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हँसकियां, चूतकुले, जोकस

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StoryPublisher

Guest
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दोस्तों,

आप सबको हँसाने और खुद हँसने के लिये मैं ये सूत्र शुरु कर रहा हूँ।

आशा करता हूँ कि ये आप सबको पसंद आयेगा,
और अपने कमेंट के साथ-साथ अपने चुटकुले भी पोस्ट करके सबका मनोरंजन करेंगे।

धन्यवाद।

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001॰ जमींदार की सुहागरात

गाँव का एक जमींदार शादी की सुहागरात को जब बेडरूम में गया तो उसकी बीवी बेड पर घूँघट ओढ़े बैठी थी। उसने घूँघट उठाया, चूमा चाटी की, दुल्हन के एक-एक करके सारे कपड़े उतारे, फिर खुद के कपड़े उतारे। दुल्हन मस्त माल थी। उसकी टाइट चूचियों को मसलते ही जमींदार का लण्ड खड़ा हो गया। जमींदार ने दुल्हन को लिटाया गाँव में बिजली नहीं आई थी। लालटेन जल रही थी। अनाड़ी जमींदार बुर में लण्ड डालने की कोशिश करने लगा, लेकिन टाइट बुर में लण्ड डाल नहीं पा रहा था। उसने दुल्हन से कहा- “अभी आता हूँ…”

उसने दरवाजा जरा सा खोलकर नौकर को आवाज लगाई- “रामू, इधर आओ…”

रामू दौड़ता हुआ आया। जमींदार ने उसे अंदर बुला लिया। दुल्हन ने साड़ी अपने ऊपर डाल लिया था। जमींदार ने लालटेन नौकर को पकड़ाया, और बोला- “यहाँ दिखाना…” फिर दूल्हन के कपड़े खींचे।

तो दुल्हन बोली- नौकरके सामने?

जमींदार बोला- “यह किसी को कुछ बताएगा नहीं, गूंगा है…” फिर दुल्हन के बदन से कपड़े खींचकर अलग किए, और लण्ड बुर में फिर से पेलने की कोशिश करने लगा। लेकिन इस बीच लण्ड थोड़ा नरमा गया था तो अंदर जाना मुश्किल था। लेकिन दुल्हन की कसी जवानी देखकर जमींदार का जेहन सेक्स से भर गया था। हुआ यूँ की लण्ड ने पानी छोड़ दिया।

दुल्हन ने फुसफुसाकर कहा- “अंदर डालो ना जी…”

जमींदार ने कहा- “अब क्या डालूं? लण्ड तो झड़ गया…”

यह सुनते ही दुल्हन ने हिकारत भरी आवाज में कहा- “छीः सुहागरात बर्बाद कर दिया। और करवट बदल लिया।

जमींदार का पारा चढ़ गया, गुस्से से बेड के नीचे उतरा और नौकर को दो चांटे लगाए- “साले, ठीक से लालटेन भी दिखाया नहीं जाता तुझसे? चल कपड़े उतार…”

रामू की कुछ समझ में नहीं आया। मालिक का गुस्सा देखकर हड़बड़ा गया और जल्दी से कपड़े उतार दिए।

जमींदार ने देखा और बोला- “साले, तू आदमी है की गधा है? चल पलंग पर चढ़…”

रामू बेड पर चढ़ गया।

जमींदार ने दुल्हन से कहा- “जानू, सीधी हो जाओ मैं तुम्हारी सुहागरात खराब नहीं होने दूँगा। जिसने खराब किया है वोही ठीक करेगा। साले, देख कैसे लालटेन दिखाते हैं। चल लण्ड में थूक लगा और नयी मालकिन की बुर में अपना लण्ड पेल…”

रामू ने लण्ड बुर की मुँह में रखा और दबाओ डाला 9” इंच लंबा 4 इंच मोटा काला लण्ड बुर में उतरने लगा। दुल्हन कसमसाने लगी- “अया…”

जमींदार दुल्हन से पूछने लगा- जानू अंदर गया?

दुल्हन बोली- हाँ जा रहा है, बहुत मोटा है।

जमींदार बोला- बहुत लंबा भी है, बर्दस्त कर लेना। इन आदिचासियों के बदन जितने मजबूत होते हैं सालों के लण्ड भी उतने ही मजबूत होते हैं…”

रामू को एक चांटा और मारा और बोला- “देखा कैसे तुझे रास्ता मिल गया? ठीक से लालटेन दिखाता तो तुझे यह सब नहीं करना पड़ता। चल अब चोद रात भर अपनी मालकिन को, और जब तक उनका दिल ना भरे रुकना मत… चोद साले… मार धक्के…”

रामू धक्के मार-मार के चोदने लगा। जमींदार लालटेन दिखाकर खुश होता रहा- “जानू अच्छा लग रहा है ना?”

दुल्हन बोली- “उससे बोलो कि टाँगें छोड़ दे, मैं फैलाकर पकड़ती हूँ। वो मेरी चूंचियों को मसले और निपल चूसे…”

जमींदार ने रामू को हुक्म दिया- “मालकिन के दूध पकड़कर चूस…”

रामू ने वक़्त गँवाए बगैर दुल्हन के सख़्त बड़ी-बड़ी चूचियां अपने खुरदुरे हाथों से पकड़ा और निपल में मुँह लगा दिया। अब वो निपल चूस-चूसकर चोदने लगा।

जमींदार ने जम्हाई ली तो दुल्हन बोली- “आप कितनी देर खड़े रहेंगे, चेयर डालकर बैठ जाइए। यह आदिवासी बड़े मजबूत होते हैं। इतनी जल्दी झड़ने वाला नहीं…”

जमींदार अब भी जमींदार ही था चाहे उसकी जमीन पर उसका नौकर हल चला रहा हो।


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002॰ लण्ड बड़ा करने का तरीका

एक रात इमरान के घर वाले दूसरे शहर गये थे। इमरान घर पर अकेला था, रात में घर के पिछवाड़े जहाँ एक गाय और उसका बछड़ा बँधे थे कुछ हलचल सुनाई दी। इमरान बाहर निकला तो दो लोगों ने उसे पकड़ लिया। उसके सारे कपड़े उतार दिए, मुँह में कपड़े ठूंस दिए और उसे खूंटे से बाँध दिया और गाय खोलकर ले गये। बताने की जरूरत नहीं की वो चोर थे।

सुबह जब उसकी माँ और 20 साला बहन वापस आए तो उसे इस हाल में देखकर परेशान हुए। उसे खोला और पूछा की किसने किया?

