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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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मुंबई के एक पब मे

जिया अपनी दोस्त नताली के साथ बैठी, वोड्का का सीप ले रही थी. जिया और नताली, दोनो का साथ काफ़ी लंबे समय से था, और दोनो अपनी हर तरह की बातें शेर करती थी. नताली, रौनक की तरह ही बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स मे से एक वंश पटेल की बेटी थी.

सेक्सी, स्टाइलिश, हॉट, और अपनी अदाओं से जादू चलाने वाली दोनो बालाएँ, अक्सर साथ पाई जाती थी. इस वक़्त भी दोनो पब मे बैठे, वोड्का के टकीला शॉट लगा रही थी....

जिया.... व्हाट दा फक... जी करता है अपने बाप पर केस कर दूं...

नताली.... तू एक्सट्रा हॉट क्यों हो रही है, पब मे आग लग जाएगी....

जिया.... यार, सारे जहाँ मे मेरे डॅड को बस वो बंदर ही मिला था शादी के लिए. अब वो फोर्स कर रहे हैं शादी के लिए हां कर दूं.... यार शादी, और अभी... अभी तो ज़िंदगी को जिया ही कहाँ है...

नताली.... तो मना कर दे ना, बोल दे तेरा पहले से एक बाय्फ्रेंड है और तू उसी से शादी करेगी....

जिया..... बाय्फ्रेंड माइ फुट, डॅड ने पहले मुझ से बारे मे प्यार से पुछा था...

नताली एक सीप लेती... हुन्न हुन्न क्या ???

जिया.... तुम्हारा कोई बाय्फ्रेंड है, जिस से तुम शादी करना चाहती हो....

नताली.... फिर क्या कहा तूने....

जिया..... मैं क्या कहती, मैने सोचा इन्हे मेरी शादी की कहीं फ़िक्र ना हो रही हो, मैने मना कर दिया....

नताली.... हहहे.... तू ग्लास खाली कर... मैं अभी वॉश रूम से आई...

जिया टेबल पर बैठी कुछ सोच ही रही थी, तभी उस टेबल पर एक हॅंडसम सा लड़का आ कर बैठा... माचो मॅन की पर्सनालटी... बिल्कुल किसी मॉडेल की तरह दिखने वाला....

लड़का.... हेलो सेक्सी, आइ आम पार्थ...

जिया.... आइ आम नोट इंटरेसटेड, प्लीज़ डॉन'ट डिस्ट्रब मी...

तभी नताली वहाँ पहुँचती है.... "क्या हो गया जिया, ये हॅंडसम कौन है"

जिया, चिढ़ती हुई.... तेरा बाय्फ्रेंड...

नताली.... कमाल है, मेरा बाय्फ्रेंड और मुझे ही पता नही...

पर्थ.... मुझे भी पता नही, तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो... हाई, आइ आम पार्थ...

नताली..... आइ'डी कार्ड दिखाओ तो मैं मानू...

पार्थ, उसे अपना कार्ड दिखाते.... नाउ यू बिलीव.. वैसे एक बात तो है... बोत ऑफ यू डॅम हॉट... दूर से ही आग लग गयी थी....

नताली.... हहहे... थॅंक्स.. वैसे यहाँ स्वीमिंग पूल नही, इसलिए सावधानी से जलना....

जिया.... हुहह... यहाँ मैं परेशान हूँ... और तू है कि फालतू की गॉसिप मे लगी है.....

पार्थ.... किस तरह की परेशानी जिया...

नताली..... इसके डॅड ने इसकी शादी फिक्स कर दी है और ये करना नही चाहती....

जिया..... एक स्ट्रेंजर से तू आज सब डिसकस कर ले नताली... तुम जाओ यार यहाँ से...

पार्थ..... मुझे समझ मे नही आता, तुम जैसी हॉट & सेक्सी गर्ल शादी का नाम सुन कर ऐसे ओवर रिक्ट क्यों करती है....

जिया..... व्हाट दा फक ! व्हाट डू यू मीन...

पार्थ.... आइ मीन टू से मिस.... पब शादी के बाद भी रहेगा, ड्रिंक तब भी होंगे, और तुम्हारी सेक्सी अदाओं पर मिटने के लिए मुझ जैसा हॅंडसम तब भी होगा. कौन सा मीना कुमारी की तरह घूँघट डाल कर तुम पब आओगी.... मॅरेज इस जस्ट लाइक आ कांट्रॅक्ट, करना भी पड़े तो इसमे इतना पॅनिक होने की ज़रूरत नही... उल्टा बहुत से फ़ायदे हैं...

जिया.... फ़ायदा, वो कैसे....

पार्थ.... पति पसंद ना आया, तो मैं तलाक़ करवा कर उसकी आधी दौलत दिलवा दूँगा.... आख़िर तुम्हारा ये लॉयर कदरदान किस दिन कम आएगा....

जिया.... क्वाइट इंटरेस्टिंग हां ! तो तुम लॉयर भी हो...

पार्थ.... हुआ नही, अपकमिंग हूँ....

नताली..... मुझे लगता है किसी और को जाय्न करना चाहिए....

जिया..... तेरी मर्ज़ी है....

पार्थ..... सो जिया, एक ड्रिंक हो जाए...

जिया.... हहे, ओके पार्थ बट सिर्फ़ एक....

 
दोनो ने टोस्ट कर के एक जाम साथ मे पिया. फिर पार्थ उससे इन्सिस्ट करते डॅन्स फ्लोर तक ले गया. दोनो एक दूसरे की कमर मे हाथ डाले, म्यूज़िक पर दोनो के पाँव थिरकाते रहे. पार्थ के हाथ जिया की कमर से नीचे पूरे बॅक से से होते हुए उसके पीठ पर फिर रहे थे.

