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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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रात के वक़्त ... नताली हाउस....

जीत की ओर कदम बढ़ चुके थे, मनु अपने सारे दाव खेल चुका था.... जीत की एक मीटिंग जो नताली के घर चल रही थी...

मनु, स्नेहा, मानस, ड्रस्टी, नताली और पार्थ सब इस जीत पर खुशी मनाने पहुँच चुके थे... पीने वालों के लिए सॉफ्ट ड्रिंक और हार्ड ड्रिंक सब खुल चुके ... सभी हाथों मे ग्लास लिए टोस्ट करते चियर्स करने लगे.....

मनु.... आप सब के बिना ये जीत संभव नही थी.... मैं आप सब का हमेशा एहसानमंद रहूँगा....

नताली.... कम ऑन मनु.... तुम तो एमोशनल हो गये.... इतने एमोशन्स की ज़रूरत नही, अब ये बताओ आगे क्या करना है....

मनु.... जस्ट वेट आंड वाच फॉर रिघ्त टाइम..... फिलहाल तो 2 महीने लाइफ एंजाय करो... और भूल जाओ इन सारी बातों को....

पार्थ....... कैसे करूँ लाइफ एंजाय...... मेरी गर्लफ्रेंड को तो तुम सब हमेशा घेरे रहते हो. कभी अकेला ही नही छोड़ते...

मानस.... कौन गर्लफ्रेंड

पार्थ.... अर्रे नताली और कौन....

स्नेहा..... अच्छा जी तो नताली से पॅच-अप हो गया और हमे पता भी नही चला ....

मनु..... बात जो भी हो, अब पार्थ ने कह दिया है, हूँ सब उसकी गर्लफ्रेंड को घेरे रहते हैं तो मैं अभी जा रहा हूँ.... जाओ तुम दोनो मस्ती करो ....

नताली.... ये क्यों नही कहते कि तुम्हे भी स्नेहा के साथ मस्ती का मूड हो रहा है....

स्नेहा.... हहे, निशाना सीधा हम पर हे..... वैसे भी बुरा क्या है. आख़िर मेरे हब्बी मेरे साथ नही टाइम स्पेंड करेंगे तो और किस के साथ करेंगे....

"चलो स्नेहा... वरना दोनो ये ना कहने लगे हमारी वजह से लेट हो गये"... इतना कह कर मनु और स्नेहा दोनो चले गये... पार्थ और नताली भी उनके पीछे-पीछे निकले... जाते-जाते नताली ने धीमे से ड्रस्टी के कानो मे कहा..... "आज की रात तुम्हारी है, इसे एक खूबसूरत रात बनाना".....

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पार्थ & नताली..... ऑन दा वे...

नताली.... पार्थ हम कहाँ जा रहे हैं...

पार्थ.... मेरे फार्म हाउस पर...

नताली..... फार्म हाउस क्या खेती करने जा रहे हैं....

पार्थ.... हां खेती ही समझ लो...

नताली..... समझ लो से तुम्हारा मतलब.....

पार्थ..... समझ लो से यही मतलब है कि खेती करना है..

नताली.... और वो किस चीज़ की खेती करनी है.....

पार्थ ने नताली के कानो मे फूस-फुसाया, और नताली उसको मारती हुई कहने लगी..... "कितना गंदा बोलते हो पार्थ... छि"

पार्थ..... अभी करने मे सब मज़ा आएगा, और बोलने मे गंदा....

नताली..... बस... वो जब होगा तब, पहले मुझे उस फाइल के बारे मे बताओ....

पार्थ.... ओह्ह्ह हो फाइल पर चर्चा.... तो क्या मैं इसका मतलब ये समझुँ कि तुम ने सारा प्लान कर लिया है.....

नताली अपनी बाहें पार्थ के गले मे डालती उसको चूमती हुई कहने लगी..... "अजी कभी-कभी ही तो अरबपति बन'ने का मौका मिलता है, उसे छोड़ कैसे दूं.....

दोनो आगे की सारी प्लॅनिंग करते फार्म हाउस पर पहुँचे.... फार्म हाउस के गेट से अंदर घुसते ही पार्थ, नताली को स्मूच करता उस के होंठो को चूमने लगा.....

नताली उसे धक्के देती..... "क्यों इतने बेसबरे हो... अंदर चलो, बाहर मेरा क्या तमाशा बनाना चाहते हो"....

