीं ऐसा तो नहीं कि सुबोध को रानू और आपके नाजायज संबंधों के बारे में पता लग गया होगा इसलिए डर के मारे सबसे पहले आपने रानू से मिलकर के उसका खून करवा दिया।”तब तक वह तुरंत रीमा की तरफ मुडा।

“रीमा, शर्म आनी चाहिए आपको। आपके पिछले 1 साल से रानू के साथ नाजायज संबंध थे और आप होटल में उसके साथ रंगरेलियां मनाने जाती थी।”

रीमा ने कहा,-“ मैं मानती हूं कि मेरे रानू से नाजायज संबंध थे। इसके बारे में मैं पहले भी आपको बता चुकी हूं और जब पिछले साल गर्मी की छुट्टियों में मैं फार्महाउस आई थी उसी वक्त मैं और रानू काफी करीब आ चुके थे। सुबोध तो मुझे कभी वक्त देता नहीं था। अब आप ही बताइए ऐसे हालात में मैंने क्या गलत किया?”अविनाश सुशांत ठाकुर की तरफ मुखातिब हुआ।

“क्यों सुशांत जी आप तो रानू से बहुत छुप छुप के मिलते थे। यह बात हमें साहिल से पता लगी है।”

साहिल बोला,-“ सर मुझे यह नहीं पता है कि इन लोगों के बीच क्या बातें होती थी?पर मैं अक्सर सुशांत जी को रानू से अकेले में मिलते देखता था।”

अविनाश ने कहा,-“ सुशांत जी आप रानू से अकेले में क्यों मिलते थे?”

सुशांत बोला,-“बात दरअसल यह है कि मैं भी सोनाली को चाहता हूं। पर सोनाली सुबोध को पसंद करती थी। मैं रानू से सोनाली और सुबोध के संबंध के बारे में पूछा करता था। मुझे लगता था कि यदि किसी तरीके से सुबोध और सोनाली का ब्रेकअप हो जाए तो मैं सोनाली से शादी करूं लूँ। शायद यही समझाने के लिए मैं रीमा से मिलने मुंबई अक्सर जाया करता था की वो अपने रिश्ते सुबोध से सुधार ले।इसी सिलसिले में मैं करीब 1 महीने पहले भी उसके घर गया था।”

“लेकिन सुशांत जी मुझे तो यही लग रहा है कि मर्डर में आप ही का हाथ है।”

“पर आपको ऐसा क्यों लग रहा है?”

“जब भी मेरा ध्यान साइनाइड की बोतल पर जा रहा है तो मुझे लग रहा है कि इसमें आपका ही का हाथ है।क्योंकि केमिकल का धंधा आप ही करते हैं। आप के पास साइनाइड आसानी से मिल सकता है। अन्यथा साइनाइड किसी को इतनी आसानी से नहीं मिलती है।”

सुशांत बोला,-“यह बात सही है कि मैं केमिकल का धंधा करता हूं लेकिन मैंने रानू को यह बोतल नहीं दी है।”

“तो फिर रानू को यह बोतल किसने दी है। सोनाली भी तो ब्यूटी पार्लर चलाती है। हो सकता है इसे कहीं से साइनाइड मिल गया हो।”

मनोज बोलता है,-“अविनाश तुम ये पहेलियां ना बुझाओ। यह बताओ कि इन सब में किसका हाथ है?”

अविनाश कहता है,-“साहिल तुम इसके बारे में कुछ रोशनी डाल सकते हो।” साहिल सब पका गया।

“नहीं सर मुझे कुछ नहीं पता है।”

“लेकिन मुझे सब कुछ पता है। सुबोध का मर्डर करवाया है उसकी बीवी रीमा ने।”

तब तक रीमा जोर से चिल्लाने लगी,- “आपके पास क्या सबूत है कि मैने ही सुबोध का मर्डर करवाया है।”

अविनाश ने कहा,-“फिंगर प्रिंट रिपोर्ट कहती है कि इस साइनाइड की बोतल पर आपकी उंगलियों के निशान हैं।”

“मैं कहती हूं यह निशान मेरे उंगलियों के हो ही नहीं सकते।”

अविनाश रीमा को रिपोर्ट खोल करके दिखा देता है।अब आप हमें यह बताइए कि साइनाइड की बोतल पर आपकी उंगलियों के निशान कैसे आए।”

रीमा गुस्से मे बोलती है,-“मुझे कुछ नहीं पता है कि यह निशान कैसे आए?”

