• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
अगली सुबह 5:30 बजे

"खिली सी सुबह, गुड मॉर्निंग" मानस ट्रॅक-सूट पहना, एअर-फोन लगाया, और जॉगिंग के लिए निकल गया. जॉगिंग भी मानस की ठीक उसी ग्राउंड मे हो रही थी, जहाँ कल वाली लड़की रोज सुबह जॉगिंग करती थी.

मानस एअर-फोन लगाए अपनी ही धुन मे जॉगिंग कर रहा था. जॉगिंग करते-करते वो भी आ कर उसी बेंच पर बैठ गया जहाँ वो कल वाली लड़की बैठी थी. मानस के वहाँ बैठ'ते ही वो लड़की उठ कर चली गयी... मानस उसे जाते देख हँसने लगा.... "ड्रस्टी के दृष्टि मे मैं आ ही गया"

जॉगिंग के बाद, कॉलेज के लिए ली गयी शेयर ऑटो, मार्केट.... जहाँ भी ड्रस्टी गयी, हर जगह उसे मानस ही मिला. फ़र्क सिर्फ़ इतना था, जॉगिंग के वक़्त वो बिना बुरखे मे थी, और बाकी सब जगहों पर वो बुरखे मे. पूरा दिन ड्रस्टी के दिमाग़ मे बस यही घूमता रहा..... "ये मेरा पिच्छा कर रहा है, या महज इतफ़ाक़ है"

,,,,,,,,,,,,,,

इधर स.स ग्रूप मे पूरा का पूरा विस्फोट जैसा महॉल बना हुआ था, रात से ले कर सुबह तक मे मूलचंदानी हाउस से दो बड़े अनाउन्स्मेंट्स हो चुके थे, पहला ये कि अब मूलचंदानी हाउस से केवल एक केर टेकर था कंपनी का.

यानी कि हर्षवर्धन और सुकन्या का कंपनी का भी चार्ज अब मनु के हाथ मे था, और दूसरा ये कि मनु शादी कर रहा है.... हालाँकि मनु की शादी की बात को ले कर तो मूलचंदानी हाउस मे भी विस्फोट हुआ, लेकिन बाहर इस खबर का असर दुगना था.

राजीव और वंश के घर मे मातम सा छाया हुआ था, और सुकन्या से संपर्क करने से पहले ही सुकन्या अपने सारे शेयर मनु के नाम कर गयी, ये एक और बड़ा झटका था राजीव और वंश के लिए....

तनु.... देख लिया तुम दोनो ने, जैसा मैने कहा था वैसा ही हुआ ना... बिठा दिया उस कल के लड़के को तुम्हारे सिर पर. अब जाना नागिन डॅन्स करने उस की शादी मे....

राजीव.... पर ये एक ही रात मे सारे शेयर मनु के नाम पर और उसके साथ-साथ शादी का अनाउन्स्मेंट... बात कुछ समझ मे नही आ रही. आख़िर इतना जल्दी, इतना सब कुछ हो कैसे गया.

वंश.... अर्रे अब भी नही समझे, मैं तो इन लोगों की सारी रण'नीति समझ गया हूँ....

टानू और राजीव दोनो एक साथ ... क्या ????

वंश.... ये सब उस शम्षेर का किया धरा है... कल इन लोगों की फॅमिली मीटिंग थी, और उस मीटिंग मे ही शम्षेर ने पहले इस मनु को पूरा मालिक बनाया, और फिर तुरंत उसकी शादी का अनाउन्स करवा दिया, ताकि कल को किसी पार्ट्नर की लड़की का रिस्ता ना आ जाए....

 


तनु.... ह्म्म्म्म ! मतलब बड़ी दूर की सोची है इस शम्षेर ने, उसे लगा होगा मनु के पूरा चार्ज लेने के बाद यदि कोई पार्ट्नर की लड़की से शादी हुई, तो उनके आगे होने वाली मीटिंग्स की बात लीक ना हो जाए, इसलिए दोनो अनाउन्स्मेंट साथ मे किया....

राजीव.... पूरी ज़िंदगी पड़ी है, जितनी भर चाहे उतनी समीक्षा करते रहो, पर इसका नतीजा कुछ नही निकलेगा. इसलिए बेहतर ये होगा कि जीतने का सल्यूशन ढुंढ़ो, ना की हार किस वजह से रहे हैं उसकी चर्चा करो. और यदि कोई रास्ता ना मिल रहा हो तो खुद को हारा मान'ने मे ही भलाई है....

