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सोनिया की मम्मी के बाद

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Guest
दोस्तो,

आपने मेरी कहानी

बुआ हो तो ऐसी


और

सोनिया की मम्मी

पढ़ी और पसंद की, धन्यवाद..

आज समय निकाल कर मैं सोनिया की चुदाई की कहानी आप लोगों के सामने रख रहा हूँ।

जैसे कि आपको पता ही है कि मैंने सोनिया की मम्मी को बहुत दिल लगा कर चोदा और मेरी चुदाई से वो भी मस्त हो गई थी। मैंने उसे बता दिया था कि मैं सोनिया को लेने आया हूँ और अगली सुबह ही चला जाऊँगा। यह सुन कर वो थोड़ी उदास हो गई और बोली- मैंने तो सोचा था कि तुम कुछ दिन यहाँ रुकोगे और मेरी प्यास बुझाओगे।

सच कहूँ तो दोस्तो, सोनिया की मम्मी किरण थी ही इतनी मस्त कि एक बार तो मेरा भी दिल किया कि छोड़ो सोनिया को, किरण के ही मजे ले लेते हैं। पर फिर सोनिया की मस्त जवानी मेरी आँखों के सामने आ गई और किरण मुझे बासी चावल लगने लगी।

जिन लोगों ने मेरी पहली कहानियाँ नहीं पढ़ी हैं उनके लिए बता दूँ कि सोनिया एक बीस साल की मदमस्त जवान, अल्हड़ मुटियार है। इस उम्र में ही उसकी जवानी की निशानियाँ किसी भी शादीशुदा औरत से ज्यादा मस्त थी। 36 इंच की चूचियाँ 26 इंच की पतली कमर, और 36 इंच की मदमस्त गाण्ड। यही वो चीजें हैं जो किसी नपुंसक का लण्ड भी कुछ देर के लिए खड़ा कर दे।

अब आते है असली कहानी पर।

शाम को जब सोनिया अपनी सहेली की सगाई से वापस आई तो उसको देखते ही मैं तो अपने होश खो बैठा। क्या लग रही थी यार। आखिर वो सगाई में सजधज कर गई हुई थी। जब वो आई तो एक मादक खुशबू पूरे कमरे में फ़ैल गई।

कपड़े बदल कर वो मेरे पास आई और मुझसे बातें करने लगी। वो बोलती जा रही थी और मैं एक टक उसको देखता जा रहा था। यह सोच सोच कर मेरा लण्ड लोहा होता जा रहा था कि घर जाकर इस हसीना की चूत मेरे लण्ड को नसीब होने वाली है। शायद यही सोच कर मेरा लण्ड भी इतरा रहा था और बैठने का नाम नहीं ले रहा था। बिल्कुल कोयल जैसी मीठी आवाज है सोनिया की। मैं तो एकदम से खो सा गया था। मेरी मदहोशी तब उतरी जब सोनिया की मम्मी ने कमरे में आकर हमें खाना खा लेने को कहा।

मैं सोनिया के साथ बैठ कर खाना खाने लगा। खाना खाने के बाद किरण बोली- तुम लोगों को सुबह जल्दी जाना है तो अब जल्दी सो जाओ।

सोनिया भी थकी हुई थी तो वो अपने कमरे में सोने चली गई और मैं भी अपने बिस्तर पर लेट गया। काम खत्म करने के बाद किरण मेरे पास आई और हम दोनों का लण्ड चूत का खेल एक बार फिर शुरू हो गया जो रात को करीब तीन बजे तक चला।

अगली सुबह जब मैं उठा तो सोनिया चलने के लिए तैयार हो चुकी थी। मैं भी जल्दी से उठा और नहा-धोकर चलने के लिए तैयार हो गया। किरण बहुत बेचैन थी। वो मुझे जाने देना नहीं चाहती थी पर मैं तो सोनिया की चूत के सपने में खोया था और यही सोच रहा था की कब अपने शहर पहुँच जाऊँ और सोनिया को नंगी करके अपना मस्त कलंदर उसकी चूत में डाल कर उसकी मस्त चुदाई करूँ।

घर से निकलते निकलते ग्यारह बज गए थे। मैं सोनिया को लेकर बस स्टैंड पहुँचा और बस पकड़ कर चल दिया। बस में बहुत भीड़ थी। हमें सिर्फ एक ही सीट मिली थी। मैंने उस पर सोनिया को बैठा दिया पर वो थोड़ा सरक कर बोली- तुम भी बैठ जाओ !

तो मैं भी उसके साथ ही बैठ गया। सोनिया का बदन मुझ से बिल्कुल सटा हुआ था। दो घंटे का सफर था। कुछ देर बाद ही सोनिया को नींद आने लगी और वो मेरी कंधे पर सर रख कर ऊँघने लगी। थोड़ी देर के बाद हमारी साथ वाली सीट खाली हुई तो मैं और सोनिया थोड़ा सरक कर बैठ गए।

सोनिया बोली- मुझे तो बहुत नींद आ रही है !