थोड़े देर दोनो एक दूसरे से चिपके, डॅन्स करने के बाद, जिया उसके कानो को पॅसशॉंट्ली काट'ती हुई धीरे से कान मे कही.... "टेक मी अवे पार्थ"

पार्थ उसके होंठो को चूम कर उसकी बॅक को स्मूच किया, और दोनो वहाँ से निकल कर कार मे आ गये.... कार सीधे जा कर एक फ्लॅट मे रुकी... और दोनो जैसे ही अंदर आए... एक दूसरे के होंठो से होंठ लगा कर चूमना शुरू कर दिए....

पर्थ के होंठो को दाँतों तले दबा कर जिया ने बड़ी तेज़ी से उसकी टी-शर्ट उतार दी. टी-शर्ट उतार कर उसके नंगे जिस्म पर पूरे होंठ चलाती उसके कंधे पर एक ज़ोर की बाइट की और उसकी पीठ पर अपने नाख़ून गढ़ा कर उसे छिलती हुई, नीचे तक ले आई....

"ओह्ह्ह्ह ... ज़ियाआअ".... करता पार्थ दर्द और मज़े के साथ आवाज़ निकाल दिया. उस ने भी जिया के बदन से तेज़ी से सारे कपड़े निकाल दिए, और उसकी गर्दन पर किस और बाइट करने लगा.... जिया ने उसे धक्के दे कर बिस्तर पर लिटा दिया.... और टाँगो को फैला कर उसके बदन के दोनो ओर करती उसके उपर चढ़ गयी.....

पहले उसके होंठो को अपने होंठ तले दबा कर उसे जोरदार किस की... फिर होंठ नीचे सरकाती, उसकी ठुड्डी पर बाइट किए. होंठ फिर उसके सीने पर ले कर आई... और सीने को चूमती, उसके निपल को अपने दाँतों तले दबा कर, उसे बाइट करने लगी....

पार्थ की आखें जो मस्ती मे बंद थी, वो हल्के दर्द से खुल गयी... वो जिया के बॅक को पूरी टाइट्ली होल्ड करते... उसे पूरे ताक़त से स्मूच किया....

"आहह" की एक सुकून भरी आह जिया के होंठो से निकली.... और वो निपल को बाइट करती... धीरे-धीरे पेट पर अपने होंठ फिरा, बाइट करती नीचे क्मर तक आई.....

कमर के बेल्ट को बड़ी तेज़ी से खींचती, जिया उसे निकाल दी. पार्थ उठ कर बैठना चाहा, पर उसके सीने पर हाथ रख कर उससे धक्के दे कर फिर से लिटा दी.... जल्द ही उसके पॅंट और अंडरवेअर दोनो को निकाल कर फर्श पर फेक दी....

पार्थ बिस्तर पर लेटा, तेज-तेज साँसे ले रहा था.... जिया उसके नीचे के पूरे खुले हिस्से को अपने आखों से ताड़ने के बाद, हौले से उस पर अपने नाख़ून फिराई.... जिया के हाथों का एहसास होते ही लिंग मे एरेक्षन शुरू हो गया....

जिया देर ना करती उसे अपने हाथो मे ले कर, पहले तो उसके भींच-भींच कर बड़ी तेज़ी से उपर नीचे करने लगी.... उफफफ्फ़ साँसे अटक सी गयी पार्थ की.... उसके बदन मे पूरे आग लग गया... वो उठ कर बैठ गया, और अपनी खुली आखों से देखने लगा.... कैसे जिया अपने अपने बड़े-बड़े नखुनो वाले हाथ से उसके लिंग को बड़ी ही ज़ोर से उपर नीचे कर रही है....

जिया देर ना करते हुए उसे अपनी हाथो मे ले कर, पहले तो उसको भींच-भींच कर बड़ी तेज़ी से उपर नीचे करने लगी....

उफफफ्फ़ साँसे अटक सी गयी पार्थ की.... उसके बदन मे पूरे आग लग गया... वो उठ कर बैठ गया, और अपनी खुली आखों से देखने लगा.... कैसे जिया अपने अपने बड़े-बड़े नखुनो वाले हाथ से उसके लिंग को बड़ी ही ज़ोर से उपर नीचे कर रही है.

थोड़ी देर लिंग को हाथों से खेलने के बाद अपने सिर को नीचे झुकाई... पूरा कमर पर जिया के सिर के बाल बिखरे पड़े थे और उसके नीचे वो लिंग को अपने हाथों मे पकड़ कर .. पहले तो उस पर अपनी पूरी जीभ फिराई....

फिर उसे अपनी लार से गीला कर के, उसके स्किन को पिछे भीची, और आगे के टिप पर अपने जीभ गोल-गोल फिराने लगी.... पार्थ तो दोनो हाथों को बस्तर से टिका... ज़ोर से आहें भरने लगा.... जिया आगे बढ़'ती लिंग को पूरा अपने मूह मे गॅप से ले ली, और अपनी उत्तेजना के हिसाब से, कभी धीमे तो कभी ज़ोर से... उसे लगातार चुस्ती चली जा रही थी....

 


जान तो तब निकल जाती पार्थ की जब लिंग के नीचे जिया अपने हाथ लगा कर अपने नाखूनों को ज़ोर से उस पर गढ़ा कर एक इंच आगे खुसकाती.... और दाँतों के बीच लिंग को दबा देती.... पल मे ही रोम-रोम पूरा झनझना जाता.... उत्तेजना पर दर्द हावी होता और अगले ही पल फिर से मज़ा....

जिया उपर आ कर पार्थ की गोद मे बैठ गयी... और अपने ब्रेस्ट को उसके सीने पर रगड़ती, उसके बालों को खींच कर उसकी गर्दन पर बाइट करने लगी.... पार्थ भी पूरे उत्तेजना मे आया, जिया की कमर के नीचे हाथ लगाया और अपनी कमर को गोल-गोल हिलाने लगा....

