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012॰ वोह कौन था?
मेरा नाम रेशमी है और मैं दूसरे गाँव के एक लड़के इमरान से प्यार करती थी। हम दोनों के घराने में पुरानी दुश्मनी चली आ रही थी। जब इन दोनों के घर वालों को प्यार की बात की पता चली तो दोनों के गर वालों ने इन दोनों को अलग रहने को कहा, वरना खून खराबा हो सकता है।
दोनों अलग हो गये लेकिन रेशमी इमरान के सिवा किसी से शादी करने को तैयार नहीं थी। उसने प्लान बनाया कि अगर वो किसी तरह इमरान के बच्चे की माँ बन जाये तो उसके घर वालों को मजबूरी में उसकी शादी इमरान से करवानी पड़ेगी। उसने इमरान को खत लिखा की कल शाम तालाब के पास वाले बरगद के पेड़ के नीचे जरूर मिलना। बहुत जरूरी काम है। और दूसरे दिन शाम को सबकी नजरें बचाकर वो तालाब के पास पहुँच गयी मौसम खराब होने लगा, लेकिन इमरान नहीं आया।
उसने हिम्मत नहीं हारी, इंतेजार करती रही कि शायद अब आ जाए। बारिश शुरू हो गई, बिजलियां कड़कने लगीं। मूसलाधार बारिश हो रही थी। उसकी आँखों से भी आँसू बहने लगे थे, उसकी आखिरी उम्मीद टूट रही थी। इतने में दूर से बिजली की रोशनी में इमरान आता हुआ नजर आया। वो उसकी ओर दौड़ पड़ी और जाकर उससे लिपट गयी, और चूमने लगी।
इमरान भी साथ देने लगा। रेशमी बोली- “इमरान, तुम नहीं आते तो मैं इसी तालाब में अपनी जान दे देती, घर वापस नहीं जाती। हमारे एक होने का एक ही रास्ता है की तुम मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो। आज मुझे तुम जी भरके चोदो। मैंने लहँगा इसीलिए पहना है, और अंदर भी कुछ नहीं पहना, ताकि कपड़े उतारने की जरूरत ना पड़े…” कहते हुए उसने इमरान का हाथ अपनी बुर पर रख दिया।
फिर कहा- “जल्दी से लहंगा उठाओ और जो करना चाहो करो…”
इमरान ने लहंगा उठाना शुरू किया और बुर में दो उंगली घुसा दिया।
तो रेशमी बोली- “आह्ह… बड़े जालिम हो, एक साथ दो उंगली घुसा दिए। कोई बात नहीं, मैं आज सब बर्दास्त करने को तैयार हूँ…” फिर उसने इमरान के पैंट के ऊपर से उसका लण्ड पकड़ लिया और कहा- “बाप रे… इमरान, तुम्हारा तो बहुत मोटा है…”
फिर खुद ही बोलने लगी- “कोई बात नहीं। आज मेरी बुर फाड़ दो तुम्हारे लिए ही तो लाई हूँ…” फिर उसने इमरान के पैंट की जिप खोली, लण्ड बाहर निकाला और सहलाने लगी। बोली- “इमरान, इसे मेरी बुर में डालो ना…”
इमरान ने भी जल्दी से उसकी एक टांग उठाकर पकड़ा और लण्ड को बुर के छेद में डालकर पेल दिया। रेशमी तड़प गयी उसकी कुँवारी बुर फट चुकी थी। दर्द जबरदस्त था। इमरान को इसकी परवाह नहीं थी, वो तो हवस से पागल हो चुका था। कुछ ही मिनट में रफ़्तार पर आ गया। रेशमी ने उसके गले में बाहें डालकर जकड़ लिया था। इमरान उसे खड़े-खड़े किसी माहिर चुदक्कड़ की तरह चोदने लगा। आधे घंटे से ज्यादा देर तक चोदने के बाद उसने रेशमी की बुर में अपना लावा उड़ेल दिया और उसे लंबी किस की।