तनु.... एक तरकीब है, लेकिन उसके लिए रौनक का हमारे साथ होना ज़रूरी है, लेकिन उस से पहले वंश भाई साब आप को भी एक काम करना होगा....

वंश.... कैसा काम...

तनु.... मनु के बारे मे मैं जहाँ तक जानती हूँ, वो यंग फ्रेशर्ज़ को काम देने मे ज़्यादा विस्वास रखता है. अभी दो कंपनीज़ के सीईओ चेंज होंगे, पहला हर्षवर्धन और दूसरा सुकन्या... तो उन कंपनी के उपर लेवल मे काफ़ी चेंज होगा... नताली, मनु की क्लास फेलो भी रह चुकी है... क्यों ना उसे वहाँ काम पर लगा दिया जाए.....

वंश... आइडिया बुरा नही है, पर मनु उसे कंपनी के अंदर इतने बड़े पोस्ट पर रखेगा क्यों....

तनु.... रखने की कोई वजह तो नही, लेकिन वजह बना दी जाएगी, आप बस नताली से पूछ कर कन्फर्म करो कि वो ऑफीस जा सकती है या नही... तब तक मैं रौनक को अपने साथ मिलाने का जुगाड़ करती हूँ...

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सब के आधे-अधूरे गणित हो गये थे मूलचंदानी हाउस के अनाउन्स्मेंट के बाद. रौनक कितनी प्लॅनिंग से जिया की शादी मनु के साथ करवाना चाहता था. एक तो उसकी सारी प्लॅनिंग भी गयी, उपर से ये नया अनाउन्स्मेंट.

रौनक, हर्षवर्धन को कॉल लगाते....

रौनक..... हर्ष ये तुम लोगों ने ठीक नही किया.... आज तक तुम जैसा कहते रहे मैं वैसा करता रहा. ये जानते हुए भी कि तुम लोग मनु को बर्बाद कर दोगे, फिर भी केवल तुम्हारे कहने पर मैं अपनी बेटी की शादी का प्रस्ताव उसके पास ले कर गया. और तुम लोगों ने इतनी बड़ी बात खुद ही तय कर ली, एक बार बताया तक नही.

रौनक की बात का कोई जबाव नही था हर्ष के पास, वो बस इल्लॉजिकल तरीके से जबाव देने लगा, और रौनक ने फोन काट दिया....

जिया... पापा, आप के साथ इतना बड़ा धोका कर दिया हर्ष अंकल ने, और आप ने मुझे बताया तक नही....

रौनक..... नही जिया धोका तो मैं दे रहा था तुम्हे. मन मे लालच लिए मनु के साथ तुम्हारी शादी तय कर रहा था, और उसी का फल मिला है मुझे.

जिया.... कैसा लालच हां पापा. मनु से मेरी शादी तो आप उसे तो बर्बाद नही ही करते ना. पर आप से काम निकलवाने के बाद आप को भूल जाने वालों को उस के किए की सज़ा ज़रूर मिलनी चाहिए. अब आप मुझे पूरी बात बताएँगे...

रौनक ने इस खेल की पूरी कहानी अपनी बेटी को बता दिया. पूरी बात ध्यान से सुन'ने के बाद जिया कहने लगी.... "आप बस देखते जाओ पापा अब मैं क्या करती हूँ, अब आप तनु आंटी के कॉल पर उन्हे जाय्न कर लेना, पर उन्हे ये फील मत होने देना कि आप इच्छा रखते हो उन्हे जाय्न करने की".

जिया भी अब इस कॉर्पोरेट के खेल मे कूद गयी थी. अपने शिकार की ओर पहला कदम बढ़ाती, उसने श्रमण को कॉल लगाया.....

श्रमण..... हेल्लूओ

जिया..... क्यों मेरे हॅंडसम कैसे हो...

श्रमण.... खोया हूँ मैं. मुझे यकीन नही हो रहा आप ने मुझे कॉल किया है...

जिया..... हहहे, ऐसा क्यों भला, अभी तो मैं बात कर ही रही हूँ ना...

श्रमण..... नही मैं, आप हमे फोन करे इसकी कोई वजह तो नही थी ना...

 


जिया..... हाई रे मेरे भोले पक्षी, उल्टा दिन रात फोन हाथ मे लिए मैं तुम्हारे कॉल का इंतज़ार कर रही थी... तुम्हे पता भी नही कि तुमने क्या कर दिया है....

श्रमण.... क्या हुआ मेडम, मैने क्या कर दिया....