इमरान ने किसी को कुछ बताने से पहले वहां पड़ा एक डंडा उठाया और बछड़े को बेदर्दी से पीटने लगा।

माँ ने उसे रोका- “गाय चोर ले गये, इसमें इस बेचारे का क्या कुसूर? इसे क्यों पीट रहा है?

इमरान बोला- “अम्मी, तुम नहीं जानती इसने रात भर अपनी माँ का थन समझकर मेरे लण्ड को चूस-चूसकर बुरा हाल किया है। देखो, मेरे हाथ बँधे थे मुँह में कपड़ा ठूँसा हुआ था। ना छुड़ा पा रहा था, ना चिल्ला पा रहा था। मेरा क्या हाल हुआ होगा सोचो। साले को लण्ड और थन में फरक नहीं पता…” इमरान फिर उसे पीटने लगा।

माँ ने समझाया- “छोटा बच्चा है…”

उसकी बड़ी बहन मुश्कुराती हुई बोली- “तेरा तो फायदा ही किया है लड़कियां लंबा लण्ड ढूँढ़ती हैं। अपने दोस्तों से बताना ‘लण्ड लंबा करने का आसान तरीका’ हाहाहाहा…”


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003॰ झांट बनाने की दुकान

इमरान ने हज्जाम की दुकान खोल ली। ठीक उसके दुकान के ऊपर माले पे एक चाय नाश्ते की दुकान थी। ऊपर से कभी कोई पानी फेंक देता, कभी कुछ, कभी कुछ। दोनों में झगड़े के बाद सुलह हुई। चाय वाला नीचे आ गया, इमरान अपनी हज्जाम की दुकान ऊपर ले गया।

लेकिन नीचे चाय की दुकान पर एक बोर्ड लगा गया- “नीचे का बाल बनाने वाला ऊपर है…”

पहले ही दिन एक सरदार उसकी दुकान में पहुँचा और चेयर पर पैंत उतारकर बैठ गया। इमरान ने पूछा- यह क्या बदतमीजी है?

सरदार बोला- “नीचे बोर्ड लगा है ‘नीचे का बाल बनाने वाला ऊपर है’ अब बनाओ नीचे का बाल…”

इमरान को अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन उसने सोचा की चुपचाप बैठने से अच्छा है कि यह भी करके देखा जाए। दिल ही दिल में सोचने लगा इस काम के लिए पैसे भी अच्छे मिलेंगे। उसने उस्तूरा निकाला और सरदार की झांट साफ कर दिया, और 50 रूपए माँगे, जो सरदार खूशी से दे गया।

रात सरदार ने सरदारनी को अपना साफ सुथरा लण्ड दिखाया तो सरदारनी ने पूछा- इसे कहाँ से साफ करवाया?

सरदार ने उसे अड्रेस बता दिया और बोला- “तुम भी वहाँ से अपना साफ करवा आना…”

दूसरे दिन सरदारनी इमरान की दुकान पर पहुँची। मुश्कुराते हुए सरदार के साफ लण्ड की तारीफ की और बोली- “उन्होंने भेजा है, मेरा भी साफ कर दो…”

इमरान बोला- “हाँ हाँ क्यों नहीं? सलवार उतारिय और बैठिए…”

सरदारनी ने सलवार उतरी और कुरती भी उतारने लगी।

इमरान बोला- उसे उतारने की जरूरत नहीं।

सरदारनी बोली- बगल भी साफ करवाना है।

इमरान कुछ सोचकर बोला- तो ठीक है उतार दीजिए।

अब सरदारनी बिल्कुल नंगी थी। इमरान उसकी इतनी बड़ी गाण्ड इतनी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर हैरान था। दिल तो कर रहा था कि चोद डाले लेकिन साइज देखकर डर महसूस कर रहा था। फिर भी सरदारनी के सीट पर बैठते ही उसने चूचियों को सहलाने शुरू कर दिया।

सरदारनी बोली- यह क्या कर रहे हो?

इमरान बोला- हज्जाम मैं हूँ या आप?

सरदारनी बोली- वो तो आप हो।

तो फिर मुझे मेरा काम करने दीजिए। आप आराम से लेटी रहिए।

सरदारनी बोली- ठीक है भैया, मुझसे गलती हो गयी आप अपना काम करें।

इमरान ने कुछ देर चूचियों को दबाया फिर निपल में होंठ लगा दिए। सरदारनी भी अब मस्त होने लगी थी। इमरान अब नीचे आया और बुर चूमने लगा।

सरदारनी बोली- “भैया, आप चोदेंगे क्या?