पार्थ.... बाहर हो या अंदर... इस पूरे कॅंपस मे हमारे सिवा कोई नही..... लेकिन फिर भी जैसा आप चाहो ... चलो अंदर ही....

पार्थ अपनी बात कह कर आगे बढ़ गया.... नताली ने उसकी कलाईयों को थामा और अपनी ओर मोड़ दी. अपनी एडियो को उपर करती, अपनी बाहें उसके गले मे डाल दी. बड़ी अदा से वो अपने होंठो को खोलती अपनी जीभ बाहर निकाली और धीमे से पार्थ के होंठो पर फिराती उसके होंठो को चूमने लगी.....

पार्थ ने बाहों की पकड़ मजबूत कर के खुद मे समेट लिया... उसके पंजे नताली की कमर को जकड़े थे और होंठ, होंठो से जकड़े थे.... दोनो एक दूसरे के होंठो को लगातार चूम रहे थे.

चूमते हुए पीठ की साइड लाइन से पार्थ धीरे-धीरे हाथ उपर लाया.... नताली के स्तनों के पास हाथ को रोका और उसपर अपना हाथ रख कर पंजों मे स्तनों भर लिया..... किस को तोड़ती नताली ने अपने होंठो से "इसस्शह" की मधुर ध्वनि निकाली और फिर से पार्थ के होंठो को चूमने लगी....

 


पार्थ अपने दोनो हाथ को समेट'ते हुए उपर गर्दन तक लाया.... नताली के बालों के बीच अपने उंगलियाँ फसाई... और पिछे की ओर खींच दिया..... "आहह" की आवाज़ आई और होंठ से होंठ अलग हो गये.... गर्दन पीछे झुका था और आगे से पार्थ ने, कानो के नीचे से अपने होंठ डाल कर उसे चूमते हुए नीचे खुले सीने तक होंठ ले आया.....

नताली बेसूध हो कर पार्थ के बालों मे हाथ फेरने लगी.... तेज चल रही सांसो की आवाज़ जोरों से आ रही थी.... "आहह... पार्थ यहाँ से चले"

दोनो की नज़रें मिली और दोनो भागते हुए घर मे आए... घर मे आते ही दोनो एक दूसरे के होंठ चूमने लगे.... होंठ चूमते हुए दोनो ने एक दूसरे के कपड़ों को इस तेज़ी मे निकाला, जैसे वो इस वक़्त के सब से बड़े दुश्मन थे....

नताली चूमते हुए अपने होंठ नीचे ले आई... पार्थ के सीने को चूमा... उसके निपल को मुँह मे ले कर बड़ी तेज़ी से सक करती होंठो को उसके पेट से फिराती धीरे-धीरे नीचे ले आई......

नताली नीचे झुकते-झुकते बैठ गयी... और अपने नरम हाथों से पार्थ का लिंग पकड़ ली. लिंग को हाथों के बीच ले कर उसे कस के जकड लिया और धीरे-धीरे उसे पीछे की ओर करने लगी.... हाथ का स्पर्श पाते ही लिंग एरेक्ट होने लगा, और देखते ही देखते वो अपने पूरा उफ्फान पर था...

नताली लिंग को लगातार जकडे उसे बड़े ज़ोर-ज़ोर से जड़ तक आगे पिछे कर रही थी... धीरे-धीरे नताली अपना सिर लिंग के बिल्कुल पास ले आई.... लिंग के उपर अपनी नाक फिराती वो धीमे से अपनी सांस अंदर खींचने लगी... और अपना मुँह खोल कर लिंग को अपने मुँह मे ले लिया......

पार्थ की कमर तो अपने आप ही हिलने लगी, और दोनो हाथों से नताली के सिर को पकड़ कर उसे तेज़ी से आगे पिछे करने लगा.... जोश इतना था कि पार्थ ने अपना पूरा लिंग नताली के मुँह मे भर दिया... वो अपना मुँह हटा कर सांस लेना चाहती थी... पर सिर को ज़ोर से दबाए वो उसे आगे पीछे करता रहा...

नताली ने फोर्स के साथ अपना मुँह हटाया और लंबी सांस लेती..... "आअहह... हाा" करने लगी... थोड़ी सी सांस अपने जिस्म मे भरने के बाद नताली ने फिर से लिंग को अपने मुँह मे ले लिया और उसे बड़ी तेज़ी से चूसने लगी......