जिया..... शॉक तो ऐसे हो रहे हो जैसे कुछ पता ही नही, लूट लिया रे मुझे लूट लिया....

श्रमण.... ये आप क्या कह रही हैं, मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा...

जिया.... मनु तो ऑफीस गया, और घर पर काम भी नही.... सो मैं आ रही हूँ 1 घंटे मे, तैयार रहना. मिल कर समझाती हूँ, क्या किया तुमने....

श्रमण तो हवाओं मे तैरने लगा.... फकीर की झोली मे खजाना आ गया हो जैसे.... वो भी जल्दी-जल्दी जा कर तैयार होने लगा.... और जिया कॉल डिसकनेक्ट कर हँसती हुई खुद से कही.... "ये तो खुद शिकार होने तैयार बैठा है, मैं क्या शिकार करूँगी"

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कल का दिन ही कुछ ऐसा था कि मूलचंदानी हाउस ने अपने पार्ट्नर्स की नींद तो हराम किया ही, लेकिन साथ मे अपने घर मे भी आग लगा चुका था. अमृता का सबसे छोटा बेटा रजत जहाँ इस फ़ैसले से नाराज़ हो कर गुस्से मे घर से बहुत दूर चला आया था, वहीं सूकन्या का बेटा मिनाज़ और बेटी श्रेया पूरे घर को अपने सिर पर उठा लिए थे.

मुषीबत ऐसी थी कि आख़िर हार कर सुकन्या ने अमृता को कॉल लगा ही दिया.....

सुकन्या.... अमृता, ये क्या करवाया तुम लोगों ने, ऐसा लग रहा है जैसे अपने ही बचों की दुश्मन बन गयी हूँ मैं...

अमृता.... रजत का भी यहाँ यही हाल है, पर सुकन्या तुम्हे तो पूरी बात समझाई थी ना... शांत करो उन्हे...

सुकन्या.... तो क्या इन को पूरी बात बता दूं...

अमृता... नही पूरी बात मत बताओ, पर उन्हे इस बात से ज़रूर डरा दो कि मनु पूरी कंपनी हथियाना चाहता था, इसलिए हम ने ये ज़रूरी कदम उठाया. कंपनी हाथ से जाने से तो अच्छा है, शेयर दे कर कंपनी मे हम बने रहे... उन्हे मजबूरी समझाओ, कि जब सामने से वॉर करने पर जीत नही सकते तो ऐसे ही सेफ रन'नीति बनानी पड़ती है....

सुकन्या..... हां ये बेहतरीन आइडिया है, इस से वो लोग समझ जाएँगे कि हमे मजबूरी मे फ़ैसला लेना पड़ा. वैसे कितना सुकून मिला था कल, जब बच्चे मनु को गालियाँ दे रहे थे... मुझे तो बड़ा मज़ा आया. काश उस वक़्त उसकी वो चुड़ैल माँ काव्या भी होती....

 
दोस्तो आज का अपडेट कैसा लगा
 
अमृता... नही पूरी बात मत बताओ, पर उन्हे इस बात से ज़रूर डरा दो कि मनु पूरी कंपनी हथियाना चाहता था, इसलिए हम ने ये ज़रूरी कदम उठाया. कंपनी हाथ से जाने से तो अच्छा है, शेयर दे कर कंपनी मे हम बने रहे... उन्हे मजबूरी समझाओ, कि जब सामने से वॉर करने पर जीत नही सकते तो ऐसे ही सेफ रन'नीति बनानी पड़ती है....

सुकन्या..... हां ये बेहतरीन आइडिया है, इस से वो लोग समझ जाएँगे कि हमे मजबूरी मे फ़ैसला लेना पड़ा. वैसे कितना सुकून मिला था कल, जब बच्चे मनु को गालियाँ दे रहे थे... मुझे तो बड़ा मज़ा आया. काश उस वक़्त उसकी वो चुड़ैल माँ काव्या भी होती....

अमृता.... हमारे बच्चे भी हमारी तरह सोचते हैं, बस थोड़ी चिंता काया को ले कर होती है...

सूकन्या.... हन नाम का असर हो गया है... काव्या-काया... इसलिए इतने क्लोज़ है उस नाजायज़ के परिवार से... खैर जाने दे, जब वो बर्बाद होगा तो दो दिन रोएगी काया फिर हमारे साथ हो जाएगी...