इमरान बोला- “देखिए, यह जो बुर की जगह है ना यह बहुत नाजुक जगह है इसके लिए अभी तक कोई क्रीम तो बाजार में आया नहीं है। इसलिए पहले बुर से ही क्रीम निकालना पड़ेगा फिर उसी क्रीम से झाँट की सफाई होगी। और बुर से बिना चुदाई के क्रीम तो निकलेगी नहीं। यह तो मेरे काम का हिस्सा है…”

सरदारनी बोली- “वो ऐसा है तो फिर अपना लण्ड निकालिए मैं भी जरा उसे चूसकर गीला कर दूं…”

इमरान ने अपने सारे कपड़े उतारकर टांग दिए और मुड़ा तो उसका लण्ड आधा खड़ा हो चुका था। उसे देखकर सरदारनी बोली- “वाह भैया, क्या लण्ड है… सरदार से दोगुना लंबा और दोगुना मोटा। मजा आ जाएगा…”

इमरान- “क्या मजा आ जाएगा… मैं कोई मजे के लिए नहीं चोद रहा…”

सरदारनी बोली- “मैं जानती हूँ फिर भी इतना तगड़ा लण्ड अंदर लेने में मजा तो आएगा ही…”

इमरान- “मुझे नहीं मालूम, आपको मजा लेना है तो लें…”

सरदारनी भूखी कुतिया की तरह लण्ड चूसने लगी। उसने बोला- “जल्दी अंदर डालो… मेरी बुर पिघलती जा रही है…”

इमरान ने जल्दी से पोजीशन लिया और लण्ड सरदारनी की बुर में घुसा दिया। सरदारनी 35-36 साल की तगड़ी औरत थी, आसानी से पूरा लण्ड निगल गयी। फिर तो इमरान किसी मशीन की तरह उसे चोदने लगा। बुर और लण्ड के बीच जंग जारी रही। आखिरकार लण्ड ने हार मान ली। दोनों बुरी तरह हाँफ रहे थे। इमरान ने सीट के नीचे एक कटोरी रख दी थी जिसमें बुर से निकलने वाली मिक्स क्रीम जमा हो रही थी। आधी कटोरी क्रीम भरी हुई थी। इमरान ने उसे उठाया और बोला- “आपकी बुर ने तो जितनी क्रीम दे दी है कि आज दूसरी कोई ग्राहक आ जाती तो इसी से उसका भी काम चल जाता, मुझे इतनी महत क्रीम निकालने में नहीं करनी पड़ती।

सरदारनी बोली- आपको मेरी बुर पसंद आई?

इमरान बोला- बड़ी भूखी बुर लगती है।

सरदारनी बोली- “हाँ यार, सरदार बड़ा सुस्त है चोदने में…” फिर सचमुच इमरान ने क्रीम उसकी बुर पर लगाया और उस्तूरा से उसकी बुर की बाल साफ कर दिए। फिर बगल के बाल साफ किए। तब तक उसका लण्ड फिर खड़ा हो गया था। उसने फिर पोजीशन लिया।

तो सरदारनी बोली- अब क्यों?

इमरान बोला- “चेक कर रहा हूँ कि साफ करने के बाद चोदने में मजा आता है या नहीं? मुझे मजा आएगा तभी तो आपके खसम को मजा आएगा? उनको मजा नहीं आया तो वो आपको भेजेगे नहीं…” इमरान ने फिर से सरदारनी को जाम के चोदा। जब झड़ गया तो हाँफते हुए बोला- “200 रूपए दो…”

सरदारनी ने उसके होंठ चूमे, दो सौ रूपीए दिए और जाते-जाते पूछा- कितने दिन में साफ करवाना है?

इमरान बोला- हफ्ते में या महीने में एक बार जरूर करवा लें…”

रात में सरदार ने चिकनी बुर देखा तो बड़ा खुश हुआ, पूछा- “कितना लिया तुमसे?”

सरदारनी ने बोला- “200 रूपये…”

सरदार आग-बबूला हो गया। बोला- “साले को मैं कल देखता हूँ…” दूसरे दिन सरदार इमरान के यहाँ गुस्से में पहुँचा। गरजकर बोला- “तुमने सरदारनी से 200 रूपए क्यों लिए?”

इमरान उससे भी ज्यादा तेज आवाज में बोला- “हज्जाम मैं हूँ या तुम? तुम्हें पता है… तुम्हारा डंडा है पकड़ा और साफ कर दिया। उनका ना डंडा है ना कुछ पकड़ने का, काम करेगा कैसे? अपना डंडा लगाना पड़ा तब कहीं जाकर काम हुआ। दो घंटे लगे मालूम?”

सरदार झेंप गया धीरे से बोला- “फिर भी 200 रूपए बहुत ज्यादा हैं…”

इमरान भी नरम लहजे में बोला- “ठीक है, ऐसा बोलोगे तो हम भी आफर देते हैं। माँ के साथ बेटी का फ्री का आफर चल रहा है। बेटी को भेज दीजियेगा फ्री कर देंगे…”

सरदार खुश हो गया बोला- “मेरी तो दो जुड़वा बेटियां हैं। मैं कल भेजता हूँ…”

इमरान बोला- “एक के तो पैसे लगेंगे। क्यों गरीब के पेट लात मारते हो…”


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004॰ हनीमून

इमरान की शादी हो गयी। उसने गाँव की लड़की से शादी की। उसे लगता था कि शहर की लड़कियां लुटाई हुई होती हैं। उसने सुहगरात में कुछ नहीं किया। दुल्हन से बोला- “हम हनीमून पर जाएँगे…”

दुल्हन क्योंकी गाँव की थी तो हनीमून का मतलब नहीं समझती थी। बहुत खुश हुई। इमरान दुल्हन को कश्मीर ले गया एक होटेल में ठहरे। दुल्हन पूछ रही- “हनीमून क्या होता है??

इमरान दिल ही दिल में खुश होता रहा कि इसे हनीमून नहीं मालूम, मतलब इसे कुछ नहीं पता। रात हुई तो इमरान ने दुल्हन को खूब जम के चोदा। सुबह हुई तो देखकर हैरान रह गया की दुल्हन की नाक का एक छेद 3” इच खुला हुआ है। उसने पूछा- “ये कैसे हुआ?”

दुल्हन रोते हुए बोली- “आप ही ने तो किया है…”

इमरान बोला- धत्त तेरे की मैं समझा बहुत टाइट है। तुमने रोका क्यों नहीं?

दुल्हन बोली- “पहली बार जैसे ही चिल्लाई तुम्हारे दोनों लड्डू मेरे मुँह में घुस गये और आवाज ही निकल नहीं पायी…”

इमरान दुल्हन पर ही बरस पड़ा- “यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है। मैं बोल रहा था की लाइट जलाकर सोते हैं तुमने ही कहा था की नहीं मुझे शरम आती है…”

दुल्हन ने पुछ लिया- “यही था क्या हनीमून?