लिंग पर वो पूरी तरह से टूट पड़ी थी..... नताली उपर लिंग को चुस्ती अपने हाथ नीचे ला कर उसके बॉल से लगा दी और हाथों से खेलने लगी... दोहरा प्रहार और पार्थ से बर्दास्त कर पाना मुस्किल हो गया.... कंधे से पकड़ कर नताली को उठाया और बिस्तर पर ले जा कर लिटा दिया...

बड़ी तेज़ी से अपने सिर को नताली की योनि के बीच ले आया, और अपना पूरा मुँह उसकी योनि मे डाल कर उसे चाटने लगा... अपने दोनो हाथों को उपर उसके स्तनों से टिका कर ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा....

नताली अपने होंठो को अपने दाँतों तले दबा ली, और अपनी जांघों के बीच पार्थ के सिर को दबा दिया.... पार्थ अपनी जीभ नताली की योनि पर फिराते हुए उसके क्लिट को अपने दाँतों तले दबा कर धीरे-धीरे घिसने लगा.....

नताली अपनी मुत्ठियों मे चादर को भींचती तेज सांस खींची और पूरी मचल गयी.... नताली ने पार्थ का बाल पकड़ कर उसे उपर की ओर खींची... दोनो के नज़रों से नज़रें मिली... और होंठ बेसब्री से एक बार फिर चूमने लगे...

नताली पार्थ को धक्के देती बिस्तर पर लिटा दी... बड़ी अदा से खड़ी हुई और कमर के दोनो ओर पाँव कर के बैठ गयी... नताली ने अपनी कमर थोड़ी उपर की और पार्थ ने अपना लिंग खड़ा कर दिया...

नताली ने लिंग को अपने हाथों से पकड़ा.... उसे अपनी योनि के द्वार पर रखी और धीरे-धीरे उसके उपर बैठ गयी.... बैठ'ते वक़्त उसके पाँव हल्के कांप गये और उसने अपने हाथों से अपने स्तनों को दबा दिया....

बाल बड़ी तेज़ी से लहरा रहे थे.... थप-थप टकराने की आवाज़ जोरों से आ रही थी.... स्तन बड़ी तेज़ी से उपर-नीचे हो रहे थे.... हल्की मादक आवाज़ के साथ नताली, लिंग के उपर कूद रही थी और पार्थ नीचे से अपनी कमर ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था...
 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
नताली ने लिंग को अपने हाथों से पकड़ा.... उसे अपनी योनि के द्वार पर रखी और धीरे-धीरे उसके उपर बैठ गयी.... बैठ'ते वक़्त उसके पाँव हल्के कांप गये और उसने अपने हाथों से अपने स्तनों को दबा दिया....

बाल बड़ी तेज़ी से लहरा रहे थे.... थप-थप टकराने की आवाज़ जोरों से आ रही थी.... स्तन बड़ी तेज़ी से उपर-नीचे हो रहे थे.... हल्की मादक आवाज़ के साथ नताली, लिंग के उपर कूद रही थी और पार्थ नीचे से अपनी कमर ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था...

सेक्स करते हुए दोनो के बदन पसीने-पसीने हो गये थे.... अचानक हे धक्कों की स्पीड ने और ज़ोर पकड़ लिया..... नताली बड़ी तेज़ी से लिंग के उपर से हटी और लिंग को अपने हाथों मे ले कर ज़ोर-ज़ोर से उपर नीचे करने लगी....

कुछ ही देर मे पार्थ का बदन अकड़ गया, कमर बड़े ज़ोर से हवा मे हुआ ... और लिंग से कम बाहर आने लगा......

"पार्थ, तुम तो जल्दी ढेर गये, तुम्हरा हथियार तो मुरझा गया.... अभी तो पूरे अरमान बाकी हैं... और तुम ने तो बीच मे ही साथ छोड़ दिए"....

पार्थ..... बस ऐसे ही थोड़ा उसे प्यार करो... अभी तो रात जवान है नताली तुम्हे मायूस नही करेगा ये...