अमृता.... ह्म ! मैं भी यही सोच कर उससे जो करना है करने देती हूँ.... फोन रखती हूँ, मैं भी ज़रा अपने बेटे को मना लूँ. वो तो नाराज़ हो कर कल रात से आया ही नही....

कहते हैं कच्ची उम्र मे बच्चों के दिमाग़ मे ग़लत बातें डालना का नतीजा बहुत ही भयवान होता है. कल की फॅमिली मीटिंग से तो ये सॉफ जाहिर था कि इनके घर मे मनु और उसके भाई के लिए कैसी चर्चाएँ होती हैं.

लेकिन नफ़रत इस कदर अँधा कर चुकी थी सूकन्या और अमृता को, कि वो ये भी नही समझ पाए की अपने-अपने बच्चों के दिमाग़ मे कौन सी बात डाल रहे हैं. दोनो ने ही कल की हुई घटना मे अपने बच्चों को सफाई देती कहने लगी.....

"शम्षेर मनु को एमडी बने देखना चाहता था, और उसके एमडी बन'ने के बाद हम हार गये, हम उसका मुकाबला नही कर सकते थे. सॉरी बच्चो हम हेल्पलेस थे, इसलिए हमे ये करना पड़ा. मनु पूरा हमे बर्बाद कर के सब कुछ हथिया लेता, उस से अच्छा ही था कि अपने शेयर उससे दे कर, कंपनी मे उतने पर्सेंट का हिस्सेदार बने रहे"

एक ज़हर सा दिमाग़ मे बैठ गया सारे बच्चो के अंदर. कच्ची उम्र जवान खून उपर से पूरी संपत्ति ऐसे हाथ मे जिस'से नफ़रत करते आते रहे हैं..... दिमाग़ मे नफ़रत का जाल बिच्छा'ते चले गये.

हर किसी की लड़ाई शुरू हो चुकी थी. सब को मालिक बन'ना था और सभी लोग अपनी-अपनी प्लॅनिंग मे जुटे हुए थे. जिया भी ठीक घंटे भर बाद मनु के घर के सामने थी. श्रमण बाहर खड़ा ही उसका इंतज़ार कर रहा था.

 
हर किसी की लड़ाई शुरू हो चुकी थी. सब को मालिक बन'ना था और सभी लोग अपनी-अपनी प्लॅनिंग मे जुटे हुए थे. जिया भी ठीक घंटे भर बाद मनु के घर के सामने थी. श्रमण बाहर खड़ा ही उसका इंतज़ार कर रहा था.

जिया..... उफफफ्फ़, क्या अदा है श्रमण जी, मैं तो फिदा हो गयी...

श्रमण थोड़ा शरमाते हुए...... "आप भी ना अच्छा मज़ाक कर लेती हैं जिया मेडम. आप के सामने तो मैं कुछ भी नही".

जिया...... "आररीए अब ये मेडम बुलाना बंद करो, और चलो चलते हैं घूमने".

जिया, अपनी कार मे श्रमण को देल्ही घुमाने लगी, साथ-साथ पहली मुलाकात का उसको गिफ्ट भी देने लगी. महँगे कपड़े, घड़ी, चस्मा... पूरा हुलिया ही बदला-बदला था श्रमण का.

घूमते हुए दोनो को लगभग शाम हो गया था....

जिया.... श्रमण सच कहूँ, तुम्हारी अदा काफ़ी कातिलाना है, उफ़फ्फ़ मार ही देती हैं...

श्रमण..... कातिल तो आप हैं जिया जी, आप के रूप का जादू ऐसा है कि नज़रें हट'ती ही नही आप से.

जिया, श्रमण के हाथों को थामती.... "सच मे श्रमण, लेकिन मुझे ऐसा क्यों लगता है तुम झूट बोल रहे हो. जब मैं इतनी सुन्दर हूँ फिर भी मुझे देख कहाँ रहे".

श्रमण थोड़ा झेंप गया.... "नही, मैं वो.. ऐसी बात नही है जिया जी, शाम हो गयी है, घर चलें क्या"

जिया.... मुझ से बोर हो गये क्या श्रमण.

श्रमण..... नही, नही ऐसी बात नही है, वो तो बस शाम हो गयी है ना, और मनु भाई भी आते ही होंगे, तो वहाँ जाना ज़रूरी है...

जिया.... हाई रे ये वक़्त, कितनी जल्दी गुजर गया पता ही नही चला. ये अच्छा वक़्त भी ना इतनी जल्दी कैसे गुजर जाता है... चलिए ड्रॉप कर दूं आप को.