रेशमी ने पहली बार और इतनी दर्दनाक चुदाई झेली थी, वहीं बैठ गयी। इमरान ने पैंट की जिप बंद किया और दौड़ता हुआ भाग गया।
रेशमी उसे आवाज लगाती रह गयी। वो कुछ देर वहीं बैठी रही। फिर बड़ी मुश्किल से खड़ी हुई, और किसी तरह घर आई। घर में अच्छा सा बहाना जो वो पहले से बनाकर गयी थी सुना दिया। एक महीने बाद वो सचमुच की उल्टियां करने लगी यानी गाभिन हो गयी थी।
घर में जलजला आ गया। सबने पूछा तो उसने साफ-साफ बता दिया- “इमरान का बच्चा है। अब आप लोगों के पास दो रास्ते हैं या तो मुझे मार डालिए या इमरान से मेरी शादी करा दीजिए…”
घर में मशविरा हुआ और फैसला हुआ की इमरान के घर वालों को शादी की रजामंदी बता दी जाए। पहले पहल इमरान के घर वाले मना किए लेकिन इमरान ने धमकी दे दी- “अगर मेरी शादी रेशमी से नहीं हुई तो मैं खुदकशी कर लूँगा…”
आखिर दोनों की शादी कर दी गयी। सुहागरात के दिन इमरान ने रेशमी से पूछा- “तुमने अपने घर वालों को कैसे मनाया?
रेशमी चहक कर बोली- तुम्हें याद है एक महीने पहले मैंने एक खत लिखा था?
इमरान- “हाँ याद आया, लेकिन मुझे माफ कर दो। उस दिन मेरे अब्बू की तबीयत खराब हो गयी और उन्हें हास्पिटल ले जाना पड़ा, मैं नहीं आ सका…”
रेशमी का सर घूम गया। वो शर्म से जमीन में गड़ गई।
फिर रेशमी सोचती रह गई- आखिरकार वो कौन था??
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012॰ वोह कौन था?
मेरा नाम रेशमी है और मैं दूसरे गाँव के एक लड़के इमरान से प्यार करती थी। हम दोनों के घराने में पुरानी दुश्मनी चली आ रही थी। जब इन दोनों के घर वालों को प्यार की बात की पता चली तो दोनों के गर वालों ने इन दोनों को अलग रहने को कहा, वरना खून खराबा हो सकता है।
दोनों अलग हो गये लेकिन रेशमी इमरान के सिवा किसी से शादी करने को तैयार नहीं थी। उसने प्लान बनाया कि अगर वो किसी तरह इमरान के बच्चे की माँ बन जाये तो उसके घर वालों को मजबूरी में उसकी शादी इमरान से करवानी पड़ेगी। उसने इमरान को खत लिखा की कल शाम तालाब के पास वाले बरगद के पेड़ के नीचे जरूर मिलना। बहुत जरूरी काम है। और दूसरे दिन शाम को सबकी नजरें बचाकर वो तालाब के पास पहुँच गयी मौसम खराब होने लगा, लेकिन इमरान नहीं आया।
उसने हिम्मत नहीं हारी, इंतेजार करती रही कि शायद अब आ जाए। बारिश शुरू हो गई, बिजलियां कड़कने लगीं। मूसलाधार बारिश हो रही थी। उसकी आँखों से भी आँसू बहने लगे थे, उसकी आखिरी उम्मीद टूट रही थी। इतने में दूर से बिजली की रोशनी में इमरान आता हुआ नजर आया। वो उसकी ओर दौड़ पड़ी और जाकर उससे लिपट गयी, और चूमने लगी।