इमरान बोला- “नहीं आज रात बताता हूँ की हनीमून क्या होता है…” रात हुई इमरान ने लाइट जलाकर दुल्हन को नंगा किया खुद भी कपड़े उतारे और अपना लण्ड दुल्हन को चुसाया। उसकी बुर और चूचियां चूसे। और चुदाई करी।

सुबह हुई तो दुल्हन ने पूछा- “हनीमून नहीं बताया आपने…”

इमरान बोला- “कल रात जो हमने किया वही तो हनीमून है…”

दुल्हन हँसने लगी और बोली- “ओह्ह… इसी खेल को हनीमून कहते हैं? इसे तो मैं गाँव में कई बार कई लड़कों के साथ खेल चुकी हूँ। हाहाहाहा…”


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005॰ सुहागरात में ट्रेनिंग

हमारे आफिस में एक डब्बू किश्म का आदमी काम करता था, बड़ा ही शर्मीला। आफिस की लड़कियों से अक्सर आँखें चुराता रहता था। एक दिन उसने बताया की उसकी मांगनी हो गयी है, लड्डू बाँट रहा था। साथ में एक तस्वीर भी लाया था दुल्हन की। मैं देखते ही दुल्हन पर फिदा हो गया, गजब की खूबसूरत थी, बला की सेक्सी आँखें थी, चौड़े चूतड़, बड़ी-बड़ी छातियां, सभी कुछ था उसमें जो एक सेक्सी लड़की में होनी चाहिए। मैं प्लान बनाने लगा की इसकी दुल्हन को इससे पहले कैसे चोदा जाए।

मैंने कहा- यार, लड़की तो बड़ी अच्छी है और बहुत सेक्सी भी। लेकिन तू ने कभी किसी लड़की को चोदा भी है?

उसने शर्मा कर कहा- छीः कैसी बात कहते हो, शादी से पहले?

मैंने कहा- फिर तो तुम्हें सुहागरात के दिन बड़ी मुश्किल होगी।

उसने पूछा- क्यों?

मैंने कहा- “यार, यह लड़की बहुत ज्यादा सेक्सी लगती है। इसे ढंग से नहीं चोदा तो तू ज़िंदगी भर के लिए हिजड़ा बन सकता है। तेरे लण्ड की नसें फट सकती हैं। मेरा एक दोस्त पछता रहा है। दो बार आपरेशन हो चुका है उसका…”

फिर क्या करूँ?

मैं- “सुहागरात के दिन सिर्फ़ ऊपर-ऊपर हाथ फेरना उसके कपड़े मत उतारना। दूसरे दिन किस करना, तीसरे दिन से तीन दिन तक सिर्फ़ उसकी बुर में एक उंगली…”

“छीः तुम क्या गंदी-गंदी बातें कर रहे हो?”

मैंने हथौड़ा चला दिया- “यह बातें तुम्हें गंदी लगती हैं? तो ठीक है मुझे बुला लेना दोनों को बता दूँगा…” मैं उसकी बात सुनने के लिए रुक गया।

उसने कहा- “ठीक है, अगर कोई गड़बड़ हुई तो बताऊँगा…”

मैंने कहा- “गड़बड़ होने से पहले बुलाया तो फायेदा होगा, गड़बड़ होने के बाद बुलाने से क्या फायेदा…”

वो बोला- “ठीक है…”

उसकी शादी हुई। मैं भी शादी में शामिल था। सब चले गये। मैंने उसे रूम के अंदर यह बोलकर धकेला की घबराना नहीं… मैं यहीं हूँ, बुला लेना।

वो अंदर गया, दरवाजा बंद किया, कुछ ही देर बाद बाहर आ गया। माथे पर पशीना था। उसने कहा- “दोस्त चलो अंदर…”

मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। वो लड़की गजब थी। अब उसे चोदने से मुझे कोई नहीं रोक सकता था। मैंने पूछा- क्या हुआ?

उसने कहा- मैं अंदर गया। दुल्हन को तुम्हारी सारी बातें बता दी…”

तो उसने कहा- “तो फिर उन्हें बुला लो, रिस्क क्यों लेना…”

मैं अंदर गया। सलीम ने मेरा तारूफ दुल्हन से करवाया, कहा- यह मेरे दोस्त हैं। इनकी शादी को पाँच साल हो चुके हैं। सभी इनसे मशवेरा करते हैं।

मैंने कहा- भाभीजी आपकी इजाजत हो तो मैं बताना शुरू करूँ।

दुल्हन ने सर हिलाकर हाँ कहा। उसका चेहरा अब भी घूँघट के अंदर था।

मैंने सलीम से कहा- घूँघट उठा दो।

सलीम ने दुपट्टा उठा दिया।

मैंने कहा- ऐसे नहीं, मैंने घूँघट फिर डालकर धीरे से घूँघट दुल्हन के माथे पर रख दिया और कहा- अब तुम एक चेयर डालकर बेड के पास बैठ जाओ, और देखो…”

मैं बेड पर चढ़ गया। वो चेयर लाकर सामने बैठ गया। मैं दुल्हन के साइड पर जा बैठा।, और बोला- “देखो, दुल्हन के कंधे पर धीरे से हाथ रखो। मैंने दुल्हन के कंधे पर हाथ रख दिया। उसे अपने करीब लाओ। फिर उसकी पेशानी को चूमो। मैं जो कह रहा था वोही कर भी रहा था। फिर गालों पर बोसा दो। मैंने दुल्हन के दोनों गालों को धीरे से चूमा। दुल्हन से बोला- तुमको कोई एतेराज तो नहीं?

