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'तो क्या मैं समझू कि...।'
'नहीं शिवा! ऐसा बिलकुल नहीं कि मैं उसकी ओर से हमेशा आंखें बंद किए रहूंगा। मैं उसकी प्रत्येक गतिविधि पर नजर रख रहा हूं। मैंने उसके पीछे अपना एक आदमी भी लगा दिया है जो यह देखता है कि वह कहां जाती है और किन-किन लोगों से मिलती है।'
शिवा ने कहा- 'फिर आप उसे रंगे हाथों क्यों नहीं पकड़ते? आप उसकी गलतियों को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं?
'नहीं-अभी यह उचित नहीं शिवा! और फिर यह भी तो हो सकता है कि डॉली वास्तव में गलत न हो और हम ही उसके विषय में गलत सोच रहे हों। सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करना भी तो ठीक नहीं।'
'तो क्या यह नाटक हमेशा चलता रहेगा?'
'यह कैसे हो सकता है? नाटक कितना भी लंबा क्यों न हो किन्तु एक-न-एक दिन तो उसे खत्म होना ही पड़ता है। उसी प्रकार से यह नाटक भी एक दिन समाप्त हो जाएगा।'
'आप जानें भैया!' शिवा बोली- 'मैंने तो डॉली से इस संबंध में कहना ही छोड़ दिया है।' इतना कहकर शिवानी वहां से चली गई।
राज ने प्याला उठा लिया।
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'नहीं शिवा! ऐसा बिलकुल नहीं कि मैं उसकी ओर से हमेशा आंखें बंद किए रहूंगा। मैं उसकी प्रत्येक गतिविधि पर नजर रख रहा हूं। मैंने उसके पीछे अपना एक आदमी भी लगा दिया है जो यह देखता है कि वह कहां जाती है और किन-किन लोगों से मिलती है।'
शिवा ने कहा- 'फिर आप उसे रंगे हाथों क्यों नहीं पकड़ते? आप उसकी गलतियों को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं?
'नहीं-अभी यह उचित नहीं शिवा! और फिर यह भी तो हो सकता है कि डॉली वास्तव में गलत न हो और हम ही उसके विषय में गलत सोच रहे हों। सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करना भी तो ठीक नहीं।'
'तो क्या यह नाटक हमेशा चलता रहेगा?'
'यह कैसे हो सकता है? नाटक कितना भी लंबा क्यों न हो किन्तु एक-न-एक दिन तो उसे खत्म होना ही पड़ता है। उसी प्रकार से यह नाटक भी एक दिन समाप्त हो जाएगा।'
'आप जानें भैया!' शिवा बोली- 'मैंने तो डॉली से इस संबंध में कहना ही छोड़ दिया है।' इतना कहकर शिवानी वहां से चली गई।
राज ने प्याला उठा लिया।
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