जिया, पैंटी के उपर पड़ रहे लिंग के दबाव से थोड़ी और उत्तेजना मे आ गयी ... वो अपने घुटनो पर बैठ कर अपने सीने को उपर की, और ब्रा से अपने बूब्स को आज़ाद करती एक बूब्स को पार्थ के मूह मे डाल कर अपने दूसरे बूब्स को अपने हाथों से बारे ज़ोर से मसलने लगी....

पार्थ भी बूब्स को मूह मे लेते ही उसे पूरा मूह मे भर लिया... उसके बूब्स को मूह के जितना अंदर ले सकता था, उतना अंदर लिया. उस पर दाँत को पूरा गढ़ा कर, दाँतों की पकड़ को खिसकाता धीरे धीरे निपल तक लाने लगा....

"ओह पर्थह".... मीठा सा दर्द पैदा होने लगा... जिया अपनी ऐसी उत्तेजना मे थी, कि धीरे तो उसे पसंद ही नही था, ऐसी ज़ोर आज़माइश उसके मज़े को और दुगना कर रही थी...

जिया अपने दोनो हाथ पार्थ के सिर पर डाल अपने सीने को और ज़ोर से पर्थ के मूह पर दबाने लगी. पर्थ भी और जोरों से उसके बूब्स को सक करते हुए बाइट करने लगा.... नीचे पार्थ के हाथ पीछे पैंटी के अंदर डाले, उसके बॅक को बेस बना कर स्मूच कर रहे थे....

पार्थ बूब्स को मूह मे भरे.... उसे ज़ोर-ज़ोर से काट'ते और चूस्ते, अब अपने हाथ की उंगलियों को बॅक की दरार से होते... अपनी एक उंगली को योनि मे और दूसरे को उसके आस होल मे डाल कर उसे तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा.....

"आहह" की एक लंबी सिसकारी जिया के मूह से निकल गयी.... अंदर वो पूरी तरह वेट हो चुकी थी.

कमर उसकी अपने आप हिलने लगी.... सिने को और कस कर उसके मूह पर दबाने लगी... "उफफफफफफफफ्फ़, आहह".... करती जिया, कभी अपना पूरा सिर हिला कर दाएँ-बाएँ कर रही थी, तो कभी पर्थ के बालों को भींच रही थी.....

अचानक ही जिया का बदन अकड़ने सा लगा, वो पार्थ के बाल को पकड़ कर अपने सीने से और ज़ोर से चिपका ली.... और पूरे बाल को मुट्ठी मे भिंचे ज़ोर की सिसकारी अपनी उखड़ती सांसो के साथ निकली.... "इस्शह"

पार्थ अब भी अपने हाथ, उसकी योनि और आस होल मे डाले तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा था, और उसके बूब्स को अपने होंठो मे दबा ... उसे ज़ोर-ज़ोर से निचोड़ रहा था.... जिया निढाल पड़ी, कुछ देर अपने चरम को सुकून से एंजाय करने के बाद, अपने बूब्स को मूह से निकाली, और पार्थ के सीने पर अपने नाख़ून गढ़ा कर उससे नीचे तक छिल्ति.... धक्के दे कर लिटा दी....

एक दम से तेज जलन हुआ पार्थ को..... "जंगली.... पूरा छिल दिया... उफफफफ्फ़"

जिया, उस की आखों मे देखती.... "एंजाय हार्ड फक बेबी"..... इतना कहते ही जिया उसके सिर के दाएँ-बाएँ पाँव रख कर खड़ी हो गयी...... अपनी कमर को रोल करती बड़ी अदा से अपनी पैंटी को अपने पाँव से निकाली, उसे पाँव से अंगूठे मे दबा कर ... अपने हाथों मे ली, और पार्थ के मूह पर फेंक दी....

पार्थ उस की खुश्बू ले कर, जैसे ही अपने चेहरे से हटाया, जिया अपने घुटनो के बल बैठ कर अपनी कमर को उसके चेहरे से हल्का उपर रखी..... पर्थ के सिर को नीचे से पकड़ कर उठाई और अपने योनि से टिका दी....

पार्थ भी अपने हाथ, उसके दोनो बॅक पर डालता, उसे पकड़ कर बेस बना लिया... और अपनी जीभ को उसकी योनि से डाल, योनि के क्लिट को अपने दाँतों तले दबा लिया.... "अऔचह, उफफफफफफफफफफफ्फ़... सक इट बाबययययी"..... "उफफफफफफफ्फ़... सक्क इट्ट्ट"

जिया अपनी कमर और बदन को प्युरे हवा मे लहराती, गोल-गोल घुमाने लगी...... और अपने सीने पर हाथ लगाती, अपने बूब्स मसलने लगी.... पार्थ अब भी बॅक पर हाथ लगाए वो जीभ को योनि के अंदर फिराता... क्लिट को दाँतों तले दबाए उस पर हल्का-हल्का बाइट कर रहा था....

धीरे-धीरे... अपने पाँव को पूरा रिलॅक्स देती, जिया अपने पाँव फैला कर पूरा भार उसके चेहरे पर दे दिया..... पार्थ ने अपने दोनो हाथों से उसके बॅक को पकड़ कर थोड़ा उपर किया... और फिर से बड़ी तेज़ी से योनि को चूसने और उस पर अपने दाँत गढ़ाने लगा....

जिया मस्ती मे अपने कमर हिलाती, अपने हाथों को पिछे ले गयी, और उसके लिंग को पकड़ कर, उसे ज़ोर-ज़ोर से मुट्ठी मे भिचने लगी..... "टेक मी हाइअर्र्र... बेबी.... ओह ... सक इट हार्ड... टेक मी हार्डर.... हाइयर..... उफफफफफफफफफफ्फ़"

 


चेहरे पर उत्तेजना की शिकन.... अब तो सब बेकाबू था... जिया पार्थ के उपर से हटी... और लिंग को गीला कर के एक बार फिर से अपने मूह मे ले ली .... और अपने सिर को झटक-झटक कर चूसने लगी....