उसने नहीं में सर हिला दिया। मुझे लाइसेंस मिल गया। अब मैं अपना हाथ उसके बगल में डाल चुका था उसे अपने से सटा चुका था। फिर दुल्हन के होंठ चूमना है। सुनते ही दुल्हन ने अपने हाथों से चेहरा ढँक लिया। मैंने उसके हाथों को चूमना शुरू किया। मैंने बोला- “इस तरह उसके हाथों पर बोसा देते रहना, जबरदस्ती उसके हाथ नहीं हटाना जब तक की वो खुद हाथ ना हटा ले…”

मैं उसके हाथ के पंजों से कोहनी तक चूमता रहा। आखिर उसने चेहरे से हाथ हटा लिया। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, लंबी किस ली और कहा- “देखा इस तरह पहली रात गुजार देना। सुहागरात 15 दिनों का कोर्स है मैं बार-बार नहीं आऊँगा। आज 7 दिन का बताऊँ या 15 दिनों का पूरा कोर्स?”

सलीम बोला- पूरा बता दो।

मैंने कहा- ठीक है। तो सबर से देखो। गरम हो जाओ तो मूठ मार लेना। मूठ मारनी तो आती है ना की वो भी बताना पड़ेगा?

सलीम बोला- नहीं आती है।

फिर मैंने कहा- “अब होंठ पर होंठ रखो और एक हाथ दुल्हन की एक छाती पर रखो अभी दबाना नहीं (मैंने ‘दबाना नहीं’ चूची दबाकर ही बताया), सिर्फ़ हल्के-हल्के सहलाना है…”

चूचियां कच्चे आम की तरह सख़्त थी मुझे सलीम की पसंद और किश्मत पर जलन हो रही थी।

मैंने दो-दो शादी की लेकिन दोनों पक्की रंडी निकलीं। पहली वाली की जब मैंने चूचियां खोलीं तो रोने को दिल किया, चूचियां लटक गयीं। मैं समझ गया कि कितना मसला गया था उसे। खैर… मुझे आज पहली बार इतनी सख़्त चूचियां दबाने को मिली थीं। मैंने कहा- “एक ही चूची सहलाते रहना, धीरे-धीरे दबाना शुरू कर देना। दुल्हन अपनी बाहें तुम्हारे गले में डाल देगी…”

दुल्हन ने सचमुच मेरे गले में बाहें डाल दिया।

मैंने कहा- “अब चूची जोर-जोर दबाना शुरू कर देना, और होंठ चूसते रहना। दूसरी चूची तब तक नहीं छूना जब तक दुल्हन खुद तुम्हारा हाथ अपनी दूसरे चूची पर ना रख दे…”

दुल्हन ने मेरे हाथ को उसकी दूसरे चूची पर रख दिया। अब बारी-बारी से दुल्हन की दोनों चूचियों मसलना शुरू कर देना। दुल्हन के मुँह से अया… उउउह्ह… की आवाज़ें निकलेंगी। अब दुल्हन को धीरे से बेड पर लिटा देना, और उसकी कुरती उतारने की कोशिश करना, जबरदस्ती मत करना। दुल्हन ऐतराज करे तो छोड़ देना। अब मैंने दुल्हन की कुरती उतार दिए। इतना दूसरे दिन के लिए काफी है।

फिर मैंने कहा- “अब दुल्हन को धीरे से बिस्तर पर लिटा देना। फिर दुल्हन के निपल चूसना…” कहते हुए मैं दुल्हन के निपल चूसने लगा। बारी-बारी से एक निपल चूस रहा था तो दूसरी निपल को चुटकी से मरोड़ रहा था। दिल में जलन भी थी कि इसे इतनी फ्रेश दुल्हन क्यों मिली? मुझे तो ढीली-ढाली मिली थी। अपना गुस्सा दुल्हन के निपल पर निकाल रहा था। निपल बेदर्दी से मरोड़ रहा था।

दुल्हन ने कान में धीरे से बोला- “लग रहा है…”

भाभी मैं खिलाड़ी होने के बावजूद आपको दर्द हो रहा है तो यह अनाड़ी करता तो सोचो आपका क्या हाल होता? मैंने फिर उसके होंठ चूसे और एक हाथ उसकी बुर पर ले गया। धीरे से बोला- “अब दुल्हन की बुर को कपड़ों के ऊपर से सहलाओ। जब वो छटपटाने लगे तो नाड़ा खोल दो…” मैंने दुल्हन की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी चिकनी बुर को सहलाने लगा। बुर के मुँह में पानी आ चुका था।

मैंने एक उंगली बुर में डाल दी तो दुल्हन के मुँह से आ निकला।

मैंने कहा- “अब एक उंगली बुर में डाल दो और अंदर-बाहर करो। जब बुर गीली हो जाए तो दो उंगली डालो, दुल्हन तड़पने लगेगी आअह्ह… आअह्ह…” मैंने दुल्हन से कहा- “जरा बर्दास्त कर लो, आगे बहुत मजा आने वाला है। इसी मजे के लिए तो शादी करते हैं…” मैं कभी उसके निपल चूस रहा था तो कभी होंठ चूस रहा था।

दोस्त अब अपना लण्ड निकालकर मूठ मार रहा था।

मैंने उससे कहा- जरा इसकी सलवार उतार दो।

वो उठा और दुल्हन की सलवार खींच दिया।

मैंने कहा- “शाबास… अब बैठ के मूठ मारो और देखो। अब अपना लण्ड बाहर निकालो…”

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और दुल्हन के हाथ में पकड़ा दिया और कहा- “इसे सहलाओ और देखो, पहले कभी लण्ड पकड़ा है?”