जिया, जब उसे ड्रॉप करने गयी, तो वो भी श्रमण के साथ ही उतरी और उसे हग करती हुई कहने लगी.... "ये मेरे लिए एक यादगार दिन था श्रमण, थॅंक्स"

किसी लड़की ने जैसे दिल के तार छेड़े हों. श्रमण को एक अजीब ही एहसास हुआ. उससे लगा जैसे जिया यूँ ही उस से गले लगी रही. जिया जब तक उसकी नज़रों से ओझल नही हो गयी, वो बस उसे जाते हुए ही देखता रहा.

जिया को भी विस्वास हो गया था कि तीर निशाने पर है. अब तो बस खेल शुरू करने की देर थी, लेकिन उसके लिए अभी श्रमण का पूरा लट्टू होना बाकी था.

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
इधर ऑफीस मे .....

मनु और स्नेहा सुबह से बधाई ही सुन रहे थे पूरा दिन. जो भी ऑफीस स्टाफ फाइल ले कर उनके कॅबिन मे आता, वो बधाई दे कर चला जाता. स्नेहा हँसने लगती, और मनु चिढ़ जाता. अभी बधाइयों का टोकरा ख़तम भी नही हुआ था कि मनु के कॅबिन मे हर्षवर्धन, अमृता और काया भी पहुँच गये.

हर्षवर्धन.... मनु, ये हमने क्या सुना, तुम स्नेहा से शादी कर रहे हो... और सब कुछ खुद ही तय कर लिया, हमे बताया भी नही.

काया.... ये भाई ने नही, बल्कि ये शादी मैने तय किया है पापा, बाकी अब आप सब का काम है, कैसे क्या करते हो.

अमृता.... हटो ज़रा देखने तो दो मुझे मेरी बहू को. यूँ तो वैसे बहुत बार देखी हूँ, पर आज बहू के रूप मे भी देख लेने दो. अब हर्ष खड़े-खड़े मुँह क्या देख रहे हो, शादी तय हुई है, कोई सगुण तो दो...

हर्षवर्धन.... हां-हां देता हूँ..

हर्षवर्धन ने एक डाइमंड का सेट निकाल कर स्नेहा के हाथ मे रख दिया. स्नेहा उसे हाथ मे थामे मनु को देख रही थी. मनु आखों मे इशारा किया ले लो, तब जा कर स्नेहा ने उसे कबूल किया.

काया.... कुछ देखा दोनो की अंडरस्टॅंडिंग, भाई ने जब तक इशारा नही किया तब तक भाभी ने गिफ्ट नही लिया.

अमृता.... हां मैने भी देखा... वैसे स्नेहा बेटा, तुम्हारे घर पर इस बात की खबर है कि नही.

घर का नाम सुनते ही स्नेहा को अपने पापा का चेहरा याद आ गया... और पापा का चेहरा याद कर के ही कांप गयी..... "नही अभी उन्हे कुछ भी पता नही है".

हर्षवर्धन.... काया बेटा तुम अड्रेस्स और फोन नंबर ले लो, अपने बेटे की शादी की बात हम खुद करने जाएँगे.....

"कहाँ है कमीना, मुझ से कुछ बताया भी नही, और बाहर वालों सीईई"..... अखिल कॅबिन के बाहर से ही चिल्लाता हुआ अंदर आ रहा था, और वहाँ मौजूद लोगों को देख कर, पूरी बात बोलते-बोलते रह गया....

गेट जैसे ही खोला नज़रों के सामने काया थी, और वो काया को देख कर बिल्कुल शांत हो गया..... "ये कौन है, माशाअल्लाह क्या प्यारी लड़की है, दिल धड़का गयी".

मनु..... आप सब इन से मिलिए, ये है मेरा दोस्त अखिल, अभी-अभी इसने देल्ही पोलीस जाय्न किया है. अखिल ये हैं, मेरे मोम-डॅड, और मेरी बहन काया...

अखिल, बड़ी सी आखें किए, अपना हाथ काया की तरफ बढ़ाते हुए कहा.... "हेलो"

अमृता.... ठीक है हम सब चलते हैं, मनु, रिश्ते की बात करने हम सब साथ जाएँगे. किसी फॅमिली ट्रिप की तरह....