इमरान भी साथ देने लगा। रेशमी बोली- “इमरान, तुम नहीं आते तो मैं इसी तालाब में अपनी जान दे देती, घर वापस नहीं जाती। हमारे एक होने का एक ही रास्ता है की तुम मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो। आज मुझे तुम जी भरके चोदो। मैंने लहँगा इसीलिए पहना है, और अंदर भी कुछ नहीं पहना, ताकि कपड़े उतारने की जरूरत ना पड़े…” कहते हुए उसने इमरान का हाथ अपनी बुर पर रख दिया।
फिर कहा- “जल्दी से लहंगा उठाओ और जो करना चाहो करो…”
इमरान ने लहंगा उठाना शुरू किया और बुर में दो उंगली घुसा दिया।
तो रेशमी बोली- “आह्ह… बड़े जालिम हो, एक साथ दो उंगली घुसा दिए। कोई बात नहीं, मैं आज सब बर्दास्त करने को तैयार हूँ…” फिर उसने इमरान के पैंट के ऊपर से उसका लण्ड पकड़ लिया और कहा- “बाप रे… इमरान, तुम्हारा तो बहुत मोटा है…”
फिर खुद ही बोलने लगी- “कोई बात नहीं। आज मेरी बुर फाड़ दो तुम्हारे लिए ही तो लाई हूँ…” फिर उसने इमरान के पैंट की जिप खोली, लण्ड बाहर निकाला और सहलाने लगी। बोली- “इमरान, इसे मेरी बुर में डालो ना…”
इमरान ने भी जल्दी से उसकी एक टांग उठाकर पकड़ा और लण्ड को बुर के छेद में डालकर पेल दिया। रेशमी तड़प गयी उसकी कुँवारी बुर फट चुकी थी। दर्द जबरदस्त था। इमरान को इसकी परवाह नहीं थी, वो तो हवस से पागल हो चुका था। कुछ ही मिनट में रफ़्तार पर आ गया। रेशमी ने उसके गले में बाहें डालकर जकड़ लिया था। इमरान उसे खड़े-खड़े किसी माहिर चुदक्कड़ की तरह चोदने लगा। आधे घंटे से ज्यादा देर तक चोदने के बाद उसने रेशमी की बुर में अपना लावा उड़ेल दिया और उसे लंबी किस की।
रेशमी ने पहली बार और इतनी दर्दनाक चुदाई झेली थी, वहीं बैठ गयी। इमरान ने पैंट की जिप बंद किया और दौड़ता हुआ भाग गया।
रेशमी उसे आवाज लगाती रह गयी। वो कुछ देर वहीं बैठी रही। फिर बड़ी मुश्किल से खड़ी हुई, और किसी तरह घर आई। घर में अच्छा सा बहाना जो वो पहले से बनाकर गयी थी सुना दिया। एक महीने बाद वो सचमुच की उल्टियां करने लगी यानी गाभिन हो गयी थी।
घर में जलजला आ गया। सबने पूछा तो उसने साफ-साफ बता दिया- “इमरान का बच्चा है। अब आप लोगों के पास दो रास्ते हैं या तो मुझे मार डालिए या इमरान से मेरी शादी करा दीजिए…”
घर में मशविरा हुआ और फैसला हुआ की इमरान के घर वालों को शादी की रजामंदी बता दी जाए। पहले पहल इमरान के घर वाले मना किए लेकिन इमरान ने धमकी दे दी- “अगर मेरी शादी रेशमी से नहीं हुई तो मैं खुदकशी कर लूँगा…”
आखिर दोनों की शादी कर दी गयी। सुहागरात के दिन इमरान ने रेशमी से पूछा- “तुमने अपने घर वालों को कैसे मनाया?
रेशमी चहक कर बोली- तुम्हें याद है एक महीने पहले मैंने एक खत लिखा था?
इमरान- “हाँ याद आया, लेकिन मुझे माफ कर दो। उस दिन मेरे अब्बू की तबीयत खराब हो गयी और उन्हें हास्पिटल ले जाना पड़ा, मैं नहीं आ सका…”
रेशमी का सर घूम गया। वो शर्म से जमीन में गड़ गई।
फिर रेशमी सोचती रह गई- आखिरकार वो कौन था??
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