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Guest
दोस्तो,
आपने मेरी कहानी
बुआ हो तो ऐसी
और
सोनिया की मम्मी
पढ़ी और पसंद की, धन्यवाद..
आज समय निकाल कर मैं सोनिया की चुदाई की कहानी आप लोगों के सामने रख रहा हूँ।
जैसे कि आपको पता ही है कि मैंने सोनिया की मम्मी को बहुत दिल लगा कर चोदा और मेरी चुदाई से वो भी मस्त हो गई थी। मैंने उसे बता दिया था कि मैं सोनिया को लेने आया हूँ और अगली सुबह ही चला जाऊँगा। यह सुन कर वो थोड़ी उदास हो गई और बोली- मैंने तो सोचा था कि तुम कुछ दिन यहाँ रुकोगे और मेरी प्यास बुझाओगे।
सच कहूँ तो दोस्तो, सोनिया की मम्मी किरण थी ही इतनी मस्त कि एक बार तो मेरा भी दिल किया कि छोड़ो सोनिया को, किरण के ही मजे ले लेते हैं। पर फिर सोनिया की मस्त जवानी मेरी आँखों के सामने आ गई और किरण मुझे बासी चावल लगने लगी।
जिन लोगों ने मेरी पहली कहानियाँ नहीं पढ़ी हैं उनके लिए बता दूँ कि सोनिया एक बीस साल की मदमस्त जवान, अल्हड़ मुटियार है। इस उम्र में ही उसकी जवानी की निशानियाँ किसी भी शादीशुदा औरत से ज्यादा मस्त थी। 36 इंच की चूचियाँ 26 इंच की पतली कमर, और 36 इंच की मदमस्त गाण्ड। यही वो चीजें हैं जो किसी नपुंसक का लण्ड भी कुछ देर के लिए खड़ा कर दे।
अब आते है असली कहानी पर।
शाम को जब सोनिया अपनी सहेली की सगाई से वापस आई तो उसको देखते ही मैं तो अपने होश खो बैठा। क्या लग रही थी यार। आखिर वो सगाई में सजधज कर गई हुई थी। जब वो आई तो एक मादक खुशबू पूरे कमरे में फ़ैल गई।
कपड़े बदल कर वो मेरे पास आई और मुझसे बातें करने लगी। वो बोलती जा रही थी और मैं एक टक उसको देखता जा रहा था। यह सोच सोच कर मेरा लण्ड लोहा होता जा रहा था कि घर जाकर इस हसीना की चूत मेरे लण्ड को नसीब होने वाली है। शायद यही सोच कर मेरा लण्ड भी इतरा रहा था और बैठने का नाम नहीं ले रहा था। बिल्कुल कोयल जैसी मीठी आवाज है सोनिया की। मैं तो एकदम से खो सा गया था। मेरी मदहोशी तब उतरी जब सोनिया की मम्मी ने कमरे में आकर हमें खाना खा लेने को कहा।
मैं सोनिया के साथ बैठ कर खाना खाने लगा। खाना खाने के बाद किरण बोली- तुम लोगों को सुबह जल्दी जाना है तो अब जल्दी सो जाओ।
सोनिया भी थकी हुई थी तो वो अपने कमरे में सोने चली गई और मैं भी अपने बिस्तर पर लेट गया। काम खत्म करने के बाद किरण मेरे पास आई और हम दोनों का लण्ड चूत का खेल एक बार फिर शुरू हो गया जो रात को करीब तीन बजे तक चला।
अगली सुबह जब मैं उठा तो सोनिया चलने के लिए तैयार हो चुकी थी। मैं भी जल्दी से उठा और नहा-धोकर चलने के लिए तैयार हो गया। किरण बहुत बेचैन थी। वो मुझे जाने देना नहीं चाहती थी पर मैं तो सोनिया की चूत के सपने में खोया था और यही सोच रहा था की कब अपने शहर पहुँच जाऊँ और सोनिया को नंगी करके अपना मस्त कलंदर उसकी चूत में डाल कर उसकी मस्त चुदाई करूँ।
घर से निकलते निकलते ग्यारह बज गए थे। मैं सोनिया को लेकर बस स्टैंड पहुँचा और बस पकड़ कर चल दिया। बस में बहुत भीड़ थी। हमें सिर्फ एक ही सीट मिली थी। मैंने उस पर सोनिया को बैठा दिया पर वो थोड़ा सरक कर बोली- तुम भी बैठ जाओ !