दुल्हन ने कहा- नहीं।

मैंने कहा- “यही तुम्हारा शौहर है, यही तुम्हें मजा देगा, यही तुम्हें माँ बनाएगा। प्यार से सहलाओ…”

वो सहलाती रही मेरा लण्ड नयी बुर पाने की खुशी में फूलता गया। मैं खुद परेशान था- यह तो आज कुछ ज्यादा ही मोटा हो रहा था। डर भी रहा था कि कहीं बुर को फाड़ ना दे। अब मैं नीचे सरकने लगा और बोला- “अब दुल्हन की बुर को चाट-चाटकर गीला करना है। गलती से भी सूखी बुर में लण्ड मत डालना…”

मैं बुर चाटने लगा, बुर की फांकें खोलकर जबान अंदर डालने लगा। दुल्हन मेरे सर को बुर में दबा रही थी। फिर मैं उठा और दुल्हन से बोला- “देखो जिस तरह बुर को चाटकर गीला करना जरूरी है उसी तरह लण्ड को चूसकर गीला करना भी जरूरी है। अब तुम लण्ड को मुँह में लेकर गीला करो…” और अपना लण्ड दुल्हन के मुँह पर रख दिया।

और दुल्हन ने उसे अंदर ले लिया और चूसने लगी। मैंने अपने अंडे उससे चटवाए और फिर उसकी टाँगों को खोल दिया, और पोजीशन लेकर लण्ड को बुर के मुँह पर रखा और दोस्त से बोला- “देखो गौर से, लण्ड धीरे-धीरे अंदर डालना। बुर बहुत नाजुक जगह है, पूरा लण्ड एक साथ अंदर मत डालना। तीसरे दिन आधा लण्ड ही डालना…” मैंने लण्ड अंदर डालना शुरू किया और आधा लण्ड अंदर डालने के बाद अंदरा बाहर करने लगा। फिर धीरे धीरे पूरा लण्ड अंदर डाल दिया।

दुल्हन को कोई दर्द नहीं हुआ। इसका मतलब मैं समझ गया की दुल्हन चुदी हुई है। मुझे फिर गुस्सा आ गया और मैं लण्ड अब जोर-जोर अंदर-बाहर करने लगा। दुल्हन मुझे अपने ऊपर खींच रही थी, वो पूरी तरह मस्ती में थी। अब बुर और लण्ड की जंग शुरू हो चुकी थी।

दोस्त बोला- “तुमने तो पूरा घुसा दिया…"

मैं हाँफते हुए बोला- “मुझ अनुभव है ना… तुम ऐसा मत करना, चार दिन बाद पूरा लण्ड डालना। देखो चोदने के कई तरीके हैं। पहला जिस तरह मैं अभी चोद रहा हूँ। दूसरा दुल्हन की टाँगों को कंधे पर रखो फिर धक्के मारो। तीसरा टाँगों को नीचे दबाओ, जिससे दुल्हन की गाण्ड ऊपर उठा जाएगी फिर धक्के मारो। चौथा दुल्हन की एक टांग को नीचे फैला दो, एक टांग को आसमान की तरफ खड़ा कर दो फिर चोदो। जितना अलग-अलग तरह से चोदोगे, उतना मजा तुम्हें भी आएगा और दुल्हन को भी। लेकिन यह सब पाँचवे और छठे दिन में। सातवें दिन दुल्हन की शरम खतम हो जाए तो खुद नीचे लेट जाना फिर दुल्हन को बोलना कि वो लण्ड की सवारी करे…”

मैं नीचे लेटकर दुल्हन को मेरे लण्ड की सवारी करने को बोला, जो वो बखूबी करने लगी।

दोस्त बोला- “वाह दोस्त, तुमने बहुत कुछ सिखा दिया। मैं तुम्हारा यह एहसान कभी नहीं भुला पाऊँगा…”

मैंने कहा- यह तो कुछ भी नहीं। तुम सात दिन तक यह सब ठीक से कर लो फिर मैं तुम्हें खड़े-खड़े चोदना, दीवार पे सटाकर चोदना, गोद में उठाकर चोदना और गाण्ड मारना सिखा जाऊँगा। आज मुझे यहीं सोना पड़ेगा, तुम्हारा दुल्हन के पास सोना ठीक नहीं होगा। उसने पहली बार लण्ड लिया है। अभी उसकी बुर कम से कम दो-तीन बार और गरम होगी, मुझे ही उसे चोद-चोदकर ठंडा करना होगा। तुम नीचे बिस्तर लगाकर सो जाओ।

दोस्त नीचे बिस्तर लगाकर सो गया और मैं उसकी दुल्हन को रात भर जी भरकर चोदता रहा।


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दोस्तों,

आज के लिये बस इतना ही, मेरी तरफ से।

अब आपके चूतकुलों का इंतेजार है??

मज़ा लीजिये, हँसिये और सेहत बनाइये।


धन्यवाद।
 
Friends,

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NO NEED TO ASK


Thanks

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010॰ मछलियों ने दुनियां की सैर की

एक बार एक तालाब में दो छोटी मछलियों की इच्छा हुई दुनियां घूमने की। दोनों ने मशविरा किया की किसी इंसान के बदन में छुपकर दुनियां घूम आते हैं। इतने में एक औरत आई तालाब में नहाने को। दोनों ने मौका गनीमत जाना और एक उसकी बुर में घुस गयी और एक उसकी गाण्ड में।

दूसरे दिन जब वो नहाने आई तो दोनों मछलियां बाहर निकल आईं।

जो गाण्ड में घुसी थी वो लंबी-लंबी साँसें लेती हुई बोली- “बाप रे बाप… कितनी गंदी कीचड़ है वहाँ, बदबू से जान निकली जा रही थी। कैसी दुनियां है मुझे नहीं जाना फिर कभी…”

दूसरी जो बुर में घुसी थी, बोली- “लेकिन मुझे तो बड़ा मजा आया। बहुत बड़ी सुरंग थी तैरने को, चिपचिपा सा पानी भी था। कभी-कभी गरम-गरम साफ लेकिन खारा पानी भी बहता था। लेकिन कई घंटों बाद जो हुआ कुछ देर के लिए मैं भी डर गयी। एक मोटी सी मछली अंदर आई उसने शायद मुझे वहां देख लिया और पीछे हटकर मुझे जोरदार धक्के के साथ मुझ पर हमला कर दिया और मुझे कुचलने की कोशिश करने लगी। मैंने भी जम के लड़ाई की। आखिर उस मोटी मछली को हारकर जाना पड़ा। लेकिन जाते-जाते उसने मुझ पर ढेर सारी उल्टी कर दिया।