नताली हस्ती हुई उठी... तौलिए से उसके लिंग को सॉफ की और वापस उसे अपने मुँह मे ले कर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी..... उत्तेजना एक बार फिर धीरे-धीरे जागने लगी.... लिंग वापस के पूरा तन कर खड़ा हो गया...

इस बार पार्थ ने नताली को बिस्तर पर लिटाया... उसके दोनो पाँव को अपने कंधो के दोनो ओर डाल कर, योनि के उपर लिंग को रब करने लगा.....

"उफफफफ्फ़... पार्थ .. क्या कर रहे हो... वहाँ पहले से ही आग लगी है"...

पार्थ ने भी बिना कोई देर किए जोरदार धक्का मारा और पूरा लिंग योनि के अंदर उतार दिया... तेज झटकों के साथ ही नताली का पूरा बदन हिल गया और स्तन उपर नीचे होना शुरू हो गये.... एक बार फिर वासना अपने पूरे चरम मे थी और मज़े के सातवे आसमान पर दोनो की कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी.....

सेक्स के आनंद मई बेला मे दोनो ने जम कर मज़े उठाए... और फिर एक दूसरे के उपर ढेर हो गये.....

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रात का वक़्त, नताली के घर....

मानस और ड्रस्टी दोनो घर मे अकेले थे. दोनो एक दूसरे के पास बैठे... महॉल भी कुछ अजीब सा था, यूँ तो जब बाहर मिलते तो कहने को 100 बातें होती थी, पर जब आज यूँ अकेले मे मुलाकात हुई तो मानो जैसे शब्द ही ना मिल रहे हो बात करने के लिए..

दोनो खामोश बैठ कर सामने टीवी देख रहे थे, पर मन के अंदर काफ़ी कतुहल भरा महॉल था... एक घंटे करीब, दोनो बिना कुछ कहे एक दूसरे के पास बैठे रहे... अंत मे मानस उठा और कहने लगा.... "ड्रस्टी मैं जा रहा हूँ कल मिलता हूँ"...

ड्रस्टी का दिल जैसे बेचैन हो गया हो, वो मानस को आज कहीं नही जाने देना चाहती थी. लेकिन उठ कर ये बात कह दे, इतनी हिम्मत नही जुटा पा रही थी.. जब से नताली ने "यादगार शाम" की बात कही थी, ड्रस्टी को रह-रह कर उसे वो बात याद आ रही थी और उसके मन की तरंगो को छेड़ रही थी...

इसी बीच मानस अपने धीमे कदमों के साथ गेट तक पहुँच चुका था.... ड्रस्टी की हिम्मत नही हो पा रही थी कि उसे रोक ले, इसी बीच दबी सी आवाज़ मे ड्रस्टी के मुँह से निकल गया... "मानस"...

मानस को अहसास हुआ जैसे ड्रस्टी उसे पिछे से आवाज़ दे रही हो. अपनी जगह रुक कर वो पिछे मुड़ा... ड्रस्टी खड़ी हो कर बस एक टक उसे ही देख रही थी.... मानस ने वापस ड्रस्टी की ओर कदम बढ़ा दिए... पास आ कर धीमे से पूछा .... "क्या हुआ"...

यूँ तो सुलगते अरमान मानस के दिल मे भी थे, पर अपनी भावनाओ को काबू किए वो चुप-चाप जा रहा था. उसे भी शायद पता था कि आज यदि वो ड्रस्टी के साथ रहा तो कहीं कोई नादानी ना हो जाए... पर खामोश खड़ी ड्रस्टी का वो मासूम चेहरा.... "आहह, भला क्यों ना प्यार आए"....

ड्रस्टी, अपने काँपते होतों से बड़ी धीमी आवाज़ मे कही.... "कुछ नही"...

मानस, उसके सिर पर हाथ फेरते हुए, बारे प्यार से कहा.... "तुम बहुत प्यारी लग रही हो ड्रस्टी". ड्रस्टी, मानस की इस बात पर बिल्कुल खामोश हो गयी. वो ऐसे पलकें झुका कर अपनी नज़रें उपर की जैसे दिल के अरमान आखों से बयान कर रही हो.

पर उसके मन मे झिझक थी और आगे बढ़ने के लिए इनकार था. मानस से अपना मुँह फेर कर ड्रस्टी पिछे मूड गयी और दो कदम आगे बढ़ गयी... मानस एक कदम आगे बढ़ कर ड्रस्टी के कलाई को थाम लिया....