"ओह... जिय्ाआआआ.... उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ .... यअहह बाबययययी... सक इट... सक्क्क.. सक्क्क्क"

जिया कुछ देर उसे सक करने के बाद... अपने दोनो पाँव पार्थ की कमर के दोनो ओर की, उसके लिंग को पकड़ कर अपनी योनि से लगाई... और .... "आहह" करती उस पर बैठ'ती चली गयी.....

जिया कमर को गोल-गोल हिलाती...... "आहह... आहह ... ऊऊऊओ.. ससिईईईईईईईईईई.... अहह.... आहह... फुक्कककक... इट हार्डे... उफफफफफ्फ़... आहह"

जिया अपने हाथों से अपने बूब्स मसलने लगी... कमर को पूरी रफ़्तार से झटकने लगी.. तेज-तेज सिसकारियाँ लेने लगी..... पर्थ भी नीचे से धक्के देता हुआ बैठ गया. जिया के बालों को पकड़ कर भींच दिया... चेहरा पिछे की ओर हो गया और सीना बिल्कुल आगे तन गया.

पार्थ, जिया के सीने पर होंठ लगाता... कभी एक को तो कभी दूसरे बूब्स को अपने होंठो मे दबा ज़ोर-ज़ोर धक्के देने लगा.....

जिया... पर्थ के बालों पर हाथ फेरती हर धक्के के साथ.... "आहह....ओह.... उफफफफफफ्फ़" करती रही और अपनी कमर हिलाती उसका पूरा साथ देती रही....

अचानक ही धक्कों की स्पीड ने और तेज़ी ले लिया... हर धक्कों पर जिया के बदन मे लहर पैदा हो रही थी.....पार्थ के मूह से भी जोरों की आवाज़ निकलनी शुरू हो गयी...... "ऊऊऊऊओह.... ब्बयययी..... आहह... अहह.. अहह"

वो चिल्ला... चिल्ला कर धक्के देने लगा... जिया भी पूरी मस्ती मे सिसकारी भरती... हर धक्के का मज़ा लेने लगी..... पर्थ की आवाज़ बता रही थी उसका पिक आ गया था.... जिया के बदन मे भी अकड़न आ गयी.... दोनो बड़ी तेज-तेज सिसकारियाँ लेते एक दूसरे को और ज़ोर से स्मूच करने लगे....

अचानक ही जिया ने फिर से अपने पूरे नाख़ून उसकी पीठ मे दबा कर उसे जोरों से भींच दिया, और इधर पार्थ भी, उसके बालों को ज़ोर से खींचता... ज़ोर-ज़ोर धक्के मारता... फिर धीमा-धीमा .. और शांत होता चला गया.....

दोनो बिस्तर पर निढाल लेट गये... और एक दूसरे के बदन पर हाथ फेरने लगे.....

 
गपशप

भीषण ठंड वाली रात….वर्षा से भीगती सर्द हवाओं से दांत किटकिटाती हुई. सभी अपने–अपने घर–झोंपड़े में दुबके हुए थे. अचानक एक कुत्ता दंपति अपने पिल्लों के साथ भटकता हुआ उधर से गुजरा. उन्हें रात बिताने के लिए आसरे की तलाश थी. लेकिन घरों के दरवाजे बंद थे. तभी बिजली कड़की और उसकी चमक पिल्ले की आंखों में समा गई.

‘मां, उधर देख….वहां कोई नहीं है. हमारी रात वहां मजे से कटेगी.’

कुतिया कांप उठी, बोली, ‘उधर नहीं वह भगवान का घर है.’

‘तो क्या हुआ? हम भी तो उसी के बनाए हुए हैं.’

‘लेकिन यह घर आदमी का बनाया हुआ है और आदमी का मानना है कि ईश्वर के घर में पत्थर की मूर्तियां रह सकती हैं. हम जैसे कमजोर जीव नहीं.’ बिजली फिर कड़की. इस बार दूसरा पिल्ला कहने लगा, ‘उसे छोड़ो बापू. इधर देखो, कितना बड़ा घर है. एकदम साफ–सुथरा और इसके दरवाजे भी खुले हैं. हम यहां आराम से रह सकते हैं.’

‘नहीं बेटा! परिस्थितियों से त्रस्त बेबस कुत्ते ने कहा. बेटा वह मस्जिद है. खुदा का ठिकाना. अल्लाह के बंदे यहां उसकी इबादत करते हैं.’

‘रात बिताने के अल्लाह के घर से अच्छी भला और कौन–सी जगह हो सकती है.’ सर्दी से कांपता हुआ पिल्ला बोल.

‘मौलवी साहब का कहना है कि हमारे छूने से मस्जिद नापाक हो जाएगी.’ कुत्ते ने समझाने की कोशिश की.

‘पिताजी, क्या तुम मुझे छूकर नापाक हो जाते हो?’

‘धत्! ऐसा भी कहीं होता है?’ कहते हुए कुत्ते ने पीठ थपथपाई.

‘मां, मेरे छूने से क्या तू अपवित्र हो जाती है?’ पिल्ले ने अपनी मां से भी वही सवाल किया.

‘कैसी बात करता है पगले, तू तो मेरे कलेजे का टुकड़ा है.’ कहते हुए कुतिया ने पिल्ले को अपने अंक में भर लिया. पिल्ला अपने सवालो का समाधान चाहता था. इसलिए पीछे हटता हुआ बोला— ‘जब मेरे छूने से आप दोनों नापाक नहीं होते तो वह; जिसके बारे में बताते हैं कि वह सबका मां–बाप है, कैसे नापाक हो सकता है?’