इस तरह तीन बार लड़ाई हुई लेकिन हर बार मैंने उसे मार-मारकर भगा दिया। लेकिन हर बार उसने उल्टी किया तभी गयी।


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011॰ सुहागरात में ही तीन गैर मर्दों से चुदी

उस रात मेरी सुहागरात थी। मैं गाँव की लड़की हूँ। एक रिश्तेदार ने मेरी शादी मेरे ही गाँव के लेकिन मुंबई में रहने वाले एक लड़के से की, जिसके माँ-बाप कोई नहीं थे। वो शादी के दूसरे दिन मुझे मुंबई ले आया था। आज मैं उसका इंतेजार कर रही थी। मैंने उसे ठीक से देखा भी नहीं था। इंतेजार करते-करते बहुत देर हो गयी शायद रात के 11:00 बजे होंगे कि मेरी आँख लग गयी।

तभी दरवाजा खुला तो मेरी नींद भी खुल गयी। मैं अपने आपको समेटकर बैठने की कोशिश करने लगी। उसने दरवाजा लगाया और मेरे पास आ गया, बोला- “नहीं-नहीं, उठने की जरूरत नहीं, लेटी रहो। बड़ी मुश्किल से जान छुड़ाकर आया हूँ। जल्दी से एक चान्स मार लेने दो कल फिर इतमीनान से करेंगे…” कहकर वो मुझ पर झुक गया और मेरा घूँघट खोल दिया। फिर मेरे माथे, फिर गाल, फिर होंठ चूमने शुरू किए।

मैं भी साथ देने लगी। उसने ब्लाउज़ के बटन खोले और चूची दबाने लगा। फिर मुँह निपल पर लगा दिया और चूसने लगा। चूसते-चूसते उसने मेरा लहँगा उठाना शुरू किया।

मैं कुछ कसमसाई फिर छोड़ दिया, आखिर चुदना तो है ही।

वो लहंगे के अंदर हाथ डालकर मेरी बुर को सहलाने लगा। फिर बुर थोड़ी गीली हुई तो उंगली घुसा दिया।

यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था। कुछ ही मिनट बाद वो नीचे सरक कर अपना मुँह मेरी बुर पर ले आया और बुर को चाटने लगा। मुझे शरम भी आ रही थी और मजा भी। फिर वो उठा और अपने पैंट के अंदर से लण्ड निकाला, नाइट बल्ब की रोशनी में मैं आँखें बंद करती, बीच में हल्के से खोलती और देख लेती। वो लण्ड मुट्टी में हिलाने लगा और मुँह से थूक निकालकर लण्ड पर मलने लगा। फिर लण्ड को बुर में पेलने लगा। मेरी कुँवारी बुर में पहली बार लण्ड जा रहा था। वो पक्का खिलाड़ी था, झुक कर मेरे होंठों को अपने होंठ से पकड़ लिया और लण्ड पूरा बुर में पेल दिया।

मुझे दर्द हुआ। जब तक की मैं दर्द झेलकर आँखें खोलती उसने लण्ड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया था, जिससे मुझे मजा ही मजा आने लगा। मैं मजे में खो गयी।

फिर कुछ देर बाद वो सिसकने लगा- “उंह्ह… उंह्ह…” और कुछ गरम-गरम पानी मेरी बुर से बहने लगा।

मेरी चुदाई हो चुकी थी।

उसने मुझे चूमा और बोला- “मैं फिर आता हूँ…” कहकर वो चला गया।

मुझे नींद आ गयी। कुछ ही देर में फिर वो आया। मेरी नींद तब खुली जब वो लण्ड बुर में आधा घुसा चुका था। मैंने बाहें फैला दी, वो समझ गया। मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया, लेकिन दूसरे ही पल मैं चौंकी और उसे धकेलने की कोशिश की।

उसने पूछा- क्या हुआ?

मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ तो मैं खामोश रही। उसके पशीने की बू अलग थी, लण्ड भी ज्यादा मोटा महसूस हो रहा था, बदन भी थोड़ा भारी था। वो लण्ड धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रहा था यानी चोदने का अंदाज भी अलग था। मेरी कुछ समझ में नहीं आई। अब वो रफ़्तार पकड़ चुका था, पहले से ज्यादा मजा आ रहा था। कुछ देर बाद उसका भी बदन अकड़ा, और उसने भी बुर में पानी छोड़ा और मुझे चूमा और चला गया।

मेरा दिमाग सुन्न हो चुका था। मेरी आँखों से नींद उड़ चुकी थी।

कुछ देर बाद वो फिर आया, और मेरे बगल में लेटकर मेरे चेहरे की ओर झुकने लगा तो मैंने चेहरा दूसरी ओर कर लिया और पूछा- तुम्हारे दोस्त गये?

उसने कहा- “इतनी रात को कहाँ जाएँगे बेचारे…”

मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि मैं क्या बोलूं, मैंने कहा- “तुम्हें और जाना तो नहीं है ना?”