तो मैंने कह दिया- मेरे कंधे पर सर रख कर सो जाओ।

पर वो मेरी गो़द में सर रख कर लेट गई। उसके बदन के स्पर्श मात्र से मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था जो उसके गाल से बार बार छू रहा था।शायद इसका एहसास सोनिया को भी हो गया था। मैंने अपना एक हाथ उसके कंधे पर रख लिया और धीरे धीरे सहलाने लगा।

खैर किसी तरह सफर खत्म हुआ और हम अपने शहर पहुँच गए।

रिक्शा पकड़ कर हम घर पहुँच गए। बुआ हम दोनों को देख कर खुश हो गई। मैंने जाते ही बुआ को बोल दिया- बुआ, अब मुझसे ज्यादा इंतज़ार नहीं होगा। जल्दी से कुछ करो और सोनिया की चूत का उदघाटन करवाओ।

बुआ ने मुझे दो दिन इंतज़ार करने को बोला पर मेरा दिल तो कर रहा था कि अभी सोनिया को उठाकर बेडरूम में ले जाऊ और लण्ड को एक ही झटके में घुसेड़ दूँ उसकी कुंवारी चूत में।

दिन बीता, रात हुई तो सोने का इंतजाम होने लगा। मैंने सोचा था कि बुआ फूफा के पास सोएगी और मैं सोनिया के साथ सो जाऊँगा।

पर फूफा ने मेरी सारी योजना खराब कर दी और बोले- राज, तू मेरे पास सो जाना और सोनिया तुम्हारी बुआ के पास सो जायेगी।

मैं भला क्या कहता !
 
मैं भागा बुआ के पास गया और कुछ जुगाड़ लगाने को बोला, तो बुआ ने भी इंतज़ार करने की सलाह दे दी।

वो रात मैंने कैसे काटी, यह मैं ही जानता हूँ।

खैर सुबह हुई तो मैंने उठते ही सबसे पहले सोनिया के कमरे का रुख किया। सोनिया अभी सो रही थी। उसने एक ढीला सा नाईट सूट पहन रखा था जो थोड़ा सा ऊपर सरक गया था। सूट के ऊपर सरकने के कारण सोनिया का गोरा गोरा नंगा पेट दिखाई दे रहा था जिसे देखते ही मेरा लण्ड फुँकारने लगा पर अभी कुछ कर नहीं सकता था।

तभी बुआ की आवाज़ आई- राज… जरा सोनिया को उठा दो वो चाय बना देगी।

मैं इस सुनहरे मौके को भला कैसे छोड़ देता। मैं सोनिया के बिस्तर के पास गया और उसके नंगे पेट पर हाथ फेरते हुए उसको उठाने के लिए हिलाया।

उसके मक्खन जैसे मुलायम पेट के स्पर्श से मेरा लण्ड फटने को हो गया था। सोनिया अभी भी गहरी नींद में सो रही थी तो मैंने अपने हाथ को थोड़ा और आगे बढ़ाते हुए उसकी नंगी चूची को स्पर्श करके देखा।

हाय ! मेरा लण्ड अब मेरे काबू से बाहर होता जा रहा था।

मैंने एक बार फिर सोनिया को हिलाया तो वो एकदम से उठ बैठी और अपने कपड़े ठीक करने लगी।

तुम्हें बुआ बुला रही है ! मैंने सफाई देते हुए कहा।

मैं अभी आती हूँ…! कहकर सोनिया बाथरूम में घुस गई।

मैं बाथरूम के दरवाजे के पास जाकर अंदर की आवाज़ सुनने लगा। अंदर से सुरर्र-सुर्र की तेज आवाज आ रही थी। सोनिया पेशाब कर रही थी।

दिल किया कि अभी दरवाज़ा खोल कर अंदर चला जाऊँ और …. पर मजबूर था।

ऐसे ही तीन दिन गुज़र गए। मैं चूत सामने होते हुए भी लण्ड हाथ में लेकर घूम रहा था। बुआ को चोद नहीं सकता था क्यूंकि वो गर्भवती थी और सोनिया को चोदने का कार्यक्रम नहीं बन पा रहा था। मैंने बुआ से कई बार कहा भी पर वो हर बार इंतज़ार करने के बोल देती।

और तीन दिन बाद अचानक गाँव से बुलावा आ गया। गाँव में कोई पारिवारिक कार्यक्रम था। बुआ को भी बुलाया था। सो हम सब उसी शाम को गाँव के लिए निकल पड़े। फूफा हमारे साथ नहीं गए थे।

मैं करीब चार महीने के बाद गाँव आया था। इसलिए मेरा बहुत स्वागत हो रहा था। सोनिया भी हमारे साथ ही थी तो गाँव के दोस्त इतनी सुन्दर हसीना को मेरे साथ देख कर मेरे आसपास ही मंडरा रहे थे।

बुआ अपने हमउम्र औरतों के साथ गप्पें मारने लेगी तो सोनिया बोर हो रही थी।

वो मेरे पास आकर बोली- राज, मैं तो यहाँ बोर हो रही हूँ, मुझे कहीं घुमा कर लाओ ना !