कुतिया और कुत्ता दोनों में से किसी के भी पास इस सवाल का जवाब नहीं था. इसलिए वे दाएं–बाएं सट गए. ताकि वह इधर–उधर देखकर ज्यादा सवाल न पूछे. थोड़ी दूर जाने के बाद ही एक सूखी–सी ठेकरी उन्हें दिखाई पड़ी. कुत्ता अपने परिवार के साथ वहीं लेट गया. पिल्ले मौसम की मार झेल नहीं पाए और सुबह होते–होते वहीं ढेर हो गए. मिट्टी से वास्ता क्या? कुतिया और कुत्ता दोनों ने एक नजर अपने पिल्लों के बेजान पड़ चुके शरीरों को देखा. मिट्टी को माथे से लगाया और नए ठिकाने की तलाश में चल दिए.

मुंह–अंधेरे एक आदमी निकला. मृत पिल्लों में से उसने एक को उठाया और थोड़ी दूर जाकर दायीं ओर को उछाल दिया. उसके कुछ ही मिनटों के बाद एक और आदमी बाहर आया. इधर–उधर देखकर उसने दूसरे पिल्ले की लाश को उठा लिया. फिर उसे जोर–जोर से घुमाने लगा और अपनी पूरी ताकत से घुमाते हुए बायीं ओर उछाल दिया.

सुबह होते ही गांव में घमासान मच गया. जान बचाने के लिए कुतिया और कुत्ता को जंगल में शरण लेनी पड़ी. दिन–भर हाय–तोबा, चीख–पुकार, मारकाट मची देख उनकी गांव लौटने की हिम्मत ही न पड़ी. रात होते–होते सबकुछ थम गया. आसरे की तलाश उन दोनों को फिर गांव खींच लाई. किंतु गांव तो अब श्मशान में बदल चुका था. चारों ओर लाशें बिखरी पड़ी थीं. घर–झोंपड़ियां तबाह हो चुके थे.

‘सुबह अपने बच्चों की मौत पर तो मैंने छाती पर पत्थर रख लिया था….मगर आज गांव में जो देखा….इतनी लाशें गिरी हैं कि कोई रोने वाला भी नहीं है.’ कुतिया ने कहा….उदास तन और भरे–भरे मन से.

‘हम कोई आदमी थोड़े ही हैं जो अपना–पराया देखें. आ, रात से जो अब तक मरे हैं उन सभी पर रो लेते हैं.

कुछ देर बाद ही वह उजाड़ और मनहूस गांव कुत्ता दंपति की रुलाई से थरथराने लगा.
 
गपशप

जैसा उन्होंने किया, वैसा कोई न करे

कुत्ता अपने परिवार से मिला तो बहुत थका हुआ था. कुतिया उसके इंतजार में थी. परिवार के मुखिया को आते देख वह फौरन उसके पास दौड़कर पहुंच गई.

‘क्यों जी, इतने दिनों में क्या तुम्हें मेरी जरा–भी याद नहीं आई?’ कुतिया ने प्यार–भरा उलाहना दिया.

‘मैं मीलों चलकर तेरे पास पहुंचा हूं, क्या यह छोटी बात है! इस बीच न जाने कितनी बार अजनबी कुत्तों ने मुझपर हमला किया. न जाने कितनी बार मैं गाड़ियों के नीचे आकर कुचलने से बचा. न जाने कितनी बार हिंस्र आदमी ने मोटा डंडा लेकर मेरा पीछा किया. पर मैं तेरी याद दिल में लिए भागता रहा, बस भागता ही रहा. जरा सोच आदमी का अगर एक भी डंडा मेरी पीठ पर पड़ जाता तो….’

‘जाने दो जी, मैं समझ गई, आप ऐसी बात मुंह से मत निकालिए.’ कुतिया ने रोक दिया. कुछ देर दोनों एक–दूसरे से सटकर खड़े रहे. मानो मूक संवाद कर रहे हों. आखिर कुतिया ने ही मौन भंग किया:

‘आप इतनी दूर से चलकर आए हैं. रास्ते में कुछ अनोखी चीजें भी देखी होंगी. क्या मुझे कुछ नहीं बताएंगे?’

‘देखा तो बहुत कुछ, परंतु जो बातें मैं खुद भूल जाना चाहता हूं, उन्हें तू जानकर क्या करेगी!’ कुत्ता बोला.

‘मेरी जिंदगी तो बच्चों को पालने–पोसने में ही निकली जा रही है, कहीं आ–जा भी नहीं पाती. बाहरी दुनिया को जानने का सिवाय तुम्हारे रास्ता ही क्या है?’ कुतिया ने अपनापा जताया तो कुत्ता बताने लगा—

‘जब मैं आ रहा था तो रास्ते में दो भाई मिले. दोनों घर से साथ–साथ कमाई करने चले थे. बड़ा मेलजोल रहा होगा दोनों में. इसलिए दोनों ने एक ही पोटली में गुड़, चने और आटा बांध रखा था. भूख लगती तो छोटा भाई आग जलाता. बड़ा मोटी–मोटी रोटियां सेकता. फिर दोनों मिल–जुलकर चूरमा बनाते और मिल बांटकर खाते. बच जाता तो मेरे आगे भी डाल देते. मुझे उनके डाले गए चूरमे का लालच नहीं था. खुले जंगल में पेट भरने को कुछ न कुछ तो मिल ही जाता है. मैं तो उनके आपसी प्यार पर मर मिटा था. जो मानुस जात में कम ही देखने को मिलता है. इसलिए काफी दूर तक उनके साथ चलता रहा…’ कुत्ता कहानी सुनाता–सुनाता अचानक रुक गया.

‘आगे क्या हुआ जी. रुक क्यों गए…’

‘अब रहने दे…यहां से आगे की कहानी कही नहीं जा रही…’

‘परंतु आपने तो मेरे भीतर इतनी ललक जगा दी है. दोनों भाइयों का आगे क्या हुआ, यह जानने के लिए मैं बड़ी उतावली हो रही हूं.’ कुतिया ने कहा. कुत्ता चुप्पी साधे रहा.