अविनाश कहता है,-“मैं बताता हूँ ये निशान कैसे आए है? सुशांत एक महीने पहले आपके घर मुंबई गए थे।आपने उनके सामान से साइनाइड की बोतल चुरा ली थी।उसी दौरान साइनाइड की बोतल पर आपकी उंगलियों के निशान आ गये।डर के मारे रानू ने साइनाइड की बोतल को दस्ताने पहनकर प्रयोग किया क्योंकि उसको डर था कि कहीं साइनाइड उसके शरीर से लग जाएगा तो उसको कहीं हानि ना पहुंचा दे। इसी वजह से दस्ताने पहनकर प्रयोग करने के चक्कर में आप के निशान साइनाइड की बोतल पर पड़े ही रह गए और दस्तानों के अंदर वाले हिस्से पर रानू की उंगलियों के निशान रह गए।7 जून की रात को उसने आपके कहे अनुसार सुबोध के खाने में साइनाइड मिला दिया। खाना खाते ही तुरंत सुबोध ठाकुर की मौत हो गई। उसने सुबोध ठाकुर की लाश को ले जाकर के 15 फीट नीचे गाड़ दिया।”

“लेकिन उससे दो गलतियां हो गई।पहली यह कि उसने दस्ताना और बोतल दोनों ही लाश के साथ गाड़ दिया और दूसरी गलती यह हुई कि सुबोध ठाकुर के घर की चाबी उसके जेब में ही पड़ी रहने दी।हो सकता है उसको इसका ध्यान न आया हो।इसके बाद आपके कहे प्लान के मुताबिक 7 जून से 11 जून तक लगातार सुबोध के मोबाइल से आपको फोन करता रहा। यह बात आप कबूल चुकी हैं कि आपके पास 7 जून से 11 जून तक लगातार सुबोध के फोन आए हैं। अब आप हमें यह बताइए यदि सुबोध 7 जून को रात 9 बजे मर गया था तो उसके मोबाइल से कौन फोन कर रहा था? वह फोन रानू कर रहा था।”

“आप यह जाहिर करना चाहती थी कि सुबोध रानू का मर्डर करके फरार हो गया है। आप सिविल इंजीनियरिंग की हुई है। आपका दिमाग काफी तेज हैं। आपने सुबोध की लाश को 15 फीट नीचे गडवा दिया। उसके बाद 11 तारीख को रात में आ करके आपने रानू की हत्या कर दी।पहले आपने उसे दारू पिलाई फिर तकिया से दबाकर आपने उसकी हत्या कर दी। और ठीक उसी जगह ले जाकर 5 फीट नीचे आपने रानू की लाश को गाड़ दिया। मतलब लाश के नीचे लाश।”“आपको पता था कि जब भी हम स्निफ्फर डाग से फॉर्म हाउस को सर्च करेंगे तो उन्हें रानू की लाश मिल जाएगी। अब दुबारा तो कोई दो चार दिन बाद उस फार्म हाउस की तलाशी लेगा नहीं क्योंकि पुलिस तो पहले ही तलाशी ले चुकी होगी।जब मैंने फार्म हाउस की कल दोबारा तलाशी लिया और मुझे एटीएम स्लिप मिली तब मुझे कुछ-कुछ माजरा समझ में आने लगा। यही कारण है सोनाली जी कि जब आपने 7 जून से 11 जून के बीच सुबोध के मोबाइल पर फोन किया था तो रानू ही आपसे बात कर रहा था क्योंकि सुबोध तो पहले से ही मर चुका था।”

“रीमा जी अब मैं आपको आपकी सबसे बड़ी गलती बताता हूँ।फार्म हाउस की सिर्फ तीन ही चाबी है।जब हम सब पहले दिन फॉर्म हाउस में घुसे थे तो वह फार्म हाउस लॉक पड़ा था। अब आप हमें यह बताइए कि सुबोध की चाबी उसके पैंट मे मिली। एक चाबी रानू के घर पर मौजूद थी। तीसरी चाबी आपने मुझे दे दी थी।जिस रात रानू की हत्या हुई रानू फार्म हाउस की चाबी अपने घर छोड़ आया था। सुबोध की चाबी उसके जेब में पड़ी थी। तो वह फार्म हाउस रानू की हत्या करने के बाद किसने लॉक किया। वह फार्म हाउस आपने लॉक किया था। यही आपकी सबसे बड़ी गलती थी। जब मुझे सुबोध की चाबी उसके जेब से मिली तब मैं कंफर्म हो गया कि हत्या में आपका ही इंवॉल्वमेंट है। अगर आप घर खुला छोड़ देती तो हो सकता था कि यह मर्डर किसी अजनबी पर चला जाता। सुबोध और रानू के मर्डर मे आपका हाथ हैं और हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं। अब आप हमें यह बताइए कि रानू ने सुबोध का मर्डर क्यों किया।”