शाम का धुंधलका फ़ैल चुका था, मैंने कहा- अब तो देर हो चुकी है, हम लोग सुबह घूमने चलेंगे।

पर वो जिद करने लगी तो मैंने सोचा कि गाँव के पास के खेत तक घुमा लाता हूँ।

हम दोनों बातें करते करते गाँव से बाहर की ओर चल दिए। रास्ते भर हम दोनों इधर उधर की बातें करते रहे।

फिर अचानक सोनिया ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?

मैं सोनिया का मुँह ताकने लगा। मुझे सोनिया से ऐसे सवाल की उम्मीद नहीं थी। पर जब सोनिया ने पूछा तो मेरा काम थोड़ा आसान हो गया।

मैंने ना करते हुए सोनिया पर उल्टा सवाल दाग दिया- तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड है…?

सोनिया हँस पड़ी और बोली- हाँ है ना.. तुम हो ना मेरे बॉय फ्रेंड… क्यों क्या नहीं हो?

अँधेरा हो चुका था। मैंने अँधेरे में ही सोनिया का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा तो सोनिया एकदम से मेरी बाहों में आ गई। मैंने सोनिया का चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर अपनी तरफ किया और चूमने की कोशिश की तो सोनिया एकदम से मुझ से छुट कर भाग गई..

मैं भी उसके पीछे भागा। चारों तरफ ज्वार के खेत थे। अचानक सोनिया एक खेत में घुस गई। मैं भी सोनिया के पीछे ही था और कुछ दूर जाकर मैंने सोनिया को पकड़ लिया तो सोनिया एकदम से मेरे गले से लिपट गई और उसने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए।

कुछ पल के लिए तो मैं हैरान हुआ, पर चाहता तो मैं भी यही था।

मैंने भी सोनिया को अपनी बाहों में भर लिया और मस्त हो कर सोनिया के रसीले होंठ चूसने लगा। कुछ देर होंठो की चुसाई के बाद सोनिया बोली- अब घर चलो ! रात हो गई है, सब लोग हमें तलाश कर रहे होंगे।

पर मेरा तो लण्ड खड़ा हो कर लोहे की छड़ बन चुका था, मैं भला कैसे सोनिया को बिना चोदे घर ले जाता।

कहानी जारी रहेगी।
 
अँधेरा हो चुका था। मैंने अँधेरे में ही सोनिया का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा तो सोनिया एकदम से मेरी बाहों में आ गई। मैंने सोनिया का चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर अपनी तरफ किया और चूमने की कोशिश की तो सोनिया एकदम से मुझ से छुट कर भाग गई..

मैं भी उसके पीछे भागा। चारों तरफ ज्वार के खेत थे। अचानक सोनिया एक खेत में घुस गई। मैं भी सोनिया के पीछे ही था और कुछ दूर जाकर मैंने सोनिया को पकड़ लिया तो सोनिया एकदम से मेरे गले से लिपट गई और उसने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए।

कुछ पल के लिए तो मैं हैरान हुआ, पर चाहता तो मैं भी यही था।

मैंने भी सोनिया को अपनी बाहों में भर लिया और मस्त हो कर सोनिया के रसीले होंठ चूसने लगा। कुछ देर होंठो की चुसाई के बाद सोनिया बोली- अब घर चलो ! रात हो गई है, सब लोग हमें तलाश कर रहे होंगे।

पर मेरा तो लण्ड खड़ा हो कर लोहे की छड़ बन चुका था, मैं भला कैसे सोनिया को बिना चोदे घर ले जाता।

पर बात सोनिया की भी सही थी कि रात होने के कारण सब लोग हमें ही तलाश कर रहे होंगे। सो मैंने भी सोचा जहाँ इतने दिन इंतज़ार किया है आज की रात और सही।

मैंने चलने से पहले एक बार उसकी मस्त चूची को देखने की इच्छा बताई तो सोनिया बोली- देख तो चुके हो तुम… अब क्या देखोगे.. वही तो है !

मैंने पूछा- मैंने कब देखी?

तो बोली-उस दिन सुबह जब तुम मुझे जगाने आये थे, तब तुमने मेरा कमीज़ ऊपर करके देखी तो थी।

“ओह्ह तो तुम उस समय जाग रही थी ?”

“हाँ…”

“तुमने तब से अब तक कहा क्यों नहीं कि तुम भी वही चाहती हो, जो मैं चाहता हूँ ???”