‘आपने बताया कि आप जंगल से गुजर रहे थे. कहीं ऐसा तो नहीं कि उनमें से किसी एक भाई को खूंखार जानवर उठा ले गया हो?

‘अगर ऐसा हो जाता तो मैं उसे दुर्घटना मान लेता और उस जानवर को गालियां देता हुआ बाकी का सफर आसानी से पूरा कर लेता.’

‘फिर?’ कुतिया सचमुच उतावली हुई जा रही थी.

‘दोनों जंगल से होकर गुजर रहे थे. जहां रात होती, सो जाते. भोर की किरन दिखाई पड़ते ही सफर फिर शुरू हो जाता. एक सुबह बड़ा भाई जागा तो बड़ा प्रसन्न था. कारण पूछने पर उसने बताया—‘रात मैंने एक सपना देखा है?’

‘कैसा सपना?’ छोटे ने पूछा.

‘बहुत अच्छा सपना. हुआ यह कि मैंने एक व्यापार शुरू किया, उसमें मुझे जबरदस्त मुनाफा हुआ. जिससे मैं सिर्फ छह महीने में करोड़पति बन गया हूं…मेरे पास खूब बड़ा बंगला है, गाड़ी है, नौकर–चाकर हैं. साथ मे एक खूबसूरत पत्नी भी है…!’

‘अच्छा, और कुछ?’ छोटे ने प्रश्न किया, ‘सपने में कुछ और भी तो देखा होगा?’

‘रहने दे, और जो हुआ वह बताने की मेरी हिम्मत नहीं है. तू तो जानता है कि मेरा सपना कभी झूठा नहीं होता.’

‘फिर भी बताओ तो भइया?’

‘तो सुन, मैंने देखा कि व्यापार में तुझे बहुत घाटा हुआ है. तेरी हालत भिखारियों जैसी हो गई है….’ बड़े ने कहा. छोटे ने बात को हंसकर टालने की कोशिश की. परंतु नाकाम रहा. उसका चेहरा लटक गया. तब बड़े ने उसको तसल्ली देते हुए कहा— ‘तू फिक्र क्यों करता हूं. मैं तो हूं न, तेरे साथ, तेरा भाई.’

बड़े की तसल्ली काम न आई. छोटे का मुंह लटका तो लटका ही रह गया. बड़े ने उसके बाद भी समझाने की काफी कोशिश की. पर सब बेकार. दोनों पूरे दिन चलते रहे. मैं भी उनके पीछे–पीछे चलता रहा, लेकिन अब उनके पीछे चलने का सारा जोश समाप्त हो चुका था. खैर शाम हुई. दोनों भाइयों ने साथ–साथ खाना खाया और सो गए…’ कुत्ता फिर चुप हो गया.

‘अब क्या हुआ जी?’ कुतिया ने फिर टोका तो कुत्ता अनमना–सा बताने लगा—‘सुबह मेरी सबसे पहले आंख खुलीं. रोज बड़ा भाई पहले उठता था. उसकी खटपट से ही मैं जागता था. उस दिन कोई आहट न हुई तो मैं भी देर तक सोता रहा. जागा तो सिर पर सवार सूरज को देखकर हैरान रह गया. कहीं वे मुझे छोड़कर तो नहीं चले गए—सोचता हुआ मैं उन्हें खोजने लगा. मगर जो देखा उससे तो मेरे होश ही उड़ गए. जिस जगह वे सोए थे, वहां उनके शव पडे़ थे. दोनॊं के मुंह से झाग निकल रहे थे.’

‘किसी विषधर ने डस लिया होगा?’ कुतिया के मुंह से आह निकली.

‘दुःख तो यही है कि कोई विषधर उन्हें डसने नहीं आया था. वे खुद एक–दूसरे के लिए विषधर बने थे.’ कुत्ता पल–भर के लिए रुका, फिर बोला— ’छोटा भाई यह सोचकर परेशान था कि एक दिन उसका बड़ा भाई उससे अधिक धनवान हो जाएगा. जिससे समाज में उसकी इज्जत घट जाएगी, लोग उसे निकम्मा कहा करेंगे. इसलिए उसने बड़े के चूरमा मे जहर मिला दिया था.

‘उफ! और छोटा भाई, उसको किसने मारा?’

‘बड़े भाई ने, वह यह सोचकर घबरा गया था कि सपने की बात सच होते ही वह तो मालदार हो जाएगा, जबकि छोटा गरीब रह जाएगा. उस हालत में वह बार–बार उसके पास मदद के लिए आया करेगा. छोटे भाई की तंगहाली देख लोग उसे ताने दिया करेंगे— इससे तो अच्छा है कि पहले ही उससे छुटकारा पा लिया जाए. इसलिए मौका देख उसने भी छोटे के भोजन में जहर मिला दिया था.’

‌’नासपीटे, कुलच्छ्ने! एक सपने से ही डर गए.’ कुतिया ने गालियां दीं. लेकिन अगले ही पल उसका मन उदासी से भर गया, बोली—’कुछ भी हो जी, दोनों थे तो इंसान ही. आज की रात हम उन दोनों के लिए शोक करेंगे और श्वानदेव से प्रार्थना करेंगे कि जैसा उन्होंने किया, वैसा कोई न करे.
 


पार्थ.... यू आर वेरी वाइल्ड जिया....

जिया.... आंड यू हॅव लॉट्स ऑफ स्टेम्ना पार्थ... मज़ा आया तुम्हारे साथ...

पार्थ.... फिर कब ये मज़ा लेना है जिया....

जिया.... सम अदर टाइम बेबी, यू हॅव टू वेट आंड अपेस मी टू.

पार्थ.... क्या अभी अपेस नही किया तुम्हे....