उसने कहा- “नहीं, कहाँ जाना है?” अब वो मेरे होंठ चूसने लगा।

मुझे टेस्ट कुछ अलग लगा, मेरी सोचने की ताकत खतम हो गयी थी तो मैंने सोचना बंद कर दिया।

उसने अपने सारे कपड़े उतारे, मेरे भी सारे कपड़े उतारे तो मुझे यकीन हो गया की यही मेरा शौहर है। मैं उससे लिपट गयी और वो कुछ देर मेरी छातियों से खेलता रहा फिर बुर में उंगली की और बोला- “तुम्हारी बुर से तो नदी की तरह पानी बह रहा है। जबरदस्त मजा आएगा…”

मैं मन ही मन बोलने लगी- “मजा तुम्हारे दोस्त लेकर जा चुके हैं। यह उन्हीं का पानी है…”

फिर उसने लण्ड बुर में पेल दिया और चोदने लगा, आधा घंटा तक चोदता रहा। इसका लण्ड थोड़ा पतला था दूसरे वाले से लेकिन लंबा उससे ज्यादा था। फिर पानी बुर में छोड़कर हाँफने लगा, मुझे चूमने लगा लेकिन जाने की कोशिश भी ना की।

इतने में दरवाजा किसी ने खटखटाया- “डार्लिंग, दरवाजा खोलो…”

मैं घबरा गयी।

जो मेरे साथ सोया था उसने मेरे कान में कहा- “तुम्हारा शौहर आया है शायद? अपने आपको और अपनी शादी को बचा लेना। मैं भाग नहीं सकता, बेड के नीचे छुप जाता हूँ। तुम दरवाजा खोल दो…” कहकर अपने कपड़े लिए और बिना पहने बेड के नीचे छुप गया।

मैं पागल हो गयी। तीन लोग मेरी चुदाई कर चुके थे और अभी मेरा सौहर आ रहा है। क्या मिलेगा उसे? पानी-पानी बुर… वो दरवाजा खटखटाए जा रहा था। मैंने धीरे से आवाज दी- “खोलती हूँ। जैसे तैसे कपड़े लपेटे और दरवाजा खोल दिया।

वो लड़खड़ा रहा था, गरजा- दरवाजा खोलने में इतनी देर क्यों लगाई?

मैं सहम गयी।

“चल कपड़े उतार…”

मैंने कपड़े जो बाँधे भी नहीं थे गिरा दिए।

उसने कहा- “मेरा भी उतार…”

मैंने काँपते हाथ से उसके भी उतार दिए। उसका लण्ड तो शायद पहले से ही खड़ा था, मेरा हाथ लेकर लण्ड पर रख दिया, और बोला- “चल इसे खड़ा कर…” वो लड़खड़ा रहा था।

मैंने कहा- आप गिर जाएँगे।

उसने कहा- तुम्हें जो लाया हूँ संभालने के लिए।

मैं दिल ही दिल में गाली दे रही थी- “मैं तुम्हें सम्भालूं, मुझे तेरे दोस्त संभालें? वाह…”

वो बेड के पास आया और धड़ाम से गिर गया। उसका लण्ड आसमान की तरफ सर उठाए खड़ा था, बोला- “देख क्या रही है चूस इसे…”

“जी, जी हाँ…” मैं भी बेड पर चढ़ गयी। मैंने कहा- “दरवाजा खुला है…”

उसने कहा- “खुला रहने दे सब सो गये हैं। तू चूस और फिर उस पर बैठ जा…”

मैंने कुछ देर चूसा। बता दूँ इस लण्ड की तो बात ही कुछ और थी। सुपाड़ा बड़ा सा, लंबा भी अच्छा खासा था, मोटा भी 3” इंच होगा। मैं उसे अपनी बेचारी बुर पर अड्जस्ट करके दबाने लगी तो सुपाड़ा जा ही नहीं रहा था।

“क्या कर रही है? अंदर ले…”

“जी, लेती हूँ…” मैं काँप रही थी।

मैंने देखा इसी मौके का फायदा उठाकर बेड के नीचे से वो आदमी निकला और घिसटता हुआ दरवाजे से बाहर निकल गया। मेरी तो जान में जान आई।

इस बीच लण्ड पूरा मेरी बुर में था।

अब मैं खुद खुशी और डर के बगैर गाण्ड नचाने लगी और चुदाने लगी। मैंने सोचा सब कुछ ठीक हो गया है। मेरे शौहर के तीन दोस्तों ने मेरे शौहर को बेवकूफ बनाकर मुझे चोद लिया और अब मेरा शौहर मेरे पास है अब कोई नहीं आने वाला।

आधा घन्टा चोदने के बाद उसने मुझे पलट दिया। अब वो मेरे ऊपर था और अब वो धक्के मार रहा था, जबरदस्त धक्के, मेरी हड्डी-हड्डी हिल गयी, जबरदस्त चोद रहा था। मेरा दिल कह रहा था कि इसी तरह ज़िंदगी भर चोदता रहे और मैं चुदती रहूं। लेकिन हर चुदाई का कोई अंत होता है तो इसका भी हुआ। उसने बुर में पूरा लण्ड ठूंस दिया और गरजते हुए पानी छोड़ा। और मुझ पर गिर गया।

जरा सांस संभली तो बोला- “भाभीजी, कैसी लगी मेरी चुदाई?”

मेरे फिर सर चकरा गया।

उसने कहा- “भाभीजी, सबसे पहले जो आया था वोही आपका शौहर था। बेचारा दो दिन से थका हुआ था एक बार चोदकर और थक गया, और शराब पीकर उस रूम में सो गया। तब हम तीनों की नीयत खराब हो गयी और बारी-बारी से आपको चोदने का प्लान बनाया। आप याद रखेंगी ना यह सुहागरात?”

मैंने अपने हाथों से अपना चेहरा ढका और सुबकने लगी। चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़ें आने लगीं। यानी अब सुबह होने को थी। सुबह जब वो आया तो मैं बिस्तर पर नंगी पड़ी थी। कपड़े पहनने का क्या फायेदा। सुहागरात को ही तीन गैर मर्दों ने मेरी इज़्ज़त लूट ली थी।

मेरे शौहर ने मेरे पास आकर मुझे जगाया तो मैंने करवट बदल ली और रोने लगी।

उसने रोने की वजह पूछी तो मैंने रोते हुए कहा- “तुम कैसे आदमी हो कि सुहागरात को दूसरे कमरे में सो गये? तुम्हारे तीनों दोस्तों ने बारी-बारी से मेरी इज़्ज़त लूट ली…”

उसने कहा- “क्या उन हरामजादों ने ऐसा किया? मैं नहीं छोड़ूंगा, बदला लूँगा और तीनों की बीबियों को बारी-बारी से चोदूंगा…”


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