“तुमने ही मेरी आँखों को नहीं पढ़ा… मैं तो जब तुम्हें एक साल पहले मिली थे तब से चाहती हूँ !”

“हे भगवान ! मैं भी कितना बुद्धू हूँ.. एक स्वप्न सुन्दरी मुझे प्यार करती है और मुझे पता ही नहीं…”

सोनिया हंस पड़ी।

मैंने एक बार फिर से सोनिया को अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ सोनिया के रसीले होंठों पर रख दिए। मेरा एक हाथ अब सोनिया की मस्त चूची को मसल रहा था। जिस कारण अब सोनिया गर्म होने लगी थी। अब वो मुझे पागलों की तरह चूम रही थी। और मेरा अनुभव मुझे बता रहा था कि एक औरत या लड़की ऐसा तभी करती है जब उसकी चूत में चुदाई का कीड़ा उछल कूद मचाने लगे।
 
“मुझे कुछ हो रहा है राज.. प्लीज़ कुछ करो… नहीं तो मैं मर जाऊँगी।”

मैंने एक हाथ से उसकी चूत को सहलाया तो देखा उसकी पेंटी ही नहीं बल्कि सलवार भी बिल्कुल गीली हो गई थी उसकी चूत के रस से।

जहाँ हम खड़े थे वहाँ नज़दीक ही टयूबवेल का कमरा था। मैं सोनिया को लेकर वहाँ चला गया। खेत में कोई नहीं था। तसल्ली करने के बाद हम दोनों कमरे के अंदर गए तो देखा अंदर एक चारपाई बिछी हुई थी। यानि सोनिया की और मेरी सुहागसेज़ तैयार थी।

मैंने कमरे के अंदर जाते ही सोनिया को फिर से चूमना शुरू कर दिया और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। फिर मैंने सोनिया की कमीज़ को उतारा तो नीचे ब्रा में कसी उसकी खरबूजे के आकार की चूचियाँ मेरे सामने आ गई। कमीज़ उतरने से सोनिया एक दम शरमा गई और उसने अपने हाथों से अपनी चूचियों को छुपाने के नाकाम सी कोशिश की।

मैंने सोनिया की बाहों को पकड़ कर उसके हाथ उसकी चूचियों पर से हटाये और उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा। मेरी इस हरकत से सोनिया सीत्कार उठी और जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी।

मैंने ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और सोनिया की ब्रा उतार कर एक तरफ रख दी।

सोनिया की गोरी गोरी चूची देख कर मेरा लण्ड फटने को हो गया। मैं टूट पड़ा सोनिया की चूचियों पर। एक चुचूक को मैंने अपने होंठों में दबा लिया और दूसरी चूची को अपने हाथ में लेकर मसलने लगा। चूची को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं बीच बीच में चुचूक को दाँत से काट लेता था जिसके कारण सोनिया चिंहुक उठती थी और उसके मुंह से सीत्कार निकल जाती।

समय ज्यादा नहीं था तो मैंने जल्दी से अपने लण्ड की भूख मिटाने की तैयारी करनी शुरू कर दी। मैंने सोनिया की सलवार का नाड़ा खोला तो सलवार सोनिया के क़दमों में नतमस्तक हो गई । सोनिया ने गुलाबी रंग का अंडरवियर पहन रखा था जिस पर उसकी चूत के पानी का एक बड़ा सा धब्बा पड़ चुका था यानि सोनिया की चूत भरपूर पानी छोड़ रही थी। सोनिया की चूत लण्ड लेने के लिए फड़फड़ा रही थी। चूत से गर्म गर्म तपिश का एहसास हो रहा था।

मैंने ज्यादा देर न करते हुए सोनिया के पेंटी भी उतार कर एक तरफ़ फेंक दी। सोनिया अब मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी।

“तुमने मुझे तो पूरा नंगा कर दिया पर अपना एक भी कपडा नहीं उतारा?” सोनिया बोली।

मैंने भी झट से अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना मस्त कलंदर सोनिया के सामने कर दिया। मेरा साढ़े सात इन्च का लंबा लण्ड देख कर सोनिया की आँखें खुली की खुली रह गई।

“राज.. मैं इतना मोटा कैसे ले पाउंगी???”

“क्यों डर लग रहा है??” मैंने पूछा।

“अरे तुम्हारा है ही इतना मोटा की डर तो लगेगा ही !”