जिया.... उफफफ्फ़, अभी तो फुल ऑन थे पार्थ... पर दोबारा इतना ईज़ी नही... कुछ तो मेरे लिए मेहनत करो बेबी....

पार्थ.... ओके सेक्सी.... आज से दिल और दिमाग़ पर एक ही चॅनेल चलेगा.... जिया के लिए मेहनत करना...

जिया.... हीहीही... फन्नी हां....

तभी जिया का फोन बजने लगता है, और वो अपने कपड़े पहन कर वहाँ से चली जाती है. जिया को जाते देख पार्थ ठंडी आहें भरने लगता है..... "उफफफफ्फ़ ये मुझे फिर कब मिलेगी"

जिया वहाँ से बाहर निकल कर, टॅक्सी लेती है और वापस पब की ओर आने लगती है. तभी उसके मोबाइल पर टेक्स्ट होता है, और टेन्षन से उसके पसीने चलने लगते हैं... वो तुरंत कॉल मनु को लगाती है, और उस से मिलने की इक्षा जाहिर करती है.... मनु भी उसे अपने घर बुला लेता है....

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इधर देल्ही से दूर... शिमला के हसीन वादियों मे.... एक प्यारा सा लड़का अपने फोन की घंटी बार-बार चेक कर रहा था, कोई लाइन आया कि नही. लगातार बर्फ-बारी से जन-जीवन अस्त-व्यस्त था... पर इन सब से परे ... वो लड़का बस फोन को ही पिच्छले तीन दिन से तक रहा था... एक कॉल तो आए...

अपने परिवार से दूर, अपने घर से दूर.... उन मखमली बिस्तर को छोड़, शिमला की ठंड मे एक सामान्य से भी नीचे जीवन बिता रहा.... मानस... छोड़ आया था अपने पिता हर्षवर्धन की पूरी दौलत, और वो ऐशो-आराम की ज़िंदगी.....

मानस का इंतज़ार बेवजह था, ना तो फोन लाइन ठीक होने वाली थी, ना ही शिमला की बर्फ-बारी रुकने वाली थी, और ना ही उसकी कोई खबर जिसकी तलाश मे मानस भटकता हुआ शिमला आया था. अजीब ही विडंबना थी, मानस के लिए आज का भी दिन ख़तम हो रहा था, और आज का दिन भी इंतज़ार मे ही कट गया.

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इधर मनु अपने कमरे मे बैठ कर आराम से टॉम & जेर्री का मज़ा ले रहा था, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, और सामने जिया खड़ी थी.....

मनु..... अंदर आओ...

जिया..... मनु, सॉरी यार, पर तुम जैसा सोच रहे है ना, वैसा कुछ भी नही था... लेट मी क्लियर ऑल दा थिंग्स....

मनु..... आराम से बैठ जिया. श्रमण... जिया मेडम को अटेंड करो....

मनु इतना कह कर आराम से टॉम & जेर्री एंजाय करने लगा.... श्रमण उसके पास आ कर सिर झुका कर खड़ा हो गया. जिया गुस्से मे लाल आखें किए बस मनु की ओर ही देखे जा रही थी. मनु कुछ देर और टॉम & जेर्री का लुफ्त उठाने के बाद ... उसे बंद करते हुए...

"आररीए श्रमण, तुम ने जिया मेडम का कुछ भी ख्याल नही रखा"

जिया.... इट'स ओके मनु. प्लीज़ तू मेरी बात तो सुन...

मनु.... चिल यार जिया, अब तुम मेरी होने वाली पत्नी हो, इतनी टेन्षन मे क्यों है....

जिया.... देखो मनु, ना तो मैं तुम से शादी करना चाहती हूँ और ना ही मानस की हालत के लिए मैं ज़िम्मेदार हूँ.... प्लीज़ मुझे क्लियर करने दे सारी बातें.

मनु..... स्ट्रेंज ना जिया, चार साल पहले हुई बात का क्लरिफिकेशन आज देने आई है... व्हाट दा हेल जिया.... तुम्हे नही लगता कि अब तुम्हारी किसी भी क्लरिफिकेशन का कोई मायने नही होगा.....

जिया..... तो तू क्या चाहता है मनु ये बता....

मनु.... ह्म ! वैसे तुम ही कुछ ऐसा ऑफर कर दो, जो मुझे ये बात किसी को भी बताने से रोक दे. वैसे दादा जी आज भी बहुत सदमे मे हैं, अपने बड़े पोते के यूँ अचानक चले जाने से... सोच ले यदि उन्हे भनक भी पड़ी... तो तुम्हारे पापा अगले दिन सड़क पर, और तुम्हारी सारी ऐशो आराम ... पता नही शायद उस वक़्त तुम अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए क्या करो.... लेकिन बड़ा अफ़सोस सा हो रहा है तुम्हारे पापा के लिए.... किया किसी ने भरेगा कोई और....

जिया..... मनु प्लीज़, एक तो उस कांड मे मेरा कोई रोल नही था... पर हां तेरा कहना भी सही है, अब क्लरिफिकेशन कोई मायने नही रखता... पर मनु... सुन्न नाअ... हम इतने दिनो से साथ रहे हैं, वी आर गुड फ्रेंड्स यार.... क्या तू अब मुझे ब्लॅकमेल करेगा....

मनु..... ह्म ! डार्लिंग, तुम ही तो मेरी एकलौती दोस्त बची हो.... डॉन'ट वरी मैं किसी से कुछ नही कहूँगा, बस तुम्हारा उररा सा चेहरा देखना था.... हां और अच्छा लगा जो तुमने शादी के लिए सीधा मना कर दिया... मेरी मुस्किल आसान कर दी...

जिया, मनु के गले लगती..... पर तू अब भी बंदर ही रहेगा, पापा ने जब से शादी के बारे मे बताए तब से मैं सदमे मे हूँ..... पर मनु इतने दिन बाद ये बात बाहर कैसे आई... यार मैं बेवजह फसि हूँ मानस के मॅटर मे....