सिर्फ़ कलाई ही पकड़ा था, और ऐसा लगा जैसे ड्रस्टी के दिल की धड़कने तेज हो कर बाहर आ जाएगी. आगे क्या होना है ये बात सोच कर ही उसके बदन मे अजीब सी सिहरन पैदा हो रही थी. मानस का हर छोटी से छोटी बात भी उसे एक मादक अहसास दिला रही थी.

वही हाल मानस का भी था. वो भी प्यार की कामुकता मे धीरे-धीरे डूब रहा था. कलाई को थाम उसने झटके से ड्रस्टी को अपने ओर खींच. ड्रस्टी के होश इस कदर उड़े कि वो सीधे सीने से जा कर टकराई. मारे शर्म के उसने अपने सीने के उपर अपना हाथ मोड़ लिया, सीने से लग गयी मानस के.

एक दूसरे के सीने से लगे दोनो अजीब सी खामोशी मे खो गये. एक एहस्सास एक दूसरे के होने का. मानस उसकी पीठ सहलाता उसे अपने बाहों मे भर लिया. इस कदर बदन टूट रहा था ड्रस्टी का, कि वो बाहों मे आकर बस उस एहस्सास मे डूब कर चूर हो गयी. पीठ पर हाथ फेरते-फेरते ना जाने कब मानस के हाथ खुले गले के अंदर नंगी पीठ पर चलने लगा.

सिसकती साँसे अंदर खींची, होंठ मानो सुख रहे हों और होंठो से मिलने को बेताब हो, पर अंदर की लज्जा ड्रस्टी को आगे नही बढ़ने दे रही थी. अंजाने मे ही ड्रस्टी ने अपना चेहरा उपर कर के मानस को देखने लगी. नज़रों से नज़र मिलते ही जैसे नज़रे ठहर सी गयो हो, दिमाग़ सुन्न सा पड़ गया हो.

चेहरा करीब और करीब और करीब होता चला गया और दोनो एक दूसरे के होंठो को चूमने लगे. काँपते हुए बिल्कुल नरम होंठ मानस के होंठो के बीच थी. साँसे गरम हो कर तेज होने लगी, बदन मे मादक फुहार रेंगने लगी और ड्रस्टी का बदन ढीला पड़ने लगा. दो सीने के बीच जो हाथ अटका था वो खुद-व-खुद झूल कर नीचे आ गया.

और मानस बड़े प्यार से, धीमे से होंठ को चूमते हुए इस कदर अपने होंठ बाहर कर रहा था कि उसके होंठ से फस कर ड्रस्टी के होंठ भी आहिस्ते खिंचे चले आ रहे थे. ड्रस्टी की साँसे पूरी बेकाबू हो चुकी थी, तेज-तेज साँसे लेती वो ड्रस्टी के बालों पर हाथ फेर रही थी.

मानस ने ड्रस्टी की कमर मे हाथ डाल कर उसे अपने गोद मे उठा लिया. होंठ से होंठ को चूमते उसे बारे प्यार से बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके पास करवट लेट कर उसके चेहरे को देखने लगा.

ड्रस्टी बिस्तर पर लेटी आखें मूंद तेज-तेज साँसे ले रही थी. उसका योबन इस कदर सीने की कसावट को दिखा रहा था कि मानो आज ये योबन मिटने को तैयार हो.

बड़े प्यार से मानस, ड्रस्टी के चेहरे पर हाथ फेरता, धीरे-धीरे हाथ को गर्दन तक ले आया ... "ओह्ह्ह्ह... कितनी खूबसूरत हो तुम ड्रस्टी, बिल्कुल किसी मासूम शहज़ादी जैसे". आवाज़ जैसे ही कानो मे गयी, ड्रस्टी मारे शर्म के पानी पानी हो गयी, और उल्टी लेट कर तकिये मे अपना मुँह छिपा लिया.

मानस कुछ देर तक उसे देखता रहा, फिर आहिस्ते अपना चेहरा पीछे से सूट के खुले हिस्से की ओर बढ़ा दिया. कंधों के बीचो बीच उस खुले हिस्से पर, अपने होंठ लगा कर प्यार भरे चुंबन का एक स्पर्श दिया.