मैंने अपना लण्ड सोनिया के हाथ में पकड़ा दिया। सोनिया एकटक मेरे लण्ड को देखे जा रही थी। फिर उसने लण्ड को धीरे धीरे सहलाना शुरू किया तो सोनिया के कोमल हाथों के एहसास से लण्ड के मुँह में पानी आ गया। मैंने सोनिया को पास में पड़ी चारपाई पर लिटाया और उसकी टाँगें खोल कर अपनी जीभ सोनिया की चूत पर रख दी। जो लोग मुझे पहले से जानते है उन्हें पता है कि मैं चूत चाटने का कितना दीवाना हूँ।

चूत एक दम कोरी थी और उस पर हल्की रेशमी झांटें उगी हुई थी। चूत से पानी की नदी बह रही थी। सोनिया पूरी गर्म हो चुकी थी। मैंने सोनिया को अपना लण्ड चूसने के बोला तो वो धीरे धीरे मेरे लण्ड को चाटने लगी। मेरा लण्ड अब दर्द करने लगा था। सो मैंने अपना लण्ड सोनिया के मुँह से निकाल कर उसकी चूत के मुँह पर रख दिया।

लण्ड का एहसास होते ही सोनिया चिंहुक उठी। मैंने सोनिया की चूत के पानी से अपने लण्ड को गीला किया फिर थोड़ा सा थूक सोनिया की चूत पर लगा कर एक हल्का सा धक्का लगा दिया। चूत तंग थी सो लण्ड साइड में फिसल गया। अगली बार मैंने लण्ड को सही से टिकाया और एक थोड़ा जोर से धक्का लगा दिया तो लण्ड का सुपारा फक्क के आवाज के साथ सोनिया की चूत में फंस गया। सोनिया एकदम से दर्द के मारे चीख पड़ी।

मैंने अपने होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए और उसका मुँह बंद कर दिया। इससे पहले कि सोनिया और कुछ करती, मैंने एक और धक्का सोनिया की चूत पर लगा दिया और दो इंच लण्ड सोनिया की चूत में सरका दिया। सोनिया थोड़ा और छटपटाई पर मैं भी कोई कच्चा खिलाड़ी नहीं था। मैंने सोनिया की चूचियों को सहलाते हुए एक जोरदार धक्का लगा दिया तो लण्ड सोनिया की चूत की शील भंग करता हुआ चार पांच इंच तक अंदर घुस गया।
 
मैंने रुकना ठीक नहीं समझा और बिना रुके दो तीन धक्के और लगा दिए। लण्ड पूरा जड़ तक सोनिया के चूत में समां गया। पूरा लण्ड घुसाने के बाद मैंने सोनिया को संभाला तो देखा उसका बुरा हाल था दर्द के मारे। चूत खून से लाल हो चुकी थी। आँसुओं की दो मोटी धार सोनिया की आँखों से बह रही थी। मैंने उसके आँसू पोंछे और उसके होंठ चूमने लगा और उसकी चूचियाँ सहलाने लगा। फिर उसको थोड़ा समझाया कि पहली बार में दर्द होता है, अब कभी दर्द नहीं होगा और सिर्फ मज़ा ही मज़ा आएगा।

सोनिया बोली- वो तो मुझे मालूम है, पर दर्द भी तो सहन नहीं होता। सच बहुत दर्द हो रहा है।

मैं सोनिया की चूची को मुँह में लेकर चूसता रहा जिससे सोनिया को बहुत आराम मिल रहा था तभी तो कुछ ही देर के बाद सोनिया का रोना बंद हो गया और फिर कुछ ही देर में सोनिया की गांड भी हल्के से उछलने लगी। इशारा मिलते ही मैंने भी धक्के लगाने शुरू कर दिए। पहले धीरे धीरे और फिर गति बढ़ती चली गई।

ज्यूँ ज्यूँ धक्के लगने लगे, सोनिया की मस्ती भी बढ़ती चली गई। आखिर थी तो वो एक मस्त चुदक्कड़ माँ की बेटी।

अब तो सोनिया के मुँह से गालियों की बौछार शुरू हो गई- बहन के लौडे..जोर जोर से चोद मुझे…बहुत दिन से इस चूत को फड़वाना चाहती थी पर कोई तेरे जैसा लण्ड मिल ही नहीं रहा था .. चोद भोसड़ी के चोद मुझे… मेरी माँ की जैसे फाड़ी थी वैसे ही मेरी भी फाड़ बहनचोद..!!

सोनिया के मुँह से यह सुन कर मैं हैरान हो गया। क्या सोनिया को मेरी और किरण की चुदाई का पता है??