मनु..... अब मुझे क्या पता उस समय हुआ क्या था, खैर जाने दे उन बातों को.... यू जस्ट चिल....

जिया..... तू पक्का कमीना है मनु, जानती हूँ नही बताएगा सोर्स कभी. खैर अपने इस चम्चे को भेज, तेरे लिए कुछ गिफ्ट लाई हूँ... और हां मेरा ऑफर हमेशा वॅलिड है... कभी मैं तुम्हारे काम आउ तो बता देना....

मनु.... अच्छा, चल ठीक है जब भी कोई ऐसा काम होगा मैं तुझे बता दूँगा... श्रमण मेडम से ज़रा मेरा गिफ्ट ले आना....

जिया के पिछे-पिछे श्रमण भी चल दिया.... जिया कार की बॅक सीट से झुक कर एक पॅकेट उठाने लगी.... श्रमण ठीक उसके पिछे लगभग 5 इंच की दूरी पर खड़ा. उफ़फ्फ़ ये सेक्सी लेग्स और जब जिया झुकी तो उसका कमर से ले कर नीचे सॅंडल तक का लुक....

श्रमण उसे खा जाने वाली नज़रों घूर रहा था. उसके गोरी सफेद खुली टाँगो को, और पिछे निकले उसके हिप को बड़े गौर से देख रहा था.... जिया अचानक ही मूडी, श्रमण को घूरते देख उसने पकड़ लिया..... "यू रास्कल, तुम घूर क्यो रहे थे"

श्रमण.... सॉरी मेडम, आखें थोड़ी भटक गयी थी... प्लीज़ फर्गिव मी...

 


जिया हस्ती हुई उसके माथे पर आए पसीने को अपनी उंगलियों से सॉफ की, और उसके हाथ मे पार्सल देती कहने लगी..... "हा हा हा... डरते हुए काफ़ी क्यूट लगते हो".... फिर जिया एक पेपर पर उसे अपना नंबर लिख कर, बढ़ाती हुई कही..... "जब भी तुम्हारे पास फ्री टाइम हो, कॉल करना... सी यू सून स्वीटहार्ट"

श्रमण, जिया की कातिल अदाओं से घायल हो कर अपने दिल को थाम लिया... "उफफफफफ्फ़... हाय्यी ये अदा".... श्रमण मुस्कुराता हुआ वापस लौटा..... और पार्सल मनु को दे कर उसके पास खड़ा हो गया....

मनु, पार्सल खोलते हुए..... "बड़ा कातिल मुस्कान मुस्कुरा रहा है, मिल गया नंबर तुझे"

श्रमण, शरमाते हुए..... "हां मनु भाई... आप को कैसे पता"

मनु.... तेरे चेहरे पर लिखा है बे. पर बेटा बच कर रहना....

श्रमण.... मैं समझा नही मनु भाई....

मनु.... तू समझ जाएगा...... जा कॉफी ले कर आ....

मनु ने पार्सल खोला. बड़े से पार्सल मे... एक छोटा सा लेटर.........

"हाई हॅंडसम......

डू यू रिमेंबर मी. पेरहप्स नोट ... आइ थॉट यू वॉवुल्डन'ट रिमेंबर ... आइ जस्ट एक्सप्लेन अन इन्सिडेन्स........ टू यियर्ज़ अगो ... आ पार्टी नाइट ... व्हेन यू वर वित युवर फ्रेंड द्रोण.... रिमेंबर दट चिट चॅट.....

"ओह्ह्ह माइ गॉड क्या सेक्स बॉम्ब है ये, देख ना द्रोण. इसकी कातिल सी आखें, ये मस्त चेहरा और इसका अट्रॅक्टिव फिगर. उफ़फ्फ़ इसका फिगर तो दिल मे छेद सा करते जा रहा है.... मखमली तराशा बदन..... बिल्कुल चिकनी... इसके बूब्स तो देख.... कितने मस्त और टाइट हैं.... लगता है किसी ने निचोड़ कर ढीले नही किए.... और उफफफ्फ़ ये क्लीवेज़ की गहराई... ऐसे दिखा रही है, मार डालेगी लगता है"......

ऑन दिस युवर नोबेल कॉंप्लिमेंट युवर फ्रेंड ऑल्सो शेर हिज़ व्यू....

"आहह... इसकी बॅक तो देख... बिना कपड़े के कैसे सपाट चिकने लगेगा.... ऐसा लगेगा जैसे संगमरमर के फर्श पर बूम के कर्व निकले हो".....

आंड व्हाट अन अवेसम सम्मरी........... मनु यू रॉक्स डार्लिंग...

"साले... बस केवल उतना ही नही, पूरा बदन संगेमरमर का होगा.... बिल्कुल तराशा.... वो भी वेक्ष किया हुआ... हा हा हा.... उफ़फ्फ़ ये कर्व फिगर.... उपर से इस हॉट & सेक्सी गर्ल का ये पारंपरिक नाक की नथ्नि.... जैसे जान निकाल रही हो.... इसे देख कर तो मेरा मन कर रहा है.. दिन रात इससे लिटा कर बिठा कर, उठा कर, कामसूत्र के जितने पोज़ हैं उतने पोज़ मे बजाता रहूं..... उफफफ्फ़ इस पर तो स्लो और रफ सेक्स का मज़ा... क्या कहने.... डॅम हॉट सेक्सी स्लट बिच".

डॅम कूल कॉंप्लिमेंट हां मनु डियर. चान्स नही मिला उस वक़्त इस कॉंप्लिमेंट को रेस्पॉंड करने का. बट डॉन'ट वरी डियर, आइ आम बॅक.... गेट रेडी टू फेस युवर नाइटमेर.... वित लव...

मुआहह......

 
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