होंठो का वो पहला स्पर्श दिया पीठ पर... कंधे छटपटा कर ऐसे टाइट हुए कि उनकी हड्डियाँ दिखने लगी... पीठ के उस खुले हिस्से पर चूमते हुए, मानस अपने हाथ उसकी पीठ पर फिराने लगा... नया योबन उसपर से अपने अनछुए बदन पर मानस के हाथ का स्पर्श... बदन तो मानो ऐसी कसमसाहट से गुजर रहा था कि, जैसे वो चूर चूर हो गयी हो.

 
पूरा बदन तब मचल गया, जब मानस ने सूट का किनारा पकड़ कर उसे कमर से उपर कर दिया, और अपने होंठ उसकी कमर के उपर खुले हुए हिस्से से लगा कर प्यार भरे स्पर्श से चूमने लगा.

पूरे बदन मे जैसे झंझनाहट हुई हो, ऐसी कसमसाहट कि हाथों की चूड़ियों की खन-ख़ानाहट और पाँव की पायल की आवाज़ आने लगी... पर मारे शर्म के नज़र उठा कर मानस को देखने की हिम्मत नही हो रही थी. तकिये मे बस मुँह छिपाये वो तेज तेज साँसे ले रही थी.

तभी लगा कि सूट को उपर खींचने के लिए मानस ज़ोर लगा रहा है. ड्रस्टी को एहस्सास हुआ कि मानस उसे उपर से निकालने की कोसिस कर रहा है. उफफफफफ्फ़ .... वो पानी पानी सी हुई जा रही थी... मन झिझक रहा था और बदन हाँ कह रहा था....

हां ना के कस-म-कस के बीच कब सोच सुन पड़ी ड्रस्टी को भी पता नही चला. उसका सरीर खुद ही ढीला पर गया, पाँव से बिस्तर पर टेक लगा कर आगे के बदन को थोड़ा उपर कर दी... और मानस ने पूरा सूट समेत कर उसे सिने के उपर कर दिया...

उफफफ्फ़ पीछे से गोरी और मखमली पीठ का वो नज़ारा... एक मादक उन्माद पैदा कर रहा ही. पीठ पर बारे ध्यान से नज़र टिकाए मानस ने अपने पचों उंगलियों के स्पर्श मात्र से, ड्रस्टी के कमर से ले कर पूरी पीठ धीरे धीरे सहलाने लगा और अपने होंठो के स्पर्श से धीरे धीरे चूमने लगा...

होंठो से कोई अल्फ़ाज़ नही निकल रहे थे... लेकिन ड्रस्टी का बदन इस कदर हल्की गुदगुदी मे हिल रहा था कि हाथों की चूड़ियों की खन-खानाहट, .. और पाँव के पायल की छन छन आवाज़ें आ रही थी

ड्रस्टी के होश उड़ चुके थे, पर शर्म की चादर मे लिपटी वो कुछ कर ना पा रही थी... तभी ड्रस्टी के मुँह से धीमे से निकला ... "इस्सह नहिी"... और मानस तब तक ब्रा के हुक खोल चुका था.

ब्रा के हुक खोल कर मानस ने ब्रा का एक किनारा पकरा और उसे धीरे धीरे खींचने लगा.. ब्रा कप.. स्तानो से सरकता हुआ धीरे धीरे खींचा जा रहा था.. और ड्रस्टी मारे शर्म के बिस्तर मे गारी जा रही थी.

तभी मानस ने पूरी ब्रा खींच कर बाहर निकल दिया, और उसे अपने नाक से लगा कर ब्रा की तेज खुसबू लेने लगा... धीरे से खुले पीठ पर हाथ फेरते कहा... "काफ़ी मादक खुसबु है ब्रा की"...

सिर्फ़ ये शब्द सुन कर ही जैसे आग लग गयी हो ड्रस्टी के बदन मे... नीचे पाँव योनि पर इस कदर बंद हो रहे थे.... खुल रहे थे, और तिलमिला रहे थे.... मानो योनि मे कुछ हो रहा हो...

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
अंदर कोई चिंगारी फुट रही हो, जो ड्रस्टी को बेचैन कर रही थी. मानस ने एक बार फिर धीमे से अपना हाथ उसकी पीठ पर फिराया और एक साइड से पकड़ कर ड्रस्टी को सीधा करने लगा. मारे शर्म के मारे ड्रस्टी की साँसे काबू से बाहर हो गयी थी, दिल बैठा जा रहा था और वो सीधी ही नही हो रही थी... फिर मानस ने हल्का ज़ोर लगाया... और वो सीधी हो गयी...