पर मुझे इससे क्या लेना, मुझे तो सोनिया की चूत चाहिए थी सो मिल गई थी।

“आज तो तेरी चूत को ऐसे फाड़ दूँगा जैसे तुम्हारी माँ की फटी हुई है… साली की चूत बहुत करारी है.. मेरा तो लण्ड निहाल हो गया तेरी और तेरी माँ की चूत में जाकर…”

“बहनचोद बोल मत बस जोर जोर से धक्के मार..सारी खुजली मिटा दे इसकी..” सोनिया मस्ती में चीख रही थी।

मैं भी मस्ती में जोर जोर से धक्के लगा कर सोनिया की कुंवारी चूत का भुर्ता बना रहा था।

“ओह्ह.. मेरे राजा….जोर से… और जोर से… आईईई…फाड़ दे बहन चोद……”

मैं बिना कुछ बोले अब धक्कों की गति पर ध्यान दे रहा था।

सोनिया अब मस्त गांड उठा उठा कर मेरा लण्ड ले रही थी अपनी चूत में।

करीब दस मिनट के बाद सोनिया का शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्ला उठी- मैं तो गईईई.. मेरे राजा…मेरा तो निकाला…जोर से मार.. आह्ह्ह.. गईईइ …ऊम्म्म्म्म… निकल गया…

और इसी के साथ सोनिया झड़ गई।

मेरा अभी नहीं निकला था सो मैं धक्के लगाता रहा। पानी निकलने के बाद सोनिया थोड़ी सुस्त सी हुई पर थोड़ी ही देर के बाद वो फिर से गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और सोनिया को घोड़ी बना कर पीछे से लंड सोनिया की चूत में डाल दिया। कमरे में अँधेरा हो गया था क्यूंकि सूरज छिप गया था। मैं अँधेरे में ही सोनिया की चूत पेलता रहा।

लगभग अगले पन्द्रह मिनट के बाद मुझे लगा कि अब मेरा भी निकलने वाला है तो मैंने भी जितनी तेज कर सकता था अपनी गति उतनी तेज कर दी। उधर सोनिया भी अब दुबारा से झड़ने को तैयार थी और मस्ती में गालियों से मेरे लण्ड से निकलने वाले अमृत का स्वागत कर रही थी।

“भर दे मेरे राजा अपने अमृत से मेरी चूत.. बहुत दिन इंतज़ार किया है इस पल का… बहन के लण्ड जल्दी जल्दी जोर जोर से चोद.. मेरा होने वाला है..”

“मैं भी आ रहा हूँ मेरी जान…” और फिर मैं भी पूरे जोर से झड़ने लगा सोनिया की चूत में। सोनिया की चूत से भी गंगा-जमना बह रही थी और सोनिया ने मुझे बुरी तरह से अपनी बाहों में जकड़ लिया था। मैं भी सोनिया के नाजुक बदन से लिपटा हुआ अभी खत्म हुई चुदाई के एहसास का मज़ा ले रहा था। घड़ी में समय देखा तो होश उड़ गए आठ बज चुके थे, गांव के माहौल के हिसाब से बहुत देर हो गई थी।

कहानी जारी रहेगी।
 
सोनिया अब मस्त गांड उठा उठा कर मेरा लण्ड ले रही थी अपनी चूत में।

करीब दस मिनट के बाद सोनिया का शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्ला उठी- मैं तो गईईई.. मेरे राजा…मेरा तो निकाला…जोर से मार.. आह्ह्ह.. गईईइ …ऊम्म्म्म्म… निकल गया…

और इसी के साथ सोनिया झड़ गई।

मेरा अभी नहीं निकला था सो मैं धक्के लगाता रहा। पानी निकलने के बाद सोनिया थोड़ी सुस्त सी हुई पर थोड़ी ही देर के बाद वो फिर से गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और सोनिया को घोड़ी बना कर पीछे से लंड सोनिया की चूत में डाल दिया। कमरे में अँधेरा हो गया था क्यूंकि सूरज छिप गया था। मैं अँधेरे में ही सोनिया की चूत पेलता रहा।

लगभग अगले पन्द्रह मिनट के बाद मुझे लगा कि अब मेरा भी निकलने वाला है तो मैंने भी जितनी तेज कर सकता था अपनी गति उतनी तेज कर दी। उधर सोनिया भी अब दुबारा से झड़ने को तैयार थी और मस्ती में गालियों से मेरे लण्ड से निकलने वाले अमृत का स्वागत कर रही थी।

“भर दे मेरे राजा अपने अमृत से मेरी चूत.. बहुत दिन इंतज़ार किया है इस पल का… बहन के लण्ड जल्दी जल्दी जोर जोर से चोद.. मेरा होने वाला है..”