तो मैं भी उसके साथ ही बैठ गया। सोनिया का बदन मुझ से बिल्कुल सटा हुआ था। दो घंटे का सफर था। कुछ देर बाद ही सोनिया को नींद आने लगी और वो मेरी कंधे पर सर रख कर ऊँघने लगी। थोड़ी देर के बाद हमारी साथ वाली सीट खाली हुई तो मैं और सोनिया थोड़ा सरक कर बैठ गए।
सोनिया बोली- मुझे तो बहुत नींद आ रही है !
तो मैंने कह दिया- मेरे कंधे पर सर रख कर सो जाओ।
पर वो मेरी गो़द में सर रख कर लेट गई। उसके बदन के स्पर्श मात्र से मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था जो उसके गाल से बार बार छू रहा था।शायद इसका एहसास सोनिया को भी हो गया था। मैंने अपना एक हाथ उसके कंधे पर रख लिया और धीरे धीरे सहलाने लगा।
खैर किसी तरह सफर खत्म हुआ और हम अपने शहर पहुँच गए।
रिक्शा पकड़ कर हम घर पहुँच गए। बुआ हम दोनों को देख कर खुश हो गई। मैंने जाते ही बुआ को बोल दिया- बुआ, अब मुझसे ज्यादा इंतज़ार नहीं होगा। जल्दी से कुछ करो और सोनिया की चूत का उदघाटन करवाओ।
बुआ ने मुझे दो दिन इंतज़ार करने को बोला पर मेरा दिल तो कर रहा था कि अभी सोनिया को उठाकर बेडरूम में ले जाऊ और लण्ड को एक ही झटके में घुसेड़ दूँ उसकी कुंवारी चूत में।
दिन बीता, रात हुई तो सोने का इंतजाम होने लगा। मैंने सोचा था कि बुआ फूफा के पास सोएगी और मैं सोनिया के साथ सो जाऊँगा।
पर फूफा ने मेरी सारी योजना खराब कर दी और बोले- राज, तू मेरे पास सो जाना और सोनिया तुम्हारी बुआ के पास सो जायेगी।
मैं भला क्या कहता !
आपने मेरी कहानी
बुआ हो तो ऐसी
और
सोनिया की मम्मी
पढ़ी और पसंद की, धन्यवाद..
आज समय निकाल कर मैं सोनिया की चुदाई की कहानी आप लोगों के सामने रख रहा हूँ।
जैसे कि आपको पता ही है कि मैंने सोनिया की मम्मी को बहुत दिल लगा कर चोदा और मेरी चुदाई से वो भी मस्त हो गई थी। मैंने उसे बता दिया था कि मैं सोनिया को लेने आया हूँ और अगली सुबह ही चला जाऊँगा। यह सुन कर वो थोड़ी उदास हो गई और बोली- मैंने तो सोचा था कि तुम कुछ दिन यहाँ रुकोगे और मेरी प्यास बुझाओगे।
सच कहूँ तो दोस्तो, सोनिया की मम्मी किरण थी ही इतनी मस्त कि एक बार तो मेरा भी दिल किया कि छोड़ो सोनिया को, किरण के ही मजे ले लेते हैं। पर फिर सोनिया की मस्त जवानी मेरी आँखों के सामने आ गई और किरण मुझे बासी चावल लगने लगी।
जिन लोगों ने मेरी पहली कहानियाँ नहीं पढ़ी हैं उनके लिए बता दूँ कि सोनिया एक बीस साल की मदमस्त जवान, अल्हड़ मुटियार है। इस उम्र में ही उसकी जवानी की निशानियाँ किसी भी शादीशुदा औरत से ज्यादा मस्त थी। 36 इंच की चूचियाँ 26 इंच की पतली कमर, और 36 इंच की मदमस्त गाण्ड। यही वो चीजें हैं जो किसी नपुंसक का लण्ड भी कुछ देर के लिए खड़ा कर दे।
अब आते है असली कहानी पर।
शाम को जब सोनिया अपनी सहेली की सगाई से वापस आई तो उसको देखते ही मैं तो अपने होश खो बैठा। क्या लग रही थी यार। आखिर वो सगाई में सजधज कर गई हुई थी। जब वो आई तो एक मादक खुशबू पूरे कमरे में फ़ैल गई।