जैसे ही पलटी अपने दोनो हाथ स्तनों पर डाल कर, उसे हाथों के बीच छिपा लिया. उफफफ्फ़ क्या उत्तेजक नज़ारा था. ड्रस्टी के गले मे सूट फसा हुआ... स्तनों पर मुड़े हुए हाथ, और चेहरा बाएँ ओर बिस्तर से टिका.

अजीब ही उलझन से दिल बैठा जा रहा था. धक-धक करती उठ'ती-बैठ'ती धड़कने.... और इसी बीच ड्रस्टी को अपने बदन पर कुछ भी महसूस नही हो रहा था. धीरे से उसने अपनी आखें खोली. जब उसकी आखें खुली मानस अपना टी-शर्ट उतार कर नीचे फेका रहा था...

गठीला बदन, चौरी छाती, छातियों पर हल्के बाल... देख कर ही ड्रस्टी के बदन मे कुछ-कुछ होने लगा.... नज़र जब उसके खुले बदन पर पड़ी तो नज़र ठहर कर उसे निहारने लगी.... पल मे ही अजीब से ख्यालों ने ड्रस्टी के बदन मे मादक चिंगारियाँ फुक दी. और जब सामने से चौड़ी बाहें फैला कर जब वो धीरे-धीरे मानस को अपनी ओर बढ़'ते देखी उसका बदन अकड़ गया.... सलवार के उपर से ही हाथ योनि पर चला गया....

होंठो से धीमी और लंबी "आआआआहह" की एक मादक सिसकारी निकली और बदन ढीला करती वो तेज-तेज साँसे लेने लगी. योनि से से क्या बाहर निकला था जिसके निकलते वक़्त उसे कुछ भी सुध नही रहा, और निकलने के बाद काफ़ी हल्की महसूस कर रही थी....

ड्रस्टी का तो पहली बार हो गया, पर मानस तो अपने अंदर अब भी पूरा आग समेटे था. सामने का कामुक नज़ारा और मखमली बदन को पूरे नंगे देख कर उसे प्यार से खेलने की लालसा मे वो पागल सा उठा था..... बार बार मानस के हाथ अपने लिंग पर जाते जिसे वो नीचे अड्जस्ट कर रहा था.

मानस तेज़ी से बढ़ता हुआ ठीक उसके पास लेट गया, दोनो के चेहरे आमने-सामने थे... और मानस ने अपने होंठ धीरे-धीरे ड्रस्टी के होंठो की ओर बढ़ा दिए.

ड्रस्टी अपना सिर पीछे ले जाना चाहती थी, पर मानस उसके गालों को थामे रहा और उसे अपनी जगह से खिसकने नही दिया. होंठो से होंठ मिलने के अहसास मे, ड्रस्टी का बदन एक बार फिर सुलगने लगा था... पर मानस थोड़ा उपर होते, उसके कान के ठीक निचले हिस्से पर होंठ लगा कर.. चूमने लगा...

उफफफफफ्फ़ जीभ का स्पर्श अपनी गर्दन पर महसूस की और पाँव आगे पीछे कर के बदन मचलने लगा. मानस का जीभ बड़े धीमे से स्पर्श करते, गर्दन की शुरुआत से ले कर कानो तक पहुँच रहा था.... ड्रस्टी "इसस्शह" की सिसकारी भरती अपनी पीठ को हल्का हवा मे कर के... छटपटाने लगी...

कानो के साइड से जीभ का हल्का स्पर्श गालो से होते हुए धीरे धीरे होंठो की ओर बढ़ रहा था. जैसे-जैसे जीभ आगे बढ़ रहा था, एक सरसराहट जैसे आगे बढ़ रही हो... "उम्म्म्ममम..... इसस्स्स्स्स्स्स्सस्स" की हल्की-हल्की आवाज़ उसके दबे होंठो से निकल रही थी...