“मैं भी आ रहा हूँ मेरी जान…” और फिर मैं भी पूरे जोर से झड़ने लगा सोनिया की चूत में। सोनिया की चूत से भी गंगा-जमना बह रही थी और सोनिया ने मुझे बुरी तरह से अपनी बाहों में जकड़ लिया था। मैं भी सोनिया के नाजुक बदन से लिपटा हुआ अभी खत्म हुई चुदाई के एहसास का मज़ा ले रहा था। घड़ी में समय देखा तो होश उड़ गए आठ बज चुके थे, गांव के माहौल के हिसाब से बहुत देर हो गई थी।हम दोनों ने जल्दी से अपने अपने कपड़े पहने और घर की तरफ चल दिए। घर पर सबके गुस्सा होने का डर सताने लगा था। हम जल्दी जल्दी चलने लगे तो सोनिया लड़खड़ा गई। उसकी चूत सूज गई थी और दर्द भी कर रही थी। जिस कारण उससे चला नहीं जा रहा था। मैंने सोनिया को अपनी गोदी में उठाया और जल्दी से घर की तरफ चल दिया। सोनिया ने अपनी बाहें मेरे गले में डाल ली और मुझ से लिपट गई। गांव से थोड़ी देर पहले मैंने सोनिया को उतारा और करीब साढ़े आठ बजे घर पहुंचे। महिला-संगीत का कार्यक्रम चल रहा था। सिर्फ बुआ ने ही हमें देखा। बाकी सबकी निगाह से किसी तरह हम दोनों बच गए थे।

नौ बजे जब संगीत खत्म हुआ तो बुआ मेरे पास आई और पूछने लगी- कहाँ गए थे?

तो मैंने सब कुछ बता दिया। बुआ पहले तो थोड़ा गुस्सा हुई- अगर पकड़ा जाता तो?

पर फिर एकदम से मुझे गले से लगा कर मुझे नई चूत की बधाई दी।

मैंने बुआ को बोला- प्लीज़ रात का कुछ इंतजाम करो ! अब रात को नहीं रहा जाएगा।

दस बजे के करीब बुआ मेरे पास आई और बोली- शन्नो चाची के घर सोने का इंतजाम हो गया है। सोनिया और मैं वही सोने जा रही हैं।

यह मेरे लिए सुराग था।

बुआ के जाने के बाद मेरे लिए एक एक मिनट पहाड़ जैसा लगने लगा था। पर मेरे दोस्त मुझे छोड़ ही नहीं रहे थे। निकलते निकलते मुझे एक बज गया।

मैं रात के एक बजे शन्नो चाची के घर पहुँचा। जब दरवाजा खोलने की कोशिश की तो देखा दरवाज़ा खुला हुआ था। मैं समझ गया कि यह सब बुआ की योजना है। अंदर जाकर देखा तो बुआ और शन्नो चाची अभी भी बातें कर रही थी और सोनिया उनके बगल में ही सो रही थी।
 
बुआ बोली- अरे राज बहुत देर कर दी तुमने… ? कहाँ रह गए थे..? हम तो तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी।

बस बुआ दोस्तों ने ही नहीं छोड़ा ! मैंने जवाब दिया और उन्ही के पास पलंग पर बैठ गया।

शन्नो चाची की आँखों में ना जाने क्यों मुझे एक शरारत सी नज़र आ रही थी।

तभी बुआ ने शन्नो चाची को कान में कुछ कहा और दोनों हंस पड़ी। तभी बुआ और शन्नो चाची उठी और मुझे सोने के लिए बोल कर दूसरे कमरे में चली गई। मैं कुछ समझ नहीं पाया था। मैंने बुआ से पूछा तो बुआ ने आँख मारी और बोली- राज.. आज तेरी सुहागरात है मेरे राजा ! मौज कर !

मैं शरमा गया।

उन लोगों के जाने क बाद मैंने सोती हुई सोनिया को देखा। एकदम परी के जैसी लग रही थी मेरी जान। मैंने धीरे से सोनिया के पेट पर हाथ रखा और सहलाने लगा। फिर अपने होंठ सोनिया के नंगे पेट पर रख कर सोनिया की नाभि को जीभ से चाटने और सहलाने लगा।

सोनिया थोड़ी कसमसाई और एक कामुक अंगड़ाई ली। मैं थोड़ा ऊपर की तरफ सरका और अपने होंठ सोनिया के कोमल होंठों पर रख दिए। सोनिया ने एकदम से आँख खोल दी। उसने चौंक कर कमरे में इधर उधर देखा पर कमरे में तो सिर्फ हम दोनों ही थे। उसने बुआ के बारे में पूछा तो मैंने उसको सब कुछ बता दिया। वो पहले तो थोड़ा सकपकाई पर फिर एकदम खुश होकर मेरे गले से लग गई।

अगले ही पल हम दोनों वासना के समुंदर में गोते लगाने लगे। कपड़ो ने शरीर का साथ छोड़ दिया। बिस्तर पर अब दो नंगे जिस्म एक दूसरे में खो जाने को बेकरार आपस में लिपटे हुए थे। मैं सोनिया के और सोनिया मेरे होंठों को चूस रही थी। मेरे हाथ सोनिया की चूचियों की गोलाईयाँ माप रहे थे।

कुछ देर ऐसे ही मज़े लेने के बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए और सोनिया मेरा लंड और मैं सोनिया की चूत का मुख-मंथन करने लगा।

“अब नहीं रहा जाता राज…. जल्दी से अपने लंड को मेरी चूत में डाल दे मेरे राजा !”