कपड़े बदल कर वो मेरे पास आई और मुझसे बातें करने लगी। वो बोलती जा रही थी और मैं एक टक उसको देखता जा रहा था। यह सोच सोच कर मेरा लण्ड लोहा होता जा रहा था कि घर जाकर इस हसीना की चूत मेरे लण्ड को नसीब होने वाली है। शायद यही सोच कर मेरा लण्ड भी इतरा रहा था और बैठने का नाम नहीं ले रहा था। बिल्कुल कोयल जैसी मीठी आवाज है सोनिया की। मैं तो एकदम से खो सा गया था। मेरी मदहोशी तब उतरी जब सोनिया की मम्मी ने कमरे में आकर हमें खाना खा लेने को कहा।
मैं सोनिया के साथ बैठ कर खाना खाने लगा। खाना खाने के बाद किरण बोली- तुम लोगों को सुबह जल्दी जाना है तो अब जल्दी सो जाओ।
सोनिया भी थकी हुई थी तो वो अपने कमरे में सोने चली गई और मैं भी अपने बिस्तर पर लेट गया। काम खत्म करने के बाद किरण मेरे पास आई और हम दोनों का लण्ड चूत का खेल एक बार फिर शुरू हो गया जो रात को करीब तीन बजे तक चला।
अगली सुबह जब मैं उठा तो सोनिया चलने के लिए तैयार हो चुकी थी। मैं भी जल्दी से उठा और नहा-धोकर चलने के लिए तैयार हो गया। किरण बहुत बेचैन थी। वो मुझे जाने देना नहीं चाहती थी पर मैं तो सोनिया की चूत के सपने में खोया था और यही सोच रहा था की कब अपने शहर पहुँच जाऊँ और सोनिया को नंगी करके अपना मस्त कलंदर उसकी चूत में डाल कर उसकी मस्त चुदाई करूँ।
घर से निकलते निकलते ग्यारह बज गए थे। मैं सोनिया को लेकर बस स्टैंड पहुँचा और बस पकड़ कर चल दिया। बस में बहुत भीड़ थी। हमें सिर्फ एक ही सीट मिली थी। मैंने उस पर सोनिया को बैठा दिया पर वो थोड़ा सरक कर बोली- तुम भी बैठ जाओ !
तो मैं भी उसके साथ ही बैठ गया। सोनिया का बदन मुझ से बिल्कुल सटा हुआ था। दो घंटे का सफर था। कुछ देर बाद ही सोनिया को नींद आने लगी और वो मेरी कंधे पर सर रख कर ऊँघने लगी। थोड़ी देर के बाद हमारी साथ वाली सीट खाली हुई तो मैं और सोनिया थोड़ा सरक कर बैठ गए।
सोनिया बोली- मुझे तो बहुत नींद आ रही है !
तो मैंने कह दिया- मेरे कंधे पर सर रख कर सो जाओ।
पर वो मेरी गो़द में सर रख कर लेट गई। उसके बदन के स्पर्श मात्र से मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था जो उसके गाल से बार बार छू रहा था।शायद इसका एहसास सोनिया को भी हो गया था। मैंने अपना एक हाथ उसके कंधे पर रख लिया और धीरे धीरे सहलाने लगा।
खैर किसी तरह सफर खत्म हुआ और हम अपने शहर पहुँच गए।
रिक्शा पकड़ कर हम घर पहुँच गए। बुआ हम दोनों को देख कर खुश हो गई। मैंने जाते ही बुआ को बोल दिया- बुआ, अब मुझसे ज्यादा इंतज़ार नहीं होगा। जल्दी से कुछ करो और सोनिया की चूत का उदघाटन करवाओ।
बुआ ने मुझे दो दिन इंतज़ार करने को बोला पर मेरा दिल तो कर रहा था कि अभी सोनिया को उठाकर बेडरूम में ले जाऊ और लण्ड को एक ही झटके में घुसेड़ दूँ उसकी कुंवारी चूत में।
दिन बीता, रात हुई तो सोने का इंतजाम होने लगा। मैंने सोचा था कि बुआ फूफा के पास सोएगी और मैं सोनिया के साथ सो जाऊँगा।
पर फूफा ने मेरी सारी योजना खराब कर दी और बोले- राज, तू मेरे पास सो जाना और सोनिया तुम्हारी बुआ के पास सो जायेगी।
मैं भला क्या कहता !