रीमा पसीने-पसीने हो गई। उसने एक गिलास पानी पिया और बोली,-“सुबोध मुझ पर बार-बार यह दबाव बना रहे थे कि मैं उन्हें डिवोर्स दे दूं पर मुझे कुछ भी रकम देने के लिए तैयार नहीं थे। धीरे धीरे मेरी अपनी जिंदगी भी खराब हो रही थी। फिर मुझे अचानक एक प्लान सूझा।1 साल पहले मैं जब इस फार्म हाउस में सुबोध के साथ रहने आई थी तभी मैंने इस मर्डर की प्लानिंग कर दी थी। मैंने रानू को अपने कब्जे में कर लिया उससे जिस्मानी ताल्लुकात बनाकर। रानू मेरा दीवाना हो गया था। हम होटल में रात गुजरने लगे और मैंने रानू को यह समझा दिया कि सुबोध की हत्या के बाद मैं उससे शादी कर लूंगी।वो मेरे झांसे में आ गया। हमारे बीच एक शर्त थी कि हम मोबाइल से आपस में कभी भी कम्यूनिकेट नहीं करेंगे। जब सुशांत मेरे घर आया तो वहां से मैंने साइनाइड की बोतल निकाल कर के रानू को दे दी। प्लान के मुताबिक 7 जून को रानू ने सुबोध की हत्या करके उसकी लाश को लान मे गाड़ दिया और उसकी हत्या के बाद सुबोध बनकर उसके मोबाइल से मुझे फोन करता रहा। मुझे यह पता था कि रानू मेरे लिए कभी भी खतरा बन सकता है क्योंकि मुझे रानू से शादी करनी ही नहीं थी। मुझे तो अमन से शादी करनी थी। 11 जून की रात रानू को बुलाकर मैंने खूब दारु पिलाई और उसके बाद तकिए से दबा कर के उसका खून कर दिया और उसकी लाश को ले जाकर के उसी जगह पर गाड़ दिया। मुझे यह पूरी उम्मीद थी कि सुबोध की लाश पुलिस कभी भी नहीं ढूंढ पाएगी।”तब तक मनोज बोला,-“ लेकिन रीमा जी यह काम आपके अकेले बस का नहीं है। इसमें जरूर आपके साथ कोई होगा।”

अविनाश बोला,-“मनोज रीमा के बॉयफ्रेंड अमन को जरा ले जाकर थर्ड डिग्री दो तो यह बोलेगा कि यह मर्डर मे शामिल था की नहीं।” अमन का डर के मारे बुरा हाल हो गया।

“मैं सब कबूलने के लिए तैयार हूं। मैंने ही कत्ल में रीमा का साथ दिया था।”

अविनाश बोला,-“मुझे पता था कि वह तुम ही हो मोटर गैराज के मालिक। इसने सुबोध की कार ले जाकर के मोटर गैराज में खोल दी। इसीलिए गाड़ी का अस्तित्व हमें काफी दूर-दूर तक नहीं मिल रहा था।”

बेबी बोली,-“बाप रे बाप! इतनी भयंकर साजिश चल रही थी। इसका तो हमें अंदाजा भी नहीं था।”

अविनाश बोला,-“जब तक लाश नहीं मिलती है तब तक कातिल को ढूंढ पाना बड़ा मुश्किल होता है। यह बात सही थी कि अगर मैं दोबारा फॉर्म हाउस पर सबूत ढूंढने नहीं गया होता और मुझे एटीएम स्लिप नहीं मिली होती तो मैं भी कभी यह अंदाजा नहीं लगा पाता कि लाश के नीचे लाश गड़ी हो सकती है।”राजू बोला,-“लेकिन सर आपने यह अंदाजा लगाया कि लाश के नीचे लाश हो सकती है। जब राजू की हत्या हुई उसने नाईट ड्रेस पहन रखा था। एटीएम स्लिप नाईट ड्रेस में वह कैसे रखेगा? लाश को छुपाते वक्त वह एटीएम स्लिप गलती से उसकी जेब से गिर गई होगी। अब कोई अहम चीज गिरी होती तो वह उसको ढूंढने की कोशिश भी करता। इसीलिए मेरा अंदाजा बार-बार यह हो रहा था कि हो ना हो यह लाश छुपाते वक्त ही गिरी होगी।स्निफ्फर डॉग सिर्फ एक ही जगह भौंका था।बस इसी सब से एक अंदाज़ा लगा मैंने।”

“सुशांत जी आपको बहुत मुबारक हो। सुबोध की प्रेमिका और सारी जायदाद के अब आप इकलौते वारिस हैं।”

“सर मैं फिर आपसे सच कह रहा हूं कि मैं सोनाली को जरूर चाहता था लेकिन मैं कभी यह नहीं चाहता था कि सुबोध की मृत्यु हो जाए।”

“आप क्या चाहते थे वह तो अब आप या भगवान ही जानता हैं। फिलहाल अभी सब कुछ आपका है। चलो राजू बेबी हम वापस एजन्सि चलते हैं।बाइ मनोज।”

samapt
 
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