 


इधर सब लोग अपनी-अपनी बात करने मे लगे थे, और अखिल, काया का हाथ थामे उसे बस देखे ही जा रहा था. काया, अखिल की हरकतों पर हँसती हुई, बस खड़ी उसे देख रही थी. मनु की नज़र जब उन पर पड़ी तो ज़ोर से कहने लगा..... "अखिल तू बाहर से चिल्लाता हुआ क्या कह रह था"

अखिल का ध्यान टूटा, और वो हडबडा कर अपना हाथ हटाया. काया उसकी हालत देख कर ज़ोर-ज़ोर हँसने लगी. तीनो जैसे आए थे वैसे ही वापस चले गये. लेकिन काया का जाना अखिल को अखर रहा था, वो तो बस इस हसरत से था कि यहाँ से सब लोग चले जाए, और काया और वो बिल्कुल अकेले रहे.

मनु, अखिल के आँखों के पास चुटकियाँ बजाते.... "तू खोया कहाँ है अखिल"

अखिल.... यार बड़ा बेईमान है तू, शादी फिक्स कर ली और लड़की से मिलवाया भी नही....

मनु.... मेरी छोड़, तू मेरी बहन को घूर क्यों रहा था.... साले अभी निकल जा यहाँ से. तुम्हे शर्म नही आती, दोस्त की बहन को ऐसे घूरते हुए....

अखिल.... सॉरी यार, मुझे मंफ़ कर दे. पर सच कहता हूँ, उसे देख कर जैसे मैं कहीं खो सा गया.... देख तू मुझे जानता है, मैं क्या ग़लत लड़का हूँ.

मनु.... ग़लत क्या होता है अखिल. अभी तो देख लिया ना मैने. किसी के दिल मे क्या है, वो तो वक़्त आने पर ही दिख जाता है. जैसे मुझे अभी दिखा.

अखिल.... यार, मुझे वो वाकई बहुत प्यारी लगी. अगर तुम राज़ी हो तो मैं उस से शादी करना चाहता हूँ.

मनु..... दो कौड़ी के पोलीस वाले तुमने ऐसा सोचने की हिम्मत कैसे किया.

अखिल.... मनु, तू बहुत बड़ा पैसा वाला होगा, पर किसी की औकात इतनी आसानी से नही आँकते.

मनु.... अच्छा तो कैसे आँकते हैं. किसी के घर गये, और उसके घर के औरतों पर बुरी नज़र डाल कर.

अखिल.... आइ आम सॉरी दोस्त. ठीक है मुझ से ग़लती हुई. चलता हूँ अभी.

मनु.... ओये मूड कर उधर मेरे एनकाउंटर का तो नही सोच रहा.

अखिल, मुस्कुराता हुआ पिच्चे मुड़ा.... "यार बहुत गिल्टी फील करवाया तूने, जानता है अंदर से रोने-रोने जैसा मन कर रहा था. सॉरी यार, मैं पहली बार किसी लड़की को ले कर इतना सीरीयस हुआ. उस वक़्त पता नही क्या हुआ, मैं खुद पर काबू नही रख पाया. जब कि बात केवल दोस्त के घर की नही थी यार, मुझे तो ट्रनिंग मे एमोशनलेस्स होना सिखाया गया था".

मनु.... मियाँ, अब ग़लती तो हो गयी तेरे से. भाई मेरी तरफ से तो रिस्ता पक्का है. आख़िर घर का लड़का है, मेरा खुद का जाँचा-परखा. और माशा-अल्लाह आज के दौर मे ऐसा नायाब हीरा कहाँ मिलता है. पर बेटा मेरे हां कहने से कुछ नही होता, लग जा अपनी दुल्हनिया के पिछे, उसने हां कर दी तो तुम दोनो का रिश्ता मैं करवाउंगा....

स्नेहा.... लेकिन उसकी शादी तो पहले से तय है...

मनु... तो क्या हुआ, डीडीएलजी रीफ्रेन्स के तौर पर देख लेगा अखिल, हा हा हा.

अखिल.... वो सब छोड़, पर यार इतनी तो क्लास नही लेना था ना. सच मे बहुत बुरा फील हुआ.

मनु.... कल तुमने मेरी होने वाली दुल्हनिया को डराया, और उससे फ्लर्ट किया था ना, उसी की सज़ा तुम्हे दिया.

अखिल.... क्या ???? ओह्ह्ह हूओ, ओह्ह्ह हूओ ... मुझे कल ही लगा था तुम दोनो के बीच कुछ है, आख़िर मेरा अंदाज़ा सही निकला.... पार्टययययी टाइमेयीईयी... बॉस को बोल ऑफीस संभाले.... हम पार्टी करते हैं....

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
Back
Top