मेरा लंड भी अब अकड़ कर बम्बू बन चूका था तो मुझ से भी अब सबर नहीं हो रहा था।

मैं सोनिया की टांगों के बीच आ गया और अपना लंड सोनिया की सूजी हुई चूत के मुँह पर रख दिया। शाम को हुई चुदाई से सोनिया की चूत सूज गई थी।

मैंने लंड को सही से रखा और एक जोरदार धक्का चूत के पानी से गीली और चिकनी हुई चूत पर लगा दिया। लंड करीब तीन इंच तक चूत में समा गया।

लंड घुसते ही सोनिया चिल्ला उठी दर्द के मारे- राज… बहुत दर्द हो रहा है !

मैंने सोनिया की बात को अनसुना करते हुए एक और धक्का लगा दिया और लंड आधे से ज्यादा चूत में घुस गया। कसी चूत का सच में अलग ही मज़ा है। सोनिया थोड़ा कसमसाई और अपने हाथों से मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी। मैंने भी उसको मजबूती से पकड़ रखा था। मैं थोड़ा रुक कर सोनिया की चूचियों को सहलाने और मसलने लगा। सोनिया की आँखों से आंसू बह निकले थे।

मैंने जीभ से चाट कर सोनिया की गाल पर आये आँसू साफ़ किये। फिर अपने होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए। थोड़ी देर बाद जैसे ही सोनिया ने अपना बदन थोड़ा ढीला किया तो मैंने एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड सोनिया की चूत में घुसेड़ दिया।

सोनिया एक बार जोर से चीखी पर जब उसे पता लगा कि पूरा लंड घुस गया है तो वो मेरी छाती में सर को डाल कर दर्द को सहन करने की कोशिश करने लगी।

कुछ देर के बाद जब दर्द खत्म हुआ तो फिर से कमरे में मस्ती का आलम हो गया और कमरे में सिसकारियाँ गूंजने लगी। सोनिया भी अब मस्त होकर लंड का मज़ा लेने लगी। मैं भी उसकी मस्त कसी चूत का मज़ा ले रहा था। जैसे जैसे जोश बढ़ने लगा सोनिया भी गांड उछाल उछाल कर लंड लेने लगी और मैं भी पूरे जोश से धक्के लगाने लगा।

“चोद मेरे राजा चोद … जोर जोर से चोद मेरे राजा.. बहुत मज़ा आ रहा है …. अह्ह्ह आह्हह्ह मेरे राजा !”

मेरा मस्त कलन्दर सोनिया की चूत में धमाल मचा रहा था। सोनिया के मुँह से गालियाँ फूटने लगी थी और वो झड़ने के कगार पर पहुँच चुकी थी- मादरचोद…बहन के लोडे…फाड़ मेरी चूत को फाड़…. जोर जोर से चोद बहनचोद…”

सोनिया अब आपने आप को रोक नहीं पा रही थी और फिर उसके शरीर में थरथराहट हुई और वो पूरे जोर से झड़ने लगी।

मैं अभी भी धक्के लगा रहा था। कुछ देर के बाद मेरा भी होने को हुआ तो मैंने धक्को की गति बढ़ा दी।

पन्द्रह मिनट की चुदाई के बाद मेरे लंड ने भी अपनी गर्मी पिचकारी के रूप में सोनिया की चूत में भर दी। गर्म गर्म वीर्य का का एहसास होते ही सोनिया एक बार फिर से झड गई और उसने अपनी टाँगें मेरी कमर पर जकड़ ली और मुझसे लिपट गई। फिर तो हम दोनों झड़ने के आनंद में डूब गए। रात काफी हो चुकी थी तो ऐसे ही लेटे लेटे हम दोनों को नींद आ गई। जब नींद खुली तो सोनिया बिल्कुल नंगी मुझ से लिपट कर सो रही थी। मुझे उस पर बहुत प्यार आया और मैंने उसका माथा चूम लिया। जब उसकी चूत पर निगाह गई तो देखा चूत बिलकुल सूज कर डबलरोटी हो गई थी। मैं तो एक बार और करना चाहता था पर तभीबुआ ने कमरे में आकर बताया कि सुबह के छ: बज चुके हैं, कोई भी आ सकता था तो मैं उठा और बाहर घूमने चला गया।

दो दिन गांव में बिताने के बाद हम सब शहर वापिस आ गए और फिर मैं एक भी रात अकेला नहीं सोया। बुआ ने सोनिया मुझे सौंप दी थी। तब से सोनिया के साथ चुदाई चल रही है।

आज के लिए बस इतना ही …….

 


ये दिवाली आपके जीवन

में खुशियों की बरसात

लाए,

धन और शौहरत की

बौछार करे,

दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं!
 
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