 
जीभ का स्पर्श उसे दीवाना बना रहा था... जीभ गालों से चलते हुए होंठो पर आ गयी, जो होंठो को भिगोते उसके मुँह को चूमने के लिए बेताब था... लेकिन तभी मानस रुका, खुद को थोड़ा उपर किया और ड्रस्टी के चेहरे पर हाथ फेरने लगा....

ड्रस्टी अब भी अपने हाथों के बीच अपने स्तनों को छिपाये, आखें मुदे, मादक एहस्सास मे खोई सी थी... तभी प्यार से आवाज़ लगाता मानस उसे आखें खोलने के लिए कहता है....

लेकिन ड्रस्टी बस अपने पाँव पटक'ती ना मे सिर हिलाने लगती है... मानस अपनी उंगलियाँ ड्रस्टी की बाहों पर फिराते, आहिस्ते से उसकी बाहों को चूम कर कहता है .... "आइ लव यू ड्रस्टी, पर यदि तुम ने अपनी आखें नही खोली तो मैं यहाँ से चला जाउन्गा.... हे लव ... देखो तो, आखें तो खोलो"...

पर ड्रस्टी की लज्जा मानस क्या जाने वो तो इस वक़्त एक हटी प्रेमी बन चुका था, जिससे ये लग रहा था कि उसकी प्रेयसी उसकी बात नही सुन रही... दो बार फिर से प्यार से मानस ने उसे अपनी आखें खोलने कहा... पर मारे लज्जा के ड्रस्टी के मुँह से कुछ निकला ही नही और ना ही उसकी आखें खुली....

"लगता है मेरा प्यार एक तरफ़ा है, तुम्हे मेरी बातों की कोई कदर ही नही... मैं जा रहा हूँ"... इतना कह कर मानस ने अपना त-शर्ट उठाया और वहाँ से जाने लगा....

"आहह... नही".... सिसकती सासों के साथ उठ कर खड़ी हो गयी ड्रस्टी.... मानस गुस्से मे चला जा रहा था.... अधनंगा सरीर, खुले स्तन... उपर से ये लज्जा.... मानस को पुकारने से पहले एक बार फिर ड्रस्टी अपने आप ही सिहर गयी...

थोड़ी सी लज्जा, होंठो मे हल्की मुस्कान, और मासूम सा उसका चेहरा.... अपने दोनो कान अपने हाथों से कुछ इस तरह से वो पकड़ी कि कोहनी उसके स्तनों को कवर किए हुए थी, और खुले बाल उसके कंधे से दोनो ओर उसके वक्ष तक लटक रहे थे.

बड़ी ही मासूमियत से ड्रस्टी ने आवाज़ लगाई..... "प्ल्ज़ ऐसे छोड़ कर ना जाओ, रुक जाओ"

तेज़ी से आगे जाते हुए कदम ठहर से गये... मानस पिछे मूड कर ड्रस्टी को देखने लगा... दोनो अपनी जगह खड़े हो बस एक दूसरे को ही निहार रहे थे.... मासूम चेहरा और ऐसा कामुक स्थिति...

मानस की नज़र गोरे बदन पर खुले लहराते बालो से होते हुए, ड्रस्टी की गहरी नाभि तक पहुँची... और तेज सासों पर पेट के अंदर बाहर होने से नाभि का वो कामुक नज़ारा.... मानस के हाथ अपने आप ही उसके लिंग पर चला गया...

धीरे-धीरे कदम बढ़ाते वो ड्रस्टी के पास जा रहा था... जैसे-जैसे मानस आगे बढ़ रहा था, ड्रस्टी का कलेजा धक-धक .... "हाय्यी अल्ल्ह्ह्ह... अब क्या होगा"

मानस धीरे-धीरे आगे बढ़'ते हुए अपनी टी-शर्ट उतार फेका... खुले बदन को देख कर ड्रस्टी की योनि मे वापस से चिंगारियाँ फूटने लगी.... बड़ी ही असहजता से वो अपने पाँव के बीच अपने योनि को दबाए जा रही थी....

और फिर वो नज़ारा जब आगे बढ़'ते हुए मानस ने अपने पैंट को बड़ी अदा से खोलते उसे पाँव से निकाल लिया.... केवल अडरवेअर मे मानस. ड्रस्टी ने अपनी पूरी नज़र एक बार मानस के उपर डाली... लिंग का वो उभार अंडरवेअर के उपर से देख कर ड्रस्टी के पाँव कांप गये...

 
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